Home Blog Page 5424

जाना था जेल विधायक जी पहुॅंच गए दोस्त के फ्लैट पर, छापेमारी में मिले ₹53 लाख

महाराष्ट्र में 21 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे पहले पुलिस और चुनाव आयोग की टीम ने एक फ्लैट से 53.43 लाख रुपए नकद बरामद किए हैं। हैरत की बात है कि छापेमारी के वक्त उस फ्लैट में विधायक रमेश कदम भी मौजूद थे, जबकि उस वक्त उन्हें ठाणे की सेंट्रल जेल में होना चाहिए था।

भ्रष्टाचार के मामले में जेल में बंद कदम सोलापुर के मोहोल से एनसीपी के विधायक हैं। अगस्त 2015 में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। उन पर सरकार द्वारा संचालित अन्नाभाउ साठे विकास निगम का अध्यक्ष रहते हुए 150 करोड़ रुपए की गड़बड़ी करने का आरोप है। मौजूदा चुनाव में मोहोल से ही बतौर निर्दलीय लड़ रहे हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जिस फ्लैट से पैसा बरामद किया गया है वह राजू खरे के नाम पर है। खरे को गिरफ्तार कर लिया गया है। कदम को जेल भेज दिया गया। वहीं, इस मामले में संलिप्त पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की बात भी कही जा रही है।

खबरों के मुताबिक कदम ने शुक्रवार को बेचैनी और सीने में दर्द की शिकायत की थी। इसके बाद उन्हें जॉंच के लिए जेजे अस्पताल ले जाया गया। लौटते वक्त उन्होंने साथ मौजूद पुलिसकर्मियों को ठाणे के घोड़बंदर रोड इलाके में अपने एक दोस्त के यहॉं ले जाने को कहा। पुलिसवाले उन्हें जेल ले जाने के बजाय दोस्त के फ्लैट पर लेकर चले गए।

जब पुलिस और चुनाव आयोग की टीम को इसकी भनक लगी कि कदम को जेल की बजाए तो एक दोस्त के फ्लैट पर ले जाया गया है तो वे फौरन हरकत में आए। एक अधिकारी ने बताया कि कदम के फ्लैट में जाने की सूचना मिलने के बाद ठाणे पुलिस की एक टीम ने छापा मारा तो विधायक कदम, फ्लैट मालिक राजू खरे और पुलिसकर्मियों को 53.43 लाख रुपये नकदी के साथ वहॉं पाया गया। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्यों एस्कॉर्ट टीम रास्ता बदल कर कदम को घोड़बंदर ले गई। जेल मैनुअल साफ़ कहता है कि अदालत की इजाज़त के बिना आरोपित को कहीं नहीं ले जाया जा सकता। अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी दिलीप शिंदे ने भी छापेमारी के दौरान कदम के फ्लैट में होने की पुष्टि की है। उनके मुताबिक फ्लैट को सीज कर दिया गया है।

उधर कमलेश तिवारी का गला रेत डाला, इधर रवीश मेक्सिको-अमेरिका का झगड़ा दिखाते रहे…

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दिनदहाड़े कमलेश तिवारी की हत्या कर दी गई। इस हत्याकांड को उनके दफ़्तर में ही अंजाम दिया गया। हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी ‘हिन्दू समाज पार्टी’ के संस्थापक-अध्यक्ष थे। साथ ही वह हिन्दू महासभा के भी सक्रिय सदस्य थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान कमलेश तिवारी राम मंदिर मामले में पक्षकार भी थे। इस मामले में पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ़्तार किया है, जिनके नाम मोहसिन शेख, राशिद अहमद ख़ान और फैज़ान शेख हैं। जाँच की आँच सूरत तक पहुँची और गुजरात एटीएस ने यूपी एसटीएफ के साथ मिल कर मामले में कार्रवाई की। शुक्रवार (अक्टूबर 18, 2019) को देर रात ख़ुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी पुलिस को तेज़ी से कार्रवाई करने का आदेश दिया।

इस दौरान सबकी नज़रें मीडिया पर भी टिकी थीं। हिज़्बुल मुजाहिदीन के आतंकियों को ‘कार्यकर्ता’ बताने वाला एनडीटीवी कमलेश तिवारी की हत्या वाली ख़बर में उन्हें ‘कट्टरवादी हिन्दू नेता’ बताना नहीं भूला और जानबूझ कर उनकी एक ग़लत पहचान बनाने की कोशिश की। इस दौरान हमारी नज़रें एनडीटीवी के शो ‘प्राइम टाइम’ पर भी गईं, जहाँ वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार मेक्सिको और अमेरिका के झगड़े पर बात करते रहे। डोनाल्ड ट्रम्प से लेकर मानव तस्करी तक, रवीश कुमार ने इस मुद्दे को मथ कर रख दिया लेकिन पूरे ‘प्राइम टाइम’ के दौरान उन्हें कमलेश तिवारी पर बात करने के लिए एक मिनट भी नहीं मिला। एनडीटीवी और रवीश से यही उम्मीद भी थी।

ये वही रवीश कुमार हैं, जिन्होंने पहलु ख़ान की हत्या पर न जाने कितनी बार ‘प्राइम टाइम’ किया होगा। यहाँ तक कि जिस दिन इस मामले में आरोपितों को बरी किया गया, उस दिन भी रवीश कुमार ने लगातार इस ख़बर को चलाया और अपने शो में इसी पर बात करते रहे, इसे लेकर समाज और सरकार को घेरते रहे। यहाँ तक कि एक-दो घटनाओं से ‘विचलित’ रवीश ने मॉब लिंचिंग पर कई शो किए, कई लेख लिखे और न जाने कितनी बार ऐसी ख़बरों को बार-बार दिखाया। पहलु ख़ान की जिस दिन हत्या हुई, जिस दिन सुनवाई पूरी हुई और जैसे-जैसे इस मामले में डेवलपमेंट्स आते गए, रवीश कुमार सक्रियता से अपने ‘प्राइम टाइम’ में इसे दिखाते गए।

हालाँकि, यह मीडिया संस्थान की स्वतंत्रता है कि वो चुने गए ख़बर को दिखाए, या फिर किसी ख़बर को जरा सा भी स्पेस न दे। लेकिन, जब यही प्रक्रिया लगातार एक ख़ास विचारधारा के समर्थन में चलती रहती है तो उस मीडिया संस्थान या पत्रकार को ख़ुद को न्यूट्रल कहने का भी हक़ नहीं है। कुछ ऐसा ही रवीश के मामले में है। वो किन ख़बरों को चुनते हैं और किन ख़बरों को छाँट देते हैं, यह जगजाहिर हो चुका है। जैसे, उन्होंने मॉब लिंचिंग ब्रिगेड का साथ देते हुए ‘जाति-धर्म को लेकर हिंसा पर क्यों उतर आते हैं लोग’ जैसे सवाल पूछते हुए ‘प्राइम टाइम’ किया लेकिन कमलेश तिवारी पर न तो उनका फेसबुक पोस्ट आया और न ही उन्होंने इस पर कोई लेख लिखा।

कमलेश तिवारी की हत्या के बाद भारी विरोध प्रदर्शन भी हुआ। सोशल मीडिया पर लोगों का आक्रोश दिखा। कई मौलवियों के वीडियो वायरल हुए। उन मौलवियों ने कमलेश तिवारी की हत्या की धमकी दी थी। रवीश कुमार इन सब से दूर रहें। वो कैसी बातें कर रहे थे? एक तरह से यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि वो ‘गोबर से खाद बनाने की विधि’ बता रहे थे। रवीश बता रहे थे कि कैसे मेक्सिको और अमेरिका में झगड़ा चल रहा है, जिस कारण 300 से भी अधिक भारतीयों को मेक्सिको ने वापस भेज दिया है। वो बता रहे थे कि ये सब वहाँ अवैध रूप से रह रहे थे और उन्हें भारत भेजने का अमेरिका ने स्वागत किया है जबकि हमारी सरकार की तरफ़ से कोई बयान नहीं आया है।

रवीश कुमार ने जम्मू कश्मीर को लेकर भी ख़ासा रट लगाया था। उन्होंने बार-बार दोहराया था कि वहाँ इंटरनेट न होने से विद्यार्थी परीक्षा के फॉर्म नहीं भर पा रहे हैं। ‘नौकरी सीरीज’ से ख़ुद को युवाओं का हितैषी दिखाने वाले रवीश यह कहते रहे और उधर जम्मू-कश्मीर में ग्रेनेड अटैक भी हो गया। कुछ ऐसा इस मामले में भी है। रवीश बेख़बर हैं नहीं बल्कि ख़ुद को बेख़बर दिखा रहे हैं। ख़ुद यूपी के डीजीपी ने मीडिया को सम्बोधित किया। लेकिन, रवीश के कानों पर जूँ तक न रेंगी। हो सकता है शायद वो इस बात का इंतजार कर रहे हों कि इस मामले में कोई ऐसा एंगल निकले, जिससे आक्रोशित लोगों को ‘आइना दिखाया जा सके।’

लेकिन, रवीश की यह ‘मनोकामना’ सफल नहीं हुई क्योंकि पुलिस ने इस केस को सुलझाने का दावा किया है और गुजरात एवं यूपी की पुलिस ने संयुक्त रूप से कार्य कर के इस हत्या विवाद को सुलझाया। एनडीटीवी लिखता है कि वो भारत का सबसे निष्पक्ष और विश्वसनीय चैनल है लेकिन उसकी निष्पक्षता की पोल तब खुल जाती है जब रवीश किसी बड़ी घटना को सिर्फ़ और सिर्फ़ इसीलिए नज़रअंदाज़ कर देते हैं क्योंकि आरोपित या दोषी मुस्लिम है। यह ‘मॉब लिंचिंग हथकंडे’ में फिट नहीं बैठता। फ़िलहाल, कमलेश तिवारी की हत्या के बाद मीडिया के बड़े वर्ग का सली चेहरा फिर से उजागर हो गया है। देखना यह है कि अब कब तक रवीश जैसे पत्रकार इससे नज़रें छिपा कर चलते हैं?

ब्राह्मण सभा से जुड़े वकील मुकेश शर्मा की हत्या, नासिर और उसके साथियों ने दी थी जान से मारने की धमकी

उत्तर प्रदेश में हिन्दू महासभा के पूर्व अध्यक्ष कमलेश तिवारी की हत्या के बाद अब ब्राह्मण महासभा से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ता मुकेश शर्मा की गोली मार कर हत्या करने की खबर सामने आई है। घटना मेरठ जिले की है। घात लगाए बैठे हमलावरों ने 58 वर्षीय शर्मा की हत्या तब की गई जब वे खाना खाकर बाहर टहलने के लिए निकले थे।

शर्मा को भूमाफियाओं से जान का खतरा था। करोड़ों रुपए की 70 बीघा ज़मीन को लेकर माफिया उन्हें कई बार जान से मरने की धमकी दे चुके थे। मेरठ पुलिस ने पाँच आरोपितों को गिरफ़्तार किया है। अभी तक की जाँच-पड़ताल के अनुसार ज़मीन पर भूमाफिया नासिर अली अपने ससुर ज़ुबैर, साले जियाउल हक़ के साथ मिलकर अवैध तरीके से प्लाटिंग कर रहा था। शर्मा ने इस पर ऐतराज जताकर ज़मीन पर स्टे ले लिया था। नासिर और उसके साथियों जुबैर, नौशाद आरिफ और शमशेर ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी। पुलिस के मुताबिक योजनाबद्ध तरीके से हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया। इसमें शर्मा के परिवार के एक सदस्य के भी शामिल होने की बात कही जा रही है।

हिंदुस्तान के मेरठ संस्करण में प्रकाशित खबर

जून 2018 में सदर तहसील के सामने मुकेश शर्मा पर नासिर, ज़ुबैर और जियाउल हक़ ने जानलेवा हमला किया था। जिसका मुक़दमा सदर बाजार थाने में दर्ज है। इस मामले में पुलिस ने गिरफ़्तारी नहीं की। आरोपित कोर्ट से स्टे ले आए, इस मुक़दमे में चार्जशीट दाखिल है।

शर्मा की हत्या की घटना शुक्रवार (18 अक्टूबर) रात 9:30 बजे की है, जब घर से क़रीब 400 मीटर की दूरी पर प्राइमरी स्कूल के पास बदमाशों ने घेरकर उनके सिर में गोली मार दी। इसके बाद हमलावर वहाँ से फ़रार हो गए। गंभीर अवस्था में परिजन उन्हें अस्पताल ले गए, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। 

मृतक मुकेश शर्मा, मेरठ बार एसोसिएशन के सदस्य और ब्राह्मण सभा के भी पदाधिकारी थे। हत्या की इस घटना के बाद इलाक़े में हड़कंप मच गया और ग्रमीणों की भीड़ जुट गई। गुस्साए ग्रामीणों ने अस्पताल में पुलिस अधिकारियों का घेराव किया और कई घंटों तक शव का पंचनामा नहीं भरने दिया। घटना की जानकारी मिलते ही भारी संख्या में अधिवक्ता भी अस्पताल पहुँचे।

घटना की सूचना मिलने पर डीएम अनिल ढींगरा, एसएसपी अजय साहनी भारी संख्या में पुलिस फ़ोर्स के साथ मौके पर पहुँचे। इस दौरान अधिवक्ताओं ने एसएसपी से कहा कि ज़िले में क़ानून-व्यवस्था चौपट हो गई है। ख़बर के अनुसार, वरिष्ठ अधिवक्ता मुकेश शर्मा ने भूमाफ़ियाओं की शिक़ायत प्रमुख सचिव, डीजीपी, डीएम और एसएसपी से की थी। उसके बाद भी उन्हें सुरक्षा मुहैया नहीं कराई गई।

ख़बर के अनुसार, मृतक के परिजन की तरफ़ से गोकलपुर गाँव के 8-10 लोगों के नाम बताते हुए पुलिस में शिक़ायत की गई है। एसएसपी का कहना है कि परिजनों ने हत्या के पीछे ज़मीनी विवाद बताया और कुछ भूमाफ़ियाओं के नाम भी उन्होंने बताए। फ़िलहाल, इस मामले की सभी स्तरों पर जाँच चल रही है।

…वो 4 इस्लामी कट्टरपंथी, जिन्होंने दी थी कमलेश तिवारी को जान से मारने की खुली धमकी

शुक्रवार (अक्टूबर 18, 2019) की दोपहर लगभग 12:30 बजे दो अज्ञात हमलावरों ने पूर्व हिंदू महासभा नेता कमलेश तिवारी की गला रेतकर व गोली मारकर बेरहमी से हत्या कर दी। हत्या की वारदात को अंजाम देकर हमलावर वहाँ से फरार हो गए। गंभीर हालत में तिवारी को ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

बता दें कि पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ टिप्पणी कर कमलेश तिवारी कई कट्टरपंथी इस्लामिक मुल्लाओं के निशाने पर आ गए थे। कमलेश तिवारी के खिलाफ रासुका (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के तहत आरोप लगाए गए थे और प्रदेश की तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार ने उन्हें जेल में डाल दिया था। तकरीबन एक साल तक जेल में रहने के बाद तिवारी को सितंबर में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा रासुका का आरोप खारिज करने के बाद जमानत मिली।

तिवारी की हत्या के बाद पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। पुलिस ने इस मामले में 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। जिसमें मौलाना मोहसिन, फैजान और राशिद पठान शामिल है। इन सब के अलावा हम उन 4 लोगों की सूची लेकर आए हैं, जिन्होंने पैगंबर मुहम्मद पर उनकी टिप्पणियों के बाद कमलेश तिवारी को खुलेआम धमकी दी थी।

1. जमील असगर प्रतापगढ़ी

इसमें पहला नाम है जमील असगर प्रतापगढ़ी का। जमील ने 2015 में बेंगलुरु में एक कार्यक्रम में तिवारी को निशाने पर लेते हुए उन्हें खुलेआम धमकी देते हुए कहा था, “तुम्हारे पैरों के नीचे कोई जमीन नहीं होगी, कभी आसमान छूने की कोशिश मत करना, जो लोग पैगंबर मुहम्मद का अपमान करते हैं, वो सावधान रहें, हम तुम्हारी जीभ काट लेंगे।” हैरानी की बात यह है कि जमील ने ये धमकी नेशनल पीसमेकर फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में दी थी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न समुदायों के बीच शांति और सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देना था।

2. मौलाना अनवारूल हक

यूपी बिजनौर के जामा मस्जिद के प्रमुख इमाम मौलाना अनवारूल हक ने 2015 में कमलेश तिवारी को खुलेआम धमकियाँ दी थी। उसने कमलेश तिवारी का सिर कलम करने पर 51 लाख रुपए का ईनाम रखा था। उसने कहा था, “अगर यूपी सरकार और कोर्ट तिवारी को सजा नहीं देती है तो बिजनौर के मुस्लिम कमलेश तिवारी का सिर काटने वाले को 51 लाख रूपए देगी। जो किसी भी धर्म, चाहे वो हिन्दू या इस्लाम हो, का अपमान करेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। कमलेश तिवारी, मैं तुम्हें चेतावनी देता हूँ, तुम जेल में रहो या फिर बाहर, अगर कोर्ट तुम्हें सजा नहीं देगी तो भारत के मुस्लिम खुद इसकी सजा तय करेंगे।”

बता दें कि मौलाना अनवारूल हक को 2016 में एक महिला के साथ रेप के मामले में गिरफ्तार किया गया था। कलमेश तिवारी की पत्नी किरण ने भी पुलिस को दी शिकायत में अनवारूल का नाम लिया है।

3. मुफ्ती अब्दुल रज्जाक

मध्य प्रदेश के मुफ्ती-ए-आजम मुफ्ती अब्दुल रज्जाक ने कमलेश तिवारी को सही सजा देने के लिए लोगों को कानून हाथ में लेने के लिए उकसाया था। मुफ्ती ने कहा था, “हम पूरी निष्ठा के साथ भारत में रहते हैं और उम्मीद करते हैं कि भारत के कानून हमारे धार्मिक भावनाओं के प्रति निष्पक्ष और ईमानदार रहेंगे, खासकर पैगंबर के मामले में। लेकिन यदि कानून हमें न्याय प्रदान नहीं करता है, तो हमारे लिए कानून के प्रति वफादार रहना कठिन होगा और हमें इसे अपने हाथों में लेना होगा।”

4. मोहम्मद मुफ्ती नईम काजमी

कमलेश तिवारी की पत्नी ने 3 लोगों के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज कराते हुए कहा है कि उनके पति की हत्या में इन तीनों की भूमिका हो सकती है। पुलिस को दी तहरीर में उनकी पत्नी ने कहा कि मोहम्मद मुफ्ती नईम काजमी और मौलाना अनवारुल हक ने उनके पति कमलेश तिवारी के ऊपर 1.5 करोड़ रुपए का इनाम रखा था। बता दें कि अज्ञात हमलावरों ने कमलेश तिवारी पर गोलियाँ दागने के बाद उनका गला भी रेता।

उल्लेखनीय है कि कमलेश तिवारी की पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान के बयान के बाद आया था। आजम खान ने एक विवादास्पद बयान देते हुए कहा था कि आरएसएस के सदस्य समलैंगिक होते हैं। जिसके जवाब कमलेश तिवारी ने मुहम्मद पैगंबर पर विवादित टिप्पणी कर दी थी।

जहाँ पैदा हुआ था बाबर, वहीं गुजरात के CM विजय रूपाणी करेंगे सरदार पटेल की मूर्ति का अनावरण

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी शनिवार (अक्टूबर 19, 2019) को 5 दिन के दौरे पर उजबेकिस्तान जा रहे हैं। यहाँ वो एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन में देश के पहले निवेश शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए जा रहे हैं। सीएम रुपाणी उज्बेकिस्तान सरकार के न्योते पर एक कार्यक्रम में शरीक होंगे। वह यहाँ इंटरनैशनल इन्वेस्टमेंट फोरम में हिस्सा लेंगे।

इस दौरान सीएम रूपाणी उजबेकिस्तान के अंदीजान शहर भी जाएँगे। बता दें कि यहीं पर भारत में मुगल शासन की नींव रखने वाले बाबर का 1483 में जन्म हुआ था। यहाँ पर विजय रूपाणी लौह पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल की मूर्ति का अनावरण भी करेंगे। इस शहर में भारत के पहले गृहमंत्री के नाम पर एक सड़क का नामकरण भी किया गया है।

अपनी यात्रा के दौरान रूपाणी भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को भी श्रद्धांजलि देंगे, जिनकी ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर करने के एक दिन बाद 11 जनवरी 1966 को ताशकंद की आधिकारिक यात्रा पर मृत्यु हो गई थी। इसके साथ ही रूपाणी ताशकंद के शास्त्री स्कूल में भी जाएँगे और वहाँ के छात्रों के साथ बातचीत करेंगे। इसके अलावा वह राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी पर आधारित एक प्रदर्शनी का भी उद्घाटन करेंगे।

विजय रूपाणी अपनी पाँच दिवसीय यात्रा के दौरान एक के बाद एक कई सारे बैठकों में हिस्सा लेने वाले हैं। इस दौरान वो उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जीयोयेव से मुलाकात करेंगे। और फिर अंदीजान, समरकंद, बुखारा क्षेत्र के गर्वनरों के साथ ही ताशकंद शहर के मेयर से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा रुपाणी उज्बेकिस्तान के फ्री फार्मास्यूटिकल जोन जाएँगे। जहाँ वो कैडिला फार्मास्यूटिकल्स की एक यूनिट का उद्घाटन करेंगे और साथ ही उज्बेकिस्तान में शारदा यूनिवर्सिटी की भी शुरुआत करेंगे।

कमलेश तिवारी हत्याकांड: मौलाना मोहसिन, फैजान और राशिद हिरासत में, दुबई से आया था मर्डर करने

हिन्दू महासभा के पूर्व अध्यक्ष और हिन्दू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी हत्याकांड मामले में पुलिस को बड़ी क़ामयाबी मिली है। गुजरात एटीएस (आतंकवाद विरोधी दस्ता) ने देर रात सूरत से 3 लोगों को हिरासत में लिया है। बाक़ी दो लोगों की तलाश अभी भी जारी है, जिनकी पहचान कर ली गई है। सूरत के मौलाना मोहसिन शेख, फैजान पठान और रशीद अहमद को हिरासत में लिया गया है। रशीद को कंप्यूटर का ज्ञान है और वो दर्जी का काम करता है। इस मामले में कुछ और लोगों को हिरासत लिया गया था लेकिन पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।

यूपी डीजीपी ओम प्रकाश सिंह ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर इस हत्याकांड पर जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने बताया कि जाँच से पता चला है कि हिरासत में लिए गए तीनों व्यक्ति कमलेश तिवारी की हत्या में सम्मिलित रहे हैं। दो और आरोपितों की तलाश जारी है। कमलेश तिवारी को मारने की योजना 2 महीने से रची जा रही थी। इस काम के लिए राशिद पठान दुबई से आया था।

डीजीपी ने बताया:

हमने जिन्हें गिरफ़्तार किया है, उनमें एक मोहसिन शेख, दूसरा फ़ैजान जो सूरत में जूते की दुकान में काम करता है और तीसरा राशिद अहमद पठान है जो कम्प्यूटर का ज्ञानी है। दो और को हिरासत में लिया गया और पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। प्रारंभिक विवेचना से पता चला है कि तीनों व्यक्ति हत्या में शामिल थे। दो मुख्य अभियुक्त और हैं, जिनकी जानकारी इकट्ठा की जा रही है।

FIR में दो लोगों को षड्यंत्रकारियों के रूप में नामज़द किया गया है। इसमें एक मौलाना अनवारुल हक़ और दूसरा मुफ़्ती नईम काज़मी है। इन्हें हिरासत में लिया गया है और उनसे पूछताछ जारी है।

पूछताछ से पता चला है राशिद पठान ने हत्या की योजना बनाई थी। हत्या के लिए मौलाना मोहसिन शेख ने उसे प्रोत्साहित किया और कहा था कि कमलेश तिवारी को मारने की ज़रूरत है। फ़ैजान मिठाई ख़रीदने में शामिल रहा। कुल मिलाकर यह कह सकते हैं कि यह छ: लोग हत्या में सम्मिलित रहे हैं। बिजनौर का कनेक्शन भी क्रॉस चेक किया जा रहा है, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

कमलेश तिवारी हत्याकांड में यूपी पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति

डीजीपी ने बताया कि अभी तक किसी ख़ास आतंकवादी संगठन से तार जुड़े नहीं पाए गए हैं।

कमलेश तिवारी राह का कांटा था, संगठन अलहिंद ब्रिगेड ने ली हत्याकांड की ज़िम्मेदारी

बता दें कि इस हत्याकांड की जाँच के लिए विशेष जाँच टीम (SIT) का गठन किया गया है। इस बीच सोशल मीडिया पर तथाकथित संगठन अलहिंद ब्रिगेड के नाम से एक मैसेज बड़ी तेज़ी से वायरल हो रहा है। इस वायरल मैसेज में हत्या की ज़िम्मेदारी ली गई है। ऐसा दावा किया जा रहा है कि जो भी इस्लाम पर ऊँगली उठाने का काम करेगा, उसका अंजाम इसी तरह का होगा। इस मैसेज में कमलेश तिवारी की फोटो भी लगी हुई है।

वायरल हो रहे मैसेज में लिखा है, “कमलेश तिवारी राह का काँटा था और जो कोई भी इस्लाम की तरफ उँगली उठाएगा, उसका यही अंजाम होगा। अलहिंद ब्रिगेड जिम्मेदारी लेता है। और ज्यादा देखने के लिए तैयार हो जाओ। युद्ध शुरू हो गया है। अलहिंद ब्रिगेड कमलेश तिवारी की हत्या की जिम्मेदारी लेता है, जिसने इस्लाम को बदनाम किया था।”

दिन-दहाड़े नृशंस हत्या को दिया अंजाम

ग़ौरतलब है कि शुक्रवार (18 अक्टूबर) को लखनऊ में नाका क्षेत्र स्थित हिन्दू महासभा कार्यालय में कमलेश तिवारी को बदमाशों ने गला रेतकर व गोली मारकर हत्या कर दी थी थी। नृशंस हत्या की वारदात को अंजाम देकर हमलावर वहाँ से फ़रार हो गए थे। गंभीर हालत में तिवारी को ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। डॉक्टरों ने बताया था कि कमलेश तिवारी का किसी धारदार हथियार से गला रेता गया। पुलिस का कहना था कि हत्या की वारदात को किसी परिचित ने अंजाम दिया है। घटना-स्थल से पुलिस ने रिवॉल्वर भी बरामद की थी।

कैमरे में क़ैद हुए कमलेश तिवारी की हत्या के संदिग्ध, 15 से ज़्यादा किए वार

पुलिस ने हत्यारों की खोज के लिए सीसीटीवी खँगाले और हाथ लगा दोनों बदमाशों का हूलिया। सीसीटीवी फुटेज में क़ैद हुई तस्वीर में देखा जा सकता है कि दोनों आरोपित भगवा रंग का कुर्ता पहनकर कमलेश तिवारी के कार्यालय में गए। इसके बाद दोनों ने मौक़ा देखकर उनके सीने और ठोड़ी पर चाकू से 15 से ज़्यादा वार किए। बाद में दोनों फ़रार हो गए। मीडिया में आई ख़बरों के अनुसार, तिवारी से मिलने आए दो लोग मिठाई के डिब्बे में असलहे और चाकू छिपाकर लाए थे।

कमलेश तिवारी की दिन-दहाड़े हत्या किए जाने से लोगों में काफ़ी आक्रोश फैल गया और उनके समर्थकों ने ख़ुर्शीद बाग़ कॉलोनी में प्रदर्शन शुरू कर दिया था। इसके मद्देनज़र घटना-स्थल पर बड़ी संख्या में पुलिस बल व पीएसी की तैनाती कर दी गई।

पत्नी ने दी पुलिस में तहरीर, नईम और अनवारुल ने कराई हत्या

पोस्टमॉर्टम के बाद शुक्रवार देर रात कमलेश तिवारी का शव सीतापुर के महमूदाबाद स्थित उनके पैतृक आवास लाया गया। शव के पहुँचते ही कमलेश के घर में चीख पुकार मच गई। उनकी पत्नी ने अपनी तहरीर में साफ लिखा है कि यूपी में बिजनौर जिले के रहने वाले मोहम्मद मुफ्ती नईम काज़मी और अनवारुल हक ने साल 2016 में उनके पति कमलेश का सर काटने के लिए डेढ़ करोड़ रूपए के इनाम की सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी। 

इस सम्बन्ध में कमलेश की पत्नी ने पुलिस में दोनों आरोपितों के खिलाफ दफा 302 के तहत मुकदमा दर्ज करने की तहरीर दी है। कमलेश की पत्नी का यह दावा है कि इन दोनों ने साजिशन उनके पति कमलेश तिवारी की हत्या कराई है।

दरअसल, दिवंगत कमलेश तिवारी ने 2015 में एक बयान दिया था जिसके बाद देशभर के कट्टरपंथियों में खलबली मच गई थी। तिवारी ने खुले-आम पैगम्बर मुहम्मद की सेक्सुअल ओरिएंटेशन पर मुखर रूप से बोलते हुए उन्हें समलैंगिक कह दिया था। इसी के बाद देवबंद से लेकर पश्चिम बंगाल तक के मुसलामानों ने फतवा जारी करना शुरू कर दिया था।

कमलेश तिवारी की हत्या, हिन्दुओं में डर: अजीत भारती के विचार | Ajeet Bharti on Kamlesh Tiwari Murder and Fear among Hindus

हिन्दूवादी नेता कमलेश तिवारी की हत्या के बाद से हिन्दुओं में डर व्याप्त है। मैं भी उन्हीं में से एक हूँ। मुझे भी भयानक सपने आते हैं और फर्श पर ‘अगला नंबर तुम्हारा है’ लिखा हुआ नजर आता है। मेरे जानने वाले लोग ये मानते हैं कि मैं सही कर रहा हूँ और ये समय की माँग है, लेकिन खतरे से भरा है। मेरे माता-पिता को नहीं पता कि पत्रकार क्या होता है वरना वो भी मुझसे कहेंगे कि सब कुछ छोड़कर गाँव आ जाओ, खेती करो।

कोई भी माँ-बाप अपने बच्चे को चाकू से हलाल होते हुए नहीं देख सकता। तो क्या मैं मान लूँ कि हिन्दू ही इस देश के असली आतंकी हैं और कट्टरपंथी सताए जा रहे हैं? क्या मैं ये मान लूँ कि जय श्री राम आतंकवादियों का नारा है? जैसा कि पतित पत्रकार और मीडिया गिरोह बार-बार लोगों को बताना चाह रहा है। क्या इस्लाम शांतिप्रिय है और सारे कट्टरपंथी डरकर जीने को मजबूर हैं?

पूरी वीडियो यहाँ क्लिक कर के देखें

‘कॉल गर्ल’ कहकर किसी लड़की को गाली देना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (18 अक्टूबर) को अपने एक फ़ैसले में कहा कि किसी महिला को ‘कॉल-गर्ल’ कहकर मौखिक रूप से गाली देना आत्महत्या के लिए उकसाने के प्रयास के तहत नहीं आएगा। यह फैसला जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​और आर सुभाष रेड्डी की खंडपीठ ने सुनाया। इस मामले के संबंध में कलकत्ता हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की गई थी।

दरअसल, यह मामला 2004 का है। तब एक लड़की ने आत्महत्या करने से पहले दो सुसाइड नोट लिखे थे, जिसमें उसने आत्महत्या के लिए अपने बॉयफ्रेंड और उसके माता-पिता को दोषी ठहराया था। दोषी ठहराने के पीछे वजह थी कि बॉयफ्रेंड के माता-पिता ने उनकी शादी का विरोध किया था और कथित तौर पर पीड़िता को ‘कॉल-गर्ल’ कहकर गाली दी थी, जिससे आहत होकर उसने आत्महत्या कर ली थी।

इसके बाद मृतका के पिता ने पुलिस में शिक़ायत दर्ज कराई। शिक़ायत में पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए मृतका के पिता ने बताया कि दोनों शादी करना चाहते थे, इसलिए उनकी बेटी लड़के के माता-पिता से बात करने के लिए उनके घर पहुँची, जहाँ लड़के के माता-पिता ने उसे कॉल-गर्ल कहकर गाली दी और कहा, “तुम एक कॉल-गर्ल हो, मेरा बेटा तुमसे शादी नहीं करेगा, हम अपने बेटे की शादी दूसरी जगह करेंगे।” इसके अगले ही दिन पीड़िता ने आत्महत्या कर ली। आत्महत्या करने से पहले पीड़िता ने सुसाइड नोट में घटना का विस्तृत वर्णन किया था। इस सुसाइड नोट के आधार पर IPC की धारा-34 के साथ 306 के तहत आरोप तय किए गए थे।

इसके बाद, आरोपित ने अपने ख़िलाफ़ आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा को रद्द करने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। मामले की सुनवाई जब ट्रायल कोर्ट में चली थी तो आरोपितों को तलब किया गया था लेकिन हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया। हाईकोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा था कि मौखिक रूप से गाली देने को आत्महत्या के लिए उकसाए जाने के दायरे में नहीं रखा जा सकता। कल के फैसले में सुप्रीम कोर्ट भी हाईकोर्ट के इस विचार से सहमत रहा।

पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ अपमानजनक बातें, ईशनिंदा मामले में साजिद अली को 5 साल की सजा

पाकिस्तान में साइबर अपराध की विशेष अदालत ने शिया समुदाय के साजिद अली को पाँच साल की कैद की सजा सुनाई है। साजिद अली को यह सजा सोशल मीडिया पर ईशनिंदा से संबंधित सामग्री डालने के मामले में सुनाई गई है। उस पर 2017 में फेसबुक पर ‘बेअदबी भरी, ईशनिंदा करने वाली और अपमानजनक’ सामग्री डालने का आरोप था।

बता दें कि यह पाकिस्तान के नए साइबर आपराधिक कानून के तहत दोष-सिद्धि का पहला मामला है। यानी कि वहाँ पहली बार नए साइबर आपराधिक कानून के तहत सजा सुनाई गई है। साजिद अली बहावलनगर के क्रिश्चियन तहसील का रहने वाला है। उसे इलेक्ट्रॉनिक अपराध रोकथाम अधिनियम 2016 और पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 298ए के तहत सजा सुनाई गई है।

उसके खिलाफ स्थानीय लोगों की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था। यह मामला बाद में क्षेत्राधिकार के मुद्दे पर संघीय जाँच एजेंसी (FIA) साइबर अपराध सर्किल लाहौर के सुपुर्द कर दिया गया था। एफआईए साइबर अपराध लाहौर के प्रमुख सरफराज चौधरी ने कहा कि पैगंबर मोहम्मद साहब सहयोगी के खिलाफ ईशनिंदा संबंधी सामग्री पोस्ट करने के आरोप में नए कानून के तहत दोष सिद्ध होने का यह पहला मामला है।

जानकारी के मुताबिक इस मामले की सुनवाई के दौरान संघीय जाँच एजेंसी के अधिवक्ता मुनम बशीर चौधरी ने 12 गवाहों को पेश किया। मुनम बशीर ने कहा कि पेश किए गए 12 गवाहों में से अधिकांश गवाहों ने साजिद अली के खिलाफ गवाही दी। इसमें एफआईए के असिस्टेंट डायरेक्टर नईम जफर भी शामिल थे। बता दें कि नईम जफर नेनअदालत में अपनी तकनीकी विश्लेषण की रिपोर्ट सौंपी थी। वहीं, एफआईए साइबर अपराध के प्रमुख सरफराज चौधरी का कहना है कि अदालत ने साइबर अपराध के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए सरकार को व्यापक स्तर पर अभियान चलाने का निर्देश दिया है।

कमलेश राह का काँटा था, जो भी इस्लाम की ओर ऊँगली उठाएगा, उसका होगा यही अंजाम: अलहिंद ब्रिगेड

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के घनी आबादी वाले नाका हिंडोला इलाके में शुक्रवार (अक्टूबर 18, 2019) को हिन्दू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी की दिनदहाड़े नृशंस हत्या कर दी गई। मामले की जाँच के लिए विशेष जाँच टीम (SIT) का गठन किया गया है। इस बीच सोशल मीडिया पर तथाकथित संगठन अलहिंद ब्रिगेड के नाम से एक मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है। इस वायरल मैसेज में हत्या की जिम्मेदारी ली गई है।

इस मैसेज को वायरल करके यह दावा किया जा रहा है कि जो भी इस्लाम या मुस्लिमों पर उँगली उठाने का काम करेगा, उसका अंजाम इसी तरह का होगा। इस मैसेज में कमलेश तिवारी की फोटो भी लगी हुई है। वायरल हो रहे मैसेज में लिखा है, “कमलेश तिवारी राह का काँटा था और जो कोई भी इस्लाम और मुस्लिमों की तरफ उँगली उठाएगा, उसका यही अंजाम होगा। अलहिंद ब्रिगेड जिम्मेदारी लेता है। और ज्यादा देखने के लिए तैयार हो जाओ। युद्ध शुरू हो गया है। अलहिंद ब्रिगेड कमलेश तिवारी की हत्या की जिम्मेदारी लेता है, जिसने इस्लाम और मुस्लिमों को बदनाम किया था।”

हालांकि मैसेज की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। यूपी पुलिस के पास भी यह मैसेज मौजूद है जिसकी जाँच की जा रही है। पुलिस हर एंगल से इसकी जाँच में जुटी है। फिलहाल इस बात का पता नहीं चल पाया है कि अलहिंद ब्रिगेड नाम के इस तथाकथित संगठन का किसी वैश्विक आतंकी संगठन से कोई रिश्ता है या नहीं। ऐसे में यह भी हो सकता है कि ऐसा मैसेज वायरल करके सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की कोई साजिश हो।


इधर, पोस्टमॉर्टम के बाद शुक्रवार देर रात कमलेश तिवारी का शव सीतापुर के महमूदाबाद स्थित उनके पैतृक आवास लाया गया। शव के पहुँचते ही कमलेश के घर में चीख पुकार मच गई। परिजनों में गम के साथ-साथ गुस्सा भी है। परिजनों ने माँग की है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद उनके घर आएँ। यदि वे नहीं आएँगे तो शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही परिवार के सदस्यों के लिए सरकारी नौकरी की भी माँग की है।

उल्लेखनीय है कि कमलेश तिवारी की पत्नी ने अपनी तहरीर में साफ लिखा है कि यूपी में बिजनौर जिले के रहने वाले मोहम्मद मुफ्ती नईम काजमी और अनवारुल हक ने साल 2016 में उनके पति कमलेश का सर काटने के लिए डेढ़ करोड़ रूपए के इनाम की सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी। इस सम्बन्ध में कमलेश की पत्नी ने पुलिस में दोनों आरोपितों के खिलाफ दफा 302 के तहत मुकदमा दर्ज करने की तहरीर दी है। कमलेश की पत्नी का यह दावा है कि इन दोनों ने साजिशन उनके पति कमलेश तिवारी की हत्या कराई है।