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यूक्रेन में हैं जैविक हथियार बनाने वाले लैब: अमेरिका ने कबूला, कहा- रूसी सेना का न हो इन पर कंट्रोल, इसका कर रहे प्रयास

रूस-यूक्रेन में जारी जंग के बीच अमेरिका ने मंगलवार (8 मार्च 2022) को स्वीकार किया कि यूक्रेन में ‘जैविक अनुसंधान सुविधाएँ’ (Biological Research Facilities) हैं। अमेरिका के राजनीतिक मामलों के राज्य की अंडर सेक्रेटरी विक्टोरिया नुलैंड का कहना है कि अमेरिका इस बात को लेकर चिंतित है कि इन सुविधाओं को रूसी सेना अपने कंट्रोल में ले सकती है। इसलिए वह यूक्रेन के साथ मिल कर इस पर काम रहे हैं, ताकि जैविक अनुसंधान सुविधाओं को रूसी सेना के हाथ में जाने से रोका जा सके। 

दरअसल, यूएस सेनेटर मार्को रुबियो ने नुलैंड से पूछा था कि क्या यूक्रेन के पास ‘रासायनिक या जैविक हथियार’ हैं? इसके जवाब में उन्होंने इसकी पुष्टि की और साथ ही यह भी कहा कि अगर यूक्रेन पर इस तरह का कोई हमला होता है तो इसके पीछे नि:संदेह रूस का हाथ होगा। विक्टोरिया यहीं पर नहीं रुकती है। वह कहती हैं कि खुद करके दूसरों पर आरोप लगाना ‘क्लासिक रूसी टेक्निक’ है। हालाँकि न तो विदेश विभाग और न ही पेंटागन की तरफ से इन सुविधाओं के बारे में अधिक जानकारी नहीं दी गई।

इधर चीन के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका से जैविक हथियारों के अनुसंधान का पूरा विवरण देने की माँग की। उन्होंने यह माँग रूस के उन रिपोर्टों के आधार पर की है, जिसमें दावा किया गया है कि यूक्रेन में जैविक हथियार के लिए अमेरिका फंडिंग कर रहा है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, अमेरिका के पास 30 देशों में 336 लैब हैं, जिनमें 26 सिर्फ यूक्रेन में हैं। इन्हें देश और विदेश में अपनी जैविक सैन्य गतिविधियों का पूरा लेखा-जोखा देना चाहिए और खुद को बहुपक्षीय सत्यापन (Multilateral Verification) के लिए प्रस्तुत करना चाहिए।

यूक्रेन में अमेरिकी दूतावास के बायोलैब्स

बता दें कि इससे पहले रूस की सेना (Russian Army) ने यूक्रेन (Ukraine) में 30 बायोलॉजिकल लेबोरेटरी (Biological laboratories) के मौजूद होने का दावा किया था। रूस ने एक दस्तावेज पब्लिश किया था, जिसमें बताया गया कि यूक्रेन ने अमेरिका द्वारा पोषित प्रयोगशालों की मदद से, रूसी सीमा पर जैविक हथियार जैसे एंंथ्रेक्स और प्लेग बनाने पर काम किया। दस्तावेज में लैब को अमेरिका द्वारा फंडिंग करने के सबूत होने का भी दावा किया गया।

रूस द्वारा प्रकाशित दस्तावेज में यूक्रेन स्वास्थ्य मंत्रालय का एक ऑर्डर भी शामिल है जिस पर तारीख 24 फरवरी 2022 की है। इसमें जैविक रोगजनक एजेंटों के आपातकाल खात्मे की बात हैं। एक रूसी प्रतिनिधि ने बताया कि यूक्रेन ने अपने ‘डर्टी बम’ के निर्माण और प्लूटोनियम को अलग करने के काम के लिए चेर्नोबिल परमाणु ऊर्जा संयंत्र क्षेत्र का इस्तेमाल किया। हालाँकि, अब अमेरिका ने भी इसकी पुष्टि कर दी है। 

11 साल में प्रियंका गाँधी के पति ने छिपाई ₹106 करोड़ की कमाई: रॉबर्ट वाड्रा पर आयकर विभाग ने कसा शिकंजा, रिपोर्ट में दावा

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के दामाद व पार्टी की महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा के पति कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा के ऊपर आयकर विभाग ने आरोप लगाया है कि वाड्रा ने राजस्थान में बेनामी लेन-देन से अपनी कमाई को 11 वर्षों से 106 करोड़ रुपए कम बताया। इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर के अनुसार, अब इस राशि को निर्धारित वर्ष 2010-11 से 2020-21 के दौरान उनकी आय में जोड़ने का प्रस्ताव किया गया है।

इसके अलावा, आयकर विभाग ने वाड्रा की सात कंपनियों की आय में भी लगभग 9 करोड़ रुपए जोड़ने का प्रस्ताव रखा है, जो कि मूल्यांकन वर्ष 2010-11 से 2015-16 के बीच का है। इन सातों कंपनियों के नाम- मैसर्स आर्टेक्स, स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी, स्काईलाइट रियल्टी, ब्लूब्रीज ट्रेडिंग, लैंबोदर आर्ट्स, नॉर्थ भारत आईटी पार्क और रियल अर्थ है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कम आय से संबंधी जानकारी का मामला वाड्रा के ख़िलाफ़ राजस्थान में भूमि सौदों में कथित चोरी से जुड़ा है जो बेनामी लेन-देन (निषेध) अधिनियम के तहत आता है। विभाग ने इस संबंध में दिसंबर 2021 में भी प्रवर्तन को अपने निष्कर्षों से अवगत कराया था, जिसमें ये 106 करोड़ की आय और उनकी सात कंपनियों की 9 करोड़ रुपए की कम आय के बारे में जानकारी थी।

इस संबंध में वाड्रा से संपर्क करने पर उन्होंने कहा, “इसकी वही वजह है जो पिछले कई सालों में रही…मेरा नाम सामने लाने का उनके लिए ये सही समय है। ये स्पष्ट तौर पर दुर्भावनापूर्ण बदला है। मेरी कानूनी टीम इस बारे में आप लोगों को स्पष्ट जवाब दे पाएगी।”

उल्लेखनीय है कि 106 करोड़ रुपए की आय का लगभग आधा अमाउंट जो विभाग का दावा है कि वाड्रा ने छुपाया, कथित तौर पर सिर्फ दो साल में कमाया गया था। वाड्रा ने 2013-14 वर्ष में 20 करोड़ रुपए और 2019-20 में 28 करोड़ रुपए की जानकारी छिपाई। अब इस मामले में सूत्रों का कहना है कि वाड्रा और उनकी कंपनियों के पास आय की कथित तौर पर कम जानकारी देने पर आयकर विभाग की जाँच पड़ताल को चैलेंज करने का मौका होगा।

बता दें कि आईटी अधिनियम 1961 की धारा 270 ए के तहत, आयकर चोरी पर या आय की कम जानकारी देने के लिए देय कर पर 50 प्रतिशत का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा यदि गलत जानकारी देने के कारण कम आय की जानकारी का खुलासा होता है तो जुर्माना देय कर का 200 फीसद भी हो सकता है।

कोक, पेप्सी, मैकडॉनल्ड्स भी रूस में समेटेंगे अपना धंधा: यूक्रेन के साथ युद्ध के बीच अमेरिका में टारगेट पर रूसी रेस्टोरेंट भी

यूक्रेन के साथ जारी युद्ध (Russia Ukraine War) के बीच एक-एक कर अंतरराष्ट्रीय कंपनियाँ लगातार रूस के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उस पर प्रतिबंध लगा रही हैं। इस कड़ी में अब अमेरिकी कंपनियों मैकडॉनल्ड्स, स्टारबक्स, कोका-कोला, पेप्सिको और जनरल इलेक्ट्रिक मोटर्स का भी नाम जुड़ गया है। मंगलवार (8 मार्च 2022) को इन सभी कंपनियों ने रूस से अस्थायी तौर पर अपने कारोबार को समेटने का ऐलान कर दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के शिकागो स्थित बर्गर कंपनी मैकडॉनल्ड्स ने कहा कि वो रूस में अपने 850 स्टोर्स को अस्थायी तौर पर बंद करेगी। हालाँकि कंपनी ने ये भी कहा कि वो अपने 62000 कर्मचारियों को उनकी सैलरी जरूर देती रहेगी। मैकडॉनल्ड्स के अध्यक्ष और सीईओ क्रिस केम्पकिंस्की ने एक ओपन लेटर में कर्मचारियों से कहा है, “हमारे मूल्यों का मतलब है कि हम यूक्रेन में मानवीय पीड़ा को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं।” उन्होंने युद्ध के हालात को कंपनी के लिए असाधारण करार देते हुए कहा कि यह अनिश्चित है कि दोबारा कब स्टोर खुलेंगे।

इसी तरह से स्टार बक्स ने भी रूस में अपना कारोबार बंद करने का ऐलान किया है। हालाँकि, स्टारबक्स के अध्यक्ष और सीईओ केविन जॉनसन 2000 रूसी कर्मचारियों को पेमेंट जारी रखने का ऐलान किया है। वहीं कोका-कोला, पेप्सिको औऱ जनरल इलेक्ट्रिक ने भी रूस में अपने कारोबार को समेटने का ऐलान कर दिया है। कोक की साझेदार, स्विट्जरलैंड स्थित कोका-कोला हेलेनिक बॉटलिंग कंपनी के पास रूस में 10 बॉटलिंग प्लांट हैं। कोका-कोला हेलेनिक बॉटलिंग कंपनी में कोक की 21% हिस्सेदारी है। पेप्सिको और जनरल इलेक्ट्रिक दोनों ने अपने रूसी कारोबार को आंशिक रूप से बंद करने की घोषणा की है। एक बयान में पेप्सिको ने कहा कि वह दूध और बेबी फूड का उत्पादन करती रहेगी।

गौरतलब है कि इससे पहले गूगल, फेसबुक, ट्विटर, एप्पल और दक्षिण कोरिया की सैमसंग (Samsung) समेत कई अन्य कंपनियों ने भी रूस के खिलाफ कार्रवाई करते हुए वहाँ अपनी सेवाओं पर रोक लगा दिया था।

रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग का असर सुदूर अमेरिका में भी दिख रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में रूसी रेस्टोरेंट को निशाना बनाया जा रहा है। मैनहट्टन में रूसी रेस्टोरेंट में फूड का ऑर्डर करने के बाद उसे कैंसिल कर दिया जा रहा है। इसके अलावा उसे ऑनलाइन निगेटिव मार्किंग दी जारी है। इसी तरह से रूसी रेस्टोरेंट को बड़ी संख्या में नेगेटिव ईमेल से निशाना बनाया जा रहा है। रेस्टोरेंट के कर्मचारियों को फोन पर नाजी कहा जा रहा है।

देशद्रोह का आरोप, फेसबुक पर पाकिस्तानी झंडा पोस्ट कर लिखा- आई लव यू… : मोहम्मद नियाज को हाई कोर्ट ने दी जमानत

इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने देशद्रोह (Sedition) के आरोपित मोहम्मद नियाज (Mohammad Niyaz) को हाल ही में जमानत दी है। वह 27 अक्टूबर 2021 से जेल में था। उस पर फेसबुक (Facebook) पर पाकिस्तान (Pakistan) का झंडा पोस्ट करने का आरोप है। लेकिन कोर्ट ने कहा कि तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए आवेदक जमानत पाने के योग्य है। यह आदेश न्यायमूर्ति ओम प्रकाश त्रिपाठी की एकल पीठ ने दिया।

जानकारी के मुताबिक नियाज पर बदायूँ जिले के फैजगंज बेहता थाने में देशद्रोह के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। पुनीत कुमार नामक व्यक्ति की शिकायत पर नियाज के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि नियाज ने अपनी फेसबुक आईडी से पाकिस्तानी झंडे की एक तस्वीर पोस्ट की थी। साथ ही लिखा था ‘आई लव यू पाकिस्तान, आई मिस यू पाकिस्तान’। आरोप है कि ऐसा कर उसने देश में सामाजिक गड़बड़ी पैदा करने की कोशिश की। नियाज पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124ए (देशद्रोह) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

नियाज के वकील की दलील थी कि वह निर्दोष है और उसे जानबूझकर फँसाया गया है। वह मजदूर है और उसने कभी भी किसी तरह की सामाजिक अशांति पैदा करने की कोशिश नहीं की। उन्होंने कहा कि आवेदक आगे भी इस प्रकार की राष्ट्रविरोधी गतिविधि में शामिल नहीं होगा। उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह जमानत का दुरुपयोग नहीं करेगा। रिपोर्ट के अनुसार अतिरिक्त सरकारी वकील ने जमानत का तो विरोध किया, लेकिन नियाज के वकील की दलीलों पर आपत्ति नहीं उठाई। इसे देखते हुए अदालत ने उसकी जमानत अर्जी मंजूर कर ली।

पाकिस्तान की आसमां ने यूक्रेन से निकलने पर PM मोदी को दिया ‘धन्यवाद’, बोलीं- ‘हम बुरे हालात में फँसे थे’

यूक्रेन की स्थिति के मद्देनजर अपने नागरिकों को वहाँ से निकालने के क्रम में भारत सरकार ने कई पाकिस्तानी छात्रों को भी सकुशल उनके घर पहुँचाने का काम किया। समाचार एजेंसी एएनआई ने इस बाबत एक लड़की की वीडियो शेयर की जो यूक्रेन में फँसी थीं और भारत सरकार की मदद से अपने घर पहुँचने वाली हैं।

वीडियो में दिखाई देने वाली लड़की का नाम आसमां शफीक है जो कीव की भारतीय एबेंसी और भारत के प्रधानमंत्री को धन्यवाद देती हैं कि भारत ने उन्हें यूक्रेन से निकालने में मदद की। रिपोर्ट के अनुसार, आसमां को भारतीय अधिकारियों द्वारा बचाया गया और अब वह देश से बाहर निकलने के लिए पश्चिमी यूक्रेन के रास्ते में है। वह जल्द ही अपने परिवार के साथ फिर मिलेंगी।

ट्वीट के साथ साझा की गई वीडियो में वह कहती हैं, “हेलो! मेरा नाम आसमां शफीक है। मैं पाकिस्तान से हूँ और मैं कीव में भारत की एंबेसी का धन्यवाद करती हूँ कि उन्होंने हमारा हर तरह से साथ दिया। हम यहाँ बहुत मुश्किल हालातों में फँसे हुए थे। मैं प्रधानमंत्री मोदी को भी धन्यवाद करती हूँ। आशा है कि हम लोग सुरक्षित घर पहुँच जाएँगे।”

बता दें कि आसमां की इस वीडियो के सामने आने से पहले सोशल मीडिया पर कई वीडियोज वायरल हैं जिनमें दावा किया गया था कि पाकिस्तान से आकर यूक्रेन में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएँ, अपने देश लौटने के लिए भारत के झंडे का सहारा लेकर बाहर आ रहे हैं। पाकिस्तानी मीडिया की वायरल वीडियो में एक व्यक्ति दावा कर रहा था कि उनके मुल्क के छात्रों को यूक्रेन से जिंदा बच कर आने के लिए भारतीय झंडे का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। यह व्यक्ति आरोप लगा रहा था कि इमरान खान की सरकार अपने छात्रों की सलामती के लिए कोई कदम ही नहीं उठा रही।

भारतीयों के साथ अन्य मुल्क के नागरिकों की मदद

उल्लेखनीय है कि यूक्रेन से भारतीयों को निकालने के बीच 28 फरवरी 2022 को प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से ये बयान दिया गया था कि भारत अपने नागरिकों को निकालते समय अपने पड़ोसी देश के नागरिकों की भी मदद करेगा जो इस समय यूक्रेन में फँसे हुए हैं। ये पहली बार नहीं है जब भारत किसी विपत्ति में अन्य मुल्कों के नागरिकों के काम आ रहा हो। साल 2015 में युद्धग्रस्त यमन से भारतीयों को निकालने के दौरान भी भारत ने अन्य देशों के 1947 लोगों को बचाया था।

‘मोदी को दिल्ली ने ख़राब कर दिया, यह सरकार हमारी नहीं है’: सत्यपाल मलिक ने PM पर फिर साधा निशाना, किसानों के साथ सड़कों पर उतरने की दी धमकी

मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक (Satya Pal Malik) ने एक बार फिर PM मोदी पर निशाना साधा है। किसान आंदोलन को लेकर उन्होंने मोदी सरकार पर फिर से भड़ास निकाली। उन्होंने कहा, “इतने किसानों की मौत हो गई, इसके बाद भी कोई शोक संदेश नहीं आया है। हम माँग लेते हैं तो भिखमंगा समझ लेते हैं। यह सरकार हमारी नहीं है। मोदी गुजरात में थे, तब MSP (मैक्सिमम सपोर्ट प्राइस) पर चिट्‌ठी लिखी थी। अब दिल्ली ने उनको खराब कर दिया। दिल्ली जगह ही ऐसी है। दिल्ली जाने के बाद वह बदल गए।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सत्यपाल मलिक यहीं नहीं रुके बल्कि PM मोदी पर जुबानी हमला करते हुए किसानों के बहाने घेरने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “PM मोदी MSP की बातें भूल गए। मैं गवर्नरशिप का पीरियड खत्म होने के बाद पूरे देश में घूमूँगा। किसानों को एकत्रित करूँगा। ताकि आगे हम माँगने वाले नहीं, देने वाले बनें। हम माँगते हैं तो ये हमें भिखमंगा समझते हैं।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सत्यपाल मलिक जाट विकास संस्थान की ओर से चूरू जिले के सरदारशहर में आज मंगलवार (8 मार्च, 2022) को जाट जागृति शताब्दी महोत्सव में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थे। उन्होंने कार्यक्रम में आंदोलन के दौरान मरने वाले किसानों का जिक्र करते हुए कहा, “किसान आंदोलन में 700 किसान मर गए। कोई कुतिया भी मर जाती है, तो दिल्ली से प्रधानमंत्री की चिट्‌ठी जाती है। लेकिन 700 किसानों के लिए कोई शोक संदेश नहीं गया। 65 से 70 प्रतिशत देश में किसान व मजदूर हैं। इनकी कोई सुनवाई करने वाला नहीं है। जितनी फसल यह पैदा करते हैं, उसके हर साल दाम कम हो रहे हैं।”

गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले भी सत्यपाल मलिक ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने दावा किया था कि बीजेपी सरकार ने उन्हें राष्ट्रपति पद का लालच दिया और कहा कि चुप रहोगे तो राष्ट्रपति बना दिए जाओगे। साथ ही मलिक ने केंद्र सरकार पर तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के बाद किसानों से किए गए वादों को पूरा नहीं करने का भी आरोप लगाया था।

इससे पहले रविवार (6 मार्च 2022) को भी सत्यपाल मलिक जींद जिले के कंडेला गाँव की खाप और माजरा खाप की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आए थे। इस दौरान उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए लाल किले में तिरंगे का अपमान करने वाले कथित किसानों का भी बचाव किया था।

उन्होंने कहा था, “लाल किले का सपना दिखा दे। ये सब खड़े हो जाएँगे। हुआ भी वही 6 महीने में तो नहीं 10 महीने में ये लाल किले पर चढ़ गए। इसके बाद मैंने केंद्र से कहा कि लाल किले पर हमारा हक है। हमारे लड़कों को दोषी मत बनाओ। इनपर मुक़दमे मत करो। ठीक है चले गए लाल किले पर चढ़ा दिया अपना झंडा। वो कोई पार्टी का झंडा नहीं था। निशान साहब था, जिसके लिए हजारों सिखों ने कुर्बानी दी थी।”

जींद में सत्यपाल मलिक यहीं नहीं रुके। उन्होंने किसानों को भड़काते हुए कहा था, “अगर आप इकट्ठा नहीं रहोगे, अपने सवालों को नहीं समझोगे तो यही होगा। लड़ने की आदत डालो। दो साल बाद चुनाव है। इकट्ठा होकर वोट करोगे तो ये सब दिल्ली से भाग जाएँगे। किसानों का राज होगा। किसी से कुछ माँगने की जरूरत नहीं होगी। यूपी के चुनाव का नतीजा भले नहीं आया पर मैं पश्चिमी यूपी घूमा हूँ और वहाँ का बता रहा हूँ। किसी गाँव में कोई मंत्री घुस नहीं पाया। स्मृति ईरानी को तो कई किलोमीटर दौड़ाया। मैं ये कहना चाहता हूँ कि राज बदलो, अपना राज बनाओ। लोग तुमसे भीख माँगेंगे, तुम्हें भीख माँगने की जरूरत नहीं होगी।” मलिक ने किसानों को कहा कि लाल किले में अपना झंडा फहराओ।

बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं है, जब राज्यपाल मलिक ने पीएम मोदी पर निशाना साधा है। इससे पहले 2 जनवरी को हरियाणा के चरखी दादरी में हुए एक कार्यक्रम में भी कहा था कि वह जब किसानों के मामले में प्रधानमंत्री से मिले तो मेरी पाँच मिनट में ही उनकी लड़ाई हो गई। वे बहुत घमंड में थे।

पिछड़े समूह का साथ, ‘त्रिदेव’ की रचना, संगठन-सरकार में समन्वय: योगी की काट ढूँढ़ते-ढूँढ़ते BJP के ‘स्वतंत्र फैक्टर’ में फँसीं विपक्षी पार्टियाँ

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अगर एग्जिट पोल्स को देखें तो भाजपा की जीत तय नजर आ रही है। ऐसा लग रहा है कि पार्टी इस बार भी 300 से अधिक सीटें जीत कर इतिहास रच देगी। इसमें कोई शक नहीं है कि इसके पीछे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 5 वर्षों का अच्छे कानून-व्यवस्था वाले कार्यकाल के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि और जन कल्याणकारी योजनाओं का हाथ है। लेकिन, साथ ही इसके पीछे स्वतंत्र देव सिंह की मेहनत भी है।

उत्तर प्रदेश में उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और राज्य में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह पार्टी के दो बड़े OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) नेता हैं। मोदी लहर ने हिंदी पट्टी में जात-पात की सीमाओं को तोड़ डाला और 2014 व 2019 के लोकसभा चुनाव के अलावा 2017 के विधानसभा चुनाव में भी हमने इसे देखा। लेकिन, जब मीडिया केवल जाति-जाति का रट्टा लगा रहा है तो हमें इन दोनों नेताओं के बारे में बताना पड़ता है।

इसे ऐसे समझिए। मीडिया ने अपने तमाम विश्लेषणों में दिखाया कि भाजपा की तरफ से 5 साल मंत्री पद के मजे लेने के बाद चुनाव के ऐन वक्त अखिलेश यादव की पार्टी में मिल जाने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य बहुत ताकतवर हैं, क्योंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आगरा से लेकर पूर्वी यूपी में गोरखपुर तक इस समाज (कुशवाहा, शाक्य और मौर्य) का विस्तार है और गैर-यादव OBC इससे सपा के साथ जुड़ेंगे। लेकिन, इस दौरान वो इसी समुदाय के केशवा प्रसाद मौर्य को भूल गए और बड़ी चालाकी से उनकी बात ही नहीं की।

स्वतंत्र देव सिंह ने कई सघन रैलियों के साथ-साथ रोड शो भी किया। पिछड़े इलाकों तक भी वो पहुँचे। बूथ मैनेजमेंट के साथ-साथ ‘मतदाता संवाद’ पर उन्होंने जोर दिया। ‘त्रिदेव’, अर्थात बूथ अध्यक्ष, BLA2 (बूथ स्तर के एजेंट्स) और बूथ प्रभारी पदों के जरिए उन्होंने निचले स्तर तक चुनावी मैनेजमेंट किया। संगठन और सरकार में समन्वय बनाते रहे। पार्टी की बैठकों में राजनीतिक स्थिति का सही आकलन किया। कई बूथ अध्यक्षों के घर भोजन के अलावा उन्हें पार्टी के छोटे कार्यकर्ताओं तक को सम्मान देते हुए और उन्हें गले लगाते हुए देखा गया।

इसी तरह मीडिया ये बातें करता है कि उत्तर प्रदेश में कुर्मी समुदाय की आबादी 12% के आसपास है और यादव समाज के बाद राज्य की दूसरी सबसे बड़ी OBC जनसंख्या वोट के गणित तय करेगी। लेकिन, इस दौरान मीडिया केवल ददुआ डाकू और इसके परिवार से आगे नहीं निकल पाता है। स्वतंत्र देव सिंह साफ़ और स्वच्छ छवि के नेता हैं, शायद इसीलिए उनकी बात नहीं की जाती। जबकि सच्चाई ये है कि उन्होंने भाजपा के लिए इस चुनाव में काफी मेहनत की है।

अब देखिए इस समाज के वोटों के लिए अखिलेश यादव ने कितने तिकड़म बेले। नीचे संलग्न की गई तस्वीर को देखिए, जिसमें समाजवादी पार्टी गठबंधन की बैठक चल रही थी और इसके मुखिया की कुर्सी पर ‘अपना दल’ के एक धड़े की प्रमुख कृष्णा पटेल को बिठाया गया था। उन्हें अखिलेश यादव ‘राजमाता’ कह कर पुकारते हैं। मीडिया ने भी इसे ‘बड़ा राजनीतिक सन्देश’ बताया। ये अलग बात है कि उनकी बेटी अनुप्रिया पटेल केंद्र सरकार में मंत्री हैं और भाजपा की गठबंधन सहयोगी भी।

इसी तरह सपा के प्रदेश अध्यक्ष भी नरेश उत्तम पटेल हैं, जो चुनाव में सक्रियता के नाम पर मंच पर सोने के लिए मशहूर हैं। एक बार तो उनकी जुबान ऐसी फिसली कि उन्होंने ‘अखिलेश यादव ने किसानों को तबाह कर दिया’ वाला बयान दे दिया। सितंबर 2021 में उन्नाव के फतेहपुर चौरासी में उनके काफिले से टकरा कर एक महिला की मौत हो गई। कुल मिला कर वो गलत कारणों से ही चर्चा में रहे हैं। स्वतंत्र देव सिंह के बयान इन सबके मुकाबले ज्यादा सुर्खियाँ भी बने और कभी उसमें कोई नकारात्मक झलक भी नहीं दिखी।

भाजपा ने अगस्त 2021 में ही इसकी तैयारी कर ली थी कि सभी 75 जिलों में OBC सम्मेलन आयोजित किए जाने का खाका तैयार कर लिया था। इसके लिए 32 तीनों का गठन किया गया और सभी 75 जिलों में अभियान चलाया गया। 2019 में स्वतंत्र देव सिंह को राज्य की कमान देकर भाजपा ने बता दिया था कि वो सरकार के साथ-साथ संगठन में भी ‘सबका साथ, सबका विकास’ फॉर्मूले पर चलती है। वो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी – तीनों के विश्वासपात्र हैं।

ये भी याद रखने की बात है कि 2014 लोकसभा चुनाव में में अमित शाह उत्तर प्रदेश में पार्टी के प्रभारी थे और उस दौरान पीएम मोदी की कई रैलियों का पर्दे के पीछे से प्रबंधन कर स्वतंत्र देव सिंह ने अपनी क्षमता का परिचय दिया था। ढाई साल तक योगी सरकार में मंत्री रहते हुए भी उन्होंने अपने परफॉर्मेंस से सीएम योगी का विश्वास जीता। शुरुआती दौर में विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे स्वतंत्र देव सिंह RSS बैकग्राउंड से आते हैं और 2001 में युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं।

2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें मध्य प्रदेश का प्रभार सौंपा और वहाँ भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा। राज्य में 29 में से 28 सीटें भाजपा के नाम गईं। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से आने वाले स्वतंत्र देव सिंह की कर्मभूमि बुंदेलखंड रही है, जो यूपी के सबसे पिछड़े इलाकों में से एक रहा है। यही कारण है कि गरीबों की समस्याओं को वो समझते रहे हैं। मीडिया के सामने योगी सरकार के कामकाज को सामने रखने में भी उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी।

स्वतंत्र देव सिंह के बारे में एक दिलचस्प तथ्य ये है कि कभी उनके गाँव के लोग उन्हें ‘कॉन्ग्रेस सिंह’ के नाम से जानते थे। असल में इसका कारण ये नहीं है कि वो कभी कॉन्ग्रेस में रहे। वो कभी कॉन्ग्रेस में थे ही नहीं। गाँव में लोगों के नाम कलक्टर से लेकर डिप्टी तक रख दिए जाते थे। हालाँकि, भाजपा में कद बढ़ने के साथ ही उनका ये नाम पीछे छूटता चला गया। कभी पत्रकार रहे स्वतंत्र देव सिंह 2012 में उरई के कालपी से विधानसभा चुनाव हार गए थे, लेकिन उसके बाद उन्होंने अपनी मेहनत से सूबे में एक अलग स्थान बनाया।

फिर उन्हें विधान पार्षद बनाया गया। यूपी में वो पार्टी के महामंत्री रहे। 12 सीटों पर हुए उपचुनाव को उनकी पहली परीक्षा माना गया और वो इसमें सफल रहे। उनसे पहले ओमप्रकाश सिंह और विनय कटियार भी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं, जो इसी समाज से आते हैं। इस समाज को योगी सरकार में भी अच्छा प्रतिनिधित्व मिला और तीन नेताओं को मंत्री बनाया गया। 2017 चुनाव के बाद भाजपा में इस समाज से 7 सांसद और 26 विधायक थे।

अगस्त 2021 में एक ऐसा समय भी आया जब समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने स्वतंत्र देव सिंह को अपनी पार्टी में आने का न्योता दे डाला। उन्होंने कहा, “सपा में शामिल हो जाओ, बहुत आगे तक जाओगे।” जब भाजपा के वयोवृद्ध नेता रहे कल्याण सिंह की श्रद्धांजलि सभा में न्योता देने के लिए वो मुलायम के पास गए थे, तब उन्हें ये ‘ऑफर’ मिला था। एक तरफ स्वतंत्र देव सिंह ने अखिलेश यादव को श्रद्धांजलि सभा में न आने पर सोशल मीडिया के मध्यम से लताड़ा, तो दूरी तरफ मुलायम को न्योता दे दिखा दिया कि भाजपा ‘मनभेद’ में विश्वास नहीं रखती।

13 फरवरी, 1964 को जन्मे स्वतंत्र देव सिंह की कर्मभूमि जालौन रही है और झाँसी में उनकी शादी हुई। कभी 1986 में उराई स्थित DAV डिग्री कॉलेज में छात्र संघ का चुनाव हार जाने वाले इस नेता ने अपनी मेहनत के बल पर इन सबके बावजूद यहाँ तक का सफर तय किया। कभी उनके ही समाज से आने वाले बेनी प्रसाद वर्मा को मुलायम सिंह ने सपा का गैर-यादव OBC चेहरा बनाया था। 2022 विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत में सीएम योगी, पीएम मोदी और केशव मौर्य के साथ-साथ स्वतंत्र देव सिंह का योगदान भी होगा।

‘चुनाव आयोग EVM में कर रहा है गड़बड़ी’: एग्जिट पोल्स पर बरसते हुए ‘रोते-रोते बचे’ अखिलेश यादव, कहा – किसानों की तरह बैठे सपा कार्यकर्ता

समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद आए एग्जिट पोल्स पर सवाल खड़े किए हैं। बता दें कि गुरुवार (10 मार्च, 2022) को आने वाले चुनाव परिणाम से पहले लगभग सभी एग्जिट पोल्स में भाजपा की बड़ी जीत दिखाई जा रही है, जिससे पता चल रहा है कि योगी आदित्यनाथ दोबारा देश के सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में लौटने वाले हैं। साया लगा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में नाराज़ दिखे अखिलेश यादव ‘रोते-रोते’ बचे।

उन्होंने आरोप लगाया कि एग्जिट पोल्स ये धारणा बनाना चाहते हैं कि एग्जिट पोल्स में भाजपा जीत रही है। उन्होंने चुनाव आयोग पर EVM के साथ छेड़छाड़ के आरोप भी मढ़ दिए। उन्होंने कहा कि ईवीएम को गलत तरीके से ले जाया जा रहा है और हमें सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईवीएम को उम्मीदवारों को बिना बताए ले जाया जा रहा है। उन्होंने इसे ‘चोरी’ बताते हुए कहा कि हमें अपने वोट बचाने की ज़रूरत है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इसे ‘लोकतंत्र बचाने का आखिरी मौका’ बताते हुए कहा कि वो इसके खिलाफ न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाएँगे। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी अयोध्या में जीत दर्ज करने जा रही है और इसीलिए भाजपा नाराज़ है। उन्होंने चुनाव आयोग के अधिकारियों को भी ‘साजिश में शामिल’ बताया। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को ‘वोट बचाने’ का सन्देश दिया। उन्होंने ‘किसान आंदोलन’ की तरह अपने कार्यकर्ताओं को बैठने के लिए कहा।

अखिलेश यादव ने ट्विटर के माध्यम से भी अपील की, “वाराणसी में EVM पकड़े जाने का समाचार राज्य की हर विधानसभा को चौकन्ना रहने का संदेश दे रहा है। मतगणना में धाँधली की कोशिश को नाकाम करने के लिए सपा-गठबंधन के सभी प्रत्याशी और समर्थक अपने-अपने कैमरों के साथ तैयार रहें। युवा लोकतंत्र व भविष्य की रक्षा के लिए मतगणना में सिपाही बने! आज से,अभी से हर युवा, हर मतदाता अगले 3 दिन तक मत की रक्षा के लिए मतगणना केंद्र की क़िलेबंदी कर दे और ढोल-मंजीरा लेकर आज़ादी के अफ़साने गाए।”

अखिलेश यादव ने कहा कि किसानों की तरह उनके लिए भी लोकतंत्र के लंगर लगेंगे व दुनिया देखेगी लोकतंत्र को कैसे बचाया जाता है। उन्होंने दावा किया कि राजनीति बाहुबल के आगे जनबल झुकेगा नहीं। बता दें कि एग्जिट पोल्स में भाजपा को 250 से भी अधिक सीटें मिलती हुई दिखाई जा रही हैं। उत्तर प्रदेश में सपा, बसपा, कॉन्ग्रेस और सत्ताधारी भाजपा में ही मुख्य लड़ाई है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस के खाता खोलने पर भी आफत दिख रही है।

मात्र 12 दिनों में अजीत कुमार और पवन कल्याण ने मिल कर पार किया ₹400 करोड़ का आँकड़ा, ‘गंगूबाई’ नहीं निकाल पाएगी बजट

बॉक्स ऑफिस पर इन दिनों दो ही फ़िल्में धूम मचा रही हैं। एक हैं अजीत कुमार (Ajith Kumar) की तमिल फिल्म ‘वलिमै’ (Valimai) और दूसरी है पवन कल्याण (Pawan Kalyan) की ‘भीमला नायक’ (Bheemla Nayak), जिन्हें दर्शकों का अच्छा-खासा प्यार मिल रहा है। दोनों ही दक्षिण भारत की फ़िल्में हैं। अजीत कुमार को तमिलनाडु में ‘थाला’ (Thala) और पवन कल्याण को आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना में ‘पॉवर स्टार’ (Power Sar) कह कर पुकारा जाता है। आइए, यहाँ हम आपको बताते हैं कि दोनों फिल्मों का कलेक्शंस (Box Office Collections) कैसा रहा है।

सबसे पहले बात करते हैं ‘थाला’ अजीत कुमार की ‘वलिमै’ की, जिसने 12 दिनों में दुनिया भर में 216 करोड़ रुपए का कारोबार किया है। केवल तमिलनाडु की ही बात करें तो यहाँ फिल्म का कलेक्शन 150 करोड़ रुपए के पार पहुँच गया है। हालाँकि, फिल्म ने अपने पहले सप्ताह में जितनी कमाई की थी उसका एक छोटा हिस्सा ही वो दूसरे सप्ताह में कमा सकी। इसका कारण है कि हिंदी बेल्ट में इसे ठीक प्रतिक्रिया नहीं मिली और समीक्षकों ने भी इसे औसत रेटिंग ही दी थी।

अब बात करते हैं ‘पॉवर स्टार’ पवन कल्याण की फिल्म ‘भीमला नायक’ की, जिसने दुनिया भर में 11 दिनों में 185 करोड़ रुपए का कारोबार किया है। लोगों को इंतजार है कि फिल्म 200 करोड़ रुपए के ग्रॉस का आँकड़ा कब पार करेगी। अकेले आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भाजपा के गठबंधन स्थित ‘जन सेना’ के अध्यक्ष की फिल्म ने 128 करोड़ रुपए से भी अधिक कमाए हैं। इस फिल्म की भी मार्केटिंग हिंदी बेल्ट में ठीक से नहीं की गई और इसे वहाँ एक सप्ताह देर से भी रिलीज किया गया।

अंत में बात कर लेते हैं आलिया भट्ट अभिनीत संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘गंगूबाई कठियावाड़ी’ की, जिसका बजट 175 करोड़ रुपए के आसपास है। इस फिल्म ने 11 दिनों में 95 करोड़ रुपए नेट कमाए हैं। ये फिल्म का भारत में नेट कलेक्शंस हैं, ग्रॉस नहीं। दुनिया भर में इस फिल्म ने 142 करोड़ रुपए के आसपास बटोर लिए हैं। हालाँकि, लाभ के लिए इसके नेट कलेक्शन को बजट की रकम को पार करना होगा, जिसकी संभावना नहीं दिखती।

त्रिपुरा में सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 33% आरक्षण, हरियाणा में पंचायती राज संस्थानों में 50% तक होगी भागीदारी

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज (8 मार्च, 2022) ऐलान किया कि त्रिपुरा में सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा। त्रिपुरा में बिप्लव देव सरकार के 4 साल पूरे होने पर एक दिवसीय दौरे पर आए अमित शाह ने आज जहाँ माँ त्रिपुरा सुंदरी के दर्शन कर आशीर्वाद माँगा वहीं अगरतला में एक रैली को भी संबोधित किया। गृहमंत्री शाह ने कहा कि हमारे देश की आजादी को 75 वर्ष पूरे हो गए हैं। साथ ही खूबसूरत त्रिपुरा को भी बने हुए 50 साल पूरे हो गए हैं।

आज जहाँ गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर निशाना साधा वहीं महिलाओं के विकास के लिए भी त्रिपुरा सरकार की कई योजनाओं को जनता के सामने रखा। अमित शाह ने रैली में बिप्लव देव सरकार के विकास कार्यों को भी गिनाया। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा के हर गरीब के घर में बिजली पहुँचाने का काम भाजपा सरकार ने किया है। हमारी सरकार ने त्रिपुरा में रोड और रेलवे से जुड़ी दर्जनों योजनाओं को पूरा किया है।

उन्होंने कहा कि त्रिपुरा की सरकारी नौकरियों में अब 33 प्रतिशत आरक्षण माताओं-बहनों को मिलने वाला है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सरकारी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स या बाजारों में दुकानें संचालित करने के लिए 50% आरक्षण मिलेगा। महिलाओं द्वारा स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए 50% उद्यम पूंजी कोष आरक्षित है। मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब द्वारा महिला कल्याण की इस पहल से त्रिपुरा में सभी को लाभ होगा।

वहीं आज हरियाणा CM मनोहर लाल खट्टर ने आज 2022-23 का बजट महिलाओं को समर्पित किया। दिवंगत नेता सुषमा स्वराज के नाम पर 5 लाख रुपए के पुरस्कार की घोषणा की और पंचायती राज संस्थानों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए महिलाओं के लिए आरक्षित 33% सीटों को 50% तक बढ़ाने की घोषणा की है।

गौरतलब है कि त्रिपुरा की रैली अमित शाह ने रैली के मंच से विपक्षी दलों पर जमकर निशाना साधा। शाह ने कहा कि 25 साल तक कम्युनिस्टों ने त्रिपुरा में राज किया था। 2015 में जब मैं यहाँ आया था, हर कोई यहाँ त्राहिमाम कर रहा था। उन्होंने कहा, “25 साल तक कम्युनिस्टों ने यहाँ गरीबों के नाम पर राज किया, लेकिन गरीबों के लिए कुछ नहीं किया। भाजपा और अन्य दलों के 39 से ज्यादा कार्यकर्ताओं की हत्या की गई। उस समय भाजपा ने तय किया था कि हम त्रिपुरा में एक आंदोलन खड़ा करेंगे।”

गृहमंत्री अमित शाह ने आगे कहा, “मुझे आज भी याद है जब पहली बार मैंने इंटीरियर त्रिपुरा में पहली बार चलो पलटाई का नारा दिया तो, लोगों में जो उत्साह दिखा उससे ही हमें पता चल गया था कि यहाँ परिवर्तन होने वाला है। भाजपा सरकार बनने के चार साल बनने के बाद मैं देख रहा हूँ कि जो त्रिपुरा पहले ड्रग्स और नशे के कारोबार से त्रस्त था, वो त्रिपुरा आज आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।”