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IPL में दो नई टीमें: गोयनका ने ₹7100 करोड़ में खरीदी लखनऊ की टीम, अहमदाबाद के लिए CVC ने दिए ₹5600 करोड़

‘इंडियन प्रीमियर लीग (IPL)’ में दो नई टीमों का ऐलान हुआ है। संजीव गोयनका की ‘RPSG Group’ ने लखनऊ और ‘CVC Capital Partners’ ने अहमदाबाद की टीम खरीदी। जहाँ लखनऊ की टीम के लिए 944 मिलियन डॉलर (7088 करोड़ रुपए) की कीमत लगी, वहीं अहमदाबाद की टीम के लिए 745 मिलियन डॉलर (5593 करोड़ रुपए) की कीमत लगाई गई। याद दिला दें कि IPL-1 से पहले 2008 में मुंबई इंडियंस की टीम के लिए 112 मिलियन डॉलर (841 करोड़ रुपए) की बोली लगी थी।

इससे पहले अंदेशा जताया जा रहा था कि अडानी समूह IPL टीम खरीद सकता है। BCCI ने 21 सितंबर को दो नई टीमों को खरीदने के लिए समयसीमा आगे बढ़ाने का निर्णय लिया था। 6 साल बाद IPL में दो नई टीमें आई हैं। इससे पहले 2015 में ‘राइजिंग पुणे सुपरजायंट्स’ और ‘गुजरात लायंस’ नामक दो टीमें जुड़ी थीं। अब मेगल ऑक्शन भी होना है। उससे पहले 2010 में 10 टीमों ने IPL खेला था, जब ‘पुणे वॉरियर्स’ और ‘कोच्चि टस्कर्स’ नामक नई टीमें जुड़ी थीं।

‘सनातन की रक्षा के लिए योगी का सत्ता में लौटना ज़रूरी’: रविंद्र पुरी बने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष, नरेंद्र गिरी की मौत के बाद खाली था पद

रविंद्र पुरी को ‘अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद’ का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया है। महंत नरेंद्र गिरी की संदिग्ध मौत के बाद ये पद खाली हुआ था। रविंद्र पुरी ने ऐलान किया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दोबारा सत्ता में लाना साधु-संतों का फ़िलहाल सबसे बड़ा लक्ष्य है। प्रयागराज के दारागंज में श्री पंचायती निरंजनी अखाड़े के सचिव रवींद्र पुरी महाराज को सोमवार (25 अक्टूबर, 2021) को अखाड़ा परिषद का मुखिया चुना गया।

रविंद्र पुरी ने अध्यक्ष बनने के बाद ऐलान किया कि साधु-संतों का समर्थन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ है। उन्होंने कहा, “योगी ही ऐसे हैं, जो साधु-संतों के मापदंडों पर खरे उतरते हैं, क्योंकि वह एक संत हैं। इसलिए, हम लोग हमेशा योगी आदित्यनाथ का समर्थन करते रहेंगे और लोगों से अपील करेंगे कि वह भी योगी आदित्यनाथ का समर्थन करें।” 13 में से 8 अखाड़ों के समर्थन से रविंद्र पुरी अध्यक्ष बने हैं।

अखाड़े के महामंत्री हरि गिरी ने बताया कि जहाँ 7 अखाड़ों ने बैठक में अपने प्रतिनिधि भेजे थे, निर्मोही अखाड़ा के मदन मोहन दास ने पत्र भेज कर बैठक को समर्थन दिया। रविंद्र पुरी ने कहा कि अखाड़ा के नियम व परंपरा अनुसार ही ये चुनाव हुआ है। हरि गिरी ने कहा कि नियमानुसार महेंद्र गिरी का कार्यकाल बचा होने तक निरंजनी अखाड़े से ही किसी को ये पद दिया जाता है। उन्होंने कहा कि जो नाराज़ हैं, उन्हें मना लिया जाएगा।

हरिद्वार में 24 अक्टूबर को एक अन्य गुट द्वारा बुलाई गई बैठक पर उन्होंने कहा कि इसका कोई औचित्य नहीं है। साधु-संतों ने कहा कि योगी आदित्यनाथ ही हैं जो राम मंदिर बनवा सकते हैं, वरना किसी और के सत्ता में आने से ये काम रुक जाएगा। सभी ने एकमत से कहा कि सीएम योगी सर्वजन सुखाय-सर्वजन हिताय की बात करते हुए सब को साथ लेकर चलते हैं। रविंद्र पुरी ने कहा कि देश-प्रदेश की समस्याओं के समाधान के लिए मोदी और योगी सरकार अच्छा कार्य कर रही है।

‘अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद’ के नए अध्यक्ष ने कहा, “कॉन्ग्रेस मुक्त भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने के हम साथ हैं। सनातन की रक्षा तभी होगी, जब BJP सरकार आएगी। उत्तराखंड में भी भाजपा को फिर से लाना है। जो राम को मानता है, हम उसके ही साथ हैं। कुंभ जैसे पहले होता आया है, वैसे ही होगा।” बैठक में बद्रीनाथ का नाम बदलने की साजिश का आरोप लगाते हुए देवबंद के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया। साथ ही ये माँग भी उठी कि कई साधु-संतों के लापता होने और उनकी हत्याओं पर CBI जाँच कराई जाए।

नकल रोकने के लिए राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार ने फिर बंद की इंटरनेट सेवा, फिर भी पेपर हुआ लीक: जरूरी सेवाएँ बुरी तरह प्रभावित

राजस्थान में रविवार (24 अक्टूबर 2021) को कॉन्ग्रेस सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में ‘नकल’ पर अंकुश लगाने के लिए इंटरनेट सेवा पर रोक लगा दी। यह रोक कई जिलों में लगाई गई थी। सरकार के इस कदम से ट्रैवल और स्वास्थ्य सहित कई सेवाएँ बड़े पैमाने पर प्रभावित हुईं।

राजधानी जयपुर, बीकानेर और दौसा जैसे जिलों में सुबह 6 बजे से 12 घंटे तक मोबाइल इंटरनेट बंद रहा। ऐसा कदम राज्य में हो रही पटवारी की परीक्षा के चलते उठाया गया था। इस परीक्षा में 10 लाख से अधिक प्रतियोगी परीक्षार्थी शामिल हुए थे। यह परीक्षा 20 से अधिक जिलों में आयोजित की गई थी।

स्वास्थ्य सेवाएँ प्रभावित हुईं

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, हर दिन लगभग 10,000 लोगों को सेवा देने वाले मेडिकल क्षेत्र में कार्यरत स्टार्टअप ने इस बारे में बताया कि 2 दिन के इस इंटरनेट बैन से दवा आपूर्ति और डॉक्टर से कंसल्टेशन जैसी सेवाएँ बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।

मेडकॉर्ड्स (Medcords) के सह-संस्थापक श्रेयंस मेहता ने बताया, “टियर-II और टियर-III शहरों में ज्यादातर लोग मोबाइल इंटरनेट पर ही निर्भर हैं। इंटरनेट बंदी के चलते जरूरतमंद लोग डॉक्टरों से अपॉइंटमेंट बुक नहीं कर पाए। हम रोजाना लगभग 8,000-10,000 लोगों को सेवाएँ देते हैं। इन 2 दिनों में यह संख्या घट कर लगभग 2,000 ही रह गई।”

इसके चलते यात्री हवाई यात्रा के लिए ना वेब चेक इन कर पाए, ना ही ट्रेन के आवागमन की जानकारी नहीं ले पाए और ना ही हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों या अस्पतालों के लिए गाड़ी बुक कर पाए।

जयपुर के टूरिस्ट एक्सपर्ट संजय कौशिक के अनुसार, “मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल ज्यादातर कम्युनिकेशन के लिए किया जाता है। यात्रा करने वाले लोग वेब चेक-इन करते हैं, ट्रेन के समय को ट्रैक करते हैं और बाकी भी कई विकल्प अपनाते हैं। होटल, रेस्टोरेंट, और दुकानों पर वे डिजिटल पेमेंट करते हैं। इंटरनेट बंद होने से उन्हें काफी असुविधा हुई। इस से प्रदेश की छवि पर असर पड़ा है।”

राज्य सरकार द्वारा परीक्षाओं में नकल और धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए इंटरनेट बंदी के ‘मास्टरस्ट्रोक’ से अनजान एक अन्य यूजर ने ट्वीट किया। उसने लिखा, “पता चला है कि राजस्थान परीक्षा के दौरान पूरे राज्य के लिए इंटरनेट बंद कर दिए गए। ऐसा इसलिए किया गया ताकि कोई नकल न होने पाए।”

इंटरनेट बंद होने से परेशान एक यात्री ने कहा, “मैंने सोचा था कि पेट्रोल स्टेशन में वाई-फाई होगा और भुगतान मशीनें काम कर रही होंगी। लेकिन तेल भरवा लेने के बाद मुझे पता चला कि मुझे नकद भुगतान पेमेंट होगा क्योंकि मशीन काम नहीं कर रही थी। मुझे पैसे लेने और भराए गए तेल का पेमेंट करने के लिए अपने घर फोन करना पड़ा।”

परीक्षा से पहले पेपर लीक हुआ

तमाम पाबंदियों के बाद भी राजस्थान में परीक्षा से पहले पेपर लीक हो गया। पुलिस ने रविवार को पटवारी भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले में भरतपुर से 12 लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने एक ऐसे गिरोह को पकड़ा जिसने कथित तौर पर परीक्षा से ठीक पहले प्रश्न पत्र हासिल कर लिया था। बाद में इस गिरोह ने प्रश्न पत्र परीक्षार्थियों के बीच लीक कर दिया।

REET के लिए भी इंटरनेट बंद किया गया था

यह पहला मौक़ा नहीं है जब राजस्थान सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए इंटरनेट बंद किया हो। इससे पहले सितंबर महीने में राजस्थान सरकार ने राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा (REET) के दौरान अजमेर जिले में मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद की थी। इसी के साथ बल्क SMS / MMS और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी रोक लगा दी थी। ये निर्णय राजस्थान पुलिस द्वारा REET 2021 परीक्षा में डमी छात्र बिठाने वाले एक गिरोह के पकड़े जाने के एक दिन बाद लिया गया था। पुलिस ने इस गिरोह के 4 सदस्यों को गिरफ्तार किया था और 5.60 लाख रुपये भी बरामद किए थे।

जिसकी बेटी-बीवी तक को इस्लामी कट्टरपंथियों ने नहीं छोड़ा, आज उसी के नाम पर खेल रहे ‘मुस्लिम कार्ड’: ताकि दब जाए पटाखों का शोर

T20 विश्व कप में पाकिस्तान ने भारत को 10 विकेट से क्या कराया, भारत के कई हिस्सों में इस्लामी कट्टरपंथियों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। देर रात पटाखे फोड़े गए। राष्ट्रीय राजधानी में भी आतिशबाजी हुई। पूर्व सलामी बल्लेबाजों वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर ने इसकी आलोचना की। लेकिन, लिबरल गिरोह विशेष मोहम्मद शमी को ढाल बना कर ले आया और कहने लगा कि मुस्लिम होने की वजह से उन्हें ‘गद्दार’ कहा जा रहा है।

मोहम्मद शमी को किसने निशाना बनाया? कितने लोगों ने उनकी आलोचना की? ये कोई नहीं बता रहा। सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा आलोचना कप्तान विराट कोहली की हुई है, मैच हारने के बाद से। रोहित शर्मा भी निशाने पर रहे हैं। तो इसका मतलब क्या है कि विराट और रोहित को हिन्दू होने की वजह से निशाना बनाया गया? लिबरल गिरोह के लॉजिक में दम नहीं है। पटाखों का शोर दबाने के लिए मोहम्मद शमी का नाम लाया गया है।

अभी तो भला मोहम्मद शमी राष्ट्रीय टीम का हिस्सा हैं और उन्हें प्लेयिंग इलेवन में भी जगह मिली। वहीं एक अन्य तेज़ गेंदबाज शार्दुल ठाकुर बाहर बैठे हुए हैं। लेकिन, एक समय ऐसा भी था जब पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर मोईन खान ने 2015 विश्व कप के समय आरोप लगाया था कि मजहब की वजह से मोहम्मद शमी को श्रीलंका के विरुद्ध प्लेयिंग इलेवन से बाहर कर दिया गया। उस मैच में यजुवेंद्र चाहल को भी आराम दिया गया था।

आज मोहम्मद शमी का नाम लेकर ‘मुस्लिम कार्ड’ खेला जा रहा है, ताकि देश के कई हिस्सों में भारतीय टीम की हार के जश्न में पटाखों से जो आतिशबाजी हुई है, उसकी चर्चा न हो। लेकिन, इन्हीं इस्लामी कट्टरपंथियों ने कभी मोहम्मद शमी का मुस्लिम होने का सर्टिफिकेट रद्द कर दिया था। उनकी बेटी आयरा की सरस्वती पूजा करते हुए तस्वीर देख कर इस्लामी कट्टरपंथियों ने उन पर निशाना साधा था और मूर्तिपूजा से दूर रहने को कहा था।

इस्लामिक कट्टरपंथियों ने इस तस्वीर को देख शिकायत किया था कि भारत के मुस्लिम उनके जैसे मुस्लिमों के कारण धीरे-धीरे हिंदू बन रहे हैं। शमी से पूछा गया था कि जब वे मुस्लिम हैं, तो आखिर उनकी बेटी हिंदू कैसे हो गई। इसके अलावा उनसे उनके नाम के आगे से मोहम्मद हटाने की सलाह भी दी गई थी। 2018 में शमी को नए साल की शुभकामनाएँ देने के लिए शिवा लिंगम की तस्वीर लगाने पर घेरा था। साथ ही उन्हें उनकी पत्नी के साथ फोटो खिंचवाने और सोशल मीडिया पर डालने के लिए भी ट्रोल किया जा चुका है।

गाली तो वीरेंद्र सहवाग को दी जा रही है, क्योंकि उन्होंने भारत की हार का जश्न मनाने वालों और पटाखे फोड़ने वालों से एक सवाल पूछ दिया कि दीवाली पर पटाखों के प्रतिबंध का ढोंग क्यों रचा जाता है? इतनी सी बात पर उन्हें ‘नाजी गंदगी, भाजपा का मॉडल, घृणा फैलाने वाला कीड़ा’ और न जाने क्या-क्या कहा गया। प्रशंसकों के निशाने पर तो पूरी भारतीय टीम है, केवल मोहम्मद शमी नहीं। विराट कोहली की तो लगातार आलोचना हो रही है।

‘लेस्बियन’ वाले करवा चौथ विज्ञापन के लिए Dabur शर्मिंदा, माफी माँगने के बाद भी लोगों ने कहा- थू है तुम पर

करवा चौथ से जुड़े डाबर फेम ब्लीच विज्ञापन पर विवाद गहराने के बाद कंपनी ने इसे वापस ले लिया है। डाबर ने सोमवार (25 अक्टूबर 2021) को एक बयान जारी कर इस विज्ञापन को वापस लेने की जानकारी दी। कंपनी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर लोगों की भावनाएँ आहत होने पर दुख जताया और इसके लिए माफी भी माँगी है। हालाँकि, डाबर के माफी माँगने के बाद भी सोशल मीडिया यूजर्स का आक्रोश कम नहीं हुआ है। वे भारतीय संस्कृति पर इस तरह से हमला करने को लेकर काफी आक्रोशित हैं।

इंस्टाग्राम पर एक यूजर ने कहा, “हमें तुम्हारी माफी स्वीकार नहीं है।” वहीं, एक अन्य ने कहा कि इस कंपनी का कोई ईमान धर्म नहीं है।

साभार: instagram

पार्वती नाम की एक यूजर ने ट्विटर पर लिखा, ”हमसे ही कमाकर हमारे त्योहारों का मजाक उड़ाते हो अब तुम देखो। भारत की जनता ट्विटर पर नहीं बाजार में दिखाती है तुम जैसी कंपनी की औकात।”

एक और यूजर ने लिखा, ”हमेशा हिंदू धर्म और उनके धार्मिक त्योहारों को ही निशाना क्यों बनाया जाता है? हम आपके उत्पादों का बहिष्कार करते हैं।”

हरीश नाम के सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, ”यह बेहद घटिया शर्मनाक विज्ञापन था। कभी नहीं सोचा था कि डाबर जैसी कंपनी हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाएगी और हिंदू विरोधी ताकतों का समर्थन करेगी।”

डाबर के माफी माँगने पर गुस्साए सत्यनारायण नाम के यूजर ने ​कहा, ”तो घटिया लोगों बनाया ही क्यों था। बस पब्लिसिटी के लिए, थू है तुम पर। अगर दम हो तो किसी और पर बना…।”

वहीं, मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने डाबर कंपनी के लेस्बियन वाले विज्ञापन को आपत्तिजनक बताया है। उन्होंने कहा, “मामले की गंभीरता को देखते हुए मैंने डीजीपी को यथोचित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कंपनी या तो विज्ञापन हटाए या फिर हम कार्रवाई करेंगे। हिन्दू धर्म के साथ इस तरह से कोई खिलवाड़ नहीं कर पाएगा।” नरोत्तम मिश्रा ने कहा, “हिन्दू धर्म के धार्मिक त्योहारों के लिए ही आखिर क्यों विज्ञापन और वीडियो-फोटो जारी किए जाते हैं। आज समलैंगिक या लेस्बियन को व्रत करते हुए दिखा रहे हैं और कल फिर लड़कों (गे) को शादी करते हुए दिखाएँगे। अगर हिम्मत है तो दूसरे धर्मों को लेकर बनाकर दिखाओ।”

गौरतलब है कि डाबर कंपनी के करवा चौथ पर जारी हुए विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर लोग काफी नाराज़ हैं। ये विज्ञापन डाबर के प्रोडक्ट ‘फेम’ को लेकर है, जिसमें एक समलैंगिक जोड़े को ‘करवा चौथ’ का त्योहार मनाते हुए दिखाया गया है। लोगों का कहना है कि क्या त्योहारों को उसी रूप में नहीं रहने देना चाहिए, जिस रूप में हम उन्हें मनाते आ रहे हैं? साथ ही पूछा कि हमेशा हिन्दू त्योहारों से ही क्यों छेड़छाड़ की जाती है, मुस्लिम या ईसाई त्योहारों से क्यों नहीं? डाबर ही नहीं फैबइंडिया और CEAT टायर ने भी विज्ञापनों से हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाया है।

वेब सीरीज का नाम ‘आश्रम’ रखना गलत: MP के गृह मंत्री ने कहा- अब स्क्रिप्ट देखने के बाद ही शूटिंग की इजाजत

वेब सीरीज ‘आश्रम 3’ को लेकर मध्य प्रदेश में घमासान जारी है। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने आश्रम 3 का नाम बदलने की माँग को लेकर वाहनों में तोड़फोड़ की थी। साथ ही वेब सीरीज के निर्देशक प्रकाश झा पर स्याही भी फेंकी थी। इन सबके बीच अब मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा है कि आश्रम नाम पर उन्हें भी आपत्ति है।

वेब सीरीज ‘आश्रम 3’ को लेकर उठे विवाद के बाद मध्य प्रदेश सरकार सख्त हो गई है। सरकार अब नई गाइडलाइन जारी करने जा रही है। प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा है कि अब शूटिंग से पहले जिला प्रशासन को स्क्रिप्ट दिखानी होगी। उन्होंने कहा कि इसका नाम बदलने का वे भी पक्षधर हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जिससे समस्या हो।

गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने ट्वीट करते हुए लिखा, “आश्रम 3 के विवाद के बाद प्रदेश सरकार फिल्मांकन को लेकर एक नई गाइडलाइन जारी करने जा रही है। अब शूटिंग से पहले जिला प्रशासन को स्क्रिप्ट दिखानी होगी और उस पर अनुमति मिलने के बाद ही शूटिंग की जा सकेगी।”

मिश्रा ने कहा, “आश्रम वाले मामले में भी हम एक स्थायी गाइडलाइन जारी करने वाले हैं कि आपत्तिजनक अगर कोई सीन है या किसी धर्म की भावना को आहत करने वाला कोई सीन आपकी स्टोरी में है तो वो स्टोरी पहले जिला प्रशासन को दें और अनुमति लें। उसके बाद ही फिल्मांकन करें। मध्य प्रदेश में शूटिंग करने आइए, स्वागत है, लेकिन आपत्तिजनक दृश्य अगर उन्हें कोई महसूस होता है या किसी और को भी होता है, वो जानकारी जिलाधिकारी को दें।” 

इसके साथ ही मिश्रा ने ये भी कहा कि हमला विरोध प्रदर्शन का सही रास्ता नहीं है और इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन प्रकाश झा को भी सोचना चाहिए कि वे क्या गलत कर रहे हैं।

बता दें कि रविवार (अक्टूबर 24, 2021) को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने शूटिंग स्थल पर जमकर तोड़फोड़ की। शहर की पुरानी जेल में चल रही शूटिंग के दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ता घुस गए और उन्होंने यूनिट के सामान व गाड़ियों में तोड़फोड़ की और कार्यकर्ताओं ने प्रकाश झा पर स्याही भी फेंकी। करीब एक घंटे तक हंगामा होता रहा, पुलिस के पहुँचने के बाद मामला शांत हुआ।

बजरंग दल का कहना है कि प्रकाश झा ने आश्रम वेब सीरीज में आश्रम व्यवस्था को गलत तरीके से दिखाया है, जो हमारी संस्कृति पर चोट है। बजरंग दल ने चेतावनी दी थी कि यदि सीरीज का नाम और कंटेंट नहीं बदला तो भोपाल में शूटिंग नहीं होने देंगे।

नरोत्तम मिश्रा ने आश्रम के साथ ही डाबर के करवा चौथ के अवसर पर जारी किए गए एक विज्ञापन पर भी आपत्ति जताई और कहा कि हमेशा हिंदू धर्म के त्‍योहारों को लेकर इस तरह की क्लिपिंग और विज्ञापन क्‍यों जारी किए जाते हैं। आज वो लेस्बियन को करवा चौध का व्रत तोड़ते हुए दिखा रहे हैं, कल को लड़कों-लड़कों को शादी के फेरे लेते हुए दिखा देंगे। डाबर के विज्ञापन पर कार्रवाई को लेकर उन्‍होंने कहा कि डाबर के लेस्बियन विज्ञापन पर डीजीपी को निर्देशित किया गया है। उन्होंने कहा कि जाँच कर विज्ञापन को हटाए नहीं तो वैधानिक कार्यवाही की जाएगी। 

बता दें कि डाबर ब्रांड ने अपने स्किन केयर क्रीम ब्लीच के विज्ञापन में दो लड़कियों को करवा चौथ मनाते हुए दिखाया था। यह विज्ञापन 23 अक्टूबर की रात को लॉन्च किया गया था। तभी से इसका काफी विरोध हो रहा था। विरोध के बाद डाबर ने अपना विज्ञापन वापस ले लिया है और माफी माँगी है।

24 कश्मीरी पंडित (11 पुरुष+11 महिला+2 बच्चे) भून दिए गए थे, मारा गया 2003 के नदीमर्ग नरसंहार का मास्टरमाइंड जिया मुस्तफा

जम्मू-कश्मीर के पुंछ इलाके में 24 अक्टूबर 2021 (रविवार) को सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई। इस दौरान आतंकी जिया मुस्तफा मारा गया है। वह 2003 में नदीमर्ग में कश्मीरी पंडितों के हुए नरसंहार का मस्टरमाइंड था। जेल में बंद मुस्तफा को 10 दिनों की रिमांड पर लिया गया था। वह लश्कर ए तैय्यबा से जुड़ा था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उसका रिमांड कश्मीर की कोट बलवाल जेल से लिया गया था। भाटा दूरियान नाम की जगह पर पहचान के लिए उसे ले जाने पर अचानक ही आतंकियों ने सैनिकों पर फायरिंग शुरू कर दी। इस दौरान 3 जवानों के साथ मुस्तफा को भी चोटें आईं। आग से घिर जाने के चलते मुस्तफा को निकाला नहीं जा सका। बाद में उसकी लाश बरामद की गई।

जिया मुस्तफा अपना नाम बदलता रहता था। अरबाज़, अब्दुल्ला, विक्टर और उमर नाम से भी वह जाना जाता था। वह पाकिस्तान के अवैध कब्ज़े वाले कश्मीर के रावलाकोट क्षेत्र के बेरमोंग गाँव का रहने वाला था। नदीमार्ग नरंसहार के अलावा वह अवंतीपुरा के एयरबेस पर हमले में भी शामिल था।

नदीमार्ग गाँव दक्षिण कश्मीर के पुलवामा क्षेत्र में पड़ता है। 1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों को घाटी से पलायन के लिए मजबूर किया गया था। लेकिन नदीमार्ग के लगभग 50 पंडितों ने अपना घर छोड़ने से इनकार कर दिया था। 23 मार्च 2003 को भारतीय सेना की वर्दी पहन कर आंतकी नदीमार्ग गाँव में घुसे। उन्होंने 11 पुरुषों, 11 महिलाओं और 2 बच्चों को घर से बाहर निकाल लाइन में खड़ा किया। इसके बाद सबको गोली मार दी गई। इस नरसंहार के बाद बचे कश्मीरी हिंदू भी पलायन कर गए थे।

पुलिस ने इस नरसंहार के मास्टरमाइंड जिया मुस्तफा को 10 अप्रैल 2003 की गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उसने नदीमार्ग नरसंहार पाकिस्तान के इशारे पर करना कबूला था। जब यह नरसंहार हुआ था तब मुफ़्ती मोहम्मद सईद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री थे। नदीमर्ग उनके पैतृक गाँव से केवल 7 किलोमीटर दूर है। रात के 10 बजकर 30 मिनट पर आतंकियों ने यहाँ चिनार के पेड़ के नीचे कश्मीरी पंडितों को इकट्ठा कर गोली मारी थी। गौर करने वाली बात यह है कि 23 मार्च को पाकिस्तान का राष्ट्रीय दिवस भी मनाया जाता है।

मरने वालों में 70 साल की बुजुर्ग महिला के साथ 2 साल का मासूम बच्चा भी शामिल था। क्रूरता की हद पार करते हुए एक दिव्यांग सहित 11 महिलाओं, 11 पुरुषों और 2 बच्चों पर बेहद नजदीक से गोलियाँ चलाई गई। कुछ रिपोर्ट्स का दावा है कि पॉइंट ब्लेंक रेंज से हिन्दुओं के सिर में गोलियाँ मारी गई थी। आतंकी यही नहीं रुके उन्होंने घरों को लूटा और महिलाओं के गहने उतरवा लिए। न्यूयॉर्क टाइम्स ने इस घटना का जिम्मेदार ‘मुस्लिम आतंकवादियों’ को बताया था। अमेरिका के स्टेट्स डिपार्टमेंट ने भी इसे धर्म आधारित नरसंहार माना था।

इस घटना में जीवित बचे एक कश्मीरी पंडित ने घटना के खौफनाक पलों को एक चश्मदीद के तौर पर बताया था। उन्होंने कहा था कि वो पहली मंज़िल से नीचे कूद कर खेतों से चले गए थे। लेकिन उनके पूरे परिवार को मार डाला गया था।

PM मोदी पर कॉन्ग्रेस का जातिवादी कमेंट, अपने नेता को ‘भकचोन्हर’ कहने पर लालू यादव को लताड़ा था

अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमेटी के बिहार प्रभारी भक्त चरण दास पर जातिवादी टिप्पणी करने को लेकर कॉन्ग्रेस ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को जमकर लताड़ा था, लेकिन इसके ठीक एक दिन बाद कॉन्ग्रेस खुद वही काम करती नजर आई। ग्रैंड ओल्ड पार्टी ने पीएम मोदी पर राजनीतिक हमला बोलने के दौरान उन पर जातिवादी टिप्पणी की है। पीएम मोदी के खिलाफ अपने सोशल मीडिया अभियान में अखिल भारतीय महिला कॉन्ग्रेस के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट ने रसोई के तेल की बढ़ती कीमतों के विरोध में #TeliKiMaar का इस्तेमाल किया है। दरअसल, तेली एक ओबीसी समुदाय है, जो मुख्य रूप से उत्तर भारत में रहता है।

साभार: ट्विटर

जातिवादी हैशटैग के साथ अखिल भारतीय महिला कॉन्ग्रेस ने एक इन्फोग्राफिक साझा करते हुए लिखा, ”रसोई के तेल की कीमतें सितंबर के महीने में 34 प्रतिशत बढ़ाई गई। तेल का खेल जनता रही झेल। #TeliKiMaar”

कॉन्ग्रेस ने अपनी जातिवादी टिप्पणी में तेली जाति का नाम लिया है। ध्यान दें कि पीएम मोदी मोदी घांची जाति से हैं, जो तेली की तरह ही ओबीसी समुदाय में आता है। पीएम मोदी ने इसी तरह कॉन्ग्रेस पार्टी के अनगिनत जातिवादी हमलों को सहन किया है।

पीएम मोदी पर कॉन्ग्रेस के बार-बार जातिवादी हमले

कॉन्ग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने पीएम मोदी पर तंज कसते हुए उन्हें ‘चायवाला’ कहा था। उन्होंने मोदी को ‘नीच इंसान’ तक कह डाला था, जिसके बाद उन्हें कॉन्ग्रेस से निलंबित कर दिया गया था। एक अन्य कॉन्ग्रेसी संजय निरुपम ने पीएम मोदी के लिए ‘अनपढ़ गँवार’ जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था।

पीएम मोदी की विनम्र पृष्ठभूमि कॉन्ग्रेस नेताओं के लिए हमेशा से आलोचना का विषय रही है। कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता सीपी जोशी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के अन्य नेताओं के खिलाफ जातिवादी गाली देने के बाद उत्तर प्रदेश के तत्कालीन कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर ने पीएम मोदी की बूढ़ी माँ तक को नहीं छोड़ा था। राज बब्बर ने कहा था, ”यूपीए सरकार के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत गिरने पर नरेंद्र मोदी रुपए की तुलना मनमोहन सिंह की उम्र से करते थे। आज रुपए की कीमत इतनी गिर गई है कि यह उनकी माँ की उम्र की ओर बढ़ रही है।”

 

2014 में कॉन्ग्रेस नेता शक्ति सिंह गोहिल ने आरोप लगाया था कि नरेंद्र मोदी एक ‘नकली ओबीसी’ हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि मोदी के सीएम बनने से पहले मोध घांची जाति ओबीसी सूची में नहीं थी। उस समय गुजरात सरकार ने एक स्पष्टीकरण जारी कर कहा था कि मोदी की जाति को 1994 में ही ओबीसी के रूप में अधिसूचित किया गया था।

कॉन्ग्रेस ने भक्त चरण दास पर जातिवादी टिप्पणी के लिए लालू प्रसाद यादव की खिंचाई

विडंबना यह है कि पीएम मोदी के खिलाफ जातिवादी गालियों का इस्तेमाल उस समय हुआ, जब कॉन्ग्रेस ने अपने बिहार प्रभारी भक्त चरण दास के खिलाफ राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को जमकर लताड़ा था। वो भी उनके द्वारा की गई जातिगत टिप्पणी के लिए। तारापुर और कुशेश्वर अस्थान विधानसभा सीटों पर उपचुनाव को लेकर रविवार (24 अक्टूबर) को लालू यादव ने अपनी पूर्व सहयोगी कॉन्ग्रेस का जमकर मजाक उड़ाया था। उन्होंने कहा था, ”कॉन्ग्रेस के बिहार प्रभारी भक्त चरण दास भकचोन्हर (stupid person) हैं। उपचुनाव में हारने के लिए कॉन्ग्रेस को सीट नहीं दे सकते हैं।”

लालू के बयान की निंदा करते हुए कॉन्ग्रेस ने जवाबी हमले में कहा था कि लालू जेल जाने के बाद भी नहीं सुधरे हैं। उन्हें अपने बयान पर सार्वजनिक रूप से माफी माँगनी चाहिए। बिहार कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता राजेश राठौर ने कहा, “लालू प्रसाद यादव ने न केवल भक्त चरण दास, बल्कि देश के सभी दलितों का अपमान किया है। लालू को 2009 के लोकसभा और 2010 के विधानसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस छोड़ने का खामियाजा भुगतना पड़ा। राजद को नुकसान हुआ है। राजद को इससे सबक लेना चाहिए।”

ट्विटर पर खिंचाई के बाद कॉन्ग्रेस नेता राधिका खेरे की सफाई, कहा- भारत-पाक के लिए नहीं किया था ट्वीट

कॉन्ग्रेस की नेशनल मीडिया कॉर्डिनेटर राधिका खेरा ने ‘भक्तों’ के नाम से किए गए अपने ट्वीट पर सफाई दी है। उन्होंने अपने ट्वीट के 12 घंटे बाद बताया है कि उनका ट्वीट भारत-पाकिस्तान मैच से जुड़ा हुआ नहीं था। हालाँकि, अपने नए पोस्ट में उन्होंने यह साफ नहीं किया कि अगर यह पोस्ट मैच संबंधी नहीं था तो किस चीज को लेकर उन्होंने भारतीयों पर तंज कसा था।

यहाँ बता दें कि राधिका ने कल भारत-पाक मैच के ठीक बाद एक ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने कहा था  “क्यों भक्तों? आ गया स्वाद? करवा ली बेइज्जी।”  इस ट्वीट के बाद तमाम सोशल मीडिया यूजर उनपर गुस्सा उतारने लगे। ट्वीट की टाइमिंग देखते हुए सबने इसे मैच से ही जोड़ा और उन्हें बताने लगे कि भारतीय टीम सिर्फ भक्तों की नहीं है बल्कि सभी की है। लेकिन राधिका इस पर कुछ नहीं बोलीं।

Congress national media coordinator celebrates Pakistan's victory against India in T20 World Cup, insults 'Bhakts'

कुछ देर बाद अपने इसी ट्वीट पर आई प्रतिक्रियाँ को देखते हुए राधिका ने अगला ट्वीट किया। इसमें उन्होंने कहा, “बेवकूफ भक्त और मालवीया के दो रुपए ट्रोल, तुमको मेरी ट्वीट से मिर्ची लग रही है तो मैं क्या करूँ? मैं तो चली सोने तुम अपना खून जलाते रहो!”

Congress national media coordinator celebrates Pakistan's victory against India in T20 World Cup, insults 'Bhakts'

देखने वाली बात ये है कि राधिका चाहतीं तो इस गलतफहमी को वहीं खत्म कर सकती थीं। लेकिन उन्होंने न ऐसा किया बल्कि लोगों के ट्वीट पर उन्हें जवाब देते हुए इस अंदेशे को बढ़ाया कि उनका पहला ट्वीट भारत पाक मैच को लेकर ही था।

यहाँ तक उनसे जब उन्हीं की पार्टी के एक साथी ने कहा कि वो भक्तों की टीम नहीं थी। पूरे भारत की थी। तो भी राधिका खेरा ने जरूरी नहीं समझा कि वो उन्हें तो समझा दें कि वो क्या कहना चाहती हैं। लेकिन उन्होंने सोशल प्लेटफॉर्म पर किए गए ट्वीट पर कोई सफाई या उसका संदर्भ देने की बजाय उसमें कन्फ्यूजन को बनाए रखा और मयूर शेखर झा से कहा कि वो उन्हें ज्ञान न दें। नतीजन अधिकांश लोगों द्वारा उन्हें इस तरह पाकिस्तान की जीत पर और भारत की हार पर खुशी मनाने के लिए भला-बुरा कहा गया।

जब सुबह मीडिया ने इस ट्वीट और उसपर आने वाली प्रतिक्रिया पर अपनी रिपोर्ट की तो एक यूजर ने उन्हें सलाह दी कि उन्हें इस मामले में शिकायत करनी चाहिए। तब जाकर राधिका खेरा ने बताया कि वो लीगल एक्शन लेंगी कि उनके ट्वीट को ट्विस्ट और टर्न किया गया यानी उसे तोड़-मरोड़ कर गलत तरह से पेश किया गया जबकि उन्होंने तो क्रिकेट को लेकर कुछ कहा ही नहीं और न ही किसी की जीत हार पर बोला। लेकिन झूठ और छल भाजपा और प्रायोजित मीडिया का कर्म और धर्म है!

इस बाबत राधिका ने इंडियन एक्सप्रेस के अर्पित आलोक शर्मा को भी सफाई दी क्योंकि उन्होंने भी सवाल किया था कि आखिर भारत की हार को ‘अंधभक्तों’ से जोड़कर कैसे देखा जा सकता है। इस पर राधिका ने उन्हें जवाब दिया कि अंधभक्ति में इतना लीन न हों कि सवाल आपकी प्रकाशन की निष्पक्ष पत्रकारिता पर उठे। इसके बाद टाइम्स नाऊ के पत्रकार को भी सवाल पूछने पर भाजपा प्रवक्ता करार दे दिया गया।

यहाँ बता दें कि राधिका खेरा ने कॉन्ग्रेस पार्टी की ओर से दिल्ली की जनकपुरी वेस्ट की सीट पर साल 2020 में विधायकी का चुनाव लड़ा था। जहाँ उन्हें मात्र 2, 084 (1.67%) वोट मिले थे और उनकी जमानत जब्त हो गई थी जबकि aap के राजेश ऋषि को 67, 968 वोट के साथ विजय मिली थी।

T20 वर्ल्ड कप में भारत पर जीत के बाद बौराए पाकिस्तानी, कराची में जश्न के दौरान 12 लोगों को लगी गोली

टी-20 वर्ल्ड कप में भारत के खिलाफ मिली जीत के जश्न में पाकिस्तानियों ने जमकर हुड़दंग किए। रविवार (24 अक्टूबर 2021) रात इस्लामाबाद, कराची, रावलपिंडी और क्वेटा जैसे बड़े शहरों में हजारों की भीड़ सड़कों पर उतर आई। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने हवाई फायरिंग कर अपनी खुशी का इजहार किया। इमरान सरकार के मंत्री जहाँ एक तरफ इस जीत पर जहर उगल रहे हैं तो वहीं, अकेले कराची में अलग-अलग जगह हुई हवाई फायरिंग में 12 लोगों को गोली लगने की खबर है। पुलिस के मुताबिक जिनको गोली लगी है उनमें एक सब-इंस्पेक्टर भी शामिल है। 

कराची पुलिस ने बताया कि रविवार रात को जश्न मनाने के दौरान शहर के अलग-अलग हिस्सों में फायरिंग की गई। इस दौरान अज्ञात लोगों की फायरिंग में एक सब-इंस्पेक्टर सहित 12 लोग घायल हो गए। कराची के ओरंगी टाउन सेक्टर-4 और 4K चौरांगी में गोलियों से दो लोग घायल हो गए। पुलिस ने कहा कि गुलशन-ए-इकबाल में हवाई फायरिंग में शामिल लोगों के खिलाफ एक ऑपरेशन के दौरान एक सब इंस्पेक्टर को गोली लग गई।

इन दोनों घटनाओं के अलावा कराची के सचल गोठ, ओरंगी टाउन, न्यू कराची, गुलशन-ए-इकबाल और मलिर समेत अलग-अलग इलाकों में हवाई फायरिंग की सूचना है। लोगों ने सड़कों पर जमकर डांस किया और आतिशबाजी की।

वहीं पाकिस्तान इस जीत को मजहबी रंग भी दे रहा है। पाकिस्तान के मंत्री शेख रशीद ने भारत के खिलाफ मिली इस जीत को पूरे इस्लाम की जीत करार दिया और दुनिया भर के मुस्लिमों को फतह मुबारक कहा। रशीद का सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है। इसमें वे कहते सुने गए कि उन्हें अफसोस है कि यह पहला हिंदुस्तान और पाकिस्तान का मैच था, जो वे कौमी जिम्मेदारियों की वजह से ग्राउंड में नहीं देख सके। लेकिन उन्होंने इस्लामाबाद और रावलपिंडी ट्रैफिक पुलिस को हिदायत दी है कि कंटेनर्स हटा दिए जाएँ, ताकि कौम इस जश्न को यादगार तरीके से मना सके।

उल्लेखनीय है कि T20 विश्व कप में भारत का पहला मुकाबला रविवार को पाकिस्तान से हुआ। इस मैच में टीम इंडिया को 10 विकेट से एकतरफा हार का सामना करना पड़ा। पाकिस्तान की जीत के साथ ही विश्व कप में भारत के हाथों उसकी लगातार 12 हार का सिलसिला टूट गया। भारत के विरुद्ध T20 मैचों में बाबर आजम और मोहम्मद रिजवान की साझेदारी सर्वाधिक है। साथ ही पहली बार T20 में भारत 10 विकेट से हारा। बाबर आजम ने 52 गेंदों पर 68 रन बनाए तो मोहम्मद रिजवान ने 55 गेंदों पर 79 रनों की पारी खेली। दोनों ही बल्लेबाज नाबाद रहे।