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17 घंटों में ही पलट गए पवन सिंह: वंदन-चंदन-अभिनंदन से किया था धन्यवाद… अब कह रहे आसनसोल से नहीं लड़ पाऊँगा

भोजपुरी फिल्मों के सुपर स्टार पवन सिंह ने आसनसोल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने ने मना कर दिया है। उन्हें बीजेपी ने आसनसोल लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा था। आसनसोल में उनका सामना टीएमसी के शत्रुघ्न सिन्हा से होने की उम्मीद लगाई जा रही थी, लेकिन पवन सिंह ने आसनसोल से लोकसभा चुनाव लड़ने से ही मना कर दिया है।

पवन सिंह ने चुनाव लड़ने से मना करते हुए एक्स पर लिखा, “भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को दिल से आभार प्रकट करता हूँ। पार्टी ने मुझ पर विश्वास करके आसनसोल का उम्मीदवार घोषित किया, लेकिन किसी कारणवश मैं आसनसोल से चुनाव नहीं लड़ पाऊँगा…”

खास बात ये है कि बीजेपी ने जब 195 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी और पवन सिंह की उम्मीदवारी की घोषणा की थी, तब पवन सिंह ने जोरदार तरीके से पार्टी को धन्यवाद कहा था और पार्टी का वंदन-चंदन-अभिनंदन करने वाला ट्वीट भी किया था, लेकिन महज 17 घंटों के अंदर ही उन्होंने चुनाव मैदान से हटने की घोषणा कर दी है।

जेपी नड्डा ने दिल्ली बुलाया

इस बीच, एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्‍यक्ष जेपी नड्डा ने पवन सिंह को बातचीत करने के लिए दिल्ली बुलाया है। बीजेपी ने पवन सिंह को पश्चिम बंगाल के आसनसोल से मैदान में उतारा था। आसनसोल से वर्तमान में तृणमूल कॉन्ग्रेस के शत्रुघ्न सिन्हा सांसद हैं। ऐसे में यहाँ दो कलाकारों के बीच मुकाबला होने की उम्मीद थी, लेकिन पवन सिंह के चुनाव मैदान से हटने की घोषणा से बीजेपी को अब दूसरे उम्मीदवार के नाम पर विचार करना होगा।

अपने ही पुराने गानों की वजह से फजीहत?

पवन सिंह को भोजपुरी फिल्मों का सुपरस्टार माना जाता है। उनकी बड़ी फैन फॉलोविंग है। माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल की महिलाओं के ऊपर गाए गए उनके पुराने गानों की वजह से उन्हें टीएमसी निशाना बनाने लगी थी। ऐसे में पवन सिंह ने मैदान से हटने में ही भलाई समझी। टीएमसी नेता और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने भी इस ओर इशारा किया था। पार्टी के राज्य सभा सांसद साकेत गोखले ने पवन सिंह के पीछे हटने पर बीजेपी को निशाने पर लिया।

अभिषेक बनर्जी ने पवन सिंह के चुनाव नहीं लड़ने के ऐलान पर कहा है कि यह पश्चिम बंगाल के लोगों की अदम्य भावना और शक्ति की जीत है। बता दें कि टीएमसी ने पवन सिंह पुराने गानों में बंगाल की महिलाओं के चित्रण पर सवाल खड़े किए थे। कुछ ही घंटों में यह विवाद काफी बढ़ गया था। टीएमसी ने इस बंगाल की महिला सम्मान से जोड़ दिया था। ऐसे में उन्होंने मैदान से ही हटने में भलाई समझी।

बता दें कि साल 2014 और 2019 में बीजेपी के टिकट पर बाबुल सुप्रियो ने यहाँ से चुनाव जीते थे। उन्होंने साल 2021 में बीजेपी को छोड़ दिया था। इसके बाद इस सीट पर टीएमसी की ओर से बॉलीवुड एक्टर शत्रुघ्न सिन्हा ने उपचुनाव जीता था। सिन्हा पहले बीजेपी में थे, और कई बार सांसद रहे थे। हालाँकि वो बिहार की पटना-साहिब सीट से चुनाव लड़ते थे।

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राजस्थान में देवेंद्र झाझरिया को चुरू से बीजेपी ने बनाया उम्मीदवार, दुनिया भर में परचम लहराने वाले चैंपियन के बारे में जानिए सब कुछ

बीजेपी ने लोकसभा चुनाव के लिए 195 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की है, उसमें राजस्थान के चुरू लोकसभा सीट से देवेंद्र झाझरिया का भी नाम है। देवेंद्र झाझरिया बेहद जीवट रखने वाले व्यक्ति हैं। वो पैरालंपिक खेलों में हिंदुस्तान के सबसे सफल खिलाड़ी भी हैं। उन्होंने 2 पैरालंपिक गोल्ड मेडल, एक सिल्वर मेडल और एक कांस्य पदक जीता है। बचपन में महज 8 साल की उम्र में ही अपना हाथ गवाँ देने वाले देवेंद्र झाझरिया भाला फेंक के खिलाड़ी हैं। एथेंस पैरा ओलम्पिक में स्वर्ण पदक, इंचियोन दक्षिण कोरिया पैरा एशियन गेम्स में रजत और चीन के ग्वाऊ च्युयानलिंग में कांस्य पदक जीतकर विश्वभर में भारत का नाम रौशन किया।

जिंदगी की मुश्किल चुनौतियों का हंसकर सामना करने वाले 42 साल के झाझरिया थार रेगिस्तान के प्रवेश द्वार के तौर पर जाने जाने वाले चुरू से अपनी राजनीति पारी का भी आगाज कर रहे हैं। राजस्थान के इस क्षेत्र को गर्मी और सर्दी के मौसम में अपने रिकॉर्ड तापमान के लिए भी जाना जाता है। बचपन में त्रासदी झेलने वाले झाझरिया ने सफलता की सीढ़ी चढ़ने के लिए काफी संघर्ष किया। अब उन्हें चुरु की उस लोकसभा सीट से टिकट दिया गया है, जहाँ बीजेपी साल 1999 से लगातार जीतती रही है।

पद्म श्री, पद्म भूषण और मेजर ध्यानचंद खेल रत्न से सम्मानित

देवेंद्र झाझरिया इस चुनाव में सबसे डेकोरेटेड खिलाड़ी हैं, जिन्हें चुनाव मैदान में उतारा गया है। उन्हें साल 2012 में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, जिन्हें पहले पैरा-एथलीट के रूप में यह उपलब्धि हासिल हुई थी। 2017 में मेजर ध्यानचंद खेल रत्न और 2022 में पद्म भूषण से भी उन्होंने भारत के सर्वोच्च खेल सम्मानों को प्राप्त किया। उन्हें साल 2004 में अर्जुन अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। खास बात ये है कि एफ46 भाला फेंक 2008 और 2012 पैरालंपिक का हिस्सा नहीं था, वर्ना उनके पदकों की संख्या और भी ज्यादा होती।

देवेंद्र झाझरिया की पत्नी भी खिलाड़ी

देवेंद्र झाझरिया की पत्नी का नाम मंजू है। वो राष्ट्रीय स्तर की कबड्डी खिलाड़ी रह चुकी हैं। वो हर कदम पर अपने पति का साथ देती हैं। वहीं, देवेंद्र झाझरिया के पिता की कैंसर से मृत्यु हो गई थी। साल 2020 में नेशनल गेम्स के दौरान वो पदक जीतने के बाद अपने पिता की याद में रो पड़े थे।

चुरू लोकसभा सीट का इतिहास

चुरू को बीजेपी की सबसे सुरक्षित सीटों में से एक माना जाता है। बीजेपी के लिए साल 1991 में पहली बार राम सिंह कासवान ने ये सीट जीती थी, इसके बाद दो चुनाव में कॉन्ग्रेस को जीत मिली, लेकिन 1999 में राम सिंह कासवान ने ये सीट फिर से जीत ली और इसके बाद उन्होंने 2004 और 2009 में भी जीत दर्ज की। साल 2014 और 2019 में राहुल कासवान ने ये सीट बीजेपी के कब्जे में रखी। राहुल कासवान राम सिंह कासवान के ही बेटे हैं। पिता-पुत्र की इस जोड़ी की विरासत को संभालने की जिम्मेदारी अब देवेंद्र झाझरिया के पास है।

बीजेपी की 25 सीटों में से 15 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा

बीजेपी ने 25 लोकसभा सीटों वाले राजस्थान के लिए 15 उम्मीदवारों की घोषणा की गई है। पहली लिस्ट के अनुसार, राजस्थान में पांच लोकसभा सांसदों के टिकट इस बारे काटे गए हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला जहां कोटा से चुनाव लड़ेंगे, वहीं बीजेपी ने हाल ही में कांग्रेस छोड़कर पार्टी में शामिल हुए दो नेताओं को भी टिकट दिया है। बता दें कि साल 2014 में भाजपा ने राजस्थान की सभी 25 सीटों पर जीत हासिल की थी। साल 2019 में बीजेपी ने गठबंधन के तहत नागौर सीट राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के हनुमान बेनीवाल के लिए छोड़ दी थी, जहाँ बेनीवाल ने जीत हासिल की, वहीं, BJP ने बाकी 24 सीटें जीती थी। इस तरह से राजस्थान में एनडीए ने क्लीनस्वीप किया था।

सीएम सुक्खू एक नंबर के झूठे: कॉन्ग्रेस के बागी विधायक बोले- पार्टी के 9 MLA उनके संपर्क में, स्थिर सरकार की बात झूठ

हिमाचल प्रदेश में सब कुछ सही नहीं है। अब तक कॉन्ग्रेस कहती आई है कि प्रदेश में सब ठीक है, लेकिन सब ठीक नहीं है। कॉन्ग्रेस के बागी नेता राजेंद्र राणा ने शनिवार (2 मार्च 2024) को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को ‘एक नंबर का झूठा’ बताया और कहा कि ना तो लोक निर्माण विभाग के मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने सुक्खू को बताया था कि वे पंचकूला में कॉन्ग्रेस के बागियों से मिल रहे हैं और ना ही मुख्यमंत्री ने उन्हें भेजा था।

राजेंद्र राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री सुक्खू तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विक्रमादित्य सिंह ने उन्हें वापस आने या समझौता करने के लिए कभी नहीं कहा। राजेंद्र राणा ने कहा कि उन्हें अपनी सरकार से शिकायतें हैं, क्योंकि सरकार पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की प्रतिमा स्थापित करने के लिए जमीन उपलब्ध कराने में नाकाम रही है।

दरअसल, सीएम सुक्खू ने शुक्रवार (1 मार्च 2024) को कहा था कि उन्हें विक्रमादित्य सिंह ने बताया था कि कॉन्ग्रेस के कुछ बागियों ने उनसे संपर्क किया था और वे वापस आना चाहते हैं। इसके बाद सुक्खू ने कहा कि वे शीर्ष नेतृत्व से बात करके इसकी जानकारी देंगे।

वहीं, पार्टी के बागी राजेंद्र राणा ने कहा कि उन्होंने प्रदेश की जनता के हितों के लिए क्रॉस वोटिंग की थी। उन्होंने कहा कि वे अपमान झेलने के बजाय घर बैठना पसंद करेंगे। राजेंद्र राणा ने कहा कि सीएम का यह दावा की सरकार स्थिर है, झूठा है। उन्होंने कहा कि हिमाचल के 9 विधायक उनके संपर्क में हैं।

दरअसल, सोलन जिले के कसौली में सीएम सुक्खू ने कहा था कि कॉन्ग्रेस पार्टी के छह काले साँपों ने अपना सम्मान बेच दिया और गरीबों के कल्याणकारी योजनाओं वाले बजट पर वोट ना देकर कॉन्ग्रेस सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की। भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने वाले कॉन्ग्रेस के छह विधायकों को सदन की सदस्यता से निलंबित कर दिया गया था।

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने 29 फरवरी को कहा था, “कॉन्ग्रेस के निशान पर चुनाव लड़ने वाले छह विधायकों ने अपने खिलाफ दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों का उल्लंघन किया है। मैं घोषणा करता हूँ कि छह लोग तत्काल प्रभाव से हिमाचल प्रदेश विधानसभा के सदस्य नहीं रहेंगे।”

जिन विधायकों की सदस्यता रद्द की गई थी, उनमें धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा, गगरेट के विधायक चैतन्य शर्मा, कुटलैहड़ के विधायक देवेंद्र भुट्टो, बड़सर के विधायक इंद्र दत्त लखनपाल, सुजानपुर के विधायक राजेंद्र राणा और लाहौल स्पीति के विधायक रवि ठाकुर शामिल हैं। इन विधायकों के पास अब हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प है।

हिमाचल विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने ट्रिब्यूनल के चेयरमैन के तौर पर पिटीशन की सुनवाई की और 30 पन्नों का फैसला दिया। बता दें कि संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने छह बागी विधायकों के खिलाफ याचिका दायर की थी। व्हिप के मुताबिक बजट पास करने के वक्त बागी विधायक सदन में मौजूद नहीं रहे। 

केरल में सरकारी नौकरों को सैलरी नहीं, न रिटायर लोगों को पेंशन… जिनके खातों में पैसा, वो भी फ्रीज: राज्य में आर्थिक संकट, 3.5 लाख कर्मचारी प्रभावित

केरल सरकार इन दिनों आर्थिक तंगी से जूझ रही है। इसी वजह से वहाँ के सरकारी कर्मचारियों को सैलरी मिलने में देरी हो रही। पहले राज्य कर्मचारियों का वेतन 1 तारीख को आना था। देरी की वजह से अब यह 4 मार्च को आने की उम्मीद है। वेतन मिलने में हो रही इस देरी का कारण बैंकों में सरकारी ट्रेजरी से समय से पैसा न पहुँचना बताया जा रहा है। इस व्यवधान की वजह से समय से वेतन पाने की उम्मीद लगाए लगभग 3.5 लाख कर्मचारी प्रभावित हुए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केरल में चल रहे आर्थिक संकट के चलते कर्मचारी ट्रेजरी सेविंग्स बैंक (ईटीएसबी) का खाता फ्रीज हो चुका है। सरकारी खजाने को फिर से भरने के लिए फ़िलहाल प्रयास शुरू किए जा चुके हैं। कर्मचारियों को वेतन देने के अलावा अन्य जरूरी कामों को पूरा करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के संगठनों से आने वाले भंडार और लाभांश को राज्य सरकार के खजाने में ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए हैं। इन अतिरिक्त प्रयासों के चलते ही राज्य कर्मचारियों के वेतन 4 मार्च को आने की उम्मीद है।

सैलरी में हो रही इस देरी की वजह से केरल के सरकारी कर्मचारियों में निराशा है। वो अपनी ही सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इन हालातों के बीच सचिवालय एक्शन काउंसिल ने भी रोष जताते हुए अपना बयान जारी किया है। काउंसिल ने इस देरी के लिए प्रदेश सरकार के गलत मैनेजमेंट को जिम्मेदार बताया है। केरल सरकार के खिलाफ ऐसी बयानबाजी कर्मचारियों के मन में बढ़ रहे असंतोष का प्रतीक मानी जा रही है।

फिलहाल इस पूरे मामले पर राज्य सरकार का ट्रेजरी और वित्त विभाग मौन साध कर बैठा है। वह इस समय के पीछे तकनीकी कारणों का हवाला दे रहा है। हालाँकि राज्य कर्मचारी सरकार की इस सफाई से संतुष्ट नहीं हैं। वो सरकार की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

केरल के सरकारी कर्मचारियों का कहना है कि वेतन उनके ईटीएसबी खातों में तो दिख रहा है लेकिन वो उसे निकाल नहीं सकते। असंतुष्ट कर्मचारियों का कहना है कि सरकार ने कुछ लोगों की नाराजगी दूर करने के लिए सैलरी खातों में आ जाने का भ्रम पैदा किया है। सैलरी के अलावा पेंशन पाने वाले रिटायर हो चुके कर्मचारी भी अपने पेंशन की उम्मीद लगाए बैठे हैं। केरल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है।

माना जा रहा है कि सैलरी आने का भ्रम पैदा करके वर्तमान सरकार केरल में चल रहे आर्थिक संकट को जानबूझ कर छिपाने का प्रयास कर रही है। वेतन आने में देरी होने से प्रभावितों में गृह, राजस्व, ट्रेजरी, जीएसटी और सचिवालय जैसे महत्वपूर्ण विभागों के कर्मचारी भी शामिल हैं। इसकी वजह से इस मामले ने और अधिक तूल पकड़ लिया है। फ़िलहाल आने वाले समय में यदि ऐसे ही हालत बने रहे तो माना जा रहा है कि यह राज्य कर्मचारियों के मन में और अधिक असंतोष को पैदा करेगा।

जैसे मर गया अब्बा अतीक अहमद, वैसे ही बेटों को भी मरने का डर… कोर्ट से लगाई गुहार: जेल से अदालत के बीच माँगी ‘कड़ी सुरक्षा’

जेल में बंद माफिया अतीक अहमद के 2 बेटों उमर और अली अहमद को भी उनके अब्बा जैसा अंजाम होने की फ़िक्र सता रही है। इन दोनों ने अदालत से गुहार लगाई है कि उनको पेशी के दौरान कड़ी सुरक्षा मुहैया करवाई जाए।

उमर अहमद लखनऊ और अली फिलहाल प्रयागराज की नैनी जेल में बंद है। उमेश पाल हत्याकांड में उमर और अली अहमद को भी पुलिस ने संलिप्त माना है। वहीं अतीक के 2 अन्य कथित नाबालिग बेटों की भी उमेश पाल की हत्या केस में भूमिका की जाँच करवाई जा रही है। इन सभी पर उमेश पाल हत्याकांड के अलावा भी कई अन्य मुकदमे विचाराधीन हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अतीक के लखनऊ जेल में बंद बेटे उमर और नैनी जेल में बंद अली अहमद का वॉरंट बी (जिस केस में अपराधी जेल में बंद हो, उससे अलग मामले का वॉरंट, ताकि जमानत मिलने पर भी आरोपित को जेल से छोड़ा न जाए) पुलिस ने दाखिल किया है। अब दोनों की SC/ST कोर्ट में पेशी होनी है। पेशी के बाद पुलिस उमेश पाल हत्याकांड में चार्जशीट दाखिल करेगी।

माना जा रहा है कि उमेश पाल हत्याकांड की इस चार्जशीट में अली और उमर अहमद को भी साजिश रचने वालों के तौर पर आरोपित किया जा सकता है। इसी पेशी से पहले अली और उमर अहमद ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई है। उन्होंने आशंका जताई है कि उन पर भी ठीक वैसा ही हमला हो सकता है, जैसा उनके अब्बा अतीक और चाचा अशरफ पर हुआ था।

अतीक के 2 अन्य नाबालिग बेटे अपनी बुआ के घर रह रहे हैं। उमेश पाल हत्याकांड में इन दोनों की भी मिलीभगत है या नहीं, पुलिस इसकी जाँच में जुटी है। दोषी पाए जाने पर इन दोनों का भी नाम आरोपपत्र में शामिल किया जा सकता है।

अतीक का 5वाँ बेटा असद पुलिस मुठभेड़ में मारा जा चुका है। वहीं अस्पताल में एक हमले के दौरान मारे गए अतीक अहमद की बीवी शाइस्ता व अशरफ की बेगम जैनब फिलहाल फरार चल रही हैं। पुलिस को इन दोनों की उमेश पाल हत्याकांड में तलाश है। अतीक अहमद के तमाम रिश्तेदारों को मिला कर अब तक उमेशपाल हत्याकांड में कुल 26 लोगों को आरोपित किया जा चुका है।

इन 26 साजिशकर्ताओं में 12 फ़िलहाल जेल में हैं। जेल काट रहे आरोपितों के नाम अखलाख अहमद, सौलत हनीफ खान, विजय मिश्र, राकेश, कैश अहमद, सदाकत खान, उमर अहमद, अली अहमद, इक़बाल अहमद, नियाज अहमद, शाहरुख़ और मोहम्मद अरशद हैं। इसके अलावा इसी केस में 7 आरोपित फरार चल रहे हैं। इनके नाम गुड्डू मुस्लिम, शाइस्ता परवीन, साबिर, जैनब फातिमा, खालिद जफर, आयशा नूरी और अरमान हैं।

इन सभी के अलावा उमेश पाल हत्याकांड में शामिल 7 अन्य आरोपित मुठभेड़ व अन्य हमलों में मारे जा चुके हैं। इनके नाम असद अहमद, अतीक अहमद, अशरफ, उस्मान उर्फ़ विजय चौधरी, नफीस बिरयानी, गुलाम और अरबाज़ हैं।

TMC गुंडों के सामने तनकर खड़ी रहने वाली प्रिया साहा को बीजेपी का टिकट: जानें ‘स्ट्रीट फाइटर’ की खूबियाँ, इसलिए बनीं पार्टी की पसंद

बीजेपी ने लोकसभा चुनाव 2024 के लिए 195 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। इस सूची में 28 महिलाओं को टिकट दिया गया है। इन्हीं उम्मीदवारों में से एक प्रिया साहा भी हैं, जिन्हें बोलपुर से मैदान में उतारा गया है। बोलपुर एससी सीट है। उन्हें पहली बार लोकसभा चुनाव के लिए मैदान में उतारा गया है। प्रिया साहा को टीएमसी के गुंडों के सामने जमकर खड़े रहने के लिए जाना जाता है। वो स्ट्रीट फाइटर रह चुकी हैं, उनकी ये खूबी उनकी पर्सनालिटी में भी झलकती है।

विधानसभा चुनाव भी लड़ चुकी हैं प्रिया

प्रिया साहा पश्चिम बंगाल में बीजेपी के युवा और निडर चेहरों में से एक है। महज 35 साल की उम्र में वो बीरभूम जिले की सैंथिया (एससी) विधानसभा सीट से साल 2021 में विधानसभा चुनाव लड़ चुकी हैं। वो नजदीकी मुकाबले में 2021 का चुनाव हार गई थी। उनके घर पर टीएमसी के गुंडों ने हमला भी किया था और परिजनों के साथ मारपीट भी की थी। उन्हें टीएमसी के लोग मैदान से हटने के लिए धमका रहे रहे थे। इसके बावजूद वो मैदान पर न सिर्फ डटी रही, बल्कि टीएमसी को कड़ी टक्कर भी दी थी।

पश्चिम बंगाल से 3 महिलाओं को टिकट

बीजेपी ने पश्चिम बंगाल से 3 महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। मालदा दक्षिण सीट से श्रीरूपा मित्रा चौधुरी को बीजेपी ने मैदान में उतारा है। वो मौजूदा समय में मालदा की इंग्लिश बाजार विधानसभा सीट से विधायक हैं। वो लंबे समय से सामाजिक कार्यों से जुड़ी रही हैं। उन्हें मानवाधिकार कार्यकर्ता के रूप में भी जाना जाता है। वहीं, बीजेपी ने हुगली लोकसभा सीट से एक बार फिर से लॉकेट चटर्जी को मैदान में उतारा है। लॉकेट चटर्जी मौजूदा लोकसभा सांसद भी हैं। वो बीजेपी की पश्चिम बंगाल शाखा की महासचिव भी हैं। लॉकेट चटर्जी को ममता बनर्जी के कट्टर विरोधियों में से माना जाता है।

बीजेपी ने इन महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा

लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी की पहली सूची में जिन 28 महिलाओं को टिकट दिया गया है, उसमें असम की गुवाहाटी सीट से बिजुली कलिता मेधि, छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चंपा सीट से कमलेश जांगड़े, कोरबा से सुश्री सरोज पांडे, महासमुंद से रूप कुमारी चौधरी, दिल्ली की नई दिल्ली सीट से सुश्री बांसुरी स्वराज, पश्चिमी दिल्ली से कमलजीत सहरावत, गुजरात की बनासकांठा सीट से डॉक्टर रेखा बेन हितेश भाई चौधरी, जामनगर से पूनमबेन माडम, झारखंड की कोडरमा सीट से अन्नपूर्णा देवी, सिंहभूम से गीता कोड़ा, केरल की कासरगोड सीट से एम एल अश्विनी, पोन्नानी से निवेदिता सुब्रमण्यन का नाम है।

बीजेपी ने अलपुझा से शोभा सुरेंद्रन, मध्य प्रदेश की भिंड सीट से संध्या राय, सागर से लता वानखेड़े, शहडोल से हिमाद्री सिंह, रतलाम से अनीता नागर सिंह चौहान, राजस्थान की नागौर सीट से ज्योति मिर्धा, तेलंगाना की हैदराबाद सीट से डॉक्टर माधवी लता, उत्तराखंड की टेहरी गढ़वाल सीट से माला राज्य लक्ष्मी शाह, उत्तर प्रदेश की मथुरा सीट से हेमा मालिनी, धौरहरा से रेखा वर्मा, अमेठी से स्मृति ईरानी, फतेहपुर से साध्वी निरंजन ज्योति, लालगंज से नीलम सोनकर, पश्चिम बंगाल की मालदा दक्षिण सीट से श्रीरूपा मित्रा चौधुरी, हुगली से लॉकेट चैटर्जी, बोलपुर से प्रिया साहा को मिला टिकट

विजयनगर ट्रेन एक्सीडेंट के वक्त मोबाइल पर क्रिकेट मैच देख रहे थे ड्राइवर: रेल मंत्री ने आंध्र प्रदेश में हुए हादसे का किया खुलासा, जाँच रिपोर्ट का इंतजार

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार (2 मार्च 2024) को खुलासा किया कि आंध्र प्रदेश में टकराई दो यात्री ट्रेनों में से एक ट्रेन के ड्राइवर और सहायक ड्राइवर फोन पर क्रिकेट मैच देख रहे थे। यह हादसा 29 अक्टूबर 2023 को विजयनगरम जिले के कंटाकपल्ली में हावड़ा-चेन्नई लाइन पर शाम करीब 7 बजे हुआ था। उस दौरान रायगढ़ पैसेंजर ट्रेन ने विशाखापत्तनम-पलासा ट्रेन को पीछे से टक्कर मार दी थी, जिसमें 14 यात्रियों की मौत 50 यात्री घायल हो गए थे।

समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए मंत्री ने कहा, “आंध्र प्रदेश में यह हादसा इसलिए हुआ, क्योंकि लोको पायलट और सह-पायलट दोनों का ध्यान क्रिकेट मैच के कारण विचलित हो गया था। अब हम ऐसे सिस्टम स्थापित कर रहे हैं, जो ऐसे किसी भी विचलन का पता लगा सकते हैं और यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि पायलट और सहायक पायलट का पूरा ध्यान ट्रेन चलाने पर केंद्रित है।”

रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) ने विजयनगरम ट्रेन दुर्घटना की जाँच की है। इस जाँच रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। दुर्घटना के अगले दिन रेलवे ने प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा था कि रायगढ़ पैसेंजर ट्रेन के चालक और सहायक चालक दुर्घटना के लिए जिम्मेदार थे, क्योंकि मानदंडों का उल्लंघन करते हुए ट्रेन दो दोषपूर्ण ऑटो सिग्नल पार कर गई थी। इस हादसे में दोनों की मौत हो गई थी।

आंध्र में रेल दुर्घटना से ठीक चार महीने पहले भारत की सबसे विनाशकारी रेल दुर्घटनाओं में से एक ओडिशा के बालासोर में रेल दुर्घटना हुई थी। 2 जून 2023 को ओडिशा के बालासोर के बहनागा बाजार स्टेशन पर हुए इस दर्दनाक हादसे में 296 लोगों की मौत हो गई थी और 1,200 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। दुर्घटना वाले दिन कोरोमंडल एक्सप्रेस एक खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई थी।

बालासोर में ट्रेन दुर्घटना के परिणामस्वरूप पटरी से उतरकर कुछ डिब्बे बगल की पटरियों पर गिर गए थे। कुछ मिनट बाद यशवंतपुर-हावड़ा एक्सप्रेस ट्रेन उन पटरियों पर आई और पटरी से उतरे डिब्बों से टकरा गई। इसके कारण उसके डब्बे क्षतिग्रस्त हो गए और वे भी पटरी से उतर गए। इस दुर्घटना में बड़े पैमाने पर जानमाल की हानि हुई थी।

बालासोर हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को सरकार मुआवजा देने का ऐलान किया थी। रेल मंत्रालय की ओर से हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को 10-10 लाख रुपए का मुआवजा देने की घोषणा की गई थी। वहीं, हादसे में घायल लोगों को दो-दो लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की बात कही गई थी। जिन लोगों को मामूली चोट लगी हैं, उन्हें 50 हजार रुपए देने की बात कही गई थी।

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रेन दुर्घटना के पीड़ितों को 2-2 लाख रुपए और घायलों को 50,000 रुपए की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। ये राशि पीएमएनआरएफ (PMNRF) फंड से दिए जाएँगे। इस तरह मृतकों को 12 लाख रुपए और गंभीर रूप से घायलों को 1 लाख रुपए देने की घोषणा की गई है।

मौसी की बेटी से कराची में निकाह किया, फिर ISI के लिए करने लगा जासूसी: 2 पासपोर्ट रखने वाले फैसल रहमान को 10 साल की सजा

कानपुर की एक अदालत ने शनिवार (2 फरवरी 2024) को पाकिस्तान के एक जासूस को 10 साल कैद की सजा सुनाई है। सजा पाए अपराधी का नाम फैसल रहमान उर्फ़ गुड्डू है। उस पर अदालत ने 50 हजार रुपए का जुर्माना भी ठोका है। आज से लगभग 13 साल पहले उसे उत्तर प्रदेश ATS ने सैनिक ठिकानों की रेकी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। फैसल की बीवी पाकिस्तान के सरकारी स्कूल में नौकरी करती है। वहीं पर उसे पाकिस्तानी एजेंट ने अपने साथ मिलाया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फैसल रहमान का केस कानपुर जिला अदालत के सत्र न्यायाधीश-8 राम अवतार प्रसाद की अदालत में सुना गया। फिलहाल वह जमानत पर चल रहा था। 13 साल तक चले इस मुकदमे में आखिरकार गुड्डू उर्फ़ फैसल रहमान को दोषी पाया गया। उसे 10 साल सश्रम कारावास और 50 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस ने फैसल रहमान को कस्टडी में लेकर जेल भेज दिया।

कानपुर के ADGC अरविन्द डिमरी ने फैसल रहमान को बेहद शातिर अपराधी बताया। ADGC ने बताया कि फैसल को किसी वकील पर विश्वास नहीं था। उसने अपने मुकदमे की पैरवी खुद ही की थी। इस बावत उसने कोर्ट से बाकायदा धारा 32 के तहत अनुमति भी ली थी। माना जा रहा है कि जल्द ही फैसल रहमान अपनी सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दे सकता है।

फैसल रहमान मूलतः झारखंड के राँची का निवासी है। उसका घर जगन्नाथ थाना क्षेत्र के फिरदौस नगर में है। साल 2002-03 में फैसल पाकिस्तान के कराची में रहने वाली अपनी मौसी जाकिया मुमताज के घर गया था। यहाँ उसे अपनी मौसी की बेटी साइमा से मोहब्बत हो गई। साइमा पाकिस्तान के सरकारी स्कूल गवर्नमेंट इस्लामिया में पढ़ाती थी। थोड़ी ही दिनों के बाद फैसल ने उससे निकाह कर लिया।

इसी पाकिस्तान यात्रा के दौरान उसकी मुलाकत ISI एजेंट से हुई थी। वह भारत लौटकर आने के बाद पाकिस्तान के लिए जासूसी करने लगा। उसने देश के विभिन्न हिस्सों में मौजूद सैनिक ठिकानों की रेकी करनी शुरू कर दी। वह प्रयागराज, राँची, झाँसी और बबीना गया। वहाँ मौजूद सैनिक ठिकानों की जानकारी जुटाई। उसने RTI डालकर भी सरकार से सेना संबंधी कई सवाल किए थे।

इन सवालों में कौन-सी बटालियन कहाँ तैनात है जैसे सवाल शामिल थे। हालाँकि इन हरकतों के चलते फैसल ATS के रडार पर आ चुका था। कई जगह घूमने के बाद आखिरकार फैसला साल 2011 में कानपुर पहुँचा। वह कानपुर सैनिक ठिकाने की जासूसी करने के लिए वहाँ गया था। वहाँ पहले से ही तैयार ATS ने 19 सितंबर 2011 को फैसल को कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन से दबोच लिया।

तलाशी के दौरान उसकी जेब से पाकिस्तानी सिम, हाथ से बना हुआ कानपुर सैनिक छावनी का नक्शा, दो अलग-अलग पासपोर्ट, कई टिकट और वोटर कार्ड आदि बरामद हुए थे। जब ATS ने उसका ईमेल चेक किया तो सेना से जुड़ी कई सूचनाएँ पाकिस्तान भेजे जाने की पुष्टि हुई। फैसल के पासपोर्ट अलग-अलग समय में पटना और राँची से बने मिले। वह पाकिस्तान के अलावा रूस की यात्रा कर चुका था।

फैसला रहमान पर धारा 22 (1), 120 बी और 115 IPC के अलावा शासकीय गोपनीयता अधिनियम 1973 की धारा 3/4/9 के तहत कानपुर के रेल बाजार थानाक्षेत्र में FIR दर्ज हुई थी। ATS की पूछताछ में फैसल ने पाकिस्तान के लिए जासूसी करने की बात कबूल की थी। उसे 2011 में जेल भेज दिया गया था, लेकिन बाद में जमानत हो गई थी। अब फैसल रहमान उर्फ़ गुड्डू को सजा सुनाई गई है।

Jharkhand court sentences Faisal Rehman to 10 years in jail for spying for Pakistan

हैदराबाद में असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ BJP ने डॉक्टर माधवी लता को उतारा: जानिए कौन हैं ये महिला, जिनकी खूब हो रही है चर्चा

लोकसभा चुनाव 2024 के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पहली लिस्ट शनिवार (2 फरवरी 2024) को जारी कर दी। भाजपा ने हैदराबाद में AIMIM सुप्रीमो एवं सांसद असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ डॉक्टर माधवी लता को प्रत्याशी बनाया है। माधवी राजनीति विज्ञान में परास्नातक हैं। वो हैदराबाद में एक नामी अस्पताल की चेयरपर्सन हैं। माधवी को प्रत्याशी घोषित करते ही सोशल मीडिया में उनके समर्थन में मुहिम छेड़ दी गई है।

बच्चों को दिया श्रीमद्भगवत गीता का ज्ञान

माधवी 3 बच्चों की माँ हैं। उनकी बड़ी बेटी लोपामुद्रा 19 वर्ष की हैं, जो IIT मद्रास से बीटेक कर रही हैं। दूसरे नंबर पर 16 साल का बेटा रामकृष्ण परमहंस है। वह भी IIT मद्रास से बीटेक प्रथम वर्ष का छात्र है। माधवी की सबसे छोटी बेटी मोदिनी है, जो फिलहाल कक्षा 11 में पढ़ती है। मोदिनी भी अपने भाई और बहन की तरह IIT करना चाहती हैं। माधवी ने अपने बच्चों को बचपन में खुद ही पढ़ाया है। वे बच्चों को अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, समाजशास्त्र आदि विषयों के साथ-साथ उन्हें श्रीमद्भगवत गीता और महाभारत का भी ज्ञान दिया है।

NCC कैडेट और भरतनाट्यम नृत्यांगना

माधवी लता के पति का नाम विश्वनाथ है। वो एमिरेट्स विरिंची नाम की कम्पनी के संस्थापक हैं। माधवी तेलंगाना टुडे को बताती हैं कि उन्होंने कई अनाथालयों को दान दिए हैं। माधवी लता प्रोफेशनल भरतनाट्यम नृत्यांगना हैं। वो अब तक 100 से ज्यादा स्टेज प्रस्तुति दे चुकी हैं। माधवी अपने छात्रा जीवन में NCC कैडेट भी रह चुकी हैं।

डॉक्टर माधवी लता को तेलंगाना में हिंदुत्व का मुखर चेहरा माना जाता है। कोटी महिला कॉलेज से राजनीति शास्त्र में MA करने के बाद वह मूलतः शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सामाजिक कार्यों में काफी सक्रिय रही हैं। इन कार्यों को वो ट्रस्ट और संस्थाओं के माध्यम से करती हैं। हैदराबाद से भाजपा की पहली महिला प्रत्याशी माधवी के हिन्दू धर्म को लेकर दिए जाने वाले भाषण अक्सर वायरल होते हैं।

हैदराबाद में मंदिरों पर कब्ज़ा

प्रत्याशी के तौर पर अपना नाम सामने आने के बाद माधवी ने ANI से बात की। तब उन्होंने बताया कि वो पिछले 8 वर्षों से लगातार हैदराबाद के उस संसदीय क्षेत्र में जा रही हैं, जहाँ से वो खुद प्रत्याशी घोषित हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उस क्षेत्र में विकास पूरी तरह से ठप्प हो गया है और लोग पढ़ाई, सफाई और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। माधवी ने आगे कहा कि जहाँ मदरसों में बच्चों को खाना नहीं मिल रहा है, वहीं हिंदुओं के कई मंदिरों को कब्ज़ा कर लिया गया है।

उस संसदीय क्षेत्र के हिन्दू समाज को आए दिन परेशानी का सामना करने वाली आबादी बताते हुए माधवी ने आरोप लगाया कि मुस्लिम बच्चों को भी बाल मजदूरी करवाई जा रही है। माधवी ने आगे बताया कि ओवैसी जैसे लोगों का वोट सिर्फ हिन्दू और मुस्लिमों की लड़ाई करवाने से आता है। पुराने हैदराबाद को गरीबी और बेबसी का शिकार बताते हुए भाजपा प्रत्याशी ने इसे बहुत आगे ले जाने की जरूरत पर जोर दिया।

1984 से काबिज़ है ओवैसी परिवार

भारतीय जनता पार्टी ने जिस हैदराबाद सीट पर माधवी लता को उतारा है, वहाँ साल 1984 से ओवैसी परिवार का दबदबा है। ओवैसी के अब्बा सुल्तान सलाउद्दीन यहाँ से 1984 में पहली बार सांसद बने थे। साल 2004 तक सुल्तान सलाउद्दीन यहाँ से जीतते आए, जिसके बाद से अब इस सीट पर असदुद्दीन ओवैसी की जीत हो रही है।

हिंदुओं से नफरत, 2047 तक भारत को इस्लामी मुल्क बनाने का मकसद: NIA ने 2 लाख के ईनामी PFI आतंकी अब्दुल सलीम को दबोचा

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने प्रतिबंधित इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के एक आतंकी अब्दुल सलीम को पकड़ा है। सलीम के खिलाफ निज़ामाबाद पीएफआई मामले में आरोप पत्र दाखिल किया था। हालाँकि, वह फरार हो गया था। उस पर NIA ने 2 लाख रुपए का नकद इनाम भी रखा था।

NIA के प्रवक्ता ने बताया, “उत्तरी तेलंगाना पीएफआई का राज्य सचिव अब्दुल सलीम 15वाँ आरोपित है, जिसे मूल रूप से जुलाई 2022 में निज़ामाबाद पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मामले में गिरफ्तार किया गया है। बाद में इस मामले को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को सौंप दिया गया था।”

एनआईए अधिकारी ने कहा कि सलीम पीएफआई के साजिशकर्ताओं के समूह का एक प्रमुख सदस्य था और यह मामला सामने आने के बाद से वह फरार था। उन्होंने बताया कि आरोपित को खुफिया जानकारी के आधार पर चलाए गए अभियान के बाद आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले के मायदुकुर से पकड़ा गया है।

एनआईए की जाँच से पता चला है कि अब्दुल सलीम पीएफआई में मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथ की राह पर धकेल रहा था। वह उन्हें कट्टरपंथ बनाने के लिए भर्ती करने में शामिल था। वह उन्हें संगठन के नापाक भारत विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए हथियार प्रशिक्षण के लिए आतंकवादी प्रशिक्षण शिविरों में भी भेजता था।

एनआईए ने दिसंबर 2022 में अब्दुल सलीम सहित 11 आरोपितों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। उसके बाद पिछले साल मार्च में पाँच और दिसंबर में एक के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दायर किया था। एनआईए अधिकारी ने कहा कि पीएफआई और उसके आतंकियों की साजिश का एक अभिन्न हिस्सा साल 2047 तक भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाना था।

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने 16 मार्च 2023 को प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है। यह आरोप पत्र निजामाबाद मामले में PFI के 5 आरोपितों- शेख रहीम उर्फ अब्दुल रहीम, शेख वाहिद अली उर्फ अब्दुल वहीद अली, जफरुल्ला खान पठान, शेख रियाज अहमद और अब्दुल वारिस के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया था।

इससे पहले 30 दिसंबर 2022 को एनआईए ने 11 आरोपितों के खिलाफ पहला आरोप पत्र दाखिल किया था। NIA ने यह मामला अगस्त 2022 में तेलंगाना पुलिस से अपने हाथ में लिया था। तेलंगाना पुलिस ने इस मामले में 4 जुलाई 2022 को मामला दर्ज किया था।

चार्जशीट में कहा गया था कि ये अभियुक्त कुख्यात PFI के प्रशिक्षित कैडर शामिल हैं। ये प्रभावशाली मुस्लिम युवाओं को भड़काने और कट्टरपंथी बनाने का काम करते थे। इसके बाद उन्हें पीएफआई में भर्ती कराते थे। इसके अलावा, भर्ती कराए गए लोगों को PFI के प्रशिक्षण शिविरों में हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जाती थी। 

दरअसल, एनआईए ने कराटे प्रशिक्षण केंद्र के नाम पर संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) द्वारा ट्रेनिंग कैंप चलाए जाने के मामले में सितंबर 2022 में छापेमारी की थी। एनआईए ने आंध्र प्रदेश के कुरनूल, नेल्लोर, कडपा, गुंटूर और तेलंगाना के निजामाबाद में संदिग्धों के घर व बिजनेस परिसरों की तलाशी भी ली थी।

इससे पहले जुलाई 2022 में तेलंगाना (Telangana) की निजामाबाद पुलिस ने कराटे और मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग की आड़ में देश विरोधी गतिविधियों के आरोप में PFI के 3 सदस्यों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार आरोपितों के नाम शेख शहदुल्लाह, अब्दुल मोबीन और मोहम्मद इमरान हैं। इनमें एक आरोपित ने अब तक 200 मुस्लिमों को ट्रेनिंग देने की बात कबूली।

इन लोगों को देश के अलग-अलग हिस्सों में अस्थिरता फैलाने का टास्क मिला था। निजामाबाद पुलिस कमिश्नर द्वारा शेयर मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रेनिंग सेंटर में देश की धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ शिक्षा दी जा रही थी। यहाँ शरिया कानून लागू करने के लिए उकसाया जाता था। ट्रेनिंग के लिए गरीब और मध्यम वर्ग के युवाओं को भर्ती किया जा रहा था।

इन सभी का सरगना 52 साल का कादिर है। वह ट्रेनिंग में आने वाले युवाओं को यह कहकर भड़काता था कि हिन्दू तुम्हारे दुश्मन हैं। पुलिस का मानना है कि यहाँ तैयार किए जा रहे लोगों को हिन्दू समाज को निशाना बनाने के लिए उकसाया जा रहा था। गिरफ्तार आरोपित पहले बैन आतंकी संगठन सिमी के सदस्य थे। बाद में ये सभी PFI से जुड़ गए।