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‘ये हिन्दू घृणा वाला है’: ‘द कारवाँ’ के संपादक विनोद जोस को प्रेस क्लब में मिली नियुक्ति, केंद्र के फैसले का लोगों ने किया विरोध

'द कारवाँ' का इतिहास काफी दागदार रहा है, जिसने न सिर्फ जस्टिस लोया की मौत का मुद्दा उठा कर अमित शाह को बदनाम किया, असीमानंद को आतंकवादी बताने की कोशिश की और अजीत डोभाल के बेटे पर झूठ फैलाया।

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने ‘द कारवाँ’ के मुख्य संपादक विनोद जोस को ‘भारतीय प्रेस परिषद (PCI)’ का सदस्य नियुक्त किया। इससे लोगों में खासा गुस्सा देखा जा रहा है क्योंकि ‘द कारवाँ’ अब तक मोदी और भाजपा विरोधी एजेंडा ही चलाता रहा है और खुद विनोद जोस को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से घृणा करने के लिए जाने जाते हैं। उन्हें भारत-विरोधी और हिंदू धर्म को बदनाम करने वाला पत्रकार भी बताया जाता रहा है।

भारत सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर के ‘Indian Press Council’ का पुनर्गठन किया है, जिसमें विनोद जोस को भी स्थान दिया गया है। गुरुवार (7 अक्टूबर, 2021) को इस संबंध में ‘भारतीय राजपत्र’ के माध्यम से अधिसूचना जारी की गई थी। PCI के 14वें कार्यकाल के लिए 22 सदस्यों की नियुक्ति की गई है। विनोद जोस को ‘अंग्रेजी भाषा के समाचार पत्रों के संपादक’ की कैटेगरी में मनोनीत किया गया है।

IAS अधिकारी संजय दीक्षित ने इसे भारत के दुश्मनों का तुष्टीकरण करार दिया। वहीं कई लोगों ने केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर को टैग कर के उनसे पूछा कि आखिर हिंदुओं से घृणा करने वाले इस व्यक्ति को PCI में क्यों शामिल किया गया है? लोगों ने इसे तुष्टीकरण की राजनीति करार दिया। लोगों ने कहा कि भाजपा में कोई है जो हिंदू आवाजों को दबाना चाहता है। कइयों ने इसे ‘घुसपैठ’ भी करार दिया।

बता दें कि ‘द कारवाँ’ का इतिहास काफी दागदार रहा है, जिसने न सिर्फ जस्टिस लोया की मौत का मुद्दा उठा कर अमित शाह को बदनाम किया, बल्कि असीमानंद को आतंकवादी बताने की कोशिश की थी। कारवाँ मैगजीन के साथ मिल कर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के बेटे विवेक डोभाल के खिलाफ दुष्प्रचार करने के मामले में कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश को कोर्ट में माफ़ी माँगनी पड़ी थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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