Home Blog Page 3319

‘यही होता है जब कारसेवकों पर गोली चलाने वाले हिंदू होने का ढोंग करते हैं’: महानवमी पर अखिलेश यादव ने दी रामनवमी की बधाई, हुए ट्रोल

आज रामनवमी है या महानवमी? आप सोच रहे होंगे कि हम यह सवाल क्यों पूछ रहे हैं। दरअसल, ट्विटर पर समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और कॉन्ग्रेस नेता आनंद शर्मा के ट्वीट को लेकर बवाल मचा हुआ है। इन दोनों नेताओं ने आज ‘महानवमी’ पर लोगों को ‘रामनवमी’ की बधाई दे दी। हालाँकि, दोनों ने अपना ट्वीट हटा लिया है।

दरअसल, सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आज ट्वीट करके कहा, “आपको और आपके परिवार को रामनवमी की अनंत मंगलकामनाएँ!” अखिलेश ने जैसे ही ट्वीट किया, वैसे ही लोगों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद अखिलेश ने ट्वीट को हटाकर नया ट्वीट किया- “आपको और आपके परिवार को महानवमी की अनंत मंगलकामनाएँ!”

बीजेपी ने अखिलेश पर कसा तंज

अखिलेश यादव के ट्वीट पर उत्तर प्रदेश बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। यूपी बीजेपी के हैंडल से ट्वीट किया गया, “जिस अखिलेश यादव को यह तक नहीं पता कि रामनवमी और महानवमी में क्या अंतर है, वो ‘राम’ और ‘परशुराम’ की बात करते हैं… जनता को मत पहनाइए ‘टोपी’, वह आप पर ज्यादा अच्छी लगती है…।”

उत्तर प्रदेश बीजेपी ने एक और ट्वीट किया, “गुमशुदा की तलाश… नाम:- अखिलेश यादव, संसदीय क्षेत्र:- आजमगढ़, नोट:- आज ही इन्हें ट्विटर पर ‘रामनवमी’ की शुभकामनाएँ देते पाया गया था। कोई जानकारी मिलने पर…”

वहीं, बीजेपी नेता अमित मालवीय ने कहा, “रामनवमी का पर्व चैत्र मास में मनाया जाता है। शारदीय नवरात्रों में महानवमी होती है, जो माँ दुर्गा की आराधना का दिन है। इसके बाद दशहरा, यानी जिस दिन भगवान राम रावण का वध करते हैं, आता है। यही होता है जब कार सेवकों पर गोली चलाने वाले, चुनाव आते ही हिंदू बनने का ढोंग करने लगते हैं।”

बीजेपी नेता संबित पात्रा ने लिखा, “जिन लोगों ने श्री राम भक्तों पर गोली चलाई थी …आज चुनावी डर से प्रभु श्री राम उनके सपनो में भी आने लगे हैं …आज वो राम नवमी की बधाई दे रहे हैं ..बधाई हो ..”

यूजर्स ने भी लिए मजे

अखिलेश यादव के ट्वीट डिलीट करने के बाद भी यूजर्स उनके पुराने पोस्ट का स्क्रीनशॉट उनके कमेंट में ही भेजते रहे और उनके मजे लेते रहे। एक यूजर ने लिखा, “पहिलका काहे मिटा दिए सुल्तान..!”

वहीं, एक अन्य यूजर ने लिखा, “वोट बैंक के खातिर मंदिरों के चक्कर लगाने की जगह हिंदू धर्म और रीति रिवाजों के बारे में अच्छे से जानकारी हासिल की होती तो शायद ऐसी गलती न करते अखिलेश यादव जी…”

योगेंद्र प्रताप ने लिखा, “पार्ट टाइम हिंदू होने का यही परिणाम है। यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव जी को रामनवमी और महानवमी का अंतर तक पता नहीं? महानवमी के दिन रामनवमी की बधाई दे रहे हैं। अखिलेश जी,आप जालीदार टोपी ही लगाइए। वहीं आप पर सूट करती है। सनातन धर्म और इसके रीति-रिवाजों से भला आपको क्या मतलब।”

आचार्य शिव किशोर लिखते हैं, “अखिलेश यादव कैसे हिंदू हैं? उनके यहाँ दो दो नवमी हैं, आज ही रामनवमी है आज महानवमी है। आज के ट्वीट देखिए इनके और लोग कहते हैं कि आस्ट्रेलिया में पढ़कर आए हैं।”

एक यूजर ने लिखा, “नकली चुनावी हिंदू बनने के नुकसान। नमाजी अखिलेश यादव को ये तक नहीं पता कि रामनवमी चैत्र मास की नवरात्रि में होती है। आज महानवमी है। कितना ही हिंदू बनो पर “यूपी में आएगा तो योगी ही।”

आनंद शर्मा ने भी हटाया ट्वीट

आनंद शर्मा के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

अखिलेश यादव ने रामनवमी की मंगलकामनाएँ वाला ट्वीट हटा लिया था, लेकिन पूर्व केंद्रीय मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता आनंद शर्मा ने काफी समय तक अपना ट्वीट नहीं हटाया था। आनंद शर्मा ने ट्वीट किया था, “रामनवमी के शुभअवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।” ट्रोल होने के बाद आनंद शर्मा ने भी अपनी गलती सुधार ली है।

बांग्लादेश में मुस्लिम भीड़ ने उखाड़ा दुर्गा पूजा पंडाल, तोड़ी गई प्रतिमाएँ: पत्र लिखकर PM मोदी से हस्तक्षेप का आग्रह

बांग्लादेश में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने दुर्गा पूजा के मौके पर कई पंडालों पर हमला कर देवी की मूर्तियों को अपवित्र और खंडित कर दिया है। इसको लेकर पश्चिम बंगाल विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रहे अत्याचार का मुद्दा उठाते हुए हस्तक्षेप करने की माँग की। वहीं, गुरुवार शाम को विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारतीय उच्चायोग वहाँ के अधिकारियों के संपर्क में है और बांग्लादेश की सरकार इस मामले में सख्त कदम उठा रही है।

पीएम को लिखे अपने पत्र में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा है, “आदरणीय महोदय, मैँ आपका ध्यान बांग्लादेश में दुर्गा पूजा के दौरान पंडालों में मूर्तियों को खंडित करने की ओर दिलाना चाहता हूँ। बांग्लादेश की कुख्यात कट्टरपंथी ताकतें वहाँ के सनातनी समुदाय पर हमले को लेकर अभ्यस्त हो गई हैं। इस बार कट्टरपंथी ताकतों ने पंडालों और कई मंदिरों को निशाना बनाया है। बांग्लादेश में रहने वाले सनातनी लोगों की स्थिति बेहद दयनीय है। आपसे आग्रह है कि बांग्लादेश के सनातनी समुदाय को राहत दिलाने के लिए जल्द एवं आवश्यक कदम उठाएँ।”

अपने ट्वीट में अधिकारी ने लिखा, “बांग्लादेश के कॉमिला जिले, कॉक्स बाजार और नोआखली में मंदिरों और पूजा पंडालों में तोड़फोड। सोशल मीडिया के माध्यम से फैलाई गईं ‘षडयंत्रकारी अफवाहें’ निराश करने वाली हैं। जानबूझकर कर माँ दुर्गा की मूर्तियों को खंडित करना सनातनी बंगाली समुदाय पर एक सुनियोजित हमला है।”

इस मामले पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, “हमने बांग्लादेश में धार्मिक सभाओं पर हमलों की कुछ रिपोर्टें देखी हैं। हमें पता चला है कि बांग्लादेश सरकार ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। बांग्लादेश में दुर्गा पूजा समारोह जारी है। हमारा उच्चायोग संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है।”


बांग्लादेश हिंदू यूनिटी काउंसिल के ट्वीट में कहा गया है, “13 अक्टूबर 2021, बांग्लादेश के इतिहास में एक निंदनीय दिन। अष्टमी के दिन मूर्ति विसर्जन के मौके पर कई पूजा मंडपों में तोड़फोड़ की गई। हिंदू अब पूजा मंडपों की रखवाली कर रहे हैं। आज पूरी दुनिया चुप है। माँ दुर्गा अपना आशीर्वाद दुनिया के सभी हिंदुओं पर बनाए रखें। कभी माफ नहीं करेेंगे।”

दरअसल, बांग्लादेश के कॉमिला जिले ननुआ दिघी में दुर्गा पूजा के पंडाल में मुस्लिम भीड़ द्वारा जमकर तोड़फोड़ मचाई गई। प्रतिमाओं को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। किसी असामाजिक तत्व ने वहाँ चल रही दुर्गा पूजा को बदनाम करने के लिए कुरान के अपमान की अफवाह फैला दी, जिसके बाद ये घटना हुई। लेखिका तस्लीमा नसरीन ने बताया कि किसी हिन्दू विरोधी ने माँ दुर्गा के चरणों में चुपचाप कुरान रख कर इस तस्वीर को वायरल कर दिया।

बांग्लादेश हिंदू यूनिटी काउंसिल ने पंडालों में खंडित की गई मूर्तियों और तहस-नहस किये गए पंडालों की तस्वीरें ट्वीट की हैं।

फेसबुक की ‘सीक्रेट ब्लैकलिस्ट’ हुई लीक: 4000+ की लिस्ट में भारत के ये 10 खतरनाक संगठन और लोगों के नाम भी शामिल

द इंटरसेप्ट ने मंगलवार (12 अक्टूबर 2021) को फेसबुक की गुप्त सूची यानी सीक्रेट लिस्ट को लीक कर दिया। ‘डेंजरस इंडिविजुअल्स एंड ऑर्गेनाइजेशन’ (DIO) की इस लिस्ट में शामिल किए गए लोगों-संगठनों को फेसबुक अपने प्लेटफॉर्म पर अनुमति नहीं देता है। इस लिस्ट में भारत के 10 आतंकवादी, उग्रवादी या चरमपंथी संगठनों का नाम शामिल है, जो 4,000 से अधिक लोगों और समूहों की उस गुप्त ब्लैकलिस्ट का हिस्सा हैं, जिनमें श्वेत वर्चस्ववादी, सैन्यीकृत सामाजिक आंदोलन और कथित आतंकवादी शामिल हैं और फेसबुक इन्हें खतरनाक मानता है।

द इंटरसेप्ट के अनुसार, प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) और नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (इसाक-मुइवा) फेसबुक सूची में भारत के 10 समूहों में शामिल हैं। इसी तरह ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स, कंगलीपाक कम्युनिस्ट पार्टी, खालिस्तान टाइगर फोर्स, पीपुल्स रिवोल्यूशनरी पार्टी ऑफ कंगलीपाक का नाम भी इस सूची में दिया गया है।

इसके अलावा इंडियन मुजाहिदीन, जैश-ए-मोहम्मद के अफजल गुरु स्क्वाड और भारत और कई देशों में एक्टिव इस्लामिक स्टेट और तालिबान जैसे वैश्विक संगठनों के विभिन्न स्थानीय या उप-समूह सहित कई इस्लामी चरमपंथी और आतंकवादी समूह भी ब्लैकलिस्ट में शामिल हैं।

खालिस्तान आंदोलन से जुड़े संगठन और व्यक्ति

  • खालिस्तान की भिंडरांवाले टाइगर फोर्स
  • खालिस्तान कमांडो फोर्स टेरर
  • खालिस्तान लिबरेशन फोर्स टेरर
  • खालिस्तान टाइगर फोर्स आतंक
  • खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स और उसके पाँच सदस्य भूपिंदर सिंह भिंडा, गुरमीत सिंह बग्गा, हरमिंदर सिंह मिंटू, परमजीत सिंह पंजवार और रणजीत सिंह नीता
  • खालिस्तान आतंकी जरनैल सिंह भिंडरावाले का भतीजा लखबीर सिंह रोडे और उनका संगठन इंटरनेशनल सिख यूथ फाउंडेशन

भारत के कम्युनिस्ट, क्षेत्रीय और नक्सली संगठन

  • भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी – माओवादी
  • कांगलीपाक कम्युनिस्ट पार्टी
  • सभी त्रिपुरा टाइगर फोर्स आतंक दक्षिण एशिया, भारत
  • नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड – इसाक-मुइवाही
  • पीपुल्स रिवोल्यूशनरी पार्टी ऑफ कंगलीपाक टेरर
  • यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम
  • आधार आंदोलन

भारत से जुड़े इस्लामिक संगठन

  • अल आलम मीडिया, इंडिया मीडिया विंग अंसार गजवत-उल-हिन्दी
  • अल साहब भारतीय उपमहाद्वीप, भारतीय उपमहाद्वीप में मीडिया विंग अल कायदा, अल कायदा मध्य कमान
  • अल-बद्र मुजाहिदीन
  • अल-मुर्सलात मीडिया, इंडिया मीडिया विंग इस्लामिक स्टेट
  • भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा
  • दावत-ए-हक टेरर इंडिया मीडिया विंग इस्लामिक स्टेट
  • इंडियन मुजाहिदीन आतंक दक्षिण एशिया
  • जमीयत-उल-मुजाहिदीन आतंक दक्षिण एशिया, भारत, पाकिस्तान
  • साहम अल-हिंद मीडिया आतंक भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान मीडिया विंग जेमाह इस्लामिया, जमात उल मुजाहिदीन बांग्लादेश, अल कायदा सेंट्रल कमांड
  • सोथ अल-हिंद टेरर इंडिया, पाकिस्तान मीडिया विंग इस्लामिक स्टेट
  • प्रतिरोध मोर्चा
  • अफजल गुरु दस्ते
  • अल रशीद ट्रस्ट
  • अल रहमत ट्रस्ट
  • अल-अक्सा मीडिया जम्मू और कश्मीर
  • इस्लामिक स्टेट जम्मू और कश्मीर
  • जैश-ए-मोहम्मद कश्मीर
  • जम्मू कश्मीर की तहरीक-ए-आजादी
  • विलायत कश्मीर

कंटेंट के संबंध में थ्री-टियर सिस्टम रखता है फेसबुक

आधी से अधिक सूची में कथित विदेशी आतंकवादी शामिल हैं जो मुख्य रूप से मध्य पूर्व, दक्षिण एशियाई और मुस्लिम हैं। इंटरसेप्ट ने एक्सपर्ट्स के हवाले से कहा कि ये लिस्ट और फेसबुक की पॉलिसी बताती है कि कंपनी हाशिए पर रहने वाले ग्रुप्स पर कठोर प्रतिबंध लगाती है।

दरअसल, फेसबुक में तीन-स्तरीय प्रणाली है जो इशारा करती है कि कंपनी कंटेंट के संबंध में किस प्रकार का इनफोर्समेंट करेगी। इसमें आतंकवादी समूह, घृणा समूह और आपराधिक संगठनों पर सबसे अधिक प्रतिबंधात्मक स्तर लागू किए गए हैं और ये टीयर 1 लिस्ट का हिस्सा हैं। जबकि सबसे कम प्रतिबंधात्मक स्तर वाले टीयर 3 में सैन्यीकृत सामाजिक आंदोलन शामिल हैं। द इंटरसेप्ट ने इसे ज्यादातर दक्षिणपंथी अमरीकी सरकार विरोधी संगठन कहा है। इस सूची में शामिल किसी भी संगठन को फेसबुक पर मौजूदगी बनाए रखने की अनुमति नहीं है।

फेसबुक ने सूची की प्रामाणिकता पर विवाद नहीं किया है, लेकिन एक बयान में कहा है कि यह सूची को गुप्त रखता है। आतंकवाद विरोधी और खतरनाक संगठनों के लिए फेसबुक के नीति निदेशक ब्रायन फिशमैन ने एक बयान में कहा, “हम अपने मंच पर आतंकवादी, नफरत करने वाले समूह या आपराधिक संगठन नहीं चाहते हैं, यही वजह है कि हम उन पर प्रतिबंध लगाते हैं और उनकी प्रशंसा, प्रतिनिधित्व या समर्थन करने वाली सामग्री को हटा देते हैं।”

फिशमैन ने आगे कहा, “हम वर्तमान में हमारी नीतियों के उच्चतम स्तरों पर 250 से अधिक श्वेत वर्चस्ववादी समूहों सहित हजारों संगठनों पर प्रतिबंध लगाते हैं, और हम नियमित रूप से अपनी नीतियों और संगठनों को अपडेट करते हैं जो प्रतिबंधित होने के योग्य हैं।”

फिशमैन ने कई ट्वीट्स में यह भी कहा कि द इंटरसेप्ट द्वारा प्रकाशित सूची का संस्करण व्यापक नहीं है और इसे लगातार अपडेट किया जाता है। उन्होंने एक ट्वीट में कहा, “फेसबुक के खतरनाक संगठनों और व्यक्तियों की सूची का एक संस्करण आज लीक हो गया। विशेष रूप से हमारे कानूनी दायित्वों के बारे में मैं कुछ संदर्भ प्रदान करना चाहता हूँ और कवरेज में कुछ अशुद्धियों और गलत व्याख्याओं को इंगित करना चाहता हूँ।”

फिशमैन ने कहा कि फेसबुक ने ‘कानूनी जोखिम को सीमित करने, सुरक्षा जोखिमों को सीमित करने और नियमों को दरकिनार करने के लिए समूहों के अवसरों को कम करने के लिए’ सूची साझा नहीं की है, लेकिन नीति में सुधार करने की कोशिश कर रहा है।

फेसबुक ने बार-बार दावा किया है कि सूची का खुलासा करने से उसके कर्मचारी खतरे में पड़ जाएँगे। हालाँकि, द इंटरसेप्ट ने कहा कि उन्हें ऐसी कोई जानकारी नहीं दी गई थी। कई अवसरों पर, कंपनी के ओवरसाइट बोर्ड ने सूची को सार्वजनिक करने की सिफारिश की थी क्योंकि यह ‘सार्वजनिक हित में’ थी।

इंटरसेप्ट की विस्तृत रिपोर्ट यहाँ पढ़ सकते हैं।

‘फैसल खान देता है चाकू मारने की धमकी’: हिन्दू परिवार ने लगाया पलायन का पोस्टर, बुलंदशहर के मुस्लिम बहुल इलाके का मामला

उत्तर प्रदेश के जिला बुलंदशहर में एक हिन्दू परिवार ने अपने घर पर पलायन का पोस्टर लगाया है। मामला थानाक्षेत्र पहासू के गाँव बनेल का है। यहाँ पर विनोद राघव ने अपने बरी वाला मोहल्ला स्थित घर पर लिखा है – “फैसल खाँ S/o यासीन खाँ और उनके 4 साथियों की वजह से हिन्दू परिवार पलायन करने पर मजबूर।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बुलंदशहर के गाँव बनैल निवासी विनोद राघव का मकान मुस्लिम समुदाय के लोगों के मकानों के नजदीक है। विनोद राघव के अनुसार मंगलवार (12 अक्टूबर 2021) शाम को मुस्लिम समुदाय के युवक ने साथियों संग न सिर्फ उनकी धार्मिक भावनाओं को आहत किया बल्कि उन पर चाकू से हमला भी किया।

इसी के साथ उनका आरोप है कि बुधवार को उन्हें ऑडियो द्वारा भी धमकाया गया जिस पर उनकी तरफ से हिदू रक्षा दल ने पुलिस में केस दर्ज करवाया। पीड़ित परिवार के अनुसार दहशत के कारण वह मकान बेचकर गाँव से पलायन करना चाह रहे हैं।

जब इस मामले में ऑपइंडिया ने पीड़ित विनोद राघव से सम्पर्क किया तब उन्होंने मामले को विस्तार से बताया। विनोद ने बताया कि उनके घर के आस-पास के अधिकतर मकान मुस्लिमों के हैं। खुद को बेहद गरीब परिवार से बताते हुए अपने 3 बेटों को मजदूर और ड्राइवर बताया।

पीड़ित विनोद ने बताया कि आरोपित फैसल उनके परिवार पर पहले भी हमले कर चुका है। बकौल विनोद हमलावर फैसल खान चाकू ले कर अक्सर उनके घर में घुस जाता है और घर के हर सदस्य को जान से मार देने की धमकी देता है। जिसका उन्होंने चुपके से वीडियो भी बनाया है। उन्होंने फैसल के अब्बू का नाम यासीन खान बताया है।

इस मामले में मुकदमा दर्ज करवाने वाले वादी हिन्दू रक्षा दल के प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश सिसोदिया ने ऑपइंडिया को बताया कि आरोपित फैसल मकानों में खिड़की – शीशे आदि लगाने का काम करता है। फैसल का भाई फरमान अक्सर सोशल मीडिया पर हिन्दू देवी देवताओं के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करता है। फरमान पर इसी सिलसिले में पिछले साल केस भी दर्ज हुआ था।

ऑपइंडिया के पास इस मामले में दर्ज हुई FIR है। इस FIR में आरोपित फैसल पर धारा 295 A, 504, 506 के तहत केस दर्ज हुआ है। इस प्रकरण की विवेचना पहासू थाने के सब इंस्पेक्टर वीरेंद्र सिंह कर रहे हैं।

FIR की कॉपी- 1

पीड़ित विनोद ने खुद को प्रताड़ित करने वालों में कुछ अन्य नाम भी बताए हैं। पीड़ित के अनुसार फैसल के साथ अकरम, आस, राजू और मुकीम भी आए दिन उन्हें व उनके परिवार को प्रताड़ित करते हैं। विनोद के अनुसार वो घर छोड़ कर अपनी बहन के घर आगरा जा कर बसने की सोच रहे हैं।

FIR की कॉपी- 2

मुकदमे के वादी हिन्दू रक्षा दल के राकेश कुमार सिसोदिया का कहना है कि उन्होंने मौखिक रूप से पहले ही थाने पर पीड़ित पर हमले की आशंका जताई थी। वादी के मुताबिक स्थानीय पहासू थाने ने फिर भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसी के साथ पुलिस द्वारा अभियुक्त फैसल पर लगाई गई धाराओं को भी नाकाफी बताते हुए वादी ने पुलिस पर आरोपित को बचाने का भी आरोप लगाया।

FIR की कॉपी- 3

इस प्रकरण में ऑपइंडिया ने जब स्थानीय पुलिस से सम्पर्क किया तो थाना पहासू से जानकारी दी गई कि प्रकरण को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझा लिया गया है। थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपित फैसल को उचित धाराओं में जेल भेज दिया गया है। साथ ही कानून व्यवस्था की स्थिति सामान्य बताई।

नॉर्वे के हमलावर ने हाल ही में कबूला था इस्लाम, 4 महिला व 1 पुरुष की तीर मार कर दी हत्या

नॉर्वे में तीर और धनुष से हमला कर पाँच लोगों की हत्या करने के आरोप में हिरासत में लिए गए आरोपी ने हाल ही में इस्लाम धर्म अपनाया था। उसे पूर्व में कट्टरपंथी के तौर चिह्नित किया गया था। पुलिस ने गुरुवार (अक्टूबर 14, 2021) को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि संदिग्ध व्यक्ति ने कोंग्सबर्ग के विभिन्न इलाकों में बुधवार  (अक्टूबर 13, 2021) शाम को तीर कमान से हमला किया, जिसमें पाँच लोग मारे गए थे। हमले में एक पुलिस अधिकारी सहित दो लोग गंभीर रूप से घायल भी हैं। इनमें से कई पीड़ित सुपर मार्केट में थे।

पुलिस प्रमुख ओले बी सावेरुड ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘पहले भी इस व्यक्ति के कट्टरपंथी होने को लेकर चिंता व्यक्त की गई थी।’’ उन्होंने बताया हमले में मारी गई चार महिलाओं और एक पुरुष की आयु 50 से 70 वर्ष के बीच थी। 

सोवेरुड ने कहा कि 37 वर्षीय संदिग्ध ने रात भर की पूछताछ के दौरान नॉर्वे में हुए सबसे घातक हमले को स्वीकार कर लिया है। उन्होंने आगे कहा, “हम अन्य बातों के अलावा इस बात की भी जाँच कर रहे हैं कि क्या यह एक आतंकवादी हमला था।” उन्होंने बताया कि संदिग्ध को शुरुआती आरोप में गिरफ्तार किया जा रहा है। फिलहाल यही मानकर चल रहे हैं कि संदिग्ध हमलावर ने ही इस घातक हमले को अंजाम दिया है।

नॉर्वे के पब्लिक ब्रॉडकास्टर NRK ने बताया कि संदिग्ध को डकैती और नशीली दवाओं के अपराधों के लिए कई बार दोषी ठहराया गया था और पिछले साल 6 महीने की सजा सुनाई गई थी। इसमें परिवार के दो करीबी सदस्यों से संपर्क करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, क्योंकि उसने उनमें से एक को मारने की धमकी दी थी।

अधिकारियों ने बताया कि हमले में घायल दो पीड़ितों को गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती कराया गया है, जिनमें से एक स्टोर में तैनात पुलिस अधिकारी है। उनकी स्थिति की तत्काल जानकारी नहीं मिल सकी। नवनियुक्त प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे ने हमले को ‘भयावह’ करार दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘यह अवास्तविक है, लेकिन यह सच्चाई है कि पाँच लोग मारे गए हैं और कई घायल हुए हैं, जबकि कई सदमे में हैं।’’

गौरतलब है कि नार्वे में 10 साल बाद हिंसा की बड़ी घटना हुई है। इससे पहले साल 2011 में एंडर्स बेहरिक ब्रेविक ने 77 लोगों की हत्या कर दी थी। मृतकों में अधिकांश युवा थे, जो एक कैम्प में शामिल होने आए थे। बता दें कि नार्वे की राजधानी ओस्लो से लगभग 67 किलोमीटर दूर कोंग्सबर्ग एक छोटा कस्बा है, जिसकी आबादी महज 28 हजार है।

‘जरूरत पड़ी तो और होगी सर्जिकल स्ट्राइक, ये बातचीत का नहीं, जबाव देने का समय’: कश्मीर में हिन्दुओं की टारगेट किलिंग पर अमित शाह

सीमा पर अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे पाकिस्तान को अब केंद्रीय गृहमंत्री ने खुली चेतावनी दी है। गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि अगर पाकिस्तान ने सीमा उल्लंघन और कश्मीर में आम नागरिकों की हत्याओं का खेल बंद नहीं किया तो उस पर फिर से सर्जिकल स्ट्राइक किया जा सकता है। गृहमंत्री गोवा के धारबंदोरा में राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय के शिलान्यास समारोह में बोल रहे थे।

पाकिस्तान को सर्जिकल स्ट्राइक की याद दिलाते हुए अमित शाह ने कहा कि 2016 में भारत ने पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक कर यह साबित कर दिया है, “हम हमलों को बर्दाश्त नहीं करते। अगर आप उल्लंघन करेंगे तो और भी सर्जिकल स्ट्राइक होंगी।” अमित शाह ने कहा, “पीएम मोदी और पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर की देखरेख में की गई सर्जिकल स्ट्राइक एक महत्वपूर्ण कदम था। हमने यह मैसेज दिया कि कोई भी भारतीय सीमाओं पर कोई गलत हरकत नहीं कर सकता है। एक समय था बातचीत करने का, लेकिन अब समय है प्रतिक्रिया का।”

गौरतलब है कि पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर में हिंदुओं और सिखों को टारगेट कर उनकी हत्या की गई थी। आतंकियों द्वारा आम नागरिकों को निशाना बनाए जाने के बाद सेना ने अपना अभियान तेज कर दिया है। इसके अलावा, आतंकियों ने सेना पर भी हमला किया था। घाटी में इस तरह की घटनाओं में बढ़ोतरी पर आतंकवादियों पर कड़ा प्रहार करने की माँग तेज हो गई है। घाटी में सेना ने आतंकवादियों को जबरदस्त चोट भी दी है। सेना ने घेर-घेर कर आतंकियों को मौत की नींद सुलाने का अभियान चला रखा है।

उल्लेखनीय है कि भारत ने उरी, पठानकोट और गुरदासपुर में आतंकवादी हमलों के जवाब में सितंबर 2016 में पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक की थी। इस दौरान, पाकिस्तान में कई आतंकवादी शिविरों को नष्ट कर दिया गया। उरी हमले के बाद 28-29 सितंबर 2016 को सर्जिकल स्ट्राइक की गई थी। 

इसके अलावा, साल फरवरी 2019 में भी भारत ने पाकिस्तान को मुँहतोड़ जवाब देते हुए एयर स्ट्राइक को अंजाम दिया था। इसमें जैश-ए-मोहम्मद के कई ठिकानों पर बम बरसाए गए थे, जिसमें बड़ी संख्या में आतंकवादी ढेर हो गए थे। भारत ने यह स्ट्राइक जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में की थी। 

आर्यन खान की बेल पर 20 अक्टूबर को फैसला: काजोल की बहन ने कहा- बच्चे को कर रहे प्रताड़ित, नवाब मलिक ने भी किया बचाव

ड्रग्स केस में गिरफ्तार आर्यन खान को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। उनकी जमानत याचिका पर स्पेशल एनडीपीएस कोर्ट ने फैसला 20 अक्टूबर तक सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान जमानत का विरोध करते हुए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने कोर्ट को बताया था कि आर्यन के सालों से प्रतिबंधित ड्रग्स का सेवन करने के सबूत हैं। क्रूज पर छापेमारी के दौरान अरबाज मर्चेंट के पास से जो ड्रग्स मिला उसका भी वह सेवन करने वाले थे।

वहीं, आर्यन खान और ड्रग्स के अन्य मामले में आरोपी अपने दामाद समीर खान के समर्थन में महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और एनसीपी नेता नवाब मलिक एक बार फिर से उतर गए हैं। वहीं, बॉलीवुड अभिनेत्री काजोल की बहन तनीषा मुखर्जी ने भी आर्यन खान का बचाव करते हुए बच्चा बताया है।

महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और प्रवक्ता नवाब मलिक ने अपने दामाद समीर खान का बचाव करते हुए बीजेपी और एनसीबी पर उन्हें फँसाने का आरोप लगाया है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मलिक ने आरोप लगाया कि एनसीबी ‘दुर्भावनापूर्ण इरादे’ से काम कर रही है और बहुत ही सेलेक्टिव तरीके से लोगों को निशाना बना रही है।

अपने दामाद समीर खान की बेल को लेकर मलिक ने भाजपा पर निशाना साधा और कहा कि भाजपा उनके दामाद पर ड्रग डीलर होने के झूठे आरोप लगा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के कहने पर ही एनसीबी ने उनके दामाद को फँसाया। उन्होंने ये भी कहा कि एनसीबी ने जिसे 200 किलो गाँजा बताया था, वह तंबाकू निकला। इतनी बड़ी एजेंसी गाँजे और तंबाकू में फर्क नहीं कर पाती है। मलिक ने यह बयान एनसीबी के उस कदम के बाद दिया है, जिसमें जाँच एजेंसी ने समीर खान की बेल के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। बता दें कि समीर खान को ड्रग्स के मामले में इसी साल जनवरी में गिरफ्तार किया था।

गौरतलब है कि इससे पहले ड्रग्स मामले में फंसे आर्यन खान का समर्थन करते हुए नवाब मलिक ने एनसीबी की रेड को फर्जी बताते हुए कहा था कि बीजेपी और समीर वानखेड़े (एनसीबी अधिकारी) के बीच कुछ डील हुई होगी।

तनीषा मुखर्जी भी आर्यन खान के सपोर्ट में उतरीं

क्रूज पर ड्रग्स केस के मामले में बॉलीवुड अभिनेत्री और काजोल की बहन तनीषा मुखर्जी ने भी आर्यन खान का बचाव किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, तनीषा का कहना है कि आर्यन के साथ ठीक नहीं किया जा रहा है। उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। पत्रकारों को लेकर उन्होंने कहा कि एक बच्चे का मीडिया ट्रायल करना गलत है। यह सही पत्रकारिता नहीं है। उन्होंने कहा कि यह सेशेसनलिज्म है और ऐसा करके बॉलीवुड को बदनाम किया जा रहा है। तनीषा के मुताबिक, यह बड़ा ही दुर्भाग्य है कि बीते कुछ समय से लोग बॉलीवुड स्टार्स को लेकर काफी रूड हो गए हैं।

डेमोग्राफी चेंज से खतरे में नैनीताल की संस्कृति: कारोबार से लेकर जमीन तक में ‘मुस्लिम घुसपैठ’, असम भी अछूता नहीं

असम के बाद अब उत्तराखंड में मुस्लिम समुदाय की वजह से तेजी से बदल रही डेमोग्राफी और अवैध भूमि अतिक्रमण पर चर्चा आरंभ हो गई है। हाल में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार नैनीताल की डेमोग्राफी पिछले कई वर्षों में असामान्य रूप से बदली है। यह अवैध अतिक्रमण और बदलती डेमोग्राफी का ही असर है कि पिछले कई महीनों से सोशल मीडिया, खासकर ट्विटर पर, प्रदेश के स्थानीय लोगों द्वारा भू कानून लाने की माँग लगातार उठाई जा रही है। इस तरह की माँगे कितनी प्रभावशाली होती हैं, वह बहस का विषय हो सकता है पर इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि अचानक उत्तराखंड के स्थानीय लोग भूमि पर अवैध अतिक्रमण, बदलती डेमोग्राफी और राज्य के नागरिकों, राजनीति और प्रशासन पर इसके असर को लेकर चिंतित और सतर्क नज़र आ रहे हैं।

खुफिया एजेंसियों के हवाले से छपी खबर के अनुसार स्थानीय लोगों के अपने पेशे और व्यवसाय पर भी इस डेमोग्राफी में हुए बदलाव का असर साफ़ देखा जा रहा है। चूँकि नैनीताल की अर्थव्यवस्था अधिकतर पर्यटन पर निर्भर है इसलिए पर्यटन सम्बंधित लगभग सभी पेशे में स्थानीय लोगों की हिस्सेदारी घटती जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार इस तरह का आर्थिक हस्तक्षेप केवल वैध रूप से चलाए जा रहे पेशे या व्यापार तक सीमित नहीं है बल्कि अन्य प्रदेशों से आए मुसलामानों द्वारा स्थानीय भूमि पर अवैध कब्जे की घटनाएँ भी बढ़ी हैं। इसे लेकर स्थानीय लोगों ने प्रशासन के पदाधिकारियों से लेकर मंत्रियों तक को ज्ञापन दिए हैं पर अभी तक इन शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। यही कारण है कि स्थानीय लोगों ने भू कानून की आवश्यकता के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया।

अन्य राज्यों की तरह उत्तराखंड में बदलती डेमोग्राफी को लेकर बातें होती रही हैं और चिंता व्यक्त की जाती रही है। पिछले महीने ही टिहरी बाँध पर बनी अवैध मस्जिद को हटाने को लेकर स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच वाद विवाद का वीडियो वायरल हुआ था। स्थानीय लोगों की कोशिश के बाद वह अवैध मस्जिद हटा दी गई पर प्रश्न उठता है कि जगह-जगह वैध या अवैध तरीके से मस्जिद, मज़ार या अन्य धार्मिक निर्माण आवश्यक क्यों है? इसी महीने प्रयाग के चंद्रशेखर आज़ाद पार्क में हुए अवैध निर्माण और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया में तीन मज़ारें और चौदह कब्रें हटाई गई। समस्या यह है कि ऐसा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के बाद ही हो सका और प्रश्न यह है कि; ऐसे अवैध निर्माणों को प्रशासनिक स्तर पर रोकना मुश्किल क्यों है?

कुछ दिन पहले ही असम में सरकार द्वारा अवैध भूमि अतिक्रमण को हटाने की प्रक्रिया को रोकने के लिए योजनाबद्ध तरीके से हिंसा का न केवल सहारा लिया गया बल्कि उसे लेकर देश और विदेश में निम्न स्तर का राजनीतिक प्रचार और अंतरराष्ट्रीय प्रोपेगेंडा देखने को मिला। पाकिस्तान सहित कुछ अरब देशों में अतिक्रमण हटाने के सरकारी प्रयास को मुसलमानों के ऊपर जुल्म के रूप में प्रस्तुत किया गया और साथ ही भारतीय उत्पादों के बहिष्कार की अपील भी की गई। हिंसा की जाँच के लिए आवश्यक कार्रवाई हुई है पर असम के मुख्यमंत्री का प्रश्न है कि; जब अतिक्रमण हटाने को लेकर अवैध रूप से रहने वाले लोगों और सरकार के बीच समझौता हो गया था तब हिंसा क्यों हुई, अनुत्तरित है।

कभी-कभी लगता है कि सार्वजनिक या निजी संपत्तियों पर ऐसे समूहों ने वैध या अवैध कब्ज़ा कर लिया है जो किसी दीर्घकालीन योजना के तहत काम कर रहे हैं। इस कब्ज़ा संस्कृति में धार्मिक स्थलों और इमारतों का निर्माण दीर्घकालीन योजना का ही हिस्सा है। समस्या यह है कि इसे रोकने के लिए जो प्रशासनिक चुस्ती चाहिए उसका अभाव हमेशा झलकता रहा है। कभी-कभी संस्थागत हस्तक्षेप दिखाई देता रहा है पर समस्या के भीषणता को देखते हुए ऐसे संस्थागत हस्तक्षेप महत्वहीन हैं। ऐसे में मामला अब राजनीतिक तत्परता, इच्छाशक्ति और स्थानीय लोगों की सतर्कता तक आ पहुँचा है। एक आम भारतीय की दृष्टि से देखा जाए तो ऐसा समय दूर नहीं जब चुनावी मुद्दों में अवैध कब्जे हटाया जाना ऐसा मुद्दा रहेगा जिसे हल्के में लेना राजनीतिक दलों के लिए आसान न होगा।

बदलती डेमोग्राफी और स्थानीय पेशे और भूमि पर वैध या अवैध कब्जा मुर्गी और अंडे वाले प्रश्न जैसी बात है। कब्ज़े के कारण डेमोग्राफी बदल रही है या बदल रही डेमोग्राफी के कारण कब्ज़ा बढ़ रहा है, यह प्रश्न हमेशा खड़ा रहेगा। संस्थागत तत्परता, राजनीतिक दलों और स्थानीय प्रशासन की भूमिका के अलावा यह समझना आवश्यक है कि इस तरह के अतिक्रमण केवल भूमि पर अवैध कब्जे की बात नहीं बल्कि सीधे-सीधे सभ्यता और संस्कृति की रक्षा की लड़ाई है और उससे मुँह मोड़ लेना न तो नागरिकों के हित में है और न ही सरकार के।

शायद यही कारण है कि अवैध अतिक्रमण हटाने के वादे को असम में भाजपा के संकल्प पत्र में जगह मिलनी शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार ने भी इस दिशा में महत्वपूर्ण काम किया है पर यह शुरुआत मात्र है। ऐसे में यह आशा की जा सकती है कि अन्य राज्यों के राजनीतिक दल भी इस समस्या की विभीषिका को समझेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि लगातार बढ़ रही यह समस्या उनके चुनावी घोषणापत्र का हिस्सा होंगे।

सालों से आर्यन के ड्रग्स लेने के सबूत, अरबाज मर्चेंट के पास मिला चरस भी वही लेने वाले थे: शाहरुख खान के बेटे पर NCB

ड्रग्स केस में गिरफ्तार आर्यन खान की जमानत याचिका पर सुनवाई चल रही है। सुनवाई के दौरान नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने कोर्ट से कहा कि उनके पास ऐसे सबूत मौजूद हैं जो बताते हैं कि आर्यन काफी सालों से प्रतिबंधित ड्रग्स का सेवन कर रहे हैं। उन्होंने दूसरे देशों में भी नशा किया है। भले ही मुंबई से गोवा जा रहे क्रूज में उनके पास से ड्रग्स बरामद नहीं हुई, लेकिन वह ड्रग पैडलर के संपर्क में भी थे। एनसीबी ने कोर्ट को यह भी बताया कि क्रूज पर छापेमारी के दौरान अरबाज मर्चेंट के पास जो चरस मिला था वह भी आर्यन ही लेने वाले थे। 

NCB की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने कहा कि अरबाज मर्चेंट के पास से ड्रग्स मिला है और पंचनामा में इसका साफ तौर पर जिक्र है। यह आर्यन और अरबाज के सेवन के लिए ही था। आर्यन खान को संदेह का लाभ दिए जाने के तर्क पर जवाब देते हुए अनिल सिंह ने कहा कि एनडीपीएस एक्ट के तहत आरोपितों को अलग करके नहीं देख सकते, भले ही आपके पास ड्रग्स मिला हो या फिर न मिला हो या मामूली मात्रा ही पाई गई हो। आप यह कहकर नहीं बच सकते कि आपके पास कुछ भी नहीं मिला था। हमने कमर्शियल क्वांटिटी में ड्रग्स एक आरोपित के पास से बरामद किया है। इस मामले में कुल 20 लोगों को अरेस्ट किया गया है। इस मामले में साजिश रची गई थी, ऐसे में आरोपितों को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता।

इस दौरान अनिल सिंह ने रिया च्रकवर्ती के भाई शौविक चक्रवर्ती के नाम का जिक्र कर जमानत दिए जाने के खिलाफ दलील पेश की। सुशांत के निधन के बाद से ड्रग्स एंगल सामने आने पर एनसीबी सतर्क हुई थी और जाँच आगे बढ़ने पर रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शौविक को भी जेल जाना पड़ा था। अनिल सिंह ने कहा कि फिलहाल मामले की जाँच शुरुआती लेवल पर है। ऐसे में नहीं कहा जा सकता है कि कौन इसमें शामिल था और कौन नहीं। आर्यन खान के वकील का तर्क था कि उनके पास न तो कोई कैश मिला है और न ही ड्रग्स बरामद हुआ है। ऐसे में उन्हें अन्य आरोपितों के साथ जोड़कर नहीं देखा जा सकता।

इससे पहले बुधवार (अक्टूबर 13, 2021) को अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन की जमानत याचिका का विरोध करते हुए NCB ने कहा था कि उनके संबंध उन लोगों से हैं जो अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्स से जुड़े हैं।  एजेंसी ने कहा था कि ये साफ है कि आरोपित आचित कुमार और शिवराज हरिजन ने आर्यन खान और अरबाज मर्चेंट को चरस पहुँचाए। आर्यन और अरबाज एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। पिछले दिनों एनसीबी ने दावा किया था कि पूछताछ में आर्यन ने 4 साल से ड्रग्स लेने की बात स्वीकार की थी। ‘आज तक’ की खबर के अनुसार, आर्यन खान सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि यूके और दुबई के अलावा कई अन्य देशों में भी जाकर ड्रग्स का सेवन कर चुके हैं।

कर्नाटक में बनेगा धर्मांतरण विरोधी कानून: ईसाई मिशनरियों का डेटा जुटाएगी सरकार, भाजपा विधायक ने कहा- 40% चर्च का रिकॉर्ड नहीं

कर्नाटक में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने अधिकारियों को राज्य में संचालित आधिकारिक और गैर-आधिकारिक ईसाई मिशनरियों का सर्वेक्षण करने का आदेश दिया है। यह आदेश ऐसे समय में आया है, जब कर्नाटक जबरन मतांतरण की शिकायतों के जवाब में मतांतरण विरोधी कानून लाने पर विचार कर रहा है। समिति के सदस्यों ने धर्मांतरण करने वाले लोगों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं को खत्म करने का सुझाव दिया।

पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण समिति की बुधवार (13 अक्टूबर, 2021) को विकास सौधा में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। विधायक गूलीहट्टी शेखर, पुत्तरंगा सेट्टी, बीएम फारूक, विरुपाक्षप्पा बेल्लरी, अशोक नाइक और अन्य ने बैठक में भाग लिया और मामले पर चर्चा की। समिति ने मिशनरियों को सरकार से मिलने वाली सुविधाओं और ईसाई मिशनरियों के रजिस्ट्रेशन पर भी चर्चा की।

समिति के सदस्यों ने मतांतरण करने वालों की सरकारी सुविधाएँ वापस लेने का सुझाव दिया। भाजपा विधायक गूलीहट्टी शेखर ने कहा कि शुरुआती जानकारी के मुताबिक, राज्य में चल रहे 40 प्रतिशत चर्च अनौपचारिक हैं। इस संबंध में आँकड़े जुटाए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने फिर से कहा कि सरकार राज्य में जबरन मतांतरण गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने हेतु धर्मांतरण विरोधी कानून लाएगी। उन्होंने कहा, “सरकार देश में विभिन्न राज्यों द्वारा इस संबंध में लागू कानूनों का अध्ययन कर रही है। इस संबंध में जल्द ही कर्नाटक में कानून लागू किया जाएगा।”

भाजपा विधायक गूलीहट्टी शेखर ने मानसून सत्र के दौरान धर्म परिवर्तन का मुद्दा विधानसभा में उठाया था। उन्होंने दावा किया था कि उनकी माँ को उनकी जानकारी के बिना परिवर्तित किया गया था। यही नहीं, ईसाई मिशनरी मतांतरण गतिविधियों पर सवाल उठाने वाले लोगों पर झूठे अत्याचार और बलात्कार के आरोप लगवा देते थे।
हालाँकि, सोमवार (11 अक्टूबर 2021) को भाजपा विधायक की माँ सहित चार परिवारों ने ईसाई धर्म से हिंदू धर्म में वापसी की।

शेखर ने मीडिया से बातचीत में बताया, “मेरी माँ सहित चार परिवार के सदस्यों ने ईसाई धर्म का पालन करने के बाद घर वापसी की है। इन्होंने आखिरकार अपनी गलती सुधार ली है।” उन्होंने बताया हिंदू धर्म में वापसी करने वालों ने आज मंदिर में पहले पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने अपने फैसले पर खुशी व्यक्त की। पूर्व मंत्री का कहना था कि इन लोगों को बहला-फुसलाकर इनकी आस्था के साथ खिलवाड़ किया गया, लेकिन अब इन्होंने फिर से हिंदू धर्म अपना लिया है।