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‘नंगी तस्वीरें माँगता, ओरल सेक्स के लिए जबरदस्ती’: हिंदूफोबिक कॉमेडियन संजय राजौरा की करतूत महिला ने दुनिया को बताई

20 साल के आसपास उम्र वाली एक लड़की ने कॉमेडियन संजय राजौरा पर यौन उत्पीड़न का आरोप मढ़ा है। महिला ने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए राजौरा पर इल्जाम लगाए। कॉमेडियन इस समय कॉमेडी कलेक्टिव ‘ऐसी तैसी डेमोक्रेसी’ का सदस्य है।’

23 सितंबर को लड़की ने अपनी पहचान तारा बताते हुए राजौरा के विरुद्ध पोस्ट लिखा। उसने बताया कि कैसे राजौरा ने मना करने के बाद भी उसे ओरल सेक्स के लिए जबरदस्ती की, वो भी सार्वजनिक स्थल पर। लड़की ने बताया कि राजौरा उसे नग्न तस्वीरें माँगता था। 

पोस्ट के स्क्रीनशॉट

पीड़िता ने बताया कि वो इन सब चीजों को नजरअंदाज कर रही थी क्योंकि वह कॉमेडियन को उसके काम के लिए सराहती थी। लड़की मानती है कि कॉमेडियन की पब्लिक छवि ने उसके फैसले को प्रभावित किया था। उसको लगता था कि राजौरा तो कई प्रभावशाली लोगों को जानता है। 

पोस्ट के स्क्रीनशॉट

पोस्ट में पीड़िता इस बात को बताती है कि वह अपने साथ होते शोषण को नजरअंदाज करती रही क्योंकि वह राजौरा को एक नारीवादी पुरुष के तौर पर देखती थी। लड़की ने बताया कि राजौरा उसे “असुरक्षित (Unsafe)” और नग्न तस्वीरें भेजने के लिए कहता था। उसके मुताबिक, “मैंने उन्हें कहा भी कि ये बहुत जल्दी है और बहाने बनाकर अपनी हिचक दर्शायी, लेकिन वह लगातार ऐसा कर रहे थे और मेरे बहाने में खामियाँ ढूँढ देते थे।”

पीड़िता ने खुलासा किया कि कैसे कॉमेडियन ने उसे सार्वजनिक स्थान पर ओरल सेक्स करने के लिए मजबूर किया। तारा ने लिखा, “उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखा और मुझे घुटनों पर बैठा कर मुझे एक्ट (ओरल सेक्स) करने के लिए गाइड किया।”

पोस्ट के स्क्रीनशॉट

तारा ने आगे बताया कि इस घटना के अगले दिन राजौरा अपनी कार को पार्किंग से बाहर निकालते समय अपने भवन के गेट पर किसी ऐसे व्यक्ति से मिला, जिससे वह पेशेवर रूप से जुड़ा था। लड़की के मुताबिक राजौरा ने बेहद अजीब ढंग से हाथ मिलाया और चेहरे पर शरारती मुस्कान थी। उसका मिलना और बात कहना (You’re man has been having fun with this young lady) ऐसा था जैसे कह रहा हो, “आज मैं करके आया हूँ।”

पोस्ट के स्क्रीनशॉट

पीड़िता कहती है कि घटना के बाद भी उसने राजौरा से मिलना और बात करना नहीं छोड़ा था। उसे बहुत महीने लगे ये दर्दनाक एहसास होने में कि जो कुछ भी दोनों के बीच हुआ वो घातक, प्रबल और समस्याग्रस्त था। उसने बताया कि वह राजौरा के प्रभाव और ताकत को देख इतना डरती थी कि वह इन सबसे बाहर नहीं निकल पा रही थी।

लड़की लिखती हैं, “मैं अब ये सब क्यों लिख रही हूँ? ये मैं अपने लिए कर रही हूँ ताकि जो भार मैंने लंबे समय से झेला है उसे कम किया जा सके। ये जिम्मा मेरे ऊपर है कि दुनिया को अपना अनुभव से मना पाऊँ, इसलिए मैं कोई प्रूफ नहीं लगा रही। मैं ये सब समाप्त करने के लिए कर रही हूँ।”

पोस्ट के स्क्रीनशॉट

अपने पोस्ट के आखिर में उसने लिखा, “मैंने जिन उदाहरणों का उल्लेख किया है, वे मेरे दर्दनाक अनुभव के चट्टान के सिरे मात्र हैं। कई बार ब्रेकडाउन और एंग्जाइटी अटैक आने के बाद से मैंने अपने सभी दोस्तों को खो दिया है। जिन चीज़ों से मैं गुज़री, उसने मेरी माँ को लगभग पागलपन की हद तक पहुँचा दिया। इस समय औपचारिक शिकायत शुरू करने के लिए मेरे पास भावनात्मक मजबूती नहीं है। मैं एक बेहतर जीवन की ओर बढ़ना चाहता हूँ, यह यहीं समाप्त होता है।”

बता दें कि राजौरा ने अभी इन आरोपों की बाबत कोई बयान नहीं दिया है। मगर, इससे पहले वो हिंदू देवी देवताओं का मखौल उड़ाने के कारण चर्चा में आया था। राजौरा ने भगवान गणेश और भगवान शिव पर टिप्पणी की थी। इसके बाद रमेश सोलंकी की शिकायत पर उसके विरुद्ध शिकायत दर्ज हुई थी।

केरल में वीर सावरकर पर नाटक का प्रसारण नहीं: कोझिकोड रेडियो स्टेशन ने आकाशवाणी के निर्देशों की उड़ाई धज्जियाँ

कोझिकोड आकाशवाणी रेडियो स्टेशन ने वीर सावरकर पर एक नाटक के प्रसारण से इनकार कर दिया है जो इस शुक्रवार को प्रसारित होने वाला था। जन्मभूमि की एक रिपोर्ट के अनुसार, कोझिकोड रेडियो स्टेशन मास्टर ने तिरुवनंतपुरम रेडियो स्टेशन को अपने इस निर्णय के बारे में सूचित कर दिया है।

हालाँकि, कथित तौर पर, स्टेशन प्रमुख ने प्रसारण रद्द करने का कारण ‘कर्मचारियों के बीच कोरोनावायरस संक्रमण में वृद्धि’ को बताया है।

अखिल भारतीय रेडियो ने आकाशवाणी की सभी राज्य इकाइयों को चल रहे राष्ट्रीय नाट्य उत्सव में वीर सावरकर पर एक नाटक प्रसारित करने के निर्देश जारी किए थे। मुख्य स्क्रिप्ट आकाशवाणी द्वारा दी गई थी, जबकि स्टेशनों को प्रसारण के लिए अपनी स्थानीय भाषा में इसका अनुवाद करना था।

बता दें कि केरल में आठ रेडियो स्टेशन हैं, और प्रत्येक को बारी-बारी से नाटक तैयार करना था।

केरल में वीर सावरकर और एमएस गोलवलकर जैसी हस्तियों के लिए घृणा कोई नई बात नहीं है। इस महीने की शुरुआत में, केरल छात्र संघ, कॉन्ग्रेस की छात्र शाखा, ने एक मार्च निकाला था और कन्नूर विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम की प्रतियाँ जलाई थीं, जिसमें सावरकर के “हिंदुत्व: एक हिंदू कौन है” और अन्य से उद्धरण थे।

छात्रसंघ ने विश्वविद्यालय पर संघ परिवार या आरएसएस के एजेंडे को लागू करने और थोपने का भी आरोप लगाया।

गौरतलब है कि सावरकर की किताब, गोलवलकर की “बंच ऑफ थॉट्स” (Golwalkar’s “Bunch of Thoughts”) और “वी ऑर अवर नेशनहुड डिफाइंड” (“We or Our Nationhood Defined” ) और दीनदयाल उपाध्याय के “एकात्म मानववाद” (“Integral Humanism”) के अंशों को कन्नूर विश्वविद्यालय में एमए गवर्नेंस एंड पॉलिटिक्स के पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने के बाद यह नया विवाद पैदा हुआ।

हालाँकि, विश्वविद्यालय के प्रोफेसर गोपीनाथ रवींद्रन ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था और कहा था कि छात्रों को सभी विचारधाराओं के बारे में सीखना चाहिए। हमने गाँधी जी, नेहरू, अम्बेडकर और टैगोर के कार्यों को शामिल किया है। पाठ्यक्रम में सावरकर और गोलवलकर के कार्य भी शामिल हैं। छात्रों को सभी विचारधाराओं के मूल पाठ को सीखने और समझने दें। उन्होंने कहा, सावरकर और एम एस गोवालकर के बारे में सीखने में कुछ भी गलत नहीं है।

राहुल गाँधी पर क्या कार्रवाई हुई: दिल्ली की अदालत ने माँगी ATR, नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने का मामला

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के खिलाफ एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) माँगी है। मामला दिल्ली कैंट में 9 साल की बच्ची के कथित रेप और हत्या के बाद उसके परिजनों की पहचान उजागर करने से जुड़ा है। अदालत ने दिल्ली पुलिस को ATR 29 सितंबर तक कराने का निर्देश दिया है।

प्रदेश भाजपा मीडिया प्रमुख नवीन कुमार जिंदल ने कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। जिंदल ने राहुल गाँधी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (Pocso Act) के तहत 14 अगस्त को बाराखंबा रोड थाने में एक शिकायत दर्ज कराई थी। इस पर कार्रवाई के लिए नई दिल्ली जिला के पुलिस उपायुक्त से 19 अगस्त को पुनः अनुरोध किया गया था। इसके बाद भी कार्रवाई न होने पर मामले की शिकायत अदालत में की गई। इस पर मजिस्ट्रेट ने पुलिस से कार्रवाई रिपोर्ट 29 सितंबर तक देने को कहा है।

शिकायतकर्ता नवीन कुमार जिंदल ने राउज एवेन्यू अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि पूरी कॉन्ग्रेस पार्टी ही महिला विरोधी है। कॉन्ग्रेस के नेता कानून और संविधान का मजाक उड़ाना अपना अधिकार समझते हैं। राहुल गाँधी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि इस मामले में एनसीपीसीआर ने ट्विटर को पत्र लिख कर कहा था कि अगर खुद राहुल गाँधी अपना ट्वीट नहीं हटाते हैं, तो माइक्रो ब्लॉगिंग साइट 24 घंटे के भीतर इसे हटा दे। इसके बाद ट्विटर ने ट्वीट को हटा दिया और राहुल गाँधी के खाते को बंद कर दिया था। नियमों के मुताबिक, पहली बार अपराध करने के कारण उनके अकाउंट को 12 घंटे के लिए बंद किया गया था। हालाँकि, बाद में इस दावे के बाद कि उन्हें पीड़िता के माता-पिता से तस्वीर का उपयोग करने की ‘अनुमति’ मिली थी, ट्विटर ने पलक झपकते ही राहुल गाँधी के अकाउंट को बहाल कर दिया था।

बता दें कि बीजेपी ने तस्वीरें साझा करने को कानून का उल्लंघन बताते हुए उनके खिलाफ NCPCR से संज्ञान लेने और कार्रवाई करने का निवेदन किया था।  बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा था कि राहुल गाँधी ने अपने ट्वीट में पीड़िता के परिजनों का चेहरा सार्वजनिक किया है, जो पॉक्सो एक्ट की धारा 23 जुवेनाइल जस्टिस केयर के तहत चाइल्ड प्रोटेक्शन एक्ट की धारा 74 का उल्लंघन है।

‘कोविड प्रबंधन में भारत सरकार ने जो किया, कोई अन्य देश नहीं कर सकता’: मुआवजे की घोषणा पर SC ने की केंद्र की तारीफ

कोरोना से हुई मौत के लिए मुआवजे की घोषणा पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की सराहना की है। कोर्ट ने कहा है कि विपरीत परिस्थितियों में भारत जो कर पाया, वैसा और कोई देश नहीं कर सका। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि COVID-19 के कारण मरने वालों के परिजनों को राज्य सरकारों से 50,000 रुपए का मुआवजा मिलेगा। 

न्यायमूर्ति शाह ने कहा, “आज हम बहुत खुश हैं। यह पीड़ित लोगों के लिए कुछ सांत्वना होगी। सरकार सब कुछ कर रही है… हमें खुशी है कि पीड़ित व्यक्ति के आँसू पोंछने के लिए कुछ किया जा रहा है। हमें इस तथ्य का नोटिस लेना होगा कि भारत सरकार ने जो किया है, कोई अन्य देश नहीं कर सकता।”

30 जून को दिए आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि देश में कोरोना से हुई हर मौत के लिए मुआवजा दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने माना था कि इस तरह की आपदा में लोगों को मुआवजा देना सरकार का वैधानिक कर्तव्य है। लेकिन मुआवजे की रकम कितनी होगी, यह फैसला कोर्ट ने सरकार पर ही छोड़ दिया था।

तब सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट ऑथोरिटी (NDMA) से कहा था कि वह 6 हफ्ते में मुआवजे की रकम तय कर राज्यों को सूचित करे। NDMA ने बाद में कोर्ट से अतिरिक्त समय की माँग की थी। अब कोर्ट के फैसले के करीब 12 हफ्ते बाद उसने मुआवजे पर निर्णय लिया है।

करीब 25 मिनट चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि वह 4 अक्टूबर को मामले में विस्तृत आदेश जारी करेगा। सरकार ने कोर्ट को बताया कि कोविड पॉज़िटिव पाए जाने के 30 दिन के भीतर आत्महत्या करने वाले व्यक्ति की मौत की वजह कोरोना ही मानी जाएगी। ऐसे लोगों के परिवार को भी मुआवजा दिया जाएगा। इस पर कोर्ट ने कहा कि दिल के दौरे से मरने वाले कोरोना मरीज़ों के परिवार का भी ख्याल रखा जाना चाहिए।

केंद्र की तरफ से पेश सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ऐसे लोगों का परिवार भी डेथ सर्टिफिकेट में सुधार के लिए ज़िला कमिटी को आवेदन दे सकते हैं। सर्टिफिकेट में बदलाव के बाद वह भी मुआवजे के हकदार होंगे।

गुजरात में ‘लैंड जिहाद’ ऐसे: हिंदू को पाटर्नर बनाओ, अशांत क्षेत्र में डील करो, फिर पाटर्नर को बाहर करो

गुजरात के सूरत से एक हैरान करने वाला मामला प्रकाश में आया है। यहाँ अशांत क्षेत्र अधिनियम को दरकिनार कर धोखेबाजी से भवन निर्माण के लिए अनुमति ली गई। सूरत के अदजान इलाके में, एक मंदिर के बगल में, रेहान हाइट्स प्रोजेक्ट निर्माण के लिए एक मुस्लिम स्वामित्व वाली एंटरप्राइजेज ने हिंदू साथी को सामने पेश कर निर्माण की अनुमति ली, जो कि कानून को धोखा देने जैसा लगता है।

सूरत के रेहान हाइट्स का मामला

इस मामले के बारे में जानकारी देते हुए सूरत के रहने वाले कार्यकर्ता असित गाँधी ने कहा, “14 मार्च 2020 को सूरत के रांदेर को अशांत क्षेत्र अधिनियम में शामिल किया गया था। इस विशेष मामले में जिस जगह की जमीनों को बेचा गया वहाँ पर तीन आवासीय सोसायटी है। यहाँ की अधिकतर आबादी हिंदू है। पास में ही एक हिंदू मंदिर है। इस क्षेत्र को अशांत क्षेत्र घोषित किए जाने के ठीक चार दिन बाद 16 मार्च 2020 एवरग्रीन कॉरपोरेशन के मकसूद गोदिल (50%) और मोहम्मद इरफान चमड़िया (50%) ने एक नई भागीदारी शुरू की। इसमें शबनम जुनैद मोतीवाला (10%), अहमद जुनैद मोतीवाला (10%) और प्रकाश धोलारिया (10%) को भागीदार बनाया। इसके लिए उन्होंने अपनी हिस्सेदारियों में 35% तक की कमी की।”

गाँधी के मुताबिक, कंपनी की हिस्सेदारी बाँटने के बाद कंपनी ने धनसुख बेजानवाला, महेश बेजानवाला, अरविंद बेजानवाला और हसमुख बेजानवाला से जमीन खरीदने के लिए अप्लाई किया। उक्त आवेदन में बाकी हिस्सेदारों की धार्मिक पहचान को छिपाते हुए यह बताया गया कि जमीन के खरीददार प्रकाश ढोलरिया और अन्य हैं। 24 मार्च 2020 को जब कोरोना वायरस के कारण देशव्यापी लॉकडाउन लागू कर दिया गया तो सारी प्रक्रिया स्थगित हो गई। इस कारण अशांत क्षेत्र अधिनियम के तहत आने वाले ऐसे मामलों में उचित प्रक्रिया नहीं की गई।

सूरत के अदाजान स्थित रेहान हाइट्स

एक्टिविस्ट ने इस बात की जानकारी दी कि अशांत क्षेत्र अधिनियम की इस मामले में गलत व्याख्या की गई है। जहाँ खरीदार और विक्रेता के बीच कम से कम एक पक्ष हिंदू या मुस्लिम होता यह अधिनियम लागू होता है। ऐसे क्षेत्रों में इस तरह के किसी भी लेन-देन के लिए उचित प्रक्रिया का पालन करना होता है। यह उन क्षेत्रों के धार्मिक और सामुदायिक मूल्यों और उनकी पहचान को बचाने के लिए है, जो जनसंख्या की दृष्टि से अतिसंवेदनशील हैं। इस तरह के किसी भी आवेदन के बाद कलेक्टर को औपचारिक जाँच करनी होती है। पुलिस और जिला मजिस्ट्रेट को जाँच करनी होती है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में अधिकारियों को उस जगह खुद जाकर सार्वजनिक तौर पर जानकारियाँ इकट्ठी करनी होती है। इसके अलावा प्रभावित लोगों से लिखित में भी स्वीकृति भी लेनी होती है। इस अधिनियम के तहत वे लोग भी शामिल हैं जो उस संपत्ति के आस-पास रहते हैं। सभी प्रक्रियाओं का पालन होने और उससे संतुष्ट होने के बाद ही कलेक्टर संपत्ति के हस्तांतरण की मँजूरी दे सकते हैं।

इस बीच जब कोरोना महामारी के कारण लगाया गया लॉकडाउन खत्म हो गया और चरणबद्ध तरीके से अनलॉक किया जा रहा था तो कथित तौर पर डिप्टी कलेक्टर ने 20 जून 2021 को बिना किसी औपचारिक जाँच के ही अचल संपत्ति को बेचने की मँजूरी दे दी। खास बात यह है कि 20 जून 2020 को जमीन का ट्रांसफर होने से पहले ही 11 जून, 2020 को उस भूमि पर निर्माण की अनुमति के लिए आवेदन कर दिया गया था।

गाँधी ने आगे बताया कि सूरत नगर निगम ने कलेक्टर की अनुमति के बिना संपत्ति पर होने वाली निर्माण गतिविधि को मँजूरी दे दी। खास बात यह है कि ऐसी संपत्तियों के ट्रांसफर की शर्तों में से एक यह होती है कि अगर इस बात का खुलासा होता है कि लेनदेन के दौरान तथ्यों को छिपाया गया है तो तत्काल उन सौदे को रद्द किया जा सकता है। गलत जानकारी देने के मामले में यह सौदा रद्द करने का मामला बन जाता है।

उल्लेखनीय है कि इस जमीन पर निर्माण की इजाजत मिलने के बाद कंपनी के हिंदू हिस्सेदार प्रकाश ढोलरिया को फर्म से बाहर निकाल दिया गया। 29 अगस्त 2020 को नोटरी पर हुए एक समझौते के अनुसार ‘एवरग्रीन कॉर्पोरेशन’ कंपनी ने ढोलारिया को बाहर निकाल दिया। प्रकाश के इस कंपनी से बाहर निकाले जाने के बाद अब उसमें केवल मकसूद गोदिल (35%), मोहम्मद इरफ़ान चमड़िया (35%), शबनम मोतीवाला (15%) और अहमद जुनैद मोतीवाला (15%) बचे हैं।

सूरत के डिप्टी कलेक्टर ने जमीन सौदे को किया कैंसिल

रेहान हाइट्स ने उस जगह 260 फ्लैटों के साथ 5 ऊँची बिल्डिंग का निर्माण शुरू कर दिया। इस मामले में यह तथ्य सामने आने के बाद सूरत के सिटी डिप्टी कलेक्टर ने अब एवरग्रीन कॉर्पोरेशन और बेजनवाला परिवार के बीच जमीन की बिक्री के मूल सौदे को रद्द कर दिया है।

फिलहाल, डिप्टी कलेक्टर के आदेश के बाद अब सभी तरह के निर्माण गतिविधियों को रोक दिया गया है। नियम के मुताबिक, एक बार संपत्ति के ट्रांसफर के आदेश को रद्द करने के बाद जमीन विक्रेता को भुगतान के रूप में प्राप्त राशि को 3 महीने के भीतर वापस करनी होगी और खरीदार को संपत्ति वापस करनी होगी। ऐसा नहीं होने की स्थिति में जिलाधिकारी 5 साल के कठोर कारावास एवं जंत्री मूल्य के 10% आर्थिक जुर्माना लगाने का आदेश दे सकते हैं।

रेहान हाइट्स कोई अकेली घटना नहीं

हालाँकि, दुर्भाग्य की बात यह है कि यह अपनी तरह की कोई अकेली घटना नहीं है। असित गाँधी ने ऑपइंडिया को बताया कि इस तरह की संपत्तियों का लेनदेन बड़े पैमाने पर पूरे गुजरात में होते हैं और लोग कानूनी खामियों का जमकर फायदा उठाते हैं। इस मामले में वे सूरत पश्चिम के विधायक पूर्णेश मोदी जैसे राजनीतिक इच्छाशक्ति वाले लोगों के समर्थन के कारण सौदा रद्द करने और कार्रवाई करने में सक्षम थे।

धोखेबाजी भरे लेनदेन कैसे हो रहे हैं इस बात की जानकारी देते हुए गाँधी ने बताया कि इस तरह के लेनदेन तीन तरीकों से होते हैं। उन्होंने कहा, “एक वो लोग नियमित तरीकों से नहीं जाते हैं, बल्कि केवल नोटरीकृत दस्तावेजों के साथ आगे बढ़ते हैं जो संपत्ति के हस्तांतरण से पहले इसकी पूरी प्रक्रियाओं को बाधित करते हैं। कभी-कभी तो इस तरह के लोग संपत्ति के हस्तांतरण के लिए तक इंतजार नहीं करते हैं और निर्माण शुरू कर देते हैं। फ्लैटों का निर्माण करने के बाद उन्हें बेच दिया जाता है, जिससे खरीददार धोखेबाजी में फँस जाते हैं, क्योंकि असल में भूमि का स्वामित्व हस्तांतरित नहीं किया गया होता है। इस धोखाधड़ी का तीसरा तरीका एक बिचौलिए को जोड़कर उसके नाम पर अनुमति लेना और फिर उसे अलग कर देना है।”

हालात ऐसे हो गए हैं कि हाल के दिनों में सूरत के कई इलाकों में धार्मिक पहचान में बदलाव आया है। गाँधी ने इस पर अफसोस जताते हुए कहा, “सूरत के गोपीपुरा क्षेत्र में जैनों की सबसे ज्यादा आबादी थी और यहाँ पर 44 जैन मंदिर भी थे। लेकिन अब यहाँ कुछ ही जैन परिवार रहते हैं और क्षेत्र मुस्लिम बहुल क्षेत्र बन गया है। इसी तरह नानावट क्षेत्र में प्राचीन राधा कृष्ण मंदिर स्थित है। जनसंख्या में परिवर्तन होने के बाद अब यहाँ केवल मंदिर का ढाँचा बचा हुआ है। हालाँकि, यहाँ की मूर्तियों को पिपलोद क्षेत्र के दूसरे मंदिर में स्थानांतरित कर दिया गया है। अब मंदिर में देवताओं की मूर्तियाँ नहीं बची हैं।”

उन्होंने कहा, “ऐसा सिर्फ सूरत में नहीं है, बल्कि अहमदाबाद, वडोदरा, कलोल और गुजरात के अन्य स्थानों में भी इसी तरह की कार्यप्रणाली का इस्तेमाल किया जा रहा है।”

गुजरात का अशांत क्षेत्र अधिनियम

उल्लेखनीय है कि सूरत का अदाजान, गुजरात अशांत क्षेत्र अधिनियम के तहत आता है, जहाँ की अचल संपत्ति का हस्तांतरण केवल तभी हो सकता है जब कलेक्टर कलेक्टर संपत्ति के खरीदार और विक्रेता द्वारा किए गए आवेदन पर अपनी साइन कर देते हैं। इसके साथ ही विक्रेता को आवेदन में इस बात का यह उल्लेख करना होता है कि वह अपनी मर्जी से संपत्ति बेच रहा है।

कलेक्टर को जिले का शांतिदूत माना जाता है और सामुदायिक सद्भाव को बनाए रखने की भी जिम्मेदारी उसी की होती है। कोई भी चीज आगे न बढ़े और साम्प्रदायिक दंगे न हों और शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी कलेक्टर की होती है। इस अधिनियम के जरिए सरकार राज्य के संवेदनशील हिस्सों में समुदायों के ध्रुवीकरण पर रोक लगाने की कोशिश कर रही है।

पालड़ी में अहमदाबाद के वर्षा फ्लैट का मामला

इसी तरह की घटना अहमदाबाद के पालड़ी इलाके में भी हुई थी और वहाँ भी अशांत क्षेत्र अधिनियम लागू है। साल 2019 में जून में अहमदाबाद के पालड़ी में जनकल्याण सहकारी हाउसिंग सोसाइटी में वर्षा फ्लैट बिक्री की अनिवार्य स्वीकृति को वापस लेने के मामले में विवादों में घिर गया था। इसके बाद जब इस सोसायटी का फिर से पुनर्विकास किया जा रहा था तो कई मुस्लिम परिवारों ने संपत्ति की खरीदी की थी। हालाँकि यह क्षेत्र अशांत क्षेत्र अधिनियम के अंतर्गत आता है तो इस सौदे को संपन्न करने के लिए कलेक्टर की अनुमति सहित उचित प्रक्रिया की आवश्यकता होगी।

इसके बाद मामले में कार्रवाई करते हुए अशांत क्षेत्र अधिनियम का उल्लंघन करने के मामले में कलेक्टर ने वर्षा फ्लैट्स में रहने वाले 13 निवासियों को अपार्टमेंट खाली करने का आदेश दे दिया है। इसके साथ ही वर्षा फ्लैट के बिल्डरों और मालिकों के खिलाफ अशांत क्षेत्र अधिनियम के उल्लंघन के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। मामले में वहाँ के लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। वहाँ से उन्हें उन्हें जिला कलेक्टर द्वारा बिक्री की मँजूरी से इनकार करने के खिलाफ विशेष सचिव राजस्व (अपील और रिवीजन) से संपर्क करने के लिए कहा गया।

पवित्र हिंदू तीर्थ स्थल द्वारका और सोमनाथ

मुंबई निवासी आनंद जनसांख्यिकी में हुए इस परिवर्तन को लेकर बात करते हुए गुजरात के सोमनाथ और द्वारका की अपनी हालिया यात्रा का वर्णन करते हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात के तीर्थ स्थानों में से एक ‘बेट द्वारका’ है, जहाँ गुजरात पर शासन करने के दौरान भगवान कृष्ण का निवास स्थान था। यह द्वारका के तट पर एक छोटा सा द्वीप है और ओखा से यहाँ से पहुँचने के लिए 30 मिनट की नाव की सवारी करनी पड़ती है।

आनंद कहते हैं द्वारका-दर्शन के लिए जब वह गए तो बस-कंडक्टर के साथ गाइड एक ब्राम्हण ने बड़े ही अच्छे तरीके और उत्साह के साथ गुजरात की प्रचीन समृद्ध विरासत और श्रीकृष्ण के द्वारका के बारे में बात की। उन्होंने कहा, “उसने हमें उस द्वीप पर रहने वाले उन परिवारों के बारे में भी जानकारी दी। उसने बताया कि इस समय द्वीप पर करीब 7,000 परिवार रहते हैं, जिनमें से लगभग 6,000 परिवार मुस्लिम हैं। मैं हिंदू बहुल देश में हिंदू तीर्थस्थल की जनसंख्या में इस तरह के बदलाव से अचंभित हूँ।”

हालाँकि, उनके गाइड ने बताया कि पूरे क्षेत्र में पानी खारा है और यहाँ की प्रजनन क्षमता भी बहुत कम है। यहाँ रहने वाले मुस्लिम मछली व्यवसाय से जुड़े कार्य करते हैं। गाइड ने आनंद को बताया, “द्वीप पर ब्राह्मण मंदिर और दूसरे अनुष्ठान से मिलने वाले पैसे पर निर्भर होते हैं। चूँकि द्वीप पर हिंदू आबादी कम हो रही है, इसलिए घरों में अनुष्ठानों की माँग भी कम हो रही है।”

आनंद ने ओखा से ‘बेट द्वारका’ तक की अपनी यात्रा का वर्णन करते हुए कहा कि हिंदू तीर्थयात्रा के पवित्र स्थलों में से एक बेट द्वारका में पहला दृश्य मस्जिद का था। यहाँ रास्ते में मछली पकड़ने वाली सैकड़ों नावें देखेंगे और इनमें से अधिकांश नावों में दो झंडे दिखते हैं। इनमें से एक झंडा भारतीय ध्वज होगा जो कि शायद भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल का है, जबकि दूसरा इस्लामी ध्वज होगा। ऐसे ही नजारे पूरे द्वारका में भी हैं। मस्जिदों और दरगाहों को रणनीतिक रूप से भारत के पश्चिमी तट पर रखा गया है।

सोमनाथ मंदिर

उदाहरण के लिए यहाँ हिंदू धर्म के सबसे पवित्र ज्योतिर्लिंग श्री सोमनाथ मंदिर का नक्शा है।

सोमनाथ मंदिर के एक किलोमीटर के दायरे में कम से कम तीन दरगाह/मस्जिद स्थित हैं।

बेट द्वारका का नक्शा

बेट द्वारका कभी भगवान कृष्ण का निवास था और सोमनाथ में कई इस्लामी शासकों द्वारा हमलों और लूटपाट और विनाश का इतिहास रहा है। गजनी के महमूद ने सोमनाथ पर 17 बार आक्रमण किया और उसे लूटा था।

हर भारतीय नागरिक को देश के किसी भी हिस्से में बसने का अधिकार है और संविधान में यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी के भी साथ कोई भेदभाव न हो। यहीं नहीं संविधान प्रत्येक भारतीय को सुरक्षा भी देता है। अगर कश्मीर जैसी जगहों के भारत के इतिहास को देखें तो यहाँ जनसंख्या में परिवर्तन के कारण हिंदुओं को अपनी जान और धार्मिक पहचान बचाने के लिए पलायन करना पड़ा था। इन क्षेत्रों में जनसांख्यिकी परिवर्तन सूक्ष्म है, जो कि हकीकत है और इसे एक चेतावनी के रूप में लिया जाना चाहिए।

(नोट: निरवा मेहता की मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी रिपोर्ट का अनुवाद कुलदीप सिंह ने किया है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए लिंक पर क्लिक करें।)

उरी हमला दोहराने की साजिश नाकाम, 3 आतंकी ढेर: 5 AK-47, 8 पिस्तौल और 70 हैंड ग्रेनेड बरामद

जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना ने LOC पर उरी के नज़दीक रामपुर सेक्टर में 3 आतंकियों को मुठभेड़ के दौरान मार गिराया। सभी आतंकी कुछ दिन पहले पाक ही अधिकृत कश्मीर (POK) से भारत की सीमा में आए थे। भारतीय सेना ने ऑपरेशन में मारे गए आतंकियों के पास से 5 AK-47, 8 पिस्तौल और 70 हैंड ग्रेनेड बरामद किए हैं।

चिनार कोर कमांडर डीपी पांडे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि गुरुवार तड़के रामपुर सेक्टर के हाथलंगा जंगल में चहल-पहल देखी गई थी। इसके बाद शुरू किए गए ऑपरेशन में तीन आतंकवादियों को मार गिराने में सेना को सफलता मिली। इससे पहले आतंकियों की ओर से 18 सितंबर को भी घुसपैठ का ऐसा ही प्रयास किया गया था, जिसे विफल कर दिया गया था।

बता दें कि पाँच वर्ष पूर्व 18 सितंबर 2016 को जैश-ए-मोहम्मद के हथियारों से लैस चार आतंकियों ने उड़ी सेक्टर में सेना की 12 ब्रिगेड के कैंप पर आत्मघाती हमला किया था, जिसमें सेना के 18 जवान बलिदान हुए थे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रविवार (19 सितम्बर, 2021) की भोर में भी उरी सेक्टर में अंगूरी पोस्ट के इलाके में स्वचालित हथियारों से लैस आतंकियों के एक दल ने घुसपैठ का प्रयास किया था। इसके बाद हुई मुठभेड़ में एक जवान घायल हो गया था। आतंकी जंगल और बारिश की आड़ में भागने में सफल हुए थे। वहीं सेना के अधिकारियों ने बताया कि उरी से कश्मीर के अंदरूनी इलाकों की तरफ आने वाले सभी प्रमुख रास्तों व नालों में भी विशेष नाके लगाए गए हैं। जहाँ घुसपैठ हुई है, उस पूरे इलाके मेें घेराबंदी कर दी गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार, सेना की 15वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडेय ने भी उरी में सैन्य अभियान की पुष्टि की थी। लेकिन उन्होंने उरी में घुसपैठ कर आए आतंकियों की संख्या के बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी। वहीं आज ऑपरेशन सफल होने में सेना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तीन आतंकियों के मारे जाने एवं भारी मात्रा में गोला बारूद बरामद होने की सूचना दी है।

गौरतलब है कि इस वर्ष फरवरी में पाकिस्तानी सेना द्वारा एलओसी पर संघर्ष विराम समझौते के बाद गुलाम कश्मीर की तरफ से उत्तरी कश्मीर में एलओसी पर आतंकियों की यह घुसपैठ की यह दूसरी कोशिश है। इससे पूर्व जून मेें बांडीपोरा में एलओसी पर घुसपैठ हुई थी। हालाँकि, उस समय भी घुसपैठ करने वाले तीनों आतंकियों को अलग-अलग मुठभेड़ों में मार गिराया गया था। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि इस वर्ष घुसपैठ के जो प्रयास हुए उनमें से शायद ही आतंकियों का कोई प्रयास सफल हो पाया है।

‘नागवार हुकूमत… मदीना को बना देगी आवारगी का अड्डा’: सऊदी अरब को ‘मदीना में सिनेमा’ पर भारत-पाक के मुस्लिम भेज रहे लानत

सऊदी अरब की हुकूमत ने जब से मदीना शरीफ में सिनेमा हॉल खोलने की बात कही है उसी समय से भारतीय मुसलमानों में नाराजगी है। कई मुस्लिम समूह और उलेमा अब सऊदी अरब की हुकूमत के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं। जगह-जगह अधिक विरोध की तैयारियाँ हो रही हैं।

रजा अकादमी द्वारा पोस्ट की गई तस्वीरों में देख सकते हैं कि कैसे बड़ी तादाद में भारतीय मुस्लिम समुदाय के लोग पोस्टर लेकर खड़े हैं। इस बाबत उन्होंने एक ट्विटर ट्रेंड अलर्ट भी जारी किया है। इसमें बताया गया है, “सऊदी हुकूमत ने जो मदीना शरीफ में सिनेमा घर खोलने का ऐलान किया है। उसके खिलाफ़ 23 सितंबर 2021 को मुंबई में उलमाये अहले सुन्नत का एहतेजाज होगा।”

पोस्टर में अपील की गई है कि सभी लोग #Bancinemainmadinashareef के ट्वीट करके इस अभियान में शामिल हों और किंग सलमान और सऊदी की एंबेसी को टैग करें।

तंजीम के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने इस संबंध में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सऊदी हुकूमत सिनेमाघर खोलकर इस्लाम को बदनाम करना चाहती है। उसे मक्का और मदीना शरीफ की पवित्रता भंग नहीं करने दी जाएगी। मक्का शरीफ में खुदा का घर है और मदीना शरीफ में पैगंबरे इस्लाम है, जिनसे दुनिया भर के मुसलमानों की आस्था जुड़ी है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, खानकाह कादरिया रहमानिया चनहटा के गद्दीनशीन मौलाना सूफी अब्दुर्रहमान कादरी ने मदीना में सिनेमा खुलने की बात सुन कहा कि कुरान और हदीस ने मुस्लिम समाज को बुराइयों से बचने का फरमान जारी किया है। गाना-बजाना और तमाशे जैसी बुरी चीजों को सऊदी हुकूमत खत्म करने के बजाय बढ़ावा दे रही है। ऐसे ही खानकाह जहांगीरिया कैंट के गद्दीनशीन सूफी पीर मोहम्मद हनीम लियाकती ने कहा कि सऊदी हुकूमत और उसके युवा शहजादे मोहम्मद बिन सलमान नाजायज कामों को बढ़ावा दे रहे हैं।

बता दें कि ट्विटर पर इस समय #ShameOnYouSaudiGovt ट्रेंड हो रहा है। ये भारत और पाकिस्तानी मुसलमान हैं जिन्होंने मिल कर एक ऐसे देश के विरुद्ध अभियान छेड़ा हुआ जो पूरे विश्व के मुस्लिमों की सहायता करने को तैयार रहता है। ऐसे में अन्य यूजर्स विरोध करने वालों को कह रहे हैं कि अगर लोगों को सऊदी से भी परेशानी है तो फिर उन्हें वहाँ भी नहीं जाना चाहिए।

मालूम हो कि इस हैशटैग को ट्विटर पर ट्रेंड करवाते हुए कहा जा रहा है कि मुस्लिम अपने पाक जगहों पर अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी माँगने जाते हैं न कि और गुनाह करने।

कुछ लोग सऊदी हुकूमत के इस फैसले में इजरायल को घुसा रहे हैं। उनका कहना है कि मदीना पूरे उम्माह का है न कि इजरायल के नौकरों को। ये सरकार गिर जाएगा। इससे मदीना की पाकीजगी को खतरा है।

निजाम सऊदी हुकूमत को बेशुमार लानतें भेजते हुए कहते हैं, जिस मुकद्दस सरजमीं पर चप्पल पहनकर चलना गवारा नहीं, वहाँ ये नागवार लोग आवारगी का अड्डा बनाएँगे!

यहाँ ये भी बता दें कि सऊदी अरब की सरकार ने पिछले साल नवंबर के अंत में मुसलमानों के पाक शहर मदीना में किंग सलमान रोड पर 10 सिनेमा घर, 32 रेस्टोरेंट और 2 मनोरंजन स्थल विकसित करने की घोषणा की थी। खबरों के अनुसार, आदेश के बाद इनका निर्माण कार्य जनवरी 2022 तक पूरा होना मुकर्रर बताया गया था।

कैला देवी में CM योगी के सभास्थल और हेलीपैड का शुद्धिकरण करने के मामले में सपा नेता गिरफ्तार, 10 पर FIR

उत्तर प्रदेश के संभल में मुख्यमंत्री योगी आदित्याथ के सभा स्थल और हैलीपैड को गंगाजल से शुद्धिकरण करने के मामले में पुलिस ने सपा नेता भावेश यादव को गिरफ्तार किया है। आरोपित समाजवादी पार्टी (सपा) के सहयोगी संगठन समाजवादी युवजन सभा का नेता बताया जा रहा है। हालाँकि इस मामले में यूपी पुलिस ने 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी ने संभल के कैला देवी स्थल में 21 सितंबर, 2021 को एक जनसभा को संबोधित किया था। साथ ही उन्होंने 275 करोड़ रुपए की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया था। समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश सचिव भावेश यादव ने बुधवार (22 सितम्बर, 2021) को अपने कुछ दूसरे कार्यकर्ताओं के साथ कैला देवी के सभास्थल, हेलीपैड और मंच स्थल सहित पूरे मैदान का गंगा जल से शुद्धिकरण किया। उसी दिन देर शाम इसका वीडियो वायरल हो गया। इसके बाद यूपी पुलिस ने बहजोई थाने में सपा नेता भावेश यादव और आठ-दस अज्ञात लोगों के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर लिया।

बता दें कि बुधवार को समाजवादी छात्रसभा के विधानसभा अध्यक्ष हरवीर यादव, समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश सचिव भावेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता कैला देवी में उस जगह पर पहुँचे जहाँ मंगलवार को CM योगी की जनसभा हुई थी। सपाइयों ने पूरे जनसभा स्थल से हैलीपैड तक गंगाजल छिड़का। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है सपाइयों ने इसके बाद शुद्धिकरण के फोटो व वीडियो वायरल कर दिया। यही नहीं बल्कि अपने बयान में इन सपाइयों ने कहना था कि मुख्यमंत्री ने पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों के साथ छल व नौकरियों में पक्षपात किया है। इसके कारण जनसभा स्थल अशुद्ध हो गया था, इसलिए शुद्धिकरण किया गया।

वहीं सपा नेता भावेश यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी देवी-देवताओं में भेदभाव करते हैं। योगी कैला देवी आए थे मगर उन्होंने माँ कैला देवी के दर्शन नहीं किए जिससे देवी का अपमान हुआ है। इसीलिए उन्होंने पूरे जनसभा स्थल और हेलीपैड का गंगा जल से शुद्ध किया है। उन्होंने कहा कि उनका प्रण है कि जहाँ-जहाँ योगी के चरण पड़ेंगे, उस जगह को गंगा जल से शुद्ध किया जाएगा।

रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस अधीक्षक चक्रेश मिश्रा ने गुरुवार (23 सितम्बर, 2021) को बताया कि इस मामले में बुधवार देर रात को मुख्य आरोपित भावेश यादव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने बताया कि एक व्‍यक्ति ने इस मामले में तहरीर दी थी। इसी आधार पर केस दर्ज किया गया। इसमें कहा गया है कि सपा कार्यकर्ताओं के इस काम से सीएम योगी के प्रशसंकों में है काफी रोष, जिससे शांति भंग होने की आशंका जताई जा रही है। वहीं वायरल वीडियो में राजू यादव, अशोक कुमार, चेतेन्द्र सिंह, गिरिराज सिह, सत्यवीर, उमेश, नरेश, संजीव यादव, नितिन यादव, वीरेश कुमार, हरीश कुमार आदि सपा नेताओं की पहचान हो चुकी है। जिनपर पुलिस की कार्रवाई की संभावना जताई जा रही।

इससे पहले इसी साल मई के महीने में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सैफई दौरे के बाद हेलीकॉप्टर उतरने के स्थल पर गंगाजल से समाजवादी के पार्टी के कार्यकर्ताओं ने स्वच्छ किया था, जिसके बाद अयोध्या के संतो ने इस खबर को संज्ञान में लेकर अपना विरोध दर्ज कराया था। संतों ने कहा था कि यह गंगाजल और संत समाज दोनों का अपमान है। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को संतो ने गुंडों तथा ऊँची मानसिकता का शिकार बताया था। संत समिति ने सपाई कार्यकर्ताओं-नेताओं की इस हरकत का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मुख्यमंत्री आवास में प्रवेश करते समय गंगाजल के छिड़काव की प्रक्रिया है। जबकि अखिलेश यादव को यह नहीं मालूम कि यह संत की प्रवृत्ति होती है।

अंग्रेजों से रेवाड़ी को दिलाई मुक्ति, स्वतंत्रता के लिए दुनिया की खाक छानी: काबुल में राव तुला राम ने ली थी आखिरी साँस

सन 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नायकों में एक राव तुला राम की आज (23 सितंबर) पुण्यतिथि है। राव तुला राम का जन्म 9 दिसंबर 1825 के दिन रेवाड़ी में हुआ था। यदुवंशी समाज के इस क्षत्रप ने अमर बलिदानी मंगल पांडेय द्वारा 1857 के स्वतंत्रतता संग्राम का बिगुल बजाने के बाद 17 मई 1857 को अंग्रेजी प्रशासन द्वारा नियुक्त तहसीलदार को हटाकर रेवाड़ी को अंग्रेज़ी शासन से मुक्ति दिलाई थी। अपने चचेरे भाई राव गोपाल देव के साथ मिलकर राव तुला राम ने न केवल दक्षिण हरियाणा से अंग्रेजों के शासन की समाप्ति की थी, बल्कि अपने इलाके से आगे बढ़कर उन शक्तियों की मदद भी की जो अंग्रेजों के विरुद्ध दिल्ली में ऐतिहासिक लड़ाई लड़ रही थी। राव तुला राम ने तत्कालीन बादशाह बहादुर शाह जफर की सेना को न केवल धन और सैन्य शक्ति से मदद की थी, बल्कि भारी मात्रा में सेना के लिए रसद सामग्री भी भेजी थी।

राव तुला राम की सेना ने उनके चचेरे भाई राव किरशन सिंह की अगुवाई में 16 नवंबर 1857 के दिन अंग्रेजी फौज के विरुद्ध नारनौल के पास नसीबपुर में भीषण युद्ध किया। राव तुला राम की सेना का पहला आक्रमण इतना तीखा था कि अंग्रेजों को मुँह की खानी पड़ी। कई अंग्रेज अफसर मारे गए और कई घायल हुए। अंग्रेजी फौज ने दूसरी बार आक्रमण किया और उसमें अंग्रेज़ों की विजय हुई। उनके सहयोगी और सेनापति बलिदान हो गए। इसके बाद राव तुला राम अपनी बची-खुची सेना के साथ राजस्थान की ओर चले गए और वहाँ लगभग एक वर्ष तक तात्या टोपे की सेना के साथ मिलकर अंग्रेज़ों के विरुद्ध युद्ध किया। सीकर की लड़ाई में राव तुला राम और तात्या टोपे की सेना की पराजित हुई और इसके पश्चात राव तुला राम ने भारत छोड़ दिया।

भारत से बाहर जाकर राव तुला राम ने ईरान के शाह, अफगानिस्तान के तत्कालीन शासक दोस्त मोहम्मद खान और रूस के राजा एलेक्सेंडर द्वितीय से मदद माँगी ताकि अंग्रेजी शासन से भारतवर्ष को मुक्त कराया जा सके। स्वतंत्रता संग्राम की पहली लड़ाई में अंग्रेजों के विरुद्ध खड़े होने के कारण अंग्रेजी शासकों ने 1859 में राव तुला राम की संपत्ति को जब्त कर लिया था। बाद में उनकी सम्पत्तियों को उनके पुत्र राव युधिष्ठिर सिंह को 1877 में सुपुर्द कर दिया गया। 23 सितंबर 1863 में राव तुला राम की काबुल में 38 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई।

राव तुला राम कुशल प्रशासक और उत्कृष्ट सेनापति थे। तुला राम जब मात्र चौदह वर्ष के थे तभी उनके पिता का देहांत हो गया था। बताते हैं कि उन्हें कई भाषाओं का ज्ञान था और तत्कालीन ऐतिहासिक घटनाओं पर उनकी नज़र भी रहती थी। रेवाड़ी पर अपने नियंत्रण के बाद उन्होंने अपनी शक्ति बढ़ानी आरंभ कर दी और इस प्रक्रिया में उन्होंने हथियार बनाने का कारखाना भी स्थापित किया। उद्देश्य मात्र एक, अंग्रेजी शासन से भारत को मुक्ति दिलाना। अपने इन्हीं प्रयासों में वे विदेश भी गए ताकि अंग्रेजों के विरुद्ध और सेनाओं तथा राजाओं की मदद ली जा सके। सार्वजनिक जानकारियों के अनुसार वे तत्कालीन बीकानेर के राजा का पत्र लेकर रूस के जार के पास तक गए थे। अंग्रेज शासकों ने उनके इन प्रयासों को रोकने की कोशिश की और इस वजह से रूस की यात्रा के समय उनके सहायक पकड़े गए।

वर्तमान में मनाए जा रहे आज़ादी के अमृत महोत्सव में राव तुला राम जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में पढ़ने और सुनने को अधिक से अधिक मिले तो वर्तमान और आनेवाली पीढ़ी अपने नायकों के बारे में जान सकेगी। यह वर्तमान और पूर्व पीढ़ियों के लिए त्रासदी से कम नहीं कि स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में जिन नायकों ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया उनके बारे में हम नहीं जानते। यह मात्र इतिहास के पुनर्लेखन की बात नहीं है। यह देश के हर नायक की कथा और उनकी पहचान की बात है। वैसे भी स्वतंत्रता संग्राम की पहली लड़ाई भी मात्र पौने दो सौ साल पुरानी ही है। ऐसे में यदि हम अपने नायकों के बारे में नहीं जान सकें तो एक राष्ट्र के रूप में हमारी पहचान सुढृढ़ करना हमेशा के लिए एक बड़ी चुनौती रहेगी।

100 मलयाली ISIS में हुए शामिल- 94 मुस्लिम, 5 कन्वर्टेड: ‘नारकोटिक्स जिहाद’ पर घिरे केरल के CM ने बताया

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने बुधवार को एक प्रेस मीटिंग में खुलासा किया कि 2019 तक केरल से ISIS में शामिल होने वाले 100 मलयालियों में से लगभग 94 मुस्लिम थे। ISIS आतंकियों की भर्ती पर बोलते हुए, विजयन ने खुलासा किया, “सरकार ने तथ्यों की पुष्टि की है कि ISIS में शामिल होने वाले 100 मलयाली में से 72 पेशेवर उद्देश्यों के लिए विदेश गए थे, लेकिन ISIS की विचारधारा से आकर्षित हो गए और इसमें शामिल हो गए। 72 में से केवल एक हिंदू था जबकि अन्य मुस्लिम समुदाय से थे।”

उन्होंने आगे कहा, “अन्य 28 ने विचारधारा से आकर्षित होने के बाद विशेष रूप से ISIS में शामिल होने के लिए केरल छोड़ दिया था। 28 में से केवल पाँच को अन्य धर्मों से इस्लाम में परिवर्तित किया गया था।’

गौरतलब है कि 2019 के कई मीडिया रिपोर्ट में सुरक्षा एजेंसियों के हवाले से ISIS में शामिल हुए केरल के लोगों की जानकारी और तस्वीर भी सामने आई थी।

केरल से ISIS में शामिल कुछ आतंकियों की तस्वीर (साभार- One India)

उसी सम्मेलन में, सीएम ने “लव जिहाद” और “नारकोटिक्स जिहाद” के आसपास जो अभी संगठित विवाद जारी है उसे निराधार बताया और पाला बिशप को ‘राज्य के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को नुकसान पहुँचाने’ के लिए लताड़ लगाई

इसके अलावा, बिशप द्वारा ‘नारकोटिक्स जिहाद’ पर लगाए गए आरोपों को खारिज करने के लिए, सीएम ने ड्रग्स पर सरकारी आँकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि मादक पदार्थों की तस्करी और मजहब के बीच कोई संबंध नहीं था।

मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने बताया, “2020 में नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (एनडीपीएस) 1985 अधिनियम के तहत, केरल में 4,941 मामले दर्ज किए गए थे। 5,422 आरोपितों में से 2700 (49.80 फीसदी) हिंदू थे, 1869 (34.47 फीसदी) मुस्लिम थे और 853 (15.73 फीसदी) ईसाई थे।”

एक खराब तर्क देते हुए, विजयन ने आगे कहा, “अनुपात यह नहीं बताता है कि मादक पदार्थों की तस्करी किसी विशेष धर्म पर आधारित है। साथ ही, जबरन नशीली दवाओं के इस्तेमाल से धर्म परिवर्तन का कोई मामला सामने नहीं आया है।”

विवाद की जड़

बता दें कि इस महीने की शुरुआत में ही, सिरो-मालाबार चर्च के पाला सूबा के बिशप मार जोसेफ कल्लारंगट (Bishop Mar Joseph Kallarangatt ) ने कहा था कि केरल के युवा ईसाई लड़कों और लड़कियों को न केवल ‘लव जिहाद’ के लिए बल्कि ‘नारकोटिक्स जिहाद’ के लिए भी निशाना बनाया जा रहा है।

एक कदम आगे बढ़ते हुए, बिशप ने कहा कि केरल में एक विशिष्ट समूह सक्रिय हैं जो गैर-मुस्लिम युवाओं को टारगेट कर रहे हैं और यहाँ तक ​​कि गैर-मुस्लिम युवाओं का लक्षित शोषण करने के लिए सहायता भी प्रदान कर रहे हैं।

“उनका उद्देश्य हथियारों से लड़े बिना गैर-मुस्लिम धर्मों को नष्ट करना है।” उन्होंने आगे आरोप लगाया था कि केरल आतंकवादियों के लिए एक भर्ती केंद्र बन गया है और ऐसे समूह युवाओं को अपने स्लीपर सेल के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं।

हालाँकि, मंगलवार (22 सितम्बर, 2021) को विजयन ने बिशप की निंदा की और कहा, “उनके जैसे सम्मानित पदों पर रहने वालों को कभी भी ‘नारकोटिक जिहाद’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था। हमारे धर्मनिरपेक्ष समाज ने इसका समर्थन नहीं किया। कुछ निहित स्वार्थों को छोड़कर कोई भी इसका पक्ष लेने को तैयार नहीं था।”

उधर, सीरो-मालाबार चर्च ने एक बयान जारी कर इस पूरे विवाद को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। चर्च ने कहा, “जो लोग धार्मिक प्रतिद्वंद्विता का प्रचार करने का आरोप लगाकर उसे अलग-थलग करने और उस पर हमला करने के लिए जानबूझकर अभियान चला रहे हैं, उनसे अनुरोध है कि वे इससे परे हटें। जबकि उनके भाषण का संदर्भ और मकसद स्पष्ट है, हम मानते हैं कि उनके खिलाफ कार्रवाई का आह्वान जानबूझकर किया गया है।”

यह दावा करते हुए कि हमारा इरादा किसी विशेष समुदाय पर हमला करने का नहीं था, चर्च ने आगे कहा, “इस तरह के कदम केवल केरल समाज में मौजूद भाईचारे और सह-अस्तित्व को नष्ट करने का काम करेंगे… हम स्पष्ट कर रहे हैं कि हम इसके खिलाफ खड़े होंगे और उनके साथ (पाल बिशप) एकजुट रहेंगे।”