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मोदी सरकार ने 6 महीने के लिए बढ़ाई फ्री राशन योजना, 80 करोड़ लोगों को मिलता रहेगा लाभ: बँटेगी 10 करोड़ टन खाद्य सामग्री

केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (PMGKAY) को अगले 6 महीने के लिए बढ़ा दिया है। शनिवार (26 मार्च 2022) को केंद्रीय कैबिनेट ने इसे मंजूरी दी। अन्न योजना की अंतिम तारीख 31 मार्च को समाप्त हो रही थी। इस योजना को आगे जारी रखते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारतवर्ष का सामर्थ्य देश के एक-एक नागरिक की शक्ति में समाई हुई है।

पीएम मोदी ने ट्वीट किया, “भारतवर्ष का सामर्थ्य देश के एक-एक नागरिक की शक्ति में समाहित है। इस शक्ति को और मजबूती देने के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को छह महीने और बढ़ाकर सितंबर 2022 तक जारी रखने का निर्णय लिया है। देश के 80 करोड़ से अधिक लोग पहले की तरह इसका लाभ उठा सकेंगे।”

इस योजना को अप्रैल 2022 से सितंबर 2022 तक बढ़ाए जाने के बाद अब अगले 6 महीने 5 किलो राशन प्रति व्यक्ति प्रति माह नि:शुल्क 80 करोड़ लाभार्थियों को फायदा मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोरोना की महामारी के खात्मे के बावजूद योजना का विस्तार सरकार की गरीबों के प्रति संवेदनशीलता को दिखाता है। PMGKAY कार्यक्रम के तहत सरकार 3.4 लाख करोड़ रुपए की लागत से 1003 लाख टन खाने की सामग्री बाँटेगी।

2020 में शुरू हुई थी यह योजना

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना संकट के बीच गरीबों को राहत देने के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत 2020 में 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को मुफ्त खाद्यान्न देने के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की शुरुआत की थी। इस योजना की शुरुआत साल 2020-21 में इस योजना को केवल अप्रैल, मई और जून के लिए (फेज-1) लॉन्च किया गया था। बाद में इसे जुलाई से नवंबर 2020 (फेज-2) और फिर मई-जून 2021 के तीसरा चरण, जुलाई से नवंबर 2021 (चौथा चरण), दिसंबर 2021 से मार्च 2022 (पाँचवाँ चरण) और अब इसे छठी बार बढ़ाया गया है।

कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह को 1 साल की सश्रम कारावास की सज़ा, साथ ही जुर्माना भी लगा: दो धाराओं में पाए गए दोषी

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह को अदालत ने एक साल की सश्रम कारावास की सज़ा सुनाई है। साथ ही उन पर 5000 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। इंदौर की अदालत ने जिस मामले में फैसला सुनाया, वो घटना 11 साल पुरानी है। दिग्विजय सिंह के अलावा पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू समेत 5 अन्य नेताओं को भी यही सज़ा सुनाई गई है। इसमें से एक आरोपित जयसिंह दरबार हैं, जो अब भाजपा का हिस्सा हैं।

बता दें कि 11 साल पहले मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह उज्जैन पहुँचे थे, जहाँ उन्हें ‘भाजपा जनता युवा मोर्चा (BJYM)’ के कार्यकर्ताओं के काले झंडे दिखा कर विरोध प्रदर्शन किया था। इसी मामले में अनंत नारायण, असलम लाला और दिलीप चौधरी को भी सज़ा सुनाई गई है। इन सभी के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज हुआ था। इंदौर जिला अदालत में अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश नाथ ने इस मेल में फैसला सुनाया।

ये घटना 17 जुलाई, 2011 को हुई थी। दिग्विजय सिंह और प्रेमचंद गुड्डू को धारा-325 (गंभीर रूप से चोट पहुँचाना) और 109 (अपराध के लिए उकसाना) का दोषी पाया गया है। इन नेताओं पर आरोप है कि इन्होंने ABVP कार्यकर्ता अमय आप्टे पर जानलेवा हमला किया। तीन आरोपित बरी भी हुए हैं। दिग्विजय सिंह के काफिले को काला झंडा दिखाए जाने के बाद कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं से उनकी जम कर झड़प हुई थी। जीवाजीगंज थाने में इस मामले की FIR दर्ज हुई थी।

दिग्विजय सिंह अक्सर विवादों में रहते हैं। हाल ही में उन्होंने आतंकी हमलों में मारे गए हिन्दुओं का भोपाल में जेनोसाइड म्यूजियम (नरसंहार संग्राहलय) बनने की माँग का विरोध करते हुए इसे साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने वाली माँग बताया था। ‘द कश्मीर फाइल्स के निर्माता विवेक अग्निहोत्री ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से जेनोसाइड म्यूजियम (genocide museum) के लिए जमीन माँगी थी। शिवराज सिंह ने भी इस संग्राहलय के लिए सहमति दे दी थी। दिग्विजय सिंह का मानना है कि इससे राज्य का सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ेगा।

‘विवेक अग्निहोत्री ने भोपालियों को समलैंगिक बता कर किया अपमान’: The Kashmir Files निर्देशक के खिलाफ शिकायत दर्ज

फिल्म The Kashmir Files के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री एक नए विवाद में घिर गए हैं। ‘भोपाल माने समलैंगिक’ बयान देने का आरोप लगाते हुए विवेक अग्निहोत्री के खिलाफ मुंबई में शिकायत दर्ज की गई है। उनके खिलाफ वर्सोवा पुलिस स्टेशन में शिकायत की गई है। साथ ही मानहानि समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज करने की माँग की गई है। विवेक अग्निहोत्री के खिलाफ ये शिकायत पत्रकार औऱ सेलिब्रिटी मैनेजर रोहित पांडेय ने अपने वकील अली काशिफ खान देशमुख के जरिए शिकायत की है।

रिपोर्ट के मुताबिक, एक पुलिस अधिकारी ने शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि आरोप है कि विवेक अग्निहोत्री ने मीडिया को दिए साक्षात्कार में जानबूझकर दुर्भावनापूर्ण तरीके से समलैंगिक कहकर भोपालियों का अपमान किया है। पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता पीआर मैनेजर रोहित पांडेय मूल रूप से भोपाल के रहने वाले हैं।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि फिल्म निर्देशक के खिलाफ आईपीसी की धारा 153 A और B (दो समूहों में द्वेष को बढ़ावा), धारा 295 A (जानबूझकर धार्मिक संघर्ष पैदा करने की कोशिश), धारा 298 (धार्मिक भावनाओं को आहत करना), धारा 500 और 505 के तहत केस दर्ज करने की माँग की गई है

क्या है मामला

गौरतलब है कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ के निर्देशक ने एक इंटरव्यू में कहा कि लोग अक्सर ‘भोपालियों’ को ‘उनकी नवाबी इच्छाओं’ के कारण समलैंगिक मानते हैं। इसकी वीडियो क्लिप वायरल हो गई। इसमें वो कहते दिखते हैं, “मैं भोपाल से हूँ, लेकिन मैं खुद को भोपाली नहीं कहता, क्योंकि इसका एक निश्चित अर्थ होता है। अगर कोई खुद को भोपाली कहता है, तो इसका आम तौर पर मतलब है कि वह व्यक्ति समलैंगिक है… ‘नवाबी’ कल्पनाओं वाला कोई व्यक्ति।” बहरहाल, इस बयान के बाद उनकी काफी आलोचना हो रही है।

हाल ही में कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार और पलायन पर बनी उनकी फिल्म द कश्मीर फाइल्स को खूब सराहा गया है।

खुद को खुल कर धार्मिक बताते हैं ‘RRR’ के हीरो राम चरण, हर साल 45 दिन की अयप्पा दीक्षा: एयरलाइंस कंपनी के हैं मालिक

फिल्म ‘RRR’ में अल्लू सीताराम राजू के किरदार में दिख रहे तेलुगु अभिनेता राम चरण तेजा का शनिवार (27 मार्च, 2022) को अपना 37वाँ जन्मदिन मना रहे हैं। ‘बाहुबली’ फेम निर्देशक एसएस राजामौली की ये फिल्म उत्तर भारत में भी खूब पसंद की जा रही है, ऐसे में आपके मन में राम चरण तेजा के बारे में और जानने की उत्सुकता होगी। असल में वो तेलुगु सिनेमा इंडस्ट्री तक लंबे समय तक राज करने वाले और एक समय भारत के सबसे महँगे अभिनेता रहे मेगास्टार चिरंजीवी के बेटे हैं।

1985 में जन्मे राम चरण तेजा को 3 बार फिल्मफेयर ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के अवॉर्ड्स से नवाजा है। 2007 में आई फिल्म ‘चिरुथा’ लीड रोल में उनकी पहली तेलुगु मूवी थी और उसके बाद वो एक जाना-पहचाना नाम बन गए थे। लेकिन, वो 2009 में आई एसएस राजामौली निर्देशित ‘मगाधीरा’ थी, जिसने उन्हें बड़ी पहचान दी। 2013 तक ये सबसे ज्यादा कमाई करने वाली तेलुगु फिल्म रही थी। 2018 में आई ‘रंगस्थलम’ से उन्होंने समीक्षकों और दर्शकों, दोनों का प्यार जीता।

बहुत कम लोग जानते हैं कि राम चरण एक अच्छे घुड़सवार भी हैं और वो इसमें दक्ष हैं। हैदराबाद में उनकी एक अपनी पोलो की टीम भी है। ‘Maa Tv’ के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का वो हिस्सा रहे हैं। 2009 में पेप्सी कंपनी ने उन्हें अपने विज्ञापन अभियानों का प्रवक्ता बनाया था। वो TruJet नाम की एक एयरलाइंस कंपनी भी चलाते हैं। 2016 में उन्होंने अपनी पोडक्शन कंपनी शुरू की और अपने पिता की 150वीं फिल्म ‘खैड़ी नंबर 150’ का निर्माण किया।

सामाजिक कार्यों में हमेशा आगे रहे राम चरण तेजा रक्तदान अभियानों का भी आयोजन करते हैं। कोरोना के दौरान उन्होंने अपने पिता के साथ ऑक्सीजन बैंक्स की शुरुआत की। उनकी पत्नी उपासना कामिनेनी ‘अपोलो चैरिटी’ की वाईस चेयरमैन होने के साथ-साथ ‘बी पॉजिटिव’ नामक मैगजीन की संपादक भी हैं। कामिनी के दादा प्रताप रेड्डी ‘अपोलो हॉस्पिटल्स’ चेन के संस्थापक हैं। हालाँकि, उन पर नेपोटिज्म वाली फैमिली से होने के आरोप भी आलोचक लगाते रहे हैं।

जून 2018 में राम चरण ने बताया था कि वो ‘आध्यात्मिक जीवन’ में विश्वास रखते हैं। साथ ही वो हर वर्ष 45 दिनों की ‘अयप्पा दीक्षा’ की प्रक्रिया पूरी करते हैं। उनका कहना है कि आध्यात्मिक प्रक्रियाएँ उन्हें राहत देती हैं। वो खुद को धार्मिक और आध्यात्मिक बताते हैं। उन्होंने तब बताया था कि पिता से प्रेरित होक वो 10 सालों से ‘अयप्पा दीक्षा’ पूरी कर रहे। एक अभिनेता के रूप में उन्हें जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, उनके हिसाब से ये प्रक्रिया उन सब से उन्हें राहत देती हैं।

उत्तराखंड के इतिहास की पहली महिला विधानसभा अध्यक्ष: फौजी परिवार की ऋतु खंडूरी को BJP ने दी बड़ी जिम्मेदारी

उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी दोबारा से राज्य के मुख्यमंत्री बन गए हैं। इसी के साथ राज्य विधानसभा के इतिहास में एक नया अध्याय भी राज्य के इतिहास में जुड़ गया है। वो ये कि राज्य को उसकी पहली महिला विधानसभा अध्यक्ष मिल गई हैं। राज्य विधानसभा अध्यक्ष के लिए पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी की बेटी ऋतु खंडूरी का चयन किया गया है।

उत्तराखंड के गठन के बाद ऐसा पहली बार हो रहा है कि राज्य में एक महिला को विधानसभा अध्यक्ष बनाया जा रहा है। उत्तराखंड बीजेपी के अध्यक्ष मदन कौशिक ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि पार्टी ने ऋतु खंडूरी के नाम पर मुहर लगा दी है। उल्लेखनीय है ऋतु खंडूरी राज्य की पाँचवीं विधानसभा अध्यक्ष बनेंगी।

कौन हैं ऋतु खंडूरी

गौरतलब है कि ऋतु खंडूरी उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के राधाबल्लभपुरम की रहने वाली हैं। ऋतु खंडूरी का जन्म 29 जनवरी, 1965 को एक फौजी परिवार में हुआ था। उनके पिता भुवन चंद्र खंडूरी आर्मी में थे। इस कारण से पिता की पोस्टिंग के हिसाब से ही उनकी शिक्षा भी हुई। मेरठ के रघुनाथ गर्ल्स कॉलेज से स्नातक करने के बाद राजस्थान विश्वविद्यालय से उन्होंने पीजी किया। जर्नलिज्म में डिप्लोमा धारक होने के साथ ही वो 2006 से 2017 तक एमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा में फैकल्टी मेंबर थीं।

वहीं उनके पति राजेश भूषण बेंजवाल बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। मौजूदा वक्त में वो मोदी सरकार में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव हैं। वहीं खुद ऋतु खंडूरी लंबे वक्त से समाजसेवा के कार्यों में शामिल रही हैं। वो करोड़पति हैं और उनके पास चल-अचल 7.26 करोड़ रुपए की संपत्ति है।

2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें कोटद्वार सीट से चुनावी मैदान में उतारा था। उन्होंने कॉन्ग्रेस सुरेंद्र नेगी को हराया है। पहले यह चर्चा थी कि शायद उन्हें मंत्री पद दिया जाएगा। हालाँकि अब उन्हें विधानसभा अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी जा रही है।

सेना की तरफ झुकाव, पंजाब से शुरुआत, रसोई में प्रयोग: यहाँ मिलेगी PM मोदी के जीवन से जुड़ी कहानियाँ, महात्मा गाँधी की पोती ने किया लॉन्च

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं। लोग उनके बारे में जानना चाहते हैं, उनके बचपन, उनकी शिक्षा और उनके राजनीतिक करियर के बारे में, लेकिन इसको लेकर जानकारियाँ मिल पाना आसान नहीं। हालाँकि, अब पीएम मोदी से जुड़ी कहानियों को दुनिया के सामने रखने के लिए पोर्टल modistory.in लॉन्च किया गया है। इसमें पीएम मोदी के जीवन से जुड़ी ज्यादातर प्रेरक कहानियों को संग्रहित किया गया है।

साभार: मोदी स्टोरी

इस पोर्टल का शुभारंभ पीएम मोदी के जीवन से जुड़ी घटनाओं को संग्रहित करने के लिए एक स्वयंसेवक की पहल का नतीजा है। मोदी स्टोरी पोर्टल का उद्घाटन महात्मा गाँधी की पोती सुमित्रा गाँधी कुलकर्णी ने किया है। इस बात की जानकारी खुद पोर्टल ने ट्विटर पर दी। इसमें लिखा गया है, “मोदी स्टोरी के शुभारंभ की घोषणा करते हुए नरेंद्र मोदी के जीवन से प्रेरक क्षणों को एक साथ लाने के लिए एक स्वयंसेवक द्वारा संचालित पहल। जैसा कि उनके साथियों द्वारा सुनाया गया है।”

इस वेबसाइट में पंजाब से बीजेपी के नेता मनोरंजन कालिया के बारे में भी बताया गया है। इसमें बताया गया है कि कैसे नरेंद्र मोदी ने पंजाब से पार्टी के पदाधिकारी के तौर पर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की। गुजरात के वडनगर में अपने स्कूल के प्रिंसिपल रासबिहारी मनियार और शारदा प्रजापति के घर में नरेंद्र मोदी 1990 के दशक में रहे थे, जिसका जिक्र पोर्टल में किया गया है।

पोर्टल में मनोरंजन कालिया ने पीएम मोदी की चतुराई औऱ राजनीतिक सफर के बारे में बात की। वो बताते हैं कि देश के सशस्त्र बलों के प्रति शुरू से उनका आकर्षण था। वो चुनाव प्रचार में बच्चों के लिए टॉफियाँ ले जाते थे। इसी तरह से पोर्टल पर मौजूद एक वीडियो में पीएम मोदी के शिक्षक रासबिहारी मनियार बताते हैं कि नरेंद्र मोदी बचपन में सैनिक स्कूल में प्रवेश लेना चाहते थे।

नीरज चोपड़ा, दीपा मलिक, पुलेला गोपीचंद समेत कईयों ने बताई अनकही बातें

मोदी स्टोरी पोर्टल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े प्रेरक कहानियों को बताया गया है। पोर्टल पर ओलंपियन नीरज चोपड़ा, पुलेला गोपीचंद, पैरालंपियन दीपा मलिक समेत कई अन्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात के अपने अनुभवों को साझा किया है। नीरज चोपड़ा बताते हैं कि जब वो ओलंपिक खेल के लौटे तो पीएम मोदी ने व्यक्तिगत तौर पर हर खिलाड़ी से मुलाकात की। ऐसा लगता ही नहीं था कि हम देश के प्रधानमंत्री से मिल रहे हैं। पीएम मोदी के कार्यकाल में खेल में बहुत सुधार हुआ है।

इसी तरह से पैरालंपियन दीपा मलिक पीएम मोदी को लेकर अपने अनुभवों के बारे में बताती है कि जब वो रियो पैरालंपिक से लौटीं थी तो हमें पीएम मोदी से उनके आवास पर मिलने का मौका मिला। मेरे 10 साल के कैरियर में ऐसा पहली बार हुआ था कि एक मेडल जीतने के कारण हमें प्रधानमंत्री से मिलने का मौका मिला, वो भी उनके आवास पर। उस दौरान पीएम मोदी ने कहा था कि दीपा आप बहुत ही सकारात्मक तरीके से लेक्चर देती हैं और कई बार आपका वीडियो देखकर मैं खुद भी पॉजिटिव हो जाता हूँ। दीपा बताती हैं कि अहमदाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री खुद उनकी व्हीलचेयर को ठेलकर स्टेज पर ले गए।

हरियाणा के रोहतक स्थित भाजपा कार्यालय के सहायक दीपक पीएम मोदी से जुड़ी एक बात को साझा करते हैं। दीपक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रसोई के प्रयोगों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यालय के किचन में खाना खत्म हो गया था। वहाँ मोदी जी पहुँचे तो पूछा कि क्या है खाने में। कुछ नहीं था तो उन्होंने अचार के मसाले को मिलाकर पराठा बनाया। इसके अलावा खिचड़ी की पराठा भी बनाया।

बुर्का विवाद के बीच कर्नाटक के स्कूलों में माँ सरस्वती की प्रतिमाओं को बनाया जा रहा निशाना: भुजाएँ तोड़ी, वीणा अलग की

कर्नाटक में 2 अलग-अलग जिलों में सरकारी स्कूलों के अंदर स्थापित सरस्वती की प्रतिमाओं को नुकसान पहुँचाने की खबर है। पहले मामले में बेलगावी जिले के चिक्कोड़ी इलाके में कुछ अज्ञात लोगों ने प्राइमरी स्तर के सरकारी स्कूल के अंदर स्थापित सरस्वती प्रतिमा को तोड़ दिया है। वहीं शिवमोगा जिले में भी इसी प्रकार की हरकत को अंजाम दिया गया है। इन इन दोनों मामलों की पुलिस में शिकायत की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चिक्कोड़ी जिले की घटना में वायरल हो रही तस्वीरों में क्षतिग्रस्त मूर्ति को देखा जा सकता है। मार्बल की 4 भुजाओं वाली मूर्ति में से 2 हाथ तोड़ कर अलग कर दिए गए हैं। मूर्ति के हाथ में रखी वीणा को भी तोड़ डाला गया है। क्षतिग्रस्त मूर्ति के टुकड़े आस-पास बिखरे दिखाई दे रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना गुरुवार (24 मार्च, 2022) शाम की है।

स्कूल चिंचणी गाँव में स्थित है। स्कूल प्रशासन को इस घटना की जानकारी अगले दिन शुक्रवार (25 मार्च) को हुई। इस घटना की शिकायत चिक्कोड़ी पुलिस स्टेशन में दर्ज करवाई गई है। घटना के बाद तनाव फ़ैल गया। किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए घटनास्थल पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस शुक्रवार को ही मौके पर पहुँच कर अपनी जाँच शुरू कर चुकी है।

शिवमोगा जिले में सरस्वती प्रतिमा के साथ गाँधी और स्वामी विवेकानंद की भी प्रतिमा क्षतिग्रस्त

वहीं कर्नाटक के ही शिवमोगा जिले में सरस्वती प्रतिमा के साथ महात्मा गाँधी और स्वामी विवेकानंद की भी प्रतिमाओं को नुकसान पहुँचाया गया है। ये घटना भी एक प्राइमरी स्तर के सरकारी स्कूल में घटी है। यह स्कूल शिवमोगा के हरोहल्ली में मौजूद है। यह स्कूल गरीब बच्चों के प्रशिक्षण का एक केंद्र भी है। स्कूल के पिछले हिस्से में भी तोड़फोड़ की गई है। इस घटना से स्थानीय ग्रामीण काफी नाराज है और उन्होंने आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। स्थानीय लोगों ने घटना के पीछे अवैध शराब माफियाओं को जिम्मेदार बताया है। उनके मुताबिक, कुछ असामाजिक तत्वों ने इस घटना को शराब के नशे में अंजाम दिया है। स्कूल स्टॉफ और गाँव वालों ने इस घटना की शिकायत स्थानीय थाने में की है।

इसी शिवमोगा जिले के मंदिर कोटे मरिकम्बा जतरे के परिसर में कुछ ही दिन पहले केवल हिन्दू दुकानदारों को दुकान खोलने की अनुमति दी गई थी। संयोगवश स्कूल के अंदर सरस्वती प्रतिमाओं पर ये हमले तब हो रहे हैं जब कुछ मुस्लिम लड़कियों ने बुर्का पर स्कूल में प्रतिबंध के खिलाफ प्रदर्शन किया था। उस दौरान उन प्रदर्शनकारियों ने सरकारी स्कूलों में सरस्वती पूजा पर आपत्ति जताई थी।

10वीं क्लास की लड़की से गैंगरेप, कॉन्ग्रेसी MLA का बेटा सहित 4 पर FIR… खुद विधायक पर विधवा के साथ कई बार रेप का केस

राजस्थान के दौसा जिले में कॉन्ग्रेस विधायक जौहरी लाल मीणा के बेटे पर नाबालिग लड़की से गैंगरेप का आरोप लगा है। इसी मामले में 4 अन्य लोग आरोपित किए गए हैं। इन सभी पर पीड़िता का अश्लील वीडियो बनाने और उसके बहाने ब्लैकमेल करने का भी आरोप है। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। सभी आरोपितों पर पॉक्सो एक्ट व अन्य धाराओं में केस दर्ज हुआ है। घटना 24 फरवरी 2021 की बताई जा रही है।

स्थानीय मंडावर थाना प्रभारी के मुताबिक, “विधायक के आरोपित बेटे का नाम दीपक है। उनके साथ एक नेतराम हैं। इन्होंने मेरे थानाक्षेत्र में आने वाले समलेटी पैलेस होटल में नशे का पदार्थ खिला कर सामूहिक गैंगरेप किया। इस दौरान उसके (पीड़िता) के नग्न फोटो खींच लिए। उन्होंने दुबारा से वो अश्लील फोटो दिखा कर पीड़िता को ब्लैकमेल किया। इस दौरान इन्होंने पीड़िता के घर में रखे 15 लाख 40 हजार रुपए और जेवरात मँगवा लिए। साथ ही शिकायत करने पर परिवार को जान से मार देने की धमकी दी जाती रही। इस मामले की जाँच CO (DSP) महुवा द्वारा की जा रही है।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़िता की उम्र 15 साल है। वो कक्षा 10 की छात्रा हैं। पीड़िता अलवर के थूमड़ा निवासी विवेक शर्मा से फेसबुक के माध्यम से मिली थी। इसके बाद 24 फरवरी 2021 को विवेक शर्मा ने पीड़िता के साथ होटल में गैंगरेप किया था। इसमें कॉन्ग्रेस विधायक जौहरी लाल मीणा का बेटा दीपक व 2 अन्य आरोपित भी शामिल थे। रेप का वीडियो मुख्य आरोपित विवेक ने ही बनाया था। इस वीडियो को दिखा कर विवेक ने कई बार पीड़िता से रेप किया और पैसे माँगे।

मई 2021 में पीड़िता के घर में शादी थी। इसी दौरान विवेक की धमकियों से डर कर पीड़िता ने चुपके से घर में शादी के लिए रखे 15 लाख 40 हजार रुपए विवेक को दे दिए। इस केस की शिकायत अलवर के रैणी थाने में दर्ज हुई थी। पुलिस जाँच पड़ताल करती हुई मुख्य आरोपित विवेक तक पहुँच गई। विवेक ने रुपए पीड़िता द्वारा देना कबूल कर लिया।

पुलिस के सामने पैसे लेने की बात स्वीकारने के बाद भी विवेक द्वारा पीड़िता को ब्लैकमेल करना और रेप करना जारी रहा। जब पीड़िता की तबियत अक्सर खराब रहने लगी, तब उसकी माँ ने 24 मार्च 2022 को इसका कारण पूछा। आखिरकार उसने सब कुछ अपनी माँ को सच-सच बता दिया। तब जाकर पीड़िता के परिजनों ने इस मामले में FIR दर्ज करवाई।

इस पूरे मामले पर कॉन्ग्रेस के विधायक जौहरी लाल मीणा ने अपने बेटे को निर्दोष बताया है। उन्होंने कहा, “मुझे इस केस की जानकारी किसी ने फोन पर दी है। मेरे बेटे को झूठा फँसाया जा रहा है और वो निर्दोष है।”

भाजपा ने साधा कॉन्ग्रेस पर निशाना

कॉन्ग्रेस विधायक के बेटे पर गैंगरेप का आरोप लगने के बाद राजस्थान से भाजपा नेता लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने गहलोत सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा:

“लोग इस घटना से राजस्थान के हालात का अंदाजा लगाएँ। राजस्थान यह सब देखने का आदी नहीं है फिर भी पूरे प्रदेश में ऐसी घटनाएँ आम हो चुकी हैं। आम अपराधी तो दूर, आज कॉन्ग्रेस की सरकार में खुद सरकार से जुड़े लोग ऐसे कृत्यों में शामिल हैं। हमारी बहन बेटियाँ असुरक्षित महसूस कर रही हैं। राजस्थान खुद को शर्मशार महसूस कर रहा है। समाज में कड़ा संदेश देने के लिए विधायक के आरोपित पुत्र पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।”

लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने प्रियंका गाँधी को भी अपने वीडियो ट्वीट में टैग किया है। प्रियंका गाँधी कॉन्ग्रेस की वही नेता हैं, जो उत्तर प्रदेश (वो भी सिर्फ चुनावों के समय) में लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ के गीत गाते चलती थीं।

खुद विधायक जौहरी लाल पर लग चुके हैं रेप के आरोप

अपने बेटे को निर्दोष बता रहे कॉन्ग्रेस विधायक जौहरी लाल खुद भी रेप केस में आरोपित रह चुके हैं। अप्रैल 2019 में एक विधवा महिला ने उन पर अपने साथ कई बार रेप किए जाने का आरोप लगाया था। तब जौहरी लाल पर धारा 328, 384 और 376 IPC के तहत केस दर्ज हुआ था। विधायक का एक अन्य वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वो उन दलितों के लिए काम न करने को कह रहे थे, जिन्होंने उनको वोट नहीं दिया था।

RRR के असली हीरो सीताराम राजू और कोमाराम भीम… निजाम और अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की जानिए पूरी कहानी

इस साल के सफलतम फिल्मों में से एक एसएस राजामौली द्वारा निर्देशित साउथ की फिल्म राईज रोअर रिवॉल्ट (RRR) 25 मार्च को रिलीज हो गई और जबरदस्त कमाई कर रही है। फिल्म में राम चरण (Ram Charan) और जूनियर एनटीआर (Jr NTR) ने प्रमुख भूमिका निभाई है। कहा जाता है कि यह फिल्म रियल लाइफ के दो हीरो पर आधारित, जिन्होंने ब्रिटिश हुकुमत के दौरान अंग्रेजों के नाको-चने चबवा दिए थे।

निर्देशक राजामौली का कहना है कि प्रसिद्ध क्रांतिकारी अल्लूरी सीताराम राजू और कोमाराम भीम की जिंदगी पर आधारित इस फिल्म को फिक्शनल रूप दिया गया है। उनका कहना है कि इन क्रांतिकारियों के जीवन के बारे में बहुत अधिक ज्ञात नहीं है, लेकिन इस काल्पनिक कहानी के जरिए ये दिखाने का प्रयास किया गया है कि उनके जीवन में क्या हुआ था और अगर दोनों एक साथ मिल गए होते तो क्या होता।

अल्लूरी सीताराम राजू और कोमाराम भीम ने उन क्षेत्रों में आदिवासियों के वन अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी थी, जो अब आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के अंतर्गत आते हैं। कहा जाता है कि 1882 में भारत की ब्रिटिश सरकार ने मद्रास फॉरेस्ट एक्ट पास कर स्थानीय आदिवासियों को जंगल में जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसी लेकर दोनों ने अपने-अपने समय में आदिवासियों की लड़ाई लड़ी। आइए जानते हैं, कौन थे अल्लूरी सीताराम राजू और कोमाराम भीम।

अल्लूरी सीताराम राजू

सीताराम राजू का जन्म 1897 में विशाखापटनम में हुआ था। राजू ने बेहद छोटी उम्र में जीवन के मोह-माया को त्यागकर आध्यात्म का रास्ता अपना लिया था। उन्होंने देश के कई बड़े धार्मिक स्थानों की यात्रा की। राजू महात्मा गाँधी के विचारों से काफी प्रभावित थे और अंग्रेजों के जुल्म के खिलाफ उठ खड़े हुए थे।

वह आदिवासियों को शराब छोड़ने के लिए प्रेरित करते थे और आपसी झगड़े को किसी तीसरे पक्ष के पास ले जाने के बजाय आपस में ही मिलकर हल करने की सलाह देते थे। सीताराम राजू पर अंग्रेजों ने खूब जुल्म किए, लेकिन कभी घुटने नहीं टेके। उन्हें 1922 से 1924 तक चले राम्पा विद्रोह के नेतृत्वकर्ता के रूप में याद किया जाता है। साल 1924 में अंग्रेजों ने सीताराम राजू को एक पेड़ से बाँध दिया और उन्हें गोलियों के भून दिया।

कोमाराम भीम

कोमाराम भीम का जन्म 1900 ईस्वी में आदिलाबाद के संकेपल्ली में हुआ था। वह गोंड समाज से ताल्लुक रखते थे और अंग्रेजों तथा हैदराबाद के निजाम के अत्याचारों के खिलाफ उठ खड़े हुए थे। उन्होंने आदिवासियों के साथ मिलकर हैदराबाद की आजादी के लिए विद्रोह का बिगूल फूँक दिया था। कोमाराम गोरिल्ला युद्ध में माहिर थे और आदिवासियों के मसीहा के रूप में जाने जाते थे।

कहा जाता है कि एक बार फसल की कटाई के दौरान निजाम के पटवारी लक्ष्मण राव और पट्टेदार सिद्दीकी ने आकर गोंड लोगों से टैक्स भरने को कहा और गाली-गलौज करने लगे। इसके बाद कोमाराम के हाथों सिद्दीकी की हत्या हो गई और वे जान बचाने के लिए भाग गए।

उन्होंने अंग्रेज़ी-हिंदी-उर्दू लिखना सीखा और प्रेस में काम किया। उसके बाद असम के चाय बगानों में काम करने लगे। वहाँ उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ मजदूरों के लिए आवाज़ उठाई और जेल में डाल दिए गए। उसके बाद आदिवासियों को इकट्ठा कर निजाम के खिलाफ 1928 से लेकर 1940 तक गुरिल्ला युद्ध करते रहे। अंत में निजाम के सैनिकों के साथ युद्ध में वह वीरगति को प्राप्त हो गए।

कहीं 11 किसानों को ज़िंदा जला कर मार डाला, तो कहीं 17 भिक्षुओं को घसीट कर आग में झोंका: बीरभूम से पीछे बंगाल का इतिहास और भी है

पश्चिम बंगाल के बीरभूम स्थित रमपुरहाट में हुई हिंसा ने पूरे देश को दहला दिया है, जहाँ 8 लोगों को उनके घर में बंद कर ज़िंदा जला कर मार डाला गया। सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के एक स्थानीय नेता भादू शेख की बमबारी में हत्या के बाद आक्रामक भीड़ ने इस घटना को अंजाम दिया। अब तक चुनाव में भाजपा कार्यकर्ताओं की राजनैतिक हत्याओं पर चुप लिबरल गिरोह को भी अब मुस्लिमों की हत्याओं के बाद पश्चिम बंगाल में ‘जंगलराज’ दिखने लगा है।

लेकिन, ये पहली बार नहीं है जब पश्चिम बंगाल में इस तरह की हिंसा की घटना हुई हो। पहले भी नरसंहार होते रहे हैं और इन्हें कभी वहाँ की वामपंथी सरकार का समर्थन हासिल था तो अब TMC के गुंडों पर आरोप लगते हैं। माओवादियों की हिंसा के बारे में भी कई ख़बरें आपने सुनी होगी। ताज़ा बीरभूम हिंसा की जाँच CBI कर रही है। इसमें अब एक नानूर हत्याकांड का भी नाम आया है, जो 2001 का है। TMC के स्थानीय जिलाध्यक्ष अनुब्रत मंडल में पुलिस को इसी हत्याकांड की तर्ज पर कार्रवाई करने की माँग की है।

बता दें कि जब नानूर हत्याकांड हुआ था, तब राज्य में CPM की सरकार थी और TMC से जुड़े 11 भूमिहीन मजदूरों को ज़िंदा जला कर मार डाला गया था। ये घटना बीरभूम जिले के दक्षिणी-पूर्वी क्षेत्र में स्थित नानूर में हुई थी। इस नरसंहार के बाद तब की सत्ताधारी वामपंथी सरकार ने मृतकों को डकैत करार दिया था। जबकि पार्टी की अंदरूनी कलह में पहले भी ऐसी हत्याएँ वहाँ हो चुकी थीं। 44 आरोपितों में 4 CPM के नेता थे और 40 समर्थक। जबकि पुलिस तब इस बात को नकारती रही थी।

इसी तरह की वीभत्स घटना अप्रैल 1982 में हुई थी, जब ‘आनंद मार्ग संप्रदाय’ के 17 साधुओं को टैक्सी से खींच कर बाहर निकाला गया और फिर ज़िंदा जला कर मार डाला गया था। ये घटना कोलकाता के बिजोन सेतु पर हुई थी। तब भी CPM की ही सरकार थी और उसे लगता था कि ‘आनंद मार्ग संप्रदाय’ किसी अन्य राजनीतिक दल का समर्थन कर रहा है। मृतकों भिक्षुओं में एक महिला साध्वी भी थीं। पश्चिमी मिदनापुर में इसी तरह जनवरी 2000 में 5 लोगों को घसीट कर ज़िंदा जला दिया गया था।

ये घटना TMC के नेता रहे बख्तर मंडल के घर पर हुई थी। इस घटना का आरोप भी तत्कालीन सत्ताधारी वामपंथियों पर ही लगा। इन सभी घटनाओं में पीड़ित विपक्षी दलों से सहानुभूति वाले थे और आरोपित सत्ता पक्ष के। लेकिन, बीरभूम के बगतुइ गाँव में हुई हालिया घटना सत्ताधारी पार्टी के बीच आतंरिक कलह का ही परिणाम बताई जा रही है। राज्य के लगभग सभी लोकतांत्रिक संस्थानों और समूहों पर पूर्ण नियंत्रण रखने वाली TMC की आतंरिक कलह अब पार्टी के नियंत्रण से भी बाहर चली गई है।

पिछले कुछ वर्षों में जब-जब भाजपा, कॉन्ग्रेस और सीपीएम ने अपने कार्यकर्ताओं की हत्याओं का मामला उठाया, तब-तब टीएमसी ने उन्हें ये कह कर चुप कराने की कोशिश की कि राजनीतिक संघर्ष में सबसे ज्यादा उसके ही कार्यकर्ताओं की मौतें हुई हैं। जबकि विपक्षी दलों का कहना है कि इनमें से अधिकतर TMC का अंदरूनी संघर्ष ही था और आरोपित भी सत्ताधारी पार्टी से ही थे। पार्टी इसे अब अपने ही सहानुभूति के लिए इस्तेमाल कर रही है।

पश्चिम बंगाल में यूँ तो दंगों का इतिहास रहा है और ब्रिटिश काल से लेकर आज़ादी के बाद के कई वर्षों तक यहाँ हिन्दू-मुस्लिम संघर्ष होते रहे हैं। पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश से यहाँ अवैध रूप से मुस्लिम घुसपैठियों को बसाने का मुद्दा भी गर्म रहा है। 1946 में कलकत्ता में दंगे हुए थे और फिर मुस्लिम भीड़ ने हजारों की संख्या में हिन्दुओं को सितंबर-अक्टूबर 1946 में नोआखली में मारा। लाखों हिन्दू बेघर हुए। इसी तरह जनवरी 1979 में मरीचझापी से आए 5000 से भी अधिक हिन्दू शरणार्थियों को मार डाला गया था।

1980 से लेकर 1983 तक असम से लेकर त्रिपुरा तक शरणार्थी बंगाली हिन्दुओं का कत्लेआम मचाया जाता रहा। इस तरह देखें तो पश्चिम बंगाल में हिंसा की बात कोई नई नहीं है और इसमें राजनीति भी पहले से रही है। 1970 में कैसे CPM के गुंडों ने सैँबरी दो कॉन्ग्रेस नेताओं की हत्या कर के उनकी माँ को बेटों के खून से सना चावल खिलाया गया, ये इतिहास में दर्ज है। इसी तरह मार्च 2007 में CPM के गुंडों के हमले में 14 किसानों की मौत हो गई थी।