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लखीमपुरी खीरी केस: सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा की जमानत रद्द की, एक हफ्ते में सरेंडर करने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (18 अप्रैल 2022) को लखीमपुर खीरी मामले में केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष की जमानत रद्द कर दी। शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए आशीष मिश्रा (Ashish Mishra) को एक सप्ताह में सरेंडर करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 4 अप्रैल 2022 को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इस मामले में आदेश सुरक्षित रख लिया था।

लखीमपुर खीरी हिंसा

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri) जिले के तिकुनिया (Tikunia Violence) में 3 अक्टूबर 2021 को हिंसा हुई थी। इस घटना में चार किसानों व एक स्थानीय पत्रकार समेत आठ लोगों की मौत हुई थी। आशीष मिश्रा और उसके साथियों पर आरोप था कि वह किसानों को अपनी गाड़ी से रौंदते हुए निकल गए थे। इसके बाद 4 अक्टूबर को तिकुनिया थाने में आशीष मिश्रा समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।

‘घटना एक सोची-समझी साजिश थी

लखीमपुर खीरी हिंसा की जाँच कर रही यूपी पुलिस की एसआईटी ने कोर्ट से कहा था कि 4 किसानों और एक पत्रकार की हत्या की घटना एक ‘सोची-समझी साजिश’ थी। केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा का पुत्र आशीष मिश्रा इस मामले के 13 आरोपितों में शामिल था। एसआईटी के आवेदन पर दलीलों को सुनने के बाद लखीमपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) ने 14 दिसंबर 2021 को इस मामले की पड़ताल कर रही SIT को मुकदमे में हत्या के प्रयास की धारा जोड़ने की इजाजत दी थी।

आशीष मिश्रा को मुख्य आरोपित बताया था

3 जनवरी 2022 को एसआईटी (SIT) ने CJM कोर्ट में इस मामले में चार्जशीट दायर की थी। एसआईटी ने 5,000 पन्नों की चार्जशीट में आशीष मिश्रा को मुख्य आरोपित बताया था। दिसंबर 2021 में एसआईटी ने कहा था कि आशीष मिश्रा ने सोची-समझी साजिश के तहत 4 किसानों की अपनी गाड़ी से कुचलकर हत्या कर दी थी। चार्जशीट में बाद में आशीष मिश्रा के साथ उसके साले वीरेंद्र शुक्ला का भी नाम जोड़ा गया था। उस पर पुलिस को झूठी सूचना देने और सबूत मिटाने का आरोप था। एसआईटी ने सभी आरोपितों पर 307, 326, 302, 34,120बी, 147, 148, 149 के तहत मामला दर्ज किया था।

9 अक्टूबर 2021 को गिरफ्तार किया गया था

आशीष मिश्रा को 9 अक्टूबर 2021 को 12 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया था। 12 घंटे तक चली लंबी पूछताछ में उससे 40 सवाल पूछे गए थे। लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में मुख्य आरोपित आशीष मिश्रा को 15 फरवरी को 129 दिन बाद जेल से रिहाई मिली थी। उसे इलाहाबाद हाई कोर्ट से 10 फरवरी को जमानत मिली थी।

जहाँगीरपुरी में मोहम्मद सोनू को पकड़ने गई पुलिस पर पत्थरबाजी, वीडियो में गोली चलाते दिखा था: बीवी हिरासत में

दिल्ली के जहाँगीरपुरी इलाके में पुलिस की टीम पर एक बार फिर पथराव की घटना सामने आई है। पुलिस इस इलाके में सोमवार (18 अप्रैल, 2022) को हिंसा में शामिल कुछ लोगों से पूछताछ करने के लिए गई थी। इसी बीच जब वह एक महिला से पूछताछ कर रहे थे, तभी कुछ लोगों ने अपने घरों से पुलिस पर पथराव करना शुरू कर दिया। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, दिल्ली के जहाँगीरपुरी में हनुमान जन्मोत्सव पर हुई हिंसा (Delhi Jahangirpuri Riot) के बाद से भारी पुलिस बल तैनात है। पुलिस लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पथराव के बावजूद पुलिस की टीम महिला को अपने ले गई। मोहम्मद सोनू, जो कि वीडियो में गोली चलाता दिख रहा है, वह महिला उसकी बीवी है। पुलिस ने इस मामले में पूछताछ करने के लिए उसे पकड़ा है। जहाँगीरपुरी हिंसा के 100 से ज्यादा वीडियो व सीसीटीवी फुटेज सामने आए हैं। इन्हीं में से एक वीडियो में मोहम्मद सोनू हिंसा में गोली चलाते हुए दिख रहा है। वह हिस्ट्रीशीटर सलीम चिकना का भाई है। वीडियो में देखा जा सकता है कि जब अन्य पत्थरबाज शोभा यात्रा पर पत्थर बरसा रहे थे, उसी बीच एक नीले रंग का कुर्ता और जालीदार टोपी पहना हुआ सोनू चिकना गोली चला रहा था।

हालाँकि, दिल्ली पुलिस ने पत्थरबाजी की इस घटना को तूल न देने का आग्रह करते हुए कहा है कि इसे बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया जा रहा है। दिल्ली पुलिस ने इसे छोटी और एक छिटपुट किस्म की घटना करार दिया। एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है।

उत्तर-पश्चिम जिले के डीसीपी ने एएनआई को बताया, ”17 अप्रैल को सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति (नीले कुर्ते में) जहाँगीरपुरी में हुई हिंसा के दौरान गोलियाँ चला रहा था। पुलिस की टीम सीडी पार्क रोड स्थित उसके घर पर तलाशी लेने और उसके परिवार वालों से पूछताछ करने के लिए गई थी।” उन्होंने बताया कि जब पुलिस उस शख्स के घरवालों से पूछताछ कर रही थी, तभी उसके परिवालों ने उन पर पथराव कर दिया। इस मामले में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है और उस पर उचित कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल स्थिति अभी पूरी तरह से नियंत्रण में है।

वहीं, दिल्ली के पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना (Rakesh Asthana) ने जनता से अफवाहों के ऊपर ध्यान नहीं देने को कहा है। उन्होंने कहा कि क्राइम ब्रांच ने 14 टीमें बनाई हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से कुछ लोग माहौल बिगाड़ रहे हैं, जो लोग गलत सूचना फैला रहे हैं उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

जहाँगीरपुरी में रहने वाले लोगों के मुताबिक, यहाँ हिन्दू महिलाओं का रेप और पुलिस से मारपीट आम बात है। स्थानीय निवासी दिनेश ने ऑपइंडिया से बताया, “ऐसे पीड़ितों की मदद भी कैसे की जा सकती है, जो डर और प्रताड़ना के कारण जगह छोड़ कर ही चले गए हैं।” उन्होंने बताया कि 4-5000 रुपए छीने जाने के एक मामले में आरोपित ने पुलिस पर ही पिस्तौल तान दी थी, ये 5-6 महीने पहले की बात है। उन्होंने याद दिलाया कि जहाँगीरपुरी में कभी मुहर्रम पर कोई खतरे की बात सामने नहीं आई, जबकि वहाँ हर साल इसके जुलूस निकलते हैं, क्योंकि हिन्दू लोगों ने कभी कोई दिक्कत नहीं की।

बता दें कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच इस मामले में अब तक 21 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें कई हिंदू भी हैं। इसके अलावा आरोपितों में 2 नाबालिग भी हैं। हिंसा में 8 पुलिसकर्मी सहित नागरिकों के घायल होने की सूचना भी है। जहाँगीरपुरी हिंसा के बाद क्राइम ब्रांच की टीम घटनास्थल पर पहुँचकर सबूत जुटा रही है। क्राइम ब्रांच के अलावा फोरेंसिक की एक भी टीम भी जहाँगीरपुरी के सी ब्लॉक मस्जिद में जाँच के लिए पहुँची है।

कर्नाटक हनुमान जयंती हिंसा: AIMIM पार्षद समेत 100 गिरफ्तार, CM बोम्मई ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी

हनुमान जयंती के मौके पर उत्तराखंड, दिल्ली समेत अन्य जगहों की तरह ही कर्नाटक के हुबली में भी इस्लामिक कट्टरपंथियों ने जमकर हिंसा और दंगा किया। रविवार (17 अप्रैल, 2022) को हुई इस घटना के बाद राज्य की पुलिस ने दंगाइयों के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। इस मामले में AIMIM पार्षद के पति समेत 100 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

इस हिंसा की घटना में एक इंस्पेक्टर समेत चार पुलिसकर्मी बुरी तरह से घायल हुए थे। हिंसा के बाद हालात को देखते हुए हुबली पुलिस स्टेशन इलाके समेत कई जगहों पर धारा 144 लगा दी गई। हुबली से पहले इसी तरह की हिंसा कोलार जिले में भी हुई थी। वहाँ मुलबगल इलाके में रामनवमी की शोभा यात्रा के दौरान पत्थरबाजी की गई थी, जिसके बाद वहाँ भी तनावपूर्ण हालात बन गए थे।

मुख्यमंत्री ने हिंसा को बताया साजिश

हुबली पुलिस स्टेशन में इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ के हमले के बाद राज्य के मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई ने इस घटना को पूरी तरह से एक सुनियोजित साजिश करार दिया था। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान दंगाइयों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसा करने वालों को ये नहीं भूलना चाहिए कि ऐसे मामलों में पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी। इसके साथ ही सीएम ने लोगों से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि उकसाने वालों पर भी कार्रवाई होगी।

क्या है पूरा मामला

कर्नाटक के हुबली में एक व्हाट्सएप स्टेटस लगाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की माँग को लेकर कट्टरपंथियों की भीड़ थाने के बाहर जमा हुई। ये उन्मादी भीड़ अचानक से हिंसा पर उतर आई। इसी भीड़ ने फिर थाने पर हमला किया, पुलिस वालों पर पथराव कर कई को जख्मी किया। यही नहीं हिंसक भीड़ ने वाहनों में भी जमकर तोड़फोड़ की।

दरअसल स्थानीय मीडिया के मुताबिक, एक युवक ने मस्जिद की तस्वीर को एडिट कर अपना व्हाट्सएप स्टेटस बनाया था। एडिट पोस्टर में उसने लिखा था, ”भगवान श्रीराम एक महान हिंदू सम्राट थे।” यह पोस्टर वायरल होते ही कट्टरपंथी मुस्लिम बेकाबू हो गए। इसके बाद उन्होंने उस युवक पर कार्रवाई की माँग करते हुए थाने और अस्पताल पर पथराव करना शुरू कर दिया। हालाँकि, युवक को भी गिरफ्तार कर लिया गया था।

मस्जिद के 100 मीटर दायरे और अजान के वक्त नहीं कर सकेंगे हनुमान चालीसा का पाठ: उद्धव की पुलिस का फरमान

महाराष्ट्र के नासिक में मस्जिदों के 100 मीटर दायरे में हनुमान चालीसा का पाठ नहीं किया जा सकेगा। इतना ही नहीं अजान से पहले और बाद में 15 मिनट के भीतर भी इसकी अनुमति नहीं होगी। न्यूज एजेंसी एएनआई ने नासिक के पुलिस कमिश्नर दीपक पांडे के हवाले से यह जानकारी दी है। पांडे ने कहा है कि हनुमान चालीसा या भजन बजाने के लिए अनुमति लेनी पड़ती है। ताजा आदेश का मकसद कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।

उन्होंने बताया कि सभी धार्मिक स्थलों को 3 मई तक लाउडस्पीकर के उपयोग की अनुमति लेने का निर्देश दिया गया है। 3 मई के बाद यदि कोई आदेश का उल्लंघन करता पाया जाता है तो उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नासिक में यह आदेश तब जारी किया गया है जब मस्जिदों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर विवाद चल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार सूबे में सभी धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर लगाने से पहले अब परमिशन लेने की आवश्यकता पड़ेगी। इसी के साथ राज्य के गृह मंत्री दिलीप वलसे पाटिल ने लाउडस्पीकर को लेकर जल्द गाइडलाइन जारी करने की बात कही है।

पाटिल ने कहा कि लाउडस्पीकर को लेकर राज्य के DGP और मुंबई के पुलिस कमिश्नर बैठकर निर्णय लेंगे और गाउडलाइन तय करेंगे। ये गाइडलाइन 1-2 दिन में जारी हो जाएँगे। उन्होंने कहा, “हमने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर नजर रखी है। राज्य में शांति भंग करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।” दूसरी तरफ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भी आज पाटिल के साथ राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति और सार्वजनिक स्थानों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के मुद्दे पर चर्चा करेंगे।

राज ठाकरे ने दिया था अल्टीमेटम

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने को लेकर मनसे लगातार प्रदर्शन कर रही है। बीते दिनों मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने शिवाजी पार्क में एक रैली को संबोधित करते हुए मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने की माँग की थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर तीन मई तक मुद्दे पर राज्य सरकार ने कार्रवाई नहीं की तो वह मस्जिदों के बाहर अपने लाउडस्पीकर लगाएँगे और तेज आवाज में हनुमान चालीसा बजाएँगे।

‘इंदिरा गाँधी ने चलवाई थी साधु-संतों पर गोलियाँ’: JP नड्डा का जनता के नाम पत्र, याद दिलाया राजीव गाँधी का ‘बड़ा पेड़’ वाला बयान

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा (JP Nadda) ने त्योहारों के बीच हो रहे दंगों पर जनता के नाम एक खुला पत्र लिखा है। उन्होंने कॉन्ग्रेस (Congress) पर निशाना साधते हुए उसके राज में हुए दंगों का जिक्र किया। नड्डा ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी का जिक्र करते हुए उनके उस बयान की याद दिलाई, जिसमें उन्होंने कहा कि था जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है। इसके साथ ही बीजेपी चीफ ने करौली हिंसा पर कॉन्ग्रेस की चुप्पी पर उसे घेरा।

बीजेपी चीफ ने कहा कि हम अभी आजादी के 75 साल पूरे होने उपलक्ष्य में ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि यही वो मौका है जब इस बात को लेकर योजना बनाने की जरूरत है, जब हम 2047 में आजादी के 100 साल पूरे करेंगे तो कैसा महसूस करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत का युवा वर्ग रुकावटों को पीछे छोड़ अवसरों को अपनाना चाहता है और विपक्ष से विकास को अपनाने की अपेक्षा भी रखता है।

इसके साथ ही नड्डा ने कॉन्ग्रेस शासनकाल में हुए दंगों की याद दिलाते हुए बंगाल और केरल में बीजेपी के कार्यकर्ताओं की हत्या किए जाने का जिक्र किया। महाराष्ट्र में राज्य सरकार के दो मंत्रियों जेल में होने पर कॉन्ग्रेस की चुप्पी पर सवाल जेपी नड्डा ने उठाया। अपने पत्र में नड्डा लिखते हैं कि देश में दशकों से वोट बैंक की राजनीति को साधने के लिए असामाजिक तत्वों से समझौता किया जाता रहा है। कॉन्ग्रेस को आत्ममंथन करने की सलाह देते हुए बीजेपी चीफ ने कहा कि कई दशकों से देश पर निर्बाध रूप से शासन करने वाली पार्टियाँ सिमट कर रह गई हैं, इसके लिए उन्हें सोचने की जरूरत है।

दंगों के लिए कॉन्ग्रेस को ठहराया जिम्मेदार

जेपी नड्डा ने हनुमान जयंती और रामनवमी जैसे त्योहारों के मौके पर हुई हिंसा के लिए कॉन्ग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। सांप्रदायिक हिंसा को समाज को तोड़ने की साजिश करार देते हुए नड्डा ने कॉन्ग्रेस पर गैर-जिम्मेदाराना रवैये का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यूपी, गोवा, उत्तराखंड और मणिपुर में चुनावों में जिस तरह की सफलता बीजेपी को मिली है, उससे कुछ लोग बेहद हताश हो गए हैं। इसीलिए देश को तोड़ने वाली साजिशों के साथ जोड़ लिया। साथ ही उन्होंने याद दिलाया कि कैसे कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहते कॉन्ग्रेस नेता सिद्धरमैया ने PFI के कट्टरपंथियों को छोड़ दिया।

इंदिरा गाँधी ने साधुओं पर चलवाई थी गोलियाँ

नड्डा ने आरोप लगाया कि 1966 में उस वक्त की पीएम रहीं इंदिरा गाँधी ने गौहत्या को बैन करने की माँग को लेकर संसद के बाहर धरने पर बैठे हिंदू साधुओं पर गोलियाँ चलवाई थीं। वहीं नड्डा ने पूर्व पीएम राजीव गाँधी के कुख्यात भाषण का भी उल्लेख किया जिसमें उन्होंने सिखों को नरसंहार को सही ठहराया था।

नड्डा ने ऐसे कई उदाहरण दिए जिसमें विपक्ष ने सत्ता में रहते हुए सांप्रदायिक हिंसा को बढ़ावा दिया। इसके अलावा उन्होंने गुजरात 1969 से भिवंडी 1984, मेरठ 1987, मुजफ्फरनगर 2013, असम 2012 और कश्मीरी पंडितों के खिलाफ 1980 के दशक में घाटी से उनके पलायन की घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने केंद्र में कॉन्ग्रेस और अन्य पार्टियों के शासन के तहत हुई कई बड़ी घटनाओं का उल्लेख किया।

जहाँगीरपुरी मस्जिद पहुँची फोरेंसिक टीम, सुप्रीम कोर्ट में दंगाइयों के बचाव में याचिका: अब तक 23 गिरफ्तारी, कई हिंदू भी

जहाँगीरपुरी हिंसा की जाँच में 23 लोगों की गिरफ्तारी होने के बाद अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया है। कोर्ट में याचिका डाल कर हिंसा की जाँच के लिए कमेटी गठित करने की माँग की गई है। याचिकाकर्ता ने भारत के चीफ जस्टिस एनवी रमना को पत्र लिखकर मामले में स्वत: संज्ञान लेने को कहा। माँग है कि कोर्ट की निगरानी में केस की जाँच हो। 

वकील अमृतपाल सिंह खालसा ने अपनी याचिका में कहा कि पिछले साल ही दिल्ली पुलिस को दिल्ली दंगे मामले में फटकार लगी थी। उस दौरान दिल्ली पुलिस की छवि कमजोर हुई थी और लोगों का विश्वास भी उन पर कम हुआ था। याचिकाकर्ता ने याचिका में दिल्ली पुलिस पर पक्षपाती जाँच और दंगे करने वालों को सीधे तौर पर बचाने का आरोप लगाया।

इस याचिका में याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि ये दूसरी बार है जब अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है। उनके पत्र के अनुसार, पहले हनुमान जन्मोत्सव में शामिल कुछ लोग मस्जिद में घुसे, वहाँ झंडा लगाया और फिर दूसरे समुदाय की ओर से पत्थरबाजी शुरू हुई। जबकि शोभा यात्रा में शामिल पुलिसकर्मियों का कहना है कि उनकी गाड़ी शोभा यात्रा के साथ-साथ थी और किसी ने भी दूसरे समुदाय के लोगों को भड़काने का काम नहीं किया

जहाँगीरपुरी हिंसा में 21 लोग गिरफ्तार

गौरतलब है कि इस मामले में अब तक दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच 23लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें कई हिंदू भी हैं। आरोपितों में 2 नाबालिग हैं। हिंसा में 8 पुलिसकर्मी सहित नागरिकों के घायल होने की सूचना है। घटना के बाद पुलिस अपनी तरफ से हाई अलर्ट पर है। हर जगह की अफवाहों को खत्म करने का प्रयास हो रहा है। पड़ताल में पुलिस साजिशकर्ताओं के बारे में जानकारी जुटा रही है।  खबर है कि जाँच में तीन तलवारें और पाँच पिस्टल बरामद हुई हैं।

हिंदू त्योहारों पर हिंदुओं को बनाया जा रहा निशाना, NIA से जाँच की माँग

केस की जाँच एनआईए से कराने की माँग भी सामने आई है। इस संबंध में विनीत जिंदल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी है। इसमें कहा गया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए और सात अलग-अलग राज्यों में देश भर में कई घटनाओं से पता चलता है कि देश भर में हिंदुओं को निशाना बनाने के लिए आइएस और अन्य राष्ट्र विरोधी और ताकतों के साथ आतंकी फंडिंग का लिंक है। याचिकाकर्ता ने इस बात पर दुख जताया कि हनुमान जन्मोत्सव और राम नवमी के शुभ अवसर देश के विभिन्न राज्यों में हिंसा की घटना सामने आई।

बता दें कि जहाँगीरपुरी हिंसा के बाद क्राइम ब्रांच की टीम घटनास्थल पर पहुँचकर सबूत जुटा रही है। क्राइम ब्रांच के अलावा फोरेंसिक की एक भी टीम भी जहाँगीरपुरी के सी ब्लॉक मस्जिद में जाँच के लिए पहुँची हैं।

मोहम्मद सोनू चिकना ने चलाई गोली, वीडियो में हुआ कैद

घटना के 100 से ज्यादा वीडियो व सीसीटीवी फुटेज सामने आए हैं। इन्हीं में से एक में हिंसा में गोली चलाने वाला मोहम्मद सोनू सामने आया है। उसकी गिरफ्तारी की पुष्टि अभी नहीं हो पाई है। वह हिस्ट्रीशीटर सलीम चिकना का भाई। वीडियो में दिख रहा है कि कैसे जब अन्य पत्थरबाज शोभायात्रा पर पत्थर बरसा रहे थे उसी बीच एक नीले कुर्ते और जालीदार टोपी में आकर गोली चलाता है। ये कोई और नहीं सोनू चिकना ही है।

‘जहाँगीरपुरी में हिन्दू महिलाओं का रेप और पुलिस से मारपीट आम’: स्थानीय का दावा – ममता बनर्जी के चुनाव में फंडिंग करते हैं बांग्लादेशी

दिल्ली के जहाँगीरपुरी में हनुमान जन्मोत्सव के दिन हुई हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस कार्रवाई में जुटी है। शोभा यात्रा निकाल रहे हिन्दू श्रद्धालुओं पर इस्लामी भीड़ ने पत्थरबाजी और गोलीबारी की। हिंसा में कई लोग और पुलिसकर्मी घायल हुए। अब तक 21 गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं। ऑपइंडिया ने इस हिंसा को लेकर स्थानीय लोगों से बातचीत की। जहाँगीरपुरी के H ब्लॉक में रहने वाले दिनेश ने बताया कि उन्होंने इस घटना के बारे में जाना-समझा है और ये नई नहीं है।

उन्होंने कहा कि जहाँगीरपुरी में इससे बड़ी-बड़ी घटनाएँ होती आई हैं और मीडिया में इसकी चर्चा तक नहीं होती। उन्होंने बताया कि कैसे छोटे-छोटे बच्चे हिन्दू महिलाओं को परेशान करते हैं। उन्होंने इलाके में कई हिन्दू महिलाओं का रेप होने का भी दावा किया। उन्होंने कहा कि शिकायत करने पर थाने में पुलिस वाले जबरन उनलोगों को ही परेशान करने लगते हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ दिनों पहले एक महिला का 15 दिनों तक बलात्कार हुआ था।

दिनेश ने बताया, “वो महिला हिन्दू थीं, जबकि बलात्कार आरोपित मुस्लिम थे। थाने के सामने उस महिला को आरोपितों ने मारा-पीटा। मुस्लिम बहुल इलाका होने के कारण उस महिला को वहाँ से घर बेच-बाच कर निकलने को मजबूर कर दिया है। एक अन्य लड़की के बलात्कार का मामला है। जहाँगीरपुरी पुलिस पर हमें भरोसा नहीं, इसीलिए नाम नहीं लूँगा। उस लड़की के परिवार को भी यहाँ से बाहर निकलना पड़ा। कोई FIR तक दर्ज नहीं की गई।”

उन्होंने अफ़सोस जताया कि ऐसी पीड़ितों की मदद भी कैसे की जा सकती है, जो डर और प्रताड़ना के कारण जगह छोड़ कर ही चले गए हैं। उन्होंने बताया कि 4-5000 रुपए छीने जाने के एक मामले में आरोपित ने पुलिस पर ही पिस्तौल तान दी, ये 5-6 महीने की बात है। उन्होंने याद दिलाया कि जहाँगीरपुरी में कभी मुहर्रम पर कोई खतरे की बात सामने नहीं आई जबकि वहाँ हर साल इसके जुलूस निकलते हैं, क्योंकि हिन्दू लोगों ने कभी कोई दिक्कत नहीं की।

उन्होंने हिन्दू श्रद्धालुओं पर पत्थरबाजी की घटनाओं को एक साजिश करार देते हुए कहा कि जहाँगीरपुरी में पुलिसकर्मियों को कई बार मारा-पीटा गया है। उन्होंने नेत्रपाल नाम के एक पुलिस अधिकारी का नाम लिया, जिसे यहाँ सट्टा बाजार चलाने वाले एक व्यक्ति ने मारा-पीटा था। उन्होंने बताया कि यहाँ के ‘मछली बाजार’ को कोरोना के दौरान भी खुला रखा गया और पुलिस तक लॉकडाउन के दिशानिर्देशों का पालन नहीं कराया गया।

इलाके में अपराध की घटनाओं की बात करते हुए उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे बच्चे चाकूबाजी की घटनाओं को अंजाम देते हैं। एक घटना के बारे में उन्होंने बताया कि लड़के ने जबरन एक हिन्दू लड़की से चाकू के बल पर शादी कर ली और उसका रेप किया था। पुलिस ने कोई उम्मीद न होने की बात कहते हुए उन्होंने माँग की कि उचित कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि जब पुलिस बात ही नहीं सुनती है, तो किस्से गुहार लगाई जाए।

उन्होंने कहा, “यहाँ अधिकतर बांग्लादेशी हैं और पुलिस उन सबसे बहुत डरती है। इन पर हाथ डालने से डरती है पुलिस। पुलिस वालों को दौड़ा-दौड़ा कर मारते हैं ये। अधिकतर झुग्गियों में रहते हैं। कई ऐसे हैं, जिन्होंने दो नंबर के धंधे कर के बड़ी संपत्ति अर्जित कर ली है। एजेंसियों को इसकी जाँच करनी चाहिए। ये लोग ममता बनर्जी को चुनाव लड़वाने के लिए पश्चिम बंगाल भी गए थे।” अब देखना ये है कि पुलिस इस्लामी दंगे के कितने गुनहगारों को सज़ा दिला पाती है।

PM मोदी के गुजरात दौरे से पहले वडोदरा में हिंसा: मंदिर को बनाया निशाना, स्थानीय लोगों ने कहा- तलवार लहराती मुस्लिम भीड़ ने किया पथराव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18-20 अप्रैल तक गुजरात का दौरा करेंगे। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक और मॉरीशस के प्रधानमंत्री भी इस दौरान आयोजित कार्यक्रमों में उनके साथ शरीक होंगे। उससे पहले राज्य के वडोदरा से पथराव की घटना सामने आई है। यहाँ पुराने शहर में रविवार (17 अप्रैल 2022) रात रावपुरा रोड पर दो मोटरसाइकिल के आपस में टकराने से बहस शुरू हुई। स्थानीय लोगों के अनुसार इसके बाद तलवार लहराती मुस्लिम भीड़ ने पथराव किया, जिससे सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया।

रिपोर्टों के अनुसार दुर्घटना के बाद वाहन मालिकों के बीच बहस हो गई और जल्द ही दोनों समुदायों के सदस्य इसमें शामिल हो गए। दोनों समुदायों में मारपीट होने लगी। लगभग 300-400 लोगों की भीड़ सड़कों पर आ गई और बताया जाता है कि उन्होंने गाड़ी ड्राइव करने वाले की पिटाई की। इसके बाद भीड़ ने पास के मंदिर में साईं बाबा की मूर्ति को भी तोड़ दिया। मूर्ति तोड़े जाने पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। इसके बाद लोगों को शांत करने के लिए साईं बाबा की मूर्ति को फिर से स्थापित किया गया।

इस घटना में 4 लोग घायल हो गए और लगभग 10 दुकानें तहस-नहस हो गईं। घायलों को इलाज के लिए सयाजी अस्पताल ले जाया गया। आनन-फानन में पहुँची पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया। रिपोर्ट के अनुसार स्टेट रिजर्व फोर्स की दो कंपनियों को भी तैनात किया गया है। इसका एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें भीड़ को पथराव और हिंसा करते हुए देखा जा सकता है। घटना के बाद से पुलिस ने दंगा करने के आरोप में अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया है।

रिपोर्ट्स में बताया गया है कि जिस तरह से अचानक भीड़ सामने आ गई, यह इस तरफ इशारा करती है कि हिंसा पूर्व नियोजित साजिश थी। पथराव की घटना से स्थानीय निवासी आक्रोशित हैं। कुछ लोगों का कहना है कि पथराव करने वाले लोग स्थानीय लोग नहीं थे, हो सकता है कि वे अन्य जगहों से आए हों। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि यह एक पूर्व नियोजित साजिश हो।

रामनवमी पर खंभात में हिंसा

गौरतलब है कि 10 अप्रैल 2022 को जब लोग रामनवमी मना रहे थे उस दौरान गुजरात में भी जुलूसों पर पथराव किया गया। मुस्लिम भीड़ ने घरों की छतों के साथ-साथ मस्जिदों से भी हमला किया। वडोदरा के पास आनंद जिले के खंभात में भी हिंसा हुई थी। शुरुआती पुलिस जाँच में एक बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है जिसमें कम से कम 3 मौलाना कथित रूप से शामिल थे। हिंसा को अंजाम देने के लिए जिले के बाहर से लोगों को बुलाया गया था। ऐसी खबरें हैं कि उन्हें आश्वासन दिया गया था कि उन्हें कुछ नहीं होगा और अगर उनके साथ कुछ होता है तो उन्हें आ कानूनी सहायता प्रदान की जाएगी। रिपोर्टों के अनुसार, मौलवी इस्लाम का प्रभुत्व स्थापित करना चाहते थे ताकि भविष्य में ऐसी कोई शोभा यात्रा न हो।

असम में उग्रवादी बना कॉन्ग्रेस का युवा नेता: सोशल मीडिया पर ULFA-I से जुड़ने का किया ऐलान, कहा- सशस्त्र विद्रोह का कोई विकल्प नहीं

असम (Assam) में एक कॉन्ग्रेस नेता के प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (स्वतंत्र) (ULFA-I) में शामिल होने की खबर सामने आई है। इस कॉन्ग्रेस नेता का नाम जनार्दन गोगोई है। ULFA-I में शामिल होने की पुष्टि खुद जनार्दन गोगोई ने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए की है। वह असम के तिनसुकिया के सादिया का रहने वाला है और जिला युवा कॉन्ग्रेस इकाई का उपाध्यक्ष है।

जानकारी की मुताबिक ULFA-I में शामिल होने के लिए गोगोई ने घर-परिवार छोड़ दिया है। उसने फेसबुक पर पत्नी के नाम एक पत्र लिखा है। इसमें ULFA-I में शामिल होने के कारणों के बारे में बताया है। उसने लिखा है, “कुछ लोग असमिया समाज के अस्तित्व को खत्म करने की साजिश कर रहे हैं। मैंने महसूस किया है कि कुछ राजनीतिक दल और तथाकथित क्षेत्रीय संगठन असमिया समाज के नाम पर व्यापार कर रहे हैं। आज, असमिया लोग अपनी मातृभूमि में असहाय हो गए हैं। मैं असमिया समाज को मिटाने की कोशिशों का महज एक दर्शक नहीं बन सकता। यह सरकार जनता द्वारा उठाए गए विरोध को लोकतांत्रिक तरीके से सुनने में विफल रही है। असमिया समाज के हितों की रक्षा के लिए सशस्त्र विद्रोह का कोई विकल्प नहीं है।”

उल्लेखनीय है कि हाल ही में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने (ULFA-I) में नए सदस्यों की भर्ती की खबरों पर चिंता जताई थी। सरमा ने कहा था कि सरकार उल्फा (आई) से जुड़े मामलों समेत सभी विवादों का राजनीतिक समाधान निकालने के गंभीर प्रयास कर रही है। इससे पहले उन्होंने कहा था कि 47 ‘लड़के और लड़कियाँ’ ULFA(I) में शामिल हो गए हैं, लेकिन कई वरिष्ठ लोगों ने संगठन छोड़ दिया है।

बता दें कि यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) असम का एक उग्रवादी संगठन है। इसकी स्थापना 1979 में हुई थी। परेश बरुआ इसके संस्थापक थे। 1990 में भारत सरकार ने इसे बैन कर दिया था। बाद में नेताओं के बीच मतभेद से उल्फा का विभाजन हो गया। ULFA(I) का नेतृत्व फिलहाल अभिजीत बर्मन के हाथ में है।

मुनव्वर फारूकी की अम्मी की होती थी पिटाई, तेजाब पीकर दे दी थी जान: हिंदूफोबिक ‘कॉमेडियन’ ने LockUpp में किया खुलासा

हिंदूफोबिक कॉमेडी करने वाले स्टैंड अप कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी ने हाल में लॉकअप शो में सबकी आखें नम कर दीं। उन्होंने अपनी माँ की मृत्यु पर खुलासा किया। उन्होंने शो में बताया कि उनकी माँ कैसे हालातों के कारण जीवन में दुखी थीं और एक दिन उन्होंने हर चीज से छुटकारा पाने के लिए तेजाब पी लिया।

शो में फारूकी ने बताया, “जनवरी 2007 में दादी ने एक सुबह मुझे उठाकर बताया कि तेरी माँ को कुछ हो गया है। जब अस्पताल गया तो वो चिल्ला रही थीं। उन्हें इमरजेंसी से बाहर लाया गया तो मैंने उनका हाथ पकड़ लिया।” फारूकी बताते हैं कि उनके घर के सब लोग वहीं थे पर कोई कुछ नहीं बता रहा था कि उनकी माँ को क्या हुआ। थोड़ी देर बाद दादी ने कोने में ले जाकर बताया- ‘तेरी माँ ने जहर पी लिया है। अगर किसी को बताया तो हमें परेशानी हो जाएगी।’ फारूकी कहते हैं कि उन्होंने फौरन ये बात अपनी मौसी की बेटी को बताई जो नर्स थी। इसके बाद माँ का इलाज शुरू हुआ।

मुनव्वर ने रोते हुए बताया, “शुक्रवार की दोपहर थी वो। एक समय आया जब डॉक्टरों ने कहा अब हाथ छोड़ दो। मुझे पता चल गया मेरी माँ नहीं रहीं। मैं आज भी उन्हें नहीं छोड़ पा रहा हूँ। मैं सोचता हूँ शायद कुछ अलग होता अगर मैं उस रात माँ के साथ सोता, अस्पताल जल्दी पहुँचता। डॉक्टरों ने ये भी बताया था कि माँ ने 8 दिन से कुछ नहीं खाया था।” फारूकी ने बताया कि उनकी माँ अपनी शादी में कभी खुश नहीं थीं। उन्हें पीटा जाता था, लड़ाई होती थी। वह बहुत मेहनत करके घर चलाती थीं। लेकिन उन्हें अब्बा-दादी नहीं समझते थे। उनके ऊपर 3500 रुपए का कर्जा भी था। फारूकी कहते हैं कि यही सब कारण हैं कि उन्होंने कभी अपने रिश्ते में गाली-गलौच नहीं की और न ही कभी हाथ उठाया।

बता दें कि इस शो में इससे पहले मुनव्वर फारूकी ने अपनी शादी के बारे में खुलासा किया था। उन्होंने बताया था कि ये बात सच है कि उनका निकाह हुआ था और उनका एक बच्चा भी है। मगर इन बातों को वो पर्दे पर नहीं लाना चाहते इसलिए उन्होंने इस बारे में कभी बात नहीं की।