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राजीव गाँधी की प्रतिमा पर पेट्रोल डालकर निहंग सिख ने लगाई आग, कॉन्ग्रेस नेता पग से साफ करते दिखे मूर्ति

लुधियाना में पीरू बांदा मोहल्ला के पास एक पब्लिक पार्क में बुधवार (जुलाई 7, 2021) को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की प्रतिमा में आग लगाने के मामले में एक निहंग सिख समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया गया।

घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आया। इसमें निहंग सिख रमनदीप सिंह अपने साथी सतपाल नवी के साथ प्रतिमा पर पेट्रोल डालते और आग लगाते नजर आ रहा है। अपनी वीडियो में रमनदीप ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर शहर में कहीं भी उन्हें राजीव गाँधी की प्रतिमा दिखी तो वो इसी तरह उसमें आग लगा देंगे।

बता दें कि निहंग सिख ने यह हरकत कॉन्ग्रेस नेता गुरसिमरन सिंह मंड की एक घोषणा के बाद की, जिसमें उन्होंने राजीव गाँधी की और मूर्तियाँ शहर भर में लगवाने का ऐलान किया था। रमनदीप अपनी वीडियो में कहते सुनाई पड़ रहे हैं, “हम राजीव गाँधी की मौजूदा प्रतिमाओं को बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं और वह (मंड) ऐसी और मूर्तियाँ और लगाने की बात कर रहा है… यह उसको जवाब है… राजीव गाँधी की हर प्रतिमा का यही हश्र होगा।”

सलेम तबरी थाना पुलिस ने इस मामले को आईपीसी की धारा आईपीसी की धारा 435 व 153ए, आईटी अधिनियम, संपत्ति अधिनियम के तहत दर्ज किया है। वहीं, कॉन्ग्रेस नेता मंड ने इस घटना के बाद भावुक होकर प्रशासन से आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। वीडियो में दिख रहा है कि मंड अपनी सिर पर बंधे पग से राजीव गाँधी के बुत को साफ कर रहे हैं और राजीव गाँधी अमर रहें के नारे लगा रहे हैं।

साभार: सुरखब टीवी की वीडियो

उल्लेखनीय है कि साल 2018 में भी एक ऐसी घटना सामने आई है। उस समय यूथ अकाली नेता अध्यक्ष गुरदीप गोशा और मीतपाल दुगरी ने राजीव गाँधी की इसी प्रतिमा पर कालिख पोत दी थी। इसके बाद कॉन्ग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हंगामा कर उन्हें गिरफ्तार करवाया था। उस समय गुरदीप गोशा का कहना था कि 1984 में हुए कत्लेआम के कारण उनकी ओर से यह कदम उठाया गया है।

सिंधिया को ‘उड़ान’ से पायलट की लैंडिंग के चर्चे: राजस्थान कैबिनेट में समर्थकों को जगह देने को गहलोत नहीं तैयार

जुलाई 2020 के बाद 2021 का जुलाई भी आ गया है। इस दौरान राजनीति में जो सवाल सबसे ज्यादा पूछा गया वह है कि सचिन पायलट कब कॉन्ग्रेस छोड़ेंगे? ज्योतिरादित्य सिंधिया के कॉन्ग्रेस छोड़ने के कुछ ही समय बाद उन्होंने भी बगावत का मूड दिखाया था। लेकिन बगावती तेवर दिखाने के बावजूद सिंधिया की तरह आखिरी फैसला नहीं कर पाए। अब एक बार फिर उसी सिंधिया को मोदी कैबिनेट में नागरिक उड्डयन मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलने के बाद पायलट के कॉन्ग्रेस छोड़ने को लेकर कयास तेज हो गए हैं।

पायलट ट्विटर पर ट्रेंड कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक उनके समर्थक विधायकों के बीच हलचल दिख रही है। जो संकेत मिल रहे हैं कि उससे लगता है कि इस बार आगे बढ़ने पर समर्थक शायद ही कदम पीछे खींचने को राजी हों। इसकी एक वजह कॉन्ग्रेस के राजस्थान प्रभारी अजय माकन के दौरे के बावजूद गहलोत और पायलट गुट के बीच सहमति नहीं बन पाना है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार सुलह के फॉर्मूले को लेकर माकन ने दो दिन तक गहलोत के साथ मंत्रिमंडल विस्तार, राजनीतिक नियुक्तियों और कॉन्ग्रेस संगठन में नियुक्तियों पर चर्चा की। लेकिन, गहलोत अपनी कैबिनेट में पायलट गुट को मनमाफिक जगह देने को तैयार नहीं हैं। वे विधायकों की संख्या के अनुपात में मंत्री बनाने का तर्क दे रहे हैं, जबकि पायलट ने बगावत ही ज्यादा प्रतिनिधित्व को लेकर की थी। कुछ रिपोर्टों में तो यहाँ तक कहा गया है कि पायलट समर्थकों को कैबिनेट में जगह देने से ही गहलोत ने साफ इनकार कर दिया है। वे संगठन में इस गुट को प्रतिनिधित्व देने को राजी बताए जा रहे हैं।

गौरतलब है कि 2018 में जब राजस्थान में कॉन्ग्रेस की सत्ता में वापसी हुई थी तो उसका श्रेय सचिन पायलट को दिया गया था। असल में 2013 में गहलोत के नेतृत्व में करारी शिकस्त के बाद पायलट को कॉन्ग्रेस ने केंद्रीय राजनीति से प्रदेश में भेजा था और बतौर प्रदेश अध्यक्ष उन्हें कमान दी थी। 2014 के आम चुनावों में कॉन्ग्रेस का खाता नहीं खुलने के बावजूद पायलट जमीन पर जुटे रहे और 2019 के विधानसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस को उनकी मेहनत का फल भी मिला। लेकिन मुख्यमंत्री चुनते वक्त उन्हें किनारे कर दिया गया। गहलोत कैबिनेट में उपमुख्यमंत्री का पद मिला पर शुरुआत से ही उन्हें और उनके समर्थकों को सरकार में उपेक्षा का दंश झेलना पड़ा। प्रियंका गाँधी से मुलाकात के बाद पायलट ने पिछली बार पैर पीछे खींच लिए थे और उसके बाद से वे सरकार तथा उनके समर्थक अलग-थलग पड़े हैं।

पिछले दिनों जब बीजेपी ने कॉन्ग्रेस से आए हिमंत बिस्वा सरमा को असम का मुख्यमंत्री बनाया था तब भी इसे पायलट के लिए संकेत के तौर पर देखा गया था। अब देखना यह है कि पायलट कॉन्ग्रेस के अपने पुराने साथी सिंधिया की तरह उड़ान भरने की हिम्मत जुटा पाते हैं या कॉन्ग्रेस के ओल्ड गार्ड के रहमोकरम तले मौका मिलने की अंतहीन उम्मीद के साए तले जीते रहेंगे।

किसानों के लिए ₹1 लाख करोड़, हेल्थ सेक्टर को ₹23,000 करोड़: PM मोदी की नई कैबिनेट की पहली बैठक, ये रहे बड़े फैसले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल के पहले मंत्रिमंडल विस्तार के अगले ही दिन यानी गुरुवार (8 जुलाई 2021) को कैबिनेट की पहली बैठक संपन्न हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली इस बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए, जिनके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। बैठक में कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े फैसले बेहद महत्वपूर्ण हैं। इसके तहत सरकार मंडी के माध्यम से किसानों तक एक लाख करोड़ रुपए पहुँचाएगी। इसके अलावा, सरकार ने 23,000 करोड़ के आपातकालीन स्वास्थ्य पैकेज का भी ऐलान किया है।

नवनियुक्त स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने बताया कि कोविड की दूसरी लहर के दौरान जो समस्याएँ आई थीं, उनको देखते हुए 23,000 करोड़ रुपए का नया पैकेज दिया गया है। इस पैकेज के तहत 15,000 करोड़ केंद्र सरकार खर्च करेगा, जबकि राज्यों को 8,000 करोड़ रुपए दिए जाएँगे।

उन्होंने बताया कि साल 2020 में कोरोना से निपटने के लिए सरकार ने 15,000 करोड़ रुपए का पैकेज दिया था। इसकी मदद से कोविड अस्पताल और कोविड केयर सेंटर खोले गए। उन्होंने बताया कि इस फंड से कोविड डेडिकेटेड अस्पताल, कोविड केयर सेंटर और ऑक्सीजन बेड स्थापित किए गए। इस समय देश में 4,389 कोविड डेडिकेटेड अस्पताल, 10,000 कोविड केयर सेंटर और 4 लाख से अधिक ऑक्सीजन बेड हैं। उन्होंने बताया कि पहले कोविड डेडिकेटेड अस्पताल 163 थे, जबकि कोविड केयर सेंटर एक भी नहीं थे।

वहीं, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि मंडियों माध्यम से एक लाख करोड़ रुपए किसानों तक पहुँचाए जाएँगे। साथ ही नारियल की खेती करने वाले किसानों के फायदे के लिए नारियल एक्ट में संशोधन किया गया है और जल्द ही नारियल बोर्ड बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के लिए राज्य सरकार और सहकारिता संस्थान, स्वयं-सहायता समूह और APMC भी पात्र होंगे।

कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए कृषि स्टार्टअप और किसान समूहों को 2 करोड़ रुपए तक का ऋण दिया जाएगा। इस ऋण पर 3% ब्याज की छूट दी जाएगी। उन्होंने बताया कि कोई भी अलग-अलग इलाकों में स्थित कोई प्रोजेक्ट लाता है तो उसे 2 करोड़ रुपए का अलग-अलग लोन दिया जाएगा और ब्याज की छूट मिलेगी।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कैबिनेट में बड़ा बदलाव करते हुए कई चेहरों को मौका दिया है, इनमें मनसुख मांडविया भी शामिल हैं। नए मंत्रिमंडल में 43 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई है। वहीं, अगर राज्य के आधार पर बात करें तो उत्तर प्रदेश से सबसे ज्यादा 7 और फिर गुजरात से 3 मंत्रियों को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है।

गाड़ी चोर शौकत अली और मोहम्मद जुबैर गिरफ्तार, फोन में मिली ड्रोन, ब्लास्ट और हत्या की तस्वीरें: आतंकी लिंक पर होगी जाँच

दिल्ली पुलिस ने रविवार (4 जुलाई, 2021) को दो कार चोरों को पकड़ा था। पूछताछ में इनकी पहचान 25 साल के शौकत अहमद मल्ला और 22 साल के मोहम्मद जुबैर के तौर पर हुई थी। इनमें शौकत कश्मीर के बारामुला का रहने वाला निकला जबकि जुबैर यूपी के शामली का निवासी पता चला। पुलिस इन्हें हिरासत में लेकर अपनी पूछताछ कर रही थी कि मामले में ‘आतंकी’ एंगल आ गया।

पुलिस की पड़ताल ने ये शक गहरे कर दिए हैं कि इन दोनों चोरों के आतंकी लिंक हो सकते हैं। प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार, पड़ताल में पुलिस ने इनके फोन से ड्रोन की तस्वीरें व कई आतंकियों की तस्वीरें बरामद की हैं। फोन की छानबीन में बम ब्लास्ट और हत्या की वीडियो भी हैं।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, “जम्मू-कश्मीर का रहने वाले शौकत अहमद जून से अब तक 6 बार दिल्ली की यात्रा कर चुका है। उसके फोन से सर्विलांस ड्रोन की तस्वीरें बरामद की गई हैं, जिनका इस्तेमाल फोटोग्राफी के लिए भी किया जाता है। इसके अलावा, आतंकवादियों और आतंकी हमलों के फोटो और वीडियो भी मिले हैं। IB इन हरे जैकेट में नजर आने वाले आतंकियों की डिटेल चेक कर रही है जो वीडियो में साफ दिख रहे हैं।”

इसके अलावा शौकत के हाथ पर पुलिस को कुछ जलने के निशान मिले हैं और फोन में एक आतंकी द्वारा मारे गए पुलिसकर्मी की तस्वीर मिली हैं। शौकत बता रहा है कि उसका हाथ खाना बनाने के दौरान जला जबकि तस्वीरें जो मिली है वॉट्सएप पर फॉरवर्ड की गई थी।

आरोपितों के पास से बरामद चीजों ने उन पर पुलिस का संदेह बढ़ा दिया है। पुलिस का शक है कि इनका मकसद शायद स्वतंत्रता दिवस से पहले किसी आतंकी घटना को अंजाम देने का था। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी कहते हैं, “चूँकि शुरुआती जाँच के दौरान उनके मोबाइल फोन से जैसे डेटा की बरामदगी हुई है। उससे मामले में संभावित आतंकी एंगल पता चल रहा है। इसलिए हमने राजधानी क्षेत्र में गश्त और निगरानी बढ़ा दी है और सभी जिलों को स्वतंत्रता दिवस से पहले सतर्क कर दिया गया है।”

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक आईबी और श्रीनगर पुलिस की सीआईडी यूनिट इनसे दिल्ली आकर पूछताछ करेगी। एक अधिकारी का कहना है कि अभी स्पष्ट नहीं कहा जा सकता कि मामला आतंकी गतिविधियों से जुड़ा है। दोनों से उनके कॉन्टैक्ट पूछे जा रहे हैं। जानकारी वेरीफाई होगी। माना जा रहा है गैंग के अन्य मेंबर हैं जो घाटी में छिपे हैं। पुलिस ने बताया है कि उनकी पड़ताल के बाद बारामुला निवासी वसीम शेख की तलाश चल रही है। वह कई बार दिल्ली आ चुका है और कश्मीर कार ले जाता था। शौकत ने उसी से ये धंधा सीखा था। जम्मू कश्मीर पुलिस की सहायता से उसे पकड़ने के प्रयास हो रहे हैं।

आरोपित शौकत कश्मीर में राज्य सरकार के लिए सिविल कॉन्ट्रैक्टर का भी काम करता है। रिपोर्ट बताती है कि दोनों आरोपित  जिस गैंग से जुड़े हैं उन्होंने कश्मीर घाटी में 100 गाड़ियों को बेचा है। शौकत कथित तौर पर दिल्ली फ्लाइट से आता था और वाहनों को कश्मीर के बारामूला जिले के सोपोर ले जाता, जहाँ से उन्हें अन्य स्थानों पर भेजा गया। मामले में पुलिस ये भी बताया शौकत और जुबेर को रिंकू से वाहन मिलते थे। फिर ये इंजन नंबर और पंजीकरण प्लेट को बदलते थे। इन दोनों संदिग्धों के पास से कम से कम 100 रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट और 150 डुप्लीकेट कार की चाबियाँ बरामद हुई हैं। 

मुस्लिम महिलाओं की फोटो नीलामी का मामला: दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने दर्ज की ‘सुल्ली डील’ के खिलाफ FIR

मुस्लिम महिलाओं की फोटो चुराने और इंटरनेट पर उन्हें नीलामी के लिए रखने के मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एफआईआर दर्ज की है। यह एफआईआर विवादित मोबाइल एप्लीकेशन ‘सुल्ली डील’ के खिलाफ दर्ज की गई है, जहाँ मुस्लिम महिलाओं की फोटो का इस्तेमाल बिना उनकी जानकारी के किया जा रहा था। अब इस मामले में जाँच की जाएगी।

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने बताया कि नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर सुल्ली डील मोबाइल एप्लीकेशन के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई थी। इसके बाद जाँच शुरू हुई और कार्रवाई की गई। इस मामले में होस्टिंग प्लेटफॉर्म गिटहब को भो नोटिस भेजा गया है। सुल्ली डील नाम का यह मोबाइल एप्लीकेशन गिटहब नामक होस्टिंग प्लेटफ़ॉर्म पर बनाया गया था।

इसके अलावा, राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भी इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस को कार्रवाई के लिए कहा। NCW की चेयरपर्सन रेखा शर्मा ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को इस मामले में जाँच करने और एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा। NCW के द्वारा यह कहा गया है कि मुस्लिम महिलाओं की फोटो को नीलामी के लिए उपयोग करने के इस मामले में उपयुक्त धाराओं में एफआईआर दर्ज की जाए ताकि दोषियों को कड़ी सजा मिल सके। साथ ही NCW ने 10 दिन के अंदर इस मामले में की गई कार्रवाई की सूचना आयोग को दिए जाने का आदेश दिया है। NCW के द्वारा लिखे गए पत्र की एक कॉपी दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट के डीसीपी को भी भेजी गई है।

राष्ट्रीय महिला आयोग के द्वारा लिखा गया पत्र

बीते रविवार को ओपन सोर्स प्लेटफ़ॉर्म पर सुल्ली डील नाम का एक मोबाइल एप्लीकेशन बनाया गया। इस एप्लीकेशन में सोशल मीडिया से कई मुस्लिम महिलाओं की फोटोज को उठाया गया और उन्हें मोबाइल एप्लीकेशन पर अपलोड किया गया। इस एप्लीकेशन में इन सभी मुस्लिम महिलाओं की तस्वीरों, उनके नाम और उनके ट्विटर हैन्डल की जानकारी दी गई थी। एप्लीकेशन में दिए गए लिंक पर क्लिक करने के बाद इन महिलाओं की सारी जानकारी क्लिक करने वाले यूजर के साथ साझा की जा रही थी। यह भी कहा जा रहा है कि अपनी फोटो वायरल होने के बाद की महिलाओं को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म छोड़ना पड़ा।

‘नारायणन को फँसाने से क्रायोजेनिक तकनीक में हुई देरी’: साजिशकर्ता केरल के अधिकारियों की बेल का CBI ने किया विरोध

केन्द्रीय जांच एजेंसी (CBI) ने बुधवार (07 जुलाई 2021) को केरल हाईकोर्ट में पूर्व ISRO वैज्ञानिक नम्बी नारायणन की जासूसी और उन्हें साजिशन गिरफ्तार करने के आरोपित केरल पुलिस के दो अधिकारियों की जमानत याचिका का विरोध किया है। साथ ही CBI ने यह भी कहा है कि नारायणन को ‘मनगढ़ंत मामले’ में फँसाए जाने के कारण भारत में क्रायोजेनिक तकनीकी के विकास में देरी देखने को मिली।

CBI ने केरल हाईकोर्ट में जानकारी दी कि यह एक राष्ट्रीय महत्व का विषय है और नम्बी नारायणन के खिलाफ जो साजिश रची गई, उसमें इन दोनों आरोपितों का बड़ा हाथ रहा। इन दोनों आरोपितों समेत अन्य अज्ञात आरोपितों द्वारा किया गया अपराध गंभीर प्रकृति का है। CBI ने यह भी कहा कि तत्कालीन वैज्ञानिक नम्बी नारायणन के खिलाफ लगाए गए देशद्रोह के आरोपों, उनके उत्पीड़न और उनके खिलाफ की गई जासूसी साजिश के चलते ही देश में क्रायोजेनिक तकनीकी के विकास में देरी हुई।

आपको बता दें कि केरल पुलिस के रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों एस. विजयन और थम्पी एस. दुर्गा दत्त द्वारा केरल हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी। दोनों ही उस विशेष जाँच टीम (SIT) के सदस्य थे, जिसने ISRO वैज्ञानिक नम्बी नारायणन को गिरफ्तार किया था।

इसके अलावा, वैज्ञानिक के खिलाफ साजिश के मामले में आरोपित केरल के पूर्व डीजीपी सिबी मैथ्यूज ने यह खुलासा किया कि इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के दबाव के कारण ही उन्होंने और केरल पुलिस के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने 1994 के जासूसी मामले में नारायणन की गिरफ़्तारी की थी। मैथ्यूज ने अपनी जमानत याचिका में कहा कि रिसर्च एण्ड एनालिसिस विंग (RAW) और IB ऐसे राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में अधिक सक्रिय होते हैं और पुलिस को इन मामलों में इन्हीं सुरक्षा एजेंसियों द्वारा दी गई सूचनाओं पर निर्भर रहना पड़ता है और कार्रवाई करनी पड़ती है।

हालाँकि खुद नारायणन ने मैथ्यूज की जमानत याचिका का विरोध किया और जिला सेशन कोर्ट में याचिका दाखिल की। नारायणन ने मैथ्यूज की जमानत याचिका का यह कहते हुए विरोध किया कि उनके खिलाफ की गई साजिश के कारण उनका पूरा कैरियर बर्बाद हो गया था। मैथ्यूज उन आरोपितों में से एक हैं, जिन्हें CBI ने नारायणन के खिलाफ साजिश रचने का दोषी पाया है।

ज्ञात हो कि 15 अप्रैल 2021 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केरल के वैज्ञानिक नम्बी नारायणन पर 1994 में लगे देशद्रोह के आरोप और उसके बाद हुई उनकी प्रताड़ना के मामले में CBI ने जाँच शुरू की थी और जाँच के लिए एक 3 सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। CBI ने इस मामले में 18 लोगों को आरोपित बनाया था। इनमें केरल पुलिस के रिटायर्ड पुलिस अधिकारी एस. विजयन, थम्पी एस. दुर्गा दत्त और केरल के पूर्व डीजीपी सिबी मैथ्यूज भी शामिल हैं। इन सब के खिलाफ आपराधिक षड्यन्त्र रचने, अपहरण और साक्ष्यों को मिटाने जैसे अपराधों में आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

ISRO वैज्ञानिक नम्बी नारायणन की गिरफ़्तारी:

1994 में ISRO वैज्ञानिक नम्बी नारायणन को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और उन पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने ISRO में कुछ संपर्कों के जरिए पाकिस्तान को भारतीय रॉकेट तकनीक की बारीकियाँ सप्लाई की हैं। नारायणन के अलावा मालदीव्स की दो महिलाओं मरियम रशीदा और फौजिया हुसैन को भी गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में मालदीव की दोनों महिलाओं और भारत के 2 वैज्ञानिकों पर गुप्त दस्तावेजों को विदेश भेजे जाने का आरोप लगा था।

बाद में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हिरासत में लिए जाने के बाद उन्हें जिस ‘कुटिल घृणा’ का सामना करना पड़ा, उसके लिए केरल के बड़े पुलिस अधिकारी जिम्मेदार थे और इस मामले में CBI को जाँच का आदेश दिया गया था। हालाँकि कई साल पहले 1996-97 में ही CBI ने पाया था कि इस मामले की जाँच करने वाले केरल पुलिस के अधिकारियों ने ही सारी गड़बड़ी की है। CBI ने उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए भी केरल सरकार को लिखा था। CPI (M) के ईके नायनार तब केरल के मुख्यमंत्री थे। वामपंथी सरकार ने उन अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के इंतजार का बहाना बनाया।

‘बीइंग ह्यूमन’ ने दिया धोखा , चंडीगढ़ पुलिस ने सलमान खान और बहन अलवीरा को भेजा समन, 10 दिन में देना होगा जवाब

बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान (Salman khan) और उनकी बहन अलवीरा खान के ख़िलाफ़ चंडीगढ़ के एक व्यापारी ने धोखाधड़ी का केस दर्ज करवाया है। व्यापारी ने चंडीगढ़ पुलिस को अपनी शिकायत देते हुए कहा कि सलमान की कंपनी बीइंग ह्यूमन (Being Human) से लिखित में एग्रीमेंट होने के बावजूद उनकी कंप्लेन पर सुनवाई नहीं हुई।

व्यापारी की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने इस संबंध में सलमान खान, उनकी बहन अलवीरा खान और बीइंग ह्यूमन के कई अधिकारियों को समन भेजकर 10 दिन के भीतर जवाब तलब किया है। व्यापारी अरुण गुप्ता के मुताबिक बीइंग ह्यूमन ने उनसे चंडीगढ़ के मनीमाजरा में तीन करोड़ रुपए की लागत से शोरूम खुलवाया लेकिन बाद में उनको सामान नहीं भेजा गया। इस बीच कंपनी की वेबसाइट भी लंबे समय बंद पड़ी मिली।

धोखाधड़ी का केस लिखवाते हुए उन्होंने बताया कि जब भी उन्होंने सामान न मिलने पर शिकायत की, उन्हें कंपनी की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। उनके मुताबिक बीइंग ह्यूमन से उनका लिखित में एग्रीमेंट है। इसके अलावा उन्होंने पुलिस को बिग बॉस का एक वीडियो भी दिया है जिसमें खुद सलमान कह रहे हैं कि उन्होंने चंडीगढ़ में बीइंग ह्यूमन जूलरी का शोरूम खोला है।

बता दें कि बीइंग ह्यूमन जूलरी ब्रांड को स्टाइल क्विटेंट जूलरी प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक कंपनी चलाती है और उनके शोरूम में सारे प्रोडक्ट भी बीइंग ह्यूमन ब्रांड के ही हैं। अरुण गुप्ता ने तस्वीर के तौर पर पुलिस के सामने अपने परिवार के साथ सलमान खान की तस्वीरें भी दिखाई। साथ ही बताया कि सलमान खान के भरोसे पर ही उन्होंने इतना भारी-भरकम 3 करोड़ रुपए का निवेश किया और साल 2018 में चंडीगढ़ में ये शोरूम खोला गया।

सलमान खान के साथ व्यवसाई अरुण गुप्ता (तस्वीर साभार-TV 9)

वह बताते हैं कि शोरूम की ओपनिंग पर सलमान खान को खुद आना था, लेकिन वो व्यस्त होने के कारण नहीं आ सके और अपने जीजा आयुष शर्मा को अपनी जगह ओपनिंग पर भेजा था। मगर अब जिस कंपनी स्टाइल क्विटेंट जूलरी प्राइवेट लिमिटेड के पास बीइंग ह्यूमन जूलरी ब्रांड का पूरा कामकाज है, उसने अपने तमाम दफ्तर और वेबसाइट बंद कर रखे हैं।

वहीं व्यापारी का दावा है कि उनको फ्रेंचाइजी देते हुए कंपनी की और से वादा किया गया था कि तमाम जूलरी का सामान कंपनी की ओर से मुहैया करवाया जाएगा। साथ ही लगातार बिजनेस को प्रमोट करने के लिए भी पूरी मदद की जाएगी, लेकिन अब ऐसा बिल्कुल नहीं हो रहा।

‘जिसको डायरी में लिखना हो वह लिख ले’: नए हेल्थ मिनिस्टिर मनसुख मांडविया, 9 साल पहले ही मोदी ने कर दिया था बड़ा ऐलान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (7 जुलाई 2021) को अपने कैबिनेट का विस्तार किया। 43 लोगों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई थी। इनमें कुछेक नाम ऐसे भी थे जिनको कैबिनेट मंत्री के तौर पर प्रमोशन मिला है। इनमें से एक नाम मनसुख मांडविया का भी है। उन्हें स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया है।

कैबिनेट विस्तार से पहले 12 मंत्रियों ने इस्तीफा दिया था। इनमें स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन भी थे। इसके बाद से उनकी जगह लेने वाले नाम को लेकर उत्सुकता बनी हुई थी। खासकर कोरोना की तीसरी लहर को लेकर जताई जा रही आशंकाओं के मद्देनजर। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात से राज्यसभा सांसद मांडविया पर भरोसा जताया है।

49 साल के मांडविया पर प्रधानमंत्री का भरोसा नया नहीं है। सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है जिससे साफ है कि मांडविया तब से ही उनके गुड लिस्ट में थे, जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे।

यह वीडियो 2012 का बताया जा रहा है। वीडियो मांडविया के सम्मान में सूरत में आयोजित एक कार्यक्रम का है। उनके राज्यसभा के लिए पहली बार चुने जाने के बाद यह कार्यक्रम हुआ था। इसमें तत्कालीन मोदी उनके भविष्य को लेकर बातें करते हुए इतने आश्वस्त हैं कि लोगों से अपनी बात डायरी में नोट कर लेने तक को कह रहे हैं।

सोशल मीडिया में इस कार्यक्रम का जो क्लिप शेयर किया गया है उसमें मोदी गुजराती में कह रहे हैं, “आपको शायद लग रहा होगा, अपने मनसुख भाई राज्यसभा में गए, सम्मान है, चलिए हो आएँ। मित्रो यह घटना इतनी छोटी नहीं है। आज की तारीख और 9:35 को मैं यह बोल रहा हूँ जिसको डायरी में लिखना हो वह लिख ले। मित्रो मैं स्पष्ट देख रहा हूँ मनसुख भाई का भविष्य कितना उज्ज्वल है। यह मुझे साफ दिख रहा है। उनमें रही शक्तियाँ आनेवाले कल को कैसे सँवारने वाली है उसका मुझे पूरा भरोसा है दोस्तों। मुझे विश्वास है मैं सच्चा साबित होऊँगा।”

गौरतलब है कि मांडविया 2002 में पहली बार विधायक बने थे। तब उनकी उम्र केवल 28 साल थी और वह सबसे कम उम्र के विधायक थे। 2012 में वह राज्यसभा के लिए चुने गए। 2018 में उन्हें दोबारा संसद के उच्च सदन में भेजा गया। 2019 में मोदी ने उन्हें राज्य मंत्री बनाते हुए बंदरगाह, पोत, जलमार्ग परिवहन के साथ साथ रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी दी थी।

हॉरर फिल्मों के ‘सरताज’ कुमार रामसे का निधन: 85 साल की उम्र में पड़ा दिल का दौरा

बॉलीवुड के सुपरस्टार दिलीप कुमार के इंतकाल के बाद गुरुवार (8 जुलाई 2021) को बॉलीवुड इंडस्ट्री के मशहूर निर्माता-निर्देशक कुमार रामसे का निधन हो गया। दिल का दौरा पड़ने के कारण 85 वर्षीय कुमार ने आज सुबह आखिरी साँस ली। कुमार रामसे के भतीजे अमित रामसे के मुताबिक, “उनको गुरुवार सुबह करीब 5:30 बजे दिल का तेज दौरा पड़ा और उन्होंने हीरानंदानी स्थित अपने घर पर ही अंतिम साँस ली।”

बता दें कि 70 और 80 के दशक में हॉरर फिल्मों का सरताज रामसे ब्रदर्स (कुमार, तुलसी, श्याम, केशू, किरण, गंगू और अर्जुन) को माना जाता था। सात भाइयों में कुमार सबसे बड़े थे। वे अधिकांशत: फिल्मों की स्क्रिप्टिंग का काम करते थे। पुराना मंदिर, साया, खोज जैसी फिल्मों में उनका काम देखते बनता है। 

कुमार के दो छोटे भाइयों, तुलसी का 2018 में और श्याम रामसे का 2019 में देहांत हो गया था। इसके बाद तीसरे भाई अर्जुन, जिनके जिम्मे पोस्ट प्रोडक्शन का काम और एडिटिंग का जिम्मा आता था उनकी मृत्यु भी 2019 में हो गई थी। किरण रामसे जो साउंड डिपार्टमेंट देखते थे उनका निधन 2017 में हुआ था, जबकि केशू रामसे ने अपनी आखिरी साँस 2010 में ली थी।

जानकारी के मुताबिक, जीवन के आखिरी दिनों में कुमार अपने बीवी बच्चों के साथ रह रहे थे। उनके साथ उनकी पत्नी शीला और तीन लड़के राज, गोपाल, सुनील थे। बतौर निर्देशक और निर्माता उन्होंने कई फिल्में लिखीं, साथ ही उनका निर्देशन भी किया। अंधेरा, दरवाजा, और कौन, सबूत, गेस्ट हाउस, दहशत, पुराना मंदिर, टेलीफोन, सामरी, डाक बंगला, साया और खोज फिल्मों की स्क्रिप्ट उन्होंने ही लिखी थी।

रामसे ब्रदर्स की जीवनी ‘डोंट डिस्टर्ब द डेड: द स्टोरी ऑफ़ द रामसे ब्रदर्स’ के अनुसार, 1947 में विभाजन के बाद उनका परिवार मुंबई आया था। मुंबई आने के बाद उनके पिता एफयू रामसे ने एक इलेक्ट्रॉनिक दुकान खोली थी, लेकिन बाद में वह फिल्मों की ओर मुड़ गए। सिनेमा जगत में सातों भाइयों ने अपने पिता के नक्शे-कदम पर चलते हुए फिल्में बनाना शुरू किया और एक दौर ऐसा आया जब कम बजट में कल्ट और उस समय के मुताबिक जबरदस्त हॉरर फिल्में रामसे भाइयों ने बॉलीवुड को दीं।

आज कुमार रामसे के जाने से बॉलावुड में एक बार फिर शोक पसर गया है। अभी कल ही दिलीप कुमार का लंबे समय तक बीमार रहने के बाद निधन हुआ था। दिलीप कुमार को पिछले 1 महीने में 2 बार अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 5 जुलाई 2021 को उनके आधिकारिक ट्विटर हैंडल से जारी किए गए अपडेट में उनकी पत्नी सायरा बानो ने बताया था कि उनकी हालत में सुधार हो रहा है, लेकिन कल मालूम चला कि हिंदुजा अस्पताल में उनका निधन हो गया।

लालू पाठ के बाद अब IIM में शैलजा मॉडल: केरल में न कोरोना पर पाया जा सका काबू-न बची कुर्सी, फिर भी शोर भरपूर

केरल की भूतपूर्व स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा आगामी 10 जुलाई को कोरोना संक्रमण की रोकथाम पर भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) बेंगलुरु के छात्रों के सामने एक लेक्चर देंगी। एक ट्वीट में आईआईएम बेंगलुरु ने बताया है कि संस्था की ओर से सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी ने फाउंडेशन डे लेक्चर सीरीज में केके शैलजा को छात्रों के सामने सफलतापूर्वक कोविड नियंत्रण के उनके तरीके और अनुभव की बात करने के लिए चुना है। यह चुनाव तब हुआ है जब केरल में कोरोना संक्रमण रुकने का नाम नहीं ले रहा और राज्य पिछले एक वर्ष में कोरोना से बुरी तरह प्रभावित राज्यों की सूची में महाराष्ट्र के साथ सबसे ऊपर है और यह अव्यवस्था राज्य के लिए महँगी पड़ती दिखाई दे रही है।

कोरोना की पहली लहर के समय से ही केके शैलजा की तथाकथित सफलता को लेफ्ट लिबरल ग्रुपों द्वारा खूब फैलाया गया। इसका यह असर हुआ कि उनकी चर्चा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हुई और उन्हें कुछ पुरस्कारों के लिए भी चुना गया। पर आश्चर्य की बात यह रही कि इतनी सफल स्वास्थ्य मंत्री को राज्य के मंत्रियों की नई सूची में जगह नहीं मिली। यहाँ कई प्रश्न उठते हैं पर उनमें से दो महत्वपूर्ण प्रश्न यह हैं कि यदि कोरोना संक्रमण पर काबू पाने का उनका मॉडल सचमुच सफल था तो केरल कोरोना की पहली लहर पर भी काबू क्यों नहीं कर सका और दूसरा प्रश्न यह है कि यदि उनका यह मॉडल कारगर था तो फिर स्वास्थ्य मंत्री के रूप में उन्हें मंत्रिमंडल में बरकरार क्यों नहीं रखा गया?

ऐसा नहीं है कि कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण की केके शैलजा की ‘सफलता’ पर प्रश्न पहले नहीं उठाए गए हैं पर तब ये प्रश्न मूलतः ऐसे लोगों द्वारा उठाए गए थे जिनके हर सवाल को ‘संघी है’ कहकर टाल दिया जाता है। मजे की बात यह कि इधर केरल में फैलते संक्रमण को लेकर सवाल उठते रहे और उधर शैलजा की ‘सफलता’ का प्रोपेगेंडा जोर पकड़ता गया। इस चर्चा का आलम यह था कि लोगों के प्रश्नों को नजरअंदाज कर ब्रिटेन की एक पत्रिका ने उन्हें साल 2020 के Top Thinkers की सूची में जगह दी। इसी तरह हाल में ही जॉर्ज सोरोस फंडेड एक विश्वविद्यालय ने शैलजा को सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति समर्पण के लिए पुरस्कृत किया।

प्रश्न यह है कि शैलजा का ऐसा कौन सा मॉडल है जो सफल भी रहा और संक्रमण भी नहीं रोक सका? मॉडल में ऐसा क्या है जिसे उस पर प्रश्न उठाने वाले समझ नहीं सकते? प्रश्न यह भी उठता है कि संक्रमण रोकने के जिस मॉडल को सफल बताया जा रहा है और जिसके लिए शैलजा को पुरस्कृत किया जा रहा है, उस मॉडल को और किसी राज्य ने क्यों नहीं अपनाया? शैलजा के मौलिक मॉडल की सफलता आखिर में इसी बात से आँकी जाएगी कि उसका प्रयोग और कितने राज्यों की सरकारों ने किया? यदि यह मॉडल इतना ही कारगर था तो वह जिस राज्य में सबसे पहले प्रयोग में लाया गया उसमें संक्रमण क्यों नहीं रुका और जिन राज्यों ने इसे नहीं अपनाया, वहाँ संक्रमण पर काबू कैसे पाया गया? ये ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर मिलना चाहिए।

आईआईएम जैसी संस्थाओं में ‘सफलता’ के ऐसे लेक्चर की डिलीवरी की बात नई नहीं है। भूतपूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद द्वारा रेलवे की क्षमता को बढ़ाने और उसे घाटे से उबारने की भी एक गाथा लिखी गई थी, जिसका पाठ करने लालू आईआईएम अहमदाबाद गए थे। इस बात की चर्चा भी देश-विदेश में हुई थी। साथ ही लालू अपने प्रबंधन क्षमता के साथ अपने आईआईएम लेक्चर की बात जगह-जगह करते पाए गए थे। यह अलग बात है कि उनकी इस तथाकथित सफलता की सच्चाई उभरते देर नहीं लगी।

देश में विचारधारा केंद्रित विमर्श का यह हाल है कि जब वाम के विरोधी विचारधारा का कोई विद्वान कुछ कहता या करता है तो उसके काम को बिना किसी मूल्यांकन के सीधा ठुकरा दिया जाता है। दूसरी तरफ वाम बुद्धिजीवियों, नेताओं, मंत्रियों या अर्थशास्त्रियों के प्रबंधन का कोई मॉडल हो, आर्थिक मॉडल हो या व्यक्तिगत सफलता की कहानी, इन पर उठने वाले हर प्रश्न को नकार कर उसे सेलिब्रेट करने की लेफ्ट लिबरल मीडिया और इकोसिस्टम की संस्कृति पुरानी हो चुकी है।

पर आईआईएम जैसे विश्व प्रसिद्ध संस्थान की क्या मजबूरी है कि वे ‘सफलता’ की इस कहानी को एक तरह की वैधता प्रदान करें? इतने बड़े संस्थान के लिए यह देखना आवश्यक क्यों नहीं कि केके शैलजा के इस मॉडल पर उठने वाले प्रश्नों को बिना किसी तर्क या बिना किसी उत्तर के नकार दिया जाता रहा है? यह ऐसा प्रश्न है जिस पर केवल आईआईएम ही नहीं, बल्कि देश के संस्थानों और प्रबुद्ध नागरिकों को विचार करने की आवश्यकता है।