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‘नारकोटिक्स जिहाद’ वाले पादरी ने अब ‘छद्म सेक्युलरिज्म’ को लेकर चेताया, कहा- केरल में बढ़ रही है कट्टरता

‘नारकोटिक्स और लव जिहाद’ वाले बयान के बाद केरल के सायरो मालाबार कैथोलिक चर्च के पाला डॉयसीज बिशप ‘जोसेफ कल्लारंगट‘ ने अब धर्मनिरपेक्षता पर बयान दिया है। उन्होंने केरल में बढ़ती कट्टरता और साम्प्रदायिकता पर चिंता व्यक्त की और कहा, “छद्म धर्मनिरपेक्षता भारत को तबाह कर देगी। इसलिए असली धर्मनिरपेक्षता की रक्षा करने की आवश्यकता है।”

चर्च से जुड़े अखबार ‘दीपिका’ में लिखे एक आर्टिकल में पादरी ने अपने पिछले बयान (नारकोटिक्स और लव जिहाद) का बचाव किया और कहा कि जो लोग इन बुराइयों के खिलाफ अपनी आवाज नहीं उठाते हैं, असल में वो इस तरह की बुराइयों को बढ़ावा देते हैं। इन बुराइयों को नजरअंदाज करने के बजाय ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो इस पर विचार करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, “धर्मनिरपेक्षता भारत का मूल है और ‘दिखावे की धर्मनिरपेक्षता’ भारत को तबाह कर देगी। हमारा संविधान धर्मनिरपेक्षता पर आधारित है। सभी धार्मिक समुदायों और धर्मनिरपेक्ष समुदाय को एक साथ रहना सीखना चाहिए। सभी धर्मों का सम्मान किया जाना चाहिए।” पादरी ने केरल में साम्प्रदायिक घटनाओं के बढ़ने और इसके ध्रुवीकरण पर अपनी चिंता व्यक्त की और कहा कि धर्मनिरपेक्षता का वास्तविक लाभ किसे मिलता है, इस पर अब सवाल उठने लगे हैं।

नारकोटिक्स जिहाद पर भी दिया था बयान

पिछले महीने जोसेफ कल्लारंगट ने एक बयान में कहा था कि केरल में कैथोलिक लड़कियाँ अब ‘लव और नारकोटिक्स जिहाद’ की शिकार हो रही हैं। उन्होंने कहा था कि केरल में एक खास ग्रुप है जो विभिन्न इलाकों में कैथोलिक और हिंदू युवाओं को ड्रग व अन्य नशा का आदी बना रहा है। ऐसे लोगों का मकसद दूसरे धर्म को भ्रष्ट करने का है।

इसके अलावा बिशप ने ये भी कहा था कि केरल में ‘लव जिहाद’ होने से इनकार करने का कोई भी प्रयास सच्चाई से मुँह मोड़ लेने जैसा है। बिशप ने कहा था कि मुस्लिम विचारों को जबरदस्ती लाने की योजना चल रही है। सभी कैथोलिकों को इसके बारे में पता होना चाहिए और सतर्क रहना चाहिए।

पति-पत्नी के रूप में अलग, पर हमेशा दोस्त रहेंगे: सामंथा और चैतन्य का तलाक, ससुर नागार्जुन को पसंद नहीं बहू का बोल्ड सीन करना?

‘फैमिली मैन 2’ वेब सीरीज में राजी का किरदार निभाकर दर्शकों का दिल जीतने वाली सामंथा रुथ प्रभु ने अपने पति नागा चैतन्य से तलाक लेने का फैसला किया है। साउथ की मशहूर एक्ट्रेस और नागार्जुन के बेटे नागा चैतन्य ने सोशल मीडिया के जरिए फैंस को यह जानकारी दी है। सामंथा और नागा ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट लिखा, “पति-पत्नी की तरह हमारे रास्ते अलग होते हैं, मगर हम हमेशा दोस्त रहेंगे।”

सामंथा ने अपनी पोस्ट में लिखा, “बहुत सोच-विचार के बाद मैंने और चैतन्य ने अलग होने का फैसला किया है। अब हमारी राहें अलग-अलग हैं। हम खुशकिस्मत हैं कि पिछले 10 सालों से हम अच्छे दोस्त रहे हैं, जो हमारे रिश्ते का आधार रही और हमें लगता है कि हमारे बीच हमेशा एक खास रिश्ता रहेगा।” सामंथा ने आगे लिखा, ‘”हम अपने फैन्स, शुभचिंतकों और मीडिया से गुजारिश करते हैं कि इस मुश्किल समय में वे हमारा साथ दें और हमारी प्राइवेसी का ख्याल रखें। आप सबके सपोर्ट के लिए शुक्रिया…।”

सामंथा और नागा चैतन्य ने साल 2017 में गोवा में रॉयल वेडिंग की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, सामंथा और नागा चैतन्य की शादी में दरार की वजह एक्ट्रेस का करियर के प्रति प्रेम बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि शादी के बाद भी सामंथा फिल्मों में बोल्ड सीन्स कर रही हैं, जो कि उनके ससुर नागार्जुन को पसंद नहीं है।

दरअसल, शादी के बाद सामंथा ने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अपने पति का सरनेम अक्किनेनी लगा लिया था। वह कई बार नागा के साथ सोशल मीडिया पर अपनी फोटोज भी साझा करती रहती थीं, लेकिन पिछले कुछ समय से वह नागा के साथ सोशल मीडिया पर उतना एक्टिव नहीं हैं। जब से सामंथा ने सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से अपने पति का सरनेम हटा लिया था, तभी से दोनों के अलग होने की खबरें मीडिया में छाईं हुई थीं। बता दें कि इन दोनों ने साउथ की कई बड़ी फिल्मों में एक साथ किया है।

करीम ने करण बन कर दलित युवती को फाँसा, 11 दिन तक किया रेप: घुमाने के बहाने ले गया था, अब हुआ गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में लव जिहाद का मामला प्रकाश में आया है। वहाँ करीम ने करण बनकर सेकंड ईयर में पढ़ने वाली दलित छात्रा को अपना नाम बदलकर अपने जाल में फंसाया और उसे घुमाने के बहाने इंदौर के ले गया और 11 दिनों तक पीड़िता के साथ रेप करता रहा। उस दौरान भी उसने अपनी पहचान जाहिर नहीं होने दी।

रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटना बड़वानी जिले के पानसेमल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक गाँव की है। पीड़िता और आरोपित दोनों यहीं के रहने वाले हैं। 22 वर्षीय युवती पानसेमल के ही शासकीय महाविद्यालय में बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा है। दोनों की दोस्ती करीब डेढ़ महीने पहले ही हुई थी। उस दौरान उसने खुद को आदिवासी बताते हुए अपना नाम करण जाधव बताया था। पहचान होने के बाद दोनों करीब आते चले गए वो व्हाट्सएप के जरिए वीडियो कॉल पर भी बातें करने लगे थे।

इस बीच बीते 20 सितंबर 2021 को करण (असली नाम करीम) पीड़िता को बहला-फुसुलाकर इंदौर ले गया। वहाँ 11 दिन तक पीड़िता को झाँसे में रखकर रेप किया। लेकिन लौटने के बाद जब लड़की को उसकी असलियत का पता चला कि वो करण नहीं करीम है तो उसने उसे निवाली छोड़ दिया। इसके बाद पीड़िता ने अपने माता-पिता को यह बात बताई। बाद में उसके माता-पिता उसे लेकर थाने गए और उसके साथ हुए धोखे की शिकायत की।

पुलिस को की शिकायत में पीड़िता ने बताया है कि वो करण नहीं करीम है और उसके पिता का नाम रहीम है और वो भी पानसेमल में ही रहता है। पीड़िता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 376 (रेप), एससी/एसटी एक्ट और लव जिहाद कानून के तहत आरोपित के खिलाफ केस दर्ज किया है। इस मामले में एसडीओपी पीएस बघेल के मुताबिक आरोपित को हिरासत में ले लिया गया है।

शॉर्ट या मिनी स्कर्ट पहनने पर इमामबाड़ा में नो एंट्री, सिर भी ढकना पड़ेगा: डांस वीडियो वायरल होने के बाद लगे नए प्रतिबंध

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बड़ा इमामबाड़ा से बहुत बड़ा फरमान जारी हुआ है। अब बड़ा इमामबाड़ा में सिर ढके रहने पर ही प्रवेश मिलेगा। महिलाओं, लड़कियों शॉर्ट स्कर्ट या मिनी स्कर्ट पर प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

दरअसल बड़ा इमामबाड़ा में लड़की का डांस वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन एक्शन में आ गई है। इमामबाड़ा का रखरखाव करने वाली हुसैनाबाद ट्रस्ट ने आज कई प्रतिबंध लगाया गया है। नए प्रतिबंध के तहत लड़कियों को शॉर्ट स्कर्ट और बिना सिर ढ़के एंट्री नहीं मिलेगी।

जानकारी के मुताबिक लड़की का वीडियो वायरल होने के बाद उलेमाओं ने आला अफसरों को खूब फटकार लगाई, जिसके बाद आज हुसैनाबाद ट्रस्ट ने इस पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। बताया जा रहा है कि बड़ा इमामबाड़ा में एंट्री करने वाली लड़कियों को ट्रस्ट की ओर से सिर ढ़कने के लिए दुपट्टा भी दिया गया है।

हुसैनाबाद ट्रस्ट की ओर से कहा गया है कि ट्रस्ट के लोगों को यह समझना होगा कि इमामबाड़ा कोई टूरिस्ट प्लेस नहीं है, वह इबादतगाह है। वहाँ पर इस तरह का वीडियो वायरल होना बेहद दुखदायी है।

लड़की के डांस करते वीडियो वायरल होने के बाद से लखनऊ में मामला बेहद गर्म है। हुसैनाबाद ट्रस्ट के अफसरों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए धर्मगुरुओं ने इस वीडियो की जाँच कराकर कार्रवाई की भी माँग की है। यहाँ तक कि मंत्री मोहसिन रजा ने तो पत्र लिखकर लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने और जाँच रिपोर्ट जल्द पेश करने के भी आदेश दिए हैं। तमाम धर्मगुरुओं ने वहाँ पर काम करने वाले गाइड और कर्मचारियों को भी सख्त नसीहत दी है।

गौरतलब है कि हाल ही में इमामबाड़े में एक युवती के डांस का 30 सेकेंड का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस वीडियो के वायरल होने के बाद लखनऊ में माहौल गरमा गया। असल में इस समय चेहल्लुम का समय है और शिया मुस्लिम समुदाय के लोग बड़ी तादाद में चेहल्लुम के मौके पर इमामबाड़ा में मजलिस करते हैं। इस वीडियो के वायरल होने के बाद तमाम धर्मगुरुओं ने जिला प्रशासन पर सवाल खड़े किए।

ट्रेनिंग के बाद भारत भेजने से पहले ISI ने आतंकियों को दिया था फेयरवेल, आतंकी ट्रेनिंग के लिए ओमान के रास्ते पहुँचे थे पाकिस्तान

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से प्रशिक्षित जिन दो संदिग्ध आतंकवादियों को दिल्ली पुलिस ने पिछले महीने गिरफ्तार किया था, उनको लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। आतंकवाद विरोधी छापेमारी में गिरफ्तार किये गए इन आतंकियों को पाकिस्तान में ना सिर्फ 15 दिनों का हथियारों और विस्फोटकों का प्रशिक्षण दिया गया था, बल्कि भारत भेजने से पहले उनका फेयरवेल भी दिया गया था। न्यूज़18 ने यह जानकारी दी है।

भारतीय खुफिया एजेंसी के सूत्रों ने न्यूज़18 को बताया कि कैसे दोनों – 22 वर्षीय ओसामा और 28 वर्षीय जीशान क़मर – ने लखनऊ से ओमान, फिर वहाँ से ईरान और अंत में पाकिस्तान गए। जिस रास्ते से वे पाकिस्तान गए थे, उसी रास्ते से वापस भारत भी पहुँचे। इस दौरान इन दोनों ने मुख्य रूप से स्पीडबोट का इस्तेमाल किया।

ओसामा और कमर को जान मोहम्मद शेख (47) उर्फ ​​समीर, मूलचंद (47), मोहम्मद अबू बकर (23) और मोहम्मद आमिर जावेद (31) के साथ 14 सितंबर को दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में छापेमारी के बाद गिरफ्तार किया गया था। पाकिस्तान द्वारा संचालित आतंकी मॉड्यूल कथित तौर पर गणेश चतुर्थी, नवरात्रि और रामलीला के त्योहारों के दौरान दिल्ली, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सहित देश भर में कई विस्फोटों की योजना बना रहा था।

महाराष्ट्र के आतंकवाद निरोधी दस्ते ने दावा किया था कि जान मोहम्मद शेख के करीब 20 साल पहले डी-कंपनी के साथ संबंध थे। डी-कंपनी का मतलब उस अंडरवर्ल्ड आपराधिक सिंडिकेट से है जिसका नियंत्रण भगोड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के हाथ में था। सूत्रों के अनुसार, ओसामा 21 अप्रैल 2021 को सलाम एयर की उड़ान में ओमान की राजधानी मस्कट के लिए लखनऊ से रवाना हुआ था। वहाँ बांग्ला बोलने वाले एक कैब चालक ने उसकी मेजबानी की, जो उसे बोशर के एक होटल में ले गया और उसे वहाँ के होटल मैनेजर को सौंप दिया जो एक पाकिस्तानी नागरिक था।

सूत्रों ने बताया कि कमर से ओसामा की मुलाकात उसी होटल में हुई। ओमान सरकार के नियमों के मुताबिक, अनिवार्य कोविड-19 क्वारंटाइन को पूरा करने के लिए दोनों सात दिनों तक होटल में ही रहे। सूत्रों ने कहा कि क्वारंटाइन अवधि पूरी होने के बाद दोनों को अल-खदरा ले जाया गया, जहाँ उन्हें एक बांग्लादेशी नागरिक को सौंपा गया और सुनसान इलाके में स्थित एक घर में ले जाया गया, जहाँ लगभग 15 अवैध बांग्लादेशी प्रवासी पहले से मौजूद थे।

चार दिनों के बाद उन्हें कथित तौर पर सोहर तट ले जाया गया जहाँ वे ईरान में बंदर-ए-जस्क जाने के लिए एक स्पीडबोट में सवार हुए। खुले पानी में पाँच घंटे की यात्रा ने उन्हें पूरी तरह से झुलसा दिया और डिहाइड्रेशन की परेशानी भी झेलनी पड़ी। जानकारी के मुताबिक, अपनी मंजिल पर पहुँचने के बाद एक ईरानी नागरिक दोनों को अपने घर ले गया, जहाँ से उन्होंने चाबहार बंदरगाह तक पहुंचने के लिए 10 से 12 घंटे की यात्रा की।

सूत्रों ने कहा कि दो दिन बाद वे पाकिस्तान के जियोनी तट के करीब जाने के लिए एक नाव पर सवार हुए। उन्हें समुद्र के बीच में एक पाकिस्तानी को सौंपा गया और फिर दोनों को जियोनी तट पर ले जाया गया, जहाँ एक कर्नल ने सुरक्षा गार्ड और तीन कारों के साथ उनकी अगवानी की। सूत्रों ने आगे बताया कि वहाँ से कराची के एक फार्महाउस तक पहुँचने के लिए उन्होंने नौ घंटे की सड़क यात्रा की।

फार्महाउस पर दोनों को आईईडी और विस्फोटक बनाने और उसे सँभालने के लिए 15 दिनों तक प्रशिक्षित किया गया। सूत्रों ने कहा कि उन्हें यह भी सिखाया गया था कि बिना कोई निशान छोड़े एक कमर्शियल मार्केट या बिल्डिंग में आग कैसे लगाई जाती है और एके-56 और बेरेटा पिस्टल को कैसे सँभालना है। उन दोनों को टारगेट प्रैक्टिस कराने के साथ ही मजहबी लोगों द्वारा कट्टरपंथी बनाया गया, जिन्होंने उन्हें बताया था कि वे इस्लाम के लिए जिहाद की लड़ाई कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि इस ट्रेनिंग के अंत में फार्महाउस पर उन्हें विदाई पार्टी (Farewell) दी गई।

अगले कुछ दिनों में दोनों ओमान वापस लौट गए। इस दौरान ज्यादातर उन्हीं लोगों के साथ उनलोगों की मुलाकात हो रही थी जो आगे की यात्रा में शामिल थे। सूत्रों ने कहा कि वे अंततः ओमान के उसी होटल में लौट आए और चार दिनों के बाद क़मर 19 जून को सलाम एयर की उड़ान से लखनऊ वापस लौटा, जबकि ओसामा अगले दिन उसी उड़ान से भारत आया।

गाँधी वाले ट्वीट पर 34 हजार लाइक्स, शास्त्री वाले पर 104000: PM मोदी ने दी श्रद्धांजलि तो पता चली लोकप्रियता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (2 अक्टूबर ) को महात्मा गाँधी और देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर सोशल मीडिया के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान सोशल मीडिया पर अजीब चीज ये देखने को मिली प्रधानमंत्री के ट्वीट पर लोगों ने सबसे अधिक लाल बहादुर शास्त्री को पसंद किया, जबकि गाँधी जी दूसरे स्थान पर रहे।

दोनों ही नेताओं की जयंती पर एक ही समय शनिवार सुबह 6:26 मिनट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ट्वीट कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को नमन करते हुए कहा कि मूल्यों और सिद्धांतों पर आधारित उनकी जीवन देशवासियों को सदा प्रेरणा देता रहेगा।

बिल्कुल इसी समय पीएम ने एक अन्य ट्वीट कर महात्मा गाँधी को भी श्रद्धांजलि दी। पीएम ने बापू को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन और आदर्श देश की पीढ़ी को अपने कर्तव्य के मार्ग पर चलने के लिए सदा प्रेरित करता रहेगा।

लेकिन सोशल मीडिया पर अजीब घटना ये हुई कि पूर्व पीएम शास्त्री जी को नेटिजन्स ने बापू से कहीं अधिक महत्व दिया। लोगों ने गाँधी जी की अपेक्षा उनसे जुड़े ट्वीट को लाइक, कमेंट और री-ट्वीट भी किए। खबर लिखे जाने तक पीएम द्वारा शास्त्री जी को लेकर किए गए ट्वीट में करीब 3600 लोगों ने कमेंट किए थे, 21,300 ने उसे री-ट्वीट किया था और 1.04 लाख से अधिक लोगों ने उसे लाइक किया था। जबकि महात्मा गाँधी को शास्त्री जी की तुलना कम लाइक और री-ट्वीट मिले थे। पीएम मोदी ने महात्मा गाँधी को लेकर जो ट्वीट किया था उसमें 2000 लोगों ने कमेंट, 5200 री-ट्वीट और करीब 34,600 लाइक्स मिले थे।

ये तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ट्वीट के आँकड़े थे। वहीं प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा द्वारा किए ट्वीट पर नजर डालें तो यहाँ भी गाँधी जी लाल बहादुर शास्त्री से पीछे हैं। लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि देते हुए पीएम की तस्वीर पर खबर लिखे जाने तक 137 लोगों ने कमेंट किए, 916 लोगों ने री-ट्वीट और 6,000 से अधिक लोगों ने इसे लाइक किया था।

वहीं महात्मा गाँधी को श्रद्धांजलि देते हुए ट्वीट में 156 लोगों ने कमेंट किए (कमेंट शास्त्री जी से अधिक हैं), 406 लोगों ने ट्वीट को री-ट्वीट किया और 2,400 लोगों ने इसे लाइक किया था।

साभार: ट्विटर

इस तरह से जयंती के दिन भी गाँधी जी पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री से सोशल मीडिया पर पिछड़ते दिखे।

टीएमसी नेता मदन मित्रा और सौगत रॉय ने ममता बनर्जी की तुलना देवी दुर्गा से की, तस्वीरें हुईं वायरल

पश्चिम बंगाल की राजनीति पर इस समय सभी की निगाहें हैं। हाल ही में बंगाल की तीन विधानसभा सीटों- भवानीपुर, जांगीपुर और समसेरगंज पर उप-चुनाव संपन्न हुए हैं। इसके नतीजे रविवार (3 अक्टूबर 2021) को घोषित किए जाएँगे। इससे ठीक एक दिन पहले टीएमसी नेता मदन मित्रा और सौगत रॉय ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तुलना देवी दुर्गा से की। मित्रा और रॉय की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई हैं। इनमें वे सीएम ममता बनर्जी की मूर्ति को फिनिशिंग टच देते हुए दिखाई दे रहे हैं।

दरअसल, कोलकाता में बागुईहाटी क्षेत्र के नजरूल पार्क उन्नयन समिति ने नवरात्रि के मद्देनजर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की एक मूर्ति लगाने का फैसला किया है। इसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को देवी दुर्गा के रूप में प्रदर्शित किया गया है। इस मूर्ति की दस भुजाएँ हैं, जिसमें प्रत्येक भुजा को राज्य सरकार की योजनाओं के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

इसमें कन्याश्री, जुबोश्री, स्वास्थ्य साथी, लखीर भंडार जैसी योजनाएँ शामिल हैं। इस दौरान मदन मित्रा ने दावा किया कि ‘आँख देने वाले’ एपिसोड में टीएमसी सुप्रीमो को देवी दुर्गा के रूप में दर्शाया गया है। इस बीच खबर है कि मुख्यमंत्री का गृह नगर भवानीपुर इस साल दुर्गा पूजा उत्सव के लिए ‘खेला होबे’ थीम रखने की योजना बना रहा है। मई 2021 में हुए विधानसभा चुनाव में भी ममता बनर्जी की पार्टी ने यही नारा दिया था।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के भवानीपुर विधानसभा सीट पर मतदान शुरू होने के साथ ही हिंसा की खबरें मीडिया में आने लगी थी। तृणमूल कॉन्ग्रेस प्रत्याशी ममता बनर्जी को टक्कर देने मैदान में उतरी भाजपा प्रत्याशी प्रियंका टिबरेलवाल ने टीएमसी विधायक मदन मित्रा पर वोटिंग मशीन कैप्चर करने का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि मित्रा ने वोटिंग मशीन बंद की, क्योंकि वह बूथ पर कब्जा करना चाहते थे। भवानीपुर उपचुनाव के नतीजों पर सबकी नजर इसलिए भी बनी हुई हैं, क्योंकि इस सीट पर ममता बनर्जी की प्रतिष्ठा दांव पर है। भारतीय जनता पार्टी ने उनके सामने टिबरेवाल को उतारा है, जिन्होंने 2014 में भाजपा ज्वॉइन की थी।

‘येशु पर विश्वास करो, वो सब कुछ ठीक कर देंगे’: बिहार में 2 महिलाओं समेत 5 हिरासत में, गरीब परिवारों को बना रहे थे ईसाई

बिहार के सासाराम में पुलिस ने ईसाई धर्मांतरण कराने के मामले में 5 लोगों को हिरासत में लिया है, जिनमें दो महिलाएँ भी शामिल हैं। ये घटना लश्करीगंज मोहल्ले में हुई है, जहाँ स्थानीय लोगों ने ही इन पाँचों को पकड़ के पुलिस के हवाले कर दिया। इनमें तीन युवक भी शामिल हैं। ये खुद को नेपाल का रहने वाला बता रहे हैं। इनका कहना है कि ये धर्म-प्रचार के लिए आए थे। नगर थाने में इनसे पूछताछ की जा रही है।

इस मामले में स्थानीय लोगों ने ही पुलिस को आवेदन देकर केस दर्ज करने व कार्रवाई की माँग की है। पुलिस मामले की छानबीन में लगी हुई है। बताया जा रहा है कि ईसाई धर्म का प्रचार करने आए ये पाँचों खुद धर्मांतरित हैं। लश्करीगंज की एक महिला ने बताया कि ये पाँचों घूम रहे थे और निवास स्थान पूछने पर कभी नेपाल तो कभी दार्जिलिंग बता रहे थे, तभी लोगों को संदेह हुआ। मोहल्ले में ही वो सोनम नाम की एक युवती से दोस्ती भी करना चाह रहे थे।

ये ईसाई मजहब के प्रोपेगंडा के लिए पुस्तकें भी लेकर आए थे, जिनकी पंक्तियाँ पढ़-पढ़ कर लोगों को सुना रहे थे। ये लोगों को कह रहे थे कि जीसस क्राइस्ट पर विश्वास करो और वो सब कुछ अच्छा कर देंगे। बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद (VHP) को जैसे ही इसकी जानकारी मिली, वहाँ इन हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ता जमा हो गए। उन्होंने पुलिस को बुला कर इन्हें उसके हवाले कर दिया। फिर पुलिस इन्हें नगर थाने ले गई।

नगर थानाध्यक्ष कामाख्या नारायण सिंह ने बताया कि पूरे घटनाक्रम की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी गई है और मामला काफी संवेदनशील होने के कारण बारीकी से जाँच की जा रही है। बताया जा रहा है कि पाँचों गरीब परिवारों को निशाना बना रहे थे। सीधी-सादी महिलाएँ इनके टारगेट पर थीं। विहिप के रोहतास महामंत्री अरुण काश्तकार ने कहा कि मामला पुलिस के पास है और वो ज़रूरी कार्रवाई करेगी।

किसानों पर दर्ज मामलों को वापस लेने के लिए पंजाब CM चन्नी ने दिए आदेश, रेलवे ट्रैक पर धरना देने के कारण दर्ज हुआ था केस

पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने पटरियों पर धरना देने वाले किसानों के खिलाफ दर्ज केस को वापस लेने का आदेश दिया है। उन्होंने आरपीएफ के चेयरमैन को पत्र लिखकर जल्द से जल्द केस वापस लेने को कहा है। बता दें कि रेलवे ट्रैक पर धरना देने वाले किसान संगठनों के खिलाफ केस दर्ज किए गए थे। 

पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। किसानों का समर्थन पाने के लिए पंजाब के सीएम चन्नी लगातार कदम उठा रहे हैं। किसानों को खुश करने के लिए चन्नी सीएम बनते ही बिजली बिल माफ करने का वादा कर दिया था। वादे के मुताबिक, पहली कैबिनेट बैठक में चन्नी ने 2 किलो वाट तक बिजली बिल माफ करने का ऐलान किया। जिन लोगों का बिल नहीं चुकाने पर कनेक्शन काटा गया था, उनके घर फिर से बिजली बहाल करने के आदेश दिए गए थे।

अब चन्नी ने किसानों के हित में फैसला लिया। वो फैसला है कृषि कानून के खिलाफ पटरियों पर प्रदर्शन कर रहे किसानों पर दर्ज केस वापस लेने का। आरपीएफ ने प्रदर्शन कर रहे किसानों पर केस दर्ज किया था। चन्नी ने यह कदम दिल्ली में शुक्रवार (अक्टूबर 1, 2021) को पीएम मोदी से हुई मुलाकात के बाद उठाया है। इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने किसानों के मुद्दे पर बात की, वहीं चन्नी ने पीएम से तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का आग्रह किया।

पीएम मोदी के साथ हुई बैठक के बाद सीएम चन्नी ने संवाददाताओं से कहा था, “मैंने पीएम मोदी से तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की माँग की। उन्होंने मेरी बात ध्यान से सुनी और कहा कि वह भी इस समस्या का समाधान चाहते हैं और इस दिशा में काम कर रहे हैं।”

पंजाब के मुख्यमंत्री ने पीएम को बताया कि राज्य की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है। अगर किसान और खेत मजदूर खुश हैं तो यह प्रगति कर सकता है। उन्होंने पंजाब में धान की खरीद तुरंत शुरू करने का भी आह्वान किया, जिसे इस बार 10 अक्टूबर तक टाल दिया गया है।

चन्नी ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री से यह भी कहा कि पंजाब किसानों के आंदोलन के कारण पीड़ित है और राज्य ने हमेशा देश के लिए लड़ाई लड़ी है। चन्नी ने कहा कि हमारे लोगों ने स्वतंत्रता संग्राम और देश की एकता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है।

इसके साथ ही सीएम चन्नी कोरोना महामारी से माता-पिता खो चुकी लड़कियों के लिए आशीर्वाद स्कीम से इनकम लिमिट हटाने का ऐलान किया है। इसके साथ ही पंजाब में अब 1 जनवरी 2004 के बाद से सरकारी नौकरी में चयनित कर्मचारियों के लिए फैमिली पेंशन स्कीम को भी मंजूरी दे दी है।

बता दें कि चन्नी ने अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि वो पंजाब के किसानों को कमजोर नहीं होने देंगे। केंद्र सरकार से कृषि कानूनों को वापस लेने की माँग करेंगे। अगर किसानों पर आँच आई तो वो अपना सिर कटा देंगे। उल्लेखनीय है कि मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसान, पिछले साल नवंबर से तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और तीनों कानूनों को निरस्त करने की माँग कर रहे हैं।

लखनऊ में धर्मस्थलों के 100 मीटर के दायरे में नहीं होंगी मांस-मछली की दुकानें व होटल, बना पहला भगवान परशुराम चौक

रामराज्य की संकल्पना को साकार करने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने जिस प्रकार से धर्मस्थलों को उनके प्राचीन एवं पौराणिक नामों से पुनर्स्थापित करने का प्रयास किया है, उसकी झलक महानगरों में भी दिखने वाली है। इसकी शुरुआत सबसे पहले उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से हो रही है।

विदित हो कि अब लखनऊ के धर्मस्थलों के आसपास के इलाके मांसाहारी दुकानों से मुक्त होने वाले हैं, क्योंकि उनके 100 मीटर दायरे में मांस-मछली की सभी दुकानें प्रतिबंधित होंगी। प्रतिबंधित 100 मीटर में कोई मांसाहारी रेस्टोरेंट भी चलाने की अनुमति नहीं होगी।

व्यापक जन समर्थन मिल रहे इस प्रस्ताव को नगर निगम लखनऊ की कार्यकारिणी ने गत गुरुवार (30 सितम्बर 2021) की रात पारित कर दिया है। हिंदुस्तान के अनुसार, लखनऊ की मेयर संयुक्ता भाटिया ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि इसको सख्ती से पालन भी करवाया जाएगा।

इसके अलावा, राजाजी पुरम क्षेत्र के एक चौराहे का नाम भगवान परशुराम चौक रखा गया। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भगवान परशुराम के नाम से ये पहला चौराहा है। इसी प्रकार लेबर कालोनी में आने वाले सर्वोदय पार्क का नामकरण महर्षि कश्यप के रूप में होगा। वहीं, डालीगंज के निराला नगर स्थित पार्क भी अब सरदार बल्लभ भाई पटेल पार्क के नाम से जाना जाएगा।

इस बैठक में लिए गए अन्य प्रमुख फैसलों में हैदरगंज द्वितीय वार्ड का नाम बुद्धेश्वर वार्ड, फैजुल्लागंज प्रथम वार्ड का नाम महर्षि नगर, फैज़ुल्लागंज तृतीय वार्ड का नाम केशव नगर और फैजुल्लागंज चतुर्थ का नाम पंडित दीन दयाल उपाध्याय वार्ड रखना तय हुआ।

इसी के साथ पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, भाऊराव देवरस, केशव नगर और परशुराम वार्ड आदि नए नामकरण अलग अलग वार्डों के किए गए। लखनऊ की मेयर संयुक्ता भाटिया के अनुसार, नाम बदलने के ये सभी प्रस्ताव स्थानीय सभासदों के द्वारा आए थे, जिसको जन भावना व जन अपेक्षा मान कर फैसले लिए गए।

जानकारी हेतु ये भी बता दें कि इस से पहले मथुरा वृन्दावन के क्षेत्रों को मांस-मछली की दुकानों से मुक्त करने के आदेश दिए गए थे। बताया ये भी जा रहा है कि भविष्य में उत्तर प्रदेश के कई अन्य शहरों में भी इसी प्रकार के नियम लागू किए जा सकते हैं।

1947 के बँटवारे के समय भारत में शरणार्थी बन कर आए लोगों के लिए भी लखनऊ नगर निगम की ये मीटिंग अभूतपूर्व ख़ुशी का कारण बनी। पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को मोहन रोड पर जीवन यापन के लिए किराए पर दी गईं 327 दुकानों को उन्हें स्थाई तौर पर आवंटित कर देने निर्णय लिया गया।