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‘डर’ पर किसका ज़ोर होता है चिदंबरम साहब, ‘ये तो वो पैमाना है जो छलक ही जाता है’

भारत जैसे विशाल देश में लोकसभा चुनाव एक राजनीतिक उत्सव की तरह होता है। इसे देश की राजनीतिक पार्टी अपने-अपने अंदाज़ से मनाती हैं। कोई किसी पर आरोप मढ़ता है, तो कोई किसी को विलेन घोषित करता है। कोई गरीबों का मसीहा बनने का दावा करता है, तो कोई अपने चुनावी घोषणापत्र के ज़रिए गरीबों को पैसा बांटने का भ्रम फैलाता है।

कहीं तो ये उत्सव एक डर के रूप में भी सामने आता है। हाल ही में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के क़रीबियों के यहाँ आयकर विभाग द्वारा छापेमारी की गई। 50 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी के दौरान करोड़ों रुपए कैश के अलावे अहम दस्तावेज़ भी बरामद किए गए। आयकर विभाग की यह कार्रवाई टॉप सिक्रेट थी, इसकी जानकारी भोपाल पुलिस को भी नहीं थी। अब इस तरह की कार्रवाई का डर पी चिदंबरम को भी सता रहा है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, “मुझे जानकारी मिली है कि आईटी विभाग शिवगंगा और चेन्नई में मेरे आवास पर छापेमारी की योजना बना रही है, हम सर्च पार्टी का स्वागत करेंगे।”

भले ही पी चिदंबरम अपने इस ट्वीट के ज़रिए यह दिखाना चाहते हों कि उन्हें आयकर विभाग की छापेमारी से डर नहीं लगता, लेकिन सच्चाई तो यह है कि वो सीएम कमलनाथ के क़रीबियों के ठिकानों पर अचानक हुई छापेमारी से सहमे हुए हैं। वजह साफ़ है। उनके बेटे कार्ति चिदंबरम और उनकी पत्नी नलिनी चिदंबरम के कारनामे उन्हें कभी भी ले डूब सकते हैं। पी चिदंबरम को यह डर है कि कहीं एयरसेल-मैक्सिस डील में पिता-पुत्र के घोटाले उन्हें चुनावी दंगल में परास्त न कर दें।पिता-पुत्र ने यह घोटाला तब किया था जब यूपीए की सरकार में सीनियर चिदंबरम (पी चिदंबरम) वित्त मंत्री थे। उन्होंने पद पर रहते हुए ग़लत तरीक़े से विदेशी निवेश को मंज़ूरी दी थी।

जूनियर चिदंबरम (कार्ति चिदंबरम) ने अपने पिता के ज़रिए INX मीडिया को विदेशी निवेश की मंज़ूरी दिलाई थी, जिससे कंपनी को ₹305 करोड़ का विदेशी निवेश प्राप्त हुआ था। बेटे के ख़िलाफ़ मनी लॉड्रिंग केस तो चल ही रहा है, वो जेल भी जा चुका है। ऐसे में सीनियर चिदंबरम का डर तो लाज़मी ही है कि पता नहीं कब उनके भ्रष्टाचारों के ख़ुलासे में इज़ाफ़ा हो जाए।

पी चिदंबरम के डर की एक और वजह है जिसने निश्चित तौर पर उनका सुख-चैन हराम किया ही होगा। वो वजह है ख़ुद उनकी पत्नी नलिनी चिदंबरम, जिनके तार शारदा चिटफंड घोटाले से जुड़े हुए हैं। नलिनी के ख़िलाफ़ CBI ने चार्जशीट दाखिल की थी जिसमें यह कहा गया था कि शारदा चिटफंड घोटाले में उन्होंने साल 2010 से 2012 के बीच ₹1.4 करोड़ लिए थे। इसके अलावा नलिनी चिदंबरम के ख़िलाफ शारदा कंपनियों के समूह के प्रॉपराइटर सुदीप्तो सेन के साथ मिलकर आपराधिक साज़िश रचने, ठगी और रुपयों के गबन के आरोप भी लगाए गए थे। इस ख़ुलासे के बाद सीनियर चिदंबरम का सकते में आना तो बनता ही है, क्योंकि शारदा चिटफंट घोटाले में उनकी पत्नी शामिल हैं, ये बात जगज़ाहिर हो चुकी है। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि पी चिदंबरम पहले से ही अपने परिवार के कारनामों का दंश झेल रहे हैं और उस पर आयकर विभाग के छापे का डर उन्हें जीने नहीं दे रहा है।

पी चिदंबरम ट्विटर पर अपने असली दर्द को तो शेयर नहीं कर सकते क्योंकि वो उनके बस की बात नहीं, लेकिन ‘आईटी की छापेमारी का स्वागत’ करने वाली उनकी लाइन बहुत कुछ बयाँ करती है, जिसे पढ़ने वाले उनके असली दर्द को आसानी से समझ सकते हैं।

भले ही इस चुनावी मौसम में देश की जनता को अपने खेमे में लाने की क़वायद अपने चरम पर होती है, लेकिन, ये जो पब्लिक है, वो सब जानती है। ऐसा इसलिए क्योंकि ऐसे कई मौक़े आते हैं जब वो खुलकर बोलती भी है, जैसे हाल ही में तमिलनाडु के मदुरै में महिलाओं ने कार्ति चिदंबरम के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया था। इसकी वजह थी कथित तौर पर कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने कार्ति के आगमन पर ‘आरती की व्यवस्था’ की थी। इसके लिए 25 महिलाओं को बुलाया गया था और उन्हें ₹500 (प्रत्येक को) देने का वादा भी किया गया था। लेकिन महिलाओं को तय राशि देने की बजाए केवल ₹800 थमाए गए और कहा गया कि आपस में बाँट लो। इस पर एक महिला ने कार्ति द्वारा ₹6000 देने की बात पर कहा कि जो वादा किए हुए ₹500 नहीं दे सकते वो ₹6000 क्या देंगे।

डर के साए में जीते पी चिदंबरम इस समय हताशा और निराशा की कगार पर हैं, तभी वो अक्सर ऐसा कुछ कह देते हैं जिससे उनकी यह दशा खुलकर सामने आ जाती है। हाल ही में एक आर्टिकल में उन्होंने बीजेपी की ख़िलाफ़त करते हुए वर्तमान शासन व्यवस्था को सर्कस का नाम दिया था। अपने इस तरह के कारनामों से चिदंबरम अपना ख़ुद का दर्द हल्का करने का काम करते हैं, जिससे उनका ध्यान अपने बेटे और पत्नी के धोखााधड़ी मामलों से भटका रहे।

साले को PM बनाने के लिए ‘जीजाजी’ करेंगे चुनाव प्रचार, स्मृति ईरानी ने कहा अपनी जमीन बचाओ

प्रियंका गाँधी के सियासी मैदान में उतरने के बाद अब उनके पति रॉबर्ट वाड्रा कॉन्ग्रेस के लिए प्रचार अभियान में जोर लगाने वाले हैं। वाड्रा ने कहा है कि यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गाँधी और कॉन्ग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गाँधी के नामांकन पत्र भरने के बाद वह पूरे भारत में कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए प्रचार करेंगे।

रॉबर्ट वाड्रा ने रविवार (अप्रैल 7, 2019) को कहा कि वह अमेठी और रायबरेली में राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी के नामांकन भरते समय उनके साथ मौजूद रहेंगे। वह इन दोनों नेताओं के लोकसभा क्षेत्रों में जाकर चुनाव प्रचार भी करेंगे। राहुल गाँधी 10 अप्रैल को अमेठी में तो सोनिया गाँधी 11 अप्रैल को रायबरेली लोकसभा सीट से नामांकन पत्र दाखिल करेंगी।

कॉन्ग्रेस के लिए रॉबर्ट वाड्रा के चुनाव प्रचार में शामिल होने की खबर पर केंद्रीय वित्त मंत्री और वरिष्‍ठ भाजपा नेता अरुण जेटली ने कहा, “मुझे नहीं पता यह कॉन्ग्रेस के चुनाव प्रचार के लिए फायदेमंद होगा या फिर भाजपा के चुनाव प्रचार के लिए।”

वहीं, अरुण जेटली के अलावा केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने भी रॉबर्ट वाड्रा के इस ऐलान पर चुटकी ली है। स्मृति ईरानी ने वाड्रा के इस बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा, “मैं इतना ही कहना चाहूँगी कि जहाँ-जहाँ रॉबर्ट वाड्रा प्रचार करने जाना चाहते हैं, वहाँ की जनता आगाह हो जाए और अपनी जमीनें बचा ले।”

गौरतलब है कि, मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसे रॉबर्ट वाड्रा को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 1 अप्रैल, 2019 को ₹5 लाख के निजी मुचलके पर अग्रिम जमानत दे दी थी। वाड्रा के खिलाफ विदेश में आय से अधिक संपत्ति को लेकर जाँच चल रही है। रॉबर्ट वाड्रा ने कुछ दिनों पहले संकेत दिए थे कि अगर उनके ऊपर लगे आरोप खत्‍म हो जाएँगे तो वह राजनीति में आ सकते हैं।

पुणे: बच्चों ने कहा बच्चों जैसी बातें करते हैं राहुल गाँधी, पहले से तैयार होती है स्क्रिप्ट

हाल ही में राहुल गाँधी ने पुणे पहुँचकर भारतीय विद्यापीठ के छात्रों से मुलाकात की थी। जिसे कॉन्ग्रेस पार्टी के करीबी कदम परिवार द्वारा संचालित किया जाता है। इस मुलाकात के बाद इंडिया टुडे की टीम वहाँ पर बच्चों की राय जानने पहुँची तो सत्र की हकीकत का खुलासा हुआ।

यहाँ छात्रों से बातचीत के दौरान एक लड़के ने अपनी बुलंद आवाज़ में पूरे सत्र की हकीकत को बयान किया। छात्र ने बताया कि राहुल गाँधी की बातचीत में सब कुछ पहले से लिखी हुई स्क्रिप्ट की तरह था। बच्चों को वहाँ अपने अनुसार सवाल पूछने तक के लिए मना किया गया था। साथ ही राहुल को पहले से पता था कि उनसे क्या पूछा जाने वाला है।

वहीं दूसरे लड़के ने बताया कि राहुल से पूछे गए सवालों में और उनके द्वारा दिए जा रहे जवाबों में कोई तालमेल नहीं बैठ रहा था। छात्र का कहना था कि राहुल जिस मंच पर थे वो कोई ऐसा मंच नहीं था जहाँ पर भावुक होकर किसी की बचपन की यादें गिनाई जाएँ। छात्र ने कहा, “हम यहाँ पर अपने सवालों का सही जवाब लेने आए थे। हमें उनसे परिपक्व और सटीक जवाबों की उम्मीद थी।”

राहुल के जवाबों से निराश हो चुके बच्चों ने प्रधानमंत्री की ‘परीक्षा पे चर्चा’ पर भी जिक्र किया। दोनों राजनेताओं की तुलना करते हुए वहाँ मौजूद एक लड़के ने बताया कि मोदी की छात्रों से हुई बातचीत प्रासंगिक/ उचित और करियर आधारित थी। जबकि राहुल की बातचीत सिर्फ़ चुनाव संबंधित थी। बच्चों ने राहुल के साथ हुए इस सत्र को जरूरी बताया। उनका कहना था कि सबकी बातें सुनकर वो अब तय कर सकते हैं कि उन्हें किसके लिए वोट करना है। इसके अलावा एक बच्चे ने इस सत्र के बारे में बताया कि यहाँ सिर्फ़ 5-6 बच्चों को राहुल से सवाल पूछने का मौक़ा मिला।

बता दें कि कुछ दिन पहले पुणे में हुई बच्चों से इस बातचीत का एक वीडियो इंटरनेट पर खूब वायरल हुआ था। जिसमें राहुल गाँधी बच्चों को बताने की कोशिश कर रहे थे कि वो नरेंद्र मोदी से बहुत प्यार करते हैं लेकिन मोदी उनसे नफरत करते हैं। यहाँ ऐसी बात कहने के बाद राहुल उम्मीद लगाए बैठे थे कि उनके समर्थन में बच्चे नारे लगाएँगे या तालियों की गड़गड़ाहट से सभाकार गूँज उठेगा। लेकिन वहाँ राहुल का फेंका पासा उन्हीं पर महंगा पड़ गया। राहुल की बात खत्म होते ही कुछ बच्चे मोदी-मोदी के नारे लगाने लगे।

वरुण गाँधी: ‘मेरे परिवार से भी कई PM हुए, लेकिन मोदी जैसा कोई नहीं हुआ, वो जिएगा तो देश के लिए, मरेगा तो देश के लिए’

लोकसभा चुनाव को लेकर गरमाई सियासत के बीच भारतीय जनता पार्टी के युवा सांसद वरुण गाँधी ने कल रात (अप्रैल 7, 2019) प्रचार अभियान के दौरान एक बड़ी बात कह दी। वरुण गाँधी ने 10 जनपथ वाले गाँधी परिवार पर हमला करते हुए कहा कि उनके परिवार से भी कई प्रधानमंत्री हुए हैं, लेकिन देश को वास्तविक सम्मान पीएम नरेंद्र मोदी ने दिलाया है। जो सम्मान नरेंद्र मोदी ने देश को दिलाया है, वो बहुत लंबे समय तक किसी ने नहीं दिलाया।

सुल्तानपुर से सांसद और पीलीभीत से भाजपा के उम्मीदवार वरुण गाँधी ने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि वो आदमी केवल देश के लिए जी रहा है और वो मरेगा भी देश के लिए, उसको केवल देश की चिंता है। भाजपा सांसद ने कहा कि जो काम पीएम मोदी ने 5 साल में किया है, वह अगले पायदान पर जाकर देश के मान सम्मान को और बढ़ाएँ। देश को पूरी दुनिया में आगे ले जाएँ। लंबे अरसे बाद देश को एक ऐसा प्रधानमंत्री मिला है, जिसके बारे में छाती चौड़ी करके बोल सकते हैं कि हमारे पास ऐसा प्रधानमंत्री है। केंद्र सरकार ने किसानों के लिए काफी काम किया है, राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी काम किया है। विपक्षी पार्टियों के द्वारा राजनीति के स्तर को गिराया जा रहा है।

इस दौरान वरुण गाँधी ने जनता से नरेंद्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने के लिए भाजपा को जिताने का संकल्प लेने की बात कही। इसके साथ ही उन्होंने मुस्लिम और एससी-एसटी मतदाताओं से भी भाजपा को वोट देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जनता के प्यार से ही वह पीलीभीत से 2009 में पहली बार सांसद बन कर दिल्ली पहुँचे थे और अब वो फिर से उनके बीच उनका प्यार पाने के लिए आए हैं।

गौरतलब है कि वरुण गाँधी अभी सुल्तानपुर से सांसद हैं। इस बार पार्टी ने उन्हें पीलीभीत से उम्मीदवार बनाया है और पीलीभीत की सांसद और वरुण की माँ मेनका गाँधी को इस बार सुल्तानपुर से टिकट दिया गया है।

J&K: मीरवाइज़ की निकली हेकड़ी, NIA की पूछताछ के लिए पहुँचेंगे दिल्ली

बीते दिनों NIA के नोटिस की अवहेलना करने के बाद कश्मीर के अलगाववादी नेता मीरवाइज़ उमर फारूक़ ने टेरर फंडिंग मामले में पूछताछ में जवाब देने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी के समक्ष दिल्ली में पेश होने के लिए निकल पड़े हैं। इसकी जानकारी हुर्रियत गुट के एक प्रवक्ता ने दी है।

गौरतलब है एजेंसी ने हाल ही में मीरवाइज को तीसरा नोटिस भेजकर 8 अप्रैल को दिल्ली में NIA के समक्ष पेश होने को कहा था। जिसपर मीरवाइज के नेतृत्व वाले हुर्रियत गुट के एक प्रवक्ता ने बतया कि मीरवाइज पूछताछ के लिए दिल्ली आने को तैयार हो गए हैं। इस दौरान उनके साथ अब्दुल गनी भट, मसरूर अंसारी, बिलाल गनी लोन समेत हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के सदस्य उनके साथ होंगे। एएनआई ने भी ट्वीट करके इस बात की जानकारी दी है कि मीरवाइज़ श्रीनगर से दिल्ली आने के लिए रवाना हो चुके है।

यहाँ बता दें कि इस नोटिस से पूर्व भी एजेंसी उन्हें दो नोटिस जारी कर चुकी थी लेकिन मीरवाइज ने दिल्ली का दौरा करने में अपनी सुरक्षा संबंधी चिंता को जाहिर किया था। साथ ही श्रीनगर में पूछताछ करने की बात कही थी। अनेक प्रयासों के बाद भी एजेंसी ने वहाँ पूछताछ करने की माँग को खारिज़ कर दिया। एजेंसी ने मीरवाइज की चिंता का ख्याल रखते हुए उन्हें आश्वासन भी दिया कि वह (एजेंसी) उनकी सुरक्षा का ध्यान रखेगी।

इससे पहले एनआईए द्वारा अलगावादी नेताओं को समन करने के बाद से श्रीनगर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। अलगाववादियों ने सड़क पर जमकर उत्पात मचाया था।

जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने मीरवाइज़ को नोटिस देने को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। महबूबा ने कहा था कि मीरवाइज़ एक साधारण अलगाववादी नेता नहीं हैं बल्कि वे ‘काश’ मुस्लिमों के मज़हबी मुखिया भी हैं। महबूबा ने एक ट्वीट में लिखा था कि एनआईए का समन हमारी धार्मिक पहचान पर भारत सरकार द्वारा बार-बार किए जा रहे चोट का प्रमाण है। उन्होंने कहा था कि सरकार वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए मीरवाइज़ को बलि का बकरा बना रही है।

बेंगलुरु: यज्ञ में बाधा उत्पन्न करने पहुँचे कॉन्ग्रेसी, लोगों ने कहा ये राक्षस हैं

आए दिन कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं का नया उत्पात देखने को मिलता है। इसी कड़ी में बेंगलुरु के पूर्ण प्रज्ञा विद्यापीठ में विष्णु सहस्रनाम यज्ञ चल रहा था, लोग विष्णु सहस्रनाम का जाप कर रहे थे। इसी बीच वहाँ पर कॉन्ग्रेस के कुछ गुंडे आए और उन्होंने लोगों को पीटना शुरू कर दिया, मोदी के विरोध में नारे लगाए और साथ ही राहुल गाँधी जिंदाबाद के नारे भी लगाए जिसके बाद वहाँ पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया, लोगों के बीच दहशत फैल गई। ये बहुत ही दुर्भाग्य की बात है कि कॉन्ग्रेस की गुंडागर्दी अब धार्मिक स्थलों पर भी दिखने लगी है।

इस घटना की प्रत्यक्षदर्शी रहीं लेखिका सहाना सिंह ने इस बारे में ट्वीट करते हुए लिखा कि कल शाम (अप्रैल 7, 2019) को बेंगलुरु के पूर्ण प्रज्ञा विद्यापीठ में धार्मिक विद्वानों, संगीतकारों और लेखकों का जमावड़ा था। मगर वहाँ का माहौल उस समय काफी भयानक परिदृश्य में तब्दील हो गया, जब कॉन्ग्रेस के कुछ गुंडों ने वहाँ पहुचकर मोदी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विद्यापीठ में उपस्थित लोगों के ऊपर हमला करना शुरू कर दिया। जो कि पूरी तरह से गुंडागर्दी थी।

अपने एक और ट्वीट में लेखिका लिखती है कि उनकी माँ और बहन सुबह विद्यापीठ से लौटीं। वहाँ से आकर वो अध्यात्मिक रूप से काफी उर्जावान महसूस कर रहीं थी। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि कल शाम उस विद्यापीठ में क्या होने वाला था। एक व्यक्ति ने ट्वीट में लिखा कि जिन लोगों ने यज्ञ में बाधा डालने की कोशिश की वे राक्षस हैं और भगवान राम हमारी रक्षा करें।

चुनावी माहौल के बीच कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी मंदिरों में जाकर पूजा करते नज़र आते हैं, वो दिखाते हैं कि उन्हें और उनकी पार्टी की भगवान में काफी आस्था है और इस बात को लेकर वो वोट बटोरने की भी कोशिश करते नज़र आ रहे हैं, लेकिन उनके कार्यकर्ताओं ने धार्मिक स्थल पर जाकर जिस तरह का उत्पात मचाया है, उससे तो ऐसा कतई नहीं लग रहा है।


SpiceJet का विमान 18 घंटे लेट: भूखे प्यासे यात्री हलकान, क्रू ने छुड़ाई जिम्मेदारियों से अपनी जान

स्पाइसजेट की कोलकाता से पटना आने वाली फ्लाइट SG377 शनिवार की रात मौसम खराब होने के कारण वाराणसी की ओर डायवर्ट कर दी गई। हालाँकि मौसम 2 घंटे बाद ठीक हो गया लेकिन पायलट की ड्यूटी पूरी हो जाने के कारण शाम 7:25 पर फ्लाइट पर सवार पैसेंजर्स को सुबह तक वाराणसी एयरपोर्ट पर विमान के भीतर ही बैठे रहना पड़ा जिसके कारण उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा।

रविवार (अप्रैल 7, 2019) की सुबह दूसरे पायलट की व्यवस्था करके फ्लाइट में सवार पैसेंजर्स को पटना एयरपोर्ट पर पहुँचाया गया। इस दौरान फ्लाइट में 72 लोग सवार थे। प्रभात खबर में छपी रिपोर्ट के अनुसार पटना पहुँचने के बाद उनमें से कई यात्रियों ने एयरलाइन के कर्मियों के व्यवहार को काफ़ी निराश करने वाला बताया।

दरअसल, वाराणसी एयरपोर्ट पर फ्लाइट खड़े रहने के दौरान पैसेंजर्स को न तो कोई फूड पैकेट दिया गया और न ही चाय कॉफी के लिए पूछा गया। यात्रियों की माने तो इस दौरान फ्लाइट का एसी भी खराब हो गया था। जब घुटन से वहाँ यात्रियों की हालत बिगड़ने लगी, तो काफ़ी हंगामे के बाद सुबह 8 बजे उन्हें चाय-कॉफी और स्नैक्स दिया गया।

रिपोर्ट की माने तो स्पाइस जेट एयरलाइन कर्मियों के रूखे व्यवहार के कारण यात्रियों ने मामले की शिकायत DGCA उच्च अधिकारियों से करने का मन बना लिया है। जिसके लिए 72 में से 50 यात्रियों ने एक आवेदन भी तैयार किया गया है जिसमें उन्होंने अपना नाम, फोन नंबर, और हस्ताक्षर भी किया।

यहाँ बता दें स्पाइसजेट की इस फ्लाइट ने कोलकाता से पहले की 6 घंटे की देरी पर उड़ान भरी थी। फ्लाइट का डिपार्चर टाइम पहले 6:15 PM था, जिसे बढ़ाकर पहले 7:25 PM कर दिया गया, फिर इसका समय रात के 10 और फिर 11 बजे किया गया। आखिर में रात 12 बजे यह फ्लाइट कोलकाता से रवाना हुई। लेकिन 1 बजे जब यह फ्लाइट पटना पहुँची तो लैंडिंग के लिए मौसम सही नहीं था।

एयरपोर्ट पर लैंडिंग के पहले प्रयास में असफलता के बाद बहुत देर तक विमान आसमान के ही चक्कर लगाता रहा। इसके बाद रनवे न दिखने के कारण दूसरे प्रयास में भी फ्लाइट की लैंडिंग मुमकिन नहीं हो पाई। विमान में ईंधन खत्म हो जाने के डर से उसे वाराणसी एयरपोर्ट डायवर्ट किया गया था। यहाँ पर विमान की लैंडिंग रात के 2 बजे हुई। वाराणसी एयरपोर्ट पर यात्रियों को भूखे प्यासे परेशानियों का सामना करना पड़ा। अगले दिन आखिरकार यात्रियों के दबाव पर सुबह 10:45 में उसी विमान को फ्लाइट संख्या SG9377 बना कर पटना लाया गया और दोपहर 12 बजे पटना एयरपोर्ट पर पहुंचकर यात्रियों ने राहत की सांस ली।

अफ्रीका का वो शख़्स जिसने 10 मिलियन डॉलर बैंक से निकलवाए, मक़सद था केवल उन्हें देखना

अफ्रीका के सबसे धनी व्यक्ति के रूप में पहचाने जाने वाले नाइजीरियाई अरबपति अलिको डांगोटे ने शनिवार को आइवरी कोस्ट में एक मंच से कहा कि कैसे उन्होंने एक बार बैंक से 10 मिलियन डॉलर कैश निकाले थे, जिसका मक़सद केवल इतना था कि आख़िर इतना सारा पैसा देखने में कैसा लगता है।

उन्होंने एबिडान में मो इब्राहिम फोरम को बताया कि जब आप युवा होते हैं तो आपका पहला मिलियन महत्वपूर्ण होता है, लेकिन उसके बाद पैसों को लेकर धीरे-धीरे यह आकर्षण कम हो जाता है।

डांगोट ने अपने दर्शकों को बताया, “एक दिन, मैंने 10 मिलियन कैश निकाला, उस कैश को अपनी कार में डाल दिया, मैंने उसे अपने कमरे में रख दिया। मैंने उन्हें देखा और सोचा, ‘अब मुझे विश्वास हो गया है कि मेरे पास पैसा है’ और फिर अगले दिन उसे बैंक ले गया।”

डांगोट ने कहा कि अफ्रीका के भविष्य के लिए सबसे आशाजनक क्षेत्र कृषि और नई तकनीकें थीं। लेकिन उन्होंने युवा अफ्रीकी उद्यमियों को सलाह दी कि वे कामयाबी की पहली सीढ़ी चढ़ने से कभी दूर न जाएँ।

उन्होंने चेतावनी दी “अक्सर अफ्रीका में हम अपनी अनुमानित आय खर्च करते हैं। व्यापार में उतार-चढ़ाव हैं।” डांगोट ने पूरे महाद्वीप में व्यापारिक विकास में बाधा डालने वाले रीति-रिवाजों और प्रशासनिक समस्याओं पर खेद व्यक्त किया।

बता दें कि फोर्ब्स की अफ्रीकी अरबपतियों की सूची (2013) में टॉप पर अलिको डांगोटे थे, जिनकी संपत्ति 20.8 अरब डॉलर (13 खरब) थी और वह उप-सहारा अफ्रीका के सबसे बड़े सीमेंट निर्माता हैं। सीमेंट का बिजनेस करने वाले डांगोट ने बताया कि उन्हें अनेकों बार तरह-तरह की कठिनाईयों का सामना भी करना पड़ा है।

6000 या 72 हजार… सब भूल जाइए क्योंकि अब हर परिवार को मिलेगा 2 लाख रुपए वो भी हर साल!

लोकसभा चुनाव के नजदीक आते ही सभा पार्टियाँ आम जनता को लुभाने में लग गई हैं। कॉन्ग्रेस ने सत्ता में आने के बाद गरीबों को साल में ₹72,000 देने की बात कही थी। अब इसी कड़ी में आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ पार्टी तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) का भी नाम जुड़ गया है। टीडीपी ने आम चुनावों के लिए शनिवार (अप्रैल 6, 2019) को अपना घोषणापत्र जारी करते हुए प्रत्येक परिवार को हर साल ₹2 लाख देने का वादा किया है।

टीडीपी अध्यक्ष एवं आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने पार्टी का घोषणापत्र जारी करते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने जहाँ हर गरीब परिवार को ₹72,000 सालाना देने का वादा किया है, वहीं अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो हर साल प्रत्येक परिवार को ₹2 लाख दिए जाएँगे। इसके साथ ही टीडीपी ने 12वीं पास कर चुके छात्रों को बेरोजगारी भत्‍ता देने की बात कही है। इतना ही नहीं, पार्टी ने राज्‍य के सभी शहरों में इनोवेशन हब स्‍थापित करने की भी घोषणा की है।

उन्होंने कहा कि कोई कल्पना में भी हमारी इस उदारता के साथ मेल खाने के बारे में नहीं सोच सकता है। टीडीपी ने केंद्र की किसान सम्मान योजना को राज्य के मेल खाते अनुदान के साथ जारी रखने का वादा किया है। इस योजना के तहत प्रत्येक किसान को सालाना ₹15,000 का फायदा मिलेगा। मुख्य विपक्षी पार्टी वाईएसआर कॉन्ग्रेस ने भी टीडीपी के घोषणापत्र जारी करने के कुछ घंटों बाद अपना घोषणापत्र जारी किया। पार्टी के घोषणा पत्र में हर किसान परिवार को लागत के लिए पचास हजार रुपए देने का आश्वासन दिया गया है। इसके साथ-साथ घर के लिए सस्ता और अतिरिक्त लोन देने की भी बात कही गई है।

आंध्र प्रदेश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ-साथ होने हैं। राज्य में 11 अप्रैल को पहले चरण में मतदान होगा। राज्‍य के मुख्‍यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने पिछले दिनों यह भी ऐलान किया था कि यदि टीडीपी वापस राज्‍य की सत्‍ता में आती है तो वह एक मुस्लिम को अपना उपमुख्‍यमंत्री बनाएँगे। इतना ही नहीं, नायडू ने समुदाय विशेष के लिए इस्‍लामिक बैंक खोलने की भी घोषणा की है।

32 चुनाव हारने के बाद भी 84 वर्षीय श्याम बाबू का जज़्बा बरक़रार, फिर से लड़ेंगे चुनाव

ओडिशा के बेरहामपुर से श्याम बाबू सुबुद्धि ने 1962 से एक निर्दलीय के रूप में लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा चुनाव लड़ा। अपनी इस चुनावी लड़ाई में उन्हें 32 बार हार का सामना करना पड़ा। बावजूद इसके वो फिर से आगामी लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे हुए हैं।

समाचार एजेंसी ANI को उन्होंने बताया, “मैंने पहली बार 1962 में चुनाव लड़ा और लोकसभा और ओडिशा विधानसभा चुनावों सहित विभिन्न चुनाव लड़े। मुझे विभिन्न राजनीतिक दलों से प्रस्ताव मिले हैं, लेकिन मैंने हमेशा एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा।”

ख़बर के अनुसार, इस साल उन्होंने अस्का और बेरहामपुर लोकसभा सीटों से अपना नामांकन दाखिल किया। एक प्रमाणित होमियोपैथ, श्री सुबुद्धि कहते हैं कि वह राज्य में तीन खाली राज्यसभा सीटों पर भी चुनाव लड़ेंगे, जिसके लिए चुनाव 11 जून को होंगे। इससे पहले, उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक के ख़िलाफ़ भी चुनाव लड़ा था। उन्होंने कहा, “मैं ट्रेनों, बसों और बाजारों में अपने दम पर प्रचार करता हूँ। इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि मैं जीतता हूँ या हारता हूँ। मुझे लड़ाई जारी रखनी है।”

उन्होंने कहा, “इस बार मेरा चुनाव चिन्ह एक बल्ला है और उस पर पीएम उम्मीदवार लिखा है।” श्री सुबुद्धि का कहना है कि वह राज्य की राजनीति से नाखुश हैं और मतदाताओं को लुभाने के लिए कथित तौर पर पैसे के इस्तेमाल पर भी दुखी हैं। उन्होंने कहा, “मैंने भ्रष्टाचार के ख़िfलाफ़ लड़ाई जारी रखी है।”

ओडिशा में विधानसभा चुनाव 11, 18, 23 और 29 अप्रैल को चार चरणों में लोकसभा चुनाव के साथ होंगे। 23 मई को परिणाम घोषित किए जाएँगे।