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‘बाइक और ₹2 लाख दहेज में माँगे, नहीं मिला तो सलमान खान ने दिया तीन तलाक’: बीबी को हत्या की धमकी दे, कहा- ‘नहीं मानता मोदी का कानून’

मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक की पीड़ा से बचाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा इसके लिए कानून बनाया गया है, लेकिन फिर भी देश में तीन तलाक के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला उत्तर प्रदेश के आगरा का है, जहाँ दहेज की माँग को लेकर मुस्लिम महिला के शौहर ने पहले उसे प्रताड़ित किया और फिर तीन तलाक दे दिया। साथ ही ये भी कहा कि वो मोदी सरकार द्वारा बनाए गए कानून को नहीं मानता।

रिपोर्ट के मुताबिक, तीन तलाक की यह घटना आगरा के एत्माद्दौला थाना क्षेत्र की है। पीड़िता अफसाना भी यहीं की रहने वाली है। 13 साल पहले 6 दिसंबर 2009 को उसका निकाह अलीगढ़ के बन्ना देवी थाना क्षेत्र के रहने वाले सलमान उर्फ इकरार खान से हुआ था। अफसाना के अब्बू का पहले से ही इंतकाल हो चुका था। ऐसे में उसका निकाह उसकी अम्मी और दूसरे सगे संबंधियों ने मिलकर करवाया। उन्होंने उसके निकाह के बाद दहेज के तौर पर काफी सामान भी दिया था।

हालाँकि, अफसाना के ससुराल वाले लालची थे। ससुराल जाते ही उन्होंने उसे और अधिक दहेज की माँग को लेकर प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। ससुराल वाले एक बाइक और दो लाख रुपए की माँग पर अड़े रहे। निकाह के कुछ दिन बीतने के बाद उसका शौहर कमाई के लिए सऊदी अरब चला गया। विदेश जाने से पहले वो उसे उसके मायके में छोड़ गया। जब भी भारत वापस आता था तो उससे मिलने जाता औऱ दहेज की माँग करता। अब उसके दो बच्चे भी हैं।

सऊदी में दूसरे निकाह की दी धमकी

पीड़िता अफसाना के शौहर की दहेज के लिए लालच इतनी अधिक हो गई थी कि वो उसे इस बात की भी धमकियाँ देने लगा था कि अगर वो दहेज नहीं देगी तो वो उसे तीन तलाक दे देगा और सऊदी अरब में दूसरा निकाह करेगा। हुआ भी वही 3 फरवरी 2022 को उसका शौहर विदेश से वापस आया। इसके बाद 25 मार्च 2022 को जब वो अपने ससुराल गई तो उसके सास, ससुर और ननदोई ने उसे घर के अंदर ही नहीं घुसने दिया। यहीं नहीं शौहर ने हत्या की धमकी देते हुए उसे तीन तलाक बोल दिया। साथ ही ये भी कहा कि वो मोदी के कानून को नहीं मानता।

इसके बाद पीड़िता ने एत्माद्दौला पुलिस स्टेशन में केस दर्ज कराया। पुलिस के मुताबिक, आरोपितों के खिलाफ तीन तलाक कानून के तहत केस दर्ज किया गया है।

सपा सरकार में मंत्री बन आजम खान ने छीनी थी शाही परिवार से जो जमीन, 10 साल बाद वक्फ बोर्ड ने उसे वापस लौटाया: जाँच के बाद हुई कार्रवाई

उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड ने रामपुर जिले में शाही परिवार की वक्फ संपत्तियों को सपा नेता आजम खान के कब्ज़े से मुक्त करवाया है। यह जमीन शाही परिवार को वापस कर दी गई है। रामपुर के शाही परिवार और आज़म खान में पहले से काफी अनबन रही है। ये जमीनें साल 2012 में अखिलेश यादव की सरकार के दौरान कब्ज़े में ली गईं थी जब आज़म खान वक्फ मंत्री थे। शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन अली जैदी की अध्यक्षता में यह निर्णय 31 मार्च (गुरुवार) को लिया गया है कि जमीन शाही परिवार को वापस होगी। इसकी जानकारी खुद अली ज़ैदी ने साझा की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आज़म खान ने समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान उस समय के शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिज़वी को निर्देश दे कर वक्फ की सम्पत्तियों को गैरकानूनी तरीके से छीन लिया था। इसी के साथ आज़म ने वसीम खान नामक एक बाहरी आदमी को इन सम्पत्तियों का मुतवल्ली बनाया था। कोर्ट का स्टे होने के बाद भी आज़म ने इन जमीनों पर बने शौकत अली बाजार को साल 2013 में ढहा दिया था।

इसी मामले पर आगे जानकारी देते हुए जैदी ने कहा, “नवंबर 2021 में फिर से शिया वक्फ बोर्ड का गठन किया गया। इस पुनर्गठन के बाद शाही परिवार की शिकायत पर वक्फ सम्पत्तियों पर अवैध कब्जे की जाँच करवाई गई। उस जाँच के निष्कर्ष के बाद सपा सरकार में नियुक्त हुए वसीम खान को हटाकर शाही परिवार के हैदर अली खां उर्फ हमजा मियां को मुतवल्ली बनाया गया है।

गौरतलब है कि फिलहाल आजम खान भ्रष्टाचार के कई केसों में UP के सीतापुर जेल में बंद हैं। उन्होंने जेल से न्यायलय में याचिका लगा कर विधानसभा शपथ समारोह में जाने की अनुमति माँगी थी। हालाँकि कोर्ट ने यह अनुमति देने से इंकार कर दिया था।

अब एटा में सपा नेता के ईंट-भट्ठे पर चला ‘बाबा का बुलडोजर’, 33 बीघा जमीन पर राज्य सरकार ने लिया कब्जा

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के शपथग्रहण के बाद से ही बुलडोजर भी दमदार वापसी कर चुका है। दोबारा सरकार बनना तय होते ही बाबा का बुलडोजर भी लगातार एक्टिव मोड पर है। तब से ही बुलडोजर हर दिन किसी ना किसी अवैध निर्माण को जमींदोज कर रहा है। इसी क्रम में शुक्रवार (1 अप्रैल, 2022) को एटा में सपा नेताओं और उनके परिजनों के ईंट भट्ठे पर योगी सरकार का बुलडोजर चला।

रिपोर्ट के अनुसार, मामला एटा जनपद के जैथरा थाना क्षेत्र के गढ़ी रोशन गॉँव का है। जहाँ समाजवादी पार्टी के नेता और अलीगंज से सपा के पूर्व विधायक रामेश्वर सिंह यादव व पूर्व ज़िला पंचायत अध्यक्ष जुगेन्द्र सिंह यादव के परिजनों पर ग्राम सभा की जमीन को अवैध रूप से कब्जा कर उस पर ईंट-भट्ठा चलाए जाने का मामला चल रहा था। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, करीब 33 बीघा जमीन सपा नेता और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर चढ़ाए जाने का मामला है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में जानकारी देते हुए अलीगंज के उप जिला अधिकारी मानवेन्द्र सिंह ने बताया कि 7 जुलाई 2008 को तत्कालीन जिला अधिकारी एटा ने इस जमीन को राज्य सरकार में निहित कर दिया था। जिसके खिलाफ ये लोग राजस्व परिषद लखनऊ में अपील में गए थे। नवंबर 2021 को राजस्व परिषद ने इनके दावे को खारिज कर दिया उंसके बाद आज इस जमीन पर सरकार द्वारा कब्जा लिया जा रहा है।

इस कड़ी में आज इसको खाली कराने की कार्रवाई के तहत योगी सरकार ने बुलडोजर चलवाकर ध्वस्त करवा दिया। बता दें कि एटा के जिला अधिकारी अंकित कुमार अग्रवाल के निर्देश पर उप जिला अधिकारी अलीगंज मानवेन्द्र सिंह के नेतृत्व में भारी पुलिस फ़ोर्स के साथ पहुँचकर 4 जेसीबी मशीनें लगाकर ढाँचा तोड़कर उसपर राज्य सरकार का कब्जा ले लिया।

समाजवादी पार्टी के नेता और अलीगंज से सपा के पूर्व विधायक रामेश्वर सिंह यादव के परिजनों पर कार्रवाई के मौके पर उप जिलाधिकारी अलीगंज मानवेन्द्र सिंह, क्षेत्राधिकारी अलीगज राज कुमार सिंह, थाना अध्यक्ष जैथरा सुधीर कुमार सिंह के नेतृत्व में आस-पास के कई थानों का पुलिस फोर्स भी मौजूद थी।

2014 में 55 पर अटकी BJP, 2022 में किया 100 का आँकड़ा पार: 34 साल बाद राज्यसभा में टूटा रिकॉर्ड, नॉर्थ-ईस्ट से कॉन्ग्रेस का सूपड़ा साफ

भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा में पहली बार 100 सीटों का आँकड़ा पार किया है। साल 1988 के बाद ये सँख्या पाने वाली भाजपा पहली पार्टी है। भाजपा ने यह उपलब्धि गुरुवार (31 मार्च) को पूर्वोत्तर भारत की 3 सीटें जीत कर हासिल की। वर्तमान समय में भाजपा के कुल 101 राज्यसभा सदस्य हैं। साल 1988 में कॉन्ग्रेस ने 245 सदस्यों की विधानसभा में 100 सीटों का आँकड़ा पार किया था। साल 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शपथ ली थी तब भाजपा के राज्यसभा सदस्यों की कुल सँख्या 55 थी।

पूर्वोत्तर भारत में राज्यसभा की कुल 4 सीटों के लिए हुए चुनाव में भाजपा ने 3 और एक उनके सहयोगी दल ने जीतीं। इसमें एक सीट त्रिपुरा की शामिल है जहाँ भाजपा विधानसभा के अंदर बहुमत में है। नागालैंड में भाजपा ने एक महिला प्रत्याशी को मैदान में उतारा था। उन्हें आसानी से जीत मिली। वो नागालैंड से राज्यसभा जाने वालीं पहली महिला प्रत्याशी भी हैं। इसी के साथ भाजपा के ही नेतृत्व वाले NDA ने असम की राज्यसभा की दोनों सीटें भी जीत ली हैं। हिमाचल प्रदेश की भी एक राज्यसभा सीट भाजपा ने जीती है।

असम के मुख्यमंत्री ने इस जीत की घोषणा करते हुए बताया, “हमने और हमारे सहयोगी दल ने असम की दोनों राज्यसभा सीटें जीती हैं। असम में भाजपा के सहयोगी दल का नाम यूनिटेड पीपल्स पार्टी लिबरल (UPPL) है।”

यह पहली बार होगा कि कॉन्ग्रेस पार्टी का पूर्वोत्तर भारत से राज्यसभा में कोई भी प्रतिनिधि नहीं है। पूर्वोत्तर के राज्य असम में कॉन्ग्रेस साल 2015 से हार रही है। वहीं आम आदमी पार्टी ने पंजाब में सभी 5 राज्यसभा सीट जीत ली है। अब नए आँकड़ों के मुताबिक राज्यसभा में भाजपा की कुल 101 सीटें हैं। जबकि कॉन्ग्रेस पार्टी अपने न्यूनतम सँख्या 32 पर आ गई है। इसी के साथ तृणमूल कॉन्ग्रेस के 13, DMK के 10, BJD के 9, CPI – M के 6, TRS के 6 और YSRCP के 6 राज्यसभा सदस्य हैं।

राज्यसभा में बहुमत का आँकड़ा 123 सीटों का है। भाजपा इस बहुमत के आँकड़े के काफी करीब आ चुकी है। जुलाई महीने से राज्यसभा में सभी दलों की स्थिति और साफ़ हो जाएगी। आने वाले जुलाई माह में कॉन्ग्रेस पार्टी के 13 और सदस्य रिटायर हो रहे हैं। फिलहाल विपक्ष अगस्त माह में होने वाले उपराष्ट्रपति के चुनाव की लड़ाई से बाहर दिखाई दे रहा है।

‘अल्लाह-हू-अकबर बोल कर मचाई तबाही, 35 लाख लोग मरे’ : मनोज मुंतशिर ने फिर साधा मुगलों पर निशाना, राम सेतु को बताया प्रेम प्रतीक

मशहूर गीतकार मनोज मुंतशिर (Manoj Muntashir) ने एक बार फिर मुगलों (Mughal) पर निशाना साधते हुए कहा कि जब देश में गरीबी से लोग मर रहे थे, तब मुगल आक्रांता शाहजहाँ ताजमहल बनवा रहा था। इस ताजमहल को प्रेम की निशानी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि प्रेम की असली निशानी राजा रामचंद्र द्वारा माता सीता के लिए समुद्र चीर कर बनाया या पुल है। प्रेम की निशानी चित्तौड़गढ़ का किला है, जहाँ राजा रतन सिंह के वियोग में माता पद्मिनी ने खुद को जलती चिता में झोंक दिया।

मुगलों को लुटेरा बताते हुए प्रख्यात कवि मुंतशिर ने कहा कि अल्लाह-हू-अकबर बोलते हुए देश में तबाही मचाई गई, मंदिरों को तोड़ा गया। उन्होंने कहा कि जब देश भूखमरी से दौर से गुजर रहा था, लोग मर रहे थे तब शाहजहाँ ने ताजमहल बनवाने के लिए 9 करोड़ रुपए खर्च कर दिए। इस दौरान 35 लाख लोग मर गए। अगर इन पैसों को जनता में खर्च किया जाता तो लोगों की गरीबी मिट सकती थी।

उन्होंने कहा कि यह भारत का दुर्भाग्य है कि इसने ऐसे लुटेरों को देखा। भारत के लोगों को बताया कि अगर शेरशाह सूरी, अकबर, खिलजी नहीं होते तो भारतीय पत्ते लपेटकर नाच रहे होते। इन इतिहासों को गर्व से पढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि इन मूर्खों को कौन बताए कि इनके पहले मोहन जोदाड़ो था। आज जो शहरों में व्यवस्थाएँ देखने को मिलती हैं वो उसी काल की देन है।

उन्होंने कहा कि इतिहासकारों ने ताजमहल को प्रेम की निशानी बताकर जनता के प्रेम का मजाक उड़ाया। प्रेम की निशानी ही जानना है तो चित्तौड़गढ़ किले का इतिहास जानो, जहाँ माता पद्मिनी ने राजा रतन सिंह के वियोग में खुद को जलती लपटों में झोंक दिया। प्रेम का मतलब जानना हो तो राजा रामचंद्र को जानो, जिन्होंने माता सीता के लिए समुद्र का सीना चीरते हुए उस पर पुल बना दिया।

मध्य प्रदेश के उज्जैन के एक आयोजन में बोलते हुए मनोज मुंतशिर ने कहा कि वे गौरवान्वित हैं कि मंगल ग्रह की जन्मभूमि उज्जैन में वे खड़े हैं। यह भूमि महाकवि कालिदास की कर्मभूमि है, श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली है और राजा विक्रमादित्य की नगरी है। उन्होंने कहा कि उज्जैन दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग महाकाल और समुद्र मंथन के दौरान छलके अमृत की नगर अवंतिका है।

जो नहीं रोया अपने माता-पिता की मौत पर… कश्मीरी हिंदुओं का दर्द देख बिलख पड़ा, ऑन कैमरा सब हुआ रिकॉर्ड

जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में 1990 के दशक में कश्मीरी हिंदुओं पर घाटी में हुई बर्बरता और उनके पलायन की दर्दनाक दास्तां को बयाँ करती विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ (The Kashmir Files) रिलीज के बाद से ही चर्चा का विषय बनी हुई है। इस फिल्म ने कश्मीरी हिंदुओं के दर्द को जनता के सामने रखा है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि इस फिल्म का एक ऐसा सीन भी है, जिसकी शूटिंग के दौरान फिल्म के निर्माता विवेक अग्निहोत्री समेत दूसरे एक्टर्स भी रोने लगे थे।

द कश्मीर फाइल्स का वो सीन है अनुपम खेर (पुष्कर नाथ) की मौत का। इसे खुद अनुपम खेर ने ही सोशल मीडिया पर शेयर किया। वरिष्ठ अभिनेता फिल्म में पुष्कर नाथ का रोल निभाते हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि अस्पताल की बेड पर पड़े अनुपम खेर से विवेक अग्निहोत्री लिपट कर रो रहे हैं। इनके साथ ही दूसरे एक्टर्स की भी आँखें नम हो जाती हैं।

उन्होंने ट्वीट किया, “जब सिनेमा की सच्चाई ज़िंदगी की सच्चाई जैसी बन जाती है तो आँसुओं का सैलाब रुकने का नाम नहीं लेता। #TheKashmirFiles में पुष्करनाथ की #DeathScene के बाद विवेक अग्निहोत्री, दर्शन कुमार औऱ मैं फूट-फूट कर रोए थे! ये रहा उस शॉट के बाद का विडियो! #WhenReelBecomesReal #KashmiriHindus।”

फिल्म के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने भी इसी वीडियो को ट्वीट करते हुए अपनी भावनाओं को कश्मीरियों के दर्द को बयाँ किया। उन्होने लिखा, “2004 में जब मेरी माँ की मौत हुई, तो मैं नहीं रोया। जब 2008 में मेरे पिता की मृत्यु हुई, तो भी मैं रोया नहीं। लेकिन जब मैंने इस मौत के सीन को शूट किया तो अनुपम खेर और मैं रुक नहीं सका। कोई बेटा नहीं कर सकता था। हमारे कश्मीरी हिंदू माता-पिता का दर्द इतना अधिक है। कृपया इस दृश्य के लिए #TheKashmirFiles देखें।”

गौरतलब है कि 11 मार्च 2022 को पर्दे पर रिलीज हुई इस फिल्म में कश्मीरी हिंदुओं पलायन, इस्लामी आतंक को दिखाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म की कमाई 240 के करीब पहुँच चुकी है।

‘हिंदू औरतों के फाड़े कपड़े, तलवार लेकर किया हमला’: बरेली पुलिस ने रफीक-कासिम को दबोचा, छत पर चढ़ कर करते थे अश्लील हरकत

उत्तर प्रदेश के बरेली (Bareilly, Uttar Pradesh) जिले के एक मुस्लिम बहुल गाँव में महिलाओं को अश्लील इशारे करने का विरोध करने पर एक हिंदू परिवार के घर में घुस कर उस पर हमला किया गया है। इस दौरान महिलाओं से छेड़खानी करने और उनके कपड़े फाड़ने की भी बात कही जा रही है। साथ ही हिंदू परिवार को बस्ती छोड़कर जाने की धमकी भी दी गई। शिकायत के बाद इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं, पुलिस ने बस्ती छोड़ने की धमकी की बात का खंडन किया है।

बरेली के थाना बहेड़ी अंतर्गत आने वाला जाम सावंत जनूबी गाँव मुस्लिम बहुल आबादी वाला है। यहीं पर पीड़ित का परिवार भी रहता है। पीड़ित परिवार के मुखिया का आरोप है कि उसका पड़ोसी रफीक और उसके बेटे- राशिद, आसिफ, आरिफ और जाहिद अपनी छत पर चढ़कर उसके घर की महिलाओं को अश्लील इशारे करते हैं। 28 मार्च 2022 की रात करीब 10 बजे इन लोगों के साथ 10-12 अज्ञात युवक भी छत पर थे और उसके घर की महिलाओं को देखकर वे लोग अश्लील हरकतें कर रहे थे। जब उसने विरोध किया गया तो उन लोगों ने उसके घर पर पथराव कर दिया और तलवार लेकर परिवार पर हमला कर दिया।

पीड़ित का आरोप आरोप है कि इस दौरान आरोपितों ने उसके भाई का सिर फोड़ दिया और घर की महिलाओं एवं लड़कियों को दबोच कर उनके साथ अश्लील हरकत की। आरोपितों ने महिलाओं के कपड़े भी फाड़ दिए। पीड़ित का यह भी कहना है कि आरोपितों ने धमकी दी कि वे हिंदुओं को अब बस्ती में रहने नहीं देंगे।

इस मामले में पीड़ित ने थाने में तहरीर दी, जिसके आधार पर 9 नामजद और 12 अज्ञात लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया। इस दौरान दो आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है, जबकि अन्य लोगों की तलाश जारी है। घटना की सूचना मिलने पर हिंदू संगठनों ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और उन्हें मदद का आश्वासन दिया।

इस मामले में पुलिस ने बयान जारी कर आरोपितों द्वारा बस्ती में नहीं रहने देने की धमकी का खंडन किया। पुलिस ने मामले को दो पड़ोसियों के बीच आपसी विवाद के बाद हुई मारपीट की घटना बताया और कहा कि आरोपितों द्वारा गाँव छोड़कर जाने की धमकी की पुष्टि विवेचना के दौरान नहीं हुई।

ट्विटर पर दैनिक जागरण की खबर का खंडन करते हुए बरेली पुलिस ने कहा, “‘हिंदुओं को बस्ती छोड़ने के लिए दी धमकी’ के संबंध में विवेचना के मध्य साक्ष्य संकलन से कोई पुष्टिकारक या सुसंगत साक्ष्य प्राप्त नहीं हुआ है और ना ही इस प्रकार का कोई तथ्य प्रकाश में आया है।” बरेली पुलिस ने कहा कि विवेचना के दौरान तथ्यों की पुष्टि नहीं होने से पुलिस इस खबर का खंडन करती है।

‘नवरात्रि पर खुली मिली मीट की दुकान तो चलेगा बुलडोजर’ : UP में पहली बार ऐसा लिखित आदेश जारी, गाजियाबाद में 9 दिन तक माँस बेचने पर लगी रोक

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के गाजियाबाद नगर निगम (Ghaziabad Nagar Nigam) ने नवरात्रि (Navratri) के त्योहार को देखते हुए बड़ा फैसला लिया है। प्रशासन ने क्षेत्र में 9 दिनों तक यानि 10 अप्रैल तक के लिए मीट बेचने (Meat Selling Ban) पर रोक लगा दी है। इस दौरान मंदिरों की साफ-सफाई करने के आदेश भी दिए गए हैं। नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी की ओर से यह आदेश जारी किया गया है। इसके साथ ही नियमों का पालन कराने के लिए एस्कॉर्ट टीम भी गठित की गई है।

शनिवार (2 अप्रैल 2022) से नवरात्रि का पावन पर्व शुरू हो रहा है। इसी को देखते हुए निगम ने ये फैसला लिया है। निगम द्वारा गठित की गई एस्कॉर्ट टीम तमाम इलाकों का दौरा कर मीट की दुकानों को बंद कराएगी। इसका पालन नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

गौरतलब है कि इसको लेकर गाजियाबाद जिले की महापौर आशा शर्मा ने शुक्रवार (1 अप्रैल 2022) को नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मिथिलेश कुमार को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने 2 अप्रैल से 10 अप्रैल तक शहर के सभी मंदिरों की साफ सफाई और प्रकाश की व्यवस्था का निर्देश दिया। फिर क्या महापौर के लिखित निर्देश मिलते ही स्वास्थ्य अधिकारी सभी सफाई और खाद्य निरीक्षकों को पत्र लिखकर आदेश का पालन करने को कह दिया।

महापौर आशा शर्मा का पत्र

बताया जाता है कि ऐसा पहली बार हो रहा है जब निगम की तरफ से लिखित में नवरात्रि पर सभी तरह की मीट और नॉनवेज दुकानों को 9 दिनों तक के लिए बंद करने के आदेश जारी किए गए हैं। इससे पहले मौखिक तौर पर आदेश दिए जाते थे। इस बीच शुक्रवार को खाद्य सुरक्षा अधिकारी एनएन झा ने सभी नॉनवेज दुकानों को बंद कराते हुए चेतावनी भी दी कि अगर आदेश के बाद भी दुकानें खुलीं तो उन पर बुलडोजर चलवा दिया जाएगा। साथ ही लाइसेंस भी रद्द कर दिया जाएगा। खाद्य विभाग के एडिशनल कमिश्नर विनीत कुमार ने कहा है कि नवरात्रि पर्व के दौरान मानकों का पालन नहीं करने पर दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई होगी। निरीक्षण के लिए 6 टीमें बनाई गई हैं।

तब रवींद्र पाटिल (सलमान खान हिट एंड रन केस के चश्मदीद) की घुट-घुट कर हुई थी मौत… अब आर्यन खान ड्रग्स केस के मुख्य गवाह को ‘हार्ट अटैक’

आर्यन खान ड्रग्स केस में अचानक मुख्य गवाह प्रभाकर सेल की मौत से जहाँ एक बड़ा ट्विस्ट आ गया है। वहीं ऐसे समय में सलमान खान मामले में भी मुख्य गवाह के मौत की घटना ताजा हो आई है। कल शुक्रवार (1 अप्रैल, 2022) को NCB के अहम गवाह प्रभाकर सेल के वकील तुषार खंडारे के मुताबिक उनकी मौत की वजह हार्ट अटैक बताया जा रहा है। चूँकि, प्रभाकर सेल ने शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान ड्रग्स केस में कई ऐसे सनसनीखेज खुलासे किए थे, जिसकी वजह से वो चर्चा में भी थे इसलिए मौत को संदिग्ध नज़रों से भी देखा जा रहा है।

हालाँकि, यह बॉलीवुड का यह पहला मामला नहीं है जब मुख्य गवाह की ऐसे अचानक से मौत हुई हो। सलमान खान 2002 हिट एंड रन मामले में भी मुख्य गवाह रवींद्र पाटिल की ऐसे ही संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। जहाँ हिट एंड रन मामले में सलमान खान के बरी होने के पीछे हाइकोर्ट ने मुख्य गवाह रवीन्द्र पाटिल के संदिग्‍ध बयानों को माना था। वहीं एक हादसे के दौरान सलमान के बॉडीगार्ड रहे मुंबई पुलिस के जवान रवीन्द्र पाटिल की मौत भी रहस्यमयी तरीके से हुई थी।

बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की गाड़ी से हुए 2002 के सड़क दुर्घटना में, हादसे के बाद मामले में सबसे पहले बयान देने वालों में रवीन्द्र पाटिल ही थे। जिन्होंने साफ कहा था कि हादसे के दौरान गाड़ी सलमान ही चला रहे थे और उन्होंने शराब पी हुई थी। पाटिल ने यह भी कहा था कि घटना के समय सलमान शराब के नशे में थे। 28 सितंबर 2002 को सलमान की कार बेकाबू तरीके से बांद्रा में एक बेकरी में घुस गई थी, जिससे वहाँ फुटपाथ पर सो रहे नुरुलाह महबूब शरीफ की मौत हो गई थी जबकि मुन्ना मलाई खान, कलीम एम. पठान, अब्दुल्ला रौफ शेख और मुस्लिम शेख घायल हुए थे।

बता दें कि 1998 बैच के कांस्टेबिल रवीन्द्र पाटिल को अंडरवर्ल्ड से धमकियाँ मिलने के बाद सलमान खान का बॉडीगार्ड बनाया गया था। रवींद्र पाटिल के अनुसार वह उस समय कार में ही मौजूद थे जब हादसा हुआ और उन्होंने तेज गाड़ी चलाने के लिए सलमान को चेतावनी भी दी थी लेकिन सलमान ने उनकी एक नहीं सुनी थी।

गौरतलब है कि पाटिल की तहरीर पर ही सलमान खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। लेकिन इसके साथ ही उनके बुरे दिनों की भी शुरूआत हो गई थी। मीडिया को दिए बयानों के अनुसार पाटिल ने बताया था कि उन पर अपने बयानों को पलटने का जबरदस्त दबाव है। उन्हें फोन करके धमकियाँ दी जा रही हैं।

पाटिल पर दबाव का असर इस कदर था कि साल 2006 में उन्हें विभिन्न आरोपों के चलते गिरफ्तार कर लिया गया और नवंबर में उन्हें इन्हीं आरोपों में नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। नौकरी जाने के बाद रवीन्द्र पाटिल की जिंदगी मुसीबत और घुटन में गुजरने लगी। वहीं अगस्त 2007 में एक दिन वह पटरी के किनारे जीर्ण शीर्ण अवस्‍था में बेहोश मिले। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था।

नाबालिग से गैंगरेप कर फरार थे आरिफ-आसिफ: UP पुलिस ने पहले घर पर चलाया बुलडोजर, फिर 24 घंटे में किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में नाबलिग लड़की के साथ हुए गैंगरेप के 2 आरोपितों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह शिकायत 25 मार्च को की गई थी। इन आरोपितों के नाम आमिर और आसिफ हैं जो रिश्ते में भाई हैं। इनके अब्बा शराफत पर भी पीड़ित परिवार को धमकाने का आरोप है। यह गिरफ्तारी 1 अप्रैल (शुक्रवार) को की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला चिलकाना थानाक्षेत्र का है। यहाँ गाँव के प्रधान शराफत अली के 2 बेटों आमिर और आसिफ पर उसी गाँव की एक नाबालिग लड़की ने निकाह का झाँसा दे कर रेप का आरोप लगाया। पीड़िता और आरोपित एक ही मज़हब के हैं। यह आरोप लगने के बाद दोनों आरोपित फरार हो गए थे। पुलिस ने इनकी गिरफ्तारी के एक दिन पहले पुलिस ने आरोपितों के घर के एक हिस्से पर बुलडोजर चलाया था। तब वायरल हुए वीडियो में स्थानीय SHO आरोपितों के घर वालों को आरोपितों को हाजिर करने के लिए 48 घंटे की मोहलत देते दिखाई दिए थे। ऐसा न करने पर घर को बुलडोजर से ढहा देने की चेतावनी दी गई थी। मौके पर एक बुलडोजर भी घर के सामने की सीढ़ी तोड़ता दिखाई दे रहा है।”

पुलिस ने आरोपितों के घर ढोल नगाड़े के साथ मुनादी भी करवाई। घर पर बुलडोजर पहुँचने के 24 घंटे के अंदर ही दोनों आरोपित पुलिस की गिरफ्त में आ गए। ऑपइंडिया से बात करते हुए सहारनपुर के SSP आकाश तोमर ने बताया, “दोनों आरोपित 1 अप्रैल की रात 8.55 पर गिरफ्तार कर लिए गए। इन पर धारा 452, 376 D, 342, 232 और 506 IPC के तहत कार्रवाई की गई है।”