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इंटरनेशनल ड्रग रैकेट से जुड़े लोगों से कनेक्शन, सबूतों से कर सकते हैं छेड़छाड़: NCB ने आर्यन खान के बेल का किया विरोध

मुंबई के क्रूज ड्रग केस में फँसे शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की जमानत याचिका का विरोध करते हुए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने नया दावा किया है। अभी तक जहाँ कहा जा रहा था कि आर्यन ड्रग्स का सेवन करते हैं, वहीं एनसीबी ने अब कहा है कि उनके संबंध उन लोगों से हैं जो अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्स से जुड़े हैं।

इससे पहले विशेष न्यायाधीश वीवी पाटिल के समक्ष एनसीबी ने ये कहा था कि आर्यन की याचिका पर सुनवाई की कोई जल्दी नहीं हैं। इसके बाद जाँच एजेंसी ने हलफनामा दायर करने के लिए एक हफ्ते का समय माँगा था और कोर्ट ने मामले को बुधवार यानी आज (13 अक्टूबर 2021) की डेट दी थी। उस समय बचाव पक्ष ने कहा था कि आर्यन को झूठे केस में फँसाया गया है और जमानत पर रिहा कर देने से जाँच नहीं रुकेगी।

अब आज इसी मामले में कोर्ट में एनसीबी का जवाब दाखिल हुआ। जाँच एजेंसी ने कहा कि एक एक आरोपित की भूमिका को दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता है। भले ही आर्यन के पास ड्रग्स नहीं मिले लेकिन वो पेडलर के संपर्क में था। एनसीबी के अनुसार, ये एक बड़ी साजिश है और इसकी जाँच होना बेहद जरूरी है। एजेंसी ने कहा कि ये साफ है कि आरोपित आचित कुमार और शिवराज हरिजन ने आरोपित आर्यन खान और अरबाज मर्चेंट को चरस पहुँचाए। आर्यन और अरबाज एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। शुरुआती जाँच में मिले सबूत बताते हैं कि आर्यन की ड्रग्स मामले में अहम भूमिका रही है।

एनसीबी कहती है कि आर्यन एक तरह से समाज में प्रभावशाली इंसान हैं तो हो सकता है वो सबूतों से छेड़छाड़ करें या फिर जिन गवाहों को निजी तौर पर जानते हैं उन्हें भी प्रभावित करने की कोशिश करें। जाँच एजेंसी ने अपनी छानबीन में हाथ लगे उन अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बारे में भी बताया जो अवैध खरीद की ओर संकेत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूरी जाँच में संपत्ति की जाँच के लिए पर्याप्त समय की जरूरत है ताकि संबंधित विदेशी एजेंसियों से संपर्क हो। 

उल्लेखनीय है कि शाहरुख खान के बेटे से जुड़े इस पूरे ड्रग केस में उनकी ओर से हायर वकील अमित देसाई ने कोर्ट में कहा कि आर्यन के पास से किसी तरह का कोई ड्रग नहीं मिला है। वो तो मुनमुन धमेचा को भी नहीं जानते। दोनों के बीच कोई कनेक्शन नहीं हैं। उन्होंने यहाँ तक दलील दी कि जिस समय एनसीबी ने छापा मारा वो क्रूज पर नहीं थे। वह वहाँ एंट्री कर रहे थे तभी एनसीबी ने उन्हें पकड़ा। मामले को भावनात्मक एंगल देते हुए देसाई ने कहा कि वे (जो गिरफ्तार हुए) तस्कर नहीं है और न ही ड्रग ट्रैफिकर्स हैं, वह जवान बच्चे हैं और अपना सबक ले लिया है। उन्हें ज्यादा वक्त जेल में न रखा जाए।

इस बीच ट्विटर पर आर्यन खान की पुरानी वीडियो वायरल है जिसमें वह स्मोक करते नजर आ रहे हैं। वहीं ट्विटर पर ही #NobailOnlyJail ट्रेंड कर रहा है। इसमें लोग आर्यन की गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं।

मालूम हो कि आर्यन की गिरफ्तारी हुए आज 10 दिन पूरे हो गए हैं। उन्हें 3 अक्टूबर को एनसीबी ने क्रूज से गिरफ्तार किया था जहाँ ड्रग पार्टी चल रही थी। इसके बाद से वह न्यायिक हिरासत में हैं। कई दफा उनकी याचिका पर सुनवाई टली है। इससे पहले 8 अक्टूबर को मजिट्रेट कोर्ट ने उनकी बेल खारिज की थी

टॉप 10 में यूपी के 7 जिले, निचले 5 में राहुल गाँधी का वायनाड: नीति आयोग की डेल्टा रैंकिंग पर CM योगी ने जताई खुशी

नीति आयोग ने जुलाई-अगस्त 2021 के सर्वेक्षण के आधार पर देश के 112 आकांक्षी जिलों की डेल्टा रैंकिंग जारी की है। आयोग ने उत्तर प्रदेश के 8 आकांक्षी जिलों में से सात को डेल्टा रैंकिंग में शीर्ष 10 की सूची में स्थान दिया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार (12 अक्टूबर 2021) को सिलसिलेवार ट्वीट कर प्रदेशवासियों से यह जानकारी साझा की।

उन्होंने लिखा, ”नीति आयोग की डेल्टा रैंकिंग, जुलाई-अगस्त, 2021 में प्रदेश के 8 आकांक्षी जनपदों में से 7 जनपदों ने देश में टॉप-10 में स्थान बनाया है। यह प्रदेश के लिए एक उपलब्धि है।” मुख्यमंत्री ने आगे लिखा, ”नीति आयोग की डेल्टा रैंकिंग जुलाई-अगस्त, 2021 में टॉप-10 में प्रदेश के जनपद फतेहपुर, सिद्धार्थनगर, सोनभद्र, चित्रकूट, बहराइच, श्रावस्ती और चन्दौली सम्मिलित हैं।”

डेल्टा रैंकिंग देश के सभी आकांक्षी जिलों की एक रैंकिंग है, जिसमें विकास की राह पर प्रगति कर रहे विभिन्न जिलों को इसमें स्थान दिया जाता है। कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के निर्वाचन क्षेत्र केरल के वायनाड को इसमें नीचे से चौथा स्थान यानी 109वाँ स्थान हासिल हुआ है।

जिलेवार प्रगति

नीति आयोग की डेल्टा रैकिंग में ओडिशा का गजपति जिला पहले नंबर पर है, जबकि यूपी का फतेहपुर दूसरे नंबर पर है। बुनियादी ढाँचा, कृषि और जल संसाधन, वित्तीय समावेशन और बेहतर विकास जिले को इस रैकिंग में उच्च स्थान हासिल करने में मदद करते हैं।

शीर्ष 5में से चार जिले यूपी के हैं। वायनाड 109वें स्थान पर है। साभार: नीति आयोग

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ग्रामीण सड़क निर्माण, कृषि और जल संसाधनों में उल्लेखनीय प्रगति की है। यह तीसरे स्थान पर है। सोनभद्र जिला चौथे स्थान पर है, जिसने वित्तीय समावेशन, स्वास्थ्य एवं पोषण और कृषि एवं जल संसाधनों में उल्लेखनीय प्रगति की है।

चित्रकूट ने पीएमजीएसवाई और कृषि एवं वित्तीय समावेशन सहित ग्रामीण सड़क बुनियादी ढाँचे में सुधार करके सूची में पाँचवा स्थान हासिल किया है। छठे स्थान पर रहे श्रावस्ती जिले ने कृषि, वित्तीय समावेशन और स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में प्रगति की है। चंदौली ने ग्राम पंचायतों की इंटरनेट कनेक्टिविटी में सुधार, कृषि, बुनियादी ढाँचे और वित्तीय समावेशन में उल्लेखनीय प्रगति करके सातवें स्थान पर जगह बनाई है। यूपी का आठवाँ आकांक्षी जिला बलरामपुर भी प्रगति की राह पर है और सूची में अपनी स्थिति में तेजी से सुधार कर रहा है। फिलहाल यह 18वें स्थान पर है।

वायनाड का खराब प्रदर्शन

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी का निर्वाचन क्षेत्र वायनाड निचले 5 जिलों में ही अपना स्थान बना पाया है। यानी वो प्रगति की राह में पीछे रहा और 109वाँ स्थान ही हासिल कर पाया। आपको बता दें कि वायनाड केरल का एकमात्र ऐसा जिला है, जो आकांक्षी जिलों की सूची में शामिल है। वहीं, निचले 5 में जिलों में झारखंड का रामगढ़ और लातेहार, हिमाचल प्रदेश का चंबा और अरुणाचल प्रदेश का नामसाई शामिल हैं।

मौलाना के पास दीनी तालीम लेने गया था 9 साल का बच्चा, घर लौटा तो कपड़ों पर लगा था खून: रेप कर धमकाया भी

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से नौ साल के बच्चे के साथ रेप किए जाने का मामला सामने आया है। आरोपित 21 साल का मौलाना मोहम्मद गुल हसन है। पीड़ित बच्चा उसके पास दीनी तालीम लेने जाता था। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपित मौलाना को गिरफ्तार कर लिया है।

घटना सोमवार (11 अक्टूबर 2021) को बारादरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कोट मोहल्ले में घटी। ऑप इंडिया से बात करते हुए बारादरी थाना के एसएचओ नीरज मलिक ने बताया, “9 साल का बच्चा आरोपित मौलाना के घर पर ट्यूशन लेने जाता था। इसी बीच उसकी नीयत बच्चे को लेकर बिगड़ गई और सोमवार को उसने बच्चे के साथ रेप किया। आरोपित मौलाना के खिलाफ इंडियन पीनल कोड की धारा 377 और पोक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है।”

पुलिस अधिकारी ने बताया कि मेडिकल जाँच में बच्चे के साथ रेप की पुष्टि हुई है। मौलाना को कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित बच्चे के परिजनों का कहना है कि मौलाना ने रेप करने के बाद बच्चे को धमकी दी थी कि अगर उसने यह बात किसी को बताई तो वह उसके परिवार को जान से मार देगा। बच्चा जब अपने घर पहुँचा तो उसके उसके कपड़ों पर खून लगा था। जब परिजनों ने उससे इस बाबत पूछा तो उसने रोते हुए सारी बात बता दी। इसके बाद उसके अम्मी-अब्बू उसे बारादरी थाने लेकर गए और पुलिस में मामला दर्ज कराया।

‘श्रवण कुमार जैसा बेटा चला गया’: बीमार पिता के लिए हरिओम मिश्रा ने छोड़ दी थी ₹25000 की नौकरी, शौच तक खुद कराते थे

लखीमपुर खीरी किसान हिंसा में मारे गए लोगों में एक नाम हरिओम मिश्रा का भी है। उनके जाने के साथ ही परिवार का कर्ताधर्ता अब नहीं रहा। गरीबी में जी रहे परिवार में एक बीमार पिता है, एक कुँवारी बहन और एक लाचार माँ। मीडिया में इस परिवार की बातें नहीं हो रहीं। ये भी तो किसान थे। छत्तीसगढ़ और पंजाब की सरकारों ने इनके लिए मदद की घोषणा नहीं की। राहुल और प्रियंका गाँधी इनसे मिलने नहीं आए।

हरिओम मिश्रा के घर की हालत देख कर ऐसा लगता है, जैसे ये कोई पुराना गोदाम हो जो वर्षों से खाली पड़ा हो। ऊपर एलवेस्टर की छत है। घर पर लत्तियाँ और झाड़ियाँ उगी हुई हैं। टीन के दरवाजे हैं। अंदर जाने पर हरिओम मिश्रा के भाई अपने पिता को कपड़े पहनाते हुए मिलते हैं। बीमार और वृद्ध पिता उठ-बैठ भी नहीं सकते। उन्हें शौच कराने से लेकर उनकी सेवा के अधिकर कार्य हरिओम खुद करते थे।

घर में एक तरफ उनके पिता चारपाई पर लेटे हुए हैं और दूसरी तरफ उनकी एक गाय है, जो खा रही है। घर में दो ही महँगी चीज दिख रही थी मुझे, एक मेरी हेलमेट जो मैं लेकर गया था और एक गद्दा। अपने पिता की सेवा में रमे रहने वाले हरिओम मिश्रा कुछ ही दिनों पहले इस गद्दे को उनके लिए ही खरीद कर लाए थे। घर में अँधेरा छाया हुआ है। एलवेस्टर और दीवार के बीच जो छेद हैं, उससे जरूर बारिश का पानी अंदर आता होगा।

उनके घर में नल तक नहीं है, चापाकल से ही काम चलाना पड़ता है। हरिओम मिश्रा 5 भाई-बहन थे, जिनमें से दो भाई और तीन बहन थीं। उनके एक भाई का नाम श्रीराम मिश्रा है। दो बहनों की शादी हो चुकी है। श्रीराम मिश्रा ने बताया कि उनके भाई रोज अपने पिता को स्नान व शौच कराने आते थे। उनको खिलाते थे और हाथ-पाँव भी दबाया करते थे। तेल मालिश करते थे और उन्हें अपने पिता की विशेष चिंता रहती थी, जिनका हालचाल वो हमेशा लिया करते थे।

अब घर में कोई कमाने वाला नहीं बचा है। श्रीराम मिश्रा ने बताया कि टीवी में जब खबर चली, जिसमें उनके भाई का नाम आया तब परिवार को उनकी मौत होने की सूचना मिली। उससे पहले किसी ने खबर नहीं दी थी। उन्होंने बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर है और हरिओम मिश्रा के रुपयों से ही पिता का इलाज चलता था। श्रीराम मिश्रा कहते हैं कि कम भी किसान हैं, हम हमारा गुजारा कैसे चलेगा?

उन्होंने सरकार से माँग की है कि उन्हें एक करोड़ रुपए का मुआवजा मिले और दोनों भाई-बहनों को सरकारी नौकरी भी दी जाए। हरिओम मिश्रा की माँ ने बताया कि उनका बेटा ‘श्रवण कुमार’ की तरह था, जो अब दुनिया से चला गया। अपने पिता की सेवा करने के लिए उन्होंने 25,000 रुपए की नौकरी भी छोड़ दी थी। वो कहते थे कि यहाँ रहेंगे तो पिता की सेवा-सुश्रुवा करेंगे, भले ही कमाई कम ही हो।

हरिओम मिश्रा के परिवार का कहना है कि उन पर 7-8 लाख रुपयों का कर्ज है। उत्तर प्रदेश के कानून मंत्री ब्रजेश पाठक बुधवार (13 अक्टूबर, 2021) को हरिओम मिश्रा के परिजनों से मिले। डिमेंशिया से पीड़ित उनके पिता का स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया गया। हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया। इस दौरान जिले में भाजपा के तमाम बड़े संगठन नेता मौजूद रहे। परिवार फरधान क्षेत्र के परसेहरा गाँव में रहता है।

(ये ग्राउंड रिपोर्ट ऑपइंडिया के लिए आदित्य राज भारद्वाज के कवर की है)

PCI के मेंबर्स केंद्र सरकार नियुक्त नहीं करती: ‘द कारवाँ’ वाले विनोद जोस को लेकर जारी विवाद के बीच ‘एक फैक्ट’ यह भी

‘द कारवाँ’ के मुख्य संपादक विनोद जोस को भारतीय प्रेस परिषद (PCI) का सदस्य नियुक्त करने के बाद से विवाद गहराया हुआ है। हालाँकि, सरकारी सूत्रों ने ऑपइंडिया को बताया है कि प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया में सदस्यों को नियुक्ति के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार नहीं है। जोस को इसका सदस्य बनाए जाने पर लोगों ने केंद्र सरकार के प्रति खासी नाराजगी व्यक्त की ​थी। उसके बाद सूत्रों ने यह स्थिति स्पष्ट की है।ही यह प्रतिक्रिया सामने आई है।

नेटिज़न्स ने सोशल मीडिया पर इसलिए नाराजगी व्यक्त की थी, क्योंकि विनोद के जोस अपनी पत्रिका ‘द कारवाँ’ के जरिए लंबे समय से मोदी सरकार और हिंदुओं के खिलाफ लगातार झूठ-नफरत फैला रहे हैं। ‘द कारवाँ’ को मोदी और भाजपा विरोधी एजेंडा चलाने और विनोद जोस को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से घृणा करने के लिए जाना जाता है।

स्पष्टीकरण देते हुए सरकारी सूत्र ने बताया, “नामांकन से लेकर नियुक्त करने तक की पूरी प्रक्रिया पीसीआई द्वारा की जाती है, जो भारत सरकार से कार्यात्मक रूप से अलग एक स्वायत्तशासी संगठन है। यह आरोप लगाना कि भारत सरकार ने पीसीआई के लिए किसी सदस्य को नियुक्त किया है, पूरी तरह से गलत और झूठ है।”

मालूम हो कि 7 मार्च, 2021 को भारतीय प्रेस परिषद ने सदस्यों के लिए नामांकन आमंत्रित करते हुए अधिसूचना जारी की थी, क्योंकि इसका तीन साल का कार्यकाल 30 मई, 2021 को समाप्त हो चुका है।

पीसीआई की अधिसूचना

बता दें कि ‘द कारवाँ’ का इतिहास काफी दागदार रहा है, जिसने न सिर्फ जस्टिस लोया की मौत के मामले में गुमराह कर अमित शाह को बदनाम किया, बल्कि असीमानंद को आतंकवादी बताने की भी कोशिश की थी। कारवाँ मैगजीन के साथ मिल कर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के बेटे विवेक डोभाल के खिलाफ दुष्प्रचार करने के मामले में कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश को कोर्ट में माफ़ी तक माँगनी पड़ी थी।

हर बार नया आदमी रेप करता, सपा जिलाध्यक्ष तिलक यादव ने तो ऐसे रेप किया जैसे बदला ले रहा हो: पोर्न से शुरू हुआ नाबालिग का शोषण

उत्तर प्रदेश के ललितपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक पिता ही हैवान बन बैठा और उसने अपनी ही बेटी को कई लोगों के सामने परोस दिया। 17 साल की लड़की ने अपने पिता और सपा-बसपा के नेताओं समेत 28 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई है। मंगलवार (12 अक्टूबर, 2020) को सामने आए इस मामले में कई आरोपित पीड़िता के रिश्तेदार ही हैं। पुलिस ने बलात्कार और आपराधिक धमकी की धाराओं में मामला दर्ज किया है।

FIR में समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष तिलक यादव, नगर अध्यक्ष राजेश जैन जोझिया, बहुजन समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष दीपक अहिरवार के अलावा लड़की के पिता का नाम भी शामिल है। इसमें जानबूझ कर दर्द पहुँचाने और शील भंग करने जैसे आरोप भी हैं। लड़की का आरोप है कि जब वो कक्षा 6 में थी, तभी उसके पिता ने अश्लील (Porn) वीडियोज दिखा कर उसे शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लिए दबाव डाला था, लेकिन तब वो नहीं मानी।

इसके बाद उसके पिता उसके लिए कुछ नए कपड़े खरीद कर लाया और उसे बाइक चलाना सिखाने के बहाने अपने साथ ले गया। आरोप है कि इसके बाद वो उसे एक सुनसान फार्महाउस में ले गया, जहाँ उसके साथ बलात्कार किया। साथ ही धमकी दी कि अगर उसने किसी को भी इस बारे में बताया तो वो इसकी माँ को मार डालेगा। कुछ दिनों बाद वो उसे स्कूल से लेने गया और उसे एक होटल में लेकर गया।

पीड़िता का पिता उसे नाश्ता कराने के बहाने लेकर गया था, जहाँ उसने गोलगप्पे में कुछ नशीली दवाइयाँ मिला दी। उसने लड़की को एक महिला को सौंप दिया, जिसने उसे होटल के कमरे में अकेले बिठाया। कुछ देर बाद एक पुरुष उस कमरे में आया। इसके बाद पीड़िता बेहोश हो गई। जब वो उठी और उसके कपड़े व जूते आपत्तिजनक अवस्था में इधर-उधर पड़े हुए थे और उसके पेट में दर्द भी हो रहा था।

इसके बाद इस तरह का सिलसिला चल निकला और होटल के कमरे में हर रोज कोई नया आदमी बेरहमी से उसका बलात्कार करता। उसे चुप रहने के लिए धमकाया भी गया था। पीड़िता के अनुसार, सपा जिलाध्यक्ष तिलक यादव ने उसके साथ इतने अमानवीय तरीके से बलात्कार किया, जैसे वो किसी बात का बदला लेना चाह रहा हो। तिलक यादव ने उसे बताया कि उसके पिता ने उसे यहाँ भेजा है और उसकी माँ को भी यहाँ लाया जाएगा।

तिलक यादव के दोस्तों और रिश्तेदारों ने भी उसका बलात्कार किया। पीड़िता का कहना है कि इसी तरह उसे अपने एक मामा के यहाँ ले जाया गया, जहाँ उसके 4 मामाओं ने उसके कजन भाइयों के साथ मिल कर उसका बलात्कार किया। उसकी नानी ने उसकी मदद की, लेकिन इस घटना को लेकर चुप रहने को कहा। उसके मामाओं ने उसे बेचने तक की कोशिश की थी, लेकिन वो सफल नहीं हुए।

ललितपुर के एसपी निखिल पाठक ने TOI को बताया, “ये एक बेहद ही संवेदनशील मामला है और हम इसे गंभीरता से ले रहे हैं। पीड़िता का बयान दर्ज हो गया है। मेडिकल परीक्षण करा लिया गया है। बुधवार को मजिस्ट्रेट के सामने उसका बयान दर्ज हुआ। लड़की का पिता ट्रक ऑपरेटर है, जिससे पूछताछ जारी है।” वहीं तिलक यादव ने कहा कि इस मामले में उन्हें और उनके भाइयों को गलत तरीके से फँसाया गया है।

कोबरा को सप्ताह भर रखा भूखा, फिर सोती पत्नी पर छोड़ दिया: हत्या को हादसा बताने वाले पति को ऐसे मिली सजा

केरल के कोल्लम की एक अदालत ने सोमवार को कोबरा साँप से कटवाकर उसकी हत्या करने के मामले में दोषी ठहराया। कोर्ट ने इस कुकृत्य को जघन्य अपराध बताते हुए कहा कि दोषी किसी भी तरह की सहानुभूति का पात्र नहीं है। इस मामले में उसे कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है।

इस जघन्य अपराध के मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 328 (नुकसान के लिए दवा देना), 307 (हत्या का प्रयास) और 201 (सबूत नष्ट करने) के तहत दोषी पाए गए आरोपित कोल्लम जिले के 32 वर्षीय सूरज कौ मौत की सजा देने की माँग की है। 17 महीने में पूरे किए गए ट्रायल में चूँकि कोई चश्मदीद नहीं था, इस कारण से यह केस काफी जटिल था। हालाँकि, उथरा की मौत की जाँच के लिए बनाई गई एसआईटी की टीम ने वैज्ञानिक तरीके से इस मामले को सुलझाया।

17 महीने में ट्रायल पूरा हुआ। हत्या के चश्मदीद न होने के कारण जाँच दल ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया। एसआईटी की गहन जाँच और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के लिए अधिकारियों द्वारा प्रशंसा की गई है। अभियोजन पक्ष ने सूरज के लिए मौत की सजा की माँग की है।

उल्लेखनीय है कि केरल में हर साल हजारों सर्पदंश के मामले दर्ज होते हैं। इसी क्रम में 06 मई, 2020 को कोल्लम अंचल की रहने वाली उथरा की मौत साँप का काटने से हो गई थी। उथरा को इससे पहले भी कोबरा ने काट लिया था और उनका इलाज चल रहा था। इस बीच एक बार और कोबरा ने उन्हें काट लिया। इससे उनके परिवार को शक हुआ तो उथरा के पिता विजयसेना ने इस मामले में उस दौरान कोल्लम के ग्रामीण एसपी एस हरिशंकर से मिलकर मामले की शिकायत की।

उन्होंने बताया कि मरने से दो महीने पहले उनकी बेटी को 02 मार्च 2020 को पहली बार साँप ने काटा था। इसके बाद 28 फरवरी को उसके घर में सीढ़ियों के नीचे एक साँप पाया गया था। बाद में मई में अप्राकृतिक तरीके से उथरा को मई में एक बार फिर से साँप ने काट लिया, जिससे उसकी मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने 7 मई को अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज किया था। हरिशंकर ने मीडिया को दिए एक बयान में कहा, “ऐसे कई कारक थे जिन्होंने प्रारंभिक रूप से इस धारणा के लिए प्रेरित किया कि यह एक आकस्मिक सर्पदंश का मामला नहीं था।”

उथरा को दो बार साँप ने काटा

इस केस को लेकर हरिशंकर ने कहा, “हमारे पास ऐसे कई कारण थे, जिससे इस बात का संदेह होता था कि यह एक सुनियोजित हत्या थी। हमने पशु चिकित्सा विज्ञान और पशु विज्ञान के कई विशेषज्ञों के साथ इस मामले पर चर्चा की। कुछ कारक अजीब लग रहे थे। ”

कथित तौर पर उथरा को पहली बार 02 मार्च, 2020 को सूरज (उथरा का पति) के घर की पहली मंजिल पर स्थित बेडरूम में एक साँप ने काट लिया था। हालाँकि, इसने जाँच के दौरान संदेह पैदा किया क्योंकि ‘रसेल्स वाइपर (एक स्थलीय प्रजाति) है और शायद ही कभी ऐसा होता है कि वो ऐसी जगहों पर पाया जाता है।

वहीं दूसरी बार उथरा को 06 मई 2020 की रात को सोते वक्त एक कोबरा ने काट लिया। लेकिन यह ‘दुर्घटनावश मृत्यु’ के सिद्धांत पर फिट नहीं बैठता है। क्योंकि कोबरा आमतौर पर शाम 5 से 8 बजे के बीच ही सक्रिय होता है। हरिशंकर ने कहा, “कोबरा का देर रात तक सक्रिय रहना बेहद असामान्य है।”

इसके अलावा कमरे के दरवाजे और खिड़कियाँ भी बंद थे क्योंकि उथरा ने एसी चालू किया हुआ था। अधिकारी ने कहा, “इसलिए साँप घर में कैसे घुसा इसे तर्कसंगत रूप से समझाया नहीं जा सकता है।”

साँप से जबरन कटवाया

एसआईटी टीम ने जाँच का दायरा आगे बढ़ाया तो पोस्टमार्टम से पता चला कि उथरा के शरीर पर दो घाव करीब-करीब 2.3 सेंटीमीटर और 2.5 सेंटीमीटर गहरे पाए गए थे। जबकि, वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चलता है कि भारतीय कोबरा के नुकीले निशान 2 सेमी से अधिक गहरे नहीं होते हैं।

पुलिस अधिकारी ने कहा, “दो बार लगातार काटने से होने वाले घाव समान गहराई के होने चाहिए। लेकिन, दोनों में भिन्नता (0.5 सेमी) से प्रतीत होता है कि संभवतः बल का इस्तेमाल किया गया था। अगर कोबरा के सिर पर कोई बाहरी बल लगाया जाता है, तो इससे नुकीला और गहरा प्रवेश हो जाएगा।” इससे ये पता चलता है कि काटने के निशान प्राकृतिक नहीं थे। उसे किसी ट्रेंड व्यक्ति के जरिए कटवाया गया था।

फॉरेन्सिक विभाग के विशेषज्ञों ने कोबरा पर किए टेस्ट से पता चला है कि उसे घर में ही एक प्लास्टिक बोतल में मारकर रखा गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बोतल के अंदर मिली पपड़ी का डीएनए मरे हुए कोबरा के डीएनए से मेल खाता है।

इस मामले की जाँच के लिए पशु चिकित्सा विज्ञान, फोरेंसिक मेडिसिन, हर्पेटोलॉजी, साइबर फोरेंसिक, डीएनए फिंगरप्रिंटिंग और फार्माकोलॉजी के विशेषज्ञों की मदद ली गई थी। साँप से जबरन कटाया गया, इस तथ्य की पुष्टि के लिए जाँच दल ने एक जीवित साँप और एक डमी ‘पीड़ित’ के साथ एक प्रयोग भी किया।

साँप की ऑटोप्सी में यह भी पाया गया कि उसे और अधिक आक्रामक बनाने के लिए उसे कम से कम एक सप्ताह तक भूखा रखा गया था।

दहेज के मामले ने पति पर शक को किया पुख्ता

पुलिस टीम जब उथरा की मौत की जाँच कर रही थी तो उसे पता चला कि ससुराल में उसके साथ घरेलू हिंसा और दहेज की माँग की जाती थी। यही वो बात थी, जिसने जाँच अधिकारियों को सूरज पर शक के लिए विवश किया। सर्पदंश की दोनों घटना जब हुई उस दौरान सूरज भी घर पर ही था। खास बात यह थी कि सूरज को वन्यजीवों के प्रति लगाव था और वो वन्यजीव क्लबों का सदस्य भी था।

जाँच दायरा आगे बढ़ा और पुलिस कोल्लम के कल्लुवथुक्कल के चावरुकावु सुरेश नाम के एक व्यक्ति तक पहुँची। वो सूजर को जानता था। सुरेश ने पुलिस को बताया कि घटना वाले दिन सूरज ने दो जहरीले साँप खरीदे थे, इनमें से एक वाइपर साँप था तो दूसरा कोबरा था। फिर क्या था जैसे ही उसे पुलिस ने पकड़ा तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

बिना तलाक के उथरा से छुटकारा पाना चाहता था सूरज

सूरज ने उथरा से दहेज के तौर पर अच्छी रकम पाने की लालच में शादी की थी। लेकिन, जब उसे मनचाहा दहेज नहीं मिला तो जल्द ही उसने तलाक के बिना अपनी पत्नी से छुटकारा पाने के तरीके ढूँढने शुरू कर दिए। इसी दौरान साँपों के जरिए हत्या करने का आइडिया आया।

पहली बार हुआ था असफल

सूरज ने पहली बार सोते वक्त उथरा के ऊपर वाइपर साँप गिरा दिया, लेकिन वो जाग गई, जिसके बाद सूरज मजबूरन उसे अस्पताल ले गया। लेकिन, दूसरी बार उथरा नींद से न जाग सके, इसके लिए सूरज ने उसे जूस में नींद की दवा मिलाकर पिला दिया।

इस बार वो अपने मंसूबों में सफल हो गया। हरिशंकर के मुताबिक, “कोबरा का जहर न्यूरोटॉक्सिक होता है। यह सीधे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है, जिससे बचने की संभावना काफी कम हो जाती है।” इसके अलावा सूरज के मोबाइल की फॉरेन्सिक जाँच से ये स्पष्ट हुआ है कि उसने साँपों के व्यवहार को जानने के लिए कई वीडियो देखे और साहित्य को पढ़ा था।

पुलिस चीफ ने थपथपाई SIT की पीठ

इस जटिल केस को सॉल्व करने के लिए केरल पुलिस प्रमुख अनिल कांत ने जाँच के दौरान वैज्ञानिक दृष्टिकोण और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए विशेष जाँच दल (एसआईटी) की सराहना की है। उन्होंने कहा कि यह एक उदाहरण है कि कैसे एक मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाए जा सकते हैं। एस हरिशंकर के नेतृत्व वाली टीम ने बहुत अच्छा काम किया।

वहीं कोर्ट के फैसले से खुश उथरा के पिता ने कहा, “मैं खुश हूँ कि आखिरकार मेरी बेटी को न्याय मिला। हम सूरज के लिए अधिकतम सजा की उम्मीद करते हैं। हम प्रार्थना करते हैं कि किसी अन्य माता-पिता को हमारे अनुभव से गुजरना न पड़े।”

उल्लेखनीय है कि सूरज के माता-पिता को भी दहेज प्रताड़ना का दोषी ठहराया गया है। उन्होंने जाँच को पटरी से उतारने के लिए उथरा के भाई के खिलाफ जवाबी शिकायत दर्ज कराई थी।

घर में घुस सिपाही ने किया रेप, बचाने आए देवर को भी पीटा: दलित महिला का राजस्थान पुलिस पर आरोप

राजस्थान में खाकी एक बार फिर दागदार हुई है। वहाँ फिर एक पुलिसकर्मी ने दलित महिला के साथ रेप किया है। पीड़िता का कहना है कि पुलिसकर्मी ने घर में घुसकर उसका बलात्कार किया। महिला गिड़गिड़ाती रही लेकिन पुलिसवाले ने कहा कि अगर वह कुछ बोलेगी तो वह उसके परिवार को जान से मार देगा। बाद में घरवालों ने ही उस सिपाही को पकड़ कर पीटा और अस्पताल में भर्ती करने लायक हालत कर दी। आरोपित के ख़िलाफ़ एससी/एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ है। आरोपित की भी गिरफ्तारी हो गई है।

आजतक की रिपोर्ट बताती है कि पीड़िता ने पुलिस को जानकारी दी कि उसका पति मजदूरी करने गया था, तभी पुलिसकर्मी श्रवण कुमार घर में घुसा और उसके साथ बलात्कार कर दिया। इसके बाद उसे धमकी भी दी कि अगर किसी को इस बारे में पता चला तो पूरे परिवार को जेल में डाल दिया जाएगा।

पीड़िता के अनुसार जब श्रवण जाने लगा तो वो बहुत तेज चिल्लाई और उसकी आवाज सुनकर देवर कमरे में आ गया। देवर को देखा तो पुलिस वाले ने उसे गला पकड़कर मारने की कोशिश की। उसके बाद घर के अन्य लोगों ने वहीं पर सिपाही को धर लिया और जमकर पीटा। पीड़िता कहती है कि उसे न्याय दिलाया जाए।

बाड़मेर के पुलिस अधीक्षक आनंद शर्मा ने बताया कि इस केस को रेप, एससी-एसटी एक्ट सहित अन्य धाराओं में दर्ज किया गया है। साथ ही पुलिस कॉन्सटेबल को सस्पेंड करके उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू हो गई है। सिपाही ने भी क्रॉस मुकदमा करवाया है। उसके मुताबिक महिला ने पहले इशारा किया था और जब वो गया तो उसे पिटवाया, कपड़े उतरवाए और वीडियो बना लिया।

बता दें कि दो साल पहले राजस्थान के चूरू जिले में सरदारशहर पुलिस स्टेशन के निलंबित पुलिस निरीक्षक के अलावा आठ पुलिसवालों के खिलाफ रेप का आरोप लगा था। तब, चार बच्चों की माँ व 35 वर्षीय दलित महिला ने आरोप लगाया था कि 9 पुलिसकर्मियों ने उसका गैंगरेप किया।

पीड़ित महिला का आरोप था कि पुलिस ने चोरी के एक मामले में उसके देवर को 6 जुलाई को पकड़ा था। पुलिसवालों ने महिला के देवर को हिरासत में इतना प्रताड़ित किया कि उसकी मौत हो गई थी। महिला का कहना था कि उसके देवर को अवैध तरीके से थाने में हिरासत में रखा गया और बलात्कार किया गया। अधिकारियों ने महिला के देवर की हिरासत के मौत मामले में न्यायिक जाँच के आदेश दिए थे।

‘गाँधी के कहने पर सावरकर ने डाली दया याचिका’: राजनाथ सिंह को सही साबित करता है 26 मई 1920, लिबरल कर रहे हंगामा

वीर विनायक दामोदर सावरकर पर उदय माहुरकर की पुस्तक ‘Savarkar: The Man Who Could Have Prevented Partition‘ की लॉन्च में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि किस तरह महात्मा गाँधी ने वीर सावरकर को सलाह दी थी कि वो अंग्रेजों को मर्सी पेटिशन लिखें। उन्होंने सावरकर के योगदान की उपेक्षा और उनके अपमान के बारे में कहा कि ये न्यायसंगत व क्षमा योग्य नहीं है।

इसके बाद से ही लिबरल गिरोह राजनाथ सिंह पर पिल पड़ा। वामपंथी नेता कविता कृष्णन ने उन पर निशाना साधते हुए लिखा कि सावरकर ने 1911 में दया याचिका डाली और महात्मा गाँधी 1915 में भारत लौटे, ऐसे में कल को राजनाथ सिंह ये भी कह देंगे कि गाँधी ने ही गोडसे को कहा था कि मुझे शूट कर दो। कॉन्ग्रेस समर्थक पत्रकार आदेश रावल से लेकर ‘द वायर’ के संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन तक, सब ने महात्मा गाँधी पर निशाना साधा।

वरिष्ठ लेखक और वीर सावरकर पर वृहद शोध कर के दो पुस्तकें लिख चुके विक्रम संपत ने अब सच्चाई बताई है। डॉक्टर विक्रम संपत ने जानकारी दी है कि कैसे ‘यंग इंडिया’ में 26 मई, 1920 को एक लेख के जरिए महात्मा गाँधी ने सावरकर बंधुओं को अंग्रेजों के सामने दया याचिका डालने को कहा था। संपत ने इस बारे में अपनी पुस्तक ‘Savarkar (Part 1): Echoes from a Forgotten Past18831924‘ में इस बारे में लिखा भी है।

कहानी कुछ यूँ है कि विनायक दामोदर सावरकर के भाई नारायणराव ने 18 जनवरी, 1920 को विचारधारा के मामले में विरोधी ध्रुव पर खड़े महात्मा गाँधी को पत्र लिखने का निर्णय लिया, जो उस समय देश के बड़े नेता के रूप में तेज़ी से उभर रहे थे। उन्होंने अपने दोनों बड़े भाइयों को छुड़वाने के लिए उनकी मदद और सलाह माँगी। उन्होंने लिखा था कि सरकार द्वारा जारी की गई रिलीज किए जाने वाले कैदियों सूची में सावरकर बंधुओं का नाम नहीं है।

उन्होंने इस पत्र में लिखा था कि किस तरह उनके भाई अस्वस्थ हैं और उनका वजन भी काफी कम हो गया है। महात्मा गाँधी ने इसके जवाब में लिखा कि वो इस मामले में ज्यादा कुछ नहीं कर सकते। लेकिन, 26 मई, 1920 को ‘यंग इंडिया’ में एक लेख आया, जिसका शीर्षक था ‘सावरकर बंध’, जिसमें महात्मा गाँधी ने लिखा कि कैसे वीडी सावरकर ने कोई हिंसा नहीं की थी, उनकी पत्नी और दोनों बच्चियों का देहांत हो चुका है।

महात्मा गाँधी ने लिखा था, “1911 में उनके खिलाफ हत्या के लिए उकसाने का मामला चला, लेकिन कुछ साबित नहीं हो पाया। दोनों ने कह दिया है कि वो क्रांतिकारी विचारों को नहीं अपनाएँगे और समाज सुधर का रुख करेंगे। कहा जा रहा है कि उनसे खतरा है। याचिकाओं के रद्द किए जाने के बावजूद नारायण राव अपने भाइयों के समर्थन में जनता को जुटा रहे हैं। छोड़े जाने के बाद दोनों भाई संवैधानिक रास्ते से आधे बढ़ेंगे।”

इसी कार्यक्रम में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने भी कहा कि वीर सावरकर को बदनाम करने के लिए देश की आजादी के बाद से ही अभियान चलाया गया। इसके बाद स्वामी विवेकानंद, स्वामी दयानंद सरस्वती और योगी अरविंद को बदनाम करने का नंबर आएगा, क्योंकि सावरकर इन तीनों के विचारों से प्रभावित थे। उन्होंने कहा, “सावरकर जी का हिन्दुत्व, विवेकानंद का हिन्दुत्व ऐसा बोलने का फैशन हो गया है। हिन्दुत्व एक ही है। वो पहले से है और आखिर तक वो ही रहेगा। सावरकर जी ने परिस्थिति को देखकर इसका उद्घोष जोर से करना जरूरी समझा।”

गाय की नाक में रस्सी डाली-पैर बाँधा, सिर पर हथौड़े के वार से कर दी हत्या: पंजाब में कंकाल का 20 फीट ऊँचा ढेर मिला

पंजाब के गुरदासपुर जिले से दिलदहलाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ स्थित एक अवैध बूचड़खाने में जिंदा गायों की नाक के अंदर रस्सी डालकर और पैरों को बाँधकर सिर पर हथौड़े से वार करके उनकी हत्या करने वाले 11 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर​ लिया है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने सोमवार (11 अक्टूबर 2021) रात डेढ़ बजे से लेकर सुबह 5 बजे तक ऑपरेशन चलाकर धारीवाल के गाँव कल्याणपुर व बदेशा गाँव के बीच चल रहे अवैध बूचड़खाने से 11 लोगों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ केस दर्ज किया है। इन सभी पर आरोप है कि ये जिंदा गायों को मार रहे थे।

पुलिस ने बताया कि जब उन्होंने दबिश दी उस समय आरोपितों ने तीन गायों के सिर पर हथौड़े से वार करके उन्हें मार दिया था। एक गाय अधमरी हालत में बेसुध जमीन पर पड़ी थी, जबकि चार को उन्होंने बचा लिया। पुलिस ने सभी आरोपितों गिरफ्तार करने के बाद गायों को पशु अस्पताल पहुँचाया। वहीं, मृत गायों का पोस्टमार्टम करवाकर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने हड्डारोड़ी के मास्टरमाइंड नियामत मसीह निवासी तरीजा नगर, रवि निवासी चक्क दीपेवाल (धारीवाल), विक्की पुत्र जैमस मसीह निवासी तरीजा नगर, रवि पुत्र नियामत मसीह तरीजा नगर, थामस मसीह पुत्र जैमस मसीह, जैसम मसीह पुत्र कुन्नण मसीह, जोनी पुत्र हैपी, तरीजा नगर, बलकार मसीह पुत्र सरदार मसीह तरीजा नगर, वसीक, नासक और तनवीर निवासी ननौटा, सहारनपुर, उत्तर प्रदेश के खिलाफ केस दर्ज किया है। बताया जा रहा है कि मास्टर माइंड नियामत मसीह लंबे समय से यहाँ पर गायों को मारकर उनके मांस बेच रहा था। यहाँ जानवरों के कंकालों का 20 फीट ऊँचा ढेर मिला है।

वहीं, एसएसपी गुरदासपुर डॉ. नानक सिंह का कहना है कि इस मामले से जुड़े सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इसमें आगे होने वाले अहम खुलासे से भी अवगत कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि हमें सूचना मिली थी कि कुछ लोग गायों को गाँव कल्याणपुर में ले जाकर वहाँ उनकी हत्या करके कच्चा मास पैकेट में बंद करके अन्य स्थानों में बेचते हैं। इसके बाद डीएसपी राजेश कक्कड़, उनकी टीम सहित भारी पुलिस फोर्स ने रात को ऑपरेशन शुरू किया। सुबह 5 बजे तक कार्रवाई में पुलिस ने बड़ी संख्या में जिंदा व घायल गायें बरामद कीं। साथ ही गायों के कटे हुए अंग भी बरामद किए गए हैं।