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‘भगवान राम-कृष्ण में आस्था नहीं, पिंडदान नहीं’: बौद्ध अंबेडकर के 22 शपथ, इस्लाम की घृणा को लेकर भी किया था आगाह

डॉ भीमराव अंबेडकर ने 14 अक्टूबर 1956 को हिंदू धर्म में अपनी आस्था त्यागकर बौद्ध धर्म अपना लिया। ऐसा माना जाता है कि यह तिथि सम्राट अशोक के बौद्ध धर्म में परिवर्तन से जुड़ी है। इस दिन को महान सामूहिक रूपांतरण/मतांतरण/कन्वर्जन (Great Conversion) या धर्म दीक्षा के रूप में भी जाना जाता है। हिंदुओं में तथाकथित ‘निम्न जातियों’ के लगभग 3,80,000 लोगों ने उस दिन महाराष्ट्र के नागपुर में बौद्ध धर्म ग्रहण किया था। गौरतलब है कि यह शहर बौद्ध लोककथाओं और इतिहास से भी जुड़ा हुआ है। इस दिन को धम्म चक्र प्रवर्तन दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।

अगले दिन, कार्यक्रम में देर से आने वालों को भी बौद्ध धर्म में परिवर्तित कर दिया गया। विभिन्न रिपोर्टों के आधार पर इस ग्रेट कन्वर्जन के दौरान बौद्ध धर्म में परिवर्तित लोगों की कुल संख्या लगभग 6 से 8 लाख बताई जाती है। जहाँ पर यह आयोजन हुआ था वहाँ दीक्षाभूमि, एक पवित्र स्मारक भी बनाया गया था।

डॉ अम्बेडकर ने बौद्ध धर्म अपनाते हुए 22 प्रतिज्ञाएँ लीं। इन प्रतिज्ञाओं में, उन्होंने हिंदू विश्वास प्रणाली में कोई आस्था नहीं रखने का वचन लिया और त्रिदेव, राम, कृष्ण और अन्य हिंदू देवी-देवताओं से जुड़े किसी भी धर्म या धार्मिक प्रथाओं को अस्वीकार करने की कसम खाई। मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश में कोई आस्था नहीं रखूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा आदि…

वो 22 प्रतिज्ञाएँ हैं:

  1. मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश में कोई विश्वास नहीं करूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा।
  2. मैं राम और कृष्ण, जो भगवान के अवतार माने जाते हैं, में कोई आस्था नहीं रखूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा।
  3. मैं गौरी, गणपति और हिन्दुओं के अन्य देवी-देवताओं में आस्था नहीं रखूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा।
  4. मैं भगवान के अवतार में विश्वास नहीं करता हूँ।
  5. मैं यह नहीं मानता और न कभी मानूँगा कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार थे। मैं इसे पागलपन और झूठा प्रचार-प्रसार मानता हूँ।
  6. मैं श्रद्धा (श्राद्ध) में भाग नहीं लूँगा और न ही पिंड-दान दूँगा।
  7. मैं बुद्ध के सिद्धांतों और उपदेशों का उल्लंघन करने वाले तरीके से कार्य नहीं करूँगा।
  8. मैं ब्राह्मणों द्वारा निष्पादित होने वाले किसी भी समारोह को स्वीकार नहीं करूँगा।
  9. मैं मनुष्य की समानता में विश्वास करता हूँ।
  10. मैं समानता स्थापित करने का प्रयास करूँगा।
  11. मैं बुद्ध के आष्टांगिक मार्ग का अनुशरण करूँगा।
  12. मैं बुद्ध द्वारा निर्धारित परमितों का पालन करूँगा।
  13. मैं सभी जीवित प्राणियों के प्रति दया और प्यार भरी दयालुता रखूँगा तथा उनकी रक्षा करूँगा।
  14. मैं चोरी नहीं करूँगा।
  15. मैं झूठ नहीं बोलूँगा।
  16. मैं शारीरिक पाप (कामुक पापों को) नहीं करूँगा।
  17. मैं शराब, ड्रग्स जैसे मादक पदार्थों का सेवन नहीं करूँगा।
  18. मैं महान आष्टांगिक मार्ग के पालन का प्रयास करूँगा एवं सहानुभूति और प्यार भरी दयालुता का दैनिक जीवन में अभ्यास करूँगा।
  19. मैं हिंदू धर्म का त्याग करता हूँ जो मानवता के लिए हानिकारक है और उन्नति और मानवता के विकास में बाधक है क्योंकि यह असमानता पर आधारित है, और स्व-धर्मं के रूप में बौद्ध धर्म को अपनाता हूँ।
  20. मैं दृढ़ता के साथ यह विश्वास करता हूँ की बुद्ध का धम्म ही सच्चा धर्म है।
  21. मुझे विश्वास है कि मैं फिर से जन्म ले रहा हूँ (इस धर्म परिवर्तन के द्वारा)
  22. मैं सत्यनिष्ठा से घोषणा और पुष्टि करता हूँ कि मैं इसके (धर्म परिवर्तन के) बाद अपने जीवन का बुद्ध के सिद्धांतों व शिक्षाओं एवं उनके धम्म के अनुसार अपना जीवन व्यतीत करूँगा।

आज 14 अक्टूबर 2021 को उस दिन की 65वीं वर्षगाँठ है जब डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर ने अपने जीवन के सबसे बड़े निर्णयों में से एक हिंदू धर्म को त्यागने और बौद्ध धर्म को अपनाने का निर्णय लिया। वह अपने करीब चार लाख समर्थकों के साथ नागपुर के दीक्षाभूमि में एकत्र हुए और बौद्ध धर्म अपनाने के लिए हिन्दू धर्म में अपनी आस्था को त्याग दिया।

अम्बेडकर का जन्म महार (दलित) जाति में हुआ था, जिन्हें अछूत माना जाता था और सामाजिक-आर्थिक भेदभाव का सामना करना पड़ता था। इस दुर्दशा को समाप्त करने के लिए, उस समय अम्बेडकर ने हिंदू धर्म को त्यागने और एक और धर्म अपनाने का फैसला किया। कहा जाता है 2 दशकों से अधिक समय तक विचार करने के बाद, एक ऐसा धर्म जो उनकी तत्कालीन आवश्यकताओं की पूर्ति करता हो, उसे देखते हुए उन्होंने बौद्ध धर्म को अपनाया और 14 अक्टूबर 1956 को बौद्ध धर्म में परिवर्तित हो गए।

लेकिन इससे पहले कि वह यह तय करें कि वह किस धर्म को चुनेंगे, अम्बेडकर एक बात पर निश्चित थे: उनका धर्मांतरण का धर्म भारतीय धरती से होगा, न कि वह जिसकी जड़ें कहीं और थीं। उन्होंने उस समय के अब्राहमिक धर्मों का गहराई से विश्लेषण किया था और निष्कर्ष निकाला था कि उनकी एकरूपता और एकेश्वरवादी सिद्धांत भारतीय समाज की विविध और बहुलतावादी प्रकृति के अनुरूप नहीं थे।

तीन अब्राहमिक धर्मों-यहूदी, ईसाई और इस्लाम में, अम्बेडकर इस्लाम के सबसे बड़े आलोचक थे। यह इतिहास का उपहास है कि बीआर अंबेडकर, जिनकी जाति व्यवस्था की निंदात्मक आलोचनाओं को नियमित रूप से लिबरल गिरोह द्वारा हिंदू धर्म का तिरस्कार और उपहास करने के लिए उद्धृत किया जाता है, लेकिन उनकी इस्लाम की तीखी आलोचनाओं और विशेष रूप से भारत में मुसलमानों के क्रूर इतिहास का जिस तरह से उन्होंने वर्णन किया है। उसे इन्हीं वामपंथी और लिबरल गिरोह द्वारा बड़ी चतुराई से किनारे कर दिया जाता है।

गौरतलब है कि 14 अक्टूबर को नागपुर में धम्म चक्र परिवर्तन दिवस मनाने के लिए लाखों की संख्या में वहाँ लोग एकत्रित हुए थे। 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में 87% से अधिक बौद्ध अम्बेडकरवादी हैं। धर्म दीक्षा के छह सप्ताह बाद 6 दिसंबर 1956 को डॉ. अम्बेडकर की दिल्ली में उनके घर पर सोते समय नींद में ही मृत्यु हो गई। वह 1948 से हृदय रोग और मधुमेह जैसी बीमारियों से पीड़ित थे।

बाबासाहब आजादी से पहले ही भाँप गए थे वहाबियों के खतरे को, चंद कॉन्ग्रेसी नेताओं ने दबा दी थी उनकी आवाज: इस लेख में पढ़िए उनके इस्लाम के प्रति विचार

(डॉ अम्बेडकर इस्लाम मजहब के कितने कटु आलोचक थे उसे इस दूसरे लिंक पर क्लिक करके विस्तार से पढ़ा जा सकता है।)

मुगल प्रेम में धुल गए मौर्य से मराठा तक: NECRT किताबों में इस्लामी महिमामंडन पर यूजर्स बरसे

विनायक दामोदर सावरकर पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संघ प्रमुख मोहन भागवत द्वारा दिए गए बयानों के बाद से सोशल मीडिया पर बहस का दौर जारी है। सोशल मीडिया यूजर्स NCERT की किताबों के कई चैप्टर का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए ये उजागर करने की कोशिश कर रहे हैं कि कैसे इसमें इस्लाम का महिमामंडन किया गया है।

वरिष्ठ लेखक और वीर सावरकर पर वृहद शोध करके दो पुस्तकें लिख चुके विक्रम संपत ने इस बारे में ट्विटर थ्रेड के जरिये कई सारी बातों पर ध्यान दिलाया है और NCERT की किताबों में इस्लाम के घुसपैठ को उजागर करने की कोशिश की है। स्कूल की इन किताबों में इस्लाम का महिमामंडन किया गया है, जबकि मौर्य, मराठा, राजपूत, अहोम, चोल, विजयनगर और गुप्त साम्राज्यों के बारे में पढ़ाई के नाम पर खानापूर्ति की गई है।

बीजेपी के दिल्ली प्रदेश प्रवक्ता अजय सेहरावत ने 12वीं कक्षा के इतिहास की पुस्तक के एक पेज का स्क्रीनशॉट शेयर किया। इसमें बताया गया है कि उदारवादी हिंदुओं को इस्‍लाम के ‘समानता, भाईचारे और एक ईश्‍वर’ के सिद्धांतों ने आकर्षित किया। अजय ने कहा कि यही वजह है कि आज की युवा पीढ़ी हिंदू संस्कृति की आलोचना करती है।

अनीश गोखले ने भी किताब के इस पन्ने को शेयर किया।

विष्णुुकांत सिंह ने लिखा कि काफी पहले से ही बच्चों का ब्रेनवॉश किया जा रहा है। इसके लिए उन्होंने किताब के दो पन्नों का स्क्रीनशॉट शेयर किया, जिसमें मुस्लिम को अच्छा और हिंदू को बुरा दिखाने की कोशिश की गई है।

विक्रम संपत के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए सुनंदा वशिष्ठ ने कहा कि हम सभी NCERT की किताबें पढ़कर बड़े हुए हैं। हम सभी जानते हैं कि इसमें हमने विजयनगर के बारे में इससे ज्यादा नहीं पढ़ाया कि यह दक्षिण में कहीं स्थित है। चोल वंश के बारे में शायद एक लाइन पढ़ने को मिल भी जाए, लेकिन राष्ट्रकूटों के बारे में तो वो भी नहीं।

मानस रोबिन ने लिखा, “शक्तिशाली अहोम ने 600 गौरवशाली वर्षों तक शासन किया। असम के सबसे महान योद्धा लचित बरफुकन ने सरायघाट के प्रसिद्ध युद्ध में मुगलों को हराया। लेकिन शर्मनाक तरीके से एनसीईआरटी ने 600 साल के लंबे इतिहास को एक छोटे से पैराग्राफ में समेट दिया। वामपंथी इतिहासकारों ने दशकों तक हम सबको बेवकूफ बनाया।”

एक यूजर ने लिखा, एनसीईआरटी की किताबें ईसाई युग का उल्लेख करती हैं लेकिन बच्चों को शास्त्रीय भारतीय युग जैसे विक्रम, शक या कोल्लम युग के बारे में नहीं बताती है।

इसी तरह एक यूजर ने किताब के एक पन्ने का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए बताया कि किसा तरह से हिंदू त्योहार दिवाली को लेकर नकारात्मकता फैलाई जाती है, जबकि ईद या बकरीद के लिए ऐसा नहीं होता।

गौरतलब है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार (अक्टूबर 13, 2021) को उदय माहुरकर की पुस्तक ‘Savarkar: The Man Who Could Have Prevented Partition‘ की लॉन्च में कहा कि विनयाक दामोदर सावरकर के ‘दया याचिका’ दायर करने को लेकर झूठ फैलाया गया, उसे गलत तरीके से पेश किया गया।

उन्होंने दावा किया कि सावरकर ने जेल में सजा काटते हुए अंग्रेजों के सामने दया याचिका महात्मा गाँधी के कहने पर दाखिल की थी। राजनाथ सिंह ने कहा था, “महात्मा गाँधी ने अपनी ओर से ये अपील की थी कि सावरकर जी को रिहा किया जाना चाहिए। जैसे हम आज़ादी हासिल करने के लिए आंदोलन चला रहे हैं, वैसे ही सावरकर भी आंदोलन चलाएँगे। लेकिन उन्हें बदनाम करने के लिए कहा जाता है कि उन्होंने माफी माँगी थी, अपने रिहाई की बात की थी जो बिलकुल बेबुनियाद है।”

वहीं संघ प्रमुख मोहन भागवत ने सावरकर को सच्चा देशभक्त और बहुआयामी व्यक्तित्व का धनी बताते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद वीर सावरकर को बदनाम करने के लिए तेजी से मुहिम चल रही है।

कहाँ है दुर्गेश देवांगन: कवर्धा में ‘हिन्दू ध्वज’ उखाड़ने का सबसे पहले किया था विरोध, मुस्लिम भीड़ ने घेरकर पीटा था

छत्तीसगढ़ के कवर्धा में मुस्लिम भीड़ ने ‘हिन्दू ध्वज’ को उखाड़ फेंका था। इसका विरोध करने पर दुर्गेश देवांगन की जमकर पिटाई की गई थी। मीडिया रिपोर्टों की माने तो दुर्गेश का अब भी पता नहीं है। इस मामले में अब तक 29 गिरफ्तारियाँ हुई है। ध्यान देने वाली बात यह है कि इन्हीं आरोपितों की गिरफ्तारी को लेकर विहिप ने प्रदर्शन किया था, जिसके बाद छत्तीसगढ़ पुलिस ने बाहर से लोगों को लाकर हिंसा भड़काने का आरोप हिन्दू संगठनों पर लगाया था। इस मामले में छत्तीसगढ़ पुलिस पर एकपक्षीय कार्रवाई और हिंदुओं को निशाना बनाने के आरोप भी शुरू से लगते रहे हैं।

दुर्गेश के संबंध में जानकारी हासिल करने के लिए ऑपइंडिया ने कई बार कवर्धा पुलिस से संपर्क किया। लेकिन हर बार पुलिस अधिकारी इस सवाल का जवाब देने से बचते रहे। ऐसे में सीधा सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर दुर्गेश देवांगन कहाँ हैं? छत्तीसगढ़ पुलिस आखिर क्या छिपाना चाह रही है? उल्लेखनीय है कि इस पूरे प्रकरण में स्थानीय विधायक और छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार के मंत्री मोहम्मद अकबर पर भी दंगाइयों को बचाने के आरोप लग रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार दुर्गेश की पिटाई सिटी कोतवाली के लोहारा नाका पर हुई थी। घटना 3 अक्टूबर की है। दुर्गेश ने हिंदू ध्वज हटाने और उसे पैरों तले रौंदने का विरोध किया था। इसके बाद समुदाय विशेष के लोगों ने उसे जमकर पीटा था। इसी मामले में आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग को लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने 5 अक्टूबर को प्रदर्शन किया था। जिसके बाद प्रशासन ने हिंदू संगठनों को हिंसा का कसूरवार ठहराया था।

रिपोर्ट के अनुसार इस मामले में अब तक 29 गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें मुख्य आरोपित रिजवान और सलमान भी हैं। सलमान के पास से एक धारदार चाकू बरामद किए जाने की भी खबर है। दो आरोपितों इदरीश खान और वज़ीर खान को मंगलवार (12 अक्टूबर 2021) को गिरफ्तार किया गया था। उससे पहले सोमवार को 11 आरोपित गिरफ्तार किए गए थे। 16 अन्य की गिरफ्तारी इससे पहले ही हो चुकी थी। पुलिस ने इन आरोपितों की पहचान टेक्निकल एविडेंस, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, सीसीटीवी फुटेज आदि के माध्यम से की है।

जो गिरफ्तार हुए हैं उनके नाम हैं: सैय्यद महफूज अली, फैजल खान, नासिर खान, सैफ अली खान, सरफराज खान, साजिद अली, रियाज हिंगोरा, अयाज खान, शोहित खान, मोहम्मद इजरायल, शाहिद खान, सादिक कुरैशी, मोहम्मद खान, मोहम्मद इमरान, तौफीक मोहम्मद, सैयद महबूब, रेहान वगैरह। सारे गिरफ्तार आरोपित एक ही समुदाय के हैं। इन सभी पर अपराध संख्या 801/2021 के तहत कवर्धा में भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 294 295. 323, 506 B IPC, अपराध संख्या 802/21 के तहत धारा 294, 336, 147 IPC, अपराध संख्या 804/21 के तहत धारा 147, 148, 353, 332, 153-ए, 427, 295 IPC, 25, 27 आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज हैं। इन सभी पर लोक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की धारा 3 भी लगाई गई है।

दुर्गेश पर हुए हमले का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल भी हुआ था।

इस घटना के बाद दुर्गेश के बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है। दुर्गेश के परिजन किसी अनहोनी की आशंका से परेशान हैं। उनका कहना है कि पुलिस दुर्गेश को अपने वाहन में बिठा कर ले गई थी। उधर कवर्धा पुलिस ने दुर्गेश के अपनी कस्टडी में होने से इनकार किया है। दुर्गेश कवर्धा के वार्ड नंबर 27 में रहते थे। गत रविवार (10 अक्टूबर 2021) को जिले के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में निकाली गई सद्भावना रैली जब दुर्गेश के वार्ड में पहुँची तब भी उनकी माँ और बहन ने अधिकारियों से दुर्गेश को खोजने की अपील की थी। दुर्गेश परिवार का इकलौता लड़का है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दुर्गेश के लापता होने पर अधिकारियों का कहना है कि उन्हें दुर्गेश के बारे में कोई सटीक जानकारी नहीं है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार दुर्गेश की तलाश की जा रही है। आम लोगों से भी उन्होंने इस मामले में प्रशासन की मदद करने की अपील की है।

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने पिछले दिनों दुर्गेश के घर जा कर उनके परिजनों से मुलाकात की थी। रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान दुर्गेश की माँ ने कहा था कि घटना के बाद उनके बेटे को पुलिस वाले गाड़ी में ले गए थे। इसके बाद से उनका बेटा गायब है। पूर्व मुख्यमंत्री ने उन्हें हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।

रमन सिंह ने इस मामले में कॉन्ग्रेस सरकार पर तुष्टिकरण की नीति अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा था कि मंत्री के दबाव में प्रशासन ने अब तक 100 से अधिक लोगों को प्रताड़ित करने के उद्देश्य से गिरफ्तार किया है। पूरे प्रकरण की न्यायिक जाँच की माँग करते हुए उन्होंने 11 अक्टूबर को दुर्ग सेंट्रल जेल पहुँच उन लोगों से मुलाकात भी की थी, जिन्हें फँसाने का आरोप प्रशासन पर लग रहा है।

प्रयागराज: समोसे के लिए आपस में भिड़े कॉन्ग्रेसी, एक-दूसरे को दी गंदी गालियाँ, हसीब अहमद ने इरशाद उल्लाह से ले लिए थे तीन समोसे

विविधताओं से भरे भारत देश में वैसे तो हर जगह की अपनी विशिष्टता है और अपना खानपान है, लेकिन उत्तर भारत में समोसे की अपनी एक अलग ही पहचान है। अक्सर मजाक किया जाता है कि समोसे नहीं मिले तो युद्ध हो जाए। अब यह मजाकर हकीकत बन गया है। ताजा मामले में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में कॉन्ग्रेस के नेता सचमुच में इसको लेकर आपस में ही भिड़ गए।

मामला बीते 6 अक्टूबर 2021 का है, जब कॉन्ग्रेस नेता और कार्यकर्ता प्रियंका गाधी की गिरफ्तारी और लखीमपुर की घटना का विरोध कर रहे थे। कॉन्ग्रेसी ट्रैफिक बाधित कर रहे थे, जिसके बाद पुलिस ने सभी को हिरासत में लिया और उन्हें पुलिस लाइन ले गई। थाने में प्रयागराज के कॉन्ग्रेस सचिव इरशाद उल्लाह पार्टी कार्यकर्ताओं में बाँटने के लिए समोसा लेकर आए। इसी दौरान उन्होंने देखा कि पार्टी के जिला प्रवक्ता हसीब अहमद ने तीन समोसे लिए। इसके वह अहमद से भीड़ गए। दोनों के बीच बात इतनी अधिक बढ़ गई कि दोनों एक-दूसरे को माँ-बहन की गालियाँ देने लगे।

कॉन्ग्रेस के महासचिव नफीस अनवर ने स्थिति को शांत करने की कोशिश की और नेताओं को चेतावनी दी कि वे घर पर नहीं हैं। बावजूद इसके वो नहीं रुके और लड़ते रहे। इसके बाद पुलिस ने बीच-बचाव कर मामले को शांत कराया।

इस मामले में एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता सड़क पर विरोध कर रहे थे, जिसके कारण से पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था। जब वे पुलिस लाइन में थे तो उनमें से कुछ ने किसी बात को लेकर मारपीट शुरू कर दी। इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

हद तो ये है कि खुद कॉन्ग्रेस पार्टी ने भी समोसे को लेकर लड़ने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं को समर्थन दिया है।

इस पर भारतीय जनता पार्टी के राज्य प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने एक ट्वीट किया था, जिस पर 14 अक्टूबर को कॉन्ग्रेस नेता और पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया पैनलिस्ट सुरेंद्र राजपूत चिढ़ गए। दरअसल, राकेश त्रिपाठी ने समोसे को लेकर कॉन्ग्रेस नेताओं की लड़ाई का एक वीडियो साझा किया था। त्रिपाठी ने लिखा था, “दूसरे कॉन्ग्रेसी नेता के हाथ में तीन समोसे देखकर कॉन्ग्रेस नेता भड़क गए। उन्होंने एक दूसरे के साथ गाली-गलौज और मारपीट की। अब मामला दर्ज किया गया है। बेचारे कॉन्ग्रेसी।”

चौधरी के ट्वीट पर नाराजगी जताते हुए राजपूत ने कहा, “आप लोग तो करोड़ों के लिए लड़ रहे हो, देश बेचने के लिए लड़ रहे हो। हम लोग तो सिर्फ समोसे के लिए ही लड़ रहे हैं।” इसके साथ ही कॉन्ग्रेस प्रवक्ता ने बीजेपी से प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन उपलब्ध कराने की माँग की। उन्होंने आगे कहा, “इतना कमा रहे हो आप लोग, कुछ तो ध्यान रखो लोकतंत्र के प्रहरियों का।”

साभार: ट्विटर

राजपूत के ट्वीट का जवाब देते हुए बीजेपी नेता ने एक शेर ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, “समोसे पर एक अनाम शायर का शेर अर्ज है…चलो आज महफ़िल कुछ इस तरह से सजाते हैं, तुम चाय का बंदोबस्त करो, हम समोसे लेकर आते हैं।”

वहीं, ऑपइंडिया से बात करते हुए त्रिपाठी ने कहा, “कॉन्ग्रेस पार्टी निराश और हताश है। यह जब भी सत्ता में आती है तो आम जनता से लूटपाट करती है। कॉन्ग्रेस को उत्तर प्रदेश पर शासन किए लगभग 32 साल हो चुके हैं, लेकिन कॉन्ग्रेस का चरित्र नहीं बदला है। उल्लेखनीय है कि वे किसी की थाली में अधिक समोसे भी बर्दाश्त नहीं कर सकते और उन्हें लूटने की कोशिश करते हैं। यह उनके अपने कार्यक्रम में दिखाई दे रहा था, जब कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता इसलिए लड़ गए कि एक उनमें से अधिक के पास अधिक समोसे थे। कहावत ‘रस्सी भले ही जल गई हो, लेकिन ऐंठन नहीं गई’ इस परिदृश्य में पूरी तरह से फिट बैठती है।”

हाल ही में 2 अक्टूबर को गाँधी जयंती पर महात्मा गाँधी को ‘वापस आने’ के लिए कहने का पुराना वीडियो वायरल होने के बाद कॉन्ग्रेस नेता हसीब अहमद चर्चा में थे।

वीडियो में उदास अहमद को रोते हुए देखा जा सकता है। हालाँकि, गाँधी जी तस्वीर पकड़े उनके सहयोगी के चेहरे पर शिकन तक नहीं है। इसमें यह भी देखा जा सकता है कि उनके तीन अन्य समर्थक इस कॉन्ग्रेसी की भावुकता से अनजान होकर उनके पीछे खड़े हैं। उनमें से एक मुस्कुरा भी रहा था।

कॉन्ग्रेस नेता ने रोते हुए कहा था, “बापू आप आइए। इस देश को आपकी जरूरत दोबारा पड़ रही है। देश की जनता आपको दोबारा देखना चाहती है। या तो हम लोगों को आप अपने पास बुला लीजिए। ये देश में जो झूठ, मक्कारी और फरेब करके लोग को लूटने का काम कर रहे हैं, उनसे हम लोगों को मुक्ति दिला दीजिए।”

जनवरी 2020 में वह एक कब्रिस्तान में रोते हुए पाए गए थे। नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में कब्रिस्तान में दफन अपने पूर्वजों से अपनी नागरिकता साबित करने के लिए प्रार्थना कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि सीएए भारतीय नागरिकों पर लागू नहीं है और यदि अहमद एक भारतीय नागरिक हैं तो उन्हें अपनी नागरिकता साबित करने की आवश्यकता नहीं होगी। उन्होंने प्रियंका गांधी के लिए जबरदस्त पोस्टर भी बनाए हैं। उनके बारे में यहाँ विस्तार से पढ़ सकते हैं।

प्रतिबंध, केंद्र की गाइलाइन और अब LG दे इजाजत: दिल्ली में घाट वाली छठ पर पल-पल पैंतरा बदल रहे केजरीवाल

दिल्ली में छठ पूजा पर DDMA के माध्यम से रोक लगाने के बाद केजरीवाल सरकार के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। इस मुद्दे पर बीजेपी के लगातार हमले के जवाब में सिसोदिया द्वारा गेंद केंद्र के पाले में डालने की नाकाम कोशिश की गई थी तो वहीं अब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद मैदान में उतर आए हैं। CM केजरीवाल ने राजधानी में सार्वजनिक जगहों पर छठ पूजा की मंजूरी के लिए उपराज्यपाल (एलजी) अनिल बैजल को पत्र लिखा है।

एलजी को लिखे पत्र में सीएम केजरीवाल ने कहा है कि दिल्ली में पिछले तीन महीनों से कोरोना संक्रमण नियंत्रण में है। इसलिए कोरोना प्रोटोकाल का पूरा ध्यान रखने हुए छठ पूजा मनाने की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली से सटे राज्यों उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान से सटे अन्य राज्यों में भी नागरिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को देखते हुए उचित प्रतिबंधों के साथ छठ पूजा मनाने की अनुमति दी गई है।

दिल्ली के लोगों और बीजेपी के हमलों के मद्देनजर केजरीवाल ने एलजी अनिल बैजल से अपील किया है कि जल्द से जल्द DDMA की बैठक बुलाकर छठ पूजा के लिए मंजूरी दिया जाए। मुख्यमंत्री ने पत्र के माध्यम से एलजी अनिल बैजल से कहा है कि दिल्ली के लोग बड़ी आस्था के छठ पूजा का पर्व हर साल मनाते हैं। यह त्योहार हमारी वैदिक आर्य संस्कृति का अहम हिस्सा है। छठ पूजा पर सूर्य देव और छठी मइया की पूजा करने वाले व्यक्ति को स्वास्थ्य समृद्धि और सुखों का लाभ होता है।

CM केजरीवाल का दिल्ली के LG को लिखा गया पत्र

पत्र देखकर ऐसा लग रहा होगा जैसे इसके पहले प्रतिबन्ध किसी और ने लगाया था लेकिन ऐसा नहीं है। हालाँकि पिछली बार कोरोना के चलते दिल्ली में सार्वजनिक जगहों पर छठ पर्व का आयोजन नहीं किया गया था। तो वहीं इस साल ईद सहित कई आयोजनों की अनुमति दी गई जबकि उस समय कोरोना के मामले ज़्यादा थे। लेकिन छठ के मामले में इस साल भी दिल्ली डिज़ास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (DDMA) ने कोरोना की आड़ लेते हुए आदेश जारी कर सार्वजनिक जगहों पर छठ पर्व के आयोजन पर रोक लगा दी है। जिसे लेकर दिल्ली बीजेपी ने केजरीवाल सरकार को घेरना शुरू कर दिया था। यहाँ तक की बीजेपी ने ईद पर अनुमति का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री हाउस का घेराव करने की भी कोशिश की थी।

वहीं दो दिन पहले 12 अक्टूबर, 2021 को छठ पूजा पर प्रतिबंध को राजनीतिक मुद्दा बनते देखकर दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया को पत्र लिखकर गेंद केंद्र के पाले में डालने की कोशिश की थी, ताकि इस मुद्दे पर भाजपा के हमले को कुंद किया जा सके। लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय ने फैसले की जिम्मेदारी सौंपते हुए गेंद वापस दिल्ली सरकार के पाले में डाल दी है। बता दें कि दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया को पत्र भेजकर पर्व को मनाने की अनुमति और इसके संबंध में दिशा-निर्देश जारी करने की माँग की थी।

डिप्टी सीएम का कहना था कि छठ पूजा उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों में मनाए जाने वाला ऐतिहासिक पर्व है। यह पूर्वांचल समाज के लिए सामाजिक-सांस्कृतिक त्योहार है। पूर्वांचल समाज के लोग इस पर्व को मनाने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

तो वहीं छठ पूजा को लेकर दिल्ली सरकार और भाजपा के बीच मचे राजनीतिक घमासान के बीच केंद्र ने यह साफ कर दिया था कि इसके लिए अलग से दिशा निर्देश जारी करने की जरूरत नहीं है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के लिए पहले से पूरे देश के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) मौजूद है और दिल्ली सरकार को उसी के अनुरूप फैसला लेना चाहिए।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना ठीक नहीं है। उनके अनुसार राष्ट्रीय स्तर का एक एसओपी केंद्र की ओर से जारी कर दिया गया है। इसके साथ ही सभी राज्य अपने-अपने यहाँ संक्रमण की स्थिति को देखते हुए स्थानीय स्तर पर त्योहारों के लिए दिशानिर्देश जारी कर रहे हैं। दिल्ली सरकार भी उसी के अनुरूप फैसला ले सकती है।

तो वहीं आज केजरीवाल के पत्र पर दिल्ली बीजेपी के मनोज तिवारी ने भी ट्वीट किया है, “जय छठी मैया… आस्था के आगे जिद टूटी… जितनी कहानी आज चिट्ठी में लिखे हो दिल्ली के मुख्यमंत्री जी.. ये सब प्रतिबंध लगाते याद नही था क्या? ख़ैर देर आए दुरुस्त आए… चलो मिल कर छठ मनाए… छठी मैया की जय।”

दरअसल, यह पूरा मामला तब गरमाया जब दिल्ली सरकार ने खुले में छठ के आयोजन पर प्रतिबन्ध लगा दिया। दिल्ली बीजेपी ने छठ आयोजन की मनाही का विरोध करते हुए दिल्ली सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर अनुमति नहीं मिली तो उसके बावजूद भी छठ पर्व का आयोजन किया जाएगा। बीजेपी की दलील थी कि अगर पूरी दिल्ली को अनलॉक किया जा सकता है और सभी तरह की एक्टिविटी को अनुमति दे दी गई है तो छठ के आयोजन पर मनाही किस बात को लेकर है।

बता दें कि राजधानी में छठ पूजा पर बैन हटाने की मॉँग करते हुए मनोज तिवारी के नेतृत्‍व में भाजपा नेताओं के एक समूह ने मंगलवार (12 अक्टूबर, 2021) को सीएम हाउस के पास प्रदर्शन किया। इस दौरान दिल्‍ली पुलिस ने सीएम हाउस के चारों ओर बैरिकेडिंग की थी। इसका मकसद प्रदर्शनकारियों को सीएम हाउस तक पहुँचने से रोकना था। छठ पूजा पर बैन के खिलाफ मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर के बाहर प्रदर्शन के दौरान उन्‍हें चोटें भी आईं थी।

‘अब रोज यह करना होगा… माँ को मार दूँगा’: नाबालिग से रेप केस में सपा-बसपा जिलाध्यक्ष फरार, 250 पर नई FIR

उत्तर प्रदेश के ललितपुर में पिता, भाई और अन्य रिश्तेदारों सहित 28 लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमे में पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों में पीड़िता के पिता और सपा के जिला प्रमुख के भाई सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, पीड़िता का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह आपबीती बता रही है। 2 मिनट 12 सेकेंड के इस वीडियो में उसने बताया है कि पिता उसे धमकी देकर किस तरह दरिंदगी करता था।

वहीं, मामले की सीबीआई जाँच की माँग को लेकर झाँसी के सपा जिलाध्यक्ष महेश कश्यप ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मार्च निकालकर डीएम और एसपी को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान सपा के कार्यकर्ताओं ने पीड़िता की पहचान उजागर कर दी। पहचान उजागर करने के मामले में महेश कश्यप सहित 250 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। वहीं, कुछ मीडिया रिपोर्ट ने इस संख्या को 150 बताया है। साथ ही इन लोगों पर धारा 144 के उल्लंघन का आरोप भी लगाया गया है। दरअसल इन लोगों ने जो ज्ञापन दिया था, उसमें रेप पीड़िता का नाम लिखकर उसे सार्वजनिक कर दिया है।

वहीं, बुधवार को सिविल जज जूनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक गरिमा सक्सेना की कोर्ट में किशोरी के 164 के तहत बयान कराया गया और मेडिकल के बाद पुलिस ने रात में दबिश देकर चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इन आरोपियों में किशोरी के पिता और सपा जिलाध्यक्ष तिलक यादव के भाई अरविंद यादव भी शामिल हैं। वहीं, कई आरोपियों ने अपने फोन बंद कर लिए हैं। कुछ ने राजनीतिक शरण ले ली है।

वीडियो में पीड़िता ने सुनाई आपबीती

पुलिस को हाथ लगे वीडियो में पीड़िता कह रही है, “मेरा नाम…. है। जब मैं कक्षा-6 में थी, उस मेरे पिताजी ने मुझे गंदी-गंदी वीडियो दिखाई और कहा कि तुम्हें भी यही करना है। मैंने कहा कि मैं ये नहीं करूँगी तो बोले- तुम्हें यही करना पड़ेगा। अगर तुमने ये नहीं किया तो तुम्हारी माँ को मार दूँगा। फिर उन्होंने मुझे मोटर साइकिल सिखाने के बहाने खेतों में ले गए और मेरे बलात्कार किया। फिर उन्होंने कहा कि अगर ये बात किसी को बताई तो मैं तुम्हारी माँ को मार दूँगा। उन्होंने मुझे धमकी दी इसलिए मैं डर गई। इसलिए मैं शांत रही। मैंने किसी को कुछ नहीं बताया।”

वीडियो में पीड़िता आगे कहती है, “एक दिन जब मैं स्कूल गई तो वो मुझे छुट्‌टी के समय तुरंत लेने आए और बोले- जो मैं कहूंगा वो करना। तो मैं शांत रही, मैंने कुछ नहीं कहा। फिर वो मुझे एक होटल में लेकर गए। उस होटल का नाम राधाकृष्ण था। वो स्टेशन के पास है। वहाँ पर बाहर एक औरत खड़ी हुई थी। मैं उसको नहीं जानती थी, पर उसने बोला- आओ बेटा, मैं तुम्हें एक कमरे में ले चलती हूँ और फिर मुझे वो एक कमरे में ले गई। वहाँ मैं धीरे-धीरे बेहोशी की हालत में होती गई। क्योंकि मुझे लगा कि पानी की टिक्की जो मुझे पिलाई गई, उसमें कुछ चीज मिली हुई थी।”

वीडियो में पीड़िता आगे की आपबीती कहती है, “वह औरत मुझे कमरे में छोड़कर चली गई और बोली कि मैं थोड़ी देर में आती हूँ, तुम यहीं रुकना। वहाँ कमरे में एक आदमी आया और उसने मेरे साथ बलात्कार किया। जब मैं होश में आई तो मेरे कपड़े और जूते बिखरे हुए थे। मैंने अपने पापा से पूछा कि क्या हुआ था मेरे साथ तो बोले कि जो कुछ हुआ, अब वही करना है तुम्हें। करना है तुम्हें। न्होंने कहा कि अब तुम्हें रोज यही करना पड़ेगा। “

किशोरी का पिता उसे रोज स्कूल से ले जाता था। इसके बाद होटल में दूसरे युवकों के पास छोड़ देता था। वहाँ पर उसके साथ रेप किया जाता था। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि जब वह अपने मामा के घर गई तो चचेरे भाइयों के साथ उसके चार चाचाओं ने उसके साथ दुष्कर्म किया। उसने दावा किया कि उसकी दादी ने घटना को दबाने की कोशिश की। किशोरी के मुताबिक, उसके ताऊ और तीन चाचाओं ने भी घर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया।

दैनिक भास्कर के अनुसार, लड़की ने बताया कि इन सब से परेशान होकर कुछ दिन पहले वह अपनी माँ के साथ महिला थाने गई और वहाँ शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसकी जानकारी जब उसके पापा को हुई तो पीड़िता और उसकी मम्मी को मारपीट कर घर में बंद कर दिया।

बताया जा रहा है कि 13 जुलाई को किशोरी अपने चाचा की लड़की की शादी में गई थी। वहाँ पर उसे बेचने का प्रयास किया गया। इसके बाद कई बार और उसे बेचने का प्रयास हुआ, जिससे डरकर पीड़िता ने माँ और भाई के साथ खुद को घर में कैद कर लिया। इसके साथ ही उसने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर चाइल्ड लाइन और महिला आयोग को भेज दिया। मामला सार्वजनिक होने के बाद पुलिस सक्रिया हुई।

एसपी ने पीड़िता से की मुलाकात, बाद में डीआईजी भी मिले

मामला सामने आने के बाद और इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस पीड़िता के घर पहुँची, लेकिन पीड़िता ने दरवाजा नहीं खोला। उसके बाद एसपी निखिल पाठक पीड़िता के घर पहुँचकर पीड़िता को न्याय का भरोसा दिलाया। बाद में डीआईजी ने भी पीड़िता के घर जाकर उससे मुलाकात की।

वहीं, पीड़िता की शिकायत के पर मुकदमा दर्ज होने के बाद पीड़िता के भाई की तहरीर पर एक अलग मुकदमा दर्ज करने की तैयारी हो रही है। पीड़िता के भाई ने भी आरोप लगाया है कि उसका पिता उसके साथ भी दुष्कर्म करने की कोशिश करता था और विरोध करने पर माँ की हत्या की धमकी देता था।

तिहाड़ से ₹200 करोड़ की ठगी: ED के सामने हाजिर हुईं नोरा फतेही, जैकलीन फर्नांडीस को भी बुलावा

बॉलीवुड एक्ट्रेस नोरा फतेही प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दफ्तर में पहुँच गई हैं। ईडी ने एक्ट्रेस को 200 करोड़ रुपए की ठगी मामले में पूछताछ के लिए आज (14 अक्टूबर, 2021) दिल्ली स्थित दफ्तर में बुलाया था। इस केस में जैकलीन फर्नांडीस को भी फिर से ईडी की तरफ से समन भेजा गया है।

जानकारी के मुताबिक, दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद सुकेश चंद्रशेखर द्वारा 200 करोड़ रुपए की ठगी मामले में नोरा फतेही को प्रवर्तन निदेशालय ने समन भेजा था। बताया जा रहा है कि ईडी ने पहले भी नोरा फतेही का बयान दर्ज किया था, लेकिन उनके बयानों में विरोधाभास पाया गया। इसकी वजह से उन्हें एक बार फिर से पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

वहीं, प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से जैकलीन फर्नांडीस को 15 अक्टूबर को पूछताछ के लिए ईडी दफ्तर में बुलाया गया है। गौरतलब है कि पिछले दिनों इसी मामले में जैकलीन से जाँच एजेंसी ने दिल्ली में 7 घंटे तक पूछताछ की थी। सुकेश कथित तौर पर उसे चॉकलेट और फूल उपहार के रूप में भेजता था। सुकेश चंद्रशेखरन को पुलिस ने इसी साल गिरफ्तार किया था। उस पर आरोप है कि उसने जेल के अंदर बंद रहते हुए 200 करोड़ रुपए वसूली का रैकेट चलाया था। उसने एक बड़े बिजनेसमैन की पत्नी से 50 करोड़ रुपए की फिरौती माँगी थी। इसी मामले को लेकर जब पुलिस ने जेल में ही रेड की तो वहाँ से उसके पास से 2 मोबाइल फोन जब्त किए गए थे। इस मामले में जैकलीन को गवाह माना जा रहा है। 

उल्लेखनीय है कि ईडी ने 30 अगस्त, 2021 को मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में चेन्‍नई का एक बंगला और कुछ लग्‍जरी कारें सीज की थी। यह कार्रवाई सुकेश चंद्रेशखर नाम के ठग के खिलाफ दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग के केस में की गई थी। चंद्रशेखर पर तिहाड़ जेल के अंदर से फिरौती रैकेट चलाने का आरोप है। जाँच एजेंसियों के मुताबिक, तिहाड़ जेल में बंद रहते हुए सुकेश ने 190-200 करोड़ रुपए की फिरौती वसूली। पिछले दिनों सुकेश की कथित गर्लफ्रेंड लीना मारिया पॉल को गिरफ्तार किया गया था। उस पर रैकेट चलाने में सुकेश की मदद करने का आरोप है।

पंडालों पर हमला, प्रतिमाओं से तोड़फोड़, हत्या-छेड़खानी: दुर्गा पूजा पर बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हिंसा

दुर्गा पूजा हिंदुओं का पवित्र त्योहार है। नवरात्रि पर माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। लेकिन, यह जीवंत त्योहार बांग्लादेश के हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय के लिए हिंसा और बर्बरता में बीता। फेसबुक पर वायरल हुई एक पोस्ट के बाद इस्लामिक चरमपंथियों ने अल्पसंख्यक हिंदुओं के साथ बर्बरता की।

रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार रात सोशल मीडिया पर हिंदुओं द्वारा कथित रूप से कुरान का अपमान करने की एक फेसबुक पोस्ट वायरल की गई और उसके बाद इस्लामिक कट्टरपंथियों ने कई दुर्गा पंडालों में तोड़फोड़ की। हालाँकि, कमिला महानगर पूजा उद्जापोन कमेटी के महासचिव शिबू प्रसाद दत्ता ने कुरान का अपमान किए जाने की बात से इनकार किया है। उन्होंने बताया कि जब गार्ड सो रहा था तो किसी ने नानुआ दिघीर पार में एक दुर्गा पूजा मंडप में सुबह-सुबह कुरान की कॉपी रख दी थी।

जिले के एक अधिकारी ने इस बात की पुष्टि करते हुए बताया, “कुछ असामाजिक तत्वों ने इसकी तस्वीरें लीं और भाग गए। कुछ घंटों के भीतर फेसबुक के जरिए भड़काऊ तस्वीरों के साथ दुष्प्रचार जंगल की आग की तरह फैल गया।” उन्होंने इसमें बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और जमात-ए-इस्लाम के कुछ कार्यकर्ताओं के शामिल होने का संदेह व्यक्त किया है।

चाँदपुर के हाजीगंज, चट्टोग्राम के बंशखली, चपैनवाबगंज के शिबगंज और कॉक्स बाजार के पेकुआ में मंदिरों पर बेरहमी से हमला किया गया और हिंदू भक्तों को पीटा गया। इस हिंसक झड़प कथित तौर पर तीन हिंदू मारे गए हैं। हालाँकि, पुलिस ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है।

ट्विटर पर हिंदुओं ने बताई आपबीती

बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हुई हिंसा के बारे में कई स्थानीय हिंदू और हिंदू संगठनों ने ट्विटर पर इस इस्लामिक बर्बरता के दृश्यों को साझा किया है। हिंदुओं पर हमले का वीडियो शेयर करते हुए एडवोकेट डॉ, गोबिंद चंद्र प्रमाणिक ने हालात को बदतर बताया। उन्होंने ट्वीट किया, “स्थिति भयानक है। शिल्पारा, कॉक्स बाजार में 150 परिवारों पर हमले, नोआखली में हटिया तोड़फोड़, नगर निगम काली मंदिर में मूर्तियों से तोड़फोड़, बर्बर हमले, महिलाओं से छेड़छाड़ और चाँदपुर में 2 लोग मृत पाए गए हैं।”

अन्य अपडेट देते हुए वकील चंद्रा ने बांग्लादेश नेशनल हिंदू यूथ ग्रैंड अलायंस की चाँदपुर जिला शाखा के प्रचार सचिव की हत्या की खबर साझा की।

जटायु ओसिंट नाम के ट्विटर हैंडल ने दुर्गा पंडालों में तोड़फोड़ करने वाली इस्लामिक भीड़ के कुछ और दृश्य साझा किए।

माचार पोर्टल ‘हिंदू वॉयस’ ने माँ दुर्गा की मूर्ति को नदी में फेंके जाने का एक वीडियो साझा किया। पोर्टल ने ट्वीट किया, “मुस्लिम भीड़ ने बांग्लादेश के कोमिला में 9 दुर्गा मंडपों और मूर्तियों को ध्वस्त कर दिया है। आज सुबह सैकड़ों कट्टरपंथी मुसलमानों ने हमला किया। हमला अभी भी जारी है। स्थिति अभी भी तनावपूर्ण है। हिंदू डरे हुए हैं। पुलिस भीड़ को नियंत्रित करने में विफल रही है।”

सोशल मीडिया यूजर नील ने चटगाँव जिले में दुर्गा पंडाल में बर्बरतापूर्वक तोड़फोड़ की तस्वीरें साझा कीं।

बांग्लादेश हिंदू एकता परिषद ने बीते 24 घंटों में हिंसा के मामले में कई अलर्ट और अपडेट साझा किए। बांग्लादेश हिंदू यूनिटी काउंसिल ने ट्वीट किया, “कोमिला में सभी हिंदुओं को सतर्क रहने का निर्देश दिया जा रहा है। एक साथ मंदिर में रहो। हम बांग्लादेश पुलिस से नानुआ धीगीर पार इलाके में मदद की अपील कर रहे हैं।”

परिषद ने कहा, “बांग्लादेश के इतिहास में एक निंदनीय दिन। अष्टमी के दिन प्रतिमा विसर्जन के दौरान कई पूजा मंडपों में तोड़फोड़ की गई है। हिंदू अब पूजा मंडप की रखवाली कर रहे हैं। आज पूरी दुनिया खामोश है।”

एक अन्य ट्वीट में काउंसिल ने कहा, “बांग्लादेश में हिंदुओं से इतनी नफरत क्यों है? बांग्लादेश में हिंदू जन्म से रहते हैं। 1971 में जान गँवाने वालों में ज्यादातर हिंदू थे। बांग्लादेश के हिंदू, मुस्लिमों को अपना भाई मानते है। 90% मुस्लिमों के लिए 8% हिंदू समस्या का कारण कैसे हो सकते हैं?”

हिंदू परिषद ने 13 अक्टूबर को ‘ब्लैक डे’ बताते हुए बांग्लादेश के हिंदुओं को बचाने का आह्वान किया। अपने लेटेस्ट ट्वीट में परिषद ने कहा, “बीते 24 घंटों के दौरान क्या हुआ है इसको लेकर हम एक ट्वीट तक नहीं कर सकते हैं। बांग्लादेश के हिंदुओं ने कुछ लोगों के असली चेहरे को देखा है। हमें नहीं पता है कि भविष्य में क्या होगा। लेकिन बांग्लादेश के हिंदू 2021 की दुर्गा पूजा को कभी नहीं भूलेंगे।”

कार्रवाई का आश्वासन दिया

एक आपातकालीन नोटिस जारी कर बांग्लादेश के धार्मिक मामलों के मंत्रालय ने कहा कि वह कुमिला में दुर्गा पंडाल में कुरान की उपस्थिति की खबर से सतर्क थे। हालाँकि, मंत्रालय ने लोगों से इस घटना पर कानून अपने हाथ में नहीं लेने का आग्रह किया।

देश के टेलीकॉम मिनिस्टर मुस्तफा जब्बार ने कहा है कि पोस्ट और वीडियो को तुरंत हटाने के लिए कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा, “हम फेसबुक के संपर्क में हैं और हमने 100 से अधिक फेसबुक लिंक को हटाने का अनुरोध किया है। हमें उम्मीद है कि उन्हें जल्द ही ब्लॉक कर दिया जाएगा।” इस घटना को लेकर अवामी लीग के महासचिव ओबैदुल कादर ने आश्वासन दिया है कि घटना के दोषी चाहे किसी भी राजनीतिक पार्टी से जुड़े हों उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा।

हिंदू विरोधी हिंसा के बाद पूरे देश में कई स्थानों पर भारी सुरक्षा तैनात की गई थी। अतिरिक्त उपायुक्त शहादत हुसैन ने भी बताया कि मामले की आगे की जाँच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। कादर के अनुसार, प्रधानमंत्री शेख हसीना ने साम्प्रदायिक हमलों और इस तरह का प्रचार करने वाले अपराधियों को पहचानने और उन्हें दंडित करने का आदेश दिया है।

…तो सचिन वाजे के ‘नंबर 1’ थे परमबीर सिंह, 12 चश्मदीदों ने क्राइम ब्रांच को कैमरे पर बताई वसूली की कहानी: रिपोर्ट

मुंबई के पुलिस कमिश्नर रहे परमबीर सिंह की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। मुंबई क्राइम ब्रांच ने उन पर लगे वसूली के आरोपों में से एक में 12 चश्मदीदों के बयान कैमरे पर रिकॉर्ड किए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इससे पता चलता है कि मुंबई पुलिस का बर्खास्त सहायक पुलिस निरीक्षक सचिन वाजे उनके लिए ही वसूली करता था।

मिड डे की रिपोर्ट के अनुसार इन चश्मदीदों ने अपने बयान में कहा है कि उन्होंने वाजे को ‘प्रोटेक्शन मनी’ दी थी। यह पैसा कथित तौर पर परमीबर सिंह के पास गया था, जिसे वाजे ‘नंबर 1’ कहता था।

क्राइम ब्रांच ने इस मामले में 12 अक्टूबर को सिंह को तलब किया था, लेकिन वे हाजिर नहीं हुए। महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की जाँच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) को वाजे ने बताया था कि वह देशमुख के लिए ‘नंबर 1’ इस्तेमाल ​करता था। लेकिन, मुंबई क्राइम ब्रांच का दावा है कि ‘नंबर 1’ सिंह थे। उल्लेखनीय है कि मुंबई पुलिस कमिश्नर पद से छुट्टी के बाद परमबीर सिंह ने आरोप लगाया था कि देशमुख ने वाजे को वसूली का टारगेट दिया था।

सूत्रों के अनुसार चश्मदीदों ने क्राइम ब्रांच को बताया है कि वाजे सिंह को ‘नंबर 1’ कहता था और उनके लिए पैसे वसूलता था। सिंह, वाजे और अन्य के खिलाफ यह मामला इसी साल अगस्त में गोरेगाँव पुलिस स्टेशन में बिल्डर बिमल अग्रवाल ने दर्ज करवाया था। अग्रवाल ने आरोप लगाया था कि उसकी पार्टनरशिप में चल रहे 2 बार और 1 रेस्टोरेंट पर छापेमारी न करने के एवज में 9 लाख रुपए वसूले गए थे। साथ ही कहा था कि वाजे ने उससे 2 लाख 92 हजार रुपए की कीमत के दो फ्लिप मोबाइल फोन भी खरीदवाए थे। ये फोन क्राइम ब्रांच जब्त कर चुकी है।

अग्रवाल ने बताया था कि मोबाइल का रंग सिल्वर होने के कारण वाजे को पसंद नहीं आया और उसने दूसरे रंग के मोबाइल फोन की माँग की। जब तक दुकानदार दूसरे रंग का फोन मँगाता तब तक मनसुख हिरेन हत्या और एंटीलिया कांड मामले में NIA ने उसे गिरफ़्तार कर लिया। अपने आरोपों के समर्थन में अग्रवाल ने कुछ ऑडियो क्लिप भी पेश किए हैं जिसकी जाँच करवाई जा रही है। इस FIR में यह भी कहा गया है कि सचिन वाजे की इस अवैध उगाही में 75% हिस्सा परमबीर सिंह का था।

शिकायतकर्ता बिमल अग्रवाल के अनुसार आरोपित सचिन वाज़े व्हाट्सएप कॉल कर के उगाही के लिए कोड वर्ड का इस्तेमाल करता था। व्हाट्सएप पर की गई इन्हीं कॉल को अग्रवाल ने रिकॉर्ड कर लिया है। क्राइम ब्रांच यूनिट- 11 के अनुसार रिकार्डिंग आरम्भिक जाँच का का मुख्य आधार है।

ताजा जानकारी के अनुसार मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच इस मामले में सचिन वाज़े की ट्रांजिट रिमांड चाहती है। फिलहाल सचिन वाजे नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (NIA) की कस्टडी में है। वहीं पिछले दिनों परमबीर सिंह के भी देश छोड़ भागने की आशंका जताई गई थी। मीडिया रिपोर्टों में उनके रूस में होने की बात कही गई थी। उससे पहले राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को लेकर भी इस तरह की खबरें आई थी। मीडिया रिपोर्टों में बताया गया था कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कई समन की अनदेखी कर चुके देशमुख के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने लुकआउट नोटिस जारी किया है।

धनुष-बाण से हमला कर 5 को मौत के घाट उतारा, आतंकी कनेक्शन की जाँच कर रही नॉर्वे पुलिस

यूरोपीय देश नॉर्वे की गिनती दुनिया के बेहद शांत देशों में होती है। अमूमन यहाँ हिंसा की घटना देखने को नहीं मिलती। लेकिन बुधवार (13 अक्टूबर 2021) को यहाँ एक हमले में 5 लोगों की मौत हो गई। दो के घायल होने की खबर है। हमले को धनुष-बाण का इस्तेमाल कर अंजाम दिया गया।

हमला देश के दक्षिण-पूर्वी शहर कोंग्सबर्ग में हुआ। इस शहर की आबादी करीब 28 हजार है। हमलावर भी यहीं रहता था। उसे गिरफ्तार कर लिया गया। मीडिया रिपोर्टों में उसकी पहचान 37 वर्षीय दानिश नागरिक के तौर पर की गई है। हमले की वजह का फिलहाल पता नहीं चल पाया है।

ड्रामन काउंटी के पुलिस प्रमुख ओविंड आस ने बताया है कि अधिकारियों ने इसके पीछे आतंकी मंसूबों की आशंका को फिलहाल खारिज नहीं किया है। इस सिरे से भी जॉंच हो रही है। उन्होंने कहा कि हमले के लिए धनुष और तीर का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश में है कि किसी और हथियार का भी इस्तेमाल हुआ था या नहीं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि हमलावर ने अकेले इस घटना को अंजाम दिया या उसके साथ और भी लोग हैं। घायलों में एक पुलिस अधिकारी भी है।

नॉर्वे की प्रधानमंत्री एर्ना सोलबर्ग ने कहा कि कोंग्सबर्ग से आ रही जानकारी बहुत ही भयावह हैं। उन्होंने कहा कि वे इस बात को भली-भाँति समझ रही हैं कि लोग डरे हुए हैं। लेकिन हालात पुलिस के कंट्रोल में है। पुलिस का कहना है कि आरोपित के पास अन्य हथियार भी थे। गौरतलब है कि नार्वे में 10 साल बाद हिंसा की बड़ी घटना हुई है। इससे पहले साल 2011 में एंडर्स बेहरिक ब्रेविक ने 77 लोगों की हत्या कर दी थी। मृतकों में अधिकांश युवा थे जो एक कैम्प में शामिल होने आए थे।