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आज मार रहे हो… कल जनता तुम्हें ‘मारेगी’ (चुनावी मैदान में): पश्चिम बंगाल पर हर चुप्पी का बदला इसी लोकतंत्र में

पश्चिम बंगाल में सरकार बनने के बाद पूरा एक महीना बीत चुका है पर हिंसा नहीं रुक रही है। इस समय कोरोना की दूसरी लहर के साथ-साथ हिंसा की तीसरी लहर चल रही है। हिंसा न रुकने का अर्थ यह है कि सरकार भले चल रही हो पर उसने कानून व्यवस्था को रोक रखा है।

भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों को मारा जा रहा है, उन पर तरह-तरह के प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं, उन्हें अपना घर छोड़कर पलायन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है और साथ ही यह दावा भी किया जा रहा है कि कोई हिंसा नहीं हो रही। ताजा घटना में एक भाजपा कार्यकर्ता की नृशंस हत्या कर दी गई।

हिंसा न होने के दावे के साथ चिंता की बात यह है कि लगातार हो रही हिंसा की बात करते हुए राज्यपाल निरीह लग रहे हैं, उनसे भी निरीह जिन्हें मारा जा रहा है या जिन्हें अपने घर छोड़कर पलायन करना पड़ रहा है।

“पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा का एक इतिहास रहा है”, राजनीतिक विमर्श में पिछले एक महीने का सबसे बड़ा क्लीशे साबित हुआ है। जिन्होंने पिछले चार दशकों से प्रदेश में राजनीतिक हिंसा देखी है, वे भी स्वीकार करेंगे कि ऐसी हिंसा पहले कभी नहीं हुई। पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था कि किसी सरकार, राजनीतिक दल या गठबंधन ने हो रही हिंसा पर प्रश्न पूछे जाने पर सीधा यह कहा हो कि; कोई हिंसा नहीं हुई। ऐसे में कहा जा सकता है कि हिंसा की नृशंसता, उसकी तीव्रता आश्चर्य की बात नहीं है।

आश्चर्य की बात है सत्ताधारी दल का यह कहना कि कोई हिंसा नहीं हो रही है। कह सकते हैं कि प्रदेश में राजनीतिक हिंसा के इतिहास का यह सबसे शर्मनाक काल है, जिसमें हो रही हिंसा को सिरे से शायद इसलिए नकारा जा रहा है क्योंकि यदि उसके होने को स्वीकार कर लिया जाएगा तो सरकार के ऊपर उसे रोकने की जिम्मेदारी आन पड़ेगी और फिलहाल सरकार उसे रोकना नहीं चाहती। 

हिंसा न रुके, इसके पीछे उसे करने वाले राजनीतिक दल की मंशा तो समझ में आना स्वाभाविक है पर इसके पीछे सरकार की मंशा क्या हो सकती है? इस प्रश्न का उत्तर किसी वैज्ञानिक फॉर्मूले में नहीं छिपा है कि उसे समझना मुश्किल हो। इसका उत्तर इस बात में है कि पिछले लगभग सात वर्षों में पश्चिम बंगाल में सरकार और सत्ताधारी दल के बीच जो एक सीमा-रेखा रहनी चाहिए, वह लगातार धुँधली होती गई और आज लगभग मिट गई है।

सत्ताधारी दल और सरकार के बीच इस रेखा के मिटने के संकेत पहले से मिलने लगे थे। इसका उदाहरण चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस वक्तव्य में है, जब किसी प्रचार मंच पर बैठे हुए उन्होंने कहा था कि; चुनाव के बाद तो केंद्र के अर्धसैनिक बल वापस चले जाएँगे। तब भाजपा समर्थकों और मतदाताओं को कौन बचाएगा?

इस बात के संकेत तब भी मिले थे जब सीबीआई ने उच्चतम न्यायालय को यह जानकारी दी थी कि शारदा ग्रुप के टीवी चैनल तारा टीवी के कर्मचारियों को मई 2013 से लेकर अप्रैल 2015 तक, हर महीने 27 लाख रुपए का भुगतान चीफ मिनिस्टर रिलीफ फण्ड से हुआ था। यह ऐसा खुलासा था, जो बताता है कि पश्चिम बंगाल सरकार और राज्य के सत्ताधारी दल के बीच रेखा कब से धुँधली होती रही है।

इसके अलावा जो बात सबको हतप्रभ करती है, वह है तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसदों का आचरण। सांसदों ने जिस तरह के बयान और जिस तरह की निम्न स्तरीय बातें राज्यपाल के लिए कही हैं, वह अपने आप में अभूतपूर्व है और भारतीय लोकतंत्र में कल्पना से भी परे रहा है।

कल्याण बनर्जी का राज्यपाल के खिलाफ FIR करने की बात हो या सांसद महुआ मोइत्रा का वह बयान, जिसमें उन्होंने राज्यपाल से सीधा कहा कि प्रदेश में परिस्थियाँ तभी ठीक होंगी, जब राज्यपाल दिल्ली वापस जाएँगे और अपने लिए कोई नई नौकरी ढूँढ लेंगे। ऐसे बयान किसी भी लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा कभी नहीं रहे। ऐसे बयान की अपेक्षा उनसे नहीं की जा सकती, जो संवैधानिक पदों पर बैठे हुए हैं।

चिंता का जो सबसे बड़ा विषय है, वह यह है कि सरकार ने अभी तक हिंसा रोकने की कोई मंशा नहीं दिखाई है और इसका अर्थ यह है कि सरकार के सत्ताधारी दल किसी तरह के राजनीतिक समाधान के पक्ष में नहीं हैं और यह एक ऐसी परिस्थिति है, जो किसी भी लोकतंत्र के लिए सही नहीं क्योंकि लोकतांत्रिक मूल्यों को खतरे में डालने वाली सरकारें चल तो सकती हैं, पर किसी का भला नहीं कर सकतीं। 

क्या हिंसा ऐसे ही चलती रहेगी? क्या हिंसा पर राजनीतिक या नैतिक विमर्श के लिए जरा भी जगह नहीं है? आखिर ऐसा क्यों है कि केरल या पश्चिम बंगाल में जब सरकार द्वारा सह दिए जाने वाली हिंसा की बात होती है तो लोकतंत्र के हिस्सेदारों को साँप सूँघ जाता है? क्यों मीडिया चुप रहता है या क्यों न्यायालय इस हिंसा का संज्ञान खुद नहीं लेते?

पिछले पंद्रह दिनों में तमाम समूहों ने राष्ट्रपति से लेकर उच्चतम न्यायालय को प्रदेश में हो रही हिंसा को रोकने के लिए हस्तक्षेप करने की माँग की पर ऐसा क्यों है कि इन माँगों पर किसी ने न तो कोई ध्यान दिया और न ही किसी तरह विमर्श शुरू करने की चेष्टा की? केवल भारतीय जनता पार्टी के समर्थक सोशल मीडिया पर दिन-रात अपना सिर किसी न दिखने वाली दीवार पर मारते रहते हैं और केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और भाजपा के नेताओं से प्रश्न पूछते रहते हैं।

मीडिया और ओपिनियन मेकर्स की मजबूरी तो समझ में आती है पर न्यायालय की कौन सी मजबूरी है? ये ऐसे प्रश्न हैं, जो न केवल अनुत्तरित रह जा रहे हैं बल्कि लोकतंत्र के तथाकथित स्तंभों का चरित्र भी दिखाते हैं। 

प्रश्न यह भी उठता है कि ऐसी राजनीति के बीच केंद्र-राज्य सम्बन्धों का क्या बनेगा? उस संघीय ढाँचे का क्या होगा, जिसकी रक्षा का दम आए दिन सभी भरते रहते हैं? राज्य सरकार केंद्र के साथ जिस तरह के टकराव के रास्ते पर है, उससे राज्य की जनता का कितना भला होगा? अधिकतर क्षेत्रीय दलों को केंद्र सरकार से शिकायतें रहती हैं पर पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी दल जिस तरह का आचरण कर रहा है, वह क्या इन शिकायतों से मेल खाता है?

प्रश्न यह भी है कि ऐसा आचरण राज्य सरकार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या दल के सांसद कितने दिन और अफोर्ड कर पाएँगे? क्या ये लोग भविष्य में अपने इस आचरण को तब न्यायसंगत ठहरा पाएँगे, जब उन्हें प्रदेश की जनता के सामने एक बार फिर से जाना पड़ेगा? प्रदेश में म्युनिसिपल और पंचायत चुनाव ज्यादा दूर नहीं, ऐसे में राजनीतिक दलों को जल्द ही जनता के सामने फिर से जाना होगा। सत्ताधारी दल को यह समझने की आवश्यकता है कि लोकतंत्र मजबूत से मजबूत दलों और नेताओं से ऊपर होता है।

पिता मुलायम ने लगवाई वैक्सीन, बेटे अखिलेश ने कहा था ‘बीजेपी की वैक्सीन’, यूपी डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य ने कहा- ‘माफी माँगें’

समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने सोमवार (7 जून 2021) को लखनऊ के मेदांता अस्पताल में कोरोना वैक्सीन की पहली डोज लगवाई। 81 वर्षीय मुलायम सिंह की वैक्सीन लगवाते हुए समाजवादी पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से तस्वीर शेयर की गई। इस बीच उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और यूपी बीजेपी के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने मुलायम सिंह की वैक्सीन लगवाते हुए इसी तस्वीर को ट्वीट करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर तंज कसा है।

मौर्य ने ट्वीट कर स्वदेशी वैक्सीन लगवाने के लिए मुलायम सिंह यादव को धन्यवाद दिया है। साथ ही उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, ”आपका वैक्सीन लगवाना इस बात का प्रमाण है कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से वैक्सीन को लेकर अफवाह फैलाई गई थी। इसके लिए अखिलेश यादव को माफी माँगनी चाहिए।”

इसके अलावा यूपी बीजेपी के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने भी ट्वीट कर अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट कर मुलायम सिंह यादव के वैक्सीन लगवाने को अच्छा संदेश बताया। स्वतंत्रदेव सिंह ने आशा जताई कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कार्यकर्ता भी अपने संरक्षक के इस कदम से प्रेरणा लेंगे।

मालूम हो कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 3 जनवरी 2021 को कहा था, “यह भाजपा की वैक्सीन है, हम नहीं लेंगे। जब अपनी सरकार आएगी तब अपनी वैक्सीन ही ली जाएगी।“ अखिलेश यादव ने कोरोना वैक्सीन पर सवाल उठाए थे और उसे भाजपा की वैक्सीन कहा था।

अखिलेश ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था, “मैं कोरोना का टीका नहीं लगवाऊँगा। ये टीका तो भाजपा वालों का है। मैं इस पर कैसे विश्वास कर सकता हूँ।” अखिलेश यादव के बयान पर तब इंटरनेट मीडिया पर खूब हंगामा मचा था।

हालाँकि, बाद में आलोचना होने पर उन्होंने अपने सुर बदले और कहा कि सरकार जल्दी टीकाकरण की तारीख तय करे। बता दें कि मुलायम सिंह से पहले उनकी बहू अपर्णा यादव ने भी पिछले महीने लखनऊ के लोकबंधु हॉस्पिटल में वैक्सीन लगवाई थी।

स्तन काटे, प्राइवेट पार्ट्स जलाया… फिर मारा: खालिस्तानी आतंकी भिंडरावाले ने अकाल तख्त में एक महिला को दी थी ‘सजा’

ऑपरेशन ब्लू स्टार की 37वीं बरसी पर कई खालिस्तानी समर्थकों ने आतंकी जरनैल सिंह भिंडरावाले को ‘श्रद्धांजलि’ दी। भारत के पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने खालिस्तानी आतंकी को एक शहीद करार देकर उसे प्रणाम किया। बाद में बवाल होने पर माफी माँगी। पिछले साल जैजी बी नाम का पंजाबी गायक भिंडरावाले को पूरा का पूरा गाना समर्पित कर चुका है।

6 जून के आते ही खालिस्तानी आतंकी भिंडरावाले का ‘महिमामंडन’ होना कोई नई बात नहीं है। लेकिन हैरानी इस बात की है कि एक आतंकी जिसने सिखों को बदनाम करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी, जिसने अपने अपराधों पर धर्म की चादर डाल दी, जिसने खून से एक पावन स्थल को मैला कर दिया, उसे ये लोग धर्म बचाने वाला कैसे कह सकते हैं?

आपको याद होगा, पिछले साल पाताललोक सीरीज आई थी। सीरीज में एक सिख की वेशभूषा वाले व्यक्ति को जब महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखा गया तो पूरा एक अभियान सोशल मीडिया पर चल पड़ा कि ये सीरीज सिखों को महिलाओं के प्रति बुरा दिखाती है। बाकायदा बयान जारी करके ये बताया गया कि कैसे इतिहास में सिखों ने महिलाओं की इज्जत के लिए अपनी जान दाव पर लगा दी और ये सीरीज कैसे उन्हें बलात्कारी बता सकती है।

निस्संदेह ही सिख समुदाय ने महिलाओं की इज्जत के लिए जो बलिदान दिया, वह भुलाया नहीं जा सकता और इसीलिए, इस सिख समुदाय द्वारा उस जरनैल सिंह का महिमामंडन बिलकुल शोभा नहीं देता, जिसने न केवल सैंकड़ों हिंदुओं के खून से अपने हाथों को रंगा बल्कि एक महिला के साथ बर्बरता की वह हद पार की, जिसे सोच कर रूह काँप जाए।

बलजीत कौर को भिंडरावाले ने कैसे मरवाया

बलजीत कौर नाम की महिला के बारे शायद आपने कम ही सुना हो। ये वो विवादित महिला थी, जिसने भिंडरावाले के दाएँ हाथ सुरिंदर सिंह सोढी की हत्या में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 30 साल की एक हरिजन महिला ने सोढी पर गोली दागी थी। जिसके बाद भिंडरावाले तिलमिला उठा। उसने सोढी की हत्या में शामिल सभी लोगों का पता लगाने के लिए अपने आदमियों से कहा और मात्र 24 से 48 घंटे में सभी साजिशकर्ता उसके सामने ले आए गए। सबसे पहले हत्या की साजिश रचने वाले साजिशकर्ता को अकाल तख्त बुलाया गया और बाद में उसका गला काटकर हत्या कर दी गई।

इसके बाद भिंडरावाले के लोगों का मारने का अंजाम क्या होता है, ये संदेश देने के लिए बलजीत कौर को अकाल तख्त में लाया गया। चूँकि सोढी पर गोली दागी थी, तो वहाँ उसे तमाम प्रताड़नाएँ दी गईं। अंत में उसके दोनों स्तनों को काट कर उसे वहीं मार दिया गया। रिपोर्ट बताती हैं कि बलजीत के प्राइवेट पार्ट्स को जला दिया गया था। उसकी हड्डियाँ तोड़ी जा चुकी थीं। जांघें और हाथ बुरी तरह मसल दिए गए थे। शुरू में किसी को समझ भी नहीं आ रहा था कि ये शव किसका है। हालाँकि बाद में पुलिस ने कयास लगाए कि ऐसी बर्बरता खालिस्तानी सिर्फ बलजीत के साथ कर सकते हैं, जिसने सोढी को मारा था।

इसके बाद हत्या में शामिल तीसरे व्यक्ति को मारना भिंडरावाले के लिए बड़ा काम नहीं था। उसने बलजीत के अन्य साथी सुरेंद्र सिंह चिंदा की भी हत्या की और बाद में अपना डर फैलाने के लिए उसके शव को बैग में रख कर बाहर फेंक दिया। सभी साजिशकर्ताओं की हत्या के बाद भिंडरावाले ने पवित्र परिसर की दीवारों पर शेखी बघारते हुए लिखा था, “चौबीस घंटों के भीतर, हमने हत्यारों और उनके दो सहयोगियों को खत्म कर दिया है।”

इन सिलसिलेवार हत्याओं के बाद भिंडरावाले ने अकाली दल के सचिव गुरुचरण सिंह को उन्हें सौंपने की माँग की थी। भिंडरावाले का कहना था कि गुरुचरण सिंह ने ही उसे, उसके भतीजे स्वर्ण सिंह और सोढी को मारने के लिए ये हत्यारे बुलाए थे। इसलिए अकालियों को उन्हें गुरुचरण को सौंप देना चाहिए। अपना डर फैलाने के लिए भिंडरावाले ने एक साइनबोर्ड लगवाया था, जिस पर चिंदा और बलजीत की तस्वीरें थीं। साथ ही लिखा था कि सोढी के हत्यारों से 48 घंटे में बदला ले लिया अब साजिशकर्ताओं से लेंगे।

ऑपरेशन ब्लू स्टार के खत्म होते ही 300 निर्दोष लोगों की जान जा चुकी थी। आज उसे हरभजन सिंह जैसे लोग प्रणाम करते हैं। खालिस्तान के समर्थन में भारत के झंडे जलाए जाते हैं जबकि हकीकत यह है कि भिंडरावाले एक आतंकी था, जिसने सिख धर्म की आड़ में देश को तोड़ने का काम किया। उसके मन में यदि इस धर्म के प्रति सम्मान होता तो क्या वह गुरु ग्रंथ साहिब से ऊपर रहने का पाप करता? सिखों के आध्यात्मिक मार्गदर्शक पूर्व जत्थेदार ज्ञानी प्रताप सिंह, जिन्होंने अकाल तख्त पर कब्जा करने और हथियारों को स्टॉक करने के लिए भिंडरावाले का विरोध किया, उनको अपने समर्थकों से गोली मरवाता?

भिंडरावाले ने अकाल तख्त में वह सब किया, जो 18वीं सदी में अहमद शाह अब्दाली करके गया था। जैसे 1762 में, अब्दाली ने स्वर्ण मंदिर के पवित्र सरोवर को जानवरों के खून और अंतड़ियों से भर दिया था… 37 साल पहले वैसे ही सारे काम भिंडरावाले और उसके समर्थक कर रहे थे।

IAS था, जनता का नौकर था… लेकिन PM कैंडिडेट मोदी का इंटरव्यू दूरदर्शन पर काट कर चलवाया था

प्रसार भारती के पूर्व सीईओ और IAS रह चुके जवाहर सरकार इस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ नीता अंबानी की फोटोशॉप्ड तस्वीर शेयर करने के कारण चर्चा में हैं। हालाँकि, ऐसा पहली दफा नहीं है कि जवाहर सरकार ने पीएम मोदी की छवि धूमिल करने का प्रयास किया हो। इससे पहले साल 2014 में भी लोकसभा चुनावों के समय भी वह मोदी विरोधी काम करके खबरों में आ चुके हैं।

2 मई 2014 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जवाहर सरकार ने 2014 लोकसभा चुनावों के दौरान दूरदर्शन पर प्रसारित बीजेपी के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के इंटरव्यू को ‘स्पष्ट रूप से एडिट’ करने की बात स्वीकार की थी। मोदी का ये इंटरव्यू 27 अप्रैल, 2014 को दूरदर्शन पर प्रसारित हुआ था।

सरकार ने मानी थी 2014 में मोदी के इंटरव्यू में काट-छाँट की बात

दूरदर्शन ने 27 अप्रैल को प्रसारित मोदी के इंटरव्यू के कुछ हिस्सों को एडिट किया था, जिसमें उन्होंने प्रियंका गांधी वाड्रा और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल का जिक्र किया था। इसे लेकर राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया था और भारतीय जनता पार्टी ने दूरदर्शन पर सरकार के नियंत्रण का आरोप लगाया था।

नरेंद्र मोदी के इंटरव्यू को जवाहर सरकार ने काट-छाँट करके चलवाया था और इसे वह अपने पत्र में स्वीकार भी चुके हैं। उस समय पूरे 56 मिनट का इंटरव्यू महज 28 मिनट में, बिना किसी को जानकारी दिए प्रसारित किया गया था।

इंटरव्यू से जो हिस्सा काटा गया वहाँ मोदी ने प्रियंका गाँधी और अहमद पटेल पर अपनी सॉफ्ट बातों को रखा था। लेकिन मोदी का यह कॉर्नर दिखाना शायद सिरकार कें नेतृत्व में दूरदर्शन को नामंजूर था। अंत: फैसला लिया गया कि इंटरव्यू ले लिया है तो वह टेलीकास्ट होगा, लेकिन एडिटिंग के बाद। बताया जाता है जिस समय मोदी के इंटरव्यू की यह एडिटिंग चल रही थी उस समय कुछ लोगों को ही ए‍डिटिंग रूम में जाने की इजाजत थी। बाकी लोगों को उस कमरे से बाहर रखा गया था।

साल 2014 में मोदी के इंटरव्यू की कहानी

साल 2014 में भाजपा द्वारा नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का दावेदार बनाने की जब घोषणा की गई तभी दूरदर्शन पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने उस इंटरव्यू को अहमदाबाद में शूट किया। लेकिन अंदरूनी कारणों से दूरदर्शन ने इसके प्रसारण में देर कर दी। उस समय सरकार को कई जगह से संदेश आने लगे कि कहीं इंटरव्यू ड्रॉप तो नहीं कर दिया गया।

सोशल मीडिया और फोन कॉल्स से पड़ रहे दबाव के बाद 27 अप्रैल को इस इंटरव्यू को बिना किसी को सूचित किए प्रसारित किया गया। इंटरव्यू में काट-छाँट किस स्तर पर हुई थी इसका अंदाजा इससे लगता है कि 56 मिनट का इंटरव्यू था और प्रसारित हुआ मात्र 28 मिनट का।

ये एडिटिड इंटरव्यू देख भाजपा समर्थक दूरदर्शन पत्रकार अशोक श्रीवास्तव पर अपना गुस्सा निकालने लगे और सरकार से तमाम सवाल-जवाब होने लगे। सरकार ने पहले तो इस हरकत का ठीकरा तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी पर फोड़ दिया। जिससे भाजपा ने तत्कालीन सरकार पर मीडिया को कंट्रोल करने के आरोप लगाए।

लेकिन दूरदर्शन की पोल तब खुली जब तिवारी ने सरकार की बातों से किनारा कर लिया। तिवारी ने कहा, “प्रसार भारती एक स्वायत्त प्रसारक है और संसद के एक अधिनियम द्वारा शासित है। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय का प्रसारक के साथ एक व्यापक संबंध है। हम उनके समाचार एजेंडे में हस्तक्षेप नहीं करते हैं।”

अब ये जानना दिलचस्प है कि सरकार ने अपने पत्र में लिखा क्या था। तो इंडिया टुडे की रिपोर्ट बताती है कि सरकार ने इस पत्र में इंटरव्यू टेलीकास्ट करने वाली स्थिति को बयान किया था। इसमें बताया था कि कैसे डीडी न्यूज के सर्वोत्तम प्रयास (एडिटेड वीडियो) के बावजूद एक संतुलित वीडियो नहीं बन पाया और वह लोग इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं थे कि इसके काउंटर में राहुल गाँधी का इंटरव्यू होगा या नहीं।

नरेंद्र मोदी के इंटरव्यू का यह वीडियो 1 मई 2014 को नरेंद्र मोदी यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया था। इसमें मात्र 6:00 सेकेंड के स्लॉट के बाद देख सकते हैं कि उन्होंने प्रियंका गाँधी को बेटी कहते हुए अपनी बात रखी है। जिसे दूरदर्शन ने वीडियो से एडिट करवा दिया था।

इसके अलावा इस इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉन्ग्रेस के दिवंगत नेता अहमद पटेल के लिए भी कई दोस्ताना बातें कहीं थी। उन्होंने बताया था कि कैसे उनसे संबंध अहमद पटेल से अच्छे थे और वह लोग उन्हें अहमद भी नहीं कहते बल्कि बाबूभाई कहते थे। हालाँकि अहमद पटेल ने चुनाव नजदीक देखते हुए मोदी के दावों को खारिज कर दिया था और कहा था कि उन्होंने सिर्फ 1980 में मोदी के साथ लंच किया था।

आतंकी भिंडरावाले को ‘शहीद’ बताने पर हरभजन सिंह ने माँगी माफी, कहा- हड़बडी में व्हाट्सएप फॉरवर्ड शेयर कर दिया था

खालिस्तानी आतंकी जरनैल सिंह भिंडरावाले का महिमामंडन करने के कारण चौतरफा घिरे पूर्व टेस्ट क्रिकेटर हरभजन सिंह ने माफी माँग ली है। भिंडरावाले को दी श्रद्धांजलि को व्हाट्सएप फॉरवर्ड बताते हुए कहा है कि हड़बड़ी में बिना समझे शेयर कर दिया था। खुद को देश के लिए लड़ने वाला सिख बताते हुए देशवासियों की भावनाएँ आहत करने के लिए बिना शर्त माफी माँगी है

हरभजन ने भिंडरावाले को ‘शहीद’ बताते हुए इंस्टाग्राम  स्टोरी में उसकी एक तस्वीर साझा कर, ‘प्रणाम शहीदा नू’ लिखा था। अब इसके लिए उन्होंने ट्विटर के जरिए माफी माँगी है। अपने पोस्ट में कहा है कि वह भारत विरोधी या अपने देशवासियों के खिलाफ किसी भी चीज का समर्थन नहीं करते हैं।

उन्होंने कहा, ”मैं कल (6 जून 2021) के एक इंस्टाग्राम पोस्ट के लिए अपना स्पष्टीकरण देना चाहता हूँ और माफी माँगना चाहता हूँ। यह एक व्हाट्सएप फॉरवर्ड था, जिसे मैंने बिना सोचे-समझे जल्दबाजी में पोस्ट कर दिया, जो यह दर्शाता है कि मैं भी इनके साथ खड़ा हूँ। यह मेरी गलती थी, जिसे मैं स्वीकार करता हूँ और किसी भी मंच पर मैं उस पोस्ट पर लिखे विचारों और उन लोगों का समर्थन नहीं करता जिनकी तस्वीरें उसमें थीं। मैं एक सिख हूँ, जो भारत के लिए लड़ेगा न कि भारत के खिलाफ। मैंने राष्ट्र की भावनाओं को आहत किया, इसके लिए यह मेरी बिना शर्त माफी है। वास्तव में मैं अपने लोगों के खिलाफ किसी भी राष्ट्र विरोधी समूह का समर्थन नहीं करता और ना ही कभी करूँगा।”

हरभजन ने लिखा, ”मैंने 20 साल तक इस देश के लिए अपना खून-पसीना बहाया है। मैं कभी भी भारत विरोधी किसी भी चीज का समर्थन नहीं करूँगा।”

बता दें कि रविवार (6 जून 2021) को ऑपरेशन ब्लू स्टार की 37वीं बरसी पर हरभजन सिंह ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से एक स्टोरी शेयर की थी। इसमें लिखा था, “सम्मान के साथ जीना और धर्म के लिए मरना। 1 जून से 6 जून 1984 को सचखंड श्री हरिमंदर साहिब पर शहीद होने वाले सिंह-सिंहनियों की शहादत को प्रणाम।”

उनकी इस हरकत के बाद वह ट्विटर पर ट्रेंड होने लगे और लोग उनसे सवाल करने लगे कि जिस भिंडरावाले ने तमाम हिंदुओं को मारा क्या वह शहीद है? तस्वीर में भी देख सकते हैं कि भिंडरावाले एकदम हीरो की तरह सेंटर में नीली पगड़ी में है।

राज्य ‘फेल’, अब वैक्सीनेशन का 100% काम/खर्च उठाएगी मोदी सरकार: 80 करोड़ देशवासियों को नवंबर तक फ्री राशन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (जून 7, 2021) को शाम 5 बजे राष्ट्र को सम्बोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि बीते सौ वर्षों में आई ये सबसे बड़ी महामारी है, त्रासदी है। प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि इस तरह की महामारी आधुनिक विश्व ने न देखी थी, न अनुभव की थी, बावजूद इसके इतनी बड़ी वैश्विक महामारी से हमारा देश कई मोर्चों पर एक साथ लड़ा है। उन्होंने कहा कि पूरी विश्व में वैक्सीन के लिए जो माँग है, उसकी तुलना में उत्पादन करने वाले देश और कंपनियाँ गिनी-चुनी हैं।

उन्होंने लोगों को कल्पना करने को कहा कि अगर यहाँ स्वदेशी वैक्सीन नहीं होती तो इतने बड़े देश का क्या होगा? उन्होंने याद दिलाया कि पहले भारत को वैक्सीन प्राप्त करने में दशकों लग जाते थे क्योंकि जब वैक्सीन का काम विदेशों में पूरा हो जाता था, यहाँ काम शुरू नहीं हो पाता था। उन्होंने पोलियो, हेपेटाइटिस बी और स्मॉल पॉक्स जैसी बीमारियों का नाम लिया। उन्होंने जानकारी दी कि 2014 में भारत में वैक्सीनेशन कवरेज मात्र 60% था।

उन्होंने कहा कि पुरानी रफ़्तार से भारत को पूरे देश के टीकाकरण में 40 साल लग जाते, लेकिन केंद्र सरकार ने ‘मिशन इंद्रधनुष’ के जरिए शत-प्रतिशत वैक्सीनेशन कवरेज का लक्ष्य रखा, और 90% हासिल कर ली। उन्होंने कहा कि इसके लिए टीकाकरण की गति और दायरा, दोनों बढ़ाया गया। उन्होंने बच्चों को आने बीमारियों से बचाने के लिए नए टीके लाने की याद दिलाई और कहा कि सरकार को गरीबों और उनके बच्चों की चिंता थी, जो आज तक वंचित थे।

उन्होंने बताया कि शत-प्रतिशत टीकाकरण के रास्ते में कोरोना वायरस ने घेर लिया और दुनिया में ये आशंका थी कि भारत इतनी बड़ी आबादी को कैसे बचाएगा। उन्होंने बताया कि सेकेंड वेव के दौरान अप्रैल और मई के महीने में भारत में मेडिकल ऑक्सीजन की डिमांड अकल्पनीय रूप से बढ़ गई थी। भारत के इतिहास में कभी भी इतनी मात्रा में मेडिकल ऑक्सीजन की जरूरत महसूस नहीं की गई और इस जरूरत को पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर काम किया गया। सरकार के सभी तंत्र लगे।

पीएम मोदी ने बताया कि देश भर में 23 करोड़ से भी अधिक वैक्सीन की डोज दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि हमारे प्रयासों में सफलता तभी मिलती है, जब स्वयं पर विश्वास हो। उन्होंने कहा कि हमें हमारे वैज्ञानिकों पर पूरा भरोसा था। उन्होंने बताया कि रिसर्च वर्क के दौरान ही लॉजिस्टिक्स व अन्य तैयारियाँ शुरू कर दी गई थीं। उन्होंने बताया कि पिछले साल अप्रैल में ही वैक्सीन टास्क फोर्स का गठन कर दिया गया था, जाव कोरोना के कुछ हजार मामले ही आए थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कोरोना वैक्सीन को लेकर राष्ट्र को सम्बोधन

उन्होंने ये भी बताया कि वैक्सीन निर्माता कंपनियों को हर स्तर पर मदद की गई। उन्होंने बताया कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मिशन कोविड सुरक्षा’ के माध्यम से उन्हें हजारों करोड़ रुपए उपलब्ध कराए गए। उन्होंने जानकारी दी कि आज देश में 7 कंपनियाँ विभिन्न प्रकार के वैक्सीन के निर्माण में लगी हुई हैं और 3 ट्रायल मोड में हैं। दूसरे देशों से वैक्सीन खरीद की भी प्रक्रिया तेज़ कर दी है। इन्होने बताया कि बच्चों के लिए दो वैक्सीन के लिए भी ट्रायल चल रहा है।

प्रधानमंत्री ने एक ‘नजल वैक्सीन’ के निर्माण को लेकर तैयारी तेज़ होने की बात कही, जिसे इंजेक्ट न कर के नाक में स्प्रे कर के दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इतने कम समय में वैक्सीन का निर्माण पूरी मानवता के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इसकी सीमाएँ भी हैं। उन्होंने बताया कि भारत ने भी WHO के मानकों के हिसाब से काम किया और संसद के विभिन्न दलों और मुख्यमंत्रियों से बैठकों में मील सुझावों को प्राथमिकता दी। प्रधानमंत्री ने कहा;

“इस साल 16 जनवरी से शुरू होकर अप्रैल महीने के अंत तक, भारत का वैक्सीनेशन कार्यक्रम मुख्यत: केंद्र सरकार की देखरेख में ही चला। सभी को मुफ्त वैक्सीन लगाने के मार्ग पर देश आगे बढ़ रहा था। देश के नागरिक भी, अनुशासन का पालन करते हुए, अपनी बारी आने पर वैक्सीन लगवा रहे थे। इस बीच, कई राज्य सरकारों ने फिर कहा कि वैक्सीन का काम डी-सेंट्रलाइज किया जाए और राज्यों पर छोड़ दिया जाए। तरह-तरह के स्वर उठे। जैसे कि वैक्सीनेशन के लिए एज ग्रुप क्यों बनाए गए? दूसरी तरफ किसी ने कहा कि उम्र की सीमा आखिर केंद्र सरकार ही क्यों तय करे? कुछ आवाजें तो ऐसी भी उठीं कि बुजुर्गों का वैक्सीनेशन पहले क्यों हो रहा है? भाँति-भाँति के दबाव भी बनाए गए, देश के मीडिया के एक वर्ग ने इसे कैंपेन के रूप में भी चलाया।”

प्रधानमंत्री ने आलोचनाओं की बात करते हुए कहा कि देश में कम होते कोरोना के मामलों के बीच, केंद्र सरकार के सामने अलग-अलग सुझाव भी आने लगे, भिन्न-भिन्न माँगें होने लगीं और पूछा जाने लगा, सब कुछ भारत सरकार ही क्यों तय कर रही है? राज्य सरकारों को छूट क्यों नहीं दी जा रही? राज्य सरकारों को लॉकडाउन की छूट क्यों नहीं मिल रही? पीएम ने याद किया कि ‘One Size Does Not Fit All’ जैसी बातें भी कही गईं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा ऐलान किया कि आज ये निर्णय़ लिया गया है कि राज्यों के पास वैक्सीनेशन से जुड़ा जो 25 प्रतिशत काम था, उसकी जिम्मेदारी भी भारत सरकार उठाएगी। ये व्यवस्था आने वाले 2 सप्ताह में लागू की जाएगी। इन दो सप्ताह में केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर नई गाइडलाइंस के अनुसार आवश्यक तैयारी कर लेंगी। उन्होंने ये घोषणा भी की कि सोमवार (जून 21, 2021) से देश के हर राज्य में, 18 वर्ष से ऊपर की उम्र के सभी नागरिकों के लिए, भारत सरकार राज्यों को मुफ्त वैक्सीन मुहैया कराएगी।

प्रधानमंत्री ने ऐलान किया कि वैक्सीन निर्माताओं से कुल वैक्सीन उत्पादन का 75 प्रतिशत हिस्सा भारत सरकार खुद ही खरीदकर राज्य सरकारों को मुफ्त देगी। नए फैसले के अनुसार, देश की किसी भी राज्य सरकार को वैक्सीन पर कुछ भी खर्च नहीं करना होगा। अब तक देश के करोड़ों लोगों को मुफ्त वैक्सीन मिली है। अब 18 वर्ष की आयु के लोग भी इसमें जुड़ जाएँगे। सभी देशवासियों के लिए भारत सरकार ही मुफ्त वैक्सीन उपलब्ध करवाएगी।

बकौल पीएम मोदी, भारत सरकार ने फैसला लिया है कि देश में बन रही वैक्सीन में से 25 प्रतिशत, प्राइवेट सेक्टर के अस्पताल सीधे ले पाएँ, ये व्यवस्था जारी रहेगी। प्राइवेट अस्पताल, वैक्सीन की निर्धारित कीमत के उपरांत एक डोज पर अधिकतम 150 रुपए ही सर्विस चार्ज ले सकेंगे। इसकी निगरानी करने का काम राज्य सरकारों के ही पास रहेगा। आज सरकार ने फैसला लिया है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को अब दीपावली तक आगे बढ़ाया जाएगा। यानी, नवंबर तक 80 करोड़ से अधिक देशवासियों को, हर महीने तय मात्रा में मुफ्त अनाज उपलब्ध होगा।

भगवान शिव के लिए की गंदी बात, हम लिख नहीं सकते: इंस्टाग्राम क्रिएटर्स ने विरोध के बाद माँगी माफी, देखें Video

सोशल मीडिया पर रविवार (6 जून 2021) देर रात एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें हैदराबाद के दो इंस्टाग्राम कंटेंट क्रिएटर्स भगवान शिव पर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी करते नजर आए। वीडियो को Youel.in इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट किया गया था। इसमें एक लड़का और एक लड़की भगवान शिव को खुद को न### (castrate) करने की बात कहते नजर आए। इस वीडियो में कई और अपमानजनक टिप्पणियों के बाद इन दोनों ने कहा कि लोगों को इससे नाराज नहीं होना चाहिए।

वहीं, हिंदू धर्म और भगवान शिव पर की गई इस अपमानजनक टिप्पणी को लेकर लोगों में खासा रोष देखा जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से इस मामले पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

इस मामले पर भाजपा विधायक टाइगर राजा सिंह ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ट्वीट किया, ”वीडियो में नजर आने वाले कृतिका गौरा और चिटिन दोनों ही हैदराबाद के निवासी हैं।” उन्होंने तेलंगाना डीजीपी और प्रशासन से जुड़े कई अधिकारियों को ट्विटर पर टैग कर इन लोगों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने को कहा है।

मामला जोर पकड़ने के बाद इंस्टाग्राम कंटेंट क्रिएटर्स ने इसको लेकर माफी माँगी है। एक इंस्टाग्राम स्टोरी में उन्होंने कहा, “अप्रैल से हमने हिंदू धर्म और इंसान (Hinduism & Humans) शीर्षक से तीन भाग में वीडियो शेयर किया, लेकिन पिछले 24 घंटों में अचानक हमें इसके विरोध में कई रिएक्शन मिले, जबकि वीडियो शेयर करते हुए हमने यह बार-बार कहा था कि हमारा वीडियो किसी को ठेस पहुँचाने के इरादे से नहीं बनाया गया था।”

कंटेंट क्रिएटर्स ने आगे कहा, “इसलिए हमने पूरे तीन-भाग वाले वीडियो को स्थायी रूप से हटाने का फैसला किया है। हमारे ​वीडियो से अनजाने में जिसे भी ठेस पहुँची है, उन सभी लोगों से हमने तहे दिल से माफी माँग ली है। हम आपसे हमारी माफी स्वीकार करने और सभी संबंधित पक्षों को टैग करने का अनुरोध करते हैं।”

यहाँ देखना अभी बाकी है कि क्या इस तरह का संगीन मामला केवल माफी माँगने से सुलझ सकता है। या पुलिस हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई करने का फैसला करती है। खासकर जब एक स्थानीय विधायक ने पुलिस अधिकारियों को कार्रवाई करने के लिए कहा है।

‘मेरे को ऐसे धक-धक होरेला है’: PM मोदी के सम्बोधन से पहले लोगों को याद आए बाबू भइया, विपक्ष के लिए अंडरग्राउंड होने का समय?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार (जून 7, 2021) को शाम 5 बजे राष्ट्र को सम्बोधित करने वाले हैं, ऐसे में कयास लगने शुरू हो गए हैं कि वो किस मुद्दे पर बात करेंगे। किसी का कहना है कि वो कोरोना को लेकर बात करेंगे तो कोई कयास लगा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार पर बात होगी। लेकिन, सोशल मीडिया में मीम्स की बौछाड़ हो गई है और लोग अपने-अपने अंदाज़ से पीएम मोदी के इस सम्बोधन को लेकर माहौल हल्का कर रहे हैं।

एक यूजर ने ‘कृष’ फिल्म से ह्रितिक रोशन का डायलॉग शेयर किया, जिसमें वो कहते हैं – “मेरी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया गया है माँ”। ‘रोफ़ल स्टालिन’ नामक हैंडल ने लिखा कि टेलीविजन सेट अभी यही सोच रहा होगा।

एक यूजर ने रणवीर कपूर की फिल्म ‘रॉकस्टार’ के गाने की पंक्ति शेयर करते हुए लिखा कि जब भी पीएम मोदी के सम्बोधन की खबर आती है, उन्हें ऐसा ही लगता है – “मेरी रूह का परिंदा फड़फड़ाए।”

एक यूजर ने लिखा कि पीएम मोदी के सम्बोधन से पहले ही लिबरलों और विपक्ष की हालत कुछ ऐसी हो गई है –

एक यूजर ने लिखा, “अब भारतीयों की यही इच्छा है कि लॉकडाउन हमेशा के लिए ख़त्म होने की घोषणा की जाए और वो मोदीजी से यही चाहते हैं”

एक यूजर ने ‘हेरा फेरी’ फिल्म से परेश रावल का डायलॉग शेयर किया, जिसमें वो कहते हैं – “मेरे को ऐसे धक्-धक् हो रैला है।”

एक यूजर ने ‘बाहुबली’ फिल्म से ‘स्वामी देना साथ हमारा’ वाले गाने का दृश्य शेयर किया –

एक यूजर ने ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ से शॉल ओढ़े मनोज वाजपेयी की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि जब भी पीएम मोदी देश को सम्बोधित करते हैं, विपक्ष यही सोचता है कि अब अंडरग्राउंड होने का समय आ गया है।

वहीं एक यूजर ने आशंका जताई कि पीएम मोदी कहीं फिर से लोगों को टास्क न दे दें। कुछ लोगों ने नोटेबंदी वाले फैसले को याद करते हुए सलाह दी कि अब लोगों को अपने-अपने सीट बेल्ट कस के बाँध लेने चाहिए। वहीं कुछ लोग उन्हें ही टैग कर के पूछ रहे हैं कि वो आज क्या घोषणा करेंगे।

PM मोदी के अंडर काम करने वाला IAS, दूरदर्शन/प्रसार भारती का था CEO… अब प्रधानमंत्री की फेक फोटो से फैला रहा झूठ

प्रसार भारती के पूर्व सीईओ जवाहर सरकार ने सोमवार (जून 7, 2021) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधने के लिए एक फोटोशॉप की गई तस्वीर को शेयर किया। फर्जी तस्वीर के जरिए सिरकार ने बताना चाहा कि कैसे देश के पीएम अपने दोस्तों के साथ इतने विनम्र हो जाते हैं कि उनके आगे हाथ जोड़ लेते हैं।

सरकार ने तंज भरे अंदाज में लिखा, “काश साथी सांसद और राजनीति में अन्य लोगों को भी उनके हमेशा भौह चढ़ाने वाले पीएम से ऐसा शिष्टाचार और खुशमिजाजी मिलती। एक परिपक्व लोकतंत्र में, हम दोतरफा संबंध, अहसान, लेन-देन को जानेंगे। किसी दिन इतिहास हमें बताएगा।”

सरकार द्वारा शेयर की गई तस्वीर में नरेंद्र मोदी, नीता अंबानी के आगे सिर झुकाकर हाथ जोड़कर खड़े दिखाई दे रहे हैं। जबकि हकीकत में फोटोशॉप की गई तस्वीर पीएम मोदी की दीपिका मंडल के साथ हुई मीटिंग की है। दीपिका एक ‘दिव्य ज्योति कल्चरल ऑर्गनाइजेशन एंड वेल्फेयर सोसायटी’ नाम की एनजीओ को चलाती हैं।

यह पहली बार नहीं है कि ये फोटो सोशल मीडिया पर झूठ बोलकर शेयर की जा रही हो। साल 2015 से ये तस्वीर वायरल हो रही है। इससे पहले ये दावे किए गए थे कि तस्वीर में नजर आने वाली महिला गौतम अडानी की पत्नी प्रीति अडानी हैं।

आज इस तस्वीर को लेकर दोबारा चर्चा शुरू हुई हैं। सरकार की सोशल मीडिया एक्टिविटी देखकर पता चलता है कि ये कोई अंजाने में हुई गलती नहीं है बल्कि मंशा के साथ झूठ फैलाया गया।

दरअसल, सरकार ने अपने ट्वीट पर आए फैक्ट चेक्स को हाइड किया हुआ है। इसमें यूजर ने उन्हें बताया है कि कैसे उनके द्वारा फैलाई जा रही खबर झूठी है। इस हरकत से साफ पता चलता है कि उन्हें मालूम था कि ये इमेज फर्जी है लेकिन वह फिर भी उसे आगे बढ़ाते रहे।

ट्वीट्स के हिडेन रिप्लाई में दिख रहा था कि जवाहर ने उन सारे जवाबों को हाइड कर दिया है जिन्होंने उनके झूठ की पोल खोली और बताया कि वो प्रोपगेंडा चला रहे हैं।

बता दें कि हमारे रिपोर्ट लिखते समय तक सरकार ने अपने अकॉउंट से इस फेक इमेज वाला ट्वीट डिलीट कर दिया है। अब सोशल मीडिया पर सिर्फ इसके स्क्रीनशॉट शेयर हो रहे हैं।

‘जिहादियों के चलते बनी है बंगाल सरकार, इन पर एक्शन नहीं लेने का है ऑर्डर’: BJP सांसद के घर के पास बमबारी

पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले में भाजपा कार्यकर्ता की हत्या के बाद लोक आक्रोशित हो गए हैं और पुलिस-प्रशासन व तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सरकार के प्रति अपना आक्रोश प्रकट कर रहे हैं। हिंसा से प्रभावित लोगों ने जगलदबाजार में घोषपारा रोड को जाम कर के अपना आक्रोश प्रकट किया, जहाँ स्थानीय सांसद अर्जुन सिंह भी पहुँचे। अर्जुन सिंह बैरकपुर से भाजपा सांसद हैं और भाटपाड़ा से लगातार 4 बार विधायक भी रहे हैं।

भाटपाड़ा ही वो जगह है, जहाँ युवा भाजपा कार्यकर्ता जयप्रकाश यादव की हत्या हुई है। अर्जुन सिंह ने आरोप लगाया कि पुलिस असहाय है। उन्होंने जानकारी दी कि कल जगदलबाजार में 7 दुकानें लूट ली गईं। उन्होंने कहा, “व्यापारियों ने रास्ता अवरुद्ध किया था। 150 पुलिस खड़ी है और उस बीच बम पड़ रहा है। पुलिस बाहर कह रही है कि इन जिहादियों के चलते ही बंगाल में सरकार आई है, इसलिए हमें स्पष्ट निर्देश हैं कि इनके खिलाफ कोई एक्शन न लें।”

आरोप है कि क्रूड बम फेंक कर भाजपा कार्यकर्ता की हत्या हुई और उनकी माँ जख्मी हो गई, लेकिन पुलिस ने अब तक इस वारदात के आरोपितों को गिरफ्तार नहीं किया है। जहाँ ये घटना हुई, वो जगह सांसद अर्जुन सिंह के घर से कुछ ही दूरी पर है। दिन-दहाड़े ये घटना तब हुई, जब जेपी यादव भाजपा के स्थानीय दफ्तर से अपने घर लौट रहे थे। अर्जुन सिंह ने कहा कि क्षेत्र में कई दिनों से बमबारी जारी है।

उन्होंने कहा कि भाटपाड़ा से कुछ ही दूर जगदल क्षेत्र में शुक्रवार (जून 4, 2021) को एक के बाद एक 100 बम बरसाए गए, लेकिन पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। भाजपा कार्यकर्ता की लाश पहचान में नहीं आ रही थी, क्योंकि सिर और उसके आसपास का शरीर का हिस्सा क्षत-विक्षत हो चुका था। अर्जुन सिंह ने कहा कि ये गरीब हैं, जो स्थानीय जूट मिल में काम कर के अपनी आजीविका चलाते हैं।

उन्होंने कहा कि इन लोगों का दोष सिर्फ इतना ही है कि इन्होंने भाजपा का समर्थन किया। उन्होंने बताया कि हत्याएँ हो रही हैं और साथ ही लोगों के घर लूटे जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि TMC के गुंडों को ये सब करने की पूरी स्वतंत्रता दी गई है। साथ ही उन्होंने चेताया कि यदि हिंसा, अत्याचार चलता रहा तो एक दिन जनता का सब्र टूटेगा और फिर पुलिस भी इन गुंडों को नहीं बचा सकेगी। उन्होंने जेपी यादव के परिजनों से मुलाकात भी की।

अर्जुन सिंह का कहना है कि उनके घर के सामने भी तृणमूल के गुंडों ने तोड़फोड़ मचाई है, जो CCTV फुटेज में भी कैद है। उन्होंने बताया कि इलाके में बमबारी के कारण लोग परेशान हैं। बंगाल पुलिस ने इसे ‘दो समूहों में झगड़ा’ बताते हुए कहा कि एक शादी समारोह में सांप्रदायिक अशांति फ़ैलाने के उद्देश्य से बम फेंका गया। सोशल मीडिया में भी लोगों ने इस घटना को लेकर आक्रोश जताया और बंगाल में राष्ट्रपति शासन की माँग की।