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Amasia: पूरी दुनिया का जमीन वाला हिस्सा लगभग एक हो जाएगा, न एशिया बचेगा ना अमेरिका, वैज्ञानिकों के शोध में सुपरकॉन्टिनेंट

न्यू कर्टिन यूनिवर्सिटी (New Curtin University) की अगुवाई में किए गए शोध में दुनिया के अगले सुपरकॉन्टिनेंट के बारे में पता लगाया गया है। नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि पृथ्वी का अगला सुपरमहाद्वीप 20 से 30 करोड़ साल के बीच बनेगा। इसका नाम एमेशिया (Amasia Supercontinent) भी तय हो चुका है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने यह जानकारी दी है कि पृथ्वी की सतह पर सुपरमहाद्वीप के बनने (Formation of Supercontinent) और विखंडित होने की प्रक्रिया लगातार चल रही है। अच्छी खबर यह है कि हमारे ग्रह यानी कि पृथ्वी के सबसे पुराने महासागर को खत्म होने में अभी 30 करोड़ (300 मिलियन) साल और बाकी हैं।

न्यू कर्टिन यूनिवर्सिटी (New Curtin University) की अगुआई में किए गए शोध में यह भी सामने आया है कि यह सुपरकॉन्टिनेंट प्रशांत महासागर के सिमट कर बंद हो जाने से बनेगा। इस दौरान अमेरिकी और एशिया महाद्वीप एक हो जाएँगे। यही कारण है कि वैज्ञानिकों ने इसे एमेशिया (Amasia Supercontinent) नाम दिया है।

नेशनल साइंस रिव्यू में प्रकाशित इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने एक सुपरकम्प्यूटर की मदद ली है। इस सुपरकम्प्यूटर में वैज्ञानिकों ने पता लगाया कि सुपरकॉन्टिनेंट कैसे बनते हैं। उन्होंने इसका सिम्यूलेशन तैयार किया और पाया कि पृथ्वी अरबों सालों से ठंडी हो रही है। महासागरों के नीचे की प्लेटों की मोटाई और सतह समय के साथ कम होती जा रही है, जिससे अगले सुपरमहाद्वीप को पास आकर जुड़ने में दिक्कतें हो रही हैं।

कर्टिन यूनिवर्सिटी के अर्थ डायनामिक रिसर्च ग्रुप और स्कूल ऑफ अर्थ एंड प्लैनेटरी साइंसेस के वैज्ञानिक और अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ चुआन हुआंग का कहना है कि इस अध्ययन से पृथ्वी पर अगले 20 करोड़ सालों में क्या होगा, इसकी जानकारी मिल सकेगी। हुआंग ने कहा:

“पिछले दो अरब वर्षों में, पृथ्वी के महाद्वीप हर 30 करोड़ (600 मिलियन) वर्षों में एक सुपरकॉन्टिनेंट बनाने के लिए एक साथ टकराए हैं, जिसे सुपरकॉन्टिनेंट साइकिल के रूप में जाना जाता है।”

बता दें कि महाद्वीपों को आपस में जुड़ने में अटलांटिक और हिंद जैसे युवा महासागरों को खत्म करने में इसी वजह से दिक्कत आ रही है। इसलिए यह कार्य प्रशांत महासागर के जरिए होगा। प्रशांत महासागर दोनों महासागरों की तुलना में कहीं ज्यादा पुराना है।

‘अल्लाह के सिवा कोई नहीं… कयामत के बाद उठाया भी जाना है’: क्रिकेटर मोहम्मद शमी ने दी दशहरा की बधाई, कट्टरपंथी दे रहे गाली

बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक दशहरा का पवित्र त्योहार आज देश भर में पूरे धूमधाम और जोश-खरोश के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर क्रिकेटर मोहम्मद शामी ने भी देशवासियों को दशहरा की बधाई दी। हालाँकि, शामी का यह बधाई संदेश कट्टरपंथियों को रास नहीं आया और वे उन्हें ट्रोल करने लगे।

मोहम्मद शामी ने बुधवार (5 अक्टूबर 2022) को सोशल मीडिया पर भगवान राम द्वारा रावण का वध करते हुए एक तस्वीर डाला, जिस पर लिखा था हैप्पी दशहरा। तस्वीर के साथ ही उन्होंने ट्वीट किया, “दशहरे के शुभ अवसर पर मैं प्रार्थना करता हूँ कि भगवान राम आपके जीवन को ढेर सारी समृद्धि, सफलता और खुशियों से भर दें। आपको और आपके परिवार को दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएँ।”

मोहम्मद शामी द्वारा दशहरा की बधाई देते ही कट्टरपंथी उन पर पिल पड़े। उन्होंने शामी को ट्रोल करना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, कई कट्टरपंथी तो उन्हें इस्लाम समझाने लगे और मुस्लिम होने के गुण बताने लगे। अकील भट्टी नाम के एक ट्वीटर हैंडल ने लिखा, “शर्म आनी चाहिए शमी। क्या तुम मुस्लिम हो?”

एक ट्विटर यूजर ने तो हद कर दी। इब्न ए अहमद नाम के ट्विटर हैंडल ने शमी द्वारा दशहरा की बधाई देने पर कटाक्ष करते हुए लिखा, “टीम में नहीं लेंगे भाई।” बता दें कि मोहम्मद शमी लंबे समय से भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा नहीं हैं।

हसन मंजूर नाम के एक ट्विटर हैंडल ने लिखा, “ये जानते हुए कि अल्लाह के सिवा कोई खुदा नहीं है, एक मुस्लिम होने के नाते आप ऐसा कैसे कह सकते हैं?”

अमन मिर्जा ना के एक अन्य ट्विटर हैंडल ने लिखा, “मरने के बाद दोबारा उठाया भी जाना है। कब्र-कयामत सब भूल बैठे हैं। अल्लाह हिदायत दे।”

कला के नाम पर हिंदू देवी-देवताओं की नग्न पेंटिंग और अब मुगलों जैसा रावण: रामायण की ‘सीता’ ने कहा- बंद हो ऐसा मजाक

फिल्म आदिपुरुष (Adipurush) में सैफ अली खान (Saif ali Khan) के लुक पर खड़े हुए विवाद में अब रामायण धारावाहिक में सीता का रोल निभाने वाली दीपिका चिखलिया का भी बयान आया है। उन्होंने कहा है कि अगर फिल्म में दिखाया गया रावण लंका का है तो उसको मुगलों जैसा नहीं दिखना चाहिए। दीपिका के मुताबिक, फिल्म के टीजर में सैफ अली खान रावण जैसे नहीं लग रहे हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म की कहानी सच्चाई और सादगी पर आधारित होनी चाहिए।

आजतक के एक शो में दीपिका ने कहा कि आदिपुरुष के टीजर में सैफ अली खान का लुक रामायण के रावण से मेल नहीं खाता। उन्होंने कहा कि फिल्म सफल तभी होती है, जब उसके पात्र जो रोल निभा रहे हों वो वास्तव में उस रूप में दिखे। फिलहाल टीजर से फिल्म के आंकलन पर दीपिका ने कहा कि इससे फिल्म का आँकलन करना जल्दबाजी होगी।

दीपिका ने इसी बहस में आगे कहा कि अगर रावण श्रीलंका के हैं तो वो श्रीलंका के ही लगने चाहिए न कि किसी मुगल देश से। हिन्दू संगठनों द्वारा खड़े किए गए विवाद पर दीपिका ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी है, जो 30 सेकेंड के टीजर से शुरू हुआ है। उन्होंने कहा कि टीजर से फिल्म को तय नहीं किया जा सकता है, लेकिन उसमें जो दिख रहा है वो पारम्परिक रामायण से काफी अलग है।

सैफ अली के रोल पर दीपिका ने कहा कि अगर कोई ऐसा रोल निभा रहा हो, जिसे लोग अच्छे से जानते हों तो उसमें फिट होने में दिक्कत आती है। उन्होंने रामानंद सागर की रामायण को मील का पत्थर बताते हुए कहा कि भले ही हर साल एक रामायण सीरियल बनता हो, लेकिन लोग उसकी तुलना रामानंद सागर की ही रामायण से करते हैं।

दीपिका के मुताबिक, जैसे रामायण धारावाहिक के बाद उनके साथ-साथ अन्य कलाकारों की किरदार वाली पहचान जीवन भर बनी रही, वैसा फिल्म आदिपुरुष के कलाकारों के साथ होना सम्भव नहीं है। उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा कि आदिपुरुष के कलाकार लोगों के जेहन में मेन स्ट्रीम अभिनय करने वालों के तौर पर हैं।

दीपिका चिखलिया ने कहा कि हिन्दू धर्म के देवी-देवताओं के साथ सभी लोग कुछ ज्यादा ही छूट उठाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने इसे बंद करने की माँग की। दीपिका ने कहा कि इसी छूट के नाम पर हिन्दुओं के आराध्यों की नग्न पेंटिंग तक बना दी जाती है।

रामायण और महाभारत को देश की धरोहर बताते हुए उन्होंने इसके खिलाफ होने वाली हरकतों को फ़ौरन रोकने की माँग की। दीपिका के मुताबिक, जिस प्रकार से सरकार के लिए संविधान है, वैसे ही आध्यात्म में भी है और वह है रामायण। कैसा बेटा होना चाहिए, कैसी बहू होनी चाहिए, किस तरह का जीवन जीना चाहिए… ये सब उसमें है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग लोगों द्वारा लिखी रामायण में बहुत कम अंतर है, लेकिन उसको मुद्दा न बनाकर हमारे ग्रंथों का सम्मान सुरक्षित होना चाहिए।

टैक्सी ड्राइवर से सवारी बन मिले तसलीम-शाहरुख-आबिद, सिर पर पत्थर मार हत्या की: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर फेंकी लाश, गिरफ्तार

दिल्ली के टैक्सी ड्राइवर विशाल की हत्या की गुत्थी सुलझ गई है। उसकी लाश दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस हाईवे के पास नाले से मिली थी। इस मामले में पुलिस ने तसलीम, शाहरुख और आबिद को गिरफ्तार किया है। विशाल की हत्या 19 सितम्बर 2022 को हुई थी। वह सवारी छोड़ने राजस्थान के अलवर गया था।

रिपोर्ट्स में पुलिस के हवाले से बताया गया है कि टैक्सी मालिक हरविंदर सिंह ने 22 सितम्बर को अपने ड्राइवर विशाल की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। उन्होंने बताया था कि विशाल का मोबाइल फोन 19 सितम्बर की शाम से ही बंद है। पुलिस ने विशाल की तलाश शुरू की तो 26 सितम्बर को उसका शव दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस हाईवे के पास मिला।

पुलिस ने हत्याकांड की पड़ताल शुरू की तो सबसे पहले अलवर के ही फिरोजपुर थाना क्षेत्र के रवा गाँव के रहने वाले तसलीम का नाम सामने आया। तसलीम को गिरफ्तार कर के पूछताछ की गई तो उसने हत्या और लूट की बात कबूल कर ली। साथ ही बताया कि उसके रवा का शाहरुख और हरियाणा नूँह का आबिद भी इसमें शामिल था। पुलिस ने इन दोनों को भी गिरफ्तार कर लिया है।

पूछताछ में तीनों ने बताया कि वे सवारी बनकर विशाल से अलवर में ही मिले थे। अलवर से 45 किलोमीर चलने पर फिरोजपुर के पास 2 आरोपितों ने टैक्सी रुकवाई और किराया देने के बहाने नीचे उत्तर गए। इस दौरान गाड़ी में ही बैठे एक अन्य आरोपित ने विशाल के सिर पर पीछे से लोहे की रॉड से वार किया, जिससे विशाल अचेत हो गया।

इसके बाद आरोपित विशाल को टैक्सी के पीछे डालकर घटनास्थल से कुछ दूरी पर स्थित नौगाँवा ले गए। यहाँ पर दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे पर एक नाले के पास पुलिया नंबर 82 पर रुक कर उन्होंने विशाल के सिर पर पत्थरों से वार कर उसकी हत्या कर दी। विशाल की लाश वहीं फेंक वे टैक्सी लेकर भाग गए।

जनसंख्या नियंत्रण पर सरसंघचालक का जोर, कहा- यह सब पर लागू हो, संतुलन बिगड़ने से बने कई देश: RSS के दशहरा मंच से मातृ शक्ति का भी उद्घोष

विजयादशमी (5 अक्टूबर 2022) के अवसर पर सरसंघचालक मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने स्वयंसेवकों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण (Population Control) पर जोर देते हुए इसके लिए एक समान कानून की पैरवी की। मौका था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के विजयादशमी समारोह का। हर साल दशहरे पर होने वाले यह संघ का सबसे बड़ा कार्यक्रम है। माउंट ऐवरेस्ट फतह करने वाली संतोष यादव मुख्य अतिथि थीं। पहली बार इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि कोई महिला बनी हैं।

इस खास अवसर पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी उपस्थित रहे। इस दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने महिलाओं की भूमिका, जनसंख्या असंतुलन समेत कई बड़े मुद्दों पर बात की।

भागवत ने कहा कि शक्ति ही शुभ और शांति का आधार है। नारियों को लेकर कहा, “हम उन्हें जगत जननी मानते हैं, लेकिन उन्हें पूजाघर में बंद कर देते हैं ये ठीक नहीं है। मातृशक्ति के जागरण का कार्यक्रम अपने परिवार से प्रारंभ करना होगा, फैसला लेने में महिलाओं को भी शामिल करना होगा।”

मोहन भागवत ने आगे कहा, “2017 में विभिन्न संगठनों में काम करने वाली महिला कार्यकर्ताओं ने भारत की महिलाओं का सर्वांगीण सर्वेक्षण किया। महिलाओं के बिना विकास संभव नहीं है। जो काम मातृ शक्ति कर सकती हैं, वह काम पुरुष भी नहीं कर सकते। इसलिए उनको प्रबुद्ध, सशक्त बनाना, उनका सशक्तिकरण करना और उनको काम करने की स्वतंत्रता देना और कार्यों में बराबरी की सहभागिता देना जरूरी है।” उन्होंने यह भी कहा, “शासन व प्रशासन के इन शक्तियों के नियंत्रण व निर्मूलन के प्रयासों में हमको सहायक बनना चाहिए। समाज का सबल व सफल सहयोग ही देश की सुरक्षा व एकात्मता को पूर्णत: निश्चित कर सकता है।”

उन्होंने कहा, “समाज के विभिन्न वर्गों में स्वार्थ व द्वेष के आधार पर दूरियाँ और दुश्मनी बनाने का काम स्वतन्त्र भारत में भी चल रहा है। उनके बहकावे में न आते हुए उनकी भाषा, पंथ, प्रांत, नीति कोई भी हो उनके प्रति निष्ठुर होकर निर्भयतापूर्वक उनका प्रतिकार करना चाहिए।”

मोहन भागवत ने जनसंख्या को लेकर भी बड़ी बातें कहीं। उन्होंने कहा, “जनसंख्या बोझ है, लेकिन ये साधन भी बन सकता है। जनसंख्या नियंत्रण के साथ-साथ जनसंख्या संतुलन भी महत्व का विषय है। इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती।” उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि एक भूभाग में जनसंख्या में संतुलन बिगड़ने का परिणाम है कि इंडोनेशिया से ईस्ट तिमोर, सूडान व सर्बिया से कोसोवा नाम के नए देश बन गए हैं। उन्होंने कहा कि जनसंख्या नीति गंभीर मंथन के बाद तैयार की जानी चाहिए और इसे सभी पर लागू किया जाना चाहिए।

वहीं, पद्मश्री संतोष यादव ने अपने सम्बोधन में कहा, “मैं पूरे भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के मानव समाज से अनुरोध करना चाहती हूँ कि वो आएँ और संघ के कार्यकलापों को देखें। यह शोभनीय एवं प्रेरित करने वाला है।” उन्होंने यह भी कहा कि बिना किसी को जाने उसके बारे में धारणा बना लेना भारतीय संस्कृति नहीं है।

बतौर मुख्य अतिथि पहुँची संतोष यादव ने कहा, “मेरे हाव-भाव को देखकर लोग पूछते थे कि क्या तुम संघी हो? तब मुझे नहीं पता था कि संघ क्या है। आज मेरी किस्मत मुझे इस सर्वोच्च मंच पर लेकर आई है।” उन्होंने कहा, “हमारा सनातन धर्म और संस्कृति हमें पंचतत्वों का संतुलन बनाना सिखाती है। स्वस्थ रहना हमारे लिए जरूरी है। इससे ही हम अपने अपने लक्ष्यों को पूरा कर सकते हैं।”

शशि थरूर का गेम सेट करने के लिए राहुल गाँधी तक गए कॉन्ग्रेसी, तिरुवनंतपुरम के MP ने कहा- चुनाव लड़ने से रोकना चाहते हैं कुछ नेता

कॉन्ग्रेस में दो राजनीतिक तमाशे इन दिनों साथ-साथ चल रहे हैं। एक, राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra)। दूसरा, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष का चुनाव (Congress presidential election)। अध्यक्ष बनने के लिए मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) और शशि थरूर (Shashi Tharoor) मुकाबिल हैं। थरूर के एक बयान ने कॉन्ग्रेस के भीतर आंतरिक लोकतंत्र की पोल खोल दी है। तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर का कहना है कि कुछ पार्टी नेता नहीं चाहते कि वे चुनाव लड़ें। नामांकन वापस लेने के लिए उन पर दबाव बनाने के मकसद से ये नेता राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) से भी मिले थे।

थरूर ने बताया है कि उनकी हाल में राहुल गॉंधी से मुलाकात हुई थी। इस दौरान उन्होंने बताया कि पार्टी के कुछ नेताओं ने उनसे मिलकर कहा कि वे थरूर को नामांकन वापस लेने के लिए। तिरुवनंतपुरम सांसद के अुनसार राहुल ने ऐसा करने से इनकार कर दिया, क्योंकि वे चाहते हैं कि थरूर चुनाव लड़ें।

रिपोर्ट्स के मुताबिक थरूर ने कहा कि राहुल गाँधी पिछले 10 साल से कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव कराने के समर्थक हैं। उनका मानना है कि चुनाव से बना अध्यक्ष कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए अच्छा काम करेगा। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक थरूर ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि पार्टी के बड़े लोग उनका साथ नहीं दे रहे हैं। उन्होंने खड़गे से वैचारिक मतभेद को खारिज करते हुए उन्हें भी अपनी तरह ही कॉन्ग्रेस की मूल सोच और विचारधारा वाला बताया है। लेकिन यह माना कि पार्टी को आगे बढ़ाने और 2024 में बीजेपी को चुनौती देने को लेकर दोनों की सोच में अंतर है।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद के लिए 17 अक्टूबर को चुनाव होने हैं। 19 अक्टूबर को वोटों की गिनती होगी। माना जा रहा है कि इन चुनावों में खड़गे को कॉन्ग्रेस के शीर्ष परिवार का समर्थन हासिल है।

बधाई हो! अब यूट्यूब पर भी तेज रफ्तार से ‘रवीश रोना’: कहा- बहुत देर कर दी, पहले ही ये काम कर लेना चाहिए था

आज (5 अक्टूबर 2022) दशहरा है। रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद का दहन होना है। उससे पहले मीडिया के स्वयंभू दशानन ने अपनी दुकान का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं रवीश कुमार (Ravish Kumar Youtube channel) के यूट्यूब चैनल की।

रवीश कुमार ने अपने यूट्यूब चैनल (Ravish Kumar Official) पर करीब 8 मिनट का वीडियो अपलोड कर बताया है कि यह उनका ही चैनल है और उन्हें यह कदम क्यों उठाना पड़ा है। यह भी बताया है कि यह चैनल उन्होंने इसी साल जून में ही बना ली थी, लेकिन एनडीटीवी प्राइम टाइम (NDTV Prime Time) की व्यस्तता के कारण समय नहीं मिल रहा था। इसकी वजह से वे बहुत कुछ नहीं कर पाए। लेकिन अब लगता है कि इसे सक्रिय कर देना चाहिए। उन्होंने अब लगातार और तेज रफ्तार से यूट्यूब चैनल पर सामग्री डालने का वादा किया है। साथ ही संकेतों में बताया है कि यही ‘नया रास्ता’ है।

इस वीडियो की खास बात यह है कि इसमें रवीश कुमार ने खुद को इतनी बार ‘असली’ बताया है, जितना खुद के विद्वान और पराक्रमी होने का ऐलान असली वाले रावण ने अपने पूरे जीवनकाल में नहीं किया होगा। इस चैनल के डिस्क्रिप्शन में कहा गया है, “यह पत्रकार रवीश कुमार का आधिकारिक यू-ट्यूब चैनल है। इसके अलावा कोई दूसरा चैनल नहीं है। रवीश सोशल मीडिया के पुराने नागरिक हैं। ब्लॉगर भी रहे हैं।”

रवीश कुमार ने फेसबुक पोस्ट के जरिए भी इसके बारे में बताया है। उन्होंने लिखा है, “बहुत देर कर दी। पहले ही ये काम कर लेना चाहिए था… अब जब यूट्यूब की घोषणा कर ही दी है तो कोशिश करूँगा कि पॉडकास्ट या वीडियो किसी भी रूप में नियमित रूप से आपके बीच पहुँचता रहूँ।”

वैसे रवीश कुमार के भविष्य में यूट्यूबर बनने की अटकलें पहले से ही लग रही थी। क्योंकि वे मीडिया में उसी पथ के अनुगामी बने हैं, जिसका निर्माण भारतीय मीडिया के पूर्व के दैत्येन्द्रों ने किया है। लेकिन यूट्यूब चैनल के आधिकारिक ऐलान के बाद अब सोशल मीडिया में यह चर्चा चल रही है कि मीडिया की लंका (एनडीटीवी) और रवीश कुमार का संबंध विच्छेद होने वाला है। हालॉंकि बीते अगस्त में खुद रवीश कुमार ने ऐसी अटकलों का खंडन किया था। उन्होंने लिखा था, “माननीय जनता, मेरे इस्तीफ़े की बात ठीक उसी तरह अफवाह है, जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुझे इंटरव्यू देने के लिए तैयार हो गए हैं और अक्षय कुमार बंबइया आम लेकर गेट पर मेरा इंतज़ार कर रहे हैं। आपका, रवीश कुमार। दुनिया का पहला और सबसे महँगा जीरो टीआरपी ऐंकर।”

वास्तविकता जो भी हो वह भविष्य में उसी तरह सामने आएगा, जैसे ‘रवीश की रिपोर्ट’ वाले एंकर का चेहरा प्राइम टाइम आते-आते दर्शकों के सामने बेनकाब हुआ था। लेकिन, यह मौका मोदी और हिंदुओं से घृणा करने वाले लिबरलों और वामपंथियों को बधाई देने का है। आखिर 2024 से पहले दिल बहलाने को उन्हें एक और भोंपू मिला गया है।

जो बनाती थी AAP के लिए वीडियो, TheLallantop ने उसे ही पत्रकार बना गुजरात भेजा: पोल खुलते ही सोशल मीडिया पर जनता ले रही मौज

इस वर्ष के अंत में गुजरात में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन चुनावों के लिए आम आदमी पार्टी एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। मीडिया को भी साध रही है, जो उनका हमेशा से एजेंडा रहा है। ऐसे में गुजरात चुनाव से पहले न्यूज पोर्टल ‘द लल्लनटॉप’ द्वारा नूपुर पटेल की नियुक्ति ने नेटिज़न्स को आश्चर्यचकित कर दिया। लोग यह जानना चाहते हैं कि नूपुर पटेल पत्रकार हैं या फिर आम आदमी पार्टी की कार्यकर्ता।

दरअसल, एक ट्विटर यूजर और एक्टिविस्ट अंकुर सिंह ने एक ट्विटर थ्रेड शेयर करते हुए बताया है कि इंडिया टुडे ग्रुप का न्यूज पोर्टल ‘द लल्लनटॉप’, आम आदमी पार्टी के आईटी सेल की मेनलाइन मीडिया विंग के रूप में काम कर रहा है। ‘द लल्लनटॉप’ द्वारा नुपूर पटेल जैसे लोगों को काम पर रखना यह दर्शाता है कि ऐसे लोगों को साथ रख कर वह आप (AAP) के लिए सॉफ्ट कॉर्नर बनाना चाहते हैं।

एक्टिविस्ट अंकुर सिंह ने नूपुर पटेल द्वारा पोस्ट किए गए पुराने ट्वीट्स शेयर किए हैं। इन ट्वीट्स में नूपुर आम आदमी पार्टी के लिए अपना समर्थन करते हुए भाजपा का खुला विरोध कर रही हैं। हालाँकि, आम आदमी पार्टी से लिंक उजागर होने के तुरंत बाद उन्होंने अपनी प्रोफ़ाइल से ऐसे कई ट्वीट्स हटा दिए हैं, जिनसे यह साबित हो सकता है कि वह खुले तौर पर आप की समर्थक हैं।

आप के लिए प्रचार वीडियो बनाने से लेकर अरविंद केजरीवाल और पार्टी की नीतियों का खुलकर समर्थन करने तक, नूपुर पटेल ने ट्विटर पर खुलकर अपनी राजनीतिक विचारधारा को उजागर किया है। यही नहीं, उन्होंने अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ भद्दे ट्वीट भी किए हैं। ऐसे ही एक ट्वीट में उन्होंने भाजपा को वायरस बताया है।

गौरतलब है, नुपुर ने अरविंद केजरीवाल और अन्य आप नेताओं के बारे में जो ट्वीट किए थे, वह ‘द लल्लनटॉप’ जॉइन करने के बाद हटाए जा चुके हैं। हालाँकि, सोमवार (3 अक्टूबर 2022) को ‘द लल्लनटॉप’ द्वारा शेयर किए गए वीडियो से सोशल मीडिया यूजर्स को यह समझ आ गया था कि वह आम आदमी पार्टी के प्रचार को बेहतरीन तरीके से आगे बढ़ा सकती हैं। वह भी लल्लनटॉप जैसे ‘तटस्थ पोर्टल’ में ‘तटस्थ पत्रकार’ की तरह काम करते हुए।

नूपुर पटेल द्वारा डिलीट किए जा चुके एक ट्वीट में उन्होंने खुद बताया था कि वो मोदी सरकार के विरोध में बीफ खाई हैं। उन्होंने ट्विटर पर ही नहीं, बल्कि यूट्यूब और फेसबुक पर भी केजरीवाल और आप के समर्थन में कंटेंट शेयर किए हैं।

गौमांस खाएँगे और बताएँगे भी!

यही नहीं, वह फेक न्यूज पेडलर और आप समर्थक व्लॉगर ध्रुव राठी से भी प्रभावित दिखाई देती हैं। नूपुर ने कई मौकों पर ध्रुव राठी द्वारा अपलोड किए गए वीडियो और पोस्ट को शेयर किया है।

अंकुर सिंह द्वारा ‘द लल्लनटॉप’ में काम पर रखे गए एक पत्रकार के खुले राजनीतिक संबंधों को उजागर किए जाने के बाद, कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इस बिंदु पर चर्चा की है कि यह सब राजनीतिक दलों और मीडिया संस्थानों के व्यापार के लिए सामान्य सी बात हो गई है।

कई अन्य लोगों ने ‘द लल्लनटॉप’ के संपादक सौरभ द्विवेदी की आलोचना की कि उन्होंने संदिग्ध ट्रैक रिकॉर्ड होने के बाद भी किसी को अपने संस्थान में रखा है।

सोशल मीडिया पर जब आज ‘द लल्लनटॉप’ की आलोचना हो रही है तब यह जानना जरूरी हो जाता है कि ‘द लल्लनटॉप’ पर लंबे समय से समाचारों की रिपोर्टिंग के बहाने दुष्प्रचार करने का आरोप लगाया जाता रहा है। जून 2021 में, ‘द लल्लनटॉप’ ने मोदी सरकार की आलोचना करने के लिए ‘अनाथ बच्चों’ से जुड़े दो अलग-अलग डेटा सेटों की जानकारी का उपयोग किया था।

इससे पहले, दिसंबर 2020 में भी लल्लनटॉप ने एक वीडियो शेयर किया था। इस वीडियो में एपीएमसी मंडियों पर गलत सूचना शेयर की गई थी, जिसमें गुजरात में एपीएमसी बाजारों और नए कृषि कानूनों के बारे में फर्जी खबरें शेयर की गई थीं।

भगवंत मान के मुँह से शराब की बदबू… जनता-जनार्दन की थ्योरी पर किरण खेर ने लगाया ब्रेक, कहा – पद का सम्मान कीजिए

बॉलीवुड एक्ट्रेस व भाजपा सांसद किरण खेर और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो में किरण खेर और भगवंत मान बात कर रहे हैं लेकिन इस दौरान किरण मास्क लगाते हुए दिख रहीं हैं। इस पर सोशल मीडिया में अलग-अलग प्रतिक्रिया देखने को मिली है। इसके बाद किरण खेर ने वीडियो पर लोगों की प्रतिक्रियाओं को लेकर सफाई दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐलान के बाद गत 28 सितंबर को चंडीगढ़ स्थित एयरपोर्ट का नाम बदलकर भगत सिंह एयरपोर्ट किए जाने के लिए एक कार्यक्रम का आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में, केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान व चंडीगढ़ से भाजपा सांसद किरण खेर समेत कई गणमान्य मौजूद थे।

वायरल वीडियो इस कार्यक्रम का है। यहाँ, किरण खेर के बगल में बैठे हुए आप नेता भगवंत मान उनसे बात करना शुरू कर देते हैं। हालाँकि, कुछ ही सेकंड बाद किरण खेर के चेहरे पर एक अलग ही तरह का बदलाव दिखाई देता है जैसे कि उन्हें किसी चीज की बदबू आ रही हो। इसके बाद, वह मास्क लगाते हुए अपने चेहरे को ढँकने का प्रयास करती हुई दिखाई देती हैं।

इस वीडियो के सामने आने के बाद ही सोशल मीडिया में लोगों ने किरण खेर और भगवंत मान को लेकर प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी। कुछ लोग तो भगवंत मान को शराब के नशे में बताते हुए ‘पियक्कड़ आदमी’ भी कह रहे।

Rahul Kumar Gupta नामक ट्विटर यूजर ने वीडियो को शेयर करते हुए लिखा “किरण खेर तो चंद सेकेंड भी बदबू बर्दाश्त नहीं कर पाईं। सड़ा के रख दिया इस पियक्कड़ आदमी ने।”

Hinduvaadi Tapan नामक यूजर ने लिखा ” किरण खेर मैडम आपने ऐसा क्या सूँघ लिया, जिसने आपको मास्क लगाने पर मजबूर कर दिया।”

Saurabh Sharma नामक यूजर ने शराब के ग्लास वाले इमोजी के साथ ट्वीट कर कहा “पता नहीं किरण खेर ने पर मुँह पर तुरंत मास्क क्यों लगा लिया। केजरीवाल जी तो बोल रहे थे छोड़ रखी है। गाने का आनंद लो मान साहब की कोई गलती नहीं है।”

Pawan ने ट्विटर पर लिखा “दारू की ‘ख़ुशबू’ इतनी ज़्यादा थी कि किरण खेर को मास्क लगाना पड़ा।”

सोशल मीडिया पर सामने आ रही इन प्रतिक्रियाओं के बाद किरण खेर को सफाई देनी पड़ी है। किरण खेर ने ट्वीट कर भगवंत मान के पद का सम्मान करने की बात कही है।

उन्होंने ट्वीट कर लिखा “अपमानजनक टिप्पणियों के साथ वायरल हो रहे इस वीडियो को देखकर बहुत दु:ख हुआ है। कम इम्युनिटी के कारण मैं खुद को बचाने के लिए मास्क का इस्तेमाल करती हूँ। कृपया इसका उपयोग माननीय पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का मजाक बनाने के लिए न करें। कोई किसी भी पार्टी का हो, हमें उनके पद का सम्मान करना चाहिए।”

हालाँकि, इसके बाद उन्होंने इस ट्वीट को डिलीट कर दिया और फिर एक अन्य ट्वीट करते हुए लिखा “एक सार्वजनिक सभा में पंजाब के माननीय मुख्यमंत्री भगवंत मान जी से बात करते हुए मैंने मास्क लगाया है, इसका वीडियो वायरल होते हुए देखना दुर्भाग्यपूर्ण है। कम इम्युनिटी के कारण मैं ऐसा करती हूँ। कृपया उनके प्रति अपमानजनक टिप्पणी का इस्तेमाल न करें। कोई किसी भी पार्टी का हो, हमें उन्हें वह सम्मान देना चाहिए जो उनके पद की गरिमा है। आपका धन्यवाद। किरण खेर, सांसद, चंडीगढ़।”

भगवंत मान और शराब को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया में काफी कुछ चलता रहता है। कई मौकों पर यह भी लिखा गया कि उन्हें शराब के कारण समस्याओं का भी सामना करना पड़ा है। हाल ही में कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि भगवंत मान को शराब न नशे में धुत होने के कारण जर्मनी में एक फ्लाइट से उतार दिया गया था। यही नहीं, उन पर शराब पीकर गुरुद्वारा और लोकसभा जाने का भी आरोप लग चुका है।

सूरत में गरबा के लिए थे मुस्लिम बाउंसर, पूछने पर हिंदू नाम बताए… बजरंग दल कार्यकर्ताओं की सख्ती से नंगे पेट भागे

हिंदुओ के प्रमुख त्यौहारों में से एक नवरात्रि महापर्व पर गुजरात के सूरत जिले अंतर्गत वेसु में एक आयोजन में जमकर बवाल हुआ है। इस बवाल का कारण यह था कि आयोजक ने गरबा कार्यक्रम में मुस्लिम बाउंसर्स को बुलाया था। इसकी जानकारी सामने आने के बाद बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने विरोध किया।

रिपोर्ट के अनुसार, इस गरबा कार्यक्रम के आयोजकों को नवरात्रि उत्सव के लिए केवल हिंदुओं को ही काम पर रखने के लिए कहा गया था। चूँकि, नवरात्रि हिंदुओं का त्यौहार है और लोगों की धार्मिक भावनाएँ भी इस त्यौहार से जुड़ी हुईं हैं। ऐसे में, किसी अन्य धर्म के व्यक्ति के शामिल होने का कोई औचित्य नहीं था।

इस गरबा कार्यक्रम में मुस्लिम बाउंसर्स को बुलाए जाने के बारे में जब बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को जानकारी मिली तो उन्होंने आयोजन स्थल में जाने का फैसला किया। आयोजन स्थल में पहुँचने पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को यह भी पता चला कि मुस्लिम बाउंसर्स गरबा कार्यक्रम में आने वाले लोगों की आईडी की जाँच भी सही तरीके से नहीं कर रहे हैं।

इस घटना की जानकारी रखने वाले बजरंग दल के एक कार्यकर्ता ने कहा, “अगर वे हलाल अर्थव्यवस्था को केवल मुसलमानों तक सीमित रख सकते हैं, तो हम भी कर सकते हैं। नवरात्रि एक हिंदू त्यौहार है और गरबा नृत्य हमारी देवी-देवताओं की पूजा का एक रूप है।”

गौरतलब है, किसी मांसाहारी प्रोडक्ट के हलाल होने का मतलब यह होता है कि जानवर को मुस्लिम द्वारा ही काटा जाना चाहिए। यदि किसी और के द्वारा काटा जाता है तो इसे मुस्लिम गैर-हलाल बताते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि हलाल और गैर-हलाल उत्पाद के चलते सभी बूचड़खानों में केवल मुस्लिमों को ही नौकरी पर रखा जाता है। इसका कारण यह है कि कोई भी हलाल और गैर-हलाल के लिए अलग-अलग बूचड़खाने खोलना अपेक्षाकृत महंगा साबित होगा।

मांस उद्योग कोई छोटा-मोटा उद्योग नहीं है। वास्तव में, यह अरबों डॉलर की कमाई वाला उद्योग है। जहाँ सिर्फ हलाल मांस के लिए मुस्लिमों को काम पर रखा जाता है। इसी हलाल सर्टिफिकेशन के चलते ऐसे लाखों लोग खासतौर से दलित वर्ग के लोग जो परंपरागत रूप से ‘कसाई’ का काम करते आ रहे हैं, उनकी रोजी-रोटी छिन गई है।

यहाँ एक और बिंदु है, जिस पर विचार करना आवश्यक है। दरअसल, मूर्ति पूजा को लेकर इस्लाम में सबसे बड़ी सजा, मौत की सजा है। इसलिए, जो लोग हिंदू देवी-देवताओं में विश्वास नहीं करते हैं और सोचते हैं कि नवरात्रि में देवी-देवताओं की पूजा करना पाप का एक रूप है, ऐसे लोगों को न केवल नवरात्रि बल्कि हिन्दुओं के किसी भी त्यौहार में शामिल नहीं होना चाहिए।

बहरहाल, बजरंग दल के कार्यकर्ता जब गरबा कार्यक्रम स्थल पर पहुँचे तो उन्होंने देवी-देवताओं में विश्वास न करने वाले लोगों को गरबा कार्यक्रम स्थल से जाने के लिए कहा। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने मुस्लिम बाउंसर्स से नाम पूछे तो उन्होंने अपने हिंदू नाम बताए। जिसके बाद, मामला और गरमा गया।

इस दौरान, बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि इस कार्यक्रम में कुछ ऐसे लोगों को भी प्रवेश दिया गया था जो कि सिर्फ मौज-मस्ती के लिए इस गरबा कार्यक्रम में आए थे। ये सभी लोग, नकली हिन्दू नामों के साथ कार्यक्रम में घुसे थे, जबकि सच्चाई यह है कि वे सभी मुस्लिम थे।

बता दें, बीते कुछ दिनों में, देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसी कई घटनाएँ सामने आई हैं जहाँ कुछ मुस्लिम युवकों ने अलग-अलग हिंदू नामों के साथ आयोजन स्थल में प्रवेश किया है। गुजरात में ही, कुछ स्थानों पर मुस्लिम भीड़ द्वारा नवरात्रि के कार्यक्रम पर पथराव की घटना भी सामने आई है।