Home Blog Page 2166

माफिया मुख़्तार अंसारी की ₹8 करोड़ की बेनामी संपत्ति कुर्क, माँ-बहन के नाम पर लिखा रखे थे प्लॉट्स

गुरुवार (15 दिसंबर, 2022) को माफिया मुख्तार अंसारी को गैंगस्टर एक्ट में 10 साल की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद अब, उसके परिवार वालों पर शिकंजा कसा जा रहा है। इसी कड़ी में उसकी माँ और बहन के नाम पर दर्ज 8 करोड़ रुपए की कीमत के दो प्लॉट कुर्क किए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार (17 दिसंबर, 2022) को हाजीपुर और हजरतगंज पुलिस की मौजूदगी में लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली अंतर्गत दो प्लॉटों को कुर्क किया गया है। ये प्लॉट मुख्तार अंसारी की माँ राबिया खातून उर्फ राबिया बेगम और बहन फहमीदा अंसारी के नाम पर दर्ज थे। इन दोनों प्लॉटों की कीमत करीब 8 करोड़ रुपए बताई जा रही है।

इस मामले में, मोहमदाबाद सीओ श्याम बहादुर सिंह का कहना है कि गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत मुख्तार अंसारी की बेनामी संपत्तियों को कुर्क किया जा रहा है। इसी सिलसिले में यह कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा है कि मुख्तार ने अवैध कमाई कर ये प्लॉट खरीदकर माँ और बहन के नाम किए थे।

श्याम बहादुर सिंह ने आगे कहा है कि इन दोनों संपत्तियों की कुर्की गाजीपुर के जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर की गई है। अब ये दोनों संपत्तियाँ स्थानीय हजरतगंज पुलिस की देखरेख में रहेंगी। यदि इन प्लॉटों पर किसी भी तरह का निर्माण करने का प्रयास होता है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि गुरुवार (15 दिसंबर, 2022) को माफिया मुख्तार अंसारी और उसके साथी भीम सिंह को गाजीपुर अदालत ने 10 साल की सजा सुनाई थी। इसके अलावा, कोर्ट ने मुख्तार पर 5 लाख का जुर्माना भी लगाया है।

मुख्तार अंसारी पिछले कुछ समय से यूपी के बांदा जेल में बंद है। उस पर हत्या, हत्या की कोशिश, अपहरण, धमकी देने सहित गैंगस्टर ऐक्ट एवं अन्य ऐक्ट में 59 मामले दर्ज हैं। इनमें से 20 मामले अदालतों में अभी लंबित हैं। मुख्तार अंसारी के अलावा, उसके गिरोह के 282 लोगों पर पुलिस कार्रवाई चल रही है। इनमें से 126 पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है, जबकि 66 पर गुंडा एक्ट में कार्रवाई हुई है। मुख्तार अंसारी के 5 साथियों को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया है।

विभिन्न मामलों में कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस ने मुख्तार अंसारी की लगभग 290 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की है। वहीं, प्रशासन ने लगभग 283 करोड़ रुपए की अवैध संपत्ति को नष्ट किया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने अपने पहले कार्यकाल में माफियाराज को खत्म करने का संकल्प लेते हुए उन्हें सलाखों के पीछे भेजने की बात कही थी। इसके बाद से प्रदेश में पुलिस-प्रशासन ने गैंगस्टरों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी थी। इनमें से एक मुख्तार अंसारी भी है।

सिर को पटका डेस्क पर, फिर ब्लैकबोर्ड से लड़ाया: मदरसे में नाबालिग छात्र की मौत के बाद टीचर जीशान गिरफ्तार, खून निकलने पर भी बच्चे को नहीं छोड़ा था

उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में एक मदरसे में 9 साल के बच्चे की मौत का मामला सामने आया है। बच्चे के परिजनों ने मदरसा टीचर पर पिटाई का आरोप लगाया है। मृतक बच्चे का नाम मोह अली है जबकि आरोपित मदरसा टीचर का नाम जीशान है। पुलिस ने जीशान को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया है। बच्चे की मौत बुधवार (14 दिसंबर 2022) को हुई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना भगवानपुर के रहमानिया मदरसा की है। यहाँ पर मोह अली तीसरी क्लास में पढ़ाई करता था। बताया जा रहा है कि मृतक छात्र क्लास में किसी से बात कर रहा था। इस दौरान मदरसा टीचर जीशान ने ऊँची आवाज में बात करने पर उसे बुलाया। इस बीच क्लास में शोरगुल सुन कर टीचर जीशान कमरे में आया। आरोप है कि इस दौरान जीशान ने बच्चे का सिर उठा कर डेस्क पर पटक दिया। इस दौरान मोह अली बुरी तरह से घायल हो गया और उसके कान और नाक से खून निकलने लगा। बाद में बच्चे का सिर ब्लैकबोर्ड पर भी पटका गया।

मदरसे से इस घटना की सूचना बच्चे के घर वालों को दी गई। आनन-फानन में उसे सहारनपुर के अस्पताल में भर्ती करवाया गया। बच्चे की हालत में सुधार न होता देख कर उसे चंडीगढ़ ले जाया गया। काफी जद्दोजहद के बाद भी बच्चे को बचाया नहीं जा स्का और उसने दम तोड़ दिया। परिजनों का दावा है कि इलाज के दौरान मोह अली दर्द से कराहता रहा था। बच्चे की मौत होने के बाद पीड़ित परिजनों ने भगवानपुर थाने में मदरसा टीचर के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। मामले में शिकायतकर्ता मृतक बच्चे के पिता सूफियान अहमद हैं।

इस घटना से नाराज मदरसे के अन्य छात्रों के अभिभावकों ने प्रदर्शन किया। भगवानपुर थाने के इंस्पेक्टर राजीव के मुताबिक आरोपित मदरसा टीचर जीशान पर गैरइरादतन हत्या के चलते IPC की धारा 304 के तहत FIR दर्ज हुई है।

युवराज ने डिलीट कर दी धोनी की तस्वीर: एडिटेड Video देख नेटिजन्स भड़के, पूछा- इतनी नफरत क्यों?

भारतीय क्रिकेट टीम के विस्फोटक बल्लेबाज रहे युवराज सिंह और कैप्टन कूल महेंद्र सिंह धोनी के बीच विवाद की खबरें अक्सर आती रहती हैं। युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह खुलकर कई बार धोनी की बुराई कर चुके हैं। उन्होंने तो धोनी पर बेटे के करियर को तबाह करने तक का आरोप लगा दिया था। ऐसे में दोनों दिग्गज खिलाड़ियों के बीच विवाद की बात को फिर हवा दी है खुद युवराज सिंह ने। युवराज सिंह ने एक वीडियो शेयर किया है। दावा किया जा रहा है कि वीडियो शेयर करते हुए युवराज ने उसे एडिट किया और धोनी के साथ वाली अपनी तस्वीर वीडियो से हटा दी।

दरअसल, टीम इंडिया के पूर्व ऑलराउंडर युवराज सिंह ने 12 दिसंबर को अपना 41वाँ जन्मदिन मनाया। सोशल मीडिया पर भी उन्हें देश और दुनिया से हजारों शुभकामनाएँ प्राप्त हुईं। इनमें से कई पर युवराज सिंह ने प्रतिक्रिया भी दी। ट्विटर पर जेम्स ऑफ क्रिकेट (@GemsOfCricket) हैंडल से एक वीडियो शेयर कर युवराज सिंह को जन्मदिन की शुभकामनाएँ दी गईं। 16 दिसंबर को उन्होंने अपने अकाउंट से उस वीडियो को दोबारा शेयर करते हुए जेम्स ऑफ क्रिकेट (@GemsOfCricket) हैंडल को वीडियो के लिए धन्यवाद कहा। युवराज द्वारा शेयर किया गया वीडियो नेटिजन्स की आँखों से बच नहीं पाया। यह वीडियो शेयर किए गए मूल वीडियो से 2 सेकेंड छोटा था। दरअसल शेयर करने से पहले युवराज सिंह ने धोनी के साथ वाली अपनी तस्वीर हटा दी थी।

जैसे ही नेटिजन्स ने धोनी के साथ वाली तस्वीर वीडियो से गायब देखी उन्होंने युवराज सिंह को निशाने पर लेना शुरू कर दिया।

मर्फी नाम के यूजर ने लिखा, “वीडियो से धोनी वाला हिस्सा निकाल दिया गया, इतनी नफरत क्यों? अच्छा है धोनी इस तरह का बकवास देखने के लिए सोशल मीडिया पर नहीं आते।”

एक यूजर ने कमेंट किया कि इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि एक पाक समर्थक ने लेफ्टिनेंट कर्नल धोनी की तस्वीर हटा दी। हर पाक समर्थक भारतीय सेना से नफरत करता है।

अश्मित त्रिपाठी नाम के यूजर ने लिखा, “मुझे लगा था कि आप अपने पिता से अलग हैं लेकिन ऐसा लगता है पूरे परिवार को एमएसडी (महेंद्र सिंह धोनी) से नफरत है। धोनी वाले हिस्से को हटाने के लिए आपने वीडियो को फिर से एडिट किया। वेल डन युवी पाजी।”

आपको बता दें साल 2021 में भी फ्रेंडशिप डे के मौके पर युवराज सिंह ने पुराने खिलाड़ियों के साथ एक वीडियो शेयर की थी। जिसमें सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, हरभजन सिंह, रोहित, शर्मा समेत कई खिलाड़ी शामिल थे। वीडियो में 2011 विश्वकप के यादगार पल भी शामिल किए गए थे लेकिन युवी के इस वीडियो में महेंद्र सिंह धोनी गायब थे। धोनी की इस अनदेखी पर फैन्स ने उस वक्त भी युवराज की क्लास लगाई थी।

‘भारतीय सेना का मनोबल तोड़ने में लगे हैं राहुल गाँधी, देश की पीठ में खंजर घोंप रहे’: BJP ने कहा- कॉन्ग्रेस ने कभी नहीं की चीन की निंदा

अरूणाचल प्रदेश के तवांग में चीनी सैनिकों के साथ भारतीय सैनिकों के झड़प को लेकर कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) द्वारा दिए गए बयान पर विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। भाजपा ने अब राहुल गाँधी को निशाने लिया है।

भाजपा ने कहा कि उसे अपने देश की सेना पर गर्व है। भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा, “जो जवान सीमा पर चीन की सेना को पीट रहे हैं, उनको अपनी ताकत दिखा रहे हैं… उस समय पर भारत के ‘जयचंद’ राहुल गाँधी हमारी सेना का मनोबल तोड़ने का काम क्यों कर रहे हैं।”

भाटिया ने कहा कि यह 1962 वाला भारत नहीं है। भारत की एक इंच भूमि ना किसी के कब्जे में है और न किसी में ये हिम्मत है कि वो कब्जा कर ले। विश्व की सबसे वीर सेना देश के पास है। उन्होंने कहा, “जब-जब सेना अपना पराक्रम दिखलाती है तो देशवासियों की छाती 56 इंच की हो जाती है, लेकिन दर्द होता है तो दुश्मन देश को होता है और राहुल गाँधी व कांग्रेस पार्टी को होता है।”

उन्होंने पूछा, “क्या कारण है कि जब-जब सेना के कारण देशवासियों की छाती 56 इंच की होती है तो कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी की छाती छह इंच की हो जाती है।” उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी को अब जयचंद वाला चरित्र छोड़ देना चाहिए।

भाटिया ने आगे कहा कि साल 2007 में संसद में एक प्रश्न के जवाब में तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार ने बताया था कि 38 हजार स्क्वॉयर किलोमीटर की जमीन और कुल 43,180 स्क्वॉयर किलोमीटर जमीन कॉन्ग्रेस शासन के दौरान चीन ने कब्जाई है।

उन्होंने कहा, “ऐसा प्रतीत होता है कि राहुल गाँधी ने दुश्मन देशों से समझौता किया हुआ कि जब-जब भारतीय सेना अपना पराक्रम दिखाएगी, राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस पार्टी सेना का मनोबल तोड़ने का कार्य करेगी। इनका चीन से समझौता है और मुझे ऐसा कोई बयान नहीं दिखा जब कॉन्ग्रेस पार्टी, सोनिया गाँधी या राहुल गाँधी ने कभी चीन की निंदा की हो।”

गौरव भाटिया ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जब-जब देश एकजुट हुआ, तब-तब कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी ने इस एकजुटता की पीठ में खंजर घोंपने का काम किया। भाटिया ने कहा कि राहुल गाँधी ने तो पुलवामा हमले को भी ‘होम ग्रोएन टेररिज्म’ बताया था।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राहुल गाँधी के बयान को अत्यंत अमर्यादित, बचकाना और राष्ट्र-विरोधी बताया है। उन्होंने कहा कि यह अंतराष्ट्रीय स्तर पर यह भारत और भारतीय सेना को अपमानित करने वाला है। उन्होंने राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस से भारतीय सेना से माफी माँगने की माँग की।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राहुल गाँधी पर निशाना साधा है। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “राहुल गाँधी कुछ भी बोलने से पहले पिछले समय को याद कर लें, जब पिद्दी देश भी भारत को आँख दिखाते थे। ये 1962 वाला भारत नहीं है। ये सर्जिकल स्ट्राइक वाला भारत है।”

भाई के साथ थिएटर में ‘अवतार 2’ देख रहा था शख्स, सीने में दर्द उठा और जमीन पर गिर कर हो गई मौत: डॉक्टर बोले – ज़्यादा एक्साइटेड हो गया था

आंध्र प्रदेश के काकीनाडा जिले में हॉलीवुड फिल्म ‘अवतार (Avatar)’ के सीक्वल, ‘अवतार 2 (Avatar 2: The Way to Water)’ को देखने गए एक शख्स की हार्ट अटैक से मौत हो गई। मृतक की पहचान लक्ष्मीरेड्डी श्रीनू के रूप में हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, काकीनाडा जिले के पेद्दापुरम शहर में लक्ष्मीरेड्डी श्रीनू नामक व्यक्ति अपने छोटे भाई राजू के साथ ‘अवतार 2’ देखने थिएटर गया था। वहाँ अचानक ही उसके सीने में दर्द हुआ और वह जमीन पर गिरकर बेहोश हो गया। इसके बाद, आनन-फानन में उन्हें नजदीकी सरकारी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। वहाँ डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। लक्ष्मीरेड्डी श्रीनू के परिवार में एक बेटा और एक बेटी भी है।

लक्ष्मीरेड्डी श्रीनू की मौत को लेकर डॉक्टर्स ने कहा है कि उसे हाई ब्लड प्रेशर की समस्या थी। फिल्म देखने के दौरान वह बेहद एक्साइटेड हो गया था। इससे उसे हार्ट अटैक आ गया। रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि ऐसी ही घटना 12 साल पहले साल 2010 में भी हुई थी। तब, ताइवान में एक 42 वर्षीय व्यक्ति अवतार फिल्म देखने गया था। जहाँ, हार्ट अटैक से उसकी मौत हो गई थी।

बता दें कि ‘अवतार: द वे ऑफ वाटर’ या अवतार 2 दिसंबर, 2009 में रिलीज हुई फिल्म ‘अवतार’ का सीक्वल है। जेम्स कैमरून के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म को बनाने में कुल 13 साल लगे हैं। साथ ही इसके निर्माण में करीब 2500 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। फिल्म शुक्रवार (16 दिसंबर, 2022) को रिलीज हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, ओपनिंग डे पर भारत में फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 40 करोड़ रुपए से अधिक की नेट कमाई की है।

गौरतलब है कि बीते कुछ दिनों में हार्ट अटैक से होने वाली मौतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इसमें, इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर मेघा ठाकुर और एक्टर सिद्धांत वीर सूर्यवंशी जैसे लोगों के नाम भी शामिल हैं।

लखनऊ में हार्ट अटैक से स्टेज पर दुल्हन की मौत

यूपी के लखनऊ में भी इसी तरह का मामला सामने आया था। शादी की पार्टी उस समय मातम में बदल गई, जब स्टेज पर आई दुल्हन की अचानक मौत हो गई। दुल्हन का नाम शिवांगी था और वह दूल्हे को वरमाला पहनाने स्टेज पर पहुँची थी। वरमाला डालने के बाद अचानक चक्कर खाकर गिर पड़ी। जिसके बाद उसे तुरंत पास के हेल्थ सेंटर में पहुँचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टर के मुताबिक, दुल्हन की मौत हार्ट अटैक से हुई।

छींक के बाद युवक की मौत

हार्ट अटैक युवाओं की भी जान ले रहा है। मेरठ में चार दोस्त कहीं जा रहे थे। इसी दौरान अचानक एक युवक को छींक आ गई। वह लड़खड़ा कर गिर गया। उसकी हार्ड अटैक से मौत हो गई। इस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ था। वहीं बरेली में ही कुछ समय पहले डीजे पर डांस करने के दौरान 45 वर्षीय आईवीआरआई कर्मी की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी।

अस्पतालों के महिला वार्ड में ट्रांस-वीमन, विरोध करने पर माना जाएगा नस्लवाद: बाहर भी निकाल दिया जाएगा, ब्रिटेन ने नए नियम का हो रहा विरोध

ब्रिटेन के अस्पतालों में ट्रांस महिलाओं के साथ भेदभाव को लेकर नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। बोर्ड की तरफ से कहा गया है कि महिला वार्ड में ट्रांस महिला के एडमिट होने का विरोध करना एक तरह का ‘नस्लवाद’ है। लिंग परिवर्तन करवाने वालों (ट्रांस सर्विस यूजर्स) के पक्ष में बनाई गई एनएचएस आयरशायर और एरॉन की नई पॉलिसी के अनुसार यदि कोई भी महिला मरीज़ एक ट्रांस महिला (लिंग परिवर्तन करवा कर महिला बनी) के साथ वार्ड शेयर करने के इनकार करती है तो उसे वार्ड खाली करना पड़ सकता है।

नियम जारी करते हुए एनएचएस वर्कर्स को साफ हिदायत दी गई है कि उन्हें इस तरह के विरोध का सामना कैसे करना है। उन्हें विस्तार से समझाया गया है कि यदि कोई महिला पास के बेड पर इलाज करा रहे ट्रांस महिला को पुरुष बताकर वार्ड शेयर करने से इनकार करे तो वर्कर्स शिकायती महिला को समझाएँ, “वार्ड केवल महिलाओं के लिए है, यहाँ किसी भी पुरुष की उपस्थिति नहीं है।”

इसमें उन्हें आगे सलाह दी गई है, “अगर एक श्वेत महिला ने एक काले रोगी के साथ एक वार्ड साझा करने के बारे में एक नर्स से शिकायत की या एक पुरुष ने एक समलैंगिक पुरुष के साथ एक वार्ड में होने की शिकायत की, तो हम उम्मीद करेंगे कि हमारे कर्मचारी एक नियम के तहत कार्य करेंगे जो व्यक्त व्यवहार से संबंधित है।”

पॉलिसी में कहा गया है कि हमारा समाज ‘ट्रांसफॉबिक’ व्यवहार कर रहा है। ऐसे व्यवहार की तुलना नस्लवाद से करते हुए कहा गया है कि ट्रांस जेंडर्स को समाज में अब भी प्रशंसा की दृष्टि से नहीं बल्कि हीन भावना के साथ देखा जाता है। पॉलिसी में एनएचएस स्टाफ को समझाया गया है कि एक श्वेत महिला यदि किसी अश्वेत समाज के मरीज के साथ वार्ड शेयर करने से इनकार करे या एक हेट्रोसेक्सुअल (विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण रखने वाला) मर्द किसी गे (पुरुष समलैंगिक) के साथ वार्ड शेयर करने से इनकार करे तो स्टाफ को यह पता होना चाहिए कि उन्हें इस परिस्थिति से कैसे निपटना है।

आपको बता दें कि ब्रिटेन में कई महीला मरीजों ने ट्रांस महिलाओं के साथ वार्ड शेयर करने में असहज महसूस करते हुए इसकी शिकायत की। इसे लेकर एनएचएस ने पॉलिसी बनाई है। कड़े विरोध के बाद फिलहाल यह कहा जा रहा है कि पॉलिसी की समीक्षा की जा रही है। दूसरी तरफ एनएचएस से जुड़े एक लाख से ज्यादा नर्सिंगकर्मी हड़ताल पर चले गए हैं। हड़ातिलों की माँग है कि उनकी वेतन में 19 प्रतिशत की वृद्धि हो, जबकि सरकार सिर्फ 5 प्रतिशत वेतन वृद्धि पर अड़ी है। हड़ताल की वजह से 76 से ज्यादा अस्पतालों में 70 हजार से ज्यादा मरीज़ प्रभावित हो रहे हैं।

रोकी गई शाहरुख़ खान के फिल्म की शूटिंग, हुआ हनुमान चालीसा पाठ: ‘पठान’ के गाने को लेकर दीपिका समेत 5 के खिलाफ शिकायत दर्ज

बॉलीवुड ऐक्टर शाहरुख खान (Bollywood Actor Shah Rukh Khan) की आने वाली फिल्म पठान (Pathaan) के गाने ‘बेशर्म रंग’ को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। मध्य प्रदेश के जबलपुर में शाहरुख की फिल्म की शूटिंग के दौरान लोगों ने प्रदर्शन और हनुमान चालीसा का पाठ किया। वहीं, इस गाने को लेकर बिहार में शाहरुख-दीपिका समेत 5 के खिलाफ शिकायत दी गई है।

मध्य प्रदेश के मंत्री नरोत्तम मिश्रा गाने में भगवा बिकनी पहनने पर ऐतराज जताया और कहा कि पठान फिल्म में कुछ आपत्तिजनक दृश्य हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उसे हटाया नहीं गया तो मध्य प्रदेश में इसे प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। वहीं, भोपाल से भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने भी फिल्म को लेकर चेतावनी दी है।

फिल्म में विवादास्पद ड्रेस और बोल को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हिंदू परिषद और बजरंग दल ने मध्य प्रदेश के पर्यटन स्थल भेड़ाघाट में शाहरुख खान की एक फिल्म ‘डंकी’ (Dunki) शूटिंग का जमकर विरोध किया। इस दौरान लोगों ने हनुमान चालीसा का भी पाठ किया।

हालाँकि, शूटिंग के दौरान शाहरुख खान या फिल्म का कोई बड़ा स्टार मौजूद नहीं था। फिल्म की शूटिंग तीन दिनों से जबलपुर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भेड़ाघाट और धुआंधार में चल रही है। प्रदर्शन के बाद शूटिंग रोक दी गई। शूटिंग में शाहरुख खान के डुप्लीकेट का इस्तेमाल किया जा रहा था।

विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने शूटिंग के विरोध में तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने भेड़ाघाट में शांतिपूर्ण प्रदर्शन की बात करते हुए कहा कि वे किसी भी अभिनेता या अभिनेत्री को ‘नर्मदा तट की तपोभूमि’ पर शूटिंग नहीं करने देंगे, जो भगवा का अपमान करता है।

उधर बिहार में अधिवक्ता सुधीर ओझा ने मुजफ्फरपुर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में 5 लोगों पर धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने और अश्लीलता फैलाने का आरोप लगाते हुए परिवाद दर्ज कराया है। जिन पाँच लोगों के खिलाफ शिकायत दी गई है, उनमें फिल्म निर्माता आदित्य चोपड़ा, अभिनेता शाहरुख खान, अभिनेत्री दीपिका पादुकोण शामिल हैं।

ओझा का कहना है कि फिल्म के निर्माता ने जानबूझकर हिन्दू भावना को ठेस पहुँचाई है। उन्होंने कहा कि बेशर्म रंग गाने के माध्यम से हिन्दू समुदाय के परिधान को निशाना बनाया गया है। इससे ना सिर्फ अश्लीलता को फैलाया जा रहा है, बल्कि धार्मिक भावना को भी ठेस पहुँचाया जा रहा है। कोर्ट ने परिवाद स्वीकार करते हुए सुनवाई की तारीख 3 जनवरी 2023 को दी है।

करियर की दुहाई देकर आफताब ने अदालत से माँगी जमानत, वकील अविनाश ने कहा – उसे जेल में रखने से कोई लाभ नहीं: श्रद्धा को 35 टुकड़ों में काटा था

अपनी लिव-इन पार्टनर श्रद्धा की बेरहमी से हत्या करने के मामले में तिहाड़ जेल में बंद आफताब पूनावाला ने जमानत के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जमानत अर्जी में आफताब ने अपने करियर की दुहाई देते हुए जमानत की माँग की है। आफताब की याचिका पर शनिवार को (17 दिसंबर, 2022) को सुनवाई होने की संभावना है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आफताब पूनावाला के वकील ने दिल्ली की साकेत कोर्ट में शुक्रवार (16 दिसंबर, 2022) को जमानत अर्जी दाखिल की थी। इस जमानत अर्जी में दलील दी गई थी कि मामले की जाँच पूरी हो चुकी है और पुलिस को अब चार्जशीट दाखिल करनी होगी।

आफताब के वकील अविनाश कुमार ने कहा था, “जमानत अर्जी में लिए गए आधार में यह तर्क दिया गया है कि आरोपित को अब भी न्यायिक हिरासत में रखने से कोई लाभ नहीं होगा।” याचिका में कहा गया है कि न्यायिक हिरासत बढ़ाने से उसके करियर और भविष्य को नुकसान होगा। गौरतलब है कि इससे पहले कोर्ट ने गत सप्ताह 9 दिसंबर को हुई सुनवाई में आफताब की न्यायिक हिरासत 14 दिनों के लिए बढ़ा दी थी। इस सुनवाई के दौरान, दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में कहा था कि मामले में जाँच चल रही है।

पुलिस फिलहाल, आफताब के पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। इसके अलावा, कहा जा रहा है कि जंगलों से मिलीं विभिन्न हड्डियों का भी पोस्टमॉर्टम किए जाने की संभावना है, क्योंकि हड्डियों की जाँच करने के बाद फोरेसिंक लैब ने कहा था कि हड्डियों में तेज धारदार हथियार के निशान मिले हैं।

बता दें कि इस मामले में अब तक सामने आए सभी सबूत आफताब के खिलाफ ही हैं। यहाँ तक कि श्रद्धा के पिता और भाई के ब्लड सैंपल का डीएनए महरौली के जंगल से मिली हड्डियों से मैच कर गया है। बता दें कि गुरुवार (15 दिसंबर, 2022) को, दिल्ली के उप-राज्यपाल वीके सक्सेना ने श्रद्धा मर्डर केस में ट्रायल कोर्ट में दिल्ली सरकार का प्रतिनिधित्व करने के लिए विशेष सरकारी वकील नियुक्त करने के दिल्ली पुलिस के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। उप-राज्यपाल कार्यालय के अनुसार, अधिवक्ता मधुकर पांडे और अमित प्रसाद मामले में विशेष सरकारी वकील के रूप में दिल्ली पुलिस का प्रतिनिधित्व करेंगे।

‘भारत में मुस्लिम ज्यादा सुरक्षित हैं…’ : सूफी काउंसिल ने दिया PAK मंत्री बिलावल भुट्टो को जवाब, सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती बोले- हमारी तुलना अपने मुल्क से न करें

ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल के चेयरमैन नसीरुद्दीन चिश्ती ने पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो को जवाब दिया है। बिलावल के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई व्यक्तिगत टिप्पणी की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए चिश्ती ने कहा कि भारत के मुस्लिम पाकिस्तानी मुस्लिमों की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और काफी बेहतर स्थिति में हैं।

सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि बिलावल भुट्टो की पीएम मोदी पर टिप्पणी से पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के साथ साथ पूरे पाकिस्तान की छवि खराब हुई है। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा, “पाकिस्तान के विदेश मंत्री द्वारा हमारे प्रधानमंत्री और हमारी मातृभूमि के खिलाफ इस्तेमाल की गई ज़हरीली भाषा की मैं कड़ी शब्दों में निंदा करता हूँ।”

अजमेर दरगाह के सक्सेसर नसीरुद्दीन चिश्ती ने आगे कहा, “बिलावल भुट्टो भूल गए हैं कि आतंकवादी ओसामा बिन लादेन मरा नहीं था, बल्कि पाकिस्तानी सरकार की नाक के नीचे अमेरिकी सेना द्वारा पाकिस्तान में मार गिराया गया था।” नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि पाकिस्तान को यह ध्यान रखना चाहिए कि भारतीय मुसलमान, पाकिस्तानी मुस्लिमों की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और बेहतर स्थिति में हैं। उन्होंने भुट्टो को हिदायत दी कि हमारे महान देश भारत की तुलना अपने ‘अस्थिर’ देश पाकिस्तान से न करे क्योंकि भारतीय संविधान सभी को धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है।

बिलावल भुट्टो की बयानबाजी और विदेश मंत्री एस जयशंकर का जवाब

आपको बता दें कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पाकिस्तान द्वारा कश्मीर का मुद्दा उठाने पर भारत द्वारा लताड़े जाने के बाद बिलाबिलाए बिलावल भुट्टो ने सार्वजनिक मंच पर दुनिया के सामने अनाप-शनाप बकना शुरू कर दिया। पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जारदारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। बिलावल ने कहा, “मैं भारत को बताना चाहता हूँ कि ओसामा बिन लादेन तो मर चुका है, लेकिन ‘गुजरात का कसाई’ अभी जिंदा है और वह भारत का प्रधानमंत्री है।”

बिलावल ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने से पहले अमेरिका ने उनकी एंट्री पर प्रतिबंध लगा दिया था। बिलावल भुट्टो दो कदम आगे बढ़ते हुए यहाँ तक कह दिया कि पीएम मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रधानमंत्री हैं और जयशंकर RSS के विदेश मंत्री। उन्होंने कहा कि भारत सरकार हिटलर की विचारधारा से प्रभावित है और पाकिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा दे रही है।

बता दें कि पहले बिलावल ने कश्मीर और आतंकवाद का मुद्दा उठाया था, तब भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान पर करारा हमला करते हुए कहा था कि जो आतंकी ओसामा बिन लादेन की मेजबानी करता हो, पड़ोसी देश की संसद पर हमला करता हो वो संयुक्त राष्ट्र में उपदेशक बन रहा है।

चीन से निपटने के लिए ₹26 लाख करोड़, … समझें ‘शांत’ जापान के मूड बदलने का कारण, चिप से लेकर साइबर युद्ध तक की तैयारी: सीधे युद्ध में 2 बार भिड़ चुके हैं दोनों देश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक बात हाल ही में दुनिया भर में खासी लोकप्रिय हुई थी, जिसे दुनिया भर के अंतरराष्ट्रीय राजनेताओं ने भी सराहा था। उन्होंने रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के साथ चर्चा में कहा था कि ये युद्ध का काल नहीं है। रूस और यूक्रेन के बीच 11 महीने से युद्ध चल रहा है और अब तक इसके कोई परिणाम नहीं निकले हैं। ऐसे में भारत के प्रधानमंत्री की ये बात बिलकुल ही सही थी। ये, युद्ध का काल नहीं है।

लेकिन, दुनिया भर में बन रही परिस्थितियों की देखें तो ये युद्ध से बचाव का काल ज़रूर है। ये ऐसा काल है, जो युद्ध का तो नहीं है लेकिन युद्ध से निपटने की तैयारी सर्वश्रेष्ठ रहनी चाहिए। ये बातें विरोधाभासी ज़रूर लगती हैं, लेकिन हैं नहीं। ऐसा इसीलिए, क्योंकि दो छोटे से देशों के बीच युद्ध आज पूरी दुनिया को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के दूरगामी परिणाम पूरी दुनिया पर पड़े हैं। खासकर जब कोई महाशक्ति युद्ध में उतर जाए तो शायद ही विश्व का कोई भाग इससे अछूता रहेगा।

ऐसे समय में दुनिया के चौथे सबसे बड़े द्वीपीय समूह देश ने एक चौंकाने वाला निर्णय लिया है, जिसकी उम्मीद खुद वहाँ के लोग भी नहीं कर रहे थे। जापान ने अपनी रक्षा और सुरक्षा योजनाओं का पूरा का पूरा खाका ही बदल कर रख डाला और भविष्य के लिए ऐसी योजना बनाई है जो चीन को उसकी तरफ आँख उठा कर देखने से भी रोकेगा। इसे ऐसे समझ लीजिए कि अपनी सेना के सम्बन्ध में जापान ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद शायद ही इस तरह की तैयारी की हो।

रूस-यूक्रेन युद्ध और चीन के आतंक के बीच जापान ने रक्षा क्षेत्र में उठाया बड़ा कदम

जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने महीनों तक चले विचार-विमर्श, बहस और चर्चाओं के बाद चीन से टक्कर लेने के लिए सैन्य क्षेत्र में अपने देश को मजबूत करने वाले दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। ताइवान पर जिस तरह से चीन अपना दावा ठोकता रहा है और अगर ताइवान पूरी तरह चीन के हाथों में चला गया तो जापान के सुदूर दक्षिणी-पश्चिमी द्वीपों को बचाने वाला कोई नहीं रहेगा। सेनकाकू द्वीप पर चीन पहले से ही दवा करता रहा है।

अव्वल तो ये कि चीन, ताइवान पर कब्जे के बाद जापान के व्यापारिक रूटों को भी ध्वस्त करने में सफल हो सकता है और किसी भी देश पर वित्तीय मार पड़ने का मतलब आप अच्छी तरह समझ सकते हैं। चीन के साथ-साथ ही एक अन्य सनकी वामपंथी शासक किम जोंग उन का उत्तर कोरिया भी जापान के लिए खतरा साबित हो सकता है। जापान के लिए ये पारिस्थितिक मजबूरी बन गई है कि वो अमेरिका, भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ अपनी रक्षा साझेदारी को ज्यादा से ज्यादा मजबूत करे।

तो, जापान ने इस दिशा में सबसे बड़ा कदम उठा दिया है। जापान ने नई ‘राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति (National Security Strategy/NSS)’ बनाई है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से जापान एक शांत राष्ट्र रहा है और उसने अपनी रक्षा ज़रूरतों को सीमित कर के रखा हुआ था। लेकिन, जापान अब अगले 5 वर्षों में ¥43 ट्रिलियन (26.06 लाख करोड़ रुपए) अपनी सैन्य शक्ति को मजबूत करने में खर्च करेगा। इसमें काउंटर-स्ट्राइक की तकनीक को विकसित करना सबसे बड़े लक्ष्यों में से एक है, ताकि हर हमले का जवाब हमले के साथ ही दिया जाए।

दुश्मन के क्षेत्र में ही हमला करने वालों को निशाना बनाया जा सके, जापान का जोर ऐसी तकनीकों को विकसित करने पर है। इसका परिणाम ये होगा कि 2027 तक जापान अपनी GDP का 2% डिफेंस बजट पर खर्च करेगा। जापान की पूरी सुरक्षा योजना रक्षा क्षेत्र को मजबूत करने पर टिकी होगी। जापान अब तीनों ही वामपंथी शासन वाले देशों रूस, चीन और उत्तर कोरिया को एक बड़े खतरे और चिंता के रूप में देख रहा है।

जापान की चिंता ये है कि पूर्वी और दक्षिणी चीन सागर में ड्रैगन यथास्थिति को बदलने का प्रयास कर रहा है। साथ ही साइबर क्षेत्र में चीन के लगातार हमलों के कारण जापान डिजिटल सुरक्षा में भी खुद को मजबूत बनाएगा। थलसेना, नौसेना और वायुसेना के एक संयुक्त कमांड की भी स्थापना होगी। अमेरिका से साझेदारी पर जोर है। चीन कहता रहा है कि वो ताइवान को अपने मेनलैंड को मिलाएगा, ऐसे में जापान के लिए ये आपात स्थिति पैदा कर सकता है।

सारी तैयारी उसी के बचाव की है, रूस-यूक्रेन युद्ध और उत्तर कोरिया तो बस छोटी चिंताएँ हैं। मिसाइल हमलों से निपटना जापान के लिए बड़ी चुनौती है। अमेरिका द्वारा बनाई गई 1600 किलोमीटर तक मार करने वाली Tomhawk मिसाइलें भी जापान खरीदेगा। जब 2013-14 में जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो अबे ने सैन्य क्षेत्र में मजबूती की ओर कदम बढ़ाया था, तब पश्चिमी मीडिया ने ‘शांतिपूर्ण देश’ के इस कदम का खासा विरोध किया था। अब चीन के खतरे के कारण यही देश इसका स्वागत कर रहे हैं।

शिंजो अबे ने जिस खतरे को लेकर दुनिया को आगाह किया था, अब चीन नामक वो खतरा पश्चिमी देशों के लिए भी चिंता का सबब बन रहा है। चीन, ताइवान को दूसरा हॉन्गकॉन्ग बनाना चाह रहा है। आसपास के सभी देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों पर दावे कर के उसने पड़ोसियों को दबाव में रखा है। दुनिया में सबसे ज्यादा जनसंख्या वाली सेना, साइबर क्षेत्र में मजबूती और देश में तानाशाही को हथियार बना कर वो कुछ भी कर सकता है।

सेमीकंडक्टर: तकनीक के क्षेत्र में भी चल रहा है एक युद्ध

सेमीकंडक्टर चिप – ये वो चीज है जो आने वाले समय में तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति लाएगा, ला रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूँ ही नहीं कहा था कि वो भारत को सेमीकंडक्टरों का हब बनाना चाहते हैं। जिस देश में दुनिया के 20% सेमीकंडक्टर डिजाइन इंजीनियर हैं, उसे भला कौन रोक सकता है? 2026 तक भारत का ही सेमीकंडक्टर खपत 80 बिलियन डॉलर (6.61 लाख करोड़ रुपए) तक हो सकता है। ऐसे समय में अब अमेरिका भी चीन को सेमीकंडक्टर बनाने के उपकरणों के निर्यात को लेकर कटौती के मूड में है।

चीन अपनी चिप इंडस्ट्री को 1 ट्रिलियन युआन (143 बिलियन डॉलर/11.58 लाख करोड़ रुपए) के पैकेज से मजबूत करने की योजना पर काम कर रहा है। ऊपर से दबाव बनाते हुए उसने अमेरिका के चिप एक्सपोर्ट को लेकर WTO (विश्व व्यापार संगठन) में आपत्ति भी दर्ज करा दी है। दुनिया में जहाँ भी अमेरिकी उत्पादों से आधुनिक सेमीकंडक्टर बन कर चीन को जा रहे हैं, अमेरिका उस पर लगाम लगाना चाहता है। जापान और नीदरलैंड – ये दो देश हैं जो चिप बनाने के उपकरणों के सबसे बड़े सप्लाईकर्ता हैं।

इन दोनों ही देशों से अमेरिका ने बात की है। जापान और नीदरलैंड अब इस सम्बन्ध में अमेरिका का साथ देंगे। ‘एक्सपोर्ट कंट्रोल’ को लेकर फोन पर अमेरिका-जापान में चर्चा भी हो चुकी है। जापान की चिप टेस्टिंग इक्विपमेंट कंपनी Advantest Corp के लिए ताइवान के बाद चीन सबसे बड़ा बाजार है। जापान दुनिया का सबसे अत्याधुनिक चिप बनाने के लिए भी अमेरिका से करार कर रहा है। ऐसे में नए ‘चिप युद्ध’ पर दुनिया की निगाहें रहेंगी।

जापान और चीन में 2 बार हो चुके हैं युद्ध: तीसरे युद्ध की आशंका से जापान ने उठाए हैं ये कदम?

कोरिया पर नियंत्रण को लेकर जापान और चीन में पहली बार युद्ध हुआ था, जो जुलाई 1894 से लेकर अप्रैल 1895 तक चला था। वहीं दूसरी बार भिड़े, तभी एशिया में द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हो गया था। तब जापान सम्राट मेइजी के शासन में मजबूत था, वहीं चीन के क्विंग राजवंश को तब एहसास हुआ था कि उसने अपनी सैन्य मजबूती पर ध्यान ही नहीं दिया। मेइजी ने अपने शासनकाल में जापानी युवाओं को पश्चिमी देशों में भेजा, ताकि वो वहाँ से आधुनिक तकनीक और विज्ञान सीख कर आएँ।

कोरिया और मंचुरिया पर नियंत्रण को लेकर हुए इस युद्ध में जापान विजयी हुआ था। सन् 1868 के बाद जापान में आधुनिकता का जो वातावरण बना और उसकी उन्नति शुरू हुई, उसे ‘Meiji Restoration’ भी कहते हैं। कोरिया और जापान में संधि होने से दोनों देशों में व्यापार बढ़ रहे थे और कोरिया में जापानी सेना को स्थापित करने की अनुमति मिल गई थी। बदले में ‘Donghak’ किसान विद्रोह को चीन ने समर्थन दे दिया, जिन्होंने कोरियन राजवंश के खिलाफ बगावत कर विदेशी शक्तियों के हस्तक्षेप को खत्म करने की माँग की थी

इसके बाद जापानी सेना ने चीन की तरफ मार्च किया और पुन्गडो, सियोंघवान, असं, प्योंगयांग और यालू नदी के ास्पा भयंकर युद्ध हुआ। पोर्ट आर्थर में जापानी सेना द्वारा नरसंहार को याद कर चीनी आज भी काँप उठते हैं। अब बात करते हैं दूसरे युद्ध की, जब चीन ने नाजी जर्मनी, रूस, यूके और अमेरिका का सहयोग पाकर चीन से लड़ाई की थी। ये युद्ध जुलाई 1937 से लेकर सितंबर 1945 तक चला। जापान उस समय अपने साम्राज्य का प्रभाव बढ़ाता जा रहा था।

बीजिंग, संघई और नान्जिंग जैसे बड़े चीनी महानगरों पर जापान ने आना नियंत्रण स्थापित कर लिया था। वुहान के युद्ध में चीन की हार हुई और जापान के आक्रमण के कारण चीन को अपनी राजधानी भी शिफ्ट करनी पड़ी थी। दिसंबर 1941 में जापान ने अमेरिका से युद्ध का दिया और अमेरिका ने चीन का साथ देना और मजबूती से शुरू कर दिया। अंततः जापान पर परमाणु बम गिरे। लेकिन, उस समय भी आधुनिक जापान ने चीन की अप्रशिक्षित सेना को हरा ही दिया था।

दोकलाम-गलवान के बाद तवांग में जो हुआ, उससे चीन को मिलेगा सबक: लेकिन, भारत को रहना होगा तैयार

हाल ही में तवांग में चीनी सेना ने अरुणाचल प्रदेश में आक्रमण का प्रयास किया, लेकिन भारतीय सेना ने संख्या में कम होने के बावजूद उसे लाठी से मार-मार कर भगाया। इसके बाद चीन के अपने ही लोग वहाँ के सोशल मीडिया में अपनी सरकार की आलोचना करने लगे। चीन भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के गठबंधन को AUKUS (ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, और ब्रिटेन का संयुक्त सैन्य गठबंधन) के समान ही अपने लिए खतरे के रूप में देखता है।

हाल ही में ये खबर भी आई है कि चीन ने प्रशांत महासागर में एक लड़ाकू जहाज भेजा है और साथ ही जापान की नई रक्षा नीति की आलोचना भी की है। कूटनीतिक स्तर पर जापान और भारत के सम्बन्ध और उनकी साझेदारी जितनी ज़्यादा मजबूत होगी, चीन को ये उतना ही ज़्यादा खलेगा। 2017 में दोकलाम, 2020-21 में गलवान और 2022 में तवांग में भारतीय सेना से मार खाने के बावजूद चीनी फ़ौज सुधरने का नाम नहीं ले रही है।

हालाँकि, भारत में कॉन्ग्रेस पार्टी जैसे कुछ ऐसे तत्व हैं जो चीन को फायदा और देश को नुकसान पहुँचाने वाली बातें करते हैं। जापान के 90% लोगों का मानना है कि देश को चीन के हमले के लिए पहले से तैयार रहना चाहिए। यहाँ राहुल गाँधी जैसे लोग जनता को ये कह कर बरगलाने में लगे हैं कि हमारी सेना पिट रही है। केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने तवांग जाकर भारतीय सैनिकों से मुलाकात भी की है। भारत ने साफ़ किया है कि हमारी सेना हमलों को रोकने में पूर्णरूपेण सक्षम है।