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‘आज हमारे पास 50000 स्टार्टअप्स, 20% तो पिछले 6 महीने में आए’: IIT कानपुर के छात्रों को PM मोदी की सलाह – आराम नहीं, चुनौती चुनें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (28 दिसंबर, 2021) को उत्तर प्रदेश के IIT कानपुर में आयोजित दीक्षांत समारोह को सम्बोधित किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने उत्तीर्ण छात्रों से कहा कि आपने जब IIT कानपुर में प्रवेश लिया था और अब जब आप यहाँ से निकल रहे हैं, तब और अब में आप अपने में बहुत बड़ा परिवर्तन महसूस कर रहे होंगे। उन्होंने एहसास दिलाया कि आने से पहले एक अनजाना सा डर होगा और एक अनजाना सा सवाल मन के भीतर रहा होगा।

उन्होंने कहा कि अब वो समय चला गया और अब आपके पास दुनिया में कई चीजों को जानने-समझने का हौसला है, सर्वश्रेष्ठ को पाने की इच्छा है और पूरी दुनिया पर छा जाने का सपना भी। उन्होंने कहा कि कानपुर भारत के उन कुछ चुनिंदा शहरों में से है, जो इतना विविधता भरा है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि सत्ती चौरा घाट से लेकर मदारी पासी तक, नाना साहब से लेकर बटुकेश्वर दत्त तक, जब हम इस शहर की सैर करते हैं तो ऐसा लगता है जैसे हम स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों के गौरव की, उस गौरवशाली अतीत की सैर कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने याद दिलाया कि 1930 के उस दौर में जो 20-25 साल के नौजवान थे, 1947 तक उनकी यात्रा और 1947 में आजादी की सिद्धि, उनके जीवन का स्वर्णकाल था। उन्होंने छात्रों से कहा कि आज आप भी एक तरह से उस जैसे ही स्वर्णकाल में कदम रख रहे हैं और जैसे ये राष्ट्र के जीवन का अमृतकाल है, वैसे ही ये आपके जीवन का भी अमृतकाल है। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि ये दौर, ये 21वीं सदी, पूरी तरह तकनीक से संचालित है और इस दशक में भी तकनीक अलग-अलग क्षेत्रों में अपना दबदबा और बढ़ाने वाली है।

उन्होंने कहा कि बिना तकनीक के जीवन अब एक तरह से अधूरा ही होगा और ये जीवन और तकनीक की स्पर्धा का युग है और मुझे विश्वास है कि इसमें आप जरूर आगे निकलेंगे। उन्होंने कहा कि जो सोच और मनोदृष्टि आज आपका है, वही मनोदृष्टि देश का भी है। उन्होंने कहा कि पहले अगर सोच काम चलाने की होती थी, तो आज सोच कुछ कर गुजरने की, काम करके नतीजे लाने की है। पीएम मोदी ने कहा कि पहले अगर समस्याओं से पीछा छुड़ाने की कोशिश होती थी, तो आज समस्याओं के समाधान के लिए संकल्प लिए जाते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, जब देश की आजादी को 25 साल हुए, तब तक हमें भी अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए बहुत कुछ कर लेना चाहिए था। तब से लेकर अब तक बहुत देर हो चुकी है, देश बहुत समय गँवा चुका है। बीच में 2 पीढ़ियाँ चली गईं इसलिए हमें 2 पल भी नहीं गँवाना है। मेरी बातों में आपको अधीरता नजर आ रही होगी लेकिन मैं चाहता हूँ कि आप भी इसी तरह आत्मनिर्भर भारत के लिए अधीर बनें। आत्मनिर्भर भारत, पूर्ण आजादी का मूल स्वरूप ही है, जहाँ हम किसी पर भी निर्भर नहीं रहेंगे। कोडिंग कीजिए, लेकिन लोगों के साथ कनेक्शन भी बनाइए। ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IOT)’ के साथ ‘इमोशन ऑफ थिंग्स’ भी मत भूलिए।”

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामी विवेकानंद के उद्धरण ‘Every nation has a message to deliver, a mission to fulfill, a destiny to reach’ की याद दिलाते हुए कहा कि यदि हम आत्मनिर्भर नहीं होंगे, तो हमारा देश अपने लक्ष्य कैसे पूरे करेगा, अपनी लक्ष्य तक कैसे पहुँचेगा? उन्होंने कहा कि आजादी के इस 75वें साल में हमारे पास 75 से अधिक यूनिकॉर्न कंपनीज हैं, 50,000 से अधिक स्टार्ट-अप हैं। इनमें से 10,000 तो केवल पिछले 6 महीनों में आए हैं। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बनकर उभरा है। कितने स्टार्टअप्स तो हमारी IITs के युवाओं ने ही शुरू किए हैं।

उन्होंने कहा, “कौन भारतीय नहीं चाहेगा कि भारत की कंपनियाँ वैश्विक बनें, भारत के उत्पाद वैश्विक बनें। जो IITs को जानता है, यहाँ की प्रतिभा को जानता है, यहाँ के प्रोफेसर्स की मेहनत को जानता है, वो ये विश्वास करता है ये IIT के नौजवान जरूर करेंगे। आज से शुरू हुई यात्रा में आपको सहूलियत के लिए शॉर्टकट भी बहुत लोग बताएँगे, लेकिन मेरी सलाह यही होगी कि आप आराम मत चुनना, चुनौती जरूर चुनना। क्योंकि, आप चाहें या न चाहें, जीवन में चुनौतियाँ आनी ही हैं। जो लोग उनसे भागते हैं वो उनका शिकार बन जाते हैं।”

‘झंडा सँभल नहीं रहा, देश सँभालेंगे ये’: पोल से गिर गया कॉन्ग्रेस का झंडा, स्थापना दिवस पर फहराने पहुँची थीं सोनिया गाँधी, Video वायरल

कॉन्ग्रेस पार्टी के स्थापना दिवस (28 दिसंबर 1885) पर पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गाँधी झंडा लहराने चलीं, तो झंडा गिरकर उनके हाथ पर आ गया। अब इस वाकये की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। वीडियो में देख सकते है कि सोनिया गाँधी रस्सी खींच कर झंडा लहराने की कोशिश करती हैं लेकिन शुरू में रस्सी अटकती है और फिर झंडा नीचे गिर जाता है। 

वहाँ खड़ी भीड़ हैरानी से इस पूरी घटना को देखती रहती है। इसके बाद झंडा लहराने की जगह सिर्फ उसे पकड़कर फैलाया जाता है और कॉन्ग्रेस समर्थक जिंदाबाद के नारे लगाने लगते हैं। अब इस वीडियो को देख लोग तरह-तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं। अंकुर दुबे कॉन्ग्रेस का मजाक उड़ाते हुए कहते हैं, “झंडा सँभल नहीं रहा देश संभालेंगे ये।”

द स्किन डॉक्टर तंज कसते हुए लिखते हैं, “जरूर इस झंडे के गिरने के पीछे पूंजीपतियों का हाथ है।”

गोपाल रावत लिखते हैं, “भगवान भी नहीं चाहते हैं कि ये लोग कभी झंडा फहराएँ। जय श्री राम।”

सेकुलर लिबरल के ट्विटर आईडी से कहा जाता है, “झंडा भी गवाही दे रहा है कि अब कॉन्ग्रेस गिर चुकी है। पहले वाली कॉन्ग्रेस नहीं रही।”

दीप कुशवाहा इस वाकये पर और इस पर आने वाली नेटीजन्स की प्रतिक्रिया पर कहते हैं, “पूरी की पूरी पार्टी गिर गई है उसके बारे में कोई नहीं सोच रहा। एक पार्टी के झंडे के लिए इतनी चिंता।”

बता दें कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा लगातार चुनावों में हार झेलने के बाद अब पार्टी नेतृत्व अपने दल को मजबूत करने में लगा है। खबरों के मुताबिक, समिति सदस्यों ने बताया कि पार्टी देशभर में एक ट्रेनिंग अभियान शुरू कर चुकी है। इस अभियान के तहत जिला और ब्लॉक स्तर तक करीब 5500 ट्रेनर तैयार हो रहे हैं जो नुक्कड़ प्रवक्ता की भूमिका में सार्वजनिक जगहों पर होने वाली बहसों में पार्टी का पक्ष रखेंगे।

23 किलो सोना, 600 Kg चंदन तेल, नोटों का पहाड़… तंबाकू-पान मसाले से लदे 4 ट्रक से खुला काली कमाई का खजाना

‘समाजवादी इत्र’ वाले कारोबारी पीयूष जैन (Piyush Jain) के यहाँ छापे में मिले खजाने ने हर किसी को चौंका रखा है। एक पुराने स्कूटर पर चलने वाले इस कारोबारी के ठिकानों पर छापे पड़े तो सीक्रेट चैंबर और बेसमेंट तक मिले, जहाँ काली कमाई छिपाई गई थी। अमूमन पायजामे और चप्पल में दिखने वाले जैन के ठिकानों से अब तक 194.5 करोड़ से ज्यादा कैश बरामद ही चुके हैं। 23 किलो सोना और 600 किलोग्राम चंदन का तेल मिला है।

रिपोर्टों के अनुसार जैन के ठिकानों तक डायरेक्टरेट ऑफ़ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) की टीम को दरअसल चार ट्रकों ने पहुँचाया। इन ट्रकों में तंबाकू और पान मसाले लदे थे। तब अधिकारियों को भी अनुमान नहीं था कि ये ट्रक उन्हें इतनी बड़ी काली कमाई तक पहुँचा देंगे।

चेकिंग दौरान पकड़े गए थे 4 ट्रक

करीब ढाई महीने पहले अहमदाबाद की डीजीजीआई की टीम ने चेकिंग के दौरान एक-एक कर चार ट्रकों को पकड़ा। इन ट्रकों में लाखों रुपए का माल पैक होने के बावजूद इसका एक भी बिल 50 हज़ार रुपए या फिर उससे ज़्यादा का नहीं था। ये शक पैदा करने की एक बड़ी वजह थी।

डीजीजीआई ने जब इस मामले की गहराई से जाँच शुरू की तब पता चला कि जीएसटी चुकाने से बचने के लिए 200 से ज़्यादा फ़र्ज़ी इनवाइसेज़ तैयार किए हैं। जाँच आगे बढ़ी और इसका सीधा कनेक्शन कानपुर से जुड़ा, क्योंकि पान मसाला वहीं से भेजा गया था। ट्रांसपोर्टर भी कानपुर का ही था। उसके बाद डीजीजीआई ने बड़ी खामोशी से इस मामले की जाँच शुरू की। ट्रांसपोर्टर और पान मसाला कारोबारी को भी ये शक नहीं हो सका कि इस जाँच की आँच अहमदाबाद से करीब 11 सौ किलोमीटर दूर कानपुर में उनके ठिकाने तक पहुँच जाएगी। 

शिखर मसाला की फैक्ट्री पर छापा

क़रीब ढाई महीने बाद 22 दिसंबर की रात डीजीजीआई की टीम ने अचानक कानपुर के ट्रांसपोर्ट नगर में मौजूद शिखर मसाला की फैक्ट्री पर छापा मारा। इसी फैक्ट्री के पास ही गणपति ट्रांसपोर्ट का भी दफ़्तर है, जिनके ट्रकों में जीएसटी चोरी वाले पान मसालों का जखीरा भरा हुआ था। लिहाज़ा, डीजीजीआई की एक टीम ने शिखर पान मसाले के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट दफ्तर पर भी दबिश डाल दी। इस तरह दो ठिकानों पर एक साथ रेड की शुरुआत हो गई। 

डीजीजीआई की टीम को पता चला कि टैक्स की चोरी में सिर्फ़ शिखर पान मसाला और गणपति ट्रांसपोर्ट ही शामिल नहीं है, बल्कि इस खेल में गणपति ट्रांसपोर्ट के मालिक प्रवीण जैन के बहनोई अमरीश और उनके भाई पीयूष जैन का भी बड़ा रोल है। पीयूष जैन ओडोकैम इंडस्ट्रीज के मालिक है। इस तरह एक के बाद एक कड़ियाँ जुड़ती चली गईं।

पीयूष जैन की दुबई में भी संपत्ति होने का पता चला है। गिरफ़्तारी टैक्स चोरी के आरोप में की गई है। गिरफ़्तारी से पहले उससे 50 घंटे की पूछताछ की गई थी। कन्नौज स्थित उनके घर में 18 लॉकर्स मिले हैं। पीयूष जैन के पास इतने पैसे थे कि उसने अपने घरों में भी कैश गिनने वाली मशीनें लगा रखी थीं।

सिख फॉर जस्टिस का आतंकी जसविंदर मुल्तानी जर्मनी में गिरफ्तार: लुधियाना ब्लास्ट का है मास्टरमाइंड, दिल्ली-मुंबई में भी हमले की थी साजिश

लुधियाना ब्लास्ट में शामिल खालिस्तानी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस (SFJ)’ के सदस्य जसविंदर सिंह मुल्तानी को जर्मनी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उस पर आरोप है कि वो दिल्ली और मुंबई में भी लोगों को निशाना बनाने की साजिश में शामिल था। इसके अलावा कथिततौर पर लुधियाना ब्लास्ट का वो मास्टरमाइंड था।

बॉन (जर्मनी का एक शहर) और नई दिल्ली आधारित राजनयिकों के अनुसार, मोदी सरकार ने जर्मन अधिकारियों से खालिस्तानी कट्टरपंथी को गिरफ्तार करने का अनुरोध किया था, जिसके बाद जसविंदर को संघीय पुलिस द्वारा मध्य जर्मनी में एरफर्ट से गिरफ्तार किया गया।

कहा जा रहा है कि वो पंजाब में सीमा पार से हथियारों और गोला-बारूद की तस्करी करने के काम से भी जुड़ा था। पूर्व में होशियारपुर का रहने वाला मुल्तानी खालिस्तानी संगठन के संस्थापक गुरपतवंत सिंह पन्नू का करीबी है। वह कई अलगाववादी गतिविधियों में शामिल रहा है।

45 साल के जसविंदर के बारे में बताया जा रहा है कि उसने बॉर्डर पर किसान नेता बलवीर सिंह राजेवाल की हत्या की साजिश भी रची थी। इस काम के लिए उसने मध्य प्रदेश के जीवन सिंह नाम के व्यक्ति को भड़काया था। लेकिन पुलिस की स्पेशल सेल ने उसको पहले गिरफ्तार कर लिया। बाद में उसके फोन की जाँच से ये बात सामने आई थी कि वो मुल्तानी के संपर्क में था, जो कि जर्मनी में है। जाँच के क्रम में दो दिन पहले ही रॉ टीम मुल्तानी के फ्लैट पर भी गई थी।

गौरतलब है कि पंजाब के लुधियाना कोर्ट परिसर में 23 दिसंबर को एक ब्लास्ट हुआ था। पंजाब पुलिस ने फॉरेंसिक जाँच की रिपोर्ट के आधार पर बताया था कि कोर्ट परिसर में हुए धमाके में RDX का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस ने बताया कि धमाके के लिए 2 किलोग्राम RDX का इस्तेमाल किया गया था। धमाके के कारण पानी की पाइप लाइन फट गई थी। वहीं, ब्लास्ट में मारे गए व्यक्ति की पहचान गगनदीप सिंह (30) के रूप में हुई, जिसके खालिस्तानी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) से लिंक थे।

144 साल में दूसरी बार कंगारुओं की टीम में आदिवासी क्रिकेटर, टेस्ट देते ही रच दिया इतिहास: एशेज में 21 गेंद में उखाड़े 6 विकेट

ऑस्ट्रेलिया (Cricket Australia) की तरफ से 32 साल की उम्र में टेस्ट डेब्यू करने वाले तेज गेंदबाज स्कॉट बोलैंड (Scott Boland) ने अपने पहले मुकाबले में ही इतिहास रच दिया। मेलबर्न में खेले गए एशेज सीरीज (Ashes Series) के तीसरे टेस्ट में बोलैंड ने इंग्लैंड के खिलाफ दूसरी पारी में सिर्फ 7 रन देकर छह विकेट झटके। बोलैंड की धारदार गेंदबाजी से इंग्लैंड (England cricket Team) की दूसरी पारी सिर्फ 68 पर सिमट गई। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया ने यह मुकाबला और एशेज सीरीज भी जीत ली।

बोलैंड ने इंग्लैंड के खिलाफ दूसरी पारी में सिर्फ 21 गेंदों में छह विकेट चटकाए। उन्होंने पाँच विकेट लेने का कारनामा सिर्फ 19 गेंदों में किया। बोलैंड ने सबसे कम गेंदों पर 6 विकेट लेकर इतिहास रच दिया। बोलैंड 144 साल के इतिहास में ऑस्‍ट्रेलिया के लिए टेस्‍ट खेलने वाले दूसरे आदिवासी पुरुष क्रिकेटर हैं। उनसे पहले ऑस्ट्रेलिया के लिए एक पुरुष और दो महिला आदिवासी क्रिकेटर टेस्ट खेल चुके हैं। फेथ थॉमस महिला आदिवासी क्रिकेटर हैं, जिन्‍होंने सबसे पहले यह मुकाम हासिल किया। तेज गेंदबाज जेसन गिलेस्पी टेस्ट खेलने वाले पहले आदिवासी पुरुष क्रिकेटर हैं। वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया की महिला टीम की सदस्य ऑलराउंडर एश्ले गार्डनर दूसरी महिला आदिवासी क्रिकेटर हैं। 

स्कॉट वेस्‍टर्न विक्‍टोरिया स्‍टेट के गुलीदजन जनजाति से आते हैं। बोलैंड ने स्‍वीकार किया कि ऑस्‍ट्रेलिया के लिए टेस्‍ट क्रिकेट खेलने वाले दूसरा आदिवासी बनना बहुत मायने रखता है। साथ ही कहा कि वे आदिवासी बच्‍चों को क्रिकेट खेलने के लिए प्रोत्‍साहित करना चाहते हैं।

मेलबर्न टेस्‍ट के पहले दिन का खेल समाप्‍त होने के बाद बोलैंड ने कहा कि उन्‍हें एक दिन आदिवासी क्रिकेटरों की फौज देखने की उम्‍मीद है। उन्होंने कहा, “बहुत छोटे क्‍लब में जुड़ना मायने रखता है और उम्‍मीद है कि यह आदिवासी समुदाय की शुरुआत है। मैं आदिवासी बच्‍चों को क्रिकेट खेलते देखने के लिए आदर्श बनना चाहता हूँ।”

स्कॉट बोलैंड ने साल 2016 में वनडे डेब्यू किया था। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की तरफ से 14 वनडे और तीन टी20 इंटरनेशनल मुकाबले हैं। उनके नाम वनडे में 16 और टी20 में तीन विकेट दर्ज है। स्कॉट बोलैंड का फर्स्ट क्लास क्रिकेट में जबरदस्त रिकॉर्ड है। उन्होंने 80 मुकाबलों में 279 विकेट झटके हैं। इसमें उन्होंने घरेलू मैदान मेलबर्न में भी 100 विकेट झटका है। स्कॉट बोलैंड ने 58 लिस्ट ए मुकाबलों में 69, जबकि 61 टी20 मुकाबलों में 74 विकेट चटकाए हैं। 

कॉन्ग्रेस सरकार बनते ही रद्द करेंगे धर्मांतरण रोधी बिल: कर्नाटक के पूर्व CM सिद्धारमैया, कहा- बौद्ध, जैन, सिख को हिंदू बताना खतरनाक

कर्नाटक में विपक्ष नेता व राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने वादा किया है कि अगर 2023 में वो सत्ता में लौटे तो एक हफ्ते के भीतर धर्मांतरण रोधी बिल को वापस ले लिया जाएगा। पत्रकारों से बात करते हुए कॉन्ग्रस नेता ने कहा, “कॉन्ग्रेस, सत्ता में आने के एक सप्ताह के भीतर या राज्य विधानमंडल के पहले सत्र में धर्मांतरण विरोधी विधेयक को रद्द कर देगी। इसमें तो कोई शक ही नहीं है।”

बता दें कि कॉन्ग्रेस नेता कई राज्यों में धर्मांतरण रोधी विधेयक का विरोध करती रही है। कर्नाटक में भी यही हाल है। वहाँ भी इस बिल का विरोध चल रहा है। हालाँकि, अभी यह विधेयक विधान परिषद में पेश किया जाना बाकी है।

सिद्धारमैया कहते हैं, “मैंने भी जबरन धर्म परिवर्तन का विरोध किया था और जबरन धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए संविधान में प्रावधान हैं, तो इसके लिए अलग कानून लाने की क्या जरूरत थी? सभी समझदार लोगों को धर्मांतरण विरोधी विधेयक का विरोध करना चाहिए। यह फैलाया जा रहा है कि बौद्ध धर्म, जैन धर्म, लिंगायत धर्म और सिख धर्म सभी हिंदू धर्म का हिस्सा हैं। यह एक खतरनाक डेवलपमेंट है क्योंकि इन धर्मों का गठन वैदिक धर्म के विरोध में किया गया था और अब भी इस जानकारी को छिपाने के प्रयास किए जा रहे हैं।”

उल्लेखनीय है कि बोम्मई सरकार द्वारा लाए जा रहे विधेयक का नाम ‘कर्नाटक प्रोटेक्शन ऑफ राइट टू फ्रीडम ऑफ रिलीजन बिल 2021’ है। अगर सरकार इस विधेयक को पारित कराने में सफल रहती है तो अवैध धर्मान्तरण के आरोपितों को 10 साल तक की सजा होगी। इसके अलावा पाँच लाख रुपए तक का जुर्माना लग सकता है। ऐसा नहीं है कि राज्य में धर्मान्तरण का कानून नहीं है। पुराने कानून के तहत तीन साल की सजा और 50,000 रुपए तक का जुर्माने का प्रावधान है।

नए बिल के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है तो उसकी प्रक्रिया भी थोड़ी लंबी की गई है। सबसे पहले धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को धर्म परिवर्तन से 60 दिन पहले जिलाधिकारी को सूचित करना होगा। इसके बाद जिलाधिकारी इसकी जाँच कराएँगे और जाँच के बाद सब कुछ ठीक होने पर अपनी सहमति देंगे। इसके बाद व्यक्ति को धर्मांतरण के बाद 30 दिन के भीतर डिक्लेरेशन भी देना होगा। प्रस्तावित कानून में आगे कहा गया है कि कोई भी संस्था या संगठन यदि उल्लंघन करता है, उसे भी सज़ा दी जाएगी।

12 महीने, 22 न्यूज: लाल किला से बंगाल हिंसा और तालिबान से बांग्लादेश तक… 2021 की सबसे Hot खबरें

साल 2022 दस्तक दे रहा है। हर कोई उम्मीद कर रहा है ये साल नई खुशियों, नई उम्मीदों वाला हो। हर जगह सिर्फ सकारात्मक खबरें सुनाई दें, 2021 की तरह नहीं… जहाँ साल की शुरुआत हुई खालिस्तानी तत्वों से और फिर मई आते-आते ऑक्सीनजन के कारण त्राहि-त्राहि मच गई। 2021 के इस साल में कभी तालिबान ने चिंता बढ़ाई तो कभी बांग्लादेश में हिंदुओं पर होते अत्याचार ने सबको हैरान कर दिया।

आइए इससे पहले 2022 की शुरुआत हो और नई खबरों से अखबार, मीडिया चैनल भर जाएँ, हम एक सरसरी निगाह 2021 की बड़ी खबरों पर डाल लेते हैं जो बड़े-बड़े राजनेताओं से लेकर कॉमन मैन तक के लिए चर्चा का विषय थीं।

जनवरी 2021

26 जनवरी हिंसा: नवंबर 2020 में शुरू हुआ कथित किसान आंदोलन जनवरी 2021 तक दिल्ली की हर सीमा को घेर चुका था। राकेश टिकैत जैसे किसान नेता जगह-जगह ऐलान कर रहे थे कि 26 जनवरी को लोग ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे और गणतंत्र दिवस पर अपनी एकजुटता दिखाएँगे। सरकार और प्रशासन की मनाही के बावजूद ये लोग नहीं माने और ‘बक्कल उतारने वाली धमकियाँ’ देकर 26 जनवरी 2021 को सैंकड़ों ट्रकों के साथ दिल्ली में घुसे। 

नतीजन दिल्ली में गणतंत्र दिवस के मौके पर हिंसा शुरू हुई। दिल्ली की सड़कों पर जहाँ-तहाँ उत्पात मचाया गया। भीड़ जब लाल किले पहुँची तो वहाँ जमके तोड़फोड़ की गई। रास्ते में तिरंगे का अपमान किया गया। उसे रौंदा गया। प्रधानमंत्री को गालियाँ दी गईं। पुलिस वाहनों पर हमला हुआ। इन सबके अलावा निहंग सिखों को खुली सड़क पर तलवार लेकर दौड़ते देखा गया। जब मामला शांत हुआ तो उपद्रव करने वालों में दीप सिद्धू जैसे बड़े नामों का खुलासा हुआ। वहीं रिपोर्ट्स से पता चला कि इस दिन की झड़प में 300 के करीब पुलिस वाले घायल हुए थे।

फरवरी 2021

वीएचपी कार्यकर्ताओं पर हमला: राम मंदिर निर्माण के लिए धन जमा करने हेतु देश भर में चलाया गया निधि समर्पण अभियान मकर संक्रांति के बाद से चर्चा में था। अभियान में जुटे करीब 9 लाख कार्यकर्ताओं की मदद से 44 दिनों (15 जनवरी से 27 फरवरी 2021) में 2500 करोड़ रुपए जुटाने का काम किया गया। हालाँकि इस दौरान वीएचपी कार्यकर्ताओं की कोशिशों के साथ जो एक और खबर चर्चा में थी वो खबर उन पर हुए हमलों की थी। जगह-जगह कट्टरपंथी तत्वों ने उन्हें अपना निशाना बनाया और उन्हें धमकियाँ दी।

टूलकिट मामला: किसान आंदोलन की आड़ में भारत के खिलाफ़ रचे गए षड्यंत्र को साबित करने वाले दस्तावेज़ ‘टूलकिट’ का खुलासा फरवरी माह में हुआ था। ग्रेटा थनबर्ग के एक ट्वीट से इस टूलकिट के बारे में सबको पता चला था। इस टूलकिट के बारे में कहा गया था कि 18 जनवरी से पहले किसान समर्थन में और मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए तैयार कर दिया गया था। इस खुलासे के बाद लंबे समय तक टूलकिट का विवाद गरमाया रहा और आरोप-प्रत्यारोप लगते रहे।

मुकेश अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक: एक खबर जिसने फरवरी माह में तहलका मचाया वो खबर मुकेश अंबानी से जुड़ी थी। इस माह में ही देश के सबसे बड़े उद्योगपति रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी के घर से कुछ दूरी पर खड़ी सिल्वर कलर की स्कॉर्पियो कार से 20 जिलेटिन छड़ें बरामद हुई थी। महीना खत्म होते-होते पता चला कि इस हरकत के पीछे जैश उल हिंद का हाथ है। हालाँकि बाद के महीनों में इस संबंध में कई खुलासे होते रहे और पता चला कि षड्यंत्र सचिन वाजे जैसे पुलिस अधिकारी द्वारा रचा गया था।

मार्च 2021

तेलंगाना में दंगे: तेलंगाना के निर्मल जिले के भैंसा नगर में 7-8 मार्च के आसपास दंगों की खबर ने सबको हैरान कर दिया था। इस हिंसा में मीडियाकर्मी, पुलिसकर्मी व आम नागरिकों को मिला कर लगभग 10 लोग घायल हुए। इनके अतिरिक्त दो घरों व एक ऑटोरिक्शा में आग लगाई गई। तीन घायलों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया। बाद में इस संबंध में कुल 15 मामले दर्ज हुए और 13 लोगों की गिरफ्तारी हुई। इस घटना से पहले साल 2020 में तेलंगाना का यगी इलाका सांप्रदायिक हिंसा का गवाह बना था। उस समय भी 11 लोग घायल हुए थे और 18 घरों को जला दिया गया था।

डासना देवी मंदिर वीडियो वायरल और यति नरसिंहानंद सरस्वती : मार्च में एक मामला डासना मंदिर का भी काफी चर्चा में था। उस समय खबर आई थी कि डासना में एक आसिफ नाम के मुस्लिम युवक को पानी पीने के बेरहमी से पीटा गया। हालाँकि बाद में मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती ने सामने आकर बताया कि कैसे मंदिर के बाहर कई नल लगे हैं अगर सिर्फ प्यास बुझानी थी तो उन नलों में पानी आता है। उन्होंने यह बी बताया था कि कैसे मंदिर में दूसरे समुदाय के लड़के प्रवेश करके लड़कियों को छेड़ते थे और उनपर अभद्र टिप्पणी करते थे इसलिए उन्होंने सबको मंदिर में घुसने से मना किया।

मनसुख हिरेन हत्या मामला: फरवरी माह में जिस स्कॉर्पियों को विस्फोटक सामग्री से भरके मुकेश अंबानी के घर के बाहर खड़ा किया गया, वो गाड़ी मनसुख हिरेन की थी। मनसुख की लाश 4-5 मार्च 2021 को मिली थी। शुरू में कहा गया कि हिरेन ने आत्महत्या की। लेकिन बाद में पता चला कि उसे मारा गया था। इसी हत्या की एंगल के जाँच के दौरान सचिन वाजे का नाम मीडिया में चर्चा में आया और पता चला कि वो हिरेन से लगातार संपर्क में था।

अप्रैल 2021

अनिल देशमुख का इस्तीफा: एंटीलिया केस और मनसुख हिरेन हत्या मामले की जाँच के क्रम में महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख पर 100 करोड़ रुपए की वसूली के आरोप मढ़े गए, जिसके बाद उनका जगह-जगह विरोध हुआ और अंतत: उन्हें 5 अप्रैल 2021 को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।

कोरोना की दस्तक: कोरोना की दूसरी लहर ने अप्रैल 2021 में भारत में दोबारा दस्तक दी थी। इस बीच महाराष्ट्र में कोरोना की आड़ में चल रहे कई धंधे उजागर हुए थे जिसमें फर्जी सर्टिफिकेट बनाना, प्रवासी कामगारों से वसूली करने का धंधा शामिल था। ऐसे ही कोरोना के बीच मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए की जाने वाली माँग भी इसी माह की खबर है। वहीं कोरोना के नाम पर कुंभ को बदनाम करने के प्रयास भी अप्रैल में शुरू हुए थे। इसी महीने में ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मचना शुरू हुआ था। माह के शुरू में ही खबर आई थी कि मुम्बई में ऑक्सीजन की कमी के कारण कई मरीजों की मौत हो गई। इसके बाद ऐसी खबरों का जमावड़ा लग गया।

मई 2021

कोरोना और प्रोपगेंडा: मई आते-आते कोरोना के कारण जहाँ जगह-जगह मातम पसरता जा रहा था। कई राज्य ऑक्सीजन की किल्लत से गुज़र रहे थे। वहीं कुछ प्रोपगेंडाबाज सोशल मीडिया पर श्मशान घाट पे जल रहे शवों की तस्वीरें शेयर कर करके अलग ही प्रोपगेंडा फैला रहे थे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ये दिखाने का प्रयास हो रहा था कि कैसे मोदी सरकार भारत में कोरोना को कंट्रोल करने में बुरी तरह विफल हुई है।

टीकरी बॉर्डर रेप: एक सबसे बड़ी खबर जो मीडिया में इस माह आई वो टीकरी बॉर्डर पर हुए रेप की थी। इसी माह किसान प्रदर्शन स्थल की हकीकत का पर्दाफाश हुआ था और पता था चला कि कैसे बंगाल से लड़की को लाकर उसका रेप किया गया और हालत इतनी बदतर कर दी गई कि अंत मे उसने कोरोना से पीड़ित होकर तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया था।

बंगाल हिंसा: 2 मई 2021 को बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों में टीएमसी की जीत के बाद राज्य में जगह-जगह हिंदू विरोधी, भाजपा विरोधी हिंसा रिपोर्ट की गई। इस दौरान सैंकड़ों हिंदुओं पर वार हुए, महिलाओं से जबरदस्ती हुई, बच्चों से बर्बरता हुई और कई घरों को आग के हवाले किया गया। पुलिस की कार्रवाई की पोल भी बाद में खुली जब अलग-अलग संगठन जमीन पर उतरे और पीड़ितों की आपबीती लाए। इसी बीच कंगना रनौत का ट्विटर अकॉउंट सस्पेंड होना भी सोशल मीडिया पर अच्छी खासी चर्चा का कारण था।

जून 2021

मई के माह में बंगाल में इतनी क्रूरता की गई कि इसका असर जून तक मीडिया खबरों में नजर आया। पूरे माह इस बात की चर्चा रही कि आखिर ममता सरकार ने कैसे हिंदुओं पर हुए हमलों को नजरअंदाज किया। बंगाल हिंसा पर हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस की एक रिपोर्ट से पता चला की बंगाल में हिंसा की 15000 घटनाएँ हुईं, 25 मौत हुईं और 7000 महिलाओं से बदसलूकी की गई।

गाजियाबाद में बुजुर्ग को पीटने का मामला: जून के महीने में गाजियाबाद की एक घटना सोशल मीडिया पर बवाल खड़ा कर दिया। एडिट की गई वीडियो के साथ बताया गया कि एक मुस्लिम को जय श्रीराम पीट-पीटकर बुलवाया जा रहा था और जब उसने ऐसा नहीं किया तो उसकी दाढ़ी काट दी गई। हालाँकि जाँच-पड़ताल के बाद खबर आई कि सपा नेता ने अब्दुल समद नाम के व्यक्ति के साथ हुई मारपीट को साम्प्रदायिक रंग देने का प्रयास किया था। हकीकत में ये विवाद ताबीज को लेकर था जिसे अब्दुल ने आरोपित के घर में दिया था।

सिख लड़कियों के धर्मांतरण का केस: जम्मू कश्मीर में सिख लड़कियों के धर्मांतरण का मामला भी जून 2021 में सामने आया था। वहाँ 28 जून को इस बाबत प्रदर्शन हुए थे। खबरें थी कि वहाँ समुदाय विशेष के लड़के सिख लड़कियों को अपना निशाना बना रहे थे और उन्हें बहला कर उनसे शादी कर रहे थे।

जुलाई 2021:

राज कुंद्रा पोर्नोग्राफी केस: जुलाई 2021 का महीना बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा से जुड़ी खबरों के नाम था। इस खबर ने न केवल मेनस्ट्रीम मीडिया में बल्कि सोशल मीडिया पर भी कई दिनों तक जगह बनाए रखी। 19 जुलाई को राज कुंद्रा को जब पोर्नोग्राफी केस में अरेस्ट किया गया तो पूरे बॉलीवुड में तहलका मच गया। पुलिस की जाँच और पूछताछ से इतर कई अभिनेत्रियों ने सामने आकर कुंद्रा पर आरोप मढ़े। मामला इतना गंभीर था कि कुंद्रा को जमानत पूरे 2 माह बाद मिली और वो 21 सितंबर को जाकर अपने घर लौटे।

अगस्त 2021:

अफगानिस्तान-तालिबान विवाद: अगस्त 2021 का पूरा महीना अफगानिस्तान और तालिबान से जुड़ी खबरों से भरा था। लंबे समय से चल रहे तनाव के बाद 15 अगस्त को तालिबान ने काबुल पर अपना कब्जा किया था। खबर आई थी कि देश के राष्ट्रपति गनी मुल्क छोड़ भाग गए और देश पर अब तालिबानी हुकूमत है। कट्टरपंथियों ने जगह-जगह फैलाया कि नया तालिबान है जो पहले से अलग है। हालाँकि, तालिबान के देश में आते ही वहाँ की सूरत बदल गई। लड़कियों को बुर्के में रहने के फरमान जारी हो गए और जगह-जगह खुले में पत्रकारों पर हमले होने लगे। सोशल मीडिया पर इसी बीच हमने कई ऐसी वीडियोज देखी थीं जिससे पता चला था कि लोग तालिबान शासित अफगानिस्तान से भागने के लिए कितनी मिन्नतें कर रहे हैं और कुछ उनके नियमों के हिसाब से कुछ को ढालने लगे हैं।

सितंबर 2021

असम हिंसा: 2021 का सितंबर महीना आधा तो तालिबान की खबरों के साथ बीता और आधार असम के दरांग में हुई हिंसा की खबरों के साथ। दरअसल, असम हिंसा 23 सितंबर की है दरांग जिले में पुलिस अतिक्रमणकारियों से जमीन खाली कराने गई तो जवानों पर हमला बोल दिया गया और 11 पुलिसकर्मी घायल हो गए। इसके बाद वामपंथियों ने राज्य में हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया। सरकार ने इस दौरान जवाब दिया कि 10,000 मुस्लिमों की भीड़ ने पुलिस को घेर कर लाठी-डंडों व ईंट-पत्थर से हमला बोल दिया था, तभी पुलिस ने कार्रवाई की। इस घटना की कई वीडियोज भी सोशल मीडिया पर सामने आई थी।

अक्टूबर 2021

आर्यन खान केस: इस माह मीडिया में जो सबसे अधिक खबर कवर की गई वो शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान से जुड़ी हुई है। 2अक्टूबर को आर्यन को मुंबई के क्रूज ड्रग केस में उनके साथियों के साथ एनसीबी ने पकड़ा और 3 हफ्ते से ज्यादा का समय उन्हें जेल में गुजारना पड़ा। इस दौरान जब उन्होंने ड्रग सेवन की बात को स्वीकारा तो सोशल मीडिया पर शाहरुख खान की खूब बदनामी हुई। जगह-जगह उनके पुराने इंटरव्यू दिखाए गए और उनकी परवरिश पर सवाल खड़ा किया गया।

बांग्लादेश हिंदू विरोधी हिंसा: यही महीना दुर्गा पूजा का भी था और इसी महीने में बांग्लादेश में हिंदुओं पर ईशनिंदा का आरोप लगाकर उनके पंडालों पर हमला हुआ और कई हिंदुओं की जान ले ली गई।

नवंबर 2021

दिवाली पटाखा बैन: साल 2021 में नवंबर का महीना वैसे तो त्योहारों के कारण चर्चा में था। लेकिन, इस माह दिवाली थी और हिंदुओं के पावन त्योहार पर एक बार फिर पटाखे बैन करने का काम राज्य सरकारें कर रही थीं। ऐसे में सोशल मीडिया पर बस सवाल किए जा रहे थे कि अगर सवाल प्रदूषण का है तो केवल दिवाली पर पटाखे क्यों बैन हुए। इन्हें क्रिसमस और न्यू ईयर पर भी बैन किया जाना चाहिए। 

इस विषय के अलावा एक टॉपिक जो विवादों में रहा वो गुरुग्राम नमाज से जुड़ा है। दरअसल वहाँ, समुदाय विशेष लोगों के खुले में नमाज पढ़ने पर कई स्थानीयों ने आपत्ति जताई थी। लेकिन प्रशासन के ढीले रवैये के कारण सुनवाई नहीं हुई। बाद में कई हिंदुओं ने विरोध जताने के लिए सड़कों पर उतर हनुमान चालीसा आदि का पाठ शुरू कर दिया और इस तरह प्रशासन को मामले पर संज्ञान लेना पड़ा। हालाँकि ये मामला अब भी शांत नहीं है। हर जुमे  की नमाज पर कई जगह मुस्लिम इकट्ठा होते हैं और खुले में नमाज पढ़ने की जुगत में रहते हैं।

दिसंबर 2021

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर: साल 2021 का दिसंबर महीना काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के लोकार्पण के लिए हमेशा याद किया जाएगा। 13 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस कॉरिडोर के उद्घाटन को देश भर में कवरेज मिली और आज भी इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं।

स्वर्ण मंदिर में लिंचिंग: हाल में पंजाब के अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में हुई एक व्यक्ति की लिंचिंग भी सुर्खियों में है। वहाँ श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने के आरोप में व्यक्ति की हत्या करके उसे गुरुद्वारा परिसर के बाहर फेंक दिया गया, लेकिन हैरत की बात यह है कि इस मामले में पुलिस या राजनीतिक पार्टियों ने एक भी शब्द नहीं बोला।

लड़के-लड़कियों के साथ पढ़ने से तालिबान खफा, पैसे की कमी बता बंद की यूनिवर्सिटी: पाकिस्तान ने कहा- रूढ़ीवादी सोच मुल्क के लिए खतरा

सत्ताधारी तालिबान ने अफगानिस्तान में विश्वविद्यालयों को बंद करने की घोषणा की है। इसके पीछे तालिबान ने लड़के और लड़कियों के एक साथ पढ़ने वाली सह-शिक्षा व्यवस्था और आर्थिक तंगी को प्रमुख कारण बताया है। तालिबान ने महिलाओं को बिना किसी नजदीकी रिश्तेदार को साथ लिए लंबी दूरी की यात्रा करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इन फैसलों को लेकर पाकिस्तान ने तालिबान को रूढ़ीवादी और अपने मुल्क के लिए खतरा बता दिया है।

अफगानिस्तान के उच्च शिक्षा मंत्री अब्दुल बाकी हक्कानी ने रविवार (26 दिसंबर) को कहा कि विश्वविद्यालयों के बंद होने का कारण सह-शिक्षा और आर्थिक संकट है। उन्होंने कहा कि लड़कियों के लिए अलग कक्षाएँ बनानी होंगी और उनके लिए शिक्षकों को नियुक्त करना होगा। इसमें समय और पैसा दोनों की जरूरत है।

बता दें कि इसी साल 15 अगस्त को तालिबान ने अफगानिस्तान पर दोबारा कब्जा कर लिया था। मुल्क में सत्ता में आते ही तालिबान ने सह-शिक्षा पर प्रतिबंध लगा दिया था और कहा था कि लड़कियों को यूनिवर्सिटी में लड़कों के साथ क्लास में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी। 

इसके साथ ही तालिबान ने अफगानिस्तान की महिलाओं पर प्रतिबंधों को और कठोर करते हुए उन्हें अकेले बाहर जाने पर प्रतिबंध लगा दिया। अपने आदेश में तालिबान ने कहा कि महिलाएँ अपने घर से अकेले बाहर भी नहीं निकल सकती। अगर उन्हें बाहर जाना है तो वे अपने किसी पुरुष रिश्तेदार के साथ बाहर जा सकेंगी। वहीं, गाड़ी मालिकों को सिर्फ हिजाब पहनने वाली महिलाओं को गाड़ी में बैठाने का आदेश दिया है। इसके अलावा, महिला पत्रकारों को भी हिजाब पहनना अनिवार्य कर दिया गया है।

महिलाओं के लिए इस तरह के आदेश जारी करने पर पाकिस्तान बिफर गया है। पाकिस्तान ने अब तालिबान को रूढ़िवादी सोच वाला और अपने लिए खतरा बताया है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने कहा, “हम अफगानिस्तान की आवाम की पूरी मदद करना चाहते हैं, लेकिन वो कह रहे हैं कि औरतें वहाँ अकेले सफर नहीं कर सकतीं, स्कूल नहीं जा सकतीं, कॉलेज नहीं जा सकतीं। तालिबान की इस तरह की पुरानी सोच पाकिस्तान के लिए खतरा है।”

चौधरी ने तालिबान पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि पाकिस्तान अतिवादी विचारों के खिलाफ है। भारत के बँटवारे के लिए जिम्मेदार मोहम्मद अली जिन्ना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जिन्ना ने पाकिस्तान को इस्लामिक मुल्क बनाया, मजहबी मुल्क नहीं।

इतना ही नहीं, पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच सीमा विवाद उभर कर भी सामने आया है। पाकिस्तान द्वारा सीमा पर लगाए जा रहे कँटीले तारों की बाड़ को तालिबान लड़कों ने रोक दिया और तार को उठा कर लेते गए। इस दौरान तालिबान लड़ाकों ने पाकिस्तान के दो सैनिकों को गोली भी मार दी।

बता दें कि तालिबान को सत्ता में लाने के लिए हर तरह की मदद करने वाला पाकिस्तान अब तालिबान को रूढ़िवादी बताते हुए उसे पाकिस्तान के लिए खतरा बता रहा है। वर्तमान हालातों को देखकर ऐसा लग रहा है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

‘धर्मदंड चलेगा तो बचने की जगह नहीं मिलेगी’: गोमांस पर ‘मेन्टल’ दिग्विजय सिंह के बयान से साधु-संत नाराज़, कहा – इसीलिए कॉन्ग्रेस गर्त में

कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने हिंदुत्व और गोमांस को लेकर जो आपत्तिजनक बयान दिए हैं, उसके बाद से साधु-संत उन्हें लेकर आक्रोशित हैं। अयोध्या में हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने कहा कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री का मानसिक संतुलन खराब हो गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे ही नेताओं की वजह से आज कॉन्ग्रेस की स्थिति बदहाल है। राजू दास ने इसे सस्ती लोकप्रियता के लिए दिया गया अनाप-शनाप बयान करार देते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस गर्त में चली गई है।

उन्होंने कहा कि हिंदू, सनातन संस्कृति, देवी-देवता, साधु-संतों और हिंदुत्व का अपमान करने वाले इन जैसे नेताओं के कारण कॉन्ग्रेस पार्टी खत्म होने की कगार पर है। उन्होंने हिन्दू व सनातन संस्कृति में गाय को पूजनीय बताते हुए पूछा कि आखिर गाय कैसे हमारी माता नहीं हो सकती है, ये दिग्विजय सिंह से पूछा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि ठाकुर जी को भोग लगाने से पहले भी गौग्रास खिलाया जाता है। उन्होंने कहा कि हमारे धर्म में गाय हमेशा माता और पूजनीय रहेगी।

वहीं तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास ने भी कहा कि वेदों में गाय को पूरी विश्व की माँ बताया गया है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक भी गाय के दूध की तुलना माँ के दूध से करते हैं। बकौल महंत परमहंस दास, हिन्दू और हिंदुत्व एक ही है। उन्होंने कहा कि जो हिन्दू है, वो हिंदुत्व भी होगा ही। उन्होंने उदाहरण गिनाया कि स्त्रीत्व के बिना स्त्री नहीं हो सकती, पुरुषत्व के बिना पुरुष नहीं हो सकता और मनुष्यत्व के बिना मनुष्य नहीं हो सकता, वैसे ही हिंदुत्व के बिना हिन्दू नहीं हो सकता।

उन्होंने याद दिलाया कि कॉन्ग्रेस ने तो भगवान श्रीराम को भी काल्पनिक बताया था, ऐसे में ये गाय को भला कैसे मानेंगे। उन्होंने गाय को 100 करोड़ धर्मावलम्बियों की माँ बताते हुए कहा कि वो श्रेष्ठ लोगों की माँ है। कॉन्ग्रेस नेताओं को मानसिक रूप से विचित्र बताते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें मेन्टल हॉस्पिटल में रखना चाहिए। उन्होंने ‘खिसियानी बिल्ली खम्भा निचोड़े’ कहावत की याद दिलाते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस का सूपड़ा साफ़ हो गया है। उन्होंने कहा कि ज़हर घोलते ऐसे लोगों के लिए साधु-संत ही काफी हैं।

महंत परमहंस दास ने कहा, “जिस दिन ये धर्मदंड शुरू हो जाएगा, उस दिन पता नहीं लगेगा और भागने का रास्ता भी नहीं बचेगा। अगर ये जहर उगलना बंद नहीं करेंगे, तो वो दिन भी जल्द ही आ जाएगा जब हम कॉन्ग्रेस बीटा जहाँ भी मिलेंगे उन पर लाठीचार्ज शुरू कर देंगे। इसके बाद उन्हें बचने तक की जगह नहीं मिलेगी।” भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने तो दिग्विजय सिंह को कसाइयों का नया वकील बताते हुए कह डाला कि उनके इस बयान से हत्या की घटनाएँ बढ़ सकती हैं।

याद हो कि दिग्विजय सिंह ने सावरकर के हवाले से कहा था कि गोमांस खाने में कोई खराबी नहीं है, ऐसा वो खुद मानते थे। भारत को विविधताओं का देश बताते हुए कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि देश में कई ऐसे हिन्दू हैं जो गोमांस खाते हैं। साथ ही उन्होंने पूछा कि ऐसा कहाँ लिखा है कि गोमांस न खाया जाए? इस दौरान दिग्विजय सिंह ने अधिकतर हिन्दुओं को गोहत्या के खिलाफ बताया। साथ ही उन्होंने लोगों से हाथ उठवा कर पूछा कि सावरकर के इस बयान के बारे में कितने लोगों को मालूम था?

चीन मामलों के विशेषज्ञ विक्रम मिसरी होंगे नए डिप्टी NSA, अजीत डोभाल को करेंगे रिपोर्ट: जानें उनके बारे में

चीन मामलों के एक्सपर्ट और बीजिंग में भारत के पूर्व राजदूत विक्रम मिसरी (Vikram Misri) को देश का नया उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (डिप्टी एनएसए) नियुक्त किया गया है। वह एनएसए अजीत डोभाल को रिपोर्ट करेंगे।

1989 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) के अधिकारी रहे मिसरी पंकज सरन की जगह लेंगे, जिनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2021 को खत्म हो रहा है। चीन में भारतीय राजदूत के रूप में मिसरी के तीन साल का कार्यकाल भी इसी महीने खत्म हुआ है। मिसरी इससे पहले प्रधानमंत्री कार्यालय में भी काम कर चुके हैं। नए डेप्युटी एनएसए को हिंद-प्रशांत क्षेत्र की रणनीतिक परिस्थितियों का काफी अनुभवी बताया जाता है। मिसरी अकेले डेप्युटी एनएसए नहीं हैं। उनके अलावा राजेंद्र खन्ना और दत्ता पंडसलगीर भी इसी पद पर तैनात हैं।

जाने कौन हैं विक्रम मिसरी?

7 नवंबर 1964 को जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में विक्रम मिसरी का जन्म हुआ था। वह केंद्र सरकार में विदेश मंत्रालय में अंडर सेक्रेटरी से लेकर निदेशक तक का कार्यभार संभाल चुके हैं। इसके अलावा मिसरी देश के तीन प्रधानमंत्रियों के निजी सचिव भी रह चुके हैं।

वह अप्रैल 1997 से मार्च 1998 तक पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के निजी सचिव रहे, जबकि अक्टूबर 2012 से मई 2014 तक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निजी सचिव की जिम्मेदारी निभाई। इसके बाद उन्होंने मई 2014 से जुलाई 2014 तक पीएम नरेंद्र मोदी के निजी सचिव का पद संभाला।