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15 Km का वीरान रेगिस्तानी रास्ता और 45°C तापमान… 5 साल की बच्ची ने प्यास से दम तोड़ा, पास में ही बेसुध मिली नानी

राजस्थान में पानी न मिलने के कारण एक बच्ची की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद विपक्षी नेताओं ने राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार पर हमला बोला है। ये बच्ची सिरोही के रायपुर से जालौर के डूंगरी के लिए अपनी 60 साल की नानी के साथ पैदल ही चली थी। नानी भी बेसुध अवस्था में मिली है। इन दोनों ने 22 किलोमीटर का सड़क मार्ग छोड़ कर 15 किलोमीटर का एक शॉर्टकट चुना था, जो वीरान था।

सफर में पानी भी नहीं मिला और ये छाँव के लिए भी तरसते रहे। एक चरवाहे ने मदद से इनकार कर दिया। हालाँकि, जहाँ बच्ची की मौत हुई उससे 1 किलोमीटर दूर की कृषि कुएँ थे और आबादी भी थी। ये घटना रानीवाड़ा के वीरान रेगिस्तानी क्षेत्र की है। मासूम बच्ची का नाम अंजनी था और उसकी नानी का नाम सुखी देवी। ये परिवार भील समुदाय से ताल्लुक रखता है। पुलिस ने 9 घंटे बाद सुखी देवी को रेस्क्यू किया, जिसके बाद रानीवाड़ा अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।

ये घटना रविवार (जून 6, 2021) की ही है, लेकिन अगले दिन इसकी जानकारी सामने आई। सुखी देवी अपने मौके में रहती थी और देखभाल के लिए कभी-कभी ससुराल जाया करती थी। इसी क्रम में वो रायपुर से डूंगरी के लिए निकली थी। बच्ची की माँ ‘नाता विवाह (किसी विवाहित स्त्री/पुरुष का किसी अन्य पार्टनर के साथ लिव-इन में रहना)’ कर चुकी है। बच्ची को वो नानी के पास ही छोड़ गई थी।

‘दैनिक भास्कर’ अख़बार में प्रकाशित खबर के अनुसार, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला है कि दोनों को डिहाइड्रेशन हो गया था और अंजलि का बीपी कम होने के कारण उसे हार्ट अटैक आ गया। बुजुर्ग महिला को रेस्क्यू करने में देरी होती तो उनकी भी जान जा सकती थी। सुखी देवी भी अपने जीवन की आस छोड़ चुकी थीं, लेकिन रायपुर के सरपंच और रानीवाड़ा थानाधिकारी वहाँ पानी लेकर पहुँचे, जिसके बाद उनकी जान में जान आई।

कहा जा रहा है कि लॉकडाउन के कारण आने-जाने के साधन जल्दी नहीं मिल रहे हैं, इस कारण इन्होंने शॉर्टकट रास्ता चुना था। जिस रास्ते से ये दोनों निकली थीं, वो रेतीला धोरों वाला वीरान रास्ता है और इसके उस पार सुंधा माता का सुनसान पहाड़ी क्षेत्र है। दोपहर 1 बजे तक ये दोनों 7 किलोमीटर पैदल चल चुकी थीं। पारा 45 डिग्री सेल्सियस पहुँच गया था। दोनों ने संभवतः खाना नहीं खाया था और भूखे पेट थीं।

राजस्थान में पानी न मिलने से बच्ची की मौत, नानी बेसुध मिलीं (साभार: दैनिक भास्कर)

सबसे बड़ी चूक तो ये कि उन्होंने पीने के लिए साथ में पानी नहीं रखा था, जो लम्बे सफर के लिए आवश्यक होता है। रास्ते में इक्का-दुका झाड़ियाँ तो हैं, लेकिन वो छाँव देने लायक नहीं। ऐसे में दोनों बस एक किलोमीटर आगे तक जा पातीं, तो ये घटना टल सकती थी। लेकिन, दोनों पहले ही निढाल होक गिर पड़ीं। रास्ते में एक चरवाहे ने मिन्नतों के बावजूद एक घूँट भी पानी नहीं पिलाया। आगे जाते-जाते रोड़ा गाँव में 5 वर्षीय बच्ची की मौत हो गई।

केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस घटना के लिए गाँधी परिवार पर हमला बोलते हुए कहा कि इसके लिए राजस्थान सरकार ज़िम्मेदार है। उन्होंने पूछा कि सोनिया, राहुल और प्रियंका अब चुप क्यों हैं? राजस्थान भाजपा ने कहा, “इस निर्दोष को प्यास ने नहीं… उस नकारी गहलोत सरकार ने मार डाला जो जिसने अपनी निम्न स्तरीय राजनीति के चलते राज्य को भूख, प्यास, अपराध, बेरोजगारी और माफियाओं की जमीन में बदल दिया। शर्म करो गहलोत जी, गरीबों और ज़रूरतमंदों की सुध लो!”

महात्मा गाँधी की परपोती फ्रॉड की दोषी, दक्षिण अफ्रीका में 7 साल कैद की सजा

महात्मा गाँधी की परपोती आशीष लता रामगोबिन (56) को धोखाधड़ी और जालसाजी मामले में दक्षिण अफ्रीका के डरबन की एक अदालत ने सोमवार (7 जून 2021) को सात साल जेल की सजा सुनाई। उन पर इंडिया से एक कंसाइनमेंट को लाने के लिए इंपोर्ट और कस्टम ड्यूटी को मैनेज करने के नाम पर बिजनेसमैन एसआर महाराज से 6.2 मिलियन रैंड (करीब 3.23 करोड़ रुपए) हड़पने का आरोप था। इससे होने वाले लाभ को व्यवसायी के साथ बाँटने का भी उन्होंने वादा किया था।

बता दें कि लता रामगोबिन इला गाँधी और दिवंगत मेवा रामगोबिंद की बेटी हैं। डरबन स्पेशलाइज्ड कमर्शियल क्राइम कोर्ट ने उन्हें सजा सुनाई। 2015 में इस मामले की सुनवाई शुरू हुई थी। राष्ट्रीय अभियोजन प्राधिकरण (एनपीए) के ब्रिगेडियर हंगवानी मुलौदज़ी ने कहा था कि लता रामगोबिन ने संभावित निवेशकों को भरोसा दिलाने के लिए जाली चालान और दस्तावेज पेश किए थे। इसमें उन्होंने दावा किया था कि भारत से लिनन के तीन कंटेनर भेजे जा रहे हैं।

उस समय महात्मा गाँधी की पड़पोती को 50,000 रैंड की जमानत पर रिहा कर दिया गया था। लता रामगोबिन के मुद्दे पर सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि उन्होंने न्यू अफ्रीका अलायंस फुटवियर डिस्ट्रीब्यूटर्स के डायरेक्टर महाराज से अगस्त 2015 में मुलाकात की थी।

महाराज की कंपनी कपड़े, लिनन और जूते का आयात और निर्माण और बिक्री करती है। इसके अलावा वह दूसरी कंपनियों को प्रॉफिट-शेयर के आधार पर फाइनेंस भी करती है। उस मुलाकात के दौरान लता रामगोबिन ने महाराज को बताया था कि उन्होंने दक्षिण अफ्रीकी अस्पताल ग्रुप नेटकेयर के लिए लिनन के तीन कंटेनर आयात किए हैं।

एनपीए की प्रवक्ता नताशा कारा ने सुनवाई के दौरान बताया कि लता राम गोबिन ने कहा था कि उन्हें इम्पोर्ट कॉस्ट और कस्टम ड्यूटी का भुगतान करने के लिए फाइनेंशियल दिक्कतों का सामना करना पड़ा था और हार्बर बंदरगाह पर सामान क्लियर कराने के लिए पैसे की आवश्यकता थी।

नताशा कारा ने बताया, “लता ने महाराज को सलाह दी थी कि सामान को क्लियर करवाने के लिए उन्हें 62 लाख रैंड की जरूरत है। बाद में उन्होंने माल डिलीवर करने और भुगतान के सबूत के तौर पर नेटकेयर का चालान महाराज को भेज दिया था।”

कारा ने कहा, “लता रामगोबिन ने नेटकेयर के बैंक खाते से लेन-देन करने की पुष्टि की थी। रामगोबिन की पारिवारिक साख और नेटकेयर के डॉक्यूमेंट्स के कारण महाराज ने कर्ज लेने के लिए उनके साथ लिखित समझौता किया था।” हालाँकि, जब महाराज को दस्तावेज़ के फर्जी होने का पता चला तो रामगोबिन के साथ कोई समझौता नहीं हुआ और उन्होंने आपराधिक आरोप लगाए।

लता रामगोबिन इंटरनेशनल सेंटर फॉर अहिंसा एनजीओ की संस्थापक, कार्यकारी निदेशक हैं। वे खुद को पर्यावरण, सामाजिक और राजनीतिक हितों पर ध्यान देने वाली कार्यकर्ता बताती हैं।

‘अब नहीं होते यहाँ दंगे, हम राजनीतिक संक्रमण से भी लड़ रहे’: CM योगी ने सरकार में फेरबदल की मीडिया अटकलों को बताया निराधार

मीडिया का एक बड़ा वर्ग उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की आहट शुरू होते ही भाजपा आलाकमान और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच खटपट की ख़बरें चला रहा है और साथ ही यूपी सरकार में फेरबदल की संभावनाओं को बल दे रहा है। हाल ही में प्रदेश प्रभारी राधा मोहन सिंह और राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष के दौरे के बाद मीडिया ने तरह-तरह के कयास लगाने शुरू किए थे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार (जून 7, 2021) को कहा कि राज्य में आगामी चुनाव में भाजपा दो तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में लौटेगी। TOI के साथ इंटरव्यू में यूपी सीएम ने कहा कि कुछ लोग भाजपा नेताओं के दौरों और बैठकों को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं, और इसे एक नया राजनीतिक घुमाव दे रहे हैं, जो कि निराधार है। उन्होंने कहा, “ये मीडिया वालों की मजबूरी है कि वो चीजों को बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर के सनसनी फैलाएँ, ताकि ध्यान खींचने वाले हेडिंग्स बनाए जा सकें।”

उन्होंने बताया कि इस तरह की बैठकें कोई नई बात नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा एक कैडर आधारित पार्टी है, जो नेपोटिज्म में विश्वास नहीं रखती है। बकौल सीएम योगी, पार्टी को अपने कैडर को ज़िंदा रखना होता है, इसीलिए वरिष्ठ नेतागण हर दो महीने पर राज्य के संगठन के साथ बैठक करते हैं। पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और यूपी प्रभारी राधा मोहन सिंह भी हर महीने 2 बार राज्य का दौरा करते हैं।

सीएम योगी ने याद दिलाया कि 4 महीने पहले खुद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी लखनऊ आए थे। उन्होंने कहा कि 2014 का लोकसभा चुनाव, 2017 का यूपी विधानसभा चुनाव और 2019 का लोकसभा चुनाव – भाजपा ने सभी जीते। साथ ही कहा कि हम न सिर्फ कोरोना संक्रमण से लड़ रहे हैं, बल्कि ‘राजनीतिक संक्रमण’ के खिलाफ भी पीएम मोदी ने नेतृत्व में लड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि सत्ताधारी दल होने के नाते भाजपा जनसेवा के कई माध्यमों में लगी हुई है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशों के हिसाब से भाजपा का संगठन कोरोना की पहली और दूसरी लहर में भी राहत कार्य में लगा रहा, जबकि बाकी दल कहीं दिखाई भी नहीं दे रहे थे। प्रियंका गाँधी द्वारा पत्र लिख-लिख कर कई मुद्दों पर ध्यान दिलाए जाने के सम्बन्ध में उन्होंने कहा कि वो बस लाइमलाइट में बने रहने के लिए औपचारिकताएँ पूरी कर रही हैं।

उन्होंने पूछा कि जो लोग केवल ट्वीट कर रहे हैं, वो कोरोना की पहली और दूसरी लहर के वक़्त कहाँ थे? उन्होंने कहा कि इन लोगों के जींस में ही है कि ये लोगों की सेवा नहीं कर सकते। उन्होंने अपनी ‘राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा’ के सवाल पर कहा कि जब वो सांसद हुआ करते थे, तब भी उनकी कोई महत्वाकांक्षा नहीं थी और आज भी नहीं है। उन्होंने खुद को भाजपा का एक ‘सामान्य सिपाही’ करार दिया, जो पीएम मोदी के विकास, सुरक्षा और समृद्धि के अभियान और भाजपा के स्वप्न के लिए कार्यरत है।

उन्होंने कहा कि भाजपा ने पिछले 4 वर्षों में उत्तर प्रदेश के विकास में जो उपलब्धि हासिल की है, हमारे पास ख़ुशी मनाने के लिए उससे बड़ा कोई कारण नहीं है। उन्होंने बताया कि महामारी के दौरान भी राज्य ने आर्थिक विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण की गति बनाए रखी। उन्होंने लोगों का ध्यान दिलाया कि यूपी अब वो राज्य नहीं रहा, जहाँ आए दिन दंगे होते थे। उन्होंने यूपी को प्रति व्यक्ति आय में देश का नंबर-1 राज्य बनाने की बात करते हुए कहा कि यहाँ जाति, धर्म या भाषा के आधार पर अब किसी को प्राथमिकता नहीं दी जाती है।

राजस्थान के अधिकारियों ने कोरोना वैक्सीन की बर्बादी मानी, टीका फेंकने, जलाने और गाड़ने की बात आई थी सामने: रिपोर्ट

दक्षिणी राजस्थान के डूंगरपुर में खुद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने ही जानकारी दी है कि वहाँ कोरोना वैक्सीन के 500 डोज बर्बाद हो गए हैं। ‘टाइम्स नाउ’ ने रिपोर्ट के हवाले से ये खबर दी है। राजस्थान पहले से ही वैक्सीन की बर्बादी को लेकर घिरा हुआ है। भाजपा ने माँग की है कि राज्य में वैक्सीन की बर्बादी की जाँच केंद्रीय स्तर पर हो। प्रदेश के भाजपा नेताओं ने केंद्र सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप की माँग की है।

राजस्थान विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन को पत्र लिख कर विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले दे स्थिति से अवगत कराया है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से एक जाँच दल भेजने का आग्रह किया और साथ ही वैक्सीन की बर्बादी पर नियंत्रण के लिए कदम उठाने का भी निवेदन किया। उन्होंने कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच रणनीति के लिए राज्य के मार्गदर्शन की भी बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि वैक्सीन फ्रिज में जमाए भी जा रहे हैं।

डॉक्टर हर्षवर्धन पहले ही राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा को पत्र लिख कर इस सम्बन्ध में चिंता जता चुके हैं और साथ ही वैक्सीन बर्बादी को रोकते हुए स्थानीय स्तर पर रणनीति बनाने को भी कहा था। उन्होंने जीरो वेस्टेज का लक्ष्य तय करने की सलाह देते हुए नसीहत दी थी कि एक वैक्सीन डोज की बर्बादी का अर्थ है कि हम एक व्यक्ति को आवश्यक सुरक्षा प्रदान करने में अक्षम रहे हैं। राजस्थान सरकार अब भी मात्र 2% वेस्टेज की ही रट लगाए बैठी है।

ऊपर से स्थिति ये है कि लोगों को वैक्सीन नहीं मिल रही। बारां जिले में तो 18+ उम्र के लोगों के लिए वैक्सीन ही नहीं बची, जिसके बाद वहाँ के लोग अब मध्य प्रदेश के शिवपुरी जाकर टीका लगवा रहे हैं। ऐसा करने वालों की संख्या 500 से भी अधिक है। पिछले दो सप्ताह से ये सिलसिला चल रहा है। याद दिला दें कि कोरोना की दूसरी लहर की चरम स्थिति में राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के मरीजों का इलाज बंद करा दिया था, जिससे 2 की मौत भी हुई थी।

उधर ‘दैनिक भास्कर’ ने भी कोरोना वैक्सीन की उन 532 वायलों का वीडियो दिखाया, जिन्हें कचरे के ढेर से उठाया गया था। इनमें से 130 वायल पूरी भरी हुई है तो 100 से अधिक ऐसी हैं, जिनमें आधी वैक्सीन भरी है। एक वायल से 10 लोगों को वैक्सीन की डोज दी जाती है।’दैनिक भास्कर’ के अनुसार, वैक्सीन फेंकी और जमीन में गाड़ी ही नहीं गई, बल्कि जिले के लांबा हरिसिंह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के पास नाले में जली हुई वैक्सीन भी मिली।

वहीं रघुनाथपुरा PHC से कोरोना वैक्सीन को फ्रिज में जमा कर बर्बाद करने का मामला सामने आया है। यहाँ कोरोना वैक्सीन की 50 वायल, अर्थात 500 डोज ऐसी ही लापरवाही के कारण बर्बाद हो गए। चूक की सूचना वरीय अधिकारियों को भी नहीं दी गई और मामला दबा दिया गया। फ्रिज में तापमान 2-8 डिग्री सेल्सियस तक रहना चाहिए, लेकिन इसका ध्यान नहीं रखा गया। अधिकारी जाँच के लिए पहुँचे तो फ्रिज की चाभी किसी कर्मचारी के पास होने की बात कह के बहाना बनाया गया।

इससे पहले ‘दैनिक भास्कर’ ने अपनी पड़ताल में पाया था कि 80% तक भरी हुई वैक्सीन की वायलें जमीन में गाड़ दी जा रही हैं। ऐसे 10 स्वास्थ्य केंद्रों की पड़ताल के बाद अख़बार ने कहा था कि वो सच दिखा रहा है और अपनी जिम्मेदारी निभाता रहेगा। स्वास्थ्य मंत्री को सम्बोधित करते हुए अख़बार ने उन्हें वैक्सीन की बर्बादी रोकने की नसीहत दी थी और कहा था कि उन्हें जो भी सबूत चाहिए, वो दिए जाएँगे पर टीके बर्बाद न हों।

ई चीटिंग है, बात तोता दिखाने की थी-तोते उड़ाने की नहीं: देश का पप्पू

आदरणीय प्रधानसेवक,

गोया कि मुझे इज्जत देनी आती नहीं। आए भी क्यों? 10 साल तक मम्मी के इशारे पर वह कुर्सी नाचती रही, जिस पर बैठ आज आप देश को संबोधित कर लेते हैं। ‘जनपथ’ से संवाद की हैसियत नहीं थी जिस कुर्सी की, वह आज ‘जन से संवाद’ करने लगा! आपको याद तो होगा कि मैं कैसे कैबिनेट से पारित अध्यादेश फाड़ देता था। वो भी सबके सामने। क्या कहा, याद नहीं। अच्छा, उस समय आप गुजरात रहते थे। कोई नहीं। यूट्यूब जानते हैं। वहाँ जाइए, सर्च मारिए आज भी हम फाड़ते मिल जाएँगे… लोकतंत्र की। संसदीय मर्यादाओं की।

फिर भी आदरणीय जोड़ा। प्रधानसेवक लिखा। वजह बिहार के मेरे एक उम्मीदवार का भाई। वह उम्मीदवार चुनाव तो नहीं जीत पाया, पर उसमें दम तो था। शील भंग का आरोप जीतने में कामयाब रहा था। उसका भाई इसी एनसीआर में रहता है। प्राइम टाइम करता है। उसने कभी मुझे बताया था कि ये प्रधानसेवक शब्द तो असल में मेरे पिता के नाना का था। इससे मिलता-जुलता प्रमुखसेवक उन्होंने उस दफ्तर में खुदवाया था जिसे आपने नीति आयोग कर दिया।

मुझे आपकी इसी करने की आदत से चिढ़ है। वैसे योजना में मेरी भी दिलचस्पी है। पर नीति से वास्ता नहीं। मेरे पुरखों का भी नहीं था। मेरी आने वाली नस्लें भी न रखेंगी इससे वास्ता। यह वचन है एक जनेऊधारी दत्तात्रेय गोत्रीय ब्राह्मण का।

आप क्या जाने योजना की ताकत। आपको तो आदत है बंद करने की। भ्रष्टाचार बंद करने की। कमीशनखोरी बंद करने की। लेकिन बता देता हूँ ताकत तो योजना में ही है। योजना से ही भारत बनता है, आत्मनिर्भर।

इसी ताकत का अहसास कराने के लिए मैंने और बंगाल वाली दीदी ने चिट्ठी लिखी। कहा कि टीका खरीदने का काम राज्यों को दीजिए। जब हमारे लोग खरीद करेंगे तो कमीशन का धंधा होगा। स्वदेशी का खटराग छोड़ जब हमारी पसंद की कंपनियों के लिए दरवाजे खोलेंगे तभी तो हमारी पार्टी के खजाने में चंदा आएगा। आखिर में ये चंदा का पैसा, ये कमीशन का पैसा जाता कहाँ?

माना कुछ ब्लैक हेवन कंट्री में जाता। कुछ जीजा जी के जमीन में। पर कुछ तो इधर भी रहता न। क्या उससे नहीं बनता भारत आत्मनिर्भर। अरे दो-चार ही बनते आत्मनिर्भर, पर होते तो भारतीय ही न। भले वे वोटर परिवार के होते। वैसे सच्चाई तो ये है कि वे वोटर किसी के नहीं हैं। होते तो हमारी ये दुर्गति न रहती। ये खाए-पिए-अघाए वोट करने निकलते ही नहीं। पर हैं बड़ी काम की चीज। टूलकिट अच्छा बनाते हैं। प्रोपेगेंडा के मास्टर होते हैं। बहुरुपिया भी। कभी लिबरल बन लिए तो कभी सेकुलर। कलाकार, पत्रकार, लेखक, इतिहासकार, साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता… ये कुछ भी बन सकते हैं। आप तो जानते ही होंगे।

दूसरी तरफ वे हैं, जिन्हें जीजा जी मेंगो पीपुल कहते हैं। ये हमारे पुरखों की उपलब्धि थी कि हमने 70 सालों से इन्हें गरीब बनाकर रखा। मजदूर बनाकर रखा। दबाकर रखा। कुचल कर रखा। पर आपको सनक है इनको ही सशक्त करने की। महामारी काल में भी फ्री की वैक्सीन और फ्री की अनाज देकर लोकतंत्र और सरकार के होने का अहसास कराने की। पहले इनके बैंक खाते खुलवाए। इनके रसोई तक गैस सिलिंडर पहुँचा दिया। घर-घर बिजली और शौचालय पहुँचा दी।

ये सब क्या कम था कि अब टीका और अनाज देंगे। अभी तो बना देते बहाना। महामारी के नाम पर दो-चार इंच सीना कम हो जाता तो क्या फर्क पड़ता। सब कुछ कितना मस्त चल रहा था। हमने तो प्राइवेट अस्पतालों में टीका बेचने का धंधा भी शुरू कर दिया था। कितना चिल्लम-पों मचा रखा था। पूछ रहे ही थे, हमारे बच्चों की वैक्सीन कहाँ गई। टीका को डस्टबिन में फेंकने से लेकर जमीन में दफन करने और जलाने तक का काम किया। हमारे मुख्यमंत्रियों ने फ्री का टीका लगवाने का ऐलान कर केंद्र से मुफ्त में टीका माँगा। पर आपने एक संबोधन से सारी मेहनत पर पानी पानी फेर दिया।

माना आपको 18 घंटे काम करने की आदत है। लेकिन हमारी मेहनत का कोई मोल नहीं? याद रखिएगा जीजा जी के मेंगो पीपुल सशक्त हुए तो हिसाब माँगेंगे। हमसे भले 70 साल का माँगे, पर इनके जो लक्षण दिख रहे हैं उसमें कम से कम एकाध दशक का हिसाब तो आपको भी देना पड़ेगा ही। लेकिन आप का क्या, आप झट से दे देंगे। आपको तो नतीजे देने की आदत है। नहीं दे पाए तो अपने कहे अनुसार झोला उठाकर चल देंगे।

पर हम करें तो करें क्या। झोला उठाकर भी तो नहीं जा सकते। और झोला उठाकर जाएँ भी क्यों? किसी न किसी दिन तो इस सुबह का अँधेरा होगा। उस अँधेरी रात हम आज का सारा सच मिटवाएँगे। आने वाली पीढ़ियों को बताएँगे कि मुगलों के तबेले में तैयार हुई कोरोना की वैक्सीन। गंगा-जमुनी तहजीब से हारी महामारी। बताएँगे जब हमारे अल्पसंख्यक भाई बीमारी से लड़ रहे थे, जब हमारे किसान जमीन के लिए लड़ रहे थे, तब कैसे ये हिंदू नफरत की खेती कर रहे थे। कैसे एक नेहरू वाला गाँधी कुर्ते की फटी जेब लेकर इन सबसे लड़ा और जीता था। उस दिन यही खाए-पिए-अघाए काम आएँगे। मेंगो पीपुल टुकुर-टुकुर ताकती रह जाएगी। जीजा जी की जमींदारी की चौहद्दी फिर बढ़ेगी। कमीशन और चंदे का राज लौटेगा। करप्शन की महामारी आएगी।

आप शायद भूल गए हैं। हमें याद है। मोहम्मद गोरी से आखिर में पृथ्वीराज हारा था। पप्पू से प्रधानसेवक हारेगा!

आपका नहीं
देश का पप्पू

राज्य खरीदे कोविड-19 वैक्सीन: राहुल-ममता ने लिखा था लेटर, पलटी मारने की कहानी PM मोदी ने सुनाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को (7 जून 2021) को देश की जनता को संबोधित किया। उन्होंने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि यह राज्य सरकारें थीं, जिन्होंने माँग की थी कि उन्हें अपने राज्य के लोगों के लिए वैक्सीन खरीदने की अनुमति दी जाए।

राज्य सरकारों ने माँग की थी कि टीकों की खरीद में उनका और अधिक योगदान होना चाहिए। हालाँकि, जल्द ही उन्हें यह एहसास हो गया कि यह कार्य उनकी क्षमता से कहीं अधिक है। इसलिए उन्होंने ये राग अलापना बंद कर दिया और वैक्सीन खरीद को केंद्रीकृत करने की माँग करने लगे।

इसके आस-पास जो पूरी राजनीति की गई थी, उसमें पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी भी थे। 8 अप्रैल, 2021 को प्रधानमंत्री मोदी को लिखे एक पत्र में उन्होंने माँग की थी कि वैक्सीन खरीद में राज्य सरकारों की अधिक भूमिका होनी चाहिए।

राहुल गाँधी ने पत्र में लिखा था, “सार्वजनिक स्वास्थ्य राज्य का विषय है, हमारे राज्यों को टीके की खरीद से लेकर पंजीकरण तक हर मामले में दरकिनार कर दिया गया है।” उन्होंने प्रधानमंत्री से यह भी कहा था कि टीके की खरीद एवं वितरण में राज्यों की भूमिका बढ़ाई जाए और इस मुश्किल समय में गरीब तबकों को सीधी आर्थिक मदद दी जाए।

राहुल गाँधी अकेले ऐसे विपक्षी नेता नहीं थे, जिन्होंने इसकी माँग की थी। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी इस तरह की माँगों को लेकर मुखर थीं।

ममता बनर्जी ने 24 फरवरी 2021 को लिखे गए पत्र में कहा था, “हम आपसे अनुरोध करते हैं कि कृपया इस मामले को उपयुक्त अधिकारियों के साथ उठाएँ, ताकि राज्य सरकार शीर्ष प्राथमिकता के आधार पर निर्धारित जगहों (designated point) से टीके खरीद सकें, क्योंकि पश्चिम बंगाल सरकार सभी लोगों का मुफ्त में टीकाकरण करना चाहती है।”

वहीं, पीएम मोदी ने खुलासा किया कि मई के दो सप्ताह बाद राज्यों को यह एहसास होने लगा कि पहले की नीति ज्यादा बेहतर थी। पहले की नीति एक केंद्रीकृत वैक्सीन खरीद नीति थी, जिसे राज्य बदलना चाहते थे। हालाँकि, अब केंद्र सरकार ने फिर से राज्यों के अनुरोध पर पुरानी नीति पर लौटने का फैसला किया है। अब केंद्र सरकार उपलब्ध टीकों का 75% राज्यों को मुफ्त में वितरित करेगी। वहीं, 25% वैक्सीन अभी भी प्राइवेट अस्पतालों को खरीदने के लिए उपलब्ध रहेगी।

‘वह किडनैपिंग का हिस्सा थी, जब मुझे पीटा जा रहा था तो…’: मेहुल चोकसी ने अपनी शिकायत में लिया ‘मिस्ट्री’ महिला का नाम

भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी ने भारत आने से बचने के लिए एक और नया दाँव खेला है। उसने एंटीगुआ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। मेहुल चोकसी ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि जब वह अपनी दोस्त बारबरा जाबारिका (Barbara Jabarica) से मिलने गया था तो उसे 8 से 10 लोगों ने बेरहमी से पीटा और उसका फोन, घड़ी व वॉलेट भी छीन लिया। अपनी शिकायत में चोकसी ने उसे जबरन मार-पीटकर डोमिनिका ले जाए जाने का आरोप लगाया है। चोकसी ने अपने अपहरण में बारबरा जाबारिका नाम की महिला का हाथ भी बताया है, जिसके साथ उसने ‘दोस्ती’ का दावा किया।

चोकसी ने आरोप लगाया कि वह बारबरा अपहरण की पूरी योजना का एक अहम हिस्सा थी। अपनी शिकायत में चोकसी ने दावा किया कि जब उसे पीटा जा रहा था और बोट पर ले जाया गया था, तब बारबरा ने उसकी मदद करने की कोशिश नहीं की।

अपनी शिकायत में चोकसी ने कहा, ”पिछले साल भर से मेरी बारबरा जबारिका से दोस्ती हुई थी। वह पहले मेरे जॉली हार्बर स्थित घर के सामने रहती थी लेकिन बाद में कोको वे होटल शिफ्ट हो गई थी। उसके मेरे स्टाफ के साथ भी अच्छे संबंध थे और हम नियमित तौर पर मिला करते थे, और अक्सर शाम को वॉक पर जाते थे।” ध्यान देने वाली बात ये है कि चोकसी की पत्नी ने दावा किया था कि उसका पति हनी-ट्रैप का शिकार हुआ था।

23 मई को क्या हुआ था

चोकसी ने 23 मई को हुई घटनाओं के बारे में विस्तार से बताया, जिसकी वजह से उसका कथित अपहरण हुआ और डोमिनिकन पुलिस ने अपने देश में अवैध तरीके से घुसने के लिए गिरफ्तार किया। चोकसी ने अपनी शिकायत में बताया कि जाबारिका ने (23 मई 2021) उसे उसके घर से पिकअप करने के लिए कहा था, जबकि आम तौर पर वे पब्लिक प्लेस पर ही मिलते थे। उसका घर मरीना की अगली वाली रोड पर स्थित था। उसने जाबारिका की बात मान ली और वह शाम को करीब 5:15 बजे उसके घर पर पहुँचा। मेहुल ने बताया कि उसने मुझे अंदर बुलाया और कहा कि हम कुछ मिनट बाद बाहर जाएँगे। इसलिए वह तब तक अपनी शराब खत्म करना चाहती है।

इसके बाद वह अपनी महिला ‘मित्र’ से बात करने लग जाता है, लेकिन तभी अचानक 8 से 10 बॉडी बिल्डर जैसे दिखने वाले लोग गेट से एंट्री करते हैं और उसे बेरहमी से पीटने लगते हैं। उसकी शिकायत के मुताबिक, उन्होंने उसके हाथों और चेहरे पर टैसर (tasers) का इस्तेमाल किया। हाई इंटेसिटी वाले बिजली के झटकों के कारण उसे काफी जलन और दर्द सहना पड़ा। मेहुल ने यह भी कहा कि ये लोग खुद को एंटीगुआ पुलिस से होने का दावा कर रहे थे। उन्होंने उसका फोन, रोलेक्स घड़ी और बटुआ भी ले लिया था।

उसने दावा किया, “इसके बाद उन्होंने मुझे व्हीलचेयर पर बिठाया, उस समय मैं लगभग बेहोशी की हालत में था। उन्होंने मेरे हाथ पैर प​कड़कर मुझे व्हीलचेयर से बाँध दिया, उस समय मैं इस स्थिति में नहीं था कि अपना बचाव कर सकूँ। मेरे मुँह में एक गैग (किसी को बोलने से रोकने के लिए उसके मुँह में कपड़े आदि का टुकड़ा ठूँस देना) रखा गया था, जिससे मैं ठीक से साँस भी नहीं ले पा रहा था और हाँफ रहा था। वे मुझे लगातार पीटते जा रहे थे, उन्होंने एक मास्क से मेरे चेहरे को ढंक दिया था, जिससे मैं उन्हें देख भी न सकूँ।”

उसने आगे कहा कि उसे वाटरक्राफ्ट से एक बहुत बड़ी बोट (नाव) में शिफ्ट कर दिया गया था। जब उसका मास्क हटाया गया तो उसे महसूस हुआ कि वह सेंट जॉन पुलिस स्टेशन नहीं जा रहा है। जब उसने पूछा कि वे उसे कहाँ ले जा रहे हैं, तो किसी ने भी उसके सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि अगर अपनी जान प्यारी है तो चुप रहो। चोकसी ने कहा कि उन्होंने मुझे चाकू की नोक पर धमकाया, जिसके बाद मैं चुप रहा, क्योंकि हथियारों से लैस इन लोगों के खिलाफ अपनी आवाज उठाना बेकार था।

चोकसी का दावा, भारतीय भी सवार थे

चोकसी ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि विमान में दो भारतीय और कैरेबियाई मूल के तीन लोग भी सवार थे। उसे एक ऐसे व्यक्ति से बात करने के लिए कहा गया था, जो इस मामले का चीफ एजेंट नरिंदर सिंह था। मुझे बताया गया था कि उसे इस जग​ह पर एक हाई रैंकिंग वाले भारतीय नेता को इंटरव्यू देने के लिए लाया गया था। उसने आरोप लगाया कि मुझसे यह भी कहा कि डोमिनिका में मेरी नागरिकता पक्की हो जाएगी और मुझे जल्द ही भारत वापस भेज दिया जाएगा।

चोकसी और उसके कथित अपहरण के खिलाफ केस

चोकसी पंजाब नेशनल बैंक के 13500 करोड़ रुपए का घोटाला करने वाले आरोपितों में से एक है, जिसमें उसका भाँजा नीरव मोदी समेत कई अन्य भी शामिल हैं। वह 23 मई को एंटीगुआ से लापता हो गया था, जिसे डोमिनिका में पकड़ा गया था। डोमिनिका की पुलिस ने उस पर देश में अवैध तरीके से एंट्री करने का आरोप लगाया है। उन्होंने यह आरोप लगाया है कि वह भारत में प्रत्यर्पण से बचने के लिए एंटीगुआ और बारबूडा से भाग गया था।

3 जून 2021 को उसे डोमिनिकन कोर्ट (Dominican court) से तत्काल भारत प्रत्यर्पण से अंतरिम राहत मिल गई है। अगली सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं की गई है। वहीं, अदालती कार्यवाही पूरी होने में समय लग सकता है। बताया जा रहा है कि उसे निर्वासन (deportation) से बचाने के लिए लंदन से चार वकीलों की एक टीम को काम पर रखा गया था। उसका चचेरा भाई वर्तमान में डोमिनिका में डेरा डाले हुए है और कथित तौर पर उसे बचाने के लिए ​उसने विपक्ष के साथ एक समझौता भी किया है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, मेहुल चोकसी के छोटे भाई चेतन चीनूभाई चोकसी ने डोमिनिकन विपक्षी नेता के साथ एक समझौता किया और अपहरण की कहानी को आगे बढ़ाने के लिए चुनावी फंडिंग का वादा किया है। चचेरे भाई ने बातचीत के दौरान खुलासा किया कि चोकसी अपने दम पर डोमिनिका पहुँचा है, लेकिन उसे अदालत में डोमिनिका सरकार के खिलाफ मामले से निपटने और यह विश्वास दिलाने के लिए कि उसे एंटीगुआ और भारतीय पुलिस द्वारा अगुवा किया गया के लिए विपक्ष की मदद की आवश्यकता है।

‘हमने पिथौरा को जिंदा दबोच इस्लामी फौज को सौंप दिया’: ‘गरीब नवाज’ ने क्यों लिया था पृथ्वीराज चौहान की हार का श्रेय?

अगर चंद दिनों के लिए दिल्ली की गद्दी पर बैठने वाले हेमू को छोड़ दें तो पृथ्वीराज चौहान दिल्ली पर राज करने वाले अंतिम हिन्दू सम्राट थे। उनके काल में ही मोईनुद्दीन चिश्ती नामक एक ‘सूफी संत’ भारत आया था, जिसे ‘गरीब नवाज’ कहा गया। आज के राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के अधिकतर हिस्सों के अलावा उत्तर प्रदेश, पंजाब और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में भी तब चौहान का ही शासन था। उन्होंने 1178 से लेकर 1192 ईश्वी तक राज किया। उन्हें ‘पृथ्वीराज रासो’ के कारण ज्यादा जाना जाता है।

पृथ्वीराज चौहान के काल में ही अजमेर में एक फकीर आकर बसे थे, जिसे लोग सूफी संत भी कहते हैं। उसका नाम था – ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती। जी हाँ, वही मोईनुद्दीन चिश्ती, जिसकी दरगाह अजमेर में आज भी मौजूद है और हर साल लाखों मुस्लिमों के साथ-साथ हिन्दू भी वहाँ चादर चढ़ाने जाते हैं। प्रधानमंत्री तक की तरफ से वहाँ चादर जाता है। लेकिन, क्या आपको पता है कि दिल्ली से हिन्दू शासन को उखाड़ फेंकने में उसका भी हाथ था?

12वीं शताब्दी का खत्म होने वाला समय वो काल था, जब भारत में चीजें तेजी से बदल रही थीं। मोहम्मद गोरी सीमा पर आ बैठा था, जिसे तराइन के प्रथम युद्ध में पृथ्वीराज चौहान ने हरा दिया था। अपमानित गोरी को पृथ्वीराज ने जीवनदान दिया, लेकिन उनकी इस एक गलती ने भारत की सदियों की गुलामी की पटकथा लिख दी और दिल्ली श्रीहीन हो गई। मोहम्मद गोरी वापस गजनी जाकर एक बड़ी फौज तैयार करने लगा।

ये महज ‘संयोग’ ही था या कुछ और कि जिस साल मोहम्मद गोरी हार कर भागा, उसके अगले ही साल या कुछ ही दिनों बाद एक सूफी संत ने अजमेर में डेरा जमाया, पृथ्वीराज चौहान की राजधानी में। वहाँ वह कई चमत्कार करने लगा। आस-पास के लोगों में उसके प्रति जिज्ञासा जागी। वह लोगों से काफी अच्छे से पेश आता। गाँव के गाँव इस्लाम में धर्मांतरित होने शुरू हो गए। बिना हथियार उठाए चिश्ती ने वो जमीन तैयार कर दी, जहाँ वो अगले 44 वर्षों तक इस्लाम का प्रचार-प्रसार करता रहा।

इस्लामी जिहाद के लिए भारत आया था चिश्ती?

1191 में गोरी हारा और 1192 में दोबारा लौट कर आया। इसी अवधि के बीच चिश्ती ने अजमेर में डेरा जमाया। आखिर ऐसे संवेदनशील समय में चिश्ती भारत क्यों आया था? वो अपने चेलों-शागिर्दों के साथ पहुँचा था। ‘Islamic Jihad: A Legacy of Forced Conversion, Imperialism, and Slavery‘ में MA खान लिखते हैं कि चिश्ती ‘काफिरों के खिलाफ इस्लामी जिहाद’ के लिए भारत आया था।

इस पुस्तक में लिखा है कि पृथ्वीराज चौहान के खिलाफ गद्दारी वाला युद्ध लड़ने के लिए ही मोईनुद्दीन चिश्ती भारत आया था, ताकि वो मोहम्मद गोरी की तरफ से उसकी सहायता कर सके और उसका काम आसान कर सके। ये इतिहास है कि तराइन का दूसरा युद्ध 1192 में हुआ और उसमें पृथ्वीराज चौहान की हार हुई। चौहान ने भले ही गोरी को छोड़ दिया हो, गोरी ने ऐसा बिलकुल भी नहीं किया और उनकी आँखें फोड़वा दीं।

तभी तो पृथ्वीराज चौहान की हार के बाद ‘ख्वाजा’ मोईनुद्दीन चिश्ती ने जीत का श्रेय लेते हुए कहा था, “हमने पिथौरा (पृथ्वीराज चौहान) को जिंदा दबोच लिया और उसे इस्लाम की फौज के हवाले कर दिया।” ये भी कहा जाता है कि एक दिन अचानक से ‘गरीब नवाज’ चिश्ती को स्वप्न में पैगम्बर मोहम्मद का संदेश मिला कि उसे भारत में उनके दूत के रूप में भेजा जा रहा है। फिर वो भारत आ गया। उसकी सोच एकदम ऐसी ही थी, जैसी अभी जाकिर नाइक की है।

MA खान की पुस्तक के अनुसार, मोईनुद्दीन चिश्ती को निजामुद्दीन औलिया के बाद दूसरा सबसे बड़ा सूफी संत माना गया लेकिन उसने अजमेर की आनासागर झील को अपवित्र कर दिया था। उसने अल्लाह और पैगम्बर की मदद से झील के किनारे बसे मंदिरों को जमींदोज करने का ऐलान किया था। साथ ही वो मंदिरों और उसमें स्थित मूर्तियों की पूजा होते देख कर खफा भी था। बता दें कि इस्लाम में मूर्तिपूजा हराम है।

ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के चेले रोज एक गाय काट कर लाते थे और उसी झील के किनारे मंदिरों के प्रांगण के नजदीक खाते थे, जहाँ राजा-महाराजा से लेकर ब्राह्मण-श्रद्धालु तक प्रार्थना किया करते थे। जहाँ माँस तक वर्जित था, वहाँ गोमांस का कबाब चलने लगा। लोगों का ये भी मानना था कि चिश्ती ने आनासागर और पनसेना की दो झीलों को ‘चमत्कार से’ सुखा दिया था, जो कि हिन्दुओं के लिए पवित्र थे।

इस अनासागर झील का निर्माण ‘राजा अरणो रा आनाजी’ ने 1135 से 1150 के बीच करवाया था। ‘राजा अरणो रा आनाजी’ सम्राट पृथ्वीराज चौहान के पिता थे। आज इतिहास की किताबों में अजमेर को हिन्दू-मुस्लिम’ समन्वय के पाठ के रूप में तो पढ़ाया जाता है, लेकिन यह जिक्र नहीं किया जाता है कि ये सूफी संत भारत में जिहाद को बढ़ावा देने और इस्लाम के प्रचार के लिए आया था, जिसके लिए उसने इस्लामी धर्मांतरण को ही अपना एकमात्र लक्ष्य बनाया।

पृथ्वीराज चौहान को कई इतिहासकार भारत में मुस्लिम राज की एंट्री के लिए दोषी मानते हैं क्योंकि उनके आस-पास के कई हिन्दू राजाओं के साथ सम्बन्ध अच्छे नहीं थे। जो पृथ्वीराज चौहान 11 वर्ष की उम्र में राजा बन गए थे, उन्हें धोखे से हराने के लिए इस्लामी आक्रांताओं को कई तिकड़म बुनने पड़े। ‘हम्मीर महाकाव्य’ कहता है कि मोहम्मद गोरी को पृथ्वीराज ने 8 बार हराया था और कई अन्य राजाओं के राज उसे लौटाने को भी कहा था। 9वीं बार वो पृथ्वीराज को हराने में सफल रहा।

‘पृथ्वीराज रासो’ और ‘प्रबंध कोष’ की मानें तो पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गोरी को 20 बार हराया था और 21वीं बार वो खुद हार गए। हर बार उन्होंने गोरी को बिना नुकसान पहुँचाए छोड़ दिया। तराइन के प्रथम युद्ध के विवरणों से ही स्पष्ट है कि पृथ्वीराज चौहान ने या तो मोहम्मद गोरी की अति-महत्वाकांक्षा को पढ़ने में भूल कर दी, या निर्दयी शत्रु के सामने रूरत से ज्यादा उदारता दिखा दी और उसे छोड़ दिया।

16वीं शताब्दी के मुस्लिम इतिहासकार फिरिश्ता की मानें तो पृथ्वीराज चौहान की सेना विशाल थी और उसमें 2 लाख घोड़ों के अलावा 3000 हाथी भी थे। असल में मोहम्मद गोरी ने तबारहिंदह (ताबर-ए-हिन्द) पर कब्जा कर लिया था। आज इस क्षेत्र को बठिंडा के नाम से जानते हैं। ये खबर सुन कर वहाँ पृथ्वीराज पहुँचे और तराइन का प्रथम युद्ध हुआ। मोहम्मद गोरी गोरी घायल हुआ और पकड़ा गया। पृथ्वीराज चौहान ने हारी हुई सेना का पीछा तक नहीं किया और सभी को जाने दिया।

तराइन के दूसरे युद्ध में गोरी पूरी तैयारी के साथ आया था और उसने वापस जाकर 1.2 लाख अफगान, ताजिक (पर्सियन-ईरानी) और तुर्क फौज इकट्ठा की – सब के सब मँझे हुए योद्धा। ‘पृथ्वीराज रासो’ कहता है कि अजमेर और दिल्ली के हिन्दू सम्राट तब भोग-विलास में व्यस्त हो गए थे। युद्ध में गोरी ने धोखा, लालच और तिकड़मों से काम लिया और पृथ्वीराज की हार हुई। फिर हजारों के खून बहे, कई को वो दास बना कर साथ ले गया और कई मंदिरों को ध्वस्त किया।

‘हिंदी बोलने वाले हरा# कोलकाता में बहुत, 2 दिन में भाग जाओ… वरना टुकड़े-टुकड़े काट कर कुत्ते को खिला दूँगा’

शशांक सिंह मैं जानता हूँ कि तुम कोलकाता में कहाँ रहते हो। सिर्फ 2 दिन का समय दे रहा हूँ। बंगाल से बाहर निकल जाओ। ऐसा नहीं करोगे तो टुकड़े-टुकड़े काट कर अपने कुत्ते को खिला दूँगा। हिंदी बोलने वाले बहुत से हरा#! यहाँ रहते हैं, एक की बलि दूँगा तो किसी को फर्क नहीं पड़ेगा।

जान से मार कर कुत्तों को खिलाने वाली धमकी

ऊपर कोई कहानी नहीं कही गई है। यह एक धमकी है, जो शशांक सिंह को मिली है। शशांक सिंह ट्विटर पर @BefittingFacts के नाम से फेमस हैं। जिसने धमकी दी है, वो ट्विटर पर @rosso_alpha के नाम से हैंडल चलाता है। फिलहाल उसका अकाउंट “doesn’t exist” दिखा रहा है।

धमकी देने वाला अकाउंट बंद कर ‘भागा’

शशांक सिंह ने कोलकाता के लाल बाजार साइबर पुलिस स्टेशन में जान से मारने की धमकी के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शशांक ने ऑप इंडिया से बात कर सिर्फ एक ही इच्छा जताई – “मैं चाहता हूँ कि कोलकाता पुलिस इस यूजर को जल्द से जल्द गिरफ्तार करे।”

शशांक सिंह के द्वारा दर्ज की गई शिकायत

शशांक सिंह को यह धमकी 6 जून को रात 11:40 पर मिली और अगले ही दिन उन्होंने लाल बाजार साइबर पुलिस स्टेशन में इसके खिलाफ लिखित शिकायत दी। अपनी शिकायत में शशांक ने खुद के जान से मारने की धमकी के साथ-साथ हिंदी-नॉन हिंदी और बंगाली-नॉन बंगाली के बीच वैमनस्य को लेकर भी बात रखी।

पुणे की कंपनी में लगी भीषण आग, 12 की मौत, पाँच अब भी लापता: रिपोर्ट

महाराष्ट्र के पुणे स्थित एक केमिकल कंपनी में रविवार (7 जून) शाम भीषण आग लगने से कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई है जबकि पाँच लोग अब भी लापता हैं।

एएनआई के मुताबिक, पुणे के घोटावाड़ा फाटा में स्थित कंपनी में रविवार को जब आग लगी तो कुल 37 कर्मचारी ड्यूटी पर थे, जिनमें से 20 लोगों को अग्निशमन विभाग ने बचा लिया है।

अग्निशमन विभाग ने खबर लिखे जाने तक 12 शव बरामद होने की पुष्टि की थी, जबकि पाँच लोगों अभी भी लापता हैं। अग्निशम विभाग ने बताया कि 8 दमकल घटनास्थाल पर मौजूद हैं और आग पर काबू पा लिया गया है। लापता लोगों की तलाश जारी है।

शुरुआती जाँच में आग लगने की वजह कंपनी में जारी पैकेजिंग कार्य को बताया गया है। फायर ब्रिगेड के अधिकारियों ने कहा, ”आग प्लास्टिक की वजह से फैली।”

पुणे ग्रामीण पुलिस ने इस मामले में एक्सिडेंटल डेथ रिपोर्ट (ADR) दर्ज की है। शवों को पुणे शहर के सरकारी ससून (Sassoon) जनरल अस्पताल ले जाया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुणे की जिस कंपनी में आग लगी है, उसे सैनिटाइजर की कंपनी बताया जा रहा है। खबरों के मुताबिक कंपनी में काम करने वालों में ज्यादातर महिलाएँ थीं।

इस अग्निकांड में ज्यादातर महिलाओं की मौत की आशंका जताई जा रही हैं क्योंकि आग लगने के बाद 15 महिलाएँ और 2 पुरुष कारखाने से बाहर नहीं निकल पाए थे।

महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलेपमेंट कॉर्पोरेशन (MIDC) और पुणे मेट्रोपोलिटन रीजन डेवलेपमेंट अथॉरिटी (PMRDA) के अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुँचे हैं।

शिवाजी नगर के विधायक सिद्धार्थ शिरोलो ने पुणे की आग की घटना पर शोक जताते हुए मृतकों के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त की।