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‘यूपी में होगी CM योगी की हार’: सपा समर्थक शेर अली शाह ने दाँव पर लगाई 4 बीघा जमीन, शर्त का करारनामा भी बना

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) समेत पाँच चुनावी राज्यों के चुनाव परिणाम कल आएँगे। लेकिन उससे पहले राजनीतिक पार्टियाँ अपना-अपना दावा और तर्क दे रहे हैं। राजनीतिक पार्टियों के साथ ही आम लोगों के बीच भी ऐसा ही कुछ देखने को मिला रहा है। इस पर जहाँ एक तरफ यूपी की राजनीति को समझने वाले पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स और सट्टा बाजार के अपने मत हैं तो वहीं गाँव-शहरों में बैठा आम आदमी भी यूपी चुनावों के नतीजों पर अपनी समझ के लिहाज से कयास लगा रहा है। ये कयास कितने और किस हद तक मजेदार हैं अगर इसे समझना हो तो यूपी के बदायूँ का रुख कर सकते हैं।

यहाँ समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दो समर्थकों में ये शर्त लगी है। परिणाम अखिलेश के पक्ष में होंगे या योगी आदित्यनाथ को फायदा पहुँचाएँगे इसे लेकर चार बीघे जमीन की जोत दाँव पर लग गई है। बदायूँ के विजय सिंह जहाँ भाजपा के समर्थन में हैं तो वहीं शेर अली शाह नाम के शख्स सपा की तरफदारी कर रहे हैं। 

दोनों ने पूरे गाँव के सामने न केवल शर्त लगाई है बल्कि एक करारनामा भी तैयार कराया है जिसमें अँगूठे के निशान के साथ साथ गवाहों के भी नाम लिखे हुए हैं। चूँकि शेर अली और विजय सिंह का ये दिलचस्प करारनामा सोशल मीडिया पर वायरल है। ऐसे में हमारे लिए भी ये बहुत जरूरी है कि हम बताएँ कि इस करारनामे में लिखा क्या है। 

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शेर अली और विजय सिंह का करारनामा सोशल मीडिया पर सुुर्खियाँ बटोर रहा है

शर्त में क्या लिखा है

यूपी में भाजपा आएगी या अखिलेश यादव को यूपी अपने अगले मुख्यमंत्री के रूप में देखेगा? शेर अली और विजय सिंह का ये सवाल पंचायत की नजर में आ चुका था, इसलिए जो करारनामा तैयार हुआ है उसमें साफ साफ लिखा है कि यदि बीजेपी की सरकार बनी तो शेर अली शाह अपनी चार बीघा जमीन विजय सिंह को एक साल तक खेती के लिए देंगे। वहीं, यदि सपा की सरकार बनी तो विजय सिंह को 4 बीघा जमीन एक साल के लिए शेर अली के हवाले करनी होगी।

गाँव के प्रमुख 12 लोग बने गवाह 

बाद में कोई अपने बात से न पलटे इसके लिए गाँव के प्रमुख लोग किशनपाल सेंगर, जय सिंह शाक्य, कन्ही लाल, राजाराम, उमेश, राजीव कुमार, सतीश कुमार सहित 12 लोग गवाह बने हैं। यानी जहाँ एक तरह यूपी चुनाव के परिणाम अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ के लिए अहम हैं तो वहीं शेर अली और विजय सिंह के लिहाज से ये महत्वूर्ण हैं।

बिहार में सिर्फ 1 हफ्ते में 2 जगह बम ब्लास्ट: गोपालगंज में हलीम मियां के उड़े परखच्चे, पुलिस ने बोरी में इकट्ठा किया शव

बिहार के गोपालगंज में बड़ा बम धमाका हुआ है। कहा जा रहा है ये धमाका पटाखा बनाने के दौरान एक घर में हुआ। इस धमाके में एक व्यक्ति की मौत और कई लोगों के घायल होने की खबरे हैं। विस्फोट में मारे गए व्यक्ति की पहचान 55 साल के हलीम मियां (कुछ रिपोर्ट में नाम अली मियां कहा जा रहा है) के तौर पर हुई। पुलिस अब मौके पर पहुँचकर इस मामले की जाँच कर रही है और घायलों को अस्पातल पहुँचाकर उनका इलाज करवाया जा रहा है। 

रिपोर्ट्स के अनुसार, ये धमाका इतना तेज था कि मरने वाले व्यक्ति के परखच्चे उड़ गए। वहीं जिस घर में ये विस्फोट हुआ वो भी धराशायी हो गया है। पुलिस ने अलग-अलग जगह से शव के टुकड़े उठाए और बोरी में भरकर अपने साथ लेकर गए। घायल अख्तम आलम को इलाज के लिए दूसरे अस्पताल रेफर किया गया है।

सामने आई जानकारी के मुताबिक, एसपी आनंद कुमार ने बताया कि बम धमके की जाँच की जा रही है। पटना और मुजफ्फरपुर से एफएसएल की टीम को बुलाया गया है। इसके अलावा एटीएस की टीम को भी बुलाया गया है। फिलहाल पुलिस ने इस पूरे इलाके को सील कर दिया और हर एंगल पर जाँच की जा रही है।

पुलिस ने इस धमाके की बाबत मृतक के परिजनों में से एक नेका आलम से पूछताछ की है। उसका कहना है कि यह धमाका नहीं था, बल्कि घर में सिलेंडर फटा है। पूरी घटना फुलवरिया थाना क्षेत्र के बथुआ बाजार की है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले बिहार के भागलपुर में बम ब्लास्ट हुआ था। इसके बाद पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में पटाखे बरामद किए थे। ये धमाका तातारपुर थाना क्षेत्र के काजवलीचक मोहल्ले में पिछले गुरुवार को हुआ था। इस धमाके में 14 जानें गई थीं। सिटी एसपी सवर्ण प्रभात ने बताया था कि हबीबपुर थाना क्षेत्र में बायपास के नजदीक सरदारपुर में गौशाला की जमीन पर अवस्थित एक ट्रांसपोर्ट के दोनों गोदामों में अवैध रूप से भंडारण किए गए करीब 1800 कार्टन पटाखा बरामद किया गया है।

बता दें कि 1 हफ्ते के भीतर दो विस्फोटों पर वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “भागलपुर के बाद आज गोपालगंज। एक ही सप्ताह में दूसरा बम धमाका और उनसे हुई डेढ़ दर्जन लोगों की मौतों ने आंतरिक सुरक्षा को एक बड़ी चुनौती दी है। पहले के आधा दर्जन विस्फोटों में लीपापोती व पटाखों की आड़ में जिहादियों को प्रश्रय बेहद घातक है।”

इस्लामी आतंकवाद हटाओ, हिंदू आतंकवाद डालो: ‘द कश्मीर फाइल्स’ की कहानी में ‘घुसपैठ’ चाहता था OTT प्लेटफॉर्म, विवेक अग्निहोत्री ने किया खुलासा

फिल्मकार विवेक अग्निहोत्री की मल्टी-स्टारर फिल्म द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files) इन दिनों चर्चा में है। 1990 के दशक में जम्मू-कश्मीर में हिंदुओं के नरसंहार और पलायन पर बनी यह फिल्म 11 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। जम्मू और दिल्ली में इस फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया था। उन्होंने उस दर्द को गहराई से महसूस किया जो कभी कश्मीरी हिन्दुओं को झेलनी पड़ी थी।

ऑपइंडिया के सीईओ राहुल रौशन के साथ बातचीत में विवेक अग्निहोत्री ने इस फिल्म के निर्माण की प्रक्रिया, उनकी टीम के सामने आने वाली चुनौतियों, सिनेमाघरों तक इसे लाने की राह की अड़चनों समेत तमाम मुद्दो पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि कैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म कुछ खास विचारधाराओं से प्रभावित हैं? कैसे ये एक तय ढाँचे के अन्दर काम करते हैं? कैसे इस्लामिक आतंकवाद पर पर्दा डालने के लिए उनकी फिल्म की स्क्रिप्ट में बदलाव के प्रयास किए गए थे? राहुल रौशन के साथ विवेक अग्निहोत्री की पूरी बातचीत आप नीचे सुन सकते हैं;

अग्निहोत्री ने बताया कि एक बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म ने द कश्मीर फाइल्स को रिलीज करने के लिए साल 2020 में उनसे संपर्क किया था। यह तब की बात है जब वैश्विक कोरोना संक्रमण की वजह से सिनेमाघर पूरी तरह बंद थे। बड़े निर्माताओं को भी फिल्म रिलीज करने के लिए नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम, हॉटस्टार, सोनी लीव और जी फाइव जैसे ओटीटी मंचों का सहरा लेना पड़ा था।

अग्निहोत्री ने बताया (27वें मिनट से आप वीडियो में सुन सकते हैं) कि एक चर्चित ओटीटी प्लेटफॉर्म के प्रमुख ने उन्हें फिल्म के राइट खरीदने के लिए ऑफर दिया था। अग्निहोत्री ने बताया कि यदि वे व्यवसायिक हित को प्राथमिकता देने वाले निर्माता होते तो यह ऑफर स्वीकार कर लेते। लेकिन इसके एवज में उनसे जिस चीज की अपेक्षा की जा रही थी वे इसके लिए तैयार नहीं थे।

उन्होंने बताया कि जब ओटीटी प्लेटफॉर्म के प्रमुख ने उनसे पूछा कि क्या फिल्म में आतंकवाद को लेकर किसी विशेषण का इस्तेमाल किया गया है तो वे चकित रह गए। विवेक के अनुसार प्लेटफॉर्म के मुखिया का कहना था कि वे फिल्म में इस्लामिक आतंकवाद जैसे शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकते। उनसे स्पष्ट शब्दों में कहा गया, “हमारी एक वैश्विक नीति है कि हम अपनी किसी भी फिल्म में इस्लामिक आतंकवाद शब्द का प्रयोग नहीं करते हैं। मुझे आशा है कि आप इसका उपयोग नहीं कर रहे हैं।”

विवेक के अनुसार उन्होंने तुरंत जवाब देते हुए कहा, “यह कैसै संभव है? जब कश्मीर में इस्लाम कबूल करो, घाटी छोड़ दो या मरो जैसे नारे लगाए जा रहे थे तो, यह इस्लामी आतंकवाद के अलावा और कुछ नहीं था। यह केवल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाकर घाटी छोड़ने के लिए मजबूर करने का मामला भर नहीं था। यह केवल सांस्कृतिक विरोध भर नहीं था जिसमें कहा जाए कि आप दीपावली जैसे उत्सव नहीं मना सकते।”

कश्मीर में 90 के दशक में हुए नरसंहार पर बात करते हुए विवेक ने कहा कि हिन्दुओं के प्रति नफरत का भाव स्पष्ट था। संदेश साफ था या तो धर्म बदलो या कश्मीर छोड़ दो। जो यह स्वीकार नहीं करते उन्हें मार दिया जाता। हिन्दुओं को अपने घर की महिलाओं को घाटी में छोड़ कश्मीर छोड़ने तक की धमकियाँ दी गई। कश्मीर में हुए नरसंहार में हिन्दुओं के साथ-साथ सिख समुदाय के लोग भी मारे गए। सिखों की हत्या भी उनके धर्म की वजह से हुई ना कि आर्थिक वजहों से, जैसा कि बरखा दत्त जैसे लोग बताते हैं।

विवेक के अनुसार उन्होंने ओटीटी प्लेटफॉर्म के मुखिया से कहा कि ‘इस्लामी आतंकवाद’ का इस्तेमाल किए बिना यह फिल्म बनाना वैसे ही होगा जैसा नाजी, जर्मनी और हिटलर का जिक्र किए बिना यहूदी नरसंहार पर कोई फिल्म बनाई जाए। इसके जवाब ओटीटी कंपनी के प्रमुख ने उनसे कहा कि यह भी सच है कि मुसलमान भी मारे गए थे। तब आपको ‘हिंदू आतंकवाद’ शब्द का भी प्रयोग करना चाहिए। इसके जवाब में विवेक ने उनसे कहा था कि मुसलमानों को हिंदू आतंकवादियों ने नहीं मारा था। उन्हें इस्लामी आतंकवादियों ने हिंदुओं के साथ खड़े होने की वजह से मारा था।

विवेक ने इस घटना का जिक्र करते हुए बताया कि इसी तरह एक तय विमर्श से फिल्मों को कंट्रोल किया जाता है। हालाँकि उन्होंने सीधे तौर पर उस ओटीटी प्लेटफॉर्म का नाम नहीं बताया। लेकिन संकेतों में बताया कि इस प्लेटफॉर्म के प्रमुख सीधे तौर पर स्वीकार करते हैं कि भारतीय बाजार में उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं है। संयोग से, नेटफ्लिक्स के सीईओ रीड हेस्टिंग्स ने हाल ही में सार्वजनिक रूप से भारतीय बाजार में वीडियो स्ट्रीमिंग कंपनी की धीमी वृद्धि की बात स्वीकार की थी।

विवेक के अनुसार एक खास विचारधारा का दखल केवल फिल्म के रिलीज तक ही सीमित नहीं है। यह फिल्म की समीक्षाओं में भी साफ तौर पर दिखता है। अनुपमा चोपड़ा जैसी फिल्म समीक्षकों ने रिलीज से पहले ही उनकी फिल्म को खराब करार दे दिया। एनडीटीवी ने रिलीज से पहले ही फिल्म को प्रोपेगेंडा पर आधारित बता दिया। हाल ही में विवेक अग्निहोत्री ने ट्विटर पर एक फैन को जवाब देते हुए यह भी बताया था कि बड़े कमर्शियल स्टार नहीं होने की वजह से ‘द कपिल शर्मा शो’ ने द कश्मीर फाइल्स का प्रमोशन करने से इनकार कर दिया है।

विवेक अग्निहोत्री ने इन्टरव्यू के दौरान साफ तौर पर कहा कि उन्हें दर्शकों पर पूरा विश्वास है। फिल्म में दर्शन कुमार, अनुपम खेर, मिथुन चक्रवर्ती, पल्लवी जोशी, चिन्मय मंडलेकर और भाषा सुंबली मुख्य भूमिकाओं में हैं।

जब मेलुहा के लोगों ने ‘नीलकंठ’ को मान लिया भगवान… अमीष त्रिपाठी की ‘शिवा ट्रिलॉजी’ पर फिल्म बनाएँगे शेखर कपूर, कहा – सब करते हैं पसंद

मशहूर लेखक अमीष त्रिपाठी (Amish Tripathi) की एक माइथोलॉजिकल नॉवेल ‘द इम्मॉर्टल्स ऑफ मेलुहा’ (The Immortals of Meluha) है जो शिवा ट्रिलॉजी सीरीज की पहली पुस्तक है। अब इस पुस्तक को फिल्मी पर्दे पर जीवंत रूप में दुनिया के सामने पेश करने की तैयारी की जा रही है। इस पर बॉलीवुड के मशहूर फ़िल्मकार शेखर कपूर (Shekhar Kapoor) एक फिल्म बनाने जा रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रख्यात लेखक अमीष त्रिपाठी के नॉवेल के अडैप्टेशन से बनने वाली इस फिल्म का नाम भी ‘शिवा’ रखा जाएगा। इस ट्रिलॉजी पर फिल्म बनाने के मुद्दे पर शेखर कपूर कहते हैं कि अमीष की यह किताब देश की सबसे सनसनीखेज किताब की एक सीरीज है, जिसे हर उम्र और हर वर्ग के लोग पसंद करते हैं। उन्होंने कहा कि ये पौराणिक होने के साथ ही यह बहुत ही बेहतरीन कहानी है।

गौरतलब है कि इससे पहले शेखर कपूर बैंडिंट क्वीन औऱ मिस्टर इंडिया जैसी फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं। इसके अलावा ‘द फैमिली मैन’ के निर्देशक रहे सुपर्ण एस वर्मा भी इसके डायरेक्टर होंगे। फिल्म का प्रोडक्शन ग्लोबल एँटरटेनमेंट स्टूडियो ‘टरनेशनल आर्ट मशीन’ के द्वारा किया जाएगा। इस हॉलीवुड कंपनी का भारत में यह पहला प्रोजेक्ट है। अमेजन प्राइम वीडियो के पूर्व अध्यक्ष राय प्राइस इस कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।

उल्लेखनीय है कि अमीष त्रिपाठी की द इम्मॉर्टल्स ऑफ मेलुहा 1900 ईसा पूर्व में मेलुहा नाम के राज्य को बताती है। इसमें तिब्बत के एक प्रवासी के बारे में बताया गया है, जिसका नाम शिवा होता है। मेलुहा के लोग उसे भगवान शिव (नीलकंठ) मानते हैं। अमीष ने तीन किताबें लिखी हैं, इनमें से क्रमश: पहली इम्मॉर्टल्स ऑफ मेलुहा, द सीक्रेट ऑफ द नागाज और द ओथ ऑफ वायुपुत्राज। तीनों किताबें क्रमश: 2010, 2011 और 2013 में प्रकाशित हुई थीं। इन किताबों को काफी पसंद भी किया गया था। इसमें भगवान राम के अवतरण से पहले के कई सदी पहले ही कहानी का चित्रण किया गया है।

‘उत्तर प्रदेश को बंगाल नहीं बनने देंगे’: इटावा में EVM की निगरानी के नाम पर सड़कों पर लाठी-डंडों के साथ उतरे सपाई, खुद ही चला रहे चेकिंग अभियान

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के विधानसभा चुनावों में एग्जिट पोल में बीजेपी की सरकार बनता हुआ दिखाया गया है। जिसके बाद अखिलेश यादव के EVM ले जाने को लेकर दिए बयान से सपा में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। जहाँ एक तरफ हार के डर से इसे हिंसा की तैयारी बताया जा रहा है वहीं इटावा का एक वीडियो सामने आया है जिसमें कथित रूप से सपा कार्यकर्ता बताए जा रहे लोग लाठी-डंडों के साथ नजर आ रहे हैं। बता दें कि विधानसभा चुनाव का रिजल्ट 10 मार्च को आनेवाला है।

प्रशांत पटेल उमराव ने ट्वीट किया, “इटावा में लाल टोपी वाले गुंडे हिंसा की तैयारी करते हुए। उत्तर प्रदेश को बंगाल नहीं बनने देंगे।”

वीडियो में जिस तरह से नारे लगाते हुए सपा कार्यकर्ता जा रहे हैं, उससे कई कयास लगाए जा रहे हैं। वहीं अखिलेश यादव का कहना है कि रिजल्ट आने से पहले EVM पर समाजवादी पार्टी कड़ी नजर रख रही है। सपा ने निगरानी के लिए सभी जिलों में प्रभारी नियुक्त किए हैं। इनके अलावा पार्टी ने सभी जिलाध्यक्षों और प्रत्याशियों को आखिरी समय तक मतगणना स्थल पर डटे रहने का भी निर्देश दिया है।

यहाँ तक कि कहा जा रहा है अखिलेश यादव के निर्देश के बाद सपा के बड़े नेता भी इटावा जिले में मतगणना होने वाली जगह पर देर रात पहुँच गए। इन नेताओं में अखिलेश यादव के चचेरे भाई जिलापंचायत अध्यक्ष अभिषेक यादव भी शामिल हैं, जिन्हें सपा ने जिले में मतगणना के लिए प्रभारी बनाया है। उन्होंने आरोप लगाया अन्य जिले में EVM पकड़ने की शिकायत आ रहीं है, इसलिए हम दिन-रात अपने वोटों और EVM की सुरक्षा में डटे रहेंगे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान जिला अध्यक्ष गोपाल यादव ने कहा कि यहाँ पर कोई गड़बड़ी नहीं होने देंगे। हम सभी पदाधिकारी मौजूद हैं और मतगणना के आखिरी समय तक डटे रहेंगे।

कल ही अखिलेश यादव ने EVM को लेकर चुनाव आयोग पर आरोप लगाए थे जिसका चुनाव आयोग ने खंडन करते हुए बताया कि वाराणसी में मिले EVM ट्रेनिंग के लिए ले जाए जा रहे थे। वहीं EVM की सुरक्षा के नाम पर सपा कार्यकर्ताओं ने देर रात सिटी मजिस्ट्रेट के साथ-साथ कई अधिकारियों की गाड़ियों की भी तलाशी ले ली। यहाँ तक कि अखिलेश यादव के चचेरे भाई अभिषेक यादव सपा कार्यकर्ताओं के साथ मतगणना स्थल के गेट पर ही धरने पर बैठ गए थे।

जिसकी सूचना मिलने के बाद पुलिस-प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुँच गए। पुलिसकर्मियों को देख सपाइयों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। साथ ही सिटी मजिस्ट्रेट और SP सिटी की गाड़ी चेक की। ADM जय प्रकाश सिंह ने बताया कि सपा कार्यकर्ताओं के मन में किसी प्रकार का संशय है। इसलिए मतगणना स्थल के बाहर गेट पर वह बैठे हैं। जिसे देखते हुए सुरक्षा और लॉ एंड ऑर्डर की दृष्टि से गेट के पास पुलिस फोर्स तैनात की गई है। स्ट्रॉन्ग रूम कड़े सुरक्षा घेरे में है।

गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद आए एग्जिट पोल्स पर सवाल खड़े किए हैं। गुरुवार (10 मार्च, 2022) को आने वाले चुनाव परिणाम से पहले लगभग सभी एग्जिट पोल्स में भाजपा की बड़ी जीत दिखाई जा रही है, जिससे पता चल रहा है कि योगी आदित्यनाथ दोबारा देश के सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में लौटने वाले हैं। जिससे प्रेस कॉन्फ्रेंस में नाराज़ दिख रहे अखिलेश यादव ने EVM को कोसना शुरू कर दिया था।

‘…केरोसिन या पेट्रोल डाल कर ज़िंदा जला दो’: गुजरात कॉन्ग्रेस विधायक की सलाह, लड़कियों के फोन यूज करने का कर चुकी हैं विरोध

गुजरात के बनासकांठा की वाव सीट से कॉन्ग्रेस विधायक गेनीबेन ठाकोर ने एक बार फिर से विवादित बयान दिया है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर गाँधीनगर में कॉन्ग्रेस सेवा दल द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, विधायक गेनीबेन ठाकोर ने कहा कि महिलाओं को उनके खिलाफ अत्याचार के मामले में सहायता के लिए पुलिस या सरकार की मदद की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए।

ठाकोर ने कहा, “जब भी किसी महिला के साथ अत्याचार या अन्याय होता है तो पुलिस या सरकार की मदद का इंतजार किए बिना, पास की 50 महिलाओं को एक साथ आना चाहिए और अपराधी के ऊपर को केरोसिन/ पेट्रोल डाल कर उसे जनता के बीच जला देना चाहिए।”

इसी कार्यक्रम में एक अन्य कॉन्ग्रेस विधायक चंद्रिकाबेन बारिया ने अपने संबोधन में कहा कि ‘बलात्कारी भाजपा सरकार’ में बैठे लोगों की आँखें निकाल लेनी चाहिए। अनुसूचित जनजाति (ST) के गरबाड़ा चुनाव क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाली बारिया ने कहा, “मुझे यह कहते हुए खेद हो रहा है कि हमें इस भाजपा सरकार में गुंडों से निपटना है। महिलाओं की ओर (बुरी मंशा से) देखने वालों की आँखें निकाल ली जाएँगी।”

पुलिस अधीक्षक मयूर चावड़ा ने बताया कि महिला दिवस के अवसर पर प्रोग्राम करने की अनुमति दी गई थी, लेकिन कुछ लोगों ने भड़काऊ और उकसाने वाले बयान दिए। जिसके बाद मार्च करने की घोषणा की गई। यह सोची-समझी साजिश थी।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब गेनीबेन ठाकोर ने विवादित बयान दिया है। उन्होंने गुजरात के बनासकांठा के कांकरेज तहसील के सिरवादा में हुए किसान सम्मेलन के दौरान विवादित बयान देते हुए कहा था कि अगर उउनका बस चलता तो वह सभी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) वालों की हत्या करवा देती। वीडियो में उन्हें यह कहते हुए सुना गया कि अगर इससे किसानों को फायदा होता है, तो वह उन्हें (भाजपा नेताओं को) मारने और जेल जाने के लिए तैयार हैं। अगर इसके लिए हथियार उठाना है तो कॉन्ग्रेस के नेता ऐसा करने को तैयार हैं।

इससे पहले गेनीबेन ठाकोर ने बनासकांठा जिले में ठाकोर समुदाय द्वारा अपनाए गए उस प्रस्ताव को अपना समर्थन दिया था, जिसमें अविवाहित लड़कियों के मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगाया गया था। प्रस्ताव में अंतर्जातीय विवाह पर भी रोक थी। उन्होंने कहा था कि इस तरह के प्रतिबंध से ‘ऐसी घटनाओं’ पर रोक लगेगी। आदेश में कहा गया था कि अंतर्जातीय विवाह करने पर लड़की के परिवार वालों पर 1.5 लाख रुपए और लड़कों के परिवार वालों पर 2 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। कॉन्ग्रेस विधायक गेनीबेन ठाकोर ने इस कदम को सही ठहराते हुए कहा कि अविवाहित लड़कियों द्वारा मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर इस तरह के प्रतिबंध से ‘लड़कों पर अपने आप नियंत्रण हो जाएगा’।

अब गेंद पर थूक नहीं लगा सकेंगे खिलाड़ी, मांकडिंग भी माना जाएगा रन आउट: क्रिकेट के नियमों में बड़ा बदलाव, डेड बॉल पर भी फैसला

क्रिकेट बहुत लोकप्रिय खेल है औऱ अगर आप क्रिकेट खेलते हैं तो आपने देखा होगा कि अक्सर क्रिकेट के दौरान गेंदबाज को गेंद पर थूक लगाते देखा होगा, लेकिन अब से नए नियम के तहत ऐसा नहीं कर सकेंगे। इस पर बैन लगा दिया गया है। बुधवार (9 मार्च 2022) को मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) ने इस नए नियम का ऐलान किया। इसके अलावा मांकडिंग भी रनआउट की श्रेणी में आएगा। एमसीसी के ये नियम इसी साल अक्टूबर 2022 से प्रभावी हो जाएँगे।

क्या हुए बदलाव

लॉ-18 के तहत अगर कोई खिलाड़ी आउट हो जाता है तो उसके बाद मैदान पर दोबारा से आने वाला खिलाड़ी ही स्ट्राइक पर होगा। चाहे आउट होने से पहले ही खिलाड़ियों ने अपनी स्ट्राइक ले ली हो। इससे पहले तक कैच आउट होने से पहले अगर बल्लेबाज बालिंग के एँड पर पहुँच जाता था तो नया बल्लेबाज स्ट्राइक नहीं लेता था।

लॉ-41.3- सलाइवा इस्तेमाल पर बैन

अक्सर देखा जाता है कि मैच के दौरान बॉलर बॉल को चिकना बनाने और उसे चमकाने के लिए उस पर अपना थूक लगाता है। हालाँकि अब नए नियम के तहत के लिए अब कोई भी खिलाड़ी ऐसा नहीं कर पाएगा। एमसीसी ने इस पर रिसर्च के दौरान ये पाया कि थूक लगाने से बॉलर की स्विंग पर कोई खास असर देखने को नहीं मिला।

मांकडिंग माना जाएगा रन आउट- क्रिकेट नियम -38

क्रिकेट के नए नियम 38 में यह प्रावधान किया गया है कि अब से मांकडिंग को रन आउट माना जाएगा। दरअसल, जब फील्ड पर गेंदबाज के गेंद फेंकने से नॉन स्ट्राइकिंग पर खड़ा बल्लेबाज क्रीज से बाहर आ जाता है तो गेंदबाज गेंद रोककर उसे रन आउट कर देता है। इसी प्रक्रिया को मांकडिंग कहा जाता है। इस व्यवहार को खल भावना के खिलाफ माना जाता रहा है।

डेड बॉल के नियमों में भी बदलाव

नियम 20.4.2.12 – के मुताबिक, एमसीसी ने डेड बॉल के नियमों बदलाव किए हैं, जिसके तहत मैच के दौरान किसी व्यक्ति, वस्तु या फिर जानवर या किसी को भी कोई चोट लगती है तो वो बॉल डेड बॉल मानी जाएगी। इसके अलावा नियम 21.4 के तहत अगर कोई गेंदबाज अपनी डिलीवरी करने से पहले स्ट्राइकर को रन आउट करने की कोशिश करेगा तो ये डेड बॉल होगी। जबकि इससे पहले तक इसे ‘नो बॉल’ कहा जाता था।

लॉ 27.4 और 28.6 – फील्डर की गलती

इस नियम के तहत अगर फील्ड पर फील्डिंग साइड का कोई बॉलर गलत व्यवहार करता है तो अब से पेनल्टी के तौर पर बल्लेबाज को 5 रन दिए जाएँगे। इससे पहले इसे डेड बॉल कह दिया जाता था।

22.1 वाइड बॉल

एमसीसी ने बल्लेबाजों पर भी लगाम लगाने की कोशिश की है। पहले कई सारे नए शॉट खेलते हैं औऱ इसके लिए वे गेंदबाज को कन्फ्यूज करने के लिए पिच के चारों तरफ घूमते हैं। लेकिन नए नियम के तहत जहाँ बल्लेबाज खड़ा होगा वहीं से एक वाइड माना जाएगा।

यूक्रेन में फँसे 9 बांग्लादेशियों का भारत सरकार ने किया रेस्क्यू: प्रधानमंत्री शेख हसीना ने PM मोदी का जताया आभार, इन देशों के नागरिकों को भी मिली मदद

युद्धग्रस्त यूक्रेन (Ukraine) में फँसे भारतीय नागरिकों को रेस्क्यू करने के लिए ऑपरेशन गंगा (Operation Ganga) चलाया जा रहा है। आपरेशन गंगा के तहत अब तक हजारों भारतीय नागरिकों को स्वदेश लाया गया है। खास बात है कि भारत सरकार ने अपने इस ऑपरेशन के जरिए पाकिस्तान (Pakistan), बांग्लादेश (Bangladesh) और नेपाल (Nepal) के अलावा अन्य कई देशों के नागरिकों को भी रेस्क्यू किया है।

शेख हसीना ने पीएम मोदी को कहा शुक्रिया

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, ऑपरेशन गंगा के तहत हाल ही में बांग्लादेश के 9 नागरिकों को यूक्रेन से रेस्क्यू किया गया है। बांग्लादेश के नागरिकों को रेस्क्यू किए जाने पर प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पीएम मोदी को धन्यवाद कहा है।

पाकिस्तान की छात्रा को भी किया रेस्क्यू

इससे पहले, ऑपरेशन गंगा के तहत यूक्रेन में फँसी पाकिस्तान की छात्रा आसमा शफीक को भी भारत सरकार ने रेस्क्यू किया है। आसमा शफीक ने भारत सरकार और पीएम मोदी की तारीफ की है। आसमा जल्द ही अपने परिवार से मुलाकात करने वाली हैं। आसमा ने कहा, “मैं कीव में भारतीय दूतावास को धन्यवाद करना चाहती हूँ। भारतीय दूतावास ने कठिन स्थिति में भी हमारा सपोर्ट किया है। मैं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी धन्यवाद देना चाहती हूँ। उम्मीद है कि हम लोग भारतीय दूतावास की वजह से सुरक्षित घर पहुँच जाएँगे।”

अब तक 18 हजार भारतीयों को लाया गया

विदेश मंत्रालय ने बताया कि यूक्रेन से करीब 18 हजार भारतीय नागरिकों को स्पेशल फ्लाइट के जरिए भारत लाया जा चुका है। मंगलवार (8 मार्च 2022) को दो विशेष विमानों के जरिए यूक्रेन के पड़ोसी देशों से 410 भारतीय नागरिकों को लाया गया है।

भारतीयों के साथ अन्य मुल्क के नागरिकों की मदद

उल्लेखनीय है कि यूक्रेन से भारतीयों को निकालने के बीच 28 फरवरी 2022 को प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से ये बयान दिया गया था कि भारत अपने नागरिकों को निकालते समय अपने पड़ोसी देश के नागरिकों की भी मदद करेगा जो इस समय यूक्रेन में फँसे हुए हैं। ये पहली बार नहीं है जब भारत किसी विपत्ति में अन्य मुल्कों के नागरिकों के काम आ रहा हो। साल 2015 में युद्धग्रस्त यमन से भारतीयों को निकालने के दौरान भी भारत ने अन्य देशों के 1947 लोगों को बचाया था।

‘पूरी दुनिया में रोशनी लेकर आया इस्लाम, 9/11 लादेन की महान उपलब्धि’: Vision IAS के बाद अब ओझा सर के वीडियो वायरल

Vision IAS से जुड़े फैकल्टी सदस्यों की विवादित वीडियोज सामने आने के बाद एक और चर्चित टीचर की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इनका नाम अवध प्रताप ओझा है, जो महाराष्ट्र के IQRA IAS इंस्टिट्यूट में पढ़ाते हैं। वीडियो में उन्हें आतंकी ओसामा बिन लादेन का महिमामंडन करते सुना जा सकता है।

वीडियो में ओझा सर नाम से मशहूर इस टीचर को कहते सुना जा सकता है, “ओसामा बिन लादेन। उसको पता था मुझे किससे लड़ना है। मार दिया ट्विन टावर पर। पूरी दुनिया जानने लगी उसका नाम। उसने USA के घर में घुसकर उसको तमांचा मारा। ये उपलब्धि है। उसने एक बार ही हमला किया। इसे कहते हैं सपना। इससे मतलब नहीं है कि अमेरिकी सेना उसे उठाया उसे मारा।”

एक अन्य वीडियो में ओझा को इस्लाम की उत्पत्ति के बारे में बातें करते सुना जा सकता है। वह कहते हैं, “इस्लाम जब पैदा हुआ तब पूरी दुनिया में अँधेरा छाया हुआ था। इस्लाम का इतिहास पढ़ो। यूरोप में विच हंट के नाम पर महिलाओं को जलाया जा रहा था। भारत में सती प्रथा थी। चीन में लड़कियों की हत्या की जा रही थी। चारों तरफ अँधेरा था, और अँधेरे के बीच मोहम्मद साहब हाथ में दीया लिए खड़े थे, इस्लाम…प्यार…संदेश।”

आगे वीडियो में उन्हें कहते सुना जा सकता है, “मोहम्मद एक रास्ते से हर रोज जाते थे। वहाँ एक महिला उनके ऊपर कूड़ा डालती थी। अगर कोई हमारे ऊपर कूड़ा डाले तो हम उसे गोली मार देंगे कि हमारे ऊपर किसी ने कूड़ा कैसे फेंका। वाजीराम के टीचर पर कूड़ा कैसे फेंका, इतनी औकात तुम्हारी। एक दिन उस महिला ने कूड़ा नहीं फेंका। मकान के अंदर गए। पूछा मोहतरमा कहाँ है। पता चला वो बीमार हैं। उनका हाल चाल पूछा कि मालिक से दुआ करूँगा आप जल्दी ठीक हो जाएँ।”

अवध प्रताप ओझा IQRA IAS में इतिहास के वरिष्ठ फैकल्टी हैं। वह पेशे से वकील हैं और पिछले 15 वर्षों से यूपीएससी के उम्मीदवारों को पढ़ा रहे हैं। उनकी यह वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर एक बार फिर ये बहस छिड़ गई है कि आखिर यूपीएससी जैसी परीक्षा के लिए तैयार करवाने वाले टीचर अभ्यार्थियों को क्या सिखा रहे हैं।

Vision IAS विवाद

बता दें कि इससे पहले सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कोचिंग सेंटर Vision IAS की तथाकथित वामपंथी टीचर स्मृति शाह के कुछ वीडियो सामने आए थे जहाँ किसी में वह शेख अब्दुल्ला को सबसे ज़्यादा लिबरल और सोशलिस्ट बताते नहीं थक रहीं थीं। वहीं किसी में कश्मीरी पंडितों के पलायन और उन पर शोषण को भी जायज ठहरा रही थीं। एक वीडियो में तो वह खुलकर हिजाब और बुर्का के समर्थन में ज्ञान देते हुए इसे सोशल प्राइड बता डाला। इस वीडियो में वह भगवा शाल या जय श्री राम कहने वालों को ही परोक्ष रूप से घेरतीं नजर आईं थी। उनकी तरह कई अन्य टीचरों की भी इस्लाम का महिमामंडन करते वीडियो वायरल हुई थी।

‘इन EVM मशीनों का मतगणना में नहीं हुआ इस्तेमाल’: अखिलेश यादव के आरोपों पर चुनाव आयोग ने दिया जवाब, कहा- वो ट्रेनिंग के लिए है

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (Uttar Assembly Election 2022) एक्जिट पोल आने शुरू हुए हैं, तभी से EVM के बुरे दिन शुरू हो गए। विपक्ष ने EVM को कोसते हुए चुनाव आयोग पर ही गड़बड़ी का आरोप लगा दिया। इस बीच अखिलेश यादव के आरोपों पर चुनाव आयोग ने कहा है कि वो ईवीएम को ट्रेनिंग के लिए लेकर गए हैं।

किसी भी तरह की गड़बड़ी से साफ इनकार करते मुख्य चुनाव अधिकारी ने बताया है कि वाराणसी में जिस ईवीएम को ले जाने का वीडियो वायरल किया जा रहा है वो ईवीएम ट्रेनिंग के लिए लेकर गए थे। यूपी के एक कॉलेज में 9 मार्च 2022 को ट्रेनिंग होनी है। इसीलिए इसे लेकर जाया जा रहा था और इसे राशन के एक गोदाम में रखा गया था। अधिकारी के मुताबिक, स्ट्रॉन्ग रूम में ले जाने के दौरान एक राजनीतिक पार्टी के लोगों ने ईवीएम को रोक लिया और ये अफवाह फैलाई के इसे वोटों की गिनती के लिए ले जाया जा रहा था।

इस मुद्दे पर वाराणसी जिले के जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने 8 मार्च को ही कई राजनीतिक पार्टियों के नेताओं के साथ बैठक की थी। वो कहते हैं कि 20 ईवीएम मशीनों को ट्रेनिंग के लिए ले जाया गया था। इलेक्शन ड्यूटी में लगे कर्मचारियों का यह सेकंड फेज की ट्रेनिंग थी। जिलाधिकारी ने ये भी स्पष्ट किया कि ट्रेनिंग के लिए ले जाई गई मशीनों का इस्तेमाल वोटिंग के दौरान नहीं हुआ था।

अखिलेश यादव ने लगाया था गड़बड़ी का आरोप

गौरतलब है कि आखिरी चरण के मतदान के बाद जब से एजेंसियों ने अपने एक्जिट पोल्स में भाजपा को बहुमत मिलता दिखाया है। उसके बाद से समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने ईवीएम को कोसना शुरू कर दिया। मंगलवार (8 मार्च 2022) को उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और चुनाव आयोग पर ईवीएम से छेड़छाड़ का आरोप लगा दिया। उन्होंने दावा किया कि ईवीएम को गलत तरीके से ले जाया जा रहा है और हमें सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने इसे ‘चोरी’ बताते हुए कहा कि हमें अपने वोट बचाने की ज़रूरत है।