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करीना कपूर खान निभाएँगी सीता का रोल, करोड़ों रुपए (जितना लेती हैं, उससे दोगुना) की फीस सुन सोच में डायरेक्टर-प्रोड्यूसर

बॉलीवुड एक्ट्रेस करीना कपूर खान अपनी एक आने वाली फिल्म को लेकर काफी चर्चा में हैं। बड़े बजट में बनने जा रही इस फिल्म में वह सीता के किरदार में नजर आएँगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने फिल्म में सीता की भूमिका निभाने के लिए 12 करोड़ रुपए माँगे हैं। बताया जा रहा है कि फिल्म में सीता के दृष्टिकोण से रामायण की कहानी को फिल्माया जाएगा। फिल्म को अस्थायी रूप से ‘सीता- द इनकार्नेशन’ (Sita– The Incarnation) टाइटल दिया गया है।

‘बाहुबली’ फिल्म के मशहूर लेखक केवी विजेंद्र प्रसाद ने ‘सीता- द इनकार्नेशन’ फिल्म की कहानी लिखी है और इसका निर्देशन अलौकिक देसाई करेंगे। बॉलीवुड हंगामा के अनुसार, “बेबो पहले ‘वीरे दी वेडिंग 2’ और हंसल मेहता की एक फिल्म की शूटिंग करेंगी, क्योंकि इन फिल्मों की शूटिंग एक-एक महीने में पूरी जाएगी। वहीं, सीता की शूटिंग और प्रोडक्शन के लिए कम से कम 8 से 10 महीने का समय चाहिए होगा। इसलिए उस समय उनका पूरा फोकस इस फिल्म पर होगा। दरअसल, करीना यह अच्छी तरह जानती हैं कि यह फिल्म उनके लिए मील का पत्थर साबित होगी, क्योंकि यह सीता के दृष्टिकोण से रामायण की एक रीटेलिंग है।”

करीना ने एक फिल्म के लिए माँगी 12 करोड़ रुपए फीस?

बेबो बॉलीवुड की उन एक्ट्रेस में से हैं, जो सबसे अधिक कमाई के लिए जानी जाती हैं। यही कारण है कि वह आमतौर पर फिल्म साइन करने से पहले अपनी फीस को लेकर डिस्कस करती हैं।

बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट में आगे लिखा है, “वह अपनी एक फिल्म के लिए 6 से 8 करोड़ रुपए चार्ज करती हैं। ऐसे में इस फिल्म के लिए करीना ने 12 करोड़ रुपए माँग कर फिल्ममेकर को बड़ा झटका दिया है। फिलहाल वे (फिल्ममेकर) अपने फैसले पर एक बार फिर से विचार कर रहे हैं। इसलिए हो सकता है कि फिल्म में वह किसी यंग एक्ट्रेस को भी कास्ट कर सकते हैं, इसको लेकर बातचीत अभी भी जारी है। लेकिन, बेबो अब भी फिल्ममेकर की पहली पसंद बनी हुई हैं।”

इससे पहले मार्च 2021 में बॉलीवुड हंगामा ने बताया था कि निर्देशक और लेखक दोनों को ऐसा लगता है कि करीना कपूर खान इस भूमिका के लिए बेहतर साबित होंगी। उनके एक सूत्र ने उन्हें बताया था, “बेबो को फिल्म में सीता का रोल काफी पसंद आया है क्योंकि वह इस फिल्म में मुख्य भूमिका हैं, इसलिए उनके पास ‘आदिपुरुष’ और ‘रामायण 3डी’ के उलट काफी स्क्रीन स्पेस होगा, जिनमें पुरुष कैरेक्टरका वर्चस्व है। करीना की टीम इसके बाद से फिल्म की डेट्स और फीस के बारे में बातचीत कर रही है। फिल्म को लेकर सब फाइनल होने के बाद एक औपचारिक घोषणा की जाएगी। अगर करीना के साथ बात नहीं बनी, तो आलिया इस फिल्म के लिए दूसरी पसंद होंगी।” बता दें कि ‘आदिपुरुष’ में करीना कपूर खान के पति सैफ अली खान रावण के किरदार में नजर आएँगे।

खास बात यह है कि इस फिल्म के डायलॉग्स लिखने की जिम्मेदारी मनोज मुन्तशिर को मिली है। ये एक पैन इंडिया फिल्म होगी। जिसे हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं में रिलीज किया जाएगा।

‘सारा अली तैयार करती थी गांजा, मुझे दी-सुशांत को भी लत लगाई’: रिया चकवर्ती ने NCB के सामने कबूला, रिपोर्ट्स में दावा

सुशांत सिंह राजपूत की पहली बरसी से पहले मीडिया रिपोर्टों के हवाले से एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि सारा अली खान के साथ ड्रग्स लेने की बात रिया चकवर्ती ने कबूली है। यह भी बताया है कि सारा ने ही केदरनाथ के दौरान सुशांत को भी मारिजुआना की लत लगाई थी। रिपोर्टों की माने तो नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने रिया का यह बयान चार्जशीट में भी शामिल किया गया है।

रिया ने कथित तौर पर एनसीबी को बताया है कि उन्हें ड्रग्स का ऑफर सारा की ओर से हुआ था। सारा ने ही उन्हें गांजा और वोदका लेने को कहा था। उनके मुताबिक सारा हाथ से रोल करके गांजे की सिगरेट तैयार करती थी। 

रिपोर्ट्स के अनुसार, जी न्यूज ने इस संबंध में दायर हुई चार्जशीट को एक्सेस की है। इसमें रिया और सारा की 4 जून से लेकर 6 जून 2017 की चैट का जिक्र है। सारा गांजे की सिगरेट रिया के साथ शेयर करती थीं और उन्हें हैंगओवर उतारने के तरीके बताती थीं। 6 जून 2017 को सारा अली खान ने उनके घर वोदका और गांजा लाने का ऑफर भी दिया था।

इस चार्जशीट के मुताबिक साल 2017 में रिया और सारा अच्छी सहेलियाँ थीं। दोनों एक साथ जिम और पार्टियों में जाती थीं। इसी बीच सारा ने उन्हें हैंगओवर का इलाज भी बताया था। हालाँकि, इस बारे में रिया का कहना है, “एक बार ड्रग्स को लेकर बात हो रही थी जहाँ उन्होंने (सारा ने) हैंगओवर के लिए इलाज बताया। वह आइसक्रीम और गांजे के बारे में बात कर रही थीं जो वह इस्तेमाल करती हैं और उन्होंने यही मुझे ऑफर किया ताकि हैंगओवर के दर्द से निकला जा सके। यह बात केवल मैसेज में हुई थी, पर्सनली हमने कभी इस बारे में बात नहीं की।”

बताया जाता है कि सैफ अली खान की बेटी व बॉलीवुड एक्ट्रेस सारा अली खान ने सुशांत सिंह राजपूत को 2018-2019 में डेट किया था। इनके दोस्तों ने बताया था कि दोनों 2019 फरवरी तक साथ रहे। बाद में इनका ब्रेकअप हो गया।

इस ब्रेक अप से पहले और सारा के साथ रिश्ते में रहते हुए सुशांत 2018 में थाइलैंड गए थे जहाँ उन्होंने अपने दोस्तों पर 70 लाख रुपए खर्च किए। इस दौरान सारा भी उनके साथ थी। रिया चक्रवर्ती के अनुसार केदारनाथ के दौरान सुशांत को मारिजुआना की लत लगी और सारा ही वह शख्स थी जिन्होंने उन्हें हाथ से ज्वाइंट बनाकर लेना सिखाया।

सुशांत सिंह राजपूत 14 जून 2020 को मुंबई में अपने घर में मृत मिले थे। उनकी हत्या की गुत्थी अभी तक नहीं सुलझी है। सीबीआई इसकी जाँच कर रही है। वहीं, एनसीबी इस मामले में कई बॉलीवुड सितारों से पूछताछ कर चुकी है जिसमें सारा अली खान भी शामिल रही है।

अस्पताल में राम रहीम से रोज मिलने जा सकेगी हनीप्रीत, 15 जून तक का अटेंडेंट कार्ड बना: रिपोर्ट्स

साध्वियों से रेप के मामले में सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद रविवार (6 जून) को गुरुग्राम के मेदांता हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया। राम रहीम के अस्पताल में भर्ती होने के सूचना मिलते ही उसकी मुँहबोली बेटी हनीप्रीत उससे मिलने अस्पताल पहुँच गई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हनीप्रीत सोमवार (7 जून) सुबह 8:30 बजे राम रहीम का हाल जानने मेदांता पहुँची। हनीप्रीत ने राम रहीम के अटेंडेट के रूप में अपना कार्ड बनावाया है। राम रहीम को मेदांता में 9वीं मँजिल पर रूम नंबर 4643 में रखा गया है।

हनीप्रीत ने अस्पताल में राम रहीम से मिलने को बनवाया अटेंडेंट कार्ड

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हनीप्रीत को राम रहीम की देखभाल के लिए 15 जून तक का अटेंडेट कार्ड दिया गया है। अब वह अटेंडेट के रूप में हर दिन राम रहीम से मिलने अस्पताल के उसके कमरे में जा सकती है। खबर है कि राम रहीम दवाई लेने और टेस्ट करवाने से मना कर रहा था। हालाँकि अस्पताल प्रशासन ने इसकी पुष्टि नहीं की है और न ही राम रहीम की ओर से कोई बयान जारी किया गया है।

तीन दिन पहले पेट में दर्द की शिकायत के बाद राम रहीम को रोहतक पीजीआई में भर्ती कराया गया था। इसके बाद डॉक्टरों की सलाह के बाद उसे आगे के इलाज के लिए गुरुग्राम स्थित मेदातां हॉस्पिटल ले जाया गया था। वह कोविड जाँच कराने से इनकार कर रहा था। ऐसे में पीजीआई में उसका सिटी स्कैन किया गया और पेट और दिल की जाँच की गई थी। मेदांता अस्पताल में उसकी कोविड जाँच की गई, जोकि पॉजिटिव आई।

रेप और हत्या मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा राम रहीम

अपनी ही दो साध्वियों से रेप मामले में राम रहीम को पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने अगस्त 2017 में दोषी करार दिया था। 16 साल पुराने इस मामले में कोर्ट ने राम रहीम के साथ ही तीन अन्य दोषियों कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल को भी उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

जनवरी 2019 में में राम रहीम और तीन अन्य को पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हत्या का दोषी पाते हुए अदालत ने आजावीन कारावास की सजा सुनाई थी। वह 25 अगस्त 2017 से ही चंड़ीगढ़ से 250 किलोमीटर दूर स्थित रोहित की हाई सिक्योरिटी सुनारिया जेल में बँद है।

‘मेरे OSD 3 राज्यों-4 जातियों से’: नेपोटिज्म पर तृणमूल MP महुआ मोइत्रा की बंगाल के गवर्नर ने खोली पोल

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने राज्य की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा द्वारा लगाए गए भाई-भतीजावाद के आरोपों का तथ्यवार जवाब दिया है। महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाए थे कि राज्यपाल ने राजभवन में अपने परिवार के लोगों और रिश्तेदारों को नौकरी पर रखा है। राज्यपाल के व्यक्तिगत कर्मचारियों के रूप में 6 नियुक्तियों को लेकर ये सारा विवाद हुआ है।

राज्यपाल ने स्पष्ट कहा कि तथ्यात्मक रूप से महुआ मोइत्रा और मीडिया के कुछ हिस्सों में लगाए जा रहे ये आरोप गलत हैं। उन्होंने कहा कि उनके सभी OSD 3 अलग-अलग राज्यों से हैं और 4 अलग-अलग जातियों से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने बताया कि इनमें से 4 ऐसे हैं, जो न तो उनकी जाति के हैं और न ही उनके राज्य राजस्थान के हैं। बता दें कि धनखड़ जनता दल के टिकट पर झुंझनूं से सांसद और अजमेर के किशनगढ़ से विधायक भी रह चुके हैं।

‘राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन’ के अध्यक्ष रह चुके जगदीप धनखड़ को जुलाई 2019 में पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था और तभी से राज्य की सत्ताधारी पार्टी उनके पीछे पड़ी हुई है। महुआ मोइत्रा ने 6 राजभवन कर्मचारियों के नाम व डिटेल्स शेयर कर दावा किया था कि वो सभी राज्यपाल के करीबी रिश्तेदार हैं। राज्यपाल ने कहा कि पश्चिम बंगाल में हिंसा से ध्यान बँटाने के लिए ये ‘डिस्ट्रैक्शन की रणनीति’ अपनी जा रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बदहाल है और इससे ध्यान हटाने के लिए इस तरह के दावे किए जा रहे हैं और आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वो संवैधानिक कर्तव्यों का पालन करते हुए पश्चिम बंगाल की जनता की सेवा करते रहेंगे और अपनी शपथ का पालन करेंगे। ये विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब भाटपारा में एक युवा भाजपा कार्यकर्ता की हत्या का आरोप TMC के गुंडों पर लगा है।

पश्चिम बंगाल भाजपा ने बताया कि उत्तर 24 परगना के बैरकपुर इलाके में उसके पार्टी कार्यकर्ता जयप्रकाश यादव पर बम से हमला कर हत्या कर दी गई। कोलकाता से सटे बैरकपुर संसदीय सीट पर इस समय भाजपा का कब्जा है और 2019 में अर्जुन सिंह यहाँ से सांसद हैं। भाजपा ने एक बयान जारी कर दावा किया कि उक्त कार्यकर्ता के खिलाफ कई झूठे मामले भी दर्ज किए गए थे।‌ पार्टी नेताओं ने दावा किया कि बंगाल में भाजपा को सपोर्ट करने की सजा उनके कार्यकर्ताओं और समर्थकों को मौत के घाट उतार कर दी जा रही है।

जहाँ तक महुआ मोइत्रा की बात है, विवादों से उनका पुराना नाता रहा है। हिन्दू नववर्ष की शुभकामनाओं को उन्होंने कट्टरता से जोड़ा था। साथ ही ट्विटर के खिलाफ कार्रवाई की निंदा करते हुए उन्होंने लिखा था, “हमारे सुसु पॉटी रिपब्लिक में आपका स्वागत है! गौमूत्र पियो, गोबर छिड़को और शौचालय में कानून के शासन को फ्लश करो। दिल्ली पुलिस ने ट्विटर को नोटिस जारी किया और भाजपा के फर्जी दस्तावेज को मैनीपुलेटेड मीडिया बताने के सही तरीके के लिए उनके कार्यालयों में छापेमारी की।”

36 साल की HIV+ महिला, शरीर में 216 दिनों तक रहा कोरोना; 32 बार हुआ म्यूटेशन

दक्षिण अफ्रीका में कोरोना संक्रमण का एक और घातक रूप देखने को मिला है। शोधकर्ताओं ने एक 36 वर्षीय HIV संक्रमित महिला की जाँच में पाया कि उसके शरीर में कोरोना 216 दिनों तक टिका रहा और इस दौरान वायरस के 32 म्यूटेशन हुए।

इस केस पर रिपोर्ट मेडिकल जर्नल medRxiv में प्रिंट हुई। रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2006 में पहली बार महिला को खुद के एचआइवी पीड़ित होने का पता चला था। इसके बाद समय के साथ उसका इम्यून सिस्टम कमजोर होता गया। पिछले साल सितंबर में जब वह कोरोना की चपेट में आई तो वायरस ने स्पाइक प्रोटीन में 13 म्यूटेशन और 19 अन्य आनुवांशिक बदलाव किए जो वायरस के बिहेवियर को बदल सकते थे।

इनमें कुछ खतरनाक वैरिएंट भी शामिल हैं। जैसे- E484K म्यूटेशन जो अल्फा वैरिएंट बी.1.1.7 (पहली बार ब्रिटेन में देखा गया) का हिस्सा है और N510Y म्यूटेशन जो बीटा वैरिएंट बी.1.351 (पहली बार दक्षिण अफ्रीका में देखा गया) का हिस्सा है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि महिला से ये म्यूटेशन किसी और में गए या नहीं। लेकिन वह इस बात पर अनुमान लगाते हैं कि ये कोई संयोग नहीं है कि नए वैरिएंट ज्यादातर दक्षिण अफ्रिका के क्वा जुलु नटाल जैसे इलाकों में उभरे जहाँ प्रत्येक 4 वयस्कों में से एक HIV पॉजिटिव है।

मालूम हो कि भले ही इस बात के बहुत कम सबूत हैं कि HIV संक्रमित लोगों में कोरोना संक्रमण की आशंका ज्यादा है और इस वायरस के कारण गंभीर चिकित्सकीय जटिलताएँ विकसित हो रही हैं। फिर भी शोधकर्ताओं का कहना है कि ऐसे और अधिक मामले पाए गए तो एडवांस HIV से पीड़ित मरीज पूरी दुनिया के लिए वैरिएंट्स की फैक्ट्री बन सकते हैं।

इस अध्ययन के लेखक और डरबन की यूनिवर्सिटी ऑफ जुलु नटाल में आनुवांशिक विज्ञानी (geneticist) टूलियो डी ओलिवेरा ने एलए टाइम्स को बताया कि कमजोर इम्युनिटी वाले मरीजों में कोरोना वायरस का संक्रमण अन्य लोगों की तुलना में अधिक समय तक रह सकता है।

संक्रमित महिला के बारे में लेखक ने कहा कि उसमें शुरुआती दौर में हल्के लक्षण ही दिखे थे। उनके अनुसार अगर ऐसे और मामले मिलते हैं तो यह HIV इन्फेक्शन नए वेरिएंट का सोर्स हो सकता है।

बता दें कि उक्त महिला का मामला तब प्रकाश में आया जब वह 300 HIV पॉजिटिव लोगों पर की गई स्टडी में शामिल हुईं। ऐसे मरीजों में वायरस लंबे वक्त तक रहता है जिससे उसे म्यूटेट होने का मौका मिलता है। टूलियो डि ओलिवीरा ने बताया कि इलाज के बाद भी वायरस महिला के अंदर मौजूद था।

उल्लेखनीय है कि अगर आगे की स्टडीज में एचआइवी मरीजों में म्यूटेशन और कोरोना वायरस के फैलाव के बीच कोई मजबूत संबंध मिला, तो यह भारत के लिए चिंता का विषय होगा, क्योंकि यहाँ एचआइवी के ऐसे करीब 10 लाख संक्रमित हैं जिन्हें इलाज नहीं मिला है।

नस्लवादी कमेंट पर बैन, भारत विरोध पर नो एक्शन: खालिस्तान समर्थक मोंटी पनेसर पर ECB को नेटिजन्स ने घेरा

इंग्लैंड की क्रिकेट अथॉरिटी ECB ने पुराने ट्वीट्स वायरल होने के बाद बॉलर ओली रॉबिन्सन को को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। उनके 2012-13 के कुछ ट्वीट्स वायरल हुए थे, जिन्हें आपत्तिजनक बताया गया था। इसके बाद एक जाँच कमिटी ने उन्हें अनुशासनहीनता का दोषी पाया। वहीं अब लोग खालिस्तान का समर्थन करने वाले सिख कट्टरवादी मोंटी पनेसर के खिलाफ कार्रवाई की माँग कर रहे है।

बता दें कि पूर्व क्रिकेटर मोंटी पनेसर ने भी जून 2019 में खालिस्तान का समर्थन कर भारत में अलगाववाद को बढ़ावा दिया था। मोंटी पनेसर ने तब ट्विटर पर लिखा था, “जून 1, 1984 को जो घटनाएँ हुईं, वो अभी भी हमारे समाज के दिलोंदिमाग में मौजूद हैं। ट्राफलगर स्क्वायर (वेस्टमिनिस्टर, सेन्ट्रल लंदन) में आप देख सकते हैं कि हम खालिस्तान के लिए कितने बेचैन हैं। क्या पंजाब के लोग खालिस्तान चाहते हैं?”

उन्होंने लिखा था कि हम 1984 को कभी नहीं भूल सकते। साथ ही मोंटी पनेसर ने तीन अन्य सिखों के साथ अपनी तस्वीर भी शेयर की थी, जिसमें वो अपनी आत्मकथा पुस्तक लिए हुए भी दिख रहे हैं। लोगों ने पूछा है कि क्या मोंटी पनेसर को उस वक़्त सस्पेंड किया गया या फिर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई की गई? भारत में अलगाववाद को बढ़ावा देकर सिख कट्टरवाद को बढ़ावा देने वाले पनेसर ने 2013-14 में अपना अंतिम मैच खेला था।

ओली रॉबिंसन के पुराने ट्वीट्स, जिन्हें लेकर हुआ विवाद

हालाँकि, उन्होंने अब तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से रिटायरमेंट की घोषणा नहीं की है। बता दें कि ओली रॉबिन्सन ने अपनी ट्वीट्स में एशियन लोगों को लेकर नस्लवादी टिप्पणी की थी। साथ ही उन्होंने लिखा था कि वीडियो गेम्स खेलने वाली लड़कियाँ ज्यादा सेक्स करती हैं और वीडियो गेम्स खेलने वाली लड़कियों के मुकाबले उनका रिलेशनशिप अच्छा चलता है। साथ ही उन्होंने बम को अपना नया ‘मुस्लिम दोस्त’ बताया था।

इधर ऑपरेशन ब्लू स्टार की 37वीं बरसी पर खालिस्तानी आतंकी जरनैल सिंह भिंडरावाले का महिमामंडन करने की वजह से पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह निशाने पर हैं। उन्होंने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में भिंडरावाले के पोस्टर और खालिस्तानी झंडे दिखने का कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने बचाव किया है। उनका कहा है कि ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगा सिख अपना दर्द कम करते हैं। भज्जी ने को खालिस्तानी आतंकी जरनैल सिंह भिंडरावाले को ‘शहीद’ बताते हुए उसकी बरसी पर प्रणाम किया। 

मैं चाहे जो लिखूँ-बोलूँ, मेरी मर्जी: बालसुलभ तर्कों से लैस इतिहास्य-कार, आरफा खानुम महज झाँकी है

तथाकथित लिबरलों की तमाम विशेषताओं में एक विशेषता होती है बिना किसी हिचक के कुतर्क कर लेना। कुतर्क करने में जो निपुणता लिबरल समाज साल छह महीनों की प्रैक्टिस से हासिल कर लेता है, वैसी निपुणता कोई रूढ़िवादी समाज वर्षों की तपस्या से भी प्राप्त नहीं कर सकता। इस निपुणता का ही असर है कि लिबरल आरफा खानुम ने बिना पलक झपकाए बोल डाला कि बामियान में तालिबानियों ने बुद्ध की जिन प्रतिमाओं को धमाके करके मिटा दिया था, उसके पीछे बाबरी ढाँचा का गिराया जाना ही एक कारण था। उन्होंने ये भी बताया कि ये अफगानी तालिबान किसी तथाकथित हिन्दू तालिबान से प्रेरित थे। कोई रूढ़िवादी ऐसे आत्मविश्वास से लबालब मुश्किल से ही मिलेगा जो कह सके कि क्रूरता का पाठ हिटलर ने स्टालिन से सीखा था। 

यह वैसा ही है जैसे रोमिला थापर ने एक सुबह दशकों से लॉकर में बंद यह भेद खोला था कि युधिष्ठिर ने महाभारत के युद्ध के बाद संन्यास लेने की इच्छा इसलिए जाहिर की थी क्योंकि वे सम्राट अशोक से प्रेरित थे। कल को रोमिला जी से प्रेरित कोई इतिहासकार यह भी बता सकता है कि केवल युधिष्ठिर ही सम्राट अशोक से प्रेरित नहीं थे, बल्कि भीष्म भी चाणक्य से प्रेरित थे और यही कारण था कि उन्होंने युधिष्ठिर को संन्यास न लेने की सलाह दी। कल को किसी इतिहासकार के मन में आए कि रामायण को साल 778 में लिखा गया ग्रंथ साबित करना है तो वह बता सकता है कि दशरथ पुत्र राम सम्राट हर्षवर्धन से प्रेरित थे इसलिए राजपाट त्याग कर वनवास के लिए चले गए थे। कोई इतिहासकार यह भी कह सकता है कि महाभारत का युद्ध कलिंग के युद्ध से प्रेरित था। कहना ही तो है। कुछ भी कह डालो। 

यह वैसा ही है जैसे कोई एजेंडाबाज इतिहासकार भारतीय समाज में गंगा के महत्व को झुठलाने का मन बना ले और किसी सुबह नींद से उठकर यह घोषणा कर दे कि दरअसल हम इतने वर्षों से जो मानते आए हैं कि सभ्यताएँ और नगर नदियों के किनारे बसते रहे हैं, वह सही नहीं है। कुछ बातों पर विचार करने के बाद हम निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि नदियाँ हजारों वर्षों से सभ्यताओं के किनारे-किनारे बहती रही हैं। चीफ इतिहासकार की हाँ में हाँ मिलाते हुए कोई सप्लीमेंट्री इतिहासकार कह देगा कि गंगा ने प्रयाग के बाद बहाव की अपनी दिशा इसलिए बदल दी थी क्योंकि उसे काशी के किनारे से बहना था। यह अपने आप में बहुत बड़ा सबूत है कि नदियाँ ही सदियों से नगरों के किनारे-किनारे बहना चाहती हैं। 

लिबरल आरफा खानुम का ट्वीट पढ़कर लगा जैसे कोई विद्यार्थी हाई स्कूल पास करके निकला और इतिहास की किताब लिखनी शुरू कर दी और मन बना लिया कि साबित कर देना है कि आदिकाल 1990 से शुरू होकर 1999 तक चला। ये उन यूथ से प्रेरित दिखती हैं जो 1990 के दशक की हिंदी फिल्मों को क्लासिक्स बताते हैं। ऐसे ही इतिहासकार आनेवाले समय में साबित करने की कोशिश कर सकते हैं कि बाबर ने मंदिर तोड़कर बाबरी मस्जिद नहीं बनवाई थी, बल्कि वहाँ दो हज़ार साल पुरानी एक मस्जिद की मरम्मत कर उसका नाम बाबरी रख दिया था। ऐसे ही इतिहासकार यह साबित करने की कोशिश कर सकते हैं कि ज्ञानवापी मस्जिद पाँच हज़ार वर्षों से वहीं थी, ये तो काशी के ब्राह्मण थे जिन्होंने साढ़े तीन हज़ार साल पहले उसे तोड़वा कर काशी विश्वनाथ मंदिर बनवा दिया था। इसलिए भाइयों और बहनों; स्मैश द ब्रह्मिनिकल पैट्रिआर्की! 

औरंगज़ेब ने भले कई दर्जन मंदिर तोड़वाए होंगे लेकिन इतिहासकार चाहे तो इस सच पर अपने इतिहास की कार चढ़ा कर उसे कुचल दे और साबित कर दे कि वह तो बड़ा शालीन शासक था। यह तो पहले ही कोशिश शुरू हो गई है कि यह मान लिया जाए जिन मंदिरों को उसने नहीं तोड़ा, इसका अर्थ है कि उन मंदिरों की उसने रक्षा की। वैसे भी उसे पहले ही बड़ा त्यागी बादशाह बताया जा चुका है। लोगों के दिमाग पर यह टाँक दिया गया है कि औरंगज़ेब इतनी मेहनत करता था कि टोपियाँ बना कर अपना जीवन-यापन करता था। उसने जिन टोपियों की बुनाई की, वो सारी हमारे इतिहासकारों को दे गया ताकि ये ‘इतिहास्य-कार’ वही टोपियाँ हम भारतीयों को पहना सकें। ‘पिलान’ के मुताबिक ये देसी इतिहासकार यदि ऐसा कर पाने में असफल रहे तो फिर विदेशी तो हैं ही। विदेशी इतिहासकार बोलते हैं तो किसी और को बोलने नहीं देते। ऐसे में इनके लिए अपने सच की दही जमाने में सुभीता हो जाता है। 

आरफा जी की मानें तो अफगानी तालिबान बलोचिस्तान, खैबर, पकिस्तान, सिंध, पंजाब, कश्मीर वगैरह में तोड़े गए मंदिरों से प्रेरणा नहीं ले सके और बेचारों को प्रेरणा के लिए अयोध्या तक आना पड़ा। ऊपर से हालत यह कि बेचारे मस्जिद तोड़े जाने का इंतज़ार करते रहे, वो भी इतना लंबा इंतज़ार। कल को आरफा जी यदि यह कह दें कि बग़दादी ने बग़दादी बनने का फैसला गुजरात के दंगों के बाद किया तो आश्चर्य नहीं होगा। वैसे इन्होंने व्यक्तियों और अखबारों को प्रेरणा देना शुरू कर दिया है। कल एक अखबार का हेडलाइन देखा।  लिखा था; मलयाली इंजीनियर ISIS के लिए लड़ते हुए मर गया। पढ़कर लगा जैसे ISIS उसकी बनाई कोई मशीन है जिसकी रक्षा करते हुए इंजीनियर ने अपने प्राण त्याग दिए। 

बालसुलभ तर्कों से लैस इतिहास्य-कार विचार, इतिहास और वैचारिक इतिहास पर कब्ज़ा करने की इच्छा रखते हैं। 

ईसाई बन गया बेटा, माँ को मुखाग्नि देने से किया इनकार: 1100 Km दूर से आई नातिन, किया अंतिम संस्कार

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में ईसाई धर्मांतरण ने एक बेटे को अपनी माँ का अंतिम संस्कार करने से भी रोक दिया। दरअसल, सरोज देवी नामक महिला के निधन के बाद उनके ईसाई बेटे डेविड ने अपनी माँ का हिन्दू पद्धति से अंतिम क्रियाकर्म करने से इनकार कर दिया। माँ सरोज देवी हिन्दू धर्मावलंबी थीं। अंत में 1100 किलोमीटर दूर से आकर नातिन श्वेता सुमन ने अपनी नानी का अंतिम संस्कार किया और सारे क्रियाकर्म संपन्न किए।

‘नई दुनिया’ की खबर के अनुसार, बेटा डेविड चाहता था कि उसकी माँ के पार्थिव शरीर को ईसाई विधियों के अनुसार कब्रिस्तान में दफनाया जाए। लेकिन, नातिन श्वेता सुमन ने झारखंड से आकर गुरुवार (जून 3, 2021) को शव को अपनी सुपुर्दगी में लिया और अगले ही दिन लक्ष्मीगंज मुक्तिधाम में हिन्दू रीति-रिवाजों के साथ अंतिम क्रियाकर्म संपन्न किया। सिटी सेंटर निवासी डेविड का नाम मतांतरण से पहले धर्म प्रताप सिंह हुआ करता था।

नातिन श्वेता सुमन ने नानी की मौत और अपने मामा द्वारा ईसाई धर्मांतरण किए जाने के सम्बन्ध में जाँच कराने के लिए स्थानीय SP के समक्ष आवेदन दिया है। शिकायत में उन्होंने कहा है कि उनके मामा उनकी नानी पर जबरन ईसाई धर्मांतरण के लिए दबाव डालते थे। सरोज देवी की मौत बुधवार को ही हो गई थी लेकिन दफनाने की जिद के कारण डेविड ने अंतिम संस्कार नहीं किया। श्वेता का कहना था कि उनकी नानी ने मृत्यु तक किसी अन्य मजहब को स्वीकार नहीं किया और हिन्दू बनी रहीं, इसीलिए सनातन प्रक्रिया से अंतिम संस्कार किए जाएँ।

मौके पर ‘हिन्दू जागरण मंच’ के कार्यकर्ता भी पहुँचे। श्वेता सुमन ने कलक्टर के सामने भी अपनी बात रखी थी। श्वेता का कहना है कि डेविड ने कभी उन्हें अपने घर का पता तक नहीं बताया था और नानी के साथ फोन पर भी कम ही बात कराते थे। नानी का हालचाल जानने के लिए जब वो जब वो कॉल करती थीं तो उनके हाथ से मोबाइल फोन छीन लेते थे। डेविड ने लाख समझाने के बावजूद माँ को मुखाग्नि देने से इनकार कर दिया।

‘न हिंदी, न हिंदू, न हिंदुस्तान, बनकर रहेगा खालिस्तान’: तिरंगे में लगाई आग-लगे भारत विरोधी नारे, लंदन की घटना

खालिस्तान जिंदाबाद के नारों के बीच रविवार( 6 जून) को लंदन के ट्राफलगर स्क्वायर में भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे में आग लगाई गई। भारतीय उच्चायोग ने इस संबंध में बयान जारी कर कहा है कि घटना से वह बेहद चिंतित और व्यथित हैं। उच्चायोग ने आश्वासन दिया कि राष्ट्र ध्वज का अपमान करने वालों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई होगी।

ब्रिटेन में टाइम्स ऑफ इंडिया की पत्रकार नाओमी कैंटन ने इस संबंध में कई तस्वीरें साझा की है। वीडियो में देख सकते हैं कि काला स्कॉर्फ पहनकर खालिस्तानी तिरंगे में आग लगा रहे हैं। साथ ही तेज-तेज चिल्ला रहे हैं, “खालिस्तान जिंदाबाद।”

पीछे से आवाज आ रही है- ‘वाहे गुरु जी दा खालसा वाहे गुरु जी दी फतेह।’  वीडियो में इकट्ठा हुई भीड़ को हिंदू विरोधी नारे लगाते भी सुना जा सकता है। ये कहते हैं- न हिंदी, न हिंदू, न हिंदुस्तान, बन कर रहेगा खालिस्तान।

ब्रिटेन की पुलिस का इस संबंध में कहना है कि झंडे में आग लगाना कोई अपराध नहीं है और उनको पता भी नहीं था कि झंडे में आग लगाई गई है। इसलिए उन्होंने भारत विरोधी नारे देने वाले किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया।

जानकारी के मुताबिक पूरा इवेंट खालिस्तानी आतंकी भिंडरावाले को याद करने के लिए आयोजित हुआ था। इनमें 5 सिख ‘पंच प्यारे’ की वेशभूषा में सैंकड़ों सिखों का नेतृत्व कर रहे थे। लोगों के हाथ में भिंडरावाले की तस्वीर थी और कुछ महिलाएँ भी थीं जो खालिस्तान को समर्थन देने वाली टीशर्ट बेच रही थीं। इनमें से कई के हाथ में पीले खालिस्तानी झंडे थे। प्रदर्शनकारी हिंदू नेता को मारने वाले सिख जगतार सिंह जोहल के समर्थन में नारे लगा रहे थे और झंडे को जलाने के लिए स्प्रे (आग पकड़ने वाला) इस्तेमाल कर रहे थे।

बता दें कि 6 जून को ऑपरेशन ब्लू स्टार की 37वीं बरसी पर पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने भी खालिस्तानी आतंकी जरनैल सिंह भिंडरावाले का महिमामंडन किया था। इंस्टाग्राम स्टोरी पर हरभजन ने भिंडरावाले को एक शहीद बताया। साथ ही उसकी तस्वीर साझा कर, ‘प्रणाम शहीदा नू’ लिखा था

वहीं अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में भिंडरावाले के पोस्टर और खालिस्तानी झंडे दिखने का कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने बचाव किया था। उन्होंने 6 जून के मौके पर श्री हरमिंदर साहिब में लगे खालिस्तानी नारों के समर्थन में कहा, “यह सिखों पर गहरा घाव है, जो साल भर दर्द देता है। बरसी पर हम ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ का नारा लगाकर इस दर्द को कम करते हैं। इसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। यह हमेशा के लिए हमारी स्मृति का हिस्सा रहेगा।” उन्होंने 1984 के ऑपरेशन को लेकर कहा कि भारतीय सेना ने अकाल तख्त पर ऐसे हमला किया जैसे चीन या पाकिस्तान पर युद्ध के दौरान करते हैं।

केरल से गल्फ गया ‘ईसाई’ इंजीनियर, ‘इस्लाम’ अपना बना ISIS का आत्मघाती हमलावर: अब लीबिया में मारे जाने की खबरें

खूँखार वैश्विक आतंकी संगठन ISIS ने अपने ‘शहीदों’ की सूची जारी की है, जिसमें दक्षिण भारतीय राज्य केरल के एक इंजीनियर का भी नाम है। अब जाँच एजेंसियाँ इसकी पुष्टि में लगी हुई हैं। ISIS का दावा है कि केरल का उक्त ईसाई से मुस्लिम बना इंजीनियर लीबिया में लड़ते हुए ‘शहीद’ हुआ। ISIS ने ‘Know your martyrs (अपने शहीदों को जानो)’ नाम का एक दस्तावेज जारी किया है, जिसमें केरल के अबू-बकर अल-हिन्दी का नाम है।

बताया जा रहा है कि ये केरल का ही एक ईसाई है, जिसने बाद में इस्लाम मजहब अपना लिया था और फिर आतंकी संगठन ISIS में शामिल हो गया था। उसने खाड़ी मुल्कों में काम करते समय ऐसा किया था। ISIS का कहना है कि वो पहला भारतीय ‘Istishhadi’ (आत्मघाती हमलावर या आतंकियों की भाषा में ‘शहीद’) है, जो अफ्रीका में लड़ते हुए मारा गया। हालाँकि, इसमें अबू-बकर का असली नाम नहीं बताया गया है।

हालाँकि, सीरिया और अफगानिस्तान में ISIS के कुछ ऐसे आतंकी मारे जा चुके हैं, जो भारत के केरल से ताल्लुक रखते थे और मलयाली थे। ISIS ने सिर्फ इतना बताया कि ‘शहीद’ मलयाली का जन्म एक अमीर ईसाई परिवार में हुआ था, जिसमें कई इंजीनियर मिलते हैं। ISIS ने बताया है कि अबू-बकर खाड़ी में काम करने से पहले बेंगलुरु में काम कर रहा था। आतंकी संगठन के अनुसार, ये पहली बार था जब वो ‘पूर्ण मुस्लिम वातावरण’ में आया।

जब वो बाजार में कुछ चीजें खरीदने गया था, तब उसे किसी ने एक पैम्पलेट दिया। उस पैम्पलेट में ईसाई को लेकर कुछ चीजें लिखी हुई थीं। आतंकी संगठन के अनुसार, तब ईसाई रहा अबू-बकर ये जान कर आश्चर्यचकित था कि मुस्लिम लोग भी जीसस का न सिर्फ सम्मान करते हैं, बल्कि उनमें आस्था भी रखते हैं। इसके बाद उसके भीतर इस्लाम को लेकर और जानने की इच्छा बलवती हुई। फिर वो कुछ मुस्लिमों के संपर्क में आया।

ISIS के दस्तावेज के अनुसार, “दिवंगत अमेरिकी इस्लामी वक्ता अल-अवलाकी के भाषणों को सुन कर वो कट्टर बना और इसके बाद उसने IS का रुख किया। अबू-बकर IS में शामिल होने वाले अन्य मलयालियों की तरफ ‘हिज्रा’ (देश छोड़ना) चाहता था, लेकिन खाड़ी देश की कंपनी के साथ करार ख़त्म होने के बाद उसे भारत वापस आना पड़ा। इसके बाद आकाओं ने उसे लीबिया जाने को कहा, जहाँ हमारे संगठन का काम मजबूत होता जा रहा था।”

लीबिया जाने के 3 महीने बाद ही एक ‘ऑपरेशन’ के दौरान उसकी मौत की बात बताई गई है। हालाँकि, जाँच एजेंसियाँ अभी तक इसकी सच्चाई की पुष्टि नहीं कर पाई है और न ही उक्त आतंकी को चिह्नित कर पाई है। ISIS 2014 में ही लीबिया में विलायत (प्रांत) के गठन की घोषणा कर चुका है और वहाँ अपने कई लोग भेजे हैं। वहीं अफगानिस्तान में काबुल के गुरुद्वारा और जलालाबाद के जेल पर हमले की जिम्मेदारी इसी ने ली है।

काबुल के गुरुद्वारे में 150 सिखों पर हमला करने वाले आतंकियों में से एक अबू खालिद-अल-हिन्दी नाम का ‘फिदाइन’ था,  केरल का ही एक दुकानदार मोहम्मद साजिद था, जो चार साल पहले चौदह लोगों के साथ ISIS ज्वाइन करने निकला था। अबू खालिद-अल-हिन्दी केरल के कासरगोड का था जो 2015 में इस्लामिक स्टेट में शामिल हो गया था। केरल से बड़ी संख्या में कट्टरवादियों ने ISIS ज्वाइन किया है।