Home Blog Page 3453

पहले खुदीराम बोस… दूसरे कौन? 20 की उम्र में मुस्कराते हुए फाँसी पर चढ़ने वाले क्रांतिकारी, जिन्होंने सुनवाई में वकील भी नहीं किया

अगर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के कुछ भूले-बिसरे क्रांतिकारियों की बात करें तो उनमें कन्हाईलाल दत्ता का नाम भी आता है। उनका जन्म 30 अगस्त, 1888 को पश्चिम बंगाल के चंदननगर में हुआ था। अपने कॉलेज जीवन में वो प्रोफेसर चारूचरण रॉय से प्रभावित हुए और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ गए। बंगाल विभाजन के खिलाफ भी उन्होंने आंदोलन किया। 1908 में उन्होंने कोलकाता जाकर ‘जुगांतर’ नामक क्रांतिकारी संगठन की सदस्यता ली थी।

2 मई, 1908 को उन्हें किंग्सफोर्ड नामक अंग्रेज अधिकारी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इन्हें मुख्यतः अलीपुर जेल में अपने साथी क्रांतिकारी सत्येन्द्रनाथ बोस के साथ मिल कर नरेन्द्र गोस्वामी नाम के गद्दार को मौत के घाट उतारने के लिए जाना जाता है। नरेन्द्र भारत विरोधी गतिविधियों में हिस्सा लेता था। दोनों ही क्रांतिकारियों को 10 नवंबर, 1908 को फाँसी की सज़ा सुनाई गई थी।

नरेंद्र गोस्वामी अंग्रेजों का मुखबिर भी बन गया था और क्रांतिकारियों का साथ छोड़ कर उसने सरकारी गवाह बनना स्वीकार कर लिया था। साथ ही उसने कई कल्पित और मनगढ़ंत बयान देकर कई लोगों को फँसा दिया था। उसकी हत्या की पूरी तैयारी काफी सूझबूझ के साथ की गई थी। असल में ये घटना अलीपुर में अंग्रेजों पर बम फेंके जाने से जुड़ी है, जिस मामले में इन क्रांतिकारियों को गिरफ्तार किया गया था।

शुरू में इन तीनों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन अंग्रेज बाकी क्रांतिकारियों को भी धर-दबोचना चाहते थे। दिक्कत ये थी कि उन्हें उनके ठिकाने मालूम नहीं थे। क्रांतिकारी भी गुप्त रूप से काम कर रहे थे। ऐसे में नरेंद्र गोस्वामी को अंग्रेजों ने मुखबिर बना दिया और उसने सब उगल दिया। साथ ही उसने कुछ निर्दोषों को भी इस मामले में फँसा दिया। ऐसे लोग, जिनका इस केस से कोई सम्बन्ध ही नहीं था।

उसका ये व्यवहार देख कर कन्हाईलाल दत्ता और सत्येन्द्रनाथ बोस को उससे घृणा हो गई। उन्होंने मन बना लिया कि इस गद्दार को मृत्युदंड देना ही उचित होगा। हालाँकि, ये सहज नहीं था। क्योंकि अंग्रेजों ने नरेंद्र गोस्वामी को क्रांतिकारियों के वार्ड से हटा कर जेल के यूरोपियन वार्ड में रख दिया था। लेकिन, कन्हाईलाल दत्ता और सत्येंद्रनाथ बोस किसी तरह बीमारी का बहाना बना कर अस्पताल जाने में कामयाब रहे, जहाँ उन्होंने पूरी तैयारी की।

यूरोपियन वार्ड में बड़ी चालाकी से नरेंद्र गोस्वामी के पास ये गुप्त सूचना भिजवाई गई कि सत्येंद्रनाथ बोस अब क्रांतिकारी गतिविधियों से ऊब गए हैं और वो भी सरकारी गवाह बनना चाहते हैं। सत्येन्द्रनाथ बोस उसके साथ मंत्रणा करना चाहते हैं, ये समाचार भी उसे भिजवाया गया। नरेंद्र गोस्वामी ने सोचा कि दो सरकारी गवाह हो जाने से और अच्छा हो जाएगा। हिंगिस नाम के एक अंग्रेज अधिकारी के साथ वो जेल में सत्येन्द्रनाथ बोस से मिलने पहुँच गया।

वो 31 अगस्त, 1908 को सुबह के लगभग 7 बजे का समय था, जब सत्येन्द्रनाथ बोस अस्पताल की पहली मंजिल के बरामदे में खड़े होकर गद्दार का इंतजार कर रहे थे। अंग्रेज अधिकारी को साथ देख कर वो भीतर के कमरे में चले गए। नरेंद्र गोस्वामी ने भी हिंगिस को बाहर इंतजार करने के लिए कह कर ‘गुप्त मंत्रणा’ के इरादे से आगे कदम बढ़ाए। तभी नरेंद्र की नजर कन्हाईलाल दत्ता पर पड़ी, जो दूसरी तरफ से इधर ही आ रहे थे।

हालाँकि, ये चीज उसे खटक रही थी। दोनों ने नरेंद्र गोस्वामी से बातचीत शुरू की। तभी अचानक से गोलियों की आवाज़ सुनाई दी और नरेंद्र गोस्वामी वहाँ से भागने लगा। उसका हाथ जख्मी हो चुका था। दोनों क्रांतिकारियों ने उस पर गोलियाँ चलाई। लिंटल नाम के अंग्रेज अधिकारी बीच में आया और उसने दोनों को रोकने की कोशिश की। कन्हाईलाल दत्ता ने अपनी पिस्तौल की नाल से उसकी खोपड़ी पर वार किया और खुद को उसकी जकड़ से मुक्त कराया।

इसके बाद कन्हाईलाल दत्ता ने अचूक निशाना लगाते हुए नरेंद्र गोस्वामी को आखिरी गोली दागी। इसके बाद दोनों क्रांतिकारियों ने भागने की चेष्टा किए बिना ही खुद को पुलिस के हवाले कर दिया। कन्हाईलाल दत्ता ने माफ़ी माँगने या फिर किसी वकील की सहायता लेने से इनकार करते हुए अपना किया स्वीकार कर लिया। उन्हें मौत की सज़ा मिली। सत्येन्द्रनाथ बोस का मामला ऊपरी अदालत में गया और उन्हें भी फाँसी की सज़ा सुनाई गई।

इस दौरान कन्हाईलाल दत्त को जरा भी हिचक नहीं थी और वो खुश थे, मुस्करा रहे थे। फाँसी के समय तक उनके कमजोर होने का सवाल तो दूर, उनका वजन बढ़ चुका था। उन्हें अब मृत्यु का भय न था। अलीपुर केंद्रीय कारगर में 10 नवंबर, 1908 को उन्हें फाँसी पर लटका दिया गया और भारत माता का ये सपूत मातृभूमि के लिए बलिदान हो गया। फाँसी की अंतिम रात भी वो कुछ ऐसे सोए थे कि उन्हें सुबह जगाना पड़ा था।

उनके अंतिम संस्कार में लोगों की भारी भीड़ जुटी और उनके चिता की आग ठंडी होने तक लोग वहाँ जमे रहे। इससे अंग्रेज सरकार डर गई। उसी साल 21 नवंबर को जब सत्येन्द्रनाथ बोस को फाँसी की सज़ा सुनाई गई तो अंग्रेजों ने उनका शव उनके परिजनों को नहीं सौंपा और खुद ही अंतिम संस्कार कर दिया। अंग्रेजों को डर था कि लोग जुटेंगे तो उसके खिलाफ आंदोलन और तेज़ होता चला जाएगा।

कन्हाईलाल दत्ता के अंतिम संस्कार के दौरान लोगों की बड़ी भीड़ एक-एक कर उनकी चिता को अग्नि देने के लिए बेताब थी। उनके पार्थिव शरीर को फूलों से ढक दिया गया था। कालीघाट के श्मशान में उस वक़्त एक अलग ही दृश्य था। महिला-पुरुष एवं बच्चे तक ‘जय कन्हाई’ का नारा लगाते हुए पहुँचे थे। इस प्रकार भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारियों में पहले बलिदानी खुदीराम बोस थे, उसके बाद कन्हाईलाल दत्ता और फिर सत्येन्द्रनाथ बोस।

अंत में ये भी जान लीजिए कि ‘अलीपुर बम केस’ क्या था। असल में अंग्रेजों ने अलीपुर में एक बड़ी बम की फैक्ट्री का पता लगा लिया था। मई 1908 में अंग्रेजों की छापेमारी में भारी मात्रा में गोला-बारूद व हथियार बरामद हुए थे। क्रांतिकारियों के साहित्य भी बड़ी मात्रा में जब्त किए गए थे। इसके बाद ऑरबिंदो घोष समेत कई स्वतंत्रता सेनानियों को गिरफ्तार किया गया था। बंगाल और बिहार में ताबड़तोड़ छापेमारी हो रही थी।

अब आपको मजफ्फरपुर बम हमले के बारे में बताते हैं, जिसकी चर्चा ऊपर की गई है। भारतीयों के प्रति घृणा का भाव रखने वाले अंग्रेज जज डगलस किंग्सफोर्ड को निशाना बना कर ये हमला किया गया था। उस समय कलकत्ता का चीफ मजिस्ट्रेट रहे डगलस किंग्सफोर्ड ने भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों को उनके प्रति घृणा का भाव रख के फैसले सुनाए थे। उसके पूरी भीड़ के सामने एक बच्चे को कोड़े मरवाए थे, जिसके बाद क्रांतिकारियों ने उसकी हत्या की योजना बनाई थी।

जन्माष्टमी के दिन जन्मे कनाईलाल दत्त अपनी ज़िंदगी के 21 साल भी पूरे नहीं कर सके थे। 20 साल की उम्र में ही क्रूर अँग्रेजों ने उन्हें फाँसी और चढ़ा दिया था। अगले दिन जब कन्हाईलाल को फाँसी के फंदे तक ले जाया जा रहा था, तब उन्होंने मुसकुराते हुए वार्डन से पूछा – “मैं कैसा दिख रहा हूँ?” वार्डन के पास कोई जवाब नहीं था। बाद में उस वार्डन ने कहा कि उसने कनाईलाल को फाँसी देकर एक बहुत बड़ा पाप किया है, अगर देश भर में ऐसे 100 लोग हो जाएँ तो क्रांतिकारियों का उद्देश्य पूरा हो जाए।

‘अल्लाह की तरफ जा रही हूँ’: अभिनेत्री सनम चौधरी ने एक्टिंग को कहा अलविदा, इंस्टाग्राम से हटाई अपनी सारी तस्वीरें

पाकिस्तान की अभिनेत्री सनम चौधरी ने अभिनय की दुनिया को अलविदा कह दिया है। शुक्रवार (27 अगस्त, 2021) को उन्होंने अपने जीवन के 30 बसंत पूरे किए और इसी अवसर पर उन्होंने ये घोषणा की। पाकिस्तान के टीवी चैनलों पर सनम चौधरी एक जाना-पहचाना चेहरा हैं। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट के बायो में ‘अभिनेत्री’ की जगह ‘इस्लाम सीख रही एक मुस्लिम माँ’ कर दिया। उन्होंने फीड से अपनी सारी तस्वीरें भी हटा दी।

सनम चौधरी ने घोषणा की कि अब उन्होंने अपना झुकाव अल्लाह की तरफ कर लिया है। ‘घर तितली का पर’ सीरियल से अपनी पहचान बनाने वाली सनम चौधरी ने कहा कि जो लोग मजहब के रास्ते का अनुसरण करते हैं, उनका दिल साफ़ होता है। उन्होंने कहा कि इस सुंदर रास्ते को चुनने के लिए सभी लोग उन्हें बधाइयाँ दे रहे हैं और उनका स्वागत कर रहे हैं। उन्होंने ये भी कहा कि सभी लोग उन्हें कुरान की शिक्षा भी देना चाहते हैं।

सनम चौधरी ने लिखा, “अभी से ही मेरा हौसला इतना बढ़ाया जा रहा है। अल्लाह हम सब को राह दिखाए!” उन्होंने एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें उनके परिवार ने जन्मदिन पर उन्हें सरप्राइज दिया था। उन्होंने बताया कि उनके परिवार ने खुशियाँ मना कर अल्लाह की राह पर उनका स्वागत किया है। उन्होंने इसे दिल को छू लेने वाला बताते हुए परिवार का धन्यवाद अदा किया। सनम चौधरी गायक सोमी चौहान की पत्नी हैं।

अब सनम चौधरी ने सिर्फ अपनी निकाह की तस्वीर को ही इंस्टाग्राम पर रखा है और खुद की बाकी तस्वीरें हटा दी हैं। नवंबर 2019 में सोमी चौहान के साथ उनका निकाह हुआ था। अक्टूबर 2020 में उन्होंने अपने पहले बच्चे को जन्म दिया। उन्होंने अपने बच्चे का नाम ‘शाहवीर’ रखा है। सनम चौधरी ‘आसमानों पे लिखा’, ‘हवाएँ’, ‘अब देख खुदा क्या करता है’, ‘इश्क़ हमारी गलियों में’, ‘रूबरू तेरा इश्क़’ और ‘मेरे आबरू’ जैसी सीरियलों में भी एक प्रमुख चेहरा थीं।

हालाँकि, उन्होंने निकाह के बाद से ही एक्टिंग की दुनिया से दूरी बना ली थी और किसी सीरियल में नहीं दिखी थीं। निकाह के समय उनका करियर उफान पर था। इसके बाद उन्होंने सिर्फ सोशल मीडिया पर खुद को सक्रिय रखा और अपने फैंस के साथ कभी-कभी बातचीत करती रहीं। जहाँ पाकिस्तान के कई लोगों ने उनके इस फैसले का स्वागत किया, कुछ ने कहा कि ये महत्वपूर्ण खबर नहीं है।

भारत में भी सना खान और जायरा वसीम जैसी अभिनेत्रियों ने इस्लाम के नाम पर बॉलीवुड को अलविदा कह दिया। इस्लाम का हवाला देकर फिल्मों को अलविदा कहने वाली ‘दंगल’ अभिनेत्री जायरा वसीम ने ट्विटर और इंस्टाग्राम अकाउंट भी डिलीट कर लिया था। सना खान ने भी मौलाना मुफ्ती अनस से निकाह के बाद हिजाब व बुर्के पहनना शुरू कर दिया और एक्टिंग छोड़ दी। दोनों कश्मीर घूमने भी गए थे, जहाँ से उन्होंने कई तस्वीरें पोस्ट की।

ईसाई बने महेश हेम्ब्रोम की हिन्दू धर्म में हुई घरवापसी: बीजेपी MLA ने की पाँव छूकर सनातन संस्कृति में बने रहने की अपील, देखें वीडियो

झारखंड के हजारीबाग जिले में ईसाई मिशनरियों द्वारा आदिवासियों को लालच या डरा धमकाकर धर्मान्तरण कराया जा रहा है। इसी क्रम में शनिवार (28 अगस्त 2021) को भाजपा के विधायक मनीष जायसवाल ने हिंदू से ईसाई बन चुके महेष हेम्ब्रोम की हिंदू धर्म में घर वापसी कराई। इस दौरान विधायक ने युवक के पैर छूकर उससे अपने पूर्वजों के धर्म को नहीं बदलने की अपील की और उसके गले से क्रॉस को उतार दिया।

मामला हजारीबाग जिले के दिग्वार पंचायत के चानो खुर्द का है। धर्म परिवर्तन किए जाने की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर भाजपा के विधायक मनीष जायसवाल गाँव के दौरे पर गए थे। इस दौरान उन्होंने धर्मान्तरण के शिकार महेश हेम्ब्रोम की ईसाई धर्म से वापस हिंदू धर्म में घर वापसी कराई। घर वापसी के बाद परिजनों ने कहा कि वो बहक गए थे। इस बीच विधायक ने लोगों से अपने पूर्वजों से सनातन संस्कृति से जुड़े रहने की अपील की।

इस मामले में विधायक मनीष जायसवाल ने धर्मान्तरण की घटनाओं पर अपना रोष व्यक्त करते हुए इसे बर्दाश्त नहीं करने की बात कही है। उन्होंने ट्वीट किया, “हज़ारीबाग की धरती पर धर्मांतरण बर्दाश्त नहीं की जाएगी! भटके हुए हर एक परिवार को जागृत करना हम सब की जिम्मेदारी है, इस मुहिम की शुरुआत की है, उम्मीद है आप सभी का साथ मिलेगा! पूर्वजों के अपने सरना धर्म पर बने रहने के संकल्प के बाद मैंने ग्रामवासियों के पैर छूकर अभिनन्दन किया।”

भाजपा विधायक का कहना है कि हजारीबाग जिले दारू ब्लॉक में ईसाई मिशनरी चोरी-छिपे आधी रात घरों में जाकर लोगों का धर्म परिवर्तन करवा रहे हैं। लोगों को कई तरह की लालच दी जा रही है।

उल्लेखनीय है कि जिले के पदमा, इचाक, बड़कागाँव, सदर प्रखंड, दारु, शहरी क्षेत्र के अमृत नगर, टाटीझरिया में बड़े स्तर पर धर्म परिवर्तन की घटनाएँ चल रही हैं। इस मामले में बीजेपी विधायक जायसवाल ने जिला प्रशासन से कार्रवाई करने की माँग करते हुए आंदोलन करने की चेतावनी भी दी।

…तो अब जौनपुर का भी नाम बदलकर होगा जमदग्निपुरम! भाजपा विधायक दिनेश चौधरी ने सीएम योगी को लिखा पत्र

उत्तर प्रदेश में एक और शहर का नाम बदलने की माँग उठी है। प्रदेश के जौनपुर जिले के केराकत भाजपा के विधायक दिनेश चौधरी ने जिले का नाम बदलकर भगवान परशुराम के पिता महर्षि जमदग्नि के नाम पर करने की माँग की है। इसके लिए विधायक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है।

चौधरी के मुताबिक, जिले का पुराना नाम जमदग्निपुरम ही था, लेकिन 13वीं शताब्दी में मुगल आक्रान्ता मोहम्मद बिन तुगलक ने इसका नाम बदलकर अपने भाई जूना खान के नाम पर जौनपुर कर दिया था। बीजेपी विधायक ने इस मामले में विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा है कि राज्य में ब्राम्हण वोटों पर कब्जा जमाने के लिए विपक्ष राजनीति तो खूब कर रहा है, लेकिन ब्राम्हण शिरोमणि भगवान परशुराम के पिता महर्षि जमदग्नि के नाम पर सभी ने चुप्पी साध रखी है।

इसीलिए अब वो माँग कर रहे हैं कि जौनपुर का नाम बदलकर फिर से जमदग्निपुरम कर दिया जाय। सीएम योगी को लिखे पत्र में दिनेश चौधरी ने कहा है कि राज्य के कई शहरों के नामकरण किए जाने से भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद गौरवान्वित हुआ है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जिले की सदर तहसील में पवित्र गंगा और गोमती नदी के तट पर जमैथा नाम का स्थान है, जहाँ भगवान परशुराम के पिता महर्षि जमदग्नि का आश्रम आज भी स्थित है और यहाँ पर लोग पूजा करते हैं। इसके अलावा यहीं पर माता रेणुका (भगवान परशुराम की माता) का मंदिर भी है, जहाँ भक्त पूजा अर्चना करते हैं।

गौरतलब है कि प्रदेश में जगहों औऱ शहरों को उनकी पुरानी पहचान वापस दिलाने के लिए उनका नामकरण किए जा रहे हैं। इससे पहले हाल ही में अलीगढ़ जिले का नाम बदलकर हरिगढ़ किए जाने का प्रस्ताव पास कर उसे राज्य सरकार के पास भेजा गया था। इसी तरह उन्नाव की मियागंज ग्रामपंचायत का नाम बदलकर मायागंज करने की माँग को लेकर भी प्रस्ताव पास कराकर उसे सरकार के पास भेजा गया है।

इमरान प्रतापगढ़ी सहित कॉन्ग्रेसी-वामपंथी गिरोह ने ‘किसान’ को लेकर फैलाया झूठ: लोगों ने कर दिया फैक्ट चेक, तस्वीर गोरक्षक की

हरियाणा में एक बार फिर किसान आंदोलन तेज हो गया है। यहाँ शनिवार (अगस्त 28, 2021) को करनाल के घरौंडा में टोल पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के एक कार्यक्रम के विरोध में किसानों ने प्रदर्शन किया। कृषि कानूनों के साथ भाजपा नेताओं के कार्यक्रमों का विरोध कर रहे किसानों ने हर जिले की तरह भिवानी में भी दो जगह रोड को जाम कर दिया। यही नहीं उन्होंने पुलिस पर जान लेवा हमला भी किया।

सीएम के आगमन का विरोध कर रहे किसानों ने बस्तारा टोल प्लाजा पर जाम लगा दिया और पुलिस को पीटने लगे। इसके बाद पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज कर दिया। इस घटना के बाद कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने ट्वीट करते हुए लिखा, “फिर खून बहाया है किसान का, शर्म से झुकाया हिंदुस्तान का।” वहीं कॉन्ग्रेस ने अपने ट्विटर हैंडल से एक तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा, “किसानद्रोही बीजेपी का अंत नजदीक है।”

आपको जान कर हैरानी होगी कि कॉन्ग्रेस पार्टी अभी भी झूठी और फर्जी खबरें फैलाकर ओछी राजनीति करने से बाज नहीं आ रही है। ऐसा इसलिए, क्योंकि पार्टी ने जो फोटो शेयर किया है, वह किसी किसान का नहीं, बल्कि एक गो-रक्षक का है। इस तस्वीर में एक सिर दिखाया गया है, जिस पर टाँके लगे हुए हैं। हालाँकि बाद में कॉन्ग्रेस ने इस ट्वीट को डिलीट कर लिया, क्योंकि लोगों ने खुद ही कॉन्ग्रेसी प्रोपेगेंडा का फैक्ट चेक कर दिया।

वहीं पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चे के अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी ने भी इसी फोटो को शेयर करते हुए लिखा, “ये सिर देश के एक किसान का है और इस फटे सर पर लगे टॉंकों की वजह नरेंद्र मोदी जी की लाठियॉं हैं।” कॉन्ग्रेस ने तो अपना ट्वीट डिलीट कर लिया है, लेकिन इमरान प्रतापगढ़ी के फेसबुक पेज पर यह पोस्ट अभी भी उपलब्ध है।

फेक न्यूज फैलाने की होड़ में भला कॉन्ग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला कहाँ पीछे रहने वाले। उन्होंने भी मोदी सरकार को नीचा दिखाने के लिए अपने ट्विटर अकाउंट से इस तस्वीर को शेयर किया और लिखा, “करनाल में किसान आंदोलन से निपटने के लिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट के तुगलकी फरमान का प्रत्यक्ष प्रमाण। कायर खट्टर सरकार, इसे हल्का बल प्रयोग बता रही है।” हालाँकि पोल खुलती देख उन्होंने भी ट्वीट डिलीट कर लिया।

कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इन कॉन्ग्रेसियों की पोल खोल दी। टीवी पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने लिखा, “ये तस्वीर फेक है, झूठी है। इस तस्वीर का किसानों से कोई लेना देना नहीं। तस्वीर पुरानी है और मोनू नाम के गो-रक्षक की है। गो-हत्यारों ने मोनू पर हमला किया था। ट्विटर और ऑल्ट न्यूज अब करिए फैक्ट चेक।”

एक यूजर ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “पुरानी तस्वीर को आधार बना कर सरकार व पुलिस को बदनाम करने और लोगों में अफवाह फैलाने के लिए इस ट्विटर हैंडल को तत्काल प्रभाव से हमेशा के लिए बन्द कर देना चाहिए।”

वहीं इमरान प्रतापगढ़ी द्वारा झूठ फैलाए जाने पर एक यूजर ने प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “इमरान शायर नही झुठायर है, दिन भर देश को बदनाम करने का काम करता रहता है, 

योगी आदित्यनाथ जी, इसके पास भी बड़ी कोठी है, जेसीबी का रुख इसकी तरफ भी करवाइए।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “जब शायर भटक जाता है। लाठी से सिर कट जाता है।” 

वहीं एक अन्य ने लिखा, “दो कौड़ी के झूठे शायर इमरान कभी सच से वाकिफ़ होकर बात कर और सही वीडियो शेयर कर। यूपी पुलिस, शलभ मणि त्रिपाठी कृपया इनकी अफवाह फैलाने के जुर्म में स्वागत करिए। देश में ऐसे मानसिकता के लोग दंगा करा देंगे।”

बता दें कि 33 वर्षीय इमरान प्रतापगढ़ी को अखिलेश यादव की सपा सरकार ने 2016 में ‘यश भारती अवॉर्ड’ से नवाजा था। इमरान प्रतापगढ़ी को उनकी नज्म ‘मदरसा’ और ‘हाँ, मैं कश्मीर हूँ’ जैसे नज्मों के लिए जाना जाता है। ‘मदरसा’ नज्म में उन्होंने इसे आतंकवाद से न जोड़ने की अपील करते हुए इसका महिमामंडन किया है। 2019 में उन्हें कॉन्ग्रेस ने मोरादाबाद लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया था, लेकिन वो 5% वोट पाने में भी नाकामयाब रहे।

इमरान अपनी शायरी के जरिए ‘इमान वालों’ को 4-6 लोगों की हत्या कर के मरने की सलाह देते हैं। इसी तरह शाहीन बाग़ आंदोलन के दौरान महिलाओं और बच्चों से उन्होंने ‘जो हिटलर की चाल चलेगा, वो हिटलर की मौत मरेगा’ का नारा लगवाया था। इस प्रदर्शन में छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल थे। इसी तरह जम्मू कश्मीर को लेकर भी वो प्रोपेगंडा फैलाते रहे हैं और कहते रहे हैं कि वहाँ मुस्लिमों की जनसंख्या ज्यादा होने के कारण उन पर ‘जुल्म’ होता है।

इसी तरह पुलवामा में जब भारतीय जवानों का बलिदान हुआ था, तब उसके बाद हुए एक मुशायरे में उन्होंने इसके लिए भारत और भारतीय सुरक्षा बलों को ही जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने ‘कातिल घर के आँगन तक पहुँचा है, रखवाले की साजिश हो सकती है’ जैसी पंक्तियों के जरिए भारत को ही कटघड़े में खड़ा किया था। CAA विरोधी आंदोलनों के दौरान मोदी सरकार को इमरान ने भारत के संविधान का ‘कातिल’ करार दिया था।

इसके अलावा इमरान प्रतापगढ़ी की एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें इमरान प्रतापगढ़ी मुस्लिमों से ब्यूरोक्रेसी पर ‘कब्जा’ करने के लिए कहते हैं। वीडियो में इमरान प्रतापगढ़ी का कहना था कि फासिस्टों ने पिछले 30 सालों में उनके नस्ल का काफी नुकसान किया है। इमरान प्रतापगढ़ी के अनुसार इससे एक फायदा भी हुआ और वह फायदा यह है कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक और नेपाल के बॉर्डर से लेकर राजस्थान के बॉर्डर तक डंडा लेकर भैंस चराने वाला आम मुस्लिम भी यह समझ चुका है कि इस देश में जिंदा रहना है तो बच्चों को पढ़ाना पड़ेगा।

पोर्नोग्राफी केस में शर्लिन चोपड़ा का शिल्पा शेट्टी पर वार, कहा- ‘दीदी गलतियाँ मानने से कोई छोटा नहीं होता’

बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के बिजनेसमैन पति राज कुंद्रा की पोर्न फिल्म बनाकर इसे ऐप पर अपलोड करने के मामले में गिरफ्तारी के मामले को लेकर मॉडल और अभिनेत्री शर्लिन चोपड़ा ने शिल्पा शेट्टी पर निशाना साधा है। शर्लिन ने एक वीडियो के जरिए शिल्पा से पोर्न फिल्म के मामले में पीड़ित लड़कियों के प्रति सहानुभूति दिखाने की नसीहत देते हुए कहा कि अपनी गलतियाँ मानने से कोई छोटा नहीं हो जाता है।

सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो में शर्लिन चोपड़ा ने शिल्पा पर तंज कसते हुए कहा, “दीदी आपने हाल ही में एक रिएलिटी शो के मंच पर आपने कहा कि जब आप रानी लक्ष्मीबाई जी की कहानी सुनती हैं तो गर्व से आपका सीना चौड़ा हो जाता है। आपने ये भी कहा कि रानी लक्ष्मीबाई की कहानी वास्तविक इतिहास है।”

‘ब्रिटिश पासपोर्ट वाले शायद रानी लक्ष्मीबाई को नहीं जानते होंगे’

शर्लिन ने आगे कहा, “रानी लक्ष्मीबाई जैसी वीरांगना, जिन्होंने अपनी दृढ़ता, वीरता, निडरता और साहस से भारत में इतिहास रच दिया, उनके बारे में भारत का बच्चा-बच्चा जानता है। ये अलग बात है कि कुछ ब्रिटिश पासपोर्ट रखने वाले उनके बारे में नहीं जानते होंगे। रिएलिटी शो के मंच पर आपने (शिल्पा शेट्टी) ये भी कहा था कि जिन महिलाओं ने भी अपने जीवन में संघर्ष किया है उन्हें आप साष्टांग दंडवत प्रणाम करती हैं। क्या उन महिलाओं में बेबस, लाचार और पीड़ित वो महिलाएँ भी शामिल हैं, जिन्होंने अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में जाकर अपने बयान दर्ज कराए थे।”

यहीं नहीं अभिनेत्री ने शिल्पा पर आरोप लगाया कि आजकल जब भी वो सोशल मीडिया पर फोटो अपलोड करती हैं तो शिल्पा के समर्थक उन्हें तुरंत फोटोशॉप्ड करार दे देते हैं। शर्लिन ने कहा, “आपको बता दूँ कि इस देश की जाँच एजेंसियाँ मुझसे, आपसे या आपके समर्थकों से कहीं ज्यादा एडवांस हैं और उन्हें तथ्यों की जाँच करना बखूबी आता है। कुछ दिन पहले आपका इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट पढ़ा था, जो विश्वास पर था। मेरा ये मानना है कि विश्वास से ही उजड़ी दुनिया में भी प्रकाश आता है।”

अभिनेत्री ने शिल्पा से पीड़ितों के प्रति सहानुभूति दिखाने का निवेदन करते हुए कहा कि उन्हें कानून व्यवस्था और न्याय पालिका पर अटूट विश्वास है।

गौरतलब है कि राज कुंद्रा की गिरफ्तारी के बाद सामने आकर शर्लिन चोपड़ा ने अपनी आपबीती बताई थी। शर्लिन ने बताया था कि उन्होंने आर्म्सप्राइम नामक कंपनी के साथ करार पर हस्ताक्षर किए थे फिर वीडियोज बनाने लगी थीं। उनका कहना था कि शुरुआत में ये ग्लैमरस वीडियो थी, लेकिन उसके बाद ये बोल्ड फिल्में बनने लगीं और बाद में उन्हें सेमी न्यूड और न्यूड वीडियोज बनाने पड़े। बकौल शर्लिन चोपड़ा, उन्हें हमेशा कहा जाता था कि इसमें कुछ गलत नहीं है क्योंकि सभी ऐसा ही करते हैं। शर्लिन ने ये भी कहा था कि कुंद्रा ने उन्हें बताया था कि शिल्पा को उनके वीडियोज अच्छे लगे थे।

‘न घर के न घाट के’: स्वरा भास्कर को अंबेडकरवादियों और वामपंथियों ने ‘लिबरल गैंग’ से किया बाहर, गृह प्रवेश पूजा बना कारण

बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने हाल ही में अपने नए घर के लिए गृह प्रवेश समारोह की कुछ तस्वीरें साझा की थीं। तस्वीरों में उन्हें एक नई शुरुआत के लिए देवताओं का आशीर्वाद लेने के लिए पूजा करते हुए देखा जा सकता है। उनकी राजनीतिक हरकतों को देखते हुए तस्वीरें काफी अजीब थीं, लेकिन फिर भी उन्हें अपनी हिंदू विरासत को पूरी तरह से न छोड़ते हुए देखना अच्छा था। यह हर रोज नहीं होता है कि आप भारत में एक लिबरल्स को अपनी हिंदू विरासत का जश्न मनाते हुए देखते हैं।

तस्वीरें प्यारी थीं, लेकिन धर्मपरायणता के सरल और सहज प्रदर्शन से अम्बेडकरवादियों और कम्युनिस्टों का आक्रोश जाग उठा। इन लोगों ने अपने ब्राह्मण विरोधी और हिंदू विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए मौके का लाभ उठाया।

साभार: ट्विटर

स्वरा की इन तस्वीरों पर तरह-तरह के कमेंट किए गए। भारत में ब्राम्हणवाद कभी खत्म नहीं होने का दावा करते हुए स्वरा भास्कर पर ‘ब्राह्मणवाद’ के एजेंडे को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया जा रहा है। कुछ ने उन पर जातिवाद को बढ़ाया देने का भी आरोप लगाया।

साभार: ट्विटर
साभार: ट्विटर

यूजर्स ने कहा कि इन सब को देख कर हम पूछने पर मजबूर हैं कि हिंदू संस्कारों, कर्मकांडों का हिंदुत्व से क्या लेना-देना है, तब जबकि इसके सहारे हिंदुत्व का मजाक उड़ाया जाता है। कोरोना महामारी से पहले ही इस तरह से चेहरे से मास्क का उतरना सही नहीं है।

साभार: ट्विटर

इस बीच कुछ लोगों ने स्वरा भास्कर की तस्वीरों की तुलना नाजी दुष्प्रचार से भी किया। यहाँ एक मिनट के लिए उस नफरत की कल्पना करें। जीवन में एक नए अध्याय को शुरू करने से पहले देवताओं की प्रार्थना की नाजीवाद के दुष्प्रचार से तुलना की जा रही है। पवित्र त्रिशूल और स्वास्तिक की तुलना नाजीवाद से की जा रही है।

किसी दूसरे धर्म के खिलाफ कट्टरता का ऐसा सार्वजनिक प्रदर्शन बर्दाश्त नहीं किया जाता है, लेकिन जब हिंदू धर्म की बात आती है, तो यह सभी के लिए खुला मौसम होता है। इस नफरत को विश्वविद्यालयों के परिसरों में, मीडिया में और मनोरंजन उद्योग में भी काफी बढ़ावा दिया जाता है।

साभार: ट्विटर

नाज़ीवाद से तुलना हाल के दिनों की ऐसी घटना है, जिसे कुछ दिनों में काफी कवर किया गया है। हिंदुत्व और श्वेत वर्चस्व के बीच एक तरह की समानता बनाने की कोशिश की जा रही है, इसके तहत ये लोग सीधे हिंदू धर्म में पवित्र माने जाने वाले प्रतीकों को टार्गेट कर रहे हैं।

हिन्दुत्व से इतनी नफरत कि कुछ लोगों ने तो स्वरा के ‘नारीवाद’ पर ‘ब्राह्मणवाद’ का ठप्पा भी लगा दिया।

साभार: ट्विटर

जिन तरीकों और कारणों के कारण स्वरा भास्कर को ‘कैंसिल’ किया गया था, उससे इस बात की अच्छी जानकारी मिलती है कि अनिवार्य रूप में ‘वैश्विक हिंदुत्व को खत्म करना’ क्या है। अम्बेडकरवादी, कम्युनिस्ट, इस्लामवादी, ईसाई धर्म प्रचारक दावा कर सकते हैं कि वे धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि एक राजनीतिक विचारधारा के खिलाफ हैं। लेकिन यह उनके वास्तविक भयावह एजेंडे को छिपाने का एक सुविधाजनक तरीका है।

लेकिन अगर ये लोग जिसके खिलाफ हैं और वही हिंदुत्व है तो वे अपने स्वयं के हिंदू देवताओं की पूजा करने और गृह प्रवेश समारोह आयोजित करने पर आपत्ति क्यों करेंगे? इस बात में किसी तरह का कोई संदेह नहीं है कि स्वरा भास्कर उन्हीं मे से एक हैं।

स्वरा ने फेक न्यूज फैलाईं, स्पष्ट हकीकत से इनकार किया है और हिंदुत्व को कमजोर करने के लिए हर तरह के दुर्भावनापूर्ण एजेंडे को बड़ी ही बेशर्मी से आगे बढ़ाया। हालाँकि, जिस क्षण उन्होंने अपनी विरासत में गर्व करते हुए हिंदू देवी-देवताओं की पूजा की तो उन्हें ‘खारिज’ कर दिया गया।

इससे यह पता चलता है कि भाजपा के खिलाफ दुष्प्रचार और अनुच्छेद 370 व सीएए का विरोध करना भी पर्याप्त नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी की छवि को नुकसान पहुँचाना ही मूल अपेक्षा है और ऐसा करना ही हिंदुत्व को चोट पहुँचाना हो गया है।

उनके समूह का हिस्सा बनने के लिए असली लिटमस टेस्ट ये होता है कि आप अपनी पहचान को पूरी तरह से खत्म कर दो और हिंदू धर्म को बदनाम करते रहो। हिंदू धर्म के सबसे ऊपरी सतह से भी जुड़े रहना इन लोगों (वामपंथियों, इस्लामवादियों) को विश्वासघात नजर आता है। जब कोई हिंदू धर्म का जश्न मनाने का फैसला करता है ऐसे ‘वैश्विक हिंदुत्व को डिसमैटल करना’ डरावना है। ऐसा करने पर उसे वही लोग खारिज कर देते हैं, जिसे उसने आपनी आत्मा तक बेच दी थी।

हम इस सत्य को भलीभाँति जानते हैं, क्योंकि हमने देखा है कि पश्चिम में यह कैसे काम करता है। हिंदू राजनेताओं और राजनीतिक उम्मीदवारों के कर्मचारियों को उनकी आस्था के कारण ही निशाना बनाया गया है और इस तथ्य को छिपाने का कोई प्रयास नहीं किया गया है कि आरोप केवल इसलिए लगाए गए, क्योंकि वह व्यक्ति हिंदू था।

हमने ये तब भी देखा जब भारत में बैठे इस्लामवादियों ने सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों से नाराज होकर मिडिल ईस्ट में रहने वाले हिंदुओं को टार्गेट करते हुए न केवल उन्हें नौकरियों से बाहर करवाया, बल्कि उन्हें गिरफ्तार करवाने की कोशिश भी की थी। कम से कम एक मामले में इस्लामवादियों द्वारा एक नकली प्रोफ़ाइल के साथ एक हिंदू को फंसाया गया था और दुर्भाग्य से उसे न केवल अपनी नौकरी खोनी पड़ी, बल्कि सऊदी अरब में दो साल जेल में बिताने पड़े।

जब स्वरा भास्कर पर हिंदू परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार अनुष्ठान करने के लिए हमला किया जाता है तो हम फिर से उसी नफरत को देखते हैं।

गुलामी की याद दिलाता है सुल्तानपुर, सीएम योगी इसका नाम बदलकर कुशभवनपुर या कुशनगरी करें: बीजेपी MLA ने लिखा पत्र

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर का नाम बदलने की माँग लंबे समय से की जा रही है। लंभुआ विधानसभा से बीजेपी विधायक देवमणि द्विवेदी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर सुल्तानपुर का नाम बदलकर कुशभवनपुर करने का आग्रह किया है। विधायक का कहना है, ”सुल्तानपुर वास्तव में कुशभवनपुर या कुशनगरी के नाम से जाना जाता था। सुल्तानपुर नाम उन्हें ‘गुलामी’ की याद दिलाता है।”

उन्होंने 17 अगस्त को लिखे अपने पत्र में कहा कि विदेशी आक्रांताओं द्वारा जबरन कुशभवनपुर का नाम बदलकर सुल्तानपुर कर दिया गया था। अत: जनभावना के दृष्टिगत इसका मूल नाम कुशभवनपुर वापस करने की घोषणा करें।

बीजेपी विधायक देवमणि द्विवेदी ने सीएम योगी को लिखा पत्र

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2018 में नगर पालिका बोर्ड की बैठक में सुल्तानपुर का नाम बदलकर कुशभवनपुर करने का प्रस्ताव भी पास किया गया था। इसके बाद सुल्तानपुर के लम्भुआ से बीजेपी विधायक देवमणि द्विवेदी ने विधानसभा में जिले का नाम बदलने का प्रस्ताव पेश किया था।

बीजेपी विधायक का कहना है कि अयोध्या से लगभग 60 किमी दूर सुल्तानपुर जिले को भगवान श्रीराम के पुत्र कुश ने बसाया था, जिसे पहले कुशभवनपुर नाम से जाना जाता था। माता सीता ने यहीं रुककर स्नान भी किया था, इसलिए इस घाट का नाम सीताकुण्ड घाट बोला जाता है।

बताया जा रहा है कि योगी सरकार भी सुल्तानपुर जिले का नाम भगवान श्रीराम के ज्येष्ठ पुत्र कुश के नाम पर कुशभवनपुर करने की तैयारी कर रही है। इस पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली प्रदेश कैबिनेट करेगी। फिलहाल नाम बदलने को लेकर कागजी कार्यवाही आरंभ हो गई है।

तीन तलाक के बाद शौहर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया अश्लील वीडियो, परेशान होकर बीवी ने की आत्महत्या, FIR

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक शौहर ने अपनी 25 वर्षीय बीवी को तीन तलाक देने के 3 महीने बाद उसका एक अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया। वीडियो वायरल होने के बाद अपने मायके में रह रही महिला ने परेशान होकर शनिवार (28 अगस्त) को आत्महत्या कर ली। यह घटना मुजफ्फरनगर जिले के भोपा पुलिस थाने के अतंर्गत किशनपुर गाँव की है।

थाना प्रभारी दीपक चतुर्वेदी ने बताया कि आरोपित और महिला का 4 साल पहले नि​काह हुआ था। दोनों का डेढ़ साल का एक बेटा भी है। उन्होंने बताया कि आरोपित ने करीब 3 महीने पहले तीन तलाक कहकर अपनी बीवी से रिश्ता तोड़ लिया था, जिसके बाद महिला अपने बच्चे के साथ किशनपुर गाँव अपने मायके में रहने चली गई थी।

इस मामले में महिला ने 18 अगस्त को पुलिस थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी। शिकायत में महिला ने अपने शौहर पर तीन तलाक देने और बेटे को उसके पास से जबरन ले जाने का आरोप लगाया है।

थाना प्रभारी ने आगे बताया कि पुलिस इस मामले की जाँच कर रही थी कि तभी कथित रूप से आरोपित ने महिला का एक अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया, जिससे परेशान होकर उसने जहर खाकर खुदकुशी कर ली। उन्होंने बताया कि आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

काबुल एयरपोर्ट के पास अब रॉकेट से हमला: अब तक 2 की मौत, 3 के घायल होने की सूचना

अफगानिस्तान के काबुल में एक और धमाका किया गया है। सोशल मीडिया पर जो सूचनाएँ आ रही हैं, उसके अनुसार काबुल के हामिद करजई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के पास रविवार (29 अगस्त 2021) की शाम को रॉकेट से हमला किया गया।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार इस हमले में अब तक 2 लोगों की मौत और 3 के घायल होने की सूचना है।

सोशल मीडिया पर इस हमले से संबंधित आई कुछ तस्वीरों और वीडियो में देखा जा सकता है कि काबुल एयरपोर्ट के पास काफी धुआँ है। धमाके के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई है।

यह हमला तब किया गया है, जब अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा था कि 24 से 36 घंटों के भीतर काबुल एयरपोर्ट के पास फिर हमला हो सकता है। इसको लेकर अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए सलाह और सुरक्षा संबंधी अडवाइजरी भी जारी की थी।

13 अमेरिकी सैनिकों सहित 200+ की मौत

काबुल एयरपोर्ट पर ही गुरुवार (26 अगस्त 2021) को आत्मघाती हमला किया गया था। इसमें 13 अमेरिकी सैनिकों समेत कुल 200+ लोग मारे गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत ने ली थी।

अमेरिका ने हालाँकि ड्रोन से स्ट्राइक करके काबुल एयरपोर्ट पर हमले के लिए जिम्मेदार आतंकी को मार गिराया।