कंगना रनौत और करण जौहर के बीच अदावत पुरानी है। ‘कॉफी विद करण’ के नए सीजन की शुरुआत से पहले भी कंगना (Kangana Ranaut) ने उन पर निशाना साधा है। उन्होंने उस वक्त को याद किया है जब वे इस शो के 5वें सीजन में गेस्ट बनकर गईं थी। इसे उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक बताया है।
करण जौहर (Karan Johar) का चैट शो ‘कॉफी विद करण’ का 7वाँ सीजन (Koffee With Karan 7) आज (7 जुलाई 2022) से नेटफ्लिक्स पर शुरू हो रहा है। कंगना ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा है, “पापा जो (करण जौहर) अपने फेमस कॉफी एपिसोड को प्रमोट कर रहे हैं, क्योंकि यह आज से ओटीटी पर आ रहा है। पापा जो को गुड लक, लेकिन उस एपिसोड का क्या, ओह सॉरी! सर्जिकल स्ट्राइक, घर में घुस के मारा था न, मेरा एपिसोड उनका सबसे अधिक पॉपुलर एपिसोड रहा था और इसके बाद वह टीवी पर बैन हो गए थे। बिल्कुल उनके फिल्मफेयर अवॉर्ड्स की तरह।”
फोटो साभार: कंगना की इंस्टाग्राम स्टोरी
दरअसल, कंगना रनौत साल 2017 में अपनी फिल्म ‘रंगून’ के प्रमोशन के लिए ‘कॉफी विद करण 5’ में पहुँची थीं। उनके साथ सैफ अली खान भी थे। इसी शो में उन्होंने करण जौहर पर बॉलीवुड में नेपोटिज्म का बढ़ावा देने का आरोप लगाया था।
हाल ही में करण जौहर ने एक इंटरव्यू में ‘नेपोटिज़्म’ (Nepotism) को लेकर हुई ट्रोलिंग पर बात की और कहा कि वह अभी भी इसको लेकर ट्रोल किए जाते हैं। कंगना रनौत ने पिंकविला में पब्लिश करण के आर्टिकल का स्क्रीनशॉट भी अपनी इंस्टा स्टोरी पर लगाया है। उन्होंने इसके साथ लिखा, “मैंने करण को उनके सभी कामों से ज्यादा पॉपुलर बना दिया है।”
फोटो साभार: कंगना की इंस्टाग्राम स्टोरी
गौरतलब है कि कंगना को अक्सर बॉलीवुड में बाहर से आए कलाकारों का समर्थन करते हुए देखा गया है। पिछले साल अभिनेता कार्तिक आर्यन को करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शन ने “अनप्रोफेशनल बिहैवियर” का आरोप लगाकर फिल्म ‘दोस्ताना 2’ से बाहर कर उन्हें ब्लैक लिस्ट कर दिया था। इसको लेकर कंगना ने करण जौहर को जमकर लताड़ा था। कंगना ने ट्वीट कर कहा था, “कार्तिक आर्यन अपने दम पर यहाँ तक पहुँचे हैं। वह अपने दम पर ऐसा करता रहेगा। पापा जो और उनके नेपो गैंग क्लब से मेरी ये विनती है कि उसे अकेला छोड़ दें। सुशांत की तरह उसके पीछे पड़कर उसे फाँसी पर लटकने के लिए मजबूर ना करो। गिद्धों उसे अकेला छोड़ दो और दफा हो जाओ चिंदी नेपोज (भाई-भतीजावाद)।”
गुजरात में वडोदरा के छानी में करोड़पति परिवार की हिंदू लड़की को ईसाई व्यक्ति सेल्विन पॉल परमार (Christian man Selvin Paul Parmar) ने पहले प्यार के जाल में फँसाया, फिर उससे शादी कर ली। इसके बाद सेल्विन पॉल परमार ने 23 वर्षीय लड़की को इमोशनली ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। वह उसे इंटीमेट वीडियो वायरल करने की धमकी देने लगा। यही नहीं उसने लड़की को खुद को ब्लेड से काटने के लिए भी मजबूर किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय को भी दखल देना पड़ा।
वडोदरा में छानी नहर के पास एक सोसाइटी में रहने वाले 10वीं पास सेल्विन परमार ने कथित तौर पर इलाके के एक करोड़पति हिंदू परिवार की बेटी को 250 करोड़ रुपए की संपत्ति का मालिक कहकर उसे गुमराह किया। उसने बताया कि उसके पास एक फैक्ट्री, एक रेत का पट्टा, एक पेट्रोल पंप है। 2019 में 2 साल के लंबे प्रेम प्रसंग के बाद ईसाई युवक ने लड़की के साथ कोर्ट मैरिज कर ली।
— VTV Gujarati News and Beyond (@VtvGujarati) July 5, 2022
इस बीच उसने लड़की के साथ अपने निजी पलों की तस्वीरें और वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। जब लड़की के परिवार वालों ने उसका मोबाइल चेक किया तो उसने पाया कि वह इस शख्स से चैट कर रही है। चैट में, उस व्यक्ति ने कथित तौर पर उसे एक मिनट में ब्लेड से खुद के शरीर पर 40 से 45 कट बनाने के लिए कहा था और साथ ही इन तस्वीरों को उसे सोशल मीडिया पर शेयर करने के लिए कहा था।
मेडिकल जाँच में लड़की के शरीर पर 500 से अधिक ब्लेड के घाव पाए गए हैं। लड़की ने इन घावों को छिपाने के लिए हमेशा पूरे शरीर को ढँकने वाले कपड़े ही पहने। एक समय ऐसा भी था जब सेल्विन पॉल परमार की धमकियों से तंग आकर उसने आत्महत्या करने का मन बना लिया था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, शादी के बाद लड़की को सेल्विन के पिता पॉल परमार ने बहला-फुसलाकर अपने ससुराल में रहने के लिए मजबूर किया। कुछ समय बाद सेल्विन, उसकी भाभी श्वेता और पिता पॉल परमार ने लड़की को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। उन्होंने उसे घर में बंद कर दिया। लड़की को उसकी मर्जी के खिलाफ नॉन वेज खाने के लिए भी मजबूर किया। लड़की के परिवार को जब इस बारे में पता चला कि ससुराल में उसके साथ आए दिन मारपीट की जाती है तो वो लड़की को घर वापस ले आए। घटना की जानकारी होने के बाद लड़की के पिता ने इस संबंध में छानी थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने सेल्विन पॉल परमार, श्वेता पॉल परमार और पॉल परमार के खिलाफ मामला दर्ज कर सेल्विन परमार को हिरासत में लिया है।
लड़की के पिता ने शी टीम से संपर्क किया
अपनी बेटी को इस हालत में देख उसके पिता ने अगस्त 2021 में पुलिस की शी टीम से संपर्क किया। लड़की के पिता ने आरोप लगाया कि शी टीम के पुलिस अधिकारी नोएल सोलंकी ने उनकी बातों को नजरअंदाज करते हुए उनसे रिश्वत की माँग की। सितंबर 2021 में, लड़की के पिता ने नोएल और सेल्विन के खिलाफ छानी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने पुलिस अधिकारी पर आरोप लगाया था कि एक ही धर्म (ईसाई) के होने के कारण नोएल ने उनकी शिकायत दर्ज नहीं की थी। इसके बाद लड़की के पिता ने मामले में न्याय की गुहार लगाते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में याचिका दायर की थी। प्रधानमंत्री कार्यालय के आदेश के बाद मामले की जाँच की गई। इसके बाद शी टीम के दोनों सदस्यों पुलिसकर्मी नोएल सोलंकी और कांस्टेबल संजय कुमार को 22 जून, 2022 को निलंबित कर दिया गया था। उनके खिलाफ सभी आरोप सही साबित हुए थे।
फिलहाल, परिवार ने बेटी को उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका भेज दिया है। वे इस घटना से इतने सदमे में हैं कि अपनी बेटी को भारत वापस नहीं लाना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि उनकी बेटी अमेरिका में ही अपनी आगे की जिंदगी जिए।
भारत आज उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। इस्लामवादियों के हौसले लगातार बढ़ रहे हैं और जो उनकी मर्जी के मुताबिक बोल-सुन नहीं रहा है, उसे वे धमकियाँ दे रहे हैं। पिछले एक महीने से नूपुर शर्मा को मौत और रेप की धमकियों के बाद इस्लामवादियों ने उन्हें समर्थन करने वालों का सिर कलम करना और धमकाना शुरू कर दिया है। कन्हैया लाल का सिर काटने की घटना ने देश को झकझोर कर रख दिया, क्योंकि दो इस्लामवादियों ने न केवल न केवल घटना को अंजाम दिया, बल्कि इसका वीडियो भी जारी किया।
कन्हैया लाल की घटना के तुरंत बाद पता चला कि कुछ दिन पहले हुई उमेश कोल्हे की हत्या भी नूपुर शर्मा का समर्थन करने के कारण की गई थी। तब से कई लोगों को नूपुर शर्मा और कन्हैया लाल के समर्थन में सोशल मीडिया पोस्ट के लिए सिर काटने की धमकी मिली है। इससे पहले यह बात भी सामने आई है कि नूपुर शर्मा को समर्थन देने के कारण जान से मारने की लगातार धमकी मिलने के कारण एक व्यक्ति नागपुर भाग गया था।
सुप्रीम कोर्ट के दो जजों ने तो यहाँ तक कह दिया कि कन्हैया लाल की हत्या के लिए नूपुर शर्मा जिम्मेदार हैं और उन्होंने शर्मा की ‘ढीली जीभ’ को दोषी ठहराते हुए टीवी पर पूरे देश से माफी माँगने की बात कह दी। सीधे शब्दों में कहें तो सुप्रीम कोर्ट ने इस्लामवादियों की इन हत्याओं के लिए नूपुर शर्मा द्वारा एक टीवी डिबेट में दिए गए बयान को जिम्मेदार ठहराया।
इस तरह हिंदुओं को मिलने वाली धमकी के विरोध में विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल सामने आए और कहा कि अगर किसी भी हिंदू को इस तरह की मौत की धमकी मिलती है तो उन्हें डरना नहीं चाहिए और तुरंत पुलिस से संपर्क करना चाहिए। इन दलों ने आगे कहा कि हिंदुओं को भी सहायता के लिए अपनी स्थानीय बजरंग दल इकाइयों से संपर्क करना चाहिए।
विहिप ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के बयानों की निंदा की और कहा कि उनकी टिप्पणियों में (जो लिखित आदेश में नहीं आया) न्यायाधीशों ने कट्टरपंथी इस्लाम के खतरे को नजरअंदाज कर दिया। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष ने व्यंग्य करते हुए कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने हम सभी को बताया था कि 1400 साल के इस्लामी हमले नूपुर शर्मा की गलती थी।
हालाँकि, हमें यह भी याद रखना होगा कि कई मामलों में पुलिस संज्ञान लेने से ही इनकार कर देती है, जैसे कि कन्हैया लाल के मामले में हुआ। जब कन्हैया लाल को जान से मारने की धमकी मिल रही थी, तब राजस्थान पुलिस ने मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया था और उन्हें इस्लामवादियों से ‘समझौता’ करा दिया था। हालाँकि, कुछ दिन बाद उन्हीं लोगों ने समझौता तोड़ते हुए कन्हैया लाल का सिर कलम कर दिया।
ऐसी स्थिति में, जब प्रशासन एक हिंदू को बचाने में विफल रहता है तो समुदाय के नेताओं को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा जाता है कि दबाव बनाया जाए। दूसरा परिदृश्य शायद तब हो सकता है जब किसी के घर के बाहर भीड़ हो और पुलिस प्रशासन की संख्या बहुत कम हो। ये ऐसी वास्तविकताएँ हैं और इसके बहुत से उदाहरण हैं।
हालाँकि टाइम्स ऑफ इंडिया खुश नहीं था। अपने प्रिंट संस्करण में उसने इस समाचार को एक वाक्य के साथ प्रस्तुत किया, जो इस बात की ओर इंगित करता है कि वे चाहते हैं कि हिंदू बिना किसी लड़ाई के बस हार मान लें और केवल ‘शांति’ बनाए रखने के लिए इस्लामवादियों द्वारा मारे जाएँ।
7 जुलाई 2022 के दिल्ली संस्करण के पहले पृष्ठ पर टाइम्स ऑफ इंडिया ने कहा है कि वीएचपी द्वारा बजरंग दल को नूपुर शर्मा के समर्थन के कारण मौत की धमकी मिलने वालों की रक्षा करने के लिए कहने का निर्णय ‘तनाव को बढ़ा सकता है’।
टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, इस्लामवादियों द्वारा मौत की धमकी मिलने वालों का समर्थन करने वाला कोई भी हिंदू संगठन ‘तनाव बढ़ा सकता है’। उसके अनुसार, जिहादियों के सामने हिंदू असहाय हो जाएँ, ताकि समुदायों के बीच शांति बनी रह सके।
अगर उसे लगता है कि विहिप और बजरंग दल द्वारा मौत की धमकी देने वालों की रक्षा करने से तनाव बढ़ सकता है तो उसे यह भी कह देना चाहिए कि हिंदुओं को कोई सुरक्षा नहीं मिलनी चाहिए और उन्हें धमकी देने वालों की दया पर छोड़ दिया जाना चाहिए, ताकि ‘तनाव’ न हो।
ये ‘तनाव’ क्या है, जिसके बारे में टाइम्स ऑफ इंडिया बात कर रहा है? सच्चाई यह है कि अगर हिंदू संगठन धमकियों को पाने वालों की रक्षा करना शुरू कर देंगे तो इस्लामवादी हिंसक हो जाएँगे? या इस्लामवादी सड़कों पर और अधिक हिंसा फैला सकते हैं, यदि उन्हें रोका गया तो? TOI के पृष्ठ 16 पर प्रकाशित इस बारे में वास्तविक लेख में ‘तनाव के बढ़ने’ का कोई उल्लेख नहीं है, जबकि पेज 1 पर वह चिंतित इसी को लेकर वह चिंतित दिखाई दे रहा है।
रिपोर्ट की डिजिटल कॉपी में भी ‘बढ़ते तनाव’ का कोई उल्लेख नहीं है। हालाँकि, अपने प्रिंट संस्करण के पहले पृष्ठ पर वे उस सहज पंक्ति का उल्लेख करते हैं, जो बताती है कि वे क्या सोचते हैं।
मलयालम फिल्मों के अभिनेता श्रीजीत रवि (Sreejith Ravi) को केरल की त्रिशुर पुलिस ने गुरुवार (7 जुलाई 2022) को गिरफ्तार किया। उस पर 2 बच्चियों के यौन शोषण का आरोप है। इस संबंध में एक्टर के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत केस दर्ज किया गया है। श्रीजीत रवि पर कुछ साल पहले भी इसी तरह के आरोप लगे थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित बच्चियों की उम्र 9 और 14 साल है। दोनों 4 जुलाई को त्रिशुर के एसएन पार्क में खेल रहीं थी। इसी दौरान एक व्यक्ति कार से वहाँ आया। उसने नग्न होते हुए बच्चियों को अपने गुप्तांग दिखाए। बच्चियों ने इसके बारे में अपने माता-पिता को बताया और उन्होंने पुलिस से शिकायत की। जब पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की जाँच की तो पता पता चला अश्लील हरकत करने वाला शख्स एक्टर श्रीजीत है। इसके बाद अभिनेता को गिरफ्तार कर लिया गया। श्रीजीत का कहना है कि वे मानसिक परेशानी से जूझ रहे हैं।
यह पहली बार नहीं है, जब एक्टर श्रीजीत पर इस तरह के आरोप लगे हैं। इससे पहले साल 2016 में इसी तरह के एक मामले में उसे ओट्टापलम पुलिस ने गिरफ्तार किया था। आरोप था कि एक्टर ने स्कूल जाती लड़कियों की फोटो खींची थी और उन्हें अपना गुप्तांग दिखाया था। उनकी इस हरकत को करीब 15 लड़कियों ने देख लिया था। लड़कियों ने इसकी शिकायत स्कूल प्रिंसिपल से की। प्रिंसिपल की शिकायत बाद श्रीजीत पर मामला दर्ज किया गया था।
यह घटना 27 अगस्त 2016 की थी। उस समय एक्टर ने शुरुआत में इन आरोपों से इनकार किया था। जब उन्हें उनकी गाड़ी के नंबर का हवाला दिया गया तो उन्होंने कहा कि हो सकता है छात्राओं से गाड़ी का नंबर नोट करते वक्त गलती हो गई होगी।
इस घटना के बाद भी श्रीजीत के करियर पर इसर नहीं पड़ा। वे मलयालम फिल्मों में काम करते रहे। उन्होंने कई फिल्मों में विलेन की भूमिका भी निभाई है। गौरतलब है कि श्रीजीत लोकप्रिय अभिनेता टीजी रवि के बेटे हैं।
कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार पर बनी फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ के डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री (Vivek Agnihotri) ने हिंदूफोबिक प्रोपेगेंडा वेबसाइट द क्विंट (The Quint) पर ट्वीट कर गंभीर आरोप लगाए हैं। विवेक अग्निहोत्री ने बुधवार (6 जुलाई 2022) को सिलसिलेवार कई ट्वीट्स किए। इसमें उन्होंने बताया कि कैसे क्विंट ने हाल ही में आयोजित ‘ह्यूमैनिटी टूर’ को लेकर उनके खिलाफ दुष्प्रचार किया। अग्निहोत्री ने अपने ट्वीट में लिखा, “वामपंथी हिंदूफोबिक प्रोपेगेंडा साइट द क्विंट ने मेरे खिलाफ दुष्प्रचार करने की कोशिश की, लेकिन उनका ये दावा उन्हीं पर भारी पड़ गया। यहाँ एक उदाहरण आपके सामने है। हम इन फेक FACT-CHECKERS को नजरअंदाज करते थे, लेकिन सच्ची देशभक्ति इन देशद्रोही Urban Naxals (अर्बन नक्सलियों) को बेनकाब करना और हराना है।”
EXPOSÉ ALERT:
GENOCIDE-DENIER & HINDUPHOBIC propaganda site @TheQuint tried to do a sinister HIT-JOB on me but fell flat on their face. Here is an example.
— Vivek Ranjan Agnihotri (@vivekagnihotri) July 6, 2022
अग्निहोत्री ने अपने ट्वीट में क्विंट के पत्रकार अभिलाष मलिक द्वारा नीदरलैंड (Netherland) के हेग (Hague) में ग्लोबल ह्यूमन राइट्स डिफेंस को भेजे गए एक ईमेल को साझा किया है, जहाँ ह्यूमैनिटी टूर (Humanity Tours) का एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। यह टूर इस साल 28 मई से 26 जून के बीच हुआ था।
GHRD को क्विंट का ईमेल
अपने मेल में मलिक ने खुद को क्विंट का एक फैक्ट-चेकर बताते हुए अग्निहोत्री की सोशल मीडिया पोस्ट का लिंक लगाया, जिसमें ह्यूमैनिटी टूर के आयोजनों के स्थानों का उल्लेख किया गया था। द कश्मीर फाइल्स को ‘इस्लामोफोबिक’ फिल्म बताते हएु मलिक ने कहा, “अग्निहोत्री ने हाल ही में ‘द कश्मीर फाइल्स’ नाम की एक फिल्म बनाई है, जो 1990 के दशक में कश्मीर घाटी से कश्मीरी पंडितों के पलायन के बारे में थी। हालाँकि, फिल्म को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है, कुछ का कहना है कि इसमें तथ्यों को छिपाया गया है और यह इस्लामोफोबिक है। वह ‘ह्यूमैनिटी टूर’ नाम की एक यात्रा पर गए हैं, जहाँ उन्होंने अपनी फिल्म के प्रचार के संबंध में यूके और जर्मनी में कई स्थानों का दौरा किया है। कम से कम दो जगहों ने उन्हें बुलाने से इनकार कर दिया, जबकि दूसरे ने दावा किया है कि उन्हें इस कार्यक्रम के बारे में कोई जानकारी नहीं है।”
I challenge GENOCIDE-DENIER and HINDUPHOBIC @TheQuint to:
1. Point out even one shot, dialogue, event in #TheKashmirFiles which is not a FACT.
2. Prove on what basis they call the film ISLAMOPHOBIC.
— Vivek Ranjan Agnihotri (@vivekagnihotri) July 6, 2022
मलिक ने दावा किया कि दो स्थानों ने उन्हें आमंत्रित करने से इनकार कर दिया था। वहीं एक जगह ने कहा कि उन्हें कार्यक्रम के बारे कोई भी जानकारी नहीं है। विवेक ने मलिक के दावों को झूठ बताया है। उन्होंने GHRD के एक अधिकारी द्वारा मलिक को भेजा गया जवाब भी साझा किया, जिसमें उन्होंने उस जगह के बारे में पूरी जानकारी दी है।
GHRD का जवाब
पत्र में लिखा है, “जीएचआरडी अग्निहोत्री और उनकी फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स‘ की आलोचनाओं से अवगत है। हम इन आलोचनाओं को सिरे से खारिज करते हैं। यह साफ है कि कश्मीरी पंडितों का सामूहिक नरसंहार किया गया और भारतीय संस्थान और मीडिया संस्थान लगातार इसकी उपेक्षा कर रहे हैं।” इसमें यूरोपीय कश्मीरी पंडित समुदाय (ईकेपीसी) द्वारा आयोजित फिल्म की स्क्रीनिंग का विवरण जोड़ा गया है, जिसमें 17 जून, 2022 को हेग में एक पैनल चर्चा शामिल है।
इसमें जीएचआरडी ने कहा, “इस कार्यक्रम की मेजबानी जीएचआरडी के सहयोग से की गई थी और इसमें श्री मार्को रेस्पिंटी (एक प्रसिद्ध इतालवी पत्रकार जो बिटर विंटर मैगजीन के निदेशक प्रभारी हैं) का योगदान भी शामिल है। नीदरलैंड में कुल 5 राजदूत उपस्थित थे। जीएचआरडी कश्मीरी पीड़ितों के साथ खड़ा है, और श्री अग्निहोत्री की फिल्म की आलोचनाओं का विरोध करता है, जिसमें कश्मीरी हिन्दुओं का नरसंहार दिखाया गया है।”
इसके अलावा, विवेक ने 21 जून के एक ट्वीट को भी कोट किया, जिसमें उन्होंने नीदरलैंड के एक कार्यक्रम का वीडियो साझा किया था। इसमें टीम के साथ विवेक और पल्लवी जोशी दोनों को दर्शकों ने खूब सराहा था।
Fake Fact-checkers and propaganda machines like @TheQuint deliberately ignore evidences in order to label, discredit and harm with malafide intentions all those who stand for Human rights of Hindus. Dangerous GENOCIDE-DENIRES.
— Vivek Ranjan Agnihotri (@vivekagnihotri) July 6, 2022
डायरेक्टर ने द क्विंट को चुनौती देते हुए उससे दो सवालों के जवाब माँगे हैं। उन्होंने उसे यह बताने के लिए कहा कि फिल्म का कौन सा सीन है, तथ्य पर आधारित नहीं है। उन्होंने आगे उनसे यह साबित करने के लिए कहा कि उन्होंने किस आधार पर फिल्म को इस्लामोफोबिक कहा। उन्होंने यह भी कहा, “अगर वे ऐसा नहीं कर सकते तो मैं बिना शर्त माफी का पात्र हूँ। या फिर तुम बेनकाब हो चुके हो।”
I challenge GENOCIDE-DENIER and HINDUPHOBIC @TheQuint to:
1. Point out even one shot, dialogue, event in #TheKashmirFiles which is not a FACT.
2. Prove on what basis they call the film ISLAMOPHOBIC.
— Vivek Ranjan Agnihotri (@vivekagnihotri) July 6, 2022
‘द कश्मीर फाइल्स’ को लिबरल गैंग के विरोध का सामना करना पड़ा
प्रधानमंत्री मोदी से लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म की सराहना की है। वहीं दर्शकों ने भी इस फिल्म को भरपूर प्यार दिया है। जबकि कट्टरपंथी-वामपंथी समूह इस फिल्म से खासा नाराज नजर आए हैं। एनडीटीवी ने तो इस फिल्म की रिलीज से पहले ही इसे प्रोपेगेंडा फिल्म बता दिया था और विरोध के बाद उन्हें अपनी रिपोर्ट से प्रोपेगेंडा शब्द हटाना पड़ा था।
‘द कश्मीर फाइल्स’ 1990 में हुए कश्मीरी पंडितों के साथ अत्याचार, उनके दर्द और पलायन के बाद के संघर्ष की कहानी है। 1990 के दशक में घाटी में इस्लामिक आतंकियों ने जेहाद के नाम पर घाटी के पंडितों का कत्लेआम मचा दिया था। औरतों के साथ बलात्कार और हत्या आम बात सी हो गई थी। इस फिल्म को निर्माता विवेक अग्निहोत्री ने अपनी पत्नी पल्लवी जोशी के साथ मिलकर बनाया है। इसमें मुख्य भूमिका अनुपम खेर, मिथुन चक्रवर्ती, पल्लवी जोशी और चिन्मय मंडलेकर ने निभाई है।
तेलंगाना (Telangana) की निजामाबाद पुलिस ने कराटे और मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग की आड़ में देश विरोधी गतिविधियों के आरोप में PFI के 3 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों के नाम शेख शहदुल्लाह, अब्दुल मोबीन और मोहम्मद इमरान हैं। इनमें एक आरोपित ने अब तक 200 मुस्लिमों को ट्रेनिंग दिए जाने की बात कबूली है।
इन लोगों को देश के अलग-अलग हिस्सों में अस्थिरता फैलाने का टास्क मिला था। गिरफ्तारी बुधवार (6 जुलाई 2022) को की गई है। तेलंगाना की निजामाबाद पुलिस इस नेटवर्क के बाकी सदस्यों की तलाश में जुट गई है।
निजामाबाद पुलिस कमिश्नर द्वारा शेयर मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कराटे और मार्शल आर्ट के इस ट्रेनिंग सेंटर में देश की धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ शिक्षा दी जा रही थी। यहाँ शरिया कानून लागू करने के लिए उकसाया जाता था। ट्रेनिंग के लिए गरीब और मध्यम वर्ग के युवाओं को भर्ती किया जा रहा था। इस सभी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि इनके एजेंडे में अन्य धर्म के लोगों पर हमला करना भी शामिल है।
— Nizamabad Police (CP Nizamabad) (@cp_nizamabad) July 7, 2022
पुलिस के मुताबिक, आरोपित इमरान चिकन और अब्दुल मोबिन वेल्डिंग का काम करता है। इन सभी ने बताया कि इन्होंने न सिर्फ तेलंगाना, बल्कि आंध्र प्रदेश के भी कई जिलों के मुस्लिमों को भी प्रशिक्षित किया है। इस प्रशिक्षण में जूडो और मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग की आड़ में घातक हथियारों को भी चलाना सिखाया जाता था।
पुलिस को इन तीनों की जानकारी 2 दिन पहले गिरफ्तार हुए अब्दुल क़ादिर से मिली थी। कादिर ही युवाओं को कराटे और मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देता था। पुलिस कमिश्नर के अनुसार, “गिरफ्तार किए गए लोगों ने मुस्लिम युवाओं को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देने के लिए कादिर को नियुक्त किया था। उन्होंने कादिर से कहा था कि वे उसे 6 लाख रुपए देंगे और उसका घर बनवाने में उसकी मदद करेंगे।”
आरोपितों पर 120-ए, 120-बी, 153-ए, 141 IPC के साथ-साथ UAPA एक्ट की धारा 13(1) के तहत कार्रवाई की गई है। टाइम्स नाउ के मुताबिक, आरोपितों के पास से ट्रेनिंग का सामान, हथियार और भड़काऊ साहित्य बरामद किया गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन सभी का सरगना 52 साल का कादिर है। वह ट्रेनिंग में आने वाले युवाओं को यह कहकर भड़काता था कि हिन्दू तुम्हारे दुश्मन हैं। पुलिस का मानना है कि यहाँ तैयार किए जा रहे लोगों को हिन्दू समाज को निशाना बनाने के लिए उकसाया जा रहा था। गिरफ्तार आरोपित पहले बैन आतंकी संगठन सिमी के सदस्य थे। बाद में ये सभी PFI से जुड़ गए।
महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के हाथों सत्ता गँवाने के बाद उद्धव ठाकरे के सामने शिवसेना पर अधिकार बचाए रखने की चुनौती गहराती जा रही है। विधायक दल के बाद पार्टी के संसदीय दल में भी फूट पड़ने की खबरें हैं। इस बीच ठाणे में पार्टी के 66 पार्षद मुख्यमंत्री शिंदे के साथ चले गए हैं। ठाणे नगर निगम में शिवसेना के 66 पार्षद थे। ठाणे शिंदे के वर्चस्व वाला इलाका भी माना जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ठाणे के 66 पार्षदों ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से उनके आवास पर मुलाकात की। मुंबई मनपा के बाद ठाणे नगर निगम राज्य की दूसरी सबसे बड़ी नगर निगम है। मूल रूप से सातारा के रहने वाले एकनाथ शिंदे ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत ठाणे से ही की थी। वो यहाँ से 4 बार विधायक भी रह चुके हैं।
इस बीच खबर ये भी है कि शिवसेना के 12 सांसद भी शिंदे के साथ जाने की तैयारी कर रहे हैं। बुधवार को ही शिंदे गुट के विधायक गुलाबराव पाटिल ने इसको लेकर दावा किया था। इसके बाद शिवसेना नेता आनंद राव ने इस्तीफा दे दिया था। जिन सांसदों के शिंदे के साथ आने की संभावना है, उनमें रामटेक से रामकृपाल तुमाने, शिंदे के बेटे और कल्याण से सांसद श्रीकांत शिंदे, शिर्डी से सदाशिव लोखंडे, हिंगोली से हेमंत पाटिल, दक्षिण-मध्य मुंबई से राहुल शेवाले, पालघर से राजेंद्र गावित, बुलढाणा से प्रतापराव जाधव, नासिक से हेमंत गोडसे, मावल से श्रीरंग बारणे और ठाणे से राजन विचारे के नाम शामिल हैं।
वहीं संसदीय दल में फूट की खबरों के बीच संजय राउत ने लोकसभा स्पीकर को पार्टी का व्हिप बदलने के लिए पत्र लिखा है। इसमें कहा गया कि रंजन विचारे को पार्टी का नया व्हिप बनाया गया है।
राजस्थान के अजमेर शरीफ दरगाह के सर्किल ऑफिसर (CO) एवं DSP संदीप सारस्वत को उनके पद से हटा दिया गया है। अजमेर के SP ने बताया कि उन्हें लाइन हाजिर किया गया है। यह कार्रवाई एक वीडियो के वायरल होने के बाद की गई, जिसमें सारस्वत नुपूर शर्मा की हत्या के लिए उकसाने वाले दरगाह के खादिम सलमान चिश्ती को बचाव का टिप्स देते नजर आए। हालाँकि, अजमेर पुलिस का कहना है कि वीडियो में आई आवाज किसकी है, यह स्पष्ट नहीं कहा जा सकता।
#WATCH | Rajasthan: In a viral video, Ajmer Sharif Dargah CO Sandeep Saraswat seen asking accused Salman Chishti,”which intoxication did you take while making the video,” adding, “say you were intoxicated to get saved.”
— ANI MP/CG/Rajasthan (@ANI_MP_CG_RJ) July 7, 2022
बता दें कि यह वीडियो चिश्ती के गिरफ्तारी के वक्त का है। वीडियो में पुलिस उसे समझाती नजर आ रही है कि तुम यह कहना कि नशे में थे, ताकि बच जाओ। हालाँकि, वीडियो वायरल होने के बाद संदीप सारस्वत ने इसे रणनीति का हिस्सा बताया था। पूर्व मंत्री एवं बीजेपी नेता वासुदेव देवनानी समेत कई लोगों ने पुलिस की इस कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।
वहीं सलमान चिश्ती का राजस्थान पुलिस की कस्टडी में एक और वीडियो सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में अजमेर दरगाह के खादिम सलमान चिश्ती को मुस्कुराते हुए और थंब का निशान दिखाते हुए पूरे तेवर में देखा जा सकता है, उसके इस अंदाज से ऐसा लगता है कि सलमान चिश्ती को अपनी गलती का बिलकुल अहसास नहीं है। या फिर उसे सजा का कोई डर नहीं है। मीडिया रिपोर्टों में यह वीडियो बुधवार (6 जुलाई, 2022) का बताया जा रहा है, जब उसे जज के आवास पर ले जाया जा रहा था।
बता दें कि भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नुपुर शर्मा के बारे में भड़काऊ वीडियो बनाने और उनकी हत्या के लिए उकसाने के आरोप में अजमेर दरगाह के खादिम सलमान चिश्ती को मंगलवार (5 जुलाई 2022) देर रात अजमेर में गिरफ्तार कर लिया गया। सलमान ने वीडियो में शर्मा का सिर कलम करने वाले को अपना घर इनाम में देने की बात कही थी। गिरफ्तारी के बाद उसे एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया। मजिस्ट्रेट की इस अदालत ने उसे दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
गौरतलब है कि सलमान चिश्ती हिस्ट्रीशीटर है। उसके खिलाफ 13 से अधिक मामले दर्ज हैं, जिसमें हत्या और हत्या का प्रयास जैसे गंभीर अपराध भी शामिल हैं। इसके बावजूद उसके लिए राजस्थान पुलिस की सहानुभूति लोगों की समझ से बाहर है। राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की सरकार है। अजमेर पुलिस बार-बार जोर दे रही है कि वो नशे में था।
6 जुलाई को वायरल हुए वीडियो में अजमेर पुलिस सलमान चिश्ती को उसके घर से गिरफ्तार करती नजर आ रही थी। चिश्ती को उसके घर से बाहर निकालते समय, कोई कहता है, “वीडियो बनाते समय कौन सा नशा कर रखा था?” वीडियो में आगे सलमान चिश्ती को यह कहते हुए सुना जाता है कि वह शराब नहीं पीता है और न ही ड्रग्स लेता है। तभी एक पुलिस अधिकारी उससे कहता है, “कहना कि तुम नशे में थे ताकि तुम्हें बचाया जा सके।” इससे पहले एएसपी विकास सांगवान ने भी यही कहा था कि खादिम भड़काऊ बयान देते समय नशे में था।
केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने बुधवार (6 जुलाई 2022) को कहा कि एक मुस्लिम महिला अपने नाबालिग बच्चे और संपत्ति की संरक्षक नहीं हो सकती है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) इस बात की मिसाल दे चुका है। हालाँकि कुरान या हदीस में मुस्लिम महिला के बच्चे के अभिभावक होने के अधिकार पर कोई रोक नहीं है, लेकिन कोर्ट ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 141 के तहत शीर्ष अदालत द्वारा व्याख्या किए गए कानून का पालन करने के लिए बाध्य है।
रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति पीबी सुरेश कुमार और न्यायमूर्ति सीएस सुधा की खंडपीठ ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को अभिभावक होने से रोकने वाले कानून को संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन माना जा सकता है और इसलिए यह शून्य है, लेकिन उच्च न्यायालय इसमें नहीं जा सकता, क्योंकि यह है शीर्ष अदालत द्वारा निर्धारित मिसाल से बँधा हुआ है।
अदालत ने कहा, “इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस आधुनिक युग में महिलाओं ने ऊँचाइयों को बढ़ाया है और धीरे-धीरे लेकिन लगातार कई पुरुष गढ़ों में प्रवेश किया है। जैसा कि बताया गया है, कई इस्लामी मुल्कों या मुस्लिम बहुल देशों में राज्य की प्रमुख के रूप में महिलाएँ हैं। महिलाएँ भी अंतरिक्ष में अभियानों का हिस्सा रही है। चाहे जो भी हो, यह अदालत माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों से बाध्य है।”
इस बीच अपीलकर्ता ने हदीस का हवाला देते हुए तर्क दिया कि महिला को उसके पति की संपत्ति के संरक्षक के रूप में भी मान्यता दी गई थी। उन्होंने कहा कि कुरान या हदीस में ऐसा कुछ भी नहीं है जो एक महिला को अपने बेटे या उसकी संपत्ति का संरक्षक होने से रोकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के किसी भी फैसले में हदीसों पर कभी विचार नहीं किया गया।
दूसरी ओर, प्रतिवादी ने कहा कि न तो कुरान और न ही हदीस यह कहती है कि एक माँ अभिभावक हो सकती है और वास्तव में कुरान की कई आयतों ने ऐसा कहा है। कोर्ट ने कहा कि हालाँकि, कुरान में विशेष रूप से यह उल्लेख नहीं किया गया है कि एक माँ अभिभावक नहीं हो सकती है, लेकिन यह कोर्ट पर निर्भर नहीं है कि वह इसकी व्याख्या करे, खासकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिए गए विचार के आलोक में।
कोर्ट ने शायरा बानो मामले का जिक्र करते हुए कहा कि शरीयत अधिनियम एकमात्र कानून है जो अधिनियम की धारा 2 में वर्णित मामलों में मुस्लिमों पर लागू होता है, जिसमें संरक्षक की भूमिका भी शामिल है।
याचिका एक विभाजन विलेख (Partition Deed) पर दायर की गई थी, जिसमें एक मुस्लिम माँ ने अपने बेटे की संपत्ति के कानूनी अभिभावक के रूप में काम किया था। केरल उच्च न्यायालय ने पाया कि पक्ष विभाजन अनुबंध से बँधे थे, लेकिन माँ को एक सही अभिभावक मानने से इनकार किया।
केरल में पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली वामपंथी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) सरकार के मंत्री रहे साजी चेरियन की संविधान का अपमान करने के मामले में मुश्किलें बढ़ गई हैं। साजी चेरियन के खिलाफ गुरुवार (7 जुलाई 2022) को केस दर्ज किया गया है। इस बीच अब उन्होंने राज्य कैबिनेट के मंत्री पद से भी इस्तीफा दे दिया है।
इस मामले में एक स्थानीय अदालत के आदेश पर पठानमथिट्टा जिले की कीझवईपुर पुलिस ने राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम की धारा-2 के तहत केस दर्ज किया है। इस बात की पुष्टि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने की है। संविधान के अपमान के मामले में दोषी पाए जाने पर उन्हें अधिकतम तीन साल कारावास या जुर्माना या दोनों की सजा मिल सकती है। खास बात ये है कि जिस दौरान संविधान के अपमान के मामले में चेरियन के खिलाफ ये केस दर्ज किया जा रहा था, उस वक्त वो विधानसभा सत्र में भाग ले रहे थे।
Case registered against Kerala minister Saji Cheriyan, who resigned from the state cabinet yesterday, for his remarks against the Constitution.
Keezhvaipur Police registered a case under section 2 of the Prevention of Insults to National Honour Act, 1971.
गौरतलब है कि एक स्थानीय टीवी चैनल में एक कार्यक्रम के दौरान साजी चेरियन ये कहते देखे गए कि देश का संविधान ‘शोषण को क्षमा करता है’ और देश के लोगों को ‘लूट’ करने में मदद करने के लिए लिखा गया है।
उनका ये बयान वायरल हो गया। इसके बाद एर्नाकुलम के एक वकील ने कथित तौर पर संविधान का अपमान करने के मामले में मंत्री के खिलाफ तिरुवल्ला मजिस्ट्रेट कोर्ट में एक याचिका दायर कर आरोपित के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। इसी के बाद बुधवार को अदालत ने मामले में केस दर्ज करने का आदेश दिया।
हालाँकि, उससे पहले मंगलवार (5 जुलाई, 2022) दोपहर को विधानसभा में एक बयान में चेरियन ने कहा कि पठानमथिट्टा जिले के मल्लपल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में संविधान की आलोचना करने का दावा करने वाली समाचार रिपोर्टों को ‘विकृत’ किया गया था।
उन्होंने कहा था, “मैं एक लोक सेवक हूँ जो संविधान का सम्मान करता है और इसके महान मूल्यों को कायम रखता है। मेरा कभी भी संविधान का अपमान करने या इसके खिलाफ कुछ भी कहने का इरादा नहीं था।”