राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के दो दिन के दौरे पर जाने वाले हैं। इस साल वह लद्दाख के द्रास इलाके में जवानों के साथ दशहरा मनाएँगे। यानी इस बार राष्ट्रपति दिल्ली में होने वाले दशहरा समारोह में भाग नहीं लेंगे। वहीं, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू की अरुणाचल प्रदेश की हालिया यात्रा पर चीन ने आपत्ति जताई है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजयान ने कहा, “सीमा मुद्दे पर चीन की स्थिति सुसंगत और स्पष्ट है। चीनी सरकार कभी भी भारतीय पक्ष द्वारा एकतरफा और अवैध रूप से स्थापित तथाकथित अरुणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं देती है। वह भारतीय नेताओं की यात्राओं का कड़ा विरोध करती है।” इस पर भारत ने चीन को करारा जबाव देते हुए पलटवार किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने बुधवार (13,अक्टूबर 2021) को कहा, ”हम चीन की बेतुकी टिप्पणियों को खारिज करते हैं। अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। भारतीय नेता नियमित रूप से राज्य की यात्रा करते हैं, जैसा कि वे भारत के किसी अन्य राज्य में करते हैं।”
रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति 14 अक्टूबर को लेह में सिंधु घाट पर सिंधु दर्शन पूजा में शामिल होंगे। गुरुवार (15 अक्टूबर) की शाम वह उधमपुर में सेना के जवानों से मुलाकात करेंगे। दशहरे के मौके पर राष्ट्रपति द्रास में स्थित कारगिल वॉर मेमोरियल जाएँगे और श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इस दौरान राष्ट्रपति सेना के अधिकारियों और जवानों से भी बातचीत करेंगे।
President Ram Nath Kovind will visit Ladakh and Jammu & Kashmir on Oct 14 & 15.
On 14th Oct, he will perform Sindhu Darshan puja at Sindhu Ghat, Leh & also interact with troops at Udhampur. On Oct 15, he will pay tributes at the Kargil War Memorial in Drass: Rashtrapati Bhawan pic.twitter.com/QlbjOvKC0r
बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों में घाटी में आतंकी गतिविधियों में वृद्धि देखी गई है। आतंकियों ने अल्पसंख्यक समुदाय के कई लोगों की हत्या भी कर दी है। ऐसे में जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति की यात्रा जवानों के लिए बूस्टर साबित हो सकती है।
गौरतलब है कि उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू 9 अक्टूबर को अरुणाचल प्रदेश के दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने राज्य विधानसभा के स्पेशल सत्र को संबोधित करते हुए अरुणाचल प्रदेश की विरासत पर विस्तार से चर्चा की थी। उन्होंने कहा था कि यहाँ अब हाल के वर्षों में परिवर्तन की दिशा और विकास की गति में तेजी से परिवर्तन देखने को मिल रहा है। इसको लेकर चीन बुरी तरह बिफर गया और कहा उसने अरुणाचल प्रदेश को कभी भी राज्य के तौर पर मान्यता नहीं दी है।
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में ‘किसान प्रदर्शनकारियों’ की हिंसा में जो लोग मारे गए थे, उनमें हरिओम मिश्रा और श्याम सुंदर निषाद भी हैं। ये दो ऐसे नाम हैं, जिनके बारे मेनस्ट्रीम मीडिया में ज्यादा कुछ नहीं आया और इनके छोटे किसान होने के बावजूद राकेश टिकैत जैसे नेताओं ने इनके लिए आवाज़ नहीं उठाई। लेकिन, दो परिवारों ने अपने इकलौते कमाऊ पूत खो दिए। दो माँओं के आँचल से उनके लाल छिन गए।
खून से लथपथ, हाथ जोड़े श्याम सुंदर निषाद: वीडियो भूल नहीं पाती हैं माँ
सबसे पहले बात करते करते हैं श्याम सुंदर निषाद की। उनका वीडियो आप सब ने देखा होगा। उनकी पत्नी उस वीडियो को नहीं देख पा रहीं। ये उनके अंतिम समय का वीडियो है, जब वो ‘किसान आंदोलनकारियों’ से अपने जान की भीख माँग रहे हैं। सोचिए, उस माँ पर क्या बीत रही होगी जिसने इस तरह अपने बेटे का वीडियो देखा होगा जिसमें वो खून से लथपथ हाथ जोड़े मिन्नतें कर रहे और हत्यारे उनकी पिटाई कर रहे हैं।
श्याम सुंदर निषाद की माँ का नाम फूलमती है। बेटे के बारे में बात शुरू होते ही वो फूट-फूट कर रोने लगीं। फिर वो बताती हैं कि कैसे उनके बेटे के शरीर से लगातार खून बह रहा था और लाठी-डंडे चल रहे थे। फिर वो बताती हैं कि कैसे हिंसा करने वाले उनसे जबरन कहवा रहे हैं कि मंत्री ने उन्हें किसानों को कुचलने के लिए भेजा है, जबकि वो बार-बार इनकार कर रहे हैं। वीडियो इतना तक ही था।
फूलमती कहती हैं कि इसके बाद वो कुछ नहीं देख पाईं क्योंकि वीडियो आना बंद हो गया। वो बार-बार सिर्फ उसी वीडियो को याद करती हैं, जिसमें खून से लथपथ श्याम सुंदर निषाद हाथ जोड़ कर जान की भीख माँग रहे हैं। वो याद करती हैं कि कैसे उनके बेटे पर लाठी-डंडों और तलवार से हाथ-पाँव तोड़ दिए गए और वो बार-बार कहते रहे कि मंत्री ने उन्हें नहीं भेजा है। वो कई बार इस वीडियो की बात करती हैं, इसे भूल नहीं पातीं।
वो कहती हैं कि सब ने वीडियो देखा है, उसमें जो लोग उन्हें मार रहे हैं वही तो हत्यारे हैं। वो कहती हैं, “मेरा बेटा हाथ जोड़ कर जान की भीख माँग रहा। हल्ला-गुल्ला मचा हुआ है। वीडियो में हमने देखा है। वीडियो तो सबने देखा है। टीवी पर भी आया है। वो कहते रहे कि वो स्वागत के लिए (उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के) जा रहे थे। मेरे बेटे को बहुत दर्द दिया है। वो खुशामद करते थे, उन्होंने नहीं छोड़ा। सिर से खून चल रहा। हाथ खून से रंगे हुए हैं।”
हरिओम मिश्रा: बेटे की मौत को माँ ने कर लिया है कबूल, लेकिन जिस तरह से मरे…
ये श्याम सुंदर निषाद की माँ की पीड़ा थी। अब बात करते हैं हरिओम मिश्रा की। उनकी माँ कहती हैं कि उनका परिवार भी तो किसान है, कृषि के अलावा उनके पास और है क्या? उन्होंने अपने मन को मना लिया है कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा। लेकिन, जिस तरीके से हत्या हुई उसे वो नहीं भूल पा रहीं। वो कहती हैं कि गोली मार देते, गर्दन दबा देते, लेकिन उन्हें तलवार और भाला भोंका गया है, तब भी कोई सबूत नहीं मिल रहा कि क्या हुआ।
वो कहती हैं कि वो तो भला एक माँ हैं जिन्होंने अपना बेटा खोया है, लेकिन हरिओम मिश्रा के लिए तो पूरा गाँव रो रहा है। वो बताती हैं कि कैसे किसी को विश्वास तक नहीं होता कि हरिओम चला गया। वो कहती हैं, “मेरा बेटा कहता था कि माँ हम तो मजदूर हैं, जहाँ थोड़े पैसे मिल जाते हैं वहाँ रहते हैं। बच्चे तक उनसे प्रेम करते थे। ‘हरिओम चाचू’ कहते थे। उसके लिए सब लोग रो रहे हैं। उसके लिए सब दुःखी हैं।”
बता दें कि हरिओम मिश्रा के घर की हालत देख कर ऐसा लगता है, जैसे ये कोई पुराना गोदाम हो जो वर्षों से खाली पड़ा हो। ऊपर एलवेस्टर की छत है। घर पर लत्तियाँ और झाड़ियाँ उगी हुई हैं। टीन के दरवाजे हैं। अंदर जाने पर हरिओम मिश्रा के भाई अपने पिता को कपड़े पहनाते हुए मिलते हैं। बीमार और वृद्ध पिता उठ-बैठ भी नहीं सकते। उन्हें शौच कराने से लेकर उनकी सेवा के अधिकर कार्य हरिओम खुद करते थे।
(ये ग्राउंड रिपोर्ट ऑपइंडिया के लिए आदित्य राज भारद्वाज ने कवर की है)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (13 अक्टूबर 2021) को देश की प्रगति को और अधिक गति देने के लिए ‘प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना’ की शुरुआत की। इस मौके पर उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आज दुर्गाष्टमी है, पूरे देश में आज शक्ति स्वरूपा का पूजन हो रहा है। शक्ति की उपासना के इस शुभ अवसर पर देश की प्रगति की गति को भी शक्ति देने का शुभ कार्य हो रहा है।
Prime Minister @narendramodi launches PM GatiShakti – National Master Plan for multi-modal connectivity#PMGatiShakti to break departmental silos and institutionalize holistic planning for stakeholders across major infrastructure project pic.twitter.com/Cm9UT9p8xH
पीएम मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान 21वीं सदी के भारत की गति को शक्ति देगा। अगली पीढ़ी के इंफ्रास्ट्रक्चर और ‘मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी’ को इस राष्ट्रीय योजना से गति शक्ति मिलेगी। गति शक्ति महाअभियान के केंद्र में भारत के लोग, भारत की इंडस्ट्री, भारत का व्यापार जगत, भारत के मैन्यूफैक्चरर्स और भारत के किसान हैं।
पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि इस योजना से सभी प्रोजेक्ट अब तय समय पर पूरे होंगे और टैक्स का एक भी पैसा बर्बाद नहीं होगा। इस दौरान पीएम ने कॉन्ग्रेस पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हमारे देश में इंफ्रास्ट्रक्चर का विषय ज्यादातर राजनीतिक दलों की प्राथमिकता से दूर रहा है। ये उनके घोषणा पत्र में भी नजर नहीं आता है। अब तो ये स्थिति आ गई है कि कुछ राजनीतिक दल, देश के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर आलोचना करने में गर्व महसूस करते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि 2014 से पहले के 5 सालों में सिर्फ 3,000 किमी रेलवे का बिजलीकरण हुआ था। बीते सात सालों में हमने 24 हजार किमी से भी अधिक रेलवे ट्रैक का बिजलीकरण किया है।
2014 से पहले के 5 सालों में सिर्फ 3,000 किलोमीटर रेलवे का बिजलीकरण हुआ था।
बीते 7 सालों में हमने 24 हजार किलोमीटर से भी अधिक रेलवे ट्रैक का बिजलीकरण किया है।
गति शक्ति योजना रेल और सड़क सहित 16 मंत्रालयों को जोड़ने वाला एक डिजिटल मंच है। इस योजना का उद्देश्य बुनियादी ढाँचा संपर्क परियोजनाओं की एकीकृत योजना बनाना और समन्वित कार्यान्वयन को बढ़ावा देना है। इसके तहत 16 मंत्रालयों और विभागों ने उन सभी परियोजनाओं को जीआईएस मोड में डाल दिया है, जिन्हें 2024-25 तक पूरा किया जाना है। इसमें रेलवे, सड़क परिवहन, पोत, आईटी, टेक्सटाइल, पेट्रोलियम, ऊर्जा, उड्डयन जैसे मंत्रालय शामिल हैं।
योजना के फायदे
गति शक्ति योजना भारत के लिए एक राष्ट्रीय मास्टर प्लान होगा। यह समग्र बुनियादी ढाँचे की नींव रखेगा। वर्तमान में परिवहन के साधनों और अलग-अलग विभाग के इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के बीच कोई समन्वय नहीं है, लेकिन गति शक्ति योजना इन सभी बाधाओं को दूर करने का कार्य करेगी।
It is important for India’s development that all departments linked to infrastructural growth come together and use each other’s collective power.
This approach has given unprecedented speed to India in the last few years.
इसके अलावा पीएम गति शक्ति योजना उद्योगों की कार्य क्षमता बढ़ाने में मदद करेगा, स्थानीय निर्माताओं को बढ़ावा मिलेगा, उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगा और भविष्य के आर्थिक क्षेत्रों के निर्माण के लिए नई संभावनाओं को विकसित करने में भी मदद करेगा।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2021 को दिल्ली के लाल किले से देश में रोजगार को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों रुपए की गति शक्ति योजना की घोषणा की थी। देश के इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए 100 लाख करोड़ रुपए की गति शक्ति योजना से देश में लाखों युवाओं को रोजगार के मौके उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
कॉन्ग्रेस पार्टी की लूट की कहानी बयाँ करता एक वीडियो सामने आया है, जिसके बाद पार्टी के अंदर हड़कंप मच गया है। यह वीडियो कर्नाटक कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डीके शिव कुमार को लेकर है। वीडियो में कॉन्ग्रेस के ही दो नेता आपस में बात कर रहे हैं, जिसमें मीडिया कोऑर्डिनेटर सली को यह कहते सुना जा सकता है कि डीके शिवकुमार 10-12 प्रतिशत घूस लेते हैं।
Video proof for DK Shivkumar loot exposed by Salim Ahmed working president of KPCC pic.twitter.com/UxF3yOcBUQ
रिपोर्ट के मुताबिक, इस वीडियो के सामने आने के बाद प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी ने वीएस उग्रप्पा को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है तो वहीं सलीम को 6 साल के लिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। बहरहाल इस वीडियो के वायरल होने के बाद बीजेपी भी उनपर हमलावर हो गई है।
क्या है वीडियो में
कॉन्ग्रेस के पूर्व लोकसभा सांसद वीएस उग्रप्पा और पार्टी के मीडिया कोऑर्डिनेटर सलीम अहमद आपस में बातें कर रहे होते हैं। इसमें सलीम अहमद उग्रप्पा से आरोप लगाते हुए कहते हैं कि डीके शिवकुमार 10-12 फीसदी का घूस लेते हैं। इससे उनके सहयोगियों ने करोंड़ों रुपए की संपत्ति खरीदी है। सलीम आगे कहते हैं कि पहले शिवकुमार केवल 6-8 प्रतिशत ही लेते थे, लेकिन अब उन्होंने 10-20 फीसदी लेना शुरू कर दिया है। उन्होंने इसे महाघोटाला करार देते हुए कहा कि जितना खोदोगे उतना ही निकलेगा। डीके शिवकुमार के सहयोगी मुलगुंड ने ही 50-100 करोड़ रुपए कमा लिए हैं।
सलीम ने शिवकुमार पर शराब पीने का आरोप लगाते हुए कहा कि वो बात करते हुए हकलाते हैं। मुझे शक है कि वो शराब पीकर आते हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले दोनों नेताओं की रिकॉर्ड इस बातचीत पर फिलहाल डीके शिवकुमार ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि अनुशासन समिति इस मामले में निर्णय लेगी। वहीं कॉन्ग्रेस ने इस मामले में कहा है कि सलीम भाजपा द्वारा लगाए गए आरोपों के बारे में बातें कर रहे थे।
डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के बाद अपने पहले विदेशी दौरे पर सऊदी अरब गए थे, जहाँ उन्हें वहाँ के रॉयल परिवार से जम कर गिफ्ट्स मिले। इनमें वो कपड़े भी शामिल हैं, जो बाघ और चीता के फर से बने हुए थे। साथ ही एक हैंडल वाला छुरा भी दिया था, जो देखने में हाथी के दाँत जैसा लग रहा था। व्हाइट हाउस के एक वकील ने इसे पशु हत्या विरोधी अधिनियम ‘Endangered Species Act‘ का उल्लंघन बताया था।
हालाँकि, डोनाल्ड ट्रम्प ने विदेश से मिले इन गिफ्ट्स के बारे में खुलासा नहीं किया। ट्रम्प प्रशासन ने इन गिफ्ट्स को ‘जनरल सर्विसेज एडमिनिस्ट्रेशन’ को दे दिया, जबकि इसे जंगली जीवों से जुड़ी सरकारी एजेंसी को दिया जाना चाहिए था। एजेंसी ने इस साल इन गिफ्ट्स को जब्त कर लिया। ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की खबर के अनुसार, जाँच में पता चला कि उन कपड़ों में चीते और बाघ के फर नकली हैं।
अरबों डॉलर की संपत्ति वाली सऊदी अरब की रॉयल फैमिली ने चीते और बाघ के नकली फर से बने कपड़े डोनाल्ड ट्रम्प को गिफ्ट कर दिए। बताया जा रहा है कि कई विदेशी कार्यक्रमों में डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा नियुक्त अधिकारीगण गिफ्ट्स अपने साथ लेकर चलते बने और सरकार को नहीं बताया। 5800 डॉलर (4.37 लाख रुपए) की वक व्हिस्की की बोतल तत्कालीन विदेश मंत्री माइक पोम्पियो को मिला था, जिसका अब तक थाह नहीं चला है।
Saudi gifted fake furs to former President Trump on his first state visit https://t.co/96XuNpTAZ0
आंतरिक विभाग के प्रवक्ता टायलर चेरी ने जानकारी दी, “वाइल्ड लाइफ इंस्पेक्टर और विशेष एजेंटों ने जाँच में पाया कि फरों की परतें बाघ और चीता के पैटर्न की नकल करने के लिए रंगी हुई थी और इसमें संरक्षित प्रजातियाँ शामिल नहीं थीं। सऊदी अरब सरकार के लिए अब ये एक शर्मिंदगी का विषय बन गया है। यहाँ तक कि जी-7 की बैठक में विदेशी नेताओं के लिए रखे गए कुछ गिफ्ट्स भी गायब हैं।
बांग्लादेश के कॉमिला जिले ननुआ दिघी में दुर्गा पूजा के पंडाल में मुस्लिम भीड़ द्वारा जम कर तोड़फोड़ मचाई गई। प्रतिमाओं को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। किसी असामाजिक तत्व ने वहाँ चल रही दुर्गा पूजा को बदनाम करने के लिए कुरान के अपमान की अफवाह फैला दी, जिसके बाद ये घटना हुई। लेखिका तस्लीमा नसरीन ने बताया कि किसी हिन्दू विरोधी ने माँ दुर्गा के चरणों में चुपचाप कुरान रख कर इस तस्वीर को वायरल कर दिया।
— Bangladesh Hindu Unity Council (@UnityCouncilBD) October 13, 2021
‘बांग्लादेश हिन्दू यूनिटी काउंसिल’ ने इस सम्बन्ध में जानकारी दी। संस्था ने कॉमिला के सभी हिन्दुओं को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्हें कहा गया है कि वो मंदिरों में साथ में रहें। इस घटना को लेकर BHUC पुलिस से भी संपर्क कर रहा है, ताकि हिन्दुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। तस्वीरों में देखा जा सकता है कि किस तरह माँ दुर्गा की प्रतिमा तोड़ डाली गई और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को भी खंडित कर दिया गया।
Some anti-Hindu Muslim fanatics secretly put the Quran on the feet of Hanuman statue at Durga puja pandal in Comilla, Bangladesh. It is just for an excuse to attack Hindus in the name of hurting religious feelings. Hope govt will save the minority community.
तस्वीरों में आप देख सकते हैं कि किस तरह पूरे पंडाल को ही उखाड़ कर तहस-नहस कर दिया गया। वहीं ये भी कहा जा रहा है कि कुरान की जिस तस्वीर को लेकर ये हिंसा हुई, वो एडिटेड है और फोटो को एडिट कर के जानबूझ कर वायरल किया गया था। ‘बांग्लादेश हिन्दू यूनिटी काउंसिल’ ने इन तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा, “पूजा हो गया। हम कभी 2021 के दुर्गा पूजा को नहीं भूल सकते।”
— Bangladesh Hindu Unity Council (@UnityCouncilBD) October 13, 2021
इससे पहले खबर आई थी कि कैसे बांग्लादेश की राजधानी ढाका के टीपू सुल्तान रोड स्थित दुर्गा मंदिर में हिन्दुओं को स्थानीय मुस्लिमों द्वारा नवरात्रि की पूजा करने से रोक दिया गया। स्थानीय इस्लामी कट्टरपंथियों ने नवरात्रि के दौरान शंखनिधि मंदिर में हिन्दुओं को माँ दुर्गा की पूजा नहीं करने दी। हालाँकि, वहाँ की सरकार ने दुर्गा पूजा के लिए हिन्दुओं को एक अस्थायी जगह दे दी है। इस मंदिर का निर्माण कोलकाता के लालमोहन साहा ने सन् 1921 में करवाया था।
राजस्थान के कुचामन में एक कोचिंग जाने वाली छात्रा के साथ दुष्कर्म मामले में पुलिस ने 2 आरोपितों को पकड़ा। इनमें एक का नाम असराज है और दूसरे का नाम इकबाल पता चला है। पुलिस ने जाँच में पाया कि लड़की से दुष्कर्म करने वाला इकबाल क्षेत्र का हिस्ट्रीशीटर है जिसने अपनी पहचान शैलेश बता रखी थी। इस पूरे केस में राजस्थान पुलिस की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। कहा जा रहा है आरोपित की पुलिस से पहचान थी। उसने पीड़िता को बताया भी हुआ था कि उसकी थाने में खूब चलती है।
9 अक्टूबर को दैनिक नवज्योति में प्रकाशित संबंधित खबर
मामले में पीड़ित पक्ष ने बताया कि उनकी बेटी सिटी में एक इंस्टिट्यूट पर पढ़ने के लिए जाने का कहकर घर से निकली। उसके बाद शाम को सूचना मिली कि वह कुचामन सिटी के होटल के पास बेहोशी की हालत में गिरी हुई है, जब उसे घर लाया गया तो वो होश में नहीं थी। पीड़िता ने अपने घरवालों को बताया कि उसे ‘शैलेश’ अग्रवाल और असराज कार में ले गए थे और कोल्डड्रिंक में कुछ मिलाकर पिला दिया। वह होश में नहीं थी तो उसे सीट पर लिटाया गया और जब होश में आई तो उसकी हालत खराब थी। पीड़िता के घरवालों ने मामले में अपहरण और रेप का आरोप मढ़ा। साथ ही कहा कि आरोपितों ने उसकी वीडियो भी बनाई है।
दैनिक भास्कर में प्रकाशित संबंधित रिपोर्ट
रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत में इस केस को दर्ज नहीं किया गया था, लेकिन बाद में इस पर कार्रवाई शुरू हुई और पीड़िता द्वारा बताए गए बिंदुओं (फोन कॉल डिटेल आदि) पर कार्रवाई करते हुए जाँच अधिकारी ने दोनों आरोपितों को पकड़ा। दोनों लड़की को पहले से जानते थे। इकबाल, शैलेश बनकर उससे फोन पर बातें कर रहा था। घटना वाले दिन दोनों लड़की के जन्मदिन के बहाने उससे मिले थे।
6 अक्टूबर को लड़की के साथ दुष्कर्म को अंजाम दिया गया। मुख्य आरोपित के बारे में बता दें वह स्पा चलाता था और दूसरा आरोपित डांस क्लास देता था। दोनों ने लड़की के जन्म दिन के 4 दिन बाद इस वारदात को अंजाम दिया और कुछ पुलिसकर्मियों ने मामले को दर्ज करना भी जरूरी नहीं समझा। बाद में जब गिरफ्तारी हुई तो वही पुलिसकर्मी जाँच टीम का हिस्सा बन गए जिसके कारण स्थानीय लोगों में गुस्सा भर गया और बवाल देखते हुए आरोपितों का बचाव करने वाले पुलिसवालों को सस्पेंड किया गया।
दूसरी ओर छानबीन में पता चला कि शैलेश का नाम इकबाल है जो कि क्षेत्र का हिस्ट्रीशीटर है और पहले से कई मुकदमों में आरोपित है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि उनकी बेटी का फोन खो गया था। ऐसे में डांस सिखाने वाले असराज ने उसे इकबाल से बात करने को कहा और बोला कि मोबाइल ढुँढवा देगा। पीड़िता ने जब उसे संपर्क किया तो उसने कहा कि उसकी पुलिस में खूब चलती है वह मोबाइल ढुँढवा देगा।
ऑस्ट्रेलियन फेडरल ऑफ इस्लामिक काउंसिल्स (AFIC) ने 16 अक्टूबर 2021 को होने वाले लाइव वेबिनार में अपनी बात रखने के लिए दो तालिबानी कट्टरपंथियों को वक्ताओं के रूप में आमंत्रित किया है। इस्लामिक काउंसिल के इस कदम का अफगान शरणार्थियों और ऑस्ट्रेलियाई दिग्गजों ने विरोध किया है।
अफगान तालिबान के जिन दो लोगों को आमंत्रित किया गया है, उनमें शेख सुहैल शाहीन और शेख सैयद अब्दुल बशीर साबरी शामिल है। खास बात यह है कि इससे पहले जब अफगानिस्तान अमेरिकी सेना के जाने के बाद तालिबान ने वहाँ पर कब्जा कर लिया था तो शाहीन का ऑस्ट्रेलियाई और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इंटरव्यू लिया था।
साभार: एएफआईसी वेबिनार
AFIC द्वारा जारी बयान के अनुसार, वे वेबिनार के लिए ‘स्पीकरों के प्रसिद्ध पैनल’ को एक साथ लाए हैं। यदि उन पर विश्वास किया जाए तो ये पैनल ‘अफगानिस्तान के भविष्य और हमारी भूमिका पर चर्चा करेगा, भले ही हम हाल के घटनाक्रमों के पक्ष में हों या खिलाफ।’
शरणार्थियों ने जताई चिंता
अफगानिस्तान के हजारा मुस्लिम और शरणार्थी वकील सिताराह मोहम्मदी ने इसे ‘पूरी तरह से गलत’ कहा। उन्होंने कहा कि यह बहुत ही भयावह लग रहा है कि तालिबान के कट्टरपंथियों को ऑस्ट्रेलिया में इस्लामी समुदाय को संबोधित करने के लिए एक मंच मिल रहा है, जहाँ वह तालिबानी प्रचार करेगा।
The Hazaras, as long persecuted religious minority are currently facing forced land evictions and ethnic cleansing at the hands of the Taliban in Afghanistan. This event would allow the Taliban to advance its push for global legitimacy, & strengthen its oppressive rule.
उन्होंने आगे कहा, “हजारा समुदाय का सदस्य रहते हुए मेरा परिवार और मैं 1990 के दशक के अंत में तालिबान के शासन से जान बचाकर भाग गए थे। इस तरह के प्रमुख कार्यक्रम में इस तरह के चेहरों को देखना काफी दर्दनाक है। हमारे लोगों ने उनके हाथों इतनी भयानक पीड़ा झेली है और आज भी ऐसा ही कर रहे हैं।”
मोहम्मदी के अनुसार, इस आयोजन से तालिबान को वैश्विक वैधता प्राप्त करने में मदद मिलेगी। इसका असर यह होगा कि लॉक किए गए अंतरराष्ट्रीय धन खोल दिए जाएँगे, जिससे तालिबानी शासन के तहत अफगानिस्तान पर दमनकारी शासन मजबूत होगा। उन्होंने ये भी कहा, “यह उन सदस्यों को पैनल में रखने के लिए वैध बनाता है।”
तालिबान को मंच देना खतरनाक
लिबरल सदस्य हर्बर्ट फिल थॉम्पसन AFIC के इस कदम का विरोध करते हुए इसे गलत बताया और कहा कि यह दिग्गजों को नाराज करेगा। थॉम्पसन अफगानिस्तान में जब निजी तौर पर सेना के लिए काम कर रहे थे तो एक बार आईईडी विस्फोट के कारण वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्होंने कहा, “तालिबान के इन दो लोगों को मंच नहीं दिया जाना चाहिए। तालिबान एक गैर मान्यता प्राप्त सरकार है।”
उन्होंने आगे कहा, “हमने युवा लड़कियों को स्कूल जाने से रोकते हुए देखा है। हम देखते हैं कि लड़कियों और महिलाओं को संपत्ति के रूप में माना जाता है। वे बर्बर हैं। इस संगठन को ऑस्ट्रेलिया में मंच नहीं दिया जाना चाहिए।”
संघीय संसद की खुफिया और सुरक्षा समिति के अध्यक्ष सीनेटर जेम्स पैटर्सन ने भी इस कदम को लेकर चेतावनी दी है। उन्होंने आशंका जताई कि यह उन्हें (तालिबान) ‘वैधता के अपने दावों का समर्थन करने’ की अनुमति देगा। पैटर्सन ने आगे कहा, “इसके बजाय हमें उन लाखों अफगान लड़कियों और महिलाओं के लिए स्वतंत्रता के उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए जो अब हिंसा और क्रूरता के इतिहास वाले शासन के नियंत्रण में रह रही हैं।”
एनएसडब्ल्यू लेबर की पुलिस और आतंकवाद विरोधी प्रवक्ता वॉल्ट सिकॉर्ड ने भी इस तरह के आयोजन का विरोध किया। उन्होंने कहा, “यह घटना कट्टरता के रोड मैप की तरह दिखती है। मुझे इस बात से बिल्कुल नाराजगी है कि ऑस्ट्रेलिया में कोई भी संगठन तालिबान और उनके आदिम विचारों को एक मंच प्रदान करेगा।”
AFIC ने घटना को सही ठहराया
AFIC के अध्यक्ष डॉ रतेब जेनिद ने कहा कि उन्होंने तालिबान के सदस्यों को अफगानिस्तान में सत्तारूढ़ शासन के रूप में उनके इरादों के बारे में सुनने के लिए आमंत्रित किया था। उन्होंने दावा किया कि कई ऑस्ट्रेलियाई मुस्लिमों के प्रियजनों के साथ अफगानिस्तान में जो कुछ भी हो रहा है उससे चिंतित थे। उन्होंने कहा, “हमारे पास अफगान पृष्ठभूमि के कई परिवार हैं जो अफगानिस्तान में अपने प्रियजनों के लिए चिंतित हैं, और वे वहाँ की सरकार की मंशा के बारे में सुनना चाहते हैं। हम यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे कि हम अपने युवाओं को अफगानिस्तान न जाने का संदेश दें।”
तालिबान को मंच देने के कदम को सही ठहराते हुए जेनिद ने कहा, “तालिबान को पूरे इंटरनेट पर हजारों प्लेटफॉर्म दिए गए हैं, उन्हें हमें एक मंच देने की आवश्यकता नहीं है।” इस प्रस्तावित कार्यक्रम के लिए जेनिद, ऑस्ट्रेलिया के नेशनल ग्रैंड मुफ्ती, इमाम अब्दुल कुद्दूस अल अजहरी और इस्लामी कानूनी विद्वान प्रोफेसर मोहम्मद नकीब जान इसमें एक वक्ता के तौर पर शामिल होंगे।
AFIC के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कीसर ट्रेड ने अपने इस फैसले का ही बचाव किया और तालिबान को ‘अफगानिस्तान की सरकार के रूप में मान्यता प्राप्त’ कहा। उन्होंने कहा कि AFIC ने युवा ऑस्ट्रेलियाई मुस्लिमों को ‘गलत कारणों’ से अफगानिस्तान की यात्रा करने से रोकने की माँग की, क्योंकि पहले लोग इस्लामिक समूहों में शामिल होने के लिए इराक और सीरिया की यात्रा करते थे।
उन्होंने दावा किया कि AFIC का मानना था कि तालिबान युवा ऑस्ट्रेलियाई मुस्लिमों को अफगानिस्तान की यात्रा नहीं करने के लिए मनाने में उनका समर्थन करेगा। उन्होंने आगे कहा, “हम अपने बच्चों को विदेशी मामलों में शामिल नहीं देखना चाहते हैं और हम निश्चित रूप से उन्हें सुपरमैक्स जेल में भी नहीं देखना चाहते हैं।”
लव जिहाद पर आधारित एक नुक्कड़ नाटक का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो सुदर्शन न्यूज ने अपने ट्विटर अकाउंट से मंगलवार (12 अक्टूबर 2021) को शेयर किया। वीडियो में एक लड़की सेल्फी लेने के लिए एक लड़के के पास जाती है। लड़के ने सेल्फी क्लिक कराने से पहले उसे प्रपोज किया, जिसके लिए लड़की मान गई। जब लड़की फोटो क्लिक करने लगी तभी लड़के ने अपनी ‘टोपी’ निकाल कर पहन ली।
वीडियो में आगे दिखाया गया है कि जैसे ही लड़की ने युवक के सिर पर टोपी देखी, उसे खुद से दूर कर दिया। लड़के ने उसे थप्पड़ मारा और जब लड़की ने उसे थप्पड़ मारने की कोशिश की, तो उसे जमीन पर गिरा लड़का उसका गला घोंटने लगा। वीडियो में एक लड़की एक तख्ती लिए हुए दिखाई दे रही है, जिस पर ‘लव जिहाद’ लिखा हुआ है और सामने ‘X’ का निशान है। इसके जरिए लव जिहाद को लेकर जागरुकता फैलाने और इसका विरोध करने का संदेश देने की कोशिश की गई। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इस नुक्कड़ नाटक की सराहना की है। उनका मानना है कि इस तरह के पहल से लव जिहाद के बारे में जानकारी फैलेगी।
हिंदू समाज को दीमक की तरह संक्रमित कर रहे उन्मादी वायरस #LoveJihad के विरुद्ध ये थीम प्रशंसनीय है, वंदनीय है.
सभी गरबा/डांडिया व दुर्गा पूजा पांडालों में ऐसे थीम बनाए जाएं ताकि न सिर्फ सनातन की पवित्रता बची रहे बल्कि हमारी बहन बेटियां भी लव ज़िहाद से बची रहें. pic.twitter.com/yVz6P7K20G
एक ट्विटर यूजर शिवाजी क्रांति ने कहा, “गरबा/डांडिया हमारे हिन्दू संस्कृति के सांस्कृतिक और शौर्य की प्राचीन परम्परा का वो पवित्र हिस्सा है, जिसे आने वाली पीढ़ी को भी उसके मूल अवधारणा में बिना परिवर्तन किए आगे बढ़ाना चाहिए। ऐसी प्रस्तुति अवश्य ही हमारी बच्चियों को जिहाद का हिस्सा बनने से रोकने में सहायक होगी।”
गरबा/डांडिया हमारे हिन्दू संस्कृति के सांस्कृतिक और शौर्य की प्राचीन परम्परा का वो पवित्र हिस्सा है, जिसे आने वाली पीढ़ी को भी उसके मूल अवधारणा में बिना परिवर्तन किए आगे बढ़ाना चाहिए। ऐसी प्रस्तुति अवश्य ही हमारी बच्चीयों को जिहाद का हिस्सा बनने से रोकने में सहायक होगी।#लव_जिहादhttps://t.co/E9g0KgA73n
बता दें कि लिबरल लोगों का गिरोह ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद) को केवल मुसलमानों को टारगेट करने के लिए एक साजिश मानता है, जबकि आए दिन लव जिहाद के मामले सामले आते रहते हैं।
कश्मीर घाटी में आतंकियों का सफाया जारी है। बुधवार (13, अक्टूबर, 2021) को सुरक्षा बलों ने पुलवामा के त्राल इलाके में हुए एनकाउंटर में जैश-ए-मोहम्मद के टॉप कमांडर शम सोफी को मार गिराया। यह सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता है। अभी भी यहाँ मुठभेड़ जारी है।
जम्मू-कश्मीर: अवंतीपोरा के त्राल में सर्च ऑपरेशन जारी है।
आज एक मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद का टॉप कमांडर आतंकवादी शाम सोफी मारा गया है। (तस्वीरें वर्तमान समय के अनुसार नहीं हैं।) pic.twitter.com/i9TDoHXAbl
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन दिनों में सुरक्षाबलोें और आतंकवादियों के बीच यह छठी मुठभेड़ है। यही नहीं सुरक्षाबलों ने इस दौरान अभी तक आठ आतंकियों को ढेर कर दिया है। जम्मू कश्मीर के आईजी विजय कुमार ने जैश कमांडर के मारे जाने की पुष्टि की है।
अवंतीपोरा के त्राल मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद के टॉप कमांडर आतंकवादी शाम सोफी मारा गया: IGP कश्मीर विजय कुमार
आईजीपी कश्मीर, विजय कुमार ने बताया, “त्राल मुठभेड़ में एक आतंकवादी मारा गया है जिसकी पहचान शमीम सोफी के नाम से हुई है इसको हम शम सोफी के नाम से जानते हैं। ये जैश-ए-मोहम्मद का टॉप कमांडर है। इसको हमने पहले 2004 में गिरफ़्तार किया था, इसने पीएसए के तहत 2 साल जेल में बिताए। जेल से बाहर आने के बाद फिर ये सक्रिय हो गया था, साल 2019 के जून में शम सोफी पूरी तरह सक्रिय हो गया था। उसके बाद उसने कई हत्याएँ की। ये बाहर से आए जैश के आतंकियों को पनाह देता था। हमें 2 आतंकवादी की सूचना मिली थी जिसमें से कमांडर मारा गया और दूसरी की तलाशी की जा रही है।”
जेल से बाहर आने के बाद फिर ये सक्रिय हो गया था, साल 2019 के जून में शम सोफी पूरी तरह सक्रिय हो गया था। उसके बाद उसने कई हत्याएं की। ये बाहर से आए जैश के आतंकियों को पनाह देता था। हमें 2 आतंकवादी की सूचना मिली थी जिसमें से कमांडर मारा गया और दूसरी की तलाशी की जा रही है: IGP कश्मीर
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के अवंतीपुरा के त्राल इलाके के तिलवानी मोहल्ला वाग्गड़ में आतंकियों की मौजूदगी के बारे में गुप्त सूचना मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने वहाँ घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया। उन्होंने बताया कि आतंकवादियों के सुरक्षाबलों पर गोलीबारी के बाद अभियान मुठभेड़ में तब्दील हो गया। सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में एक आतंकवादी मारा गया। कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक विजय कुमार ने बताया कि आतंकवादी की पहचान जैश-ए-मोहम्मद के शीर्ष कमांडर शम सोफी के तौर पर हुई है। उन्होंने ट्वीट किया, “जैश-ए-मोहम्मद का शीर्ष कमांडर शम सोफी मुठभेड़ में मारा गया।”
सुरक्षाबलों का कहना है कि जवाबी कार्रवाई शुरू करने से पहले उन्होंने आतंकियों को हथियार डालने के लिए कहा था परंतु जब वे नहीं माने तो उन्हें भी गोलीबारी शुरू करनी पड़ी। दोनों ओर से गोलीबारी का सिलसिला जारी है। घेराबंदी में दो से तीन आतंकियों के फँसे होने की आशंका है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार सूत्रों से मिली सूचना के आधार पर एसओजी, सेना और सीआरपीएफ का एक दल अवंतीपोरा त्राल के तिलवानी मुहल्ला में पहुँचा और तलाशी अभियान शुरू कर दी। सूचना मिली थी कि मुहल्ले में दो से तीन आतंकवादियों ने प्रवेश किया है। सूचना के आधार पर जैसे ही सुरक्षाबलों ने मुहल्ले की घेराबंदी के साथ तलाशी अभियान शुरू किया। एक मकान में छिपे आतंकियों ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी।
गौरतलब है कि आतंकी हमले में एक जेसीओ समेत पाँच भारतीय जवानों के बलिदान होने के बाद सुरक्षाबल लगातार आतंकियों की खोज में तलाशी अभियान चला रहे हैं। एक दिन पहले 12 अक्टूबर को शोपियाँ जिले में दो अलग-अलग मुठभेड़ों में पाँच आतंकवादी मारे गए। इनमें से एक आतंकवादी हाल में श्रीनगर में बिहार के एक फेरी वाले की हत्या में शामिल था।