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‘मौलवी शौहर बनाता है मेरे न्यूड वीडियोज, जादू-टोने के लिए ले जाता है अंडरगार्मेंट्स’: महिला ने बयाँ किया दर्द – कर लिया है दूसरा निकाह भी

मध्य प्रदेश के इंदौर से एक शर्मनाक मामला सामने आया है। एक महिला ने अपने शौहर पर न्यूड वीडियो बनाने, दहेज के लिए प्रताड़ित करने और जादू-टोने के लिए उसके अंडरगारमेंट्स का इस्तेमाल करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता ने बताया कि उसका शौहर मौलवी है और न सिर्फ उसने दूसरा निकाह कर लिया है, बल्कि उसके बाथरूम, बेडरूम में कैमरा लगाकर उस पर दिन भर निगाह भी रखता है। वह उसे आए दिन उसके साथ मारपीट करता है और खाने का खर्चा भी नहीं देता है।

महिला की शिकायत पर शनिवार (16 अप्रैल, 2022) को सदर बाजार थाने में आरोपित शौहर के खिलाफ दहेज प्रताड़ना और मारपीट के दो केस दर्ज किए हैं, लेकिन उसे अभी तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है।

दहेज में टाटा मैजिक, प्लॉट माँग कर प्रताड़ित करने लगा

38 वर्षीय महिला ने ‘दैनिक भास्कर’ से अपनी आप बीती बताई है। उसने बताया कि वह सात भाइयों की इकलौती बहन है। 8 अप्रैल, 2010 को उसका निकाह जूना रिसाला में स्थित एक मस्जिद के मौलवी के साथ हुआ था। वह बडवाली चौकी के पास रहता था। महिला ने बताया, “वह मुझे निकाह के बाद से ही दहेज में टाटा मैजिक, प्लॉट आदि की माँग कर प्रताड़ित करने लगा था। मेरा परिवार उसे यह सब देने में असमर्थ था। इसलिए वह आए दिन मेरे साथ मारपीट करता मुझे गालियाँ देता।” पीड़िता ने यह भी बताया कि उसका शौहर उसे खाने में नशे की चीज मिलाकर देता था, जिससे वो बेहोश हो जाती थी।

बकौल पीड़िता, इसके बाद वह उसके सोते हुए उसका न्यूड वीडियो बनाता था। फिर वीडियो बनाने के बाद उसे दिखाता। जादू-टोना करने के लिए उसके अंडरगारमेंट्स भी ले जाता है।

पीड़िता के मुताबिक, उसने (शौहर) दूसरा निकाह भी कर लिया है और उन्हें तलाक की धमकी देता है। घर से निकल जाने को कहता है। एक तो खाने को भी नहीं देता, ऊपर से दिनभर भूखा रखता है। पीड़िता ने बताया, ” वो घर में ताला लगाकर कई दिनों के लिए चला जाता है। पिछले तीन सालों से वह मुझे बहुत ज्यादा प्रताड़ित करने लगा है। मैं अपने भाइयों से मदद लेती रहती हूँ, लेकिन उनका भी परिवार है। वह कब तक मुझे देखते रहेंगे। दो दिन पहले भी उसने मुझसे मारपीट की। मुझे सीढ़ियों से घसीटा, जिससे मेरे कूल्हे की हड्‌डी फ्रैक्चर हो गई।”

बेडरूम और बाथरूम पर नजर रखता

महिला ने आगे बताया कि वह किस तरह मोबाइल से उसके बेडरूम और बाथरूम पर नजर रखता है। उन्होंने बताया, “मेरे शौ​हर ने घर के हर कमरे में कैमरे लगाए हुए हैं। जब मैं बेडरूम में कपड़े बदल रही होती हूँ तो वह मोबाइल से मेरा वीडियो बना लेता है। बाथरूम में भी कैमरा लगा रखा है। बाथरूम में नहाते हुए भी मेरे वीडियो बनाता है। कैमरे के ​जरिए मेरी दिनभर की गतिविधियों पर नजर रखता है। वो मेरे अंडरगारमेंट्स से ताबीज बनाता था। इन्ही गलत हरकतों के कारण उसे मस्जिद से भी निकाल दिया गया।”

पीड़िता के माता-पिता और सास-ससुर का इंतकाल हो चुका है। उनके (महिला) शब्दों में, “भाइयों का अपना-अपना परिवार है। मेरे लिए कोई घर नहीं है, इसलिए सब सहन करती रही। तीन साल से मामला ज्यादा बढ़ गया है, क्योंकि वो मुझे जिस्मानी और दिमागी रूप से ज्यादा प्रताड़ित करने लगा है। दूसरी शादी करने के बाद मुझसे कहता है तुझे मर जाना चाहिए। सौतन भी उसे कुछ नहीं समझाती है।”

वहीं पीड़िता के वकील एनके सोनी का कहना है महिला का आशिक मिजाज शौहर उसके वीडियो रिकॉर्ड करता है। पिछले महीने भी उसने मारपीट की तो केस दर्ज हुआ था। उसने दूसरा निकाह कर लिया और चाहता है कि उसकी पहली बीवी घर से खुद ही निकल जाए।

अंग्रेजी के आतंक का ‘देवनागरी लिपि’ बन सकती है समाधान, हिंदी से जुड़ कर इस तरह देना होगा साथ

संसदीय राजभाषा समिति की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अंग्रेजी के विकल्प के रूप में हिंदी को अपनाने का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने बताया कि उत्तर-पूर्व के नौ समुदाय अपनी भाषाओं की लिपि के रूप में देवनागरी लिपि को अपना चुके हैं। उत्तर-पूर्व के सभी आठों राज्यों ने दसवीं कक्षा तक हिंदी को अनिवार्य बनाने पर भी सहमति व्यक्त की है। अमित शाह ने यह भी कहा कि हिंदी का विकास और विस्तार भारतीय भाषाओं की कीमत पर नहीं, बल्कि अंग्रेजी के बरक्स होना चाहिए। हालाँकि, कुछ विरोधवादियों को उनकी यह बात रास नहीं आई है। इनमें तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन, केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन, ए आर रहमान और प्रकाश राज जैसे लोग शामिल हैं। दुर्भाग्यपूर्ण है कि औपनिवेशिक हैंगओवर के शिकार ये लोग अंग्रेजी की वकालत कर रहे हैं। ए आर रहमान और प्रकाश राज जैसे ‘हिंदी की खाने वाले और अंग्रेजी की बजाने’ वालों के बयान भारत की आत्मा से न जुड़ पाने का दुष्परिणाम हैं।

अंग्रेजी से आशंकित हैं भारतीय भाषाएँ

अमित शाह का बयान इस संदर्भ में विशेष महत्व का है कि अभी देशभर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू करने के लिए जोर-शोर से काम हो रहा है। इस नीति में शिक्षा का माध्यम मातृभाषाओं या भारतीय भाषाओं को बनाने पर विशेष बलाघात है। किंतु वर्तमान शैक्षिक-सांस्कृतिक परिदृश्य में यह कार्य अत्यंत चुनौतीपूर्ण है क्योंकि भारतीय भाषाएँ औपनिवेशिक भाषा अंग्रेजी से आशंकित, आक्रांत और असुरक्षित हैं। वह धीरे-धीरे भारतीय भाषाओं को लीलती जा रही है। भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल हिंदीतर 21 भारतीय भाषाओं की जगह बौद्धिक जगत में क्रमशः सिकुड़ती जा रही है। अंग्रेजी भाषा के वर्चस्व में क्रमशः बढ़ोतरी हो रही है। सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन, शासन-प्रशासन, बाजार-व्यापार के अलावा शिक्षा के माध्यम के रूप में भी अंग्रेजी ने अभूतपूर्व बढ़त बनाई है। यह आज की बड़ी चुनौती है। वर्तमान केंद्र सरकार के प्रयत्नों से हिंदी और मराठी, तमिल, तेलगु, कन्नड़, मलयालम, असमिया, डोगरी, कश्मीरी और पंजाबी आदि अन्य भारतीय भाषाओं को समर्थन, सम्मान और स्वीकृति प्रदान करने से स्थिति कुछ संतुलित तो हुई है; किंतु अभी बहुत काम करने की आवश्यकता है। मातृभाषा में शिक्षण शिक्षार्थी की बौद्धिक क्षमताओं के अधिकतम विकास और भारतीय भाषाओं के प्रचार-प्रसार की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण भी है। यह भारत को वैश्विक ज्ञान शक्ति अर्थात विश्वगुरू बनाने की महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला है। भारत के सांस्कृतिक गौरव की प्रतिष्ठा का प्रस्थान-बिंदु भारतीय भाषाओं का पारस्परिक संपर्क, संवाद और संगठन है।

अंग्रेजी वर्चस्ववाद से निपटने के लिए भारतीय भाषाओं को एक-दूसरे के निकट आने की आवश्यकता है। उनके आपसी अपरिचय और अलगाव को मिटाने की दिशा में प्रयत्नशील होने की आवश्यकता है। भारतीय भाषाओं के विकास, प्रचार-प्रसार और आपसी संपर्क-संवाद में देवनागरी लिपि की निर्णायक भूमिका हो सकती है। तमाम भारतीय भाषाओं के श्रेष्ठतम साहित्य को देवनागरी लिपि में लिप्यान्तरित करके बहुसंख्यक और व्यापक हिंदी समाज तक लाने की जरूरत है। सभी भारतीय भाषाओं द्वारा राष्ट्रलिपि या संपर्क लिपि के रूप में देवनागरी लिपि को अपनाने की बात राजा राममोहन राय, लोकमान्य तिलक, महर्षि दयानंद सरस्वती, महात्मा गाँधी, आचार्य विनोबा भावे, कृष्णस्वामी आयंगर, मुहम्मद करीम छागला और बिनेश्वर ब्रह्म जैसे अनेक महापुरुषों ने समय-समय पर की है। आज संकीर्ण राजनीति और क्षेत्रवादी अस्मिताओं से ऊपर उठकर उनके उस स्वप्न को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ने का समय है। ‘देवनागरी के नवदेवता’ बिनेश्वर ब्रह्म ने तो इस स्वप्न के लिए ही अपना प्राणोत्सर्ग भी किया था।

एक लिपि होने से क्या होगा फायदा

भारतीय भाषाओं की एक लिपि होने से उनके बीच का अपरिचय, अविश्वास और दूरी मिटेगी। वे एक-दूसरे के अधिक निकट आ सकेंगी। उनके बीच अधिक आत्मीयता पैदा होगी और उनमें बहनापा बढ़ेगा। यह एक दूरगामी महत्व की परियोजना है। संस्कृत से उद्भूत भारतीय भाषाओं और लिपि-हीन भाषाओं एवं बोलियों की लिपि के रूप में देवनागरी लिपि को अपनाकर यह शुरुआत की जा सकती है। आज जम्मू-कश्मीर, उत्तर-पूर्व, अंडमान-निकोबार और गोवा आदि की अनेक ऐसी भाषाएँ एवं बोलियाँ हैं जो लिपि न होने के अभाव में अस्तित्वसंकट से जूझ रहीं हैं। इन क्रमशः विलुप्त हो रही भाषाओं में श्रुत/मौखिक साहित्य की अत्यंत समृद्ध परम्परा रही है। उस दुर्लभ साहित्य को न सिर्फ संरक्षित करने की आवश्यकता है; बल्कि उसे अब तक अपरिचित रहे व्यापक समाज के बीच ले जाने की भी आवश्यकता है। नयनार-आलवार संतों के साहित्य, जयदेव के गीतगोविन्दं, नानकदेव की गुरुवाणी, शंकरदेव के पदों, लल्लेश्वरी के बाख़, तुलसीदास की रामचरितमानस और गुरुदेव की गीतांजलि को हर साक्षर भारतीय को पढ़ना चाहिए। इससे सामाजिक निकटता और सांस्कृतिक प्रगाढ़ता बढ़ेगी।

तमिल, तेलगु, कन्नड़, मलयालम आदि जिन भारतीय भाषाओं की अपनी पृथक लिपि है; उनकी सह-लिपि के रूप में देवनागरी लिपि को अपनाने से अनेक सामाजिक-सांस्कृतिक संकीर्णताओं का निदान हो सकता है। भारत की भाषानीति लम्बे समय से चर्चा और चिन्तन का केंद्र रही हैI भारत बहुभाषिक, बहुलिपिक देश है। लेकिन इस बहुलता के बावजूद भारतीयता की अंतर्धारा उसे उसकी सबसे बड़ी विशिष्टता है। भारतीयता की इस अंतर्धारा को और अधिक पुष्ट करने में राष्ट्रभाषा हिंदी की तरह ही राष्ट्रलिपि देवनागरी लिपि की बड़ी भूमिका हो सकती है। तमाम विरोध और संकीर्ण राजनीति को पीछे छोड़ते हुए आज हिंदी देश की स्वाभाविक संपर्क भाषा बन गई है। वह राष्ट्रीय एकीकरण की भी संवाहिका है। इसी प्रकार देवनागरी लिपि को समस्त भारत की संपर्क लिपि बनाने हेतु देशवासियों को संगठित और सक्रिय होना चाहिए। भाषा विशेष की विशिष्ट ध्वनियों को समायोजित करने के लिए देवनागरी लिपि में आंशिक संशोधन/परिवर्द्धन भी किया जा सकता है। देवनागरी लिपि को लचीलापन और उदारता दिखानी चाहिए ताकि अधिकाधिक भारतीय भाषाओं के साथ उसकी सहज निकटता और आत्मीयता स्थापित हो सके।

तमाम भाषाशास्त्री भाषा-शिक्षण के अंतर्गत चार भाषिक कौशलों का उल्लेख करते हैं-सुनना,बोलना,लिखना और पढ़ना। सुनना और बोलना नामक दो भाषिक कौशल भाषा-अधिगम का प्रथम चरण हैं; जबकि लिखना और पढ़ना द्वितीय चरण माने जाते हैं। भाषा-अधिगम के द्वितीय चरण का सम्बन्ध लिपि से है। भारतीय भाषाओं के लिए एक लिपि को अपनाकर भाषा अधिगम की जटिल प्रक्रिया को बहुत सरल और सर्वसाध्य बनाया जा सकता है। ऐसा करके सिर्फ प्रथम चरण के साथ ही नई-नई भाषाओं को सीखा जा सकेगा। द्वितीय चरण के मुश्किल होने के कारण ही किसी भी भाषिक समुदाय में प्रथम चरण में दक्ष अर्थात सुनने-बोलने वाले लोग द्वितीय चरण में दक्ष अर्थात लिखने-पढ़ने वालों की तुलना में बहुत अधिक होते हैं। प्रथम चरण भी काफी आसान हो जाएगा क्योंकि कश्मीर से कन्याकुमारी तक और कच्छ से कामरूप तक भारतीय भाषाओं के सांस्कृतिक सन्दर्भ और शब्दावली काफी मिलती-जुलती है। इसका मूल कारण यह है कि अनेक भारतीय भाषाओं की व्युत्पत्ति वेदभाषा संस्कृत से हुई है। यह भारतीयों को बहुभाषिक बनाने की भी कुंजी है। शिक्षित भारतीय अनेक भाषाओं को आसानी से पढ़-लिख सकेगा और उनके समृद्ध साहित्य, अन्तर्निहित सांस्कृतिक परम्पराओं से परिचित हो सकेगा। उल्लेखनीय तथ्य यह भी है कि भारतीय भाषाएँ परस्पर प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि संपूरक हैं। देवनागरी लिपि को अपनाने से यह पस्परता और संपूरकता क्रमशः बढ़ेगी। भारतीय भाषाओं में शत्रुता नहीं, मैत्री और लेन-देन जरूरी है।

हिंदी के साथ जुड़कर समृद्ध होंगी भारतीय भाषाएँ

अरब जगत की अधिकांश भाषाओं की लिपि अरबी और यूरोप-अमेरिका की अनेक भाषाओं की लिपि रोमन है। इसलिए उनमें न सिर्फ बेहतर सामाजिक-सांस्कृतिक संवाद है, बल्कि व्यापार और पर्यटन भी खूब फल-फूल रहा है। आज बाज़ार और भाषा का अन्यान्योश्रित सम्बन्ध है। भाषा के माध्यम से बाजार का विस्तार होता है और बाजार के द्वारा भाषा का प्रचार-प्रसार होता है। इसीलिए हिंदी का इतना विकास और विस्तार हो रहा है। अन्य भारतीय भाषाएँ देवनागरी लिपि के माध्यम से अपनी बड़ी बहन हिंदी के साथ जुड़कर न सिर्फ सांस्कृतिक रूप से समृद्ध होंगी; बल्कि रोजगार, व्यापार और पर्यटन क्षेत्र में भी अपनी जगह बना सकेंगी। बड़े बाजार की भाषा होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भाषा की पहचान और पूछ बढ़ती है। वह अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को प्रभावित करते हुए विदेश-नीति निर्धारण में निर्णायक हस्तक्षेप कर सकती है। अंग्रेजी के भाषिक आतंकवाद से निपटने के लिए भारतीय भाषाएँ साझा सांस्कृतिक पृष्ठभूमि, समान शब्दभंडार और देवनागरी लिपि के आधार पर एक संयुक्त मोर्चे का निर्माण कर सकती हैं। डोगरी भाषा की मूल लिपि टाकरी और कश्मीरी भाषा की शारदा थी। लेकिन समयांतराल में डोगरी ने देवनागरी और कश्मीरी ने नस्तालिक को अपना लिया। आज डोगरी हिंदी समाज द्वारा भी पढ़ी-समझी जाती है। लेकिन कश्मीरी भाषा क्रमशः सिमट-सिकुड़ रही है। वह भी देवनागरी को अपनाकर अपना हिंदी और भारतीय भाषाओं से जुड़ सकती है। अपना विकास और विस्तार कर सकती है। यूँ भी देवनागरी लिपि उसकी मुललिपि शारदा से ही विकसित हुई है। अतः स्वाभाविक रूप से उसकी लिपि देवनागरी लिपि ही होनी चाहिए।

यह किसी भी भारतीय भाषा या उसकी लिपि को खत्म करने या उसकी जगह को हड़पने की योजना नहीं; बल्कि भारतीय भाषाओं की आपसी समझदारी, साझेदारी और बहनापे को बढ़ाने की परियोजना है। इस परियोजना से किसी भी भारतीय भाषा को कोई खतरा नहीं होगा। अगर किसी को खतरा होगा तो औपनिवेशिक वर्चस्ववाद को ही होगा। रोमन लिपि के भारतीय भाषाओं की लिपि बन बैठने से पहले ही हमें इस खतरे से निपटने की दिशा में सक्रिय पहल करनी चाहिए। राजनीति जोड़-तोड़ का काम है। इसलिए वह जोड़ती भी है और तोड़ती भी है। लेकिन संस्कृति अगर वह वास्तव में संस्कृति है तो जोड़ती ही जोड़ती है। इसलिए इस परियोजना को फलीभूत करने का उत्तरदायित्व राजनेताओं से ज्यादा संस्कृतिकर्मियों का है। उन्हें आगे आकर और एकमत होकर राष्ट्रीय एकीकरण और भाषा संरक्षण की इस परियोजना में योगदान देना चाहिए।

(लेखक जम्मू केन्द्रीय विश्वविद्यालय के भाषा संकाय के अधिष्ठाता हैं।)

‘लड़कियों के सामने कूल बनने के लिए लेता था ड्रग्स’: बोले संजय दत्त – ‘भगवान शिव ने मुझे हमेशा बचाया, बचपन से उनका भक्त’

बॉलीवुड में ‘संजू बाबा’ नाम से जाने जाने वाले अभिनेता संजय दत्त आजकल ‘KGF-2’ को लेकर चर्चा में हैं। वैसे तो इस फिल्म में कन्नड़ अभिनेता यश मुख्य भूमिका हैं, लेकिन इसमें संजय दत्त मुख्य विलेन ‘अधीरा’ के किरदार में दिखे। ये उनकी कन्नड़ डेब्यू फिल्म भी है। इसी क्रम में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने इस बात को स्वीकार किया है कि वो ड्रग्स लेते थे। उन्होंने बताया कि वो लड़कियों के सामने कूल दिख सकें, इसीलिए ऐसा करते थे।

हाल ही में एक साक्षात्कार के दौरान एक्टर ने खुलासा किया, “मैं बहु शर्मीला था। खासकर महिलाओं के साथ। इसलिए मैंने ड्रग्स लेना शुरू कर दिया। मैंने कूल दिखना शुरू कर दिया था। अगर आप ड्रग्स लेते हो तो महिलाओं के सामने आप एकदम कूल बंदे बन जाते हो। आप उनसे बातें करने लगते हैं।”

अपने नशे के दिनों की यादों को ताजा करते हुए उन्होंने बताया, “मैंने अपनी जिंदगी के 10 साल अपने कमरे या बाथरूम में काटे हैं। मुझे शूटिंग्स में कोई रुचि नहीं थी। लेकिन इसी जिंदगी में सब कुछ बदल गया।” दत्त ने आगे कहा कि जब वो रिहैबिलिटेशन सेंटर से बाहर निकले तो लोग उन्हें ‘चरसी’ कहकर बुलाते थे। मैंने सोचा कि ये तो गलत है। सड़क पर चलने वाले लोग भी मुझे ऐसा कह रहे हैं। तभी मैने कुछ करने की ठानी और फिर वर्कआउट शुरू किया। कुछ दिनों के बाद मैं ‘चरसी’ से ऐसा बन गया कि लोग बोलते थे कि क्या स्वैग है, क्या बॉडी है।

YouTuber रणवीर इलाहाबादिया को दिए इंटरव्यू में संजय दत्त ने ये खुलासे किए। इसके साथ ही उन्होंने भगवान शिव को अपने जीवन में काफी प्रेरक बताया। एक्टर ने कहा कि वो बचपन से भगवान शिव के भक्त रहे हैं और उन्होंने हमेशा उन्हें बचाया है। उन्होंने कहा कि शिव ही मेरे लिए सबकुछ हैं। वो ही ब्रह्मांड हैं। एक्टर ने कहा कि जब मैं बच्चा था, तभी से भगवान शिव से मेरा जुड़ाव रहा है। (संजय दत्त ने ये बातें वीडियो 1:45 सेकंड से 3 मिनट के दौरान कहीं हैं।) उनके पूरे इंटरव्यू को आप यहाँ देख सकते हैं।

इसके साथ ही एक्टर ने अपने ड्रग्स के दिनों, जेल और कैंसर जैसी व्यक्तिगत जीवन में आई मुश्किलों को भी याद किया। गौरतलब है कि राजकुमार हिरानी की 2018 में आई फिल्म ‘संजू’ में भी संजय दत्त के संघर्ष के दिनों के बारे में दिखाया गया था। उल्लेखनीय है कि संजय दत्त की आगामी फिल्म अक्षय कुमार अभिनीत-पृथ्वीराज में है। फिल्म में मानुषी छिल्लर, साक्षी तंवर और सोनू सूद भी हैं। संजय रणबीर कपूर और वाणी कपूर स्टारर ‘शमशेरा’ का भी हिस्सा हैं।

आतंकियों से सीधे संपर्क में था गोरखनाथ मंदिर का हमलावर मुर्तजा, ISIS में होने वाला था शामिल: UAPA लगने के बाद NIA ले सकती है केस

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर में हमला करने वाला अहमद मुर्तजा अब्बासी आतंकियों के संपर्क में था और उसने कुख्यात आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (Islamic State) में शामिल होने की ऑनलाइन शपथ भी ली थी। ATS ने उसके खिलाफ गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया है।

यूपी के आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) द्वारा जुटाए गए सबूतों के आधार पर पता चला है कि वह कट्टरपंथियों से लगातार संपर्क में था। उसके घर से बरामद किए लैपटॉप और मोबाइल की फोरेेंसिक जाँच के बाद ATS ने UAPA की धारा बढ़ाई है। जल्दी ही इस केस को विशेष अदालत में स्थनांतरित कराया जाएगा। यह भी कहा जा रहा है कि NIA इस केस को अपने हाथ में लेगी।

रिमांड पूरा होने के बाद शनिवार (16 अप्रैल 2022) को उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में गोरखपुर जेल भेज दिया गया। मुर्तजा के दो वीडियो भी सामने आये थे, जिनमें वह खुद गोरखनाथ मंदिर में हमले के पीछे नागरिकता संशोधन कानून (CAA) व नेशनल रजिस्टर फॉर सिटीजन (NRC) को लेकर अपना गुस्सा जाहिर किया था।

बता दें कि UAPA लगने के बाद जाँच एजेंसियों को 180 दिन में चार्जशीट दायर करना होगा। वहीं, न्यायिक हिरासत भी 60 दिन मिलती है। आम अपराधों में जाँच एजेंसी को 90 दिन में चार्जशीट दायर करना होता है और आरोपित को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा जाता है, जिसे हर 14 दिन पर बढ़वाना भी पड़ता है। वहीं, UAPA लगने के बाद मामले की जाँच गजटेड ऑफिसर करता है।

जाँच के दौरान मुर्तजा के घर पुलिस को कई एयरगन और जेहादी साहित्य मिले थे। इनमें से कुछ अरबी भाषा में थे। वह अक्सर इस्लामिक कट्टरपंथियों का वीडियो देखा करता था। यही नहीं, वह सीरिया सहित अन्य देशों में आतंकी संगठनों को पैसे भी भेजता था।

यूपी एटीएस की जाँच में यह खुलासा भी हुआ है कि मुर्तजा सोशल मीडिया पर बहुत एक्टिव रहता था। फेसबुक पर उसकी 6 आईडी हैं और हर आईडी में करीब 1,000 दोस्त। इनमें उसके केवल मुस्लिम दोस्त ही हैं। एटीएस को इनमें अभी तक सिर्फ एक गैर-मुस्लिम युवक मिला है, जो महाराष्ट्र का रहने वाला है। उसने मुर्तजा के साथ आईआईटी (IIT) की पढ़ाई की है।

गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर पर 3 अप्रैल 2022 को हमला करने वाले मुर्तजा अब्बासी के अब्बा मुशीर अहमद अब्बासी को ATS ने तलब किया था। यह बात भी सामने आई थी कि मुर्तजा सीरिया भागने की फिराक में था। गोरखनाथ मंदिर पर हमले के बाद उसकी योजना नेपाल होते हुए सीरिया या अफगानिस्तान जाने की थी। वह आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के लिए केमिकल हथियारों की खेप तैयार करना चाहता था।

रिपोर्ट में बताया गया है कि इस्लामिक स्टेट ने 25 मार्च को एक वीडियो जारी किया था। इसमें नजर आ रहे आतंकी के हाथ में भी उसी तरह के हथियार थे जैसा मंदिर पर हमले के दौरान मुर्तजा ने ले रखा था। मुर्तजा अब्बासी का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। इसमें वह कह रहा है, “मेरे बड़े पापा ने कहा कि थोड़ा सीरियस लग रहा है। ये पुलिस वाले हैं और ये समन दे रहे हैं। कोई केस किए हो क्या? यहाँ रहोगे कि कहीं जाओगे? फिर हम दिमाग लगाए और निकल गए घर से। हम वहाँ से नेपाल चले गए।”

3 दिन में ₹419 करोड़: दुनिया भर के बॉक्स ऑफिस पर ‘रॉकी भाई’ की धूम, डेविड वार्नर पर भी चढ़ा खुमार

यश की कन्नड़ फिल्म ‘KGF 2’ ने रिलीज के पहले तीन दिनों में दुनिया भर के बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाते हुए 419 करोड़ रुपए से भी अधिक की कमाई कर ली है। फिल्म ने पहले दिन जहाँ 165.37 करोड़ रुपए कमाए थे, दूसरे दिन इसका वर्ल्ड वाइड कलेक्शन 139.25 करोड़ रुपए रहा। तीसरे दिन 115.08 करोड़ रुपए कमा कर इसने 419.70 करोड़ रुपए का आँकड़ा छुआ। रविवार (17 अप्रैल, 2022) को भी फिल्म 100 करोड़ रुपए से अधिक की ही कमाई करेगी।

इसका कारण है, हिंदी भाषा में डब किए गए इसके वर्जन का उत्तर भारत में सुपरहिट होना। फिल्म के हिंदी वर्जन ने तीसरे दिन 42.90 करोड़ रुपए नेट बटोरते हुए 143.64 करोड़ रुपए की कमाई कर ली। न सिर्फ मास सर्किट्स में इसका प्रदर्शन अच्छा रहा है, बल्कि मेट्रो शहरों में भी इसे बेहतर प्रतिक्रिया मिल रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि रविवार के कलेक्शंस को जोड़ते हुए फिल्म का हिंदी वर्जन 185 करोड़ रुपए नेट की कमाई कमाई कर लेगी।

उधर ऑस्ट्रेलियाई सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर पर भी ‘KGF 2’ का खुमार चढ़ गया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पेज पर शेयर किए गए वीडियो में ‘रॉकी भाई’ के डायलॉग को कॉपी किया। इससे पहले ‘अल्लू अर्जुन’ की ‘पुष्पा’ के दृश्य को भी उन्होंने रिक्रिएट किया था। डेविड वार्नर फ़िलहाल चल रहे IPL में ‘दिल्ली कैपिटल्स’ का हिस्सा हैं और वो शानदार खेल भी रहे हैं। पिछले साल वो ‘सनराइजर्स हैदराबाद’ में खेल रहे थे।

वहीं फिल्म क्रिटिक कमाल आर खान (Kamaal R Khan) ने ‘केजीएफ चैप्टर 2’ को लेकर विवादित ट्वीट किया है, जिसके बाद से वह यूजर्स के निशाने पर आ गए हैं। अपने विवादित बयानों के कारण अक्सर सुर्खियाँ बटोरने वाले केआरके ने ट्वीट किया, “मुझे 100 प्रतिशत यकीन था कि रेहड़ी वालों, ठेले वालों, रिक्शावालों और चायवालों को ‘केजीएफ चैप्टर 2’ जरूर पसंद आएगी। हैरानी की बात तो यह है कि सिंगल स्क्रींस पर फिल्म में भारी गिरावट आ रही है, जबकि मल्टीप्लेक्स में यह धूम मचा रही है। इसका मतलब जस्टिस काटजू ने सही कहा है कि 98% भारतीय अशिक्षित हैं।”

‘प्रार्थना तुम्हारी है, हमें क्यों सुनाते हो’ : राज ठाकरे ने फिर दिया मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने का अल्टीमेटम, बोले- हम दंगा नहीं चाहते

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS/मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे एक बार फिर से लाउडस्पीकर विवाद पर अपनी राय रखने मीडिया के सामने आए। रविवार को उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनकी लाउडस्पीकर हटवाने की माँग नमाज करने का विरोध नहीं है। वह बस चाहते हैं कि महाराष्ट्र में कोई दंगा न हो।

उन्होंने कहा, “हम महाराष्ट्र में कोई दंगे नहीं चाहते। किसी ने भी नमाज का विरोध नहीं किया। लेकिन अगर तुम मुस्लिम इसे लाउडस्पीकर पर करोगे तो हम भी लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करेंगे। मुस्लिमों को समझना होगा मजहब कानून से बड़ा नहीं है। हम 3 मई के बाद देखेंगे क्या कर सकते हैं।” उन्होंने जहाँगीरपुरी हिंसा को लेकर कहा, “मुझे लगता है कि ऐसी चीजों का जवाब उन्हीं ढंग में दिया जाना चाहिए। वरना लोगों को समझ में नहीं आएगी।”

उन्होंने पूछा कि नमाज के लिए फुटपाथ की जरूरत क्यों है? घर पर पढ़ो। वह बोले, “प्रार्थना आपकी है अगर तो हमें क्यों सुना रहे हो। अगर इन्हें हमारी बात समझ नहीं आती तो आपकी मस्जिद के सामने हनुमान चालीसा बजाएँगे। राज्य सरकार को हम कहते हैं कि हम इस मुद्दे से पीछे नहीं हटेंगे। आपको जो करना है करो।”

उन्होंने कहा, “ऐसा कौन सा धर्म है जो दूसरे धर्म तकलीफ देता है। हम गृह विभाग को कहना चाहते हैं हमें दंगे नहीं चाहिए। 3 मई तक सारे लाउडस्पीकर मस्जिद से हटने चाहिए। हमारी तरफ से कोई तकलीफ नहीं होगी।” उन्होंने मस्जिदों पर लगे लाउडस्पीकर्स को धार्मिक नहीं, सामाजिक मुद्दा बताया। वह बोले कि अगर एक दिन में लाउडस्पीकर से पाँच बार आजान होगी तो हम पाँच बार लाउडस्पीकर से हनुमान चालीसा पढ़ेंगे। 

उन्होंने मनसे को धमकी देने वालों को चेतावनी दी और कहा, “अगर कोई महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को धमकी दे रहा है तो मैं कहना चाहता हूँ कि हमने हाथ नहीं बाँधे हुए। अगर कुछ लोग पथराव कर रहे हैं तो उन्हें मुँहतोड़ जवाब मिलेगा। अगर वे लोग हथियार के साथ हैं तो ये याद रखा जाएग कि हम भी ऐसा ही करेंगे।”

अबू ज़ैद ने ‘राहुल’ बन कर हिन्दू नाबालिग लड़की को फाँसा, इंस्टाग्राम पर हुई थी दोस्ती: हिन्दू संगठनों ने पीड़िता को बचाया

सोशल मीडिया संवाद का बहुत अच्छा माध्यम है, लेकिन कुछ लोग इसका गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसा ही एक मामला मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर (Indore) से आया है, जहाँ इंस्टाग्राम (Instagram) के जरिए अबू जैद नाम के मुस्लिम युवक ने नाम बदलकर हिंदू नाबालिग किशोरी को अपने जाल में फँसा कर ‘लव जिहाद (Love Jihad)’ किया। हालाँकि, समय रहते इसकी भनक हिन्दू संगठनों लग गई और उन्होंने नाबालिग लड़की को उसके चंगुल से बचा लिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, 17 वर्षीय पीड़िता इंदौर के अमर टेकरी की रहने वाली है। वो 11वीं की छात्रा है। पीड़िता के पिता की मौत हो चुकी है और उसकी माँ एक फैक्ट्री में काम करती हैं। ऐसे में वो दिन भर घर में अकेली ही रहती थी। उसके साथ लव जिहाद की इस घटना की शुरुआत करीब 6 महीने पहले इंस्टाग्राम के जरिए हुई। इंस्टाग्राम पर उसकी मुलाकात उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के गाजीपुरा के रहने वाले अबू जैद पुत्र कलीम से हुई। इंस्टाग्राम पर अबू जैद ने पीड़िता को अपना नाम ‘राहुल’ बताया था। धीरे-धीरे दोनों की जान-पहचान हुई और दोस्ती गहरी होती गई। ये दोस्ती प्यार में बदल गई।

बुधवार (13 अप्रैल, 2022) को नाबालिग लड़की का बर्थडे था। ऐसे में पीड़िता को अपने साथ ले जाने के इरादे से आरोपित इंदौर पहुँच गया। इसके अगले दिन गुरुवार (14 अप्रैल) को उसने बैरवा समाज की धर्मशाला के नजदीक लड़की को मिलने के लिए बुलाया, तो लड़की घर से चली गई, लेकिन जब वो वापस नहीं लौटी तो माँ ने उसे तलाश करना शुरू कर दिया। आसपास के लोगों ने जब उसकी तलाश शुरू की तो वो आरोपित के साथ पाई गई।

हिंदू संगठनों ने किया पुलिस के हवाले

इसके बाद मामले की जानकारी जब हिंदूवादी संगठनों को लगी तो उन्होंने पहले उसे जमकर कूटा और फिर उसे पीटते हुए एमआईजी थाने लेकर गए और पुलिस के हवाले कर दिया। इस मामले में टीआई अजय वर्मा का कहना है कि लड़की की माँ की तहरीर पर पुलिस ने 27 वर्षीय अबू जैद को गिरफ्तार कर लिया है। वो उसे अपने साथ ले जाने की तैयारी में था। वो मजदूरी करता है। फिलहाल उसके आधार कार्ड, पैन कार्ड औऱ राशन कार्ड को जब्त किया गया है।

‘रेहड़ी, रिक्शा और ठेले वालों की पसंद है KGF 2, डायरेक्टर को जेल में डालो’: KRK ने 98% भारतीयों को बताया अशिक्षित

कन्नड़ सुपरस्टार यश (Yash) की फिल्म ‘केजीएफ चैप्टर 2’ को दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है। फिल्म को देखने के लिए हिन्दी भाषी दर्शक भी लगातार सिनेमाघरों का रुख कर रहे हैं। यश के फैंस को फिल्म की कहानी, उनकी दमदार एक्टिंग, अधीरा की एंट्री – सब कुछ बेहद पसंद आ रहा है। वहीं फिल्म क्रिटिक कमाल आर खान (Kamaal R Khan) ने ‘केजीएफ चैप्टर 2’ को लेकर विवादित ट्वीट किया है, जिसके बाद से वह यूजर्स के निशाने पर आ गए हैं।

अपने विवादित बयानों के कारण अक्सर सुर्खियाँ बटोरने वाले केआरके ने ट्वीट किया, “मुझे 100 प्रतिशत यकीन था कि रेहड़ी वालों, ठेले वालों, रिक्शावालों और चायवालों को ‘केजीएफ चैप्टर 2’ जरूर पसंद आएगी। हैरानी की बात तो यह है कि सिंगल स्क्रींस पर फिल्म में भारी गिरावट आ रही है, जबकि मल्टीप्लेक्स में यह धूम मचा रही है। इसका मतलब जस्टिस काटजू ने सही कहा है कि 98% भारतीय अशिक्षित हैं।”

इस ट्वीट के 10 मिनट बाद ही केआरके ने दूसरा ट्वीट किया। कमाल आर खान लिखते हैं, “मैं एक फिल्म डायरेक्ट करने के लिए पूरी तरह से तैयार हूँ और बॉलीवुड को बताना चाहता हूँ कि एक ब्लॉकबस्टर फिल्म कैसे बनाई जाती है।”

केआरके ट्वीट को लेकर सोशल मीडिया पर यश के फैंस बेहद नाराज हैं। एक यूजर ने लिखा, “तूने भी तो देखी है फिल्म, फिर तुम कौन सी कैटेगरी में फिट होते हो।” इतना ही नहीं, एक यूजर ने तो केआरके को कहा कि यह पूरी तरह से गलत है सर। एक फिल्म को पसंद करने से 98 प्रतिशत लोग अशिक्षित कैसे हो सकते हैं। ये बहुत गलत है।

केआरके के दूसरे ट्वीट पर भी फैंस ने उन्हें अपने निशाने पर लिया है। एक यूजर ने लिखा कि अपनी औकात से ज्यादा क्यों हर बार बोलता हो, बाद में थूक कर चाटते हो।

केआरके ने इससे पहले भी कई ट्वीट्स किए थे और केजीएफ 2 फिल्म को दिमाग की दही कर देने वाली बताया था। उनका कहना था कि उन्होंने बहुत फिल्में देखी हैं लेकिन ऐसी कभी नहीं देखी। उन्होंने फिल्म के निर्देशक प्रशांत के लिए कहा था कि ऐसी फिल्म बनाकर लोगों को बेवकूफ बनाने और लूटने के लिए जीवन भर के लिए उन्हें जेल में डाल देना चाहिए।

दरअसल, 14 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज हुई ‘केजीएफ: चैप्‍टर 2’ ​बॉक्स ऑफिस पर हिंदी से लेकर अन्य भाषाओं में जबरदस्त कमाई कर रही है। पहले दिन 134.5 करोड़ के साथ ओपनिंग करने वाली ‘केजीएफ: चैप्‍टर 2’ ने दूसरे दिन 112.95 करोड़ का नेट कलेक्शन किया। अब ‘केजीएफ: चैप्‍टर 2’ ने तीसरे दिन ताबड़तोड़ कमाई जारी रखी। ‘केजीएफ: चैप्‍टर 2’ ने रिलीज के तीसरे दिन केवल हिंदी में ही 42.90 करोड़ रुपए का बिजनेस किया। देशभर में 4000 से अध‍िक स्‍क्रीन्‍स पर रिलीज हुई डायरेक्टर प्रशांत नील की फिल्म ‘केजीएफ: चैप्‍टर 2’ ने हिंदी में अब तक 143 करोड़ से अधिक की कमाई कर ली है।

बता दें कि क्रिटिक केआरके आए दिन कलाकारों पर विवादित टिप्पणी करते रहते हैं। उन्होंने 21 मार्च को आमिर खान के लिए लिखा था, “आमिर खान ने साबित कर दिया है, कि वो सच्चा देशभक्त है! उसकी बीवी ने बोला था कि देश में डर लगता है! देश छोड़ दो! भाई ने बीवी छोड़ दी, लेकिन देश नहीं छोड़ा।”

आंध्र में ‘अल्लाह-हू-अकबर’ नारे के साथ हनुमान जयंती शोभा यात्रा पर पथराव, कई घायल: मस्जिद के पास घटना, DJ पर हुई थी बहस

भारत संभवत: दुनिया का अकेला देश है, जहाँ के बहुसंख्यक हिंदुओं को अपने त्योहार मानने पर कथित अल्पसंख्यकों का निशाना बनना पड़ता है। भारत में यह परिपाटी लंबे समय से चली आ रही है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से जो हमले देश भर में हो रहे हैं, वे एक एक ही पैटर्न में दिख रहे हैं। देश के कई राज्यों में रामनवमी से लेकर हनुमान जयंती तक पर बहुसंख्यकों को हमलों का सामना करना पड़ा रहा है। दिल्ली, उत्तराखंड, कर्नाटक के बाद आंध्र प्रदेश से भी ऐसी ही खबर आ रही है।

आंध्र प्रदेश के कुरनूल में भी हनुमान जन्मोत्सव की शोभायात्रा पर मुस्लिम ने अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाते हुए पत्थरबाजी की। इसके बाद दूसरे पक्ष ने भी जवाब में पत्थर फेंके। इस पत्थरबाजी में कुछ लोगों के घायल होने की खबर आ रही है। झड़प के बाद मौके पर पहुँचकर पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया।

विश्व हिन्दू परिषद (VHP) ने कुरनूल जिले के होलागुंडा के ईरला कट्टा में हनुमान जयंती के अवसर पर समारोह का आयोजन किया था। समारोह के दौरान जब शोभायात्रा आगे बढ़ने लगी तो पुलिस ने रास्ते में पड़ने वाली मस्जिद को देखकर डीजे पर चलने वाले संकीर्तन को जबरन बंद करा दिया।

शोभायात्रा जब गुजरी उस समय मस्जिद में रोजा इफ्तार चल रहा था। मस्जिद से आगे बढ़ने के बाद जब शोभायात्रा में डीजे बजने लगा तब मुस्लिमों ने अल्लाह-हू-अकबर का भड़काऊ नारे लगाते हुए पत्थरबाजी शुरू कर दी। इसके बाद दूसरे पक्ष ने भी जवाब में पत्थर चलाए। इस दौरान लगभग 10 मिनट तक पथराव होता रहा।

मौके पर पहुँचकर पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर कर दिया। बाद फुटेज के आधार पर पुलिस ने 20 लोगों को हिरासत में लिया है। एसपी का कहना है कि विहिप ने पुलिस सलाह को नहीं मानते हुए डीजे का इस्तेमाल किया था।

दिल्ली में फायरिंग और आगजनी

दिल्ली के जहाँगीरपुरी में भी शोभायात्रा पर एक हजार से अधिक मुस्लिमों की भीड़ ने पथराव किया और गोलियाँ चलाई थीं। इस हमले में पुलिस के अधिकारी को भी गोली लगी है। वहीं कई वाहनों में तोफोड़ करने के बाद उनमें आग लगा दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने अंसार और असलम सहित अभी 14 लोगों को गिरफ्तार किया है। इलाके में तनाव को देखते हुए भारी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है।

कर्नाटक में पत्थरबाजी

हनुमान जयंती (Hanuman Jayanti) के मौके पर मुस्लिम कट्टरपंथियों की भीड़ ने ओल्ड हुबली पुलिस स्टेशन पर (Karnataka Hubli Stone Pelting Violence) पथराव किया। इसमें एक इंस्पेक्टर सहित 4 पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। इस घटना के बाद अधिकारियों ने इस इलाके में धारा-144 लागू कर दी है। ।

जानकारी के अनुसार, एक थाने के बाहर जमा हुई मुस्लिमों की भीड़ अचानक हिंसक हो गई और थाने, पुलिस के वाहनों पर पथराव शुरू कर दिया। भीड़ को तितर-बितर करने और स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस को लाठी चार्ज और आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इस मामले में पुलिस 40 लोगों को गिरफ्तार किया है।

उत्तराखंड में हमला

उत्तराखंड के रुड़की स्थित भगवानपुर थाना क्षेत्र के डाडा पट्टी गाँव में हनुमान जन्मोत्सव की शोभायात्रा मुस्लिमों के मोहल्ले से होकर गुजर रही थी, तभी कट्टरपंथी मुस्लिमों ने शोभा यात्रा पर पथराव कर दिया। इस हमले में मंडावर चौकी प्रभारी आशीष नेगी के अलावा 10 से अधिक लोग घायल हो गए।

शोभायात्रा पर मुस्लिम मोहल्ले में घरों की छतों से किया गया। इस दौरान संपत्तियों को जलाने और उनमें तोड़फोड़ भी की गई। दंगाइयों ने कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया।

‘मस्जिद से पत्थरबाजी, दंगाई भीड़ में महिलाएँ-बच्चे भी’: गोली लगने से घायल इंस्पेक्टर ने बताया – बांग्लादेशी भाषा में लग रहे थे नारे

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जहाँगीरपुरी (Delhi Jahangirpuri riots) में हनुमान जयंती के मौके पर हिंदुओं द्वारा निकाली गई शोभा यात्रा पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने हमला किया था। मुस्लिम भीड़ ने ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगाते हुए दंगा, पत्थरबाजी, आगजनी और गोलीबारी की। ऐसी ही एक गोली वहाँ ड्यूटी पर तैनात सब इंस्पेक्टर मेदा लाल के हाथ पर लगी। इसमें वो गंभीर रूप से घायल हो गए। अस्पताल से घर लाए गए इंस्पेक्टर मेदा लाल ने खुद जहाँगीरपुरी के दंगे के बारे में बताया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, घायल मेदा लाल ने बताया, “पहले दो जुलूस निकल चुके थे और तीसरा जुलूस निकल रहा था, जो खत्म होने वाला था। जब ये मस्जिद सी ब्लॉक के सामने पहुँची, शोभा यात्रा में शामिल लोग श्रीराम के नारे लगाते हुए चल रहे थे, लेकिन मस्जिद के ऊपर से पत्थरबाजी शुरू हो गई। पहले तो दोनों को अलग कर दिया, लेकिन कुशल चौक पर पब्लिक दोबारा आ गई। हाथ में लाठी, डंडे, तलवार और काँच की बोतलें लेकर उन्होंने हमला कर दिया।”

पथराव कैसे हुआ इसको लेकर मेदा लाल का कहना है कि सी ब्लॉक में जहाँ पर मस्जिद थी, वहाँ पर पहले नारेबाजी हो रही थी, जिसके बाद पथराव हुआ। हालाँकि, हनुमान जयंती में शामिल लोग वहाँ से हटकर जी ब्लॉक की तरफ चले गए। लेकिन, बाद में मस्जिद के पास वाले दंगाई दोबारा से आ गए, उस भीड़ में बच्चे और महिलाएँ भी शामिल थीं। छतों के ऊपर से वो पत्थरबाजी कर रहे थे।

पुलिस अधिकारी के मुताबिक, गोली पब्लिक की तरफ से चलाई गई। 8-10 बार फायर किया गया, जिसमें से एक गोली उन्हें भी लगी। गोली उनके हाथ को फाड़कर आर-पार हो गई। हालाँकि, हड्डी में लगने के कारण उसकी दिशा बदल गई थी। दंगाई हाथ में तलवार, लाठी और मीट काटने वाला औजार लिए थी। वो लोग बांग्लादेशी भाषा में नारेबाजी कर रहे थे। उन्होंने बताया, “हमारे एक साथी कॉन्स्टेबल सुमन को पीठ पर और हाथ में तलवार से मारा गया। मेरे अलावा मेरे 6-7 और साथी भी घायल हुए हैं।”

सब इंस्पेक्टर मेदा लाल का कहना है कि दंगाइयों ने कई दुकानों, गाड़ियों में आग लगा दी। उन्होंने बताया, “मेरी पोस्टिंग जहाँगीरपुरी थाने में ही है। ये दंगा साजिश के तहत किया गया या नहीं ये तो नहीं कह सकते। लेकिन छतों से पत्थर और बोतलें फेंकी गई थीं।” पुलिस अधिकारी ने ये स्पष्ट किया कि गोली और पत्थरबाजी बंगाली भाषी लोगों द्वारा चलाई गई। जबकि, हनुमान जयंती में शामिल लोग उनके पीछे थे।

गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर से की बात

गौरतलब है कि इस दंगे के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली के पुलिस कमिश्नर से फोन पर बात कर हालात का जायजा लिया था। साथ ही केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने भी मौके पर पहुँच कर स्थिति को समझा।