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तालिबानियों की एंट्री के बाद अफगानी क्रिकेटर राशिद खान को सताई परिजनों की चिंता, IPL में जगह पक्की

अफगानिस्तान के मौजूदा हालातों पर हर कोई हैरान-परेशान है। ऐसे में क्रिकेट प्रेमियों को वहाँ के अफगानिस्तानी क्रिकेटर राशिद खान की चिंता सता रही है। यही कारण है कि आज ट्विटर पर उनका नाम ट्रेंड भी हो रहा है। इस ट्रेंड में बताया जा रहा है कि कैसे इस समय राशिद खान अपने मुल्क के हालात देख परेशान हैं और चाह कर भी अफगानिस्तान से अपने परिजनों को बाहर नहीं निकाल पा रहे हैं।

इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर केविन पीटरसन ने स्वयं राशिद की चिंता को लेकर खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि राशिद खान अफगानिस्तान के हालातों पर बहुत ज्यादा परेशान हो रखे हैं क्योंकि उनका परिवार अब भी वहीं फँसा है और वह उन्हें वहाँ से नहीं निकलवा पा रहे हैं। पीटरसन ने अपने बयान में आगे ये भी कहा है, “वह ऐसे हालात और तनाव में भी हंड्रेड लीग में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। मुझे लगता है कि यह सबसे ज्यादा दिल को छू लेने वाली कहानी होगी।”

बता दें कि राशिद अभी खुद यूके (युनाइटेड किंगडम) में हैं और द हंड्रेड लीग खेल रहे हैं। वहाँ वह ट्रेंट रॉकेट्स के लिए खेल रहे हैं, जबकि मोहम्मद नबी लंदन स्पिरिट्स की ओर से मैदान में हैं। इसके अलावा इन खबरों की पुष्टि भी हो गई है कि अफगानी क्रिकेटर्स राशिद खान और मोहम्मद नबी आईपीएल 2021 के दूसरे फेज में अपनी-अपनी फ्रेंचाइजी टीमों के लिए खेल पाएँगे।

न्यूज एजेंसी से बात करते हुए सनराइजर्स हैदराबाद के सीईओ के शंमुगम ने कहा कि अफगानिस्तान के दो खिलाड़ी आईपीएल के दूसरे चरण में टीम का हिस्सा होंगे। सीईओ ने ये भी कहा कि उन्होंने अभी अफगानिस्तान में क्या हालात रहे हैं उसको लेकर किसी तरह की चर्चा नहीं की है। लेकिन अभी के बातचीत के अनुसार दोनों यूएई के लिए फ्लाइट पकड़ेंगे।

उल्लेखनीय है कि आईपीएल 2021 के दूसरे फेज की शुरुआत 19 सितंबर से होने जा रही है। इस दौरान 31 मैच यूएई में खेले जाएँगे। आईपीएल के नजदीक होने पर और अफगान की ऐसी स्थिति पर क्रिकेट प्रेमी परेशान थे। इससे पहले राशिद खान ने 10 अगस्त को एक ट्वीट किया था। इस ट्वीट में राशिद ने लिखा था, “वैश्विक नेताओं! मेरा देश मुश्किल में है, बच्चों और औरतों समेत हजारों मासूम मारे जा रहे हैं, शहीद हो रहे हैं, घर और प्रॉपर्टी तोड़ी जा रही है, हजारों परिवार पलायन कर चुके हैं। हमें इस मुश्किल समय में मत छोड़िए। अफगानियों को मारना और अफगानिस्तान को तबाह करना बंद करिए। हम बस शांति चाहते हैं।”

‘2023 के पंचायत चुनाव में नहीं होंगे केंद्रीय बल, BJP उम्मीदवार भुगतेंगे परिणाम’: TMC विधायक की धमकी

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के एक विधायक ने पश्चिम बंगाल में 2023 में होने वाले पंचायत चुनावों को लेकर अभी से ही धमकी दी है। TMC विधायक जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने रविवार (15 अगस्त, 2021) को कहा कि 2023 के पंचायत चुनाव में केंद्रीय सुरक्षा बल नहीं होंगे और भाजपा की तरफ से लड़ने वाले उम्मीदवारों का ‘ख्याल रखा जाएगा।’ उन्होंने 2023 पंचायत चुनावों में भाजपा के टिकट के दावेदारों को ये धमकी दी है।

जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया जलपाईगुड़ी जिले के सितई विधानसभा क्षेत्र से से TMC के विधायक हैं। उन्होंने स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक में कहा, “भाजपा की तरफ से जो लोग पंचायत चुनाव के लिए नॉमिनेशन करने जा रहे हैं, वो सावधान रहें, हमारे आदमी उनलोगों का पूरा ख्याल रखेंगे।” उन्होंने भाजपा को ‘हत्यारी और सांप्रदायिक’ पार्टी बताते हुए कहा कि अगर इसके लिए कोई वोट माँगेगा तो उसे परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

इस पर टिप्पणी करते हुए TMC सांसद सौगत रॉय ने कहा कि पार्टी इस तरह के बयानों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनावों में अभी समय है, लेकिन हम लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव लड़ कर जीतेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा की ‘धमकियों और साजिशों’ को विधानसभा चुनाव में हरा कर TMC को बड़ी संख्या में वोट दिया है। उन्होंने दावा किया कि जनता अब भी तृणमूल का ही समर्थन कर रही है।

वहीं TMC के महासचिव कुणाल घोष ने कहा कि भाजपा की तरफ से भी कई नेताओं ने भड़काऊ बयान दिए थे, लेकिन जनता ने उन सबको नकार दिया। पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वो चुनौती देते हैं कि वो जो कह रहे हैं, वो कर के दिखाएँ। उन्होंने कहा कि भाजपा के कार्यकर्ता इस तरह की धमकियों से डरने वाले नहीं हैं।

उन्होंने कहा, “हम इस तरह की आतंकी हथकंडों के सामने नहीं झुकेंगे।” उन्होंने कहा कि मार्च-अप्रैल में हुए विधानसभा चुनावों में यही जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया लोगों के आक्रोश को देखते हुए डर के मारे अपना ही विधानसभा क्षेत्र छोड़ कर भाग गए थे। उन्होंने कहा कि आज भाजपा के पास 77 विधायक हैं और हम 3 साल पहले वाले हथकंडों को नहीं अपनाने देंगे। बता दें कि 2018 में पंचायत चुनावों के दौरान बूथ कैप्चरिंग से लेकर हिंसा की कई खबरें आई थीं।

तालिबानी हुकूमत के लिए ‘अल्लाह का शुक्रिया’ करते जामिया के आसिफ इकबाल तन्हा को सुनिए, दिल्ली दंगों का भी है आरोपित

जब भारत अपनी स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में प्रवेश कर रहा था और चारों ओर इसका जश्न मनाया जा रहा था तब जामिया का छात्र और दिल्ली दंगों का आरोपित आसिफ इकबाल तन्हा अफगानिस्तान में तालिबानी शासन का खुलकर समर्थन कर रहा था।

ट्विटर स्पेस पर साथियों से चर्चा करते हुए रविवार (15 अगस्त 2021) को उसने कहा, “मैं एक अच्छी खबर देना चाहता हूँ, अशरफ गनी ने इस्तीफा दे दिया है। अल्लाह का शुक्रिया कि धीरे-धीरे ही सही लेकिन इस्लामिक एमिरेट ऑफ अफगानिस्तान (तालिबान का शासन) स्थापित हो गया। हमें इससे प्रेरणा लेने और सीखने की की जरूरत है कि कैसे आजादी के आंदोलन के लिए संघर्ष किया जाता है।” स्पेस पर जिस टॉपिक पर चर्चा हो रही थी वह था, “क्या भारत में मुस्लिम आजाद हैं?”

ट्विटर स्पेस में शामिल रहे मोहम्मद तनवीर के ट्वीट से इस बात की पुष्टि होती है कि चर्चा में दिल्ली दंगों का आरोपित इकबाल मौजूद था। वीडियो से यह पता चलता है कि बाकी सदस्यों के माइक्रोफोन ऑफ थे और तालिबान की तारीफ करते तथा अल्लाह का शुक्रिया करते हुए आसिफ इकबाल को सुना गया।

इकबाल आजादी पाने के लिए तालिबान से प्रेरणा लेना चाहता है और संभवतः यह वही ‘जिन्ना वाली आजादी’ है जिसके स्लोगन का उपयोग सीएए विरोधी दंगों के दौरान हुआ था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को दिए गए अपने बयान में इकबाल ने कबूल किया था कि वह भारत को एक इस्लामिक देश बनाना चाहता है। इकबाल 2014 से जामिया मिलिया इस्लामिया और स्टूडेंट इस्लामिस्ट ऑर्गनाइजेशन (SIO) का सदस्य है। फरवरी 2020 में पूर्वोत्तर दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों के साजिशकर्ता के रूप में इकबाल को UAPA के अंतर्गत गिरफ्तार किया गया था।

भारत को इस्लामिक देश बनाने की इच्छा के अलावा भी उसने कई खुलासे किए थे। इक़बाल ने अपने बयान में कहा था कि वह नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) को मुस्लिम विरोधी मानता था इसी कारण वह इसके विरोध में शामिल हुआ था। उसने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर बसों को आग लगाने की बात भी स्वीकार की थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक आसिफ इकबाल ने 12 दिसंबर को जामिया मिलिया इस्लामिया के गेट नंबर 7 से 2500-3000 लोगों के मार्च का नेतृत्व करने की बात स्वीकार की थी। उसने खुलासा किया था कि शरजील इमाम ने 13 दिसंबर को भड़काऊ भाषण देकर प्रदर्शनकारियों को चक्का जाम करने के लिए उकसाया था।

आसिफ ने यह भी स्वीकार किया था कि 15 दिसंबर को जामिया मेट्रो स्टेशन से संसद की तरफ गाँधी शांति मार्च का आयोजन किया गया था और गाँधी नाम का उपयोग इसलिए किया गया था ताकि अधिक से अधिक संख्या में लोग जुड़ सकें। इकबाल ने कोलकाता, लखनऊ, कानपुर, उज्जैन, इंदौर, पटना, साहिबगंज, समस्तीपुर और अहमदाबाद जैसे शहरों में भड़काऊ भाषण देने की बात स्वीकार की। उसके द्वारा मुस्लिमों को प्रदर्शन करने और रूरत पड़े तो हिंसा भी करने का सुझाव दिया गया।

जेल से रिहा होने के बाद 22 जून को इकबाल ने ट्वीट कर कहा था, “अस्सलामलैकुम दोस्तों, 13 महीने जेल में रहने के बाद आज अपनी माँ, परिवार, दोस्तों और साथी कार्यकर्ताओं से मिल रहा हूँ। ऐसा लग रहा है जैसे पिंजरे में कैद किसी पक्षी को खुला आसमान मिला है जो पहले से भी बड़ा है।”

आसिफ इक़बाल के ट्वीट का स्क्रीनशॉट
पत्रकार अली सोहराब की प्रोफाइल

यहाँ ध्यान देने की बात है कि जब इकबाल अफगानिस्तान में तालिबानी शासन की प्रशंसा कर रहा था तब उत्तर प्रदेश के पत्रकार अली सोहराब को समर्थन में ‘अल्हम्दुलिल्लाह’ कहते हुए सुना गया। सोहराब को उत्तर प्रदेश पुलिस ने नवंबर 2019 में हिन्दू समाज के संस्थापक कमलेश तिवारी की हत्या के बारे में आपत्तिजनक पोस्ट करने के जुर्म में दिल्ली से गिरफ्तार किया था। सोहराब के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 295A, 295B, 66, 67 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था।

‘AAP’ की महिला कार्यकर्ता ने किया आत्महत्या का प्रयास, पार्टी नेता ने राजनीतिक करियर बर्बाद करने की दी थी धमकी

गुजरात में सूरत की आम आदमी पार्टी की कार्यकर्ता सपना राजपूत ने 13 अगस्त को पार्टी के एक नेता द्वारा कथित तौर पर मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने के बाद आत्महत्या करने की कोशिश की। पुलिस के अनुसार, मूल रूप से उत्तर प्रदेश की रहने वाली सपना राजपूत भेस्तान में आकाश दर्शन सोसायटी में रहती हैं। उन्होंने कथित तौर पर अधिक मात्रा में नींद की गोलियाँ खाकर और अपने दाहिने हाथ की नस काटकर आत्महत्या करने का प्रयास किया था।

पुलिस ने आगे बताया कि उनके पति अजय राजपूत उन्हें इस हालत में SMIMER अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने सपना को खतरे से बाहर बताया है। उन्होंने आप नेता गौतम पटेल के खिलाफ रंगदारी की शिकायत भी दर्ज कराई थी।

बताया जा रहा है कि सपना ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि आम आदमी पार्टी के नेता गौतम पटेल ने पार्टी के काम से जुड़े मुद्दों पर उनसे बहस की थी। पटेल ने कथित तौर पर उसे बताया कि उसके पति अजय राजपूत ने डेढ़ साल में चार हजार रुपए का कर्ज लिया था और अभी तक नहीं लौटाया है। इसके लिए उसने कथित तौर पर सपना से 10,000 रुपए माँगे, जो उन्होंने दे दिए।

सपना ने 13 अगस्त की रात पांडेसरा पुलिस थाने में अपनी शिकायत में यह आरोप भी लगाया था कि उसे आप नेता गौतम पटेल का फोन आया था। पटेल ने फोन पर उनका राजनीतिक करियर खत्म करने की धमकी दी थी।

पुलिस सब-इंस्पेक्टर जे आर देसाई के अनुसार, आप नेता गौतम पटेल द्वारा धमकी और मानसिक प्रताड़ना देने के बाद से सपना काफी तनाव में रहने लगी थीं, जिसके बाद उन्होंने आत्महत्या करने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है, लेकिन गौतम अभी फरार है।

सोनी मिश्रा ने की आत्महत्या, केजरीवाल ने कहा था समझौता कर लो

गौरतलब है कि जून 2016 में आप की कार्यकर्ता सोनी मिश्रा ने आप नेता रमेश भारद्वाज पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। 19 जुलाई, 2016 को पार्टी और पुलिस द्वारा उस पर कोई कार्रवाई नहीं किए जाने से निराश होकर आप की युवा कार्यकर्ता सोनी मिश्रा ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी।

आत्महत्या करने से पहले सोनी मिश्रा ने खुलासा किया था कि उन्होंने आप नेता रमेश भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से भी संपर्क किया था। उनके अनुसार, AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने अपनी पार्टी के नेता के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं, बल्कि उनसे ही AAP नेता के साथ ‘समझौता’ करने की माँग की, जिन्होंने कथित तौर पर उनका यौन शोषण करने का प्रयास किया था।

‘धोखेबाज! गिरगिट! पैसे के लिए पिता का नाम डूबा दिया’: ‘खेला होबे’ का नारा लगा TMC में गई महिला कॉन्ग्रेस अध्यक्ष, भड़के कॉन्ग्रेसी

‘ऑल इंडिया महिला कॉन्ग्रेस’ की अध्यक्ष अब तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की नेता हो गई हैं। सिल्चर की पूर्व सांसद सुष्मिता देव कॉन्ग्रेस पार्टी से इस्तीफा देने के बाद कोलकाता में एक कार्यक्रम में TMC में शामिल हो गई हैं। सांसद डेरेक ओब्रायन की मौजूदगी में वो TMC में शामिल हुईं। TMC ने असम की नेता का स्वागत करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से प्रेरित होकर सुष्मिता देव ने ये फैसला लिया है।

इसके बाद सुष्मिता देव ने भी सोशल मीडिया पर ‘खेला होबे’ का टैग लगाते हुए कहा कि वो पार्टी के लिए अपनी क्षमतानुसार अपना अब कुछ देंगी। साथ ही उन्होंने पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी को धन्यवाद भी दिया। लेकिन, कॉन्ग्रेस समर्थकों को ये रास नहीं आया और उन्होंने सुष्मिता देव की आलोचना की। राहुल गाँधी की डीपी वाले एक हैंडल कामरान खान ने लिखा, “रातोंरात विचारधारा बदल ली। वाह! इंसान के ज़मीर का अब कोई भरोसा नहीं रह गया हैं। वैसे राज्यसभा की डील मुबारक हों।”

सुष्मिता देव के TMC में जाने के बाद लगभग रोने लगे कॉन्ग्रेस समर्थक

राहुल गाँधी के ही डीपी वाले एक अन्य हैंडल ओपी मीणा ने पूछा, “मैडम, कॉन्ग्रेस से मन भर गया था क्या?” वहीं कई लोगों ने उन्हें अपने यूजरनेम में से INC हटा कर TMC लगाने की सलाह दी। कुछ ने आशंका जताई कि ब्लू टिक चले जाने के कारण वो ऐसा नहीं कर रही हैं। सेल्विन थॉमस नाम के यूजर ने तो उन्हें ‘गिरगिट’ बताते हुए लिखा कि उन्होंने पल भर में विचारधारा बदल ली, वो बड़ी प्रतिभावान हैं।

एक कॉन्ग्रेस समर्थक ने पूछा, “राज्यसभा सीट? मुख्यमंत्री का चेहरा? पैसे? बताइए तो कि टेबल के नीचे से क्या डील हुई है।” एक अन्य ने पूछा, “आप अपनी क्षमतानुसार सब कुछ कॉन्ग्रेस को क्यों नहीं दे सकती थीं, जो TMC को देने की बात कर रहीं?” कई यूजर्स ने उनसे ‘डील’ के राज जानने चाहे।विशाल रंजन ने दिल टूटने वाले इमोजी लगाते हुए कहा, “आपको कॉन्ग्रेस नहीं छोड़ना चाहिए था मैडम।”

सुष्मिता देव के TMC में जाने के बाद आक्रोशित हुए कॉन्ग्रेस समर्थक

कॉन्ग्रेस समर्थकों ने उन पर पार्टी को धोखा देने के आरोप लगाए। एक यूजर ने आरोप लगाया कि उन्होंने ‘पैसे के लिए’ अपने पिता का नाम डूबा दिया। वहीं एक अन्य यूजर ने उन्हें ‘लालची’ करार देते हुए कहा कि ऐसे लोग सिर्फ लेना जानते हैं, देना नहीं। एक यूजर ने तो आरोप लगाया कि अमित शाह के बाद अब TMC भी कॉन्ग्रेस को निशाना बना रही है। एक अन्य ने उन पर कॉन्ग्रेस का एहसान न चुकाने के आरोप लगाए।

सुष्मिता देव के TMC में जाने के बाद कॉन्ग्रेस समर्थकों ने लगाए कई आरोप

सुष्मिता देव के बारे में बता दें कि वो कॉन्ग्रेस के दिवंगत दिग्गज नेता संतोष मोहन देव की बेटी हैं। संतोष मोहन देव 5 बार असम के सिल्चर और 2 बार त्रिपुरा वेस्ट से सांसद रहे थे। वो राजीव गाँधी के सबसे विश्वस्त सिपहसालारों में से एक थे। यूपीए काल में भी वो केंद्रीय मंत्री थे। उनके पिता सतीन्द्र मोहन देव पश्चिम बंगाल के स्वतंत्रता सेनानी थे। उनके दादा काली मोहन देव भी कॉन्ग्रेस के सक्रिय सदस्य थे। इस तरह सुष्मिता देव चौथी पीढ़ी की कॉन्ग्रेसी थीं।

सुष्मिता देव ने भी अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए असम के सिल्चर को ही अपनी राजनीतिक कर्मभूमि बनाया। वो 2011 में यहाँ से विधायक चुनी गईं। 2014 में मोदी लहर के बीच वो जीत कर सांसद बनीं। हालाँकि, 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें भाजपा उम्मीदवार डॉक्टर राजदीप रॉय के हाथों हार झेलनी पड़ी। सुष्मिता देव की माँ भीतिका देव भी सिल्चर से 2006 में विधायक रही हैं।

जब बामियान में बुद्ध को डायनामाइट से उड़ाया, 9 गाय काट कर मना जश्न: तालिबान लौट आया तो मिर्जा हुसैन से भी मिल लीजिए

अफगानिस्तान में तालिबानियों के कब्जे के बाद अब उस हर भयावह मंजर को याद किया जा रहा है जो किसी समय में तालिबानी शासन का सच हुआ करता था। उस दौर की सच्चाई को बयान करने वाली एक घटना बामियान में स्थित मशहूर बुद्ध प्रतिमा से भी जुड़ी है, जिसे विस्फोट में आज से 20 साल पहले उड़ा दिया गया था। ये सांस्कृतिक नरसंहार की कोशिश थी। इस काम का जिम्मा 26 साल के मिर्जा हुसैन को दिया गया था। मिर्जा थे तो शिया मुसलमान लेकिन तालिबानी उनको काफिर मानते थे। 

2015 में प्रकाशित बीबीसी की एक रिपोर्ट में मिर्जा हुसैन का पूरा पक्ष बताया गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, मिर्जा ने बताया था कि कैसे अफगानिस्तानियों ने बुद्ध मूर्ति पर हमला किया। उन्होंने बताया कि तालिबानियों ने पहले तो बुद्ध प्रतिमा पर टैंक और भारी गोलियों से हमला किया था, लेकिन जब वह उसे नष्ट करने में नाकाम रहे तो उन्होंने कुछ स्थानीय युवकों से उसमें विस्फोटक लगवा दिया। इस काम में मिर्जा हुसैन भी शामिल थे।

मिर्जा बताते हैं, “मैं 25 कैदियों में से एक था। शहर में कोई भी नागरिक नहीं था सिर्फ़ तालिबानी थे। हमें इस काम के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि वहाँ कोई और था ही नहीं। हम लोग क़ैदी थे और हमारे साथ इस तरह बर्ताव किया जाता था जैसे हमें कभी भी मारा जा सकता है।”

उल्लेखनीय है कि बामियान की अधिकांश आबादी शिया मुसलमानों की है। सुन्नी सुमदाय वाले तालिबानी उनको काफिर मानते हैं। इसलिए जब मई 1999 में कई महीनों तक चले युद्ध के बाद तालिबान ने बामियान पहाड़ियों पर कब्जा किया तो, ज्यादातर स्थानीय निवासी या तो भाग गए थे या उनको गिरफ्तार कर लिया गया था।

मिर्जा, चूँकि गिरफ्तार हुए थे, तो वह 2001 में घटे उस मंजर के गवाह बने, जिसे सुन कोई भी सहम जाए। उनके अनुसार, तालिबानी कई ट्रकों में भरकर विस्फोटक ले आए थे। उसके बाद उन लोगों (कैदियों) ने उसको अपनी पीठों और हाथों में उठाकर प्रतिमा के पास सेट किया। इस बीच एक कैदी बहुत चोटिल हो गया था और विस्फोटक नहीं ले जा पा रहा था। तालिबानियों ने उसे उसी वक्त गोली मारी और दूसरे को उसकी लाश ठिकाने लगाने को कहा।

बुद्ध की मूर्ति में चारों ओर विस्फोटक लगाने में तीन दिन का वक्त लगा था। सबकी तारें नजदीकीं मस्जिद के पास तक बिछाई गईं थी। वहीं से उन्हें चार्ज किया गया और अल्लाह-हू-अकबर की आवाजों के बीच बम धमाका किया गया। धमाका बहुत तेज था। बुद्ध की मूर्ति के सामने सिर्फ धुआँ और आग की लपटें दिख रहीं थी। हवा के बहने के साथ बारूद की गंध नाक में जा रही थी।

तालिबानी कमांडर सोच कर बैठा था कि वो लोग न सिर्फ बुद्ध की मूर्ति को तबाह करेंगे बल्कि पूरी पहाड़ी को गिरा देंगें। लेकिन इस भारी धमाके ने केवल बुद्ध की टांगें ही उड़ाईं। इस हरकत की हर जगह आलोचना हुई। मगर, तालिबान शांत नहीं हुआ। वह दोबारा साबुन जैसे और आटें की लोई जैसे विस्फोटक लाया और रोजाना दो-तीन विस्फोट करने लगा।

मिर्जा हुसैन के अनुसार, वह लोग खुद ड्रिल करके प्रतिमा में डायनामाइट लगाते थे। इसके बदले उन्हें खाने में थोड़े चावल और रोटियाँ मिलती थीं और बर्फीली रातों में एक पतला सा कंबल ओढ़ने को दिया जाता था। जब तमाम प्रयासों के बाद प्रतिमा को पूरा नष्ट करने में ये लोग सफल हुए तो जश्न मना, हवा में गोलियाँ चलीं, डांस हुआ और कुर्बानी के लिए नौ गायों की हत्या हुई।

रिपोर्ट के अनुसार, 6 साल पहले (2015) मिर्जा हुसैन बामियान में साइकल मैकेनिक के तौर पर काम कर रहे थे और उम्मीद कर रहे थे कि विदेशी दानदाता और सरकार मिलकर उस बुद्ध प्रतिमा को दोबारा खड़ा करेंगे। उनको बहुत पछतावा था कि उस मूर्ति के टूटने में उनका भी हाथ था। लेकिन वह करते भी क्या? अगर विरोध किया होता तो शायद तालिबानियों के हाथों मार दिए गए होते।

उल्लेखनीय है कि काबुल से करीब 200 किलोमीटर दूर उत्तर-पश्चिम में बामियान घाटी एक बौद्ध केंद्र थी। छठी शताब्दी में कई बौद्ध सन्यासी इस घाटी में रहते थे। बौद्ध सन्यासियों के साथ ही केंद्रीय अफगानिस्तान के पहाड़ी इलाकों में बौद्ध कला और संस्कृति आई। लाल रेतीले पत्थर की बड़ी बड़ी चट्टानों में रहने लायक गुफाएँ बनाई गईं। बुद्ध की वो मूर्तियाँ भी इसी पत्थर से बनाई गई थीं। लेकिन 2001 में तालिबानी कहर ने इसे नष्ट कर दिया। बड़ी मूर्ति 174 फीट की थी। बाद में इसे 3-डी तकनीक से खड़ा किया गया और पर्यटकों को लुभाने के लिए प्रोजेक्टेड छवि बनाई गई। इसमें 76.70 लाख रुपए का खर्चा आया। लेकिन इसे बनाने वाली चीनी दंपत्ति झेयांग शिन्यु और लियांग हॉग ने कहा कि ये अफगानिस्तान को चीन का तोहफा है।

74 वर्ष तक आजादी को झूठा कहने वाली माकपा ने 15 अगस्त पर पहली बार फहराया तिरंगा, कॉन्ग्रेस ने कहा- बहुत देर से समझ आई

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) इन दिनों विवादों के घेरे में है। दरअसल, देश की आजादी को 74 वर्ष तक झूठा मानने वाली माकपा ने पहली बार माना कि भारत अब स्वतंत्र है। पार्टी ने स्वतंत्रता दिवस पर पहली बार भारतीय ध्वज तिरंगा फहराकर आजादी का जश्न मनाया। माकपा की केरल इकाई ने रविवार (15 अगस्त) को तिरुवनंतपुरम के एकेजी सेंटर में पार्टी मुख्यालय में तिरंगा फहराया। समारोह का नेतृत्व पार्टी सचिव ए विजयराघवन ने किया था। इसके तुरंत बाद, पूर्व कॉन्ग्रेस नेता सबरीनाधन केएस ने आरोप लगाया कि झंडा उसी ऊँचाई पर फहराया गया था, जिस पर कम्युनिस्ट पार्टी का झंडा था।

उन्होंने कहा कि पार्टी के नेताओं ने फ्लैग कोड का उल्लंघन किया है, जिस पर संज्ञान लिया जाना चाहिए। ध्यान दें कि फ्लैग कोड (पीडीएफ) के अंतर्गत किसी अन्य ध्वज को भारतीय तिरंगे से ऊपर या इसके आसपास नहीं रखा जाना चाहिए।

एक फेसबुक पोस्ट में उन्होंने कहा, “पार्टी सचिव ने एकेजी सेंटर पर भारतीय ध्वज तिरंगा फहराया, लेकिन एक तरह से उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया है।” सबरीनाधन ने आगे ​कहा कि राष्ट्रीय ध्वज संहिता (National Flag Code) में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है, राष्ट्रीय ध्वज के साथ किसी अन्य ध्वज को उसके साथ, उससे ऊपर या उसके आसपास नहीं रखा जाना चाहिए। एकेजी केंद्र में इस कानून का उल्लंघन हुआ है। पार्टी के झंडे को राष्ट्रीय ध्वज से अधिक प्रमुखता दी गई है। हालाँकि, द न्यूज मिनट के अनुसार, सीपीआई (एम) का झंडा राष्ट्रीय ध्वज के नीचे था।

सबरीनाधन केएस के फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट

गौरतलब है कि इससे पहले, केरल प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष (केपीसीसी) के. सुधाकरन ने भारत के 75वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर माकपा के तिरंगा फहराने के कदम की आलोचना की थी। सुधाकरन ने टिप्पणी की थी, “जो लोग अब स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं, वे वही लोग हैं जिन्होंने दुष्प्रचार किया था कि 15 अगस्त एक खतरा है। पार्टी जो 15 अगस्त को अपाथु 15 (Danger 15) कहती थी, अब राष्ट्रीय ध्वज फहराना शुरू कर दिया है। मुझे खुशी है कि सीपीएम ने कम से कम कॉन्ग्रेस की विरासत को पहचाना तो। उन्होंने कहा कि सीपीएम एक ऐसा संगठन है, जिसने गाँधीजी को नकार दिया। उन्हें अतीत की गलतियों को स्वीकार करने का जज्बा दिखाना चाहिए।”

‘मस्जिद में राष्ट्रगान हराम, तिरंगा फहराना अल्लाह के कहर को दावत’: आगरा के मुफ़्ती ने जारी किया फतवा

आगरा के एक मौलवी ने मस्जिद में तिरंगा फहराए जाने और राष्ट्रगान को लेकर फतवा जारी कर दिया है। आगरा में स्वतंत्रता दिवस पर राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अशफाक सैफी द्वारा आगरा के जामा मस्जिद में झंडोत्तोलन किए जाने के बाद मौलवी ने ये बयान दिया। मुफ़्ती मौलाना उमैर ने कहा कि जामा मस्जिद का माहौल खराब न किया जाए, क्योंकि मस्जिद में राष्ट्रगान गाना हराम है।

मुफ़्ती उमैर शहर के इमाम-ए-ईदगाह के मौलाना हैं। वहीं ‘राज्य अल्पसंख्यक आयोग’ ने उनके बयान की निंदा करते हुए माफ़ी माँगने को कहा है। वहीं चैयरमैन असलम कुरैशी ने माँग की है कि न सिर्फ मुफ़्ती को पदच्युत किया जाए, बल्कि उनके खिलाफ ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA)’ के तहत मामला चलाया जाए। जामा मस्जिद के भीतर स्थित मदरसा-ए-औलिया में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर रविवार (15 अगस्त, 2021) को तिरंगा फहराया गया था।

अशफाक सैफी को इस अवसर पर मुख्य अतिथि बनाया गया था। उन्होंने झंडारोहण के बाद न सिर्फ जन-गण-मन का गायन किया, बल्कि ‘हिंदुस्तान ज़िंदाबाद’ के नारे भी लगाए गए। इसके बाद मुफ़्ती ने चेयरमैन को फोन कर के जन-गण-मन को हराम बताते हुए ‘मस्जिद का माहौल खराब’ न करने की हिदायत दी। उन्होंने कहा, “आप इस तरह से अल्लाह के कहर को दावत नहीं दीजिए। डरिए अल्लाह से, अल्लाह की पकड़ बहुत मजबूत है।”

‘दैनिक भास्कर’ की खबर के अनुसार, राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अशफाक सैफी ने कहा कि मुफ्ती का बयान निंदनीय है और उन्हें सार्वजनिक रूप से अपनी बात वापस लेते हुए माफी माँगनी चाहिए। वहीं जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के चेयरमैन असलम कुरैशी ने पूछा कि भारत का नहीं तो क्या पाकिस्तान का झंडा फहराया जाएगा? फ़िलहाल मुफ़्ती को इस पद से हटा दिया गया है।

मुफ्ती मौलाना उमैर ने कहा, “जब कोई मुझे वीडियो या फोटो दिखाकर किसी बात के जायज या हराम होने के बारे में पूछता है तो मैं उन्हें जवाब देता हूँ। पहले जामा मस्जिद के नीचे मैदान में हाई स्कूल में यह परेड वगैरह हुआ करती थी। अब इसे मस्जिद में कराया जा रहा है। हर काम के लिए उसकी एक खास जगह होती है। जामा मस्जिद में केवल अल्लाह की इबादत हो सकती है और किसी की नहीं।”

जैन शिकंजी के नाम पर बिक रही थी चिकन बिरयानी, विरोध करने पर श्रद्धालुओं पर हमला: शराफत, शहजाद, अरशद सहित 6 पर FIR

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में जैन मंदिर के बाहर ‘जैन शिकंजी’ का बैनर लगाकर चिकन बिरयानी बेचे जाने का मामला सामने आया है। इसे लेकर जैन तीर्थ यात्रियों द्वारा जब विरोध किया गया तो उनके साथ मारपीट की गई और उनकी बस को भी आग लगाने का प्रयास किया गया।

घटना बागपत जिले के खेकडा थाने के अंतर्गत बड़ागाँव की है। बड़ौत से कुछ जैन तीर्थयात्री बड़ागाँव स्थित जैन मंदिर आए हुए थे। रात में जब ये तीर्थ यात्री वापस जाने लगे तो उन्होंने मंदिर के बाहर ठेला लगाकर चिकन बिरयानी बेचे जाने का विरोध किया। रिपोर्ट्स में बताया गया कि जैन समुदाय के सदस्यों द्वारा विरोध किए जाने पर ठेले वाले ने अपने दर्जन भर साथियों को बुला लिया और तीर्थ यात्रियों की बस पर पथराव कर दिया। आरोपितों के हाथ में लाठी और डंडे थे, साथ ही उन्होंने बस को आग लगाने की कोशिश भी की।

इंस्पेक्टर एनएस सिरोही ने जानकारी दी कि मामले की जाँच की जा रही है और अभी तक 4 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक 6 आरोपितों शराफत, सोनू, शहजाद, अरशद, नदीम और नौशाद के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इन सभी आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 295-A, 323, 336, 307, 427, 436 और 511 के तहत केस दर्ज किया गया है।

ज्ञात हो कि रविवार (15 अगस्त 2021) को पार्श्वनाथ मंदिर में एक समारोह का आयोजन किया गया था जहाँ कई श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। रात लगभग 8 बजे एक व्यक्ति को मंदिर के सामने जैन शिकंजी का बैनर लगाकर चिकन बिरयानी बेचते हुए पकड़ा गया। इसके बाद जब जैन श्रद्धालुओं ने विरोध किया तो बिरयानी बेचने वाले ने अपने साथियों के साथ जैन श्रद्धालुओं पर हमला कर दिया।

‘7वीं शताब्दी में मुहम्मद, 21वीं सदी में तालिबान’: ‘जमीन कब्जाने वालों’ पर ट्वीट कर ‘मुनाफ़िक़ीन’ बनीं तस्लीमा नसरीन

बांग्लादेश की लेखिका तस्लीमा नसरीन ने अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद इस घटना पर टिप्पणी की है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “21वीं सदी में तालिबान ऐसे ही जमीन पर कब्ज़ा कर रहा है, जैसे 7वीं शताब्दी में मुहम्मद जमीन कब्जाते थे। ये हमारे आधुनिक समय में एक ‘मध्यकालीन युग’ है।” तस्लीमा नसरीन के इस ट्वीट के बाद कई इस्लामी कट्टरपंथी भड़क भी गए और इस ट्वीट से आक्रोश जताया।

उमर नाम के एक ट्विटर यूजर ने तस्लीमा नसरीन की ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “इसी ‘मध्यकालीन युग’ के लोगों ने 21वीं सदी की आधुनिक सेना को हरा दिया। आप कहना क्या चाहती हो?”

एसके मुजफ्फर नाम के ट्विटर यूजर ने लिखा, “देशद्रोही महिला दूसरों को ज्ञान दे रही है।”

युसूफज़ैन नाम के ट्विटर यूजर ने तस्लीमा नसरीन को ‘मुनाफ़िक़ीन (Hypocrote या दोहरे रवैये वाला)’ बताते हुए लिखा, “क़यामत तक तेरे जैसे कितने आएँगे लेकिन इस्लाम का कुछ बिगाड़ नहीं पाएँगे।”

बता दें कि कट्टरपंथियों के गुस्से के कारण तस्लीमा नसरीन को बांग्लादेश से निकाल दिया गया था, जिसके बाद से वो भारत में ही रहती आई हैं। हाल ही में उन्होंने 75वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर तिरंगे के साथ तस्वीर भी पोस्ट की थी। 1994 से ही बांग्लादेश से बाहर रह रहीं तस्लीमा नसरीन अपने उपन्यास ‘लज्जा’ को लेकर विख्यात है। कभी वो मेडिकल प्रोफेसर हुआ करती थीं। वो बुर्का सहित इस्लाम की कई कुरीतियों के खिलाफ आवाज़ उठाती रही हैं।

तस्लीमा नसरीन के बयानों पर इससे पहले भी इस्लामी कट्टरपंथी आक्रोशित होते रहे हैं। दिसंबर 2020 में उन्होंने आरोप लगाया था कि बांग्लादेश के मस्जिद-मदरसों में हर दिन बलात्कार होते हैं। उन्होंने लिखा था, “बांग्लादेश में रोजाना मस्जिद-मदरसे में बलात्कार हो रहे हैं। अल्लाह के नाम पर बलात्कार हो रहे हैं। मदरसे के बलात्कारी-शिक्षक, बलात्कारी-मस्जिद के इमामों का मानना है कि अगर वो पाँच वक्त की नमाज अदा करेंगे तो उनके गुनाह आजाद होंगे, क्योंकि अल्लाह माफ कर रहा है।”