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विक्की कौशल-कैटरीना की शादी में खाने का भी पंगा, मैक्सिकन चखा तो पंजाबी स्टॉल पर एंट्री नहीं: एग्रीमेंट-गेस्ट-मेन्यू की ‘रील लिस्ट’

कैटरीना कैफ (Katrina Kaif) की शादी फाइनली हो रही है। फाइनली इसलिए कि अब तक कई बार पहले सेमी फाइनल हो चुका था। पर मामला किसी अदालती बेंच के रिजर्व फैसले टाइप होकर रह जाता और सेमी फाइनल में तब के वर-वधू के साथ उनके फैंस को मन मारकर रह जाना पड़ा था। खैर, एक से अधिक सेमी फाइनल के बाद फाइनल का मुहूर्त बना, जिसमें कैटरीना के साथ इस बार विक्की कौशल (Vicky Kaushal) हैं।

वैसे दोनों की शादी (Katrina Vicky Wedding) से भी बड़ी खबर यह है कि दोनों अपनी शादी में आने वाले मेहमानों से एक एग्रीमेंट साइन करवा रहे हैं। जैसे कह रहे हों- आना है तो पहले एग्रीमेंट साइन करना होगा। कल हमारा वकील दस बजे एग्रीमेंट लेकर पहुँचेगा और सारे क्लॉज़ पढ़कर सुनाएगा। मँजूर है तो साइन करो, फिर हम कार्ड भेजेंगे।

माने शादी के निमंत्रण की शुरुआत कार्ड की लिखा-पढ़ी से नहीं, बल्कि स्टाम्प पेपर की लिखा-पढ़ी से हो रही है। जैसे शादी की वारदात को अंजाम देने वाले दोनों लोग बिना कुछ बोले बता रहे हो- एग्रीमेंट के क्लॉज़ नंबर वन को ही ‘वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ…’ मान लिया जाए। मानो कह रहे हों- भेज रहा हूँ एग्रीमेंट तुमसे साइन करवाने को, हे मानस के राजहंस साइन कर देना, आने को। जैसे एग्रीमेंट के अंत में वर के ढाई वर्षीय भतीजे का मैसेज छपा हो- मेले चाचू की छादी में आना ताहते हो तो ये एग्लीमेंट जुलूल छाइन कल देना!

एक जमाना था जब फिल्मी लोगों के भी वैवाहिक जीवन में वकील और अदालत की भूमिका तलाक के समय आती थी। अब जमाना बदल गया है। अब वकील और अदालत की भूमिका छादी से… सॉरी शादी से पहले ही शुरू हो जाती है। दो बॉलीवुडियों की बात है, ऐसे में अगर शादी को फिल्म मान लिया जाए तो कह सकते हैं कि पहले सीन में वर-वधू की नहीं, बल्कि वकील और स्टाम्प पेपर की एंट्री होती है। वर-वधू अपनी ही शादी में साइड रोल कर रहे हैं और लीडिंग रोल में वकील और स्टाम्प पेपर पर एग्रीमेंट है। गेस्ट रोल में वे हैं जो एग्रीमेंट साइन करने के बाद शादी अटेंड कर पा रहे हैं।

कल बिरेंदर कहीं से यह खबर सुने और मुझसे बोले- आ गेस्ट सब से एग्रीमेंट साइन करवा रहा है लोग! सोचिए! मने जो साइन किया उहे आ सकेगा। बताइए, शादी है कि यूनाइटेड नेशन का बैठक! फिर कुछ सोचते हुए बोले- बाकी भइया, ऐगो बात बताइए, का होगा एग्रीमेंटवा में? खरचा-बरचा कम करने खातिर कलाज सब डाला है का लोग? मने का चाहता गेस्ट से? कहीं ई त नै कहेगा कि कलाज चार के ऐकोर्डिंग कोई भी गेस्ट चार कचौड़ी आ दू गो रसगुल्ला से बेसी नै खा सकेगा? या फिर ई त नै कहेगा कि खाली एक्के तरह के फ़ूड काउंटर पर खा सकेंगे। जइसे जदि मेक्सिकन खाएँगे त फिर पंजाबी इस्टाल पर नै जा सकेंगे बा चाइनीज खाएंगे त फिर फुचका नै मिलेगा? नहीं, मतलब चाहता क्या है ई लोग? 
 
शादी समारोह की बात पर बिरेंदर के कल्पना भोजन के स्टॉल और नागिन डांस से आगे नहीं जाती। चूँकि यहाँ बात बॉलीवुड (Bollywood) में शादी की हो रही थी शायद इसलिए उसने अपनी कल्पना की उड़ान को केवल भोजन तक सीमित रखा। मन में यह सोचते हुए कि ई लोग त खुदै एतना बड़ा-बड़ा डांसर है। नागिन डांस त नहिये करेगा लोग, आ ऊ भी तब जब संगीत से लेकर बरात तक में डांस डायरेक्शन खातिर खुद करन जौहरे अभेलेबल रहेंगे। 

बिरेंदर के कल्पना की उड़ान की सीमा है इसलिए उसकी चिंताएँ छोटी हैं। पर इस खबर की माने तो विकी कौशल और कटरीना बड़े लोग हैं इसलिए उनकी चिंताएँ भी बड़ी हैं। वे अपने मेहमानों से नॉन डिस्क्लोजर एग्रीमेंट साइन करवाए बिना उन्हें अपनी शादी में घुसने नहीं देंगे। इस खबर के अनुसार वे यह चाहते हैं कि जो भी गेस्ट शादी में आएँ वे अपना फोन लेकर घटनास्थल पर न पहुँचे।

बताइए, ऐसा पॉसिबल है? फोन कोई बेटा-बेटी है कि उसे घर पर मेड के पास छोड़कर कोई शादी में आ जाए? इनकी सबसे बड़ी चिंता है कि आनेवाले गेस्ट ने अपने फोन से इनकी फोटो ले ली तो क्या होगा? जैसे कह रहे हों- आजतक हमें किसी ने देखा नहीं है। इसलिए हम यह चाहते हैं कि पहली बार पूरे विश्व के लिए जिस फोटो में हम दिखाई दें वह फोटो हमारे अपने फोन से ली गई हो, किसी और के फ़ोन से नहीं। 

इस खबर को छापने वालों ने शादी की जगह के बारे में सब कुछ बता दिया है, पर इसी के अनुसार- वर-वधू यह चाहते हैं कि नॉन डिस्क्लोजर एग्रीमेंट में क्लॉज़ रहे कि गेस्ट शादी की जगह के बारे में किसी को नहीं बताएगा। एक अन्य क्लॉज़ के अनुसार अगर कोई गेस्ट शादी की जगह में घुस गया तो फिर उसका ‘आउटसाइड वर्ल्ड’ से तब तक कोई संपर्क नहीं हो सकता जब तक वह स्थल से निकल नहीं जाए।

बताइए, यह शादी स्थल है या बिग बॉस हाउस? कोई उसी समय यदि गेस्ट को कॉल करके बताना चाहे कि आपने जो ‘दवा’ मँगाई थी वह आ गई है तो वो कैसे कांटेक्ट करेगा? वैसे यह क्लॉज़ पढ़कर मन में आया कि इसे पक्का ‘भाई’ ने सजेस्ट किया होगा। वे यह साबित करना चाहते होंगे कि डेढ़ दशक तक बिग बॉस का होस्ट बनने का कुछ फायदा हुआ है। 

शादी और तलाक ऐसी घटनाएँ हैं जो बॉलीवुड के भूले-बिसरे लोगों को न्यूज़ के बाजार में ला खड़ी करती हैं। किसी का तलाक़ हो गया तो अक्सर न्यूज़ पढ़ने को मिलती है कि इनके फलाने दोस्त ने दोनों के बीच समझौता कराने की कोशिश की पर दोनों नहीं माने। खबर जिस फलाने दोस्त की बात कर रही होती है उसका नाम पूरे एक दशक से लोग भूल चुके होते हैं पर न्यूज़ में नाम पढ़कर मन ही मन सोचते हैं; अरे! ये तलाक़ लेने वालों का दोस्त था? बताओ, हमें तो पता ही नहीं था।

मीडिया इस शादी में आने वालों के नाम भी छाप रहा है। मीडिया का काम ही छापना, फिर चाहे पैसा हो या नाम। इनमें कुछ भूले-बिसरे गीत टाइप नाम हैं, जिन्हें पढ़कर लोग दाँतों तले ऊँगली दबा ले रहे हैं, यह सोचते हुए कि ये तो बड़ा इम्पोर्टेन्ट आदमी निकला। हम तो इसे भुला चुके थे लेकिन वर-वधू को ये अभी तक याद है। 

बॉलीवुडिया शादी मीडिया के लिए व्यस्तता लेकर आती है। कुछ मीडिया वाले बिजी हो लिए हैं। कृषि कानूनों के वापस लिए जाने की वजह से निराश थे। इस शादी ने नया मक़सद दे दिया है। सूत्रों के अनुसार; Vickat (जी हाँ, सैफीना की तरह ही Vickat नामकरण हो चुका है) हनीमून के लिए फलाने जगह जाएँगे। सूत्रों के अनुसार गेस्ट की लिस्ट ये है। एक खबर के अनुसार कियारा आडवाणी को निमंत्रण नहीं मिला है। ये खबर पढ़कर करोड़ों लोग यह सोच सकते हैं कि चलो कियारा आडवाणी और मुझमें कुछ तो कॉमन है। न तो कियारा को शादी का निमंत्रण मिला और न ही मुझे। 

देखा जाए तो शादी को लेकर मीडिया वालों की व्यस्तता ‘शोभा बरन न जाई’ वाले जोन में पहुँच गई है। सुबह अखबारों के संवाददाता और एडिटर के बीच की बातचीत कुछ ऐसी हो रही है;

सर, दो घंटे हो गए, विक्की-कैटरीना की शादी पर कोई न्यूज़ नहीं गई है।

कुछ लगा दें?

नया क्या लिखेंगे?

सर, सोच रहे हैं ये हेडलाइन लगाकर एक न्यूज़ बना दें कि शादी की व्यस्तता के बावजूद कोरोना के नए वैरिएंट को लेकर चिंतित हैं विक्की और कैटरीना”

ठीक है, करके लगा दो

एक खबर के अनुसार शादी स्थल के ऊपर कोई ड्रोन उड़ेगा तो उसे मार गिराया जाएगा। शादी स्थल है या एयर फ़ोर्स का नॉर्दन कमांड? कोई भी ड्रोन दो सौ मीटर के दायरे में आए तो मार गिराओ। ये ऑर्डर ऊपर से आने वाले के लिए हैं। नीचे सड़क के रास्ते एंट्री की कोशिश करने वालों के खिलाफ भी कोई प्लान होगा।

मीडिया ढाई गज की न्यूज बनाकर सबसे नीचे लिख कर फारिग हो ले रहा है कि हालाँकि न तो विक्की कौशल ने और न ही कैटरीना से इन बातों की पुष्टि की है। बॉलीवुड के हीरो हीरोइन के फैंस इतने हैं कि केवल वे काफी हैं वेबसाइट को ट्रैफिक देने के लिए। ऐसे में शादी में घटनास्थल पर चाहे जो हो, शादी के दिन तक न्यूजपेपर के वेबसाइट पर यही होना है। आखिर विक्की कौशल और कैटरीना को अपनी शादी के बारे में तमाम जानकारियाँ कहाँ से मिलेंगी?

मामूली विवाद में श्याम राठौड़ को जान से मार डाला: शेख सादिक, सैयद हफीज और सिराजुद्दीन गिरफ्तार, महाराष्ट्र की घटना

महाराष्ट्र के यवतमाल के काली दौलतखान में शुक्रवार (3 दिसंबर 2021) को दिनदहाड़े पाँच लोगों ने 22 वर्षीय श्याम शेषराव राठौड़ की बेरहमी से हत्या कर दी थी। जानकारी के अनुसार, श्याम काली दौलतखान के बस स्टैंड एरिया में बाइक से जा रहा था, तभी आरोपितों ने उसे बीच सड़क पर रोका और उस पर चाकू और तलवार से हमला कर दिया। इससे श्याम की आंत फट गई और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

पुलिस ने श्याम की हत्या के मामले में 42 वर्षीय शेख सादिक उर्फ सदर मंसूर अली, 28 वर्षीय सैयद कलीम उर्फ सैयद हफीज, 20 वर्षीय मनु उर्फ सिराजुद्दीन, सबीरोद्दीन, वहबुद्दीन, मुकीमोद्दीन और रफीकुद्दीन को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके पास से हत्या में इस्तेमाल की गई तलवार और चाकू भी बरामद किया है। उन्हें 10 दिसंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। इस मामले में अभी और आरोपितों की गिरफ्तारी हो सकती है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपितों ने मामूली बात को लेकर हुए विवाद में राठौड़ की हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि श्याम की बाइक ने उनमें से एक आरोपित को टक्कर मार दी थी, जिसके बाद दोनों में कहासुनी हो गई। इसके बाद आरोपित ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर श्याम पर तलवारों और चाकू से हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। श्याम की मौत के बाद से यानी शुक्रवार दोपहर से उसके गाँव में तनाव का माहौल है।

शनिवार (4 दिसंबर 2021) को श्याम का शव उसके घर पहुँचा। बेटे की हत्या से परिजन काफी आक्रोशित थे, उन्होंने फैसला किया जब तक श्याम के हत्यारों को गिरफ्तार नहीं कर लिया जाता, तब तक वह उसका अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। बाद में श्याम के भाई लक्ष्मण राठौड़ की शिकायत पर पुलिस ने चार आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया, जिसके बाद परिजनों ने दाह संस्कार किया। इस घटना में लक्ष्मण भी घायल हो गया था।

श्याम की मौत के बाद से इलाके में तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी। कुछ ग्रामीणों ने बस स्टैंड क्षेत्र में भी आग लगा दी। दोनों समुदायों में दंगे की आशंका के चलते शुक्रवार की रात को आसपास के इलाकों में भी कर्फ्यू लगा दिया गया था। मौके पर पहुँचे जिला पुलिस अधीक्षक डॉ दिलीप पाटिल भुजबल ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।

बता दें कि काली दौलतखान पहले से ही एक संवेदनशील इलाका माना जाता है। श्याम के पिता की पहले ही मौत हो चुकी थी और परिवार की जिम्मेदारी उस पर थी। वह पुलिस में भर्ती होने और अन्य नौकरियों के लिए प्रयास कर रहा था।

मुंबई की लड़की से मिलने सीमा पार कर के आ रहा था Pak का मोहम्मद अहमर, सोशल मीडिया से बनाया ‘गर्लफ्रेंड’: BSF ने पकड़ा

पाकिस्तान से तारों के नीचे से सीमा पारकर भारत में घुसे एक पाकिस्तानी व्यक्ति को राजस्थान में बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) ने गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में आरोपित ने बताया है कि सोशल मीडिया के जरिए उसे मुंबई की एक लड़की से प्यार हो गया। उससे मिलने के लिए उसने भारत का वीजा लेने की कोशिश की, लेकिन जब वीजा नहीं मिला तो वह अवैध तरीके से भारत में घुस आया।

रिपोर्ट के मुताबिक, मोहम्मद अहमर (22) नाम के पाकिस्तानी व्यक्ति ने राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में अनूपगढ़ इलाके में पाकिस्तान की सीमा से लगती बीएसएफ की शेरपुरा और कैलाश पोस्ट के बीच तारों के नीचे से घुसपैठ कर जीरो लाइन को क्रॉस करने की कोशिश की। इसी कोशिश में वो जैसे ही आगे बढ़ा तो तार से टच होते ही अलार्म बज उठा। इसके बाद बीएसएफ के जवानों ने उसे पकड़ लिया।

इंटेरोगेशन के दौरान पाकिस्तान के बहावल के रहने वाले मोहम्मद अहमर ने बीएसएफ के अधिकारियों को बताया कि वो सोशल मीडिया के जरिए मुंबई की रहने वाली एक लड़की से मिला था। धीरे-धीरे दोनों की दोस्ती हुई औऱ समय बीतने के साथ दोनों की ये दोस्ती प्यार में बदल गई। उसने कहा कि वो अपनी ‘गर्लफ्रेंड’ से मिलने के लिए मुंबई जाने के लिए निकला है।

उसने अधिकारियों को ये भी बताया कि दोनों ने शादी करने का फैसला किया था। इस मामले को लेकर श्रीगंगानगर के एसपी आनंद शर्मा का कहना है कि बीएसएफ ने अपनी पूछताछ पूरी कर ली है और अब मोहम्मद अहमर को पुलिस को सौंप दिया गया है। अब पुलिस भी उससे पूछताछ करेगी। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, अगर वह सही रहा तो उसे वापस भेजने की कार्यवाही की जाएगी।

पिछले महीने भी हुई थी ऐसी ही घटना

पिछले महीने पाकिस्तान का ही अलाद्दीन (30) नाम का व्यक्ति बॉर्डर क्रॉस कर भारत में घुस आय़ा था। बाद में बीएसएफ ने उसे रालवा पुलिस स्टेशन इलाके में गिरफ्तार कर लिया था। इन दोनों मामलों में समानता ये है कि दोनों ही बहावलपुर के रहने वाले हैं।

निकाय चुनाव में ओबीसी को 27% आरक्षण देने के उद्धव सरकार के फैसले पर सुप्रीम रोक, कोर्ट बताया- नियमों के खिलाफ

महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार ने निकाय चुनावों को ध्यान में रखते हुए राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 फीसदी आरक्षण देने का ऐलान किया था। लेकिन राज्य सरकार के मंसूबों पर पानी फेरते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने इस फैसले पर अपने अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दिया है। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि ओबीसी कोटे के लिए आयोग का गठन और अपर्याप्त प्रतिनिधित्व का डाटा कलेक्ट किए बिना आरक्षण नहीं दिया जा सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले की सुनवाई जस्टिस एएम खानविलकर की अगुवाई वाली बेंच ने किया। इस बेंच में जस्टिस सीटी रविकुमार भी शामिल रहे। बेंच ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि राज्य चुनाव आयोग को ओबीसी रिजर्वेशन के मामले में पहले से अधिसूचित चुनाव कार्यक्रम के साथ आगे बढ़ने की इजाजत नहीं मिल सकती। कोर्ट के मुताबिक, जब तक राज्य सरकार ट्रिपल टेस्ट नहीं करती है, अध्यादेश लाने के फैसले को स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

दरअसल, महाराष्ट्र सरकार ने अध्यादेश लाकर निकाय चुनावों में ओबीसी कोटे को 27 फीसदी आरक्षण देने का ऐलान किया था। लेकिन राज्य सरकार के इस फैसले को याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने अधिसूचना को चुनौती दी थी। जबकि राज्य सरकार की ओर से सीनियर एडवोकेट शेखर नफड़े ने दलीलें दी।

क्या है ट्रिपल टेस्ट

  1. राज्य में स्थानीय निकायों के पिछड़ेपन की प्रकृति और निहितार्थ की सख्त प्रयोगसिद्धि की जाँच के लिए कमीशन का गठन किया जाता है।
  2. आयोग की सिफारिश पर ही निकाय वार आरक्षण के अनुपात निर्दिष्ट किया जाता है। ताकि स्थित साफ हो सके।
  3. इसके अलावा किसी भी सूरत में एससी/ एसटी और ओबीसी को दिया गया आरक्षण 50 फीसदी से अधिक न हो।

क्या है महाराष्ट्र सरकार का मामला

महाराष्ट्र सरकार इसी साल मार्च के महीने में एक अध्यादेश लेकर आई, जिसे नियम विरुद्ध बताकर सर्वोच्च न्यायालय ने उस पर रोक लगी दिया था। इसके बाद उद्धव सरकार ने अपने फैसले को लागू करने के लिए अध्यादेश का सहारा लिया। (अध्यादेश अस्थाई कानून होता है)। हालाँकि कोर्ट ने उस पर भी रोक लगा दिया है।

‘वसीम रिजवी जहाँ भी दिखे, गला काट कर लाओ, 50 लाख रुपए दूँगा’: कॉन्ग्रेस नेता का ऐलान – मर्डर करने वाले का केस भी लड़ूँगा

हैदराबाद के कॉन्ग्रेस नेता मोहम्मद फिरोज खान ने ‘शिया सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड’ के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी (अब जितेंद्र नारायण स्वामी) के सिर पर 50 लाख रुपए का इनाम रखा है। ये वीडियो 10 दिन पुराना है, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बता दें कि वसीम रिजवी ने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के डासना स्थित शिव-शक्ति धाम में महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के मार्गनिर्देशन में न सिर्फ हिन्दू धर्म अपना लिया, बल्कि जीते-जी अपना अंतिम संस्कार की प्रक्रिया भी पूरी कर ली।

बता दें कि मोहम्मद फिरोज खान हैदराबाद से कौन्ग्रे के टिकट पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ लोकसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं। जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, उसमें वो ऐलान करते दिख रहे हैं कि जो भी सैयद वसीम रिजवी का सिर कलम करेगा, उसे 50 लाख रुपए का इनाम दिया जाएगा। इस वीडियो को सबसे पहले 25 नवंबर, 2021 को ‘Voiceup Media’ नामक यूट्यूब चैनल ने शेयर किया था। इस वीडियो में मोहम्मद फिरोज खान वसीम रिजवी को लेकर अभद्र और गाली वाली भाषा का भी इस्तेमाल कर रहे हैं।

वीडियो में कॉन्ग्रेस नेता कहते हैं, “वसीम रिजवी, 4 महीने से सुन रहा हूँ तेरे को मैं। बर्दाश्त जो है ना, तू ख़त्म कर देगा। ये जहाँ भी दिखे, इसकी हत्या कर दो और इसका गला लेकर मेरे पास आ जाओ। 50 लाख रुपए मेरे से ले लेना। सेशन कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक, इसका मर्डर करने वाले के लिए हर जगह वकील मैं रखूँगा। साथ खड़ा रहूँगा। ऐसे ‘ह%म के %ल्ले’ को और ‘सू&र की औलाद’ को जीने का कोई हक़ नहीं है। जो भी मेरे को सुन रहे, मैं अल्लाह की कसम खा रहा कि मैं तेरा साथ दूँगा।”

हालाँकि, ये पहली बार नहीं है जब वसीम रिजवी का नाम लेकर इस तरह का ऐलान किया गया हो। मार्च 2021 में उनका सिर काट कर लाने पर मुरादाबाद बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता अमीरुल हसन जाफरी ने 11 लाख रुपए के इनाम की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि घोषित इनाम की व्यवस्था वह अपने पास से और बार एसोसिएशन के लोगों के माध्यम से एकत्र करेंगे और अगर इसके बाद भी रकम कम पड़ जाती है तो वो अपनी औलाद को बेच देंगे, लेकिन ‘कुरान से छेड़छाड़ करने वाले’ वसीम रिजवी का सिर क़लम करने वाले को पूरा इनाम देकर रहेंगे।

बताते चलें कि

उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष ‘वसीम रिजवी’ ने आज (6 दिसंबर 2021) डासना देवी मंदिर में हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया। अब उनका नाम जितेंद्र नारायण स्वामी/ त्यागी किया गया है। इस धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया के दौरान मंदिर में हवन पूजा और अनुष्ठान हुए और ‘रिजवी’ से जलाभिषेक करवाया गया। मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद ने बताया कि उन्होंने वसीम को त्यागी उपजाति इसलिए दी क्योंकि वह बताना चाहते हैं कि हिंदू धर्म में जाति व्यवस्था कमजोरी नहीं है। वहीं ‘रिजवी’ ने कहा, “मैं अब यति का सिपाही हूँ, सनातन के दुश्मनों से मिल कर लड़ेंगे।”

‘जिस गाड़ी में सपा का झंडा, समझो उसके अंदर बैठा जाना-पहचाना गुंडा’: सीएम योगी ने सपा पर साधा निशाना

उत्तर प्रदेश के सगड़ी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाबा साहेब आंबेडकर को उनके 64वें परिनिर्वाण दिवस पर याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने सगड़ी, आजमगढ़ में 76.14 करोड़ रुपए लागत की 32 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण कर लाभार्थियों को योजनाओं के प्रमाण-पत्र बाँटे। उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि बाबा साहेब ने संविधान में जो व्यवस्था दी, उससे देश उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक एकता के सूत्र में बंधा हुआ है।

सीएम योगी ने इस मौके पर समाजवादी पार्टी, कॉन्ग्रेस और बसपा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने सपा सरकार में रामपुर में गरीबों पर हुए अत्याचार को याद दिलाते हुए कॉन्ग्रेस व बसपा पर चुप्पी साधे रहने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने कहा, ”सपा सरकार में, रामपुर में दलितों को प्रताड़ित किया जा रहा था और उन्हें उजाड़ा जा रहा था, तब कॉन्ग्रेस मौन थी। बसपा भी मौन थी। उन दलितों के लिए केवल भारतीय जनता पार्टी आंदोलन कर रही थी। हमें अत्याचार स्वीकार्य नहीं है।” सपा पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा, “जिस गाड़ी में सपा का झंडा उसमें होगा जाना-पहचाना गुंडा।”

पिछली सरकारों ने गरीबों व दलितों की जमीनों एवं व्यापारियों के प्रतिष्ठानों पर कब्जा करके जिस प्रकार की अराजकता पैदा की थी, वह किसी से छुपी नहीं है। वर्ष 2017 के बाद हमारी सरकार ने गुंडागर्दी की कमर तोड़ने का कार्य किया है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोरोना काल में जब भाजपा के सांसद व विधायक जनसेवा कर रहे थे, तब आजमगढ़ के सांसद नदारद थे। पता किया तो पता चला कि इंग्लैंड गए हैं। दूसरी बार पता किया तो मालूम हुआ कि ऑस्ट्रेलिया गए हैं। जनता ने ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जाने के लिए तो उन्हें नहीं चुना था।

बता दें कि देश व प्रदेश की एकता अखंडता सीएम के संबोधन का हिस्सा रहा। उन्होंने जय श्रीराम के नारे के साथ अपना संबोधन समाप्त किया।

‘ये झूठा केजरीवाल ट्रिपल मारता-झुर्रियाँ मारता है… पंजाब में ये लॉलीपॉप काम नहीं करेगा’: सिद्धू का चुनावी बाउंसर

पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनावों से सियासी सरगर्मियाँ तेज हो गई हैं। इसी क्रम में पंजाब कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए उन्हें बिजली फ्री करने के मामले में झूठा करार दिया। साथ ही कहा कि पंजाब में ऐसा नहीं चलने वाला है। सिद्धू के मुताबिक, केजरीवाल अमीरों से टैक्स लेकर उसका थोड़ा सा हिस्सा गरीबों की झोपड़ी में दे देते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, नवजोत सिंह सिद्धू का वीडियो वायरल हुआ है। इसमें कहते हैं, “ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए कि में घरों में 24 घंटे लगातार बिजली दे सकें। ये झूठा केजरीवाल! ये ट्रिपल मारता-छुर्रियाँ मारता है। दिल्ली में बिजली का रेट 12 रुपए प्रति यूनिट है। लेकिन हम 9 रुपए के हिसाब से दे रहे हैं। ये करते क्या हैं? ये अमीरों पर टैक्स लगाते हैं और उसी पैसे से झुग्गी झोपड़ियों में फ्री बिजली दे देते हैं। ये लॉलीपॉप कब तक दोगे? ये पंजाब में नहीं चलने वाला।”

सिद्धू यहीं नहीं रुके उन्होंने दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित की तारीफ करते हुए कहा, “ये समृद्ध राज में अगर किसी ने कुछ दिया है तो वो शीला दीक्षित ने दिया था और वो भी शीला दीक्षित ने दिया था।” कॉन्ग्रेस नेता ने यह बयान अमृतसर में सोमवार (6 दिसंबर 2021) को दिया। इससे पहले रविवार (5 दिसंबर 2021) को गेस्ट शिक्षकों के साथ नवजोत सिंह सिद्धू ने दिल्ली में केजरीवाल के घर के बाहर धरना प्रदर्शन किया था। उन्होंने दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था पर तंज कसते हुए उसे ऊँची दुकान फीका पकवान बताया था। उन्होंने पूछा कि 2015 में केजरीवाल ने 8 लाख नौकरियाँ देने का वादा किया था, लेकिन केवल 440 नौकरियाँ दी।

गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की तर्ज पर पंजाब के लोगों को भी फ्री बिजली मुहैया कराने का ऐलान किया है। केजरीवाल ने पंजाब के हर घर में 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का वादा किया था।

21 दिसंबर से धर्मांतरण के खिलाफ VHP का ‘धर्मयुद्ध’: भारत में बन रहे ‘मिनी Pak’ और ‘मिनी वेटिकन’ पर शिकंजा, हो रहा सर्वे

‘विश्व हिन्दू परिषद (VHP)’ ने धर्मांतरण के खिलाफ देशव्यापी युद्ध छेड़ने का ऐलान किया है। बता दें कि उत्तर प्रदेश सहित 5 राज्यों में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ‘लव जिहाद’ और धर्मांतरण भी मुद्दा बना हुआ है। VHP ने कहा है कि 21 दिसंबर, 2021 से देश भर में धर्मांतरण के खिलाफ अभियान चलेगा। इसके तहत घर-घर जाकर विहिप के कार्यकर्ता अभियान चलाएँगे। संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने इस बारे में जानकारी दी है।

उन्होंने ‘दैनिक भास्कर’ से बात करते हुए बताया कि देश की डेमोग्राफी में बदलाव आ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में भी अब ‘मिनी पाकिस्तान’ और ‘मिनी वेटिकन’ बन रहे हैं। उन्होंने इस बार पर ताज्जुब जताया कि देश के पुलिस-प्रशासन को इसकी कोई खबर ही नहीं है उन्होंने कहा कि हमें इस मुद्दे को लेकर चिंतित होना चाहिए। VHP धर्म-परिवर्तन को लेकर देशव्यापी सर्वे भी कर रही है। अलग-अलग इलाकों से जानकारियाँ जुटाई जा रही हैं। क्या आँकड़े हैं और प्रशासन क्या कर रहा है, इन सब पर बातें हो रही है।

धर्मांतरण को अंजाम देने वाली संस्थाओं और डेमोग्राफी में बदलाव को लेकर सूचनाएँ जुटाई जा रही हैं। ये काम अभी शुरुआती दौर में है। हाल ही में मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले का एक डेटाबेस तैयार किया गया है। वहाँ पिछले 3 दशक में 53 चर्च के निर्माण की बात सामने आई है। विहिप का कहना है कि प्रशासन को इसकी भनक भी नहीं लगी, जबकि सब सरकारी जमीन पर बने हैं। उन्होंने इसे सरकारी भूमि का अतिक्रमण बताते हुए पूछा कि इसके लिए अनुमति कहाँ से मिली?

उन्होंने पूछा, “सरकारी जमीन पर कब्जा कैसे हुआ? हुआ तो फिर कब्जे के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यह भी नहीं पता कि कितने लोग हिंदू, बौद्ध, सिख और जैन से ईसाई बने? मुस्लिम बने?” उन्होंने बताया कि RTI से ये सब पता चला है। उन्होंने इस्लामी कट्टरपंथियों के साथ-साथ मिशनरियों का भी जिक्र करते हुए कहा कि ‘लव जिहाद’ के बारे में तो अब सब जानने लगे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस्लामी संस्थाएँ तलवार के बल पर धर्मांतरण करा रही हैं।

उन्होंने आगामी अभियान को ‘धर्मयुद्ध’ करार देते हुए कहा कि ये एक महीने या उससे अधिक समय तक भी चल सकता है। फ़िलहाल संगठन हर इलाके के सांसदों से मिल कर उनके क्षेत्रों में इस तरह की समस्याओं से अवगत करा रहा है। उन्हें सबूत उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सिख, बौद्ध और जैनों के साथ हो रहे धर्मांतरण व साजिश पर भी विहिप मुखर है। पंजाब में मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को सूचना देने पर मिशनरियों का एक कार्यक्रम टला। मिशनरी भी इसा मसीह से बीमारी ठीक कराने और गरीबी दूर करने का लालच देकर ‘चंगाई सभाओं’ के जरिए धर्मांतरण करा रहे हैं।

‘मुस्लिम बाबरी विध्वंस को नहीं भूलेंगे, फिर से बनेगी मस्जिद’: केरल के स्कूल में बाँटा गया ‘मैं बाबरी हूँ’ का बैज

केरल के स्कूल में बच्चों को अपनी राजनीति में शामिल करने और उन्हें मजहब के नाम पर गुमराह करने का मामला सामने आया है। सोमवार (6 दिसंबर, 2021) को कोट्टंगल के चुंगप्पारा सेंट जॉर्ज स्कूल के बच्चों को एसडीपीआई (SDPI) का एक कथित कार्यकर्ता ‘मैं बाबरी हूँ’ का बैज बाँटता दिखा। इसकी कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिसमें कार्यकर्ता बच्चों की शर्ट पर बैज लगाता हुआ भी दिख रहा है।

केरल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने ट्वीट कर सवाल किया है कि क्या केरल एक और सीरिया बन रहा है। कोट्टंगल पंचायत के चुंगप्पारा सेंट जॉर्ज स्कूल के छात्रों को एसडीपीआई जबरदस्ती ‘आई एम बाबरी’ का बैज लगा रहा है। उन्होंने ट्वीट में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को टैग करते हुए इस मामले पर ध्यान दिलाने का प्रयास किया। दक्षिणी केरल के पथानामथिट्टा जिले में कोट्टंगल गाँव में चुंगप्पारा स्कूल स्थित है।

सुरेंद्रन द्वारा साझा की गई तस्वीरों में उस कार्यकर्ता को ‘मैं बाबरी हूँ’ के बैज को एक छात्र को लगाते हुए देखा जा सकता है। कथित एसडीपीआई कार्यकर्ता ने भी अपनी शर्ट पर यही बैज लगाया हुआ है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, Parent Teacher Association ने पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने इसकी जाँच शुरू कर दी गई है। यह घटना सोमवार (6 दिसंबर 2021) सुबह की है, जब बच्चे स्कूल परिसर में पहुँचे थे। रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षकों ने जब कक्षा में बच्चों को ये बैज लगाए हुए देखा तो उन्होंने इसे हटाने के लिए कहा। वहीं, एसडीपीआई भी ट्वीट कर रहा है कि मुसलमान बाबरी विध्वंस को नहीं भूलेंगे और मस्जिद फिर से बनेगी।

बता दें कि एसडीपीआई इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का राजनीतिक संगठन है, जिसे कई राज्यों में चरमपंथी गतिविधियों के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसी साल नवंबर में एसडीपीआई के गुंडों ने आरएसएस के एक कार्यकर्ता ए संजीत की उसकी पत्नी के सामने ही हत्या कर दी थी।

‘लड़ाई जीत ली, पर युद्ध जारी रहना चाहिए’: ISI सरगना और खालिस्तानी के साथ राकेश टिकैत का वीडियो कॉल, PM मोदी को कहा गया ‘खलनायक’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के एलान के बाद उस पर चर्चा करने के लिए 22 नवंबर 2021 को ‘कौर (कोर) किसान’ नाम के एक संगठन की ओर से अंतरराष्ट्रीय वेबिनार आयोजित किया गया। इसमें BKU के प्रवक्ता राकेश टिकैत के अलावा कई खालिस्तानी भी शामिल हुए।

इस वेबिनार में टिकैत के अलावा खालिस्तानी समर्थक मो धालीवाल, आईएसआई के लिए काम करने वाला पीटर फ्रेडरिक, मोनिका गिल, प्रीत कौर गिल, आसिस कौर, क्लाउडिया वेबबे समेत कई अन्य भी इसमें शामिल रहे। ये सभी यहाँ पर किसान आंदोलन की आड़ में देश विरोधी गतिविधियों को भड़का रहे थे। फिलहाल इस जूम कॉल की कई रिकॉर्डिंग ऑपइंडिया को मिली है।

दरअसल, ‘व्हेयर-इज-प्रूफ’ नाम के एक ट्विटर हैंडल ने जूम कॉल का स्क्रीनशॉट शेयर किया था। जिसकी छानबीन की तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ।

आंदोलन को जारी रखने के पक्ष में राकेश टिकैत

जूम मीटिंग में जिस संगठन की ओर से ये मीटिंग आयोजित की गई थी, उस ‘कौर फार्मर्स’ की मेज़बान राज कौर ने टिकैत को एक हीरो के रूप में पेश किया, जिन्होंने 26 जनवरी, 2021 को दिल्ली में हिंसा की घटना के बाद भी आंदोलन को जारी रखा। कृषि कानून के निरस्त होने से खुश हैं या नहीं यह पूछे जाने पर टिकैत ने कहा, “वे कानूनों को निरस्त कर रहे हैं। लेकिन कई मुद्दे अभी भी हैं। कई अन्य मुद्दे हैं जैसे एमएसपी, प्रदर्शनकारियों की मौत और बहुत कुछ, जिसपर सरकार से बातचीत होनी चाहिए। टिकैत अपनी बातों पर अडिग दिखे कि आंदोलन को जारी रखा जाना चाहिए।”

हालाँकि, टिकैत की बात पर हैरान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि कथित किसान नेता ने इससे पहले 5 दिसंबर, 2021 को ये एलान कर दिया था कि आंदलनकारियों का अगला टारगेट बैंकों का निजीकरण होगा। इसके अलावा टिकैत ये भी एलान कर चुके हैं कि 2024 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले किसी भी सूरत में वो आंदोलन को खत्म नहीं होने देंगे। कुल मिलाकर वे सुर्खियों में बने रहने के लिए कोई न कोई बवाल करते ही रहते हैं।

लखीमपुर में भाजपा समर्थकों के मारे जाने का कोई जिक्र नहीं

जूम मीटिंग के दौरान जब टिकैत से लखीमपुर खीरी की घटना के बारे में पूछा गया कि वो मामले की जाँच से संतुष्ट हैं, तो उन्होंने अपनी संतुष्टि जताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में तीन जज लखीमपुर मामले की जाँच कर रहे हैं। इसके अलावा किसानों के यूनियन की भी एक कमेटी है जो इस घटना की अपने स्तर पर जाँच कर रही है। बड़ी बात ये है कि टिकैत ने लखीमपुर खीरी की हिंसा में बेरहमी से मारे गए बीजेपी के कार्यकर्ताओं पर कुछ नहीं बोला। टिकैत के पक्षपात को ऐसे समझा जा सकता है कि क्योंकि संयुक्त किसान मोर्चा ने उसके ही’ आंदोलनजीवी’ योगेंद्र यादव को महज इसलिए संगठन से निलंबित कर दिया था क्योंकि वो मारे गए बीजेपी कार्यकर्ता शुभम मिश्रा के घर चले गए थे।

किसानों की आत्महत्या पर टिकैत का बयान

वेबिनार के दौरान राकेश टिकैत से पूछा गया कि किसान कृषि कानून से पहले भी आत्महत्या करते थे, उसको लेकर किसानों के यूनियन क्या कर रहे हैं? टिकैत ने इस सवाल की कल्पना शायद नहीं की थी, इसलिए वो थोड़े हड़बड़ाए। हालाँकि, बाद में दावा किया कि किसानों को उनकी उपज का उचित लाभ नहीं मिलता था। खर्चे बढ़ने के कारण किसानों को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा और इसी कारण वो आत्महत्या करने के लिए मजबूर हुए। खास बात ये है कि अंधविरोध की बजाए अगर राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कानून को पढ़ा होता तो वो समझ पाते कि उसमें किसानों की आय को बढ़ाने के बारे में बताया गया था। लेकिन अब तो वो कानून के लिए कदम उठाए गए थे।

महिलाओं के लिए अलग से कुछ नहीं किया गया

मेजबान राज कौर ने टिकैत से जब महिलाओं को लेकर सवाल किया कि महिला किसानों के लिए वो कुछ खास कर रहे हैं? लेकिन, महिलाओं से जुड़े मुद्दों और सरकारी योजनाओं की जानकारी नहीं होने के कारण टिकैत ने हकलाते हुए दावा किया कि सरकार के पास महिलाओं के लिए कोई अलग नीतियाँ नहीं हैं। दरअसल, अपनी राजनीति के चक्कर में राकेश टिकैत मुद्रा ऋण, प्रधानमंत्री आवास योजना, जन धन योजना, उज्ज्वला योजना, शौचालय, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ समेत कई अन्य योजनाओं के बारे में जान ही नहीं पाए। जबकि इन योजनाओं का सीधा लाभ महिलाओं को मिला है।

मतेवरा पर जताई अनभिज्ञता

पिछले साल 2020 में पंजाब सरकार ने क्षेत्र में औद्योगिक कॉरिडोर बनाने के लिए लुधियाना में मतेवरा जंगल के सेखोवाल ग्राम पंचायत में 400 एकड़ की जमीनों का अधिग्रहण किया। इसका अधिकांश भाग यहाँ रहने वाले आदिवासियों दलितों का था। वो दलित 1996 से वहाँ थे। उन्होंने वहाँ की बंजर जमीन को बड़ी मुश्किल से उपजाऊ बनाया और बाद में सरकार ने उस पर कब्जा कर लिया, जिसका स्थानीय लोगों द्वारा विरोध किया गया। लेकिन जब टिकैत से इसके बारे में पूछा गया कि किसान यूनियन दलितों के अधिकारों के लिए क्या कर रही तो वो इसके बारे जानकारी से ही इनकार कर गए। टिकैत ने इसके लिए पंजाब के किसान यूनियनों से बात करने की सलाह दे डाली। दरअसल, वो इस सवाल से ही चिढ़ गए थे।

उल्लेखनीय है कि खुद को किसान बताने वाले टिकैत के पास 13 जगहों पर जमीनें और संपत्तियाँ है और ये सब करीब 80 करोड़ रुपए के आसपास का है। टिकैत ने दावा किया कि गाँवों में जमींदार किसानों और भूमिहीन किसानों के बीच कोई भेदभाव नहीं है। सभी एक-दूसरे की मदद करते हैं।

हालाँकि, भारत सरकार हाशिए पर पड़े किसानों के हालातों को सुधारने की भरसक कोशिश कर रही है। सरकार की कोशिशों का नतीजा यह हो रहा है कि इन किसानों को भूमि का स्वामित्व देने से लेकर नीम लेपित यूरिया और वित्तीय सहायता तक दिया जा रहा है।

ISI के गुर्गे को बता दिया इतिहासकार

ये बड़ी हास्यास्पद बात है कि इस मीटिंग में आईएसआई के गुर्गे पीटर फ्रेडरिक को ‘इतिहासकार और लेखक’ के तौर पर पेश किया गया। फ्रेडरिक ने दावा किया कि किसी ने नहीं सोचा होगा कि किसान आंदोलन मोदी सरकार को पीछे धकेल सकता है। उसने पीएम मोदी को इशारों में खलनायक करार दिया और कहा, “किसानों का विरोध सिर्फ एक अध्याय है। असली खलनायक अभी भी सत्ता पर काबिज है। हमने लड़ाई जीत ली है, लेकिन युद्ध जारी रहना चाहिए।” केंद्र सरकार को फासीवादी करार देते हुए फ्रेडरिक ने मुस्लिमों और ईसाईयों पर हमले किए जाने का दावा करते हुए किसान आंदोलनकारियों से इनका समर्थन करने की अपील की और ‘आज़ादी की ओर बढ़ने’ का आह्वान किया। लेकिन यह समझ से परे है कि वो किस आजादी की बात कर रहा था।

खास बात ये है कि जब फ्रेडरिक ने अपना भाषण खत्म किया तो इस मीटिंग के होस्ट में कहा कि वह (पीटर फ्रेडरिक) दुनिया भर में भाजपा और आरएसएस के खिलाफ प्रचार कर रहा है। उसने ये भी दावा किया कि हिटलर ने RSS से प्रेरणा ली थी।

खालिस्तानी धालीवाल बोला- लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई

खालिस्तानी समर्थक मो धालीवाल को ये पता था कि ये आंदोलन लंबा खिंचने वाला है। उसी ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की वकालत की थी। इस दौरान धालीवाल ने इस बात का खुलासा किया कि उसका संगठन पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन प्रदर्शनों में किस तरह से शामिल था। हालाँकि, उसने रिहाना और ग्रेटा थनबर्ग के साथ अपना नाम जोड़े जाने को हास्यास्पद बताया। उसने ये भी दावा किया कि टूलकिट उसी की देखरेख में बनाया गया था। बाद में गलती से ग्रेटा थनबर्ग ने उसे शेयर कर दिया और साजिश का भांडाफोड़ हो गया।

धारीवाल ने सरकार पर बातचीत नहीं करने का आऱोप लगाते हुए कहा कि मोदी सरकार की नीतियाँ भारत के लोगों के खिलाफ हैं और इसे ‘संरचनात्मक हिंसा’ कहा जा सकता है। उसने सीएए का जिक्र करते हुए कहा कि सीएए विरोध प्रदर्शनों में शासन विरोधी की चिंगारी देखी गई।

जनवरी 2020 की शुरुआत में अपने भाषण को याद करते हुए धालीवाल ने कहा, “कृषि कानूनों को निरस्त करने से लड़ाई खत्म नहीं होती, बल्कि वहीं से शुरू होती है।” उसने देश में माहौल बिगाड़ने के लिए विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया और कहा, “लड़ाई जारी रखने की जिम्मेदारी हम पर है।”

उल्लेखनीय है कि पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन जैसे संगठनों और राकेश टिकैत और पीटर फ्रेडरिक जैसे लोगों द्वारा फैलाई गई गलत सूचना और फर्जी खबरों के कारण न केवल सरकार को उन कानूनों को निरस्त करने के लिए मजबूर किया जो वास्तव में किसानों के लाभ के लिए थे। बल्कि इससे कृषि सुधारों के मामले में भारत सालों पीछे चला गया। गौरतलब है कि हाल ही में टिकैत ने 26 जनवरी 2021 को फिर से हिंसा की धमकी दी थी।