बॉलीवुड की बेबो यानि करीना कपूर खान एक बार फिर अपने टशन के चलते सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर आ गई हैं। दरअसल, करीना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में आप देख सकते हैं कि उनके पास खड़े एक गार्ड ने उन्हें सलाम किया, लेकिन करीना उसे नजरअंदाज करते हुए आगे बढ़ गईं। बस फिर क्या था यूजर्स को एक्ट्रेस की ये हरकत पसंद नहीं आई और उन्होंने ट्रोल करना शुरू कर दिया।
‘बजरंगी भाईजान’ फिल्म की एक्ट्रेस का यह वीडियो उनके फैन पेज से शेयर किया गया है। इसमें वह लाइट स्काई ब्लू कलर की शर्ट और बेज कलर के शॉर्ट्स पहनी हुई हैं। करीना ओवरसाइज्ड सनग्लासेस लगा रखी हैं और हाथों में मग लिए हुए टशन में अपनी कार की ओर जाती हुई दिख रही हैं। एक यूजर ने कमेंट किया, ”थोड़ी तो शर्म कर लो, कोई इंसान तुम्हें सैल्यूट कर रहा है।”
अन्य यूजर्स ने भी करीना को घमंडी कहते हुए अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने कहा, ”बुड्ढी हो गई, लेकिन अभी तक इसके अंदर संस्कार नहीं आए।” दशरथ पांचाल नाम के यूजर ने लिखा, ”बच्चे पैदा करने की मशीन।”
एक यूजर लिखते हैं, ”बेहद अफसोसजनक है करीना का ये बर्ताव।” एक अन्य ने कहा, ”पब्लिक के पैसे बटोर कर उसी से बड़े बनते हैं। भैंस लग रही है।”
गौरतलब है कि करीना जल्द ही आमिर खान के साथ फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ में नजर आने वाली हैं। ‘लाल सिंह चड्ढा’ हॉलीवुड फिल्म ‘फॉरेस्ट गम्प’ का रीमेक है। इससे पहले करीना कपूर को ‘The Incarnation – SITA’ फिल्म ऑफर की गई थी, लेकिन लगातार विरोध होने के बाद यह फिल्म कंगना रनौत की झोली में चली गई। ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ताओं ने नागपुर में करीना कपूर के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए जिला अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी थी। उन्होंने कहा था, “बार-बार मुस्लिम समाज के लोग ही हिंदू चरित्रों को क्यों निभाते हैं? इससे हमारे समाज को क्षति होती है। ये जिहादी मानसिकता के लोग हैं, जो हिन्दुओं से कमाई कर हिंदू समाज को ही गाली देते हैं।”
महात्मा गाँधी की जयंती पर एक बार फिर से सपा नेताओं का रोते हुए वीडियो वायरल हो रहा है। सपा नेता गालिब खान ‘बापू-बापू’ कहते हुए फूट-फूट कर रोते नजर आए। वीडियो में देखा जा सकता है कि जहाँ गालिब खान महात्मा गाँधी की प्रतिमा पर सिर रख कर रो रहे हैं, वहीं उनके अन्य समर्थक भी काफी गमगीन दिख रहे हैं। वो गालिब खान को ढाँढस बँधा रहे हैं और उन्हें सांत्वना दे रहे हैं।
इससे पहले 2019 में भी इसी तरह का एक वीडियो सामने आया था। तब उत्तर प्रदेश के संभल जिले के कुछ नेता गाँधी जयंती के मौके पर इसी तरह फूट-फूट कर रोने लगे थे। वो मामला चंदौसी कोतवाली क्षेत्र के फव्वारा चौक का था, जहाँ सपा जिलाअध्यक्ष फिरोज खान और अन्य पदाधिकारी पहुँचे जरूर, लेकिन थोड़ी देर में बापू की याद में विलाप करने लगे थे। कई लोग इस दौरान जिलाध्यक्ष का ढांढस भी बँधाते नजर आए थे और फिरोज खान लगातार कहते रहे थे, “बापू आप कहाँ चले गए… आपने इतने बड़े देश को आजाद कराया और हमें आनाथ बनाकर चले गए।”
वहीं ताज़ा वीडियो पर भी लोगों की एक से बढ़ कर एक प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। किसी ने याद दिलाया कि आज बापू की पुण्यतिथि नहीं बल्कि जयंती है, तो किसी ने ये ध्यान रखने को कहा कि कहीं ये लोग बापू का चश्मा चुरा कर न ले जाएँ। कई लोगों ने इस वीडियो को ऑस्कर में भेजे जाने की माँग की तो कइयों ने वीडियो के स्क्रीनशॉट लेकर पूछा कि पीछे खड़ा व्यक्ति हँस क्यों रहा है? लोगों ने इसे उत्तर प्रदेश में होने वाले 2022 विधानसभा चुनाव के मद्देनजर चुनावी आँसू भी करार दिया।
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह लक्षद्वीप में महात्मा गाँधी की पहली प्रतिमा का अनावरण करेंगे। इसके लिए वो शुक्रवार (2 अक्टूबर, 2021) को बापू की जयंती पर राजधानी कवरत्ती पहुँच रहे हैं। केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप में ये कोई पहली सार्वजनिक प्रतिमा होगी। कलक्टर एस अस्कर अली ने जानकारी दी है कि पीतल की 6 फुट लंबी प्रतिमा का अनावरण कवरत्ती द्वीप पर किया जाएगा। प्रशासन ने इसके लिए गाँधी जयंती के अवसर पर 3 दिवसीय कार्यक्रम का भी किया है।
ये कार्यक्रम शनिवार तक चलेंगे, जब प्रतिमा का अनावरण कर के इसे जनता को समर्पित किया जाएगा। वैसे ये प्रयास पहली बार नहीं हो रहा है। 2010 में भी महात्मा गाँधी की एक अर्ध-प्रतिमा के अनावरण का सरकार ने फैसला लिया था और इसके लिए केरल की एक कंपनी को ठेका भी दे दिया गया था। लेकिन, स्थानीय लोगों के विरोध प्रदर्शन के कारण प्रतिमा द्वीप समूह पर लाए जाने का बावजूद लगाया नहीं जा सका।
लक्षद्वीप में मुस्लिम जनसंख्या की बहुलता है, इसीलिए वहाँ के नए प्रशासक प्रफुल्ल खोड़ा पटेल को द्वीप समूह को मालदीव की तरह पर्यटन स्थल बनाने के लिए योजना लाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। प्रशासन ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अपना सब कुछ देने वाले सेनानियों की ये यहाँ पहली प्रतिमा होगी। आंध्र प्रदेश की कंपनी ‘श्री साईं बाबा मेगा सिलपसला’ को दिया गया था, जिसने 2 सप्ताह में 8.2 लाख रुपए की लागत से इसका निर्माण किया है।
Heading to Kavaratti in Lakshadweep to unveil the statue of Mahatma Gandhi. This is going to be the first statue of Pujya Bapu on this Island.
यहाँ चल रहे कार्यक्रम में सैकड़ों लोग आ रहे हैं। कलक्टर ने कहा कि भले ही इसे लगाए जाने से पहले खूब राजनीति हुई हो, लेकिन अब जब इसका अनावरण किया जा रहा है तब ऐसी कोई बात नहीं है। 2010 में आई प्रतिमा के बारे में उन्होंने कहा कि उसे ट्रेस करना मुश्किल है, क्योंकि अब उसका कोई रिकॉर्ड नहीं। प्रशासक के कई फैसलों का विरोध कर रही संस्था ‘सेव लक्षद्वीप’ ने भी इसके समर्थन का निर्णय लिया है।
लक्षद्वीप में मुस्लिमों की बहुसंख्यक आबादी है, जो कि लक्षद्वीप की कुल आबादी का लगभग 98% है। महात्मा गाँधी के पुतले का विरोध मुस्लिमों ने इसलिए किया था क्योंकि उनका कहना था कि किसी भी पुतले या मूर्ति को स्थापित करने से समुदाय की मजहबी भावनाओं को ठेस पहुँचेगी। मुस्लिम यह मानते हैं कि यदि कोई पुतला स्थापित कर दिया गया तो मुस्लिमों को उसे सम्मान देना और फूलों से सजाना होगा जो कि हिन्दुत्व का एक हिस्सा है और शरिया कानून का उल्लंघन करता है।
तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन के बीच जल संरक्षण और जलापूर्ति बड़ी समस्या बनकर उभरा है। इसी को ध्यान में रखते हुए महात्मा गाँधी की जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (2 अक्टूबर 2021) को ‘जल जीवन मिशन ऐप‘ और जल जीवन कोष लॉन्च किया। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, उत्तराखंड, मणिपुर और गुजरात सहित देश के पाँच राज्यों में जल जीवन मिशन का लाभ पाने वाले लोगों से भी वर्चुअली बातचीत की।
क्या है जल जीवन मिशन ऐप?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2019 में जल जीवन मिशन की घोषणा की गई थी। इसके तहत हर घर में जल पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। मौजूदा समय में ग्रामीण इलाकों में केवल 17 फीसदी आबादी तक ही पानी की सप्लाई की पहुँच है। ऐसे में यह ऐप जल जीवन मिशन से जुड़ी सभी जानकारियाँ लोगों को उपलब्ध कराएगा। इसके जरिये देशवासी अपने यहाँ के पानी की शुद्धता पर नजर रख सकेंगे। इसके अलावा, वाटर सप्लाई टीमों का विवरण तक सब कुछ इस ऐप पर उपलब्ध होगा।
प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण की दिशा में काम करने वाली पानी समितियों और ग्राम पंचायतों से भी बातचीत की। उन्होंने अपने संबोधन में महात्मा गाँधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को याद किया और कहा, “मुझे खुशी है कि आज के दिन देश भर के लाखों गाँवों के लोग ग्राम सभा के तौर पर जल जीवन पर संवाद कर रहे हैं।” पीएम ने कहा कि जल जीवन मिशन केवल लोगों तक पहुँचाने तक ही सीमित नहीं है। यह विकेंद्रीकरण व महिला विकेंद्रीकरण का बड़ा जन आंदोलन है।
प्रधानमंत्री के एक कोट को साझा किया औऱ कहा कि गाँधी जी कहते थे ‘ग्राम स्वराज का सही अर्थ आत्मबल से परिपूर्ण होना है।’ मेरी कोशिश है कि ग्राम स्वराज की ये सोच वास्तविकता की ओर आगे बढ़े। आगे प्रधानमंत्री ने कहा, “हमने कई फिल्में देखीं हैं, कहानियाँ पढ़ी हैं, जिनमें महिलाएँ मीलों दूर से पानी ढोती हैं। बहुत कम लोगों ने ये सोचा होगा कि ऐसा क्यों है। मैं मानता हूँ कि जिन लोगों पर लंबे समय से नीतियाँ बनाने की जिम्मेदारी थी, उन्हें ये सवाल खुद से जरूर पूछना चाहिए था।”
उन्होंने ये भी कहा कि जल जीवन मिशन के तहत बनने वाली जल समितियों में महिलाओं की भागीदारी 50 फीसदी यानि कि आधी होगी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “पानी को हमें प्रसाद की तरह इस्तेमाल करना होगा और अपनी आदतों को बदलना होगा। किसानों को भी कम पानी वाली फसलों पर जोर देना चाहिए।” पीएम ने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जो काम बीते 70 साल में नहीं किया गया वो दो साल में हमने करके दिखाया है।
2 अक्टूबर महात्मा गाँधी की जयंती है, जिन्हें भारत में ‘राष्ट्रपिता’ के रूप में भी जाना जाता है। तटीय शहर पोरबंदर में एक गुजराती हिंदू मोध बनिया परिवार में जन्मे गाँधी ने अपनी शिक्षा इंग्लैंड से पूरी की और कानून की प्रैक्टिस करने के लिए वहाँ से दक्षिण अफ्रीका चले गए।
बाद में वे भारत लौट आए और दमनकारी ब्रिटिश शासन के खिलाफ देश के स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हो गए। इन सबके अलावा, उन्होंने विभिन्न समुदायों, विशेष रूप से हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच सामंजस्य स्थापित करने के उद्देश्य से दैनिक प्रार्थना सभाओं के आयोजन के साथ प्रयोग किया। इन बैठकों के दौरान गाँधी ने लोकप्रिय भजनों और धार्मिक गीतों के सामुदायिक गायन को प्रोत्साहित किया।
गाँधी ने मुस्लिमों को खुश करने के लिए हिंदू धार्मिक भजन के लिरिक्स के साथ छेड़छाड़ की
गाँधी की प्रार्थना सभाओं में ‘रघुपति राघव राजा राम’ मुख्य आकर्षण का केंद्र था। भजन का इस्तेमाल पहली बार गाँधी द्वारा 1930 में दांडी मार्च के दौरान दांडी तक की 241 मील की यात्रा के दौरान एक नए कानून का विरोध करने के लिए किया गया था, जिसे अंग्रेजों ने भारतीयों को नमक बनाने या बेचने से प्रतिबंधित करने के लिए बनाया था। इस आंदोलन के दौरान गाँधी ने ‘रघुपति राघव राजा राम’ को लोकप्रिय बनाया क्योंकि मार्च करने वालों ने अपने आत्मविश्वास को बनाए रखने के लिए गाया था।
हालाँकि कल्पना के विपरीत, गाँधी भजन के निर्माता नहीं थे। भगवान श्री हरि के मानव अवतार पुरुषोत्तम श्री राम को समर्पित यह भजन श्री लक्ष्मणाचार्य द्वारा रचित श्री नम: रामायणम् का एक अंश है। गाँधी जी इस मूल भजन की 1-2 पंक्तियों को स्वतंत्रता आंदोलन मे अपनी भागीदारी के अनुसार परिवर्तित करके गाया करते थे। इस दौरान एक और मिथक पॉपुलर हो गया था कि यह एक देशभक्ति गीत है जिसका उद्देश्य भारतीय समाज की एक धर्मनिरपेक्ष समग्र छवि पेश करना है। हालाँकि, मूल रचना को, जिसे कभी-कभी राम धुन के रूप में संदर्भित किया जाता था, भगवान राम की महिमा और स्तुति के रूप में वर्णित किया जा सकता है। मूल पंक्तियाँ इस तरह है:
रघुपति राघव राजाराम,
पतित पावन सीताराम।
सुन्दर विग्रह मेघश्याम,
गंगा तुलसी शालिग्राम।
भद्रगिरीश्वर सीताराम,
भगत जन-प्रिय सीताराम।
जानकीरमणा सीताराम,
जय जय राघव सीताराम
यहाँ मूल हिंदू भजन की एक वीडियो है: –
गाँधी इस मूल रचना में बदलाव करके प्रार्थना सभा में गाया करते थे, जो इस प्रकार है-
रघुपति राघव राजाराम,
पतित पावन सीताराम,
भज प्यारे तू सीताराम
ईश्वर अल्लाह तेरो नाम,
सबको सन्मति दे भगवान।
धार्मिक भजन का यह घटिया संस्करण तुरंत लोकप्रिय हो गया। इसके पीछे गाँधी द्वारा स्वयं इसे प्रमोट करना था और इसके धर्मनिरपेक्ष अर्थ की वजह से यह अत्यधिक लोकप्रिय हुआ। इस भजन की रचना प्रसिद्ध संगीतज्ञ पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर द्वारा की गई थी।
यहाँ तक कि बॉलीवुड ने भी धार्मिक भजन के मिलावटी संस्करण पर विचार करने में अपनी भूमिका निभाई। हिंदी फिल्मों, जैसे ‘लगे रहो मुन्नाभाई’ और ‘कुछ कुछ होता है’ में इसका इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा, यह 1982 में अफ्रोबीट बैंड के एल्बम ओसिबिसा- अनलेशेड – लाइव का शुरुआती ट्रैक भी था।
लिरिक्स में इस हेरफेर के साथ मुस्लिमों को अपना समर्थन गाँधी को देने और उन प्रार्थना सभाओं में शामिल होने में कोई समस्या नहीं होती थी, जिसका उद्देश्य दोनों समुदायों के बीच मतभेदों को सुलझाना और सांप्रदायिक सद्भाव बनाना था। हालाँकि, मुस्लिम अल्पसंख्यक की माँगों के साथ सामंजस्य बैठाने की जिम्मेदारी हमेशा हिंदू बहुसंख्यकों की ही रही।
गाँधी ने मुस्लिमों द्वारा रखे गए आरक्षण को संबोधित करने के लिए एक हिंदू धार्मिक गीत के लिरिक्स को विकृत करने में बेजोड़ निपुणता दिखाई, लेकिन उन्होंने कभी भी पवित्र कुरान के आयतों की निंदा नहीं की, जो मूर्ति-पूजा को पाप कहता है और मूर्तिपूजा के लिए मृत्युदंड का आदेश देता है।
गाँधी ने मुस्लिमों को खुश करने के लिए हिंदुओं के राम जाप वाले भजन को विकृत कर दिया। बता दें कि गाँधी के सामुदायिक प्रार्थना में मुस्लिमों का कलमा जाप भी शामिल था। हालाँकि, ऐसी कोई रिपोर्ट या ऐतिहासिक सबूत नहीं हैं, जो यह बताता हो कि गाँधी ने हिंदुओं की चिंताओं को दूर करने के लिए कुरान की आयतों को बदल दिया या कलमा में बदलाव किया था, ताकि इसे आपसी सह-अस्तित्व और सांप्रदायिक सद्भाव के अपने स्वीकृत रुख के अनुकूल बनाया जा सके। शायद इस दोहरेपन के कारण ही विभाजन के दौरान गाँधी की प्रार्थना सभाओं का ध्रुवीकरण हो गया और प्रार्थना सभाओं के दौरान कलमा को शामिल करने पर सवाल उठाए जाने लगे।
समग्र एकता के सार को बनाए रखने के लिए गाँधी द्वारा हिंदुओं के साथ बार-बार विश्वासघात
राम धुन में मिलावट एक ऐसी घटना थी, जिसमें गाँधी ने हिंदुओं की भावनाओं के प्रति बेहद कम संवेदनशीलता दिखाई। उनके लिए अगर हिंदू धर्मग्रंथों और धार्मिक गीतों में बदलाव करने से मुस्लिम चिंताओं को संतुष्ट करने में मदद मिलती है तो यह उचित था। हालाँकि गाँधी ने मुस्लिमों को आधुनिकता को अपनाने और इस्लाम की अपनी शुद्धतावादी व्याख्या को छोड़ने के लिए कहने से परहेज किया।
इसी तरह, अन्य घटनाएँ भी हुईं जब गाँधी का हिंदुओं के हितों को प्रति उदासीन रवैया देखने को मिला। 1920 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान इस्लामिक खिलाफत के समर्थन में भारतीय मुस्लिमों के बीच एक विद्रोह हुआ था। इसका नाम खिलाफत आंदोलन दिया गया, जिसका उद्देश्य ऑटोमन साम्राज्य की मदद से ब्रिटिश साम्राज्य को नष्ट करके भारत में इस्लामी प्रभुत्व स्थापित करना था। अपने वर्चस्ववादी उपक्रमों के बावजूद गाँधी के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस ने 1920 में खिलाफत आंदोलन का समर्थन किया और इसे हिंदू-मुस्लिम संबंधों को मजबूत करने के एक महान अवसर के रूप में बताया।
गाँधी के संरक्षण के कारण खिलाफत आंदोलन ने मालाबार में भी प्रभावी हुआ और इसकी आड़ में भयानक हिंदू नरसंहार को अंजाम दिया, जिसे 1921 मोपला दंगों के रूप में भी जाना जाता है। विभाजन के समय, जब पाकिस्तान में हिंदुओं और सिखों को बेरहमी से मार डाला गया था, गाँधी ने नरसंहार को भाग्यवाद के रूप में बचाव करने की कोशिश की और तर्क दिया कि हमले में मारे गए हिंदुओं ने कुछ हासिल किया था, क्योंकि हत्यारे कोई और नहीं बल्कि उनके मुस्लिम भाई थे।
उन्होंने पश्चिमी पंजाब के हिंदू शरणार्थियों के लिए भी इसी तरह की टिप्पणी की, उन्हें घर लौटने के लिए कहा, भले ही वे मारे जाएँ। गाँधी चाहते थे कि वे हिंदू जो मौत से बचने के लिए पाकिस्तान से भाग कर भारत आए हैं, वो वापस लौट जाएँ और अपने भाग्य को गले लगा लें। इस प्रकार, गाँधी के आदर्शों का प्रारूप न केवल स्पष्ट रूप से अन्यायपूर्ण, कट्टरपंथी और गलत था, बल्कि एकतरफा भी था, जहाँ हिंदू हमेशा सांप्रदायिक कट्टरता का शिकार होते थे। उनके खिलाफ किए गए अत्याचारों पर या तो पर्दा कर दिया गया था या फिर नैतिक व्याख्याओं का उपयोग करके उचित ठहराया गया था।
गाँधीवादी धर्मनिरपेक्षता आज भी भारत को सताती है
दुर्भाग्य से, धर्मनिरपेक्षता का यह विकृत संस्करण, जिसका गाँधी ने समर्थन किया, यह आज भी भारत को परेशान कर रहा है। धर्मनिरपेक्षता की विकृति और बदतर हो गई है। वामपंथी झुकाव वाले बुद्धिजीवी हिंदुओं को अपराधबोध की तरफ ले जाने की कोशिश करते हैं और यह विश्वास दिलाते हैं कि उनकी हिंदू पहचान की मुखरता के कारण बहुलवाद खतरे में है।
धर्मनिरपेक्षता का यह तमाशा ही है कि गाँधी के हिंदू धार्मिक गीतों के घटिया संस्करण को महिमामंडित किया जाता है, जबकि पैगंबर मुहम्मद पर एक स्पष्ट चर्चा के अनुरोध को ‘सर तन से जुदा’ या सिर काटने के आह्वान के साथ पूरा किया जाता है। इस तरह की धमकियाँ देने वाले लोगों की निंदा करना तो दूर, लेफ्ट-लिबरल धर्मनिरपेक्षतावादियों ने उनकी धमकी को यह कहते हुए उचित ठहराया कि उन्हें ऐसा करने के लिए उकसाया गया था।
इसी तरह, इस साल की शुरुआत में यूपी शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने एक याचिका दायर कर कुरान से 26 आयतों को हटाने की माँग की थी। उनका दावा था कि इसमें आतंकवाद का समर्थन किया गया है। इसके बाद बड़े पैमाने पर आक्रोश फैल गया, सैकड़ों-हजारों प्रदर्शनकारी जामा मस्जिद में याचिका के विरोध में इकट्ठे हुए।
केंद्र और राज्य सरकारों को भेजे गए एक ज्ञापन में मुस्लिम प्रदर्शनकारियों ने उनके कृत्य के लिए ‘तत्काल गिरफ्तारी’ की माँग की। उन्होंने चेतावनी दी कि रिजवी के खिलाफ निष्क्रियता का मतलब होगा कि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था याचिका के समर्थन में है। उन्होंने जोर देकर कहा, “वसीम रिजवी अब पवित्र कुरान का अपमान करने में लिप्त है, इसलिए वह अब मुस्लिम नहीं है।” इसके अलावा, मुस्लिम निकायों ने माँग की कि उन्हें किसी भी मुस्लिम संस्थान में नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए।
इस मामले में भी भारत की धर्मनिरपेक्षता के स्वयंभू संरक्षकों ने वसीम रिजवी या पवित्र कुरान में संशोधन की उनकी माँग के समर्थन में आवाज नहीं उठाई। इसके बजाय, उन्होंने यूपी शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष का विरोध करते हुए सड़कों पर उतर आए और उनकी गिरफ्तारी का आह्वान किया। ऐसे छद्म धर्मनिरपेक्षों के लिए अल्पसंख्यक चिंताओं को समायोजित करने के लिए एक हिंदू धार्मिक भजन को विकृत करना पूरी तरह से उचित कार्य है, लेकिन जब इस्लाम में लाए गए बेहद जरूरी सुधारों का समर्थन करने की बात आती है तो उन सभी के मुँह सिल जाते हैं।
जैसा कि गाँधी ने स्वयं निर्धारित किया था, भारत में धर्मनिरपेक्षता एकतरफा रास्ता है जहाँ राष्ट्र के बहुलवादी ताने-बाने को संरक्षित करने का भार पूरी तरह से हिंदुओं के कंधों पर है। वहीं, अन्य समुदायों के सदस्य अपनी मर्जी के अनुसार कार्य करने के लिए स्वतंत्र हैं और सांप्रदायिक सद्भाव और सामाजिक एकता के आदर्शों को बनाए रखने के लिए उन पर कोई दायित्व नहीं है।
‘संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA)’ के अध्यक्ष अब्दुल्ला शाहिद ने खुलासा किया है कि उन्होंने भारत की कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड की डोज ली है। उन्होंने पुणे में स्थित ‘सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SRI)’ द्वारा निर्मित इस कोरोना वैक्सीन की दोनों खुराक ले ली है। उन्होंने कहा, “हाँ, मैंने भारत में बनी कोविशील्ड ली है और मैं ज़िंदा हूँ।” वो उस सवाल का जवाब दे रहे थे, जब उनसे पूछा गया था कि क्या सिर्फ ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)’ से अनुमति प्राप्त वैक्सीन ही लेनी चाहिए?
उन्होंने इसे एक काई तकनीकी सवाल बताते हुए कहा कि वो नहीं जानते कि कितने देशों ने कोविशील्ड को मान्यता दे रखी है, लेकिन कई ऐसे देश हैं जिनकी अधिकतर जनसंख्या ने भारत में बनी इसी वैक्सीन की डोज ली है। उन्होंने शुक्रवार (2 अक्टूबर, 2021) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित करते हुए खुद का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, “हाँ, मैं जीवित हूँ। लेकिन, ये सवाल आप किसी स्वास्थ्य विशेषज्ञ से पूछिए।”
उन्होंने बताया कि कोरोना वैक्सीन को लेकर जो अधिकतर प्रतिक्रियाएँ आई हैं, उनमें भारत, चीन और अमेरिका से सकारात्मक ही रही हैं। उन्होंने कहा कि जनवरी में होने वाली UNGA की बैठक में वो सभी देशों को साथ लाना चाहते हैं, ताकि उस साल के ख़त्म होने तक पूरी दुनिया का टीकाकरण किया जा सके। मूल रूप से मालदीव से ताल्लुक रखने वाले अब्दुल्ला शाहिद जनवरी 2022 में कोरोना टीकाकरण पर सभी देशों से प्रतिक्रियाएँ लेंगे।
‘I got Covishield from India’: President of the 76th UN General Assembly Abdulla Shahid https://t.co/2xg7ia2j63
बता दें कि यूके ने भारत की वैक्सीन लेने वालों के लिए क्वारंटाइन अनिवार्य कर दिया था, जिसका जवाब भारत ने भी दिया है। अब ब्रिटेन से आने वालों को यहाँ 10 दिन क्वारंटाइन में रहना पड़ेगा। दोनों देशों के बीच वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट को लेकर एक तरह का संघर्ष चल रहा है। यूके ने अब तक कोविशील्ड को मान्यता नहीं दी है। 4 अक्टूबर से नया ब्रिटिश ट्रेवल नियम लागू होगा। भारत अब तक कोरोना वैक्सीन के 90 करोड़ डोज दे चुका है।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने देश की ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के उपलक्ष्य में शनिवार (2 अक्टूबर 2021) को लाल किले से राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) की अखिल भारतीय कार रैली ‘सुदर्शन भारत परिक्रमा’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) की साइकिल रैलियों का भी स्वागत किया। दांडी, उत्तर-पूर्व और लेह से लेकर कन्याकुमारी तक देश के विभिन्न हिस्सों से शुरू हुईं ये साइकिल रैलियाँ आज नई दिल्ली में सम्पन्न हुईं।
Watch Live Streaming of Sudarshan Bharat Parikrama NSG Black Cats Car Rally Flag-off Ceremony from Red Fort on NSG YouTube channel event linkhttps://t.co/G87Ezygei0
पीआईबी के मुताबिक, 7,500 किलोमीटर लंबी यात्रा के दौरान NSG की कार रैली 12 राज्यों के 18 शहरों में देश के स्वतंत्रता आंदोलन और स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़े महत्वपूर्ण व ऐतिहासिक स्थानों से होकर गुजरेगी। यह रैली 30 अक्टूबर 2021 को नई दिल्ली स्थित पुलिस स्मारक पर समाप्त होगी। वहीं, 15 अगस्त 2021 से शुरू हुई साइकिल रैलियों में अधिकारी और जवानों समेत करीब 900 साइकिल सवार शामिल हैं, जो 21 राज्यों से लगभग 41,000 किलोमीटर का सफर तय करते हुए शनिवार को दिल्ली पहुँचे हैं।
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा आयोजित इन रैलियों का उद्देश्य देश की आजादी की 75वीं वर्षगाँठ को ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ के रूप में मनाना और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों का दौरा करके आपसी भाईचारे का संदेश प्रसारित करना है। इसके साथ ही युवाओं से मिलकर देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए उन्हें राष्ट्रभक्ति के लिए प्रेरित करना है।
नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) क्या है
राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड, जिसे नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) के नाम से भी जाना जाता है, भारत की सर्वश्रेष्ठ कमांडो यूनिट है। यह एक अति विशिष्ट टुकड़ी है। इसका गठन 1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद संसद द्वारा विशेष विधेयक द्वारा किया गया था।
भारत के इस कमांडो की गिनती विश्व की प्रमुख 5 कमांडोज यूनिट में होती है। देश में करीब 14,500 एनएसजी कमांडो हैं। NSG कमांडो अत्याधुनिक हथियारों से लैस होते हैं। इसे इंग्लैंड के SAS और जर्मनी कमांडो यूनिट GSG-9 के तर्ज पर तैयार किया गया है। जर्मनी ने भी इस यूनिट को आतंकवाद से लड़ने के लिए बनाया था, जो कारगर साबित हुई। यह गृह मंत्रालय के अंतर्गत आती है और इसी के निरीक्षण में काम करती है। नेशनल सिक्योरिटी गार्ड का मुख्य उद्देश्य व कार्य देश और राज्य में फैली आतंकवादी गतिविधियों को खत्म करना है। NSG कमांडो को दो भागों Special Action Group (SAG) और Special Rangers Group (SRG) में विभाजित किया गया है।
बता दें कि अपनी यात्रा के दौरान एनएसजी की कार रैली देश के 12 राज्यों के 18 शहरों से काकोरी मेमोरियल (लखनऊ), भारत माता मंदिर (वाराणसी), नेताजी भवन बैरकपुर (कोलकाता), स्वराज आश्रम (भुवनेश्वर), तिलक घाट (चेन्नई), फ़्रीडम पार्क (बेंगलुरू), मणि भवन/अगस्त क्रांति मैदान (मुंबई) और साबरमती आश्रम (अहमदाबाद) जैसे ऐतिहासिक महत्व वाले अनेक स्थानों से होकर गुजरेगी।
तारीख है 2 अक्टूबर। साल का क्या है, हर 365 दिन पर बदल जाता है। हर चार साल पर जिद्दी भी हो जाता है और बदलने में 366 दिन ले लेता है। उस गोले का कैलेंडर भी इस गोले जैसा है। इस गोले पर आज मोहनदास करमचंद गाँधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती है। उस गोले पर जयंती तो नहीं मन रही पर गहमागहमी असामान्य है।
असल में हुआ यूँ कि बापू रोज की तरह इंद्रप्रस्थ पार्क में मार्निंग वॉक पर थे। हाथ में लाठी तो थी पर आभा और मनु साथ नहीं थीं। टहलते-टहलते बापू समय से टकरा गए। बात शुरू हुई उस कारस्तानी से जो इंद्रप्रस्थ पार्क का नाम बदलकर जवाहर पार्क करने को लेकर चल रही थी। बापू बोले- जिन्ना भी जिद्द किए बैठा है कि आधा पार्क उसे चाहिए। डायरेक्ट एक्शन डे की धमकी दे रहा है। जवाहर कह रहा है कि 75 टुकड़े कर दो पर एक तो उसके नाम हो ही। अचानक बापू मौन हो गए। गहरी साँस ली। मानो सोच रहे थे कि इस गोले से उस गोले तक ये तो ऐसे गले पड़े, जैसे विक्रम के पीछे बेताल। सहारा देने को आभा और मनु भी न थी। नि:सहाय बापू ने खुद ही समय से पूछा कि उस गोले पर क्या चल रहा है।
समय ने कहा- मैं समय हूँ और बापू ने चश्मा उतार आँखों पर गैलीलियो की दूरबीन चढ़ाई। नजर इस गोले पर टिक गई। समय ने बताया- ये देखिए बापू, ये है 24 अकबर रोड। आपने तो स्वतंत्रता के बाद इस दुकान का शटर गिराने को कहा था। लेकिन न तब शटर गिरा, न अब शटर गिरा है। पर अभी आपस में ही मारा-मारी है। शटर भले न गिरे, इंद्रप्रस्थ पार्क के टुकड़े भले न हो पर इस दुकान के टुकड़े होने का वक्त आ गया। इसलिए आजकल जवाहर के नाते-रिश्तेदारों को आप बहुत याद आ रहे हैं।
बापू समझ न पाए तो समय उन्हें सन 1939 में लेकर चला गया। अब समय की गति है। एक पल में यहाँ, दूजे पल वहाँ। सन 39 के त्रिपुरी अधिवेशन में पहुँचते ही बापू को कुछ बताने की जरूरत न पड़ी। उन्हें खुद याद आ गया कि कैसे जवाहर की राह निष्कंटक करने के लिए सुभाष का हिसाब हुआ था। जब याददाश्त लौटी तो समय ने याद दिलाया कि आजकल जनपथ की हवा भी कुछ ऐसी ही है।
बापू का मन उद्गिन हो उठा। सुभाष के साथ हुआ हिसाब कचोटने लगा। समय से कहा कुछ और दिखाओ कि दिल्ली वाले सर जी बापू की दूरबीन से टकरा गए। बापू ने झटके से दूरबीन नजरों से हटाई जैसे कोई दु:स्वप्न देख लिया। खुद ही समय से बोले- सुना है इसने मुझे ही बेच अपनी दुकान सजाई है। रालेगण सिद्धि से किसी को गाँधी बनाकर लाया, उसके कँधे चढ़ा और फिर उसे लात मार दी… बापू आगे नहीं बोल पाए। उनका दुख समझते समय को देर न लगी। बस इतना ही कहा- बापू ये भी आपके जवाहर ब्रीड का ही है!
दुखी बापू ने कहा इस शहर से मन उचट गया है। त्रिपुरा की बात की तो मध्य प्रदेश ही ले चलो। सुना है गजब है मध्य प्रदेश! समय उन्हें मध्य प्रदेश के शहर इंदौर में लेकर आ पहुँचा। कहते भी हैं- रात मालवा न देखा तो क्या देखा। अब चूँकि रात हुई नहीं थी तो बापू से राहुल गाँधी टकरा गया। टकरा गए उसके दर्द। फूट-फूट कर रोया। समय से विस्तार से बापू को राहुल गाँधी की कथा सुनाई।
बापू सन्न! नि:शब्द! फिर उन्हें याद आया कि वे बैरिस्टर भी थे। समय की गति पर पर सवार हो आँखों पर पट्टी बँधी देवी के दरवाजे पर खड़े हो गए। दरवाजे ने खुलने से इनकार कर दिया। कहा- आज गाँधी जयंती है का हॉलीडे है। बापू फट पड़े। झट से सवाल दागा- आधी रात जिसके लिए दरवाजे खोले उसका प्रोफाइल मेरे से चकाचक था? मुँह न खुलवाओ मेरा। तुम्हारे इस पिलपिलेपन को मैं खूब बूझता हूँ। इसी का नतीजा है कि किसानों के नाम पर सड़कों पर गुंडागर्दी हो रही… बापू अपनी ही धुन में थे। समय ने चुपके से दरवाजे के कान में कहा- अब खुद की कितनी बेइज्जती करवाओगे। आज भी राष्ट्रपिता हैं। एक बार पिलपिलेपन का ठप्पा लगा दिया तो भले जितनी बार भी धोओ, सर्फ एक्सेल से भी दाग न जाएगा। दरवाजे को बात जँच गई और वह खुल गया। पीआईएल में कहा गया है- बापू, गाँधी वापस चाहते हैं। वे गाँधी के साथ पप्पू को अब और ढोने को तैयार नहीं…
हिमाचल प्रदेश की सरकार ने बड़ा फैसला लिया है कि वहाँ के मंदिरों में अब सिर्फ हिन्दू कर्मचारी ही भर्ती किए जाएँगे और गैर-हिन्दुओं पर दान का रुपया खर्च नहीं होगा। ‘अमर उजाला’ की खबर के अनुसार, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की सरकार ने इस सम्बन्ध में अधिसूचना भी जारी कर दी है। राज्य के मंदिरों, शक्तिपीठों व हिन्दू धार्मिक संस्थानों को मिलने वाला चढ़ावा गैर-हिन्दुओं पर खर्च नहीं किया जाएगा।
चढ़ावे में मिलने वाले रुपए का सोने-चाँदी अब सिर्फ हिन्दुओं पर ही खर्च किए जाएँगे। मंदिर की सुरक्षा से लेकर उसकी समितियों में भी वही लोग शामिल होंगे, जो हिन्दू धर्म को मानते हैं। ‘भाषा कला एवं संस्कृति विभाग’ ने ‘हिमाचल प्रदेश हिंदू सार्वजनिक धार्मिक संस्था और पूर्त विन्यास अधिनियम-1984’ की धारा-27 के तहत मंदिर आयुक्तों को आदेश जारी भी कर दिया है। अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी धीमान ने ये अधिसूचना जारी की।
हिमाचल प्रदेश में कई बड़े मंदिर हैं, जिनमें हर साल हिन्दू श्रद्धालु करोड़ों रुपयों का चढ़ावा चढ़ाते हैं। मंदिरों को सोने-चाँदी समेत कई कीमती धातु भी बड़ी मात्रा में मिलते हैं, जिन्हें खजाने में जमा किया जाता है। धनराशि को बैंकों में ‘फिक्स्ड डिपॉजिट’ बना कर रख दिया जाता है। अधिकतर मंदिरों में वर्षों से सोने-चाँदी पड़े हुए हैं, लेकिन उनका सही तरीके से इस्तेमाल नहीं हो पाया है। इन्हीं चढ़ावों से पुजारियों व मंदिर अधिकारियों को वेतन-भत्ते भी दिए जाते हैं।
हिमाचल के मंदिरों को लेकर सरकार का बड़ा फैसला (फोटो साभार: अमर उजाला)
यहीं से आई रकम मंदिरों के रखरखाव-प्रबंधन, प्रतिमाओं-मंदिरों की सजावट, मंदिरों के तहत आने वाले स्कूलों-कॉलेजों और संस्कृत कॉलेज खोलने, सराय बनाने, सड़कों को तैयार करने पर भी खर्च किया जाता है। बैंकों में एफडी की गई धनराशि को प्रशासन अन्य विकास कार्यों में खर्च करता है। धातुओं को पिघला कर श्रद्धालुओं को सिक्के देने की योजना थी, पर ये सफल नहीं हो पाई। 1986 में संशोधित नियमों में फिर से संशोधन कर नई प्रक्रिया तय किए जाने पर काम चल रहा है।
‘विश्व हिन्दू परिषद् (VHP)’ ने हिमाचल प्रदेश सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता व केंद्रीय सहमंत्री विजय शंकर तिवारी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के मंदिरों की आय अब गैर हिन्दुओं पर नहीं खर्च होगी, विहिप का प्रयास सफल हुआ। वो ‘भारतीय धरोहर’ व ‘विश्व हिन्दू पत्रिका’ के संपादक भी हैं। हिन्दू संगठन देश भर में मंदिरों को सरकारी कब्जे से मुक्त करने का अभियान चला रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से मानसिक रूप से दिव्याँग एक युवती का रेप करने का मामला सामने आया। पीड़िता जिले के जेएन मेडिकल कॉलेज और ट्रॉमा सेंटर में भर्ती है और यहीं उसका इलाज चल रहा है। इसी दौरान मौका देखकर एक दिन आरोपित वारिस मदद के नाम पर पीड़िता को ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया।
रिपोर्ट के मुताबिक, घटना गुरुवार (30 सितंबर 2021) की रात करीब 12:30 बजे की है। उस दिन रात में पीड़िता (22) अचानक अपने बेड से गायब हो गई, जिसके बाद अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने सुरक्षा गार्ड सरताज अली और मोहम्मद नदी को लड़की की तलाश करने को कहा। गार्ड पीड़िता को ढूँढ ही रहे थे कि उन्हें अस्पताल के बाथरूम से उसके चीखने की आवाज सुनाई दी। वहाँ जाकर देखा तो आरोपित वारिस लड़की का रेप कर रहा था। आरोपित को पकड़ने के बाद पुलिस के हवाले कर दिया गया। सीएमओ की शिकायत पर सिविल लाइंस पुलिस ने आरोपित के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
मदद के नाम पर दिया दगा
आरोपित वारिस अस्पताल के सामने स्थित एक मेडिकल स्टोर पर काम करता था। वह नियमित तौर पर पीड़िता की मदद करने के बहाने पीड़िता के वार्ड में आता रहता था। वारिस क्वार्सी के महेशपुर फाटक का रहने वाला है। इसी कारण से उस पर किसी को कोई शक भी नहीं हुआ और उसने इसी का फायदा उठाकर इस वारदात को अंजाम दिया।
पीड़िता के घरवालों का नहीं है पता
22 वर्षीय पीड़िता मेडिकल कॉलेज के फर्स्ट फ्लोर पर रिकवरी वार्ड ईएसटी में भर्ती है। बीते 18 जुलाई को एक एक्सीडेंट के बाद उसे यहाँ इलाज के लिए आरपीएफ ने भर्ती कराया था। चूँकि उसके माता-पिता का कोई पता नहीं चल सका है, इसलिए अस्पताल ही उसकी देखभाल करता है।
इस घटना को लेकर सिविल लाइन थाने के सीओ श्वेताभ पांडेय ने कहा है कि वारिस को गिरफ्तार कर लिया गया है और सिक्योरिटी गार्ड सरताज की शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ रेप का केस दर्ज किया गया है। फिलहाल पीड़िता का मेडिकल कराने के बाद मामले की छानबीन की जा रही है।