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महाराष्ट्र के बाद अब बंगाल पुलिस ने नूपुर शर्मा को जारी किया समन, पूछताछ के लिए पेश होने को कहा: TMC के अबू सोहैल ने कराई थी FIR

पैगंबर मुहम्मद और उनकी बीवी आयशा के बारे में कथित टिप्पणी को लेकर कोलकाता पुलिस ने बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma)को सोमवार को समन जारी किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नारकेलडांगा पुलिस स्टेशन (Narkeldanga Police Station) ने यह समन जारी किया है। पूर्व भाजपा नेता को सीआरपीसी की धारा 41 ए के तहत 20 जून को पूछताछ के लिए तलब किया गया है।

पुलिस ने नूपुर शर्मा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 34, 153 ए (धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। उनके ऊपर आईपीसी की धारा 295ए (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य, जिसका उद्देश्य किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना) और 298 (किसी भी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के इरादे से बोले गए शब्द) के तहत भी आरोप लगाए गए हैं।

इससे पहले तृणमूल कॉन्ग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के नेता अबू सौहेल ने उनके खिलाफ पश्चिम बंगाल के पुरबा मेदिनीपुर जिले के कांथी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। अबू सोहैल के मुताबिक, नूपुर शर्मा ने पैगंबर मोहम्मद का अपमान किया है और इसलिए उनके खिलाफ एक्शन होना ही चाहिए। उसने धमकी दी थी कि अगर पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं करती है तो वह सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेगा। मुंबई पुलिस ने भी पूर्व भाजपा प्रवक्ता को समन जारी किया है और उन्हें 25 जून, 2022 को सुबह 11:00 बजे पेश होने के लिए कहा है। इसके अलावा मुंब्रा थाने से भी नूपूर को 22 जून को पेश होने को कहा गया है।

बता दें कि नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) के खिलाफ जब से ऑल्ट न्यूज के को-फाउंडर जुबैर ने कट्टरपंथियों इस्लामवादियों को भड़काया है, तभी से उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियाँ दी जा रही हैं। पाकिस्तान के आतंकी संगठन TLP के समर्थकों ने शर्मा पर 50 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था।

हैदराबाद की स्थानीय पार्टी AIMIM (इंकलाब) ने 29 मई 2022 को नूपुर शर्मा की हत्या करने वाले को 1,00,00,000 रुपए का इनाम देने का ऐलान किया था। इसके नेता कवी अब्बासी का नूपुर शर्मा को धमकी देने और हिन्दू धर्म को लेकर अपमानजनक टिप्पणी करने का वीडियो सामने आया था। इसमें वह शर्मा को ‘सफेदपोश वेश्या’ कहता है।

वहीं, नूपुर शर्मा ने दावा किया है कि पैगंबर मुहम्मद के बारे में उनकी टिप्पणी ‘भगवान शिव का अपमान’ किए जाने की प्रतिक्रिया के रूप में थी, क्योंकि वह इसे बर्दाश्त नहीं कर सकीं। पार्टी से निलंबित किए जाने के बाद उन्होंने इसके लिए माफी भी माँग ली है। इसके बावजूद कट्टरपंथी लोगों द्वारा उन्हें लगातार जान से मारने की धमकी दी जा रही है।

स्वीमिंग पूल में नहाते-नहाते मुस्लिमों के लिए रो पड़ीं चंदा-ए-आज़म राणा अयूब: इंस्टाग्राम और ट्विटर से हुआ खुलासा

कहते हैं आर्कमडीज़ को नहाते-नहाते भौतिकी का एक सिद्धांत दिमाग में आया था और वो बिना कपड़े पहने ही ‘यूरेका-यूरेका’ चिल्ला कर बाथटब से निकल लिए थे। न्यूटन भी अपने बगीचे में चिल्ल मार रहे थे कि सर पे सेब गिरा और उन्हें गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का ज्ञान प्राप्त हुआ। बड़े-बड़े लोग छोटी-छोटी बातों में जीवन का गूढ़ रहस्य ढूँढ़ ही लेते हैं। ऐसा ही कुछ किया है इस्लामी पत्रकारिता की बहुत बड़ी वाहक और चंदाकार सुश्री राणा अयूब ने। 

दरअसरल राणा इन दिनों अपने परिवार के साथ छुट्टियों पर केरल गई हुई हैं। तस्वीरों से लगता है कि वो किसी बड़े रिजॉर्ट में होंगी जहाँ एक बड़ा सा एक ऐसा स्वीमिंग पूल भी है जिसे देख आप और हम शायद इस सोच में डूब जाएँ कि कहीं पानी ठंडा या पूल गहरा तो नहीं है। पर, इसी स्वीमिंग पूल में रविवार की शाम जब राणा अयूब अपनी सेल्फ़ी ले रही थीं तो उनके दिलो-दिमाग़ में बस उन्हीं लोगों की चिंता थी जिनके स्वीमिंग पूल तो छोड़िए योगीजी ने जिनके लिए बाथरूम तक न छोड़ा और पूरा मकान तुड़वा दिए। 

जब हमें राणा अयूब के इस दुख का पता चला तो हमने उनके सोशल मीडिया अकॉउंट खंगालकर उस तस्वीर और वीडियो को निकाला जिसे देख साफ हो गया कि वो स्वीमिंग पूल में नहाते-नहाते भी देश के मुस्लिमों की चिंता में इतना डूबीं थी कि उनके काले चश्मे के बावजूद आँसू रुक न सके और इतना बहे कि स्वीमिंग पूल का पानी, समुद्र के पानी जितना खारा हो गया। हमने जब वह वीडियो देखी तो हमें भी लगा कि आखिर परिवार के साथ छुट्टी मनाते-मनाते भी राणा के कंधों पर कौम की कितनी जिम्मेदारी है कि एक ओर उन्हें स्वीमिंग पूल में खड़े रहकर फोटो भी निकालनी है और दूसरी ओर कौम पर क्या अत्याचार हो रहे हैं इसकी सूचना आगे तक देनी है।

ट्रोल्स उनकी इस जिम्मेदारी को नहीं समझते। वो बस इस बात पर आपत्ति जताने में लगे हैं कि अगर राणा वाकई मुस्लिमों के प्रति चिंतित हैं तो इतनी चिल्ल करने वाली तस्वीरें इंस्टा पर क्यों डाल रही हैं… तो ऐसे ट्रोल्स को राणा पर सवाल उठाने से पहले ये ध्यान देने की जरूरत है कि राणा ने अपनी वीडियो में पाउट बनाया है। पाउट का मतलब होता है होठों को गोल और छोटा बनाना। अब ट्रोल्स क्या इतना भी नहीं समझ सकते कि क्रूर योगी सरकार ने बुलडोजर कार्रवाई कर करके उनका व उनकी कौम के लबों को छोटा कर दिया है, बोलने की स्वतंत्रता कम कर दी है!

जैसे राणा का पाउट योगी जी की फासीवादी नीतियों का एक प्रमाण है वैसे ही उनका काला चश्मा भी कोई स्वैग के लिए नहीं लगाया गया। राणा ने उसे लगाया है ताकि वह उससे अपने आँसू छिपा सकें जो यूपी में बुलडोजर कार्रवाई देख उनकी आँखों से बह रहे हैं।

आप यदि राणा के ट्विटर पर जाएँगे तो आपको लगेगा ही नहीं कि राणा ने अपने काम से ब्रेक लिया है। वह लगातार ट्विटर पर पोस्ट कर करके अपने समुदाय पर होते अत्याचार का दुख व्यतीत कर रही हैं। वहीं इंस्टा पर क्लोज फ्रेंड्स के लिए स्वीमिंग पूल सेल्फी भी भेज रही हैं। सोशल मीडिया पर इतने बैलेंस ढंग से किए जा रहे पोस्ट से आपको आखिर दिक्कत ही क्या है। अगर दोनों ही पोस्ट एक समय शेयर किए जा रहे हैं तो क्या जरूरी है इस बात को पूछना कि एक सोशल मीडिया पर इतना गंभीर पोस्ट और एक पर इतना चिल्ल करता पोस्ट क्यों शेयर किया।

ट्रोलर्स को नहीं पता चलता लेकिन जो लोग उन्हें लगातार फॉलो करते हैं उन्हें मालूम है कि राणा के सिर पर कितना भार है। उन्होंने जब ट्विटर पर दंगाइयों को मुस्लिम कार्यकर्ता बताकर उनके घरों पर होती कार्रवाई का दुख जताया तो वह वैकेशंस पर थीं। कोई करता है क्या वैकेशंस पर भी कौम के लिए काम…?

राणा अयूब के पोस्ट के पीछे असली कहानी

राणा अयूब के अलग-अलग सोशल मीडिया पर अलग-अलग मूड को दिखाते पोस्ट चंद घंटे पहले के हैं। हम समझ सकते हैं कि व्यथित होकर उन्होंने इस ट्वीट को किया होगा। जब हमने उनकी यही व्यथा समझने के लिए उनके इंस्टा अकॉउंट को देखा तो हमें पता चला कि अल्पसंख्यकों पर होते अत्याचारों की बात विदेश तक पहुँचाते पहुँचाते वह इतना थक गईं कि कुछ दिन पहले ही परिवार संग छुट्टियों पर गई थी। लेकिन इसी बीच क्रूर योगी सरकार ने जावेद पंप को पत्थर बता कर उसके घर पर बुलडोजर चलवा दिया। जिस समय यह खबर आई उस समय राणा पूल में बैठकर अल्पसंख्यकों पर होते तरह-तरह के अत्याचार की सूची बना रही थीं ताकि गल्फ देशों से शिकायत कर सकें। देश का तेल पानी बंद कर करवा सकें। मगर ये लिस्ट पूरी होती ही कि फासीवादी योगी सरकार एक्शन में आ गई। जावेद के घर की एक-एक ईंट को गिरता देख राणा के आँसू नहीं थमे और वह दर्द से कराह उठीं।

ट्विटर पर उनका यही दर्द लगातार किए गए ट्वीट में देखने को मिला और इंस्टाग्राम पर उनकी यह पीड़ा वीडियोज में सामने आई। परिवार वाले उनके आँसू देख दुखी न हों इसलिए उन्होंने काला चश्मा लगाए रखा। इसके बाद 360 डिग्री घूमकर अपने दर्शकों को स्वीमिंग का का नजारा दिखाया। वह चाहती थी कि इस वीडियो के साथ वह कोई मजहबी गीत लगाएँ ताकि उनके फॉलोवर्स समझ पाएँ कि छुट्टियों के दौरान भी उनके भीतर से इस्लाम का प्रेम खत्म नहीं हुआ। हालाँकि उन्हें इंस्ट्राग्राम की ट्रेंडिंग रील का कोई गाना लगाना पड़ा ताकि रील ज्यादा रीच पाए।

अब उनके ट्विटर और इंस्टा पर पोस्ट देख कुछ कट्टर हिंदूवादी उनकी मंशा पर सवाल उठा रहे हैं और ये दिखाया जा रहा है कि कैसे सोशल मीडिया के जरिए मुसलमानों को भड़काने वाले परिवार के साथ मौज उड़ा रहे हैं और जो उनकी बातों में आकर दंगा किए, वो पुलिस द्वारा पीटे जा रहे हैं। लेकिन अगर आप राना अयूब का ट्विटर-इंस्टा देखेंगे तो पाएँगे कि भले ही वो परिवार के साथ छुट्टियाँ मनाने गईं हों लेकिन जिस तरह उनके अल्पसंख्यक भाइयों ने सड़कों पर कर्तव्य समझ जगह-जगह दंगा मचाया, वैसे ही वो भी अपने काम में जुटी हैं। अभी देखिए उनकी चेकलिस्ट में पहला काम आफरीम फातिमा का स्टैंड लेना था वो उन्होंने स्वीमिंग पूल में खड़े होकर ट्वीट करके ले लिया है। दूसरा काम भारत को फासीवादी बताने का था वो भी वह कर चुकी हैं।

अब थोड़ा बहुत जो समय मिला है वह उसे परिवार के साथ व्यतीत कर रही हैं, उन्हें खुश रहकर दिखा रही हैं। लेकिन वास्तविकता ये है कि जैसे ही अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की घटना समाज में घटी तो वो दोबारe से स्वीमिंग पूल में आकर खड़ी होंगी और अपनी सेल्फी… ओह सॉरी-सॉरी ‘स्टैंड’ लेंगी।

‘एक मुदस्सिर शहीद हुआ है, 100 पैदा होगा’: दंगाई की अम्मी की PM मोदी को धमकी, कहा – जान के बदले जान, चाहे वो मंदिर का घंटा बजाने वाला ही क्यों हो

झारखंड की राजधानी राँची में 10 जून 2022 (शुक्रवार) को जुमे की नमाज़ को हुई हिंसा में एक और खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक हिंसा के लिए भीड़ जुटाने के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया था। इस ग्रुप का नाम ‘वासेपुर गैंग’ दिया गया था। पुलिस इस ग्रुप के एडमिन की तलाश कर रही है।

वासेपुर झारखंड का ही एक स्थान है जो राँची के बगल के धनबाद जिले में स्थित है। इस स्थान के नाम पर जून 2012 में बॉलीवुड में फिल्म भी बन चुकी है जिसमें इस जगह को अपराधियों का गढ़ बताने की कोशिश की गई थी। एक स्थानीय समाचार के मुताबिक, राँची में हुए प्रदर्शन के दौरान हिंसक भीड़ द्वारा भी गोली चलाने की खबर है। इसकी जाँच के लिए फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुँच कर जाँच कर रही है। इस दौरान एक खंबे में लगी गोली को निकला गया जिसे परीक्षण के लिए टीम अपने साथ ले गई।

मुदस्सिर की अम्मी ने पुलिस को दी ईंट से ईंट बजाने की धमकी

उधर हिंसा के दौरान मारे गए मुदस्सिर की अम्मी ने पुलिस को धमकी दी है। एक इंटरवियु में उन्होंने कहा, “गुंडई अब नहीं चलने वाली। वो वर्दी में गुंडा बनेंगे? क्या सोच कर रखा है कि FIR नहीं लिखेगा? ईंट का ईंट बजा देंगे। उन्हें FIR हर हाल में लिखना होगा वरना हम उन्हें शांति से नहीं रहने देंगे। मेरे बाबू को कैसे मारा? वो सिर्फ इस्लाम जिंदाबाद बोला था। क्या सरकार ने उन्हें (पुलिसवालों) को आदेश दिया था कि जो इस्लाम जिंदाबाद बोले उसे गोली मार देना ? मेरा बेटा अभी 10 वीं का एग्जाम दिया था और कम्प्यूटर भी पढ़ रहा था।”

मुदस्सिर की अम्मी ने आगे कहा, “वहाँ लिटिल-लिटिल बच्चा था। कोई बड़ा नहीं था। उन्हें गोली मरने के लिए क्या मोदी ने कहा था? हम हर चैनल में देखना चाहते हैं ये। वरना मैं आप लोगों को मोदी का दल्ला समझूँगी। आज मेरे दिल में आग लगी है। क्या मेरा बच्चा किसी की मुंडी काट रहा था? मुसलमानों पर फायरिंग क्यों की? क्या सोच रहा है मोदी कि 1 करोड़ फ़ौज खड़ी कर के मुसलमान को दबोच लेगा? वो कभी नहीं कर पाएगा। अभी तो एक बच्चा गया है। मेरे साथ 10 बच्चे सिर कटाने के लिए खड़े हैं। मुझे मुआवजा नहीं बल्कि जान के बदले जान चाहिए। जिसने मेरे बच्चे को मारा है मुझे उसकी जान चाहिए। चाहे वो पुलिस वाला हो या मंदिर में घंटा बजाने वाला। मोदी तूने गलत औरत से पंगा ले लिया।”

इसी वीडियो में मुदस्सिर की अम्मी के साथ बैठी और औरतें बोल रहीं, “इस्लाम जिंदाबाद था और इस्लाम ही जिंदाबाद रहेगा। एक मुदस्सिर शहीद हुआ है तो 100 मुदस्सिर पैदा होगा। वही जिंदाबाद करेगा। जितनी भी अन्य जातियाँ हैं, एक दिन सब खत्म होनी हैं। इस्लाम ही रहेगा। ये सारी दुनिया इस्लाम से ही ज़िंदा है। जब तक इस्लाम है तब तक ही ये दुनिया है।”

अंत में मुदस्सिर की अम्मी ने मीडिया वालों को चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “मेरा एक-एक शब्द सभी TV चैनल में चलना चाहिए। अगर एक भी शब्द छूटा तो मैं तुम मीडिया वालों को पकड़ूँगी। मेरे लोग भी यहाँ रिकार्डिंग कर रहे हैं। बाद में ये मत कहना कि मुझे क्यों पकड़ लिया ?”

‘चोर’ राहुल को पुलिस ने लतियाया… सुरक्षा के लिए राहुल गाँधी के पीछे खुद को भगाया: लुटियंस सोच आखिर कब तक?

राहुल ने चोरी की। पुलिस राहुल को पकड़ के ले गई। थाने में मरम्मत भी की। जज साहब ने राहुल को जेल भेज दिया। यह है आम… बोले तो देशी-ठेठ जिंदगी।

राहुल गाँधी पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगा। पूछताछ के लिए राहुल गाँधी को बुलाया गया। पूरा कॉन्ग्रेस राहुल गाँधी के नाम पर देश भर में सड़क पर उतर गया। यह है बिंदास… बोले तो लुटियंस जिंदगी।

ऊपर के 2 पैराग्राफ को ध्यान से पढ़िए। राहुल और राहुल गाँधी – दो अलग-अलग आदमी हैं। देशी-ठेठ जिंदगी में राहुल को डायरेक्ट चोर कह दिया जाता है, आरोपित कभी नहीं। भले ही परचून की दुकान से गल्ला चुराने का आरोप कानून की नजर में लगा हो। लुटियंस जिंदगी का मजा लूट रहे राहुल गाँधी के साथ ऐसा कुछ करने/कहने की औकात नेता से लेकर शासन-प्रशासन तक की नहीं… आम लोग तो खैर क्या ही कह पाएँगे!

राहुल गाँधी स्पेशल क्यों?

अपने देश का लोकतंत्र “हम भारत के लोग…” से चलता है। यह लिखना आसान है, पढ़ने-सुनने में अच्छा लगता है। जमीनी हकीकत लेकिन 13 जून 2022 को कॉन्ग्रेस के लोग दिखा-समझा देते हैं। कॉन्ग्रेस यह बता देती है कि वो और उनके लोग “हम” जैसे आम नागरिक नहीं हैं… वो समझा देती है कि वो हमारे माई-बाप हैं, हमारे सर्वेसर्वा हैं, हमसे 100-50 फीट ऊपर हैं।

धोखाधड़ी की साजिश रचने, फंड का गबन करने… आदि-इत्यादि का आरोप राहुल गाँधी पर लगा है। ध्यान दीजिए सिर्फ आरोप लगा है, साबित नहीं हुआ है। क्या करना चाहिए ऐसे में? आरोप का सामना कीजिए। जो भी जाँच एजेंसी है, उसके सामने बिना झुके खड़े हो जाइए। जितना पूछा जाए, सब कुछ खोल कर बता दीजिए… लेकिन नहीं! अपने ही बाप-दादा के बनाए कानूनों-संस्थानों के खिलाफ खड़ा होना है इन्हें। “राहुल गाँधी झुकेगा नहीं, सत्य झुकेगा नहीं” वाला फिल्मी डायलॉग मारना है। नेता यंग हो ना हो, एंग्री यंग मैन बने रहना है।

कॉन्ग्रेस यह कैसे कर लेती है? कोई स्पेशल पावर है उसके पास? या कोई दैवीय शक्ति? नहीं। वो कर लेती है क्योंकि उन्हें यह लगता है कि देश का संविधान कॉन्ग्रेस के द्वारा, कॉन्ग्रेस का और कॉन्ग्रेस के लिए बना है। वो कर लेती है क्योंकि हमारे-आपके जैसे राहुलों की बेहतरी सोच कर वो समय और उर्जा खर्च नहीं करती। उनके लिए राहुल गाँधी हिताय, राहुल गाँधी सुखाय ही एकमात्र सूत्रवाक्य है।

भाजपा वाले मोदी Vs कॉन्ग्रेस वाले गाँधी

गोधरा में कट्टरपंथी मुस्लिमों ने कारसेवकों की ट्रेन जला दी थी। प्रतिक्रिया में गुजरात के कई इलाकों में दंगे हुए। इन दंगों का आरोप तब के गुजरात सीएम रहे नरेंद्र मोदी पर भी लगा। क्या किया था उन्होंने? सड़क पर उतरे थे, चक्का-जाम किया था? BJP ने जाँच करने वाली एजेंसी के ऑफिस को घेर लिया था?

जी नहीं। ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था। गुजरात दंगों की जाँच के लिए जिस एसआईटी का गठन हुआ था, वहाँ तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने करीब 9 घंटे बिताए थे। हँसी-ठिठोली नहीं की थी, पूछताछ का सामना किया था। सीएम मोदी ने तब सभी 100 सवालों (यह लगभग आँकड़ा है) के जवाब दिए थे। पूरी पूछताछ के दौरान सहज भी रहे थे। यह सब बातें खुद एसआईटी के हेड रहे आरके राघवन ने लिख छोड़ा है।

पूरे राज्य का मुख्यमंत्री, जिसे जनता चुन कर भेजती है… वो एसआईटी के सामने पेश होता है। सवालों को झेलता है, उनके जवाब देता है। आखिर क्यों? क्योंकि मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को संविधान-कानून पर भरोसा था। क्योंकि मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूछताछ के बाद मीडिया से कहा भी था कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं।

इसके उलट राहुल गाँधी क्या करते हैं? या इंदिरा गाँधी ने क्या किया था? संजय गाँधी को लेकर कॉन्ग्रेसियों ने कितना बवाल काटा था? इन सवालों के 1-2 लाइन में जवाब यह हैं:

  1. ED राहुल गाँधी को पूछताछ के लिए बुलाती है, कॉन्ग्रेसी सड़क जाम कर देते हैं। कोर्ट आदेश कुछ और देती है, इंदिरा गाँधी आपातकाल ही लगा डालती है।
  2. जीप घोटाले का आरोप जब इंदिरा गाँधी पर लगता है तो बवाल इतना कि गिरफ्तारी के बावजूद थाने या जेल में नहीं बल्कि मजबूरन गेस्ट हाउस में रखा जाता है उन्हें।
  3. इंदिरा गाँधी के बेटे संजय गाँधी की तो बात ही निराली है। फिल्म ‘किस्सा कुर्सी का’ उन्होंने प्रिंट ही जला दिया था, कोर्ट ने उन्हें जेल भेज दिया था, लेकिन कॉन्ग्रेसियों ने क्या-क्या और कितना बवाल किया होगा… एक उदाहरण से समझिए। तब कमलनाथ नामक नेता (बाद में यह मंत्री-सीएम भी बने) ने तो जज से ही लड़ाई कर ली थी।

कॉन्ग्रेसी सिस्टम अपने नेता (सिर्फ गाँधी पढ़ा-समझा जाए) के लिए जो करता है, शायद वो उनके लिए एकमात्र या आखिरी रास्ता होगा लेकिन झेलना आम नागरिकों को पड़ता है। पुलिस वाले चोरों-अपराधियों के बजाय नेताओं के पीछे भागते-दौड़ते हैं। आखिर क्यों? आपके दुख का बोझ जनता क्यों उठाए?

नेता या नागरिक: दोष किसका?

SPG सिक्यॉरिटी वाला मामला याद है? (सोनिया-राहुल-प्रियंका) गाँधी सबका SPG कवर हटा लिया गया था। इसके बदले Z+ कवर दिया गया था। तब भी कॉन्ग्रेसियों ने बहुत बवाल किया था। सच्चाई जबकि यह है कि Z+ कवर में भी 55 सुरक्षाकर्मी होते हैं।

एक आदमी के लिए 55 सुरक्षाकर्मी! जी हाँ। क्योंकि उस आदमी की जान को खतरा है। यह और बात है कि यह खतरा सटीक नहीं होता है, बस आकलन किया जाता है। बात अगर आकलन की है तो कश्मीर में हिंदुओं की जान को भी तो खतरा है। सुरक्षा उन्हें क्यों नहीं फिर? या यूँ कह लें कि आम नागरिक की जान का आकलन लगाने वाला गणित पैदा नहीं हुआ है… नेताओं की जान कीमती है, ऐसा नासा-इसरो ने साबित कर दिया है?

दरअसल दोष नेताओं या कॉन्ग्रेसियों का है ही नहीं। वो तो अपने फायदे की ही सोचेंगे। जनता को क्या करना है, यह तो जनता को ही सोचना होगा। नदी की धारा जिस विज्ञान पर चलती है, जनता वैसे ही सोचे, वैसा ही आचरण करे – यहीं से समस्या का समाधान निकल कर आएगा। ऊँचाई से नीचे की ओर बहती है नदी। आम नागरिक को ऊँचे पदों पर बैठे लोगों जैसा ही आचरण करना चाहिए। यह थोड़े समय के लिए देश में अशांति ला सकती है लेकिन इसके दूरगामी परिणाम होंगे और बढ़िया होंगे, इसकी गारंटी है।

चोरी, रेप, हत्या, गबन, अपहरण… अपराध चाहे जो हो, आरोपित को जब भी कोई संस्था (पुलिस वाले भी) पूछताछ के लिए बुलाए या गिरफ्तार करे तो उसके पूरे परिवार, उसके पूरे समाज को सड़क पर उतर जाना चाहिए। समाधान किसी एक के ऐसा करने से आ जाएगा, इस भुलावे में मत रहिएगा। हर गाँव-पंचायत-तहसील-ब्लॉक-जिला-राज्य में हर एक परिवार को यह कदम उठाने के लिए तत्पर रहना होगा। जब कोई आरोप लगे, बिना हिंसा किए फटाक से सड़क जाम। रेल को रोक दीजिए। दफ्तरों में ताला मार दीजिए। शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार सिर्फ कॉन्ग्रेसियों को है, ऐसा संविधान में कहीं नहीं लिखा है।

जान को जरा सा भी खतरा मालूम हो, डीएम-एसपी से सुरक्षा माँगिए। न दे तो उनके ऑफिस को घेर लीजिए। हर वो काम कीजिए, जो-जो काम नेता हर दिन करते हैं, उन्हें अपना अधिकार मानते हैं। उन्हें उनके ही बनाए अधिकारों के शतरंज में मात दीजिए। अगर ऐसा नहीं करते हैं तो कल को ऐसे नेता “चाय क्यों नहीं मिली” मामले पर भी चक्का जाम कर देंगे और आप लोकतंत्र के सिपाही बन कर तमाशा देखते रह जाएँगे। अगर आप ऐसा करते हैं तो देश में जो शासन-प्रशासन में भूचाल आएगा, उससे शायद ये नेता संसद में बैठ कर अपनी भूलों को सुधारने पर चर्चा करेंगे, अधिकारों को बपौती न मान कर कुछ हमारे-आपके बारे में भी सोचेंगे।

महिला उपन्यासकार के साथ ‘स्ट्रॉबेरी वाली फोटो’ डाल छाए शशि थरूर, कॉन्ग्रेसियों का हुड़दंग पड़ा फीका: नेटिजन्स बोले- नेहरू की विरासत को आप ही आगे ले जा रहे

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और केरल के वायनाड के सांसद राहुल गाँधी को सोमवार (13 जून 2022) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने पेश होना पड़ा। उनकी पेशी से पहले से ही कॉन्ग्रेसियों ने सड़क पर हुड़दंग मचाना शुरू कर दिया था। लेकिन ट्विटर पर केरल के तिरुवनंतपुरम से ही कॉन्ग्रेस के सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) एक पोस्ट से लाइमलाइट चुरा ले गए। हालाँकि उनका ये पोस्ट उस नेशनल हेराल्ड केस से जुड़ा नहीं था, जिसमें राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) से एजेंसी ने पूछताछ की है।

दरअसल, कॉन्ग्रेसियों के प्रदर्शन के बिच कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर लंदन में एक महिला उपन्यासकार का जन्मदिन मनाते हुए नजर आए। उन्होंने ट्विटर पर उपन्यासकार गीतांजलि श्री के साथ फोटो भी शेयर की। इसमें वह गीतांजलि श्री के साथ ‘स्ट्रॉबेरी’ खाते हुए दिख रहे हैं। थरूर जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में शिरकत करने के लिए लंदन गए हुए हैं।

यह तस्वीर सामने आने के बाद नेटिजन्स इसकी तुलना कॉन्ग्रेसियों के प्रदर्शन से करने लगे। एक यूजर ने लिखा, “बाकी कॉन्ग्रेस वाले इंदिरा या राजीव की विरासत आगे बढ़ा रहे होंगे, केवल अकेले आप ही नेहरू की विरासत आगे ले जा रहे हैं, रिस्पेक्ट।” वहीं एक ने लिखा है, “आग लगे बस्ती में, थरूर अपनी मस्ती में!”

शिवा नाम के यूजर ने लिखा, “तुम्हारे दोस्त जेल में हैं और तुम यहाँ स्ट्रॉबेरी से मजे कर रहे हो, वाह जनाब।”

एक अन्य ने लिखा, “चिंता और तनाव दूर करने का बस एक ही उपाय है! आँखे बंद करके सुबह-शाम बोलिए, भाड़ में गई कॉन्ग्रेस।”

बता दें कि ट्विटर पर ट्रोल होने के बाद शशि थरूर ने एक और पोस्ट की। उन्होंने भाजपा और दिल्ली पुलिस पर निशाना साधते हुए लिखा, “एक राजनीतिक दल के सांसदों के धरने के लिए पुलिस का बंदोबस्त ऐसा है, जैसे वे दंगाई हों। क्या दिल्ली पुलिस के पास और कोई काम नहीं बचा है या फिर गृहमंत्री को लगता है कि पुलिस वाले नागरिकों के लिए नहीं सिर्फ सांसदों के लिए हैं।”

गौरतलब है कि नेशनल हेराल्ड से जुड़ा यह मामला कॉन्ग्रेस पार्टी के नेतृत्व में ‘यंग इंडियन’ में वित्तीय अनियमितता की जाँच के सिलसिले में दर्ज किया गया था। समाचार पत्र ‘नेशनल हेराल्ड’, यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड का है। ‘नेशनल हेराल्ड’ एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड के स्वामित्व में है। भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और अन्य पर धोखाधड़ी की साजिश रचने और यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड के फंड का गबन करने का आरोप लगाया था। स्वामी ने यह भी आरोप लगाया था कि यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड ने 90.25 करोड़ रुपए की वसूली के अधिकार हासिल करने के लिए सिर्फ 50 लाख रुपए का भुगतान किया था, जो एजेएल पर कॉन्ग्रेस का बकाया था।

प्रयागराज में जावेद के जिस घर पर चला बुलडोजर, उससे मिले हथियार-आपत्तिजनक दस्तावेज: अरब और पाकिस्तान के इस्लामी साहित्य भी बरामद

प्रयागराज में 10 जून 2022 को जुमे की नमाज के बाद हुई हिंसा के मास्टरमाइंड जावेद पंप उर्फ जावेद मोहम्मद के घर से पुलिस ने आपत्तिजनक सामान बरामद किया है। तलाशी के दौरान पुलिस को अवैध हथियार, पोस्टर, झंडे, इस्लामी देशों के साहित्य और ऐसे कागजात मिले हैं, जिसमें अदालतों के ऊपर टिप्पणी की गई है। पुलिस ने ये सभी सामान कब्ज़े में ले लिया है।

जावेद पंप का करेली स्थित घर प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) ने रविवार (12 जून 2022) को बुलडोजर से ढहा दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जावेद के घर से जो साहित्य बरामद हुए उसमें से कई खाड़ी देशों से संबंधित हैं। इसमें कुछ शोध के पेपर भी हैं। कई शोध पत्रों का संबंध पाकिस्तान के प्रोफेसरों से भी है। ‘इज इस्लाम अ वॉयलेंट रिलीजन’ नाम की एक किताब भी मिली है। यह किताब मक्का यूनिवर्सिटी के एक पूर्व प्रोफेसर ने लिखी है। पुलिस के मुताबिक अन्य किताबों और कागजातों की जाँच की जा रही है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक जावेद के घर से पुलिस को 12 बोर और 315 बोर के 2 तमंचे मिले हैं। इसके अलावा कुछ कारतूस भी बरामद किए गए हैं। घर पर बुलडोजर चलने के पहले पुलिस ने पूरे घर की तलाशी ली थी। वहीं इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल को 6 वकीलों ने पत्र लिख कर जावेद पंप के मकान पर बुलडोजर चलाए जाने की कार्रवाई को गलत बताया है। इन वकीलों के नाम केके राय, मोहम्मद सईद सिद्दीकी, प्रबल प्रताप, रवींद्र सिंह, नजमुस साकिब खान और रविंद्र सिंह हैं। वकीलों के मुताबिक जिस घर पर बुलडोजर चला है, वह जावेद के ससुर ने अपनी बेटी को गिफ्ट में दिया था।

दिल्ली स्थित UP भवन पर प्रदर्शन

प्रयागराज में जावेद पंप के खिलाफ हुई प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में दिल्ली स्थित UP भवन पर प्रदर्शन हुआ है। प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियाँ लिए हुए थे और योगी सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे। इस समूह में हिजाब पहनी कुछ मुस्लिम लड़कियाँ सबसे आगे दिखाई दे रही थीं। बताया जा रहा है कि कुछ वामपंथी छात्र छात्र भी इसमें शामिल थे।

₹50 लाख देकर हड़प ली ₹2000 करोड़ की संपत्ति, सोनिया-राहुल के पास 76% शेयर: आसान शब्दों में समझिए ‘नेशनल हेराल्ड’ का ‘खेला’

प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और उनके बेटे व कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को पूछताछ के लिए समन भेजा। जहाँ सोनिया गाँधी फ़िलहाल अस्पताल में भर्ती हैं, देश में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के शक्ति प्रदर्शन के साथ राहुल गाँधी ED के दफ्तर में पेश हुए। आइए, हम आपको समझाते हैं कि ये नेशनल हेराल्ड मामला है क्या और गाँधी परिवार व कॉन्ग्रेस पार्टी पर कौन सी वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप हैं।

सबसे पहले इस मामले में जिन टर्म्स का बार-बार इस्तेमाल हो रहा है, उसे समझ लेते हैं। जैसे, AJL के बारे में आप सुन रहे होंगे। AJL का अर्थ है – एसोसिएट जर्नल लिमिटेड। ये वही प्रकाशन कंपनी थी, जो ‘नेशनल हेराल्ड’ नामक अख़बार निकालती थी। इस अख़बार की स्थापना खुद स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने की थी, जो कई दफे कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष भी रहे। AJL में न सिर्फ जवाहरलाल नेहरू, बल्कि 5000 स्वतंत्रता सेनानियों को शेयरधारक बनाया गया था।

राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली स्थित ITO में इसका पंजीकृत मुख्यालय हुआ करता था। अब दूसरा टर्म जो आप सुन रहे होंगे, वो है – YIL, यानी यंग इंडिया लिमिटेड। ये वो कंपनी है, जिसकी स्थापना 2010 में की गई थी। सोनिया गाँधी और उनके बेटे राहुल गाँधी इसके 76% शेयरों का स्वामित्व रखते हैं, अर्थात मेजोरिटी शेयर्स उनके पास हैं। बाक़ी के 24% शेयर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा और पूर्व केंद्रीय मंत्री ऑस्कर फर्नांडिस के पास थे।

ये दोनों ही कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता हुआ करते थे, जिनका अब निधन हो चुका है। मोतीलाल वोरा AJL के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हुआ करते थे। वो AICC (ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमिटी) के कोषाध्यक्ष भी रहे हैं। साथ ही ‘यंग इंडियन’ में भी उनके पास 12 शेयर्स थे। इसी तरह ऑस्कर फर्नांडिस भी AJL और YIL के डायरेक्टर रहे थे। अब बात करते हैं कॉन्ग्रेस पार्टी की। ये सब शुरू हुआ ‘नेशनल हेराल्ड’ अख़बार के घाटे में जाने से।

कई वर्षों से सर्कुलेशन कम होने और घाटे में जाने के कारण 2008 में ‘नेशनल हेराल्ड’ अख़बार को बंद कर दिया गया। इसने अपने ऑपरेशन्स बंद कर दिए। लेकिन, दिल्ली, लखनऊ और मुंबई जैसे महानगरों में इसके पाद अकूत संपत्ति थी। अख़बार के पास 2000 करोड़ रुपए की संपत्ति होने का अंदाज़ा लगाया गया। राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी की बड़ी-बड़ी बातें करते हुए इसी की आड़ में कॉन्ग्रेस ने ‘नेशनल हेराल्ड’ को पुनर्जीवित करने की ठानी।

असली खेल यहीं से शुरू हुआ, जब कॉन्ग्रेस ने अपने पार्टी फंड से अख़बार को 90 करोड़ रुपए का लोन दिया। 2010 में कॉन्ग्रेस ने अपनी नई कंपनी YIL को AJL वाला ऋण असाइन कर दिया। अब AJL ऋण को वापस नहीं कर पाया। फिर उसकी सारी संपत्तियों को YIL को ट्रांसफर कर दिया गया। इस तरह 50 लाख रुपए के बदले AJL की सारी संपत्तियों का मालिकाना हक़ गाँधी परिवार के स्वामित्व वाली YIL के पास चली गई।

ये एक विवादित डील साबित हुआ। 2013 में भाजपा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने शिकायत दर्ज कराते हुए पूछा कि 1000 शेयरधारकों वाली 2000 करोड़ रुपए की संपत्ति किसी कंपनी से मात्र 50 लाख रुपए का लोन देकर कैसे हड़पी जा सकती है? कुल लोन 90.25 करोड़ रुपए का था, जिसके माध्यम से स्वामी ने गाँधी परिवार पर धोखाधड़ी के करने के आरोप लगाए। कॉन्ग्रेस के इन 4 बड़े नेताओं के अलावा पार्टी की ओवरसीज शाखा के अध्यक्ष सैम पित्रोदा और ‘राजीव गाँधी फाउंडेशन’ के पत्रकार सुमन दुबे भी इस मामले में आरोपित हैं।

2015 में वयोवृद्ध अधिवक्ता शांति भूषण ने दावा किया कि उनके पिता विश्वामित्र भी AJL में शेयरहोल्डर थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि शेयरहोल्डर्स की सहमति लिए बिना ही इसकी संपत्तियों को ‘यंग इंडियन’ को ट्रंसफर कर दिया गया। 2014 में मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट गोमती मनोचा ने गाँधी परिवार समेत सभी आरोपितों को समन किया। मजिस्ट्रेट ने कहा कि IPC की धारा-403 (संपत्तियों को लेकर बेईमानी), 406 (विश्वास को आपराधिक रूप से धोखा) , 420 (ठगी) और 120B (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत केस दर्ज करने का मामला बनता है।

2014 में ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जाँच शुरू की। 2015 में गाँधी परिवार के माँ-बेटे पटियाला हाउस कोर्ट से जमानत पाने में सफल रहे। फरवरी 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपितों पर मामला रद्द करने से इनकार कर दिया। ED फ़िलहाल लेनदेन के विवरण, स्वामित्व का पैटर्न और AJL के प्रमोटर्स के रोल की भी जाँच कर रहा है। PMLA के तहत नया केस दर्ज होने के बाद आयकर विभाग (IT) भी मामले को देख रहा है।

‘नेशनल हेराल्ड’ की स्थापना 1937 में हुई थी। AJL तब उर्दू में ‘कौमी आवाज़’ और हिंदी में ‘नवजीवन’ नामक अख़बार निकालता था। नेहरू के लेख इसमें अक्सर आया करते थे। अंग्रेज सरकार ने इसे 1942 में बैन कर दिया था। नेहरू स्वतंत्रता के बाद इसके बोर्ड के अध्यक्ष पद से तो हट गए, लेकिन अख़बार कॉन्ग्रेस से ही चलता रहा। 1963 में इसके सिल्वर जुबली कार्यक्रम में नेहरू ने सन्देश जारी किया। 2016 में इसे फिर से डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में लॉन्च किया गया।

दरअसल, यंग इंडियन को सेक्शन 25 के तहत एक चैरिटेबल संस्था बनाई गई थी, जिसे टैक्स से छूट दी गई थी। गाँधी परिवार की कंपनी ने आयकर विभाग में इस छूट के लिए मार्च 2011 को आवेदन दिया था, जब केंद्र में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस की सरकार थी और 9 मई 2011 को बिना किसी दिक्कत के इसे मंजूरी भी दे दी गई। एक गैर-लाभकारी संस्था के रूप में पंजीकृत होने के बावजूद यंग इंडियन ने पब्लिशिंग हाउस होने की आड़ में संपत्तियों का अधिग्रहण करना शुरू कर दिया था। इसे वर्ष 2010-11 में भी टैक्स में छूट प्राप्त हुआ।

उम्र 30 साल, वजन 200 किलो: 80 रोटी, 3kg चावल, 2kg मटन… रोज खाता है रफीक, खाना बनाने के लिए किए 2 निकाह

बिहार के कटिहार का मोहम्मद रफीक अदनान अपने वजन को लेकर सुर्खियों में है। 30 वर्षीय अदनान 20 से 30 कदम भी पैदल नहीं चल सकता। एक दिन में 3 बार खाना खाने वाले रफीक की डाइट सुनकर आप चौंक जाएँगे। आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, रफीक दिन भर में 4 किलो आटे से बनी लगभग 80 रोटी और 2-3 किलो चावल खा लेता है।

दै​निक भास्कर की रिपोर्ट में रफीक का वजन 200 किलो बताया गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार रफीक के खुराक के अनुसार एक बीवी खाना नहीं बना पाती थी, इसलिए उसने दूसरी निकाह की। रफीक ने बताया, “मैं दिन में 3 बार खाना खाता हूँ। मुझे इतनी भूख लगती है कि पूरे परिवार से 10 गुना खाना मैं अकेले खा सकता हूँ। 1 बोरा चावल (50 किलो) हमारे परिवार में मुश्किल से सात दिन भी नहीं चलता। मैं रोजाना लगभग 2-3 किलो चावल अकेले ही खाता हूँ। इसके साथ 2 लीटर दूध, 1-2 किलो मटन या चिकन भी खाता खाता हूँ। इसके अलावा करीब 3-4 किलो आटे की रोटी खाता हूँ।”

रफीक 6 बहनों और 4 भाइयों में सबसे छोटा है। उसके पिता गोदाम में काम करते थे और माँ घर पर ही रहती थीं। पाँचवी कक्षा तक पढ़े रफीक ने बताया, “मुझे याद है जब मैं 15 साल का था, तब भी मेरा वजन 80 किलो था, लेकिन उस समय इतना अधिक वजन ना होने के कारण मैं खेलता रहता था। फिर धीरे-धीरे मेरी भूख बढ़ती गई और मेरा वजन भी बढ़ता गया। मुझे जो भी मिलता मैं वो सब खा लिया करता था।”

उसने बताया, “मैं जैसे ही पैदल चलने की कोशिश करता हूँ, थक जाता हूँ और फिर मुझे बैठना पड़ता है। थकान के कारण अगर मुझे कभी जाना भी होता है तो मैं बाइक से जाता हूँ। लेकिन कई बार वह भी मेरा वजन नहीं उठा पाती। मैं दिन भर गाँव के लोगों से बात करता रहता हूँ और घर के बाहर ही एक पलंग पर लेटा रहता हूँ।” एक पड़ोसी के अनुसार वजन के कारण रफीक की बाइक भी कभी-कभी धंस जाती है। लोग उसे शादी-विवाह में बुलाने से भी बचते हैं।

बता दें कि डॉक्टर ने उसको हमेशा भूख लगने का कारण बुलिमिया नर्वोसा (Bulimia nervosa) नाम का ईटिंग डिसऑर्डर बताया है। ईटिंग डिसऑर्डर दो तरह के होते हैं। पहला एनोरेक्सिया नर्वोसा (Anorexia nervosa) और दूसरा बुलिमिया नर्वोसा (Bulimia nervosa)। एनोरेक्सिया नर्वोसा में मरीज अपने आपको पतला रखना चाहता है और इसके लिए वो बहुत ज्यादा सोच-विचार कर खाता है। वहीं बुलिमिया नर्वोसा में मरीज का ध्यान हर वक्त खाने पर ही लगा रहता है। लेकिन खाने के बाद उसे अपने बढ़े हुए वजन को लेकर शर्म भी महसूस होती है।

इलाहाबाद HC ने मोहम्मद जुबैर पर दर्ज FIR रद्द करने से किया इनकार, उसकी याचिका को बताया अयोग्य: हिन्दू संतों पर उगला था ज़हर

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर पर उत्तर प्रदेश में दर्ज FIR को रद्द करने से इनकार कर दिया है। किया था घृणा फैलाने वाला ट्वीट। मोहम्मद जुबैर ने अपने ट्वीट में महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती, बजरंग मुनि और आनंद स्वरूप जैसे धार्मिक नेताओं पर घृणास्पद टिप्पणी की थी। उसके खिलाफ IPC की धारा-295A (धार्मिक भावनाओं का अपमान) के अलावा IT एक्ट की धारा-67 के तहत केस दर्ज किया गया था।

मोहम्मद जुबैर ने इस मामले में राहत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मोहम्मद जुबैर ने इन तीनों को ‘घृणा फैलाने वाला (Hate Mongers)’ कहा था, जिसके बाद खैराबाद स्थित ‘बड़ी संगत’ के मुखिया और ‘राष्ट्रीय हिन्दू शेर सेना’ के संरथापक बजरंग मुनि के शिष्यगणों ने विरोध प्रदर्शन किया था। जबकि उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से पेश अधिवक्ता ने कहा कि मोहम्मद जुबैर आदतन ऐसी करतूतें करता रहा है और उस पर पहले भी मामले दर्ज हुए हैं।

उसके खिलाफ एक बच्ची की ऑनलाइन प्रताड़ना के सम्बन्ध में दर्ज केस की भी चर्चा की गई। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि मामला अभी शुरुआती चरण में ही है और आगे जाँच होनी बाकी है। साथ ही उच्च न्यायालय ने कहा कि इस मामले में सबूत जुटा कर पेश किए जाने के बाद ही कुछ निष्कर्ष निकाला जा सकेगा। कोर्ट ने कहा कि अगर ये आरोप झूठे हैं और जानबूझ कर बदनाम करने के लिए लगाए गए हैं, तो जाँच में ये सब सामने आ जाएगा।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोहम्मद जुबैर पर दर्ज FIR रद्द करने से किया इनकार

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि FIR रद्द करने का अधिकार दुर्लभ में भी दुर्लभतम मामलों में ही है। साथ ही कहा कि याचिकाकर्ता ने जो बातें कही हैं, वो ट्रायल कोर्ट में सुनवाई और उचित जाँच के बाद ही स्पष्ट हो सकती हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में जो शुरुआती आरोप लगे हैं, वो जाँच की अनुमति के लिए पर्याप्त हैं। इसीलिए, याचिका को अयोग्य पाते हुए रद्द कर दिया गया।

याद दिला दें कि

मोहम्मद जुबैर ने 27 मई 2022 को किए गए अपने ट्वीट में टाइम्स ऑफ इंडिया के विनीत जैन को टैग करते हुए लिखा था, “बहुत बढ़िया! हमें यति नरसिंहानंद सरस्वती या बजरंग मुनि या आनंद स्वरूप जैसे हेट मोंगर को किसी समुदाय या मजहब के खिलाफ बोलने के लिए धर्म संसद आयोजित करने की क्या जरूरत है, जब उससे बढ़िया काम करने के लिए स्टूडियो में एंकर मौजूद हैं।” महंतों को हेट मोंगर कहने पर राष्ट्रीय हिंदू शेर सेना के सीतापुर जिलाध्यक्ष भगवान शरण ने खैराबाद में FIR दर्ज कराई थी।

बरखा दत्त की ‘Shero’ का हिजाब खींचकर केरल पुलिस ने गाड़ी में बैठाया, प्रयागराज में ‘बुलडोजर’ का एक्शन देख करवा रही थी हाईवे ब्लॉक

साल 2019 में सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान Shero बनकर उभरी आयशा रेन्ना एक बार फिर से केरल में प्रदर्शन के कारण चर्चा में आई है। दरअसल, आयशा केरल के मल्लापुरम में भीड़ जुटाकर उस जावेद के घर पर हुई ‘बुलडोजर कार्रवाई’ का विरोध कर रही थी, जो प्रयागराज हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता कहा जा रहा है। आयशा पर आरोप है कि उसने मल्लापुरम में हाईवे को ब्लॉक करने के लिए भीड़ का नेतृत्व किया, जिसके बाद केरल पुलिस उस प्रदर्शन में पहुँची और खींचते हुए आयशा को वहाँ से बाहर ले गई।

सामने आई तस्वीर में आयशा नारे लगाने वाली मुद्रा में हैं और केरल की महिला पुलिसकर्मी उनका हिजाब पकड़कर उन्हें खींचते हुए ले जा रही हैं। अगली वीडियो में कुछ अन्य महिला पुलिसकर्मी आयशा को उठाकर गाड़ी में बिठा रही हैं वही आयशा गाड़ी में बैठने से मना कर रही है। ताजा जानकारी के मुताबिक पुलिस ने आयशा को हिरासत में ले लिया है। कुछ लोग आयशा के साथ हुए ऐसे बर्ताव के लिए केरल पुलिस की आलोचना कर रहे हैं। लेकिन कुछ लोग केरल पुलिस को सही भी ठहरा रहे हैं।

बता दें कि आयशा रेन्ना केरल के मल्लापुरम के कोनडोट्टी की रहने वाली है। साल 2019 में जब सीएए एनआरसी के खिलाफ प्रोटेस्ट हुए तो आयशा की तस्वीर मीडिया में वायरल हुई थी। वह अपने साथियों को बचाने के लिए पुलिस के आगे खड़ी दिखी थी। इसके बाद प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते उसकी फोटोज आई, जिन्हें देख बरखा दत्त ने उन्हें अपने ट्वीट में अपनी जामिया और शाहीन बाग की शीरो बताया। 2019 से पहले की बात करें तो आयशा 2015 में भी नागपुर में मुंबई ब्लास्ट के दोषी याकूब मेमन को सजा मिलने पर दुख जता चुकी हैं। हाल में उन्होंने यूपी के दंगों के साजिशकर्ता जावेद पंप और उनकी बेटी आफरीन फातिमा को समर्थन दिया है। आफरीन को लेकर भी पुलिस ने कहा है कि वो भी ऐसी ही गतिविधियों में शामिल हैं।