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‘JNU के बाद अब DU को हथियाने की तैयारी’: प्रोफेसर ने किया ‘मार्क्स जिहाद’ का खुलासा, केरल के छात्रों को 100% नंबर

दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) की जारी प्रवेश की प्रक्रिया में केरल बोर्ड ऑफ हायर सेकेंडरी एजुकेशन के छात्रों का दबदबा देखने को मिल रहा है। इसको लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर राकेश कुमार पांडेय ने सवाल उठाते हुए इसे ‘मार्क्स जिहाद‘ करार दिया है।

किरोड़ीमल कॉलेज में फिजिक्स के प्रोफेसर पांडेय ने कहा कि पिछले कुछ सालों से वामपंथी-जिहादी साजिश के तहत केरल के छात्रों की डीयू में घुसपैठ करवाई जा रही है। उन्होंने कहा कि केरल बोर्ड अपने छात्रों को 100 प्रतिशत नंबर देता है, जिससे डीयू में प्रवेश आसान हो जाता है। 5 अक्टूबर को की गई एक फेसबुक पोस्ट में उन्होंने कहा, “एक कॉलेज को केवल 20 सीटों वाले पाठ्यक्रम में 26 विद्यार्थियों को प्रवेश देना पड़ता, क्योंकि उन सभी को केरल बोर्ड से 100 प्रतिशत अंक मिले थे। पिछले कुछ सालों से केरल बोर्ड #Marksjihad लागू कर रहा है।”

राष्ट्रीय जनतांत्रिक शिक्षक मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष राकेश पांडेय ने चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में यह प्रमुख विश्वविद्यालय जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की तरह हो जाएगा। उन्होंने जेएनयू पर कब्जा कर ही लिया है अब वे डीयू पर भी कब्जा करेंगे। पांडेय ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा, “वामपंथी अपने वॉलेंटियर से एक विश्वविद्यालय को पूरी तरह पैक करने के लिए प्रवेश प्रक्रिया में हेरफेर करने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने जेएनयू में दशकों तक सफलतापूर्वक ऐसा किया है।”

पांडेय ने अपनी ‘मार्क्स जिहाद’ टिप्पणी के जरिए लेफ्ट-लिबरल गैंग पर अपना गुस्सा निकाला है। वह जोर देकर कहते हैं कि इस तरह के संगठित मिशनरी जिहादी और वामपंथी एजेंडे का फैलाव डीयू को बर्बाद कर देगा। इस बीच केरल के मानव संसाधन विकास मंत्री वी शिवनकुट्टी ने उनके खिलाफ कार्रवाई की माँग की है और वामपंथी छात्र संगठन उनके खिलाफ कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। इस बीच कूदते हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने मार्किंग सिस्टम को तर्कसंगत बनाने की माँग की है।

केरल के छात्रों का बढ़ रहा दबदबा

प्रोफेसर ने कहा कि वह पिछले तीन वर्षों से इस ट्रेंड पर नजर रख रहे हैं और ये देखा जा रहा है कि केरल के छात्रों का दबदबा लगातार बढ़ रहा है और केरल बोर्ड से 100 प्रतिशत प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि कोई बोर्ड प्रवेश प्रक्रिया पर हावी होना चाहता है तो शत-प्रतिशत अंक देकर आसानी से किया जा सकता है। प्रोफेसर ने कहा, “मुझे लगता है कि इसके पीछे एक मकसद है। कुछ लोग हैं जो अपने वॉलेंटियर को डीयू में भेजना चाहते हैं।”

राकेश पांडेय का अपनी टिप्पणी को वापस लेने या माफी माँगने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका इशारा सिर्फ अनुचित पेपर मूल्याँकन की ओर है और मार्क्स जिहाद संदर्भित है। उन्होंने कहा कि जिस तरह धर्म को फैलाने के इरादे से किया गया प्यार लव जिहाद है, उसी तरह वामपंथी विचारधारा फैलाने के लिए दिए जाने नंबर ‘मार्क्स जिहाद’ हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों के अंकों में अकथनीय वृद्धि और केरल बोर्ड से आवेदनों की संख्या में हो रही अप्रत्याशित वृद्धि के पीछे की साजिश वैचारिक है, न कि धर्म से प्रेरित।

प्रोफेसर पांडेय के मुताबिक, उन्होंने कहा कि वामपंथी हानिकारक और बड़ा खतरा हैं। केरल के ‘राइसबैग’ छात्र डीयू के परिसरों में जहरीली विचारधारा और जिहाद का इंजेक्शन लगाएँगे। पांडेय को डीयू में वामपंथियों के आने से बार-बार होने वाली हड़तालों और परिसर में हिंसा का डर है। वह इस बात से आश्चर्यचकित हैं कि 100 फीसदी साक्षर और हार्वर्ड को पीछे छोड़ने वाली शिक्षा के बाद भी केरल के छात्र यहाँ आ रहे हैं।

पांडेय ने आगे कहा, “या फिर उन्हें (वामपंथियों को) महसूस हुआ है कि उन्होंने केरल को भी वामपंथी शासन के बाद एक मनहूस राज्य में बदल चुके बंगाल की तरह बना दिया है।” उन्होंने दावा किया कि डीयू में पढ़ाई का माध्यम अँग्रेजी और हिंदी है और केरल के इन छात्रों में से अधिकांश अंग्रेजी और हिंदी, दोनों में कमजोर हैं।

समाचार वेबसाइट tfipost ने डीयू में केरल स्टेट बोर्ड के छात्रों के अधिक संख्या में प्रवेश का संकेत देने वाले कुछ डेटा का विश्लेष्ण किया है। रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है कि इस साल कुछ कोर्स में 100 प्रतिशत कट-ऑफ होने के बावजूद प्रवेश प्रक्रिया में केरल के छात्रों का दबदबा है। 100 प्रतिशत कट-ऑफ वाले 10 पाठ्यक्रमों में से 3 ने 6 अक्टूबर 2021 को ही अपनी प्रवेश प्रक्रिया बंद कर दी। अनारक्षित श्रेणी के तहत भर्ती हुए 206 छात्रों में से 95 प्रतिशत से अधिक छात्र केरल स्टेट बोर्ड के स्टूडेंट हैं। टीएफआई की रिपोर्ट में इस बात पर शक जताया गया है कि 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में से अगर केरल प्रवेश में 95 प्रतिशत सीटों पर कब्जा कर लेता है तो इसका अर्थ यह है कि राज्य में या तो सबसे बेहतर प्रणाली है या फिर कुछ गड़बड़ है।

केरल बोर्ड अपने छात्रों का फाइनल रिजल्ट घोषित करने से पहले कक्षा 11वीं और कक्षा 12वीं दोनों के औसत अंकों का उपयोग करता है, जबकि डीयू केवल 12वीं के कट-ऑफ मार्क्स के आधार पर एडमिशन देता है। इसके अलावा, केरल के मानव संसाधन विकास मंत्री वी शिवनकुट्टी को अच्छी तरह पता है कि केरल बोर्ड 12वीं कक्षा में नंबर देने में काफी लिबरल है।

मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि डीयू के अधिकारियों को भी केरल के आवेदकों के कक्षा 11वीं और कक्षा 12वीं के अंकों में गड़बड़ियाँ मिली हैं।

अब शाहरुख खान का ड्राइवर NCB की रडार पर, पूछताछ के लिए बुलाया: चरस लेने की बात कबूल चुके हैं आर्यन खान

मुंबई की क्रूज ड्रग पार्टी केस में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की कार्रवाई तेजी से आगे बढ़ रही है। सुपरस्टार शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की गिरफ्तारी के बाद अब जाँच एजेंसी ने उनके ड्राइवर को समन भेजा है। ड्राइवर का नाम राजेश मिश्रा है। एनसीबी उनसे पूछताछ कर रही है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ड्राइवर से होने वाली पूछताछ जाँच का ही हिस्सा है। पहले की जाँच में सामने आया था कि आर्यन खान, अरबाज मर्चेंट, प्रतीक गाबा के साथ एक और शख्स आर्यन के बंगले ‘मन्नत’ से क्रूज पार्टी के लिए मर्सिडीज गाड़ी में गया था। रिपोर्ट कहती है कि, इसके पीछे कोई प्लॉन था जिसकी जानकारी के बाद एनसीबी ने एनडीपीएस के सेक्शन-29 को एफआईआर में एड किया था।

बता दें कि एक ओर जहाँ एनसबी लगातार इस मामले में अपनी कार्रवाई कर रही है। वहीं एनसीपी के नेता नवाब मलिक ने जाँच एजेंसी पर वसूली गिरोह चलाने और लोगों को परेशान करने का आरोप लगाया था। ऐसे में एनसीबी ने वीडियो जारी करते हुए अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज किया है।

एनसीबी का कहना है कि पूरी कार्रवाई बिना किसी राजनैतिक दबाव के और साफ तरीके से की गई है। एनसीबी अधिकारी ने कहा कि एनसीपी नेता की ओर से लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। उन्होंने बताया कि एनसीबी अपने इंटेलिजेंस व पब्लिक से मिली सूचना के आधार पर कार्रवाई करती है। ऐसी ही एक सूचना के आधार पर क्रूज शिप पर 2 अक्तूबर को रेड की गई थी, जिसमें 8 लोग गिरफ्तार हुए थे। एनसीबी ने बताया कि उनके पास से ड्रग्स के साथ 1 लाख 35 हजार रुपए भी बरामद हुए। 

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, एनसीबी ने बताया, “किसी भी कार्रवाई से पहले हमें गवाह के तौर पर लोगों को शामिल करना होता है। क्रूज शिप पर हुई रेड में 9 स्वतंत्र गवाह बनाए गए थे, जिसमें मनीष भानुशाली और केपी गोसावी भी थे।” उन्होंने बताया कि इस रेड से पहले एनसीबी उन गवाहों को जानती नहीं थी।

गौरतलब है कि मुंबई क्रूज ड्रग पार्टी के मामले में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने शनिवार (9 अक्टूबर 2021) को प्रोड्यूसर इम्तियाज खत्री के बांद्रा स्थित घर और ऑफिस पर छापे मारे थे। वहीं, दूसरी ओर ये खबर भी आई थी कि आर्यन पूछताछ में इस बात को कबूल कर चुके हैं कि वह चरस पीते हैं और क्रूज पार्टी वाले दिन भी वह ऐसा करने वाले थे।

गुरुग्राम में सार्वजनिक जगह पर नमाज के विरोध में महिलाओं का भजन-कीर्तन, कहा- खाली जमीन का मतलब यह नहीं कि कोई कब्जा कर ले

सार्वजनिक जगहों पर नमाज अदा किए जाने का पिछले दिनों से गुरुग्राम में विरोध हो रहा है। शनिवार को (अक्टूबर 9, 2021) गुरुग्राम सेक्टर 47 की हिंदू महिलाएँ भी विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बनीं। उन्होंने खुने में नमाज का विरोध करते हुए भजन-कीर्तन और आरती की। इसके साथ ही वहाँ जमा हुए मुस्लिमों ने भी नमाज अदा की।

गुरुग्राम न्यूज ने इसका वीडियो शेयर किया है जिसमें सेक्टर 47 में काफी भीड़ देखी जा सकती है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इलाके की हिंदू महिलाओं ने सार्वजनिक तौर पर होने वाली नमाज का विरोध किया। वीडियो में देखा जा सकता है कि महिला और पुरुष दोनों मौके पर नारे लगा रहे थे। कथित तौर पर, हिंदू महिलाओं ने मुस्लिमों द्वारा सार्वजनिक तौर पर किए जाने वाले नमाज के विरोध में ‘भजन’ और ‘कीर्तन’ किए। वे बैनर लेकर कम्युनिटी सेंटर से स्टेट विजिलेंस ब्यूरो के सामने तक प्रदर्शन करते हुए आए। साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच नमाज भी अदा की गई।

वार्ड नंबर 29 के एमसीजी पार्षद कुलदीप यादव ने कहा कि वहाँ नमाज अदा करने के लिए किसी प्राधिकरण से अनुमति नहीं थी और स्थानीय लोग भी इसका विरोध कर रहे थे। यादव ने सवाल किया, “मस्जिद यहाँ से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर है और वे वहाँ जा सकते हैं। सार्वजनिक स्थान पर कब्जा क्यों किया जा रहा है?”

सेक्टर 47 की एक महिला ने कहा कि जब तक यहाँ खुले में शुक्रवार को नमाज अदा करना बंद नहीं होता है तो वह भजन और आरती करना जारी रखेंगी। उन्होंने कहा, खाली जमीन का मतलब यह नहीं है कि कुछ लोग उस पर कब्जा कर सकते हैं। क्या वे हमें इस जमीन पर कुछ भी निर्माण करने देंगे? जवाब है- नहीं। विरोध में शामिल हुई एक अन्य महिला ने कहा कि वह किसी मजहब का विरोध करने के लिए नहीं, बल्कि सार्वजनिक जगह पर नमाज का विरोध करने के लिए आई हैं।

उल्लेखनीय है कि पिछले महीने इलाके में सार्वजनिक तौर पर हो रहे नमाज के खिलाफ भारी विरोध-प्रदर्शन हुआ था। स्थानीय निवासियों ने अपने स्थान के आसपास मुस्लिम पुरुषों की भीड़ का विरोध किया और उन पर कानून-व्यवस्था तोड़ने का आरोप लगाया। बाद में गुरुग्राम पुलिस ने दावा किया था कि हिंदुओं और मुसलमानों के बीच आपसी चर्चा के बाद मुस्लिमों को सार्वजनिक स्थानों पर नमाज़ अदा करने की अनुमति दी गई थी। इसके बाद एक आरटीआई दायर किया गया।

गुरुग्राम जिला न्यायालय के वकील अभिषेक शर्मा ने RTI दायर की थी। जिसमें उन्होंने ऐसे नमाज स्थलों और समुदायों के प्रतिनिधियों का विवरण माँगा, जो ‘आपसी समझौतों’ में शामिल थे। शर्मा ने जन सूचना अधिकारी को पत्र लिखकर अतिक्रमणकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की भी जानकारी माँगी है। बाद में गुरुग्राम पुलिस ने उस ट्वीट को डिलीट कर दिया है जिसमें उन्होंने दावा किया था कि सार्वजनिक स्थानों पर नमाज की अनुमति हिंदुओं और मुसलमानों दोनों के आपसी समझौते के बाद दी गई थी।

‘असम के अधिकतर मुस्लिम धर्मांतरित, उनके हिन्दू पूर्वज नहीं खाते थे बीफ’: बोले CM हिमंता बिस्वा सरमा – मेरे फैसले से वो खुश

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि राज्य के अधिकतर मुस्लिम धर्मांतरित हैं, जिनके पूर्वज हिन्दू थे और बीफ नहीं खाते थे। ‘इंडिया टुडे कन्क्लेव’ में उन्होंने असम में अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान पर भी बात की। उन्होंने कहा कि असम में कोई ‘हेट नैरेटिव’ नहीं है और एक विरल वीडियो में लाश पर कूदते दिख रहे व्यक्ति को गिरफ्तार भी किया गया। उन्होंने कहा कि असम के अधिकतर लोग मानते हैं कि बांग्लादेश के मुस्लिमों ने घुसपैठ कर के अतिक्रमण किया।

उन्होंने कहा कि वो असम के मुस्लिमों को हमेशा याद दिलाते हैं कि आपके पूर्वज बीफ नहीं खाया करते थे, आप कम से कम इसके इस्तेमाल को तो बढ़ावा मत दो। उन्होंने ध्यान दिलाया कि इस देश में कई लोग परंपरा की बात करने पर नाराज हो जाते हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमांत बिस्वा सरमा ने कहा कि अधिकार हमारी सभ्यता के मूल्यों से ही निकले हैं, ऐसे में इसे स्वतंत्र नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।

उन्होंने धार्मिक स्थलों के 5 किलोमीटर के दायरे में बीफ को प्रतिबंधित किए जाने के फैसले का भी बचाव करते हुए कहा कि मुस्लिम इस निर्णय से खुश हैं और इससे आपसी सौहार्द में भी वृद्धि हुई है। उन्होंने पूछा कि क्या आपने बीफ खाने के नए नियमों पर असम में किसी मुस्लिम संगठन का विरोध देखा है? साथ ही कहा कि इस फैसले के खिलाफ जो विरोध हो रहा है, वो लेफ्ट लिबरलों द्वारा किया जा रहा है।

‘इंडिया टुडे कन्क्लेव’ में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा

NRC पर भी उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इसे लागू किया गया। उन्होंने कहा कि इस फैसले से कोई सांप्रदायिक तनाव नहीं होगा, इसे सांप्रदायिक तनाव को कम करने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि 77,000 एकड़ जमीन पर किसी 1000 परिवार का कब्जा नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि 2 एकड़ के हिसाब से इनके पास 2000 एकड़ होना चाहिए, लेकिन बाकी के 75,000 एकड़ का क्या?

प्रियंका गाँधी के झाड़ू लगाने की तस्वीरों पर उन्होंने कहा, “प्रियंका के द्वारा फर्श पर झाड़ू लगाने को देशव्यापी मुद्दा क्यों बनाया जा रहा है? इसे जश्न की तरह क्यों दिखाया जा रहा है? मेरी माँ भी घर में झाड़ू लगाती है। लाखों भारतीय अपने घरों में यह काम करते हैं।” उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बीजेपी को मियाँ वोट नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं उनके पास वोट के लिए नहीं जाता और वे भी मेरे पास नहीं आते हैं।

जबरन करवाई पोर्न फिल्मों की शूटिंग, एडल्ट एप पर अपलोड भी किया: 500 पन्नों की चार्जशीट से गहना गैंग बेनकाब

पोर्न फिल्में बनवाने और रेप कराने के आरोपों से घिरीं एक्ट्रेस गहना वशिष्ठ के खिलाफ मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नई चार्जशीट दाखिल की है। नई चार्जशीट में गहना पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। 500 पन्नों की इस चार्जशीट में पुलिस ने गहना के अलावा फिल्म प्रोड्यूसर अभिजीत बोम्बले, अजय श्रीमंत, प्रिंस कुमार और अरविंद कुमार श्रीवास्तव उर्फ यश ठाकुर को आरोपित बनाया है। इन लोगों पर स्ट्रगलिंग मॉडलों और एक्ट्रेस को जबरदस्ती पोर्न फिल्मों में काम करवाने और बाद में उनके वीडियो तीन एडल्ट ऐप पर अपलोड करने का आरोप लगाया गया है।

पुलिस ने बताया कि बोम्बले और श्रीमंत को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया है। गहना वशिष्ठ अभी जमानत पर हैं। वहीं, प्रिंस कुमार कश्यप और यश ठाकुर फरार हैं। इनके ऊपर भारतीय दंड संहिता की धाराओं में मामले दर्ज किए गए हैं। इसमें अश्लील किताबें बेचना, अश्लील हरकतों से महिलाओं के चरित्र हनन, धोखाधड़ी और आईटी एक्ट जैसे आरोप शामिल हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई चार्जशीट मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज किए गए दूसरे केस में लगाई गई है। पोर्नोग्राफी के मामले में क्राइम ब्रांच 4 मामलों की जाँच कर रही है, जबकि एक अन्य मामले की जाँच लोनावाला पुलिस कर रही है।

बताया जा रहा है कि नई चार्जशीट मध्य प्रदेश की रहने वाली 21 साल की एक मॉडल की शिकायत पर दाखिल की गई है। उसने आरोप लगाया है कि उसे फिल्मों में काम दिलाने का झाँसा देकर बॉम्बले, श्रीमंत, गहना वशिष्ठ और बाद में यश ठाकुर लोखंडवाला के अलग-अलग बंगलों पर लेकर गए और जबरन उससे पोर्न फिल्मों में काम कराया। उसने इन क्लिप्स को 3 अलग-अलग ऐप्स पर अपलोड करने के भी आरोप लगाए हैं।

गौरतलब है कि फरवरी 2021 में कुछ मॉडल्स ने गहना वशिष्ठ व अन्य पर आरोप लगाते हुए कहा था कि उन्होंने जबरन पोर्न और अश्लील फिल्में शूट करवाई थीं। मॉडल्स ने गहना पर शूटिंग के सेट पर रेप करवाए जाने का भी आरोप लगाया था। इसके बाद गहना को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। फिलहाल वह जमानत पर है।

बाद में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पोर्न फिल्मों को लेकर राज कुंद्रा को भी गिरफ्तार किया था। उस दौरान गहना लगातार कुंद्रा के सपोर्ट नजर आई थीं। उन्होंने कहा था, “मुझे राज के गिरफ्तारी के बारे में पता चला, मैं सिर्फ यह कहना चाहूँगी कि कोई भी पॉर्न नहीं बना रहा है, कोई गंदे वीडियो नहीं बना रहा। नार्मल वीडियो थे जैसे एकता कपूर ‘गंदी बात’ बनाती हैं और ‘पार्च्ड’ न जाने कितनी फिल्में हैं। इन सारी सीरीज़ में उनसे कम बोल्डनेस है।” फिलहाल राज अभी जमानत पर हैं।

बसपा, थप्पड़, शौचालय… बारूद फैक्ट्री से निकल नेता बने कांशीराम के सियासी सफर में कितने मोड़

बसपा संस्थापक कांशीराम ने जिस पार्टी को फर्श से अर्श तक पहुँचाया था, उसकी हालत आज पूरी तरह से खस्ता हो चुकी है। उत्तर प्रदेश में चार बार सरकार बना चुकी पार्टी का ग्राफ लगातार गिरता ही जा रहा है। हालात ये है कि कांशीराम की उत्तराधिकारी मायावती ने खोए हुए जनाधार को फिर से हासिल करने के लिए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर जिलास्तर के पदाधिकारी तक सभी बदल दिए, लेकिन स्थिति जस की तस है।

उत्तर प्रदेश में आगामी चुनाव की तैयारियाँ शुरू हो गई हैं, लेकिन पार्टी की ओर से कहीं कोई सुगबुगाहट नहीं दिख रही है। कांशीराम को भारत में दलितों के उत्थान के लिए काम करने वाले सबसे बड़े नेताओं के रूप में जाना जाता था। दलितों के उत्थान के नाम पर ही चार बार मायावती प्रदेश की सियासत में भी आई। लेकिन, उनका गिरता सियासी पारा अब थमता नहीं दिख रहा है। वहीं पार्टी के संस्थापक कांशीराम के सियासी सफरनामे पर नजर डालें तो पंजाब के रोपड़ जिले के खवासपुर गाँव में 15 मार्च 1934 को कांशीराम का जन्म हिंदू परिवार में हुआ था, लेकिन बाद में उन्होंने सिख धर्म अपना लिया था। वे पुणे की गोला-बारूद फैक्ट्री में क्लास वन ग्रेड के अधिकारी थे।

इसी फैक्ट्री में राजस्थान के रहने वाले दीनाभाना चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी के तौर पर काम करते थे। वे अंबेडकर जयंती पर घर जाना चाहते थे और इसी को लेकर उनका उनके वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विवाद हुआ और उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। उनका पक्ष लेने आए डीके खापर्डे को भी सस्पेंड कर दिया गया। इसका पता चलने पर कांशीराम ने भी विरोध किया। नतीजा यह हुआ कि उन्हें भी नौकरी से निकाल दिया गया। इसके बाद उन्होंने सस्पेंड करने वाले अधिकारी को पीट दिया और दलितों के उत्थान के लिए निकल पड़े।

यहीं से नीव पड़ी दलित कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए काम करने वाले संगठन बामसेफ (Backward And Minority Communities Employees Federation) की। 6 दिसंबर 1978 का दिन था जब राष्ट्रपति भवन के सामने स्थित बोटक्लब मैदान पर तीन लोगों ने मिलकर बामसेफ की। ये तीन लोग कांशीराम, डीके खापर्डे और दीनाभाना थे। कांशीराम ने दिल्ली महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा समेत कई राज्यों में संगठन को मजबूती देते हुए लाखों लोगों को इससे जोड़ा।

BSP की स्थापना

दलितों और वंचितों के लिए संघर्ष करते हुए कांशीराम को इस बाता का अहसास हुआ कि राजनीतिक सत्ता के बिना दलितों की आवाज बन पाना मुश्किल है। इसलिए उन्होंने 14 अप्रैल 1984 को एक ऐसा फैसला लिया जिसके बाद BSP का जन्म हुआ। हालाँकि, इसका असर यह हुआ कि बामसेफ टूट गया और उनके कई साथी इससे अलग हो गए।

मायावती से मुलाकात

दलितों को उनका अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे कांशीराम को ही मायावती को राजनीति में लाने का श्रेय दिया जाता है। मायावती दिल्ली विश्वविद्यालय से लॉ की पढ़ाई कर रही थीं। इसके साथ ही वो IAS की तैयारी भी कर रही थीं। DU में एक कार्यक्रम के दौरान मायावती ने मंच पर दलितों के उत्थान को लेकर एक भाषण दिया था। इस भाषण से प्रभावित होकर कांशीराम मायावती से मिलने गए। उन्होंने मायावती से उनके भविष्य की योजनाओं को लेकर पूछा तो उन्होंने कहा कि वो IAS बनना चाहती हैं। इस पर कांशीराम ने उन्हें समझाया कि IAS बनकर दलितों के लिए काम करना मुश्किल है, क्योंकि अधिकारियों को भी नेताओं की बात माननी होती है, इसलिए राजनीति में आओ। इसके बाद मायावती अपनी पढ़ाई छोड़ राजनीति में आ गईं।

आशुतोष को जड़ दिया था थप्पड़

पूर्व पत्रकार और नेता आशुतोष, कांशीराम के एक थप्पड़ के कारण सुर्खियों में आए थे। घटना 1996 की है, जब कांशीराम के घर के बाहर पत्रकारों की भीड़ लगी हुई थी। वो उनकी बाइट लेना चाहते थे। लेकिन, कांशीराम के समर्थकों ने पत्रकारों को वहाँ से हटा दिया। बावजूद इसके बाइट लेने पर अड़े पत्रकारों से नाराज कांशीराम ने आशुतोष को थप्पड़ मार दिया था। इस घटना से 4 साल पहले 1992 में अयोध्या में विवादित ढाँचे को लेकर बयान देते हुए कांशीराम ने कहा था कि उस ढाँचे की जगह शौचालय बनवा देना चाहिए।

जब मिल गए मुलायम-कांशीराम

बात 1991 की है जब समाजवादी पार्टी के प्रमुख रहे मुलायम सिंह और कांशीराम की दोस्ती एक घटना से हुई थी। दरअसल, इटावा में लोकसभा उपचुनाव हो रहा था, जिसमें कांशीराम उम्मीदवार थे। उस चुनाव को जीतने में मुलायम सिंह यादव ने उनकी मदद की। इसके अगले साल 1992 में बाबरी विध्वंस के बाद जब केंद्र सरकार ने यूपी की कल्याण सिंह सरकार को बर्खास्त कर दिया तो मुलायम और कांशीराम की दोस्ती अपनी बुलंदियों पर थी। उस दौरान एक नारा दिया गया था, ‘मिले मुलायम कांशीराम, हवा में उड़ गए जय श्रीराम’। 1993 में सपा-बसपा ने गठबंधन कर चुनाव भी लड़ा था। हालाँकि, 1995 के गेस्ट हाउस कांड से दोनों में दूरियाँ बढ़ गई थीं।

कांशीराम की मौत

BSP के संस्थापक कांशीराम की मौत को लेकर हमेशा से एक विवाद रहा है। कांशीराम की बहन स्वर्ण कौर ने एक बार ये आरोप लगाया था कि मायावती ने उनके भाई को बंधक बना लिया था और बाद में उनकी हत्या कर दी। उन्होंने मायावती को दुश्मन नंबर वन करार दिया था। उल्लेखनीय है कि कांशीराम की मौत 9 अक्टूबर 2006 में हुई थी।

राम-रावण बनने के लिए रणबीर-ऋतिक लेंगे 75-75 करोड़ रुपए: ₹750 करोड़ की होगी सीरिज, ‘सीता’ बनने की न्यूज करीना ने फिक्स करवाई

बॉलीवुड के दो जाने-माने चेहरे रणबीर कपूर और ऋतिक रौशन जल्द ही राम और रावण के किरदार में नजर आएँगे। फिल्म निर्देशक नीतेश तिवारी की ‘रामायण’ में दोनों के रोल देखने को मिलेंगे। जानकारी के मुताबिक, ये रामायण तीन पार्ट की सीरिज होगी। इसका कुल खर्च 750 करोड़ रुपए आएगा जबकि दोनों एक्टर्स को ये रोल करने के लिए 150 करोड़ (75-75 करोड़) रुपए दिए जाएँगे।

बता दें कि इससे पहले तमाम लोगों ने रामायण को पर्दे पर उतारने का बहुत प्रयास किया है। लेकिन जैसी ख्याति रामानंद सागर की रामायण को मिली, वैसी शायद ही कभी किसी को मिल पाए। उसके एक-एक किरदार और दृश्य से दर्शक इतने प्रभावित हैं कि तमाम प्रयास के बावजूद कोई निर्देशक उस स्तर पर नहीं पहुँच पाता ।

खैर, अब एक कोशिश और होने जा रही है और अच्छे खासे बजट के साथ, जिसमें लीड एक्टर्स को भी बड़ा अमाउंट मिलेगा। नीतेश तिवारी और उनकी टीम, राम और रावण के किरदार के लिए एक्टर मिलने के बाद अब सीता के रोल के लिए अभिनेत्री तलाश रहे हैं। कुछ लोग करीना कपूर के भी सीरिज से जुड़े होने की बातें कह रहे थे। हालाँकि, बाद में पता चला ये अफवाह उनकी मार्केटिंग टीम ने उड़वाई थी

इस बीच, ऋतिक रोशन और रणबीर कपूर ने हाल ही में नीतेश तिवारी और निर्माता मधु मंटेना के साथ अपनी पहली आधिकारिक मुलाकात की। जहाँ उन्होंने इस बड़े प्रोजेक्ट और यहाँ तक ​​कि अगले साल की दूसरी छमाही में इसे फ्लोर पर ले जाने की संभावित योजनाओं पर चर्चा की।

गैर-मुस्लिम लड़कियों के साथ लिव-इन, फिर निकाह और धर्मांतरण: सरफराज के मोबाइल से मिले कई सबूत, विदेश से फंडिंग

अवैध धर्मांतरण मामले में गिरफ्तार मौलाना कलीम सिद्दीकी के सहयोगी सरफराज अली जाफरी को लेकर उत्तर प्रदेश ATS ने कई बड़े खुलासे किए हैं। पुलिस को आरोपित सरफराज अली के मोबाइल से कई अहम सबूत मिले हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरफराज के फोन से गैर मुस्लिम महिलाओं से लिव इन रिलेशनशिप में रहकर निकाह करने के भी साक्ष्य मिले हैं। एटीएस ने खुलासा किया कि सरफराज व मौलाना कलीम के नेटवर्क के जरिए जिन लोगों का धर्मांतरण किया जाता था, उनका ब्यौरा मौलाना उमर गौतम की संस्था इस्लामिक दावा सेंटर को भी भेजा जाता था। ऐसा कहा जा रहा है विदेश से फंडिंग के लिए यह ब्यौरा साझा होता था।

इस्लामी धर्मान्तरण रैकेट की जाँच कर रही उत्तर प्रदेश ATS ने गुरुवार (7 अक्टूबर 2021) को बड़ी कार्रवाई करते हुए मौलाना कलीम सिद्दीकी के सहयोगी सरफराज अली जाफरी को गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी अमरोहा जिले से की गई थी। बताया जा रहा है कि भारत के ‘सबसे बड़े धर्मांतरण गिरोह’ को चलाने के आरोपित मौलाना कलीम सिद्दीकी के साथ मिलकर काम कर रहा था और 2016 से ही इसमें लिप्त था।

गौरतलब है कि कलीम सिद्दीकी को पिछले महीने ही ATS ने गिरफ्तार किया था। ATS के आईजी जीके गोस्वामी ने खुलासा किया कि मौलाना सिद्दीकी से पूछताछ के दौरान सरफराज अली जाफरी के बारे में जानकारी मिली थी। उन्होंने कहा, “मौलाना कलीम सिद्दीकी के ग्लोबल पीस सेंटर में जाफरी काम करता था। वह रिवर्ट, रिहैब और दावा व्हाट्सएप ग्रुप का भी मेंबर था। इसी के जरिए उसके गिरोह के लोगों ने धार्मिक नफरत फैलाने के साथ ही लोगों को लालच देकर उन्हें इस्लाम अपनाने के लिए प्रेरित किया।”

ये लोग धर्मान्तरण करने वाले लोगों को काम दिलाने में मदद करने का वादा करते थे। इसके लिए जाफरी को मौलाना सिद्दीकी से फंडिंग मिलती थी। उसके सेलफोन की जाँच से पता चला है कि गैरकानूनी धर्मान्तरण की गतिविधियों के लिए उसे विदेशों से भी फंडिंग मिलती थी।

‘BJP वर्कर की हत्या करने वाले दोषी नहीं, वह एक्शन का रिएक्शन’: राकेश टिकैत ने लखीमपुर खीरी में लिंचिंग को जायज ठहराया

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने शनिवार (अक्टूबर 9, 2021) को कहा कि लखीमपुर खीरी हिंसा के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं की लिंचिंग को वह गलत नहीं मानते। उन्होंने कहा, “जो हुआ वो गलत नहीं था। मैं उनको दोषी नहीं मानता।” उनका कहना है कि पीट-पीट कर मारना उनकी नजर में हत्या नहीं है। ये बातें ‘किसान नेता’ ने दिल्ली प्रेस क्लब में मीटिंग के दौरान कहीं।

टिकैत ने कहा कि लखीमपुर में भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या करने वालों को दोषी मत समझो, उन्होंने केवल प्रदर्शनकारियों के ऊपर एसयूवी चढ़ाए जाने की प्रतिक्रिया में ऐसा किया। वह हत्या में नहीं आता है। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं की पीट-पीट कर हत्या करना केवल ‘एक्शन का रिएक्शन’ था। कोई प्लानिंग नहीं थी।  

इधर संयुक्त किसान मोर्चा ने लखीमपुर खीरी हिंसा के विरोध में 15 अक्टूबर को पुतला दहन का ऐलान किया है। किसान नेता राकेश टिकैत का कहना है कि हिंसा का विरोध जताते हुए वह दशहरे के दिन पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का पुतला जलाएँगे। राकेश टिकैत ने ऐलान किया है कि 26 अक्टूबर को संयुक्त किसान मोर्चा बैठक कर पूरे देश में कलश यात्राएँ निकालेगा। इसके साथ ही 18 अक्टूबर को किसान संगठन 6 घंटे ट्रेन रोकेंगे।

संयुक्त किसान मोर्चा नेता योगेंद्र यादव 18 अक्टूबर को रेल रोको का आह्वान किया है। संयुक्त किसान मोर्चा की माँग है कि जल्द ही लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में जल्द ही अजय मिश्रा टेनी और मुख्य आरोपित उनके बेटे आशीष मिश्रा की गिरफ्तारी हो। इसके साथ ही वह अजय टेनी को केंद्रीय गृह राज्यमंत्री पद से बर्खास्त करने की भी माँग कर रहे हैं। वहीं योगी सरकार पर आरोप लगाते हुए संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि सरकार पावरफुल लोगों को बचाने में जुटी हुई है।

योगेंद्र यादव ने शनिवार को जानकारी दी कि संयुक्त किसान मोर्चा 12 सितंबर को लखीमपुर से ‘शहीद’ किसान कलश यात्रा शुरू करेगा। उन्होंने कहा, ”हम हर नागरिक से अपील करते हैं कि 12 सितंबर की शाम 7 बजे अपने घरों के बाहर पाँच मोमबत्तियाँ जलाएँ।”

वहीं, किसान नेता दर्शनपाल ने कहा कि किसानों को गाड़ी से कुचलकर दोषियों ने डर का माहौल बनाने की कोशिश की थी, लेकिन किसान नहीं डरेंगे। उन्होंने लखीमपुर खीरी हिंसा को पूर्व नियोजित बताया। वहीं, किसान नेता जोगिंदर सिंह उग्राहन ने कहा कि प्रदर्शनकारी किसानों के खिलाफ सरकार द्वारा हिंसक रूप अपनाया गया है। साथ ही उन्होंने साफ किया कि वह हिंसा का रास्ता नहीं अपनाएँगे। इसके साथ ही उन्होंने भी मंत्री अजय मिश्रा और उनके बेटे आशीष की गिरफ्तारी की माँग की।

यूपी: एटा में रज्जाक ने कुल्हाड़ी से काटकर मंदिर के पुजारी को उतारा मौत के घाट

उत्तर प्रदेश के एटा जिले के कोतवाली देहात थाने के अंतर्गत आने वाले गाँव नगला जगरूप में शुक्रवार (8 अक्टूबर 2021) की रात एक मंदिर के पुजारी की हत्या कर दी गई। इस हत्याकांड में पुलिस ने रज्ज़ाक नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुजारी की हत्या करने के लिए आरोपित रज़्ज़ाक ने कुल्हाड़ी का प्रयोग किया था, जिसे एटा पुलिस ने बरामद कर लिया है। मृत पुजारी का नाम कृपाल सिंह था, और उसकी उम्र लगभग 52 वर्ष बताई जा रही है।

घटनास्थल पर मौजूद ग्रामवासी

घटनास्थल पर मौजूद पुलिस बल –

पुलिस की प्राथमिक जाँच में पता चला कि मृतक पुजारी कृपाल सिंह गाँव वालों के बीच “बाबा साधु” नाम से चर्चित थे। बताया जा रहा है कि मृतक पुजारी और हत्यारोपित रज्जाक में पहले अच्छी दोस्ती हुआ करती थी और दोनों अक्सर साथ ही देखे जाते थे। दोनों खाना भी अक्सर साथ ही खाते थे।

गाँव वालों को इस घटना की जानकारी शनिवार को हो पाई, जब उन्होंने ने मंदिर परिसर में पुजारी का लहूलुहान मृत शरीर देखा था। मृत पुजारी कृपाल सिंह एटा के ही गढ़ी तालुका के रहने वाले थे जो एक माह पहले मंदिर में पूजा-पाठ आदि के लिए आए थे।

पुलिस के अनुसार हत्यारोपित रज़्ज़ाक की उम्र लगभग 45 वर्ष है। इस हत्याकांड पर बयान देते हुए एटा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक IPS उदय शंकर सिंह ने बताया कि- “हिरासत में लिए आरोपित रज़्ज़ाक से पूछताछ जारी है। प्रारंभिक पूछताछ में यह प्रकाश में आया है कि रात में मृतक पुजारी और आरोपित रज़्ज़ाक दोनों ने एक साथ खाना खाया जिसके बाद दोनों में कुछ आपसी विवाद हुआ। बतौर SSP एटा इसी विवाद के चलते रज़्ज़ाक ने पुजारी कृपाल सिंह की हत्या कर दी।

आरोपित रज़्ज़ाक नशे का आदी बताया जा रहा है। पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर कोतवाली देहात पुलिस ने ऑपइंडिया को बताया कि हत्यारोपित रज्जाक अक्सर गाँजा (Marijuana) के नशे में रहता था। आशंका ये भी जताई जा रही है कि घटना के दिन भी उसने गाँजे का सेवन किया था और उसी के चलते उसने पुजारी का कत्ल कर दिया। इसी के साथ पुलिस इस घटना से जुड़े हर पहलू की पड़ताल कर रही है और आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है।