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13 साल की बच्ची की रेप के बाद हत्या कर ब्रिटेन गया अफगान शरणार्थी जुबैदुल्लाह, ऑस्ट्रिया पुलिस की शिकायत पर अब प्रत्यर्पण

ग्रूमिंग जिहाद से जूझ रहे ब्रिटेन में एक और अफगानी रेपिस्ट को शरण देने का मामला सामने आया है। अफगानी आरोपित का नाम रसूली ज़ुबैदुल्लाह है। उस पर ऑस्ट्रिया के विएना में एक 13 साल की बच्ची के साथ रेप करने के बाद उसकी हत्या करने का आरोप है। ज़ुबैदुल्लाह ने ब्रिटेन में अफगानी शरणार्थी के रूप में शरण हासिल की है।

आरोपित ज़ुबैदुल्लाह ने पिछले साल गर्मियों में ऑस्ट्रिया की सैर की थी। उसका एक फोटो विएना के नामी टूरिस्ट पॉइंट पर भी वायरल हुआ है। इसी दौरान उसने एक 13 साल की स्कूली छात्रा का रेप किया। रेप के बाद उसने बच्ची की हत्या कर दी थी। लाश को निर्ममता से एक दरी में लपेट कर उसने सेंट्रल विएना में एक पेड़ पर रख दिया था। बच्ची का मृत शरीर उसके घर से लगभग 300 यार्ड दूर मिला था। क्षत-विक्षत शव से मिला DNA भी ज़ुबैदुल्लाह से मिलता पाया गया था। अपराध में अकेले ज़ुबैदुल्लाह ही नहीं, बल्कि अफगानी शरणार्थियों का एक पूरा समूह शामिल बताया गया था।

ऑस्ट्रिया पुलिस उस तक पहुँच पाती उस से पहले ही वह भागकर फ़्रांस के Dunkirk शहर पहुँच गया। वहाँ से उसने कई लोगों को लेकर जा रही एक नाव में बैठ कर इंग्लिश चैनल होते हुए ब्रिटेन में शरण ले ली। इंग्लैंड में यह नाव केंट तट पर रूकी थी। यहाँ ज़ुबैदुल्लाह ने अपना फर्जी नाम लिखवाते हुए खुद को अफगानी शरणार्थी बताया। ब्रिटिश प्रशासन ने उसे पूरी लंदन के वाइटचेपल स्थित एक होटल में शरण दे दी। यह होटल शरणार्थी घर के रूप में प्रयोग होता है। जब ऑस्ट्रिया पुलिस ने ब्रिटिश पुलिस को ज़ुबैदुल्लाह की जानकारी दी, तब वह होटल के एक कमरे में मिला। यह जुलाई महीने का उत्तरार्द्ध था और बच्ची की हत्या को लगभग 1 महीने हो चुके थे।

आरोपित की उम्र लगभग 23 साल है। अब उसकी याचिका पर सुनवाई हो रही है, जिसमें ऑस्ट्रिया की पुलिस ने ब्रिटेन से उसके प्रत्यर्पण की माँग की है। इस माँग में उसे अपने देश का फरार मुल्जिम बताते हुए उस पर ऑस्ट्रिया में केस चलाने की बात कही गई है। एक अनुमान के मुताबिक इंग्लैण्ड में फिलहाल 27,000 ऐसे शरणार्थी मौजूद हैं, जो इस साल फ्रांस के रास्ते ब्रिटेन में दाखिल हुए हैं। ये सभी शरणार्थी होटलों, हॉस्टलों और पूर्व फौजी कैम्पों में रखे गए हैं। इनमें ज्यादातर संख्या युवाओं की है।

माइग्रेशन वॉच यूके के चेयरमैन अल्प मेहमेट का कहना है, “सीमाओं पर सुरक्षा बलों के पास तलाशी का कोई साधन मौजूद नहीं है। अधिकतर शरणार्थियों ने अपने असली कागज़ात नष्ट कर दिए हैं। ऐसा अपनी असली पहचान छिपाने और नकली पहचान से इंट्री पाने के लिए किया जा रहा है। इन सभी को ब्रिटिश नागरिकों के दिए जा रहे टैक्स पर पाला जा रहा है।” आरोपित ज़ुबैदुल्लाह के बारे में उन्होंने कहा, “उसने जब अफगानिस्तान छोड़ा था तब वह टीनएज में था। उसके पास ऐसा कोई ठोस कारण नहीं था कि वो अपना पैतृक देश छोड़े।”

इस जघन्य कांड पर बोलते हुए ऑस्ट्रिया के विदेश मंत्री ने कहा है, “अफ़गानी शरणार्थियों ने अपने कायदों को तोड़ा है। हम उन्हें काबुल जाने वाले विमान में फिर से बैठा कर भेजेंगे। भले ही वहाँ तालिबान का शासन क्यों न हो।” अब मृतका के परिजनों ने अपने अधिकारियों पर अफगानियों को वापस न भेज पाने का आरोप लगा कर शिकायत दर्ज की है।

अब मृतका के परिजनों ने अपने अधिकारियों पर अफगानियों को वापस न भेज पाने का आरोप लगा कर शिकायत दर्ज की है। एक इंटरव्यू में मृतका की माँ ने अफगानियों के लिया कहा है कि, ‘ये यहाँ क्यों है ? इन्हे यहाँ से कब निकाला जाएगा ? कहाँ गए हमारे अधिकारी और नेता? फिलहाल आरोपित ज़ुबैदुल्लाह अभी ब्रिटेन की जेल में है। उसे वापस ऑस्ट्रिया भेजा जाएगा या नहीं इस पर फैसला जनवरी माह में होगा। जेल से ही उसकी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सुनवाई भी हुई है।

गौरतलब है कि सीरियाई, ईराकी और अफगानी शरणार्थियों के लिए अपने दरवाजे खोल देने वाले ब्रिटेन में न सिर्फ आतंकी हमले बढ़े हैं बल्कि वहाँ रेप और ग्रूमिंग जिहाद जैसी घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है। दिसम्बर 2020 को ब्रिटेन में आसिफ, आमिर सहित 30 आरोपितों पर 8 नाबालिग बच्चियों के साथ यौन अपराध का केस दर्ज किया गया था। पीड़िता बच्चियों की उम्र 13 से 16 वर्ष के बीच थी। इसी के साथ एक खुलासे के मुताबिक पिछले 40 साल में ब्रिटेन में कम से कम 5 लाख गैर-मुस्लिम (काफिर) लड़कियों के साथ समुदाय विशेष के लोगों ने रेप किया है।

‘जिहादियों और इस्लामवादियों’ द्वारा भाई की जान को खतरा बताने पर ट्विटर ने पत्रकार का अकाउंट किया लॉक, बताया- कम्युनिटी स्टैंडर्ड का उल्लंघन

कश्मीरी पंडित और पत्रकार आरती टिक्कू ने 15 दिसंबर (शुक्रवार) को ट्विटर पर मदद की गुहार लगाते हुए कश्मीर के इस्लामी आतंकवादियों द्वारा उनके भाई को जान से मारने की धमकी देने के बारे में एक पोस्ट साझा किया था। उसके दो दिन बाद यानी 17 दिसंबर को ट्विटर इंडिया ने आरती टिक्कू के अकाउंट को ‘लॉक’ कर दिया। ट्विटर ने आरती को नोटिस भेजा था, जिसमें कहा गया था कि अगर वह अपने भाई को धमकी मिलने वाली धमकी से संबंधित पोस्ट को डिलीट करती हैं तो उनका अकाउंट ‘अनलॉक’ किया जा सकता है।

ट्विटर द्वारा जारी किया गया यह नोटिस कई लोगों द्वारा शेयर किया गया

आरती टिक्कू ने गृह मंत्रालय के ट्विटर हैंडल को टैग करते हुए ट्वीट किया था, “मेरे भाई @TikooSahil_ जो श्रीनगर में रहते हैं, उन्हें भारत के कश्मीर में बैठे जिहादी आतंकवादियों और पाकिस्तान, ब्रिटेन और अमेरिका में उनके आकाओं द्वारा खुलेआम धमकी दी जा रही है। क्या कोई देख रहा है? क्या हम इन इस्लामवादियों द्वारा मारे जाने का इंतजार कर रहे हैं या आप उन पर कोई कार्रवाई करेंगे?”

ट्विटर ने यह अजीब फैसला इसलिए लिया है, क्योंकि पत्रकार के भाई को धमकी मिलने वाले ट्वीट ने उनके सामुदायिक मानकों (community standards) का उल्लंघन किया है। ट्विटर (Twitter) ने इस ट्वीट को लोगों के एक समूह को टारगेट करने, उन्हें धमकाने या परेशान करने के रूप में माना है।

ट्विटर ने अपने नोटिस में आगे कहा, “आप नस्ल, राष्ट्रीयता, जातीयता, sexual orientation, लिंग और मजहब के आधार पर, धार्मिक संबद्धता, उम्र, विकलांगता या गंभीर बीमारी के आधार पर अन्य लोगों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा नहीं दे सकते हैं। इसके अलावा धमकी देकर या अन्य तरह से परेशान नहीं कर सकते हैं।” नोटिस में यह भी कहा गया है कि उनके ट्वीट ने ट्विटर के नियमों का उल्लंघन किया है। इसके चलते उन्हें अपना ट्वीट हटाना पड़ा है।

ट्विटर के अनुसार, जो ट्वीट्स उनके सामुदायिक मानकों का उल्लंघन करते हैं, वो उस ट्विटर अकाउंट को ‘लॉक’ कर देता है। वह निश्चित रूप से सोशल मीडिया यूजर्स को कुछ भी ऐसे ट्वीट करने से प्रतिबंधित करता है, जिसमें उन्होंने कुछ ऐसा लिखा हो। वे उस ट्वीट को स्वीकार नहीं करते हैं और उसे ट्विटर के नियमों का उल्लंघन बताते हैं। हालाँकि, विवादित ट्वीट को लेकर अपील करने का प्रावधान है, लेकिन ऐसे में शायद ही ट्विटर कोई प्रतिक्रिया देता है या फिर वह किसी कुतर्क के माध्यम से अपने आपको सही साबित करने की पुरजोर कोशिश करता है।

इस ट्वीट को देखने से ऐसा नहीं लगता है कि आरती टिक्कू ने इसमें ऐसा कुछ भी लिखा है, जो ट्विटर के कम्युनिटी मानकों के खिलाफ हो। दरअसल, उनके भाई को लगातार जान से मारने की धमकियाँ मिल रही हैं, जिसको लेकर उन्होंने गृह मंत्रालय से केवल मदद की गुहार लगाते हुए यह ट्वीट किया था, ताकि वह समय रहते अपने भाई को बचा सकें। लेकिन ट्विटर ने आरती से कोई भी सहानुभूति न दिखाते हुए उनके अकाउंट को लॉक करना उचित समझा। यहाँ ट्विटर ने ‘जिहादी’ या ‘इस्लामी’ शब्द का इस्तेमाल मजहब, धार्मिक संबद्धता और समुदाय के खिलाफ जोड़कर देखा है। ट्विटर ने इस पोस्ट को धमकी देने वालों के खिलाफ घृणास्पद ट्वीट माना है।

आईटी दिशा-निर्देशों का फेसबुक, ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म द्वारा पालन नहीं किया जा रहा

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने इस साल 25 फरवरी को ‘मध्यस्थ दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता नियम, 2021’ के तहत डिजिटल प्लेफॉर्म्स के लिए नई गाइडलाइन जारी की थी। अभी तक अधिकतर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इन दिशा-निर्देशों का पालन करने में विफल रहे हैं। नियमों के तहत प्रकाशकों को आचार संहिता का पालन करना, शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना और भारत सरकार को कंटेंट संबंधित सभी जानकारी देना जरूरी है।

वहीं, इस साल जून में नए आईटी नियमों के अनुरूप कंपनी अनुपालन अधिकारियों को नियुक्त करने में विफल रही थी, जिसके कारण केंद्र सरकार ने भारतीय आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत ट्विटर को मिला सुरक्षा का अधिकार छीन लिया था।

’83 फिल्म पाकिस्तानियों को बहुत पसंद आएगी, यह एक बहुत ही स्पेशल पल है’: पाकिस्तान के पत्रकार से रणवीर सिंह

अपने अजीबोगरीब पहनावे के लिए फेमस बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह (Ranveer Singh) इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म ’83’ (83 Movie) को लेकर खासा चर्चा में हैं। हाल ही में फिल्म के प्रमोशन के दौरान अभिनेता ने दुबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया से बातचीत की।

अपनी फिल्म 83 को जहाँ रणवीर सिंह प्रोमोट कर रहे थे, वहाँ पाकिस्तानी पत्रकार भी थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक पाकिस्तानी पत्रकार जब ‘पद्मावत’ अभिनेता से सवाल करता है, तो वह कहते हैं, “आप पाकिस्तान से हैं?” इस पर पत्रकार जवाब देता है, “जी, मैं पाकिस्तान से हूँ।” इसके बाद रणवीर कहते हैं, ”आपके बोलने के तरीके से पता चल रहा है सर।”

‘बेफिक्रे’ अभिनेता ने पत्रकार के सवाल के जवाब में कहा, “यह एक बहुत ही स्पेशल पल है, जिसे आप बतौर पाकिस्तानी देख कर बहुत खुश हो जाएँगे। फिल्म में कई यादगार पलों को समेटा गया है, जो हर उम्र के लोगों को पसंद आएगी।”

उन्होंने आगे कहा, ”मैं आपको बताऊँगा नहीं। कुछ ही दिनों में आप फिल्म देखेंगे और फिर आपको मेरी याद आएगी। मेरे लिए वो बहुत खास है। यह फिल्म ऐसे ही खूबसूरत पलों से भरी हुई है।” प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक्टर के साथ उनकी रील व रियल लाइफ वाइफ दीपिका पादुकोण और फिल्म के डायरेक्टर कबीर खान भी मौजूद थे। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया सोशल पर तेजी से वायरल हो रहा है।

फिल्म में पूर्व भारतीय क्रिकेटर कपिल देव का किरदार निभाने वाले रणवीर ने पाकिस्तानी पत्रकार से यह भी कहा, “अगर आप क्रिकेट के दीवाने हैं, तो यह फिल्म आपके लिए बेहतर जर्नी साबित होगी। इसके अलावा यदि आप उस समय के उन सभी खिलाड़ियों को जानते हैं, तो यह आपको बेहद पसंद आएगी।”

पाकिस्तानी न्यूज वेबसाइट Dawn.com में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, यह फिल्म भले ही 1983 के विश्व कप में भारतीय क्रिकेट टीम की जीत पर आधारित हो, लेकिन पाकिस्तान के लोग भी इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसका मुख्य कारण अभिनेता रणवीर सिंह हैं, क्योंकि उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह कहा है कि पाकिस्तानी इसे देख कर खुश हो जाएँगे।

कबीर खान (Kabir Khan) के डायरेक्शन में बनने वाली ’83’ फिल्म 24 दिसंबर को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। यह फिल्म 1983 विश्व कप में भारतीय क्रिकेट टीम की जीत पर आधारित है। इसमें कपिल देव, कीर्ति आजाद और बलविंदर संधू के अलावा उस वक्त के क्रिकेटरों को पर्दे पर उतारा गया है। फिल्म में रणवीर सिंह, दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) और पंकज त्रिपाठी मुख्य किरदार में नजर आएँगे। दीपिका फिल्म में कपिल देव की पत्नी रोमी की भूमिका में हैं।

श्रीशैल मंदिर परिसर में मुस्लिम भी खोल सकेंगे दुकान: आंध्र सरकार के फैसले को SC ने पलटा, याचिकाकर्ता बाशा ने बताया था जीवन का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अपने एक निर्णय में कहा है कि आन्ध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के श्रीशैलम मंदिर (Srisailam temple) के पास कारोबार करने से गैर-हिंदुओं को रोका नहीं जा सकता। शुक्रवार (17 दिसंबर) को जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ (DY Chandrachud) और जस्टिस एएस बोपन्ना (AS Bopanna) ने यह निर्णय सुनाया। उन्होंने कहा कि अन्य धर्म (Religion) को मानने वाले उन दुकानदारों को दुकानों की नीलामी प्रक्रिया में हिस्सा लेने से नहीं रोका जा सकता, जिनकी पहले से ही दुकानें मंदिर परिसर में मौजूद हैं। इस आदेश में दुकान मालिकों के साथ उन किरायेदारों को भी शामिल कर लिया गया है, जो हिन्दू नहीं हैं।

अपने निर्णय में बेंच ने आन्ध्र सरकार से कहा, “एक बार आप ऐसा कह सकते थे कि मंदिर परिसर में शराब या इस तरह की कोई दुकान नहीं खोली जा सकती, लेकिन हिन्दू के अलावा कोई दूसरा दुकान न ले, ये उचित नहीं है। आप ऐसा कैसे कह सकते हैं कि वहाँ गैर-हिन्दू फूल और खिलौने भी नहीं बेच सकता?” आन्ध्र प्रदेश सरकार की तरफ से सीनियर एडवोकेट सीएस वैद्यनाथन ने अपना पक्ष रखा।

इससे पहले आन्ध्र प्रदेश सरकार ने मंदिर के बगल दुकानों की नीलामी में हिस्सेदारी लेने का अधिकार केवल हिन्दू धर्म को मानाने वालों के लिए आदेशित किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सितम्बर 2019 में सैय्यद जानी बाशा ने इस आदेश को आन्ध्र पदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। तब उच्च न्यायालय ने आन्ध्र सरकार के आदेश पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था। याचिकाकर्ता सैय्यद जानी बाशा ने इस आदेश को अपने जीवन के अधिकार में हस्तक्षेप बताया था। याचिकाकर्ता ने ये भी बताया कि वर्ष 1980 से पहले तमाम दुकानदार वहाँ अपने प्रतिष्ठान चला रहे थे, लेकिन इस आदेश के बाद उन्हें धर्म के आधार पर छाँट दिया गया।

गौरतबल है कि आन्ध्र प्रदेश सरकार ने साल 2015 में आदेश जारी किया था कि हिन्दुओं को छोड़ कर कोई अन्य धर्म का व्यक्ति श्रीशैलम मंदिर से जुडी दुकानों की नीलामी प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकता। यह आदेश उन धार्मिक क्षेत्रों के लिए था जो आन्ध्र प्रदेश चैरिटेबल व हिन्दू धर्म संस्थान एंडोमेंट एक्ट 1987 के अधीन आते हैं।

ब्रिटेन की तरह भारत में फैला तो 14 लाख रोज आएँगे कोरोना के नए मामले, WHO ने स्वदेशी ‘कोवैक्सीन’ को दी आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी

कोरोना के नए वैरिएंट ओमीक्रॉन को लेकर दुनिया भर में चिंताएँ बढ़ती जा रही हैं। भारत में भी इसके संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही है। नीति आयोग ने कहा है कि ब्रिटेन में यह वैरिएंट जिस रफ्तार से बढ़ रहा है, उसको भारत की आबादी के अनुपात में देखा जाए तो यह संख्या 14 लाख प्रतिदिन के अनुसार हो सकती है। वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत में विकसित स्वदेशी कोरोना वैक्सीन ‘कोवैक्सीन’ को आपातकालीन मंजूरी दे दी है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) के प्रमुख अदार पूनावाला ने डब्ल्यूएचओ के इस कदम का स्वागत किया है। उधर रुस ने कहा है कि ‘स्पूतनिक V’ वैक्सीन ओमीक्रॉन में भी प्रभावी है।

बता दें कि ओमिक्रॉन का संक्रमण 91 देशों में फैल चुका है और जिस तेजी से यूरोप में फैल रहा है, उसको देखते हुए भारत पूरी तरह सतर्क हो चुका है। नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने कहा कि यह वैरिएंट यूरोप में डेल्टा वैरिएंट पर भारी पड़ रहा है, जो महामारी के एक नए चरण की शुरुआत को दिखा रहा है।

पॉल ने कहा कि ब्रिटेन 80-90 हजार मामले प्रतिदिन आ रहे हैं। ऐसे में भारत की आबादी और ओमीक्रॉन की रफ्तार के नजरिये से देखा जाए तो यह 14 लाख प्रतिदिन नए केस आने के बराबर है। बता दें कि कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान भारत में प्रतिदिन लगभग 4 लाख मामले आ रहे थे। वह भारत के लिए बेहद संकट की स्थिति थी। अब ओमीक्रॉन को लेकर बेहद सतर्क रहने की जरूरत है।

बता दें कि ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी सहित यूरोप के कई देशों में डेल्टा का कहर पहले से जारी है। इसके कारण टीके द्वारा हासिल की गई इम्यूनिटी बेअसर साबित हो रही है और ओमिक्रॉन का कहर बढ़ने लगा है। नीति आयोग के सदस्य ने स्वास्थ्य मंत्रालय की साप्ताहिक प्रेस कांफ्रेस में कहा कि ब्रिटेन में तेजी से मामले बढ़े हैं। फ्रांस में 80 प्रतिशत लोगों को टीके लग चुके हैं, फिर भी संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसी प्रकार नॉर्वे में तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमितों की संख्या में 18 फीसदी संक्रमण ओमिक्रॉन के मिले हैं।

पॉल ने कहा, “हमें इतनी बड़ी संख्या वाली संक्रमण की स्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा। ठंड का मौसम भी वायरस के प्रजनन में वृद्धि के लिए जिम्मेदार है। ऐसे में मामले रातों-रात बढ़ते हैं और स्थिति गंभीर हो जाती है। हालाँकि, हालात अभी स्थिर हैं, लेकिन हमें सतर्क रहना चाहिए।” 

बता दें कि ब्रिटेन में शुक्रवार (17 दिसंबर) को 93,045 नए मामले सामने आए। वहीं, एक दिन में मरने वालों की संख्या 111 पहुँच गई है। ब्रिटेन में अब तक कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या 1.1 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है, जबकि इस महामारी में 1,47,000 लोगों ने जान गँवा दी है। अगर भारत की बात की जाए तो देश में ओमीक्रॉन के अब तक कुल 101 मामले सामने आए हैं। 11 राज्यों में आए कुल मामलों में 22 सबसे अधिक मामले महाराष्ट्र में मिले हैं।

जैकलीन-नोरा के बाद अब श्रद्धा कपूर और कुंद्रा से जुड़ा घोटालेबाज सुकेश के तार : ED के सामने किया ये दावा

200 करोड़ रुपए की वसूली केस में प्रवर्तन निदेशालय के सामने सुकेश चंद्रशेखर ने कई हैरान करने वाले खुलासे किए हैं। ये जानकारी सूत्रों के हवाले से मीडिया में आई है कि सुकेश ने अपने बयान में ईडी के सामने शिल्पा शेट्टी, श्रद्धा कपूर और हरमन बावेजा का नाम लिया है। हालाँकि ईडी ने इसे फर्जी दावा कहा है।

उसने बयान में बताया कि वो शिल्पा शेट्टी के भी संपर्क में था और श्रद्धा कपूर और हरमन बावेजा से भी बात करता था। उसके मुताबिक, उसने पोर्नोग्राफी केस में फँसे राज कुंद्रा को जेल से छुड़ाने के लिए कानूनी मदद दिलाने का वादा शिल्पा से किया था।

उसने ये भी कहा कि वो हरमन बावेज़ा को भी अच्छी तरह जानता है, जो कार्तिक आर्यन के साथ कैप्टन नाम की फिल्म को प्रोड्यूस करने की प्लानिंग कर रहा था। सुकेश ने ईडी को ये भी बताया कि वह  श्रद्धा कपूर को साल 2015 से जानता हे। उसने सुशांत सिंह राजपूत मामले में NCB के केस में श्रद्धा कपूर की मदद भी की थी। हरमन को लेकर कहा कि वह उसके पुराने दोस्त हैं।

बता दें कि करोड़ों की वसूली केस के कारण बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीस और नोरा फतेही पहले ही परेशानियों में घिरी हुई हैं। दोनों से केंद्रीय एजेंसी पूछताछ कर रही है। अब तक सामने आई जानकारी के मुताबिक दोनों अभिनेत्रियों ने सुकेश से महंगे तोहफे लिए थे और जैकलीन की तो सुकेश के साथ निजी तस्वीरें भी सामने आई थी।

मालूम हो कि एजेंसी ने इस साल दो बार 36 वर्षीय जैकलीन फर्नांडीज का बयान दर्ज किया, जिसमें उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर ने खुद का परिचय “शेखर रत्न वेला” के रूप में दिया था। एजेंसी ने इस महीने की शुरुआत में विशेष धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत के समक्ष आरोपपत्र दायर किया था और चंद्रशेखर, उसकी पत्नी लीना मारिया पॉल और छह अन्य को नामजद किया था।

मुख्तार अंसारी पर लगातार कस रहा शिकंजा, एक और नजदीकी की संपत्ति पर चला योगी सरकार का बुलडोजर

उत्तर प्रदेश में माफियाओं के खिलाफ योगी आदित्यनाथ सरकार की बुलडोजर वाली कार्रवाई लगातार जारी है। योगी सरकार ने मऊ जिले में शुक्रवार (17 दिसंबर) को कुख्यात माफिया सरगना मुख्तार अंसारी के एक नजदीकी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उसकी लाखों की संपत्ति पर बुलडोजर चलवा दिया है। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद अपराधियों में अफरा-तफरी मची हुई है।

मामला मऊ जिले के सराय लखंसी थाना क्षेत्र के डुमरा गाँव का है। आरोप है कि यहाँ की ग्राम सभा की जमीन पर राम अवध सिंह ने कब्जा कर लिया था। अवैध कब्जे वाले तालाब की जमीन का गाटा संख्या 588 और रकबा करीब 0.091 हेक्टेयर है। यहाँ पर आरोपी ने पोखरे के चारों तरफ बाउंड्री वाल बना दिया है। इसके साथ ही इसमें शौचालय और गाड़ियों के लिए गैरेज बनाकर रखा गया था। इसके साथ ही इसमें स्विमिंग पुल भी बनवाया गया था।

जिला अधिकारी अमित कुमार बंसल के निर्देश पर एसडीएम, तहसीलदार और पुलिस बल की टीम मौके पर पहुँची और पोकलेन एवं जेसीबी की मदद से इस संपत्ति को तोड़ दिया गया। इस कार्रवाई में पुलिस ने अवैध रूप से कब्जा करके बनाई गई बाउंड्री और गाड़ियों के गैरेज को तोड़ा डाला। इस तरह पुलिस ने जगह को पूरी तरह से खाली करा लिया।

राम अवध के बेटे आर्यन मऊ जनपद के बड़े ठेकेदारों में गिने जाते हैं। आर्यन के मुख्तार अंसारी से नजदीकी संबंध बताए जाते हैं। इस जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर संतोष कुमार ने पुलिस में शिकायत की थी। उसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की है।

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से मुख्तार अंसारी पर योगी सरकार की कार्रवाई जारी है। इसमें अंसारी के अरबों रुपये की संपत्ति जब्त करने के साथ-साथ उसके सहयोगियों पर लगातार कार्रवाई जारी है।

‘यूपी में CM योगी की होगी प्रचंड जीत’: स्वामी ने की भविष्यवाणी, साथ ही दी एक ऐसी ‘चेतावनी’ जो सबसे अधिक उन्हीं पर होती है लागू

भाजपा (BJP) नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी (Subramanian Swamy) ने दावा किया है कि आगामी विधानसभा चुनावों (UP Assembly Election 2022) में भारी जीत के बाद उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की सरकार सत्ता में वापस लौटेगी। शुक्रवार (17 दिसंबर) को ट्विटर पर किए गए पोस्ट में उन्होंने यह बात कही। ट्वीट में स्वामी ने कहा कि उनकी हाल की मथुरा यात्रा के दौरान उनके द्वारा स्थापित ‘विराट हिंदुस्तान संगम’ के सदस्यों ने बताया कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा 2017 की तरह इस बार भी बड़ी जीत हासिल करेगी और 300+- सीटें जीतेगी।

हालाँकि, जो भी कारण हो, स्वामी ने दावा किया कि कुछ लोग इस जीत का क्रेडिट हड़पने की कोशिश करेंगे। उन्होंने लोगों को इससे सावधान रहने की ‘चेतावनी’ भी दी। विडंबना यह है कि क्रेडिट हड़पने की बात करने वाले सुब्रमण्यम स्वामी खुद कई ऐसी उपलब्धियों का श्रेय लेने के लिए जाने जाते हैं, जिनमें उनकी कोई भूमिका नहीं रही।

इसका सबसे बड़ा उदाहरण अयोध्या के राम मंदिर का मामला है। स्वामी ने दावा किया था कि उनके हस्तक्षेप के बाद ही सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की प्रतिदिन सुनवाई शुरू हुई थी, लेकिन तथ्य यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस ऐतिहासिक मामले में उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। हालाँकि, सर्वोच्च न्यायालय ने राम मंदिर में पूजा के मौलिक अधिकार को लागू करने वाली उनकी याचिका को बरकरार रखा था, लेकिन तत्काल सुनवाई की माँग को खारिज कर दिया था।

श्रीराम जन्मभूमि स्थल हिंदुओं को सौंपने के शीर्ष अदालत का फैसला मूल टाईटल सूट में दिया गया था, जिसमें स्वामी पक्षकार थे ही नहीं, क्योंकि इस मामले में हस्तक्षेप करने की उनकी याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया था।

अभी तीन दिन पहले ही सुब्रमण्यम स्वामी ने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर और पीवी नरसिम्हा राव की सरकारों और 2014 में बीजेपी की जीत का श्रेय लिया था। उन्होंने कहा था कि साल 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी को ऐतिहासिक जीत रामसेतु के लिए उनके योगदान, 2जी स्पेक्ट्रम मामला और उनके द्वारा लड़े गए अन्य मामलों के कारण मिली थी।

स्वामी ने इसी तरह कई अन्य अदालती आदेशों और सरकारी फैसलों का श्रेय लिया है। यहाँ तक कि उन मामलों का श्रेय भी स्वामी ने लिया, जहाँ उनकी कोई स्पष्ट भूमिका नहीं रही। अब वही व्यक्ति चेतावनी दे रहा है कि यूपी के आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत का श्रेय कोई व्यक्ति हड़प लेगा।

‘रेप के मजे लो, आवारगी करेंगी’: माननीयो भले आपकी सोच कमर के नीचे हो, लड़कियों की जिंदगी केवल कमर के नीचे नहीं

देखिए एक कहावत है- जब रेप होना ही है तो लेट जाइए और मजे लीजिए। आपकी इस वक्त वही स्थिति है।

कॉन्ग्रेस के छह बार के विधायक रमेश कुमार ने जो कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं, जब सदन में यह बात गुरुवार को (16 दिसंबर 2021) कही तो उनके साथियों के चेहरे पर एक शर्मनाक हँसी थी। विवाद बढ़ा तो रमेश कुमार ने माफी भी माँग ली। पर गौर करने की बात यह है कि रेप पीड़िताओं का कॉन्ग्रेस विधायक ने ऐसा मजाक पहली बार नहीं उड़ाया है। इसी कर्नाटक विधानसभा में जब रमेश कुमार स्पीकर की कुर्सी पर बैठते थे तो एक बार खुद की तुलना भी रेप पीड़िता से कर डाली थी।

जैसे रेप, रेप न हुआ। कोई मजे की चीज हो गई। सहमित से सेक्स का आनंद लेना हो गया।

रमेश कुमार पहले माननीय नहीं है जिनके लिए यह मजाक का विषय रहा हो। अतीत में माननीयों की करतूतों पर नजर डालने से पहले जरा ताजा-ताजा आए बयानों पर गौर करिए । समाजवादी पार्टी के सांसद हैं शफीकुर्रहमान बर्क। उनका मानना है कि लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र बढ़ाकर 18 साल से 21 करने का मतलब है कि लड़कियों को आवारगी का ज्यादा मौका देना। उनकी ही पार्टी के नेता हैं अबू आजमी। उनके अनुसार इससे लड़कियॉं गलत रास्ते पर जाएँगी। एसपी के ही सांसद टी हसन का मानना है कि शादी की न्यूनतम उम्र बढ़ गई तो लड़कियॉं बच्चे पैदा करने की मशीन नहीं रह पाएँगी। रमेश कुमार हो या बर्क, आजमी हो हसन इनके बिगड़े बोल ताजातरीन उदाहरण हैं।

जरा पीछे जाएँ तो मुलायम सिंह यादव याद आते हैं और याद आता है उनका सार्वजनिक तौर पर बलात्कार के आरोपितों का यह कहकर बचाव करना कि लड़के हैं गलती हो जाती है। मुलायम सिंह उसी पार्टी के मुखिया रहे हैं जिस पार्टी की सांसद जया बच्चन हैं जो आज रमेश कुमार के बयान पर विलाप कर रहीं थी। लेकिन मुलायम सिंह के इस बयान के बावजूद उन्होंने साइकिल की सवारी नहीं छोड़ी थी। इसी सपा के तोता राम यादव ने तो कह दिया था कि बलात्कार जैसी कोई चीज ही नहीं होती।

ऐसा भी नहीं है कि यह बीमारी केवल सपा तक सीमित है। शरद यादव ने तो यहॉं तक कह दिया था, ‘वोट की इज्जत आपकी बेटी की इज्जत से ज्यादा बड़ी होती है। अगर बेटी की इज्जत गई तो सिर्फ गाँव और मोहल्ले की इज्जत जाएगी लेकिन अगर वोट एक बार बिक गया तो देश और सूबे की इज्जत चली जाएगी।’ ममता बनर्जी की टीएमसी के चिरंजीत चक्रवर्ती ने एक बार कहा था, ‘रेप के लिए कुछ हद तक लड़कियाँ भी जिम्मेदार हैं। उनकी स्कर्ट दिन पर दिन छोटी होती जा रही है।

यानी, आप राजनीति के जिस खाने में नजर दौड़ाएँगे ऐसे लोग आपको बेशर्म ठहाके लगाते मिल जाएँगे जिनके लिए महिला होना भोग की वस्तु जैसा होना है।। बच्चे पैदा करने की मशीन होना। जैसे उनके अपने कोई सपने न हो। सेक्स से इतर उनका कोई अस्तित्व न हो। वे सामथ्र्यहीन हों। उनकी पहचान मानव योनि से न होकर केवल योनि मात्र से हो।

जब बड़े राजनेता कहते हैं कि लड़कियों की इज्जत देश की इज्जत से बड़ी नहीं होती और रेप का कारण उनकी छोटी स्कर्ट होती है। तो इस बात में कोई हैरानी नहीं है कि आखिर हमारे यहाँ हर 15-16 मिनट पर एक लड़की का रेप होने वाले आँकड़े क्यों मौजूद हैं। क्यों दिन पर दिन रेप की घटनाएँ बढ़ती जा रही है और क्यों इन अपराधी मानसिकता से निपटने की जगह लड़कियों को घर में बैठने को कहा जा रहा है।

देश के नेताजी द्वारा जो हाल में जो सुझाव दिया गया है…. क्या इसके अर्थ जानते हैं आप? शायद नहीं… इसलिए इन बातों को बर्दाश्त करने की क्षमता आपमें हो सकती है। मगर एक लड़की में नहीं। लड़की को सहमति से किया गया सेक्स और रेप में फर्क जाहिर होता है। इसलिए उसमें इतनी हिम्मत नहीं होती कि कोई भी पुरुष उसे चंद सेकेंड की हवस मिटाने के लिए उठाए और वो भी किसी बुरे परिणाम से खुद को सुरक्षित रखने के लिए एक सपाट जगह पर जाकर लेट जाए और हरी झंडी देकर बलात्कारी को न्योता दे।

ऐसी किसी भी घटना के समय में लड़की की मनोस्थिति उस पर हावी होती है जो उससे विरोध करवाती है। जो ये नहीं मान पाती कि आखिर उसके शरीर को कोई पुरूष कैसे जबरदस्ती हाथ लगा सकता है। उसे डर भी होता है कि कहीं उसे उठाने के बाद उसके साथ निर्भया जैसी बर्बरता न हो, गुनाह छिपाने के लिए उसे प्रिया जैसे जलाया न जाए।

किसी के लिए यदि रेप सिर्फ अगर सेक्स है तो ये मानसिकता उसको नीच दर्जे का इंसान बनाती हैं। सेक्स का सरोकार आपसी सहमति से होता है। जबकि, रेप का मतलब है महिला की इच्छा के विरुद्ध उसके साथ संबंध बनाना और पीड़ा देना। छोटी बच्ची के साथ या 2 साल की मासूम और 6 माह की नवजात के सथा ‘सेक्स’ किसी परिस्थिति में नहीं होता , जो घटनाएँ आप पढ़ते हैं वो रेप की श्रेणी में आती हैं।

अगर आज आप रेप आरोपितों को सजा देने से ज्यादा लड़कियों को ये सिखा रहे हैं कि उन्हें ऐसी विकट स्थिति को कैसे इंजॉय करना है तो गलती फिर अपराधियों की कम मानी जाएगी और उस जनमानस की ज्यादा मानी जाएगी जिन्होंने ऐसी सोच वाले व्यक्तियों को जनप्रतिनिधि बनने का मौका दिया और इस लायक बनाया कि वो एक बड़े तबके बीच अपने घृणित विचारों की उलटी कर सकें और अपराधियों के पनपने को जायज बता सकें।

आप जानते हैं हाल में सामने आई NCRB की रिपोर्ट क्या बताती है। इस रिपोर्ट का कहना है कि सिर्फ 2020 में औसतन 77 रेप के मामले प्रतिदिन आए थे और साल भर में महिलाओं के विरुद्ध किए गए अपराध के मामले 3 लाख से ज्यादा थे। केवल पति और रिश्तेदारों की क्रूरता सहने वाली महिलाओं की लिस्ट 1 लाख 11 हजार पार थी और 62 हजार किडनैपिंग के मामले आए थे। 105 केस एसिड अटैक के हुए थे और 6,966 मौतें दहेज के कारण हुई थी।

है न कितनी हैरानी वाली बात? एक देश जहाँ की राजनीति में लगातार महिलाओं की सुरक्षा की बातें हैं, उन्हें आगे बढ़ाने प्रोत्साहित करने का जिक्र है, वहाँ ऐसे आँकड़े!! हैरान मत होइए…क्योंकि ये सिर्फ 2020 की बात नहीं है। 2020 से पूर्व भी ऐसी घटनाओं ने देश को शर्मिंदा किया था और 2021 में भी ये सिलसिला जारी रहा। हाँ! आँकड़े किसी साल ऊपर नीचे होते रहते हैं। मगर, ये कहना कि महिलाओं की स्थिति सुधरी या फिर वो सुरक्षित हुई केवल बेवकूफी है। वो भी उस समय जब आपने ऐसे लोगों को सहने की क्षमता अपने अंदर बना ली हो जो बताएँ कि रेप को एंजॉय किया जाता है और उसका विरोध करना कितना गलत है।

इस मानसिकता के दुष्परिणाम कितने गहरे होते हैं इसका अंदाजा आप एक कॉन्ग्रेस सांसद हिबी ईडन की बीवी के बयान से लगा सकते हैं जिन्होंने एक महिला होने के बाद किस्मत को रेप से जोड़ दिया था और कहा था कि किस्मत रेप जैसी होती है आप इसे रोक नहीं सकते, तो इसे इंजॉय करने की कोशिश कीजिए… आज तमाम माननीयों की सोच भले ही ये साबित करे कि लड़कियों की जिंदगी केवल कमर के नीेचे और घुटनों से ऊपर तक होती है। लेकिन लड़कियों के सपने, उनकी उड़ान, उनका विरोध, इस बात को कभी सिद्ध नहीं होने देगा कि इस घटिया सोच में रत्ती भर सच्चाई है!

निर्भया केस इसका सबसे बड़ा सबूत है। जिसके अपराधियों ने खुद बताया था कि कैसे उन्होंने पीड़िता के साथ अमानवीयता की क्योंकि वह आत्मसमर्पण नहीं कर रही थी। अगर वह ऐसा करती तो शायद वो लोग इतनी क्रूरता नहीं करते। आप सोचिए, क्या ये विचार निर्भया के जहन में नहीं आया होगा जब उसने रॉड उठाते उस हैवान को देखा होगा। क्या उसे नहीं पता चला होगा कि उसका आत्मसमर्पण उसे बर्बरता से बचा सकता है। उसने ऐसा नहीं किया या वो नहीं कर पाई क्योंकि उसकी मनोस्थिति उसे या किसी पीड़िता को इतना तार्किक होने की इजाजत नहीं देती कि वो ऐसी परिस्थिति में राजनेताओं की तरह सोच पाए।

‘VHP नेता की हत्या में SHO आलम शामिल’: परिजनों ने राँची में SP से की शिकायत, कहा- हथियार तस्करों द्वारा श्मशान भूमि कब्जाने का मुकेश ने किया था विरोध

झारखंड की राजधानी राँची में विश्व हिन्दू परिषद (VHP) के नेता मुकेश सोनी की हत्या के मामले में मृतक के परिजनों ने खलारी थाने के SHO फरीद आलम को भी मुख्य साजिशकर्ता बताते हुए पुलिस अधीक्षक को शिकायत दी है। शिकायत पत्र में यूनुस अंसारी और प्रिंस खान नाम के दो अन्य लोगों को भी आरोपित बनाया गया है। घटना की वजह लगभग सवा साल पहले श्मशान की भूमि पर किए गए अवैध कब्ज़े का मुकेश द्वारा विरोध करना बताया जा रहा है। इस प्रार्थना पत्र को पुलिस अधीक्षक देहात नौशाद आलम ने 16 दिसम्बर (गुरुवार) को रिसीव किया है।

शिकायती प्रार्थना पत्र में मुकेश के पिता ने लिखा है, “मुझे शक है कि मेरे बेटे की हत्या थाना प्रभारी खेलारी फरीद आलम के इशारे पर हुई है। लगभग सवा साल पहले 4 सितम्बर 2020 को खलारी के ही रहने वाले यूनुस अंसारी और प्रिंस खान द्वारा महावीर नगर के श्मशान घाट पर अवैध रूप से कब्ज़ा करके घर बनवाया जा रहा था। यह घर आरोपितों के अवैध कार्यों को अंजाम देने में काम आता। इसका विरोध मेरे बेटे मुकेश ने किया था। तब यूनुस और प्रिंस खान ने मुकेश को अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी थी।”

शिकायत पत्र

प्रार्थना पत्र में आगे लिखा गया है, “मेरे बेटे को लगातार धमकियाँ दी जा रही थीं। ये सब कुछ थाना प्रभारी फरीद आलम की जानकारी में था। आरोपित प्रिंस खान और यूनुस अंसारी अवैध हथियारों का कारोबार भी करते हैं। उनके इस काम को भी थाना प्रभारी फरीद आलम का संरक्षण प्राप्त है।” प्रार्थना पत्र में दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की गई है। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, पुलिस अधीक्षक देहात नौशाद आलम द्वारा थाना प्रभारी फ़रीद आलम पर कार्रवाई का केवल मौखिक आश्वासन दिया गया है।

मुकेश सोनी की शव यात्रा

उधर मुकेश सोनी का अंतिम संस्कार शुक्रवार (17 दिसंबर) को दिया गया। अंतिम संस्कार में भारी भीड़ जमा हुई थी। शव यात्रा सुबह 11 बजे उनके घर से उसी महावीर नगर के श्मशान घाट के लिए निकली, जिस पर अवैध कब्ज़े का उन्होंने विरोध किया था। इस अवसर पर हिन्दू संगठनों के तमाम पदाधिकारी मौजूद थे।

ऑपइंडिया ने इस संबंध में मृतक मुकेश के भाई सागर सोनी से बात की। सागर ने बताया, “ऐसी जानकारी मिली है कि खलारी थाना प्रभारी फरीद आलम पर करवाई की प्रक्रिया चल रही है। विधायक और हिन्दू संगठनों द्वारा हमारे परिवार के लिए रखी गई माँगों में से अभी कोई भी माँग पूरी नहीं हुई है। स्थानीय पुलिस की जाँच निष्पक्ष होगी, ये नहीं लगता हमें। हमारे घर सिर्फ भाजपा के विधायक और हिन्दू संगठन के नेता ही आए हैं। सत्ता पक्ष का कोई भी नेता या मंत्री हमसे मिलने नहीं आया। उनमें से किसी का फोन भी अभी तक नहीं आया है।”

SHO फरीद आलम