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PFI सदस्यों ने बना रखी थी हिटलिस्ट, बीजेपी-RSS से जुड़े 100 लोगों के नाम: केरल में स्वयंसेवक की हत्या की जाँच से खुलासा

इस्लामी कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के सदस्यों ने एक हिटलिस्ट बना रखी थी। इसमें बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े कम से कम 100 लोगों के नाम थे। इनकी हत्या की जानी थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह खुलासा RSS कार्यकर्ता एसके श्रीनिवासन की हत्या की जाँच के दौरान हुआ है।

जनम TV की रिपोर्ट के मुताबिक यह लिस्ट श्रीनिवासन की हत्या के मामले में गिरफ्तार आरोपित के मोबाइल से मिली है। श्रीनिवासन का नाम भी इस लिस्ट में था। इस लिस्ट में बीजेपी के केरल राज्य महासचिव सी कृष्णकुमार का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। भाजपा के युवा नेता प्रशांत सिवान का नाम भी इसमें मिला है।

रिपोर्ट के मुताबिक आरोपितों ने पूछताछ में बताया कि भाजपा और संघ के नेताओं की हत्या के पीछे उनका मकसद PFI सदस्य जुबेर की हत्या का बदला लेना है। दावा ये भी किया जा रहा है कि PFI के सीनियर लोगों को भाजपा नेताओं पर हमलों की जानकारी है। श्रीनिवासन की हत्या केस में गिरफ्तार मुख्य आरोपित मोहम्मद बिलाल, मोहम्मद रिज़वान, रियासुद्दीन और सहद ने पुलिस ने आगे अपना जुर्म कबूल किया।

आरोपितों ने माना है कि वो पलक्कड़ संघ नेता की हत्या के उद्देश्य से ही आए थे। बताया जा रहा है कि PFI के नेताओं ने आरोपितों को संघ और भाजपा नेताओं को 24 घंटे में खत्म करने के आदेश दिए थे। इस लिस्ट में शामिल श्रीनिवासन पहले शिकार बने। केरल पुलिस ने PFI की लिस्ट को गंभीरता से लिया है।

RSS कार्यकर्ता श्रीनिवासन की हत्या

गौरतलब है कि 16 अप्रैल 2022 को PFI के सदस्यों ने केरल के पलक्कड़ में संघ कार्यकर्ता श्रीनिवासन की दिनदहाड़े हत्या कर दी थी। हमलावरों की संख्या 5 से 6 के बीच बताई थी जो 3 बाइकों से आए थे। इन सभी ने श्रीनिवासन की मेलमुरी इलाके में स्थित दुकान में घुस कर उन पर धारदार हथियारों से कई वार किए। अस्पताल ले जाते हुए श्रीनिवासन की मौत हो गई। बाद में पुलिस ने इस घटना में शामिल बताए जा रहे PFI की राजनैतिक शाखा SDPI के बिलाल, रिज़वान, रियासुद्दीन और सहद को गिरफ्तार किया था।

हिंदू नाबालिग से रेप, अश्लील वीडियो बनाया, अगवा करने का प्रयास… राहुल बनकर आया था कासिम, बाँधता था कलावा-लगाता था तिलक

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से लव जिहाद का मामला सामने आया है। कासिम पर अपना मजहब छिपाकर एक नाबालिग हिंदू लड़की को फँसाने, उसके साथ रेप करने और अश्लील वीडियो बनाने का आरोप लगा है। कासिम ने कथित तौर पर पीड़िता को अगवा करने का भी प्रयास किया। बरेली पुलिस ने शुक्रवार (29 अप्रैल 2022) को ट्वीट कर बताया है कि आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक कासिम ने पीड़िता को अपना नाम राहुल बताया था। पीड़िता इंटरमीडिएट की छात्रा है। पीड़िता के मुताबिक कासिम हाथ में कलावा बाँधता था और माथे पर तिलक लगाता था। बताया जा रहा है कि कासिम और पीड़िता एक ही इलाके के रहने वाले हैं। वो लगभग 2 साल से एक-दूसरे से परिचित थे। दोनों मोबाइल पर लगातार बात और चैट किया करते थे।

जब लड़की को कासिम के मुस्लिम होने के बारे में पता चला तो वह कासिम से दूरी बनाने लगी। इस बात से नाराज होकर कासिम ने लगभग 12 साथियों के साथ पीड़िता पर हमला किया और उसका अपहरण करने की कोशिश की। वह पीड़िता पर निकाह का दबाव भी बना रहा था। इस दौरान छात्रा की चीख सुन कर आसपास के लोग जमा हुए। उन्होंने कासिम को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। इस मामले में बारादरी थाने की पुलिस ने कासिम पर पॉक्सो एक्ट, धर्म परिवर्तन और दुष्कर्म की धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने कासिम का मोबाइल भी जब्त कर लिया है।

गौरतलब है कि मार्च 2022 में बरेली में ही आसिफ नाम के 2 अलग-अलग आरोपितों पर केस दर्ज हुए थे। इसमें से एक आसिफ पर आकाश बन कर नाबालिग लड़की को फँसाने और उस से निकाह के साथ धर्मान्तरण के दबाव का आरोप लगा था। वहीं दूसरे आसिफ़ पर दलित समुदाय की नाबालिग लड़की के अपहरण और पीड़ित परिवार को धमकाने का आरोप लगा था।

बांग्लादेश में जयशंकर: PM शेख हसीना ने भारत को दिया चटगाँव बंदरगाह के इस्तेमाल का प्रस्ताव, चीन को झटका

भारत ने बांग्लादेश में बड़ी कूटनीतिक जीत हासिल की है। बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना ने चटगाँव बंदरगाह का इस्तेमाल करने का प्रस्ताव भारत को दिया है। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार (28 अप्रैल 2022) को उनसे ढाका में मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने बांग्लादेशी पीएम को इस साल के अंत तक भारत आने का न्योता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से दिया।

बांग्लादेश ने चटगाँव बंदरगाह को लेकर भारत को यह प्रस्ताव ऐसे समय में दिया है जब चीन बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के जरिए भारत के पड़ोसी देशों में अपनी घुसपैठ बढ़ाने की कोशिश में है। उसकी नजर बांग्लादेश के बंदरगाहों पर भी थी। ऐसे में प्रधानमंत्री शेख हसीना का प्रस्ताव उसके लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

शेख हसीना ने पड़ोसियों के आपसी संपर्क के महत्व को रेखांकित करते हुए भारत को उपयोग के लिए अपने देश का मुख्य बंदरगाह चटगाँव सौंपने की पेशकश की। इससे भारत के पूर्वोत्तर राज्यों जैसे असम और त्रिपुरा को फायदा होगा।

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री हसीना ने कहा कि दोनों देशों को कनेक्टिविटी को और बढ़ाना होगा। उनके प्रेस सचिव एहसानुल करीम ने बताया कि पीएम शेख हसीना ने जयशंकर से कहा कि आपसी लाभ के लिए कनेक्टिविटी बढ़ाने की जरूरत है। ऐसे में बांग्लादेश के दक्षिण-पूर्वी चटगाँव बंदरगाह का उपयोग करने से भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र को विशेष रूप से फायदा होगा।

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री ने बांग्लादेश और भारत के बीच सीमा पार मार्गों को फिर से शुरू करने की पहल की है, जिसे 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान बंद कर दिया गया था। उस समय बांग्लादेश पाकिस्तान का हिस्सा था और उसे पूर्वी पाकिस्तान के नाम से जाना जाता था। करीम ने कहा कि प्रधानमंत्री हसीना की जयशंकर के साथ आधे घंटे से अधिक चली बैठक के दौरान कई द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई। जयशंकर ने बाद में अपने बांग्लादेशी समकक्ष एके अब्दुल मोमेन के साथ भी चर्चा की और फिर संयुक्त रूप से मीडिया को संबोधित किया।

मुलाकात के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने बांग्लादेशी पीएम के साथ द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्ददों पर चर्चा की। विदेश मंत्री ने एक बयान में कहा कि शेख हसीना और उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर समीक्षा की। विदेश मंत्री ने कहा कि कोरोना चुनौतियों के बावजूद दोनों देशों ने अपने संबंधों में अच्छी प्रगति की है।

विदेश मंत्री जयशंकर ने आगे कहा कि वे ज्वाइंट कंसल्टेटिव कमीशन के सातवें दौर में बांगेलादेश के विदेश मंत्री का स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं। यह बैठक दोनों देशों के बीच के संबंधों के अगले स्तर के लिए आधार तैयार करने का एक अच्छा अवसर प्रदान करेगी, जिसकी उन्हें आशा है। बता दें कि दोनों देशों बांगलादेश-भारत संयुक्तसलाहकार आयोग (जीसीसी) की सातवीं बैठक दिल्ली में होनी है। जयशंकर की आखिरी बांग्लादेश यात्रा पिछले साल मार्च में हुई थी।

पकड़ा गया जहाँगीरपुरी में हिंदुओं की शोभा यात्रा पर गोली चलाने वाला फरीद: बंगाल में मौसी के घर छिपा था, पहले से भी दर्ज हैं कई मामले

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पश्चिम बंगाल से फरीद को पकड़ा है। वह जहाँगीरपुरी में हनुमान जन्मोत्सव पर निकाली गई शोभायात्रा पर हुए हमले के मामले में आरोपित है। उस पर हिंदू जुलूस पर पहली फायरिंग का आरोप है। उसकी गिरफ्तारी 28 अप्रैल 2022 (गुरुवार) को हुई। उस पर पहले से भी चोरी, डकैती जैसे कुल छह आपराधिक मामले दर्ज हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस को 34 साल के फरीद की लोकेशन पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदनीपुर जिले के तामलुक में मिली थी। यहीं से उसे पकड़ा गया। तामलुक के पुलिस अधिकार अरुप सरकार ने बताया कि उसने अपनी मौसी के घर पनाह ले रखी थी। उनके अनुसार फरीद का परिवार अब बंगाल में नहीं रहता। वह मूल रूप महिसदल इलाके से ताल्लुक रखता है। 34 साल पहले यहॉं से जाकर उसका परिवार दिल्ली में बस गया था।

दिल्ली पुलिस उसे आज शुक्रवार (29 अप्रैल 2022) कोर्ट में पेश करेगी। जहाँगीरपुरी हिंसा के कुछ वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुए थे। फरीद इनमें दिखा। CCTV फुटेज की जाँच के बाद पुलिस ने भी उसे गोली चलाते पाया था। पुलिस उसे दंगों के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक मान रही है। उस पर लोगों को पत्थरबाजी के लिए भड़काने का भी आरोप है। हिंसा के बाद वह अपने घर से भाग गया था। तब से दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच उसकी तलाश कर रही थीं। जानकारी के मुताबिक फरीद साल 2010 से अपराध की दुनिया में सक्रिय है। पुलिस रिकॉर्ड में वह जहाँगीरपुरी क्षेत्र का हिस्ट्रीशीटर बताया जा रहा है।

गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले बुधवार (27 अप्रैल 2022) को पुलिस ने हनुमान जयंती शोभायात्रा पर हमले के आरोप में जाफर और बाबुद्दीन को गिरफ्तार किया था। जाफर भीड़ में हथियारों के साथ दिखा था, जबकि बाबुद्दीन शोभा यात्रा में शामिल लोगों पर हमले के लिए उकसा रहा था। दोनों आरोपित जहांगीरपुरी के निवासी हैं और मुख्य आरोपित अंसार के नजदीकी बताए जा रहे हैं।। इन पर हिंसा के ही दिन 16 अप्रैल को केस दर्ज हुआ था।

16 अप्रैल 2022 को हनुमान जन्मोत्सव के मौके पर हिंदुओं ने शोभा यात्रा निकाली थी। इस पर कट्टरपंथी मुस्लिमों ने हमला कर दिया था। शोभा यात्रा पर पथराव किया गया। काँच की बोतलों से हमला किया गया था। हिंसा में कई लोग बुरी तरह घायल हुए थे। दंगाइयों द्वारा चलाई गई गोली में एक पुलिसकर्मी भी घायल हो गया था।

‘…. तो J&K का भारत में विलय के दौरान मुस्लिमों का फैसला कुछ और होता’: उमर अब्दुल्ला के आरोप पर BJP नेता ने कहा- भारत से बेहतर जगह नहीं

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) ने कहा है कि देश में मुस्लिमों को परेशान किया जा रहा है। कभी मस्जिदों पर लाउडस्पीकर के नाम पर तो कभी हलाल मीट को बैन करने के नाम पर तो कभी बुलडोजर के नाम पर डराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय के समय मुस्लिमों को पता होता कि यहाँ एक धर्म को ज्यादा महत्व दिया जाता है तो शायद उनका फैसला कुछ अलग होता।

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि मस्जिदों पर लाउडस्पीकर की अनुमति नहीं दी जा रही है, जबकि दूसरी जगहों पर इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। अब कहा जा रहा है कि हलाल मीट नहीं बेचा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “हम (मु्स्लिम) जो करते हैं वो आपको पसंद नहीं आता। आखिर हलाल मीट क्यों नहीं बेचा जाना चाहिए? आपको हमारे खाने से चिढ़ है। हमारे कपड़े पहनने के तरीके (हिजाब) पर एतराज है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर में रमजान के महीने में सेहरी और इफ्तार के वक्त बिजली की कटौती की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह मुस्लिमों की भावना के साथ खिलवाड़ है। अगर उनकी भावना से खिलवाड़ नहीं करना है तो सेहरी और इफ्तार के वक्त बिजली देनी चाहिए।

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जब मु्स्लिमों के घरों पर बुलडोजर चलाए जाते हैं तो टेलीविजन चैनल के एंकर कहते हैं कि भारत में बुलडोजर की कमी हो जाएगी तो बुलडोजर आयात करना पड़ेगा या भारत में ही बनाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जब टेलीविजन चैनल के एंकर बुलडोजर पर चढ़ते हैं और ड्राइवर से कहते हैं कि सिर्फ घर के छत को गिराया गया है, दीवार खड़ी है तो मुस्लिमों को कैसा लगता होगा? उन्होंने मुस्लिमों की भावनाएँ जुड़ी होने की बात कही।

उमर ने इसी दौरान जम्मू-कश्मीर की भारत में विलय पर सवाल उठा दिया। उन्होंने कहा कि ये वो हिंदुस्तान नहीं है, जिसके साथ जम्मू-कश्मीर ने विलय किया था। जिस हिंदुस्तान के साथ समझौता किया था, उसमें हर मजहब को बराबरी की नजर से देखा जाता था। उन्होंने कहा कि अगर उस वक्त कहा गया होता कि यहाँ एक धर्म को दूसरे धर्म से ज्यादा अहमियत दी जाएगी तो शायद मुस्लिमों का फैसला कुछ और होता।

उमर अब्दुल्ला के इन आरोपों पर भाजपा के वरिष्ठ नेता और बिहार सरकार में मंत्री शहनवाज हुसैन ने नकार दिया है। उन्होंने कहा कि उमर अब्दुल्ला भारत के बारे में जिस तरह का बयान दे रहे हैं वह दुर्भाग्यपूर्ण है। जितना अच्छा माहौल आज देश में है, देश मिलकर रह रहा है, वह शानदार है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में अल्पसंख्यकों के लिए भारत से बेहतर देश नहीं हो सकता।

मोहम्मदपुर के बाद दिल्ली के इन 40 गाँवों के मुस्लिम नाम बदलने के लिए बीजेपी ने खोला मोर्चा, CM केजरीवाल को लिखा पत्र

दिल्ली के मोहम्मदपुर गाँव में माधवपुर का बोर्ड लगाने के बाद बीजेपी ने दिल्ली के 40 गाँवों के मुस्लिम नामों को बदलने की माँग को लेकर मोर्चा खोल दिया है। इसे लेकर दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने मुख्यमंत्री केजरीवाल को पत्र लिखा है। उन्होंने दिल्ली सरकार से इस संबंध में जल्द फैसला लेने की माँग की है।

इसके लिए आदेश गुप्ता ने ट्वीट कर कहा, “दिल्ली का हर गाँव स्वाभिमान के साथ जाना जाए न कि किसी गुलामी के प्रतीक से, आज सीएम अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर गुलामी के प्रतीक 40 गाँवों के नाम बदलकर स्वतंत्रता सेनानियों और महान विभूतियों के नाम पर रखे जाने की माँग की, आशा है कि वे राजनीति से ऊपर उठकर शीघ्र स्वीकृति देंगे।”

उन्होंने कहा कि मोहम्मदपुर के साथ ही हुमायूंपुर, युसूफ सराय, मस्जिद मोठ, बेर सराय, मसूदपुर, जमरूदपुर, बेगमपुर, सदैला, फतेहपुर बेरी, हौजखास, शेख सराय, नेब सराय, मिर्जापुर, हसनपुर, गालिबपुर, ताजपुर खुर्द, नजफगढ़, अलीपुर सहित 40 गाँवों का नाम स्वतंत्रता सेनानियों, बलिदानियों और अलग-अलग क्षेत्र में विशेष उपलब्धि हासिल करने वालों के नाम के नाम पर रखा जाना चाहिए।

बता दें कि आदेश गुप्ता बुधवार (27 अप्रैल, 2022) को मोहम्मदपुर गाँव में जाकर इसका नाम बदलने की माँग करते हुए माधवपुर का बोर्ड लगाया था। उनका कहना है कि गाँववासियों की माँग पर लगभग चार माह पहले दक्षिणी दिल्ली नगर निगम ने इस संबंध में प्रस्ताव पास करके दिल्ली सरकार को भेजा था। दिल्ली सरकार ने अब तक इसे मंजूरी नहीं दी है।

दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष का कहना है कि देश स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने पर अमृत महोत्सव मना रहा है। इतने वर्षों बाद भी राजधानी के कई गाँवों के नाम गुलामी के प्रतीक वाले हैं। संभव है मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का ध्यान इस तरफ नहीं गया हो। भाजपा ने इस तरह के 40 गाँवों की पहचान की है। वहीं आदेश गुप्ता ने दिल्ली सरकार को लिखे पत्र में दावा किया है कि 40 गाँवों के नाम बदलने को लेकर गाँव के लोग सहमत हैं।

‘मैंने वो सब खो दिया था, जो वर्षों से बनाया था’: जम्मू-कश्मीर के पहले UPSC टॉपर शाह फैसल ने सेवा में लौटने के दिए संकेत, कहा- नई शुरुआत

जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के पहले संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) टॉपर रहे शाह फैसल (Shah Faesal) आईएस (IAS) की नौकरी छोड़कर राजनीति में जाने पर अफसोस जताया है। उन्होंने सरकारी सेवा में फिर से लौटने का संकेत दिया है। इस संबंध में उन्होंने बुधवार (27 अप्रैल 2022) को कई ट्वीट किए।

फैसल ने ट्वीट में कहा, “मेरे जीवन के 8 महीनों (जनवरी 2019-अगस्त 2019) ने इतना बेकार बना दिया था कि मैं लगभग समाप्त हो गया था। एक कल्पना का पीछा करते हुए मैंने लगभग वह सब कुछ खो दिया था, जो मैंने वर्षों में बनाया था। काम, दोस्त, प्रतिष्ठा और सार्वजनिक सद्भावना। लेकिन मैंने कभी उम्मीद नहीं खोई। मेरे आदर्शवाद ने मुझे निराश किया।”

अगले ट्वीट में उन्होंने कहा, “मुझे खुद पर भरोसा था कि मैं अपने द्वारा की गई गलतियों को नहीं दोहराऊँगा। यह जीवन मुझे एक और मौका देगा। मेरा एक हिस्सा उन 8 महीनों की याद से थक गया है और मैं उस याद को मिटाना चाहता हूँ। मुझे विश्वास है कि बाकी समय मिटा देगा।” उन्होंने कहा कि अतीत की छाया से अलग एक अद्भुत दुनिया है और 39 साल की उम्र में एक बार फिर से शुरुआत करने को लेकर बेहद उत्साहित हैं।

शाह फैसल का नाम पोस्टिंग की प्रतीक्षा वाले अधिकारियों की सूची में हैं। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने फैसल की पुन: नियुक्ति प्रक्रिया खोल दी है। माना जा रहा है कि फैसल आईएएस अधिकारी के रूप में या उप-राज्यपाल के सलाहकार की भूमिका मेें वापस सरकारी सेवा में लौटेंगे।

जम्मू-कश्मीर का सामान्य प्रशासन विभाग

बता दें कि साल 2019 में उन्होंने IAS पद से इस्तीफा दे दिया था। पिछले तीन वर्षों के दौरान उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया था। GAD डिपार्टमेंट के सूत्रों का कहना है कि जिस अधिकारी ने अपना इस्तीफा सौंप दिया था और स्वीकृति के लिए डीओपीटी- भारत सरकार को भेज दिया गया था, उन्हें सामान्य प्रशासन विभाग में पोस्टिंग के आदेश की प्रतीक्षा में रखा गया है।

साल 2009 में यूपीएससी टॉप करने वाले शाह फैसल ने देश में बढ़ती असहिष्णुता के नाम पर जनवरी 2019 में सरकारी नौकरी छोड़ते हुए इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उन्होंने मार्च 2019 में जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट नाम से एक राजनीतिक पार्टी बनाई थी। उनका उद्देश्य विधानसभा चुनाव लड़ना था, लेकिन राज्य में अनुच्छेद 370 हटने के बाद से जम्मू-कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश घोषित कर दिया गया और चुनाव नहीं संपन्न हुआ।

अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को खत्म करने के बाद शाह फैसल को हिरासत में भी लिया गया था। राज्य के बदले राजनीतिक हालात के बाद उन्होंने अगस्त 2020 में राजनीति छोड़ने की घोषणा कर दी। इसके बाद सरकारी सेवा में आने के उन्होंने कई बार संकेत दिए थे। केंद्र और भाजपा के कटु आलोचक रहे फैसल सोशल मीडिया पर केंद्र सरकार की नीतियों का खूब समर्थन करने लग गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के बयानों और भाषणों को भी खूब साझा करते रहे हैं।

उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा के लोलाब इलाके में जन्मे फैसल श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) में मेडिकल की पढ़ाई की थी और वहाँ वे गोल्ड मेडलिस्ट थे। जब फैसल 19 साल के थे तब साल 2002 में उनके शिक्षक पिता गुलाम रसूल शाह को आतंकियों ने हत्या कर दी थी।

आयशा के शौहर आरिफ खान को मिली 10 साल की सजा: दहेज को लेकर प्रताड़ित करने पर साबरमती नदी में कूदकर की थी आत्महत्या

अहमदाबाद की आयशा खान नाम की महिला ने फरवरी 2021 में आत्महत्या कर ली थी। अब इस मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया है। अहमदाबाद सत्र अदालत ने मामले में फैसला देते हुए आयशा के शौहर आरिफ खान को 10 साल कैद की सजा सुनाई है। बता दें कि आयशा ने अहमदाबाद में साबरमती नदी में कूदने से ठीक पहले एक वीडियो रिकॉर्ड किया था। यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में आयशा ने अपने शौहर और उसके परिवार पर दहेज और उत्पीड़न का आरोप लगाया था।

रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने सजा सुनाने के लिए आयशा द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो संदेश को अहम सबूत माना। अदालत ने कहा कि घरेलू हिंसा की सामाजिक बुराई को रोकने के लिए आरोपित को बख्शा नहीं जाना चाहिए। आरिफ की आवाज की भी जाँच की गई। फैसले में उसे भी अहम सबूत माना गया।

जानकारी के मुताबिक आयशा ने साबरमती नदी में कूदने से पहले अपने शौहर को भी बुलाया था। पुलिस ने आयशा और आरिफ के बीच 70 मिनट की कॉल रिकॉर्डिंग बरामद की थी जिसमें आरिफ को आयशा के ऊपर चिल्लाते हुए और कहते हुए सुना गया था, “जाओ मरो और मुझे अपनी मौत का वीडियो भेजो।”

आयशा की मौत के एक हफ्ते बाद और अधिक जानकारी सामने आई थी जिससे पता चला था कि उसके शौहर आरिफ का राजस्थान की एक लड़की के साथ एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर था। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि आयशा का शौहर आरिफ अपनी प्रेमिका को फोन करता था और आयशा के सामने ही उसके साथ अश्लील बातचीत करता था। अपने शौहर के उत्पीड़न के बावजूद, आयशा ने चुप रहने का फैसला किया और उससे सवाल-जवाब नहीं किया।

कथित तौर पर, आरिफ ने आयशा के सामने कबूल किया था कि उसके जीवन में एक और महिला थी और उसने कहा था कि वह उसे आयशा के लिए नहीं छोड़ेगा। इससे पहले 2020 में आयशा ने अहमदाबाद के वटवा पुलिस स्टेशन में आरिफ और उसके परिवार के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मामला भी दर्ज कराया था।

आत्महत्या करने से पहले उसने अपने माता-पिता को भी फोन किया। उसके माता-पिता ने आयशा को अपना फैसला बदलने के लिए मनाने की बहुत कोशिश की लेकिन वे असफल रहे। उसने अपनी अम्मी से कहा, “जो कुछ हुआ है, मैं उससे काफी निराश हूँ, मैं इसे और बर्दाश्त नहीं कर सकती, वह (उसका शौहर आरिफ) आजादी चाहता है, मैं उसे आजादी दूँगी।”

उसकी आत्महत्या पर सोशल मीडिया पर कई तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आई थी। अधिकारियों ने शव को बरामद कर लिया था और मामले में उसके शौहर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया था। बाद में उसे मार्च 2021 में गिरफ्तार कर लिया गया था। हालाँकि, अधिकांश लोगों ने महिला के प्रति सहानुभूति व्यक्त की, तो वहीं कुछ ऐसे लोग भी थे जिन्होंने शिकायत की कि उसने हलाल के ऊपर हराम को चुना।

शाहीन बाग से NCB ने ₹400 करोड़ मूल्य के 100Kg ड्रग्स किया बरामद, ₹30 लाख कैश भी जब्त: अफगानिस्तान से जुड़े तार

दिल्ली के जामिया नगर के शाहीन बाग (Shaheen Bagh, Jamia Nagar) में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने छापेमारी कर भारी मात्रा में हेरोइन एवं अन्य संदिग्ध पदार्थ बरामद किया है। NCB ने बुधवार (27 अप्रैल 2022) को 50 किलोग्राम हेरोइन और 47 किलोग्राम अन्य ड्रग बरामद किया है। इसके बाद साथ ही पैसे गिनने वाली मशीन के साथ भारी मात्रा में नकदी भी जब्त किया गया है।

NCB के DDG (Operation) संजय सिंह ने बताया कि एनसीबी दिल्ली जोन ने 27 अप्रैल को जामिया नगर के शाहीन बाग में एक आवासीय परिसर में छापेमारी की। इसमें 50 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाली हेरोइन, 47 किलोग्राम संदिग्ध नशीले पदार्थ, 30 लाख रुपये नकद और अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त की है।

संजय सिंह ने बताया कि हेरोइन एवं अन्य ड्रग की खेप अफगानिस्तान के रास्ते भारत पहुँची है, जिसे जामिया नगर में छिपा कर रखा गया था। वहीं, जब्त की गई नकदी हवाला के जरिए इकट्ठा करने का अंदेशा है। वहीं, इस मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार करने की बात कही जा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कुल कीमत लगभग 400 करोड़ रुपए से अधिक है।

बताया जा रहा है कि ये हेरोइन पेड़ की डालों में कैविटी बनाकर उसमें छिपाकर समंदर और फिर पाकिस्तान बॉर्डर के रास्ते भारत में लाया गया है। इसे फ्लिपकार्ट की पैकिंग में पैक किया गया था। इस ड्रग्स सिंडिकेट के तार पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली सहित देश के कई राज्यों से जुड़े होने का अंदेशा जाहिर किया जा रहा है।

NCB के DDG ज्ञानेश्वर सिंह के बताया कि इससे पहले भी ये सिंडिकेट अलग-अलग सामान में ड्रग छिपाकर भारत ला चुका है। इस सिंडिकेट से जुड़े लोग हेरोइन मैन्युफैक्चरिंग और अडल्टरिंग में माहिर हैं। वे इसका फायदा जाँच एजेंसियों को चकमा देने में करते हैं। इस सिंडिकेट से जुड़े लोगों के अन्य शहरों के ठिकानों पर भी जाँच चल रही है।

बता दें कि शाहीन बाग वही जगह हैं, जहाँ CAA-NRC के विरोध में महीनों तक सड़कों को जाम रखकर पूरी राजधानी को बंधक बना लिया गया था। यहाँ दिल्ली भर लोगों को लाकर पर प्रदर्शन में बैठाया जाता था और उन्हें रहने-खाने की मुफ्त व्यवस्था की जाती थी। यहाँ तक कहा जाता है कि प्रदर्शन में शामिल करने के लिए लोगों को दिहाड़ी दी जाती थी।

‘राजस्थान में तुरंत बदलें CM, नहीं तो होगा पंजाब जैसा हाल’: सचिन पायलट ने कॉन्ग्रेस आलाकमान को दी चेतावनी, संकट गहराया

राजस्थान कॉन्ग्रेस में एक बार फिर से सियासी उथल-पुथल शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कॉन्ग्रेस नेता सचिन पायलट के बीच की अनबन की खबरें एक बार फिर मीडिया की गलियारे में है। सूत्राें का दावा है कि कॉन्ग्रेस नेता सचिन पायलट ने सोनिया गाँधी से मुलाकात कर अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री पद से हटाने की माँग की है। वहीं इधर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के कॉन्ग्रेस में एंट्री न होने की पीछे की वजह अशोक गहलोत बताए जा रहे हैं।

NDTV ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि सचिन पायलट ने पिछले दिनों गाँधी परिवार के साथ तीन बैठकें की है। बताया जाता है कि इस दौरान पायलट ने कॉन्ग्रेस आलाकमान से कहा कि गहलोत को हटाने में देर करने पर राजस्थान में पंजाब जैसी स्थिति हो जाएगी। सूत्रों का यह भी कहना है कि सचिन पायलट ने सोनिया से खुद को सीएम बनाने की माँग भी की है।

सचिन पायलट ने सोनिया गाँधी से साफ शब्दों में कह दिया कि यदि राजस्थान में कॉन्ग्रेस सरकार रिपीट करनी है तो अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री पद से हटाना ही होगा। पायलट से पहले सोनिया गाँधी ने सीएम अशोक गहलोत को नई दिल्ली में मुलाकात के लिए बुलाया था। वहीं पाँच दिन पहले ही 23 अप्रैल को राजधानी जयपुर में राजस्व सेवा परिषद के जयपुर में एक कार्यक्रम में गहलोत ने कहा था कि उनका इस्तीफा तो 1998 से परमानेंट सोनिया गाँधी के पास रखा हुआ है। जब मुख्यमंत्री बदलना होगा तो किसी को कानो-कान खबर तक नहीं लगेगी। यह काम रातो-रात हो जाएगा। इस पर कोई चर्चा और चिंतन नहीं होगा। सोनिया गाँधी फैसला लेने के लिए स्वतंत्र है। इसलिए अफवाहों पर ध्यान न दें।

इधर बताया जा रहा है कि किशोर के कॉन्ग्रेस में न आने की वजह गहलोत ही हैं। पीके का पार्टी में न आना गहलोत के लिए फायदेमंद और सचिन पायलट के लिए नुकसानदेह है। ऐसा इसलिए क्योंकि प्रशांत किशोर ने कहा था कि पार्टी में युवा चेहरों को आगे लाना चाहिए। ऐसे में सचिन पायलट को मौका मिल सकता था। वहीं यह फैसला गहलोत के लिए राहत भरा रहा। उन्होंने पिछले दिनों पीके के कॉन्ग्रेस में शामिल होने का विरोध किया था। गहलोत के खास वफादार माने जाने वाले तकनीती शिक्षा मंत्री डाॅ. सुभाष गर्ग ने भी इस तरफ इशारा किया। उन्होंने ट्विटर पर लिखा- “किसी संगठन को मजबूत व ताकतवर केवल नेतृत्व व कार्यकर्ता ही बना सकते हैं। कोई सलाहकार व सेवा प्रदाता नहीं। नेतृत्व के चाणक्य की जरुरत है न कि व्यापारी की।”

हालाँकि, राजस्थान राज्य में सचिन पायलट के खेमे ने कहा है कि पायलट लड़ना बंद नहीं करेंगे, वह किसी भी ‘लॉलीपॉप’ के लिए अपना राजनीतिक स्थान नहीं छोड़ेंगे। उल्लेखनीय है कि राजस्थान में दिसंबर 2023 में चुनाव होने हैं। ऐसे में सचिन पायलट ने अपनी बात पार्टी के प्रमुख के सामने रख दी है। दो साल पहले, पायलट ने जब सीएम के पद के लिए अपनी दावेदारी की थी तो उन्‍हें 18 विधायकों का साथ मिला था। वहीं प्रदेश के मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत को अपने विधायकों को लेकर रिसॉर्ट में रहना पड़ा था।