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UP के देवबंद में NIA की फिर छापेमारी: बांग्लादेशी आतंकी संगठन JMB के लिए भर्ती मामले में कार्रवाई, फर्जी कागजात बनाने वाले मुस्तकीम को उठाया

राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (NIA) ने मंगलवार (28 जून 2022) को उत्तर प्रदेश के देवबंद (Deoband) में दो स्थानों पर बांग्लादेशी नागरिकों से जुड़े एक मामले में तलाशी ली। बताया जा रहा है कि ये बांग्लादेशी नागरिक वहाँ के आतंकी संगठन जमात उल मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) की विचारधाराओं का भारत में प्रचार-प्रसार कर रहे थे। ये लोग युवाओं को भारत के खिलाफ जिहाद के लिए उकसा रहे थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, छापेमारी के दौरान एनआईए की टीम ने खानकाह पुलिस चौकी के अंतर्गत आने वाले दारुल उलुम वक्फ इलाके में स्थित एक जनसेवा केंद्र के संचालक मुस्तकीम को हिरासत में लिया और उससे किसी सीक्रेट प्लेस पर पूछताछ की। इसके बाद उसे इंटेलीजेंस विंग को सौंप दिया गया।

आरोपित को फर्जी आधार कार्ड व फर्जी पासपोर्ट बनाने के मामले में पकड़ा गया है। उसके कम्प्यूटर समेत दूसरे सामानों को कब्जे में ले लिया गया है। पकड़ा गया आरोपित उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के एक गाँव का रहने वाला है।

इस मामले पर एनआईए के एक प्रवक्ता ने कहा कि यह मामला प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) से संबंधित छह सक्रिय कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी से जुड़ा है, जिनमें तीन बांग्लादेशी अवैध अप्रवासी भी शामिल हैं। इनमें से कई ऐसे हैं जो कि देवबंद में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पढ़ाई कर रहे थे।

क्या है पूरा मामला

बीते 13 मार्च 2022 को एटीएस की टीम ने भोपाल में बड़ी कार्रवाई करते हुए 6 आतंकियों को पकड़ा था। ये सभी ऐशबाग थाना क्षेत्र के अहमद अली कॉलोनी की गली नंबर 4 में फातिमा मस्जिद के बगल में रहते थे। इन्हीं आतंकियों से पूछताछ के बाद एनआईएन ने देवबंद में ये एक्शन लिया। गौरतलब है कि बांग्लादेशी आतंकी संगठन जेएमबी युवाओं तो भड़काकर उन्हें आतंकी बनाने का काम करता है।

एक्शन में यूपी पुलिस

एनआईए की कार्रवाई के बाद अब उत्तर प्रदेश पुलिस भी एक्शन में आ गई है। यूपी पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वो देवबंद में रहकर पढ़ाई कर रहे बाहरी स्टूडेंट की नए सिरे से जाँच करेगी। पुलिस इन सभी का वेरीफिकेशन करेगी। सहारनपुर एसपी सूरज कुमार राय ने बताया है कि बीते तीन महीने में इस तरह के तीन मामले सामने आ चुके हैं।

‘आसमानी किताब को बैन करो, नूपुर शर्मा ने क्या गलत कहा?’: दिल्ली में हिन्दुओं का प्रदर्शन, कन्हैया लाल की हत्या पर गहलोत सरकार को घेरा

दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘बजरंग दल’ और ‘विश्व हिन्दू परिषद (VHP)’ ने राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल तेली का सिर कलम कर हत्या किए जाने के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान कइयों ने गिरफ्तारियाँ भी दी। पुलिस उन्हें DTC की बसों में भर कर ले गई। कई अन्य जगहों पर भी हिन्दू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। पृथ्वीराज रोड स्थित राजस्थान हाउस के सामने भी हिन्दू कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगा।

इस दौरान एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “वो बाहर आकर वही करते हैं जो उनकी किताब में लिखा है। नूपुर शर्मा ने कुछ बोल भी दिया तो वही बोला जो उनकी किताब में लिखा है। क्या गलत बोला? इस बेचारे का क्या कसूर है? इसने सिर्फ समर्थन में एक डीपी लगाई थी। एक सप्ताह पहले इन्होंने रिपोर्ट लिखवाई थी, लेकिन अशोक गहलोत की सरकार बैठी रही। ये सब मदरसों में सिखाया जा रहा है। कश्मीर से हिन्दुओं को भगा दिया गया।”

एक प्रदर्शनकारी महिला ने कहा कि सरेआम सारे सबूत पब्लिक डोमेन में मौजूद हैं, ऐसे में उसका कीमा बना दिया जाना चाहिए, उसे फाँसी होनी चाहिए। महिलाओं ने कहा कि नूपुर शर्मा हमारी बहन है, हम सब उनकी डीपी लगाएँगे। महिलाओं ने नूपुर शर्मा के बयान को दोहराया। उन्होंने कहा कि हिन्दुओं का क़त्ल करना इन्हें सिखाया जाता है। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को धमकी दी गई है वीडियो बना कर, उन्हें जरा भी खरोंच भी आ गई तो गजब हो जाएगा। इस दौरान उन्होंने ‘हिंदुस्तान को तालिबान नहीं बनने देंगे’ जैसे पोस्टर्स भी ले रखे थे।

एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि पूरा मामला साफ़ होना चाहिए और जो-जो साजिश में शामिल हैं, सबको पकड़ा जाना चाहिए। लोगों ने कहा कि नरेंद्र मोदी को धमकी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोनों हत्याओं को हमारे हवाले कर दो – लोगों ने डिमांड की। इस दौरान उन्होंने कहा, “इस देश में आसमानी किताब पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।” साथ ही लोगों ने हिन्दुओं को बाँटने का आरोप लगाते हुए पूछा कि ‘अवॉर्ड वापसी गैंग’ चुप क्यों हैं?

हिन्दू संगठन के एक अन्य पदाधिकारी ने कहा कि सीमा पार करने वालों को जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ‘बजरंग दल’ हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है और हम हर एक हिन्दू पीड़ित के साथ खड़े हैं। उन्होंने प्रशासन पर भी FIR करने की माँग की, क्योंकि हिन्दुओं की टारगेट किलिंग और कई बार शिकायत दिए जाने के बावजूद वो चुप बैठे रहे। इस दौरान लगातार ‘जय श्री राम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगते रहे।

कन्हैया लाल की तरह अमरावती के उमेश को किसने मारा: अब्दुल और शोएब की गिरफ्तारी, नूपुर शर्मा का समर्थन करने पर हमले का दावा

महाराष्ट्र के अमरावती में रहने वाले एक केमिस्ट उमेश कोल्हे की 22 जून, 2022 को चार मुस्लिम हमलावरों ने हत्या कर दी थी। हत्या उस समय हुई थी जब वह उस रात अपनी फार्मेसी से लौट रहे थे। हालाँकि, हत्या के कारण अभी भी स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन महाराष्ट्र भाजपा के प्रवक्ता शिवराय कुलकर्णी ने आरोप लगाया है कि उन्हें नुपुर शर्मा का समर्थन करने के लिए मारा गया था। कुलकर्णी ने दावा किया है कि पुलिस को इस बात की जाँच करनी चाहिए कि सोशल मीडिया पर नूपुर शर्मा के समर्थन में एक पोस्ट को लेकर कोल्हे की हत्या तो नहीं की गई। यह एंगल इसलिए भी सामने आया है क्योंकि कल मंगलवार (28 जून, 2022) को उदयपुर में कन्हैयालाल की गला रेतकर हत्या महज एक व्हॉट्सपप्प स्टेटस के आधार पर कर दी गई।

क्या है मामला

महाराष्ट्र के अमरावती में ‘अमित मेडिकल’ के नाम से फार्मेसी चलाने वाले 54 वर्षीय केमिस्ट उमेश कोल्हे 22 जून की रात अपने बेटे संकेत और बहू वैष्णवी के साथ अलग-अलग बाइक से घर जा रहे थे तभी हमलावरों ने कोल्हे की गर्दन पर पीछे से चाकू से हमला कर दिया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए और भारी खून बहने से कोल्हे की मौके पर ही मौत हो गई।

उस दिन कोल्हे का बेटा और बहू उसकी मदद के लिए दौड़े, लेकिन अंधेरे के कारण हमलावर भागने में सफल रहे। जैसा कि कोल्हे के बेटे ने पुलिस को बताया, दो लोगों ने वाहन को रोका और उस पर हमला कर दिया। जिसके बाद क्राइम ब्रांच और सिटी कोतवाली पुलिस ने एक संयुक्त जाँच शुरू की और मुदस्सिर अहमद शेख इब्राहिम और शाहरुख पठान इनायत खान नाम के दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया। बाद में पुलिस ने कोल्हे की हत्या के मामले में दो और आरोपितों अब्दुल तौफीक और शोएब खान को भी गिरफ्तार किया है।

इस मामले में जाँच करने पर पता चला कि हमलावर उस इलाके की रेकी कर रहे थे, जहाँ कोल्हे को मारा गया था। हालाँकि, यह संदेह है कि मामले में एक मजहबी एंगल भी हो सकता है। जिसे ध्यान में रखते हुए अमरावती सिटी पुलिस ने कहा है कि वे हर संभावित कोण से मामले की जाँच करना जारी रखेंगे।

नूपुर शर्मा से जुड़ा हो सकता है मामला

महाराष्ट्र बीजेपी के नेता और प्रवक्ता शिवराय कुलकर्णी ने आरोप लगाया है कि इस मामले में नूपुर शर्मा का कोण शामिल हो सकता है। कुलकर्णी ने कहा है कि पुलिस को इस बात की जाँच करनी चाहिए कि क्या उमेश कोल्हे की मौत का बदला उनके सोशल मीडिया साइट्स पर पूर्व बीजेपी प्रवक्ता नुपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट करने पर लिया गया था। कुलकर्णी ने आगे कहा, “चूँकि, पुलिस के पास कोल्हे का फोन है, इसलिए यह जाँच की जानी चाहिए कि क्या उन्हें नूपुर शर्मा का समर्थन करने वाले पोस्ट पर जान से मारने की धमकी मिल रही थी। ऐसा नहीं लगता कि यह हत्या सामान्य लूट के लिए की गई थी।”

कुलकर्णी ने एक वीडियो में कहा, “मामला बेहद संदिग्ध है। कोल्हे की हत्या से पहले हमलावरों की कोई आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं थी। मिस्टर कोल्हे ने नुपुर शर्मा के समर्थन में कुछ पोस्ट सोशल मीडिया और कुछ व्हाट्सएप ग्रुप्स पर शेयर की थीं। यह जरूरी है कि पुलिस जाँच करे कि क्या इस तथ्य का उनकी हत्या से कोई लेना-देना है।”

साथ ही उन्होंने बताया कि उमेश कोल्हे पर हमला बेहद ‘पेशेवर’ तरीके से 5 इंच के चीनी चाकू से किया गया था। यहाँ तक कि कोल्हे की गर्दन पर हमला करने वाले हमलावरों ने उनके बैग में पड़े पैसों को छूने तक की जहमत नहीं उठाई। जबकि वे उस पर करीब एक हफ्ते से नजर रखे हुए थे। पुलिस को बिना किसी बाहरी दबाव के इस एंगल से जाँच करनी चाहिए।’

अमरावती के पूर्व भाजपा पार्षद तुषार भारतीय ने माँग की है कि शुरूआती जाँच में मिले सुराग को देखते हुए महाराष्ट्र विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस को आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) से जाँच कराने के लिए आवेदन करना चाहिए।

कॉन्ग्रेस की ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ की भेंट चढ़े कन्हैया लाल, खतरा जान भी सोती रही राजस्थान पुलिस: टोंक से उदयपुर तक इसी मजहबी आग में झुलसे हैं हिंदू

राजस्थान के उदयपुर (Udaipur, Rajasthan) में मंगलवार (28 जून 2022) को कन्हैया लाल साहू नाम के हिंदू व्यक्ति की गला काटकर दिन-दहाड़े हत्या कर दी गई। इस्लामी आतंकियों ने न सिर्फ गला काटा, बल्कि बाद में वीडियो भी बनाया और उनके रसूल की गुस्ताखी पर लोगों को धमकाया।

इस तरह की घटनाएँ अफगानिस्तान में तालिबान और इराक एवं सीरिया में इस्लामिक स्टेट (IS या ISIS) के आतंकियों द्वारा अंजाम देते हुए हमने देखे हैं, लेकिन ये घटनाएँ अब हमारे पड़ोस में होने लगी हैं और हालात देखकर यही कहा जा सकता है कि अगर इस तरह की आतंकी घटना हमारे साथ हो जाए तो कोई बड़ी बात नहीं होगी।

किसी भी आतंकी घटना को रोकने में समाज और सरकार की भूमिका होती है। सरकार अगर दृढ़ निश्चयी हो तो समाज भी पूरे जोश के साथ लड़ता है, लेकिन उदयपुर की घटना देखने के बाद साफ लगता है कि इस्लामी आतंकवाद (Islamic Terrorism) की गंभीरता को देखने के बजाय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) की नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस (Congress) एक समुदाय विशेष की तुष्टिकरण की नीति पर चल रही है। इसका परिणाम ये हो रहा है कि राजस्थान जल रहा है।

कन्हैया लाल की सरेआम सिर कलम करने की घटना ने कॉन्ग्रेस सरकार और वहाँ के प्रशासन पर कई सवाल खड़े किए हैं। जब कन्हैया लाल को इस्लामी चरमपंथियों की धमकी मिल रही थी, तब पुलिस ने उन्हें सुरक्षा मुहैया क्यों नहीं कराई? धमकी देने वालों को गिरफ्तार क्यों नहीं किया? या फिर कार्रवाई नहीं करने वाले पुलिस अधिकारियों पर सरकार ने एक्शन क्यों नहीं लिया?

ये ऐसे सवाल हैं, जिनमें कन्हैया लाल की हत्या का राज छुपा हुआ है। नूपुर शर्मा का समर्थन करना अपराध नहीं है, क्योंकि शर्मा ने वही बात कही थी जो इस्लामी विद्वान अपने मुँह से खुद कहते आए हैं, उनकी किताबों में लिखी हैं और जो तकरीरों में अक्सर बताई जाती हैं।

जब नूपुर शर्मा का कन्हैया लाल ने समर्थन किया और इस्लामी चरमपंथियों ने उनके खिलाफ शिकायत की तो पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया। लेकिन, जमानत मिलने के बाद भी उन्हें हत्या की धमकी मिलती रही तो कन्हैया लाल 15 जून 2022 को थाने में शिकायत की। लेकिन, पुलिस ने इस्लामी चरमपंथियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें थाने में बुलाकर समझौता करा दिया और कन्हैया लाल को दो चार दिन छुपकर रहने का मुफ्त सलाह देकर अपने कर्तव्यों से इतिश्री कर ली।

इसका परिणाम ये हुआ कि थाने में समझौता करने के बाद भी चरमपंथियों ने कन्हैया लाल का सिर कलम कर दिया। स्पष्ट है कि कॉन्ग्रेस सरकार की मुस्लिम तुष्टीकरण की चरम ने पुलिसकर्मियों के हाथ बाँध रखे। हालाँकि, पुलिस यहाँ अपने संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन में पूरी तरह विफल रही। कई बार सरकार की ऐसी नीतियाँ भ्रष्ट पुलिसकर्मियों ने सुनहरा अवसर के रूप में सामने आते हैं और वे इसका खूब लाभ उठाते हैं।

राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार की मुस्लिम तुष्टिकरण पिछले कुछ दिनों की स्थितियों में साफ नजर आ रहा है। हिंदू नववर्ष पर 2 अप्रैल 2022 को करौली हिंसा में जिस तरह हिंदुओं की शोभायात्रा पर हमले किए गए और पुलिस की प्रतिक्रिया रही, उससे इन लोगों ने पैशाचिक आत्मविश्वास और बढ़ता गया।

घटना दर घटना को अंजाम देने के बाद चरमपंथियों का बढ़ रहा मनोबल

करौली हिंसा के बाद सरकार ने अगर उचित कार्रवाई की होती तो चरमपंथियों के मन में कानून के प्रति खौफ पैदा होता। हालाँकि, राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार ने राजनीतिक गोटी सेट करने के चक्कर में अपराधियों पर उचित और त्वरित कार्रवाई नहीं की। उस मामले के कई अपराधी आज भी खुलेआम घूम रहे हैं।

इसी तरह 2 मई 2022 को जालोरी गेट पर स्वतंंत्रता सेनानी बालमुकंद बिस्सा की प्रतिमा पर ईद की नमाज पढ़कर निकले दंगाइयों ने तोड़फोड़ की और इस्लामी झंडे फहरा दिए। सरकार यहाँ भी कार्रवाई करने में विफल रही या कहें कि जानबूझकर कार्रवाई नहीं की।

राजस्थान के कॉन्ग्रेस सरकार की अनदेखी और पुलिस-प्रशासन की लापरवाही के कारण टोंक जिले के मालपुरा प्रखंड के हिंदू पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। मालपुरा के हिंदुओं का कहना है कि इलाके में मुस्लिमों की संख्या अवैध रूप से बढ़ती जा रही है और वे हिंदुओं को तरह-तरह से प्रताड़ित कर रहे हैं। हालात से तंग आकर वहाँ के हिंदुओं ने अपने घरों पर मकान बिकाऊ है के पोस्टर लगाए, लेकिन सरकार सोई तो तब तो जगे। ये सरकार तो सोने का नाटक कर रही है।

राजस्थान कॉन्ग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण कर रहा आग में घी का काम

राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार के इस कार्यकाल के ऐसे तमाम काम हैं, जो उन्मादी भीड़ को हौसला देने का काम कर रहे हैं। मुस्लिम तुष्टीकरण की सरकारी नीति आतंकवाद को प्रश्रय, चरमपंथियों को हौसला और हिंदू समाज में भय का माहौल व्याप्त कर दिया है।

राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार ने ऐसे कई कदम उठाए जो सीधा मुस्लिम तुष्टीकरण की इशारा करता है। अक्टूबर 2021 में राज्य में सरकारी स्कूलों की हालत खस्ता होने के बावजूद सरकार ने उसमें सुधार के लिए फंड जारी करने के बजाए हर मदरसे को 15 से 25 लाख रुपए तक देने का प्रावधान किया। यह सीधे तौर पर एक समुदाय विशेष को खुश करने की कवायद थी।

इसी तरह जनवरी 2022 में मुस्लिमों के परंपरागत हुनर के विकास, उन्हें रोजगार देने, वक्फ भूमि या सार्वजनिक भूमि पर बने कब्रिस्तान, मदरसों में चारदीवारी निर्माण के लिए 100 करोड़ रुपए का कोष जारी किया।

राजस्थान सरकार ने मुस्लिम तुष्टीकरण की हदें पार करते हुए रमजान के महीने में मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में बिजली कटौती नहीं करने का आदेश जारी कर दिया। इसको लेकर विद्युत वितरण कंपनियों ने आदेश जारी किए गए। इस तरह का आदेश का हिंदू त्योहारों पर राज्य सरकार ने कभी नहीं दिया। इसके विपरीत, हिंदू त्योहारों पर कई जिलों में धारा 144 लागू किया गया और रैली आदि निकालने के लिए पुलिस की अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया।

ऐसे बहुत जारी कारक हैं, जो विहिप के अधिकारी पर हमले, हिंदू व्यक्ति के साथ मारपीट के बाद सांप्रदायिक तनाव से होते हुए भगवा झंडा हटाकर इस्लामी झंडा फहराने तक और फिर करौली में शोभायात्रा पर भारी हिंसा तक बात पहुँच गई। अब ISIS की तरह खुलेआम गला काटने के बाद वीडियो बनाकर प्रधानमंत्री तक को मारने की धमकी देने की हिम्मत भी ये आतंकी करने लगे।

भाजपा के नेता राज्यवर्धन राठौड़ ने ठीक ही कहा कि राज्य सरकार की तुष्टीकरण वाली नीतियों के कारण इस तरह के आतंकी हमले हो रहे हैं और राज्य में आतंकी संगठनों के पनपने में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सरकार मदद कर रही है।

राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन अगर अपने रूख में बदलाव नहीं करता तो पाकिस्तान से सटा यह सीमावर्ती राज्य भारत के कश्मीर की तरह एक और नासूर बन जाएगा। इसके साथ ही आतंकियों संगठनों के स्लीपर सेल एवं भर्ती का पनाहगाह स्थल भी साबित होगा। लेकिन, कॉन्ग्रेस को देश से कब मतलब रहा है, उसे तो हर कीमत पर सत्ता चाहिए। आजादी के बाद से कॉन्ग्रेस की नीति और नीयत यही रही है, जिसका परिणाम आज दिख रहा है।

गिरफ़्तारी के बाद डिलीट हुए मोहम्मद जुबैर के 101 ट्वीट्स, कौन कर रहा सबूतों से छेड़छाड़? AltNews को 24 घंटे में मिला था ₹1 करोड़

मोहम्मद जुबैर के बारे में पता चला है कि उसने पिछले 3 दिन में अपने 101 ट्वीट्स डिलीट किए हैं। ट्विटर हैंडल ‘The Hawk Eye’ ने ये बड़ा दावा किया है। इससे पहले 20 जून, 2022 को भी AltNews के सह-संस्थापक ने 28 ट्वीट्स डिलीट किए थे। ट्विटर हैंडल ने दिल्ली पुलिस को टैग करते हुए पूछा है कि पुलिस रिमांड के तहत उसके पास गैजेट्स का एक्सेस नहीं है, इसके बावजूद ये कैसे संभव है? ये सब कौन कर रहा? इसे सबूत के साथ छेड़छाड़ का स्पष्ट मामला बताया जा रहा है।

ट्विटर हैंडल ने ये भी याद दिलाया कि कैसे 2 महीने पहले ही मोहम्मद जुबैर ने मात्र 24 घंटे में 1 करोड़ रुपए डोनेशन के रूप में जुटा लिए थे। वहीं M2S नामक एक NGO के साथ मिल कर उसने कुल 1.80 करोड़ रुपए जुटा लिए थे। उसने दावा किया कि इसमें से 26% फंडिंग विदेश से आई थी। इसमें FCRA के उल्लंघन की बात भी कही जा रही है। क्या मोहम्मद जुबैर ने इसमें से अपने व्यक्तिगत खर्च के लिए भी रुपए निकाले थे?

उधर कुछ प्रोपेगंडा पत्रकार UN में भी मोहम्मद जुबैर की गिरफ़्तारी को लेकर सवाल पूछ रहे हैं। ऐसे ही एक सवाल के जवाब में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि पत्रकारों को वो क्या लिखते हैं और कहते हैं, इसके लिए जेल नहीं भेजा जाना चाहिए। जुबैर के खाते से 50 लाख के संदिग्ध लेनदेन पर पुलिस की भी नजर है। उन पैसों का कोई स्रोत पता नहीं चला है। उसके साथ प्रतीक सिन्हा का कहना है कि AltNews को मिला सारा पैसा संगठन के बैंक खाते में जाता है, व्यक्तिगत नहीं।

उधर ये भी बताया जा रहा है कि ‘हनुमान भक्त’ नाम के जिस ट्विटर हैंडल की शिकायत पर मोहम्मद जुबैर की गिरफ़्तारी हुई, वो अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मौजूद नहीं है। वामपंथी मीडिया द्वारा लगातार उस ट्विटर हैंडल को निशाना बनाया जा रहा था। पुलिस का कहना है कि जुबैर किसी एक समुदाय को नाराज करने के लिए धर्म का इस्तेमाल कर रहा था। वह एक समुदाय को दूसरे से लड़ाकर लोकप्रियता हासिल करना चाहता था। वह पूछताछ में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को सहयोग भी नहीं कर रहा है। जुबैर ने दिल्ली पुलिस की पूछताछ में केवल गुमराह करने वाले जवाब ही दिए हैं।

केमिकल फेंके, साड़ी खींचा… केतकी चितले ने बताया- पवार पर नहीं था पोस्ट, NCP कार्यकर्ताओं ने हिरासत में बदसलूकी की

मराठी अभिनेत्री केतकी चितले (Ketaki Chitale) के साथ एनसीपी कार्यकर्ताओं ने हिरासत में बदसलूकी की थी। उन पर टॉक्सिक केमिकल फेंके गए थे। उनकी साड़ी का पल्लू खींचा गया था। यह खुलासा अभिनेत्री ने टाइम्स नाउ को दिए एक इंटरव्यू में किया है। एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के कथित अपमान को लेकर मई में उनको गिरफ्तार किया गया था। उनका यह भी कहना है कि जिस पोस्ट को लेकर उन पर 22 एफआईआर किए गए, वह शरद पवार से जुड़ा हुआ भी नहीं था। उन्होंने सत्ता के दुरुपयोग को लेकर महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार को जमकर लताड़ लगाई गई।

करीब 40 दिन जेल में बिताने के बाद चितले हाल ही में जमानत पर बाहर आईं हैं। उन्होंने कहा है कि मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी पर फ्री स्पीच का झंडा लेकर चलने वाले उस वक्त कहाँ थे, जब एक पोस्ट को लेकर बिनी किसी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया बिना उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इंटरव्यू में केतकी ने जुबैर की गिरफ्तारी पर फ्री स्पीच का रोना रो रहे लोगों पर निशाना साधा। एक्ट्रेस ने कहा कि राहुल गाँधी, शशि थरूर, ओवैसी, जयराम रमेश, डेरेक ओ ब्रॉयन, अजीत अंजुम, रबीश कुमार, ममता बनर्जी, राणा अयूब और महुआ मोइत्रा समेत अन्य लोग उस वक्त कहाँ थे, जब मुझे गिरफ्तार किया गया था।

एक्ट्रेस ने कहा, “उस वक्त ये लोग कहाँ थे, जब मुझे 41 दिनों तक जेल में रखा गया था। क्या कर रहे थे ये लोग। क्या केवल इसलिए ये लोग जुबैर का बचाव कर रहे हैं क्योंकि इनकी विचारधारा एक है।”

केतकी ने कहा, “मुझे झूठे केस में गिरफ्तार किया गया था। मैंने शरद पवार के बारे में बात ही नहीं की। पूरी पोस्ट में शरद पवार को लेकर कोई दावा नहीं किया गया है। मुझे गैरकानूनी तरीके से मेरे घर से उठाया गया। न तो कोई नोटिस दी गई, न ही कोई बयान दिया गया और बिना किसी अरेस्ट वारंट के मुझे गिरफ्तार किया गया। पुलिस कस्टडी में मेरे साथ एनसीपी के कार्यकर्ताओं ने बदसलूकी की। एक पोस्ट के लिए एक नहीं, बल्कि 22 एफआईआर मेरे खिलाफ दर्ज की गई।”

गौरतलब है कि 27 जून को महाराष्ट्र पुलिस ने बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया था कि वह चितले को अब गिरफ्तार नहीं करेगी। इससे पहले एक मामले में उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी थी। अब हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई 12 जुलाई को होनी है।

जब ‘बाल शिव’ की अभिनेत्री से काम के बदले माँगा गया सेक्स, सुनाया कास्टिंग काउच का अनुभव: कहा – जब ‘प्रोड्यूसर’ के कमरे में गई, तब…

टीवी सीरियल ‘बाल शिव’ में पार्वती का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री शिव्या पठानिया ने अपने कास्टिंग काउच अनुभवों को शेयर किया है। उन्होंने कहा कि वो आत्मविश्वास से लबरेज हैं और मानती हैं कि केवल कड़ी मेहनत से ही आपको काम मिलता है। एक बड़ी सौंदर्य प्रतियोगिता और टीवी शो का हिस्सा रहने के बावजूद उनका इस्तेमाल करने की कोशिश की गई। उन्होंने बताया कि ये तब की बात है, जब उनका पहला टीवी शो ‘हमसफर्स’ बंद कर दिया गया था।

इसके बाद उन्होंने करियर का एक बुरा दौर देखा। हाल ही में ‘फ़िदा’ म्यूजिकल वीडियो में नजर आने वाली अभिनेत्री ने बताया कि उस समय 8 महीने तक उन्हें कोई काम नहीं मिला था। इस दौरान वो एक जालसाज के चक्कर में आ गई थीं, जिसने उनसे काम से बदले सेक्सुअल फेवर्स माँगे थे। उन्हें तब मुंबई के सांताक्रुज में ऑडिशन के लिए बुलाया गया था। एक व्यक्ति उनसे मिला था, जो उस एडवर्टाइजमेंट का प्रोड्यूसर होने वाला था।

शिव्या पठानिया ने बताया, “उस प्रोड्यूसर ने मुझसे कहा कि अगर तुम किसी बड़े सेलेब्रिटी के साथ विज्ञापन करना चाहती हो तो तुम्हें कॉम्प्रोमाइज करना पड़ेगा। सबसे हास्यजनक बात जो मैं कभी नहीं भूल सकती, वो ये है कि उसके लैपटॉप में हनुमान चालीसा बज रहा था। मुझे हँसी आ गई। मैं वहीं हँसने लगी। मैंने उससे कहा – आपको शर्म नहीं आ रही है? भजन सुन रहे हो और आप क्या बोल रहे हो?” बाद में पता चला कि वो व्यक्ति जालसाज था।

31 वर्षीय शिव्या पठानिया ने बताया कि इस घटना के बाद उन्होंने अपने दोस्तों-परिचितों को उस आदमी के बारे में बताया। वो चाहती थीं कि कोई और उसके जाल में न फँसे। उन्होंने कहा कि उन्हें अब तक पता नहीं कि ऐसा करने की उसकी हिम्मत कैसे हुई थी। शिव्या पठानिया का जन्म हिमाचल प्रदेश में हुआ था। उनका पिता वहाँ सरकारी अधिकारी थे। वो ‘राम-सिया के लव कुश’ और ‘राधा कृष्ण’ के अलावा ‘लाल इश्क’ में भी दिख चुकी हैं।

इस्लाम के नाम पर हिंदू का गला काटा, सेकुलर मीडिया ने नुपूर शर्मा-टेलर-कस्टमर की आड़ में मजहबी आतंक के खतरों को छिपाया

राजस्थान के उदयपुर जिले के धानमंडी थानाक्षेत्र में मंगलवार (28 जून, 2022) को दर्जी कन्हैयालाल तेली की दिनदहाड़े गला काटकर हत्या कर दी गई। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस घटना के वीडियो में हत्यारा मोहम्मद रियाज अंसारी उन पर धारदार हथियार से हमला करते हुए दिखाई दे रहा है। वारदात के बाद एक दूसरा वीडियो जारी करके हत्या की जिम्मेदारी लेते हुए अपने गुनाह खुद कबूल रहा है और साथ ही प्रधानमत्री मोदी और नूपुर शर्मा की भी गर्दन काटकर हत्या की धमकी दे रहा है लेकिन तथाकथित सेक्युलर-लिबरल मेन स्ट्रीम मीडिया का एक धड़ा हत्या और हत्यारे के कबूलनामें का वीडियो होते हुए भी उसके गुनाहों को छिपाने या कमतर दिखाने में लगा है जिसे हम आज के न्यूज़ पेपर में हुए कवरेज में देख सकते हैं।

किसी ने कहीं कोने में जगह दी तो कोई हैडलाइन में ही खेल कर हत्यारों और उनके मजहब को छिपाता रहा। जैसे यह कोई वीभत्स घटना न होकर कोई मामूली अपराध हो। इस जघन्य हत्या को कवर करते हुए हिंदुस्तान टाइम्स लिखता है, “Hindu Tailor Murderd in gruesome hate crime.” अर्थात “जघन्य हेट क्राइम में हिंदू दर्जी की हत्या”- बाकी किसने की, क्यों की? वो सब गायब या अंदर छोटे में है जिसे खोजकर पढ़ना हो पढ़े।

वहीं राजस्थान पत्रिका लिखता है, “उदयपुर में दरिंदों ने दिनदिहाड़े काट डाली गर्दन, पुलिस और प्रशासन सोते रहे! दैनिक जागरण लिखता है, “उदयपुर में बर्बरता, नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट करने पर दिनदहाड़े काटा गला”, हिंदुस्तान लिखता है, “नूपुर शर्मा समर्थक का गला रेता” इसके अलावा इंडियन एक्सप्रेस हो या ओडिशा पोस्ट सबने या तो सिंपल टेलर की हत्या लिखा या उसे हेट क्राइम से जोड़ते हुए कहीं न कहीं नूपुर शर्मा और उनके तथाकथित समर्थन में लगाए गए व्हाट्सप्प स्टेटस को ही सबसे बड़ा गुनाह साबित करने की कोशिश की।

जबकि यह बात भी सामने आ चुकी है कि पोस्ट कन्हैयालाल के 8 साल के मासूम बच्चे ने शेयर किया था जिसे उसका अर्थ भी पता नहीं होगा और किसी की बात का समर्थन करना जो पहले से ही इस्लामी हदीसों में लिखा गया है गुनाह कैसे हो गया? लेकिन मेन स्ट्रीम मीडिया में किसी ने भी हैडलाइन में न हत्यारों का नाम लिखा न यह पता लगने दिया कि वह किस मजहब का है।

यहाँ आगे बढ़ने से पहले एक बार यह याद कर लीजिए कि इस्लामी हत्यारों ने मजहबी नारे लगाते हुए न सिर्फ कल वारदात और उसके बाद का वीडियो रिलीज कर उसके बारे में मुस्कराते हुए बताया बल्कि करीब 10 दिन पहले 17 जून को ही वीडियो रिलीज कर वह कन्हैयालाल की गर्दन काटकर हत्या की धमकी दे चुका है। लेकिन, पुलिस सुरक्षा देने की बजाय इसे नजरअंदाज करती रही। जबकि जिस पोस्ट पर इन इस्लामी हत्यारों ने उसकी हत्या की वह भी कन्हैयालाल के 8 वर्षीय मासूम बच्चे ने गलती से किया था। यह बात भी वो कई बार प्रशासन से बता चुके थे। क्योंकि कन्हैयालाल खुद कायदे से लिखना-पढ़ना भी नहीं जानते थे। न उन्हें हाल ही में ख़रीदे गए स्मार्टफोन की कोई खास समझ थी। यह बात कई मीडिया रिपोर्टों में सामने आई है।

जबकि कई इंग्लिश न्यूज़ पेपर जिन गौस मोहम्मद और मोहम्मद रियाज अंसारी जैसे हत्यारों को हैडलाइन में कोई कस्टमर तो कोई बदमाश लिखकर उनकी असली पहचान छिपा रहा है। जबकि वो खुद ही हत्या के समय और बाद में तलवार पर खून और चेहरे पर हँसी के साथ वीडियो में कहता है, ”मैं मोहम्मद रियाज अंसारी और ये हमारे गौस मोहम्मद भाई, उदयपुर के अंदर जो माता स्टेट वाला है उसका सर कलम कर दिया है।” आगे मजहबी नारा लगाते हुए कहता है, ”हम जिएँगे आपके लिए और मरेंगे आपके लिए।”

हमलवार आगे पीएम मोदी की गर्दन काटने और नूपुर शर्मा को धमकी देते हुए कहता है, ”ये नरेंद्र मोदी सुन ले, आग तूने लगाई है और बुझाएँगे हम, इंसाअल्लाह मैं रब से दुआ करता हूँ कि यह छुरा तेरी गर्दन तक भी जरूर पहुँचेगा। और उस कुति** तक भी पहुँचेगा। उदयपुर वालों नारा लगाओ गुस्ताखे नबी की एक ही सजा, सर तन से जुदा। दुआओं में याद रखना।”

लेकिन ऐसे दरिंदे हत्यारे हमारे तथाकथित सेक्युलर न्यूज़पेपर को मासूम, भटके हुए, बदमाश या सामान्य सा शब्द कस्टमर नजर आ रहे हैं। जबकि हत्यारा वारदात के 10 दिन पहले ही खुलेआम सिर तन से जुदा की धमकी देते हुए नजर आ रहा है।

10 दिन पुराने वीडियो में वह कह रहा है, “मैं मोहम्मद रियाज अंसारी राजस्थान के उदयपुर, खांजीपीर से, ये वीडियो में जुम्मे के दिन बना रहा हूँ। माशाल्लाह और 17 तारीख है। मैं इस वीडियो को उस दिन वायरल ​करूँगा, जिस दिन अल्लाह की शान में गुस्ताखी करने वाला का सिर कलम कर दूँगा। आपको एक मैसेज देता हूँ रियाज ने सिर कलम करने की शुरुआत तो कर दी है। बाकी के जो बचे हैं उन सभी का सिर आपको कलम करना है। इस बात का ध्यान रखना।”

उसने आगे कहा, “ये चिंता मत करना मेरे भाई कि तुम्हारी फैमिली का क्या होगा, कारोबार का क्या होगा। मेरी भी फैमिली है। मैं भी नौकरी करता हूँ, लेकिन मुझे इसकी कोई चिंता नहीं है। क्योंकि मैं अपने रसूले पाक के लिए जी रहा हूँ। मेरा सब कुछ आप पर कुर्बान रसूल अल्लाह।”

अभी आपने जो पढ़ा यह उस वीडियो में कही गई बातों का बहुत छोटा सा हिस्सा है। वह जिस तरह से नूपुर शर्मा और उनका समर्थन करने वालों की गर्दन कलम करने की खुलेआम धमकी दे रहा है वह कोई मामूली या सामान्य अपराध की बात नहीं है। यहाँ तक कि अब घटना की भयावहता का अंदाजा कन्हैयालाल के पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी लगाया जा सकता है जिसमें उनके शरीर पर 26 निशान मिले हैं, जिसमें से 8 से 10 बार गर्दन पर ही वार किया गया है। वहीं पीएम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कन्हैया का गला रेत कर अलग कर दिया गया था।

अब ऐसे में यह आपको सोचना है कि जितने गुनहगार ऐसे जघन्य वारदात करने वाले इस्लामी हत्यारे हैं उतने ही उन्हें बचाने वाले या उनके क्रूरतम अपराधों पर पर्दा डालने वाले ये मीडिया गिरोह के लोग भी। जो हर हाल में इस्लामी हत्यारों के बचाव में कूद पड़ते हैं। ऐसे ही कल लिबरलों और इस्लामी कट्टरपंथियों का भी वह चेहरा सामने आया था जो कन्हैयालाल की हत्या पर हाहाहा रिएक्ट करके अपनी ख़ुशी का इजहार कर रहा था।

लैपटॉप में ऐसा क्या है जिसे छुपाना चाहता है AltNews वाला जुबैर: बरामदगी के लिए बेंगलुरु ले जाएगी दिल्ली पुलिस, फोन कर चुका है फॉर्मेट

इस्लामिक कट्टरपंथ को हवा देने वाले ऑल्ट न्यूज (Alt News) के को-फाउंडर मोहम्मद जुबैर (Mohammad Zubair) को गिरफ्तार करने के बाद अब दिल्ली पुलिस (Delhi Police) उसके लैपटॉप की तलाश में जुट गई है। इसके लिए पुलिस उसे बेंगलुरू ले जाएगी, ताकि उसके खिलाफ सबूतों को इकट्ठा किया जा सके।

रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस का कहना है कि जुबैर किसी एक समुदाय को नाराज करने के लिए धर्म का इस्तेमाल कर रहा था। वह एक समुदाय को दूसरे से लड़ाकर लोकप्रियता हासिल करना चाहता था। वह पूछताछ में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को सहयोग भी नहीं कर रहा है। जुबैर ने दिल्ली पुलिस की पूछताछ में केवल गुमराह करने वाले जवाब ही दिए हैं।

जुबैर को जब इस बात का आभास हुआ कि उसकी गिरफ्तारी हो सकती है तो उसने अपने फोन को फॉर्मेट कर दिया था। पुलिस के मुताबिक, ये उसकी अरेस्ट की बड़ी वजह बनी। पुलिस को उम्मीद है कि उसके लैपटॉप से कई सारी संवेदनशील जानकारियाँ हासिल हो सकती हैं। बरामदगी के बाद लैपटॉप को फोरेंसिक जाँच के लिए लैब में भेजा जाएगा।

पुलिस इस बात से और सतर्क हो गई है कि आखिर लैपटॉप में ऐसी क्या जानकारियाँ हैं, जिन्हें जुबैर पुलिस से छिपाना चाहता है और वह लैपटॉप उसे देना नहीं चाहता है। पुलिस को लैपटॉप से 50 लाख रुपए के लेनदेन सहित अन्य लेनदेन और उसके संपर्कों के बारे में जानकारियाँ मिल सकती हैं।

अपनी वकील वृंदा ग्रोवर के जरिए जुबैर ने दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाया है कि उसे इसलिए परेशान किया जा रहा है, क्योंकि वह सत्ता में बैठे कुछ लोगों को चुनौती दे रहा था। बहरहाल पुलिस आज (बुधवार) को जुबैर को बेंगलुरू ले जा सकती है। हालाँकि, वहाँ भी उसे अपने वकील से मिलने की इजाजत होगी।

वृंदा ग्रोवर की दलील है कि जुबैर की जिस ट्वीट के आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया है, वह ‘किसी से ना कहना (1983)’ फिल्म का है। हालाँकि, कोर्ट इस दलील को खारिज कर चुका है और कहा कि यह तर्क आरोपित के लिए मददगार नहीं है।

वहीं, दिल्ली पुलिस ने अपने तर्क में कहा था, “इस तरह के ट्वीट को रीट्वीट किया जा रहा था और ऐसा लग रहा था कि वह उसकी ब्रिगेड बन गई है, जो सांप्रदायिक सद्भाव और सार्वजनिक शांति को बिगाड़ने के लिए किसी को बदनाम करने के काम में लिप्त है।”

उधर दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए लोक अभियोजक (PP) ने तर्क दिया था कि मशहूर होने के लिए हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आजकल चलन बन गया है। उन्होंने यह कहा कि जुबैर के तीन-चार मीडिया पोस्ट संदिग्ध थे।

4 दिन की पुलिस रिमांड पर है जुबैर

गौरतलब है कि मोहम्मद जुबैर को 27 जून 2022 को दिल्ली पुलिस ने धार्मिक भावनाओं को भड़काने और विभिन्न समुदायों के खिलाफ नफरत फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उस पर IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा-153 और 295 के तहत कार्रवाई की गई है। उसे वहाँ से पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया था, जहाँ से उसे 4 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।

रिमांड का आदेश देते हुए कोर्ट ने कहा था कि जुबैर का व्यवहार असहयोगी वाला रहा है और उसे अपने मोबाइल फोन एवं लैपटॉप की बरामदगी के लिए बेंगलुरु ले जाना होगा। कोर्ट ने इस दलील को भी खारिज कर दिया था कि जुबैर को दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 41 A के तहत नोटिस नहीं दिया गया था।

जुबैर के एक पोस्ट का जिक्र करते हुए पीपी ने कहा था, “महाभारत के चरित्र संजय को लैपटॉप का उपयोग करते हुए दिखाया गया है। मोबाइल फोन से सभी एप्लिकेशन हटा दिए गए हैं। वह एक खाली फोन लेकर आया था। उसका जानबूझकर किया गया कृत्य रिकॉर्ड में है, जो धार्मिक भावनाओं को आहत करता है। इसलिए पुलिस रिमांड की जरूरत है।”

क्या है पूरा मामला

बता दें कि जुबैर ने ‘हनीमून होटल और हनुमान होटल’ से संबंधित एक ट्वीट किया था। जिसको लेकर एक सोशल मीडिया यूजर ने पुलिस से शिकायत की थी और कहा था कि इससे उसकी धार्मिक भावनाएँ आहत होती हैं। इसके आधार पर ही पुलिस ने मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था।

गला काटने से पहले कन्हैया लाल की दुकान की CCTV किसने बंद की? माँ-पत्नी की चीत्कार से रोया उदयपुर, कहा- फाँसी दो, वरना कल किसी और को मारेंगे

राजस्थान के उदयपुर में टेलर कन्हैया लाल तेली का सिर कलम कर के आतंकियों ने हत्या कर दी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने घटना की जाँच NIA को सौंप दी है, वहीं पूरे राजस्थान में धारा-144 लागू कर दी गई है। उनके परिजनों के रो-रो कर बुरा हाल है। उनकी भतीजी ने सिसकते हुए कहा कि गुनहगारों को सिर्फ सज़ा नहीं, फाँसी मिलनी चाहिए। NIA की 4 सदस्यीय टीम उदयपुर पहुँच गई है और IB के साथ मिल कर घटना की छानबीन की जा रही है।

उदयपुर के 7 थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। कन्हैया लाल तेली की पत्नी और माँ का भी रो-रो कर बुरा हाल है। उनकी पत्नी लगातार छाती पीट-पीट कर रो रही हैं। उनकी चीत्कार सुन कर आसपास खड़े पुलिस वाले अभी अपनी आँखों में आँसू आने से नहीं रोक पाए। पत्नी की माँग है कि आरोपितों को कड़ी से कड़ी सज़ा मिले। उनका कहना है, “सरकार इन हैवानों को फाँसी दे। इन्होने आज एक को मारा है, कल ये दूसरों को मारेंगे।”

कन्हैया लाल के पार्थिव शरीर के पास भी पुलिस ने परिजनों और करीबी रिश्तेदारों के अलावा किसी को भी नहीं जाने दिया। पत्नी और माँ के अलावा उनकी भतीजी भी दहाड़ मार-मार कर रो रही हैं। पुलिस और परिजनों में तनातनी भी हुई, क्योंकि पुलिस पास के श्मशान में अंतिम संस्कार की बात कह रही थी, जबकि परिवार अशोक नगर श्मशान में अंतिम क्रिया-कर्म करवाना चाहता था। अंत में पुलिस को राजी होना पड़ा। उनकी अंतिम यात्रा में कई स्थानीय लोग भी पहुँचे।

कन्हैया लाल की पत्नी जसोदा साहू ने कहा कि कई दिनों से वो चिंतित रहते थे, लेकिन परिवार को कुछ बताते नहीं थे। परिजनों का कहना है कि शिकायत के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की थी और दुकान में CCTV को बंद कर दिया गया था। भांजी ने बताया कि दुकान में सीसीटीवी बंद करने का काम वैसे किसी व्यक्ति ने किया था, जो पहले से संपर्क में हो। उन्होंने कहा कि जैसे मामा को मारा है, वैसे ही उन्हें मारा जाना चाहिए।