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‘हमारे 700 डिमांड्स हैं…’: राकेश टिकैत ने किया 1000 किसानों के संसद कूच का ऐलान, टिकरी सीमा पर दोगुने हुए किसान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भले ही 1 साल तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद गुरु परब के दिन तीनों कृषि कानून वापस लिए जाने की घोषणा कर दी हो, लेकिन किसान नेता अब भी नहीं मान रहे हैं और दिल्ली की टिकरी सीमा पर प्रदर्शनकारियों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। 26 नवंबर, 2021 को किसान अपने आंदोलन के एक वर्ष पूरा होने पर जबरदस्त शक्ति-प्रदर्शन की योजना बना रहे हैं। खाली दिख रहे टेंट्स भी बढ़ गए हैं। पिछले मात्र 4 दिनों में किसानों की संख्या वहाँ दोगुनी हो गई है।

अब जब 29 नवंबर को संसद की तरफ ट्रैक्टर से कूच का कार्यक्रम स्थगित नहीं हुआ है, दिल्ली का पुलिस-प्रशासन भी हलकान है कि आंदोलनकारियों का अगला रास्ता क्या होगा। दिल्ली पुलिस उनसे सामंजस्य बनाने की कोशिश में लगी है। मन टटोल कर पता लगाया जा रहा है कि आगे क्या होगा। तीनों कृषि कानूनों के विरोध में शुरू हुए आंदोलन में अब ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)’ के तहत कानून बनाने और 750 किसानों की मौत का दावा कर के उन सब के परिवारों को मुआवजा देने की माँग की जा रही है।

किसान नेताओं और केंद्र सरकार के बीच 11 दौर की बैठकें हुई थीं, लेकिन उसका कोई नतीजा नहीं निकला था। पंजाब-हरियाणा के गाँवों से किसानों को वापस दिल्ली सीमा पर बुलाया जा रहा है। उत्साहित आंदोलनकारी अब फिर से भीड़ जुटाने लगे हैं। बता दें कि 26 नवंबर को शक्ति-प्रदर्शन के अलावा 29 नवंबर से 500 किसानों के ट्रैक्टर से संसद कूच की योजना है। संसद का शीतकालीन सत्र भी शुरू हो रहा है। किसानों का कहना है कि सड़क दुर्घटना में, हार्ट अटैक से और पुलिसिसय बल प्रयोग के कारण किसानों की मौत हुई है।

वहीं राकेश टिकैत ने ‘टाइम्स नाउ’ के एक सवाल के जवाब में कहा कि हमारे पास तो 700 डिमांड्स हैं, सरकार से इन सब पर बातचीत चलती रहेगी। उन्होंने कहा, “ये जो संसद सत्र चलाते हैं, वो क्या करते हैं वहाँ पर? डिमांड्स को अप्रूव करते हैं, लागू करते हैं। दिल्ली जाएँगे। 500 किसान 30 ट्रैक्टरों के साथ संसद जाएँगे। अभी तो MSP है, 700 मृतक किसानों के परिजनों को मुआवजा है, मुकदमे वापस लेने हैं, सीड बिल है, पेस्टीसिड्स बिल है, ये सब हाउस में आना है।”

वहीं मंगलवार (23 नवंबर, 2021) को ‘भारतीय किसान यूनियन (BKU)’ के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने ऐलान किया था कि 60 ट्रैक्टरों के साथ 1000 किसान दिल्ली की तरफ कूच करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा खोले गए रास्तों से ही ये ट्रैक्टर संसद तक जाएँगे। उन्होंने कहा कि सड़कें जाम करने के आरोप हम पर लगा, लेकिन हमने ऐसा नहीं किया था। उन्होंने कहा कि सड़कें जाम करना उनके अभियान का हिस्सा नहीं है। साथ ही कहा कि सरकार से बातचीत चलती रहेगी, लेकिन प्रदर्शन फ़िलहाल जारी रहेगा।

‘पीड़िता से रोमांटिक था रिश्ता…’: मेघालय हाई कोर्ट ने यौन शोषण के आरोपित किशोर को दी बेल, पॉक्सो एक्ट से जुड़ा है मामला

मेघालय हाई कोर्ट ने सोमवार (नवंबर 22, 2021) को यौन शोषण के एक ‘किशोर’ आरोपित की बेल याचिका ये कहते हुए मंजूर की कि आरोपित और पीड़िता के बीच रोमांटिक रिलेशन था और उसी दौरान उनमें संबंध बने थे। आरोपित के विरुद्ध इस केस में पॉक्सो एक्ट के तहत सुनवाई चल रही थी। 

कोर्ट ने 20 हजार रुपए के निजी मुचलके पर याचिका को मंजूर किया। आरोपित को निर्देश दिए गए कि वो केस के गवाहों के साथ छेड़छाड़ न करे और न ही फरार हो या न ही निचली अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर निकले।

जस्टिस डब्ल्यू डिएंगदोह ने कहा कि प्रथम दृष्टया में यह स्पष्ट है कि दोनों के बीच रोमांटिक रिलेशन था और उनके बीच यौन संबंध मर्जी से बने थे। कोर्ट ने ये भी कहा कि इस तथ्य के बावजूद कि पीड़ित के नाबालिग होने के केस में सहमति को नहीं माना जाता। अदालत द्वारा जमानत देने की याचिका पर विचार किया जा रहा है।

कोर्ट ने मामले को सुनते ही इस बात को गौर किया कि पीड़िता और आरोपित के बीच में संबध थे और इस केस में शिकायत पीड़िता की माँ की ओर से की गई है। कोर्ट ने कहा कि ये सबूत मिलने का विषय है कि कथित अपराध पॉक्सो अधिनियम के प्रावधान के अनुसार यौन उत्पीड़न को गठन करता है।

आरोपित के वकील सीबी सेवियन ने कहा कि उनका मुवक्किल उस समय किशोर था और अपनी किए के परिणाम समझने में सक्षम नहीं था। ऐसे में उसे अगर क्रिमिनल्स के साथ रखा जाएगा तो उसके भविष्य पर इसका असर पड़ सकता है। वहीं पीड़िता के पक्ष से अतिरिक्त वकील जनरल बी भट्टाचार्जी ने कहा कि आरोपित वयस्क था जिसे गंभीर आरोपों में हिरासत में लिया गया। पॉक्सो अधिनियम के प्रावधान अपराध की गंभीरता के बीच अंतर नहीं करते हैं चाहे वह रोमांटिक रिश्ते का परिणाम हो।

‘ओरल सेक्स नहीं है गंभीर अपराध’

बता दें कि इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यौन शोषण मामले में एक टिप्पणी की थी। कोर्ट ने बच्चे के साथ ओरल सेक्स के एक मामले की सुनवाई में कहा था कि बच्चे के मुँह में लिंग डालना गंभीर मामला नहीं है। लिहाजा आरोपित को  पॉक्सो एक्ट की धारा 6 और 10 के तहत सजा नहीं सुनाई जा सकती। हाई कोर्ट ने इस मामले में दोषी की सजा घटाकर 10 से 7 साल कर दी थी। साथ ही उस पर 5 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया था।

‘तुम्हें और तुम्हारे परिवार को मार डालेंगे’: गौतम गंभीर को ‘ISIS कश्मीर’ से मिली धमकी, दिल्ली पुलिस ने घर की सुरक्षा बढ़ाई

पूर्वी दिल्ली से भाजपा सांसद और पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर को मंगलवार (23 नवंबर 2021) की रात आतंकी संगठन की ओर से जान से मारने की धमकी मिली। उन्होंने दिल्ली पुलिस से इसकी शिकायत की है। डीसीपी सेंट्रल श्वेता चौहान ने शिकायत मिलने की पुष्टि की है।

गंभीर को ई-मेल के जरिए ‘आईएसआईएस कश्मीर’ ने धमकी दी है। इसमें उनकी और उनके परिवार की हत्या की बात कही गई है। दिल्ली पुलिस ने गंभीर के आवास के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। मामले की जाँच जारी है।

पुलिस को भेजी शिकायत में गंभीर ने धमकी भर ईमेल भी अटैच किया है। रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार रात 9.32 बजे सांसद की आधिकारिक ईमेल आईडी पर ISIS कश्‍मीर का एक मेल आया। इसमें उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई थी।

साभार: NBT

बता दें कि क्रिकेटर से राजनेता बने गंभीर अक्सर अपने बेबाक बयानों के लिए सुर्खियों में रहते हैं। उन्हें दिल्ली के साथ-साथ देश से जुड़े हर गंभीर मुद्दे पर अपनी राय रखते हुए देखा गया है।

नोएडा के जेवर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट की आधारशिला रखेंगे PM मोदी, 5 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा वाला इकलौता राज्य बन जाएगा UP

उत्तर प्रदेश में 340.82 किलोमीटर लंबे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार (25 नवंबर 2021) को नोएडा के जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (एनआईए) की आधारशिला रखेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अनुसार, इसके बाद उत्तर प्रदेश भारत का एकमात्र ऐसा राज्य बन जाएगा, जिसके पास पाँच अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे होंगे।

उत्तर प्रदेश राज्य प्रशासन द्वारा सोमवार को जारी एक बयान में कहा गया है, “25 नवंबर को निर्धारित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के शिलान्यास के साथ, राज्य अब 5 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे बनाने की राह पर है, जो किसी राज्य में सबसे ज्यादा है।” भाजपा के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने एक अपने बयान में आगे कहा है, “प्रधानमंत्री का गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान राज्य में बुनियादी ढाँचे का लगातार विकास कर रहा है।”

यह एयरपोर्ट दिल्ली एनसीआर में बनने वाला दूसरा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट होगा और इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर भीड़भाड़ कम करने में मदद करेगा। पीएमओ के अनुसार, हवाई अड्डा दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, अलीगढ़, आगरा, फरीदाबाद और आसपास के क्षेत्रों सहित कई शहरों के लोगों की सेवा करेगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस एयरपोर्ट में 2 पैसेंजर टर्मिनल होंगे। टर्मिनल 1 की क्षमता 3 करोड़ यात्री प्रतिवर्ष और टर्मिनल 2 की क्षमता 4 करोड़ यात्री प्रतिवर्ष की होगी। बताया जा रहा है कि​ टर्मिनल 1 को दो फेज में पूरा किया जाएगा। पहला फेज 2024 तक पूरा होने की उम्मीद है। वहीं, दूसरे फेज को भी इसी तरह 2 चरणों में पूरा किया जाएगा।

मालूम हो कि इस साल 20 अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर प्रदेश में कुशीनगर हवाई अड्डे का उद्घाटन किया था, जो राज्य का तीसरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। इसके अलावा, लखनऊ और वाराणसी में दो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहले से चालू हैं। 2022 में अयोध्या हवाई अड्डे और 2024 में नोएडा हवाई अड्डे के खुलने के साथ उत्तर प्रदेश भारत का एकमात्र राज्य बन जाएगा, जिसमें पाँच अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे होंगे।

राज्य में फिलहाल आठ हवाई अड्डे चालू हैं, जबकि 13 हवाई अड्डों और सात हवाई पट्टियों को विकसित किया जा रहा है। हवाई अड्डे का निर्माण और संचालन स्विट्जरलैंड की ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी द्वारा किया जाएगा। नोएडा एयरपोर्ट के पहले चरण का काम 2024 तक लगभग 10,050 करोड़ रुपए की लागत से पूरा होने की उम्मीद है।

साभार: इंडिया टीवी

बता दें कि जेवर एयरपोर्ट प्रॉजेक्ट कुल 3500 हेक्टेयर जमीन पर पूरा होना है, लेकिन पहले चरण में सिर्फ 1300 हेक्टेयर पर ही काम होगा। इंदिरा गाँधी एयरपोर्ट से नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा लगभग 72 किलोमीटर की दूरी पर है। नोएडा, फरीदाबाद और गाजियाबाद से इसकी दूरी 40 किलोमीटर है। ग्रेटर नोएडा से यह एयरपोर्ट 28 किमी, गुरुग्राम से 65 किमी और आगरा से 130 किमी की दूरी पर है।

पाकिस्तान ने 3-0 से जीती T-20 सीरीज, बांग्लादेश ने फिर भी नहीं दी ट्रॉफी: BCB ने कहा- अभी चेयरमैन नहीं, टेस्ट सीरीज के बाद देंगे

पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच हुई टी-20 सीरीज को 3-0 से जीतने के बाद भी पाकिस्तान को उनकी ट्रॉफी नहीं दी गई। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने ऐसा करने के पीछे तर्क दिया कि वो टेस्ट सीरीज के नतीजे आने के बाद ट्रॉफी पाकिस्तान टीम को देंगे।

बीसीबी ने कहा कि बोर्ड के अध्यक्ष द्वारा ये ट्रॉफी पाकिस्तान को दी जानी थी लेकिन उनकी अनुपस्थिति के कारण ऐसा नहीं हुआ। प्रवक्ता ने बताया कि बोर्ड के अध्यक्ष और प्रायोजक कंपनियाँ बायोसिक्योर-बबल (कोविड के कारण की गई व्यवस्था) का हिस्सा नहीं थे। इसलिए अवार्ड देने का कार्यक्रम कोविड प्रोटोकॉल्स के चलते नहीं हो पाया।

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच खेले गए तीन मैच की टी-20 सीरीज के आखिरी मैच में पाकिस्तान ने 5 विकेट से जीत दर्ज करके पूरी सीरीज को 3-0 से अपने नाम किया था। मैच की आखिरी गेंद पर पाकिस्तान को जीत के लिए दो रन चाहिए थे और मोहम्मद नवाज ने चौका लगाकर पाकिस्तान को फतह दिलाई। वहीं बांग्लादेश टीम का प्रदर्शन निराशजनक था। उन्होंने 20 ओवरों के मैच में 124 रन बनाए। इसमें भी 47 रन मोहम्मद नईम के थे। पाकिस्तान को इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी।

बता दें कि बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच हुई ये टी-20 सीरीज सिर्फ हार-जीत के कारण चर्चा में नहीं थी। पाकिस्तान की हरकतों के कारण कई बार इस सीरीज की बातें जगह-जगह हुईं। जैसे पिछले दिनों पाकिस्तान टीम ने ढाका के एक ग्राउंड पर प्रैक्टिस करते हुए अपने मुल्क का झंडा वहाँ लगा दिया था। इसके बाद बांग्लादेश के लोगों ने इस पर आक्रोश जताया था। इसी तरह पाकिस्तानी खिलाड़ी शाहीन शाह अफरीदी ने एक बांग्लादेशी बल्लेबाज अफिफ हुसैन के टखने पर गेंद मार दी थी। शाहीन को गुस्सा इसलिए आया था क्योंकि अफिफ ने उनकी फेंकी गेंद पर छक्का जड़ा था।

पहले पाकिस्तान के करक में हिंदुओं का मंदिर तोड़ा, अब तोड़ने वाले इस्लामी कट्टरपंथियों पर लगा जुर्माना भरने का हिंदू काउंसिल पर दबाव

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों खासकर हिंदुओं पर अत्याचार नई बात नहीं है। अब एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार हिंदू काउंसिल पर उन इस्लामी कट्टरपंथियों के बदले जुर्माना भरने का दबाव बनाया जा रहा है जो करक में एक मंदिर पर हुए हमले में शामिल थे। इन पर सुप्रीम कोर्ट ने जुर्माना लगाया था। हमले में शामिल 11 मौलवियों पर लगाया गया जुर्माना हिंदू पहले ही भर चुके हैं। अब उन पर इस मामले के आरोपित अन्य 100 से अधिक इस्लामी कट्टरपंथियों का जुर्माना देने का भी दबाव है।

खैबर-पख्तूनख्वा के करक जिले में दिसंबर 2020 में मंदिर पर हमला किया गया था। इस मामले में पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने 11 मौलवियों पर जुर्माना लगाया था। यह राशि ऑल पाकिस्तान हिंदू काउंसिल के फंड से दी गई है।

एक स्थानीय निवासी ने बताया, “हिंदू काउंसिल ने जमात उलेमाई-ए-इस्लाम फजल (जेयूआई-एफ) जिले के अमीर मौलाना मीर जाकीम, पूर्व करक जिला नाजिम रहमत सलाम खट्टक, मौलाना शरीफुल्ला और आठ अन्य पर लगा जुर्माना देने का फैसला किया और प्रति व्यक्ति 2,68,000 रुपए का भुगतान किया।” रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस की FIR में कुल 123 आरोपित नामित किए गए हैं, जिनमें से कई को हमले के वीडियो फुटेज की मदद से पहचाना गया है।

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने खैबर-पख्तूनख्वा (केपी) सरकार की आपत्तियों के बावजूद प्राथमिकी में नामित आरोपितों से मंदिर के पुनर्निर्माण शुल्क के तौर पर 3.30 अरब रुपए की वसूली का आदेश दिया था। रिपोर्ट से पता चला था कि हमले में शामिल स्थानीय मौलवी मंदिर के पुनर्निर्माण में बाधा उत्पन्न कर रहे थे।

कथित तौर पर, जिला प्रशासन प्राथमिकी में नामित सभी 123 आरोपितों पर 26 अक्टूबर को नोटिस भेजकर उनके हिस्से का जुर्माना भरने का दबाव बना रहा है। एक हिंदू नेता ने कहा कि हिंदू परिषद द्वारा 11 आरोपितों का जुर्माना भरने के बाद अब एफआईआर में नामित शेष आरोपित चाहते हैं कि हिंदू उनके हिस्से के जुर्माने का भुगतान भी करें। उन्होंने कहा, “राशि का भुगतान पहले ही किया जा चुका है, लेकिन अब सभी 123 आरोपित माँग कर रहे हैं कि उनका जुर्माना भी हिंदू समुदाय द्वारा भुगतान किया जाना चाहिए जो संभव नहीं है।”

रिपोर्ट में एक स्थानीय हिंदू नेता के हवाले से बताया गया है कि समुदाय पूरी तरह असहाय है। सरकार की भागीदारी के बावजूद उपायुक्त ने स्थानीय मौलवियों के डर से मंदिर पुनर्निर्माण के दौरान मदद से इनकार कर दिया। लिहाजा हिंदू इन मौलवियों को और अधिक नाराज नहीं करना चाहते। यही कारण है कि हिंदू काउंसिल से उन पर लगा जुर्माना देने का फैसला किया गया।

करक मंदिर हमला

बता दें कि 30 दिसंबर 2020 को करक जिले की टेरी यूनियन काउंसिल स्थित कृष्ण द्वार मंदिर पर सैकड़ों की संख्या में कट्टरपंथियों ने हमला कर दिया था। उन्मादी मुस्लिम भीड़ ने पहले मंदिर में आग लगा दी और फिर उसे हथौड़ों से तोड़ डाला। उस दौरान इस कृत्य में शामिल करीब 109 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। साथ ही उस दौरान ड्यूटी पर मौजूद पुलिस अधीक्षक और पुलिस उपाधीक्षक सहित 92 पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था।

‘ये सारे किसान नहीं हैं… मैं भी किसान की बेटी’ : जब माँ का अंतिम संस्कार करने जा रही एक बेटी का टूट गया सब्र, Video वायरल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कृषि कानून वापस लेने की घोषणा किए जाने के बाद भी किसान आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। अलग-अलग माँगों के साथ अब भी कथित किसान नेता भीड़ लेकर बैठे हैं। हालत ऐसी हो गई है कि आम जन इसे बर्दाश्त नहीं कर पा रहे। मंगलवार (नवंबर 23, 2021) को तो एक महिला गुस्से में इन प्रदर्शनकारियों पर चिल्ला पड़ी। उसने बीच सड़क पर पुलिस की मौजूदगी में किसान नेता को झाड़ा और उन नेताओं के समर्थन में उतरीं महिलाओं को भी खरी-खोटी सुनाई।

जानकारी के मुताबिक, किसान आंदोलन के नाम पर ग्रेटर नोएडा में कुछ प्रदर्शनकारी शक्ति प्रदर्शन के लिए इकट्ठा हुए थे। सैंकड़ों किसानों ने जीरो प्वाइंट एक्सप्रेसवे पर जाम लगाया हुआ था। इससे एक एंबुलेस इस जाम में फँस गई। एंबुलेंस में एक महिला का शव रखा था जिसे उनका परिवार अलीगढ़ ले जा रहा था। हालाँकि लंबा जाम लगने के कारण ये बहुत देर तक संभव नहीं हुआ। 

अंत में जब बर्दाश्त की सीमा पार हुई तो मृत महिला की बेटी गाड़ी से उतरी और किसान नेता सुखबीर खलीफा पर भड़क पड़ी। वह बोली, “आप ही किसान हो क्या, हम किसान नहीं है। ये सारे किसान नहीं हैं। मैं उतनी दूर से चलकर आई हूँ अभी मुझे टप्पल जाना है। मेरी मम्मी की डेथ हो गई और ये जाम लगा पड़ा है।” 

महिला की आवाज सुनकर कुछ महिलाएँ आ गईं और कहने लगीं, “ठीक है आप निकलिए।” इस पर महिला ने कहा, “जब जाम खुलेगा तभी तो निकलेंगे। मेरी हालत दिख रही है तुम्हें। मैं भी किसान की बेटी हूँ।” जब वहाँ खड़ी महिलाओं ने कहा, “हम आपका दर्द समझ रहे हैं।” इस पर महिला बोली, “कोई दर्द नहीं समझता है।”

बता दें कि इस वीडियो के सामने के बाद सोशल मीडिया पर लोग अपने-अपने क्षेत्रों में होने वाली परेशानियों की तस्वीर शेयर कर रहे हैं। जगह-जगह जाम होने के कारण लोगों को आवाजाही में दिक्कत हो रही है। इस घटना को देख कोई इसे शर्मसार करने वाला बता रहा है तो तो इससे झकझोरने वाली वीडियो कहकर इस पर प्रतिक्रिया दे रहा है। स्वतंत्र मीडिया कर्मियों से सवाल किया जा रहा है कि आखिर वो आम जन का पक्ष दिखाने में क्यों हिचक रहे हैं।

बतौर गवर्नर 3 साल में 5 राज्य, पहले 6 बार बदली सत्यपाल मलिक ने पार्टी: जिस कॉन्ग्रेस ने जेल में ठूँसा, उसी के बने थे सांसद

बिहार, जम्मू कश्मीर, गोवा और अब मेघालय के राज्यपाल बने सत्यपाल मलिक अपने बयानों के कारण लगातार चर्चा में हैं। बीच में उन्हें ओडिशा का भी अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। इस तरह कुल मिला कर 4 वर्षों में 5 राज्यों के राज्यपाल रह चुके हैं। हाल ही में उन्होंने एक बयान दिया है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धमकी भरे अंदाज़ में इंदिरा गाँधी की हत्या याद दिलाई गई है। सिख और जाट कार्ड खेलते हुए उन्होंने ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ के वक्त भारतीय सेना प्रमुख रहे जनरल अरुण श्रीधर वैद्य की हत्या तक को गिना दिया।

आपके मन में ये जज्ञासा ज़रूर जगी होगी कि सत्यपाल मलिक हैं कौन? अधिकतर लोगों ने उनका नाम तभी सुना होगा जब उन्हें सितंबर 2017 के अंत में बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया। अगले साल मार्च में उन्हें ओडिशा का अतिरिक्त प्रभार दिया गया और तीन महीने से अधिक समय तक उनके पास ही रहा। अगस्त 2018 में उन्हें जम्मू कश्मीर का राज्यपाल बना कर भेजा गया। जब वो एक केंद्र शासित प्रदेश बन गया तो उनका ट्रांसफर गोवा हुआ।

अगस्त 2020 में उन्हें मेघालय का राज्यपाल नियुक्त किया गया। इस तरह 3 सालों में ही उन्होंने 5 राज्यों का मुँह देख लिया। लेकिन, वो जिस भी राज्य में गए वहाँ अपने बयानों से सुर्खियाँ बटोरी। अब ‘किसान आंदोलन’ के समर्थन में बार-बार उनके बयानों से केंद्र सरकार असहज हुई। उन्होंने ये तक दावा कर दिया कि इंदिरा गाँधी ने स्वर्ण मंदिर में कार्रवाई के बाद अपने घर पर महामृत्युंजय यज्ञ कराया था और जब अरुण नेहरू ने उनसे पूछा कि वो तो इन सब में नहीं मानती हैं, इस पर उन्होंने कहा था कि उन्होंने सिखों का ‘अकाल तख़्त’ तोड़ा है, वो उन्हें नहीं छोड़ेंगे।

कौन हैं सत्यपाल मलिक? कैसा रहा है उनका राजनीतिक करियर

सत्यपाल मलिक का जन्म उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के हिसवाड़ा गाँव में हुआ था। उससे पहले के भी इतिहास की बात करें तो 300 साल पहले उनके पूर्वज पहले हरियाणा के रोहतक जिले के खरावड़ गाँव में रहा करते थे, जहाँ से उन्होंने पलायन किया था। सामान्य किसान परिवार में जन्मे सत्यपाल मलिक के ने पड़ोस में स्थित ढिकौली गाँव से इंटर तक की पढ़ाई पूरी की थी। उन्होंने छात्र जीवन से ही अपना राजनीतिक सफर शुरू किया और दो बार प्रधान चुने गए। मेरठ कॉलेज से उनकी सियासी पारी शुरू हुई थी, जहाँ वो दो बार छात्र संघ के अध्यक्ष रहे थे।

75 वर्षीय सत्यपाल मलिक मेरठ विश्वविद्यालय (अब चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी)से बीएससी और एलएलबी की पढ़ाई पूरी की थी। उन्हें दो प्रधानमंत्रियों का करीबी माना जाता था। चौधरी चरण सिंह और फिर वीपी सिंह का उन्हें वरदहस्त प्राप्त हुआ। वो कभी RSS से जुड़े नहीं रहे हैं, लेकिन भाजपा में वो राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद तक पहुँचे थे। वो दो बार राज्यसभा सांसद और एक बार लोकसभा सांसद रहे हैं। 1974-77 तक वो उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे। कई संसदीय समितियों में उन्हें जगह दी गई और कइयों के वो अध्यक्ष भी रहे।

भारतीय संसद द्वारा संचालित किए जाने वाले ‘सांविधानिक तथा संसदीय अध्ययन केंद्र (Institute of Constitutional and Parliamentary Studies)’ से उन्होंने संसदीय मामलों के अध्ययन में डिप्लोमा की डिग्री भी ले रखी है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कई पार्टियाँ बदली हैं। 1974 में जब वो बागपत से विधायक बने थे, तब उन्होंने चौधरी चरण सिंह के ‘भारतीय क्रांति दल’ से जीत दर्ज की थी। 1977 में आपातकाल के दौरान उन्होंने इसका विरोध किया, जिस कारण उन्हें इंदिरा गाँधी की सरकार ने जेल में डाल दिया था।

इसके बाद सत्यपाल मलिक चौधरी अजीत सिंह की ‘लोक दल’ से 1980 में राज्यसभा सांसद बने। 1985 तक वो इस पद पर रहे। 1985 में उन्होंने फिर से पाला बदला और कॉन्ग्रेस में चले गए। कॉन्ग्रेस ने भी उन्हें राज्यसभा सांसद बना दिया। हालाँकि, जब राष्ट्रीय राजनीति में वीपी सिंह का उद्भव हुआ तो उन्होंने उनका साथ देना उचित समझा और ‘जनता दल’ में शामिल हो गए। 1989 में इसी पार्टी के टिकट पर वो अलीगढ़ से सांसद चुने गए। प्रधानमंत्री वीपी सिंह की सरकार में उन्हें पर्यटन और संसदीय मामलों का केंद्रीय राज्यमंत्री बनाया गया।

गोवा राजभवन पर मौजूद सत्यपाल मलिक की प्रोफ़ाइल के अनुसार, उन्होंने 1965 में राम मनोहर लोहिया के समाजवाद से प्रेरित होकर राजनीति का रुख किया था। 1974 में उनकी जीत के बाद ‘भारतीय क्रांति दल’ ने उन्हें पार्टी का चीफ व्हिप नियुक्त किया था। जब वो कॉन्ग्रेस में गए, तब पार्टी ने उन्हें राज्यसभा सीट के साथ-साथ उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी में जनरल सेक्रेटरी का पद भी दिया। 1987 में उन्होंने बोफोर्स घोटाले का विरोध कर के कॉन्ग्रेस से भी नाता तोड़ लिया।

फिर उन्होंने खुद की पार्टी बनाई, जिसका नाम रखा गया था – ‘जन मोर्चा’। 1987 में इसका विलय ‘जनता दल’ में कर दिया गया और वो विश्वनाथ प्रताप सिंह के साथ घूम-घूम कर रैलियों में उनके पक्ष में चुनाव प्रचार करने लगे। ‘जनता दल’ ने उन्हें सेक्रेटरी और प्रवक्ता बना कर इनाम दिया। इसके बाद उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा शुरू होता है। 2004 में वो भाजपा में शामिल हुए और बागपत लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार नसीब हुई।

इस चुनाव में रालोद के अजीत सिंह की जीत हुई थी और सत्यपाल मलिक बसपा उम्मीदवार से भी पीछे तीन नंबर पर रहे थे। उन्हें मात्र 15.58% वोट नसीब हुए। जिस चौधरी चरण सिंह के कभी वो साथ थे, उनके बेटे के खिलाफ ही उन्होंने चुनाव लड़ा। हालाँकि, हार के बावजूद भाजपा ने उन्हें 2005 में यूपी में पार्टी का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया। 2009 में उन्हें भाजपा के ‘किसान मोर्चा’ का राष्ट्रीय प्रभारी बनाया गया। 2012 में उन्हें भाजपा ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया और 2014 में उन्हें पुनः इस पद के लिए चुना गया।

बतौर राज्यपाल अपने बयानों से जम कर बटोरी सुर्खियाँ

इसके बाद जब नरेंद्र मोदी की सरकार आई, तो पार्टी में पिछले 13 वर्षों से रहे सत्यपाल मलिक को राज्यपाल बनाया गया। ये वो समय था जब नीतीश कुमार की सरकार मुजफ्फरपुर में नाबालिग बच्चों के यौन शोषण मामलों में फँसी हुई थी। सत्यपाल मलिक ने मुख्यमंत्री को इस मामले को लेकर दो पत्र भेजे। इस शेल्टर होम कांड को उन्होंने दिल दहलाने वाला बताते हुए ऐसे उपाय करने के सुझाव दिए, जिससे ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने तत्कालीन केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भी इस मामले को लेकर पत्र लिखे।

लेकिन, जब वो जम्मू कश्मीर पहुँचे तो उन्होंने वहाँ आतंकी हत्याओं की तुलना बिहार में अपराध से कर डाली। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर अन्य राज्यों की तरह ही है और यहाँ कोई नरसंहार नहीं हो रहा है। जनवरी 2019 में दिए गए बयान में उन्होंने कहा कि एक दिन में पटना में जितनी हत्याएँ होती हैं, वो जम्मू कश्मीर में एक सप्ताह में होने वाली हत्याओं के बराबर है। उन्होंने दावा किया था कि पत्थरबाजी और आतंकी संगठनों में युवाओं का भर्ती होना रुक गया है।

उन्होंने कश्मीर के आतंकियों को भी सार्वजनिक रूप से सलाह देते हुए कह दिया था कि जो युवा ‘गैर-जरूरी रूप से’ पुलिस वालों की हत्याएँ कर रहे हैं, उन्हें उनको मारना चाहिए जिन्होंने देश और कश्मीर के धन को लूटा है। बाद में उन्होंने इसे अपनी व्यक्तिगत सोच बताते हुए माफ़ी माँगते हुए कहा था कि एक राज्यपाल के रूप में उन्हें ऐसा नहीं कहना चाहिए था। गोवा में जाते उन्होंने जम्मू कश्मीर की बुराई शुरू कर दी। उन्होंने कह दिया कि वो एक समस्याओं वाले राज्य से आ रहे हैं, जिनसे वो सफलतापूर्वक निपटे।

उन्होंने गोवा को शांतिपूर्ण और विकासशील जगह बताते हुए कहा कि वो शांति से अब यहाँ समय व्यतीत करेंगे, क्योंकि गोवा का नेतृत्व विवादित नहीं है। उन्होंने कहा कि उनसे पहले जो जम्मू कश्मीर के राज्यपाल हुए वो शराब पीते थे और गोल्फ खेलते थे। उन्होंने कहा था, “गवर्नर का कोई काम नहीं होता। कश्मीर में जो गवर्नर होता है अक्सर वो दारू पीता है और गोल्फ खेलता है। बाकी जगह जो राज्यपाल होते हैं वो आराम से रहते हैं, किसी झगड़े में नहीं पड़ते।”

इसके बाद गोवा सरकार से भी उनकी ठन गई और उन्होंने मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की सरकार पर कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक से न निपट पाने का आरोप मढ़ दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सही निर्णय नहीं लिए और मुख्यमंत्री को अब पद छोड़ देना चाहिए। मेघालय में जाते सत्यपाल मलिक ‘किसान आंदोलन’ वाले विवाद में पड़ गए और लगातार प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया। गोवा में उन्होंने प्रमोद सावंत सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा दिए, जिससे विपक्ष को मुखर होने का मौका मिल गया।

हाल ही में एक इंटरव्यू में सत्यपाल मलिक ने राज्यपाल का पद छोड़ने से इनकार कर दिया। साथ ही वो इंटरव्यू से निकल भी गए। पत्रकार सुशांत सिन्हा ने इस इंटरव्यू के बाद कहा कि सत्यपाल मलिक को कुर्सी बड़ी प्यारी हैं। सत्यपाल मलिक ये कह कर भी सनसनी मचा चुके हैं कि RSS नेता से जुड़े जमीन की डील को आगे न बढ़ाने के कारण उन्हें जम्मू कश्मीर से हटा दिया गया, जिसके लिए उन्होंने 300 करोड़ रुपए बतौर घूस ऑफर किए गए थे। बाद में उन्होंने RSS का नाम घसीटने को लेकर माफ़ी माँग ली थी।

निकाह के बाद नाबालिग बेटी को घर पर लाया नान्हू खान, 2 साल तक किया बलात्कार: पॉक्सो कोर्ट ने सुनाई फाँसी की सजा

उत्तर प्रदेश के बहराइच में नाबालिग बेटी के साथ दरिंदगी करने वाले नान्हू खान को फाँसी की सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही 51 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम/ रेप एंड पॉक्सो एक्ट के तहत नितिन पांडेय ने नाबालिग बेटी से रेप करने वाले उसके 40 वर्षीय अब्बा को मौत की सजा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बहराइच के सुजौली थाना क्षेत्र में रहने वाली नाबालिग लड़की की माँ ने अपने शौहर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।

बीते 25 अगस्त को स्थानीय पुलिस उसका शिकायती पत्र पढ़कर हैरान रह गई। अपनी शिकायत में पत्नी ने बताया कि उसके शौहर पिछले दो साल से जबरन उसकी 14 साल की बेटी के साथ रेप कर रहा है। रात को बच्ची की चीखने की आवाज सुनकर माँ और उसके बेटे ने नान्हू खान को दरिंदगी करते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। इसके बाद पुलिस ने रेप व पॉक्सो के तहत दुष्कर्मी पिता के खिलाफ केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया और मामले की जाँच शुरू कर दी।

पत्नी ने अदालत को बताया कि उसके शौहर ने समाज को दिखाने के लिए बेटी का निकाह कर दिया था, लेकिन बाद में वह उसे वापस अपने घर ले आया। वह हर रोज उसका बलात्कार करता। कई बार समझाने के बाद भी नहीं मानने पर पत्नी ने अपने शौहर के खिलाफ केस दर्ज करवाया।

लड़की के भाई ने भी कोर्ट में अपने पिता की करतूत के खिलाफ गवाही दी थी। विशेष जिला शासकीय अधिवक्ता पॉक्सो संत प्रताप सिंह ने इस गंभीर मामले में न्यायाधीश से दुष्कर्मी को कड़ी से कड़ी सजा देने की माँग की थी।

इस्लामी समर्थक स्तंभकार ने ‘मुस्लिमों को बचाने’ के नाम पर भारतीय उत्पादों के बहिष्कार की अपील की

भारत के प्रति नफरत और फेक न्यूज फैलाने के लिए स्तंभकार सीजे वेरलेमैन (CJ Werleman) अपने विवादास्पद बयान के कारण सुर्खियों में हैं। स्वघोषित ‘इस्लामोफोबिया क्रूसेडर’ वेरलेमैन ने मंगलवार (23 नवंबर 2021) को ट्विटर पर अपने फॉलोअर्स से मुस्लिमों को बचाने के लिए भारतीय उत्पादों का बहिष्कार करने की अपील की।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “भारत और कश्मीर में मुस्लिमों को बचाओ: भारतीय उत्पादों का बहिष्कार करो।” वेरलेमैन ने एक पुराना वीडियो भी शेयर किया है, जो इस साल 13 अक्टूबर का है।

CJ Werleman के ट्वीट का स्क्रीनग्रैब

इससे पहले सीजे वेरलेमैन ने कहा था कि भारत और जम्मू-कश्मीर में रहने वाले मुस्लिमों पर कथित ‘दुर्व्यवहार’ के लिए बढ़ता अंतरराष्ट्रीय दबाव और बहिष्कार भारत में अब कैंपेन का रूप ले चुका है। सीजे ने खेद व्यक्त किया था कि पश्चिमी लोकतंत्र और मुस्लिम बहुल देश भारतीय मुस्लिमों को बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में ले जाने की मोदी सरकार की कथित पहल के लिए मूकदर्शक बने हुए हैं।

सीजे वेरलेमैन ने आरोप लगाया कि असम के दरांग जिले में बेदखली अभियान के दौरान विजय शंकर बनिया नाम के एक फोटो जर्नलिस्ट द्वारा एक अवैध अतिक्रमणकारी के शव पर कूदने के बाद भारत दुनिया भर की सुर्खियों में छा गया। द सियासत डेली के एक लेख का हवाला देते हुए, स्तंभकार ने कहा कि कुवैत ने ‘भारतीय अधिकारियों और हिंदू चरमपंथियों’ द्वारा मुस्लिमों के खिलाफ किए गए कथित अत्याचारों की निंदा की थी। उन्होंने दोहराया कि भारतीय उत्पादों के बहिष्कार का वैश्विक अभियान चल रहा है।

हिंदू कार्यकर्ता समूह पर आरोप लगाया गया

इससे पहले 21 अक्टूबर को फेक न्यूज पेडलर सीजे वेरलेमैन ने हिंदू कार्यकर्ता समूह श्री रमा सेने के प्रमुख प्रमोद मुतालिक का एक वीडियो ट्वीट किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्होंने मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा और कर्नाटक में एक मस्जिद को गिराने का आह्वान किया था। उन्होंने लिखा था, “हिंदुत्व समूह श्री राम सेना के नेता ने मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा और कर्नाटक में जामा मस्जिद को गिराने का आह्वान किया।”

टेनिस दिग्गज भी CJ Werleman द्वारा फैलाई गई फर्जी खबरों की शिकार हुईं

यहाँ तक ​​कि टेनिस की दिग्गज खिलाड़ी मार्टिना नवरातिलोवा भी उनकी फर्जी खबरों की शिकार हो चुकी हैं। ऑपइंडिया ने पहले बताया था कि कैसे लेफ्ट-लिबरल न्यूज वेबसाइटों ने झूठा दावा किया था कि प्रमोद मुतालिक ने कर्नाटक के गडग में जामा मस्जिद का हाल ‘बाबरी मस्जिद‘ जैसा करने का आह्वान किया था। हालाँकि, हकीकत में उन्होंने ऐसा कोई दावा नहीं किया था।

बता दें कि वेरलेमैन एक आदतन फेक न्यूज पेडलर हैं, जो भारत के प्रति नफरत फैलाकर अपना टाईम पास करते हैं। इससे पहले सितंबर में, उन्होंने भारत के खिलाफ ‘regime decapitation‘ हड़ताल का आह्वान किया था।

अक्सर हिंदू घृणा से सने ट्वीट करने वाले और इस्लामी समर्थक सीजे वेरलेमैन के ऊपर शेखर गुप्ता की वेबसाइट ने प्रोफाइल किया, उसे एक पत्रकार के रूप में घोषित किया। सच्चाई यह है कि सीजे वेरलेमैन एक स्तंभकार है, जगह-जगह अपने लेख छपवाता है।

नोट: इस खबर में सीजे वेरलेमैन को पहले शेखर गुप्ता की वेबसाइट “द प्रिंट” का स्तंभकार लिखा गया था, जो एक भूल थी। संपादकीय स्तर पर हुई भूल को अब सुधार लिया गया है।