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‘पार्टी के अंदरूनी मामलों पर बाहर न बोलें एक भी शब्द’: राजस्थान में मचे बवाल पर कॉन्ग्रेस ने अपने नेताओं को दी चेतावनी, कहा- बात न सुनी तो कार्रवाई करेंगे

राजस्थान की राजनीति में चल रही हलचल के बीच कॉन्ग्रेस पार्टी ने अपने सभी नेताओं के लिए एडवाइजरी जारी की है। इस एडवाइजरी के मुताबिक कॉन्ग्रेस के हर नेता को पार्टी के किसी भी नेता के खिलाफ या पार्टी के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने से मना कर दिया गया है। पार्टी ने कहा है कि अगर कोई नेता ऐसा करना पाया गया तो उसके विरुद्ध सख्त एक्शन लिया जाएगा।

ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमेटी की एडवाइजरी में लिखा है, “हमने नोटिस किया है कि राजस्थान में कॉन्ग्रेस नेता पार्टी के आंतरिक मामलों और अन्य नेताओं के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं। ऐसे नेताओं को सलाह दी जाती है कि वो सार्वजनिक रूप से पार्टी के बारे में और पार्टी के आंतरिक मामलों पर बयान देने से बचें।”

इस एडवाइजरी में लिखा है कि अगर कोई इस एडवाइजरी का उल्लंघन करता पाया गया तो फिर कॉन्ग्रेस के संविधान के मुताबिक उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि एक ओर कॉन्ग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा के जरिए राहुल गाँधी देश में पार्टी की पैठ दोबारा से बनाने की कोशिश कर रहे हैं और दूसरी ओर राजस्थान में पैदा हुआ विवाद बढ़ता जा रहा है। आज सीएम गहलोत ने इसी बाबत सोनिया गाँधी से मुलाकात करके पिछले दिनों जो कुछ हुआ उसके लिए माफी माँगी थी। उन्होंने पत्र में कहा था कि जो कुछ भी वो बेहद दुखद है।

बता दें कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद चुनावों में सीएम गहलोत का नाम प्रमुखता से उठने के बीच राज्य की कमान सचिन पायलट को सौंपने की तैयारियाँ की जा रही थी। लेकिन गहलोत गुट इससे नाराज हो गया और 90 से ज्यादा विधायकों ने अपने इस्तीफे सौंप दिए। इसके बाद बागी विधायकों के रवैये को अनुशासनहीनता बताया था।

67 पॉर्न साइट पर लगाओ बैन: मोदी सरकार ने इंटरनेट कंपनियों को दिया आदेश, अब तक भारत में 900 साइटें प्रतिबंधित

भारत सरकार ने इंटरनेट कंपनियों को 67 पोर्नोग्राफिक वेबसाइट को ब्लॉक करने का आदेश दिया है। गुरुवार (29 सितंबर 2022) को सामने आए चार गोपनीय पत्रों से यह बात सामने आई है कि इसके लिए सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ देयता और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 का हवाला दिया है।

इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को भेजे गए ईमेल में दूरसंचार विभाग (DoT) ने पुणे की एक अदालत के आदेश के आधार पर 63 वेबसाइटों को और उत्तराखंड उच्च न्यायालय के निर्देश पर 4 वेबसाइटों को ब्लॉक करने के लिए कहा है। यह निर्देश इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) द्वारा जारी किया गया।

दूरसंचार विभाग द्वारा 24 सितंबर 2022 को भेजे गए ईमेल में कहा गया है, “सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के नियम 3(2)(बी) के साथ-साथ न्यायालय (उत्तराखंड उच्च न्यायालय) के आदेश के अनुपालन के तहत कुछ अश्लील सामग्रियों वाली वेबसाइट/यूआरएल को हटाने (ब्लॉक) करने का निर्देश दिया गया है, जो महिलाओं की मर्यादा एवं उनकी छवि को खराब करती हैं।”

MeitY द्वारा लागू आईटी नियम 2021 आईटी कंपनियों को उनके द्वारा होस्ट, संग्रहीत या प्रकाशित ऐसी सामग्री हटाने या ब्लॉक करने के लिए कहता है, जिसमें पूर्ण या आंशिक नग्नता दिखाई जाती है या किसी व्यक्ति को यौन कृत्य या आचरण करते हुए दिखाई जाती है।

बता दें कि साल 2018 में सरकार ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश के बाद करीब 827 अश्लील वेबसाइटों पर प्रतिबंध लगा दिया था। उस समय उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सरकार को 857 वेबसाइटों को ब्लॉक करने के लिए कहा था। इस इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (Meity) ने कहा था कि 30 पोर्टल पर कोई अश्लील सामग्री नहीं मिली है।

इस प्रतिबंध के बाद भारत में कुछ प्रतिबंधित पोर्न साइटों की संख्या लगभग 900 के करीब पहुँच गई है। भारत में पोर्न बैन के समय पोर्नहब के उपाध्यक्ष ने कहा था कि पोर्न साइट्स पर प्रतिबंध लगाना भारत के लोगों का करना है। इससे ये लोग जोखिम वाले गैरकानूनी पोर्न साइटों पार जा सकते हैं। उस समय भारत पोर्नहब के लिए तीसरा सबसे बड़ा कंज्युमर था।

मुकेश अंबानी की सुरक्षा में 58 जवान 24 घंटे रहेंगे तैनात: गृह मंत्रालय ने दी Z+ सिक्योरिटी, खर्चा खुद उठाना होगा

समीक्षा के बाद केंद्रीय गृहमंत्रालय ने उद्योगपति मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) की सुरक्षा को बढ़ा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों द्वारा खतरे के आंकलन के बाद उनकी सुरक्षा को बढ़ाकर जेड ‘प्लस’ (Z+) कर दिया गया है।

मुकेश अंबानी रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक हैं। खतरे को देखते हुए उन्हें ‘जेड श्रेणी’ की सुरक्षा दी गई थी। अब उस सुरक्षा कवर को और बढ़ा दिया गया है। बता दें कि पिछले साल उनके आवास एंटीलिया के बाहर विस्फोटक मिलने के बाद उनकी सुरक्षा को मजबूत करने पर काफी दिनों से विचार चल रहा था।

पिछले महीने 15 तारीख को भी किसी अज्ञात व्यक्ति ने रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल की लैंडलाइन नंबर पर कॉल कर मुकेश अंबानी परिवार को मारने की धमकी दी थी। इसके बाद मामले की जानकारी नजदीकी पुलिस स्टेशन को दे दी गई थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने जाँच शुरू कर दी थी। 

गृहमंत्रालय ने यह फैसला IB की रिपोर्ट पर लिया है। IB की रिपोर्ट में मुकेश अंबानी की जान को खतरा बताया गया है। वहीं, इस सुरक्षा व्यवस्था का पूरा खर्च मुकेश अंबानी को ही उठाना पड़ेगा। इससे पहले भी जेड श्रेणी की सुरक्षा का खर्च रिलायंस ही उठाता रहा था।

बता दें कि मुकेश अंबानी की जब जेड श्रेणी की सुरक्षा दिया गया था, तब इसको लेकर काफी विवाद हुआ था। यहाँ तक कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) तक चला गया था। हालाँकि, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला मुकेश अंबानी के पक्ष में सुनाया था।

Z+ सुरक्षा का दूसरा सर्वोच्च स्तर है। इससे ऊपर SPG सुरक्षा होती है, जो प्रधानमंत्री को मिली होती है। जेड प्लस सुरक्षा कवरेज में 58 सुरक्षाबल तैनात होते हैं, जिनमें से 10+ एनएसजी कमांडो और पुलिस अधिकारी शामिल होते हैं। इनमें से हर कमांडो मार्शल आर्ट का भी विशेषज्ञ होता है और उसे निहत्था युद्ध प्रशिक्षण मिला होता है।

Z+ कैटेगरी की सुरक्षा मिलने के बाद 10 आर्म्ड स्टैटिक गार्ड, 6 PSO, दो एस्कॉर्ट में 24 जवान, दो शिफ्ट में 5 वॉचर्स रहते हैं। वहीं, एक इंस्पेक्टर या सब इंस्पेक्टर इंचार्ज के तौर पर तैनात रहता है। उस VIP के घर आने-जाने वाले लोगों के लिए 6 स्क्रीनिंग करने वाले तैनात रहते हैं। इसके अलावा, 6 ड्राइवर भी दिए जाते हैं।

कैसा है वह ‘साहेब कोना’ जहाँ पहली बार हिंदू बने ईसाई: 1906 में जहाँ से भागे थे पादरी, 2022 में हमें भागना पड़ा

छत्तीसगढ़ का जशपुर ईसाई धर्मांतरण का बड़ा केंद्र है। यहाँ अनुसूचित जनजाति (Schedule Tribes) वर्ग के हिंदुओं को धर्मांतरित (Religious conversion) करने की पहली घटना जो जानकारी में है, वह 1906 की है। ईसाई बने कोरकोटोली और खड़कोना गाँव के शुरुआती लोगों की याद में एक स्मारक भी खड़कोना में बना हुआ है। इस पर कुल 56 नाम अंकित हैं। बताया गया है कि इनलोगों का 21 नवंबर 1906 को बपतिस्मा हुआ था।

मनोरा ब्लॉक के खड़कोना गाँव में प्रवेश करने से ठीक पहले सड़क किनारे एक बोर्ड लगा हुआ है। यह बोर्ड उस कच्चे रास्ते की ओर इंगित करता है जो पहाड़ से सटे एक जगह पर ले जाता है, जिसे स्थानीय ईसाई ‘साहेब कोना’ कहते हैं। यहाँ एक सालाना आयोजन होता है, जिसमें धर्मांतरित हिंदू शरीक होते हैं। ‘साहेब कोना’ को लेकर स्थानीय लोगों का दावा है कि आज के झारखंड के रास्ते पहली बार पादरी इसी जगह जंगल और पहाड़ों से होकर आए थे और इस इलाके में धर्मांतरण शुरू हुआ।

खड़कोना गाँव में प्रवेश करते ही है क्रुस चौक

आस्ता से करीब 10 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद मुख्य सड़क से एक रास्ता खड़कोना के लिए कटता है। खड़कोना जाने का 7.3 किलोमीटर लंबा रास्ता खेतों और जंगल से घिरा है। दूर पहाड़ नजर आता है। इस रास्ते पर कुछेक किलोमीटर चलने पर सड़क से सटा एक चर्च है। इसके बाद सड़क किनारे थोड़ी-थोड़ी दूरी पर लकड़ी के बड़े-बड़े क्रॉस गड़े हैं। खड़कोना में प्रवेश करते ही क्रुस चौक है। आसपास कुछ घर हैं। एक पानी की टंकी है। एक सार्वजनिक चापाकल भी। चापाकल से लगता हुआ पैदल रास्ता एक टीलेनुमा जगह पर जाता है। इस टीले पर ही वह स्मारक है, जिस पर 1906 में धर्मांतरित हुए हिंदुओं के नाम दर्ज हैं। धर्मांतरण के 100 साल पूरे होने पर यह स्मारक बना था। एक चर्च भी है। चर्च पर लगे शिलापट्ट के अनुसार 1984 में इसका निर्माण फादर पातरस टोप्पो ने किया था।

1906 में कोरकोटोली और खड़कोना में ईसाई बनने वाले शुरुआती लोगों की याद में बना स्मारक

जब हम खड़कोना पहुँचे तो क्रुस चौक पर सन्नाटा था। लेकिन चर्च से जब हम लौटे तो वहाँ कुछ लोग जमा हो गए थे। 68 साल के मार्टिन खड़कोना के ही रहने वाले हैं। वे खेती-किसानी करते हैं। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया, “गाँव में 39 घर हैं, इनमें से 30-32 परिवार ईसाई हैं। ज्यादा लोग खेती ही करते हैं।” 25 साल के रमेश राम इकलौते हिंदू थे जो हमें इस गाँव में मिले। उन्होंने बताया, “गाँव में हिंदुओं के अब 5 घर ही बचे हैं। उनलोगों को काम की भी दिक्कत है।” हमारी बातचीत चल ही रही थी तो वहाँ मौजूद ग्रामीण हमसे सवाल-जवाब करने लगे। वे इस बात से नाराज थे कि हमने चर्च के वीडियो शूट किए हैं। धर्मांतरण और ईसाई मिशनरियों की गतिविधि को लेकर सवाल पूछ रहे हैं। कुछ हमारे वीडियो भी बनाने लगे। माहौल गर्म होता देख हम गाँव से लौट गए।

क्रुस चौक पर जुटे ग्रामीण और वह जगह जिसे ‘साहेब कोना’कहते हैं

वापसी के समय हम उस कच्चे रास्ते पर बढ़े जो ‘साहेब कोना’ की तरफ जाता है। वहीं कोरकोटोली के 65 वर्षीय कलाबेल से हमारी मुलाकात हुई। चौथी तक पढ़ाई करने वाले कलाबेल भी खेती-किसानी करते हैं। वे स्नान करने के बाद खुले में अपने कपड़े सुखा रहे थे। खड़कोना की तरह ही कोरको टोली भी ईसाई बहुल गाँव है। कलाबेल ने बताया, “मेरे गाँव में 35 घर हैं। इनमें से केवल 7 परिवार अब हिंदू हैं।” उन्होंने हमें वह जगह दिखाई जहाँ कथित तौर पर पहली बार ईसाई मिशनरी के लोग पहुँचे थे। वह झरना दिखाया, जहाँ उनके पूर्वजों का बपतिस्मा हुआ। वो गुफा दिखाई जिसके बारे में दावा किया जाता है कि धर्मांतरण की सूचना मिलने के बाद जब जशपुर राजपरिवार के लोग इस गाँव में पहुँचे तो उसी गुफा के रास्ते मिशनरी के लोग भाग गए थे। अब यह जगह ईसाइयों के लिए ‘तीर्थ स्थल’ है। एक मंच भी बना हुआ है।

कलाबेल ने ऑपइंडिया को बताया, “साहेब लोग झारखंड से आते थे तो यहीं डेरा लगाते थे। यहीं गाँव के लोगों को बुलाते थे। पहले यहाँ पूरा जंगल था। 29 नवंबर को हर साल यहाँ तीर्थ यात्रा लगता है। एक-डेढ़ लाख लोग जुटते हैं।” कलाबेल के अनुसार अब ईसाई मिशनरी से ज्यादा फायदा उनलोगों को नहीं मिलता है। वे कहते हैं, “हमारे जिन पूर्वजों का धर्म बदला था, उनको फायदा दिया था। हमलोगों को वही फायदा मिलता है जो सरकार देता है।”

खड़कोना में हर जगह ईसाइयत के निशान

जब हम झरने के पास शूट कर रहे थे तो ग्रामीणों का वह समूह ‘साहेब कोना’ की तरफ आते दिखा, जिन्होंने क्रूस चौक पर हमें अपने काम से रोका था। हमारे स्थानीय संपर्क ने यह देख हमें वहाँ से निकलने की सलाह दी। उनका कहना था, “आप चले जाएँगे, लेकिन हमें यहीं रहना है…।” कच्चे रास्ते से हम मुख्य सड़क पर आ गए। रास्ते में उस चर्च के पास भी कुछ लोग जमा थे, जहाँ हमारे आने के समय सन्नाटा था और चर्च का मुख्य द्वार बंद मिला था। उनलोगों ने हमें चर्च के पास रुकने नहीं दिया। हमने तस्वीर लेने की कोशिश की तो हमें वहाँ से चले जाने को मजबूर कर दिया। ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि खड़कोना में किसी प्रतिकूल परिस्थिति में फँसने पर कोई बाहरी मदद भी हमें मिलना मुश्किल था। एयरटेल और वोडाफोन के मोबाइल नेटवर्क उस इलाके में काम नहीं कर रहे थे।

खड़कोना या कोरकोटोली केवल गाँव नहीं हैं। ये बताते हैं कि सुदूर वनवासी क्षेत्रों में ईसाई मिशनरियों ने घुसपैठ कर कैसे अपना विस्तार किया है। 2011 की जनगणना के अनुसार जशपुर जिले की करीब 22 फीसदी आबादी ईसाई है। स्थानीय वकील राम प्रकाश पांडे की माने तो यह संख्या 30-40 फीसदी तक हो सकती है। ये गाँव प्रतीक हैं, उस इकोसिस्टम का जिसे सरकारी संरक्षण हासिल है। उस संरक्षण के बलबूते उन्होंने लोकतांत्रिक भारत में अपने ऐसे इलाके गढ़ लिए हैं, जहाँ मीडिया अपनी मर्जी से सवाल भी नहीं पूछ सकती। सड़क किनारे लगे क्रॉस उनके इलाके की मुनादी करते हैं और बताते हैं कि यहाँ नाममात्र के ही हिंदू बचे हैं।

क्लिनिक में मरीज बनकर घुसा हमलावर, मौका देख ताबड़तोड़ गोली चलाई: पाकिस्तान के कराची में फिर चीन नागरिक की हत्या, 2 घायल

पाकिस्तान के कराची में एक बंदूकधारी के हमले में चीनी नागरिक की मौत की खबर है। बताया जा रहा है कि इसी हमले में 1 महिला सहित 2 अन्य चीनी नागरिक बुरी तरह से घायल हुए हैं। दोनों घायलों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है जहाँ उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। अभी तक किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। घटना बुधवार (28 सितम्बर 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना कराची के एक दाँत के क्लिनिक में घटी। हू डेंटल क्लिनिक नाम की यह क्लिनिक चीन के डॉक्टर रिचर्ड हू चलाते थे। घटना के दिन हमलावर वहाँ मरीज बन कर पहुँचा। उसने कुछ समय तक वेटिंग रूम में इंतज़ार किया और बाद में लगभग 15 मिनट बाद क्लिनिक में दाखिल हो गया। इसके बाद हमलावर ने पिस्तौल से डॉक्टर रिचर्ड हू और उनकी पत्नी फेन टेपिन पर गोलियाँ बरसा दीं। इस हमले की चपेट में मौके पर मौजूद तीसरा चीनी नागरिक रेमंड चाउ भी आ गया। हमलावर ने उसे भी गोलियाँ मारी।

बताया जा रहा है कि गोलियाँ बरसा कर हमलावर मौके से फरार हो गया। उसके फरार होने में उसके एक साथी ने मदद की जो सड़क पर बाईक ले कर खड़ा था। इधर गोलीबारी के चलते डॉक्टर रिचर्ड और उनकी पत्नी टेपिन गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। उनका इलाज कराची के एक अस्पताल में चल रहा है। डॉक्टर की क्लिनिक पर काम करने वाला कर्मचारी रोनाल्ड मौके पर ही मारा गया।

बताया जा रहा है कि चीन के मूल निवासी डॉ रिचर्ड और उनकी पत्नी फेन टेयिन लम्बे समय से कराची में रह रहे थे। उनकी दाँत की क्लिनिक काफी मशहूर थी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और जाँच में जुट गई। पुलिस के पहुँचने से पहले ही हमलावर फरार हो चुका था। पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री राणा सनाउल्लाह ने चीनी नागरिक की हत्या पर शोक जताते हुए इस घटना की आलोचना की है। उन्होंने सिंध के मुख्य सचिव को इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट भेजने को कहा है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान की अलगाववादी बलूच लिबरेशन आर्मी चीन के अपने देश में हस्तक्षेप के सख्त खिलाफ है। अप्रैल माह में कराची यूनिवर्सिटी के पास हुए एक आत्मघाती विस्फोट में चीन के 3 नागरिक मारे गए थे। इसी के साथ जुलाई 2021 में कराची के परमाणु ऊर्जा संयंत्र निर्माण में में चीन के 2 श्रमिकों को ले जा रही वैन पर 2 बंदूकधारियों ने हमला किया जिसमें 2 लोग घायल हो गए थे।

‘सरकार सपा की बनी थी, पर EC ने मुस्लिम-यादवों के वोट ही काट दिए’: UP चुनाव के महीनों बाद छलका अखिलेश यादव का दर्द, PM रेस से खुद को बाहर किया

इस समय विपक्ष में कई ऐसे नेता हैं, जो खुद को प्रधानमंत्री पद का सबसे मजबूत दावेदार मान रहे हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने इशारों-इशारों में यह स्पष्ट कर दिया है कि वह प्रधानमंत्री की रेस में नहीं हैं। यह बयान उन्होंने लखनऊ में गुरुवार (29 सितंबर 2022) को समाजवादी पार्टी के दो दिन के सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद दिया। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि वह बीजेपी को हराने के लिए अहम भूमिका निभाना चाहते हैं।

सपा के अध्यक्ष ने पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, “ये लड़ाई बड़ी है। हमारा उस स्थान (पीएम पद) पर पहुँचने का कोई सपना नहीं है। समाजवादियों का केवल एक ही सपना है समाज को बाँटने वाली ताकतों को बाहर निकालने का।”

अखिलेश यादव ने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा, “भले ही सपा हाल के चुनावों में हार गई हो, लेकिन इन नतीजों ने साफ कर दिया है कि यूपी में सिर्फ समाजवादी पार्टी ही है, जो बीजेपी को हरा सकती है।”

समाजवादी पार्टी ने अपने ट्विटर हैंडल पर अखिलेश यादव का वीडियो भी शेयर किया है। इस वीडियो में वह कह रहे हैं,

“सरकार जो बनी है ये जनता की बनाई हुई नहीं है, ये सरकार आपकी छीनी है इन्होंने। जनता को भी भरोसा नहीं हुआ कि ये सरकार कैसे बन गई। यूपी में समाजवादियों की सरकार बन गई थी, लेकिन पूरी की पूरी मशीनरी लगाकर आपकी सरकार छीनी गई। जिससे हमें सबसे ज्यादा उम्मीद थी उस इलेक्शन कमीशन ने बीजेपी के इशारे पर सपा के वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से काटे। जानबूझ कर हमारे यादव और मुस्लिमों के वोट कम कर दिए। जाँच करके देख लें तो, पता चल जाएगा कि 20000-20000 हजार वोट हमारे वहाँ से जानबूझ कर उड़ा दिए गए।”

बता दें कि अखिलेश यादव को आज (29 सितंबर 2022) लगातार तीसरी बार समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया है। चुनाव अधिकारी और पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव (Ram Gopal Yadav) ने सपा के राष्ट्रीय अधिवेशन में अखिलेश यादव के निर्विरोध पार्टी अध्यक्ष चुने जाने का ऐलान किया।”

‘गौमूत्र पियो, गोबर खाओ हरा@*$’: बर्मिंघम में ‘अल्लाह-हू-अकबर’ बोल हिंदू मंदिर पर टूटी कट्टरपंथियों की भीड़, PM मोदी को दी माँ की गाली; Videos वायरल

ब्रिटेन के बर्मिंघम में हिंदू मंदिर पर हुए हमले का एक वीडियो 28 सितंबर 2022 को सामने आया है। यहाँ इस्लामी भीड़ ने मंदिर के अंदर मौजूद हिंदुओं को गौमूत्र पीने वाला बता कर मज़ाक उड़ाया और उनकी पिटाई की। इस वीडियो में दिख रहा है कि हमलवारों ने अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाए और सुरक्षा के लिए पहुँचे पुलिस बल से भी अभद्रता की।

इस वीडियो को ट्विटर यूजर @INSIGHT_UK ने शेयर किया है। पहला वीडियो 2:10 मिनट का है। इसमें वीडियो बना रहे व्यक्ति ने हिंदुओं को मूत्र पीने वाला और बास्टर्ड कहा। बाद में उसी ने हिंदुओं को गाय का मूत्र पीने के लिए कहा। इसी वीडियो में हमलावरों द्वारा मंदिर में मौजूद हिंदुओं को माँ की गाली भी देते सुना जा सकता है।

वीडियो के आधे हिस्से के बाद पुलिस मौके पर पहुँचती है और वो हमलावरों को मंदिर से हटाने की कोशिश करती है। इस दौरान साफ देखा जा सकता है कि हमलावर न सिर्फ पुलिस वालों को धक्का देते हैं बल्कि महिला पुलिसकर्मियों पर बोतल भी फेंकते हैं। हालाँकि वो बोतल पुलिसकर्मी को नहीं लगी। इतने में वीडियो बनाने वाले की तरफ पुलिस आई और भीड़ को मंदिर की दीवार से खदेड़ने लगी। पुलिस द्वारा धक्का देते ही वे ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाने लगे। 1:34 टाइमस्टैम्प पर, किसी ने महिला पुलिस कर्मियों पर एक बोतल फेंकी जो उन्हें नहीं लगी।

इसी हैंडल द्वारा शेयर किए गए दूसरे वीडियो में भीड़ ने हिंदुओं को नस्लवादी कहा गया। इस दौरान अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाए जा रहे थे। इस वीडियो में रिकार्ड करने वाले व्यक्ति ने कैमरा अपनी तरफ घुमाया और हिंदुओं को फिर से मूत्र पीने वाले कहते हुए माँ की गाली दी। वीडियो बनाने वाले ने अपना चेहरा ढक रखा था। इस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि हमलावर महिला पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी अश्लील भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। यह वीडियो भी 2 मिनट 20 सेकेंड का है।

इसी हैंडल से शेयर हुआ तीसरा वीडियो भी 2:20 मिनट का है। इसमें वीडियो रिकॉर्ड कर रहे व्यक्ति ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को माँ की गाली दी है। इस वीडियो में भी हिंदुओं को मूत्र पीनी वाला बता कर अन्य गालियाँ दी गईं हैं। इसी वीडियो में एक व्यक्ति को मंदिर की दीवार पर चढ़ते भी देखा जा सकता है। मंदिर के बाहर हमलावर भीड़ काले रंग का नकाब पहने हुए है। पुलिसकर्मी उन्हें हटाने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं लेकिन हमलावर भीड़ पुलिस से उलझती दिख रही है।

बर्मिंघम का जो मंदिर हमले का शिकार हुआ वहाँ पर के कार्यक्रम में साध्वी ऋतम्भरा को आना था। हमलावरों ने उनके इसी दौरे को बहाने के तौर पर बनाया। हालाँकि स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के चलते साध्वी ऋतम्भरा इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुई थीं। साध्वी के न आने के बावजूद भी हमलावर भीड़ ने हिन्दुओं को डराने के लिए इस प्रकार की हरकत की।

ब्रिटेन में चरमपंथियों के निशाने पर लगातार हिंदू समाज

पिछले कुछ दिनों से ब्रिटेन के अलग-अलग हिस्सों में हिंदू समाज के लोगों को हिंसा का शिकार होना पड़ा है। इस हमले का बहाना पाकिस्तान की भारत के खिलाफ टी 20 क्रिकेट में हुई हार को बनाया जा रहा है। हालाँकि बाद में पाकिस्तान ने भारत को हरा दिया था पर हमलावर इसके बावजूद नहीं रुके और उनके हिन्दुओं पर हमले जारी रहे। इन हमलों के चलते कई हिंदू परिवार लीसेस्टर छोड़ कर पलायन कर गए हैं जो अब तक नहीं लौट पाए हैं। हिंदू समाज के न सिर्फ घरों बल्कि उनके दुकानों में भी तोड़फोड़ की गई है। इतने के बावजूद कई मीडिया संस्थान इस हमले का दोष हिन्दुओं को ही देते दिखाई दिए।

हिन्दुओं को गौ मूत्र पीने वाला बताना आतंकियों की भाषा

हिन्दुओं को गौमूत्र पीने वाला बताना आतंकियों की भाषा है। साल 2019 में जैश ए मोहम्मद द्वारा पुलवामा के जिस आतंकी हमले में 42 जवानों ने बलिदान दिया था उसमें एक आतंकी को वीडियो में हिन्दुओं को गौमूत्र पीने वाला कहते सुना गया था। आतंकी का नाम आदिल अहमद डार था जो पुलवामा के आतंकी हमले में शामिल होने की बात कबूल रहा था।

सोनिया गाँधी से CM गहलोत की हुई डेढ़ घंटे बात, बाहर आकर बोले- अब नहीं लड़ूँगा ‘कॉन्ग्रेस अध्यक्ष’ का चुनाव, पत्र में लिखा- जो हुआ बहुत दुखद है

राजस्थान (Rajasthan) के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ेंगे। प्रदेश में जारी सियासी संकट के बीच गहलोत ने गुरुवार (29 सितंबर 2022) को कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी से मुलाकात की। करीब 1.30 घंटे तक चली बैठक के बाद उन्होंने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया।

उन्होंने कहा,

“राजस्थान में दो दिन पहले जो हुआ उस घटना ने मुझे हिलाकर रख दिया है। पिछले 50 साल में मैं इंदिरा गाँधी हों या फिर कोई भी अध्यक्ष रहा हो सभी ने मुझ पर हमेशा विश्वास करके जिम्मेदारी दी। मैंने वफादार सिपाही रूप में काम किया है। राहुल गाँधी ने जब चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था, तब मैंने उनसे मुलाकात के बाद तय किया था कि अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ूँगा। लेकिन उसके बाद जो घटना हुई, उससे पूरे देश में यह संदेश गया कि मैं सीएम बना रहना चाहता हूँ। मैंने इसके लिए सोनिया गाँधी से माफी माँगी है। मैं कॉन्ग्रेस का वफादार हूँ।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अशोक गहलोत जब सोनिया गाँधी से मिलने 10 जनपद गए, तो उनके पास एक पत्र था। इसमें लिखा था, “जो हुआ बहुत दुखद है, मैं भी बहुत आहत हूँ। बीते दिन जो भी हुआ उसके लिए मैंने सोनिया जी से माफी माँग ली है।”

वहीं, राजस्थान में सियासी ड्रामे के बीच दिग्विजय सिंह ने ऐलान किया है कि वे अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने आज नामांंकन फॉर्म भी खरीद लिया है, जिसे वे कल भरेंगे। कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने आज पार्टी सांसद शशि थरूर से मुलाकात भी की। शशि थरूर ने दोनों के गले मिलने वाली तस्वीर अपने ट्विटर हैंडल पर भी शेयर की है। इस मौके पर थरूर ने कहा,

“मैं कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद के लिए उनकी उम्मीदवारी का स्वागत करता हूँ। हम दोनों इस बात पर सहमत हैं कि हमारी लड़ाई प्रतिद्वंद्वी नहीं है, बल्कि सहयोगियों के बीच एक दोस्ताना मुकाबला है। हम केवल यह चाहते हैं कि जो भी जीतेगा, कॉन्ग्रेस जीतेगी।”

गौरतलब है कि बीते दिनों सचिन पायलट को अशोक गहलोत का उत्तराधिकारी बनाए जाने के विरोध में गहलोत समर्थक माने जाने वाले 92 विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को अपना इस्तीफा भी सौंप दिया था। इसके बाद पायलट समर्थकों को लेकर यह खबर सामने आई थी कि केंद्रीय प्रवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन की रिपोर्ट के बाद पार्टी आलाकमान सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने के लिए कोई ना कोई रास्ता निकालेगी।

₹793 करोड़ की लागत, अंदर 500 डिवाइस: काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से 4 गुना बड़ा होगा ‘महाकाल लोक’, QR कोड स्कैन करके सुनाई पड़ेगी भगवान शंकर की महिमा

यूपी के वाराणसी स्थित विश्वनाथ कॉरिडोर के तर्ज पर मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकाल कॉरिडोर को भी विकसित किया जा रहा है। इस कॉरिडोर को ‘महाकाल लोक’ नाम दिया गया है। नवंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन कर, जनता को समर्पित करेंगे। यहाँ लोगों को भगवान शंकर के विभिन्न रूपों के बारे में बताया जाएगा।

महाकाल लोक में आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए विशेष सुविधाओं का आयोजन किया गया है। यहाँ श्रद्धालु भगवान शंकर की महिमा को कथाओं के रूप में रूप में सुन सकेंगे। इसके लिए श्रद्धालुओं को ‘उमा’ नाम का ऐप डाउनलोड करना होगा। इसके बाद मोबाइल पर ही भगवान शंभू कि कहानियाँ ऑडियो फॉरमेट में श्रद्धालु सुन सकेंगे।

उमा ऐप को डाउनलोड करने के लिए म्यूरल और स्कल्प्चर पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करना होगा। जिस मूर्ति का क्यूआर कोड स्कैन किया जाएगा, उसके बारे में उमा ऐप जानकारी देने लगेगा। महाकाल लोक में ऐसे 500 डिवाइस लगाई जा रही हैं। इसके साथ ही ऑडियो फॉरमेट को भी तैयार कर लिया गया है।

अगर श्रद्धालु पूरी कहानी ऑडियो के माध्यम से जानना चाहते हैं तो महाकाल मंदिर के ‘नंदी द्वार’ के सामने बने ऑफिस से शुल्क देकर ऑडियो डिवाइस लेना होगा। इसको स्कैन करते ही दर्शनार्थी शिव महिमा की पूरी कथा जान सकेंगे।

महाकाल लोक में 52 म्यूरल, 80 स्कल्प्चर और 200 मूर्तियाँ हैं। इनके माध्यम से भगवान शिव की लीला को बताया गया है। इन्हें स्कैन करते ही भाषा सेलेक्शन का विकल्प आएगा। आप अपनी मनपसंद भाषा में उसे सुन सकते हैं। शुरुआत में हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती और मराठी भाषा को शामिल किया गया है।

बता दें कि महाकाल कॉरिडोर बनकर तैयार हो गया है। इस कॉरिडोर के निर्माण के बाद महाकाल मंदिर पहले से कहीं अधिक अधिक भव्य दिखाई दे रहा है। महाकाल कॉरिडोर शुरू होने के बाद यहाँ दर्शनार्थियों की संख्या में भारी बढ़ोतरी होने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 11 अक्टूबर को इस कॉरिडोर का लोकार्पण करेंगे।

मध्य प्रदेश के सबसे बड़े तीर्थ स्थलों में से एक उज्जैन में इस कॉरिडोर के बनने के बाद महाकाल मंदिर परिसर दस गुना अधिक बड़ा हो गया है। पहले यह सिर्फ 2 हेक्टेयर में फैला हुआ था लेकिन अब यह 20 हेक्टेयर में फैल चुका है। उत्तर प्रदेश का काशी विश्वनाथ कॉरिडोर 5 एकड़ में बना हुआ है, यानी महाकाल कॉरिडोर उससे 4 गुना अधिक बड़ा है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 19 सितंबर 2022 को बताया कि इस महाकाल कॉरिडोर का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होना है। मुख्यमंत्री ने ट्वीट करते हुए बताया था, “आज हमने जो काम देखा है, उस से मैं संतुष्ट हूँ। 11 अक्टूबर को माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महाकाल महाराज की नगरी पधारेंगे और प्रथम चरण के कार्यों का लोकार्पण करेंगे। हम आज से ही तैयारियाँ प्रारंभ कर रहे हैं।”

महाकाल कॉरिडोर प्रोजेक्ट की कुल लागत 793 करोड़ रुपए बताई जा रही है। इस प्रोजेक्ट के पहले चरण के कामों को फाइनल टच दिया जा चुका है। पहले चरण में महाकाल पथ, महाकाल वाटिका, रुद्रसागर तालाब के किनारे का डेवलपमेंट समेत मुख्य द्वार, नाइट पार्क व अन्य विस्तार शामिल हैं। यह प्रोजेक्ट महाकाल मंदिर की तस्वीर की पूरी तरह बदल देगा। इस प्रोजेक्ट के दर्शनार्थियों को दो लाभ होने वाले हैं – पहला यह कि दर्शन बेहद आसान होंगे और दूसरा, दर्शन के साथ ही धार्मिक पर्यटन भी किया जा सकता है।

कर्नाटक में फाड़े गए राहुल गाँधी के 40 पोस्टर: कॉन्ग्रेस ने BJP पर थोपा इल्जाम, कहा- ‘भारत जोड़ो यात्रा की सफलता सहन नहीं हो रही’

भारत जोड़ो यात्रा के दौरान कर्नाटक पहुँचने से पहले ही राहुल गाँधी के पोस्टर फटे पाए गए हैं। फ़टे हुए पोस्टरों की सँख्या लगभग 40 है। ये पोस्टर राहुल गाँधी के स्वागत के लिए सड़क के किनारे लगाए गए थे। इस माह की आने वाली 30 तारीख को राहुल गाँधी अपनी यात्रा के साथ कर्नाटक में प्रवेश करने वाले हैं। कॉन्ग्रेस पार्टी ने इसका इल्जाम भारतीय जनता पार्टी पर लगाया है। घटना 28-29 सितम्बर 2022 के रात की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार घटना गुंडलपेट हाईवे की है। बताया जा रहा है कि फाड़े गए पोस्टरों में राहुल गाँधी के साथ पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और कॉन्ग्रेस के कुछ अन्य नेताओं की भी तस्वीर लगी थी। इन पोस्टरों को जहाँ लगाया गया था वहीं से राहुल गाँधी की यात्रा केरल से कर्नाटक में प्रवेश करने वाली थी। कॉन्ग्रेस ने पोस्टर फाड़े जाने की घटना का दोष भाजपा को दिया है।

कर्नाटक कॉन्ग्रेस ने इस घटना पर 29 सितम्बर 2022 को ट्वीट करते हुए लिखा, “भाजपा को ये नहीं पता कि चीजों को जोड़ा और बनाया कैसे जाता है। उनकी संस्कृति में केवल तोड़ना और नष्ट करना शामिल है। भाजपा भारत जोड़ो यात्रा की सफलता को सहन नहीं कर पा रही है। अब भाजपा उस अवस्था में है जहाँ वो अपनी खीज बैनरों पर उतार रही है।”

गौरतलब है कि 7 सितम्बर 2022 से शुरू हुई राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा 22वें दिन में पहुँच चुकी है। 30 सितम्बर 2022 को उनकी यात्रा केरल से खत्म हो कर कर्नाटक में प्रवेश करेगी। यह यात्रा कर्नाटक के चमराजनगर से होते हुए आगे बढ़ेगी। फ़िलहाल यात्रा की शुरुआत कन्याकुमारी से करने के दौरान कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया मौजूद नहीं थे।