Home Blog Page 3285

‘मेरे पति गलत नहीं, ये हम बर्दाश्त नहीं करेंगे: नवाब मलिक को समीर वानखेड़े की पत्नी का जवाब, शेयर की थी वसूली वाली चिट्ठी

महाराष्ट्र के मंत्री और एनसीपी नेता नवाब मलिक ने ट्विटर पर एनसीबी के एक अनाम अधिकारी की चिट्ठी साझा की थी। इसमें एनसीबी के ज्वाइंट डायरेक्टर समीर वानखेड़े पर बॉलीवुड स्टार्स से वसूली का आरोप लगाया गया है। इस मसले पर मलिक को वानखेड़े की पत्नी क्रांति रेडेकर ने जवाब दिया है।

क्रांति रेडेकर ने कहा है कि इस तरह के पत्र का कोई मतलब नहीं है। उनके पति गलत नहीं है और इसे वे बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने इस मसले पर कोर्ट जाने से इनकार करते हुए कहा कि जो लोग आरोप लगा रहे हैं उनको अदालत जाना चाहिए। क्रांति ने कहा, “हम करोड़पति नहीं हैं। हम साधारण लोग हैं। समीर एक ईमानदार अधिकारी हैं। कई लोग हैं जो चाहते हैं कि उनको हटा दिया जाए।”

वहीं मलिक द्वारा वानखेड़े के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर एजेंसी के महानिदेशक मुथा अशोक जैन ने आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया है। मुंबई में एनसीबी कार्यालय के बाहर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मैंने उस पत्र को देखा है। हम आवश्यक कार्रवाई करेंगे।”

क्या है पूरा मामला

महाराष्ट्र के मंत्री और एनसीपी नेता नवाब मलिक ने ट्विटर पर एक पत्र साझा कर वानखेड़े पर नए आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि यह पत्र उन्हें एनसीबी के एक अनाम अधिकारी से मिला है। चार पन्नों के पत्र में वानखेड़े पर बॉलीवुड स्टारों से वसूली करने के आरोप लगाए गए हैं। मलिक ने अपने ट्वीट में बताया है कि वे इस पत्र को डीजी नारकोटिक्स को भेज रहे हैं। यह पत्र वानखेड़े के खिलाफ एनसीबी की जाँच का हिस्सा होना चाहिए। पत्र में अनाम अधिकारी ने कहा है कि वह बीते दो साल से एनसीबी के मुंबई कार्यालय में तैनात है।

पति की छवि खराब करने को लेकर कीर्ति ने Koimoi को लताड़ा था

हाल ही में समीर वानखेड़े की पत्नी क्रांति रेडकर वानखेड़े ने वेबसाइट Koimoi.com द्वारा प्रकाशित एक समाचार की क्लिपिंग साझा की थी। इसमें उन्होंने न्यूज वेबसाइट पर उनकी और उनके पति की छवि खराब करने के इरादे से भ्रामक हेडलाइन देने का आरोप लगाया था। Koimoi.com द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के शीर्षक का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए क्रांति रेडकर ने ट्वीट किया, “प्रिय @Koimoi आप यहाँ क्या कर रहे हैं? केवल कुछ व्यूज के लिए आपने भ्रामक शीर्षक दिया है, क्यों? इस केस को मैं पहले ही अदालत में लड़कर जीत चुकी हूँ। मैंने पूरी रिपोर्ट पढ़ी, इसमें गलत पहचान की बात कही गई है, फिर भी यह शीर्षक क्यों? मेरी या समीर की प्रतिष्ठा को चोट पहुँचाने के लिए। सिर्फ पैसे के लिए?”

‘मस्जिद तोड़ कर बनाए गए मंदिर में मेरा राम नहीं बस सकता’: अयोध्या पहुँचे केजरीवाल तो लोगों ने याद दिलाई ‘नानी’

अब तक राम मंदिर को कोसते आए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अयोध्या जाकर रामलला का दर्शन किया। इस दौरान AAP सुप्रीमो ने सरयू आरती में भी हिंसा लिया। साथ ही उन्होंने लोगों को अयोध्या के मुफ्त में दर्शन कराने का भी वादा किया। नए-नए ‘रामभक्त’ बने अरविंद केजरीवाल ने हनुमानगढ़ी में हनुमान जी का भी दर्शन किया और अयोध्या को ‘श्री राम की पवित्र जन्मस्थली’ बताया।

लेकिन, क्या आपको पता है कि इससे पहले अरविंद केजरीवाल राम मंदिर को लेकर क्या-क्या कहते आए हैं? भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें अयोध्या और राम मंदिर को लेकर अरविंद केजरीवाल के पुराने बयान दिखाए गए हैं। दिल्ली में उनकी सरकार ने मुल्ले-मौलवियों के वेतन में इजाफा किया है और उनकी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान अक्सर इस्लामी कट्टरपंथी बयान देते रहते हैं।

अरविंद केजरीवाल ने एक रैली में कहा था, “जब बाबरी मंदिर का ध्वंस हुआ तब मैंने अपनी नानी से पूछा कि नानी आप तो अब बहुत खुश होंगी? अब तो आपके भगवान राम का मंदिर बनेगा। नानी ने जवाब दिया – ना बेटा, मेरा राम किसी की मस्जिद तोड़ कर ऐसे मंदिर में नहीं बस सकता।” केजरीवाल ने मार्च 2014 में ये बयान दिया था। एक अन्य बयान में उन्होंने ‘मंदिर वहीं बनाएँगे, पर तारीख़ नहीं बताएँगे’ वाले नैरेटिव को आगे बढ़ाया था।

अरविंद केजरीवाल ने तब कहा था, “अब ये बार-बार भाजपा ने भी कहना चालू कर दिया है कि मंदिर वहीं बनाएँगे, मंदिर वहीं बनाएँगे। हम पूछते हैं कि कब बनाओगे? तो वो जवाब देते हैं कि तारीख़ नहीं बताएँगे। लेकिन, हर 5 साल बाद कहते हैं कि मंदिर वहीं बनाएँगे।” वहीं 2018 में उन्होंने कहा था कि अगर प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने ‘स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ की जगह मंदिर बनाया होता तो देश का विकास नहीं होता।

वहीं दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा, “अयोध्या में राम लला के मंदिर में आज केजरीवाल को सिर झुकाना पड़ रहा है। ये नमन केवल रामलला को नहीं , 6 दिसम्बर 1992 के घटनाक्रम, कारसेवकों के पराक्रम को नमन है। ये हनुमान जैसे कारसेवकों का पराक्रम है कि आज के कालनेमि और मारीच भी राम-नाम जप रहे है।” दिल्ली भाजपा के उपाध्यक्ष अशोक गोयल ने कहा कि केजरीवाल की राजनीति से गिरगिट को भी शर्म आ जाए।

वहीं दिल्ली भाजपा ने तंज कसा, “बाबरी के समर्थक, श्री राम मंदिर के विरोधी, दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल अब चुनावों के चलते भगवान श्री रामलला के दर्शन करने अयोध्या जी जाने पर मजबूर हैं। केजरीवाल जी, सच में आप दोहरे चरित्र के धनी हैं।” कई लोगों ने दीवाली पर दिल्ली में पटाखों को प्रतिबंधित किए जाने के उनके फैसले की याद दिलाई। लोगों ने याद दिलाया कि यही AAP अयोध्या में राम मंदिर की जगह स्कूल और अस्पताल की बातें कर रही थी।

बिजली की समस्या से सिर्फ बीमारी ही नहीं मौत भी झेल रहे पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थी: आदर्श नगर कैंप का आँखों देखा हाल

उत्तरी दिल्ली के आदर्श नगर इलाके में मजलिस पार्क में रह रहे 200 पाकिस्तानी हिन्दू परिवारों का हाल जानने जब ऑपइंडिया की टीम पहुँची तो चारो तरफ फैले कीचड़, नाले का पानी, कूड़े का ढेर, गन्दगी, मच्छर और आस-पास दूसरी बस्तियों के टहलते मैले से सने सूअरों को देखकर थोड़ी देर के लिए एक सिहरन सी हुई कि यहाँ कितने बद्तर हालात में रह रहे हैं लोग। जहाँ न बिजली है, न पीने को स्वच्छ जल। कुछ कम्युनिटी शौचालय नजर तो आए लेकिन पीने के लिए पानी ही जब बड़ी मुश्किल से टैंकरों के जरिए लाइन लगाकर मिलता हो तो वहाँ के शौचालय की हालत देखने की हिम्मत नहीं हुई।

ऐसी विपरीत परिस्थियों में रहने को मजबूर यहाँ के 800 से अधिक लोगों की पिछले 8 सालों से चली आ रही बिजली की माँग भी सरकारी नियमों के मकड़जाल में फँसकर हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा ठुकरा दी गई थी। दयनीय हाल देखकर लगा कि देश की राजधानी दिल्ली में भी जब पाकिस्तान में बहुसंख्यक मुस्लिमों द्वारा सताए गए इन हिन्दुओं को राहत मिलता नजर नहीं आ रहा है तो और कहाँ किससे उम्मीद की जाए। ऐसे में हमने अपनी पत्रकारिता की जिम्मेदारियों को समझते हुए कैंप के लोगों से ही मुलाकात कर उनकी अब तक झेली गई ज़िंदगी को आपके सामने रखने का फैसला किया।

पाकिस्तानी हिन्दुओं के आदर्श नगर कैंप में वहाँ के प्रधान नेहरू लाल से मिलने से पहले, हमने कुछ महिलाओं, बच्चों से उनका हाल और उनके भारत आने की वजह जाननी चाही। कैंप में ज्यादातर पाकिस्तान के सिंध सूबे के हैदराबाद से हरिद्वार तीर्थयात्रा के बहाने एक बेहतर ज़िन्दगी की उम्मीद में भारत आए हैं। उनका साफ कहना है, “और कहाँ जाते? मुस्लिमों के सताए हुए हैं कौन सा मुस्लिम देश हमें अपना लेगा। हम हिन्दुओं का एक ही देश है भारत, अगर हम यहाँ भी आराम से न रह सके तो मौत ही अच्छी। अब तो बस यहाँ इस उम्मीद में दिन काट रहे हैं कि एक दिन सब अच्छा होगा। हमें भी CAA के तहत नागरिकता मिलेगी, बच्चों का भविष्य आगे बढ़ेगा। अभी भी उम्मीद है लेकिन…” कहकर जब वो महिला रुकी तो उसके मौन ने भी उस नाउम्मीदी की तरफ इशारा किया जिसे वहाँ साफ देखा जा सकता था।

आदर्श नगर पाकिस्तानी हिन्दू कैंप के नाउम्मीद शरणार्थी

कोई नाउम्मीद हो भी क्यों न? जब पिछले 8-10 सालों से कैंप में जीवन के लिए मिनिमम जरुरी सुविधाएँ भी न हों। चाहे वो पीने के लिए साफ पानी की समस्या हो, उचित शौचालय की या फिर बिजली की, बिजली की इसलिए भी क्योंकि इससे न सिर्फ गर्मियों-बरसातों में उन्हें साँप-बिच्छू का प्रकोप झेलना पड़ता है बल्कि मच्छरों से घिरे होने के कारण डेंगू-मलेरिया के साथ-साथ कुछ दूसरी पानी जनित बिमारियों का भी शिकार होकर मौत का सामना करना पड़ा।

वहाँ कैंप के मास्टर मूलचंद ने पूरे कैंप की बदहाली, कच्चे मकानों के निर्माण की लागत, उनके ढहने और असुरक्षित होने की कई समस्याओं के साथ वहाँ अक्सर घुटने तक लगने वाली नाले की पानी की समस्या के बारे में भी उन्होंने हमें विस्तार से बताया खासतौर से बारिश में झेले जाने वाले अपने उस दौर के बारे में जब बस्ती में घुटने से ज़्यादा पानी भर जाता है और ये लोग सड़क पर होते हैं। वहाँ से भी इन्हें वापस खदेड़ दिया दिया जाता है क्योंकि उनके पास कोई लिखित परमीशन नहीं होता। अक्सर बस्ती में रुके पानी और आस-पास की गंदगी की वजह से वहाँ रहने वाले लोग मच्छरों के प्रकोप के कारण डेंगू और मलेरिया के शिकार होते हैं।

आदर्श नगर कैंप में अभी कीचड़ पसरा था

इन सब पर आगे हमने वहाँ के प्रधान से नेहरू लाल से बात की जो उस समय बारिशों में टूट गई मंदिर को फिर से खड़ा करने और बनाने-सजाने में लगे थे। कैंप के काली मंदिर को दिवाली से पहले ठीक करने में वो अपने कुछ साथियों के साथ खुद जुटे हुए थे। हमने जब उनसे बात करनी चाही तो एक निराशा उनकी आँखों में दिखी, छूटते ही उन्होंने कहा, “पिछले 8 सालों से (2013 से) हम यहाँ रह रहे हैं बहुत लोगों से बात कर ली, कई नेताओं से मिले हर्षवर्धन जी भी यहाँ आए थे, यहाँ के केजरीवाल सरकार के विधायक के पास भी गए थे, मनोज तिवारी के पास भी गए लेकिन कुछ नहीं हुआ। हमारी गलती क्या है? यह भी कोई नहीं बताता अब तो हमें यहाँ से निकालने की भी तैयारी हो रही है। उधर पाकिस्तान में हमारा सब कुछ ख़त्म हो गया है और अब यहाँ से भी निकाल दिए गए तो कहाँ जाएँगे?”

ऑपइंडिया की टीम ने जब उनसे कहा कि हम आपकी बात एक नए सिरे से लोगों के सामने रखेंगे, क्या पता लोगों के दबाव और समर्थन के कारण आपकी उम्मीदों को रोशनी मिल जाए, कोई समाधान निकल आए। पिछले कई सालों से आपकी दिवाली में अँधेरा है शायद इस बार रोशनी की कोई किरण हाथ लग जाए। ऐसी बातें कहना आसान नहीं होता वो भी उनसे जो पिछले कई सालों से सरकारी नियमों, वैध-अवैध प्रमाण पत्रों और कागजों के जंजाल में उलझकर निराशा के एक अलग ही स्तर पर चले गए हैं। पूछते हैं कि कोई तो बताए हमारी गलती क्या है? हम क्या करें?

हमने उनसे निवेदन किया कि एक बार फिर आप अपनी पूरी समस्या हमें बताइए हम उसे वैसे ही देश के सामने रखेंगे। पहले आप उन्हें ही सुनिए—

आपने वीडियो में देखा होगा कैसे पाकिस्तान में बहुसंख्यक मुस्लिमों द्वारा सताए इन पाकिस्तानी हिन्दू परिवारों की मुश्किलें यहाँ बिलकुल भी कम नहीं हुई हैं। क्या राज्य की केजरीवाल सरकार, क्या केंद्र… दोनों मिलकर भी देश की राजधानी दिल्ली के उत्तर में पाकिस्तान से 2011 के बाद से ही अलग-अलग समय पर आए हिन्दू शरणार्थियों के तीन कैम्पों- मजलिस पार्क आदर्श नगर, मजनू का टीला और सिग्नेचर ब्रिज के करीब 450 परिवारों के कुल 1800-1900 हिन्दुओं के जीवन के लिए जरूरी मूलभूत सुविधाओं को भी उपलब्ध नहीं करा पाईं हैं।

बिजली, पानी, शौचालय जैसी कई बेसिक सुविधाओं के लिए यह लोग 2013 से ही प्रयासरत हैं। हालाँकि इन कैम्पों में प्रधानमंत्री स्वच्छता मिशन के तहत कुछ शौचालयों का निर्माण हुआ है लेकिन बिजली की समस्या अभी भी बनी हुई है। ऐसे में टैंकर के भरोसे रहने वाले इन लोगों के शौचालयों का हाल आप समझ सकते हैं जो इनकी कई दूसरी समस्याओं की वजह भी है-फिर चाहे वह स्वास्थ्य से जुड़ी हो, शिक्षा से या साँप-बिच्छुओं से सुरक्षा से। ये लोग जो बड़ी मुश्किल से मोबाइल कवर-टेम्पर बेचकर, दिहाड़ी मजदूरी करके अपनी आजीविका चला रहे हैं फिर भी दिल्ली में मुफ्त की नहीं बल्कि बिजली का बिल चुका कर, बिजली की माँग कर रहे हैं।

कैंप के प्रधान नेहरू लाल का साफ कहना है, “हमें बताया गया कि यह दिल्ली जल बोर्ड की जमीन है। हमें पता नहीं कोई नोटिस नहीं आया हमें, होगी किसी न किसी की, सरकार की जमीन है, पाकिस्तान से सर पर उठाकर तो हम लाए नहीं है। हम यहाँ कब्जा तो नहीं कर रहे हैं लेकिन जब तक हम यहाँ हैं तब तक तो हमें बिजली-पानी की सुविधा दे दो। जिससे इलाज का हमारा खर्चा भी बचेगा। आगे आप जब भी हमें जहाँ भेजना हो भेज देना हम वहाँ ख़ुशी-खुशी रहने चले जाएँगे।”

हमने थोड़ी पड़ताल की और कैंप के प्रधान से पूछा तो उन्होंने बताया कि तीन-चार साल पहले किसी तरह पैसे देकर जहाँगीरपुरी से इन्हें दो-तीन महीने बिजली मिली थी लेकिन वो भी केजरीवाल सरकार ने कटवा दी थी। यह बात 2018 की है। तभी यह बात भी आई थी कि दिल्ली जल बोर्ड की यह जमीन दिल्ली सरकार ने डिफेंस को दे दी है। जिसे उन्हें खाली कराकर देना था। और यही जमीन की मालकियत ही दिल्ली हाईकोर्ट के हालिया फैसले में उनकी संवैधानिक तरीके से बिजली की माँग को ख़ारिज करने की वजह भी बनी।

तब जब आदर्श नगर कैंप में रहने वाले हिन्दू शरणार्थियों की चंद दिनों के लिए आई बिजली दिल्ली सरकार ने काटी थी तो उस समय भी सोशल मीडिया पर एक आक्रोश उठा था। बात 2018 की ही है तब कई लोगों ने ट्वीट करते हुए केजरीवाल सरकार को लताड़ा था। लेकिन उसके बाद भी इस समस्या का कोई समाधान हमारी सरकारी मशीनरी ने निकालने की कोई जहमत नहीं उठाई।

गौरतलब है कि बिजली के सपने को साकार करने के लिए आदर्श नगर कैंप के लोगों ने कुछ एक्टिविस्टों की मदद से दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका डाली थी। जिस पर इसी महीने के 22 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने ही 200 पाकिस्तानी हिंदू प्रवासी परिवारों के लिए बिजली कनेक्शन की माँग वाली याचिका का दिल्ली हाईकोर्ट में विरोध किया है।

सरकारी नियमों के चंगुल में फँसे यह शरणार्थी पिछले महीने से इस उम्मीद में थे कि शायद उनकी यह दिवाली रौशन हो, लेकिन अब दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल जवाब में बताया गया है कि यह शरणार्थी कैंप दिल्ली जल बोर्ड की जमीन पर अवैध अतिक्रमण है। जो वर्तमान में डिफेन्स की जमीन है। जिससे इन्हें बिजली कनेक्शन की मंजूरी नहीं मिल सकती।

बता दें कि अदालत ने पिछले महीने ही दिल्ली सरकार और केंद्र को पाकिस्तान से पलायन करने वाले हिन्दू परिवारों के लिए राहत की माँग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया था। जिस पर 22 अक्टूबर, 2021 को हुई सुनवाई में केंद्र ने अदालत को बताया है कि अगस्त 2018 में 70.253 एकड़ भूमि रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन को हस्तांतरित की गई थी और वह संबंधित जिला प्रशासन और पुलिस के साथ रक्षा भूमि पर अनधिकृत कब्जे और अतिक्रमण को हटाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।

ऐसी अनगिनत समस्याओं के बीच राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS), सेवा भारती, बजरंग दल, हिन्दू सेवा संघ जापान (HSS Japan) के साथ ही कुछ छिट-पुट NGO भी समय-समय पर पाकिस्तान से आए इन हिन्दुओं के लिए उम्मीद की किरण हैं। इसमें से खासतौर से HSS जापान अर्थात हिन्दू सेवा संघ जापान की जो आदर्श नगर के कैंप में एक तय मॉडल के तहत बच्चों-महिलाओं को क्रिएटिव एक्टिविटी, नृत्य, संगीत और भजन की शिक्षा के साथ ही स्किल डेवलॅपमेन्ट के तहत सिलाई और ब्यूटीपार्लर की बुनियादी जानकारी और प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें आजीविका के लिए सक्षम बना रही है।

चलते-चलते बस यही कहना है कि जो भी सक्षम अधिकारी हों, सरकार में बैठे लोग हों वो इनकी सुध लें क्योंकि आज भी और आगे भी हिन्दुओं की एक मात्र शरणस्थली भारत ही होगी जिनसे किसी भी देश में सताया जा रहा हिन्दू अंतिम रूप से भारत की ओर ही आशा की नजरों से देखेगा। और अगर अपने इस गौरवशाली देश में भी उसे निराश होना पड़ा तो इस निराशा की कीमत कई पीढ़ियों को चुकानी होगी।

डाबर ने ‘लेस्बियन करवा चौथ’ वाला विज्ञापन वापस लिया तो नाराज हो गईं पूजा भट्ट, कहा- बस यही करते रहो

डाबर ने माफी माँगते हुए लेस्बियन कपल के करवा चौथ मनाने वाला विज्ञापन वापस ले लिया है। यह बॉलीवुड अभिनेत्री पूजा भट्ट को बेहद नागवार गुजरा है और उन्होंने कंपनी पर अपना गुस्सा व्यक्त किया है। उन्होंने लोकतंत्र की दुहाई देते हुए डाबर के अपने विज्ञापन पर पीछे हटने के लिए आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि डाबर जैसी दिग्गज कंपनी को अपने स्टैंड पर कायम रहना चाहिए था। उसे इस तरह से पीछे नहीं हटना चाहिए था। 

उन्होंने ट्वीट किया, “बस यही करते रहो, स्लैम, बम, बैन। डाबर जैसी दिग्गज कंपनी ने अपने विज्ञापन के साथ खड़े होने से इनकार कर दिया। मैं सैद्धांतिक तौर पर फेयरनेस क्रीम का समर्थन नहीं करती। फिर भी मैंने प्रतिक्रिया नहीं दी क्योंकि वे बराबरी और गर्व को सेलिब्रेट कर रहे थे, लेकिन अब क्यों छुपाना?”

बता दें कि करवा चौथ से जुड़े फेम ब्लीच विज्ञापन पर विवाद गहराने के बाद डाबर ने इसे वापस लिया था। डाबर ने सोमवार (25 अक्टूबर 2021) को एक बयान जारी कर इस विज्ञापन को वापस लेने की जानकारी दी। कंपनी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर लोगों की भावनाएँ आहत होने पर दुख जताया और इसके लिए माफी भी माँगी।

करवा चौथ को ध्यान में रखते हुए डाबर ने फेयरनेस प्रोडक्ट फेम का एक विज्ञापन जारी किया था जिसमें दो समलैंगिक महिलाएँ एक-दूसरे के लिए व्रत रखती दिखाई दी थीं। मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी इसकी आलोचना की थी और कार्रवाई की धमकी दी थी। वहीं सोशल मीडिया पर भी इसे हिंदुओं के त्याहारों को निशाना बनाने को लेकर ट्रोल किया गया। लोगों ने आक्रोश जताते हुुए सवाल किया था कि क्या त्योहारों को उसी रूप में नहीं रहने देना चाहिए, जिस रूप में हम उन्हें मनाते आ रहे हैं? हमेशा हिंदू त्योहारों से ही क्यों छेड़छाड़ की जाती है, मुस्लिम या ईसाई त्योहारों से क्यों नहीं? विवाद बढ़ने के बाद डाबर ने इस विज्ञापन को वापस ले लिया और माफी माँग ली, लेकिन इसके बाद भी सोशल मीडिया यूजर्स का आक्रोश कम नहीं हुआ है।

जब सोशल मीडिया नहीं था, तब Pak की जीत का जश्न घरों में मनाते थे: शरजील इमाम का पुराना पोस्ट हुआ वायरल

भारत-पाकिस्तान के टी-20 वर्ल्ड कप मैच के बाद शरजील इमाम का एक पोस्ट वायरल हो रहा है। ये पोस्ट 19 जून 2017 का है। इसमें उसने बताया था कि जब सोशल मीडिया नहीं था तो उनके समुदाय के लोग पाकिस्तान की जीत को घरों में और पड़ोसियों के साथ सेलिब्रेट करते थे।

इस पोस्ट में इमाम ने कहा था, “सोशल मीडिया पर हमारे कई नौजवान पाकिस्तान की क्रिकेट में जीत की खुशी मना रहे हैं। पहले सोशल मीडिया नहीं था तो घर पे, गलियों में मनाते थे। बचपन में कई बार मैं इनमें शरीक भी रहा हूँ। हालाँकि 12 साल से मैंने न क्रिकेट देखा है और न खुशी मनाई है।”

इमाम ने आगे लिखा, “अब कुछ लोगों को तकलीफ है कि ये है कि ये भक्तिवाद के उलट है और भक्तों को मौका देता है कि हमें पाकिस्तानी पुकारने का। कुछ ने ये भी कह दिया कि देखो जमशेदपुर में हमला कर दिया, 80 दुकानें जला दीं, क्यों बहाने देते हो। पहली बात तो ये कि वो आपको हर हाल में पाकिस्तानी समझते हैं, देशभक्त मुसलमान अपने मुगालते से निकलें।”

शरजील इमाम का पोस्ट

फिर इमाम कहता है, “दूसरी बात कि जब बचपन से हमें सब्जीबाग पटना में सईद अनवर की बीवी के नाम शक्ल सूरत सब की खबर थी और गांगुली के बारे में कम जानते थे तो उसकी कोई वजह ही रही होगी। वजह पता कीजिए।”

तीसरी बात समझाते हुए वह पोस्ट कहता है, “ये टीम इंडिया नहीं टीम बीसीसीआई है। एक प्राइवेट टीम जो कि बड़े कॉर्पोरेट करप्शन कि एक टूल है, जिसका नोटिस सुप्रीम कोर्ट ने भी लिया है। पाकिस्तान की टीम तो कम से कम सरकारी है। बहरहाल सबको हक है अपने हीरोज बनाने का और मेरा पहला पसंदीदा शायर इकबाल लाहौरी था और पहला बॉलर वसीम अकरम। ऊपर से हम थे भी लेफ्ट आर्म।”

यहाँ बता दें कि शरजील इमाम द वायर, द क्विंट और फर्स्टपोस्ट जैसे वामपंथी पोर्टल्स का स्तंभकार रहा है। उसने जामिया नगर में दंगों के लिए भड़काऊ बयानबाजी की थी। बाद में पुलिस ने उसे 28 जनवरी 2020 को बिहार से पकड़ा था।

4 साल पहले शरजील इमाम ने जैसे इस पोस्ट में दावा किया है कि ‘उनके नौजवान’ पाकिस्तान की जीत का जश्न मनाते हैं। वैसा ही नजारा 24 अक्टूबर को हुए मैच के बाद देखने को मिला था। पंजाब के संगरूर में भी कश्मीरी छात्रों ने पाकिस्तान की जीत पर जश्न मनाया था। इसी तरह कश्मीर में भी पाक के जीतने पर पटाखे फूटे जिसके बाद पुलिस ने ऐसा करने वालों के ख़िलाफ़ यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया

‘सबसे अच्छी बात मोहम्मद रिजवान ने की, ग्राउंड पर हिन्दुओं के बीच नमाज पढ़ी’: वकार यूनुस की बात पर मुस्कराए शोएब अख्तर

T20 विश्व कप में भारत का पहला ही मैच पाकिस्तान से हुआ, जिसमें उसे 10 विकेट से हार झेलनी पड़ी। पाकिस्तान के मंत्रियों ने इसे इस्लाम की जीत तक बता दिया। भारत के विभिन्न मुस्लिम बहुल इलाकों में पटाखे छोड़े गए। पाकिस्तानी कप्तान बाबर आजम ने ‘कुफ्र टूटने’ की बात कही। लेकिन, क्या आपको पता है कि पाकिस्तान के सलामी बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान मैच के दौरान ही नमाज पढ़ने लगे थे?

मैच में जब ब्रेक हुआ था तो जब बाकी खिलाड़ी ड्रिंक्स में व्यस्त थे, तब मोहम्मद रिजवान जमीन पर बैठ कर नमाज पढ़ रहे थे। इसका वीडियो भी सामने आया है, जब वो बैट और हेलमेट को किनारे रख कर नमाज पढ़ते दिख रहे हैं। पाकिस्तान में इस वीडियो को खूब शेयर किया जा रहा है और कहा जा रहा है कि नमाज पढ़ने से ही सफलता मिलती है। वहाँ के नागरिक मोहम्मद रिजवान की तारीफ़ करते हुए कह रहे हैं कि वो नमाज किसी भी स्थिति में नहीं छोड़ते।

बता दें कि मोहम्मद रिजवान ने इस मैच में 55 गेंदों पर 79 रनों की पारी खेली थी, जिसमें उन्होंने 6 चौके और 3 छक्के जड़े। उनका स्ट्राइक रेट 143 से भी अधिक रहा। अब पाकिस्तान के पूर्व तेज़ गेंदबाज वकार यूनुस ने भी मोहम्मद रिजवान द्वारा नमाज पढ़े जाने पर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा, “सबसे अच्छी बात मोहम्मद रिजवान ने की। माशाल्लाह! उन्होंने ग्राउंड में हिन्दुओं के बीच खड़े होकर नमाज पढ़ी।”

वकार यूनुस ने कहा कि ये उनके लिए ‘बहुत ही ज्यादा स्पेशल’ था। एक टीवी चैनल ‘ARY News’ पर भारत-पाकिस्तान मैच के परिणाम के बाद हो रही चर्चा में उन्होंने ये बात कही। जब वकार यूनुस ये कह रहे थे, तब एक अन्य पाकिस्तानी पूर्व तेज़ गेंदबाज शोएब अख्तर भी उस डिबेट में मौजूद थे और वो इस बात पर मुस्करा रहे थे। नीचे जो यूट्यूब वीडियो है, उसमें 18 मिनट के बाद आप ये बातचीत सुन सकते हैं।

बता दें कि फिल्म ‘पीके’ को पाकिस्तान में रिलीज करने के लिए आमिर खान ने ARY के साथ ही करार किया था और इस फिल्म को वहाँ हिन्दू देवी-देवताओं के मजाक के रूप में प्रचारित किया गया था।

20 राज्य, 40 श​हर: अक्टूबर को ‘हिंदू विरासत माह’ के रूप में मना रहे अमेरिकी, कहा- हिंदुओं के तौर-तरीकों ने सबके जीवन पर असर डाला

अमेरिका के लोग अक्टूबर को ‘हिंदू विरासत माह’ के रूप में मना रहे हैं। समुदाय के नेताओं ने सोमवार (25 अक्टूबर 2021) को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देश के 50 में से 20 से अधिक राज्यों और 40 से अधिक शहरों ने इसके बारे में घोषणाएँ की है।

अमेरिका में हिंदू संगठनों की इस पहल का निर्वाचित प्रतिनिधियों ने स्वागत किया है। उन्होंने देश में इस अल्पसंख्यक समुदाय के योगदान को पहचानने के लिए घोषणाएँ और अधिसूचनाएँ जारी की हैं।

दरअसल, दुनिया भर में हिंदू अक्टूबर माह के आस-पास नवरात्रि और दीपावली मनाते हैं। इसलिए, इस महीने को अमेरिका स्थित कई हिंदू संगठनों ने ‘हिंदू विरासत माह’ के रूप में मनाने का फैसला किया है। एक मीडिया विज्ञप्ति में कहा गया है, “योग से भोजन तक, उत्सव से लेकर परमार्थ तक, नृत्य से लेकर संगीत तक और अहिंसा से लेकर गहन दर्शन तक हिंदुओं के इन तौर-तरीकों ने अमेरिका में सभी के जीवन पर प्रभाव डाला है।”

‘हिंदू विरासत माह’ को लेकर जिन राज्यों ने अधिसूचना जारी की है उनमें टेक्सास, ओहायो, न्यू जर्सी, मैसाचुसेट्स, जॉर्जिया, फ्लोरिडा, मिनेसोटा, वर्जीनिया, नेवादा, मिसिसिपी, डेलावेयर, उत्तरी कैरोलिना, पेंसिल्वेनिया, मैरीलैंड, न्यू हैम्पशायर, कनेक्टिकट, विस्कॉन्सिन, मिसौरी, इंडियाना और मिशिगन शामिल हैं।

मिशिगन में ट्रॉय, कैलिफोर्निया में इरविन, ओरेगन में पोर्टलैंड और टेक्सास में इरविंग और ह्यूस्टन अक्टूबर को हिंदू विरासत माह के रूप में मान्यता देने वाले कुछ शहर हैं। विज्ञप्ति में आगे कहा गया है कि देश भर में अमेरिकी नेताओं के लिए प्राचीन हिंदू पद्धति का योगदान और अमेरिकी समाज में हिंदुओं की सक्रिय भूमिका काबिलेतारीफ है।

अमेरिकी कॉन्ग्रेस के सदस्य ट्रॉय बाल्डरसन ने अपने मान्यता पत्र (letter of recognition) में हिंदू अमेरिकी समुदाय के इस फैसले को स्वीकार किया है। कॉन्ग्रेस सदस्य राजा कृष्णमूर्ति ने हिंदू धर्म को ‘विशिष्ट बहुलवादी’ बताया है। मैसाचुसेट्स राष्ट्रमंडल के गवर्नर चार्ली बेकर ने कहा है कि जीवंत हिंदू समुदाय ने ‘राष्ट्रमंडल की जीवन शक्ति में जबरदस्त योगदान दिया।

हिंदू नेता बिंदू पटेल ने समुदाय की सराहना करने और हिंदू विरासत माह गतिविधियों का समर्थन करने के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हिंदू स्वयंसेवक संघ (एचएसएस) स्थानीय धार्मिक समुदाय के साथ काम कर रहा है और समाज को कुछ देने की भावना से दीपावली को ‘सेवा दिवाली-भोजन अभियान’ के तौर पर मना रहा है। विज्ञप्ति में कहा गया है, “इस साल दीपावली नवंबर के पहले सप्ताह में है। अत: ऐसी उम्मीद की जाती है कि हिंदू विरासत माह स्वाभाविक तौर पर कुछ और हफ्तों तक बढ़ाया जाएगा।”

कॉन्ग्रेस MLA का बेटा गिरफ्तार, तलाश में लगाए गए थे पोस्टर: शादी का झाँसा दे पार्टी वर्कर से रेप का है आरोप

मध्य प्रदेश की इंदौर पुलिस ने मंगलवार (अक्टूबर 26, 2021) को फरार चल रहे रेप के आरोपित करण मोरवाल को गिरफ्तार कर लिया। आरोपित बड़नगर से कॉन्ग्रेस विधायक मुरली मोरवाल का बेटा है। आरोपित को उज्जैन के पास मक्सी से गिरफ्तार किया गया। रेप का आरोप लगने के बाद से ही वह फरार चल रहा था। इंदौर पुलिस ने बड़नगर में उसके घर और प्रमुख स्थानों पर पोस्टर चिपका दिए थे और लोगों से अपील की थी कि जहाँ भी वह दिखे उसकी सूचना दें।

सरेंडर की दी गई थी चेतावनी

हाल ही में गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने करण मोरवाल को चेतावनी भी दी थी कि जितना जल्दी हो सके, वह पुलिस के सामने सरेंडर कर दें, अगर ऐसा नहीं किया तो ऐसी नजीर दी जाएगी जो पूरा मध्य प्रदेश याद रखेगा। मिश्रा ने कहा था, ”करण मोरवाल ने अगर 2 दिनों में सरेंडर नहीं किया तो ऐसी कार्रवाई करेंगे जो प्रदेश में नजीर बन जाएगी।”

दरअसल, कॉन्ग्रेस की एक महिला कार्यकर्ता ने अप्रैल में करण मोरवाल के खिलाफ शादी का झाँसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था, जिसके बाद से ही करण मोरवाल फरार हो गया था। तकरीबन 7 महीने से पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। इस बीच उस पर इनाम भी रखा गया था। करण मोरवाल पर हाल ही में इनाम की राशि बढ़कर 25 हज़ार रुपए कर दी गई थी। 

पीड़िता ने इस साल अप्रैल में कॉन्ग्रेस नेता के बेटे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। महिला के मुताबिक घटना 14 फरवरी की है। उसने आरोप लगाया था कि इंदौर आने पर मोरवाल उसे होटल प्राइड ले गया, जहाँ उसे कुछ पीने के लिए दिया, जिसे पीकर वह बेहोश हो गई। इसके बाद मोरवाल उसे बेहोशी की हालत में अपने फ्लैट में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया

इसके बाद मोरवाल उसे बेहोशी की हालत में अपने फ्लैट में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता ने कहा कि जब उसे एहसास हुआ कि उसके साथ बलात्कार हुआ है, तो आरोपित ने उसे आश्वासन दिया कि वह उससे शादी करेगा। हालाँकि बाद में उसने शादी का झाँसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया। महिला की शिकायत के आधार पर दो अप्रैल को FIR दर्ज की गई थी। भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार), 376 (2) N (एक से अधिक बार बलात्कार), 376 (2) J, 506 (आपराधिक धमकी) और 294 (सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील कृत्य) के तहत आरोप दायर किए गए थे।

‘वो हमारे बच्चे, ये मामूली झगड़ा’: यूपी-बिहार के छात्रों पर कॉलेज और पुलिस नहीं करेगी कार्रवाई, Pak की जीत का जश्न मना रहे कश्मीरियों को पीटा था

पंजाब के ‘भाई गुरुदास इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (BGIET)’ के उन यूपी-बिहार के छात्रों को को निष्काषित नहीं किया गया है, जिन्होंने कथित रूप से पाकिस्तान की जीत का जश्न मना रहे कश्मीरी छात्रों की पिटाई की थी। कॉलेज प्रशासन ने ऑपइंडिया से इसकी पुष्टि की है। एक सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया था कि यूपी-बिहार के छात्रों पर कार्रवाई हुई है। एक कश्मीरी छात्र ने ये दावा किया था।

T20 विश्व कप में भारत को पहले ही मैच में पाकिस्तान से 10 विकेट से मात मिली, जिसके बाद ये कश्मीरी छात्र जश्न मना रहे थे। रविवार (24 अक्टूबर, 2021) को रात साढ़े 11 बजे ये घटना हुई, जब यूपी-बिहार के छात्रों ने पाकिस्तान के समर्थन में जश्न का विरोध किया। एक कश्मीरी छात्र ने वीडियो शेयर कर दावा किया था कि यूपी-बिहार के छात्र उनके कमरों में घुस आए और उनलोगों की जम कर पिटाई की।

इस दौरान कमरों में तोड़फोड़ किए जाने का भी दावा किया गया। खबर के औसर, यूपी-बिहार, कश्मीर और हरियाणा के छात्र अपने-अपने कमरों में भारत-पाकिस्तान का मैच देख रहे थे। कश्मीरी छात्र लगातार पाकिस्तान के लिए नारे लगा रहे थे और उन्होंने ‘आज़ादी’ के नारे भी लगाए। पाकिस्तान की जीत पर पटाखे फोड़े गए। अन्य राज्यों के छात्र इससे चिढ़ गए और दोनों पक्षों में संघर्ष शुरू हो गया। स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आना पड़ा।

पटियाला के IGP (इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस) एमएस चिन्ना ने बताया कि कश्मीर और यूपी-बिहार के छात्रों में मारपीट हुई थी। दोनों पक्षों ने लिखित में दिया है कि वो आगे से इस तरह की हरकतों का हिस्सा नहीं बनेंगे और पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करेंगे। IGP ने बताया कि दोनों पक्षों ने माफ़ी भी माँगी है। पुलिस का कहना है कि मामला दोस्ताना रूप से सुलझा लिया गया है। दोनों पक्षों के 25-30 छात्रों में संघर्ष हुआ था।

सोशल मीडिया का दावा निकला झूठा, यूपी-बिहार के छात्रों पर कार्रवाई नहीं

BGIET के डायरेक्टर ने बताया कि कॉलेज ने इस मामले की जाँच के लिए एक 5 सदस्यीय टीम का गठन किया है, जिसमें DSW (डीन, स्टूडेंट्स वेलफेयर) भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई दोषी पाया गया तो कॉलेज कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि छोटा-मोटा झगड़ा हुआ था, लेकिन सोशल मीडिया शेयर हो रहे कई वीडियो इस घटना के नहीं हैं। संगरूर के एसपी स्वप्न शर्मा ने ऑपइंडिया से कहा कि पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है, क्योंकि ये छात्रों का झगड़ा था और इसे सुलझा लिया गया है। उन्हें पढ़ाई पर ध्यान देने को कहा गया है।

सोमवार को ऐसे सोशल मीडिया पोस्ट शेयर शेयर होने लगे कि यूपी-बिहार के उन छात्रों को कॉलेज से निष्काषित कर दिया गया है। राशिद नाम के एक छात्र ने वीडियो में ये दावा किया था। BGIET के एसोसिएट प्रोफेसर प्रांजल शुक्ल ने ऑपइंडिया को बताया कि ये सोशल मीडिया रिपोर्ट्स गलत हैं और छात्रों के छोटे से झगड़े को तुरंत सुलझा लिया गया था, कॉलेज ने कोई कार्रवाई नहीं की है।

उन्होंने कहा कि वो हमारे बच्चे हैं और हम कोई कार्रवाई नहीं करने जा रहे। उन्होंने कहा कि ऐसी कोई योजना ही नहीं है और यूपी-बिहार के छात्रों को कुछ नहीं होगा। सोशल मीडिया पर सामने आई वीडियो में दिख रहा है कि कैसे कमरों में तोड़फोड़ हुई है। कश्मीरी दावा करते हैं कि ये बिहार, उत्तर प्रदेश के लोगों ने किया है। उनका पूछना है कि वो पढ़ने आए हैं, उनके साथ ऐसा बर्ताव क्यों? क्या वो भारतीय नहीं है।

हुर्रे पाकिस्तान जीत गया करके मास्टरनी मना रही थी जश्न, पकड़ाने पर बोली – ‘मजाक कर रही थी’: स्कूल ने नौकरी से ही निकाल दिया

पाकिस्तान से भारत T-20 वर्ल्ड कप में हार गया। वर्ल्ड कप में यह भारत की पहली हार है। अपने देश के लोग दुखी थे और हैं भी। दुश्मन देश यानी पाकिस्तान में जश्न है। कुछ लोग हालाँकि अपने यहाँ भी जश्न मना रहे थे – पटाखे फोड़ कर, नाच-गा कर… कुछ सोशल मीडिया पर प्यार जता कर। राजस्थान के उदयपुर में नीरजा मोदी स्कूल की एक टीचर नफीसा अटारी ने भी जश्न मनाया। स्कूल ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया है।

खबर की शुरुआत होती है 24 अक्टूबर की रात से। भारतीय क्रिकेट टीम पर पाकिस्तान की जीत के साथ ही उदयपुर के नीरजा मोदी स्कूल की शिक्षिका नफीसा अटारी ने व्हाट्सएप पर स्टेटस डाला। इसमें लिखा था – “जीत गए, हम जीत गए (Jeeeet gayeeee… We wonnn)”

किसी ने नीरजा मोदी स्कूल की शिक्षिका नफीसा अटारी का यह व्हाट्सएप स्टेटस देख लिया। पूछ भी लिया – क्या आप पाकिस्तान का समर्थन करती हैं? पूछने वाले ने शर्मसार होने वाली इमोजी भी लगाई। मैडम ने बड़ी शान से जवाब दिया – हाँ।

नफीसा अटारी का व्हाट्सएप स्टेटस और सवाल-जवाब 25 अक्टूबर को वायरल हो गया। सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल पूछने शुरू कर दिए कि अगर एक शिक्षिका खुले तौर पर पाकिस्तान का समर्थन कर रही है तो वह अपनी कक्षा में क्या पढ़ाती होगी?

नफीसा अटारी स्कूल से निष्कासित

उदयपुर के नीरजा मोदी स्कूल ने मामले को संज्ञान में लिया। मैनेजमेंट ने नफीसा अटारी को स्कूल से ही निकाल दिया। स्कूल ने नोटिस जारी कर लिखा:

स्कूल द्वारा निष्कासन का नोटिस

“नीरजा मोदी स्कूल की अध्यापिका नफीसा अटारी को सोजतिया चैरिटेबल ट्रस्ट की मीटिंग के निर्णय के अनुसार नीरजा मोदी स्कूल तुरंत प्रभाव से निष्कासित कर दिया गया है।”

ऑपइंडिया ने इस खबर की पुष्टि के लिए उदयपुर के नीरजा मोदी स्कूल से संपर्क किया। स्कूल ने पुष्टि की कि नफीसा अटारी की नौकरी को कल (25 अक्टूबर) की बैठक के दौरान समाप्त कर दिया गया था और बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चल रही जानकारी सटीक है।

नफीसा का दावा – नहीं है पाकिस्तानी समर्थक

नफीसा अटारी ने दावा किया कि उनकी पोस्ट को “सही मायने में” लिया गया। नफीसा ने बताया कि भारत-पाकिस्तान मैच के दौरान उनका परिवार दो टीमों में बँट गया था। प्रत्येक टीम ने दोनों देशों का समर्थन किया। उनके अनुसार उनकी टीम पाकिस्तान का समर्थन कर रही थी, इसलिए उन्होंने जीत के बाद व्हाट्सएप पर स्टेटस पोस्ट किया।

सफाई देते हुए नफीसा ने कहा, “मेरे फोन कॉन्टैक्ट में शामिल बच्चों के माता-पिता में से किसी एक ने मैसेज कर पूछा कि क्या मैं पाकिस्तान का समर्थन करती हूँ। मैंने हाँ कह दिया। मुझे लगा कि यह एक मजाक है क्योंकि मैसेज के अंत में एक इमोजी था।” नफीसा ने आगे दावा किया कि वह एक देशभक्त हैं और कभी भी पाकिस्तान का समर्थन नहीं कर सकती हैं।