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असम में सरकारी डॉक्टरों की नियुक्ति, 64% मुस्लिम: जानिए वायरल दावे का क्या है सच

असम को लेकर सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्मों पर एक संदेश वायरल हो रहा है। इसमें दावा किया जा रहा है कि असम में हाल ही में नियुक्त किए गए डॉक्टरों में से अधिकांश अल्पसंख्यक हैं। दावे के साथ डॉक्टरों की तीन पन्नों की डॉक्टरों की नियुक्ति की एक सूची भी शेयर की जा रही है। इसमें कहा गया है कि असम लोक सेवा आयोग ने हाल में 55 डॉक्टर नियुक्त किए हैं। इनमें से 34 अल्पसंख्यक (मुस्लिम) से हैं। यानी नियुक्त किए गए डॉक्टरों में 64% प्रतिशत संख्या मुस्लिम डॉक्टरों की है।

वायरल लिस्ट के नामों को देखने से भी ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकांश मुस्लिम नाम वाले डॉक्टर हैं। लेकिन यह दावा भ्रामक है। दरअसल जो लिस्ट वायरल की जा रही है, वह असम में नवनियुक्त डॉक्टरों की चयन सूची नहीं है। यह स्थानांतरण सूची है। असम सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से जारी आदेश में पहले के एक आदेश को संशोधित किया गया है। इसके अनुसार 19 जनवरी, 2023 को जारी नोटिफिकेशन संख्या 1/2023/94 में आंशिक संशोधन करते हुए नव नियुक्त चिकित्सकों को तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक उनके नाम के साथ अंकित स्थान पर नियुक्त किया जाता है। सूची का मूल पीडीएफ यहाँ देख सकते हैं।

वायरल लिस्ट का स्क्रीन शॉट

नए आदेश के अनुसार 55 चिकित्सकों को पहले नियुक्त किए गए स्थान से ट्रांसफर किया गया है। इसलिए इस सूची में केवल उन्हीं डॉक्टरों को शामिल किया गया है, जिनकी नियुक्ति दूसरे स्थानों पर की जा रही है। इस सूची में 64% मुस्लिम नाम हैं। नए आदेश में 19 जनवरी, 2023 के पूर्व के एक नियुक्ति संबंधी आदेश का जिक्र है। 19 जनवरी को जारी आदेश के अनुसार असम में नए 541 चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (Medical and Health Officers) की नियुक्ति की गई थी। उस आदेश का पीडीएफ यहाँ देख सकते हैं।

19 जनवरी को जारी 541 डॉक्टरों की नियुक्ति सूची में उनके धर्म का उल्लेख नहीं है। ऑपइंडिया ने बहाल डॉक्टरों के नाम और उपनाम के आधार पर उनके धर्म का पता लगाने की कोशिश की। लिस्ट के नामों की विवेचना के अनुसार हमें नवनियुक्त 541 चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों-1 में 183 मुस्लिम नाम वाले डॉक्टर मिले। इसका अर्थ है कि राज्य में नियुक्त डॉक्टरों में लगभग 34% मुस्लिम हैं, न कि 64 प्रतिशत।

बता दें लिस्ट में शामिल नाम के आधार पर धर्म का पता लगाने में कुछ त्रुटियाँ हो सकती हैं। हालाँकि असम में मुस्लिमों के नाम और उपनाम देश के दूसरे राज्यों की तुलना में आसानी से समझे जा सकते हैं, इसलिए त्रुटि होने की संभावना कम से कम है। लेकिन राष्ट्रीय हिस्सेदारी के हिसाब से डॉक्टरों की नियुक्ति में मुस्लिमों की 34 प्रतिशत हिस्सेदारी भी अधिक लगती है। राज्य के हिसाब से देखें तो असम में 34 प्रतिशत मुस्लिम हैं, इस अनुसार मुस्लिमों की नियुक्ति जनसंख्या के अनुसार सामान्य प्रतीत होती है।

यह दावा कि असम में नियुक्त नए सरकारी डॉक्टरों में से 64% अल्पसंख्यक हैं, गलत और भ्रामक है। इसी तरह यह दावा कि डॉक्टरों की नियुक्ति असम लोक सेवा आयोग द्वारा की गई है, यह भी गलत है। दोनों आदेशों में देखा जा सकता है कि यह नियुक्ति चिकित्सा एवं स्वास्थ्य भर्ती बोर्ड की सिफारिश पर असम सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग द्वारा की गई है।

साँस लेने में दिक्कत, हिलने-डुलने में तकलीफ, दर्द, पट्टियाँ… प्रभास की फिल्म की शूटिंग के दौरान घायल हुए अमिताभ बच्चन, ‘कुली’ के समय भी हुआ था हादसा

बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) हैदराबाद में अपनी अपकमिंग फिल्म ‘प्रोजेक्ट के’ (Project K) की शूटिंग के दौरान घायल हो गए। बिग बी ने रविवार (5 मार्च, 2023) को अपने ब्लॉग पर चोट लगने की जानकारी दी है। उनकी पसलियों में चोट आई है। फिल्म की शूटिंग कैंसिल कर दी गई है। हैदराबाद के एआईजी अस्पताल में अमिताभ का चेकअप कराने के बाद उन्हें मुंबई भेज दिया गया है।

अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में लिखा, “हैदराबाद में ‘प्रोजेक्ट के’ की शूटिंग के दौरान एक एक्शन शॉट करते हुए मुझे चोट लग गई है। रिब कार्टिलेज फट गया है। दाहिनी रिब केज की मांसपेशियों में खिंचाव आ गया है। शूटिंग कैंसिल कर दी गई है। टीम के लोग मुझे हैदराबाद के एआईजी अस्पताल में ले गए। वहाँ डॉक्टरों ने मेरा सीटी स्कैन कराया और अब मैं अपने घर वापस आ गया हूँ। पट्टी बाँधी गई है और इलाज किया जा रहा है। काफी ज्यादा दर्द हो रहा है। हिलने-डुलने में तकलीफ हो रही है। साँस लेने में भी दिक्कत आ रही है। इस दर्द के लिए मुझे कुछ दवाएँ दी गई हैं। ठीक होने में अभी कुछ हफ्ते लगेंगे।”

अमिताभ बच्चन के ब्लॉग का स्क्रीनशॉट

​​​​​​बिग बी ने आगे लिखा, “जब तक मैं ठीक नहीं हो जाता, तब तक के लिए सभी काम रद्द कर दिया गया है। मैं जलसा में आराम कर रहा हूँ। मोबाइल पर उपलब्ध रहूँगा, लेकिन ज्यादातर बेड रेस्ट पर ही रहूँगा। जरूरी चीजों के लिए ही थोड़ा बहुत चलूँगा। मेरे लिए यह कहना काफी मुश्किल है, पर मैं आज जलसा के गेट पर अपने चाहने वालों से नहीं मिल पाऊँगा। मेरी सलाह है कि आप यहाँ ना आएँ। आप उन लोगों को भी यह बात बता दें, जो जलसा आने की योजना बना रहे हैं। इसके अलावा बाकी सब ठीक है।”

गौरतलब है कि 1982 को बेंगलुरु में फिल्म ‘कुली’ की शूटिंग के दौरान एक एक्शन सीन करते हुए अमिताभ बच्चन के पेट की झिल्ली और छोटी आँत फट गई थी। दरअसल, उस सीन में पुनीत इस्सर को अमिताभ बच्चन के पेट पर पंच मारना था, लेकिन गलती से यह पंच ज्यादा तेज से लग गया, जिससे के बाद अमिताभ की हालत गंभीर हो गई। उन्हें आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया। इस हादसे से बाद अमिताभ 61 दिन तक अस्पताल में जिंदगी और मौत से लड़े थे। एक समय पर डॉक्टर्स ने भी जवाब दे दिया था। तब उनके फैंस बिग बी के ठीक होने की दुआएँ माँग रहे थे। बताया जाता है कि तब अमिताभ बच्चन लगभग कोमा में चले गए थे।

बता दें कि ‘प्रोजेक्ट के’ एक फैंटेसी ड्रामा है, जिसमें साउथ के सुपरस्टार प्रभास एक नए अवतार में नजर आएँगे। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन के अलावा दीपिका पादुकोण भी अहम भूमिका में हैं। ‘प्रोजेक्ट के’ 2024 में सिनेमाघरों में रिलीज हो सकती है।

‘एक मोहल्ला, एक होलिका’ का ज्ञान देने वाले ईद पर ‘एक मोहल्ला, एक बकरा’ वाली सलाह देंगे? – हिन्दू त्योहारों पर ज्ञान बाँचने का चलन फिर शुरू, लिबरल गिरोह एक्टिव

होली आ गई है। होली, मतलब रंग-गुलाल का त्योहार। हिन्दू त्योहार। अब चूँकि त्योहार हिन्दुओं का है, इसीलिए इस पर हंगामा मचाया जाना और इसके प्रति घृणा फैलाई जानी तो स्वाभाविक है। ऐसा करने वाले वामपंथी होते हैं, जिनका साथ कट्टर इस्लामी लोग बखूबी देते हैं। हिन्दू त्योहारों के खिलाफ प्रोपेगंडा में मीडिया, बुद्धिजीवी और सेलेब्रिटीज का एक पूरा का पूरा गठबंधन शामिल रहता है। होली को लेकर भी समय-समय पर ज्ञान दिए जाते रहे हैं।

ये कोई नई बात भी नहीं है। होली को लेकर पहले भी ज्ञान दिया जाता रहा है। जैसे, होली आते ही सब ‘वॉटर एक्टिविस्ट’ बन जाते हैं और पानी बचाने की बातें करने लगते हैं। ऐसे सेलेब्रिटी जो अपने घर में स्विमिंग पूल में नहा-नहा कर रोज हजारों लीटर पानी बर्बाद करते हैं, वो भी होली पर पानी बचाने का ज्ञान देते नजर आते हैं। कभी ‘सूखी होली’ खेलने को कहा जाता है तो कभी केवल फूलों का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।

जब रंग ही गायब हो जाए तो होली कैसी? अब ‘दैनिक जागरण’ के एक विज्ञापन को देखिए। ये स्पष्ट नहीं है कि ये विज्ञापन कब का है, लेकिन ये होलिका दहन को लेकर ही है। ‘दैनिक जागरण की पहल’ के नाम पर अख़बार ‘एक मोहल्ला, एक होलिका’ नाम से एक विज्ञापन लेकर आ गया। इसमें उसने लिखा, “इस बार होली पर प्रयास करें कि थोड़ी दूर पर अलग-अलग होलिका जलाने की जितना जगह हो सके, एक मोहल्ले में एक ही होलिका जलाएँ। इससे प्रदूषण घटेगा, अपमापन बढ़ेगा।” साथ ही कुछ ‘दिशानिर्देश’ भी दिए गए।

ईद-क्रिसमस पर जम कर बधाइयाँ देने वाली मीडिया होली पर जम कर हिन्दुओं को नीचा दिखाती है। ‘दैनिक जागरण’ ने भी हिन्दुओं को ये सलाह दिया – यातायात बाधित न करें, इससे हमें और आपको ही परेशानी होगी, हाईटेंशन व अन्य तारों को बचाएँ, लकड़ी की जगह उपलों का प्रयोग करें, ताकि बचे रहें हमारे पेड़, ऐसा कोई सामान न जलाएँ जिससे पर्यावरण में प्रदूषण पैदा हो। क्या ईद-क्रिसमस पर ऐसे ज्ञान निकलते हैं?

अब जरा सोचिए। क्या ईद पर मीडिया लोगों को ये सलाह देती है कि एक मोहल्ले में एक ही बकरा काटें, क्योंकि जीव-जंतुओं की हत्या करना ठीक नहीं है? क्या ऐसे सलाह दिए जाते हैं कि जानवरों के खून को सड़क पर न बहाया जाए और बचे हुए मांस के टुकड़ों को सड़क पर न फेंका जाए? इससे तो बीमारी पैदा ही होती ही है। इस्लामी मुल्कों में सड़क पर खून की नदियाँ बहती दिखती हैं। ऐसे ही, ईद पर कभी ये ज्ञान नहीं दिया जाता कि सड़क जाम कर के नमाज न पढ़ें, इससे तो सचमुच यातायात बाधित होता है।

इसी तरह क्रिसमस और ईसाई नववर्ष के मौके पर कभी ये ज्ञान नहीं दिया जाता कि पटाखे न जलाएँ। दीवाली खत्म होते ही इस तरह का ज्ञान देने की तारीख़ एक्सपायर हो जाती है। क्रिसमस पर कभी आर्टिफिसियल पेड़ों को घर पर न लाने की सलाह नहीं दी जाती। कभी ये नहीं कहा जाता कि पार्टियों में पानी और भोजन बर्बाद न करें। उलटा और खुल कर जश्न मनाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि सारे पर्यावरण का ठेका हिन्दुओं ने ही ले रखा है जो प्रकृति की पूजा करते हैं।

क्या हम ‘दैनिक जागरण’ से ये पूछ सकते हैं कि अख़बारों के लिए कागज कैसे बनता है? इसके लिए पेड़ काटे जाते हैं या नहीं? क्या ‘दैनिक जागरण’ लोगों को ये सलाह देते हुए खबर प्रकाशित करेगा कि आप अखबर न खरीदें, क्योंकि इसके लिए जो कागज आता है वो पेड़ काट कर बनाया जाता है। लेकिन नहीं, जिन्हें ‘एक मोहल्ला, एक बकरा’ और ‘एक मोहल्ला, एक क्रिसमस ट्री’ लिखने की हिम्मत नहीं है, वो एक मोहल्ला, एक होलिका’ लिख रहे हैं।

होलिका दहन एक ऐसा त्योहार है, जिसे भक्त प्रह्लाद के राक्षसों के अत्याचार के बावजूद ज़िंदा बच जाने की कहानी कहता है। अब देखिए, एक यूट्यूबर और कथित महिला एक्टिविस्ट ने तो होलिका दहन को ही महिला विरोधी त्योहार बताते हुए पूछ दिया कि एक सभ्य समाज में स्त्री को ज़िंदा जलाना कहाँ तक उचित है? ऐसी बातें वही करते हैं, जिन्हें न तो हमारे पर्व-त्योहारों के पीछे का कॉन्सेप्ट पता है और न इसका इतिहास और इसकी कथा।

होलिका दहन के बारे में हिन्दुओं को पता है कि होलिका अपने मासूम भतीजे प्रह्लाद को ज़िंदा जलाने के लिए आग में बैठ गई थी, लेकिन वो जल गई और भक्त प्रह्लाद बच गए। अगर होलिका जलाना स्त्री-विरोधी है तो क्या हर साल रावण को दशहरा के मौके पर जलाए जाने को पुरुष विरोधी बता कर आंदोलन खड़ा कर दिया जाना चाहिए? स्त्रियों की जहाँ पूजा होती है, उस हिन्दू धर्म में इस तरह के पाश्चात्य वोक एक्टिविज्म की ज़रूरत ही नहीं है।

होली रंगों का त्योहार है। रंग और पानी के बिना इसे हम क्यों मनाए? ऐसे ही, महाशिवरात्रि पर दूध बचाने का ज्ञान दिया जाता है। दीवाली पर कहा जाता है कि दीये मत जलाओ और पटाखे मत उड़ाओ। दुर्गा पूजा कर हिन्दुओं को ये कह कर नीचा दिखाया जाता है कि भारत में बलात्कार होते हैं। गणेश चतुर्थी के मौके पर प्रतिमा जल में न विसर्जित करने को कहा जाता है। अर्थात, जितने हिन्दू त्योहार उतने ही किस्म के नए-नए ज्ञान।

त्योहार हमेशा से वैसे ही मनाए जाने चाहिए जैसा हमारे शास्त्रों पर वर्णित है और जैसे हमारे पूर्वज पूरे उत्साह के साथ मनाते रहे हैं। हिन्दू त्योहारों में न तो हिंसा के लिए कोई जगह है और न ही किसी और को नुकसान पहुँचाया जाता है। उत्सव के दौरान सब जश्न में डूबे रहते हैं, एक-दूसरे से मिलते हैं और ईश्वर की पूजा-अर्चना करते हैं। इसमें लिबरल गिरोह के ज्ञान के लिए कोई जगह नहीं है। गया की ज़रूरत जिन्हें है, उन्हें देने में इनकी हालत पस्त हो जाती है क्योंकि वो ‘सिर तन से जुदा’ कर देते हैं।

इसीलिए, खूब अच्छे से होली मनाइए। रंग लगाइए एक-दूसरे को। पानी में रंग घोल कर एक-दूसरे पर उड़ेलिए। हाँ, बस हमें ऐसे रंगों का प्रयोग नहीं करना है जिससे हमारा नुकसान हो जाए। ब्रज में फूलों की होली खेलिए, काशी में चिताभस्म की होली खेलिए और मोहल्ले में अबीर-गुलाल सबका प्रयोग कर के होली खेलिए। पकवान खाइए, पूजा-पाठ कीजिए और ज्ञान देने वाले को दिखा-दिखा कर ये सब कीजिए। कोई ‘दैनिक जागरण’ या फिर कोई ‘निर्देश सिंह’ ये डिसाइड नहीं कर सकते कि हिन्दू अपने त्योहार कैसे मनाएँ।

मेरठ में हिंदुओं पर मुस्लिम भीड़ का हमला, पथराव-तोड़फोड़: दावा- होलिका पर मारी लात, इस्लाम कबूलने को कहा

उत्तर प्रदेश के मेरठ में होलिका दहन के लिए चंदा वसूली के दौरान कहासुनी के बाद हालात बिगड़ गए। खबरों के मुताबिक होलिका दहन के लिए चंदा जमा कर रहे हिंदू युवकों पर मुस्लिमों के एक ग्रुप ने हमला कर दिया। इसके बाद दोनों तरफ से पत्थरबाजी शुरू हो गई। झड़प में 2 लोगों के जख्मी होने की खबर है। पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लिया है। इलाके में अब भी तनाव है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ब्रहमपुरी थाना क्षेत्र के हरिनगर मोहल्ले में 50 सालों से आयोजित होने वाले होलिका दहन के लिए स्थानीय निवासी अमित गुप्ता, सोनू प्रजापति और मुल्लू चंदा जमा कर रहे थे। आरोप है कि इलाके के पार्षद शहजाद मेवाती, उसका भाई भूरा बेटों (इंतजार, सेफू) समेत मौके पर पहुँचे और चंदा माँग रहे हिंदू युवकों पर छींटाकशी करने लगे। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शहजाद और उसके साथ आए लोगों ने चंदा माँगने वाले हिंदू युवकों से कहा, “हमसे भी चंदा ले लो और चंदा लेकर इस्लाम कबूल लो।” इस बात पर दोनों पक्षों में विवाद हो गया।

आपत्ति जताए जाने के बाद शहजाद और उसके साथियों ने हिंदू युवकों के साथ मारपीट शुरू कर दी। अमित और मुल्लू की बुरी तरह पिटाई की गई। इतना ही नहीं मुस्लिम उपद्रवियों ने होलिका को भी लात मार कर अपमानित किया। इस तरह इलाके में सांप्रदायिक तनाव फैल गया। करीबन आधे घंटे वहाँ दोनों पक्षों में पथराव हुआ, कई वाहन क्षतिग्रस्त किए गए। घटना की जानकारी मिलते ही ब्रहमपुरी थाना की पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस ने मामले में तीन लोगों को हिरासत में लिया है वहीं अमित और मुल्लू को गंभीर चोटें आने की बात कही जा रही है।

तनाव को देखते हुए मौके पर कई थानों की पुलिस तैनात की गई है। एसपी सिटी पीयूष सिंह का कहना है कि चश्मदीदों से पूछताछ की जा रही है और घटना की जानकारी ली जा रही है। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

‘जमीन के बदले नौकरी…’ : राबड़ी देवी के घर पड़ा CBI का छापा, अधिकारियों की 3 गाड़ी आवास पर पहुँचीं

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के घर आज (6 मार्च 2023) सीबीआई का छापा पड़ा है। सामने आई तस्वीरों में उनके घर के बाहर भारी मात्रा में सुरक्षाकर्मी लगे दिख रहे हैं।

कथितौर पर सीबीआई ने ये कार्रवाई जमीन के बदले नौकरी मामले में की है। केस में राबड़ी देवी के अलावा उनके पति लालू प्रसाद यादव और दोनों की बेटी मीसा भारती भी आरोपित हैं।

बता दें कि सीबीआई का छापा पूर्व सीएम के आवास पर तब पड़ा जब जब विधानसभा का सत्र शुरू होने वाला था। इसी दौरान राबड़ी देवी के आवास पर सीबीआई की कई गाड़ियाँ पहुँची और घर में जाँच शुरू हुई। इस छापेमारी से पहले तेजस्वी यादव आवास से विधानसभा सत्र के लिए निकल गए थे

इस छापेमारी से पहले लालू, राबड़ी देवी, मीसा भारती समेत 14 लोगों के खिलाफ सीबीआई ने समन भेजा था। सीबीआई ने समन में सब लोगों को 15 मार्च को पेश होने के लिए कहा है।

उल्लेखनीय है कि 14 साल पहले जिस समय यह घोटाला हुआ था, उस समय लालू प्रसाद यादव यूपीए शासनकाल में रेलमंत्री थे। उस समय नौकरी के देने बदले लालू प्रसाद यादव के परिजनों को पटना में करीब 1.05 लाख वर्ग फुट जमीन अधिग्रहित की गई थी।

इस घोटाले में बिना विज्ञापन निकाले रिश्वत देने वाले अभ्यार्थियों को तीन दिन के अंदर रेलवे में नौकरी दे दी गई थी। इतना ही नहीं, इन उम्मीदवारों ने नौकरी के लिए झूठे स्थानांतरण प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया है और रेल मंत्रालय में झूठे प्रमाणित दस्तावेज भी जमा कराए थे।

दिनदहाड़े आए और गोलियों से भून चले गए: भारत के 4 मोस्ट वांटेड आतंकी खलास, 3 पाकिस्तान में और 1 अफगानिस्तान में मारा गया

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में आतंकी सैयद नूर शालोबार की गोली मार कर हत्या कर दी गई। शनिवार (04 मार्च, 2023) को अज्ञात हमलावरों ने कश्मीर में कई आतंकवादी घटनाओं के लिए जिम्मेदार शालोबार को गोलियों से भून डाला। नूर शालोबार से पहले सैयद खालिद राजा, एजाज अहमद अहंगर और बशीर अहमद नाम के आतंकियों की भी गोली मार कर हत्या हो चुकी है। मारे गए चारों आतंकी भारत में मोस्ट वांटेड थे। इनमें से एक को अफगानिस्तान में ढेर किया गया जबकि 3 का शिकार पाकिस्तान में ही बनाया गया।

आतंकी सैयद नूर शालोबार

रिपोर्टों के मुताबिक सैयद नूर शालोबार पाकिस्तानी सेना और आईएसआई के साथ मिलकर कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने का काम कर रहा था। उसपर आतंकी संगठनों के लिए नए लोगों खास कर कश्मीरियों की भर्ती की जिम्मेदारी थी। शालोबार 4 मार्च को पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा इलाके में अज्ञात बंदूकधारियों के हाथों मारा गया।

अलबद्र कमांडर सैयद खालिद राजा

27 फरवरी को कश्मीर में सक्रिय रहे आतंकी सैयद खालिद राजा को मार दिया गया था। खालिद राजा अल-बद्र का आतंकी कमांडर था। खालिद कुछ समय से पाकिस्तान के कराची में रह रहा था। जहाँ वह ‘फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्ज’ का वाइस चेयरमैन बना दिया गया था। हालाँकि वह कश्मीरी आतंकियों के साथ जुड़ा हुआ था और पाकिस्तान में बैठकर उनकी मदद कर रहा था। खालिद को हमलावरों ने उसके घर के बाहर ही गोली मार दी और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

आईएस आतंकी एजाज अहमद अहंगर

इसी तरह कश्मीर में पैदा हुए आतंकी एजाज अहमद अहंगर को 22 फरवरी, 2023 को मार गिराया गया था। अहंगर इस्लामिक स्टेट से जुड़ा हुआ था और भारतीयों पर हमला करने के लिए आत्मघाती हमलावरों को तैयार करता था। गृह मंत्रालय ने जनवरी 2023 में ही अहंगर को आतंकी घोषित किया था। अहंगर को अबू उस्मान अल-कश्मीरी के नाम से भी जाना जाता था। रिपोर्टों के मुताबिक अहंगर को तालिबान ने अफगानिस्‍तान के कुनार इलाके में मार गिराया।

बशीर अहमद पीर

21 फरवरी, 2023 को हिजबुल मुजाहिद्दीन के टॉप कमांडर बशीर अहमद पीर को पाकिस्तान के रावलपिंडी में मार गिराया गया था। रिपोर्टों के मुताबिक बशीर अपने घर के पास मस्जिद में नमाज पढ़ने गया था। मस्जिद से बाहर निकलने के बाद बाइक सवार दो हमलावरों ने आतंकी को गोली मारी और चलते बने। अक्टूबर 2022 में भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने में शामिल होने की वजह से उसे आतंकवादी घोषित किया गया था।

बशीर कश्मीर में आतंकवाद के लिए भर्ती किए गए नौजवानों को हथियार और गोला-बारूद उपलब्ध कराता था। इसके अलावा पीओके में संचालित आतंकी शिविरों और लॉन्च पैड्स से आतंकियों को भारत में घुसपैठ कराने में भी मदद कर रहा था। बशीर जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले का रहने वाला था लेकिन पिछले 15 सालों से वह पाकिस्तान में रह रहा था।

अल-बद्र के आतंकी खालिद के हत्या की जिम्मेदारी सिंधुदेश रिवॉल्युशनरी आर्मी ने ली है। सिंधुदेश रिवॉल्युशनरी आर्मी नाम का संगठन पाकिस्तान से अलग सिंधुदेश बनाने की माँग कर रहा है। आतंकी अहंगर को तालिबान ने मारा जबकि बाकी के 2 आतंकियों नूर शालोबार और बशीर अहमद पीर को ढेर करने वालों के बारे में जानकारी नहीं मिल सकी है।

ईसाई बनो, मकान-नौकरी सब मिलेगा: कानपुर में किराए के घर से चल रहा था धर्मांतरण का रैकेट, हिंदुओं को शादी तक का दे रहे थे लालच

उत्तर प्रदेश के कानपुर से रविवार (6 मार्च 2023) को धर्मांतरण का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस संबंध में दो लोगों को पकड़ा है। ये दोनों एक फ्लैट में रहकर लोगों को अच्छी नौकरी, बिजनेस, मकान और शादी का लालच देकर बरगलाने का काम करते थे। पुलिस को इनके पास से ताइवान भाषा में लिखी कुछ पुस्तकें बरामद हुई हैं। अब इस मामले की जाँच एटीएस, आईबी, मिलिट्री इंटेलिजेंस समेत अन्य जाँच एजेंसियों के अधिकारी कर रहे हैं।

पूरा मामला चकेरी थाने के श्यामनगर का है। स्थानीय लोगों ने शिकायत की थी कि फ्लैट में धर्मांतरण का कार्य होता है। इसी बाबत बजरंग दल और विहिप के कार्यकर्ता वहाँ पहुँचे और उन्होंने फ्लैट पर 50 से अधिक पुरुष और महिलाओं को पाया। विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष आनंद सिंह ने बताया कि इन सब लोगों का फ्लैट में ब्रेन वॉश हो रहा था, जिन्हें ईसाई धर्म से जुड़े साहित्य भी उपलब्ध कराए गए थे। उनके मुताबिक करीबन 8-10 लोगों को हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई बनने को कहा जा रहा था।

जब पुलिस को इस धर्मांतरण के खेल की सूचना मिली तो फ्लैट पर फोर्स पहुँची और दो युवकों (अभिजीत और रजत) को धरा। साथ ही 6 संदिग्धों (जीवन, शिवांग, शीतल, जाबिन, राणाजी समेत 6) को हिरासत में लिया। गिरफ्तार हुए युवकों में से एक ने खुद को उत्तराखंड के चमोली का बताया और दूसरे ने खुद को थर्ड जेनरेन क्रिश्चियन बताया।

पुलिस को इनके पास से लैपटॉप, कम्प्यूटर में धर्मांतरण की प्रचार सामग्री बरामद हुई है। 4 ऐसे लोग भी मिले हैं जिन्हें लालच देकर धर्म परिवर्तन के लिए मना लिया गया था। अब पुलिस इनका फंडिंग कनेक्शन तलाश रही है। पुलिस का कहना है कि उन्हें छानबीन में मिले दस्तावेजों में ताइवान की भाषा लिखी हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर आनंद देव तिवारी ने बताया कि फ्लैट पर धर्म परिवर्तन का काम नौकरी और बेहतर जीवन के नाम पर किया जा रहा था। फ्लैट से जिस प्रकार के दस्तावेज मिले हैं उसे देख यही लगता है कि मामले में और जाँच की जरूरत है। उन्होंने बताया कि पुलिस की पड़ताल में 4 लोग ऐसे भी मिले जो धर्मांतरण को तैयार थे पर अभी उनका धर्म परिवर्तन हुआ नहीं था। पुलिस ने बताया कि फ्लैट में रहकर धर्मांतरण की गतिविधि ऑपरेट की जा रही थी।

हैरानी की बात ये है कि आरोपितों की कोई लोकल इनकम सोर्स का नहीं पता चल पाया है जबकि इनका मासिक खर्चा 2 लाख रुपए से ऊपर का है। पुलिस मान रही है कि कानपुर में धर्मांतरण का खेल किसी एनजीओ द्वारा संचालित हो रहा था।  पुलिस अब दोनों आरोपितों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। 

उमेश पाल पर पहली गोली चलाने वाला उस्मान ढेर, 8 दिन में UP पुलिस ने अतीक के 2 गुर्गों का किया एनकाउंटर: CM योगी ने कहा था- मिट्टी में मिला देंगे

उमेश पाल हत्याकांड में शामिल एक और शूटर का आज (6 मार्च 2023) एनकाउंटर हुआ। कौंधियारा थाने की पुलिस ने आरोपित विजय उर्फ उस्मान चौधरी को प्रयागराज में हुई मुठभेड़ में ढेर किया। इस फायरिंग में एक सिपाही नरेंद्र भी जख्मी हो गए। 

यूपी पुलिस द्वारा जिस उस्मान का एनकाउंटर किया गया, वो अतीक अहमद की गैंग का शार्प शूटर था। उसी ने एक दुकान से निकलकर उमेश पाल पर पहली गोली चलाई थी और सीसीटीवी में साफ कैद हुआ था। 

वारदात के बाद पुलिस उसे ढूँढ रही थी। उसे पकड़ने के लिए उसपर 50 हजार रुपए का इनाम भी रखा गया था। एक दिन सूचना आई कि उस्मान प्रयागराज के कौंधियारा के लालापुर में छिपा है। इसी के बाद पुलिस की एसओजी टीम ने अपनी कार्रवाई की।

जानकारी के मुताबिक, प्रयागराज के लालापुर में जब एसओजी की टीम ने उस्मान को पकड़ने के लिए घेराबंदी की, तो शार्प शूटर ने पहले टीम पर गोली चलानी शुरू की, जिसके बाद पुलिस ने भी उसपर जवाबी फायरिंग की और उस्मान को ढेर किया।

इस मुठभेड़ को लेकर शलभ मणि त्रिपाठी ने लिखा, “कहा था ना कि मिट्टी में मिला देंगे !! उमेश पाल और संदीप निषाद पर पहली गोली चलाने वाला खूंखार हत्यारा उस्मान भी आज पुलिस मुठभेड़ में ढेर।” 

अतीक का गुर्गा अरबाज ढेर

उल्लेखनीय है कि इससे पहले पुलिस ने 27 फरवरी को एक और बदमाश अरबाज का एनकाउंटर हुआ था। अरबाज़ पर आरोप था कि वो हमले के दौरान उस क्रेटा गाड़ी को चला रहा था, जिससे शूटर आए थे। 1 दिन पहले यह क्रेटा गाड़ी अतीक अहमद के घर से बरामद हुई थी।

उमेश पाल हत्याकांड

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 24 फरवरी को उमेश पाल का मर्डर दिनदहाड़े हुआ था। उमेश के उतरते ही बदमाशों ने उनपर ताबड़तोड़ गोली चलाई थी। उनके साथ उनके दो गनर भी थे जिनमें से एक की वहीं मौत हुई जबकि दूसरे की इलाज के वक्त मौत हो गई थी। घटना के बाद सीएन योगी ने विधानसभा में साफ कहा था कि उनकी सरकार माफियाओं के खिलाफ है और उन्हें मिट्टी में मिला देगी।

अब इसी क्रम में उमेश पाल हत्याकांड में शामिल सभी लोगों की तलाश जारी है। 5 आरोपितों पर ढाई लाख रुपए का इनाम रखा गया है। क्राइम ब्रांच और एसटीएफ की रडार पर 20 हजार मोबाइल नंबर हैं। 150 से अधिक अतीक के गुर्गों से पूछताछ हो चुकी है।

‘गोमूत्र से नहीं मिली देश को आजादी’: अब हिन्दुओं के खिलाफ घृणा फैलाने पर उतरे उद्धव ठाकरे, कहा – मेरे विधायकों को इंजेक्शन लगा कर छीन ली पार्टी

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग को लेकर विवादित टिप्पणी की है। उन्होंने कहा है कि चुनाव आयोग ‘चूना लगाओ आयोग’ है और सत्ता में बैठे हुए लोगों का गुलाम है। यही नहीं, उन्होंने कहा है कि गौमूत्र छिड़कने से देश को आजादी नहीं मिली। बल्कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान से आजादी मिली है। उन्होंने यह बयान रविवार (5 मार्च 2023) को दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, महाराष्ट्र के रत्नागिरी के खेड़ गाँव में आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा है, “चुनाव आयोग ‘चूना लगाओ आयोग’ है और सत्ता में बैठे लोगों का गुलाम है। जिस सिद्धांत के आधार पर चुनाव आयोग ने यह फैसला लिया, वह गलत है। चुनाव आयोग ने हमसे पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न छीन लिया है, लेकिन वह शिवसेना को मुझसे नहीं छीन सकते।”

उद्धव ठाकरे ने यह भी कहा, “शिवसेना की स्थापना चुनाव आयोग के पिता ने नहीं, बल्कि मेरे पिता ने की थी। महाराष्ट्र मेरा परिवार है। वे इसका कैसे ख्याल रखेंगे। मुझे आप सभी के साथ की जरूरत है। गद्दारों को कहना चाहता हूँ कि आप नाम चुरा सकते हो, चिह्न चुरा सकते हो लेकिन शिवसेना नहीं चुरा सकते। मैं चुनाव आयोग को खासतौर से कहना चाहता हूँ अगर चुनाव आयोग मोतियाबिंद से पीड़ित नहीं है तो उसे आना चाहिए और जमीनी स्थिति देखनी चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा कि उन्हें तोड़ने की कोशिश की जा रही है। यह शिवसेना नहीं, मराठी मानुष और हिंदुत्व को तोड़ने का षडयंत्र है। जिसको कभी गली का कुत्ता भी नहीं पूछता था, आज वो उन्हें तोड़ने की प्लानिंग कर रहे हैं। उन्हें चुनाव आयोग का फैसला मंजूर नहीं है। चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ वह सुप्रीम कोर्ट जाएँगे।

उन्होंने आगे कहा, “सरदार पटेल ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया, उन्होंने सरदार पटेल का नाम चुराया। इसी तरह, उन्होंने सुभाष चंद्र बोस को चुरा लिया और बाला साहेब ठाकरे के साथ ऐसा ही किया। मैं उन्हें चुनौती देता हूँ कि वे मोदी के नाम पर वोट माँगे, न कि शिवसेना के नाम और बाला साहेब ठाकरे की फोटो पर।”

उद्धव ठाकरे ने यह भी कहा, “सरकार तो सही चल रही थी लेकिन टूटी क्यों? सरकार इसलिए टूटी क्योंकि हमारे साथ धोखा किया गया। हमारे विधायकों को बेहोशी का इंजेक्शन लगाया गया। हम सबने मिल कर प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा है। केजरीवाल मुझसे मिलने आए थे। उन्होंने कहा है कि बहुत हो रहा है, हमें अब एक होना होगा। मैंने कहा है कि मैं तैयार हूँ।”

उन्होंने गोमूत्र पर विवादित बयान देते हुए कहा, “क्या हमारे देश को गोमूत्र छिड़कने से आजादी मिली थी? क्या ऐसा हुआ था कि गोमूत्र छिड़का गया और हमें आजादी मिली? ऐसा नहीं था, स्वतंत्रता सेनानियों ने बलिदान दिया था। तब कहीं जाकर हमें आजादी मिली थी।”

‘भारत के बारे में कुछ बुरा नहीं बोलूँगी – गिरफ़्तारी के सवाल पर लंदन में बोली थीं इंदिरा गाँधी’: पत्रकार ने राहुल की ऐसे कर दी बोलती बंद, देखें वीडियो

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करते हुए भारत को बदनाम करने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। ब्रिटेन की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में बोलते हुए उन्होंने देश में ‘लोकतंत्र पर खतरा’ वाले प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाया था। हालाँकि अब उनके इस प्रोपेगेंडा और भारत विरोधी बयान पर उन्हें एक पत्रकार ने इंदिरा गाँधी से सीख लेने की सलाह दी है।

दरअसल, राहुल गाँधी लंदन में आयोजित ‘भारत पत्रकार संघ (IJA)’ के कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस कार्यक्रम में उन्होंने एक बार फिर देश को बदनाम करने की कोशिश की। हालाँकि, वहाँ मौजूद एक पत्रकार ने उन्हें बताया कि इंदिरा गाँधी से जब उनकी गिरफ्तारी के बारे में पूछा गया था तो उन्होंने साफ तौर कह दिया था कि वह भारत के बारे में कोई भी गलत बात नहीं करना चाहती हैं।

‘भारतीय पत्रकार संघ’ के कार्यक्रम में राहुल गाँधी को इंदिरा गाँधी के बारे में बताते हुए एक पत्रकार ने कहा, “मोरारजी देसाई द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद इंदिरा गाँधी लंदन आई थीं। तब यहाँ आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनसे एक पत्रकार ने उनके भारत में जेल जाने के अनुभव को लेकर सवाल किया था। इस सवाल के जवाब में इंदिरा गाँधी ने कहा था कि वह इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत के बारे में कोई भी बुरी बात नहीं करना चाहतीं। अब आप लगातार भारतीय मीडिया पर हमला कर रहे हैं। आपने कैंब्रिज में दिए भाषण में भी यही किया था। मैं आशा करता हूँ कि आप इंदिरा गाँधी द्वारा कही गई बातों से कुछ सीखेंगे।”

गौरतलब है कि राहुल गाँधी ने ब्रिटेन की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में बोलते हुए भारत को बदनाम करने की ‘नापाक’ कोशिश की थी। इस कार्यक्रम में बोलने के बाद देश में राहुल की जमकर किरकिरी हुई थी। हालाँकि, इसके बाद भी उन्होंने भारत विरोधी सुर अलापना बंद नहीं किया। अब उन्होंने लंदन में भारत पत्रकार संघ के कार्यक्रम में भी कैंब्रिज वाली बात दोहराई है।

राहुल गाँधी ने कहा कि भारत में लोकतंत्र के ढाँचे पर बर्बर हमले हो रहे हैं। मीडिया से लेकर न्यायपालिका, संसद सभी पर हमला हो रहा है। भारत में लोगों की आवाज उठाने में मुश्किल हो रही है। उन्होंने यह भी कहा, “भाजपा चाहती है कि भारत चुप रहे, क्योंकि वे (सरकार) चाहते हैं कि जो भारत का है उसे ले सकें और इसे अपने करीबी दोस्तों को दे सकें। यही विचार है, जनता का ध्यान भटकाना और फिर भारत की संपत्ति को तीन, चार, पाँच लोगों को सौंप देना।”

उन्होंने बीबीसी के ऑफिस पर इनकम टैक्स विभाग की हुई कार्यवाही को लेकर बात करते हुए कहा, “‘बीबीसी को अब इसके बारे में पता चल गया है, लेकिन यह सब पिछले नौ साल से भारत में लगातार चल रहा है। हर कोई जानता है कि पत्रकारों को डराया जाता है। उन पर हमला किया जाता है और धमकी दी जाती है। सरकार की लाइन पर चलने वाले पत्रकारों को पुरस्कृत किया जाता है। अगर बीबीसी सरकार के खिलाफ लिखना बंद कर दे तो सब कुछ सामान्य हो जाएगा। सभी मामले गायब हो जाएँगे।”

बता दें कि इससे पहले राहुल गाँधी ने कैंब्रिज में भारत विरोधी दुष्प्रचार किया था। अपने भाषण के दौरान उन्होंने बड़ी संख्या में नेताओं के फोन में पेगासस होने का दावा किया था। कहा था कि उनके फोन में भी पेगासस था। उनकी मानें तो इंटेलीजेंस अधिकारियों ने उन्हें फोन का सँभलकर इस्तेमाल करने की सलाह दी थी, क्योंकि फोन की रिकॉर्डिंग की जा रही थी। राहुल गाँधी ने भारत में लोकतंत्र पर हमले होने की बात भी कही। कहा कि मीडिया, न्यायपालिका और लोकतंत्र पर प्रहार हो रहा है। अल्पसंख्यकों और जनजातीय लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।

अपने भाषण में राहुल गाँधी ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार के खिलाफ कुछ मुद्दों पर बात करने के लिए उन्हें कुछ नेताओं के साथ गिरफ्तार कर जेल में बंद कर दिया गया था। उन्होंने समाचार पत्रों के स्क्रीनशॉट और पार्लियामेंट के बाहर प्रदर्शन की एक तस्वीर दिखाते हुए यह दावा किया। हालाँकि, न तो तस्वीर न ही स्क्रीनशॉट इस बात की पुष्टि कर रहे थे कि राहुल गाँधी को गिरफ्तार किया गया था क्योंकि इस तरह की कोई घटना घटी ही नहीं थी।

राहुल गाँधी ने जिस तस्वीर को पार्लियामेंट के बाहर प्रोटेस्ट का बताया था वह दरअसल साल 2020 के हाथरस कांड के बाद की तस्वीर है। हाथरस जाने के रास्ते पर यमुना एक्सप्रेस वे के पास राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी को रोक लिया गया था। उस वक्त इलाके में कर्फ्यू लगा हुआ था। राहुल गाँधी फिर भी हाथरस जाने की जिद कर रहे थे ऐसे में उन्हें कुछ घंटो के लिए उन्हें हिरासत में लिया गया था।

संबोधन के दौरान कई झूठ बोल चुके राहुल गाँधी ने अपने उपर दायर मुकदमों को झूठा करार दिया। राहुल ने दावा किया कि उनपर ऐसे क्रिमिनल केस चलाए जा रहे हैं जो नहीं होने चाहिए थे। बता दें कि देश में लगभग 5 दशकों तक राज करने वाले परिवार पर हजारों करोड़ रुपए के घोटाले के मामले चल रहे हैं। खुद राहुल गाँधी बेल पर हैं।