Home Blog Page 2710

‘मुर्तद के लिए सज़ा-ए-मौत’: इस्लाम छोड़ने वालों का होता है टॉर्चर, कुरान-हदीस में भी है ‘सज़ा’, जानिए क्या कहना है मुस्लिम स्कॉलर्स का

इस्लाम छोड़ने वाले केरल (Kerala) के अस्कर अली (Askar Ali) एक बार फिर चर्चा में हैं। हाल ही में उन्होंने अपने रिश्तेदारों पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने से कुछ घंटे पहले ही उनका अपहरण करने का आरोप लगाया था। उन्हें इस्लाम छोड़ने के बाद से कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। यहाँ तक कि परिवार वालों और रिश्तेदारों ने भी उनका साथ नहीं दिया। वे कहते हैं, “मैंने इस्लाम का विस्तार से अध्ययन करने के बाद इस मजहब को छोड़ दिया। जब मैं (हुदावी) कोर्स कर रहा था उस दौरान मेरे पास इस्लाम से संबंधित सामग्री के अलावा अन्य सामग्रियों को पढ़ने का अवसर काफी कम था। लॉकडाउन के दौरान मुझे अन्य विषयों को पढ़ने को मिला, जिससे मेरी आँखें खुल गईं।”

अस्कर ने इस बात इस बात को प्रमुखता से उठाया कि मुस्लिम समुदाय के जो लोग अपना मजहब छोड़ते हैं, उन्हें उनके परिवार के सदस्य ‘नीच प्राणी’ के रूप में देखते हैं। अली को इस्लाम का त्याग करने के बाद उन्मादी मुस्लिम भीड़ के हमलों का सामना भी करना पड़ा था, जैसे उन्होंने इस्लाम छोड़कर बहुत बड़ा पाप कर दिया हो।

इस्लाम छोड़ने वाले अस्कर अली (फोटो साभार:द न्यूज मिनट)

हालाँकि, अस्कर अली एकमात्र पूर्व मुस्लिम नहीं हैं, जिन्हें उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा है। हाल ही में साहिल नाम के एक और मजहब त्यागने वाले को इस्लामिक मौलवी ने लाइव टीवी पर धमकाया था। मौलाना ने बार-बार उस व्यक्ति को मुर्तद (मजहब छोड़ने वाला) (Murtad) कहकर संबोधित किया और उसे फटकारा। मौलवी ने कहा “एक मुर्तद (धर्म त्यागी) को इस्लाम के बारे में बोलने का कोई अधिकार नहीं है। चुप रहो, तुम एक शब्द भी नहीं बोल सकते।” इसके बाद मौलवी ने शो में मजहब त्यागने वालों को बुलाने पर न्यूज एंकर के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया।

मौलाना ने अपनी धमकियों के साथ जारी रखा और चिल्लाते हुए कहा, “यह इस्लाम के खिलाफ एक साजिश है। भारत के मुस्लिम आपको, आपकी जगह दिखाएँगे।”

एक मजहब त्यागने वाले को लाइव टीवी पर धमकाने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बार इस तरह की असहिष्णुता वाली घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। इस्लाम को त्यागने वाले व्यक्तियों को अक्सर उनके समुदाय के लोगों द्वारा जान से मारने की धमकी दी जाती है।

कुरान और हदीसों के माध्यम से धर्म त्यागना

क्या मजहब त्यागने वालों के प्रति इस तरह का व्यवहार मजहबी फरमानों से प्रभावित है? इसके लिए कुरान और हदीसों को करीब से जानने की जरूरत है। अध्याय 9 (अत-तौबा) कुरान की आयत 66 कहती है, “कोई बहाना मत बनाओ! आपने अपना विश्वास खो दिया है। यदि हम आप के एक समूह (पश्चाताप करने वालों) को क्षमा कर दें, तो हम दूसरों को उनकी दुष्टता के लिए कैसे दंडित करेंगे।”

अध्याय 16 (अन-नहल) कुरान की आयत 106 कहती है, “जो कोई अपने ईमान के बाद अल्लाह पर कुफ़्र करता है, उन लोगों को नहीं जो मजबूर हैं, बल्कि वे जो पूरे दिल से कुफ़्र को गले लगाते हैं। उन्हें अल्लाह द्वारा दोषी ठहराया जाएगा और उन्हें एक बहुत बड़ी सजा मिलेगी।”

अध्याय 88 (अन-ग़शियाह) कुरान की आयत 22-24 कहता है: “आप उन्हें विश्वास करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते हैं। लेकिन जो कोई अल्लाह पर विश्वास करने से इनकार करेगा, अल्लाह उन्हें बड़ी सजा देगा।”

सहीह अल-बुखारी (6 प्रमुख हदीस संग्रहों में से एक) खंड 9, पुस्तक 84, हदीस 57 में कहता है:

इकरीमा: कुछ ज़ानादिक़ा (नास्तिकों) को जब अली के पास लाया गया तो उन्होंने उन्हें जला दिया। इस घटना की खबर, इब्न अब्बास तक पहुँची। इस पर उन्होंने कहा, “अगर मैं उनकी जगह होता, तो मैं उन्हें नहीं जलाता, जैसा कि अल्लाह के रसूल ने यह कहते हुए मना किया था, “किसी को भी अल्लाह की सजा (आग) से दंडित न करें।’ मैं उन्हें अल्लाह के रसूल के अनुसार, ‘जिसने अपना इस्लामी धर्म बदल दिया, उसे मार डालता।”

यह खंड 9, पुस्तक 84, हदीस 58 में आगे कहता है- एक व्यक्ति ने इस्लाम अपना लिया और फिर वापस यहूदी धर्म में लौट आया। मुआद बिन जबल आया और उसने अबू मूसा के साथ उस आदमी को देखा। मुआद ने पूछा, “इस (आदमी) में क्या गलत है?” अबू मूसा ने उत्तर दिया, “उसने इस्लाम अपनाया और फिर यहूदी धर्म में वापस चला गया।” मुआद ने कहा, “मैं तब तक नहीं बैठूँगा, जब तक आप उसे अल्लाह और उसके रसूल के फैसले के अनुसार मार नहीं देते।”

‘मजहब का त्याग’ करने को लेकर इस्लामी विद्वानों की राय

पाकिस्तानी इस्लामिक स्कॉलर डॉ इसरार अहमद (1932-2010) के अनुसार, इस्लाम त्यागने की सजा मौत है। कोई भी मुस्लिम जो अपने ईमान को छोड़कर जमात से बाहर जाता है। यानी मुर्तद बन जाता है, उसे मौत की सजा दी जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव में आकर जो भी अपने धर्म को बदलने के लिए इच्छुक हैं। उनको लेकर इस्लामी विद्वानों का तर्क है कि धर्मत्यागियों को तभी मारा जाना चाहिए, जब वे इस्लामिक स्टेट को उखाड़ फेंकने की साजिश रचें।

असिम अल हकीम नाम के एक अन्य इस्लामी विद्वान ने टिप्पणी की, “क्या दूसरों को मारना उचित है? यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कहाँ से आ रहे हैं। यदि आप मुस्लिम हैं, तो उसके लिए एक निर्धारित सजा है।” उन्होंने आगे बताया कि इस्लाम को स्वीकार करने के बाद छोड़ना बहुत बड़ा पाप है।

हदीसों और इस्लामी विद्वानों की बातों के साथ-साथ कुरान की आयतों की बारीकी से जाँच करने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि मुस्लिम के रूप में पैदा हुए लोगों के लिए इस्लाम छोड़ना आसान विकल्प नहीं है। ‘धर्मत्याग के लिए मौत’ की सजा के अलावा और भी कई तरह की प्रताड़ना दी जाती है। यह केवल भारत तक ही सीमित नहीं है।

ह्यूमनिस्ट यूके के अनुसार, दुनिया में 13 देश ऐसे हैं जो ईशनिंदा या मजहब छोड़ने के लिए मौत की सजा देते हैं। इन देशों में अफगानिस्तान, ब्रुनेई, ईरान, कतर, सऊदी अरब, सोमालिया, संयुक्त अरब अमीरात, मलेशिया, मालदीव, मॉरिटानिया, नाइजीरिया, पाकिस्तान और यमन शामिल हैं।

इस्लाम में मजहब छोड़ने की सजा मौत

इस्लाम में मजहब छोड़ने पर मौत की सजा है। साल 2014 में आठ मुस्लिम बहुल देशों में एक मुस्लिम द्वारा इस्लाम के त्याग करने की सजा मृत्युदंड थी। जानकारी के मुताबिक, तेरह देशों में इस्लाम छोड़ने पर कई तरह की सजा दी जाती थी। इसके तहत उन्हें जेल में डाल दिया जाता है या जुर्माना लगाया जाता है। इतना ही नहीं, इसके तहत उनके बच्चे की कस्टडी भी छीन ली जाती है। कुछ दशक पहले, अधिकांश शिया और सुन्नी कानूनविदों का मानना ​​था कि इस्लाम छोड़ना अपराध के साथ-साथ पाप भी है।

जितेंद्र त्यागी बनने के बाद बेघर हुए वसीम रिजवी, वक्फ बोर्ड ने घर में लगा दिया ताला: हनुमान सेतु की पार्किंग में रात गुजारने को हुए मजबूर

यूपी शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण त्यागी ने अपने मकान पर जबरन कब्जे का आरोप लगाया है। सआदतगंज यतीमखाने के पास स्थित वक्फ बोर्ड के किराए के मकान में तालाबंदी देख जितेंद्र नारायण त्यागी ने रविवार (29 मई, 2022) को देर शाम हनुमान सेतु मंदिर की पार्किंग में डेरा डाल दिया। उन्होंने घोषणा की है कि जबतक यतीमखाने के पास बने मकान की चाबी उन्हें नहीं मिल जाती वह पार्किंग में ही रातें गुजारेंगे। उन्होंने अप्पने समर्थकों के साथ वहीं पार्किंग में बिस्तर लगाया और लेट गए।

वहीं यह जानकारी मिलते ही उनके समर्थन में अखिल भारतीय हिंदू महासभा और अंतरराष्ट्रीय हिंदू महासभा के पदाधिकारी भी पहुँच गए थे। इसके बाद रात करीब 7:30 बजे कमिश्नर डीके ठाकुर से मुलाकात कर मकान के एग्रीमेंट से जुड़े दस्तावेज सौंपते हुए जितेंद्र त्यागी ने ऐलान किया कि जब तक मकान की चाबी नहीं मिलती, तब तक वह मंदिर के पीछे पार्किंग में ही रहेंगे।

हालाँकि बाद में पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर और अन्य अधिकारियों के आश्वासन पर रविवार देर रात जितेंद्र नारायण त्यागी पार्किंग से हटे। इसके बाद वह नक्खास में रहने वाली अपनी बेटी के घर पहुँचे जहाँ उन्होंने रात गुजारी। वहीं जितेंद्र नारायण त्यागी से कल शाम एडीसीपी पश्चिम चिरंजीव नाथ सिन्हा सहित पुलिस अधिकारीयों ने मुलाकात की।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एडीसीपी चिंरजीव नाथ सिन्हा ने बताया कि जितेंद्र नारायण त्यागी से सआदतगंज के पास यतीमखाना के पास स्थित आवास के संबंध दस्तावेज माँगे गए हैं। वह एग्रीमेंट से संबंधित जो भी दस्तावेज प्रस्तुत करेंगे उसके आधार पर शिया वक्फ बोर्ड से पूछताछ की जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएँगे उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

एडीसीपी के मुताबिक दस्तावेजों के आधार पर यतीमखाना के पास स्थित आवास जितेंद्र नारायण की पत्नी के बाबा इब्ने हसन के नाम से आवंटित है न कि उनके नाम से। जितेंद्र त्यागी बने वसीम रिज़वी उस मकान में वर्ष 2016 से रह रहे थे। जब वह शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष थे। शिया वक्फ बोर्ड के हस्तक्षेप के बाद ही उसमें ताला बंद किया गया था।

वहीं, इस मामले में जितेंद्र नारायण त्यागी का कहना है, “मकान के निर्माण में मैंने करीब 25-30 लाख रुपए खर्च किए थे। एग्रीमेंट में यह तय हुआ था कि यतीमखाने को जब भी इस मकान की आवश्यकता होगी तो मुझे तीन माह पहले नोटिस दी जाएगी। इसके साथ ही मकान के निर्माण कार्य में उनका जो भी रुपया लगा होगा वह वापस कर दिया जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

जितेंद्र त्यागी ने कहा कि बोर्ड के इशारे पर हुसैनी टाइगर्स के अध्यक्ष शमील शम्सी ने अपने साथियों और पुलिस के साथ मिलकर घरवालों को बाहर निकाल दिया और ताला जड़ दिया। उनका कहना है कि अगर किराया बकाया भी है तो बोर्ड नोटिस दे सकता है। उन्होंने दावा किया कि उनके पास इस वक्त कोई मकान नहीं है।

बता दें कि इसी बीच यह भी सूचना आ रही है कि जितेंद्र नारायण त्यागी ने 30 जून के बाद हरिद्वार में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंद रविंद्रपुरी व जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी यति नरसिंहानंद की मौजूदगी में संन्यास लेंगे। संन्यास लेकर वह सनातन धर्म के प्रचार प्रसार से जुड़ेंगे। संन्यासियों की तरह ही जीवन यापन करेंगे। वह अपना शेष जीवन सनातन धर्म के कार्यों में लगाएँगे।

पैर की चोट से नहीं लगा डर, पीरिड्स के दर्द ने हरा दिया: फ्रेंच ओपन मैच के बाद बोलीं चीनी खिलाड़ी झेंग- ‘काश मैं लड़का बन पाती’

मासिक धर्म के दौरान पेट में होने वाला दर्द किसी महिला की क्षमता पर कैसे असर डालता है ये हाल में टेनिस टूर्नामेंट- द फ्रेंच ओपन 2022 के महिला सिंगल्स मैच में देखने को मिला। इस मैच में पोलैंड की ईगा स्वियातेक ने चीन की किनवेन झेंग को हराया। मैच में हैरान करने वाली चीज ये थी कि जो झेंग शुरुआती मैच में ईगा पर हावी थीं। वहीं दूसरे और तीसरे मैच में इतनी धीमी पड़ गईं कि उन्हें हार का मुँह देखना पड़ा। बाद में पता चला कि झेंग को मैच में अचानक पीरियड्स के दौरान पेट का दर्द हुआ था और उसके बाद वह उस तरह नहीं खेल पाई जैसे पहले खेल रही थीं। मैच के अंत में उन्होंने अपने दर्द को ये कहकर बयां किया- “काश मैं लड़का होती।”

19 साल की झेंग ने मैच में टॉप टेनिस प्लेयर स्वितेक के खिलाफ शानदार शुरुआत की थी। पहले ही सेट में उन्होंने 6-7 से वो पारी अपने नाम की थी। लेकिन अगले सेट में वो 6-0 और तीसरे सेट में 6-2 के अंतर से हार गईं। मैच के बाद उन्होंने बताया कि पहले खेल के दौरान पैर में भी चोट आई थी लेकिन इस मैच में उन्होंने उस चोट के दर्द को बर्दाश्त कर लिया। मगर पेट का दर्द उनसे नहीं झेला गया और उनका खेल प्रभावित हुआ। पीरियड्स से होने वाले दर्द की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने कहा,

“यह लड़कियों वाली चीज थी। पहला दिन हमेशा बहुत मुश्किल होता है और ऐसे में मुझे मैच खेलना था। मुझे पहले दिन हमेशा बहुत ज्यादा दर्द होता है। मैं अपने बनावट के विरुद्ध नहीं जा सकती। मैं सोचती हूँ कि काश मैं लड़का बन सकती तो मुझे ये सब नहीं झेलना पड़ता। ये बहुत मुश्किल होता है।”

बता दें कि एक ओर जहाँ मासिक धर्म में होने वाले पेट दर्द के कारण चीन की झेंग बेहतर प्रदर्शन के बावजूद हारीं। वहीं पोलैंड की स्वितेक ने लगातार 32 मैच जीतने का रिकॉर्ड अपने नाम किया। ये रिकॉर्ट जस्टिस हीन के 14 साल पुराने रिकॉर्ड के बराबर है। स्वितेक ने लगातार तीसरे साल क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई है। लेकिन उन्होंने झेंग से खेल के बाद कहा कि झेंग ने मैच के दौरान बेहतरीन टेनिस खेला। उनके शॉट्स हैरान करने वाल थे और टॉप स्पिन शानदार थी। स्वितेक ने झेंग को बधाई दी। वहीं झेंग के चेहरे पर नंबर वन प्लेयर को न हरा पाने की निराशा भी दिखी। वर्ल्ड रैंकिंग में बता दें कि झेंग का नंबर 74 वें पायदान पर आता है।

‘पहले धुआँ अब उज्ज्वला, पहले सुरक्षा की चिंता अब सर्जिकल-एयर स्ट्राइक’: PM मोदी के 8 साल, हिमाचल की धरती से किसानों को भेजा पैसा

अपनी सरकार के 8 वर्ष पूरे होने पर अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में रोड शो किया और कई विकास परियोजनाओं के उद्घाटन के साथ-साथ एक विशाल जनसभा को भी सम्बोधित किया। उन्होंने इस दौरान ‘किसान सम्मान निधि’ की 11वीं किश्त भी जारी की। पीएम ने इसके बाद कहा कि अभी देश के करोड़ों किसानों के खाते में पीएम किसान सम्मान निधि का पैसा ट्रांसफर हो गया, पैसा उनको मिल भी गया पीएम मोदी ने ‘गरीब कल्याण सम्मेलन’ में ये बातें कही।

उन्होंने कहा कि उन्हें शिमला की धरती से देश के 10 करोड़ से भी ज्यादा किसानों के खाते में पैसे पहुँचाने का सौभाग्य मिला है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज उनके जीवन में एक विशेष दिवस भी है, इस विशेष दिवस पर देवभूमि को प्रणाम करने का मौका मिले, इससे बड़ा सौभाग्य क्या हो सकता है। उन्होंने इतनी बड़ी तादाद में आशीर्वाद देने आने के लिए जनता का आभार व्यक्त किया। पीएम मोदी ने एक दिन पहले के कार्यक्रम को याद करते हुए कहा कि कोरोना काल में जिन बच्चों ने अपने माता-पिता को खो दिया था, ऐसे बच्चों का जिम्मा सँभालने का अवसर उन्हें मिला है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि ऐसे हजारों बच्चों की देखभाल का निर्णय उनकी सरकार ने किया, कल उन्हें मैंने कुछ पैसे भी चेक के माध्यम से भेज दिए गए। उन्होंने कहा कि 130 करोड़ भारतीयों के सेवक के तौर पर काम करने का उन्हें जनता ने अवसर दिया, उन्हें सौभाग्य मिला। पीएम ने कहा कि आज वो कुछ कर पाते हैं, दिन रात दौड़ पाते हैं तो कोई ये मत सोचे कि ये मोदी करता है, ये मत सोचे कि मोदी दौड़ता है, ये सब तो देशवासियों की कृपा से हो रहा है।

प्रधानमंत्री ने शिमला में कहा कि एक परिवार के सदस्य के नाते, परिवार की आशा-आकांक्षा से जुड़ना, 130 करोड़ देशवासियों का परिवार ये ही सब कुछ है उनकी जिंदगी में। उन्होंने कहा कि जनता ही हैं सब कुछ उनकी जिंदगी में और ये जिंदगी भी जनता ही के लिए है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे 2014 से पहले की सरकार ने भ्रष्टाचार को सिस्टम का जरूरी हिस्सा मान लिया था और तब की सरकार भ्रष्टाचार से लड़ने की बजाय उसके आगे घुटने टेक चुकी थी, तब देश देख रहा था कि योजनाओं का पैसा जरूरतमंद तक पहुँचने के पहले ही लुट जाता है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “आज चर्चा जन-धन खातों से मिलने वाले फायदों की हो रही है, जनधन-आधार और मोबाइल से बनी त्रिशक्ति की हो रही है। पहले रसोई में धुआँ सहने की मजबूरी थी, आज उज्ज्वला योजना से सिलेंडर पाने की सहूलियत है। 2014 से पहले देश की सुरक्षा को लेकर चिंता थी, आज सर्जिकल स्ट्राइक-एयर स्ट्राइक का गर्व है। आज हमारी सीमा पहले से ज्यादा सुरक्षित है। पीएम आवास योजना हो, स्कॉलरशिप देना हो या फिर पेंशन योजनाएँ, टेक्नोलॉजी की मदद से हमने भ्रष्टाचार का स्कोप कम से कम कर दिया है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन समस्याओं को पहले स्थायी मान लिया गया था, उनकी सरकार उसके स्थायी समाधान देने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि ये राजग सरकार है जिसने चार दशकों के इंतजार के बाद ‘वन रैंक वन पेंशन’ को लागू किया, हमारे पूर्व सैनिकों को एरियर का पैसा दिया, जिसका बहुत बड़ा लाभ हिमाचल के हर परिवार को हुआ है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में दशकों तक वोटबैंक की राजनीति हुई है और अपना-अपना वोटबैंक बनाने की राजनीति ने देश का बहुत नुकसान किया है। बकौल पीएम मोदी, हम वोटबैंक बनाने के लिए नहीं, नए भारत को बनाने के लिए काम कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने आगे कहा, “2014 से पहले जब मैं आपके बीच आता था, तो कहता था कि भारत दुनिया से आँख झुकाकर नहीं, आंख मिलाकर बात करेगा। आज भारत मजबूरी में दोस्ती का हाथ नहीं बढ़ाता है, आज भारत मदद के लिए हाथ बढ़ाता है। हमें 21वीं सदी के बुलंद भारत के लिए, आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए काम करना है। एक ऐसा भारत जिसकी पहचान अभाव नहीं बल्कि आधुनिकता हो। हम भारत वासियों के सामर्थ्य के आगे कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। आज भारत में रिकॉर्ड विदेशी निवेश-एक्सपोर्ट हो रहा है।”

नहीं आता गैजेट्स चलाना, आशीष नेहरा ने दिखा दिया कागज़-कलम से भी आ सकती है ट्रॉफी: IPL जीतने वाले पहले भारतीय कोच, RCB ने निकाल दिया था

आशीष नेहरा IPL की ट्रॉफी जीतने वाले पहले भारतीय कोच हैं। उन्होंने बिना किसी लैपटॉप-फोन या फैंसी डेटा के ये कर दिखाया। आशीष नेहरा के बारे में बताया जाता है कि वो आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल नहीं करते और यहाँ तक कि वो सोशल मीडिया पर भी सक्रिय नहीं हैं। ‘गुजरात टाइटंस’ के लिए खिलाड़ियों की नीलामी से लेकर टीम को विजेता बनाने तक, उनका प्रदर्शन शानदार रहा। कप्तान हार्दिक पंड्या और अन्य खिलाड़ियों के साथ उनकी बॉन्डिंग भी मस्त रही।

IPL के 15 वर्षों के इतिहास में आशीष नेहरा से पहले किसी भी ट्रॉफी विजेता टीम का कोच भारतीय नहीं रहा, सभी विदेशी ही थे। आशीष नेहरा ने ये कर दिखाया और खुद को एक सफल मेंटर के रूप में स्थापित किया है। यहाँ तक कि टीम के कप्तान हार्दिक पंड्या ने भी इस जीत का लगभग पूरा श्रेय उन्हें ही दिया। पहली बार IPL में आई ‘गुजरात टाइटंस’ की जीत पर पंड्या ने कहा कि आने वाली नस्लें इस जीत को याद रखेंगी और इस पर चर्चा करेंगी।

पूर्व भारतीय तेज़ गेंदबाज आशीष नेहरा को अक्सर कागज़-कलम के साथ मैचों में देखा जाता था। वो मोबाइल-लैपटॉप या आईपैड पर नहीं, बल्कि कागज़ पर कलम से चीजें नोट करते रहते थे और रणनीति बनाते थे। जहाँ प्रत्येक टीम में मैनेजमेंट को गैजट्स के साथ देखा जाता है, आशीष नेहरा ने बता दिया कि पेन-पेपर का इस्तेमाल कर के भी टूर्नामेंट जीते जा सकते हैं। उन्हें कभी गुस्से में नहीं देखा गया। वो डगआउट में रिलैक्स्ड नजर आते थे।

स्पिनर अमित मिश्रा ने भी उनकी तारीफ़ की। इसके अलावा सोशल मीडिया पर फैंस भी उनकी तारीफों के पुल बाँध रहे हैं। आशीष नेहरा के बारे में साथी खिलाड़ी कहते हैं कि वो कभी दबाव में नहीं आते और हमेशा हँसी-मजाक करते रहते हैं। भारत को वर्ल्ड कप जिताने वाले गैरी कस्टर्न भी ‘गुजरात टाइटंस’ से जुड़े हुए थे, लेकिन हेड कोच के रूप में टीम प्रबंधन ने आशीष नेहरा पर भरोसा जताया। आमिर खान ने भी IPL फाइनल के बाद एक कार्यक्रम में उन्हें गुजरात की जीत का मुख्य आर्किटेक्ट बताया।

इससे पहले ‘रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु’ सहित कुछ अन्य टीमों ने आशीष नेहरा को अपना हेड कोच नहीं बनाया था। एक नई टीम ने उन पर भरोसा जताया। RCB ने उन्हें हटा दिया था तो उन्होंने शर्त रखी थी कि वो बतौर मुख्य कोच ही किसी टीम से जुड़ेंगे। RCB ने 2018 में उन्हें गेंदबाजी कोच बनाया था। नीलामी के बाद लोगों ने आशीष नेहरा की आलोचना करते हुए कहा था कि राष्ट्रीय टीमों से बाहर हो चुके खिलाड़ियों पर उन्होंने भरोसा जताया है और ऐसे युवा खिलाड़ी लिए, जो प्रभावी नहीं हैं। अब इन अटकलों पर विराम लग गया है।

आशीष नेहरा को इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स चलाने नहीं आता। उन्होंने खुद स्वीकार किया था कि पत्नी के बहुत कहने पर उन्होंने एक स्मार्टफोन खरीदा था। वो मैच के दौरान अक्सर नारियल-पानी पीते हुए और खिलाड़ियों को सलाह देते हुए देखे जाते थे। चार बार न्यूजीलैंड के स्टीफेन फ्लेमिंग, तीन बार श्रीलंका के महेला जयवर्धने और दो बार ऑस्ट्रेलिया के ट्रेवर बैलिस टूर्नामेंट जीत चुके हैं। टॉम मूडी, रिकी पोंटिंग, जॉन राइट, डैरेन लेहमैन और शेन वॉर्न एक-एक बार बतौर कोच चैंपियन बने। अब आशीष नेहरा इस सूची में शामिल हुए हैं।

स्कूल में घुस कश्मीरी पंडित महिला शिक्षक को आतंकियों ने मारी गोली, हुई मौत: हिंदुओं की टार्गेटेड किलिंग पर लगाम कब?

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में इस्लामी आतंकियों ने एक महिला कश्मीरी हिंदू (पंडित) की हत्या कर दी है। हाई स्कूल गोपालपोरा की शिक्षिका रजनी को आतंकियों ने स्कूल में गोलियों से छलनी कर दिया। घायल रजनी को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया।

महिला कश्मीरी पंडित और शिक्षिका की हत्या के बाद पूरे इलाके की घेराबंदी की गई है। 31 मई 2022 को अंजाम दी गई इस घटना के बाद आतंकियों को पकड़ने के लिए सुरक्षाबलों ने कार्रवाई शुरू कर दी है।

कश्मीर जोन की पुलिस का कहना है कि इस घटना के लिए जिम्मेदार आतंकियों को खोज निकाला जाएगा और उन्हें ढेर कर दिया जाएगा।

कश्मीरी हिंदुओं पर टार्गेटेड अटैक

कश्मीर के ही बडगाम में दो-तीन हफ्ते पहले 12 मई 2022 को लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकियों ने एक सरकारी कार्यालय में घुस कर 35 वर्षीय राहुल भट की गोली मारकर हत्या कर दी थी। राहुल भट प्रवासी कश्मीरी हिंदुओं के रोजगार के लिए दिए गए विशेष पैकेज के लिए काम कर रहे थे।

जिस समय दोनों आतंकियों ने कार्यालय में घुसकर भट की हत्या की थी, उस समय शाम के लगभग साढ़े चार बज रहे थे और तहसील कार्यालय कर्मचारियों से भरा हुआ था। आतंकी दुस्साहस दिखाते हुए भरी ऑफिस में घुस गए और राहुल भट को सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी।

टार्गेटेड अटैक खौफ की रणनीति

राहुल भट की हत्या से पहले पिछले साल 7 अक्‍टूबर को आतंकियों ने प्रिंसिपल सतिंदर कौर और अध्‍यापक दीपक चंद की हत्‍या कर दी थी। 5 अक्‍टूबर को माखनलाल बिंद्रू को मौत के घाट उतारा गया था। 17 सितंबर को कॉन्‍स्‍टेबल बंटू शर्मा को जान से हाथ धोना पड़ा था। 8 जून को सरपंच अजय पंडिता की जान गई थी। यह सिलसिला मानो थमने का नाम नहीं ले रहा है।

राहुल भट या महिला शिक्षक रजनी की हत्या आम आतंकी घटना नहीं। यह टार्गेटेड किलिंग है। टार्गेटेड किलिंग इसलिए क्योंकि जिस ऑफिस/स्कूल में घुस कर आतंकी ऐसी घटना को अंजाम देते हैं, अगर यह आम आतंकी घटना होती तो वहाँ काम करने वाले दूसरे भी मारे जा सकते थे या घायल होते। क्या ऐसा हुआ? नहीं। क्या कारण हो सकता है? सिर्फ और सिर्फ टार्गेटेड किलिंग। भीड़ भरे ऑफिस/स्कूल/जगह में घुसना और नाम पूछ कर गोली मारना टार्गेटेड किलिंग नहीं है तो और क्या है?

15000 समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल होंगे हार्दिक पटेल, खुद बताई तारीख़: गुजरात की राजनीति में बड़ी हलचल

गुजरात कॉन्ग्रेस के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल ने पार्टी छोड़ने के बाद अब भाजपा में शामिल होने का फैसला लिया है। उन्होंने बताया है कि वो गुरुवार (2 जून, 2022) को भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। उनके साथ 15,000 अन्य समर्थक भी भाजपा में शामिल होंगे। इस दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल भी मौजूद रहेंगे। गाँधीनगर स्थित भाजपा कार्यालय में वो हार्दिक पटेल को पार्टी की सदस्यता दिलाएँगे।

हार्दिक पटेल ने खुद ANI से बात करते हुए इसकी पुष्टि की है कि वो 2 जून को भाजपा में शामिल हो रहे हैं। ‘पाटीदार आंदोलन’ का चेहरा रहे हार्दिक पटेल को अदालत से ही राहत मिल गई है, ऐसे में अब उनके चुनाव लड़ने का रास्ता भी साफ़ हो गया है। हालाँकि, अभी तक भाजपा ने इस सम्बन्ध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी गुजरात दौरे पर गए थे। गुजरात में पाटीदारों का अच्छा-खासा प्रभाव है।

इससे पहले उन्होंने उन्होंने कॉन्ग्रेस पर हिंदू धर्म की आस्था को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाया। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “मैंने पहले भी कहा था कि कॉन्ग्रेस पार्टी जनता की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का काम करती है, हमेशा हिंदू धर्म की आस्था को नुकसान पहुँचाने का प्रयास करती है। आज पूर्व केन्द्रीय मंत्री और गुजरात कॉन्ग्रेस के नेता ने बयान दिया की राम मंदिर की ईंटों पर कुत्ते पेशाब करते हैं..!” उन्होंने पूछा था कि कि कॉन्ग्रेस नेताओं को भगवान श्रीराम से क्या दुश्मनी है?

कॉन्ग्रेस से इस्तीफा देने के बाद हार्दिक पटेल ने कहा था, “जब भी राहुल गाँधी गुजरात में आते हैं, तो हम अपेक्षा करते हैं कि वह यहाँ के जमीनी मुद्दों पर बात करेंगे। लेकिन यहाँ पार्टी के नेता उनके आने पर उनकी खातिरदारी में जुट जाते हैं कि वो कब खाएँगे, क्या खाएँगे। नाश्ते में क्या लेंगे। उनके लिए कौन सा चिकन सैंडविच लाना है, कहाँ से लाना है। ये सब देखकर बहुत दुःख होता है। ये लोग अपनी गलतियों को सुधारना ही नहीं चाहते हैं। इसलिए जो गलत होगा उस पर बोलूँगा।”

टीले वाली मस्जिद नहीं, लक्ष्मण टीला पर स्थित ‘टीलेश्वर महादेव’: लखनऊ की अदालत में सुनवाई, 9 साल से केस लड़ रहे हरिशंकर जैन

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सतजित ‘टीले वाली मस्जिद’ को लेकर सेशन कोर्ट में सुनवाई चल रही है। हरिशंकर जैन ये इस सम्बन्ध में याचिका दायर की थी। उनका कहना है कि ये ‘टीले वाली मस्जिद’ नहीं, बल्कि ‘लक्ष्मण टीला’ है। 2013 में इस सम्बन्ध में निचली अदालत में दायर याचिका को लेकर जो आदेश आया था, उसके विरुद्ध रिवीजन सूट दायर किया गया है। इसमें ‘लक्ष्मण टीला’ को हिन्दुओं को वापस सौंपने की माँग की गई है।

बता दें कि अदालत में ज्ञानवापी मामले में भी हिन्दुओं का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन ही कर रहे हैं। उनके बेटे विष्णु शंकर जैन भी इस मामले में सक्रिय हैं। जैन ने अपनी याचिका में कहा है कि पूरे ‘टीला वाली मस्जिद’ के परिसर को ‘शेषनागेस्थ टीलेश्वर महादेव’ कहा जाता है। उन्होंने बताया कि क्रूर मुग़ल बादशाह औरंगजेब के समय इसे ध्वस्त कर दिया गया था। कोर्ट ने इसके बाद इससे सम्बंधित पक्षों को नोटिस जारी किया।

मुस्लिम पक्ष ने इस सूट को रद्द करने की अपील की, जिसे कोर्ट ने नकार दिया। ये याचिका ‘शेषनागेस्थ टीलेश्वर महादेव विराजमान’ और ‘लक्ष्मण टीला शेषनाग तीर्थभूमि’ की तरफ से दायर की गई है। रामरतन मौर्य, वेदप्रकाश त्रिवेदी, दिलीप साहू, स्वतंत्र कुमार त्रिपाठी और धनवीर सिंह याचिकाकर्ताओं में से हैं। इसमें ASI और केंद्रीय गृह मंत्रालय के अलावा वक्फ बोर्ड और मौलाना फजुर रहमान को भी रेस्पोंडेंट बनाया गया है।

याचिका में माँग की गई है कि इस स्थान को हिन्दुओं को सौंप कर उन्हें पूजा-पाठ की अनुमति दी जाए और उनके दर्शन में बाधा डालने वालों को रोका जाए। 25 सितंबर, 2017 को निचली अदालत ने वाद के खिलाफ दायर प्रतिवादी की आपत्ति को ख़ारिज कर दिया था। मौलाना फजुर रहमान की मौत के बाद उनके उत्तराधिकारी मौलान फजलुल मन्नान को प्रतिवादी बनाया गया। इस मामले में आज भी अदालत में सुनवाई होनी है।

‘हम जिएँगे और मरेंगे, ऐ वतन तेरे लिए’: बलिदानी मुदस्सिर अहमद का आखिरी वीडियो, सच साबित कर गए गाने के बोल… पिता बोले – फख्र है

बारामूला में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में बलिदान हुए जम्मू कश्मीर पुलिस के मुदस्सिर अहमद शेख का आखिरी वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें वो ‘हम जिएँगे और मरेंगे ऐ वतन तेरे लिए, दिल दिया है जान भी देंगे, ऐ वतन तेरे लिए’ गाने गाने पर एक्ट करते हुए दिख रहे हैं। हाथ में राइफल लेकर मुदस्सिर अहमद ने हँसते हुए ये वीडियो बनाया था। इसमें वो पुलिस ड्रेस में दिख रहे हैं। लोग उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए इस वीडियो को शेयर कर रहे हैं।

देशभक्ति गाने का ये वीडियो मुदस्सिर अहमद ने बलिदान होने से 3 दिन पहले बनाया था। वहीं उनके पिता ने अपने बेटे की वीरगति को प्राप्त होने पर गर्व जताया है। मक़सूद अहमद ने कहा कि उन्हें इस बात से बहुत ख़ुशी है कि उनके बेटे की वजह से 1000 लोगों की जान बच गई। उन्होंने कहा कि उनके बेटे की क़ुरबानी पर उन्हें बहुत फख्र है। उन्होंने कहा कि उन्हें पता है कि उनका बेटा वापस नहीं आएगा, लेकिन उन्हें इस बात का फख्र है कि उन्होंने लड़ते-लड़ते अपनी जान दे दी।

मुदस्सिर अहमद शेख के पिता ने कहा कि उनके बेटे ने देश के लिए अपनी जान दे दी, लेकिन आतंकवादियों को भागने नहीं दिया। बता दें कि बारामूला में हुए एनकाउंटर में तीन आतंकियों को मार गिराया गया। मुदस्सिर अहमद शेख ने इस एनकाउंटर से पहले अपने भाई से जूते खरीद लेने को और पैसे की चिंता न करने को कहा था। उन्होंने भाई को भेजे अपने इस आखिरी वॉइस मैसेज में बताया था कि वो एक ऑपरेशन में जा रहे हैं, तुम सब अपना ख्याल रखना और कल किसी भी वक्त फोन कर लेना।

बारामूला में ये मुठभेड़ बुधवार (25 मई, 2022) को हुई थी। उनके पिता कह रहे हैं कि बेटे की मौत पर आँसू बहाने की कोई जरूरत नहीं है, सब को उन पर गर्व है। मारे गए सभी आतंकी पाकिस्तान पोषित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के थे। स्पेशल पुलिस ऑफिसर मुदस्सिर अहमद शेख ‘इलीट पुलिस यूनिट’ के सदस्य थे। क्रीरी स्थित नजीभाट चेकपॉइंट पर ये गोलीबारी हुई। उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने उनके घर जाकर परिजनों से मुलाकात की। शेख को उनके साथी ‘बिंदास मुदस्सिर’ कह कर भी बुलाते थे।

‘शिवलिंग होता तो कब का तोड़ कर हटा देते’: ज्ञानवापी पर मौलाना सरफ़राज़ अहमद ने दोहराया, एंकर ने पूछा – पैगंबर मुहम्मद पर कोई ऐसा बोले तो?

काशी के ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के अंदर के नए वीडियोज सामने आने के बाद ये लगभग साफ़ हो गया है कि शिवलिंग के साथ छेड़छाड़ की गई थी और जिसे ‘मस्जिद’ कहा जाता है, उसके भीतर मंदिर होने के कई प्रमाण मौजूद हैं। अब सरफराज अहमद नाम के एक मौलाना ने कहा है कि ज्ञानवापी में शिवलिंग की बातें करने वालों का मकसद ही था कि हिंदुस्तान में बवाल करना है। उन्होंने कहा कि जो न्यूज़ चैनलों में चल रहा है वो क्या है, कानून के दायरे में मना कर दिया गया है कि कोई बात न करे, लेकिन फिर भी मीडिया में चल रहा है।

मौलाना सरफराज ने आगे कहा, “आपको क्या लगता है, जो फव्वारा कहा जा रहा है वो क्या है? फव्वारा है तो फव्वारा ही कहा जाएगा न। और अगर आपने ये आरोप लगा है कि ये शिवलिंग है तो ये जाँच का विषय है। एक बात मैं ‘ऑफ द रिकॉर्ड’ बोलना चाहता हूँ। किसी जमाने में ये मंदिर था। मंदिर तोड़ कर मस्जिद बन दी गई, इसमें कोई संशय की बात नहीं है। तो कहने का मतलब कि क्या बना, किसने बनाया – ये एक अलग विषय है।”

वायरल वीडियो में मौलाना सरफराज कहता दिख रहा है कि ज्ञानवापी के बारे में कोई प्रमाण भी नहीं है, क्योंकि कागजात लेकर अंग्रेज लंदन चले गए थे। ‘Zee Hindustan’ चैनल ने जब मौलाना सरफराज से इस बयान को लेकर पूछा तो उन्होंने कहा कि उन्होंने ‘ऑफ द रिकॉर्ड’ भी ये बात कही थी और अब ‘ऑन द रिकॉर्ड’ भी कह रहे हैं कि अगर वहाँ शिवलिंग होता तो उसे कब का तोड़ कर हटा देते। इस पर टीवी एंकर और डिबेट में मौजूद हिन्दू संत के कड़ी आपत्ति जताई।

मौलाना सरफराज ने इस बयान पर माफ़ी माँगने से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने ऐसा क्या कहा है? एंकर प्रत्यूष खरे ने पूछा कि अगर यही बात पैगंबर मुहम्मद के बारे में किसी ने कह दी होती तो बवाल मच जाता और मौलाना सरफराज अहमद इसी चैनल पर माफ़ी मँगवाने की बात कह रहे होते। बता दें कि सर्वे के लीक वीडियो में मस्जिद के वजूखाना के अंदर शिवलिंग स्पष्ट शिवलिंग दिख रहा है। साथ ही तहखानों की दीवारों पर स्वस्तिक, त्रिशूल, कमल और हिंदू देवताओं के रूपांकरण उकेरे हुए नजर आ रहे हैं।