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KG से PG तक गरीब लड़कियों की पढ़ाई फ्री, पेपर लीक की जाँच के लिए SIT, 5 साल में 2.5 लाख सरकारी नौकरी: राजस्थान के लिए BJP का संकल्प

भाजपा ने राजस्थान विधानसभा चुनावों के लिए अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इसे जारी करते हुए भाजपा का संकल्प पत्र बताया है। भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में 12वीं के बाद छात्राओं को फ्री स्कूटी दी देने, प्रदेश में एंटी रोमियो स्क्वॉयड स्थापित करने, कुर्की हुई किसानों की जमीनों के लिए कमिटी बनाने का वादा किया है।

राजधानी जयपुर में घोषणा पत्र को जारी करते हुए नड्डा ने कहा, “अन्य पार्टी के लिए घोषणा-पत्र एक औपचारिकता मात्र है, लेकिन भाजपा के लिए यह विकास का रोडमैप है। हमारा इतिहास इस बात का साक्षी है कि हमने जो कहा, वह करके दिखाया। जो नहीं कहा, वह भी कर के दिया।” उन्होंने कहा कि राजस्थान को पिछले 9 वर्षों में 23 मेडिकल कॉलेज दिए हैं, जिसमें से 11 ऑपरेशनल हो गए हैं।  

भाजपा ने राजस्थान के अपने संकल्प पत्र में कई महत्वपूर्ण वादे किए हैं। भाजपा ने कहा है कि अगर वह सत्ता में आती है तो हर थाने में एक महिला खाना खोला जाएगा। महिलाओं के खिलाफ हिंसा से त्रस्त राजस्थान के लिए पार्टी ने महिला सुरक्षा के लिए हर जिले में एंटी रोमियो स्क्वॉयड शुरू की भी बात कही है।

भाजपा ने बेटी के जन्म लने पर 2 लाख रुपए का बॉन्ड देने और 12 वीं से आगे की कक्षा में पहुँचने वाली छात्राओँ को फ्री स्कूटी देने की भी योजना शुरू करने की बात भी कही है। इतना ही नहीं, गरीब छात्राओं को केजी से लेकर पारास्नातक यानी पीजी तक मुफ्त शिक्षा देने का भी ऐलान किया है।

इसके अलावा, लखपति दीदी योजना की शुरुआत, उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को रसोई गैस पर 450 रुपए की सब्सिडी दी जाएगी। मातृत्व वंदना योजना के तहत महिलाओं को दिए जा रहे 5,000 रुपए को बढ़ाकर 8,000 करने का भी ऐलान किया गया है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 2,000 करोड़ रुपए का फंड बनाने की भी बात कही गई है।

भाजपा ने किसानों को भी ध्यान में रखा है। इसमें कहा गया है कि अगर भाजपा की सरकार बनती है तो गेहूँ को 2700 रुपए में खरीदा जाएगा। जिन किसानों की भूमि को कुर्क किया गया हैं, उनको क्षतिपूर्ति कैसे किया जाएगा उस पर काम किया जाएगा। इसके अलावा, भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई के लिए SIT का गठन किया जाएगा।

लखपति योजना के तहत 6 लाख ग्रामीण महिलाओं को ट्रेनिंग दी जाएगी। देश के युवाओं को अगले 5 वर्षों में ढाई लाख सरकारी नौकरियाँ देने की घोषणा की गई है। कमजोर वर्ग की बालिकाओं को उनके खाते में सीधे राशि ट्रांसफर की जाएगी।

निस्वार्थी हैं PM मोदी, राष्ट्रहित में ले रहे क्रांतिकारी निर्णय: शेहला रशीद ने बताई हृदय परिवर्तन की वजह, कहा- केंद्र की नीतियों में कोई कमी नहीं

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) की पूर्व छात्रा शेहला रशीद कुछ समय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करती कई प्लेटफॉर्म पर दिख चुकी हैं। ऐसे में लोग कहने लगे थे कि उनका हृदय परिवर्तन हो गया। अब शेहला ने इस पर खुद ट्वीट किया है। उन्होंने बताया कि आखिर कैसे वो पीएम मोदी की पहले विरोधी हुआ करती थीं, और अब मुरीद हो गई है।

शेहला ने स्मिता प्रकाश को दिए इंटरव्यू की एक क्लिप को शेयर किया है। इस वीडियो में उन्होंने बता रखा है कि भारत को बदलने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा निस्वार्थ भाव से लिए गए फैसले ने उनका मन बदला।

उन्होंने कहा, “मेरे हृदय परिवर्तन का कारण यह अहसास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक निस्वार्थ व्यक्ति हैं जो भारत को बदलने के लिए क्रांतिकारी निर्णय ले रहे हैं। उन्होंने बहुत आलोचनाओं का सामना किया है, लेकिन समावेशी विकास के अपने दृष्टिकोण पर कायम रहे, जिसमें कोई भी पीछे नहीं छूटता।”

शेहला ने इस इंटरव्यू में कहा कि राज्य के लिए जो फैसले मोदी सरकार ने लिए हैं, वो उनसे बहुत प्रभावित हैं। उन्होंने कहा, “मैंने भाजपा के बारे में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बहुत कुछ पहले से सोच के रखा हुआ था। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत आलोचना सही। हर कोई आर्टिकल 370 के निरस्त होने पर नाराज था, पर वो अपने विकास के काम करने से पीछे नहीं हटे। इसी वजह से मैं एक निर्णय पर पहुँची, जिसने मेरे हृदय को भी बदला, कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री बहुत निस्वार्थ व्यक्ति हैं राष्ट्रहित के मामले में।”

उन्होंने माना कि उन्होंने पीएम मोदी की बहुत आलोचना की है। उसी तरह राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनको आलोचनाएँ मिलीं। सोचने वाली बात थी कि कोई इतनी आलोचना क्यों सहेगा अगर ये राष्ट्रहित में नहीं होता। शेहला रशीद ने आगे कहा कि केंद्र नीतियों में कोई कमी नहीं है और वो इसके लिए किसी से भी बहस के लिए तैयार हैं। वह घाटी में हो रहे बदलावों पर तथ्य पेश भी कर सकती हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के निर्णयों से कश्मीर की हालत सुधरी है। वहाँ कश्मीरी लोगों की जिंदगियाँ बन रही हैं। उनसे विकास हो रहा है। बच्चे वहाँ स्वतंत्र होकर खेल, घूम पाते हैं। अब वहाँ खेल आधारभूत संरचना है।

बता दें कि यह पहली बार नहीं था जब शेहला रशीद ने जम्मू-कश्मीर के हालातों के सुधरने की तारीफ की। इससे पहले उन्होंने इस साल अक्टूबर की शुरुआत में ही उन्होंने केंद्र में पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल के घाटी में मानवाधिकार की स्थिति में सुधार की कोशिशों के लिए तारीफ करते हुए उन्हें धन्यवाद कहा था।

इस साल अक्टूबर की शुरुआत में ही उन्होंने केंद्र में पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल के घाटी में मानवाधिकार की स्थिति में सुधार की कोशिशों के लिए तारीफ करते हुए उन्हें धन्यवाद कहा था।

अमेरिकी उद्योगपति नेविल रॉय सिंघम को ED का समन, चीनी प्रोपेगंडा के लिए उसी की कंपनी ने अभिसार शर्मा वाले ‘Newsclick’ को भेजे थे करोड़ों रुपए

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चीन से फंडिंग के मामले में मीडिया संस्थान ‘Newsclick’ से जुड़े अमेरिकी उद्योगपति नेविल रॉय सिंघम को समन भेजा है। ED इस मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की जाँच कर रही है, जिसमें ‘न्यूज़क्लिक’ के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ को ED ने गिरफ्तार किया था। ये मामला मनी लांड्रिंग का है और नेविल रॉय सिंघम चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) से जुड़ा हुआ है। वो चीनी प्रोपेगंडा को फैलाने के लिए दुनिया भर में फंडिंग करता है।

नेविल रॉय सिंघम की संपत्ति करोड़ों में है और उसने अमेरिका की नागरिकता ले रखी है। वो चीन के संघाई में रहता है। PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग) में उसके खिलाफ अब फिर से समन जारी किया गया है। केंद्रीय विदेश मंत्रालय के माध्यम से उसे समन भेजा गया है। दिल्ली कोर्ट ने ED को इस मामले में ‘Letters Rogatory’ (विदेशी अदालत से सहायता के लिए औपचारिक निवेदन) भेजा है, ताकि उसका बयान दर्ज किया जा सके। इस मामले की जाँच 2021 में शुरू की गई थी।

नेविल रॉय सिंघम को इससे पहले भी समन भेजा जा चुका है, ताकि वो पूछताछ के लिए हाजिर हो। 2 महीने पहले ही इस प्रकरण में CBI ने भी मामला दर्ज किया है। ‘Newclick’ और नेविल रॉय सिंघम पर FCRA (विदेशी अंशदान विनियम अधिनियम) के उल्लंघन का आरोप है। दिल्ली के सैदुलाजाब स्थित ‘न्यूज़क्लिक’ के दफ्तर में भी छापा पड़ा था। इस मामले में अब तक 25 लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। ED ने नेविल रॉय सिंघम को ईमेल भी भेजा है।

‘न्यूज़क्लिक’ के खिलाफ UAPA (आतंक रोधी अधिनियम) के तहत भी जाँच चल रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी चीनी फंडिंग के विषय में उनका नाम लिया था। इस मामले में ‘न्यूजक्लिक’ के HR हेड अमित चक्रवर्ती को भी गिरफ्तार किया गया था। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने इन गिरफ्तारियों को अंजाम दिया था। ‘न्यूज़क्लिक’ को अमेरिका में पंजीकृत ‘वर्ल्डवाइड मीडिया होल्डिंग्स LLP’ से 9.59 करोड़ रुपए मिले थे। बताया गया कि ये पैसे चीन से आए थे और अमेरिकी कंपनी के माध्यम से भारत भेजे गए।

नेविल रॉय सिंघम के पिता आर्चीबाल्ड सिंघम एक श्रीलंकाई राजनीतिक वैज्ञानिक और इतिहासकार थे। वो न्यूयॉर्क के सिटी यूनिवर्सिटी के ब्रुकलिन कॉलेज में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर थे। वह कैरेबियन में अधिकारी था और गुटनिरपेक्ष आंदोलन में भागीदार थे। इन्हीं के घर 1954 में नेविल रॉय का जन्म हुआ था। नेविल रॉय अपनी युवावस्था में लीग ऑफ़ रिवोल्यूशनरी ब्लैक वर्कर्स एक काले राष्ट्रवादी-माओवादी समूह का सदस्य था

दलबदलू नेताओं पर लगे जुर्माना, केरल हाई कोर्ट ने दी सलाह: कहा- यह लोकतंत्र के लिए अभिशाप, अर्थदंड का भी कानून बनाए विधायिका

दल-बदल विरोधी कानूनों के बावजूद इस तरह के काम करने वाले नेताओं को लेकर केरल उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने उम्मीद जताई है कि दल-बदलू नेताओं पर वित्तीय दंड लगाने वाला एक कानून बनाया जाएगा। न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस ने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए अभिशाप है और वर्तमान दल-बदल विरोधी कानून इस प्रथा को रोकने में प्रभावी नहीं हैं।

न्यायालय ने कहा, “राजनीतिक दलबदल का आचरण न केवल उस पार्टी के साथ विश्वासघात करता है जिसके टिकट पर उम्मीदवार ने चुनाव लड़ा, बल्कि उन लोगों की इच्छा के साथ भी विश्वासघात करता है जिन्होंने उम्मीदवार को चुना। चुनाव के बाद पाला बदलना इसको लेकर बनाए गए कानून की प्रभावशीलता को भी खत्म कर देता है।”

न्यायालय ने आगे कहा, “ऐसे प्रयास लोकतंत्र के लिए ही खतरा होंगे। दलबदल विरोधी कानून की कठोरता को दूर करने के लिए दल-बदलुओं द्वारा अपनाए गए सरल तरीकों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए।” कोर्ट ने कहा कि अगर इस पर विचार नहीं किया गया तो इसका उद्देश्य ही नष्ट हो जाएगा।

कोर्ट ने कहा कि दल बदलने वाले राजनेता को कानून के तहत अयोग्य घोषित कर दिया जाता है, लेकिन उन्हें किसी अन्य महत्वपूर्ण नतीजे का सामना नहीं करना पड़ता है। दूसरी ओर, उप-चुनाव कराने के कारण राजकोष पर वित्तीय बोझ पड़ता है। इसलिए, न्यायालय ने सुझाव दिया कि विधायिका दल-बदल विरोधी कानून में वित्तीय दंड शामिल करने पर विचार करे।

न्यायालय ने कहा, “न्यायालय की सोच है कि दल-बदल के कृत्यों के लिए कड़े वित्तीय दंड शामिल करने पर विचार करने का समय आ गया है। जब तक दल-बदल करने वाले को आर्थिक दंड महसूस नहीं होता, तब तक उन बुरे कृत्यों का निवारण दल-बदल विरोधी कानून के जरिए जारी रहेगा। न्यायालय को पूरी उम्मीद है कि विधायिका इस पर ईमानदारी से विचार करेगी।”

दरअसल, यह टिप्पणी केरल राज्य चुनाव आयोग के एक आदेश को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान केरल हाईकोर्ट ने की। केरल राज्य चुनाव आयोग ने एक आदेश दिया था, जिसमें थोडुपुझा नगर परिषद के सदस्य मैथ्यू जोसेफ को अयोग्य घोषित करने से इनकार कर दिया था। वे साल 2020 में परिषद के लिए चुने गए थे। इसके बाद इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

गौरतलब है कि राजनीतिक दल केरल कॉन्ग्रेस (एम) दो गुटों में विभाजित हो गया था – जोस के मणि के नेतृत्व वाला केसीएम और पीजे जोसेफ के नेतृत्व वाला केसीएम यानी केसीएमपीजेजे। केसीएम को भारत के चुनाव आयोग और उच्च न्यायालय के आदेश के बाद ‘दो पत्तियाँ’ प्रतीक दिया गया था। वहीं, केसीएमपीजेजे को ‘चेंडा’ (ड्रम) प्रतीक दिया गया था।

केसीएम लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट का हिस्सा था, जबकि केसीएमपीजेजे यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट गठबंधन का हिस्सा था। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि जोसेफ ने केपीएमजेजे के सदस्य के रूप में चुनाव लड़ा और जीता, लेकिन निर्वाचित होने के बाद, उन्होंने स्वेच्छा से केसीएमपीजेजे के साथ अपनी सदस्यता छोड़ दी और केसीएम में शामिल हो गए। याचिकाकर्ताओं ने केरल स्थानीय प्राधिकरण (दलबदल निषेध) अधिनियम, 1999 की धारा 3ए के तहत उन्हें अयोग्य ठहराने की माँग की।

रोहित शर्मा दूर फेंकते हैं सिक्का, इसीलिए जीत रहा है भारत… पाकिस्तानी फैंस का नया रोना, कह रहे – टॉस ही फिक्स है

ICC वनडे वर्ल्ड कप 2023 के सेमीफाइनल मैच में भारत ने न्यूजीलैंड को 70 रनों से हरा दिया। बुधवार (15 नवंबर, 2023) को हुए इस मैच में जहाँ विराट कोहली और श्रेयस अय्यर ने शतक जड़ा, वहीं मोहम्मद शमी ने 7 विकेट झटके। रोहित शर्मा ने टॉस जीत कर पहले बल्लेबाजी चुनी थी और भारत ने 397 रनों का बड़ा स्कोर खड़ा किया था। पहले पिच को लेकर और अब टॉस को लेकर गड़बड़ी के आरोप भारत से नफरत करने वाले तत्वों द्वारा लगाए जा रहे हैं।

खासकर पाकिस्तानी फैंस इसमें आगे हैं। TikTok पर ‘cricwizard6’ नाम के एक यूजर का वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें ये व्यक्ति टॉस के दौरान अपनी कमेंट्री करते हुए गड़बड़ी के आरोप लगा रहा है। वीडियो में उधर टॉस चलता रहता है और इधर ये कहता है, “अब सेमीफाइनल की टॉस शुरू होने वाली है और हमेशा की तरह भारत को टॉस जीतनी है। रोहित शर्मा को सिक्का मिलेगा, वो दूर फेंक देंगे। फिर मैच रेफरी आएगा और बोलेगा कि रोहित शर्मा ने टॉस जीत लिया।”

इस दौरान वो उलटे-सीधे दावा करता है कि कॉइन फेंकना कहीं और आता है लेकिन ये दूर फेंकेगा। टॉस जीतने के बाद उसने दावा किया कि उसकी बात सही साबित हो गई। कुल मिला कर उसने रोहित शर्मा पर टॉस फिक्स करने दिया। बता दे कि रोहित शर्मा के टॉस में कुछ भी असामान्य नहीं था और टॉस के दौरान अक्सर ऐसा ही होता है। ऐसा भी नहीं है कि रोहित शर्मा हर मैच में टॉस जीतते ही हैं। आँकड़े भी इसकी ही तस्दीक करते हैं। भले ही ये दावे हास्यास्पद हों, फिर भी आँकड़े बताने ज़रूरी हैं।

रोहित शर्मा ने जहाँ 25 टेस्ट मैचों में टॉस जीता है, वहीं इससे ज़्यादा मैचों मतलब 27 में उन्होंने टॉस हारा है। वहीं वनडे मैचों की भी बात करें तो उन्होंने जहाँ 129 ODI मैचों में टॉस जीता है, वहीं 132 मैचों में उन्होंने टॉस हारा है। वहीं पाकिस्तानी अभिनेत्री सेहर शेनवारी ने भी दावा किया कि भारत के खिलाड़ी अच्छे अभिनेता हैं, उन्हें पता है कि मैच फिक्स है फिर भी वो ऐसा दिखा रहे हैं जैसे कि सचमुच का मैच चल रहा है। वहीं तनवीर हसन नामक यूजर ने तो ट्रेंट बोल्ट और टीम सऊदी को स्विंग न मिलने के पीछे भी साजिश करार दिया।

इतना ही नहीं, पाकिस्तानी टीवी पर विशेषज्ञों ने भी ऐसे ही उलटे-सीधे दावे किए। इसमें एक पैनलिस्ट कहता दिख रहा है कि रोहित शर्मा टॉस दूर फेंकते हैं और रेफरी कभी नहीं देखता कि टॉस में क्या मिला है, सीधे उन्हें विजेता घोषित कर दिया जाता है। इस दौरान कुछ मैचों के टॉस के भी वीडियो चलाए गए। फखर दुर्रानी नामक यूजर ने भी मैच फिक्स होने का दावा किया। कई अन्य पाकिस्तानी फैंस ने भी पूरे टूर्नामेंट के ही फिक्स होने का दावा किया।

बता दें कि पाकिस्तानी फैंस द्वारा इस तरह की उलटे-सीधे बातें करने के पीछे का कारण ये है कि उनकी टीम 9 में से 5 मैच हार कर लीग फेज से ही बाहर हो गई। ऊपर से PCB ने बाबर आज़म को कप्तान पद से हटा कर टेस्ट मैचों में शान मसूद को और T20 मैचों की कप्तानी शाहीन अफरीदी को दे दी। पाकिस्तानी टीम अपने ही पूर्व खिलाड़ियों की आलोचना का शिकार हो रही है। ऐसे में टीम के लोग बौखलाए हुए हैं। पाकिस्तानियों को इतना भी पता नहीं है कि हमेशा मेजबान टीम के कप्तान सिक्के को उछालते हैं।

तेरे नाम से मुझको दुनिया वाले जानेंगे… मोहम्मद शमी की बीवी हसीन जहां ने दिखाया ‘प्योर लव’ , नेटीजन्स बोले- मर जाना, ऐसी लड़की से शादी मत करना

वर्ल्ड कप 2023 के सेमीफाइनल्स में मोहम्मद शमी के धुआँधार प्रदर्शन के बाद जहां पूरा देश उनकी गेंदबाजी की तारीफ करते नहीं थक रहा, वहीं उनकी बीवी हसीन जहां का भी एक वीडियो इंस्टाग्राम पर सामने आया है। इस वीडियो में वो एक गाने पर लिप्सिंग करते और शर्माते हुए नजर आ रही हैं। वीडियो के कैप्शन में लिखा है- “प्योर लव।”

जिस गाने पर शमी की बीवी ने वीडियो बनाया है। उसके लिरिक्स हैं- “तेरे नाम से ही मुझको दुनिया वाले जानेंगे। तेरी सूरत देखकर ही लोग मुझे पहचानेंगे।”

हसीन जहां की रील देखने के बाद अब मोहम्मद शमी के फैंस ताबड़तोड़ कमेंट कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा- शमी भाई के नाम से अब तुझे कोई नहीं जानता।

एक ने लिखा- जिसके ऊपर बीवी का प्रेशर न हो वो बहुत तेज गेंद फेंकता है, अब आप मोहम्मद शमी को ही देख लो।

एक यूजर ने जवाब दिया- वैसे भी लोग तुझे शमी भाई के नाम से ही जानते हैं बाकी तेरे को कौन जानता है।

अभिषेक श्रीवास्तव लिखते हैं- पछतावा तो बहुत हो रहा होगा न तुमको।

गुड्डू भाई ने लिखा- ठुकरा के मेरा प्यार मेरा इंतकाम देखेगी।

संजीव ने कहा- सिंगल मर जाना लेकिन ऐसी लड़की से शादी मत करना।

हिमांशु ने लिखा- इसकी शख्स को विकेट समझ के शमी भाई बॉल डालते हैं।

बता दें कि शमी के शानदार पर्फॉर्मेंस के बाद हसीन जहां ने सोशल मीडिया पर एक और वीडियो पोस्ट की है। इसमें एक मौलवी बताता नजर आ रहा है कि जब आपको पता है और आपका जमीर अंदर से गवाही दे रहा है कि आप सही हो तो भाड़ में जाए दुनिया।

इस वीडियो पर भी शमी के फैंस ने आकर हसीन जहां को ट्रोल किया। लोगों ने कहा- तुम भाड़ में जाओ, शमी इंडिया की शान है, आप बताओ आपने देश के लिए क्या किया है।

एक ने हिदायत दी- अभी भी वक्त है तुम्हारे पास उससे माफी माँग लो, शायद तुम्हें माफ कर दे। दूसरे यूजर ने लिखा- शमी रॉक एक्स वाइफ शॉक्ड।

गौरतलब है कि आज हसीन जहां भले ही शमी का नाम लिए बिना ऐसे गानों पर वीडियो डाल रही हों कि लोग उन्हें शमी से जोड़े, लेकिन कुछ दिन पहले इन्हीं हसीन जहां के बोल कुछ अलग थे। हसीन ने एक भैंसे की फोटो डालकर उसे ‘अमरोहा का भैंसा’ कहा था। लोगों ने यह देख उनपर कार्रवाई की माँग की थी क्योंकि शमी भी अमरोहा से हैं और वह लाइन एक तंज में कही गई थी।

10 साल में दिग्विजय सिंह ने कर दिया था बँटाधार, शिव’राज’ में बदल गया MP: कॉन्ग्रेस की ‘बीमारू’ कमाई, BJP ने बदली तस्वीर

मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव में शुक्रवार (17 नवंबर 2023) को 230 सीटों के लिए मतदान है। राज्य के मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग कर मध्य प्रदेश के साथ-साथ भाजपा और कॉन्ग्रेस के भाग्य का भी फैसला करेंगे। यहाँ कॉन्ग्रेस के दिग्विजय सिंह के शासन और भाजपा के शिवराज सिंह चौहान के शासन के बीच का विश्लेषण किया गया है।

2003 के बाद से GDSP में 16 गुना और प्रति व्यक्ति आय में 10 गुना वृद्धि

मध्य प्रदेश के आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2003-04 में जीएसडीपी 85,530.48 करोड़ रुपए दर्ज की गई थी। वहीं, प्रति व्यक्ति आय लगभग 13,465 रुपए थी। इसके विपरीत, इस वर्ष 2023 के बजटीय विश्लेषण में जीएसडीपी लगभग 13,87,117 करोड़ रुपए होने का अनुमान है।

अगर इसी वर्ष में प्रति व्यक्ति आय की बात करें तो यह बढ़कर 1,40,583 रुपए हो गई है। इस तरह मध्य प्रदेश की जीएसडीपी में 16 गुना से अधिक की जबरदस्त वृद्धि देखी गई है। वहीं, प्रति व्यक्ति आय में भी लगभग दस गुना वृद्धि देखी गई है।

इसके अलावा, मध्य प्रदेश ने वित्तीय वर्ष 2022-23 में लगभग 16.43 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर दर्ज की गई है, जो कि कोविड के कारण उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद यह बेहतर प्रदर्शन है। पिछले वित्त वर्ष 2021-22 में विकास दर करीब 18.02 फीसदी रही थी।

इसी प्रकार, 2003 के बाद से आर्थिक विकास दर में वृद्धि अक्सर दोहरे अंक रही है। इसके विपरीत, वित्तीय वर्ष 2002-03 के दौरान, जीएसडीपी वृद्धि दर नकारात्मक (-) 4.01 प्रतिशत थी। इसमें उतार-चढ़ाव होता रहा। इन आँकड़ों से वर्ष-दर-वर्ष के आधार पर तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के एक दशक लंबे कार्यकाल के दौरान अनियमित सरकारी नीतियों का संकेत मिलता है।

वित्त वर्ष 2023-24 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 55,708 करोड़ रुपए (जीएसडीपी का 4%) है, जबकि 2002-03 में यह लगभग 4,062 करोड़ रुपए (जीएसडीपी का 5.29%) था। वित्तीय वर्ष 2003-04 में सकल ऋण जीएसडीपी का 33.71 प्रतिशत था, जो 2023-24 में घटकर 30.4 प्रतिशत रह गया है।

यहाँ ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि पूंजीगत व्यय 19 गुना बढ़ने के बावजूद debt-to-GSDP में कमी आई है। यह 2023-24 में लगभग 54,056 करोड़ रुपए होने का अनुमान है, जो लगभग 2003-04 में 2,838 करोड़ रुपए था। इसी तरह, मध्य प्रदेश वर्ष 2002-03 में का कर राजस्व मात्र 6,805 करोड़ रुपए था। साल 2023-24 में इसमें लगभग 13 गुना वृद्धि देखी गई है और इसे लगभग 86,500 करोड़ रुपए होने का अनुमान है।

इसी तरह, किसी भी राज्य के स्वास्थ्य मापदंडों के संकेतक मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) और शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) जैसे सूचकांकों में भी काफी सुधार हुआ है। 2001-2003 के बीच किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, राज्य का एमएमआर लगभग 379 था। 2019 में ही इसमें लगभग 57% की गिरावट देखी गई।

साल 2017-19 में मातृ मृत्यु लगभग 163 था। इसी तरह मध्य प्रदेश ने भाजपा शासन के दौरान शिशु मृत्यु दर (प्रति 1,000 जीवित जन्म) को कम करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। साल 2003 में यह लगभग 82 के उच्चतम स्तर था, जो देश में सबसे खराब स्थानों में से एक था। साल 2020 में यह दर लगभग आधी यानी 43 रह गई है।

इसी प्रकार, मध्य प्रदेश की कृषि विकास दर वर्ष 2002 में 3 प्रतिशत थी जो हाल के वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ 19 प्रतिशत हो गई है। इसके अतिरिक्त, सिंचाई क्षमता में 585 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जो 2003 में 7 लाख 50 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 45 लाख हेक्टेयर को पार कर गई है।

इसी तरह, औद्योगिक विकास दर की बात करें तो यह साल 2001-02 में मात्र 0.61 प्रतिशत थी, जो अब प्रभावशाली ढंग से बढ़कर 24 प्रतिशत हो गई है। शिवराज सिंह चौहान के शासन में मध्य प्रदेश ने वर्ष 2022 में 7वीं बार ‘कृषि कर्मण्य पुरस्कार’ जीता है। यह पुरस्कार गेहूँ, धान, दालें, बाजरा आदि फसलों के उत्पादन के लिए दिया जाता है।

इसके अलावा, कृषि निधि के उच्चतम उपयोग के लिए मध्य प्रदेश को ‘बेस्ट परफॉर्मिंग स्टेट’ का भी पुरस्कार भी मिला है। चौहान सरकार ने लगभग 5 लाख शहरी छोटे व्यवसायों को 521 करोड़ रुपए से अधिक का ऋण वितरित करके अन्य राज्यों को पछाड़ा है। इसके साथ रेहड़ी-पटरी पर व्यवसाय करने वाले लोगों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएँ लागू की गई हैं।

केंद्र सरकार की किसान सम्मान निधि के माध्यम से मिलने वाले 6,000 रुपए के अलावा मध्य प्रदेश सरकार किसान कल्याण योजना के तहत राज्य को किसानों को 4,000 रुपए वार्षिक देती है। इस तरह लाभार्थी किसानों को साल में कुल 10,000 रुपए की वित्तीय सहायता मिल जाती है।

अहर राजनीतिक परिदृश्य पर विचार किया जाए तो मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा की परिवर्तनकारी शासन का महत्व और भी बढ़ जाता है। सीएम चौहान ने 30 नवंबर 2005 को मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था। इसके बाद उन्होंने एक ऐसी भूमिका में कदम रखा, जिसमें उन्होंने उमा भारती की जगह लेते हुए क्रांतिकारी परिवर्तन किए।

शिवराज सिंह चौहान की प्रभावी डिलीवरी और शासन शैली ने उन्हें 2018 तक लगातार तीन कार्यकाल तक सेवा प्रदान करने में मदद की। साल 2018 के विधानसभा चुनावों में रिकॉर्ड चौथी बार सरकार बनाने से चूकने के बावजूद शिवराज सिंह चौहान 23 मार्च 2020 को सत्ता में फिर लौट आए। इस तरह मध्य प्रदेश के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड बना डाला।

साल 1993 से 2003 तक कॉन्ग्रेस सरकार में दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री थे। एक दशक लंबे कार्यकाल के दौरान राज्य को ‘बीमारू’ राज्य का कुख्यात उपनाम मिला। BIMARU बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश का संक्षिप्त रूप है। ये राज्य विकास और सुशासन के प्रमुख मापदंडों को पूरान नहीं करने वाले राज्य हैं।

कल्याणकारी योजनाएँ एवं प्रभावी वितरण

अपने प्रारंभिक कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने अपने चुनावी वादों को पूरा किया। ये वादे ‘बिजली, सड़क और पानी’ से संबंधित थे। अपने प्रभावी कार्यान्वयन से उन्होंने दो बार सत्ता विरोधी लहर को मात दी। इसके साथ ही उन्होंने अपने कार्यकाल के शुरुआत में विद्रोह को दबाने के लिए मतदाताओं के साथ-साथ पार्टी नेताओं का भी विश्वास हासिल किया।

इसके लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कल्याणकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन पर बल दिया। पिछले साल सितंबर में उन्होंने दो दर्जन योजनाओं के लाभार्थियों के नामांकन की सुविधा और उनके वितरण में खामियों को दूर करने के लिए जनसेवा अभियान शुरू किया।

अपनी लो प्रोफ़ाइल और उदार छवि के साथ सर्व सुलभ मुख्यमंत्री चौहान ने राज्य में कल्याणकारी योजनाएँ लागू कीं। इसमें प्रमुख महिला सशक्तीकरण को लेकर शुरू की गई लाडली लक्ष्मी योजना और कन्यादान योजना भी शामिल है। उन्होंने ‘मामा’ उपनाम अर्जित किया और महिला मतदाताओं अपनी जबरदस्त पकड़ बनाई।

दरअसल, लाडली लक्ष्मी योजना लड़कियों के जन्म को लेकर लोगों में सकारात्मक धारणा पैदा करने के लिए शुरू गई थी। यह एक सरकार द्वारा प्रायोजित बीमा योजना है, जो लड़की को 21 वर्ष की आयु तक पहुँचने पर 1 लाख रुपए की राशि देती है। इसमें प्रमुख शर्त ये है कि लड़की की शादी कानूनी उम्र 18 साल से पहले नहीं होनी चाहिए।

महिलाओं की कल्याण योजना में नकद प्रोत्साहन योजना भी शामिल है, जो उन्हें अस्पताल में प्रसव कराने के लिए प्रोत्साहित करती है। इस पहल से अस्पताल में प्रसव कराने में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। इस योजना के कारण यह दर 26 से बढ़कर 70 प्रतिशत हो गई। इन महिला-केंद्रित योजनाओं से साक्षरता दर और एमएमआर और आईएमआर जैसे स्वास्थ्य मापदंडों में सुधार करने में लाभ मिला।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में मध्य प्रदेश में जबरदस्त विकास हुआ। उन्हें विरासत में खस्ताहाल खजाना, पटरी से उतरती अर्थव्यवस्था, अव्यवस्थित शासन, ढहता बुनियादी ढाँचा मिला था। इन चुनौतियों के बावजूद उन्होंने राज्य में एक उल्लेखनीय परिवर्तन किया। इस कारण से मध्य प्रदेश पर से कुख्यात ‘बीमारू’ टैग हट गया है।

मजदूरों को निकालने उत्तरकाशी पहुँची 40000 Kg की अमेरिकी मशीन, थाईलैंड-नार्वे से भी मदद: सुरंग में 5 दिन से अटकी है 40 जिंदगी

उत्तराखंड के उत्तरकाशी स्थित एक निर्माणाधीन सुरंग में रविवार (12 नवंबर, 2023) 40 मजदूर फँस गए। 5 दिनों से ये मजदूर वहीं फँसे हुए हैं, उन्हें पाइप के माध्यम से ऑक्सीजन और भोजन पहुँचाया जा रहा है, उन्हें निकाले जाने के लिए कोशिश चल रही है। राहत कार्य की प्रक्रिया में देरी हो रही है, क्योंकि भूस्खलन और इस्तेमाल किए जा रहे मशीन के कारण समस्या आ रही है। ये सुरंग सिल्क्यारा और डंडलगाँव के बीच बनाई जा रही थी। ब्रह्मखाल-यमुनोत्री राजमार्ग पर इसका निर्माण किया जा रहा है।

उत्तरकाशी में घटनास्थल पर ‘हमारे आदमी निकालो’ के नारे लगाते हुए इस घटना में फँसे मजदूरों के साथी मजदूरों ने विरोध-प्रदर्शन भी किया। मजदूरों और उनके परिजन इस बात से नाराज़ हैं कि रेस्क्यू और रिलीफ के लिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बनाई गई। भूस्खलन के कारण सुरंग का एक हिस्सा ढह गया और ये 40 मजदूर फँस गए थे, उसके बाद से ही ये ऑपरेशन चल रहा है। पाइप के माध्यम से उन्हें ऑक्सीजन-भोजन ही नहीं, बल्कि दवाएँ भी भेजी जा रही हैं।

भूस्खलन के कारण वहाँ के पत्थर कमजोर हो रहे हैं और रेस्क्यू ऑपरेशन में इसी कारण दिक्कत आ रही है। मंगलवार को एक और भूस्खलन हुआ था। रेस्क्यू में लगे 2 अन्य मजदूर भी घायल हो गए, जिनका अस्पताल में इलाज किया गया। हिमालय के क्षेत्र में सामान्यतया सॉफ्ट रॉक ही मिलते हैं। जिस इलाके में ये घटना हुई वहाँ के पत्थर कमजोर हैं और टूटे-फूटे हैं। इस कारण खुदाई में समस्या आती है। मजदूरों को निकालने के लिए स्टील के बड़े-बड़े पाइप लगाए जाने की प्रक्रिया चल रही है।

इस प्रक्रिया को ‘ट्रेंचलैस तकनीक’ कहते हैं। इस पाइप के माध्यम से मजदूरों को रेंगते हुए बाहर निकाले जाने की योजना है। अधिकारियों ने बताया कि जो मशीन मँगाई गई है वो पुरानी है। इसके बाद नई मशीन मँगाई जा रही है। 800-900 मिलीमीटर के पाइप लगाए जा रहे हैं। नए मशीनों से नई प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी। इसके तहत 125 mm के पाइल के माध्यम से हवा-पानी-भोजन भेजा जा रहा है। साथ ही कम्युनिकेशन के लिए कैमरा वगैरह लगाया जा रहा है।

ये पाइप 12 मेटे डाली जा चुकी है। अमेरिका में बना ड्राई ड्रिलिंग उपकरण इसके लिए मँगाया भी जा रहा है। अगर ये प्रक्रिया सफल नहीं रही तो फिर पारंपरिक खुदाई के माध्यम से ‘पाइप रूफ अम्ब्रेला मेथड’ का इस्तेमाल किया जाएगा। रोज 10 मीटर के हिसाब से 5-6 दिन में एक पूरा का पूरा टनल बनाया जाएगा। एक परिजन ने अंदर फँसे अपने परिवार वाले से बात कर के बताया कि उन्हें नियमित रूप से भोजन वगैरह मिल रहे हैं। वहीं कुछ इस बात से चिंतित हैं कि कोई समयसीमा नहीं दी जा रही है।

आखिर इस सुरंग में ऐसी स्थिति कैसे पैदा हुई? विशेषज्ञ कह रहे हैं कि निर्माण से पहले ठीक तरीके से जाँच-परख नहीं की गई, ये एक कारण हो सकता है। सर्वे और इन्वेस्टीगेशन में समय लगता है, पैसा भी लगता है – ऐसे में क्या प्रोटोकॉल्स का ठीक से पालन नहीं किया गया जल्दी-जल्दी परियोजना पूरा करने के चक्कर में? इसी में पर्यावरण एक्टिविस्ट भी सक्रिय हो गए हैं और कह रहे हैं कि पहाड़ों में कंस्ट्रक्शन का काम इतनी अधिक मात्रा में नहीं होनी चाहिए।

‘राष्ट्रीय राजमार्ग और अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड’ (NHIDCL) ने भारतीय वायुसेना से भी मदद माँगी है। उधर 25 टन भारी अमेरिकी ड्रिलिंग मशीन भी दिल्ली से चिन्यालीसौर एयरस्ट्रिप तक लाया जा चुका है। इस मशीन को वहाँ इनस्टॉल करने में भी 4 घंटे के आसपास लगेंगे। थाईलैंड की गुफा में फँसे 12 युवकों को निकालने वाले कर्मियों से भी संपर्क किया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री जनरल (रिटायर्ड) VK ने भी घटनास्थल पर पहुँच कर स्थिति का जायजा लिया। थाईलैंड और नॉर्वे के विशेषज्ञों से भी ऑनलाइन मदद ली जा रही है।

वीके सिंह ने बताया कि 2 किलोमीटर के क्षेत्र में ये मजदूर फँसे हुए हैं। उन्होंने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी इस प्रक्रिया में लगे हुए हैं। उन्होंने बताया कि नई मशीन की शक्ति और गति ज़्यादा है। उन्होंने 2-3 दिन में रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने की उम्मीद जताई और सभी विकल्पों के इस्तेमाल की बात कही। उन्होंने कहा कि अन्य देशों के विशेषज्ञों और भारत की रेलवे, माइनिंग जैसी एजेंसियों की मदद ली जा रही है।

कनाडा ने सबूत दिए नहीं, जाँच कैसे करें: आतंकी निज्जर की हत्या पर विदेश मंत्री एस जयशंकर की दो टूक, बोले- हिंसक विचारों को दे रहा जगह

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लंदन में अपनी पाँच दिवसीय यात्रा के बीच बुधवार (15 नवंबर 2023) को एक कार्यक्रम के दौरान कनाडा के मुद्दे पर बात की। उन्होंने आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या मामले में भारतीय एजेंटों पर लग रहे आरोपों को लेकर कनाडा सरकार से सबूत माँगे। उन्होंने कहा कि भारत किसी भी प्रकार की जाँच से इनकार नहीं कर रहा है। लेकिन जाँच करवाने के लिए भारतीय एजेंटों के खिलाफ कुछ सबूत तो दिए जाएँ।

उन्होंने कार्यक्रम में कहा, “कनाडा में, हमें लगता है कि कनाडाई राजनीति ने हिंसक और अतिवादी राजनीतिक विचारों को जगह दी है जो हिंसक तरीकों सहित भारत से अलगाववाद की वकालत करते हैं। इन लोगों को कनाडा की राजनीति में शामिल किया गया है। उन्हें अपने विचार व्यक्त करने की आजादी दी गई है।”

एस जयशंकर कहते हैं, “बोलने की आजादी और अभिव्यक्ति की आजादी एक निश्चित जिम्मेदारी के साथ आती है। उन स्वतंत्रताओं का दुरुपयोग और राजनीतिक उद्देश्यों के लिए उस दुरुपयोग को बर्दाश्त करना बहुत गलत होगा। देखिए, यदि आपके पास ऐसा आरोप लगाने का कोई कारण है, तो कृपया हमारे साथ सबूत साझा करें। हम जाँच से इनकार नहीं कर रहे है। मगर उन्होंने अभी तक सबूत ही नहीं दिए।”

बता दें कि साल 2020 में भारत द्वारा हरदीप सिंह निज्जर को आतंकी घोषित किया गया था। 18 जून को हुई उसकी हत्या के बाद खालिस्तानी इसका इल्जाम भारतीय एजेंटों को देने लगे, लेकिन उस पर कोई सबूत नहीं दिया। पिछले दिनों सिख फॉर जस्टिस के गुरपतवंत सिंह पन्नू ने इसे लेकर सिटिजन अरेस्ट की माँग उठाई थी और भारतीय राजनयिकों के खिलाफ कनाडाइयों को भड़काया था

उससे पहले कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो देश की संसद में बयान देकर भारत सरकार पर आरोप लगाया था कि निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों का हाथ है। इसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव पैदा हो गया था। उस समय भारत ने ट्रूडो के आरोपों को बेतुका और प्रेरिक बताकर एक सिरे से खारिज कर दिया था।

‘इंशाल्लाह, अल्लाह मेरी दुआ सुनेगा… न्यूजीलैंड जीतेगा’: ट्विटर पर बांग दे रही थी पाकिस्तान की महिला ‘पत्रकार’, मैदान में आ गया मोहम्मद शमी का तूफान

सेमीफाइनल का खेल हुआ भारत और न्यूजीलैंड का। रोमांच भारतीयों, न्यूजीलैंड के फैंस के बीच चरम पर था। लेकिन रो पाकिस्तान रहा था! इसलिए नहीं कि पाकिस्तानी टीम क्यों क्रिकेट वर्ल्ड कप 2023 से बाहर हो गई बल्कि इसलिए कि भारत क्यों बढ़िया खेल रही है, क्यों जीत रही है!

हरीम शाह। महिला ‘पत्रकार’ है। है लेकिन पाकिस्तान की। मानसिकता भी पाकिस्तानी ही है। भारत को लेकर एकदम कट्टर है। भारत की हार इसका एकमात्र मकसद है। यह अकेली ऐसी है, ऐसा भी नहीं है।

भारत की हार के लिए दुआ करती हरीम शाह

अल्लाह से दुआ कर रही थी। क्यों? न्यूजीलैंड की जीत के लिए, भारत को हराने के लिए। सफेद हिजाब, हरे रंग की नेल-पॉलिश, थ्रेडिंग कराए सुंदर आईब्रो, लाल लिपस्टिक लगा कर हरीम शाह ने अपनी एक फोटो ट्वीट की। साथ में लिखती है:

“इंशाल्लाह, अल्लाह मेरी दुआ सुनेगा, सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड जीतेगा।”

खैर! जीत भारत की हुई। अल्लाह ने पाकिस्तान महिला ‘पत्रकार’ हरीम शाह की दुआ कबूल नहीं की। शायद बिजली के संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में लाउडस्पीकर नहीं बज पाया होगा और अल्लाह तक आवाज नहीं पहुँची होगी! हो यह भी सकता है कि इस्लाम में जिन-जिन चीजों की मनाही (नेल-पॉलिश, आईब्रो की थ्रेडिंग, लिपस्टिक और हाँ… फोटो भी) है, हरीम ने उन सब का सहारा लेकर ट्वीट किया! जो भी बनी वजह… जीत भारत की हुई!

वर्ल्ड कप 2023 से पाकिस्तान की टीम बाहर हो चुकी है। उनके खिलाड़ियों ने बढ़िया प्रदर्शन नहीं किया। पाकिस्तानी अगर क्रिकेट-प्रेमी होते तो वहाँ के लोग अपनी टीम का सपोर्ट करते, वर्ल्ड कप के बाकी मैचों को आराम से देखते, खेल का मजा लेते। लेकिन नहीं! वो कभी ऐश्वर्य राय पर ओछी टिप्पणी कर रहे, कभी नीना गुप्ता और विवियन रिचर्ड्स के वीडिया वायरल कर रहे।

जब सारे पाकिस्तानी ऐसी हरकत कर रहे, तो हरीम शाह कैसे पीछे रहती। ट्वीट ठेल दिया। लेकिन हुआ क्या? पागलपन वाले ट्वीट के कारण अपने ही मजहब को गाली दिलवा रही। ‘पत्रकार’ हुई तो क्या, विषय को सोच-समझ कर लिखेगी-बोलेगी? जिस मानसिकता से पाकिस्तान का जन्म हुआ, उसी मानसिकता की पैदाइश है हरीम शाह!

वैसे हरीम शाह कौन हैं, यह जानना भी दिलचस्प है। कभी इसी हरीम ने पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख रशीद का एक वीडियो वायरल किया था। इस वीडियो में वो रेल मंत्री से कहती हैं:

“क्या अल्लाह मालिक है, आप नंगा होके मुझे दिखाते थे। वीडियो पे गलत-गलत किस्म की हरकतें करते थे।”

भारत ने न्यूजीलैंड को क्रिकेट वर्ल्ड कप 2023 के पहले सेमीफाइनल में हरा दिया है। 70 रन से। इस जीत के कई सारे हीरो रहे। सबने भारत की जीत में योगदान दिया। टीम को टीम-गेम की तरह खेला। न्यूजीलैंड ने खराब खेला, ऐसा भी नहीं है! सेमीफाइनल में पहुँचने वाली टीम की तरह बैटिंग में अटैक किया, लेकिन भारत की टीम ने शानदार खेल दिखाते हुए फाइनल में अपनी जगह बना ली।

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रोहित शर्मा ने कोहली, गिल, शामी और केएल राहुल के अलावा केन विलियमसन और डेरिल मिशेल के शानदार खेल की तारीफ की। खेल को खेल भावना से खेलने के कारण ही रोहित शर्मा यह कर पाए। केन विलियमसन ने भी यही किया। शानदार और जज्बे के साथ लड़ते हुए हारे लेकिन हँसते हुए विरोधी टीम को जीत की बधाई दी, उनके खेल को सराहा। पाकिस्तानियों को लेकिन क्रिकेट से क्या लेना-देना? उनको तो बस हिंदू, हिंदू देश को हराना है या हारते देखना है… अफसोस यह हो न सका!