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मदुरै में नाबालिग लड़की की जहर से मौत के बाद, नागूर हनीफा, राजा मोहम्मद, शाहुल हमीद, सुल्तान अलादीन सहित 8 आरोपित गिरफ्तार: पुलिस ने गैंगरेप को नकारा

तमिलनाडु के मदुरै पुलिस ने मेलूर के पास एक नाबालिग लड़की के कथित यौन उत्पीड़न के मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। चूहे मारने के जहर खाने के बाद, सरकारी राजाजी अस्पताल में इलाज करा रही 17 वर्षीय लड़की की 6 मार्च, 2022 को कई अंगों के फेल होने के कारण मौत हो गई थी। इस मामले में यौन अपराधों के विरुद्ध बच्चों का संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम के तहत दस में से आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों पर अवैध रूप से जमा होने, नाबालिग लड़की को खरीदने और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मदुरै जिले के पुलिस अधीक्षक वी. भास्करन ने रविवार को एक बयान में कहा कि लड़की को मदुरै के राजकीय राजाजी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जब उसने एस. नागूर हनीफा (26) के साथ जहर खा लिया था। नागूर हनीफा ने तुरंत जहर उगल दिया, लेकिन लड़की की तबीयत बिगड़ गई और उसे अस्पताल ले जाया गया।

पुलिस ने कहा कि हनीफा ने लड़की को अपने घर छोड़ दिया और उसकी माँ मथिना बेगम से उसे उसके माता-पिता को सौंपने के लिए कहा और उसे 3 मार्च को उसके माता-पिता को सौंप दिया गया। जब माता-पिता को पता चला कि उसने जहर खा लिया है, तो वे उसे ले गए। एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया और बाद में उसे मदुरै के मेलूर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। उसकी हालत बिगड़ने पर उसे मदुरै के सरकारी राजाजी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया।

वहीं 6 मार्च को पत्रकारों को संबोधित करते हुए, जिला पुलिस अधीक्षक वी भास्करन ने मामले के बारे में मीडिया को बताया। हालाँकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि लड़की के साथ न तो सामूहिक बलात्कार किया गया था और न ही नशा दिया गया था। ऐसे में पीड़िता की पहचान सोशल मीडिया पर उजागर करने वालों या गलत जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।

क्या है पूरा मामला

भास्करन ने कहा, “लड़की की माँ ने 15 फरवरी को शिकायत दी थी कि उसकी बेटी लापता है। सामुदायिक सेवा रजिस्टर की रसीद जारी की गई थी। पूछताछ में, हमने पाया कि लड़की उसी शहर के एस नागूर हनीफा (26) के साथ रिश्ते में थी जहाँ वह रह रही थी और वह 14 फरवरी, 2022 को उसके साथ गई थी। 21 फरवरी को प्राथमिकी दर्ज की गई और टीम शुरू में चेन्नई में खोज रहे थे, जहाँ वह व्यक्ति काम कर रहा था, और अन्य क्षेत्रों में। इन परिस्थितियों में 3 मार्च को नागूर हनीफा के परिजन लड़की को उसके घर वापस छोड़ गए।”

“चूँकि, लड़की अस्वस्थ थी, इसलिए परिवार उसे एक स्थानीय निजी क्लिनिक में ले गया और बाद में उसे मदुरै जीएच ले जाया गया। अस्पताल में, डॉक्टर की रिपोर्ट के आधार पर, हमने मामले को POCSO अधिनियम में बदल दिया। तीन विशेष टीमों का गठन किया गया और आगे की जाँच के लिए मदुरै, इरोड और तिरुपुर भेजा गया। नागूर हनीफा और उसकी मदद करने वाले नौ अन्य लोगों की पहचान की गई और उनमें से आठ को गिरफ्तार किया गया है। उन्हें रिमांड पर लिया गया है।”

हालाँकि, पुलिस अधीक्षक ने कहा कि उसके साथ यौन शोषण नहीं हुआ। पुलिस ने कहा कि पुलिस के कहने पर लड़की के माता-पिता गुमशुदगी का मामला दर्ज करने के लिए तैयार नहीं हुए, लेकिन बाद में वे मान गए और प्राथमिकी दर्ज कर ली गई।

एसपी ने बताया कि हनीफा बच्ची को अस्पताल ले गया था और उसे इंजेक्शन लगाया गया था। पुलिस ने नागूर हनीफा, उसके दोस्तों पी. प्रकाश, एम. पेरुमल, कृष्णन, राजा मोहम्मद, शाहुल हमीद, सुल्तान अलादीन, उसकी पत्नी बेगम और उसकी चाची रमजान बेगम को गिरफ्तार किया। वहीं दो संदिग्ध अभी भी फरार हैं।

मामले में कहा जा रहा है कि परिवार और ग्रामीणों ने मुआवजे की मांग को लेकर मेलूर में राजमार्गों के पास विरोध प्रदर्शन किया। एसपी भास्करन ने बाद में लड़की के परिवार से बात की। उसके शव को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी राजाजी अस्पताल भेज दिया गया है।

आतंकी जहूर मिस्त्री की कराची में हत्या: फर्जी पहचान के साथ रहा था पाकिस्तान में, कंधार विमान अपहरण कांड में था शामिल

मोस्ट वांटेड आतंकियों को पनाह देने के मामले में पाकिस्तान एक बार फिर बेनकाब हो गया है। खूंखार आतंकवादी और आईसी-814 अपहरणकर्ता जहूर मिस्त्री उर्फ जाहिद अखुंद की कराची में हत्या कर दी गई। वह 1999 में आईसी-814 के पाँच अपहरणकर्ताओं में से एक था। उसकी हत्या 1 मार्च को हुई। News9 ने पाकिस्तान के कई खुफिया स्रोतों से यह जानकारी दी, लेकिन पाकिस्तानी मीडिया ने इस पर रिपोर्ट करने से परहेज किया।

मिस्त्री पिछले कई सालों से जाहिद अखुंद बनकर फर्जी पहचान के साथ कराची में रह रहा था। अखुंद क्रिसेंट फर्नीचर का मालिक था जो कराची में अख्तर कॉलोनी के भीतर था। रिपोर्ट के मुताबिक, दो हथियारबंद मोटरसाइकिल सवार उस इलाके की रेकी कर रहे थे जहाँ मिस्त्री की फर्नीचर की दुकान थी। अख्तर कॉलोनी की सड़कों पर घूमने के बाद अज्ञात मोटरसाइकिल सवार एक हमलावर फर्नीचर गोदाम में घुस गया और मिस्त्री को निशाना बनाया।

हालाँकि, स्थानीय समाचार एजेंसी जियो न्यूज ने घटना की सूचना दी, लेकिन बिना उसके नाम के। रिपोर्ट में न तो मिस्त्री का नाम बताया गया और ना ही उसकी आतंकी गतिविधियों के बारे में। उसकी हत्या को केवल बिजनेसमैन की हत्या के रूप में रिपोर्ट किया गया। 

कंधार हाईजैक

24 दिसंबर, 1999 नेपाल की राजधानी काठमांडू से दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाले इंडियन एयरलाइंस का विमान आईसी-814 हाईजैक हो गया। शाम 5.30 बजे जैसे ही प्लेन भारतीय क्षेत्र में घुसता है तुरंत आतंकवादी संगठन हरकत उल मुजाहिद्दीन के आतंकवादी प्लेन हाइजैक कर लेते हैं। शाम तक सबको पता चल जाता है भारतीय विमान हाइजैक हो गया है। अमृतसर, लाहौर और दुबई में लैंडिंग करते हुए आतंकी विमान को लेकर अफगानिस्तान के कंधार में उतर जाते हैं।

आठ दिन तक दहशत में रहा देश

प्लेन में 176 यात्री सवार थे, जिनमें से 27 को दुबई में छोड़ दिया गया। लेकिन रूपिन कात्याल नाम के एक यात्री को चाकू गोदकर मार डाला गया और कई लोग घायल हो गए थे। यात्री विमान के अंदर प्रदर्शन शुरू कर चुके थे। तालिबान ने भारतीय विशेष सैन्य बलों द्वारा विमान पर धावा बोलने से रोकने की कोशिश में अपने सशस्त्र लड़ाकों को अपहृत विमान के पास तैनात कर दिया। अपहरण का यह सिलसिला 8 दिनों तक चला और भारत द्वारा तीन आतंकवादियों – मुश्ताक अहमद जरगर, अहमद उमर सईद शेख (जिसे बाद में डेनियल पर्ल की हत्या के लिए गिरफ्तार कर लिया गया) और मौलाना मसूद अजहर (जिसने बाद में जैश-ए-मुहम्मद की स्थापना की) को रिहा करने के बाद खत्म हुआ। 

अपहर्ताओं की पहचान इस प्रकार थी

  • मिस्त्री जहूर इब्राहिम, कराची, पाकिस्तान
  • इब्राहिम अतहर, बहावलपुर, पाकिस्तान
  • शाहिद अख्तर सईद, कराची, पाकिस्तान
  • सन्नी अहमद काजी, कराची, पाकिस्तान
  • शकीर, सुक्कुर, पाकिस्तान

‘वो मेरे बेटे को मार डालना चाहता था’: दिल्ली के निहाल विहार में कोचिंग संचालक एजाज अहमद ने दलित बच्चे को बेरहमी से पीटा, वायरल वीडियो पर ग्राउंड रिपोर्ट

राजधानी दिल्ली के निहाल विहार क्षेत्र में एक बच्चे को पीटने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वीडियो में एक युवक अपने से आधी उम्र के बच्चे की डंडे से पिटाई कर रहा है। छत से कोई व्यक्ति इस वीडियो को बनाता दिख रहा। आरोपित का नाम एजाज अहमद है। पीड़ित छात्र नाबालिग है जो दलित समुदाय से है। घटना 3 मार्च (गुरुवार) की है। आरोपित को हिरासत में ले लिया गया है।

इस मामले में स्वयं पीड़ित छात्र ने पुलिस को शिकायत दी है। शिकायत में उसने बताया, “मैं पिछले 2 साल से अपने माता-पिता और भाई-बहन के साथ किराए के मकान में रहता हूँ। मैं कक्षा 8 का छात्र हूँ। पहले मैं एजाज कोचिंग सेंटर में पढ़ता था लेकिन लगभग 20 दिन पहले मैंने उसे छोड़ कर दूसरे कोचिंग में अपना नाम लिखवा लिया था। 3 मार्च को मैं अपने 2 दोस्तों के साथ छत पर बैठा था। तभी एजाज कोचिंग सेंटर का टीचर एजाज अहमद वहाँ आ कर मुझे बिना कुछ बताए पीटने लगा। उसने मुझे लात, घूंसों के साथ बाँस की लकड़ी से मारा। वो मुझे जान से मार देने की नियत से घसीट कर कोचिंग की तरफ ले गया। घटना के समय मेरे मम्मी – पापा नहीं थे।”

FIR Copy

ऑपइंडिया से बात करते हुए इंस्पेक्टर निहाल विहार SHO ने बताया, “पुलिस ने इस केस में धारा 323, 341, 506 IPC के साथ SC / ST एक्ट के तहत कार्रवाई की है। आरोपित को हिरासत में ले लिया गया है। मामले में जाँच और कानूनी प्रक्रियाएँ जारी हैं।”

ऑपइंडिया ने पीड़ित परिवार से ली विस्तार से जानकारी

ऑपइंडिया की टीम पीड़ित परिवार में पहुँची। पीड़ित का घर निहाल विहार में एक पतली से गली में है। आस-पास दलित समुदाय के लोग रहते हैं। पीड़ित की गली के ही मुहाने पर आरोपित एजाज अहमद का कोचिंग है। यह कोचिंग एक किराए के मकान में चलता है। आस-पास के लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि एजाज के उसी इलाके में एक से अधिक कोचिंग संस्थान चलते हैं। साथ ही वो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मेरठ का रहने वाला है। वो मुख्य रूप से क्लास 12 तक के छात्रों को पढ़ाने के साथ इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स भी करवाया है। एजाज लगभग 5 साल से कोचिंग चला रहा है।

एजाज का कोचिंग सेंटर

पीड़ित की माँ ने कहा, ‘वो मेरे बेटे को मार डालना चाहता था’

पीड़ित परिवार मूल रूप से राजस्थान के अलवर का है। परिवार यहाँ किराए पर है। कमाई का मुख्य स्रोत पिता है जो मजदूरी करता है। कभी – कभार माँ भी मजदूरी करके घर की कमाई में हाथ बँटा देती हैं। ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़ित छात्र की माँ रोने लगीं। उन्होंने रोते हुए बताया, “मेरा बेटा आए दिन मुझसे कहता था कि सर मारते-पीटते हैं। मैं सोचती थी कि बेटे की भलाई के लिए थोड़ा बहुत डांटते होंगे। लेकिन मुझे नहीं पता था कि वो इतना बड़ा जल्लाद है। मेरे बेटे का पूरा शरीर चोट खाया है। उसको कई जगहों से दर्द हो रहा है। मैं उसका इलाज भी करवा रही हूँ। मेरे बाकी बेटे भी उसी के यहाँ पढ़ते थे। लेकिन अब मैं उसको (एजाज) को सज़ा दिलाना चाहती हूँ।”

पीड़ित छात्र की माँ

पीड़िता की माँ ने यह भी कहा कि किसी भी दलित संगठन ने उनका साथ नहीं दिया। अभी तक किसी की सहयोग के लिए कोई कॉल भी नहीं आई। पुलिस वाले आ रहे हैं और वो पुलिस कार्रवाई से संतुष्ट हैं।

पिता बोले, “बहुत मारा मेरे बेटे को, न्याय हो”

पीड़ित छात्र ने कहा, “हम मजदूरी करके अपने बच्चों को पाल रहे हैं। घटना के समय मैं बाहर था। मेरे बेगुनाह बेटे को बहुत मारा है एजाज ने। हमारे साथ न्याय हो।”

न्याय माँगते पीड़ित के पिता

बाथरूम जाने के लिए भी पड़ रही सहारे की जरूरत. पीड़ित छात्र बोला, ‘शायद मैं दलित था, इसलिए’

एजाज द्वारा बेरहमी से पिटाई के शिकार छात्र ने ऑपइंडिया से बातचीत में कहा, “एजाज सर मुझे बहुत पहले से उल्टा सीधा कहते थे। मेरी कोई गलती नहीं थी फिर भी उन्होंने मुझे मारा। शायद इसलिए हुआ क्योंकि मैं दलित था। मेरे पूरे शरीर में दर्द है। मुझे बाथरूम भी जाने के लिए सहारे की जरूरत पड़ रही है। जिस लड़के ने वीडियो बनाई वो उसे भी मारने के लिए दौड़े थे। वीडियो बन जाने के बाद भी वो मुझे मारते रहे। मैं उनसे मारने की वजह पूछता रहा तो उन्होंने नहीं बताया। “

पीड़ित छात्र

पीड़ित छात्र ने जीती हैं 2 ट्रॉफियाँ

जिस दलित छात्र को टीचर एजाज अहमद ने बेरहमी से मारा है वो काफी होनहार बताया जा रहा है। उसको इस कोचिंग संस्थान ने ट्राफियाँ दे रखी हैं। खुद छात्र ने बताया, “मुझे पहली ट्रॉफी बीमारियों से जागरूकता के लिए किए गए नुक्क्ड़ नाटक में मिली थी। साथ ही दूसरी ट्रॉफी अच्छे डांस परफॉर्मेंस में मिली थी। ये दोनों ट्राफियाँ मैं एजाज कोचिंग से पहले जहाँ पढ़ता था वहाँ दी गई थी।”

Award

पीड़ित छात्र के 2 भाई भी पढ़ते थे एजाज की कोचिंग में, उन्हें भी पीटा जाता था

ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़ित छात्र के 2 अन्य भाइयों ने बताया, “हम भी 2 साल से एजाज की कोचिंग में गणित और विज्ञान पढ़ रहे हैं। वो हमें भी मारता पीटता था।” तीनों भाई नाबालिग हैं।

पीड़ित छात्र के 2 अन्य पीड़ित भाई

गरीबी की हालत में जीवन यापन कर रहा परिवार

पीड़ित परिवार एक सामान्य से किराए के मकान में रहता है। घर में किचन और बाथरूम के साथ 2 कमरे हैं। दरवाजे पर बाइक भी खड़ी नहीं हो सकती। परिवार धार्मिक प्रवृत्ति का है जहाँ हिन्दू देवी देवताओं की मूर्तियाँ रखी हुई हैं।

घर के एक कोने में मौजूद पूजा घर

स्थानीय RSS पदाधिकारी ने बताया कि ये पहला मामला नहीं है

ऑपइंडिया ने स्थानीय RSS पदाधिकारी राजेश गर्ग से बात की। राजेश गर्ग ने बताया, “मैं RSS का नांगलोई का सेवा प्रमुख हूँ। एजाज की घटना मेरी जानकारी में आई। बच्चे के साथ हुई घटना पहली बार नहीं है। इससे पहले भी ऐसा हुआ है। पहले भी एक बार ऐसा काण्ड लगभग 5 साल पहले हुआ था। इसके बाद इनके मनोबल बढ़ गए हैं। स्थानीय जनता एजाज का ट्यूशन सेंटर बंद करने और उस पर कड़ी कार्रवाई की माँग कर रही है। बच्चे ने मुझे बताया है कि उसके खिलाफ जातिसूचक शब्द एजाज द्वारा प्रयोग होता रहा है। बच्चे ने जातीय प्रताड़ना सही है। अगर बच्चे का बीच बचाव न हुआ होता तो शायद एजाज उसे छत से भी फेंक देता।”

एजाज पर कार्रवाई की माँग करते हुए RSS पदाधिकारी राजेश गर्ग

राजेश गर्ग ने आगे बताया, “हम और पीड़ित परिवार एजाज के खिलाफ कठोर कार्रवाई की माँग पुलिस से करते हैं। वही बच्चा ही उनका सहारा था जो अभी पढ़ रहा है। अभी वो किराए के मकान में रहते हुए दिहाड़ी की मजदूरी कर रहे हैं। लगभग 2 साल पहले भी यहाँ एक क्लिनिक पर काम करने वाली एक हिन्दू लड़की पर मुस्लिम युवक ने निकाह का दबाव बनाया था। इंकार करने पर उसको बुरी तरह से मारा पीटा गया था। बाद में इस मामले में कार्रवाई के बजाय समझौता करा दिया गया था। अब ऐसी घटनाएँ आम होती जा रही हैं।”

आरोपित टीचर एजाज अहमद

फ़िलहाल पीड़ित छात्र का इलाज चल रहा है। वो आगे की पढ़ाई करना चाहता है। पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद है।

UP में लौट रहे योगी, BJP को कितनी सीटें; अखिलेश की साइकिल और मायावती की हाथी में कितना बचा दम: सही साबित होंगे Exit Poll?

8 जनवरी 2022 को चुनाव आयोग ने तारीखों का ऐलान कर उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव (Assembly Elections 2022) के जिस रण का शंखनाद किया था, उस पर 7 मार्च 2022 को यूपी की आखिरी 54 सीटों पर मतदान पूरा होते ही विराम लग गया। पाँचों राज्यों के नतीजे 10 मार्च को आने हैं। उससे पहले पोल पंडित अपने-अपने ‘गणित’ के साथ सीटों का अनुमान लगा रहे हैं। वैसे एग्जिट पोल (Exit Poll) का अतीत ज्यादातर मौकों पर गलत साबित होने का ही रहा। खासकर, तब जब कोई एकतरफा लहर न दिखती हो या फिर एकतरफा लड़ाई को भी मीडिया ‘कड़ी टक्कर’ प्रचारित करने पर अमादा हो। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश के नतीजों पर सबसे ज्यादा नजरें हैं। लोकसभा में सबसे ज्यादा सांसद भेजने वाले इस राज्य के नतीजों से 2024 के आम चुनावों की दशा और दिशा भी तय होगी। ऐसे में उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा चुनाव के आखिरी नतीजे क्या हो सकते हैं, यह जानने से पहले कुछ उदाहरणों से यह समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर प्रदेश में जमीन पर किस तरह की राजनीति चल रही थी।

जब मेनस्ट्रीम मीडिया स्वामी प्रसाद मौर्य के ‘पालाबदल’ को अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा का मास्टरस्ट्रोक बता रही थी, उन दिनों मैं दिल्ली में नहीं था। पूर्वांचल में भटक रहा था। अचानक से एक बुजुर्ग टकरा गए। चुनाव की बात चली तो उन्होंने कहा, “माहौल तो सही है। थोड़ा बहुत डगमग है। लेकिन उससे कोई अंतर नहीं पड़ेगा।” यह पूछे जाने पर कि किसके लिए माहौल सही है, उन्होंने कहा, “बीजेपी के लिए।” अगला सवाल स्वामी प्रसाद मौर्य के बीजेपी छोड़ने को लेकर पूछा तो उनका जवाब था, “प्रभाव नहीं पड़ने वाला है इससे, क्योंकि और भी लोग हैं। उनका कोई मतलब नहीं। देखा जाए तो पब्लिक को काम प्यारा है। काम हो रहा है, वर्क हो रहा है तो सब सही है। किसी के आने-जाने से फर्क नहीं पड़ता।” ये सारी बातें कहने वाले शख्स का नाम विजय कुमार मौर्य है और उन्होंने भी अपने जीवन में राजनीति के उतने ही मोड़ देख रखे हैं, जितना 68 वर्षीय स्वामी प्रसाद मौर्य का देखा है।

बाद में कुशीनगर की अपनी परंपरागत पडरौना सीट छोड़ स्वामी प्रसाद मौर्य फाजिलनगर से चुनाव लड़ने चले गए। बीच चुनाव जब स्वामी प्रसाद मौर्य ‘मेरे काफिले पर बीजेपी के लोगों ने हमला किया है’ का प्रलाप अलाप रहे थे, उस वक्त फाजिलनगर में बसपा के इलियास अंसारी उनकी राजनीतिक जमीन खोद रहे थे। मेनस्ट्रीम मीडिया के लिए अंसारी भले मौर्य की तरह हैवीवेट नही हैं, लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि अंसारी चुनाव से ऐन पहले तक सपा में ही थे। मौर्य के लिए जब सपा ने उनसे मुँह मोड़ लिया तो उनका एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वे कह रहे थे, “मैंने समाजवादी पार्टी के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया। सपा की राजनीति के चलते मेरी 22 साल की बेटी विधवा हो गई। पार्टी की वजह से मेरे दामाद की हत्या हो गई। समाजवादी पार्टी मेरी हत्या कराना चाहती है। यहाँ के लोग स्वामी प्रसाद मौर्य को हराकर दम लेंगे।” कहा जाता है कि मायावती ने उन्हें विशेष तौर पर बुलाकर बसपा का टिकट दिया था। अब फाजिलनगर के दो ही संभावित नतीजे नजर आते हैं। या तो अंसारी जीतेंगे या फिर वे मौर्य की हार सुनिश्वित करेंगे।

स्वामी प्रसाद मौर्य की तरह धर्म सिंह सैनी भी योगी सरकार की कैबिनेट में थे। उनके भी पालाबदल का खूब शोर मीडिया में मचा था। जब हम पहले चरण के मतदान के पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में घूम रहे थे तो चार बार के विधायक सैनी नकुड़ सीट पर कमजोर दिखे थे।

सैनी और मौर्य बस उदाहरण हैं। फेहरिस्त लंबी है। पूरे चुनाव ‘हम जिसके साथ जाते हैं उसकी सरकार बनती है’ का दंभ भरते रहने वाले सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के मुखिया ओमप्रकाश राजभर की राजनीतिक कब्र गाजीपुर की जहूराबाद सीट पर बसपा की शादाब फातिमा ने खोद दी है। एग्जिट पोल के दिन इन सबका जिक्र महज इसलिए ताकि आप समझ सकें कि विधानसभा चुनाव के दौरान असल में उत्तर प्रदेश की जमीन पर हुआ क्या? क्यों योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी के एक बार फिर 2017 जैसी जनादेश के साथ वापसी की संभावना दिखती है? क्यों मीडिया जिसे कड़ी टक्कर बता रहा था, असल में जमीन पर वह थी नहीं? क्यों कागज पर सारे समीकरण सही करने वाले अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा करारी शिकस्त के मुहाने पर है?

बीजेपी की जीत का कारण नंबर 1: किसान आंदोलन पर वोट नहीं पड़े, आवारा पशुओं को विपक्ष भुना नहीं पाया

चुनावों के ऐलान से कुछ महीने पहले तक उत्तर प्रदेश में चुनाव एकतरफा नजर आ रहा था। अचानक से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन कृषि कानूनों की वापसी का ऐलान कर किसान प्रदर्शनकारियों से अपने घरों को लौटने को कहा। इस फैसले को राजनीतिक पंडितों ने विधानसभा चुनावों से जोड़कर देखा और वातानुकूलित कमरों में बैठकर यह थ्योरी गढ़ी कि बीजेपी ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश की है। जमीनी हकीकत यह है कि उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन चुनावों का कोई मुद्दा ही नहीं था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जयंत चौधरी के रालोद से गठबंधन करने और राकेश टिकैत के हवा भरने के बावजूद हमने अपनी ग्राउंड रिपोर्टिंग में पाया कि ज्यादातर किसानों को प्रधानमंत्री का फैसला वापस लेना नहीं पचा था। जाहिर है फिर इस फैसले के पीछे प्रधानमंत्री की कुछ और सोच रही होगी, क्योंकि हम जानते हैं कि बीजेपी हमेशा चुनावी मोड में रहती है। लगातार सर्वे और फीडबैक जमीन से लेती रहती है। खासकर चुनावी राज्यों में तो यह प्रक्रिया बेहद कम अंतराल पर दुहराई जाती है। यह एक सुनिश्चित प्रक्रिया के तहत होती है और इसकी रिपोर्ट आलाकमान तक भी जाती है। ऐसे में यह संभव ही नहीं है कि बीजेपी को इसका पता नहीं हो कि यूपी के मतदाताओं के लिए कथित किसान आंदोलन कोई मुद्दा ही नहीं है। इसके उलट यूपी के हर इलाके में आवारा पशुओं से फसलों को नुकसान की बात लगातार लोगों ने की। विपक्ष इसे मुद्दा बनाने में नाकामयाब रहा। इसी तरह गन्ना किसानों का समय से भुगतान नहीं होने की बात भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लोग कर रहे थे। लेकिन लगे हाथ यही लोग यह भी बता रहे थे कि पूर्व की सरकारों के मुकाबले इस सरकार में भुगतान जल्दी हो रहा है। वे व्यवस्था में और सुधार चाहते थे तथा इसकी भी उम्मीद उन्होंने बीजेपी से लगा रखी थी। उनका मानना था कि सपा या बसपा की वापसी से भुगतान की प्रक्रिया और लंबी हो सकती है।

बीजेपी की जीत का कारण नंबर 2: मुफ्त राशन-सख्त शासन

ऐसा भी नहीं है कि बीजेपी के लिए सब कुछ सही ही था। कई सीटों पर उसके उम्मीदवारों को लेकर भारी नाराजगी थी। यहाँ तक कि अयोध्या जैसी सीट पर भी लोगों का कहना था कि बीजेपी के निवर्तमान विधायक 5 साल तक इलाके में नहीं दिखे थे। कई जगहों पर प्रशासन में ‘ठाकुरशाही’ के बढ़ते दखल को लेकर भी लोग नाराजगी जता रहे थे। इसके उलट कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर योगी सरकार का इकबाल और मुफ्त राशन दो ऐसे काम थे, जिससे कमोबेश उत्तर प्रदेश के हर इलाके में लोग संतुष्ट थे। यहाँ यह ध्यान देना जरूरी है कि घर, शौचालय, रसोई गैस, बैंक खाता जैसे काम पूर्व के चुनावों में भी बीजेपी के लिए वोट खींच चुके हैं। इनका अभी भी असर बचा है।

बीजेपी की जीत का कारण नंबर 3: लाभार्थी वर्ग से टूटे जातीय समीकरण

2014 के आम चुनावों में मोदी लहर से टकरा कर हिंदी पट्टी में सारे जातिगत समीकरण धाराशायी हो गए थे। उसके बाद इन इलाकों में हुए तमाम चुनावों के नतीजे तय करने में जातिगत समीकरणों का दखल लगातार कमजोर हुआ है। इसकी वजह है- विभिन्न योजनाओं के जरिए मोदी सरकार द्वारा लाभार्थी का एक नया वर्ग तैयार करना। यूपी विधानसभा चुनाव में भी इसका असर दिखा है। मसलन, उत्तर प्रदेश में करीब 15 करोड़ लोग ऐसे हैं जिन्हें कोरोना काल में मुफ्त राशन मिला। करीब डेढ़ करोड़ परिवार ऐसे हैं जिन्हें उज्ज्वला स्कीम के तहत एलपीजी कनेक्शन दिए गए। इसी तरह कोरोना संकट के दौरान ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर मनरेगा के तहत रोजगार भी मुहैया कराए गए। इन सबके साथ अयोध्या में मंदिर निर्माण और विकास की अन्य परियोजना, काशी कॉरिडोर, मथुरा-वृंदावन में विकास की योजनाओं ने बीजेपी के कोर वोटर को भी उसके पीछे इन चुनावों में लामबंद किया।

बीजेपी की जीत का कारण नंबर 4: अपनों ने भी जलाई सपा की लंका

2017 के विधानसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस और 2019 के आम चुनावों में बसपा के साथ जोड़ी बनाकर हाथ जलाने वाले अखिलेश यादव ने इस बार बीजेपी के आजमाए फॉर्मूले पर अमल करते हुए छोटे-छोटे राजनीतिक खिलाड़ियों को अपने साथ जोड़ा। वैसे तो ये ‘स्वयंभू मसीहा’ अपनी-अपनी जातियों का ठेकेदार होने के दावे करते हैं, पर सत्य यही है कि इनकी जाति इनके समर्थन में तभी लामबंद होती है जब ये उम्मीद पैदा करने वाले किसी बड़े चेहरे के पीछे खड़े रहते हैं। आज की तारीख में मोदी ही एकमात्र ऐसे चेहरे हैं। अखिलेश यादव में वो करिश्मा नहीं है। लिहाजा यह प्रयोग सपा के लिए वोटों को लामबंद करने में कामयाब नहीं रहा। वहीं बीजेपी के पाला बदलने वाले जिन चेहरों पर सपा ने दांव लगाया उनमें से ज्यादातर ऐसे हैं जिनके खिलाफ उनके इलाकों में भारी नाराजगी थी और उन्हें टिकट काटे जाने की आशंका थी। इनको साइकिल की सवारी का मौका देकर अखिलेश ने उनलोगों को नाराज कर दिया जो पिछले 5 साल से जमीन पर पार्टी के लिए सक्रिय थे। गठबंधन सहयोगियों और पाला बदलने वालों को संतुष्ट करने के लिए अखिलेश यादव ने कई जगहों पर अपनों से आखिरी वक्त में टिकट भी वापस ले लिया। करीब दो दर्जन सीटें ऐसी हैं जिन पर सपा की हार इन्हीं लोगों ने तय की है।

बीजेपी की जीत का कारण नंबर 5: मायावती का उम्मीदवार चयन

भले बसपा की इन चुनावों में कम चर्चा हुई हो। लेकिन उम्मीदवार चयन के लिहाज से मायावती ने सबसे बेहतर काम किया है। मेनस्ट्रीम मीडिया की अनदेखी के बीच अपने समर्थकों तक बात पहुँचाने के लिए उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लिया। बहुत सारी सीटों पर बसपा मुस्लिमों का भी वोट झटकने में कामयाब रही है। कम से कम 50 सीटें ऐसी हैं जिस पर सपा-बीजेपी की सीधी लड़ाई में बसपा ने सपा की हार तय करने का काम किया है। इसी तरह कुछ ऐसी भी सीटें हैं जिन पर बसपा उम्मीदवारों की वजह से इस बार बीजेपी उतने बड़े मार्जिन से नहीं जीत रही जैसा उसका 2017 में प्रदर्शन रहा था। हालाँकि बसपा खुद किस आँकड़े तक पहुँचेगी यह अनुमान लगाना मुश्किल है। लेकिन यह तय है कि बीजेपी गठबंधन 10 मार्च को 290 से जितना आगे जाएगी, उसमें बसपा की बड़ी भूमिका देखने को मिलेगी।

निष्कर्ष

यूपी में भले मीडिया ने चुनावों को कड़ी टक्कर के तौर पर प्रचारित किया हो, लेकिन इससे कहीं ज्यादा तगड़ी टक्कर बिहार के 2020 के विधानसभा चुनावों में दिखी थी। बिहार में पहले चरण में तो राजद काफी आगे थी। इसके उलट पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सपा-रालोद को वैसी बढ़त जमीन पर नहीं मिली है। सबसे ज्यादा संभावना इस बात की है कि बीजेपी गठबंधन को इस बार 320 के आसपास सीटें मिलेंगी, लेकिन इनमें से कम से कम 50 सीटें ऐसी रहने वाली हैं जिस पर बीजेपी को बेहद मामूली अंतर से जीत मिलेगी। ओवरऑल भी बीजेपी उम्मीदवारों की जीत का मार्जिन इस बार वैसा नहीं होगा, जैसा 2017 में था। इसका एक कारण यह भी है कि 2017 में यूपी में सत्ता परिवर्तन करने के लिए भी एक वर्ग वोट करने निकला था और यह बीजेपी की झोली में गिरा था। इस बार सत्ता परिवर्तन की अकुलाहट वैसी नहीं थी तो मतदान का प्रतिशत भी 2017 के मुकाबले गिरा है।

दहेज़ में बुलेट नहीं मिलने पर इरशाद ने निकाह से किया इनकार, दोनों पक्षों में जम कर मारपीट: बोली दुल्हन – दहेज़ लोभी से निकाह नहीं करूँगी

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के निराना गाँव में निकाह के दौरान दहेज में बुलेट बाइक को लेकर दूल्हा-दुल्हन पक्ष में विवाद हो गया। दुल्हन पक्ष ने बुलेट देना तय न होने की बात कही। दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हो गई। दुल्हन ने निकाह से इनकार कर दिया। मामला पुलिस तक पहुँचा। पुलिस ने दूल्हे व उसके पिता को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों पक्षों के बीच समझौते की बात चल रही है।

जानकारी के मुताबिक, भोपा थाना क्षेत्र के गाँव इस्सोपुर निवासी इरशाद की बरात सिखेड़ा थाना क्षेत्र के गाँव निराना आई थी। बारात जमशेद की बेटी हुस्नजहाँ के यहाँ आई थी। बरात की खूब खातिरदारी हुई। निकाह की तैयारी चल रही थी। आरोप है कि इसी दौरान दूल्हे पक्ष ने बुलेट बाइक की माँग की।

लड़की पक्ष ने दहेज का सामान भी सभी के सामने सजा कर रखा था। दहेज के सामान में बुलेट मोटरसाइकिल दिखाई न देने पर दूल्हे पक्ष ने नाराजगी जताई। फिर विवाह के मध्यस्थ के माध्यम से लड़की पक्ष के समक्ष बुलेट की माँग रखी गई। दुल्हन पक्ष ने इसमें असमर्थता जताई।

इसके बाद दोनों पक्षों में विवाद हो गया। इसी दौरान दूल्हे पक्ष के एक युवक ने दुल्हन पक्ष के एक व्यक्ति को थप्पड़ मार दिया, तो इसके बाद दोनों पक्षों में मारपीट हो गई। किसी ने पुलिस को सूचना दे दी तब मौके पर पहुँची पुलिस दूल्हा व उसके पिता तथा दूसरे पक्ष के लोगों को भी थाने ले आई।

दुल्हन ने कहा- दहेज लोभी से नहीं करना निकाह

बताया गया कि जब दुल्हन पक्ष के व्यक्ति को थप्पड़ मार दिया और निकाह से पहले ही दहेज में बुलेट माँगी जाने लगी तो पिता की बेइज्जती होते देख कर दुल्हन हुस्नजहाँ ने निकाह से इनकार कर दिया। हंगामे के बाद गाँव के लोगों ने दोनों पक्षों को समझा बुझाकर शांत किया। दोनों पक्षों के जिम्मेदार लोगों की सुलह के बाद निकाह नहीं हो सका और बारात वापस लौट गई।

‘भारत को ऐसा पत्र क्यों नहीं भेजते हो?’: रूस की निंदा करने को कहा तो EU पर भड़के इमरान खान, कहा – हमने ₹7.71 लाख करोड़ गँवा दिए

रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़े एक पत्र मिलने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पूरे ‘यूरोपियन यूनियन (EU)’ पर भड़क गए हैं। उन्होंने EU के एम्बेसडर के बयान को ‘अकूटनीतिक’ करार देते हुए पूछा कि क्या उन्होंने भारत को ऐसा कोई पत्र भेजा है? दरअसल, EU के राजदूत ने पाकिस्तान को रूस की निंदा करते हुए बयान जारी करने के लिए कहा था। बदले में इमरान खान ने कश्मीर को ‘स्वतंत्र क्षेत्र’ बताते हुए भारत पर ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC)’ के प्रस्तावों का उल्लंघन करने का आरोप मढ़ दिया

इमरान खान ने कहा, “क्या आपने कभी उस आतंक के खिलाफ पाकिस्तान के रुख का संज्ञान लिया, जिसने न सिर्फ 80,000 लोगों की जिंदगियाँ लील ली बल्कि संपत्ति की भी भारी क्षति हुई। क्या कभी इन यूरोपीय देशों ने भारत के साथ व्यापारिक रिश्ते ख़त्म किए, या उसकी गैर-कानूनी गतिविधियों पर आपत्ति जताई?” बता दें कि 23 देशों के समूह ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों और UN चार्टर का हवाला देते हुए पाकिस्तान से रूस की निंदा करने को कहा था।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि कूटनीति इस तरह से नहीं की जानी चाहिए। पाकिस्तान ने दावा किया कि वो यूक्रेन में शांति के सभी प्रयासों का समर्थन कर रहा है और सीजफायर के साथ-साथ बातचीत की वकालत कर रहा है। मुल्क ने कहा कि अगर उसने यूक्रेन रिजोल्यूशन का समर्थन किया होता तो दोनों देशों के बीच कूटनीति के लिए कुछ नहीं बचता। इमरान खान ने कहा कि वो एक ‘स्वतंत्र देश’ में जन्मे हैं और किसी के सामने इज्जत खो कर सिर नहीं झुकाएँगे।

इमरान खान ने कहा कि अगर वो अपने पूर्ववर्तियों की जगह होते तो कभी इस क्षेत्र में किसी युद्ध के लिए बाहरी ताकतों को अनुमति नहीं देते। उन्होंने कहा कि उनके मुल्क ने 80,000 लोग खो दिए, 35 लाख को पलायन करना पड़ा और 100 बिलियन डॉलर (7.71 लाख करोड़ रुपए) गँवा दिए। उन्होंने गिनाया कि 2008-18 में पाकिस्तान में 400 ड्रोन हमले हुए, लेकिन उनके समय में एक भी नहीं। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी जैसे ‘चोरों’ ने इन ड्रोन हमलों पर आपत्ति नहीं जताई, क्योंकि वो अपनी अवैध कमाई बचाना चाहते थे।

याद हो कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पूर्वी यूक्रेन में रूसी सैनिकों द्वारा चल रहे ‘स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन’ के बीच रूस में मेहमानवाजी का लुत्फ उठा रहे थे। उनके मॉस्को पहुँचने के दौरान ही रूस ने यूक्रेन पर हमला किया। मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ नियमों के उल्लंघन पर अमेरिका ने पाकिस्तान के नेशनल बैंक (NBP) और इसकी न्यूयॉर्क ब्रांच पर $55 मिलियन का जुर्माना लगाया। वहीं न्यूयॉर्क स्टेट डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज ने पाकिस्तान के नेशनल बैंक ने $35 मिलियन का भुगतान करने के लिए कहा।

‘बॉलीवुड वाले KFC मँगाते हैं, दक्षिण में रोटी-चावल मिलता है’: बोनी कपूर ने बताया क्यों है साउथ फिल्मों का क्रेज, ‘थाला’ अजीत की तारीफ़ की

फिल्म निर्माता बोनी कपूर इन दिनों अपनी तमिल फिल्म ‘वलिमै’ की सफलता को लेकर उत्साहित हैं, जिसमें ‘थाला’ नाम से पुकारे जाने वाले अजीत कुमार मुख्य भूमिका में हैं। ‘वलिमै’ ने अब तक दुनिया भर में 11 दिनों में 215 करोड़ से भी अधिक रुपए कमा लिए हैं, जिसमें से अकेले तमिलनाडु बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने 150 करोड़ की कमाई की है। हिंदी बेल्ट में ठीक प्रदर्शन न करने के बावजूद बाइक स्टंट्स से लबालब इस फिल्म ने कई रिकॉर्ड्स ध्वस्त किए।

बता दें कि बोनी कपूर की फिल्म ‘इंग्लिश इंग्लिश (2012)’ के तमिल वर्जन में अजीत कुमार ने कैमियो अपीयरेंस दिया था, जिसके बाद दोनों ने ‘पिंक’ के रीमेक ‘Nerkonda Parvaai (2019)’ में भी साथ काम किया। ‘इंग्लिश इंग्लिश’ में बोनी कपूर की दिवंगत पत्नी श्रीदेवी मुख्य भूमिका में थीं। उन्होंने ‘थाला’ अजीत कुमार को काम के प्रति समर्पित, गंभीर और प्रोफेशन अभिनेता बताया। बोनी की अगली फिल्म में भी अजीत ही अभिनेता होंगे।

‘फर्स्टपोस्ट’ को दिए गए इंटरव्यू में बोनी कपूर ने कहा कि उनकी पत्नी श्रीदेवी की अजीत काफी इज्जत करते थे, इसीलिए उन्होंने साथ काम करने के लिए हामी भरी और दूसरा कारण ये भी है कि अजीत की पत्नी शालिनी ने श्रीदेवी के साथ पहले काफी काम किया था। श्रीदेवी ने तमिल फिल्मों से ही अपना डेब्यू किया था और बाद में भी वो कई तमिल फिल्मों में दिखीं। बोनी कपूर ने कहा कि अधिकतर दक्षिण भारतीय फ़िल्में ‘भारतीय मिजाज’ के हिसाब से बनती हैं।

उन्होंने कहा कि यही कारण है कि दक्षिण की डब की हुई फ़िल्में भी हिंदी बेल्ट में खासी लोकप्रिय होती हैं। उन्होंने कहा कि इन फिल्मों में उस हर कुछ का मिश्रण होता है, जो भारतीय दर्शकों को पसंद है। उन्होंने उदाहरण दिया कि अगर ये फैमिली ड्रामा हो तो लोग तुरंत इससे जुड़ जाते हैं। उन्होंने कहा कि कहानी कुछ भी हो, हीरो हमेशा हीरो ही रहता है और म्यूजिक का बड़ा किरदार होता है। फिर इसमें एक्शन और कॉमेडी का तड़का लगाया जाता है।

बोनी कपूर ने बॉलीवुड से दक्षिण की तुलना पर कहा, “आजकल मुंबई के फिल्म निर्माता McDonalds-KFC की चीजें और पिज्जा खाने में देते हैं जहाँ आपको वही मिलेगा जो आपने ऑर्डर किया, जबकि दक्षिण में रोटी, दाल-चावल, सब्जी और चिकन मिलता है। दक्षिण भारतीय फिल्मकारों द्वारा बनाई गई दुनिया हमें स्वीकार्य होती है। उनमें सभी चीजों का मिश्रण होता है। जब अल्लू अर्जुन और महेश बाबू की हिंदी डब फ़िल्में 15-25 करोड़ रुपए में बिकने लगी थीं, तभी मुझे लगा था कि ये समय आएगा। आज RRR, पुष्पा और रोबोट जैसी फिल्मों की चर्चा होती है और टीवी पर बड़ी संख्या में लोग डब फ़िल्में देखते हैं।”

बोनी कपूर ने कहा कि अधिकतर हिन्दू फिल्म निर्देशक ऑस्कर जीतने के लिए और हॉलीवुड से प्रतिस्पर्धा के लिए फ़िल्में बना रहे हैं, लेकिन ऑस्कर में क्या जाएगा ये आप तय नहीं करते। उन्होंने याद दिलाया कि महबूब खान ने ‘मदर इंडिया (1957)’ या आमिर खान ने ‘लगान (2001)’ ऑस्कर का सोच कर नहीं बनाई थी। उन्होंने याद दिलाया कि राज कपूर और मनोज कुमार भारतीय समस्याओं को दिखा कर हिट हुए। उन्होंने याद दिया कि ‘बाहुबली’ भारतीय लोककथा और संस्कृति पर है, इसीलिए हिट हुई। उन्होंने दक्षिण की पत्रिका ‘चन्दामामा’ की याद दिलाते हुए कहा कि भारत की दुनिया ये है, जिसे हम भूल गए।

बोनी कपूर ने स्पष्ट किया कि दक्षिण भारत में नायकों पर लोगों का भरोसा होता है और कंटेंट के मामले में भी वो बेहतर हैं। उन्होंने कहा कि मुंबई में दो-तीन सफल फिल्म निर्माता हैं, लेकिन दक्षिण की फ़िल्में जितना कमा रही हैं उसका एक छोटा हिस्सा ही उनकी कमाई होती है। उन्होंने बॉलीवुड में अच्छे लेखकों की कमी को भी एक कारण बताया। बोनी कपूर फ़िलहाल अजय देवगन की ‘मैदान’ को लेकर भी उत्साहित हैं। एक फिल्म में वो रणवीर कपूर के पिता के किरदार में अपना एक्टिंग डेब्यू भी करेंगे।

‘वेश्याओं से संपर्क, महिलाओं से अश्लील चैट’: छत्तीसगढ़ में व्यंग्य पर पत्रकार की गिरफ़्तारी, पुलिस ने फेक न्यूज़ का भी लगाया चार्ज

पत्रकार नीलेश शर्मा की गिरफ्तारी को लेकर रायपुर पुलिस ने बहु सूत्रीय प्रेस रिलीज (Multi-Point Press Release) जारी किया है। आउटलुक के पत्रकार आशुतोष भारद्वाज ने रायपुर पुलिस द्वारा जारी रिलीज के स्क्रीनशॉट साझा किए। पुलिस ने दावा किया है कि उन्हें शर्मा के फोन में ब्लैकमेलिंग, पोर्नोग्राफी और फेक न्यूज के सबूत सहित अन्य आपत्तिजनक सामग्री मिली है।

शर्मा को 2 मार्च को भारतीय दंड संहिता की धारा 504, 505, 505 (1) (बी) और 505 (2) के तहत गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन्होंने जमानत के लिए आवेदन किया था, लेकिन निचली अदालत ने इसे खारिज कर दिया था। गिरफ्तारी के बाद से शर्मा की वेबसाइट डाउन है।

‘शर्मा ने अवैध रूप से हासिल किए कॉल रिकॉर्ड’

पुलिस ने आरोप लगाया कि शर्मा ने एक पुलिस अधिकारी के माध्यम से किसी के कॉल रिकॉर्ड को एक्सेस किया था। कानून के अनुसार, केवल जाँच एजेंसियाँ ही किसी के कॉल रिकॉर्ड को एक्सेस कर सकती हैं। इसके लिए भी अमुमति लेनी होती है और कारण का वैध होना भी आवश्यक है। हालाँकि इस मामले में अवैध रूप से कॉल रिकॉर्ड एक्सेस किए गए थे। कॉल रिकॉर्ड प्रदान करने वाला पुलिस अधिकारी भी जाँच के दायरे में है। पुलिस ने दावा किया कि शर्मा ने काम करवाने के बहाने कई लोगों से पैसे लिए और चैट भी हुई जहाँ उन्होंने काम नहीं होने पर पैसे वापस देने की बात कही। पुलिस ने कहा कि जाँच के दौरान उन लोगों से पूछताछ की जाएगी।

‘वह वेश्याओं के संपर्क में था और अश्लील सामग्री फॉरवर्ड करता था’

रायपुर पुलिस ने आगे आरोप लगाया कि शर्मा के फोन में अश्लील सामग्री थी, जिसे कई लोगों को फॉरवार्ड किया गया था। यह आईटी अधिनियम के तहत एक अपराध है। शर्मा ने जिसे अश्लील सामग्री भेजा, पुलिस उससे पूछताछ कर सकती है। पुलिस ने आरोप लगाया कि वह वेश्याओं के संपर्क में थे और कुछ महिलाओं से बात करते समय आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते थे। पुलिस ने दावा किया कि शर्मा और अन्य लोगों के बीच इसी तरह की चैट भी मिली थी।

‘फेक न्यूज के सबूत मिले’

पुलिस ने आरोप लगाया कि उन्हें शर्मा और अन्य लोगों के बीच एक चैट मिली, जिससे संकेत मिलता है कि वे उनके साथ मिलकर फेक न्यूज फैलाने के एजेंडे पर काम कर रहे थे। पुलिस ने कहा, “उन सभी से पूछताछ की जाएगी।”

‘पत्रकारिता की आड़ में ब्लैकमेल किया’

पुलिस ने आगे आरोप लगाया कि शर्मा ने एक पत्रकार के रूप में अपने पद का इस्तेमाल कई लोगों को ब्लैकमेल करने और डराने-धमकाने के लिए किया। पुलिस जाँच के दौरान पीड़ितों से बाद में पूछताछ करेगी।

‘गोपनीय दस्तावेज मिले’

पुलिस ने आरोप लगाया कि शर्मा के मोबाइल फोन पर आधिकारिक गोपनीय दस्तावेज मिले हैं। पुलिस ने कहा कि ऐसे दस्तावेज केवल सरकारी अधिकारी या कर्मचारी की मदद से ही प्राप्त किए जा सकते हैं। आगे की जाँच की जाएगी कि उन्होंने उन दस्तावेजों को कैसे एक्सेस किया।

गौरतलब है कि नीलेश शर्मा वेब पोर्टल indiawriters.co.in और प्रिंट पत्रिका ‘इंडिया राइटर्स’ के संपादक हैं। उन्हें उनके लोकप्रिय राजनीतिक व्यंग्य (Political Satire) के लिए गिरफ्तार किया था। वह ‘घुरवा के माटी’ के नाम से राजनीतिक व्यंग्य पर आधारित एक लोकप्रिय सीरीज चलाते हैं। उन पर छत्तीसगढ़ में सत्तारूढ़ कॉन्ग्रेस के नेताओं के खिलाफ फेक न्यूज फैलाने का आरोप लगाया गया। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता खिलवान निषाद ने शर्मा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। जिसके बाद पुलिस की साइबर सेल ने शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करते हुए नीलेश शर्मा को गिरफ्तार कर लिया।

दाऊद इब्राहिम मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक, ऑर्थर रोड जेल होगा अब ठिकाना

दाऊद इब्राहिम मनी लॉन्ड्रिंग मामले में महाराष्ट्र सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के 62 वर्षीय मंत्री और एनसीपी नेता नवाब मलिक को मुंबई की स्पेशल PMLA कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मलिक को 7 मार्च, 2022 तक हिरासत में भेजा दिया था। आज शाम तक उन्हें ED की कस्टडी से मुंबई की आर्थर रोड जेल में शिफ्ट कर दिया जाएगा। ईडी ने मलिक को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 23 फरवरी गिरफ्तार किया था।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट में सुनवाई के दौरान एडिशनल सोसलिस्टर जनरल अनिल सिंह ने अदालत से उनकी कस्टडी बढ़ाने की माँग नहीं करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आग्रह किया था, जिसे जज ने मान लिया। हालाँकि, इसके बावजूद एनसीपी नेता नवाब मलिक के वकील तारक सैय्यद ने उनकी कस्टडी का विरोध करते हुए एक एप्लीकेशन मूव किया था। सुनवाई में सरकारी वकील ने 1993 बम धमाकों से जुड़ा एक कॉन्फिडेंशियल स्टेटमेंट अदालत के सामने रखा है, जिसके बाद मलिक की कस्टडी को बढ़ा दिया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, विशेष न्यायाधीश रोकाडे ने उन्हें ईडी की हिरासत में भेजते हुए तर्क दिया था कि पिछले 20 वर्षों में अपराध की कार्यवाही की जाँच के लिए पर्याप्त समय की आवश्यकता होगी। ED की दलीलों के बाद न्यायाधीश ने यह भी पाया था कि मलिक के खिलाफ आरोप प्रथम दृष्टया अच्छी तरह से स्टेब्लिश थे। बता दें कि इससे पहले भी नवाब मालिक की हिरासत को 7 मार्च, 2022 तक बढ़ा दिया गया था, क्योंकि नवाब मलिक से पूछताछ करने के लिए ED की पहले की रिमांड अवधि के दौरान 3 से 4 दिन जाँच एजेंसी के पास उपलब्ध नहीं थे क्योंकि मलिक को अस्पताल ले जाना पड़ा था।

बता दें कि इससे पहले नवाब मलिक के वकील अमित देसाई ने कोर्ट में कहा था, ईडी ने रिमांड आवेदन में आरोप लगाया था कि मलिक ने भगोड़े डॉन दाउद इब्राहिम की बहन हसीना पारकर को कुर्ला की जमीन के लिए 55 लाख रुपये दिए थे। लेकिन आज इसे प्रिंटिंग मिस्टेक बताते हुए सिर्फ 5 लाख दिए जाने की बात कही जा रही है। जबकि इसी आवेदन के आधार पर मलिक को ईडी की हिरासत में भेजा गया। इसी के आधार पर मलिक पर टेरर फंडिंग का भी आरोप लगाया गया।

क्या है पूरा मामला

ED ने कोर्ट में बताया था कि नवाब मलिक ने कथित रूप से मुनिरा प्लंबर से 300 करोड़ रुपए का प्लाट कुछ लाख रुपए में एक कंपनी के जरिए हासिल किया था। इस कंपनी का नाम सॉलिड्स इन्वेस्टमेंट प्रा.लि. है और कंपनी का मालिक नवाब मलिक का परिवार ही है। ED ने आरोप लगाया कि मलिक यह कंपनी भगोड़े डॉन दाउद इब्राहिम की बहन हसीना पारकर और डी गैंग के अन्य सदस्यों के सहयोग से चलाते रहे हैं।

गौरतलब है कि इस मामले में मुनिरा प्लंबर ने ईडी को दिए बयान में बताया कि कुर्ला में गोवाला कंपाउंड में उनका 3 एकड़ का प्लॉट था। इस जमीन पर अवैध कब्जे को खाली कराने और विवादों को निपटाने के लिए सलीम पटेल ने उनसे पाँच लाख रुपए लिए थे, लेकिन उसने यह जमीन थर्ड पार्टी को बेच दी जबकि सलीम को कभी प्रापर्टी को बेचने के लिए नहीं कहा गया था। यही नहीं, 18 जुलाई 2003 को जमीन के मालिकाना हक ट्रांसफर करने से संबंधित कागज पर ही हस्ताक्षर नहीं किया था। उन्हें इस बात की भनक नहीं थी कि सलीम पटेल ने यह जमीन किसी दूसरे को बेच दी है।

वहीं, इस जमीन से जुड़े कागजातों को खंगालने के बाद ईडी को पता चला कि इसके पीछे सरदार शाहवली खान है जो 1993 के मुंबई बम धमाके का आरोपी है। वह डाटा और मकोका के तहत औरंगाबाद की जेल में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा है। शाहवली खान ने ईडी को बताया था कि सलीम पटेल भगोड़े डॉन दाउद इब्राहिम की बहन हसीना पारकर का करीबी था। हसीना के निर्देश पर ही सलीम ने मुनिरा की जमीन के बारे में सभी फैसले लिए थे। एजेंसी का कहना है कि यह जाँच, भगोड़े गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम, उसके सहयोगियों और मुंबई अंडरवर्ल्ड की गतिविधियों से संबंधित है।

प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में भी सरकारी के बराबर ही फीस: PM मोदी का बड़ा ऐलान, कहा – देश में 8500 ‘जन औषधि केंद्र’, 800 दवाओं के दाम हुए कम

रूस से युद्ध के कारण यूक्रेन से लौटने वाले मेडिकल छात्रों को लेकर एक नई चर्चा ने जन्म ले लिया है, जिसमें भारत में मेडिकल कॉलेजों और वहाँ के भारी फीस को लेकर बातें की जा रही हैं। इसी बीच ‘जन औषधि दिवस’ पर सम्बोधन देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा ऐलान किया है। दरअसल, मोदी सरकार ने तय किया है कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में आधी सीटों पर सरकारी मेडिकल कॉलेज के बराबर ही फीस लगेगी।

प्रधानमंत्री ने बताया कि कुछ दिन पहले ही सरकार ने ये बड़ा फैसला लिया है, जिसका बड़ा लाभ गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों को मिलेगा। बता दें कि मोदी सरकार ने बड़ी संख्या में मेडिकल सीटों का इजाफा किया है, लेकिन इसके बावजूद प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में भारी फीस के कारण लोग कजाखस्तान से लेकर यूक्रेन तक जाते रहे हैं। हाल ही में यूक्रेन से हजारों छात्रों को भारत सरकार वापस लेकर आई है, जो वहाँ युद्ध में फँस गए थे।

पीएम मोदी ने कहा कि जन-औषधि केंद्र तन को औषधि देते हैं, मन की चिंता को कम करने वाली भी औषधि हैं और धन को बचाकर जन-जन को राहत देने वाले केंद्र भी हैं। उन्होंने कहा कि दवा का पर्चा हाथ में आने के बाद लोगों के मन में जो आशंका होती थी कि, पता नहीं कितना पैसा दवा खरीदने में खर्च होगा, वो चिंता कम हुई है। उन्होंने जानकारी दी कि आज देश में साढ़े आठ हजार से ज्यादा जन-औषधि केंद्र खुले हैं। ये केंद्र अब केवल सरकारी स्टोर नहीं, बल्कि सामान्य मानवी के लिए समाधान केंद्र बन रहे हैं।

पीएम मोदी ने कहा, “हमारी सरकार ने कैंसर, टीबी, डायबिटीज, हृदयरोग जैसी बीमारियों के इलाज के लिए जरूरी 800 से ज्यादा दवाइयों की कीमत को भी नियंत्रित किया है। सरकार ने ये भी सुनिश्चित किया है कि स्टंट लगाने और ‘Knee Implant’ की कीमत भी नियंत्रित रहे।” बता दें कि कोरोना संक्रमण आपदा आने के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर बहस तेज़ हो गई है। सरकार भी अगले किसी आपदा से निपटने के लिए पहले से ही तैयारी में है।