Home Blog Page 3298

हिंदू धार्मिक व धर्मार्थ विभाग के कॉलेज में सुहैल को चाहिए नौकरी, मद्रास हाई कोर्ट में मामला: ‘केवल हिंदू ही करें आवेदन’ पर बवाल

मद्रास हाई कोर्ट में एक मामला आया है। एक मुस्लिम आदमी एक हिंदू धार्मिक संस्था में काम करना चाहता है। “इस पोस्ट के लिए सिर्फ हिंदू ही आवेदन कर सकते हैं” – इसके खिलाफ ए. सुहैल नाम के मुस्लिम आदमी ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है।

यह मामला चेन्नई के अरुलमिगु कपालिश्वरार कला व विज्ञान कॉलेज (Arulmigu Kapaleeswarar Arts and Science College, Chennai) से जुड़ा है। इसकी स्थापना तमिलनाडु हिंदू धार्मिक व धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग (Hindu Religious and Charitable Endowments Department, Tamil Nadu) के द्वारा की गई है।

हिंदू धार्मिक व धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के कॉलेज में मुस्लिम आदमी ए. सुहैल को नौकरी चाहिए। उसने हाई कोर्ट की अपनी याचिका में तर्क दिए:

(i) “केवल हिंदू ही आवेदन कर सकते हैं” की शर्त के कारण वह कॉलेज में कार्यालय सहायक के पद के लिए इंटरव्यू में शामिल नहीं हो सका।

(ii) सुप्रीम कोर्ट ने व्याख्या दी है कि ‘हिंदू’ शब्द किसी धर्म को नहीं दर्शाता है, हिंदू एक धर्म नहीं बल्कि जीवन का एक तरीका है तो कोई भी उम्मीदवार हिंदू है या नहीं, इसको कैसे तय किया जा सकता है? इसलिए भारतीय मुस्लिमों या भारतीय ईसाइयों या किसी भी अन्य को कॉलेज आवेदन करने से नहीं रोक सकता।

(iii) संविधान में स्पष्ट है कि धर्म के आधार पर राज्य भेदभाव नहीं कर सकता है। इसलिए नौकरी के लिए लगाई गई शर्त कि केवल हिंदू ही उस पद पर नियुक्त होने के पात्र हैं, असंवैधानिक है।

(iv) हिंदू कट्टरपंथी वर्तमान सरकार की आलोचना करते हैं कि वो हिंदू विरोधी है। ऐसे में इस तरह की आलोचना से बचने के लिए ही कॉलेज या विभाग ने हिंदुत्व विचारधारा के प्रसार का तरीका अपनाया, केवल हिंदुओं को नियुक्त करने का निर्णय लिया।

(v) शिक्षण और गैर-शिक्षण पदों का धार्मिक कार्यों से कोई लेना-देना नहीं है। ऐसे पदों के लिए सभी को प्रतिस्पर्द्धा करने की अनुमति दी जानी चाहिए, चाहे उम्मीदवार का धर्म कुछ भी हो।

अरुलमिगु कपालिश्वरार कला व विज्ञान कॉलेज ने 13 अक्टूबर 2021 को भर्ती अधिसूचना जारी की थी। इसके अनुसार सहायक प्रोफेसर, फिजिकल डायरेक्टर, लाइब्रेरियन, सहायक, जूनियर सहायक, कार्यालय सहायक सहित चौकीदार, सफाईकर्मी और स्वीपर की भर्ती के लिए केवल हिंदू उम्मीदवारों को वॉक-इन इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था। यह भर्ती 18 अक्टूबर 2021 को होनी थी।

‘केवल हिंदुओं के लिए क्यों’ पर राजनीति

भर्ती शुरू होने से पहले बवाल जरूर शुरू हो गया। ए. सुहैल की मद्रास हाई कोर्ट में याचिका से पहले द्रविड़ कड़गम के अध्यक्ष के. वीरमणि भी इसके खिलाफ मैदान में कूद चुके थे। भर्ती अधिसूचना (जो 13 अक्टूबर को आई थी) पर उन्होंने आपत्ति जताते हुए सवाल किया था कि हिंदू धार्मिक व धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग (Hindu Religious and Charitable Endowments Department) द्वारा संचालित कॉलेजों में कोई भी पद केवल हिंदुओं के लिए क्यों होने चाहिए?

इस राजनीति से शिक्षक संघ भी अछूता नहीं रहा। एसोसिएशन ऑफ यूनिवर्सिटी के पूर्व अध्यक्ष के. पांडियन ने कहा कि राज्य सरकार के द्वारा संचालित किसी भी विभाग में धर्म आधारित नियुक्ति या भेदभाव नहीं किया जा सकता है। पांडियन ने उदाहरण दिया कि मदुरैई के वक्फ बोर्ड में कई गैर-मुस्लिम काम करते हैं।

BHU में फिरोज खान Vs जीसस एंड मेरी कॉलेज

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय (SVDV) का मामला भूल गए हों तो याद कीजिए कि कैसे फिरोज खान नाम के एक गैर-हिन्दू का ‘धर्म-विज्ञान संकाय’ में नियुक्ति कर दी गई थी। छात्रों के जबरदस्त विरोध और ऑपइंडिया की लगातार कवरेज के बाद उस नियुक्ति को निरस्त किया गया था। वामपंथियों द्वारा इस मुद्दे को नौकरी के नाम पर संवैधानिक हक का जामा पहनाया गया था। मीडिया गिरोह में लंबे-लंबे लेख लिखे गए थे।

BHU के नाम पर कूदने वाली वामपंथियों की यही लॉबी तब हफ्ते भर के अंदर गायब हो गई थी, जब जीसस एंड मेरी कॉलेज ने अपना एक विज्ञापन निकाला था। विज्ञापन के अनुसार प्राध्यापक के पद पर नियुक्ति हेतु आवेदन आमंत्रित किया गया था। आवेदक के पास पादरी का ‘अनुशंसा पत्र’ होना चाहिए था और ‘बैप्टिज्म सर्टिफिकेट’ भी – मीडिया गिरोह हालाँकि BHU की थकान के बाद सो गया था।

सेंट जोसफ स्कूल के प्रिंसिपल ने कहा- चोटी कटवा कर आओ, छात्र ने इनकार किया तो बाहर निकालाः शिखा के चलते प्रताड़ित करने का आरोप

छत्तीसगढ़ के जिला कांकेर के सेंट जोसफ हायर सेकेंड्री स्कूल गुरुवार (21 अक्टूबर 2021) को विवाद का केंद्र बन गया। यहाँ पर हिन्दू धर्म के अपमान का आरोप लगा है। विवाद वहीं पढ़ने वाले एक छात्र की शिखा (चोटी) को ले कर उठा है। कक्षा 10 में पढ़ने वाले छात्र का आरोप है कि उसे शिखा कटवा कर आने को कहा गया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पीड़ित छात्र का नाम अंश तिवारी है। अंश के परिजनों ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे को 2 दिन से स्कूल में घुसने नहीं दिया गया है। स्कूल के प्रिंसिपल का नाम जोमोन पीटी है। जब अभिभावकों ने उनसे बात की तो उन्होंने कहा कि पहले शिखा कटवाओ तब भेजो। परिजनों का आरोप है कि उनके बेटे अंश तिवारी को शिखा के चलते स्कूल में कई बार प्रताड़ित किया गया है।

कथित तौर पर प्रिंसिपल ने छात्र से शिखा कटवाने को कहा। जवाब में छात्र ने इसे अपने धर्म का प्रतीक बता कटवाने से इनकार कर दिया। इससे नाराज हो प्रिंसिपल ने उसे स्कूल से बाहर निकाल दिया था। सेंट जोसफ स्कूल कांकेर के भानु प्रतापपुर क्षेत्र में स्थित है।

जब इस पूरे प्रकरण की जानकारी भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा को हुई तो कई कार्यकर्ता स्कूल पहुँच गए। उन्होंने प्रिंसिपल के कमरे में भगवा झंडा लगा दिया। इसी के साथ स्कूल के कैम्पस में जय श्री राम के नारे लगे। भाजयुमो के जिला अध्यक्ष राजा पांडे इस समूह का नेतृत्व कर रहे थे।

राजा पांडे के अनुसार सेंट जोसफ स्कूल की शिकायतें लगातार 7-8 वर्षों से मिल रही थीं। पहले भी उस स्कूल में हिन्दू देवी देवताओं पर अपमानजनक टिप्पणी की जाती रही है। हिन्दू छात्रों की धार्मिक भावनाओं पर भी लगातार प्रहार किया जाता है। इसी के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी का यह आंदोलन है।

इस मामले की सच्चाई जानने के लिए जब पत्रकारों ने प्रिंसिपल से सवाल किया तो वो चेंबर से बाहर निकल गए। पत्रकारों ने उनके गाडी में बैठने तक सच्चाई जाननी चाही तो उन्होंने कोई भी जवाब नहीं दिया। आखिरकार वो बिना कुछ भी बताए स्कूल से चले गए।

इस घटनाक्रम पर भानु प्रतापपुर के SDM का बयान भी आया है। SDM जितेंद्र यादव ने कहा है कि स्कूल के मैनेजमेंट और बाकी समाज के लोगों के बीच सहमति बन गई है। आगे से स्कूल प्रबंधन परिजनों को हर मामले की सूचना देता रहेगा। स्कूल के प्रबंधन ने आगे ऐसी शिकायत न आने की बात कही है। इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्कूल प्रबंधन की तरफ से दुबारा ऐसा किया गया तो कार्रवाई की जाएगी।

संयुक्त किसान मोर्चा से योगेंद्र यादव सस्‍पेंड, लखीमपुर खीरी में मार डाले गए BJP कार्यकर्ता शुभम मिश्रा के घर जाने को लेकर कार्रवाई

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने योगेंद्र यादव को एक महीने के लिए सस्पेंड कर दिया है। SKM केंद्र सरकार के कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठनों का शीर्ष निकाय है। योगेंद्र यादव पर यह करवाई लखीमपुर खीरी हिंसा में मार डाले गए बीजेपी कार्यकर्ता शुभम मिश्रा के घर जाने को लेकर की गई है।

इस मुलाकात के बारे में यादव ने खुद ट्विटर पर जानकारी साझा की थी। उन्होंने लिखा था, “शहीद किसान सभा से वापसी में बीजेपी कार्यकर्ता शुभम मिश्रा के घर गए। परिवार ने हम पर गुस्सा नहीं किया। बस दुखी मन से सवाल पूछा कि क्या हम किसान नहीं हैं? हमारे बेटे का क्या कसूर था? आपके साथी ही एक्शन का रिएक्शन वाली बात क्यों कही? उनके सवाल कान में गूँज रहे हैं।”

कहा जा रहा है कि इस ट्वीट के बाद से ही योगेंद्र यादव के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा में नाराजगी का माहौल था। उनके खिलाफ मोर्चा कार्रवाई करने की बात भी कह रहा था, लेकिन उससे पहले उन्हें माफी माँगने को भी कहा गया था। गुरुवार (21 अक्टूबर 2021) को हुई संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में योगेंद्र यादव को एक महीने के लिए सस्पेंड करने का निर्णय लिया गया।

सूत्रों के मुताबिक, पंजाब के किसानों ने बड़ी ही आक्रामकता के साथ योगेंद्र यादव पर कार्रवाई की माँग की थी। बैठक के दौरान योगेंद्र यादव ने शुभम मिश्रा परिवार से मिलने से पहले अपने सहयोगियों से सलाह न लेने के लिए माफी माँगी थी। लेकिन उन्होंने मृतक भाजपा कार्यकर्ता के परिवार से मिलने के लिए माफी नहीं माँगी। उनका कहना था कि उन्होंने संवेदना व्यक्त कर कुछ भी गलत नहीं किया।

लखीमपुर खीरी हिंसा मामला

3 अक्टूबर 2021 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में ‘किसानों’ की एक भीड़ ने भाजपा के काफिले पर पत्थर और लाठियों से हमला किया। इसके बाद हुए हंगामे के बीच प्रदर्शनकारियों के ऊपर एक वाहन दौड़ता देखा गया। इसके बाद गुस्साई भीड़ ने दो वाहनों को आग के हवाले कर दिया। लोगों को वाहन के अंदर से घसीटा और पीट-पीटकर मार डाला। हिंसा में कुल आठ लोगों की जान चली गई थी। मामले में अब तक दस गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार ने मृतक के परिजन को 45 लाख रुपए और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का वादा किया था। मामले की जाँच के लिए एक सदस्यीय कमेटी भी बनाई गई है। पिछले दिनों हिंसा की जाँच कर रही SIT ने घटना में शामिल कुछ संदिग्धों की तस्वीरें जारी कर लोगों से सूचना देने की अपील भी की थी।

वैध प्रमाण पत्र, सरकारी नियमों के चंगुल में फँसे पाकिस्तान से आए 800 हिन्दू: अब इस वजह से दिल्ली हाईकोर्ट में बिजली देने से इनकार

उत्तरी दिल्ली के आदर्श नगर इलाके में रह रहे 800 पाकिस्तानी हिन्दू शरणार्थियों की जिंदगी में सालों से अँधेरा है। पिछले कई सालों से यह लोग यहाँ पर अँधेरे में रहने को मजबूर हैं। वजह है झुग्गी में रह रहे इन 200 परिवारों के लिए बिजली का न होना। भारत में इनके होने की उम्मीद केंद्र की मोदी सरकार ही है। सालों से यह भारतीय नागरिक होने के सपने लिए बहुत ही बुरी हालात में जी रहें हैं। ये लौटना भी नहीं चाहते क्योंकि इनके लिए पाकिस्तान और भी बुरा है। ऐसे में अपने बिजली के सपने के लिए इन्होने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका डाली थी। जिस पर आज सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने ही 200 पाकिस्तानी हिंदू प्रवासी परिवारों के लिए बिजली कनेक्शन की माँग वाली याचिका का दिल्ली हाईकोर्ट में विरोध किया है।

सरकारी नियमों के चंगुल में फँसे यह शरणार्थी पिछले महीने से इस उम्मीद में थे कि शायद उनकी यह दिवाली रौशन हो, लेकिन अब दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल जवाब में बताया गया है कि यह शरणार्थी कैंप दिल्ली जल बोर्ड की जमीन पर अवैध अतिक्रमण है। जो वर्तमान में डिफेन्स की जमीन है। जिससे इन्हें बिजली कनेक्शन की मंजूरी नहीं मिल सकती।

अदालत ने पिछले महीने ही दिल्ली सरकार और केंद्र को पाकिस्तान से पलायन करने वाले हिन्दू परिवारों के लिए राहत की माँग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया था। जिस पर आज (22 अक्टूबर, 2021) केंद्र ने अदालत को बताया है कि अगस्त 2018 में 70.253 एकड़ भूमि रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन को हस्तांतरित की गई थी और वह संबंधित जिला प्रशासन और पुलिस के साथ रक्षा भूमि पर अनधिकृत कब्जे और अतिक्रमण को हटाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।

बिजली को मोहताज पाकिस्तानी हिन्दू शरणार्थी

केंद्र ने अदालत को बताया कि रक्षा मंत्रालय ने दिल्ली जल बोर्ड और उत्तरी दिल्ली पावर लिमिटेड के साथ भी ‘अनधिकृत कब्जाधारियों’ की बिजली और पानी की आपूर्ति को काटने का मामला भी उठाया था। अर्थात जो अब तक बिजली की आस देख रहे थे। उनको अब रहने के भी लाले पड़ने वाले हैं। यहाँ सोचने के लिए यह भी है कि जब पहले से ही वहाँ पाकिस्तानी हिन्दू शरणार्थी रह रहे थे, जिनका भारत में अपना कोई ठिकाना नहीं है तो बिना पुनर्वास के उनकों वहाँ से हटाने का प्रबंध भी दिल्ली जलबोर्ड ने वह जमीन 2018 में डिफेन्स को स्थान्तरित करके कर दी।

सितम्बर में दाखिल हुई थी याचिका

गौरतलब है कि मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति अमित बंसल की पीठ ने गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय, दिल्ली सरकार, उत्तरी दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी), दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (डीईआरसी), टाटा पावर दिल्ली वितरण लिमिटेड (टीपीडीडीएल) और उत्तरी दिल्ली के जिलाधिकारी को नोटिस जारी किए थे और उन्हें याचिका पर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए थे। जिस पर आज की सुनवाई में केंद्र के जवाब से CAA के जरिए नागरिकता का सपना पाले इन पाकिस्तानी हिन्दू शरणार्थियों के सपने एक बार फिर चूर होते नजर आ रहे हैं।

बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने पिछले महीने ही मामले को आगे की सुनवाई के लिए 22 अक्टूबर, 2021 को सूचीबद्ध किया था। जिस पर आज कोर्ट में सुनवाई हुई और समाधान निकलता नजर नहीं आ रहा है। याचिका में 200 हिंदू अल्पसंख्यक शरणार्थी परिवारों के लिए बिजली कनेक्शन की माँग की गई है, जिसमें लगभग 800 लोग शामिल हैं, जो वर्तमान में उत्तरी दिल्ली के आदर्श नगर इलाके में दिल्ली जल बोर्ड मैदान में रह रहे हैं। इसके अलावा भी उत्तरी दिल्ली के मजनू का टीला और सिग्नेचर ब्रिज के पास वाले कैंप में भी जहाँ पाकिस्तान से आए हिन्दू शरणार्थी रहते हैं, बिजली और उचित शौचालय की व्यवस्था न होने से इन हिन्दू शरणार्थियों का जीवन बेहाल है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए मजनू का टीला कैंप के प्रधान धर्मवीर ने कहा, “पिछले सात सालों से हम बिजली के लिए प्रयास कर रहे हैं, आए दिन साँप-बिच्छू निकलते रहते हैं। जीवन का खतरा यहाँ भी है और वहाँ (पाकिस्तान) भी, हम क्या करें। बिजली मिल जाए हम मेहनत करके बिल भी चुका देंगे।” बता दें कि यमुना के किनारे बसा मजनू का टीला कैंप भी केंद्र सरकार की जमीन पर ही है और ये शरणार्थी पिछले सात साल से पुनर्वास की बाँट जोह रहे हैं।

बिजली को मोहताज पाकिस्तानी हिन्दू शरणार्थी

भारत में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के ‘अल्पसंख्यक शरणार्थियों’ के कल्याण के लिए काम करने वाले याचिकाकर्ता हरिओम ने आदर्श नगर कैंप को लेकर मीडिया को बताया कि आदर्श नगर कैंप के मामले में, प्रवासी पाकिस्तान से हैं, ज्यादातर सिंध से हैं, और पिछले कुछ सालों से यहाँ बिना बिजली के रह रहे हैं। ये शरणार्थी जो पाकिस्तान में बहुसंख्यक मुस्लिमों द्वारा अपने धार्मिक उत्पीड़न के कारण पाकिस्तान से भारत आए हैं। उनका मानना है कि भारत आने से उनके बच्चों को एक उज्ज्वल और सुरक्षित भविष्य मिलेगा, लेकिन झुग्गी में बिजली के बिना उनका वर्तमान अस्तित्व पूरी तरह से बिखर गया है।

तमाम कोशिशों के बाद भी नहीं मिली बिजली

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अधिवक्ता समीक्षा मित्तल, आकाश वाजपेयी और आयुष सक्सेना के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है, “महामारी के दौरान जब सभी स्कूल ऑनलाइन हो गए हैं, ऐसे में झुग्गियों में बिजली नहीं होने से उनके बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो गया है।”

याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि पहले भी उन्होंने विभिन्न सरकारी अधिकारियों से संपर्क किया है, लेकिन शरणार्थियों के लिए बिजली प्राप्त करने में सफल नहीं हो सके और उनमें से कुछ ने टीपीडीडीएल को भी आवेदन किया, जिसने इस आधार पर इनकार कर दिया कि इसके लिए वैध निवास प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है। अब ये शरणार्थी जिनकी भारत में नागरिकता ही नहीं है वैध प्रमाण पत्र कहाँ से लाएँ।

याचिका में दावा किया गया है कि अधिकांश प्रवासी लंबी अवधि के वीजा पर रह रहे हैं और उनके पास उसी पते के साथ आधार कार्ड भी है जिस पर वे वर्तमान में रह रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप उनका कब्जा साबित हुआ। वहीं डिस्कॉम के अनुसार आधार का उपयोग पहचान प्रमाण के रूप में किया जा सकता है, लेकिन परिसर में रहने के प्रमाण के रूप में नहीं। याची ने अदालत से आग्रह किया था कि उनके मुवक्किलों को आधार कार्ड व वीजा के आधार को मानते हुए बिजली कनेक्शन प्रदान करने का निर्देश दिया जाए।

देश की आन के लिए खालिस्तानियों से भिड़ा, 6 माह ऑस्ट्रेलिया जेल में रहा: देखें विशाल जूड की ऑपइंडिया से खास बातचीत

ऑस्ट्रेलिया की जेल से विशाल जूड की रिहाई के बाद अभी हाल में वो भारत लौटे हैं। उन्होंने विदेश में अपने देश के लिए आवाज उठाने की कीमत 6 माह चुकाई। खालिस्तानियों के विरोध में आवाज बुलंद करने वाले और देश की आन की खातिर उनसे लड़ने वाले विशाल 16 अप्रैल 2021 से 15 अक्टूबर 2021 तक जेल में बंद रहे। कोर्ट में सबूत भी दिए गए कि उन्हें खालिस्तानियों ने उकसाया था, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब लंबे अरसे बाद वह लौटे हैं। ऐसे में ऑपइंडिया की एडिटर-इन-चीफ नुपूर जे शर्मा ने उनका साक्षात्कार लिया है।

इंटरव्यू में विशाल जूड और उनके वकील अमरेंद्र सिंह ने उन घटनाओं के क्रम बारे में बात की जिसके कारण उनकी और सिखों की झड़प हुई और उन्हें जेल में रहना पड़ा। पहली घटना क्वेकर हिल की थी, जहाँ खालिस्तानी भारत में किसानों के विरोध में एकत्र हुए थे। इस घटना में, वे ‘मोदी &*% है’ और अन्य भारत विरोधी आक्रामक नारे लगा रहे थे। वे भारतीय ध्वज का भी अपमान कर रहे थे। लेकिन विशाल उनके सामने खड़े हो गए और पार्क की बेंच पर खड़े होकर भारतीय ध्वज फहराया। इसके बाद खालिस्तानियों ने विशाल पर हमला कर दिया।

दूसरी घटना 14 फरवरी की है। उस समय गणतंत्र दिवस पर कथित किसानों द्वारा की गई हिंसा के ख़िलाफ़, विशाल जूड ने भारत के साथ एकजुटता दिखाने के लिए एक तिरंगा रैली का आयोजन किया था। उस रैली के दौरान खालिस्तानियों ने विशाल जूड को ढूँढना शुरू किया। जूड बताते हैं कि तिरंगा रैली को लेकर खालिस्तानियों ने ऑस्ट्रेलिया पुलिस को झूठ बोला था कि इस रैली में भाग लेने वाले गुरुद्वारे पर हमला करने जा रहे हैं। इसके बाद रैली की परमिशन होते हुए भी उन्हें रैली खत्म करनी पड़ी और वापस लौटना पड़ा।

इस बीच विशाल को खालिस्तानियों ने ढूँढा और बेस बॉल के बैट से मारने चले, लेकिन जूड ने उनसे वो बल्ला छीना और डराने के लिए कार उसी से उनकी कार पर मार दिया। बस यही वो घटना थी जिसके कारण विशाल को 6 माह सजा काटनी पड़ी। खालिस्तानियों से आत्मरक्षा में छीना गया बेस बॉल का बैट और बचाव में किया गया हमला जूड पर आरोप लगाने का आधार बना। खास बात ये थी कि वो वीडियो जिसमें खालिस्तानियों ने जूड पर हमला किया वो गायब कर दी गई और इसके कारण कोई खालिस्तानी हिंसा मामले में नहीं पकड़ा गया।

इन घटनाओं के अलावा साक्षात्कार में विशाल और उनके वकील ने जेल में उनके साथ दुर्व्यवहार पर भी बात की। पहले दिन जेल का गार्ड जो सिख खालिस्तानी था उसने उन्हें धमकाया। दूसरी बार उसे कॉल पर धमकी आई। लेकिन आरोपित गार्ड की जब शिकायत की गई तो उसे सिर्फ चेतावनी दी गई और जूड को जेल के अंदर एक अलग स्थान पर ले जाया गया। उन्हें वहाँ उनके मूल अधिकारों से वंचित रखा गया। कभी-कभी उन्हें खाना नहीं दिया जाता था और कभी कभी परिवार को फोन करने की अनुमति नहीं मिलती थी।

इन बातों के अलावा, जूड के वकील ने यह भी स्पष्ट कहा कि भारतीय मीडिया और ऑस्ट्रेलियाई मीडिया में कुछ जगह जूड के निर्वासन पर गलत रिपोर्ट हुई। हकीकत में उन्हें निर्वासित नहीं किया गया था, बल्कि उन्हें तो ऑस्ट्रेलिया का आजीवन वीजा लेने का विकल्प दिया गया था, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया था और भारत वापसी की इच्छा जताई।

मालून हो कि विशाल जूड हरियाणा से हैं और ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई करने गए थे। उन्हें 16 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था क्योंकि खालिस्तानियों ने उनके ख़िलाफ़ शिकायत कर दी थी। उनपर संपत्ति को तोड़ने और मारपीट का आरोप लगा था। वहीं खालिस्तानी पीड़ित दिखाए गए थे। इस तरह उनके लिए ऑस्ट्रेलिया कोर्ट ने 6 माह की सजा मुकर्रर की। 1 सितंबर को विशाल के वकील ने वादी से समझौता किया और उन्हें 2 मामलों में दोषी पाकर बाकी केस ड्रॉप कर दिए गए। विशाल के भाई ने ऑस्ट्रेलिया टुडे से कहा था, “बजरंग बली के आशीर्वाद से विशाल जल्द हमारे साथ होगा। हम सिडनी से उसकी रिहाई के इंतजार में हैं।”

आप ऑपइंडिया पर विशाल जूड और उनके वकील अमरेंद्र सिंह का इंटरव्यू इस लिंक पर क्लिक करके देख सकते हैं। ये लेख अंग्रेजी एडिटर नुपूर जे शर्मा द्वारा लिखे लेख पर आधारित है।

‘फ्री में मुर्गा न देने पर सिंघु बार्डर पर बिहार के दलित मजदूर की निहंगों ने तोड़ी टाँग’: आरोपित नवीन संधू गिरफ्तार, वीडियो वायरल

निहंग की हिंसक हरकत से एक बार फिर से सिंघु बार्डर और किसान आंदोलन चर्चा में है। हरियाणा के सोनीपत जिले के सिंघु बार्डर पर अब आस-पास के गाँवों में मुर्गा सप्लाई करने वाले मजदूर की टाँग तोड़ दी गई है। पीड़ित मनोज पासवान बिहार का रहने वाला है। घायल मनोज को सोनीपत के अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। पुलिस ने आरोपित निहंग नवीन संधू को गिरफ्तार कर लिया है।

गिरफ्तार निहंग बाबा अमन सिंह के समूह का बताया जा रहा है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में घायल मनोज पासवान घटना की जानकारी देते हुए कह रहा है कि, ‘एक सरदार जी ने मुझ से मुर्गा माँगा। मैंने बोला कि मुर्गा नहीं दे सकता क्योकि मेरा गिनती का हिसाब होता है। मैंने उन्हें पर्ची भी दिखाई। मैं मुर्गा नहीं दे सकता हूँ।

बताया जा रहा है कि इसी के बाद निहंग नवीन संधू ने मनोज पासवान की लाठी से पीट-पीटकर उसकी टांग तोड़ दी। आरोपित निहंग के बारे में दावा किया जा रहा है कि सिंघु बॉर्डर पर जो निहंग सिंह पकड़ा गया है वह नवीन संधू है। नवीन संधू हरियाणा के करनाल जिले के गाँव गगसीना का रहने वाला है। इसी के साथ वह शुरू से ही किसान आंदोलन से जुड़ा हुआ है।

मिली जानकारी के अनुसार मनोज ने आरोपित निहंग को जेब से मुर्गों की संख्या वाली पर्ची भी दिखाई थी। पर्ची निकालते समय मनोज की जेब से बीड़ी का बंडल बाहर आ गया। इस बात पर निहंग मनोज को गाली देने लगा। मनोज ने अपना दोष पूछा तो उसको फिर मारा गया।

पीड़ित मनोज कुंडली बॉर्डर के पास सत्यवान की चिकन शॉप में काम करता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सत्यवान ने बताया कि उनका आस-पास के गाँवों में मुर्गे की सप्लाई का काम है। मनोज हर दिन की तरह रिक्शे पर मुर्गा ले कर निकला तो रास्ते में निहंग ने उसको रोका और पीट दिया।

सत्यवान के अनुसार पुलिस में शिकायत कर दी गई है। दुकान मालिक के अनुसार सत्यवान की टाँग टूट जाने के कारण उनके घर पर रोजी रोटी का संकट आ गया है। उनकी इच्छा है कि हमलावर निहंग के खिलाफ पुलिस कड़ा एक्शन ले।

इस घटना के बाद वायरल हो रहे एक अन्य वीडियो में कई निहंग दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में उनको कहते सुना जा सकता है कि वो बाबा अमन सिंह से नाता तोड़ रहे हैं। उनके अनुसार सिंघु बॉर्डर पर आज जो आदमी गिरफ्तार हुआ है वो बाबा अमन सिंह के ही जत्थे से है।

इस से पहले सिंघु बॉर्डर पर 15 अक्टूबर 2021 (शुक्रवार) को सुबह लखबीर सिंह की हत्या कर दी गई थी। इसका आरोप भी निहंगों पर लगा था। लखबीर की हत्या के पीछे निहंगों ने अपने धर्मग्रंथ का अपमान बताया था।

‘इस्लाम द ओनली सॉल्यूशन’ छपी बिल से सालिम कर रहा था मजहबी प्रचार, FIR के बाद यूपी पुलिस ने की पूछताछ

उत्तर प्रदेश के कानपुर में इस्लाम का प्रचार करने के लिए बिल की पर्ची का इस्तेमाल किया जा रहा है। ये खुलासा होने के बाद पुलिस अब बिल जारी करने वाली दुकान के मालिक को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। दूसरी ओर सोशल मीडिया पर इस तस्वीर को तेजी से शेयर किया जा रहा है। इस पर ‘Islam Is The Only Solution’, अर्थात इस्लाम ही एकमात्र समाधान लिखा है।

इस मामले में ताजा जानकारी के मुताबिक पुलिस ने मेस्टन रोड में स्थित कारोबारी मोहम्मद सालिम को हिरासत में ले लिया है और उसके विरुद्ध धारा 505 (2) के तहत केस दर्ज किया है। सालिम ‘हसीन एन्ड कंपनी इंडिया’ का है, जो कानपुर में गाय, भैंस और बकरी की चमड़ी दुकानदारों को सप्लाई करता है। इस कंपनी में 5-10 कर्मचारी हैं। ये ड्राई रबर कंटेन्ट और गाय, भैंस व बकरे की कच्ची चमड़ी व इससे बने लेदर की डिलीवरी करता है। कानपुर में इस तरह का मामला सामने आने के बाद पुलिस के का खड़े हो गए हैं।

कारोबारी से पूछताछ में पता चला है कि बिल बनाने के लिए उसके अब्बू 10 साल पहले एक मशीन लाए थे। व्यापार में बरकत के लिए उसने इस्लाम द ओनली सॉल्यूशन लिखवाया। तीन साल पहले उसके अब्बू की मृत्यु हो गई थी। सालिम ने इस मामले में लिखित माफीनामा देते हुए कहा कि उसका इरादा किसी को आहत करने का नहीं था।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, डीसीपी ईस्ट प्रमोद कुमार ने बताया कि इंटरनेट मीडिया के जरिए मामला संज्ञान में आया था। पुलिस ने दुकान वाले की पहचान की और उसे पूछताछ के लिए तलब किया गया। उससे पूछताछ हुई। जो भी जानकारी पता चली उसके आधार पर जाँच करके कार्रवाई की जाएगी। पुलिस कमिश्नर असीम अरुण ने बताया कि व्यापारी के खिलाफ आईपीसी धारा 505 (2) में रिपोर्ट दर्ज की गई है। धारा के तहत मामले में 3 साल की सजा और जुर्माना है।

बता दें कि सालिम से पुलिस मुख्यालय के साथ ही प्रशासनिक स्तर के अधिकारियों ने पूछताछ की। बाद में आईबी व एटीएस ने भी उससे सवाल किए। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, उसे लंबी पूछचाछ के बाद नोटिस दिया गया है और अभी के लिए उसे छोड़ दिया गया है।

सिंघु बॉर्डर पर जिसे निहंगों ने काटकर टाँग दिया, उस लखबीर सिंह के खिलाफ FIR: धार्मिक ग्रन्थ के बेअदबी का मामला

सिंघु बॉर्डर पर जिस लखबीर सिंह की बेरहमी से हत्या हुई, जिसे हाथ-पाँव काटकर टाँग दिया गया था, अब उस पर भी निहंगों की शिकायत पर हरियाणा पुलिस ने केस दर्ज किया है। लखबीर सिंह पर भारतीय दंड संहिता की धारा 295-A (किसी वर्ग के धर्म का अपमान करने के आशय से उपासना के स्थान को क्षति करना या अपवित्र करना।) के तहत केस दर्ज किया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, लखबीर सिंह पर पवित्र किताब का अपमान करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।

बता दें कि पिछले सप्ताह लखबीर सिंह की जघन्य हत्या कर शव को सिंघु बॉर्डर के पास लगे बैरिकेड से टांग दिया गया था। वहीं मीडिया में पुलिस सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि लखबीर सिंह के खिलाफ 17 अक्टूबर को ही कुंडली पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया है। निहंग सिख ने मीडिया चैनल के सामने दावा किया है कि मृतक लखबीर सिंह पर कुंडली थाने में बेअदबी का मुकदमा जत्थेदार बलविंदर सिंह की शिकायत पर FIR हुआ है। इसी दिन बलविंदर सिंह ग्रुप के दो सदस्य भगवंत सिंह और गोविंद प्रीत ने लखबीर सिंह की हत्या में अपनी संलिप्ता को लेकर हरियाणा पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सोनीपत के डीएसपी, (लॉ एंड ऑर्डर), वीरेंद्र सिंह ने बताया कि एफआईआर नंबर 612 लखबीर सिंह के खिलाफ दर्ज किया गया था। इस मामले में जाँच की जा रही है। बुधवार को पुलिस ने कहा था कि वो एक वीडियो क्लिप की जाँच कर रही है जिसमें दिख रहा है कि लखबीर सिंह एक भीड़ से कह रहा है कि उसे 30,000 रुपए दिए गए थे और वो एक युवक का फोन नंबर उन लोगों से शेयर कर रहा है। जिस शख्स का फोन नंबर शेयर किया गया था उसने बताया है कि उसका सिंघु बॉर्डर पर हुई घटना से कोई लेना-देना नहीं है और वो कभी सिंघु बॉर्डर गया ही नहीं।

शिकायत में बताया गया है कि 15 अक्टूबर, 2021 की अलसुबह 3:40 बजे एक युवक पालकी से गुरु ग्रंथ साहिब लेकर भाग रहा था और उसने चाय के लंगर के पास उसे फेंक दिया था। इस पर संगत गुस्से में आ गई। आरोपी को किसने भेजा था, इसकी जाँच की जाए।

गौरतलब है कि इस मामले में हरियाणा पुलिस ने अब तक 4 निहंगों को गिरफ्तार किया है। जिसमें सरबजीत सिंह, नाराय सिंह, भगवंत सिंह और गोविंद प्रीत सिंह शामिल है। 15 अक्टूबर को कुंडली पुलिस स्टेशन में हत्या का केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने कहा है कि आरोपितों ने लखबीर सिंह की हत्या की बात स्वीकार की है और कहा है कि गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी पर उन्होंने यह सजा दी है।

अनन्या पांडे ने कहा था- शाहरुख खान मेरे दूसरे पिता, क्या उनके बेटे आर्यन से करती थीं ‘नशे की बात’: NCB के सामने हुई पेशी

मुंबई ड्रग केस में शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की गिरफ्तारी के बाद नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने चंकी पांडे की बेटी व बॉलीवुड अभिनेत्री अनन्या पांडे के घर छापेमारी कर उनको पूछताछ के लिए समन किया। अब अनन्या अपने पिता चंकी पांडे के साथ एनसीबी के दफ्तर पहुँचीं हैं।

समाचार चैनलों पर लगातार उनकी वीडियो चलाई जा रही है। दावे किए जा रहे हैं कि कुछ समय पहले आर्यन खान की जिस उभरती हुई एक्ट्रेस के साथ ड्रग संबंधी चैट सामने आई थी वो अनन्या पांडे ही थीं।

22 साल की अनन्या के बारे में बता दें कि उन्होंने एक बार शाहरुख को अपने दूसरा पिता कहा था। उस समय उन्हें आर्यन और सुहाना के साथ नजदीकियों के साथ जाना जाता था। ऐसे में साल 2019 में एक बार उन्होंने कहा,

“शाहरुख खान मेरे लिए दूसरे पिता जैसे हैं। वो मेरे पिता के पक्के दोस्त हैं तो हम आईपीएल के लिए साथ जाते हैं।” उन्होंने कहा था, “सिर्फ सुहाना और शनाया ही इंडस्ट्री से मेरी करीबी दोस्त हैं और हम एक दूसरे से सब साझा करते हैं।” 

बता दें कि अनन्या ने अपने करियर की शुरुआत साल 2019 में करण जौहर की फिल्म स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2 से की थी। करण खुद भी ड्रग पार्टी केस में एनसीबी की जाँच के दायरे में हैं। आर्यन की गिरफ्तारी के बाद से वो वीडियो फिर चर्चा में है जो 1 साल पहले सुशांत की मौत के बाद सोशल मीडिया पर वायरल होना शुरू हुआ था। पार्टी की वीडियो को लेकर कहा गया था कि उसमें सभी सेलेब्रिटी ड्रग्स ले रहे हैं। हालाँकि करण ने ऐसे दावों से इंकार किया था।

उल्लेखनीय है कि इस समय बॉलीवुड का ड्रग केस बहुत गरमाया हुआ है। आर्यन की गिरफ्तारी को 20 दिन के करीब हो गया है। लेकिन राहत की कोई किरण नहीं दिख रही। ऐसे में शाहरुख खान आज खुद आर्थर जेल में बेटे से मिलने गए थे। वहीं अनन्या भी पूछताछ के लिए एनसीबी दफ्तर पहुँची। उनका फोन जब्त किया जा चुका है।

3 पोर्न एडिक्ट बच्चे, उम्र: 8 से 11 साल; 6 साल की बच्ची को मार डाला क्योंकि उसने पोर्न देखने से इनकार कर दिया

असम के नौगाँव के कलियाबोर में 6 साल की बच्ची की हत्या कर दी गई। हत्या करने के आरोपित भी तीन बच्चे हैं जिनकी उम्र 8 से 11 साल के बीच है। तीनों पोर्न एडिक्ट बताए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि इन्होंने पोर्न देखने से इनकार करने पर बच्ची की हत्या की।

नौगाँव पुलिस ने इस घटना की जानकारी ट्विटर पर दी है। पुलिस के अनुसार मिस्सा, कलियाबोर क्षेत्र में एक दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम में 6 वर्ष की बच्ची की हत्या कर दी गई। इस केस को 24 घंटे में सुलझा लिया गया है। हत्या में 3 नाबालिग और एक वयस्क को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार वयस्क उस 11 साल के आरोपित का पिता है जिसके मोबाइल पर बच्चे पोर्न देख रहे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार तीनों आरोपित बच्ची के घर के पास ही रहते थे। ये सभी अक्सर मोबाइल पर अश्लील क्लिप देखा करते थे। घटना के दिन इन सभी ने बच्ची को लालच दे कर खदान पर बुलाया था। बाद में इन सभी ने बच्ची को अश्लील क्लिप मोबाइल में दिखाने की जिद की। जब बच्ची नहीं मानी तो उन्होंने पत्थरों से उसकी हत्या कर दी। हत्या करने के बाद इन सभी ने शव वहीं एक शौचालय में छिपा दिया।

बाद में सभी आरोपित घर आ गए और उन्होंने इस घटना के बारे में किसी को भी नहीं बताया। लेकिन पुलिस की जाँच में आख़िरकार ये सभी पकड़े गए। बच्ची का शव मंगलवार (19 अक्टूबर 2021) को पत्थर की खदान के शौचालय में मिला था। पुलिस के अनुसार पकड़े गए आरोपित अन्य अपराधों की साजिश रचने और उनको अंजाम देने में भी सक्षम हैं। पुलिस ने इस कृत्य को आत्ममंथन और सामाजिक हस्तक्षेप का विषय भी बताया है।

नौगाँव जिले के पुलिस अधीक्षक आनंद मिश्रा ने भी घटना पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। ट्वीट कर उन्होंने लिखा है, “परिवार और सामाजिक हस्तक्षेप के साथ संस्थागत मार्गदर्शन 4 युवा जीवन को बचा सकता था। यह हम में से किसी के भी साथ कहीं भी हो सकता है। यदि हमारी आने वाली पीढ़ियाँ सामाजिक-नैतिक मूल्यों पर फेल होती हैं, तो इसकी जिम्मेदारी हमारी ही होगी।”

इसी प्रकार का एक मामले इसी साल अगस्त में मुंबई से सामने आया था। इस मामले में 16 साल की बहन ने अपने 13 वर्षीय भाई को पोर्न वीडियो दिखा जबरन सेक्स करने के लिए मजबूर किया था। इसका खुलासा तब हुआ था जब लड़की 5 महीने की गर्भवती पाई गई। लड़की ने बताया था कि उसने अपने छोटे भाई पर यौन संबंध बनाने के लिए दबाव डाला था, जिसकी वजह से वो गर्भवती हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, किशोरी को पोर्न वीडियो देखने की लत थी। वह अपने छोटे भाई के साथ सोफे पर सोती थी। इस बीच वह 13 साल के भाई को अपने मोबाइल पर पोर्न वीडियो दिखाती थी। इसके बाद वह अपने भाई से उसके साथ सेक्स करने को कहती थी।