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बिहार: न पीने को पानी-न खाना, ग्रामीणों ने कहा-मरेंगे तो साथ-साथ

बाढ़ से बेहाल बिहार के दरभंगा जिले के धधिया गॉंव के लोगों के पास न तो पीने का पानी है और न खाना। मवेशियों को चारा तक मयस्सर नहीं है। संकट की इस घड़ी में भी गॉंव वाले एक-दूसरे का सहारा बने हुए हैं और उनकी जिद्द है कि इस संकट से लड़ेंगे भी साथ-साथ और यदि मरने की नौबत आई तो वो भी साथ-साथ।

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक बाढ़ के पानी में गॉंव के डूबने के बाद यहॉं के निवासी अपने मवेशियों के साथ एक ही जगह पर रह रहे हैं। एक ग्रामीण ने बताया, “यदि मौत आई तो हम साथ-साथ मरेंगे। हमने अपने मवेशियों को साड़ी से बनाए एक शेड के नीचे रखा है। यहॉं हालात बेहद खराब हैं और हम सरकारी मदद मिलने का इंतजार कर रहे हैं। कई लोगों का घर बाढ़ लील चुका है। हमारे पास न खाना है और न मवेशियों के लिए चारा।”

रिपोर्ट में ग्रामीणों के हवाले से बताया है कि अब तक उन्हें प्रशासन से कोई मदद नहीं मिली है। बाढ़ से कम से कम नुकसान हो इसके लिए उन्होंने अपने स्तर से पूरा प्रयास किया, लेकिन गॉंव के चारों तरफ पानी का स्तर बढ़ने से उनके सारे प्रयास बेकार साबित हुए।

एक ग्रामीण ने बताया, “यह बेहद निराशाजनक है कि कोई सरकारी अधिकारी हमारी मदद को नहीं आया। हमारे पास पीने का पानी तक नहीं हैं। हम सब यहॉं एक-दूसरे की मदद करने के लिए इकट्ठा हुए हैं। हमारा राशन, घरेलू सामान, फर्नीचर वगैरह सब पानी में डूब चुके हैं।”

ग्रामीणों के लिए सु​रक्षित जगहों तक पहुॅंचना भी संभव नहीं है, क्योंकि बाढ़ के कारण यातायात सेवाएँ बुरी तरह बाधित हैं। एक अन्य ग्रामीण ने बताया, “यातायात ठप है। इस तरह के हालात में लोग सुरक्षित जगहों तक पहुॅंच सके इसकी व्यवस्था सरकार को करनी चाहिए।”

बाढ़ से बिहार में अब तक करीब सौ लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य के 12 जिलों के करीब 26 लाख लोग इससे प्रभावित हैं। राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों के खाते में भेजने के लिए 6000 करोड़ रुपए मुहैया कराए हैं।

₹128 करोड़ का बिजली बिल, जबकि घर में है केवल पंखा और बल्ब

उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग की लापरवाही का खामियाजा एक गरीब बुजुर्ग को भरना पड़ रहा है। हापुड़ के चमरी गाँव निवासी शमीम को बिजली विभाग ने 1,28,45,95,444 रुपए का बिजली बिल भेजा है। शमीम ने 2 किलो वाट का घरेलू कनेक्शन ले रखा है।

ब‍िल आने के बाद से शमीम बिजली विभाग के अधिकारियों के कार्यालय के चक्कर काट रहा है, लेकिन कोई भी उनकी फरियाद सुनने को तैयार नहीं। ब‍िल न भरने पर शमीम के घर का कनेक्शन भी काट दिया गया है। शमीम ने बताया कि कोई भी अधिकारी उनकी शिकायत पर ध्यान नहीं दे रहा। वो कहाँ से इतना पैसा जमा करा पाएँगे। उन्होंने बताया कि शिकायत करने पर अधिकारियों ने कहा कि जब तक वे बिल जमा नहीं करेंगे, उन्हें कनेक्शन नहीं दिया जाएगा।

शमीम का कहना है कि वे घर में सिर्फ पंखा और लाइट का उपयोग करते हैं? उन्होंने कहा कि उनके घर का बिल मुश्किल से 700 से 800 तक आता है।

वहीं, इस मामले को बिजली विभाग के अधिकारी कोई बड़ी बात नहीं मान रहे हैं। असिस्टेंट इलेक्ट्रिकल इंजीनियर राम शरन ने कहा, “यह तकनीकी खामी है। यदि वे हमें बिल लाकर देते हैं तो हम सिस्टम की तकनीकी खराबी को सुधारने के बाद उन्हें सही बिल जारी कर देंगे। यह कोई बड़ी बात नहीं है, तकनीकी समस्याएँ होती रहती हैं।”

मध्य प्रदेश: कॉन्ग्रेस राज में थम नहीं रहा मॉब लिंचिंग का सिलसिला, अब भोपाल में युवक को जमकर पीटा

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भले मॉब लिंचिंग रोकने के लिए नया कानून लाने की बात कही हो। लेकिन, उनके राज में हिंसा पर उतारू भीड़ को इससे कोई फर्क पड़ता नहीं दिख रहा। ताजा घटना में राजधानी भोपाल में भीड़ ने बच्चा चोरी के शक में एक युवक की बेरहमी से पिटाई कर दी।

इससे पहले नीमच जिले में एक बुजुर्ग की हत्या भीड़ ने मोर चोरी के शक में कर दी थी। रायसेन में भी इसी तरह की घटना हुई थी। उससे पहले देवास जिले के कन्नौद में भीड़ ने बच्चा चोरी के शक में एक महिला की पिटाई की थी।

इन घटनाओं को लेकर राज्य के गृह मंत्री बाला बच्चन ने शनिवार (जुलाई 20, 2019) को कहा था कि सरकार मॉब लिंचिंग रोकने के लिए कृत संकल्पित है और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं,राज्य के पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक राजेंद्र शुक्ल ने कहा है कि कमलनाथ राज्य में तबादला उद्योग चल रहा है। इससे कानून-व्यवस्था चौपट हो गई है और अपराध बढ़ रहे हैं।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक भोपाल के टीटी नगर थाना क्षेत्र के बाणगंगा में भीड़ ने बच्चा चोरी के शक में एक युवक की जमकर पिटाई की। पुलिस के पहुॅंचने पर भी भीड़ का गुस्सा कम नहीं हुआ। हॉलांकि किसी तरह पुलिस युवक को भीड़ से बचाने में कामयाब रही। पूछताछ में पता चला कि भीड़ के हत्थे चढ़ा विशाल गिरी वाहन चोर है। टीटी नगर के थाना प्रभारी संजीव कुमार ने वीडियो फुटेज के आधार पर कार्रवाई करने की बात कही है।

वहीं, नीमच में बुजुर्ग की पीट-पीट कर हत्या किए जाने के मामले में पुलिस ने नौ लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार की रात को कुकडेश्वर थाना क्षेत्र के लसूरिया आतरी गांव में भीड़ ने मोर की चोरी करने के शक में तीन लोगों को पकड़ा और उनकी पिटाई कर दी। भीड़ की पिटाई से हीरा लाल (58) की मौत अस्पताल ले जाने के दौरान हो गई।

न्यूज एजेंसी आईएएनएस के अनुसार बकरा चोरी के मामले में नीमच जिले में ही पिछले दिनों भीड़ ने तीन लोगों को मारा था और उनकी मोटर साइकिल जला दी थी। उस मामले में पुलिस ने कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया था।

बांग्लादेश: दर्द बयां करने की सजा, हिन्दू महिला पर चलेगा देशद्रोह का मुकदमा

अल्पसंख्यक हिन्दुओं की दुर्दशा बयां करने वाली महिला पर बांग्लादेश में देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाएगा। इस हिन्दू महिला ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कहा था कि उसके देश में अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित किया जा रहा है। यह महिला हैं, बांग्लादेश हिन्दू बुद्धिस्ट क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल (एचबीसीयूसी) की आयोजन सचिव प्रिया साहा।

बांग्लादेश के सड़क परिवहन मंत्री एवं सत्तारूढ़ अवामी लीग के महासचिव ओबैदुल कादर ने महिला को झूठी बताते हुए उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला चलाए जाने की जानकारी दी। साहा ने 19 जनवरी को ह्वाइट हाउस में आयोजित एक बैठक में भाग लिया था।

इस मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद से ही साहा बांग्लादेश की बहुसंख्यक आबादी के निशाने पर हैं। वीडियो में वह खुद को बांग्लादेशी नागरिक बताती दिख रही हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति से कहती हैं कि अल्पसंख्यक समुदाय के 3.7 करोड़ लोग बांग्लादेश से लापता हो गए हैं। उन्होंने इन्हें गैर कानूनी तरीके से जेल में कैद रखने या हत्या किए जाने का शक जताया।

साहा उन पॉंच बांग्लादेशियों और दो रोहिंग्या शरणार्थियों में से एक थीं जिन्हें ढाका के अमेरिकी दूतावास ने व्हाइट हाउस भेजा था। उनके बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कादर ने कहा, “महिला झूठी है और जान- बूझकर देशद्रोही टिप्पणी की है। उनका बयान पूरी तरह गलत हैं। इससे कोई भी सहमत नहीं होगा। उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया जाएगा। इस संबंध में कार्रवाई चल रही है। हमें निश्चित रूप से उनके खिलाफ कदम उठाना चाहिए और हम इस प्रक्रिया में आगे बढ़ रहे हैं,क्योंकि एक बांग्लादेशी नागरिक होने के बावजूद उन्होंने झूठी, जान-बूझकर, देशद्रोही टिप्पणी की।”

‘द वायर’ वालो, इतिहास पढ़ो, संदर्भ देखो और तब ज्ञान छाँटो कि जर्मन राजदूत के संघ जाने का क्या अर्थ है

The Wire वाले भाटिया जी बहुत दुःखी हैं- बहुत ही ज़्यादा। जर्मनी के राजदूत संघ वालों से मिलने नागपुर चले गए न! भाटिया जी याद दिला रहे हैं कि संघ के दो पितृ-पुरुषों सावरकर और गोलवलकर ने हिटलर की तारीफ़ कर दी थी, और इसलिए जर्मनी के राजदूत वॉल्टर जे लिंडनर का संघ के लोगों से मिलना न केवल हिटलर के हाथों मारे गए यहूदियों का अपमान है बल्कि बिना सीधे-सीधे कहे यह भी समझा रहे हैं कि इससे जर्मनी के सत्तर साल का प्रायश्चित मिट्टी में मिल गया।

दो बार प्रतिबंधित होने के बाद भी आज तक जारी कैसे है RSS?

भाटिया जी बताते हैं कि संघ पर दो-दो बार प्रतिबंध लग चुका है। पहले तो उनका इतिहास-ज्ञान ही सुधारा जाए- संघ दो नहीं, तीन बार प्रतिबंधित हुआ है। एक बार गाँधी-वध के बाद, एक बार आपातकाल में, और तीसरी बार बाबरी-ध्वंस के बाद। कारणों पर मैं बाद में आऊँगा, पहले भाटिया जी ये बताएँ कि इतनी बार प्रतिबंधित होने के बावजूद संघ आज तक काम कैसे कर रहा है?

अगर यह सवाल भाटिया जी से बगलें झाँकने के अलावा कोई जवाब नहीं होगा। क्योंकि जवाब यह है कि हर बार संघ को प्रतिबंधित करने के बाद भी, कोई भी सरकार उसके द्वारा कोई गैर-क़ानूनी काम साबित नहीं कर पाई है। न गाँधी-वध में सरदार पटेल संघ का हाथ साबित कर पाए, न ही नरसिम्हा राव बाबरी-ध्वंस में संघ का हाथ साबित कर पाए। इसके अलावा संघ पर तीसरा प्रतिबंध इंदिरा गाँधी के उस आपातकाल में लगा, जिसके लिए जेल जाना या प्रतिबंधित होना शर्म नहीं, गर्व की बात है।

हिटलर, ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’

यह सच है कि हिटलर की तारीफ़ गोलवलकर और सावरकर ने की थी। लेकिन हिटलर को ‘मेरे मित्र हिटलर’ तो गाँधी ने भी कहा था। उन्होंने तो हिटलर को ‘वीर’, ‘अपनी पितृभूमि से प्रेम करने वाला’ भी कहा था, और कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि हिटलर वह दैत्य है जो उसके दुश्मन उसे बताते हैं। तो क्या गाँधी को केवल इतना कह देने के लिए भारत के हृदय से हटा दें? भाटिया जी बताएँगे कि गाँधी जी की बात तो ‘परिप्रेक्ष्य’ में देखा जाना चाहिए, अलग से उठा कर नहीं; भाटिया जी यह भी बताएँगे कि बाद में गाँधी की धारणा हिटलर के बारे में बदल गई। तो धारणाएँ तो गोलवलकर की भी जीवन में सतत रूप से बदलतीं रहीं थीं– जैसा कि किसी भी ऐसे विचारक के साथ होता ही है जिसने वैचारिक स्वातंत्र्य अक्षुण्ण रखा हो न कि किसी विचारधारा के आगे गिरवी रख दिया हो, जैसे वायर वाले कर चुके हैं।

तो या गाँधी और सावरकर-गोलवलकर के लिए मापदण्ड अलग-अलग हैं, कि गाँधी के विचारों में परिवर्तन ठीक है, गोलवलकर-सावरकर के नहीं; और अगर ऐसा नहीं है तो भाटिया जी बताएँ वह क्या हैं- वैचारिक दोगले, जिसने यह जानकर भी गोलवलकर का दानवीकरण किया, या फिर इतिहास से अनभिज्ञ, जिस स्थिति में सवाल यह उठेगा कि खुद इतिहास ठीक से न जानने वाला व्यक्ति किस नैतिक अधिकार से किसी देश के राजदूत को ज्ञान दे रहा है, और 50-60 लाख लोगों की तुलना इतिहास के सबसे क्रूर व्यक्तियों में से एक से कर रहा है?

हिटलर के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की तुलना संघ के और हिन्दुओं के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद से करने वाले भाटिया जी को यह भी जान लेना चाहिए कि ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ की संघ की अवधारणा नेहरू की ‘डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया’ में दी गई अवधारणा से बहुत अलग नहीं है। वह भी अपनी किताब में ‘हिन्दुस्तानियत’ को परिभाषित संस्कृति से ही करते हैं, भौगोलिकता से नहीं– और हिंदुस्तान की राष्ट्रीय संस्कृति तो वही होगी जो हिंदुस्तान में पैदा हुई हो, यानि हिन्दू संस्कृति। अब सिद्धार्थ भाटिया बताएँ कि नेहरू फ़ासिस्ट थे या नाज़ी?

यहूदियों का दोस्त कौन?

जब हिटलर की बात होती है तो यहूदियों की बात होना लाज़मी है। यह देख लेना ज़रूरी है कि यहूदियों को दो हज़ार साल दुनिया में दर-दर भटकने के बाद अपना राज्य, अपना राष्ट्र मिला तो उसके बारे में और उसके साथ हिंदुस्तान में किसने क्या व्यवहार किया। 1920 के दशक में सावरकर ने लिखा कि अगर यहूदियों के अपने राज्य, अपने राष्ट्र का ज़ियोनिस्ट सपना पूरा होता है तो उन्हें यहूदियों जितनी ही ख़ुशी होगी। 1947 में जब यहूदियों को अपना खुद का राज्य, अपना देश मिलने में भारत ने टाँग मारी तो सावरकर बिफ़र उठे। गोलवलकर ने इजराइल को अपने सपनों के हिन्दू राष्ट्र के लिए एक आदर्श ‘मॉडल’ माना था। और इसके उलटे, गाँधी ने फ़िलिस्तीन को यहूदियों नहीं अरबी फ़िलिस्तीनियों का बताया था।

इज़राइल के साथ नेहरूवियन हिंदुस्तान के कैसे रिश्ते रहे, इसे इस एक कथन से समझा जा सकता है: “हिंदुस्तान के साथ इज़राइल का रिश्ता रखैल का है– आप आड़ में यह अफेयर चलाने में तो खुश हैं, लेकिन सबके सामने इस संबंध को स्वीकार करने को तैयार नहीं।” मैं भाटिया जी को चुनौती देता हूँ कि इस कथन को वह गलत साबित करके दिखाएँ। यह सच्चाई बदलने वाला भी एक ‘संघी’ मोदी ही था। भाटिया जी बताएँगे कि हिटलर के हाथों मारे गए यहूदियों की आत्माएँ जर्मनी के राजदूत के उस संघ के दरवाज़े जाने से नाराज़ होंगी, जिसने इज़राइल को सम्मान देने वाला मोदी बनाया, या उन गाँधी की समाधि पर राजघाट जाने से, जिनका दिल इज़राइल के लिए नहीं पिघला।

इसमें कोई शक नहीं कि गोलवलकर-सावरकर के कई विचार गलत भी थे। कुछ उस समय गलत नहीं भी रहे होंगे लेकिन हो सकता है आज के परिप्रेक्ष्य में उनकी प्रासंगिकता न हो- यह मोहन भगवत ने भी माना है कि संघ केवल गोलवलकर या सावरकर की उस समय कही गई बातों तक सीमित नहीं है। लेकिन उन विचारों को बिना परिप्रेक्ष्य, बिना देश-काल-परिस्थिति के, उठा कर उसके आधार पर न केवल किसी व्यक्ति का बल्कि उस व्यक्ति से जुड़े हर व्यक्ति का भी मूल्यांकन करना या तो घृणित है, या फिर बौद्धिक दीवालियापन। यह भाटिया जी तय कर लें कि उनकी श्रेणी क्या हो सकती है।

शशि थरूर जी ब्रो, आपके व्हाट्सएप में पहुँची हर शायरी ग़ालिब की नहीं होती!

‘सावधानी हटी, दुर्घटना घटी’ इस तरह की शायरियाँ और चेतावनियाँ अक्सर गाड़ी और टेम्पो के पीछे लिखी नजर आती हैं, लेकिन इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले शशि थरूर जैसे बुद्धिजीवियों के लिए भी यह काफी हद तक सही साबित होती है।

वेबकूफ जैसे शब्द ईजाद करने वाले कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर आज ट्विटर पर खुद ही व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का हिस्सा बनते नजर आए हैं। दरअसल, शशि थरूर ने आज ‘मिर्जा ग़ालिब के जन्मदिन’ पर ‘ग़ालिब’ की ही एक एक बहुत ही सुन्दर और मनोहर शायरी शेयर की है। लेकिन ट्विटर यूज़र्स को इसमें कुछ झोल नजर आ गया।

शशि थरूर ने आज ट्वीट करते हुए लिखा –

“ख़ुदा की मोहब्बत को फ़ना कौन करेगा?
सभी बन्दे नेक हों तो गुनाह कौन करेगा?
ऐ ख़ुदा मेरे दोस्तों को सलामत रखना

वरना मेरी सलामती की दुआ कौन करेगा
और रखना मेरे दुश्मनों को भी महफूज़ वरना

मेरी तेरे पास आने की दुआ कौन करेगा…!!!
Mirza Ghalib’s 220th birthday. So many great lines…. “

लेकिन इस ‘दर्दभरी शायरी’ को ट्वीट करते ही ट्वीटर यूज़र्स ने शशि थरूर को याद दिला दिया कि ना ही आज मिर्जा ग़ालिब का जन्मदिन है और ना ही ये शायरी ग़ालिब ने लिखी हुई है। जब तक ‘वेबकूफ’ शब्द गढ़ने वाले शशि थरूर समझ पाते कि वो ‘फूट इन माउथ’ मोमेंट का शिकार हुए हैं, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उन्होंने एक ट्वीट के जरिए स्पष्ट किया कि उन्हें जन्मदिन की तारीख को लेकर कुछ ग़लतफ़हमी हो गई थी। इसके बाद शशि थरूर को बेहद रोचक रिप्लाई आने लगे।

कुछ ट्विटर यूज़र इस बात से भी नाराज थे कि आज ही कॉन्ग्रेस नेता शीला दीक्षित का निधन हुआ और शशि थरूर को शायरी सूझ रही थी।

अधिक शायरी के लिए ऑटो वालों से संपर्क करें शशि थरूर

हालाँकि, शशि थरूर बहुत ज्ञानी आदमी हैं लेकिन उन्हें इस तरह की ‘फैन’ होने की बातों से वास्तविक साहित्य प्रेमियों को निराश नहीं करना चाहिए। यह सिर्फ इस बात का सबूत है कि इस मामले में आपका ज्ञान बेहद सतही और सिर्फ ज्ञान के प्रदर्शन के तक ही समर्पित है।

जिस शायरी को शशि थरूर मिर्जा ग़ालिब की बताकर अन्य लोगों में भी इस भ्रम को फैलाते हैं, उस तरह की शायरी के स्टिकर अपने काले छाते की कमानियों में छोटे शहरों के बस स्टैंड में बेच रहे होते हैं। ये शायरियाँ ऑटो-रिक्शा चालक और बस या ट्रक ड्राइवर्स अपने मनोरंजन के उद्देश्य से शीशे या फिर बोनट आदि पर चिपकाकर चलते हैं।

शायरी का वो संकलन, जिसे हमने थरूर की मोबाइल से निकाला

ऑपइंडिया तीखी मिर्ची सेल ने शशि थरूर का मोबाइल हैक कर के शायरी का वो संकलन निकला है जिसे शशि थरूर आने वाले मशहूर शायरों के जन्मदिन पर पोस्ट करने वाले थे। सड़कछाप पंक्तियों को ग़ालिब का बताते हुए श्री थरूर जी ब्रो ने यह जानकारी भी दी कि मिर्ज़ा ग़ालिब उनके ‘ऑल टाइम फेवरेट’ हैं। कल वो ग़ालिब के नाम से नीचे की पंक्तियाँ न ट्वीट कर दें, इस कारण लोगों में डर का माहौल है। एक नजर –

मालिक की गाड़ी, ड्राइवर का पसीना
चलती है सड़क पर बन कर हसीना

ड्राईवर की ज़िन्दगी में लाखों इलज़ाम होते हैं,
निगाहें साफ़ होती हैं फिर भी बदनाम होते हैं!

चलती है गाड़ी उड़ती है धूल
जलते हैं दुश्मन खिलते हैं फूल

बागों में मोरनी पूछे, चौराहे पर पूछे सिपाही
बोम्बे में एसवरिया पूछे ७९११ क्यों नहीं आई

मेरी चलती है
तो तेरी क्यों जलती है

एक चाँद को देख कर चांदनी भी शरमा गई
किस्मत थी इस गरीब की सवारी गाड़ी में आ गई

गुल गया, गुलबदन गया, गई होंठों की लाली,
अब तो पीछा छोड़ दे मैं हो गई बच्चों वाली

टेबल पर ‘उल्टा तिरंगा’ रखते हैं ‘वेबकूफ’ शशि थरूर

कल ही कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने एक तस्वीर शेयर की थी, जिसमें उन्होंने अपने टेबल पर उल्टा तिरंगा रखा हुआ था। इसके बाद ट्विटर यूज़र्स ने उन्हें इस बात पर जमकर लताड़ लगाई थी।

भू माफिया आजम खान ने निजी यूनिवर्सिटी में करवाया था सरकारी खर्चे से ‘जश्न’, सैफई से भी ज्यादा था खर्चा

अपने दादा के नाम पर अली जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में 26 किसानों की 5 हेक्टेयर जमीन हड़पने के कारण चर्चा में आए भू माफिया आजम खान का विवादों से गहरा सम्बन्ध रहा है। भू माफिया आजम खान समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और रामपुर से मौजूदा सांसद हैं। जनसत्ता की एक रिपोर्ट के अनुसार, भू माफिया आजम खान ने अखिलेश सरकार में सैफई महोत्सव की तर्ज पर रामपुर महोत्सव का आयोजन किया था।

जश्न-ए-जौहर

इस महोत्स्व के दौरान भी वो विवादों के घेरे में आए थे। दरअसल, उस वक्त भी एक विवाद उछला था, जब आजम खान ने रामपुर महोत्सव का नाम बदलकर जश्न-ए-जौहर कर दिया था। इस समारोह का स्थान उन्होंने अपने निजी विश्वविद्यालय में रखा था। खास बात यह है कि उस समारोह का पूरा इंतजाम जिला प्रशासन ने किया था। राज्य सरकार की तरफ से इसके लिए 58 लाख रुपए आवंटित किए गए थे, जो कि सैफई महोत्सव से 10 लाख ज्यादा थे। तब आरोप लगे थे कि अखिलेश सरकार आजम खान के सामने नतमस्तक है और उन्होंने ही इसकी सारी तैयारियाँ करवाई हैं।

आजम खान को रामपुर जिला प्रशासन ने उन्हें भू-माफिया घोषित किया है और इस सम्बन्ध में उनका नाम एंटी भू माफिया पोर्टल पर जमीन कब्जाने वालों की सूची में डाल दिया गया है। आजम खान के खिलाफ ये मामला जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ा हुआ है। पीड़ित लोगों का आरोप है कि आजम खान ने अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए जौहर विश्वविद्यालय के लिए जमीन हथिया ली। जौहर विश्वविद्यालय के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के शासन में भी इस तरह के आरोप लगे थे। लेकिन सरकार में होने के बावजूद उन पर कभी किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई।

भू माफिया आजम खान पर पिछले एक महीने में 13 मामले दर्ज किए गए हैं। उनके खिलाफ अलग-अलग केसों में 30 मुकदमे चल रहे हैं।

झारखंड के 5000 बच्चों की तस्करी करने वाला दरिंदा पन्ना लाल महतो खूंटी से गिरफ़्तार

झारखंड पुलिस ने शुक्रवार (19 जुलाई 2019) को दावा किया कि खूंटी ज़िले में हज़ारों लड़कियों को ख़रीदने-बेचने व मानव तस्करी के सरगना पन्ना लाल महतो को गिरफ़्तार कर लिया गया है। महतो की गिरफ़्तारी झारखंड पुलिस एक बड़ी सफलता है।

महतो पर आरोप है कि उसने झारखंड के 5,000 बच्चों को, जिनमें अधिकतर आदिवासी लड़कियाँ थीं, उन्हें नई दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में बेच दिया। पुलिस ने उसके क़ब्ज़े से अवैध भूमि सौदों और तस्करी से संबंधित कई दस्तावेज़ भी ज़ब्त किए।

डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस (हेडक्वार्टर) जयदीप लकड़ा ने बताया कि महतों को गुरुवार (18 जुलाई 2019) की आधी रात को खूंटी पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले खूंटी टोला से गिरफ़्तार किया गया। उन्होंने बताया, “हमें एक सूचना मिली कि महतो खूंटी टोला के एक पखनु गंझू के घर पर है। जब हम घर पर छापा मारने पहुँचे, तो उसने अपनी एसयूवी कार से भागने की कोशिश की लेकिन हमने उसे पकड़ लिया।”

इसके आगे उन्होंने बताया,

“हमने एक पीले रंग की फाइल बरामद की जिसमें मानव तस्करी से संबंधित धन के आदान-प्रदान का विवरण, भूमि सौदों से संबंधित एक नीले रंग की डायरी, एक सफेद SUV, विभिन्न बैंकों के चेकबुक, एटीएम कार्ड, गैर-न्यायिक टिकट और अन्य वस्तुएँ बरामद किए।”

इसके अलावा, खूंटी के बाल कल्याण समिति (CWC) ने महतो के ख़िलाफ़ मानव-तस्करी विरोधी इकाई (AHTU) (खूंटी) में भी एक FIR दर्ज की थी। खूंटी में CWC के सदस्य बैद्यनाथ कुमार ने कहा था कि उन्होंने खूंटी ब्लॉक की नाबालिग लड़की की तस्करी में शामिल होने के मामले में अगस्त 2018 में महतो के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था। उन्होंने बताया,

“लड़की की तस्करी पिछले साल दिल्ली में की गई थी। उसे दिल्ली पुलिस ने बचा लिया था और फिर उसे दिल्ली CWC को सौंप दिया गया था। इसके बाद लड़की को खूंटी CWC लाया गया, जहाँ उसका बयान दर्ज किया गया।”

बैद्यनाथ कुमार के अनुसार,

“लड़की ने अपने बयान में बताया कि उसके साथ मारपीट की गई और यौन शोषण भी किया गया। उसके बयान के आधार पर, पुलिस ने महतो के ख़िलाफ़ धारा-363, 370 (4), 370 (A), 371, 374, 354 (A) और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम की धारा-8 के तहत FIR दर्ज की गई थी।”

ख़बर के अनुसार, इससे पहले भी महतो को गिरफ़्तार किया जा चुका है। महतो और उसकी पत्नी सुनीता कुमारी को अक्टूबर 2014 में नई दिल्ली के शकूरपुर इलाक़े से मानव तस्करी के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था, जब वे किसी अज्ञात स्थान पर भागने के लिए अपना सामान इकट्ठा करने के लिए वहाँ गए थे।

पुलिस ने बताया कि महतो को मानव तस्करी और अन्य मामलों में 2004 और 2006 में भी गिरफ़्तार किया गया था। पुलिस ने कहा कि आरोपित ने रांची, दिल्ली और खूंटी में बड़ी संपत्ति अर्जित कर ली है।

एक NGO का दावा है कि झारखंड से लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में हर साल कम से कम 10,000 बच्चों की तस्करी की जाती है। अधिकांश पीड़ितों को घरेलू कामों में और कुछ को वेश्यालय में धकेल दिया जाता है।

जल्द हल होगा कश्मीर मसला, धरती की कोई ताकत इसे नहीं रोक सकती: रक्षा मंत्री

कठुआ: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दावा किया कि कश्मीर मुद्दे का समाधान अब होने को है, और “धरती की कोई ताकत इसे रोक नहीं सकती।” रक्षा मंत्री ने यह बात द्रास सेक्टर स्थित कारगिल युद्ध स्मारक पर कही। इस दौरान उन्होंने कठुआ और बसंतसर में दो पुलों का भी उद्घाटन किया।

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‘तो कैसे, हमें मालूम है’

उझ नदी पर बना 1,000 मित्र लम्बा कठुआ का पुल बॉर्डर रोड आर्गेनाइजेशन (बीआरओ, BRO) के अब तक के इतिहास का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है। ₹50 करोड़ के इस पुल का लोकार्पण करते हुए राजनाथ ने, जोकि मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में गृह मंत्री का कार्यभार भी संभाल चुके हैं, देश को आश्वस्त किया कि “कश्मीर समस्या का हल जल्दी ही होने वाला है।” इस दौरान उन्होंने अपने गृह मंत्री होने के उस दौर को भी याद किया जब उनके नेतृत्व में पहुँचे सर्वदलीय डेलीगेशन से बात करने के लिए हुर्रियत नेताओं ने अपने घर के दरवाज़े तक नहीं खोले थे।

राजनाथ ने चेतावनी भी दी कि बातचीत ही उनकी सरकार के पास इकलौता विकल्प नहीं है। “अगर बातचीत से नहीं, तो कैसे, हमें मालूम है।” उन्होंने साथ ही जोड़ा, “इसका समाधान हो कर रहेगा। मैं जो बोलता हूँ, सोच-समझ कर बोलता हूँ। ऐसे नहीं बोलता हूँ।”

टेरर फंडिंग: कश्मीरी अखबार के संपादक से NIA की पूछताछ, जिहादी पत्रकारों को ISI से मदद मिलने का शक

कश्मीर घाटी में हिंसा की घटनाओं के लिए आतंकी फंडिंग केस की जाँच कर रही राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने मंगलवार (जुलाई 16, 2019) को कश्मीर के एक स्थानीय अखबार के संपादक से पूछताछ की। एनआईए ने एजेंसी के दिल्ली मुख्यालय में घाटी के अखबार ‘कश्मीर रीडर’ के संपादक मोहम्मद हयात भट को बुलाकर उनसे कई घंटों तक कड़ी पूछताछ की। इससे पूर्व एजेंसी ने पिछले हफ्ते हयात भट को समन जारी किया था। मूल रूप से पुलवामा के निवासी हयात भट से हुई पूछताछ में कई बड़ी जानकारियाँ एजेंसी के हाथ लगी हैं।

खबर के मुताबिक, हयात भट उर्फ हाजी हयात ने साल 2012 में ‘कश्मीर रीडर’ अखबार की शुरुआत की थी और इससे पूर्व वो हेल्पलाइन ऐडवर्टाइजिंग एजेंसी के नाम से एक फर्म चलाता था, जिसे किसी दूसरे देश से फंडिंग मिलती थी। श्रीनगर नगर निगम के एक अधिकारी के अनुसार, ऐडवर्टाइजिंग एजेंसी चलाने वाले भट को साल 2007 में 10 वर्षों के लिए सरकारी विज्ञापनों के लिए श्री नगर निगम की स्थापना का कॉन्ट्रैक्ट मिला था। उसे श्री नगर में लगभग 150 स्थानों के लिए एक मामूली राशि के लिए अनुबंध मिला था। बता दें कि जिस समय भट को यह कॉन्ट्रैक्ट मिला था, उस समय जम्मू-कश्मीर के सीएम पीडीपी के नेता मुफ्ती मोहम्मद सईद थे।

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी का दावा है कि भट के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से बेहद करीबी संबंध थे और उसने अपने अखबार में लिखने के लिए कई जिहादी पत्रकारों को भी नौकरी पर रखा हुआ है। उनमें से कुछ पत्रकार अब कथित रुप से कश्मीर के प्रेस क्लब के कार्यकारी सदस्य हैं। अधिकारियों के अनुसार, एजेंसी कश्मीर के एक संदिग्ध संगठन ‘कश्मीर एडिटर्स गिल्ड’ के संस्थापकों का भी पता लगाने में जुटी हुई है। एजेंसी के अधिकारियों को शक है कि इस संगठन का निर्माण आईएसआई द्वारा घाटी में कराया गया है और इसके कई सदस्य भी टेरर फंडिंग केस में शामिल हो सकते हैं।

जानकारी के अनुसार, एनआईए भारत सरकार के खिलाफ नफरत पैदा करने वाली सामग्री को लेकर कश्मीर के कई पत्रकारों से पूछताछ कर रही है। वहीं, कश्मीर एडिटर्स गिल्ड (KEG) के नव निर्वाचित निकाय ने टाइम्स ऑफ इंडिया के रिपोर्ट की निंदा करते हुए इसे आधारहीन बताया है। उन्होंने कहा है कि वे इस रिपोर्ट पर कानूनी कार्रवाई करेंगे।

गौरतलब है कि, कुछ दिनों पहले, एनआईए ने कश्मीरी अलगाववादी आसिया अंद्राबी की श्रीनगर स्थित घर को अटैच किया था। आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जाने के कारण यूएपीए के तहत यह कार्रवाई की गई थी। आसिया अंद्राबी के इस घर का इस्तेमाल आतंकी संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत की गतिविधियों के लिए किया गया था। अब आसिया अंद्राबी अपने इस घर को तब तक नहीं बेच सकती है, जब तक इस पूरे मामले की जाँच खत्म न हो जाए। कश्मीर घाटी में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने और युवाओं को भड़काने के कारण अलगाववादी नेता शब्बीर शाह, यासिन मलिक, आसिया अंद्राबी, पत्थरबाजों के पोस्टर बॉय मसरत आलम और हवाला एजेंट जहूर वटाली को पहले ही गिरफ़्तार किया जा चुका है।