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बांदीपोरा में पिछले साल भाजपा नेता और उनके परिवार की हत्या करने वाले आतंकियों का सुरक्षाबलों ने किया खात्मा, 2 आतंकी ढेर

जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा इलाके में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में 2 आतंकियों को मार गिराया है। कश्मीर पुलिस ने रविवार (26 सितंबर, 2021) को ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले में मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबलों ने उस आतंकवादी को भी मार गिराया है, जिसने पिछले साल जुलाई में भाजपा नेता के परिवार के तीन सदस्यों को गोली मार दी थी। इस ऑपरेशन में सेना की 14 राष्ट्रीय राइफल्स के जवान शामिल हुए हैं। ऑपरेशन के बाद इलाके में बड़ी संख्या में जवानों को तैनात किया गया है।

बांदीपोरा पिछले कई वर्षों से अपेक्षाकृत शांत रहा है। ऐसे में परिवार के तीनों लोगों की हत्या से सभी को बड़ा झटका लगा ​था। इससे पहले बारामूला में 17 अगस्त, 2020 को शुरू हुए मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने तीन आतंकवादियों को ढेर किया था। इसमें लश्कर-ए-तैयबा के दो टॉप कमांडर्स सज्जाद उर्फ हैदर और उस्मान भी शामिल थे।

आईजीपी कश्मीर विजय कुमार ने 18 अगस्त, 2020 को बताया था कि सज्जाद हैदर बीजेपी नेताओं की हत्या का मुख्य साजिशकर्ता था, जबकि विदेशी आतंकी उस्मान ने वसीम बारी, उनके पिता और भाई की हत्या की थी। इन दो आतंकियों का मारा जाना सुरक्षाबलों के लिए बड़ी सफलता है। सज्जाद युवाओं को आतंकी संगठनों में भर्ती करता था और पुलिस, नागरिकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर हमलों में शामिल था।

गौरतलब है कि 8 जुलाई 2020 को 27 वर्षीय शेख वसीम बारी के अलावा, उनके पिता शेख बशीर अहमद और भाई शेख उमर की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। हमला बांदीपोरा पुलिस स्टेशन के ठीक बाहर हुआ, जब तीनों अपनी दुकान पर थे। वसीम बारी बांदीपोरा जिले के पूर्व बीजेपी अध्यक्ष भी थे। उमर भाजपा की जिला युवा इकाई का सदस्य थे, जबकि उनके पिता बशीर शेख भाजपा के जिला उपाध्यक्ष रह चुके थे।

वसीम बारी की हत्या के बाद आतंकियों की तरफ से फरमान जारी किया गया था। जिसमें आतंकियों ने बीजेपी नेताओं को इस्तीफा देने के लिए कहा था। यह आतंकियों का खौफ ही था कि तब से अब तक करीब एक दर्जन बीजेपी नेता पार्टी से इस्तीफा दे चुके हैं। वहीं बीजेपी से जुड़े कई लोगों की हत्या कर दी गई है।

‘चर्च में बिना अंडरवियर के आएँ महिलाएँ… वरना ईसा मसीह शरीर में नहीं कर पाएँगे प्रवेश’- पादरी का फरमान: Fact Check

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो धड़ल्ले से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि केन्या के पादरी ने चर्च में आने वाली महिलाओं को आदेश दिया है कि वो किसी भी प्रकार का अंडरगारमेंट पहनकर न आएँ। अगर वह यह आदेश नहीं मानेंगी तो जीजस नाराज हो जाएँगे जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ेगा।

इस वायरल वीडियो को देखने के बाद हमने भी इस खबर को कवर करने की सोची। इस खबर के बारे में अधिक जानकारी के लिए हमने गूगल का सहारा लिया। मगर यहाँ पर हमें जो सोर्स मिला, उसे देख कर हमने खबर नहीं, फैक्ट चेक करने का फैसला किया।

जानिए ऑपइंडिया की पड़ताल में क्या आया सामने 

दरअसल, पड़ताल करने पर पता चला कि यह खबर तो सही है लेकिन ऐसा अभी नहीं हुआ बल्कि यह 7 साल पुरानी घटना है। 2-4 सिंपल कीवर्ड से 2014 की खबर गूगल सर्च के पहले पन्ने पर ही मिल गई, लेकिन सोशल मीडिया पर बिना खबर की सच्चाई जाने इस खबर को खूब शेयर किया जा रहा है।

सिंपल कीवर्ड से 2014 की खबर गूगल सर्च के पहले पन्ने पर ही मिल गई 

आखिर खबर है क्या?

ये पूरा मामला केन्या के नैरोबी स्थित Lord’s Propeller Redemption नामक चर्च का है। जहाँ के पादरी रेवरेंड नजोही ने चर्च आने वाली महिलाओं के लिए एक आदेश जारी किया जिसके अनुसार, चर्च में महिलाएँ किसी भी प्रकार का अंडरगारमेंट पहनकर ना प्रवेश करें।

रिपोर्ट के अनुसार, चर्च के फादर नजोही ने इसके पीछे यह तर्क दिया कि चर्च में जब महिलाएँ अंडरगारमेंट पहनकर आती हैं तो इससे गॉड जीसस उनके शरीर में प्रवेश नहीं कर पाते जिससे उनका चर्च में आना अधूरा रह जाता है। फादर रेवरेंड नजोही के अनुसार, महिलाएँ तभी चर्च में आने का पूरा लाभ उठा पाएँगी जब वह अंडरवियर पहनकर आना बंद कर देंगी। क्योंकि यह गॉड जीजस से मिलने में बाधा उत्पन्न करता है। मगर पादरी ने पुरुषों के अंडरगारमेंट्स पर कुछ नहीं कहा।

पादरी ने तर्क दिया कि चर्च जाते समय लोगों को मन और शरीर से पूरी तरह फ्री होना चाहिए। उनके मुताबिक इस काम में अंडरगारमेंट्स बाधा पहुँचाते हैं। सिर्फ यही नहीं बल्कि, फादर नजोही ने चर्च आने वाली महिलाओं को यह कहकर डराया भी कि अगर वह यह आदेश नहीं मानेंगी तो गॉड नाराज हो जाएँगे जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ेगा।

इतना ही नहीं, पादरी ने महिलाओं से कहा कि चर्च में आने से पहले उन्हें अपनी बेटियों को चेक करना होगा, ताकि वह अंदरूनी कपड़े पहनकर न आ सकें। आपको जानकर हैरानी होगी कि कई सारी महिलाएँ जो चर्च नियमित रूप से जाया करती थी, वह पाखंडी पादरी के बहकावे में आ गईं और उन्होंने पादरी के आदेश का पालन करते हुए चर्च बिना अंडरगारमेंट पहने ही जाना शुरू कर दिया।  

इससे साबित होता है कि यह खबर सही है लेकिन अभी ऐसा कोई आदेश नहीं दिया गया है। अभी 7 साल पुरानी खबर फिर से वायरल की जा रही है।

‘इस्लाम अपनाने पर ₹1 लाख, 50 गज का मकान’: ‘मोहम्मद अली’ ने दिया लालच, कलीम सिद्दीकी के करीबी ATS की रडार पर

मौलाना कलीम सिद्दीकी के कई साथी उत्तर प्रदेश ATS की रडार पर हैं। उधर बुलंदशहर में लालच देकर इस्लामी धर्मांतरण कराने का एक पोस्ट वायरल हुआ है। यूपी ATS (आतंक निरोधी दस्ता) ने मौलाना कलीम सिद्दीकी की गिरफ्तारी के साथ ही उसके संपर्कों को खँगालना शुरू कर दिया है। दिल्ली, मेरठ और मुजफ्फरनगर में इसके लिए खास तौर पर अभियान चलाया जा रहा है। उसके खिलाफ जानकारी जुटाई जा रही है।

इससे पता चलेगा कि धर्मांतरण गिरोह के सरगनाओं में से एक मौलाना कलीम सिद्दीकी के तार कहाँ तक फैले हुए हैं। आशंका है कि उसका भी नेटवर्क मोहम्मद उमर गौतम की तरह फैला हुआ और मजबूत हो सकता है, जो पहले से ही पुलिस की गिरफ्त में है और जिसकी निशानदेही पर कलीम सिद्दीकी धरा गया। उससे जुड़े संपर्कों की धर-पकड़ होगी और उनसे भी पूछताछ की जाएगी, ताकि गिरोह की तह तक जाया जा सके।

वहीं यूपी ATS उधर अवैध फंडिंग को लेकर भी मौलाना कलीम सिद्दीकी से पूछताछ कर रही है। शुक्रवार (24 सितंबर, 2021) को उसे जेल से ATS मुख्यालय भी ले जाया गया। वहीं पर उससे कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ जुटाने के लिए पूछताछ चल रही है। अन्य माध्यमों से भी सूचनाएँ इकट्ठी की जा रही हैं। इस मामले में एएसपी के निगरानी में गठित टीम को पूछताछ के साथ-साथ उमर गौतम और मौलाना के रिश्तों को लेकर भी जाँच करने के लिए भी लगाया गया है।

उधर उसके एक अन्य करीबी मुजफ्फरनगर के खतौली से कलीम के करीबी हाफिज इदरीश को पुलिस दो दिन पहले ही हिरासत में ले चुकी है। इसके बाद मदरसा जामिया इमाम वलीउल्लाह इस्लामिया के शिक्षक, स्टाफ और छात्र के अलावा फुलत गाँव में रहने वाले कलीम के परिवार वाले अंडरग्राउंड हो गए हैं। इदरीश को खतौली से दबोचा गया। मौलाना सारिक के घर हुए एक कार्यक्रम को लेकर पुलिस सूचनाएँ खँगाल रही है।

इधर बुलंदशहर में इस्लामी धर्मांतरण के लिए लालच देने वाला फेसबुक पोस्ट वायरल हुआ, जिसके बाद साइबर सेल के कान खड़े हो गए। शनिवार (25 सितंबर, 2021) को एक मोहम्मद अली नामक व्यक्ति ने ये पोस्ट शेयर किया। इसमें उसने धर्म-परिवर्तन कर इस्लाम अपनाने पर लोगों को एक लाख रुपए के साथ-साथ 50 गज का एक मकान देने का वादा किया है। SSP ने रिपोर्ट दर्ज करा जाँच शुरू कर दी है। आईडी फर्जी पाई गई है।

हाल ही में कलीम सिद्दीकी मामले में नितिन पंत नामक व्यक्ति ने कुछ खुलासे किए थे, जो धर्मांतरण केस में गिरफ्तार कलीम सिद्दीकी के लालच का शिकार हुआ था। कलीम ने नौकरी, शादी और पैसे का लालच देकर नितिन को अली हसन बना दिया था। इस दौरान उसे राजस्थान और फिर मुजफ्फरनगर के मदरसे में रखा गया। नितिन ने बताया कि उसे कलीम सिद्दीकी हिंदू लड़कियों को वश में करने के लिए कहता था। हिंदू लड़कियों का अश्लील वीडियो बनाने को कहता था।

नक्सलियों से लड़ बलिदान देते हैं जहाँ सुरक्षाबल, उस छत्तीसगढ़ के CM नहीं आए नक्सल मीटिंग में, ममता बनर्जी भी गायब

नक्सल समस्या पर चर्चा करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ आज (सितंबर 26, 2021) कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक शुरू हो गई है। इस बैठक में नक्सल प्रभावित इलाकों में हालात की समीक्षा की जा रही है। वहीं इन सब के बीच खबर है कि नक्सल प्रभावित राज्यों में से एक छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इस बैठक में शामिल होने के लिए नहीं पहुँचे हैं। सीएम भूपेश बघेल की जगह मुख्य सचिव अमिताभ जैन, डीजीपी डीएम अवस्थी बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुँच गए हैं।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में बस्तर संभाग के ज्यादातर जिलों में नक्सली आतंकियों का खतरा है। अक्सर इन जिलों में नक्सली सुरक्षाबलों को निशाना बनाते हैं। साथ ही इलाके में चल रहे विकास कार्यों को बाधित भी करते हैं। इस साल भी नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों को खूब निशाना बनाया है। हाल ही में नक्सली हमले में आईटीबीपी के एक अफसर बलिदान हो गए थे।

मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी इस बैठक में शामिल होने नहीं पहुँची हैं। पश्चिम बंगाल की ओर से मुख्य सचिव एचके द्विवेदी प्रतिनिधित्व करेंगे। वह रविवार सुबह दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं। इसके अलावा आंध्र प्रदेश के सीएम जगन मोहन रेड्डी भी मीटिंग में शामिल होने के लिए नहीं पहुँचे हैं। उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव को प्रतिनिधित्व करने के लिए भेज दिया है।

गृह मंत्री अमित शाह नक्सल प्रभावित इलाकों में सड़कों, पुलों, स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण जैसे मौजूदा विकास कार्यों की समीक्षा भी कर सकते हैं। गृह मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार देश में माओवादी हिंसा में खासी कमी आई है और अब यह समस्या करीब 45 जिलों में व्याप्त है। हालाँकि, देश के कुल 90 जिलों को माओवादी प्रभावित माना जाता है और वे मंत्रालय की सुरक्षा संबंधी व्यय योजना के तहत आते हैं।

नक्सली हिंसा को वामपंथी उग्रवाद भी कहा जाता है। 2019 में 61 जिलों से नक्सली हिंसा की रिपोर्ट आई थी जबकि 2020 में यह संख्या घटकर 45 हो गई। गृह मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, साल 2015 से साल 2020 तक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हुई हिंसा की विभिन्न घटनाओं में लगभग 380 सुरक्षाकर्मी, 1000 नागरिक और 900 नक्सली मारे गए। इसके साथ ही इसी समय में कुल 4200 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण भी किया।

मुख्यमंत्री जिन्हें होना था शामिल

जानकारी के अनुसार इस बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केरल के मुख्यमंत्री के पिनराई विजयन को शामिल होने के लिए कहा गया था। 

‘UP की जेलों में 27% मुस्लिम बंद… अतीक, मुख्तार भी’: ओवैसी के भाषण पर अतीक की बीवी ने कहा- ‘अखिलेश ने भेजा जेल’

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एआईएमआईएम (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी शनिवार (25 सितंबर 2021) को जनसभा करने पहुँचे। यहाँ उन्होंने गैंगस्टर अतीक अहमद का समर्थन किया। ओवैसी ने जनसभा में लोगों से कहा, ”अतीक अहमद सिर्फ एक ही नहीं है, बल्कि यूपी में हजारों अतीक अहमद हैं जो कि जेलों में सड़ रहे हैं। अतीक अहमद कानून की नजर में आज भी चुनाव लड़ सकते हैं। हमें उम्मीद है कि आगामी विधानसभा चुनाव में वह चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे।”

उन्होंने कहा, “अतीक जेल में हैं, मुख्तार जेल में हैं और उत्तर प्रदेश की जेलों में 27 प्रतिशत मुसलमान बंद हैं। क्या अब भी नहीं उठोगे। आज यह वक्त उठने का है। बेखौफ होकर अपने वोट का इस्तेमाल करो।”

इस दौरान जनसभा के मंच से बसपा के पूर्व सांसद अतीक अहमद की बीवी शाइस्ता परवीन ने अपने शौहर का पत्र पढ़ा। गुजरात की साबरमती जेल में बंद अतीक अहमद ने जेल से पत्र लिखकर समाजवादी पार्टी (सपा) पर हमला बोला है। पत्र में अतीक ने लिखा, ”मैं और मेरा भाई जेल में हैं। मेरे बेटे पर इनाम रखा गया है। मुझे मजबूरन यह खत अपनी पत्नी को पढ़ने को कहना पड़ा। मेरे वालिद अगर जिंदा होते तो शायद इसकी इजाजत कभी ना देते।” अहमद ने अपने पत्र में लिखा कि मुझे अखिलेश यादव ने न सिर्फ जेल भेजा बल्कि सरकारी वकील के जरिए मेरी पैरवी को भी कमजोर किया, मेरी जमानत नहीं होने दी।

अतीक ने आगे लिखा, “सपा को इलाहाबाद, कौशांबी में कितने लोग जानते हैं? मुझे आप लोग विधायक मानते थे, मैंने मुलायम सिंह यादव जी का सपोर्ट किया। जब भी मुलायम सिंह यादव ने रैली की मैंने बस में भरकर लोगों को उनके समर्थन में लखनऊ भेजा। अपने भाई को भाई कहने में आज अखिलेश यादव को शर्म आती है। उन्हें अपने भाई का झंडा उठाने में शर्म आती है।”

इसके बाद मजीदिया इस्लामिया कालेज में ओवैसी ने कहा, “मैं अतीक अहमद और उनके परिवार को सलाम करता हूँ, जो एक जालिम हुकूमत के साथ लड़ रहा है।” इसके साथ ही एआईएमआईएम के अध्यक्ष ने अवैध धर्मांतरण मामले में गिरफ्तार मौलाना कलीम सिद्दीकी के मुद्दे पर बीजेपी, सपा, बसपा और कॉन्ग्रेस पर हमला बोला।

ओवैसी ने कहा कि सपा, कॉन्ग्रेस के लोग मौलाना कलीम सिद्दीकी पर बयान देने के लिए मुझे फोन करते हैं। उन्होंने कहा, “मैंने उनसे पूछा आपके नेता राहुल गाँधी, सपा के नेता अखिलेश यादव इस मामले पर क्यों नहीं बोलते। इस पर कॉन्ग्रेस, सपा के लोगों ने बोला कि यदि उनके नेता इस पर बोलेंगे तो उन्हें हिंदुओं का वोट नहीं मिलेगा।”

हैदराबाद के सांसद ने कहा, “उत्तर प्रदेश की सरकार ने धर्म परिवर्तन का जो कानून बनाया है, वह कानून गलत है। मैंने इस कानून की आलोचना की है। यह असंवैधानिक है, उच्चतम न्यायालय के पुट्टूस्वामी के मामले में दिए गए निर्णय के खिलाफ है। मैं अब सपा, बसपा से पूछना चाहता हूँ कि क्या वे मौलाना कलीम सिद्दीकी के बारे में बोलेंगे या नहीं बोलेंगे।”

दरअसल, इससे पहले भी औवेसी ट्वीट कर अवैध धर्मांतरण मामले में गिरफ्तार मौलाना कलीम सिद्दीकी का समर्थन कर चुके हैं। असदुद्दीन ओवैसी ने इस मामले पर शुक्रवार (24 सितंबर 2021) को ट्वीट किया, ”मौलाना कलीम साहब के वकील अबुबकर सब्बाक से बात की। अनुच्छेद-25 में अपने धर्म का प्रचार करने का अधिकार है। अपने धर्म की जानकारी देना किसी भी तरह से अपराध नहीं है। यूपी सरकार मीडिया ट्रायल कर रही है। उनके खिलाफ लगाई गई धाराएँ आरोपों से मेल नहीं खाती। इंशाअल्लाह इंसाफ होगा।” इसके बाद वह सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर आ गए थे।

गौरतलब है कि एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी अगले साल उत्तर प्रदेश और गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव में अपनी जमीन तलाशने में जुटे हुए हैं। पिछले हफ्ते अहमदाबाद की एक दिवसीय यात्रा पर औवेसी ने जेल में बंद गैंगस्टर अतीक अहमद से मिलने की इजाजत माँगी थी। लेकिन अहमदाबाद केंद्रीय कारागार के अधीक्षक रोहन आनंद ने औवेसी को अतीक अहमद से मिलने से मना कर दिया था। उन्होंने कहा था, ”आपको सूचित किया जाता है कि जेल नियमों के अनुसार यहाँ बंद व्यक्ति से केवल परिजन या वकीलों को ही मिलने की अनुमति है। जेल के नियमों और कोरोना महामारी के कारण अन्य लोगों को मिलने की अनुमति नहीं है।”

सीएम योगी की सिंगापुर के उच्चायुक्त ने कनेक्टिविटी और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए की सराहना, जताई यूपी में निवेश की इच्छा

भारत में सिंगापुर के उच्चायुक्त साइमन वोंग वी कुएन ने शनिवार (25 सितंबर 2021) को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कहा कि राज्य में कनेक्टिविटी बढ़ाने और व्यापार करने में आसानी होने के चलते सिंगापुर की कंपनियाँ उत्तर प्रदेश में निवेश की इच्छुक हैं। ये बैठक लखनऊ स्थित योगी आदित्यनाथ के आधिकारिक आवास पर हुई।

साइमन के साथ उप उच्चायुक्त एलिस चेंग भी इसमें शामिल रहीं। बाद में साइमन ने हिंदी में किए एक ट्वीट में योगी आदित्यनाथ के साथ अपनी बातचीत का विवरण साझा किया और इस मुलाकात पर संतोष व्यक्त किया।

सिंगापुर के उच्चायुक्त ने ट्वीट कर बताया, “मुझे मुख्यमंत्री से मिलकर खुशी हुई, मैंने सीएम से कहा कि हम 2017 से उत्तर प्रदेश में कनेक्टिविटी और व्यापार करने में आसानी करने से प्रभावित हैं। हमें सीएम के नेतृत्व पर भरोसा है और उम्मीद है कि हम राज्य में और निवेश करेंगे। धन्यवाद सीएम।”

बैठक के दौरान उच्चायुक्त ने कहा कि उन्होंने पिछले चार सालों में बहुत ही करीब से देखा है कि उत्तर प्रदेश ने कैसे प्रगति की है। उन्होंने कहा कि सिंगापुर अब उत्तर प्रदेश के विकास में भागीदार बनना चाहेगा। इस मामले में सहयोग और निवेश के लिए हमने कई क्षेत्रों की पहचान भी की है।

दरअसल, सीएम योगी आदित्यनाथ के शासन में उत्तर प्रदेश ने तेजी से अपने कारोबारी माहौल को सकारात्मक तरीके से बदला है। इसी का नतीजा है कि भारत ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के मामले में दूसरा स्थान हासिल किया है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने बुनियादी ढाँचे के विकास में तेजी लाते हुए 21 उद्योग और निवेश अनुकूल नीतियाँ पेश कीं। 2018 में सफल उत्तर प्रदेश इन्वेस्टर्स समिट के बाद उत्तर प्रदेश ने निवेश को और अधिक आकर्षित करने में सफल हुआ है।

इस मुद्दे पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में व्यापार, उद्योग और निवेश की अपार संभावनाएँ हैं। उन्होंने उच्चायुक्त को बताया कि कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाला उत्तर प्रदेश विश्व का सबसे बड़ा बाजार है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दूध आलू, गन्ना और फलों के उत्पादन के मामले में उत्तर प्रदेश नंबर एक है और डेयरी और खाद्य प्रसंस्करण प्रमुख क्षेत्रों में उभरा है जहाँ वातावरण काफी अनुकूल है। योगी आदित्यनाथ का कहना है कि अगर सिंगापुर उत्तर प्रदेश के विकास में हाथ मिलाता है तो लोगों को बड़ी खुशी होगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश में लखनऊ, वाराणसी और कुशीनगर में तीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे हैं। इसलिए, सिंगापुर और यूपी कई क्षेत्रों में काम कर सकते हैं।

उच्चायुक्त ने कहा कि सिंगापुर की फर्मों के लिए डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में निवेश करने के अच्छे अवसर हैं, इसके अलावा धार्मिक पर्यटन, रसद, बुनियादी ढाँचे जैसे कई अन्य क्षेत्र हैं, जहाँ पर निवेश किया जा सकता है।

खास बात यह है कि बुंदेलखंड में डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के हिस्से के रूप में उत्तर प्रदेश में लखनऊ, कानपुर, अलीगढ़, आगरा, झाँसी और चित्रकूट में 20,000 करोड़ रुपए के डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं।

उच्चायुक्त ने यह भी कहा कि सिंगापुर हवाई सेवा का अंतरराष्ट्रीय केंद्र होने का लाभ उत्तर प्रदेश में विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

लड़कियों के कपड़े कैंची से काटे, राखी-गहने-चप्पल सब उतरवाए: राजस्थान में कुछ इस तरह हो रही REET की परीक्षा, रोते रहे अभ्यर्थी

राजस्थान अध्यापक पात्रता परीक्षा (REET 2021) की परीक्षा के दौरान सेंटरों पर लड़कियों के फुल बाजू के कपड़ों को कैंची से काट डालने का मामला सामने आया है। एक तस्वीर में देखा जा सकता है कि किस तरह REET 2021 परीक्षा सेंटर पर एक महिला पुलिसकर्मी एक महिला अभ्यर्थी के फुल बाजू को कैंची से काट कर हाफ बना रही है। CCTV के माध्यम से परीक्षा पर नजर रखी जा रही है और अधिकारी लगातार दौरा कर रहे हैं।

सीकर जिले में इस बाबत इंटरनेट सेवा भी ठप्प कर दी गई है, जिससे आम लोगों को खासा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चेकिंग के दौरान परीक्षार्थियों के हाथों में बँधी राखी तक उतरवा ली गई। साथ ही महिलाओं से नाक-कान-गले में पहने हुए गहने भी उतरवा लिए गए। यहाँ तक कि छात्राओं के बाल के रिबन तक खुलवा लिए गए। पोद्धार स्कूल पर बने सेंटर पर पुलिस से अभ्यर्थियों की झड़प भी हुई।

एक महिला के कपड़े की बाजू काटने पर पुलिसकर्मियों से परिजन उलझ गए। परीक्षार्थियों को उनके चप्पल तक उतारने को कहा गया, जिससे उन्होंने पुलिस के साथ झड़प की। हालाँकि, स्थानीय कोतवाल ने वहाँ पहुँच कर किसी तरह मामले को शांत कराया। इतनी सुरक्षा के बावजूद कई लोग सेठ जयदेव जालान स्कूल की दीवारों पर चढ़े हुए थे, जिन्हें पुलिस ने खदेड़ कर भगाया। तब जाकर वहाँ से लोग भागे।

परीक्षा के नियमों को इतना कड़ा कर दिया गया है कि कुछ मिनटों की देरी पर आने के बाद परीक्षार्थियों को अंदर प्रवेश तक नहीं दिया गया। कई छात्राएँ परीक्षा हॉल में न जाने दिए जाने के कारण बाहर ही रोती रहीं। उनके परिजन उन्हें ढाँढ़स बँधाते रहे। वो गुहार लगाते रहे कि उन्हें भीतर जाने दिया जाए, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। ‘आज तक’ ने इस सम्बन्ध में खबर प्रकाशित की है और परीक्षा सेंटरों का हाल बताया है।

‘मुझे यीशू के बारे में बताना अच्छा और सरल लगा’: धर्म परिवर्तन कराने के आरोप में यूपी पुलिस ने पादरी को पकड़ा, पूछताछ जारी

उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में जबरन धर्मांतरण कराने के आरोप में चर्च के पादरी को हिरासत में लिया गया है। यह घटना बकेवर थाना क्षेत्र की है। बताया जा रहा है कि शनिवार (25 सितंबर, 2021) को एक संगठन के कार्यकर्ताओं ने लखना पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया कि ईकरी तिराहे के पास एक मकान में लोगों को बहला कर उनका धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। इसके बाद पुलिस ने शिकायत के आधार पर मकान से चर्च के पादरी को पकड़ लिया। पुलिस पादरी को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ कर रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस दौरान वहाँ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RRS) से जुड़े कुछ लोग भी पहुँच गए। पादरी ने पुलिस को बताया कि वह औरैया के महटौली गाँव का रहने वाला है। करीब 3 साल से वह अपने परिवार के साथ लखना कस्बा में किराए के मकान में रह रहा है। उसके दो बच्चे अन्य जिले में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं।

पादरी ने बताया कि वह बकेवर के लुधियानी क्षेत्र के नगला मिलक गाँव में स्थित चर्च में यीशू की प्रार्थना कराता है। उसे वहाँ कुछ लोग दान भी देते हैं। उसने यह भी बताया कि उसे यीशू के बारे में लोगों को जानकारी देना अच्छा और सरल लगा। हालाँकि, पूछताछ में पादरी इस बात से इनकार करता रहा कि उसने लोगों का धर्म परिवर्तन कराया है।

फिलहाल, पुलिस इस मामले की हर दृष्टिकोण से जाँच करने में जुट गई है। कार्यवाहक थाना प्रभारी एसएसआई विनोद कुमार यादव ने बताया कि जाँच के बाद ही मामला स्पष्ट हो सकेगा कि पादरी अवैध धर्म परिवर्तन के कार्य में संलिप्त है या नहींं।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में अवैध धर्मांतरण के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। उत्तर प्रदेश के आतंक निरोधी दस्ते (एटीएस) ने बुधवार (22 सितंबर, 2021) को अवैध धर्मांतरण मामले में मौलाना कलीम सिद्दीकी को गिरफ्तार किया था। भारत के सबसे बड़े धर्मांतरण गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए एटीएस ने यह गिरफ्तारी मेरठ से की थी।

11वीं से 14वीं शताब्दी की 157 मूर्तियाँ-कलाकृतियाँ, चोर ले गए थे अमेरिका… PM मोदी वापस लेकर लौटे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने अमेरिका के सफल दौरे बाद रविवार (सितंबर 26, 2021) को वापस स्वदेश लौट गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को जब स्वदेश लौटें, तब अपने साथ 157 प्राचीन कलाकृतियाँ व वस्तुएँ लेकर आए। अमेरिका ने इन कलाकृतियों व वस्तुओं को प्रधानमंत्री को भेंट किया है, जिस पर प्रधानमंत्री ने आभार जताया।

अमेरिका द्वारा भारत को सौंपी गई कलाकृतियों में सांस्कृतिक पुरावशेष, हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म से संबंधित मूर्तियाँ शामिल हैं। बता दें कि, भारत रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी यूएन में भाषण देने के बाद न्यूयॉर्क में भारतीय समुदाय के लोगों से मिले और सेल्फी के साथ-साथ ऑटोग्राफ भी दिया।

इनमें से अधिकतर कलाकृतियाँ व वस्तुएँ 11वीं से 14वीं शताब्दी के बीच की हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इन कलाकृतियों को लौटाने के लिए अमेरिका का धन्यवाद किया। प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने चोरी, अवैध व्यापार और सांस्कृतिक वस्तुओं की तस्करी को रोकने के प्रयासों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।

इन 157 कलाकृतियों व वस्तुओं में 10वीं शताब्दी की बलुआ पत्थर से तैयार की गई डेढ़ मीटर की नक्काशी से लेकर 12वीं शताब्दी की उत्कृष्ट काँसे की 8.5 सेंटीमीटर ऊँची नटराज की मूर्ति शामिल है। लगभग आधी कलाकृतियाँ सांस्कृतिक हैं, जबकि अन्य आधे में हिंदू धर्म, बौद्ध और जैन धर्म से संबंधित मूर्तियाँ हैं।  

मध्य प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने ट्वीट करते हुए लिखा, “दुनिया भर से देश की विरासत को वापस लाने की मुहिम को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका से अपने साथ 157 कलाकृतियाँ वापस ला रहे हैं जो कॉन्ग्रेस के शासनकाल में चोरी और तस्करी के ज़रिए देश के बाहर चली गई थीं।”

यह सभी धातु, पत्थर और टैराकोटा से बनी हैं। काँसे की वस्तुओं में लक्ष्मी नारायण, बुद्ध, विष्णु, शिव-पार्वती और 24 जैन तीर्थंकरों की भंगिमाएँ शामिल हैं। कई अन्य कलाकृतियाँ भी हैं जिनमें कम लोकप्रिय कनकलामूर्ति, ब्राह्मी और नंदीकेसा शामिल है। यह कलाकृतियाँ और पुरावशेष तस्करी और चोरी करके कभी अमेरिका ले जाए गए थे। मोदी सरकार ने दुनिया भर से भारत की प्राचीन वस्तुओं और कलाकृतियों को वापस लाने की मुहिम छेड़ रखी है। ये 157 कलाकृतियाँ उसी मुहिम के तहत वापस लाई गईं हैं।

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने यूएन में संबोधन के बाद एक ट्वीट में कहा, “पिछले कुछ दिनों में हुई द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकें, अमेरिकी कंपनियों के सीईओ के साथ मुलाकात और यूएन में संबोधन जैसे कई परिणाम देने वाले कार्यक्रम हुए। मुझे विश्वास है कि भारत और अमेरिका के रिश्ते आने वाले सालों में और ज्यादा मजबूत होंगे। हमारे बीच व्यक्ति से व्यक्ति के संपन्न रिश्ते हमारी सबसे बड़ी संपत्ति हैं।” 

उल्लेखनीय है कि अमेरिका दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने उप राष्ट्रपति कमला हैरिस को उनके दादा पीवी गोपालन की सरकारी नियुक्तियों और सेवानिवृत्ति से जुड़े गजट नोटिफिकेशन को लकड़ी की फ्रेम में सजा कर भेंट किया था। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने कमला हैरिस को गुलाबी मीनाकारी शतरंज का सेट भी उपहार में दिया। वहीं पीएम मोदी ने जापान के प्रधानमंत्री योशीहिदे सुगा (Yoshihide Suga) को चंदन की बुद्ध की मूर्ति ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष स्कॉट मॉरिसन (Scott Morrison) को चाँदी का गुलाबी मीनाकारी जहाज भेंट किया। 

जबान के पक्के अजीत अंजुम, योगी आदित्यनाथ को दे रहे सलामी: वीडियो वायरल हो गया… हम कड़ी निंदा करते हैं

अजीत अंजुम नाम के एक पत्रकार हैं। बहुत बड़ा नाम है उनका। जिस भी मीडिया कंपनी में रहे, न्यूजरूम में लोग उनको झुक कर सलाम करते थे। जब मीडिया कंपनियों को लात मारी, तब भी जलवा-जलाल कम न हुआ। बेरोजगारी में YouTube पर वीडियो बनाने लगे, फिर भी लोगों ने सलामी नहीं छोड़ी।

‘वीडियो बना कर YouTube से पैसा कमाने वाले अजीत अंजुम नहीं होते तो किसान दिखने वालों का आंदोलन सफल नहीं होता’ – यह जानकारी खुफिया विभाग से मिली है। दरअसल यह जानकारी नहीं है, बल्कि अजीत अंजुम की महानता की निशानी है।

इतिहास गवाह है, महान अजीत अंजुम ने कभी घमंड नहीं किया। किसान दिखने वालों के क्रांतिकारी वीडियो से कमाई घट गई तो बिना घमंड दिखाए उत्तर प्रदेश की ओर चल दिए। जब भी उत्तर प्रदेश से वीडियो डालते हैं, बैकग्राउंड से आवाज आती है:

गाँव-गाँव घूम रहे
बना रहे वीडियो
वीडियो-दर-वीडियो
हो रहे जलील
निपोर रहे दाँत
जरा पूछो तो सही…
आया चुनाव है क्या?

गाली, मुँह पर बेइज्जती, हर सवाल पर जवाब ऐसा कि बंदा शर्म-हया से बेहोश हो जाए… लेकिन अंदर का पत्रकार ऐसा कि अजीत अंजुम को कर्तव्य पथ से डिगा न सका। उत्तर प्रदेश के ‘गँवार’ लोगों ने बार-बार अपने जवाब से अंजुम जी को बता दिया कि लहर किसकी है, लेकिन उनके अंदर का अजीत हारा नहीं… फिर एक घटना हुई।

इस घटना की शुरुआत होती है एक चैलेंज से। चैलेंज अजीत अंजुम देते हैं। किसे? एक आदमी को, जो भगवा पहने रहता है… नाम है योगी आदित्यनाथ। अंजुम का अजीत यहीं हार जाता है। चैलेंज का घमंड टूट जाता है।

सलाम ठोकते महान अजीत अंजुम अब सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे हैं। “सलाम_ठोक_अजीत_अंजुम” और “झुक_अंजुम_और_सलामी_दे” जैसे हैशटैग चलाए जा रहे हैं। लेकिन क्या यही हमारी भारतीय संस्कृति है? किसी इंसान के साथ जोर-जबरदस्ती सही नहीं है। साँप-बिच्छू के साथ ऐसा हो तो समझा जा सकता है। इसलिए ऐसे हैशटैग की ऑपइंडिया संपादकीय टीम कड़ी आलोचना करती है।

सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि अजीत अंजुम ही इस वीडियो में सलामी ठोक रहे हैं। पत्रकार धर्म का पालन करते हुए हमने इस वीडियो को एडिट करके अजीत अंजुम जी के चेहरे पर किसी आम इंसान का चेहरा चिपका दिया है। कृपया इस वीडियो को देखिए और बताइए कि कहीं भी, किसी भी सेकंड उनका चेहरा गलती से भी दिख तो नहीं गया? एडिटिंग खराब तो नहीं हुई?