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Byju’s की एडटेक स्टार्टअप ने व्हाइटहाट जूनियर और टॉपर के 2500 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला

एडटेक कंपनी बायजूस (Byju’s) ने अपने करीब 2500 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। बायजू रवीन्द्रन (Byju Raveendran) की अगुवाई वाली इस कंपनी ने Toppr, WhiteHat Jr और सेल्स एंड मार्केटिंग, ऑपरेशंस, कंटेंट और डिजाइन टीमों से फुल-टाइम और कॉन्ट्रैक्ट वाले कर्मचारियों की छँटनी की है।

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक 22 अरब डॉलर वैल्यू वाली इस स्टार्टअप ने ग्रुप के कई कंपनियों के कर्मचारियों को निकाला है। बायजूस ने Toppr और WhiteHat Jr से 27 और 28 जून को 1500 से अधिक कर्मचारियों को बाहर किया है। इन दोनों कंपनियों को बायजूस ने पिछले दो सालों में खरीदा था। साथ ही कंपनी ने अपनी कोर ऑपरेशंस टीमों के करीब 1000 कर्मचारियों को 29 जून को ई-मेल भेजा था।

बताया जा रहा है कि कंटेंट और डिजाइन टीम पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा है। Toppr लर्निंग प्लेटफॉर्म से 1200 कर्मचारियों को निकाला गया है। 300 से 350 परमानेंट कर्मचारियों को निकाल दिया गया है, जबकि करीब 300 कर्मचारियों को इस्तीफा देने के लिए कहा गया है। साथ ही कॉन्ट्रैक्ट पर रखे गए 600 कर्मचारियों को निकाल दिया गया है। उनका कॉन्ट्रैक्ट अक्टूबर-नवंबर तक था।

बायजूस ने पिछले कुछ सालों में ब्रिक एंड मोर्टार कोचिंग इंस्टीट्यूट, आकाश इंस्टीट्यूट सहित कई बड़े संस्थानों का टेकओवर किया है। इसके बाद से इस कंपनी का भारत के साथ-साथ विदेशों में भी जबरदस्त ग्रोथ हुआ है। वहीं, मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स के मुताबिक वित्त वर्ष 2021 में कंपनी को 1690 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू 483.9 करोड़ रुपए रहा, जबकि कुल खर्च बढ़कर 2175.2 करोड़ रुपए पहुँच गया।

बता दें कि बायजूस ने पिछले साल 150 मिलियन डॉलर (लगभग 11838855000 रुपए) में Toppr को खरीदा था। कंपनी का कहना है कि उसने Toppr के इंटिग्रेशन की प्रक्रिया पूरी कर ली है। उसने करीब 80 फीसदी कर्मचारियों को अपने पास रख लिया है। अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद Toppr के सेल्स और मार्केटिंग डिवीजन के कर्मचारियों को बनाए रखा गया है, जबकि बाकी कर्मचारियों को निकाल दिया गया है। इससे पहले वाइटहैट जूनियर (WhiteHat Jr) ने करीब 300 फुल टाइम कर्मचारियों को निकाल दिया था। बायजूस ने अगस्त 2020 में वाइटहैट जूनियर को खरीदा था। निकाले गए कर्मचारियों में से अधिकांश कोड टीचिंग और सेल्स टीम के हैं। इनमें से 80 कंपनी के ब्राजील ऑफिस में काम कर रहे थे। बायजू ने पिछले साल अप्रैल में ब्राजील में कदम रखा था।

‘इस्तीफा दे रहे हैं, शपथ नहीं ले रहे’: इधर CM पद छोड़ रहे थे पिता उद्धव ठाकरे, उधर बेटे आदित्य के चहरे पर हँसी नहीं रुकी, नेटीजन्स बोले- ‘शिवसेना का पप्पू’

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने 30 जून को होने वाले फ्लोर टेस्ट से एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के महाराष्ट्र विधानसभा में फ्लोर टेस्ट की अनुमति देने वाले आदेश के कुछ मिनटों बाद ही अपना इस्तीफा दे दिया था। समाचार एजेंसी एएनआई ने राज्यपाल को इस्तीफा सौंपते हुए उद्धव ठाकरे की एक तस्वीर साझा की है, जिसमें आदित्य ठाकरे (Aaditya Thackeray) अपने पिता के ठीक पीछे खड़े हुए मुस्कुरा रहे हैं।

इस तस्वीर को देखने के ​बाद नेटीजन्स को फौरन राहुल गाँधी याद आ गए। उन्होंने आदित्य ठाकरे की तुलना राहुल गाँधी की उस तस्वीर से की, जिसमें 2014 के लोकसभा चुनाव हारने के बाद वह अपनी माँ सोनिया गाँधी के बगल में खड़े होकर मुस्कुरा रहे थे। ट्विटर यूजर Krunal_Goda ने कहा, “एक ही तरह के लोगों को पहचानें।”

ट्विटर यूजर मेहता संजय छिब्बर ने कहा, “19 मई 2014 और 29 जून 2022। दो पप्पू की कहानी। हार और इस्तीफे के वक्त दोनों हँस रहे हैं?”

एक अन्य ट्विटर यूजर इंदौरवाले भैया ने कहा, “हर वंश का अपना राहुल गाँधी होता है।”

ट्विटर यूजर विशाल लिखते हैं, “अंजना ओम कश्यप का कमेंट बहुत सही था। महाराष्ट्र के पप्पू ने 2014 के राहुल गाँधी की याद दिला दी।”

राजनीतिक पर्यवेक्षक ऋषि बागरी ने लिखा कि सरकारें आती हैं और जाती हैं, लेकिन कुछ चीजें कभी नहीं बदलेगी।

इस ट्वीट के जवाब में विशाल छेड़ा लिखते हैं, “सरकार आती जाती रहती है… पर पप्पू प्रथा बनी रहनी चाहिए।” ट्विटर यूजर नायिका देवी ने राहुल गाँधी की एक और तस्वीर साझा की है, जिसमें वह हाल के चुनाव में हार के बाद आइसक्रीम का आनंद लेते हुए दिख रहे हैं। उन्होंने लिखा, “ये दोनों किसी मामले में तो टॉप पर हैं।”

इस ट्वीट का जबाव देते हुए Mr Mysterious ने लिखा, “पप्पू भी 2014 के लोकसभा चुनाव हारने के बाद ऐसे ही हँस रहा था।” ट्विटर यूजर BesuraTaansane ने कहा, “कोई आदित्य को ये तो बता दे कि उद्धव जी यहाँ इस्तीफा दे रहे हैं ना कि शपथ ले रहे हैं।”

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने MVA (महा विकास अघाड़ी) गठबंधन के दागी मंत्री नवाब मलिक और पूर्व मंत्री अनिल देशमुख को भी फ्लोर टेस्ट में हिस्सा लेने की इजाजत दे दी थी, लेकिन इसके बावजूद उद्धव ठाकरे की शिवसेना के मात्र 16 विधायक ही उनके साथ हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि विधानसभा में मतदान करने के बाद ये दोनों वापस जुडिशल कस्टडी में लाए जा सकते हैं। उन्हें आने-जाने के लिए ED की कस्टडी में रहने का आदेश दिया गया था।

कन्हैया लाल की तरह ही कारोबारी नितिन जैन की भी हो रही थी रेकी, पिता ने बताया- खौफ में है परिवार: रिपोर्ट में दावा- उदयपुर छोड़ा

उदयपुर में टेलर शॉप चलाने वाले कन्हैया लाल साहू की 28 जून 2022 को बर्बर तरीके से हत्या कर दी गई थी। अब यह बात सामने आई है कि उनके अलावा उदयपुर के दो और लोग भी इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर थे। इसकी वजह नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट करना बताया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जो लोग टारगेट पर थे, उनमें से एक टायर कारोबारी नितिन जैन हैं। 35 साल के जैन के उदयपुर छोड़ने की खबर है।

यह जानकारी ऐसे वक्त में सामने आई है जब कन्हैया लाल का गला काटे जाने के बाद उदयपुर में तनाव की स्थिति है। 1 महीने के लिए धारा 144 लगा दी गई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत गुरुवार (30 जून 2022) को उदयपुर आ रहे हैं

कन्हैया लाल की हत्या करने वाले रियाज ने भी वीडियो में अपने साथियों को कुछ अन्य लोगों की हत्या के लिए उकसाया था। इसमें किसी सेक्टर-11 के व्यक्ति का जिक्र भी किया गया था। माना जा रहा है की सेक्टर-11 वाले ये व्यक्ति नितिन जैन ही हैं। दैनिक भास्कर के मुताबिक भी यह धमकी टायर कारोबारी नितिन जैन के लिए ही थी। नितिन के पिता ने बताया कि नूपुर शर्मा के समर्थन में 7 जून को शेयर हुई पोस्ट के चलते नितिन पर पुलिस ने FIR दर्ज की थी। इस केस में नितिन की गिरफ्तारी भी हुई थी।

रिपोर्ट के अनुसार 9 जून 2022 को 3 लोग नितिन के टायर की दुकान पर उसकी तलाश में पहुँचे थे। नौकर से नितिन के बारे में पूछा। उसने बताया कि साहब नहीं आए हैं तो तीनों लौट गए और 100 मीटर दूर खड़ी बाइक पर बैठ कर चले गए। इसके बाद 16 जून को एक बार फिर 4 लोग नितिन की गोवर्धन विलास स्थित दुकान पर उसकी तलाश में आए। उस दिन भी नौकर ने बताया कि वे नहीं हैं तो वे लोग लौट गए।

बाद में जानकारी मिली कि नितिन को नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट करने के वजह से खोजा जा रहा है। इसके बाद नितिन ने दुकान जाना बंद कर दिया। फिलहाल नितिन का परिवार कन्हैयालाल की हत्या के बाद से खौफ में है। नितिन के पिता का कहना है कि वे मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहते थे। इसके कारण उस समय पुलिस में शिकायत नहीं की। अब उन्होंने SP मनोज कुमार को इसकी सूचना दी है। बताया जा रहा है कि इस सूचना पर SP ने स्थानीय SHO को जरूरी दिशा-निर्देश दिए हैं।

नितिन के पिता का कहना है कि उसके बेटे की पूछताछ करने आए 7 लोगों में कन्हैया लाल के कातिल शामिल नहीं हैं। वैसे जिस तरह नितिन की रेकी की बात कही जा रही है, उसी तरह कन्हैया लाल की भी गई थी। उन्होंने इसकी शिकायत भी पुलिस से की थी। लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। इनके अलावा एक अन्य व्यक्ति को भी नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट करने के आरोप में उदयपुर की धनमंडी थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उसे भी धमकियाँ दी जा रही हैं और उसकी भी रेकी की गई है।

कन्हैया लाल के हत्यारे ‘इस्लाम के शेर’: जहरीले ट्वीट पर एक्शन लेने से ट्विटर ने कर दिया था इनकार, अपनी पॉलिसी को भी नजरअंदाज किया

उदयपुर में कन्हैया लाल की निर्मम हत्या के बाद सामने आई हत्यारों की वीडियो ने सबको झकझोरा। किसी ने इस वीडियो की निंदा करते हुए इसे आगे बढ़ाया तो किसी ने इस्लामी कट्टरता को बयां करने के लिए इसे शेयर किया। लेकिन इसी बीच कुछ कट्टरपंथी भी सामने आए जिन्होंने इस वीडियो को बहादुरी का कारनामा बता कर प्रदर्शित किया।

हैदर नाम का ट्विटर यूजर उन्हीं लोगों में से एक था जिसने कन्हैया लाल के हत्यारों को ‘इस्लाम का शेर’ कहा और ट्विटर ने इस ट्वीट पर कार्रवाई करने की जगह शुरुआत में ये कह दिया कि हैदर द्वारा शेयर वीडियो और ट्वीट उनकी सुरक्षा नीतियों के विरुद्ध नहीं गया है। हालाँकि बाद में उन्हें कई जगह से रिपोर्ट होने के कारण इस अकॉउंट को सस्पेंड करना पड़ा।

ट्विटर यूजर @kansaratva ने स्क्रीनशॉट शेयर करके ट्विटर के इस दोहरे रवैये की पोल खोली। उन्होंने एक ट्वीट में दिखाया कि कैसे हैदर ने उन दोनों हत्यारों की वीडियो साझा करके लिखा था, “ये इस्लाम के असली शेर है। अल्लाह भी डरपोकों से नफरत करता है। आखिरकार भारतीय मुसलमान मोदी के विरुद्ध खड़े होना शुरू हो गए हैं।”

इसी ट्वीट को देख जब ट्विटर यूजर @kansaratva ने शिकायत की तो कंपनी ने उन्हें मेल किया कि उन्होंने हैदर का ट्वीट देख लिया है और उन्हें नहीं लगता कि इस ट्वीट में कुछ भी ऐसा है जिससे सुरक्षा नीतियाँ आहत हों। आगे ट्विटर ने यूजर को सलाह दी कि अगर वह कंपनी के इस जवाब से सहमत नहीं हैं तो वो हैदर को ब्लॉक कर सकते हैं। इससे उन्हें वो ट्वीट दिखना बंद हो जाएगा।

अब गौर देने वाली बात ये है कि अपने ही मेल में ट्विटर ने वो सारी बातें भी बताई हैं जिनके आधार पर ट्विटर किसी अकॉउंट पर कार्रवाई करता है, और हैदर द्वारा शेयर ट्वीट में ये सारी चीजें मौजूद थीं। कट्टरपंथी हिंदुओं को धमकी दे रहे थे, कन्हैया लाल की हत्या का जश्न मना रहे थे, आने वाले समय में हिंसा की बात कर रहे थे, आदि।

यानी हैदर का ट्वीट, ट्विटर के हर मानक के हिसाब से सुरक्षा नीतियों के विरुद्ध था। बावजूद इस पर कार्रवाई न होना बताता है कि ट्विटर इंडिया अपने यूजर्स की शिकायतों पर इतनी गंभीरता भी नहीं दिखाता कि रिपोर्ट हुए ट्वीट का रिव्यू अपने मानको पर ही कर सके।

लाहौर से चल रहा हैदर का अकॉउंट

फिलहाल हैदर का अकॉउंट सस्पेंड है। ट्विटर पर अजयेंद्र उर्मिला त्रिपाठी नाम रिसर्चर ने इस अकॉउंट की लोकेशन भले ही दिल्ली सेट की गई हो लेकिन हकीकत में ये पाकिस्तान से संचालित हो रहा था। त्रिपाठी दावा करते हैं कि हैदर लाहौर में बैठ कर इस तरह के ट्वीट कर रहा है और लोकेशन दिल्ली इसलिए डाली गई है ताकि अन्य लोग भ्रमित हो सकें और वह लोग इस स्थिति का फायदा उठा पाएँ।

जाते-जाते दोस्तों को दर्द दे गए उद्धव ठाकरे: संभाजीनगर और धारशिव से नाराज बताया जा रहा कॉन्ग्रेस का एक धड़ा, AIMIM-सपा भी भड़की

महाराष्ट्र विधानसभा में फ्लोर टेस्ट पर रोक लगाने से इनकार के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बुधवार (29 जून 2022) की रात इस्तीफा दे दिया। उससे पहले सरकार बचाने की आखिरी कोशिश करते हुए उनकी कैबिनेट ने औरंगाबाद और उस्मानाबाद का नाम बदलने का फैसला किया। औरंगाबाद का नाम अब संभाजीनगर और उस्मानाबाद का नाम धारशिव होगा। हालाँकि यह फैसला भी उद्धव सरकार के काम नहीं आया और अब उनकी विदाई के बाद महाविकास अघाड़ी के दोस्तों ने इस पर नाराजगी जताई है।

यह फैसला जिनको रास नहीं आया उसमें कॉन्ग्रेस भी शामिल है जो उद्धव कैबिनेट में शामिल थी। इसके अलावा असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम और सपा ने भी इस पर ऐतराज जताया है। औरंगाबाद का नाम बदलने से खफा हुए AIMIM के सांसद इम्तियाज जलील ने उद्धव ठाकरे पर तंज कसा और कहा कि जैसे ही उन्होंने सत्ता खोना शुरू किया, तो जाते-जाते उन्हें संभाजी महाराज की याद आ गई।

जलील ने कहा, “मेरे हिसाब से 25-30 साल पहले जो घोषणा की गई थी, इसको सिर्फ ये चुनावी मुद्दा बनाते रहे, राजनीति का मुद्दा बनाते रहे और जब कुर्सी सरकने लगी तो यह फैसला लिया है। मैं उद्धव साहब को, शिवसेना को यह बताना चाहता हूँ कि इतिहास बदला नहीं जा सकता है, नाम बदले जा सकते हैं। जब आपके पास दिखाने के लिए कुछ नहीं है तो आप इस तरह की घटिया राजनीति का बहुत अच्छा नमूना पेश करके आप जा रहे हैं। औरंगाबाद की जनता यह तय करने वाली है कि औरंगाबाद का नाम क्या रहेगा और क्या नहीं रहेगा।”

वहीं समाजवादी पार्टी के विधायक एवं महाराष्ट्र अध्यक्ष अबू आसिम आजमी ने उद्धव ठाकरे पर तंज कसते हुए कहा कि भाजपा हो या एमवीए – जो बैसाखी पर चल रहा है – मुस्लिमों को दरकिनार करना चाहता है। उन्होंने कहा, “मुझे दुख है कि हम जिनका समर्थन कर रहे हैं, जिन्होंने कहा था कि 30 साल गलत लोगों के साथ रहने के बाद अब वे सेकुलर होंगे, आखिरी दिन ऐसा कर रहे हैं। मैं शरद पवार और सोनिया गाँधी को बताना चाहता हूँ कि सरकार हमारे समर्थन से अस्तित्व में है। अगर सरकार ऐसा कदम उठाती है, तो हम कहाँ जाएँगे? मैं शरद पवार, अजीत पवार, अशोक चव्हाण, बालासाहेब थोराट को बताना चाहता हूँ कि मुस्लिमों को दरकिनार किया जा रहा है। मैं निंदा करता हूँ।”

इसके अलावा उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “मैं महाविकास अघाड़ी सरकार की कैबिनेट बैठक में औरंगाबाद और उस्मानाबाद के नाम बदलने के फैसले की निंदा करता हूँ। साथ ही मुस्लिम आरक्षण को भी नजरअंदाज किया गया। हमारा समर्थन कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के तहत है, लेकिन अब MVA भी वही कर रही है जो भाजपा करती है। मैं शरद पवार, अजीत पवार, अशोक चाव्हाण और बालासाहेब थोराट से कहना चाहूँगा कि इन फैसलों से महाराष्ट्र का मुसलमान खुद को महाविकास अघाड़ी से ठगा हुआ और दरकिनार महसूस रहा है।”

इसके साथ ही उद्धव ठाकरे ने इस फैसले से कॉन्ग्रेस को भी नाराज कर दिया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी के एक वर्ग का मानना ​​​​है कि कॉन्ग्रेस के ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्रियों को अपनी असहमति दर्ज करते हुए या प्रतीकात्मक वॉकआउट करते हुए इस निर्णय से खुद को अलग कर लेना चाहिए था। बताया जा रहा है कि इसके लिए कोशिश भी की गई थी। पार्टी के महाराष्ट्र के कुछ नेताओं ने संगठन के प्रभारी एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे से संपर्क किया और उनके हस्तक्षेप की माँग की थी। हालाँकि आलाकमान ने किसी तरह के हस्तक्षेप इनकार कर दिया।

पार्टी आलाकमान को आशंका थी कि अगर पार्टी ने इन जगहों का नाम बदलने के फैसले से खुद को दूर कर लिया तो हिंदुओं की ओर से विरोध हो सकता है। कॉन्ग्रेस का महाराष्ट्र नेतृत्व पहले इन शहरों के नाम बदलने के कदम का विरोध कर चुका है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है, “उन्होंने (शिवसेना) कॉन्ग्रेस को इसमें शामिल कर लिया। शिवसेना हिंदुत्व के मुद्दे पर अच्छा दिखना चाहती थी। अब कॉन्ग्रेस पार्टी भी इस फैसले का भागीदार बन गई है। हम फैसले में फँस गए हैं। हमें परिणाम भुगतने होंगे।” हालाँकि महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष बाला साहेब थोराट ने इस फैसले को लेकर पार्टी में किसी तरह के विवाद से इनकार किया है।

‘तुम काफिर हिंदुओं को हम अंजाम तक पहुँचाएँगे’: कन्हैया लाल को रियाज और गौस मोहम्मद ने कैसे काटा, FIR से चौंकाने वाले खुलासे

राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल साहू की 28 जून 2022 को बर्बर तरीके से हत्या कर दी गई थी। मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने टेलर शॉप में घुसकर उन्हें काट डाला था। हत्यारों ने घटना का खौफनाक वीडियो भी बनाया था। इस मामले में कन्हैया लाल के 20 वर्षीय बेटे ने जो FIR दर्ज कराई है, उससे भी कई हैरान करने वाले खुलासे होते हैं।

इसके मुताबिक हमले से पहले उनसे इस्लामी हत्यारों ने कहा था कि तुमने हमारे नबी के खिलाफ लिखा इसलिए तुम्हें जीने का कोई अधिकार नहीं। तुम काफिर हिन्दुओं को हम अंजाम तक पहुँचाएँगे। न्यूज़ 18 के अनुसार दर्ज एफआईआर में कन्हैया लाल के बेटे के हवाले से कहा गया है, “ये 2 हत्यारे देश के लोगों में आतंक और तनाव फैलाने के साथ निर्मम हत्याएँ करने का एक गैंग चलाते हैं। इन्होने पूरी प्लानिंग के साथ मेरे पिता की हत्या कर दी। इसके बाद इन्होने बाकी लोगों को भी धमकी दी है।”

अपनी शिकायत में कन्हैयालाल के बेटे ने कहा गई, दिन में करीब 3:30 पर एक रिश्तेदार ने मुझे फोन कर बताया कि मेरे पिता की दुकान के अंदर 2 लोगों ने हत्या कर दी है। मैं पहुँचा तो देखा कि मेरे पिता की लाश दुकान के बाहर पड़ी है और आस-पास काफी खून बिखरा है। उनकी गर्दन पर गहरे घाव थे। साथ ही उनके हाथों और सिर पर भी वार किया गया था। मेरी दुकान के एक स्टाफ राजकुमार ने मुझे बताया कि 2 लोग कुर्ता सिलवाने दुकान में आए थे। कुछ देर बाद उन्होंने अपने कपड़ों में छिपे हथियार बाहर निकाल लिए और मेरे पिता पर धमकी देते हुए हमला कर दिया।”

FIR के मुताबिक दुकान में मौजूद 2 कर्मचारियों ने कन्हैयालाल को बचाने की कोशिश की थी। लेकिन उन दोनों पर भी हमला कर दिया गया। इस दौरान एक कर्मचारी ईश्वर सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। उनका इलाज चल रहा है। शिकायत में हत्यारों द्वारा शेयर किए गए वीडियो का भी जिक्र है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र को भी धमकी दी गई है।

गौरतलब है कि कन्हैया लाल का अंतिम संस्कार 29 जून को किया गया। इस दौरान जन सैलाब उमड़ पड़ा था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक उनके शरीर पर घाव के 26 निशान थे। सभी घाव धारदार खंजर के थे। इसमें 8 से 10 घाव गर्दन के पास मिले। साथ ही हाथों, सिर व शरीर के कुछ अन्य हिस्सों पर भी वार किया गया था।

‘हिंदी इंडस्ट्री के कलाकार हिंदी भी नहीं बोल पाते’ : जिस महिला सिंगर को सलमान खान के कारण मिली रेप धमकियाँ, उसने बॉलीवुड पर कसा तंज

हिंदी सिनेमा में काम करने के बावजूद हिंदी में ढंग से बात न कर पाना कई बॉलीवुड हस्तियों की दिक्कत रही है। अब गायिका सोना मोहपात्रा ने इसी किस्म के कलाकारों पर अपना बयान दिया है। सोना ने कहा है कि ये शर्मनाक बात है कि बॉलीवुड के कलाकार हिंदी सिनेमा से जुड़े हैं लेकिन हिंदी में ही बात नहीं कर पाते।

ZEE5 की डॉक्यूमेंट्री ‘शटअप सोना’ में जल्द नजर आने वाली सोना मोहपत्रा ने बॉलीवुड कलाकारों की समस्या को उजागर करते हुए ये भी ध्यान दिलाया कि कैसे साउथ इंडियन सिनेमा अपनी संस्कृति को बढ़ावा देता है और बॉलीवुड के लोग हिंदी बोलने के लिए ही संघर्ष कर रहे हैं।

इंडिया टुडे से बातचीत में उन्होंने अपनी यह प्रतिक्रिया दी। उनसे हिंदी भाषा पर छिड़े डिबेट से जुड़ा सवाल किया गया था। इस पर सोना ने इंडिया टुडे को कहा, “मैं एक चीज कहना चाहूँगी कि मैंने आरआरआर और पुष्पा देखी। मैं सच में नाच-कूद रही थी…। कमाल है! सारे प्रयास, आर्ट डायरेक्शन, कास्टिंग सब बेहतरीन था। उन्हें हमेशा संस्कृति को बढ़ावा देते देखना अच्छा लगता है। “

आगे वह बोलीं, “हालाँकि, हमारे पास कुछ महान बॉलीवुड कलाकार हैं जो मुश्किल से हिंदी बोलते हैं और ये शर्म की बात है। क्योंकि, हिंदी फिल्म स्टार की हिंदी फर्राटेदार होनी चाहिए। भारती संस्कृति साउथ की फिल्मों में मजबूती से दिखती है।”

सुदीप किच्चा और अजय देवगन बहस

सोना मोहपात्रा ने जिस हिंदी मसले पर अपनी राय रखी है, उसकी वजह से पिछले दिनों अजय देवगन और सुदीप किच्चा के बीच सोशल मीडिया पर नोंक-झोंक हो गई थी। सुदीप किच्चा ने हिंदी भाषा को लेकर कहा था कि जैसे दक्षिण भारतीय सिनेमा ने पिछले दिनों हिट फिल्में दी हैं उस हिसाब से हिंदी को राष्ट्रीय भाषा नहीं कहा जा सकता। इसी पर अजय देवगन ने उन्हें जवाब दिया था कि अगर बात ऐसी है तो उन्हें अपनी फिल्में हिंदी में डब करवाने की जरूरत क्यों पड़ती है? 

सोना मोहपात्रा को मिली रेप धमकी

उल्लेखनीय है कि सोना मोहपात्रा इससे पहले सलमान खान पर बयान देने के बाद चर्चा में आई थी। उन्होंने बताया था कि कैसे सलमान खान पर बोलने के कारण उन्हें ट्रोलिंग का शिकार होना पड़ा। लोग उन्हें रेप से लेकर हत्या तक की धमकी देने लगे थे। इतना ही नहीं उनकी तस्वीरें मॉर्फ करके पॉर्न साइट्स पर डाल दी गई थी। स्टूडियो में उन्हें लंच बॉक्स में मल भर के भेजे गए थे। ये सब उनके साथ 2016 में दिए गए बयान के बाद हुआ था।

कन्हैया लाल के परिजनों के लिए हिन्दुओं ने इकट्ठा किया ₹1 करोड़ का चंदा: BJP ने किया राजस्थान बंद का ऐलान, CM गहलोत की बैठक का बहिष्कार

राजस्थान के उदयपुर (Udaipur, Rajasthan) में कन्हैया लाल साहू (Kanhaiya Lal Sahu) का इस्लामी आतंकियों (Islamic Terrorist) द्वारा दिन-दहाड़े की गई हत्या के बाद राज्य का माहौल गर्म है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक का भाजपा (BJP) ने बहिष्कार कर दिया है।

वहीं, 30 जून 2022 को भाजपा ने राजस्थान बंद का आह्वान किया है। स्थिति को देखते हुए राज्य में कर्फ्यू को एक दिन के लिए और बढ़ा दिया गया है। इसके साथ ही इंटरनेट सेवा को भी कल तक बंद रखा गया है। राज्य सरकार कई इलाकों में पुलिस बल की तैनाती को बढ़ा दिया है।

राजस्थान के डीजीपी एमएल लाठर ने कहा है कि कन्हैया लाल की हत्या में UAPA के तहत केस दर्ज किया गया है और इसकी जाँच आतंकी हमला मानकर की जा रही है। वहीं, मामले में एएसआई को निलंबित कर दिया गया है। बता दें कि DGP लाठर के नेतृत्व में राज्य की पुलिस व्यवस्था चरमरा गई है और राज्य में अपराधियों का आतंक कायम हो गया है।

उधर भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने मृतक कन्हैया लाल साहू के परिजनों की मदद के लिए चंदा इकट्ठा किया है। उन्होंने बताया कि देश भर के हिंदू समाज ने अब तक एक करोड़ रुपए से अधिक का चंदा दिया है।

इसको लेकर मिश्रा ने ट्वीट करते हुए कहा, “जय श्रीराम! आप सभी का धन्यवाद। 24 घंटे से भी कम समय में एक करोड़ रुपए से अधिक एकत्रित।” उन्होंने कहा कि कन्हैया लाल को बचाने की कोशिश में गंभीर रूप से घायल होने के बाद महाराणा भूपाल सिंह अस्पताल में भर्ती ईश्वर सिंह को भी 25 लाख रुपए दिए जाएँगे।

बता दें कि जब दोनों इस्लामी आतंकियों ने कन्हैया लाल पर हमला किया था, तब दुकान में मौजूद सारे लोग डरकर भाग गए, लेकिन ईश्वर सिंंह नहीं भागे और आतंकियों का अकेले मुकाबला करते रहे। उन्हें बचाने की कोशिश करता हुआ देख दोनों आतंकियों ने उन पर हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। ईश्वर सिंह को 16 टाँके लगे हैं।

इस मामले में DGP लाठर ने ने बताया कि एक आरोपित गौस मोहम्मद का दावत-ए-इस्लामी के सम्पर्क में था। वह साल 2014 में इसी संगठन के तहत पाकिस्तान के कराची भी गया था। पुलिस के अनुसार, दावत-ए इस्लामी का दिल्ली और मुंबई में कार्यालय है। वह कुरान की तालीम का प्रसार करता है।

कन्हैया लाल की हत्या के बाद ओवैसी ने फिर की नूपुर शर्मा की गिरफ़्तारी की माँग, मजहब पर हुआ सवाल तो भड़के

राजस्थान के उदयपुर में हिन्दू टेलर कन्हैया लाल की बेरहमी से इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा हत्या कर वीडियो बनाने को आतंक करार दिया गया है। हालाँकि, इसके साथ ही असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owasi) ने कन्हैया लाल (Kanhaiya lal murder ) के हत्यारों को नौजवान करार दिया है। ओवैसी ने हिन्दुओं को बाँटने की कोशिश करते हुए कहा कि वो आरएसएस की विचारधारा का विरोध करते हैं, हिन्दू विचारधारा का नहीं।

रिपोर्ट के मुताबिक, एमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी मध्य प्रदेश के नगरीय चुनाव में अपनी पार्टी का प्रचार करने के लिए भोपाल आए हुए थे। श्यामला हिल्स स्थित एक होटल में ओवैसी ने मुस्लिमों को संबोधित करते हुए कहा कि डरना है तो केवल अल्लाह से डरना। याद रखो केवल रब्बोलालमीन से ही डरना। कन्हैया लाल की हत्या पर ओवैसी ने कहा, “उदयपुर में दो नौजवानों के एक हिन्दू टेलर का कत्ल कर दिया। मैं उसका खुला खंडन करता हूँ। कानून में किसी को भी कत्ल करने की इजाजत नहीं है।”

इसके साथ ही ओवैसी ने तर्क दिया कि अगर राजस्थान पुलिस चौकस होती तो ये घटना नहीं होती। उदयपुर की घटना को आतंकी घटना करार देने के सवाल पर ओवैसी ने कहा कि पहलू खान और अखलाक की हत्या भी आतंकी घटना है। उन्होंने कहा कि रूल ऑफ लॉ सभी के लिए समान होना चाहिए।

हालाँकि, आतंकवाद के धर्म के नाम पर भड़के ओवैसी ने सवाल को गोलमोल घुमाते हुए कहा कि आखिर महात्मा गाँधी को मारने वाले का क्या धर्म था।

नूपुर शर्मा पर उगला जहर

ओवैसी ने भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा की गिरफ्तारी की माँग करते हुए केंद्र सरकार पर शर्मा के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया। वहीं मध्य प्रदेश के खरगौन में पत्थरबाजों पर सरकार की कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित करार दिया।

गौरतलब है कि नूपुर शर्मा के पैगंबर मुहम्मद को लेकर दिए गए कथित बयान के समर्थन में सोशल मीडिया पोस्ट को आगे बढ़ाने के कारण 28 जून को इस्लामिक कट्टरपंथी रियाज अंसारी और गौस मोहम्मद ने उनकी हत्या कर दी थी। घटना के बाद से पूरे राजस्थान में उबाल है। वहीं केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मामले की जाँच अब एनआईए को सौंप दी है।

महाराष्ट्र के CM उद्धव ठाकरे का इस्तीफा: सोनिया गाँधी और शरद पवार को दिया धन्यवाद, कहा – मुझे फ्लोर टेस्ट नहीं खेलना

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सदन में फ्लोर टेस्ट से पहले ही इस्तीफा दे दिया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उन्होंने इस्तीफे का ऐलान किया। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (30 जून, 2022) को राज्यपाल के आदेश पर विधानसभा में होने वाले फ्लोर टेस्ट पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसके बाद शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे का ऐलान कर दिया। अब महाराष्ट्र में सरकार बदलनी तय लग रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने MVA (महा विकास अघाड़ी) गठबंधन के दागी मंत्री नवाब मलिक और पूर्व मंत्री अनिल देशमुख को भी फ्लोर टेस्ट में हिस्सा लेने की इजाजत दे दी थी, लेकिन इसके बावजूद उद्धव ठाकरे की शिवसेना के मात्र 16 विधायक ही उनके साथ हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि विधानसभा में मतदान करने के बाद ये दोनों वापस जुडिशल कस्टडी में लाए जा सकते हैं। उन्हें आने-जाने के लिए ED की कस्टडी में रहने का आदेश दिया गया था।

उद्धव ठाकरे ने अपने सम्बोधन में कहा कि औरंगाबाद का नाम बदल कर संभाजी नगर और ओस्मानाबाद को धाराशिव करने के अपनी सरकार के फैसले से वो संतुष्ट हैं। उन्होंने इस दौरान सोनिया गाँधी और शरद पवार को धन्यवाद दिया। साथ ही इस पर दुःख जताया कि अंतिम कैबिनेट बैठक में उनके साथ सिर्फ 4 मंत्री थे। उन्होंने कहा कि बाला साहब ठाकरे ने लोगों को बड़ा बनाया, लेकिन बड़ा बनने के बाद वो बाला साहेब को भूल गए।

उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना को 50 वर्ष हो गए हैं, जिनमें रिक्शा चलाने वाले लोगों और सीधे-सादे लोगों को पार्टी में आगे बढ़ाया गया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करने की बात कहते हुए कहा कि NCP और कॉन्ग्रेस के उन लोगों का धन्यवाद, जिन्होंने उनका समर्थन किया। उन्होंने बागी विधायकों से कोई शिकवा न होने की बात कहते हुए उन्हें वापस आकर आमने-सामने चर्चा की सलाह दी। उन्होंने शिवसैनिकों से अपील की कि वो वापस आने वाले बागी विधायकों को न रोकें।

उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें ये फ्लोर टेस्ट का गेम नहीं खेलना।