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‘नेपाल भाग गए हैं मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा’: मीडिया गिरोह के झूठ का पर्दाफाश, अजीत अंजुम और राना अयूब ने भी किया था दावा

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी किसान हिंसा मामले में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय कुमार मिश्रा के बेटे आशीष मोनू रविवार (9 सितंबर, 2021) को यूपी पुलिस के समक्ष पूछताछ के लिए पेश हुए। उन्हें दिन में 11 बजे पेश होना था, लेकिन वो 15 मिनट पहले ही पहुँच गए। वो स्कूटी से पुलिस लाइन पहुँचे। मजिस्ट्रेट के सामने अब उनसे पूछताछ की जा रही है। 40 सवालों की सूची उनके सामने रखी गई है।

इससे पहले मीडिया का एक वर्ग लगातार ये अफवाह फैलाने में लगा था कि आशीष मिश्रा नेपाल भाग गए हैं। पत्रकार अजीत अंजुम ने भी ट्वीट कर के लिखा था, “सुना है कि लखीमपुर खीरी का विलेन मंत्री पुत्र नेपाल भाग गया है। मोदी है तो मुमकिन है।” प्रोपेगंडा पत्रकार राना अयूब ने भी दावा किया था कि आशीष मिश्रा नेपाल भाग गए हैं। साथ ही उन्होंने धृतराष्ट्र की एक तस्वीर शेयर की, जिसमें वो कह रहे हैं, “ये क्या हो रहा है दुर्योधन।”

इसी तरह महेंद्र यादव नाम के पत्रकार ने लिखा था, “किताबें और बकरी चोरी के जुर्म में पूर्व मंत्री, पूर्व सांसद आजम खान दो साल से जेल में हैं, और चार किसानों को कुचलकर मार डालने वाला आशीष मिश्रा नेपाल में ऐश कर रहा है।”

इसी तरह कुख्यात पत्रकार प्रशांत कनौजिया ने लिखा था, “गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी का आतंकवादी बेटा आशीष मिश्रा कथित तौर पर नेपाल भागने की आशंका है। भाग गए या भगा दिया गया?’

इसी तरह ‘दी लल्लनटॉप’ के पत्रकार सिद्धांत मोहन ने लिखा, “आशीष मिश्रा के नेपाल निकल लेने की ख़बरें आ रही हैं। गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा के इस्तीफ़े की ख़बर नहीं आ रही है। निष्पक्ष जाँच हो, उसके लिए कई ज़रूरी क़दमों में से एक क़दम है अजय मिश्रा का इस्तीफ़ा।” इसी तरह मीडिया के इस गिरोह के अधिकतर लोगों ने ये अफवाह फैलाई।

अब जब आशीष मिश्रा ‘मोनू’ पुलिस के समक्ष पेश हुए हैं और जाँच में सहयोग कर रहे हैं, मीडिया के गिरोह विशेष झूठे साबित हो गए हैं। आशीष की जांच दल के सामने पेशी को लेकर पुलिस लाइन में सुरक्षा के तगड़े इंतजाम हैं। उनके पिता ने भी बताया था कि आशीष नेपाल नहीं गए हैं। उनका कलमबंद बयान दर्ज किया जा रहा है, जहाँ उनके वकील भी मौजूद हैं। उनके वकील ने कानून का सम्मान व जाँच में सहयोग की बात कही है।

क्राइम ब्रांच के सामने पेश हुए आशीष मिश्रा: CM योगी ने कहा- ‘दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा, लेकिन दबाव में काम नहीं करेंगे’

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में आरोपित केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा पुलिस लाइंस पहुँच गए हैं। क्राइम ब्रांच उनसे पूछताछ कर रही है। आशीष मिश्रा के खिलाफ धारा 147, 148, 149, 279, 338, 304ए, 302 और 120बी के तहत मामला दर्ज है। पुलिस ने उनके घर पर नोटिस चिपकाकर पुलिस के समक्ष पेश होने के लिए कहा था।

इससे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आश्वासन दिया कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। हालाँकि, उन्होंने बिना सबूत के दबाव में कोई कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। शुक्रवार (8 अक्टूबर) को एक टेलीविजन चैनल द्वारा आयोजित कॉन्क्लेव में बोलते हुए यूपी के सीएम ने जोर देकर कहा कि गिरफ्तारी सबूतों के आधार पर की जाएगी, न कि केवल आरोपों के आधार पर।

लखीमपुर खीरी हिंसा के दोषियों के खिलाफ प्रक्रिया के तहत होगी कार्रवाई: योगी आदित्यनाथ

सीएम योगी ने कहा, “सब कुछ एकदम साफ हो जाएगा। किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी, लेकिन किसी दबाव में कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।” यूपी के सीएम ने आगे कहा कि विपक्षी सदस्य, जो पीड़ित परिवारों से मिलना चाहते थे, वे केवल दिखावा कर रहे थे, लेकिन असल में उनमें से कुछ चेहरे ऐसे भी हैं जो लखीमपुर खीरी त्रासदी के पीछे हो सकते हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून की नजर में उनकी पोजिशन और पॉवर के बावजूद सभी समान हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। सीएम ने कहा कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने में इस बात की परवाह नहीं की जाएगी कि वह किस पार्टी से जुड़ा है।

सीएम ने केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के संभावित इस्तीफे और उनके बेटे आशीष मिश्रा की गिरफ्तारी के बारे में पूछे जाने पर कहा, “सुप्रीम कोर्ट के अनुसार हम किसी के द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकते। लिखित शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया है और घटना की जाँच की जा रही है।”

इससे पहले यूपी पुलिस ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में दर्ज प्राथमिकी में आशीष मिश्रा का नाम लिया था। ‘किसान’ इस बात पर जोर दे रहे हैं कि घटना के समय आशीष मिश्रा मौके पर मौजूद थे और कुछ यह भी दावा कर रहे हैं कि मिश्रा कार चला रहे थे, जिससे दो किसान प्रदर्शनकारियों की कुचलकर मौत हो गई। इधर, आशीष और उनके पिता कह रहे हैं कि वह उस दिन मौके पर भी मौजूद नहीं था, इसलिए लोगों को कार से मारने का सवाल ही नहीं उठता।

विपक्षी अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए यूपी सरकार को निशाना बना रहे हैं

राजनीतिक लाभ के लिए घटना का इस्तेमाल करने के लिए विपक्षी दलों की आलोचना करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि छत्तीसगढ़ और पंजाब के मुख्यमंत्री अपने राज्यों को चलाने में सक्षम नहीं हैं, लेकिन अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साध रहे हैं।

उन्होंने कॉन्ग्रेस के नेता राहुल और प्रियंका गाँधी से सवाल किया, जो आगामी यूपी विधानसभा चुनावों से पहले अपने डूबते राजनीतिक करियर को बचाने के लिए लखीमपुर त्रासदी का लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने कहा, “राहुल, प्रियंका और अखिलेश यादव कहाँ थे, जब कोरोना महामारी चरम पर था? पीड़ितों के परिवारों सहित सभी लोगों ने कहा कि वे सरकार के काम की सराहना करते हैं।”

‘किसानों’ ने देशव्यापी ‘रेल रोको’ विरोध की धमकी दी

दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के राज्य सरकार के आश्वासन के बावजूद ‘किसानों’ ने आंदोलन की धमकी दी है, जिससे और भी हिंसा भड़क सकती है। संयुक्त किसान मोर्चा ने शुक्रवार को लखीमपुर खीरी हिंसा की जाँच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी और जाँच आयोग को खारिज कर दिया। मोर्चा ने माँग पूरी नहीं होने पर 18 अक्टूबर को देशव्यापी ‘रेल रोको’ विरोध प्रदर्शन की धमकी दी है।

उल्लेखनीय है कि ‘किसान’ संगठन लखीमपुर खीरी में 3 अक्टूबर को हुई हिंसा के सिलसिले में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा को बर्खास्त करने और उनके बेटे आशीष मिश्रा को गिरफ्तार करने की माँग कर रहे हैं। किसान संयुक्त मोर्चा ने कहा कि वह लखीमपुर खीरी घटना की जाँच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी और जाँच आयोग, दोनों को खारिज करता है। आशीष मिश्रा से फिलहाल क्राइम ब्रांच पूछताछ कर रही है।

लखीमपुर खीरी हिंसा

लखीमपुर खीरी हिंसा में कुल आठ लोग मारे गए थे, जो एक बहुत बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है, खासकर कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए। खबरों के मुताबिक, विरोध कर रहे किसानों ने भाजपा कार्यकर्ताओं के काफिले पर हमला कर दिया, जिसके बाद एक कार ने कथित तौर पर नियंत्रण खो दिया, जिसमें दो किसान घायल हो गए। इससे आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने वाहन पर हमला कर दिया, उसमें आग लगा दी और यात्री के साथ मारपीट की। इसके परिणामस्वरुप दो भाजपा कार्यकर्ता, एक पत्रकार और ड्राइवर की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि हिंसा के दौरान दो और किसानों की मौत हो गई।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने जामिया के वाइस चांसलर को बुलाया, यूनिवर्सिटी स्कूल में ‘दलित टीचर के अपमान’ से जुड़ा है मामला

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने जामिया मिलिया इस्लामिया के वाइस चांसलर को समन भेजा है। यह कार्रवाई हरेंद्र कुमार की 2018 में की गई शिकायत के आधार पर की गई है। कुमार यूनिवर्सिटी के अधीन आने वाली जामिया मिडिल स्कूल में गेस्ट टीचर थे। उनका आरोप है कि दलित होने की वजह से स्कूल के हेडमास्टर मोहम्मद मुर्सलीन उन्हें अपमानित और प्रताड़ित करते थे। 2018 में नौकरी से निकाले जाने के बाद कुमार ने यह शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें हेडमास्टर पर अन्य शिक्षकों के सामने अपने लिए जातिसूचक संबोधन के इस्तेमाल का आरोप लगाया था।

भेजे गए समन में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के वाइस चांसलर को 13 अक्टूबर 2021 को सुबह 11 बजे राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष के समक्ष पाँचवे तल, लोकनायक भवन नई दिल्ली में उपस्थित हो अपना जवाब रखने को कहा गया है।

Source: National Commission for Scheduled Castes

समन में स्पष्ट कहा गया है कि बेहद विशेष परिस्थिति न हो तो वाइस चांसलर को स्वयं उपस्थित होना है। हरेंद्र कुमार ने कहा था, “मैं वर्ष 2017 में बतौर गेस्ट टीचर नियुक्त हुआ था और वर्ष 2018 में बिना किसी वजह के निकाल दिया गया। कार्यकाल के दौरान प्रधानाध्यापक मोहम्मद मुर्सलीन का व्यवहार मेरे लिए ठीक नहीं रहा। तमाम ऐसे व्यक्तिगत कार्य करवाए गए जो विभाग से संबंधित नहीं थे। वे मुझ से चाय बनवाने, साफ-सफाई जैसे काम करवाते और कई बार उन्होंने मेरी जाति को ले कर अशोभनीय टिप्पणी भी की।”

हालाँकि हेडमास्टर मोहम्मद मुर्सलीन ने इन आरोपों को आधारहीन और झूठा बताया था। उन्होंने हरेंद्र पर अपनी जाति का फायदा उठाकर बदला लेने का आरोप लगाया था। जिस समय की यह घटना है उस समय वाइस चांसलर तलत अहमद थे। गौरतलब है कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया प्रशासन पर जनवरी 2021 में भी दलित हिन्दुओं के साथ भेदभाव के आरोप लगे थे। तब 23 सफाई कर्मचारियों ने आरोप लगाया था कि छंटनी के नाम पर केवल वाल्मीकि लोगों को ही विश्वविद्यालय प्रबंधन ने बाहर किया है।

NCB ने शाहरुख खान के करीबी प्रोड्यूसर इम्तियाज खत्री के घर-ऑफिस पर मारा छापा, आर्यन खान ने भी कबूला- ‘मैं चरस पीता हूँ’

मुंबई क्रूज ड्रग पार्टी के मामले में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की कार्रवाई जारी है। एनसीबी ने शनिवार (9 अक्टूबर 2021) को प्रोड्यूसर इम्तियाज खत्री के बांद्रा स्थित घर और ऑफिस पर छापे मारे हैं। इम्तियाज शाहरुख खान और आर्यन का करीबी बताया जा रहा है। इससे पहले एनसीबी ने 2 अक्टूबर को कोर्डेलिया शिप पर ड्रग्स रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए शाहरुख के बेटे आर्यन खान समेत 8 लोगों को हिरासत में लिया था। फिलहाल, आर्यन मुंबई की आर्थर रोड जेल में बंद हैं। उन्होंने और उनके दोस्त अरबाज मर्चेंट ने NCB की पूछताछ के दौरान ड्रग्स लेने की बात कबूल की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आर्यन ने कहा कि वह चरस पीते हैं और क्रूज पार्टी में भी चरस लेने वाले थे। NCB ने अदालत में दिए पंचनामे में बताया है कि उन्हें तलाशी के दौरान अरबाज के पास से 6 ग्राम चरस बरामद हुई थी। अरबाज ने अपने जूते से ड्रग्स का पाउच निकाल कर दिया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इम्तियाज के बॉलीवुड के बड़े सितारों के साथ कनेक्शन हैं। उस पर सुशांत सिंह राजपूत के मामले में ड्रग्स सप्लाई करने का आरोप भी लग चुका है। सिंह की दिवंगत मैनेजर श्रुति मोदी के वकील अशोक सरावगी ने इस मामले में खत्री के शामिल होने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि खत्री ने सिंह और रिया चक्रवर्ती को ड्रग्स सप्लाई किए थे। दरअसल, इम्तियाज का नाम अचित कुमार की पूछताछ में सामने आया है, जिसे NCB ने गुरुवार (7 अक्टूबर 2021) को गिरफ्तार किया था।

बताया जा रहा है कि इम्तियाज खत्री प्रोड्यूसर के साथ बिल्डर भी है। उसकी INK इंफ्रास्ट्रक्चर नाम की कंपनी है। साल 2017 में वीवीआईपी यूनिवर्सल एंटरनेटमेंट नाम की एक कंपनी बनाई गई थी, जो बॉलीवुड में नए कलाकारों को मौका देती है। इसके डायरेक्टर के तौर पर इम्तियाज का नाम दर्ज है। वो बॉलीवुड फिल्मों में पैसा भी लगाता है। मुंबई में इम्तियाज की अपनी एक क्रिकेट टीम भी है। उन्होंने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट प्राइवेट किया हुआ है। यहाँ उन्हें बॉलीवुड के बड़े सितारे जैसे कियारा आडवानी, मनीष मल्होत्रा, गुरु रंधावा समेत कई हस्तियों ने फॉलो किया हुआ है।

गौरतलब है कि क्रूज ड्रग्स मामले में गिरफ्तार शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की शुक्रवार (8 अक्टूबर 2021) को किला कोर्ट ने जमानत की अर्ज़ी खारिज कर दी थी। मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट आरएम नेर्लिकर ने दो अन्‍य आरोपितों अरबाज मर्चेंट और मुनमुन धमेचा की जमानत याचिका भी खारिज कर दी थी। वहीं, आर्यन की वजह से उनके अब्बा शाहरुख खान को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एजुकेशनल टेक्नोलॉजी कंपनी बायजू (Byju) के एड-टेक चीफ ने शाहरुख के सभी विज्ञापनों पर रोक लगा दी है।

नवरात्रि के नाम पर कॉन्डम की सेल: Nykaa पर कानूनी कार्रवाई की माँग, लोगों ने कहा- हिंदू त्योहारों का अपमान बंद करो

हिंदुओं के पावन नवरात्रियों में ई-कॉमर्स साइट ‘नाइका (Nykaa)’ की एक घटिया मार्केटिंग स्ट्रैटेजी उजागर हुई है। उन्होंने दुर्गा पूजा को समर्पित नवरात्रि के नाम पर कॉन्डम बेचने का प्रयास किया है। इसमें उन्होंने सेल (Sale) का टैग लगाया है और 40 % से ज्यादा ऑफ ऑफर किया है।

सुनैना होले नाम की ट्विटर यूजर ने इस ऑफर के स्क्रीनशॉट लेकर ट्विटर पर शेयर किए। उन्होंने नाइका को टैग करते हुए पूछा- नवरात्रि और सेक्स का क्या लॉजिक है। हिंदू, इस पावन त्योहार को मनाते हैं और 9 दिन 9 देवियों की पूजा होती है। दुर्गा पूजा नवरात्रि का पर्याय है, जहाँ देवी दुर्गा महिषासुर से युद्ध करके विजय प्राप्त करती हैं और धर्म को बहाल करती हैं।

वह आगे कहती हैं, “हिंदुओं के देवी-देवताओं और त्योहारों का अपमान करना बंद करो। बर्दाश्त की हद होती है नाइका। तुम्हारे लिए यही अच्छा है कि तुम कॉन्डम का प्रचार बंद करो नवरात्रि के नाम पर।” आगे उन्होंने लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी को टैग करके इस मामले को देखने को कहा।

इस ट्वीट के बाद नाइका को लेकर कई लोगों ने प्रतिक्रिया दी। एक यूजर ने एप को डिलीट करने की बात कहते हुए कहा, “एक ऐसा एड रमजान, ईद, थैंक्सगिविंग, गुड फ्राइडे, क्रिसमस पर भी दे दो। हर बार हिंदुओं के त्योहारों पर ही ऐसी छूट क्यों?”

संतोष नाम के यूजर लिखते हैं, “हमें इसका पूर्ण बहिष्कार करना होगा। ये बेहद घटिया और अपमानजनक है। मेरा कहना है कि आप ऐसे अपमानजनक बात ऐसे पावन सप्ताह में कैसे कर सकते हैं। वाकई ये घटिया है और इस पर लीगल एक्शन लिया जाना चाहिए। बहुत ज्यादा आजादी स्वतंत्रता खतरा होती है।”

इशिता अग्रवाल पूछती हैं, “नाइका ये सब क्या है? क्या ये ऐड इसलिए हैं ताकि आपके बारे में लोगों को पता चले और सेल बढ़े। अगर ऐसा है तो तुम्हें इसका अफसोस होगा।”

एक यूजर कहते हैं, “ये नाइका या अन्य के बारे में नहीं है। वह इस भारत को जानते हैं कि वो हिंदुओं के पर्व और देवताओं को बदनाम कर सकते हैं और हम ये सहकर भी उनके प्रोडक्ट खरीदते रहेंगे।”

उल्लेखनीय है कि ये पहली बार नहीं है जब कंपनी या किसी संगठन ने प्रचार के नाम पर हिंदुओं की भावनाओं को आहत किया हो। दिवाली से लेकर होली और तमाम त्योहारों पर बड़ी-बड़ी कंपनियाँ ऐसी विज्ञापन दे डालती हैं जिससे हिंदू होने के नाते किसी को भी ठेस पहुँचे। पिछले दिनों मान्यवर ने ‘कन्यादान’ रीति को नई परिभाषा देने के नाम पर ऐसा ही काम किया था, उस समय उनका भी विरोध हुआ था।

चीन-नेपाल से सटे जिलों में ‘महोत्सव’ से पलायन रोकेगा उत्तराखंड, डेमोग्राफी में आए बदलाव से सुरक्षा एजेंसियाँ भी सतर्क

उत्तराखंड से स्थानीय लोगों के पलायन और मैदानी इलाकों से खास समुदाय के लोगों के आकर बसने का मामला इन दिनों चर्चा में है। इसके कारण राज्य के कई इलाकों में अचानक से डेमोग्राफी में बदलाव आया है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट से पता चला था कि नेपाल से सटे उत्तराखंड के जिलों में मुस्लिमों की आबादी 10 साल के भीतर 2.5 गुना बढ़ी। अब चीन और नेपाल से सटे जिलों के ग्रामीण इलाकों में से पलायन रोकने के लिए महोत्सवों का आयोजन किया जाएगा।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार इन जिलों से पलायन और डेमोग्राफी में बदलाव को लेकर सुरक्षा एजेंसियाँ चिंतित हैं। इनमें से कई इलाके संवेदनशील और कुछ अतिसंवेदनशील भी हैं। लिहाजा उत्तराखंड के सीमांत इलाकों में पुलिस को ‘महोत्सव’ का आयोजन करने की जिम्मेदारी दी गई है। दो से तीन दिन तक चलने वाले इन महोत्सवों के जरिए पुलिस सीमांत गाँवों के लोगों की समस्याएँ सुनेगी। इसके बाद उन समस्याओं का समाधान करने की कोशिश की जाएगी।

इस योजना के तहत उत्तराखंड पुलिस अक्टूबर के अंत में राज्य के सीमांत इलाकों में दो से तीन दिन के महोत्सव का आयोजन करने वाली है। हालाँकि आयोजन की तारीख को लेकर फिलहाल फैसला नहीं हुआ है। उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार के मुताबिक पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी के गाँवों में सबसे अधिक पलायन होने की बात सामने आई है। क्षेत्र में कई ऐसे गाँव हैं जो आज भी विकास की मुख्य धारा से अलग-थलग पड़े हैं। पुलिस अब इन क्षेत्रों में महोत्सव का आयोजन करेगी और विकास कार्यों को प्रमोट करेगी।

बॉर्डर से लगे गाँव एक तरह से देश के लिए प्रहरी का भी काम करते हैं लेकिन पिछले कुछ साल से रोज़गार, शिक्षा, स्वास्थ्य के नाम पर सीमांत क्षेत्रों से बड़े पैमाने पर हो रहे पलायन ने सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। इस बारे में पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार का कहना है कि हर साल DGP की कॉन्फ्रेंस होती है, उसमें इस बार पीएम मोदी ने सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों को निर्देश दिया था कि पुलिस राज्य के सीमांत इलाकों में विकास मेला महोत्सव का आयोजन करे, शुरुआत में तीन महोत्सवों का आयोजन उत्तराखंड में किया जा रहा है। इन महोत्सवों को आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से बड़ा कदम बताया जा रहा है।

विकास महोत्सव में युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए उद्योग विभाग, कृषि संबंधी जानकारी देने के लिए कृषि विभाग, पशुओं की समस्या को लेकर पशुपालन विभाग और चिकित्सक, बागवानी विभाग, पर्यटन विभाग, सिंचाई विभाग, मत्स्य व दुग्ध विकास, शिक्षा की अलख जगाने के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारी मौजूद रहेंगे।

गौरतलब है कि डेमोग्राफी में बदलाव और पलायन से पूरा उत्तराखंड जूझ रहा है। पिछले दिनों खबर आई थी कि राजधानी देहरादून और उससे सटे इलाकों में तीन दर्जन से अधिक ऐसे इलाके हैं जहाँ करीब दो दशक के भीतर ही मुस्लिम आबादी ढाई गुणा तक बढ़ गई है। 2001-2011 के बीच इन इलाकों में समुदाय विशेष की आबादी में 45 फीसदी तक का इजाफा देखने को मिला। जनगणना के नए आँकड़ें सामने आने के बाद यह तस्वीर और साफ होगी, क्योंकि पिछले 10 सालों में इस ट्रेंड ने और जोर पकड़ा है।

वहीं नैनीताल की भी डेमोग्राफी में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। हाल ही में खुफिया एजेंसियों के सूत्रों ने भी माना था कि शहर के विभिन्न क्षेत्रों में मुस्लिमों का दखल बढ़ता ही जा रहा है। उच्च न्यायालय के अधिवक्ता नितिन कार्की ने इस डेमोग्राफिक बदलाव के संबंध में आगाह करते हुए कुछ दिनों पहले ही जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा था।

BYJU के विज्ञापन में नहीं दिखेंगे शाहरुख खान, ड्रग्स केस में आर्यन की गिरफ्तारी के बाद कंपनी की हो रही थी किरकिरी

बॉलीवुड के बादशाह कहे जाने वाले शाहरुख खान को ड्रग्स मामले में जेल में बंद बेटे आर्यन खान की वजह से करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एजुकेशनल टेक्नोलॉजी कंपनी बायजू (Byju) के एड-टेक चीफ ने शाहरुख के सभी विज्ञापनों पर रोक लगा दी है।

रिपोर्ट की मानें तो बायजू किंग खान के लिए सबसे बड़े स्पॉन्सरशिप डील्स में से एक था। बायजू अपने ब्रांड को एंडोर्स करने के लिए अभिनेता को सालाना 3-4 करोड़ रुपए का भुगतान करता है। वह (शाहरुख) साल 2017 से इसके ब्रांड एंबेसडर हैं। इसके अलावा अभिनेता हुंडई, एलजी, दुबई टूरिज्म, आईसीआईसीआई और रिलायंस जियो जैसी कई कंपनियों का भी चेहरा हैं।

बताया जा रहा है कि कंपनी पिछले कुछ दिनों से ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तीखी आलोचनाओं का सामना कर रही है। यही कारण है कि उसने एडवांस बुकिंग होने के बावजूद एक्टर से जुड़े सभी विज्ञापन पर रोक लगा दी है।

दरअसल, नेटिजन्स सोशल मीडिया पर शाहरुख खान और उनके बेटे आर्यन खान को लेकर काफी आगबबूला हैं। उनका कहना है ऐसे व्यक्ति से लर्निंग ऐप का प्रचार कराना ठीक नहीं, जो खुद अपने बच्चे को अच्छे संस्कार और कानून की जानकारी नहीं दे सकता। यह कंपनी की छवि को प्रभावित करेगा।

बायजू का पिछले दो सालों में ब्रिक एंड मोर्टार कोचिंग इंस्टीट्यूट, आकाश इंस्टीट्यूट सहित कई बड़े संस्थानों का टेकओवर करने के बाद भारत के साथ-साथ विदेशों में जबरदस्त ग्रोथ हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी ने अभिनेता को अपने विज्ञापनों से इसलिए हटा दिया है, क्योंकि वह उनके बेटे आर्यन खान के विवाद को देखते हुए उनके साथ जुड़ना नहीं चाहती। हालाँकि, इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि कंपनी ने उन्हें अपने ब्रांड एंबेसडर के रूप में पूरी तरह से हटा दिया है या नहीं। बायजू कंपनी के प्रवक्ता ने इस पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बायजू ने तीन हफ्ते पहले ही शाहरुख के साथ अपना नया एड कैंपन शुरू किया था।

गौरतलब है कि क्रूज ड्रग्स मामले में गिरफ्तार शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की शुक्रवार (8 अक्टूबर 2021) को किला कोर्ट ने जमानत की अर्ज़ी खारिज कर दी गई थी। मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट आरएम नेर्लिकर ने दो अन्‍य आरोपितों अरबाज मर्चेंट और मुनमुन धमेचा की जमानत याचिका भी खारिज कर दी थी। अभी आर्यन खान मुंबई की सबसे पुरानी आर्थर रोड जेल में हैं।

दलित युवती को परेशान करता था जुबैर, बात करने से इनकार किया तो धारदार हथियार से कर दी हत्या

राजस्थान के झालावाड़ जिले के पिड़ावा थाना क्षेत्र के बाकीपुर गाँव में शुक्रवार (अक्टूबर 8, 2021) को एक सिरफिरे आशिक ने 19 वर्षीय दलित युवती पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। परिजन युवती को लेकर हॉस्पिटल पहुँचे, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 

जानकारी के मुताबिक आरोपित जुबैर खान ने युवती की हत्या के बाद थाने पहुँच आत्मसमर्पण कर दिया। उसके कबूलनामे को सुन पुलिस भी हैरान रह गई। बताया जा रहा है कि उसने पुलिस के सामने जाकर कहा, “मैंने प्रेमिका की हत्या कर दी। मुझे गिरफ्तार कर लो।”

पुलिस का कहना है कि आरोपित जुबैर हिरासत में है। युवती के पिता की तहरीर पर जुबैर के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। वहीं, गाँव में तनाव का माहौल देखते हुए पिड़ावा क्षेत्र में 10 थानों की पुलिस तैनात कर दी गई है। 

परिजनों का कहना है कि जुबैर खान युवती के पीछे पड़ा था। युवती की शादी तय होने पर बौखलाकर उसने इस घटना को अंजाम दिया। रिपोर्ट के अनुसार पहले दोनों के बीच बात होती थी, लेकिन परिजनों द्वारा समझाए जाने के बाद युवती ने बातचीत बंद कर दी थी। इस पर जुबैर उसे लगातार परेशान कर रहा था। इस मामले में एक बार युवती और जुबैर के परिजनों के बीच विवाद के बाद समझौता भी हुआ था। पुलिस भी प्रथम दृष्टया इसे प्रेम प्रसंग का मामला मान रही है। हत्या के पीछे की वजह जानने की कोशिश में जुटी है।

पुलिस के अनुसार पूजा गाँव की कुछ महिलाओं के साथ सोयाबीन का फसल काटने गई थी। तकरीबन 10 बजे वह शौच जाने की बात कह कर वहाँ से निकली। इसी दौरान जुबैर ने उसके ऊपर धारदार हथियार से हमला कर दिया। पूजा के गर्दन समेत कई जगहों पर गहरी चोटें आईं। इधर जब वह काफी देर तक नहीं लौटी तो लोग उसकी खोजबीन करने लगे। एक खेत में वह पड़ी मिली और उसे अस्पताल ले जाया गया। पोस्टॉर्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया।

झालवाड़ एसपी किरण कंग सिद्धू नेबताया, “बांकीपुरा गाँव में युवती की हत्या के आरोपित को डिटेन कर लिया गया है। प्रथम दृष्टया मामला प्रेम प्रसंग का लग रहा है। आरोपित के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है।”

उइगरों को मिटाने के लिए चीन का खतरनाक कदम, बॉडी पार्ट काटकर तैयार कर रहा जीन बैंक: रिपोर्ट्स

उइगर मुस्लिमों के साथ अत्याचार की हर सीमा को पार कर चुका चीन अब उनके अंगों से अपने देश में जीन बैंक बनाना चाहता है। एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमें ये चौंकाने वाली जानकारी का उल्लेख है। उइगरों पर तरह-तरह के जुल्मों के बाद अब चीन अपनी सेना की मदद से इस काम को अंजाम देने में लगा है।

अंतरराष्ट्रीय संस्था इंटरनेशनल फोरम फॉर राइट्स एंड सिक्योरिटी (IFFRAS) के मुताबिक, चीन में लोगों के अंगों को जबरन काटकर उसका DNA इकट्‌ठा करने का काम हो रहा है। इसके लिए लोगों के साथ जबरदस्ती की जाती है। जब लोग इसका विरोध करते हैं तो उन्हें गायब कर दिया जाता है।

चीन में होते मानवाधिकारों के हनन और भयावह रिकॉर्ड के कारण कुछ समय पहले मेडिकल कम्युनिटी ने आवाज उठाई थी कि चीन से आने वाली वैज्ञानिक पत्रिकाओं के लेख प्रस्तुतियाँ अस्वीकार की जाएँ। टोरंटो के इस थिंक टैंक के मुताबिक, सितंबर में आयोजित वैज्ञानिकों और चिकित्सकों के सम्मेलन में इन्हीं चीजों को देखते हुए चीन के किसी भी आयोजन का बहिष्कार करने का प्रस्ताव भी रखा गया। साथ उसके किसी भी रिपोर्ट्स को अंतरराष्ट्रीय जनरल में जगह नहीं देने की माँग की गई। इसमें बताया गया कि हाल में चीन ने जो डेटा कलेक्ट किया वो ‘मास जेनेटिक टेस्टिंग’ के जरिए था, जिसे अल्पसंख्यक आबादी और निश्चित क्षेत्र से लिया गया।

थिंकटैंक ने कहा कि चीन का एल्गोरिदम हिरासत में लिए गए लोगों के अंग जबरन काटकर डेवलप होता है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि लोगों को जेनेटिक डेटा लेने के लिए कैसे-कैसे परेशान किया गया। थिंकटैंक के अनुसार जेनेटिक डेटा का उपयोग मानवाधिकार मानकों के अनुसार समस्याग्रस्त है क्योंकि इसे इकट्ठा करते समय सूचित सहमति आवश्यकताओं का दुरुपयोग व उल्लंघन होने का मामला शामिल था।

IFRAS ने कहा, “चीन के डिटेंशन सेंटर्स में उइगरों की कैद और मानवाधिकारों के निरंतर उल्लंघन में एक नया आयाम जुड़ा है। ये डीएनए और नस्लीय प्रोफाइलिंग हैं ताकि वो व्यापक स्तर पर डीएनए को इकट्ठा करके चयनात्मक जाति का सफाया कर सकें। इस हरकत को मानवता के विरुद्ध किया जाने वाला सबसे घटिया अपराध कहा जा सकता है जो कि चीनी प्रशासन कर रहा है।”

बता दें कि उक्त दावे से संबंधित ये रिपोर्ट अगस्त में पब्लिश हुई थी जिसमें ये जानकारी दी गई थी कि चीन में उइगरों का सफाया करने के लिए कैसे काम किया जा रहा है। मालूम हो कि वहाँ इससे पहले भी तमाम तरह की ऐसी घटनाएँ हो चुकी हैं जिसने चीन के मानवीय व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। मसलन डिटेंशन कैंप में रखकर उइगरों को प्रताड़ित करना, उन्हें यातनाएँ देना, महिलाओं से रेप करना, उनके एबॉर्शन करवा देना, उनके प्राइवेट पार्ट में मिर्च लगाना आदि।

पर्दे का विदेशी 007 हिट, पानी का स्वदेशी 007 फ्लॉप: मोतीलाल और जवाहर लाल नेहरू के नाम से क्या है 007 का रिश्ता

007! इसका जिक्र होते ही आपके दिमाग में क्या कौंधता है? एक विदेशी फिल्म सीरिज का वो नायक जो पर्दे पर जेम्स बांड के नाम से छा जाता है। लेकिन, 007 से आपको भारत का रिश्ता पता है? चलिए सवाल और आसान करते हैं। इससे देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और उनके पिता मोती लाल नेहरू का क्या रिश्ता है? आप जानकर हैरान रह जाएँगे कि जेम्स बांड की याद दिलाने वाला 007, भारत में परिवारवाद की कॉन्ग्रेसी राजनीति से जुड़ा है।

आगे बढ़ने से पहले 100 से ज्यादा जहाजों को बना चुकी भारत सरकार के स्वामित्व वाली कोच्चि शिपयार्ड लिमिटेड (Cochin Shipyard) के बारे में जानते हैं। यह कंपनी अब तक के सफर में कई उपलब्धियाँ हासिल कर चुकी है। सन् 1972 से शुरू हुई इस कंपनी का उद्देश्य प्रौद्योगिकी उन्नयन और क्षमता वृद्धि के माध्यम से जहाज निर्माण और जहाज मरम्मत गतिविधियों को बनाए रखना रहा है। इस कंपनी ने सन् 1981 में अपने पहले जहाज रानी पद्मिनी (001 M.V Rani Padmini) की डिलीवरी दी थी। इसे बनाने से लेकर डिलिवर करने तक में 66 माह लगे थे। 

इसके बाद समय बदला। क्षमता में विकास हुआ और अगला शिप 002 M.V Ratna Deep सिर्फ 45 माह में ही बनाकर डिलिवर कर दिया गया। ऐसे ही M.V. Maratha Mission, MV Maratha Majesty और M.V. AP.J Shalin नामक शिपों को भी तैयार किया गया। 1989 तक शिप बनाने के बाद कोच्चि शिपयार्ड ने सन् 1990 में ऑयल टैंकर को बनाकर एक नई उपलब्धि हासिल की। कोच्चि शिपयार्ड ने 43 महीनों के अंदर देश के पहले ऑयल टैंकर को दुनिया के सामने पेश किया। पंचादी वेंकटरमण ( Panchadi Venkataramana) की वर्कर पार्टिसिपेशन मैनेजमेंट नामक किताब के पृष्ठ नंबर 113 में बताया गया है कि इस ऑयल टैंकर को कंपनी ने मार्च 1987 में बनाना शुरू किया था और नवंबर 1989 में जाकर ये पूरी तरह तैयार हुआ।

साभार: पंचादी वेंकटरमण की वर्कर पार्टिसिपेशन मैनेजमेंट नामक किताब

इसके बाद इसकी डिलीवरी में करीबन एक साल का वक्त लगा था और 9 अक्टूबर 1990 को आखिरकार भारत के पास पहला स्वदेशी ऑयल टैंकर था। पर आपको शायद ही याद हो कि देश में निर्मित इस पहले ऑयल टैंकर का नाम क्या था?

आगे बढ़ने से पहले यह ध्यान रखें कि कोच्चि शिपयार्ड के अस्तित्व में आने से लेकर पहले ऑयल टैंकर तक के सफर में 18 साल लगे। सन् 1972- जब कंपनी की शुरुआत हुई, 1981 जब कंपनी ने पहला शिप तैयार किया और 1990-जब कंपनी ने पहला ऑयल टैंकर बनाकर इतिहास रचा… ये वही काल है जो भारतीय राजनीति में कॉन्ग्रेस की पैठ के लिए याद किए जाते हैं। ये जानकारी क्यों दी गई है इसका अंदाजा आपको आगे लगेगा।

जब 1981 में पहला शिप आया तो उसका नाम रानी पद्मिनी के नाम पर पड़ा। लेकिन एक दशक बाद हालात बदल गए और परिवारवाद की परिभाषा एक नए ढंग से लिखने का प्रयास शुरू हुआ। नतीजन सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी ने 2 साल के भीतर दो ऑयल टैंकर दिए और दोनों का नाम नेहरू परिवार से जुड़े लोगों पर रखे गए और इन दोनों को Shipping Corporation of India बॉम्बे, ने खरीदा।

कोच्चि शिपयार्ड द्वारा भारतीय जहाजरानी निगम को सबसे पहले 1990 में जो ऑयल टैंकर सौंपा गया था उसका नाम 007.M.T. Motilal Nehru था। इसकी क्षमता  94540 DWT (Dead Weight Tons) थी। इसके बाद 1992 में दूसरा टैंकर तैयार हुआ, वो भी मात्र 35 माह के भीतर (नवंबर 1989-फरवरी 1992) और उसका नाम जवाहर लाल नेहरू (007.M.T. Jawaharlal Nehru) के नाम पर रखा गया।

मोतीलाल नेहरू, ऑयल टैंकर
मोतीलाल नेहरू के नाम पर बना ऑयल टैंकर

अब एक के बाद एक बने ऑयल टैंकरों को ‘नेहरू उपनाम’ ही क्यों दिया गया, इसके अलग कारण होंगे। लेकिन ये तो जाहिर सी बात है कि जब पहली दफा भारत सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी ने एक ऑयल टैंकर को निर्मित करदेश को सौंपा होगा तो ये अपने आप में उपलब्धि मानी गई होगी। हालाँकि, इनमें क्या खामियाँ थीं, इनका पता बाद में चलना शुरू हुआ। जैसे कई रिपोर्ट्स में शिकायत हुई कि ये सिंगल हल और नॉन क्वॉयल्ड हैं और केवल तटीय क्षेत्रों में कच्चे तेल को लाने-ले जाने के लिए उपयुक्त हैं। अंतत: SCI ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज को इसकी जानकारी देते हुए इसे बेच दिया।

मौजूदा जानकारी के अनुसार क्रूड ऑयल टैंकर MT. Motilal Nehru को शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ने 12 दिसंबर 2013 को बेचा था। 2013-14 की शिप इंडिया वार्षिक परफॉर्मेंस रिपोर्ट में भी इसकी खामियों का जिक्र है। इसमें लिखा था कि मोतीलाल नेहरू और जवाहरलाल नेहरू ऑयल टैंकर Single Hull और Non-coiled tanker केवल तटीय क्षेत्रों के लिए उपयुक्त थे। समय के साथ आई खामियों को देखते हुए  MT Motilal Nehru को हटा दिया गया। सिंगल हल (एकल पतवार) वाले टैंकरों को कोई मार्केट उपलब्ध नहीं है।