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‘छात्रों के लिए TN सरकार ने किया बसों का इंतजाम’ : बिजनेस लाइन पत्रकार ने सरेआम कहा झूठ, MEA ने निकलवाए पिशोचीन से 900+ भारतीय

रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण यूक्रेन में उपजे हालातों के मद्देनजर भारत सरकार लगातार अपने नागरिकों को वहाँ से निकालने के प्रयासों में जुटी हुई है। इसी क्रम में खार्किव और पिशोचीन में भी बसों का इंतजाम करके वहाँ से भारतीय निकाले गए। 4 मार्च 2022 को जब विदेश मंत्रालय की ओर से सूचना दी गई कि पिशोचीन इलाके में फँसे 900-1000 से ज्यादा भारतीयों को निकालने के लिए बसों के इंतजाम हो रहे हैं, उसी समय द हिंदू के बिजनेस लाइन की पत्रकार पार्वती बिंदु बेनू का एक ट्वीट आया और उन्होंने इस मुद्दे पर जनता को भ्रमित करने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि ये इंतजाम तमिलनाडु सरकार ने किया है।

पार्वती ने डीएमके की राज्यसभा सांसद कानीमोंझी को यूक्रेन में फँसे बच्चों की मदद के लिए आगे आते देखा तो उनसे बिन तारीफ किए नहीं रहा गया और उन्होंने उनके ट्वीट पर लिखा, “तो! ये चीज काम कर रही है। तमिलनाडु सरकार ने पिशोचीन से बच्चों को निकालने के लिए ट्रांसपोर्ट अरेंज किए हैं वो भी मुफ्त में। इंतजार कर रही हूँ कि इस रिवायत को बाकी राज्य द्वारा भी निभाया जाए।” अब पार्वती का यह ट्वीट कैसे एक झूठी खबर है इसका पता विदेश मंत्रालय के बयान से चलता है।

दोनों स्क्रीनशॉट में देख सकते हैं कि रात के 9:59 पर पार्वती बिंदु बेनू ने अपने ट्वीट को किया जबकि 4 मार्च को शाम 6 बजे ही MEA ने कहा था कि पूर्वी यूक्रेन, खासकर खार्किव और पिशोचीन में खास ध्यान रखते हुए भारत सरकार ने वहाँ बसों के इंतजाम किए। 5 बसें चालू हैं और बाकी बसें भी शाम तक चालू हो जाएँगी। 900-1000 भारतीय पिशोचीन में फँसे हुए हैं जबकि 700 लोग सूमी में हैं।

स्पष्ट है कि बिजनेस लाइन की पत्रकार ने इस मामले पर अपने ट्वीट में झूठ फैलाया, जिसका खुलासा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के वरिष्ठ सलाहकार कंचन गुप्ता ने किया। उन्होंने बताया बिजनेस लाइन पत्रकार खुलकर झूठी खबर फैला रही हैं। बसों की व्यवस्था भारत सरकार के खर्च पर विदेश मंत्रालय और स्थानीय मिशन द्वारा की गई थी। उन्होंने बताया कि ऐसी फेक न्यूज फैलने से पहले ही भारत सरकार ने अपने नागरिकों को पिशोचीन और खार्किव में खाना-पानी भेज दिया है।

उल्लेखनीय है कि भारतीय छात्रों को यूक्रेन से निकालने के लिए चलाया जा रहा ऑपरेशन गंगा अब तक 10 हजार से ज्यादा बच्चों को भारत लेकर आ चुका है। कल की खबर के अनुसार 24 घंटे के अंदर भारत में 18 फ्लाइट आईं जिनसे 4000 भारतीय वापस लाए गए। विदेश मंत्रालय ने बताया कि अगले 24 घंटे में ऐसे भारतीय भारत पहुँच जाएँगे जो यूक्रेन बॉर्डर पार करके पड़ोसी देशों में पहुँच चुके हैं।

गूगल, फेसबुक, ट्विटर, एप्पल, PayPal और माइक्रोसॉफ्ट के बाद अब सैमसंग भी रूस के खिलाफ उतरा: युद्ध में पश्चिम के एजेंडे पर यूँ चल रहे टेक जायंट्स

रूस और यूक्रेन (Russia-Ukraine War) के बीच लगातार युद्ध जारी है। इसका आज दसवाँ दिन है। जिस तरह से पुतिन की सेना यूक्रेन के खिलाफ कार्रवाई कर रही है अमेरिका समेत कई सारे देश उसके ऊपर प्रतिबंधों की बारिश कर रहे हैं। इसी क्रम में विश्व की टेक दिग्गज भी रूस के खिलाफ जंग लड़ रही हैं। गूगल, फेसबुक, ट्विटर और एप्पल के बाद अब दक्षिण कोरिया के कंपनी सैमसंग (Samsung) ने भी रूस के खिलाफ कार्रवाई करते हुए रूस में फोन और चिप बेचने पर रोक लगा दिया है।

सैमसंग रूसियों का पसंदीदा ब्रांड है और वहाँ इसे एप्पल और शाओमी से भी ज्यादा लोग पसंद करते हैं। यहीं नहीं, रूस के खिलाफ एक्शन लेने के साथ ही सैंमसंग यूक्रेन की मदद के लिए आगे आया है। कंपनी ने यूक्रेन में राहत कार्यों में सहायता के लिए $60 लाख (45,85,53,000 भारतीय रुपए) देने का ऐलान किया है। कोरियाई टेक जायंट की इस मदद में ग्राहकों और उसके कर्मचारियों के द्वारा दिया गया दान भी शामिल है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण कोरियाई कंपनी ने कहा कि वो लगातार यूक्रेन के हालात पर नजर बनाए हुए है। चिप्स से लेकर स्मार्टफोन और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स तक सभी सैमसंग प्रॉडक्ट्स का रूस को निर्यात रोक दिया गया है।

सैमसंग ने इस मामले में एक बयान जारी कर कहा, “हमारी संवेदनाएँ प्रभावित लोगों के साथ हैं और हमारी प्राथमिकता अपने सभी कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।”

पहले भी कई कंपनियाँ ले चुकी हैं रूस के खिलाफ एक्शन

गौरतलब है कि यूक्रेन और रूस के खिलाफ जारी जंग के बीच शुक्रवार (4 फरवरी 2022) को अमेरिकी टेक दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट ने भी रूस के खिलाफ कार्रवाई की थी। कंपनी ने अपने सभी उत्पादों की बिक्री और सेवाओं पर रोक लगा दिया था। इसी तरह से गूगल ने भी रूस में सभी तरह के विज्ञापनों को रोक दिया था। 1 मार्च 2022 को ट्विटर ने भी रूस के खिलाफ कार्रवाई करते हुए ऐलान किया था कि वो रूसी सरकार से जुड़े किसी भी कंटेंट में लेबल लगाएगा।

गूगल के पेमेंट ऐप ने रुस में अनी सेवाओं को बंद कर दिया। वहीं यूट्यूब ने रूस से जुड़े सभी मीडिया आउटलेट्स को ब्लॉक करना शुरू कर दिया है। वहीं PayPal ने भी आधिकारिक रूप से रूस में अपनी सेवाओं को रोक दिया है।

फेसबुक ट्विटर पर रूस की कार्रवाई

दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों के एक्शन के बाद अब रूस ने भी एक्शन लिया है। शुक्रवार को रूसी संसद में फेक न्यूज पर लगाम लगाने के लिए एक प्रस्ताव पास हुआ। नए कानून के तहत जानबूझकर फेक न्यूज फैलाने पर 15 साल तक की सजा होगी। इसी के तहत फेसबुक और ट्विटर को रुस में बैन कर दिया गया है।

नहीं रुकेगी यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्रों की इंटर्नशिप, भारत सरकार ने की व्यवस्था: रूस का सीजफायर, NATO ने ठुकराई जेलेंस्की की माँग

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध (Russia-Ukraine War) के 10वें दिन शनिवार (5 मार्च) को रूस ने यूक्रेन में लोगों तक मानवीय सहायता पहुँचाने के लिए मारियुपोल (Mariupol) में संघर्ष विराम की घोषणा की। रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन के मारियुपोल और वोल्नोवाखा (Volnovakha) के निवासियों के लिए मानवीय गलियारे खोले जाएँगे। वहीं, युद्ध से प्रभावित यूक्रेन से लौटे भारतीय मेडिकल छात्र-छात्राओं को राहत देने की कोशिश की गई है।

भारत के राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने शुक्रवार (4 मार्च) को एक सर्कुलर जारी कर उन विदेशी मेडिकल विद्यार्थियों को इंटर्नशिप को देश में पूरा करने की अनुमति दी है, जो कोरोना और यूक्रेन युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण अधूरे रह गए हैं। भारत में चिकित्सा शिक्षा और चिकित्सा पेशेवरों की नियामक संस्था NMC ने कहा कि जिन विदेशी मेडिकल छात्र-छात्रओं ने Foreign Medical Graduate Examination (FMGE) की पात्रता पूरी कर ली है, वे इंटर्नशिप पूरा करने के लिए राज्य चिकित्सा परिषदों के माध्यम से आवेदन दे सकते हैं।

एनएमसी ने अपने सर्कुलर में कहा, “कुछ विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट ऐसे भी हैं, जिनकी COVID-19 महामारी और युद्ध जैसी नियंत्रण से बाहर वाली विषम परिस्थितियों के कारण इंटर्नशिप अधूरी रह गई है। इन विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स की पीड़ा और तनाव को ध्यान में रखते हुए भारत में उनके इंटर्नशिप के अधूरे भाग को पूरा करने के लिए उन्हें योग्य माना जाएगा।”

सर्कुलर में आगे कहा गया है, “राज्य चिकित्सा परिषदों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भारत में पंजीकरण चाहने वाले उम्मीदवार राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (NBE) द्वारा आयोजित विदेशी चिकित्सा स्नातक परीक्षा (FMGE) उत्तीर्ण हों। यदि उम्मीदवार मानदंडों को पूरा करते हैं तो राज्य चिकित्सा परिषदों द्वारा उन्हें 12 महीने या बाकी बची हुई अवधि के लिए इंटर्नशिप प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन दिया जा सकता है।”

एनएमसी ने राज्य चिकित्सा परिषदों से यह भी कहा है कि वे मेडिकल कॉलेजों से एक शपथ-पत्र लें, जिसमें यह सुनिश्चित हो कि विदेशी मेडिकल स्नातकों से इंटर्नशिप के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसके साथ एनएमसी ने यह भी कहा कि विदेशी छात्र-छात्राओं को वजीफा और अन्य सुविधाएँ सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रशिक्षित किए जा रहे भारतीय मेडिकल स्नातकों के बराबर दी जानी चाहिए।

बता दें कि यूक्रेन में हालात बदतर होते जा रहे हैं। रूस के हमले में वहाँ मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हालात को देखते हुए यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादोमिर जेलेंस्की ने NATO से यूक्रेन को नो फ्लाई जोन घोषित करने का आग्रह किया था, लेकिन NATO ने इस पर ध्यान नहीं दिया। नाटो का तर्क है कि इस कदम से परमाणु हथियारों से लैस रूस के साथ यूरोपीय देशों की बड़ी जंग भड़क सकती है। नाटो की इस प्रतिक्रिया पर जेलेंस्की ने कहा कि इनकार करके नाटो ने रूस को यूक्रेन पर और हमले की हरी झंडी दे दी है।

‘आर्यन खान को ड्रग्स मामले में फँसाया गया, SRK की छवि को धब्बा लगाना मकसद’: ‘ईसाई सुपरहीरो’ बने अभिनेता का दावा, मीडिया भी बता चुकी है ‘निर्दोष’

मलयालम अभिनेता टोविनो थॉमस का मानना है कि शाहरुख़ खान के बेटे आर्यन को ड्रग्स मामले में जबरदस्ती फँसाया गया था। बता दें कि दिसंबर 2021 में ‘नेटफ्लिक्स’ पर आई मलयालम फिल्म ‘मिन्नल मुरली’ को खासी प्रशंसा मिली थी और इसे हिंदी में भी डब किया गया था। ‘देसी सुपरस्टार’ वाली केरल की इस फिल्म में टोविनो थॉमस ने ही मुख्य भूमिका निभाई थी। इसमें उन्होंने जैसन नाम के एक युवक का किरदार निभाया था, जो ईसाई होता है।

अब टोविनो थॉमस ने कहा है, “मुझे लगता है कि शाहरुख़ खान की छवि पर धब्बा लगाने के लिए आर्यन खान को ड्रग्स मामले में फँसाया गया। ये राजनीतिक रूप से प्रेरित मामला था।” उन्होंने एक न्यूज़ पोर्टल को दिए गए इंटरव्यू में कहा कि वो अपनी तरफ से कुछ दावा नहीं कर रहे हैं, लेकिन उन्हें निश्चित रूप से ऐसा लगता है। 33 वर्षीय टोविनो थॉमस ने कोयम्बटूर स्थित ‘तमिलनाडु कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग’ से ‘इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन’ में स्नातक की डिग्री ले रखी है।

टोविनो थॉमस को ‘कोच्चि टाइम्स’ ने ‘सबसे चाहते पुरुषों (Most Desirable Men)’ की सूची में पहले स्थान पर रखा था। 2013 में आई ‘ABCD: अमेरिकन बोर्न कन्फ्यूज्ड देशी’ और 2014 की फिल्म ‘7th Day’ से उन्होंने सुर्खियाँ बटोरी थीं। उनकी आने वाली फ़िल्में ‘नारदन’ और ‘थल्लुमाला’ है। 2017 में आई ‘मायानधि’ और 2018 में आई ‘Ente Ummante Peru’ से उन्हें समीक्षकों का प्यार मिला था। उनकी ‘सुपरहीरो’ वाली फिल्म OTT पर सबसे ज्यादा देखी जाने वाली फिल्म है।

बता दें कि बॉलीवुड ऐक्टर शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान  से जुड़े कॉर्डेलिया क्रूज शिप ड्रग्स मामले में मीडिया ने एक बार फिर झूठ फैलाया था कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) को आर्यन के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है। वहीं, केस की जाँच करने वाले एनसीबी अधिकारी ने इन रिपोर्ट्स का खंडन किया। NCB के DDG (ऑपरेशंस) संजय सिंह ने कहा, “यह कहना जल्दबाजी होगी कि आर्यन खान के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। जाँच अभी जारी है। कई बयान दर्ज किए गए हैं और अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँचा जा सका है।”

अयोध्या DM हाउस का बोर्ड भगवा या हरा? – जूनियर इंजीनियर किए गए सस्पेंड, हरे रंग को बदल किया गया लाल

उत्तर प्रदेश का अयोध्या जिला। यहाँ के जिलाधिकारी आवास में एक बोर्ड लगा हुआ था – भगवा रंग का। उसे बदल कर हरे रंग का कर दिया गया था। अब इस मामले में शुक्रवार (4 मार्च 2022) को कार्रवाई की गई है। उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग ने जूनियर इंजीनियर अजय कुमार शुक्ला को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

लोक निर्माण विभाग ने अपनी शुरूआती जाँच में अजय कुमार शुक्ला को दोषी पाया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह बताया जा रहा है कि डीएम आवास के बोर्ड का रंग अपने मन से बदला गया था। इसको लेकर अधिकारियों को संज्ञान में नहीं लिया गया था।

भगवा या हराडीएम आवास के बोर्ड के रंग पर राजनीति

अयोध्या के डीएम आवास में मरम्मत का काम हो रहा है। इस वजह से जिलाधिकारी के आवास को अस्थायी रूप से लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस में शिफ्ट कर दिया गया है। यहीं पर पहले केसरिया रंग का बोर्ड लगाया गया था, जिसे बदल कर हरे रंग का कर दिया गया।

सोशल मीडिया पर बोर्ड के रंग बदलने का गलत संदेश गया। कई लोगों ने इसे सीधे तौर पर राजनीति से जोड़ कर देखा। कुछ लोगों ने इस मामले को उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन से जोड़ दिया। सपा के नेता इसे योगी सरकार की विदाई कह कर प्रचारित कर रहे थे।

अब बोर्ड का रंग दोबारा बदल दिया गया है। इस बार बोर्ड का रंग हरा से लाल कर दिया गया है। बता दें कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं। एक चरण की वोटिंग अभी बाकी है। 10 मार्च 2022 को चुनाव के परिणाम आने हैं, ऐसे में एक अधिकारी के घर के बाहर बोर्ड के बदलते रंग के कारण सियासत गर्म है।

ऑपइंडिया से अयोध्या डीएम की बात

सरकारी आवास के बोर्ड का रंग बदलने को लेकर ऑपइंडिया ने अयोध्या के डीएम नीतीश कुमार से बात की थी। उन्होंने बताया था कि उनका आवास इस समय पीडब्ल्यूडी के गेस्ट हाउस में अस्थाई रूप से है, जिसका बोर्ड अचानक से पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने हरा रंग कर दिया था।

इसके बारे में पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि पीडब्ल्यूडी की कलर नीति के तहत ही बोर्ड का रंग बदला गया है। सभी डाक बंगलों व विभागीय बोर्ड हरे रंग के किए जा रहे हैं। डीएम आवास के डाक बंगले का बोर्ड का रंग भी उसी के तहत बदला गया है।

UP में योगी सरकार ने पसमांदा मुस्लिमों को उच्च पदों पर बैठाया: कॉन्ग्रेस ने की थी अनदेखी, अखिलेश-मायावती ने भी नहीं दी हिस्सेदारी

भाजपा (BJP) के सुनील बंसल के नेतृत्व में पिछले साल 9 अक्टूबर को 6 नेताओं की एक कमेटी बनी। इसका प्रभारी उत्तर प्रदेश के मंत्री मोहसिन रजा (Mohsin Raza) को बनाया गया। इस कमेटी को यूपी के पिछड़े तबके के मुस्लिमों, जिन्हें पसमांदा कहा जाता है, उनको भाजपा के पक्ष में लाने का दायित्व दिया गया।

हालाँकि भाजपा के भीतर ऐसी योजना 2014 में ही रखी गई थी, लेकिन हिंदुत्व की राजनीति करने वाली भाजपा (BJP) और आरएसएस (RSS) ने इसे अपने एजेंडे के प्रतिकूल समझा। वहीं, 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Assembly Election 2022) की तैयारी और रणनीति में पसमांदा अभियान को स्वीकृति दी गई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की भी भूमिका रही।

बता दें कि पसमांदा फ़ारसी शब्द है, जो दो शब्दों से मिलकर बना है। पस शब्द का अर्थ है पीछे और मांदा का शाब्दिक अर्थ छूट जाना- अर्थात जो पीछे छूट गए उन्हें पसमांदा कहा गया। ऐसा माना जाता रहा है कि हिंदू पिछड़ी जातियों और दलित जातियों का मुगल काल में भारी संख्या में धर्मांतरण हुआ और वे लोग मुस्लिम हो गए।

विशेषकर उत्तर प्रदेश और बिहार में इनकी संख्या मुस्लिम समुदाय के भीतर अधिकतम देखने को मिलती है। पसमांदा मुस्लिमों में कुरैशी, दर्जी, बढ़ई, चूड़ीदार, जुलाहा, मंसूरी, धुनिया, रंगरेज, हजाम, तेली, धोबी, नाई, मोची, राजमिस्त्री आदि आते हैं। मुस्लिमों के बीच जो अशरफ- जिनमें खान, पठान, सैयद आदि ऊँचे तबके के माने जाते हैं, वही अंसारी और मियाँ निचले तबके में आते हैं। 

अशरफ को राजनीति, सामाजिक और प्रशासन में उच्चतर स्थान प्राप्त हुआ, लेकिन पसमांदा मुस्लिमों को राजनीति में उचित प्रतिनिधितव न के बराबर रहा। पसमांदा मुस्लिमों की राजनीति करने वालों का मत रहा है कि संविधान में अनुच्छेदों के माध्यम से हिंदुओं के भीतर दलितों को तो फायदा पहुँचाया गया, लेकिन पसमांदा पर संविधान मौन है।

उत्तर प्रदेश के अंदर दलितों के लिए तो सीटें आरक्षित रखी गईं, लेकिन पसमांदा मुस्लिम का ध्यान नहीं रखा गया। आज उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पसमांदा मुस्लिम को मुस्लिमों से हटकर एक नए वोट बैंक के रूप में देखा जा रहा है। पूर्वांचल में इनकी भारी तादाद होने के कारण सभी पार्टियों के एजेंडे में पसमांदा शामिल हो चुका है। हालाँकि, खास बात है कि कल तक भाजपा इनके वोट लेने से परहेज करती थी, मगर इस बार उसने इस वर्ग पर केंद्रित किया है। 

पसमांदा मुस्लिमों के पैरवीकार मानते हैं कि आजादी के तुरंत बाद उत्तर प्रदेश में सत्ताधारी कॉन्ग्रेस ने इनकी अनदेखी की, जबकि यह समुदाय कॉन्ग्रेस को वोट देता रहा। कॉन्ग्रेस के बड़े नेता रफ़ी अहमद किदवई मुस्लिमों के बड़े नेता रहे। वे अशरफ समुदाय से आते थे। उनके द्वारा पिछड़े और कमजोर पसमांदा की अनदेखी हुई ।

उत्तर प्रदेश के अंदर मोहसिना किदवई, सलमान खुर्शीद और आरिफ मोहम्मद खान प्रमुख मुस्लिम नेता रहे, लेकिन ये सभी अशरफ समुदाय से ताल्लुक रखते थे। 1974 और 1985 में मात्र जिया-उर-रहमान अंसारी पसमांदा समुदाय से कॉन्ग्रेस के उन्नाव से सांसद रहे। बाद के दिनों में 2012 के विधानसभा चुनाव में राहुल गाँधी के आग्रह से कॉन्ग्रेस ने पसमांदा मुस्लिमों की समस्या को अपने चुनावी घोषणा पत्र में शामिल किया।

समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी में आजम खान और नसीमुद्दीन सिद्दीकी प्रमुख मुस्लिम चेहरे रहे। मुलायम सिंह यादव अपने मुस्लिम-यादव गठजोड़ के कारण और मौलाना मुलायम की भूमिका में इस तबके का वोट लेते रहे। वहीं, बाद में उनके पुत्र अखिलेश यादव को भी पसमांदा मुस्लिमों ने वोट देकर 2012 में मुख्यमंत्री बनाया। समाजवादी पार्टी ने 70 प्रतिशत पसमांदा मुस्लिमों के वोट तो लिए लेकिन नौकरी, सरकार और तैनाती में हिस्सेदारी नहीं दी। यहाँ तक कि आज तक कोई भी पसमांदा सपा से राज्यसभा नहीं पहुँचा। 

अखिलेश यादव ने मुस्लिमों को 18 प्रतिशत आरक्षण का वादा किया लेकिन रंगनाथ मिश्र कमेटी ,सच्चर कमेटी की सिफारिशों को लागू तक नहीं किया। पसमांदा नेता मानते हैं कि अब मुस्लिम अखिलेश पर यकीन नहीं कर रहा, जहाँ से हिसेदारी मिलेगी वहीं जायेगा। दलित-पिछडो की राजनीति करने वाली मायावती भी 2007 में पसमांदा के वोट से मुख्यमंत्री बनी थी लेकिन उनके विषय में ज्यादा कुछ नहीं कर सकी।

2017 से उत्तर प्रदेश के भीतर भाजपा की सरकार ने अपने हिंदुत्व की विचारधारा के बीच ही मुस्लिम समुदाय के पसमांदा वर्ग के वोट को एक रणनीति के तहत प्राप्त करने की खास योजना बनाई है, जिसमें सबसे पहले योगी सरकार ने उच्च पदों पर पसमांदा समुदाय को बैठाया। इसमें अल्पसंख्यक आयोग के पद पर पसमांदा मुस्लिम के बढ़ई समुदाय से आने वाले को अध्यक्ष बनाया तो उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष पद पर भी पसमांदा को ही जगह दी।

इसके साथ ही राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा का अध्यक्ष अब्दुल रशीद अंसारी को बनाया तो आतिफ रशीद को उपाध्यक्ष बनाया। भाजपा द्वारा इस प्रकार की तैनाती उनकी विशेष रणनीति की हिस्सा रही है। यदि रोजगार की बात की जाए तो भाजपा ने रामपुर से वाराणसी तक हुनर हाटों को प्राथमिकता दिया, जहाँ बुनकारी और कारीगरी जैसे पसमांदा मुस्लिमों के व्यवसाय को प्राथमिकता दिया गया। इससे इस वर्ग को फायदा पहुँचा।

हुनर हाटों में पहँचने के लिए 1500 रुपए दैनिक भत्ता, ट्रेन किराया और अपने साथ एक सहयोगी को ले आने का प्रबंधन किया गया। वाराणसी में बुनकरों को नए करघे दिए गए, बिजली  की अनुपस्थिति में इनवर्टर की व्यवस्था तथा मार्केट भी उपलब्ध कराया गया। हालाँकि वाराणसी में जब 2004 से 2009 तक डॉ. राजेश मिश्रा कॉन्ग्रेस से संसद सदस्य थे, तब बुनकरों की हालत बहुत सुधरी थी, लेकिन बाद के सरकारों ने इसकी अवहेलना की। 

भाजपा ने वंचित मुस्लिमों में अपने नए मतदाता को देखा है, इसलिए इनके बीच अपनी पैठ बढ़ाने के लिए तमाम विकास योजनाओं को सक्रियता के साथ इन तक पहुँचाया है। भाजपा ने सांप्रदायिक राजनीति के ठप्पे से अपने को बाहर निकलने का प्रयास किया है। भाजपा ने प्रधानमंत्री आवास योजना द्वारा सबसे ज्यादा पसमांदा मुस्लिमों को लाभ पहुँचाया है। पूर्वांचल के गाजीपुर में शहरों में रहने वाले 80 प्रतिशत पसमांदा को लाभ पहुँचा है। राशन योजना और पेंशन योजना के माध्यम से भी पसमांदा मतदाताओं को अपने पक्ष में करने का प्रयास किया।

सामाजिक रूप से बहिष्कृत, उपेक्षित, अशरफ मुस्लिमों द्वारा शोषित मुस्लिमों ने अपनी पारंपरिक मतदान व्यवहार में भी परिवर्तन किया है। आज इनकी राजनीति महत्वकांक्षा और उच्च पदों पर पहुँचने की लालसा ने इनके पुराने विचारों में परिवर्तन किया है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पसमांदा ने एक नया नारा दिया है, “वोट हमारा राज तुम्हारा, नहीं चलेगा, नहीं चलेगा।” 

उनका मानना है कि उत्तर प्रदेश में बाबरी मस्जिद का मामला हो या दंगों की बात हो, सभी में उच्चे वर्ग के मुस्लिमों के हित टकराते हैं। इसमें करघा जलता है तो कमजोर मुस्लिमों का ही जलता है, जबकि इन मुस्लिमों को न दंगे से कोई सरोकार है न ही किसी धार्मिक मुद्दे में दिलचस्पी है। उन्हें तो बस सस्ता धागा मिल जाए और बिजली मिल जाए, इसी से ताल्लुक है। न मंदिर चाहिए, न मस्जिद चाहिए। केवल बेरोजगार मुस्लिमों को काम, बेहतर जीवन स्तर और सस्ती कार्य कुशलता को लेकर प्रशिक्षण मिल जाए।

भाजपा के द्वारा पसमांदा मुस्लिमों पर नजरें इनायत करने को एक तीर से दो निशाने के रूप में भी देखा जा रहा है। भाजपा की राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा ने एक ब्लू प्रिंट तैयार किया है। एक तो 4000 बूथों पर तैनात किए जाने वाले अल्पसंख्यक मोर्चा के अधिकतर कार्यकर्त्ता पसमांदा मुस्लिम हैं, जिससे उन बूथों पर भाजपा के पक्ष में पसमांदा के अधिकतम वोट प्राप्त किया जा सके। वहीं, पिछड़ी हिंदू जातियों और दलित जातियों से मुगल काल में जो धर्मांतरण हुआ है, उन मुस्लिमों को पुनः हिंदू धर्म में वापसी कराना है। 

हालाँकि, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में ओवैसी अपने भाषणों में जिस मुस्लिम वर्ग को केन्द्रित कर रहें हैं और जिन वोटरों पर उनकी निगाहें हैं, वे पिछड़े पसमांदा ही हैं। वे इस समुदाय के बीच कायदे आजम बनना चाहते हैं और काफी मुखरता के साथ इसी समुदाय की संवेदनाओं को उभारते हुए मजबूत अपील कर रहे हैं। 

एक बात मालूम होता है कि पूर्वांचल के अंदर भाजपा 4 प्रतिशत राजभर जातियों के बिखराव की भरपाई 4 से 5 प्रतिशत पसमांदा मुस्लिमों के मतों को प्राप्त कर करना चाहती है। यदि पसमांदा मुस्लिमों का वोट भाजपा या ओवैसी को मिलता है तो समाजवादी पार्टी के लिए पूर्वांचल में संकट खड़ा हो सकता है। यदि पसमांदा मुस्लिमों ने धार्मिक आधार से हटकर रोजगार, आवास, कुशलता, बुनकारी को बढ़ावा, उच्च पदों पर उनके समुदाय की बहाली और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर भाजपा को यदि वोट किया तो भारत के चुनावी राजनीति में एक नया प्रयोग साबित होगा और धार्मिक संवेदनाओं पर मिलने वाले वोट का मिथक टूटेगा। ये बातें वास्तविकता के धरातल पर चरितार्थ होगी या धार्मिक रुख के साथ जाएगी, वह आने वाले चुनाव परिणाम के बाद तय होगा।

भागलपुर धमाके में मोहम्मद आजाद की भूमिका संदिग्ध: शोल्जर और शहजाद SIT की हिरासत में, SHO सस्पेंड

बिहार के भागलपुर (Bhagalpur Blast, Bihar) जिले के तातारपुर थाना क्षेत्र के काजवलीचक मोहल्ले में गुरुवार (3 मार्च 2022) की देर रात एक घर में विस्फोट ने 14 जानें ले लीं। चार घर पूरी तरह जमींदोज हो गए, जबकि कुछ अन्य घरों को भी नुकसान पहुँचा है। पुलिस के मुताबिक, जिस घर में धमाका हुआ वह मोहम्मद आजाद का था। उसने लीलावती देवी को किराए पर दिया था। 

मोहम्मद आजाद की भूमिक संदिग्ध

बताया जा रहा है कि विस्फोट की घटना के बाद मोहम्मद आजाद मौके पर पहुँचा था, लेकिन उसके बाद वह कहीं दिखाई नहीं दिया। मोहम्मद आजाद फरार हो गया है। इसकी वजह से घटना में आजाद की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है और कहा जा रहा है कि आजाद का लीलावती देवी के यहाँ आना-जाना था। ऐसे में घर में बारूद रखने और अवैध तरीके से पटाखा बनाने की बात आजाद को जरूर पता होगी। वह ग्रील वेल्डिंग की आड़ में इस अवैध कारोबार में लिप्त था।

इधर SIT ने आजाद के घर पर छापेमारी कर उसके दो भाइयों मोहम्मद शोल्जर और शहजाद को हिरासत में ले लिया है। इसके साथ ही पुलिस आजाद का पश्चिम बंगाल और विस्फोटक पदार्थ की तस्करी करने वालों से कनेक्शन को भी खँगाल रही है।

थानाध्यक्ष को किया गया निलंबित

इलाके में अवैध तरीके से बारूद का भंडारण और पटाखे बनाने की घटना को देखते हुए जिले के एसएसपी राम बाबू ने तातारपुर के थानाध्यक्ष एसके सुधांशु कुमार को सस्पेंड कर दिया गया है। एफएसएल एक्सपर्ट ने घटनास्थल पर आकर जाँच की और सैंपल भी ले गए। डीआईजी ने बताया कि पुलिस हर स्तर पर मामले की जाँच कर रही है। 

जाँच में पटाखा बनाने वाले बारूद से विस्फोट की बात सामने आई है, लेकिन बारूद फटा किस वजह से इसकी पड़ताल अभी जारी है। सैंपल की जाँच के बाद ही साफ हो सकेगा कि विस्फोटक क्या था और इसकी कितनी मात्रा कितनी थी। वैसे मलबा हटाने के क्रम में सात-आठ किलो बारूद बरामद भी हुआ है। बम निरोधक दस्ते को जाँच के दौरान कहीं पर कोई बम या उसके अवशेष नहीं मिले हैं।

मामले में तातारपुर थाना के दारोगा पूर्णेंदु कुमार के बयान पर केस दर्ज किया गया है। इसमें मोहम्मद आजाद, लीलावती देवी और उसके पूरे परिवार के साथ-साथ महेंद्र मंडल और उसके परिवार को आरोपित किया गया है। केस विस्फोटक अधिनियम, हत्या और अवैध तरीके से पटाखा निर्माण को लेकर किया गया है। विस्फोट में लीलावती देवी और महेंद्र की मौत हो चुकी है।

घर में पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना

उल्लेखनीय है कि इससे पहले मीडिया रिपोर्टों में बताया गया कि धमाका नवीन आतिशबाज के घर हुआ था। घर में इससे पहले 2002, 2008 और 2018 में भी ऐसी ही घटनाएँ हो चुकी हैं। जिस मकान में धमाका हुआ, वह कोतवाली से सिर्फ 100 मीटर की दूरी पर था। विस्फोट की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता कि घटनास्थल से चार किलोमीटर की परिधि में आने वाले मकान में मौजूद लोगों ने तेज झटके महसूस किए।

गौरतलब है कि इससे पहले बिहार के खगड़िया जिले में ब्लास्ट हुआ था। उससे पहले  जून 2021 में बिहार के बाँका जिले में टाउन थाना क्षेत्र के नवटोलिया में नूरी मस्जिद इस्लामपुर परिसर के आगे एक मदरसे में बम विस्फोट हुआ था। इस ब्लास्ट में मदरसे के मौलवी मोहम्मद मोमिद सहित कई लोग घायल हुए थे। वहीं 10 जून 2021 में बिहार के ही अररिया जिले के बैरगाछी थाना क्षेत्र के त भुवनेश्वरी रामपुर गाँव में झोले में रखा एक बम फट गया था। इस धमाके में मोहम्मद अफरोज नाम का शख्स बुरी तरह घायल हो गया। बाद में बताया गया कि अफरोज झोले में बम ले जा रहा था। लेकिन सरिया से टकराकर वह उसके हाथ में ही फट गया। दो जिंदा बम भी बरामद किया गया था।

योनि (Vagina with Wings) का टैटू बनवाने गई थी 18 साल की लड़की: केरल के आर्टिस्ट ने किया रेप, कई और महिलाओं ने लगाए आरोप

केरल के कोच्चि (Kochi, Kerala) में एक सेलिब्रिटी टैटू आर्टिस्ट को सोशल मीडिया पर यौन शोषण के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है। इस टैटू आर्टिस्ट की क्लाइंट सूची में मलयालम फिल्मों की बड़ी-बड़ी हस्तियाँ शामिल हैं। 18 वर्षीय पीड़िता ने एक गुमनाम रेडिट पोस्ट के माध्यम से बताया कि सुजीश ने अपने टैटू शॉप इंकफेक्टेड (Inkfekted) में उसके साथ कैसे बलात्कार किया गया था। यह घटना सामने आने के बाद कई महिलाओं ने विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनके साथ भी हुई ऐसी ही घटना के बारे में बताया।

इस मामले में कोची के पुलिस कमिश्नर सीएच नागार्जुन ने कहा कि शिकायत मिलते ही पुलिस इस मामले में केस दर्ज करेगी। वहीं, मामला सामने आने के बाद आरोपित सजीश फरार है।

लड़की ने बताया कि वह टैटू बनवाने के लिए सुजीश के स्टूडियो गई थी। वह पंखों वाला योनि का एक प्रतीकात्मक टैटू अपने शरीर के निचले हिस्से में बनवाना चाहती थी। सजीश ने लड़की से इस टैटू का मतलब पूछा। फिर उम्र के बारे में पूछा। उसके बाद अश्लील लहजे में बोलना शुरू कर दिया।

पीड़िता के अनुसार, सुजीश ने उससे रिलेशनशिप के बारे में पूछा और कभी सेक्स किया है या नहीं, वर्जिन हो, परियड आती है या नहीं जैसे अनुचित सवाल पूछे। टैटू गोदने के दौरान सुजीश उसे गलत तरीके से छूता रहा और फिर उसके साथ कथित तौर पर बलात्कार किया। पीड़िता ने अपना भयावह अनुभव बताते हुए लिखा, ‘मैं बोल नहीं पाई। मैं फ्रिज हो गई और समझ नहीं पाई कि क्या हो रहा है।”

एक अन्य यूजर ने सुजीश द्वारा किए गए यौन उत्पीड़न को इंस्टाग्राम पर साझा किया। दो साल पहले जब 20 साल की महिला Inkfekted गई तो उस एनकाउंटर को याद करते हुए बताया, “मुझे अपनी ब्रा हटाने के लिए कहा गया और मुझे अपने शरीर को ढँकने के लिए कोई कपड़ा नहीं दिया गया। मुझे लगा कि यह ठीक नहीं है”

अपनी पोस्ट में महिला ने यह भी बताया कि उसके स्तन को भी छूआ था। महिला ने बताया कि सुजीश दाहिने हाथ से टैटू बना रहा था और बाएँ हाथ से टटोलना जारी रखा था। महिला ने बताया कि जब वह जा रही थी तो सुजीश ने उसे गले लगाया और कहा कि पूरी रकम देने की जरूरत नहीं है।

एक अन्य पीड़िता ने 4 साल पहले उसके साथ हुई घटना को याद करते हुए लिखा, “यह 4 साल पहले मेरे साथ हुआ था। तब मुझे नहीं पता था कि क्या करना है। इसके बाद मैं अपने जीवन के साथ आगे बढ़ गई। मेरे साथ जो हुआ उसके बारे में बताने में अब मैं सहज महसूस कर ही हूँ। मुझे उम्मीद है कि इस पोस्ट को देखकर और लोग अपनी कहानियों के साथ सामने आएँगे। मुझे उम्मीद है कि न्याय मिलेगा।”

सोशल मीडिया पर और भी कई पीड़िता हैं, जिन्होंने अपने अनुभवों के वीडियो पोस्ट किए हैं। एक इंस्टाग्राम यूजर ने बताया कि कैसे सुजीश ने टैटू बनाने के दौरान ‘उसे ऊपर की ओर खींचता रहा’ और उसके साथ छेड़छाड़ करता रहा। उसने बताया कि सुजीश ने उसके साथ उसके दोस्त को उस कमरे में बैठने नहीं दिया, जहाँ वह टैटू बना रहा था।

सोशल मीडिया पर इन प्रोफाइल और कई अन्य लोगों के बीच आश्चर्यजनक समानताएँ हैं। लगभग हर मामले में टैटू बनवाने जाने वाली महिला टैटू आर्टिस्ट पर उनसे अनुचित सवाल पूछने का आरोप लगाया गया है। वह उन महिलाओं को छूट देता था, जिनका वह यौन शोषण करता था। वह महिलाओं के दोस्तों को उनके साथ कमरे में जाने से मना करता था, जहाँ वह टैटू बनाता था।

बहन पर कमेंटबाजी को लेकर चाकू-पेचकस से हमला: कासिफ, फरदीन, दानिश समेत 4 गिरफ्तार, सनी और भरत घायल

दिल्ली के मंगलोपुरी इलाके में बहन पर कमेंटबाजी को लेकर दो भाइयों पर हमला किया गया। दोनों पर चाकू और पेचकस से वार करके घायल भी कर दिया गया। पुलिस ने इस मामले में एक नाबालिग समेत 4 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान कासिफ, फरदीन और दानिश के रूप में हुई है।

हमले में घायल हुए युवकों की पहचान सनी और भरत के रूप में हुई है। ये दोनों मंगोलपुरी वाई ब्लॉक में मैकेनिक का काम करते हैं। घायलों को नजदीक के संजय गाँधी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। वहीं दूसरी ओर वारदात के बाद मौके पर पहुँची पुलिस मामले की जाँच में जुट गई है। 

क्यों हुआ विवाद?

जानकारी के अनुसार, सनी और भरत रोजाना की तरह अपनी दुकान पर काम कर रहे थे। इस दौरान पड़ोस के ही एक दुकानदार से सुबह के समय उनकी किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई थी। हालाँकि आसपास के लोगों ने इस विवाद को उस समय शांत करा दिया था। लेकिन दूसरे पक्ष के लोगों शांत नहीं हुए और बदला लेने की ठान ली।

पुलिस उपायुक्त (बाहरी) समीर शर्मा ने बताया कि शाम के समय जब सनी और भरत दुकान बंद करके घर जा रहे थे तो अचानक दर्जन भर के करीब लोग आए और उन पर चाकू और पेचकस से हमला कर दिया। जब तक लोग कुछ समझ पाते, तब तक बेखौफ बदमाश वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए।

पुलिस ने भरत के बयान पर आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 307 और 34 के तहत मामला दर्ज किया है। वहीं आरोपितों का कहना है कि भरत और सनी ने उनकी बहन पर टिप्पणी की थी, इसलिए उन्होंने उन पर हमला किया।

पुलिस वारदात में इस्तेमाल किए गए हथियार को बरामद करने की कोशिश कर रही है। फिलहाल इस घटना के बाद से ही इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है। आसपास के दुकानदार और स्थानीय लोग डरे और सहमे हुए हैं। 

रूस में जानबूझकर फेक न्यूज फैलाने पर 15 साल तक की जेल: BBC-DW और Youtube बैन, ब्लूमबर्ग-CBC ने काम समेटा

यूक्रेन से युद्ध के बीच रूस (Russia-Ukraine War) ने सेना के खिलाफ जानबूझकर फेक न्यूज (Fake News) फैलाने को आपराधिक कृत्य बनाया है और इसके लिए 15 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान किया है। रूस की संसद ने शुक्रवार (4 मार्च) को इससे संबंधित पेश किए गए बिल को मंजूरी दे दी।

रूसी अधिकारियों का कहना का है कि अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगी देशों जैसे दुश्मनों द्वारा उसके खिलाफ फेक न्यूज फैलाई जा रही है, ताकि रूस के लोगों के बीच अराजकता फैलाई जा सके। इसके साथ ही रूस ने कई विदेशी मीडिया संस्थानों और फेसबुक को प्रतिबंधित कर दिया है।

रूस के कॉम्युनिकेशन नियामक ने ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (BBC) और जर्मनी की न्यूज एजेंसी रेडियो डॉयचे वेले (Deutsche Welle) जैसी विदेशी न्यूज कंपनियों की वेबसाइटों को रूस में प्रतिबंधित कर दिया है। रूस का आरोप है कि ये न्यूज एजेंसी यूक्रेन युद्ध को लेकर फेक न्यूज फैला रही हैं।

वहीं, बीबीसी का कहना है कि फेक न्यूज पर कानून बनने के बाद उसने रूस में अपने पत्रकारों को काम करने से रोक दिया है। इसके साथ ही ब्लूमबर्ग (Bloomberg) और कनाडा की सीबीसी न्यूज (CBC News) ने भी रूस स्थित अपने पत्रकारों को काम करने से रोक दिया है।

बीबीसी के महानिदेशक टिम डेवी ने एक बयान में कहा, “यह कानून स्वतंत्र पत्रकारिता की प्रक्रिया का अपराधीकरण करने जैसा है।” उन्होंने कहा कि पत्रकारों को अपना काम करने के लिए आपराधिक मुकदमों का सामना करना पड़ सकता है।

वहीं, सैंमसंग (Samsung) ने रूस को मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक्स चिप्स की सप्लाई रोक दी है। लक्जरी ब्रांड लुईस वुइटन (Louis Vuitton) ने रूस में अपने 124 स्टोर को बंद करने की घोषणा की है।

रूस ने ट्विटर और फेसबुक के बाद अब Youtube पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। इसके पहले ट्विटर, फेसबुक और यूट्यूब ने रूस की सरकार न्यूज वेबसाइटों की रीच को कम कर दिया था और उन पर दिखने वाले विज्ञापनों को सीमित कर उनकी कमाई को प्रभावित करने की कोशिश की थी।