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‘बीजेपी कर रही कोविड में लोगों की सेवा विपक्ष हुआ क्वान्टाइन’: मोदी सरकार के 7 साल पर जेपी नड्डा

मोदी सरकार को सत्ता में आए आज सात साल पूरे हो गए हैं। इस अवसर पर रविवार (30 मई 2021) को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। नड्डा ने कहा कि 13 कंपनियों को कोरोना वैक्सीन बनाने की इजाजत दे दी गई है। अब देश में 2 कंपनियों की बजाए 13 कंपनियाँ वैक्सीन का निर्माण करेंगी और जल्द ही ये संख्या 19 हो जाएगी।

इसके अलावा, कोवैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक, जो अभी तक हर महीने 1.3 करोड़ वैक्सीन बना रही थी, वो अब अक्टूबर 2021 से हर महीने 10 करोड़ वैक्सीन बनाने का काम शुरू करेगी।

इस दौरान जेपी नड्डा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, ”जो लोग आज वैक्सीन को लेकर हल्ला कर रहे हैं, जब प्रधानमंत्री वैक्सीन बनाने के लिए भारत के उद्यमियों को प्रेरित कर रहे थे तब विपक्षी पार्टियों ने हर तरह से भारत के मनोबल को तोड़ने का काम किया। इस वैक्सीन को मोदी की वैक्सीन बताकर सरकार का हौसला तोड़ने की भरसक कोशिशें की गईं।”

उन्होंने कहा कि कुछ लोग साधक होते हैं और कुछ लोग बाधक होते हैं। साधक का काम साधना करना होता है और बाधा पहुँचाने वाले लोग हमेशा मिलेंगे। कुछ लोग हम पर हर तरह का आरोप लगाते रहेंगे, दिल्ली भी इससे ग्रसित है।

बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा, “बीजेपी कार्यकर्ता कोरोना महामारी के बीच राहत कार्य कर रहे हैं, जबकि विपक्षी दल आइसोलेशन में चले गए हैं। बीजेपी कार्यकर्ता कोविड के दौरान लोगों के साथ खड़े हैं, जबकि विपक्षी नेता केवल डिजिटल सम्मेलनों में नजर आते हैं। सभी बीजेपी सांसद, मंत्री और विधायक सरकार के सात साल पूरे होने के अवसर पर कम से कम दो गाँवों में लोगों की सेवा करेंगे।”

बता दें कि मोदी सरकार के सात वर्ष पूर्ण होने पर नड्डा ने आज ट्वीट कर प्रधानमंत्री मोदी और ‘राजग परिवार’ को बधाई और शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि बीजेपी आज के दिन को ‘सेवा दिवस’ के रूप में मनाएगी। सेवा दिवस कार्यक्रम के तहत 1 लाख गाँवों व बस्तियों में, भाजपा कार्यकर्ता सेवा कार्यों में लगे हैं। इसी कड़ी में गीता कॉलोनी, दिल्ली में सेवा कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से सम्मलित हुआ। इसके साथ ही भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा राहत सामग्री का भी वितरण किया गया।

राजस्थान: 347 कर्मचारियों की कोविड ड्यूटी में मौत, सिर्फ 6 को मुआवजा- बाकी शुगर, हार्ट अटैक बताकर पल्ला झाड़ रही कॉन्ग्रेस सरकार

कॉन्ग्रेस द्वारा शासित राज्यों में कोरोना वायरस संक्रमण के दौरान लगातार कोरोना वारियर्स और ड्यूटी में लगे कर्मचारियों के हितों की अनदेखी की जा रही है। हाल ही में कॉन्ग्रेस शासित छत्तीसगढ़ से खबर आई थी कि सरकार द्वारा अपना वेतनमान कम किए जाने के कारण लगभग 800 बॉण्डेड डॉक्टरों ने इस्तीफे की धमकी दी वहीं अब राजस्थान से भी खबर आ रही है कि राज्य की अशोक गहलोत सरकार कोरोना ड्यूटी में लगे कर्मचारियों की मौत पर भी लापरवाही कर रही है। लगभग 350 कर्मचारियों की मौत को राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार सामान्य मौत मान रही है।

दैनिक भास्कर की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में बताया गया है कि राजस्थान में कोरोना वायरस संक्रमण के दौरान कोरोना ड्यूटी में लगे अलग-अलग विभाग के 347 कर्मचारियों की मृत्यु हो गई लेकिन इनकी मृत्यु का कारण कोरोना को मानने के बजाय मृत्यु प्रमाण पत्र में हार्ट अटैक, डायबिटीज और दूसरे कारण बताए जा रहे हैं।

दरअसल, राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार ने कोविड ड्यूटी में लगे कर्मचारी की मौत पर उनके परिजनों को 50 लाख की सहायता का आदेश जारी किया था। हालाँकि, इस आदेश के अनुसार अब तक मात्र 6 कर्मचारियों की मृत्यु पर उनके परिजनों को सहायता दी गई है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में बताया गया है कि राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार के पास भी इन कर्मचारियों के आँकड़े नहीं हैं जबकि भास्कर ने दावा किया है कि उसके पास उन कर्मचारियों की पूरी लिस्ट है जिनकी कोविड ड्यूटी के दौरान मृत्यु हुई है। जिन कर्मचारियों की मौत हुई है, विभागानुसार उनकी संख्या कुछ इस प्रकार है :

  • शिक्षा विभाग – 100
  • चिकित्सा विभाग – 50
  • पशु चिकित्सक – 23
  • बिजली कंपनियाँ – 80
  • खान – 6
  • सहकारिता – 8
  • पुलिस – 30
  • अन्य विभाग – 50

कर्मचारियों की संख्या के साथ दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में कर्मचारियों की पूरी लिस्ट है, उनके नाम, विभाग और उनके पद के साथ।

हालाँकि, भास्कर में बताया गया है कि सरकार के संबंधित आदेश को लेकर स्थितियाँ पूरी तरह से साफ नहीं हैं जिसके चलते असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो रही है। क्योंकि कुछ ऐसे सवाल हैं जिनके बारे में आदेश में स्पष्ट रूप से कुछ नहीं बताया गया है। जैसे कि यदि कोई कर्मचारी ड्यूटी से हटने के बाद ही संक्रमित (कोविड ड्यूटी के कारण) हो जाए और उसकी मृत्यु हो जाए तो क्या उसे सरकार का यह लाभ मिलेगा? या फिर एक सवाल यह भी है कि यदि ड्यूटी के दौरान कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आ गई और बाद में कर्मचारी की मृत्यु हो गई तो क्या उसे भी लाभ दिया जाएगा या नहीं? ऐसे ही कई सवाल हैं जिनके कारण असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

इस मुद्दे पर राजस्थान की भाजपा इकाई ने भी अशोक गहलोत सरकार पर निशाना साधा। राजस्थान भाजपा ने ट्वीट करके कहा कि राज्य की अशोक गहलोत सरकार की असंवेदनशीलता ही है कि सरकार कोविड ड्यूटी के दौरान कर्मचारियों की मौत को कोविड डेथ नहीं मान रही है।

हालाँकि, शिक्षक और कर्मचारी संघ लगातार माँग कर रहे हैं कि दायित्व का निर्वहन करते हुए किसी भी कारण से कर्मचारी की मृत्यु हो, उसे सरकार की सहायता मुहैया करानी चाहिए। राजस्थान पशु चिकित्सा कर्मचारी संघ के प्रमुख महामंत्री अर्जुन शर्मा ने तो यहाँ तक कह दिया है कि कर्मचारियों की मौत को लेकर पशु पालन विभाग पर आपराधिक केस दर्ज कराया जाएगा।

आदित्य सिंह बनकर कई बार दूल्हा बना आबिद हवारी, खुद को बताता था पुलिस इंस्पेक्टर: लव जिहाद मामले में गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इंदिरा नगर पुलिस ने मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले आबिद हवारी को गिरफ्तार कर लव जिहाद के एक सनसनीखेज मामले का खुलासा किया है। पुलिस ने आरोपित आबिद हवारी को गंभीर धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया है।

मामले की जानकारी देते हुए लखनऊ के इंदिरानगर पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर अजय प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि इंदिरा नगर की ही रहने वाली एक युवती ने शिकायत की थी कि आबिद हवारी ने अपना नाम आदित्य सिंह बताकर उसे अपने जाल में फँसाया, वह खुद को लखनऊ क्राइम ब्रांच का इस्पेक्टर बताकर उसे धोखा दिया है।

आरोपित आबिद हवारी ने खुद को हिंदू आदित्य सिंह बताकर न केवल लड़की के साथ रेप किया, बल्कि युवती से वह अब तक 15 लाख रुपए भी ऐंठ चुका है। वह फर्जी इंस्पेक्टर बनकर कुछ दिन तक युवती के साथ भी रहा। इसी दौरान एक दिन उसका मोबाइल देखकर पीड़िता को उसकी असलियत का पता चला।

मोबाइल से युवती को पता चला कि आरोपित आबिद आजमगढ़ का रहने वाला है और वहाँ उसकी एक बीवी है। उसके 5 बच्चे भी हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश के ओरछा में भी उसने एक हिंदू युवती के साथ खुद को इंस्पेक्टर आदित्य सिंह बताकर शादी कर रखी है।

पीड़िता को ये सारी जानकारियाँ पता चलने के बाद उसे उसके साथ किए गए छल का आभास हुआ। इसके बाद उसने इंदिरानगर पुलिस स्टेशन में आबिद के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। रिपोर्ट के मुताबिक वह शादी के बाद युवतियों का धर्म परिवर्तन कराने में लगा हुआ था।

आबिद की इंस्पेक्टर की यूनिफॉर्म, पुलिस का मोनोग्राम लगी बाइक और इस्पेक्टर के दफ्तर में बैठी हुई तस्वीरों के बल पर ही वह लड़कियों को पहले अपने जाल में फँसाता था।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ समय के दौरान कथित तौर पर लव जिहाद के कई मामले सामने आए थे। अकेले कानपुर जिले में लव जिहाद और जबरन धर्मान्तरण के 11 मामलों की छानबीन की जा रही है।

‘Ketto के पैसे मेरे पर्सनल अकाउंट में नहीं आए’- प्रोपेगेंडा पत्रकार राणा अयूब का दावा: जानिए क्या है सच

प्रोपेगेंडा फैलाने वाले पत्रकारों में से एक राणा अयूब इन दिनों देश के FCRA कानूनों का उल्लंघन करने को लेकर चर्चा में हैं। शनिवार (29 मई 2021) की रिपोर्ट्स के मुताबिक, पत्रकार राणा अयूब ने संभावित अनियमितताओं के सामने आने के बाद अपना कोविड-19 के लिए फंड इकट्ठा करने का कैम्पेन समाप्त कर दिया है। ऐसा कहा जा रहा था कि ये पैसे उनके पर्सनल अकाउंट में जाएँगे। साथ ही इस कैम्पेन को लेकर यह आशंका भी जताई जा रही थी कि इसमें राणा देश के FCRA कानूनों का उल्लंघन कर रही थीं।

पत्रकार ने केटो (ketto) पर बनाए गए फंड कैम्पेन में लिखा गया था कि विदेशी दान के लिए FCRA कानून के तहत योग्य भारतीय एनजीओ के साथ टाई-अप किया गया है। इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए चिकित्सकीय उपकरण की आपूर्ति का लक्ष्य रखा गया है। राणा ने कहा कि इसके बाद उनके खिलाफ कई वेबसाइट द्वारा कैम्पेन चलाए गए।

दरअसल, कैम्पेन समाप्त करने के बाद उन्होंने इस बात से इनकार किया है कि उनके पर्सनल अकाउंट में पैसे आ रहे थे। अयूब ने दावा किया कि केटो के फंडरेजर पेज (Ketto’s fundraiser page) पर दिखाया गया अकाउंट उनका नहीं है, बल्कि यह केटो का ही अकाउंट है, जिसे वे प्रत्येक फंडरेजर (अपनी गैर सरकारी संस्थाओं के लिए पैसे की व्यवस्था करते हैं) के लिए बनाते हैं।

राणा अयूब फंडरेजर कैम्पेन में लाभार्थियों का उल्लेख ‘प्रवासी श्रमिक’ के रूप में किया गया था। केटो ने फंडरेजर के लिए जो बैंक अकाउंट बनाया था उसमें कहा गया था, ‘प्रवासी श्रमिक-केटो” (Migrant Workers-Ketto)। हालाँकि, जब एक ट्विटर यूजर परिक्षित को फंडरेजर को लेकर छानबीन की, तो उन्होंने इसको लेकर सवाल उठाए और फंडरेजर को किए गए दान का एक स्क्रीनशॉट डालते हुए ट्वीट किया। इस ट्वीट के मुताबिक, रसीद में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि यह एक ‘पर्सनल’ फंडरेजर था और इसकी ऑनर राणा अयूब थीं। इसके साथ ही कहा गया कि यह दान आयकर अधिनियम की धारा 80G (tax exemption under 80G) के तहत छूट के लिए मान्य नहीं था।

अब हम अगले प्वांइट पर आते हैं, वह पैसा कहाँ से निकालेंगी? प्रवासी श्रमिकों के नाम से उनका किसी बैंक में अकाउंट नहीं हो सकता है। वह या तो अपने पर्सनल अकाउंट (सेविंग या करंट) में निकाल लेगी, या इसे अपने एनजीओ के अकाउंट में वापस ले लेगी। अगर इसे उनके एनजीओ के खाते में वापस लेना था, तो उनका नाम कहीं भी क्यों नहीं लिखा गया?

जब हमने महिला पत्रकार की प्रोफाइल को स्क्रॉल किया, तो उनके द्वारा किए जा रहे राहत कार्यों कई वीडियो और तस्वीरें सामने आई। वह उन कार्यों के लिए पैसा इकट्ठा कर रही हैं, इसलिए हम यह मान सकते हैं कि उन्होंने केटो अकाउंट से अब तक कुछ पैसे निकाल लिए होंगे। अगर उन्होंने पैसे निकाले होते तो वे किसी बैंक अकाउंट में चले जाते। वह बैंक अकाउंट उनका पर्सनल/करंट/गैर सरकारी संगठन (Non government organization) का होगा, लेकिन इसका उल्लेख कैम्पेन में ही किया जाना चाहिए था। हालाँकि, उसके द्वारा इकट्ठा किया गया पैसा फंडरेजर में किसी काम का नहीं रहेगा, यदि वह इसे अपने किसी भी अकाउंट में नहीं निकाल रही हैं।

यह मानते हुए कि राणा आयूब को इस बात की जानकारी नहीं है कि केटो एक फंडरेजर को मिलने वाले दान के बारे में क्या मापदंड अपनाता है। हम कैसे फंडिंग कैम्पेन किया जाता है कि उन मानदंडों को एक बार फिर से यहाँ पर दिखा रहे हैं। कृपया ध्यान दें कि नीचे दी गई जानकारी केटो की वेबसाइट पर उपलब्ध है, जिसे हर कोई आसानी से देख सकता है।

फंडरेजर के साथ दिखाया गया बैंक अकाउंट

सबसे पहले फंडरेजर पेज पर बैंक अकाउंट के बारे में बात करते हैं। राणा अयूब की बात सही है कि वहाँ बताया गया अकाउंट सीधे तौर पर उनका नहीं है। यह केटो का अकाउंट है। केटो पर अक्सर पूछे जाने वाले FAQs सेक्शन में यह कहता है, “यह अकाउंट नंबर आपके फंडरेजर के लिए बनाया गया एक वर्चुअल यूपीआई अकाउंट है, जिसके माध्यम से दानकर्ता एनईएफटी NEFT से दान कर सकते हैं, यह बैंक अकाउंट नहीं है।”

इसमें आगे कहा गया है, “यह लेन-देन करने का एक और तरीका है। इस प्रक्रिया के माध्यम से सभी दान आपकी दाता सूची और डैशबोर्ड पर दिखाई देंगे। कृपया ध्यान दें कि UPI अकाउंट केवल दिए गए फंडरेजर के लिए ही मान्य है। यह यस बैंक के साथ बनाया गया कोई नया बैंक अकाउंट नहीं है। यह केवल आपके फंडरेजर के लिए NEFT के माध्यम से दान स्वीकार करने के लिए केटो पर बनाया गया एक वर्चुअल अकाउंट (virtual account) है।”

यह तर्कसंगत है कि पैसा इकट्ठा करने के लिए केटो अपने मंच पर शुरू किए गए हर कैम्पेन के लिए एक नया बैंक अकाउंट नहीं खोलेगा। यह ना तो संभव है और ना ही व्यावहारिक होगा। इसलिए, वे वर्चुअल यूपीआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। केटो ने ऐसे वर्चुअल अकाउंट मुहैया कराने के लिए यस बैंक के साथ करार किया है।

पैसा कैसे निकाला जाता है

दान किया गया पैसा केटो द्वारा बनाए गए वर्चुअल यूपीआई अकाउंट में इकट्ठा किया जाता है। फंडरेजर प्लेटफॉर्म सीधे लाभार्थियों को पैसा नहीं देता है। फंडरेजर के संचालक को केटो के अकाउंट से पैसों को अपने खुद के अकाउंट में ट्रांसफर करना होगा, जहाँ से वे कैम्पेन के मुताबिक पैसों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

केटो के अनुसार, पैसा सीधे फंडरेजर से जुड़े बैंक अकाउंट में जाता है। इस मामले में वह राणा अयूब के पर्सनल या करंट अकाउंट में होगा, जो इस बात पर निर्भर करता है कि उसने केटो को अपने किस अकाउंट की जानकारी दी थी। राणा के मामले में इसका मतलब है कि केटो सीधे प्रवासी श्रमिकों को पैसे ट्रांसफर नहीं करेगा, उसे या उसके संगठन को अपने अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करने होंगे।

मालूम हो कि राणा आयूब ने कहा था कि एक पत्रकार होने के नाते उनका कर्त्तव्य है कि फॉलोअर्स का उनके प्रति विश्वास बना रहे और उन्होंने हमेशा यह सुनिश्चित किया है कि भारत के टैक्स और अन्य कानूनों का पूरा पालन किया जाए। अपने फंड इकट्ठा करने वाले कैम्पेन को समाप्त करते हुए राणा ने यह भी लिखा था कि वह दान लेने वालों और अपने लिए किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं चाहती हैं। इसलिए उन्होंने दान में जो भी मिला है उसे विदेशी दानदाताओं को वापस करने का निर्णय लिया गया है। हालाँकि, राणा ने इसे राहत कार्यों को एक बड़ा झटका बताते हुए यह भी कहा कि ऐसे कठिन समय में इस तरह का निर्णय लेना दुर्भाग्यपूर्ण है।

बता दें कि राणा आयूब का यह पहला कैम्पेन नहीं है जो संदेह के दायरे में आया है। इससे पहले उन्होंने महाराष्ट्र, बिहार और असम में राहत कार्यों के लिए कैम्पेन चलाया गया था। इस कैम्पेन में 68 लाख रुपए इकट्ठा हुए थे। हालाँकि, केटो (ketto) ने बिना किसी उचित कारण के यह कैम्पेन समाप्त कर दिया था।

राहुल गाँधी जहाँ समुद्र में कूदे, वहाँ के होटल का 6 लाख रुपए का बिल अभी तक नहीं चुकाया: CPI(M) का आरोप

केरल में वामपंथी सरकार सीपीआई (एम) के मुखपत्र देशभिमानी ने हाल ही में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी पर निशाना साधते हुए दावा किया कि विधानसभा चुनावों के दौरान वह कोल्लम के जिस होटल में रुके थे, उसका 6 लाख रुपए का बिल अभी भी बकाया है।

हालाँकि, सीपीआई (एम) के दावों पर पलटवार करते हुए कॉन्ग्रेस नेता बिंदुकृष्णा ने माकपा पर फर्जी अभियान चलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में माकपा को जिस तरह का झटका कोल्लम में जनता ने दिया है, वो अभी उबरने की कोशिश कर रही है।

बिंदुकृष्णा ने दावा किया कि जिस क्विलोन होटल में राहुल गाँधी रुके हुए थे, उसका एक भी रुपया बकाया नहीं है। सभी बकायों का निपटारा किया जा चुका है। कॉन्ग्रेस नेता ने फेसबुक पर होटल मालिक का एक लेटर पोस्ट करते हुए कहा कि इस तरह का झूठ फैलाने वालों से कानूनी रूप से निपटा जाएगा।

क्विलोन होटल मालिक के पत्र में दावा किया गया है, “राहुल गाँधी समेत दूसरे प्रमुख लोगों के रुकने के बाद सभी बकाया राशि के भुगतान का निपटान किया जा चुका है। क्विलोन बीच होटल का इस संबंध में कोई विवाद नहीं है।”

गौरतलब है कि माकपा के मुखपत्र देशभिमानी में दावा किया गया था कि राहुल गाँधी के होटल में रुकने के बाद होटल के बकाए 6 लाख रुपए का भुगतान नहीं किया गया था।

बता दें कि केरल विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गाँधी ने केरल में कई लोगों का ध्यान आकर्षित किया था। इसी दौरान वो कोल्लम में मछुआरों के साथ समुद्र में तैरने के लिए कूद गए थे। इस दौरान वह मछुआरों के साथ मछली पकड़ते भी दिखे थे। उन्होंने मछली पकड़ने का जाल भी समुद्र में फेंका था। लेकिन, इन सब के बावजूद कॉन्ग्रेस केरल में अपनी किस्मत नहीं बदल पाई। क्योंकि पिनारई के नेतृत्व में सीपीआई (एम) जबरदस्त जीत दर्ज की है।

बेंगलुरु गैंगरेप केस: वीडियो वायरल होने के बाद से पुलिस ने बांग्लादेशी पीड़िता को केरल में खोज निकाला, बयान दर्ज

बेंगलुरु रेप केस में रविवार (30 मई 2021) को पीड़िता का पता लगा लिया गया है। समाचार न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, डॉ. शरणप्पा एसडी, डीसीपी पूर्वी बेंगलुरु ने बताया कि बेंगलुरु पुलिस द्वारा गैंगरेप केस की पीड़िता का पता लगा लिया गया है। इस संबंध में पीड़िता का बयान दर्ज किया गया है। उसे केरल के कोझीकोड में खोजा गया था।

दरअसल बीते दिनों (27 मई 2021) सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें कुछ लोग एक महिला का गैंगरेप करते दिख रहे थे। गैंगरेप का वीडियो वायरल होने के बाद बेंगलुरु पुलिस ने इस मामले में एक महिला समेत 5 बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया था।

इसके बाद से पुलिस पीड़िता को भी खोजने में जुट गई थी, ताकि वो भी जाँच प्रक्रिया का हिस्सा बन सके और अपना बयान दर्ज करा सके। बेंगलुरु सिटी के पुलिस कमिश्नर कमल कांत ने बताया कि शुरुआती जाँच के बाद बलात्कार और प्रताड़ना का मामला दर्ज कर लिया गया था। पीड़िता को खोजने के लिए पुलिस की एक अलग टीम भी बनाई गई थी। ऐसे में पुलिस की मेहनत रंग लाई और उन्होंने आज (30 मई 2021) पीड़िता को खोज निकाला।

बता दें कि रेप पीड़िता को ट्रैफिकिंग (मानव तस्करी) करके भारत लाया गया था। वो भी बांग्लादेशी है। पीड़िता की वित्तीय समस्याओं के कारण उसे प्रताड़ित किया गया। यही नहीं एक महिला समे​त 5 दरिंदे उसके साथ हैवानियत की सभी हदें पार करते हुए नजर आए थे।

वायरल वीडियो में सभी आरोपित अपनी करतूतों को वीडियो कॉल पर अन्य परिचितों को दिखाते हुए भी देखे गए थे। वे यहीं नहीं रुके उन्होंने वीडियो रिकॉर्ड करते समय पीड़िता के प्राइवेट पार्ट में एक शराब की बोतल भी घुसा दी थी। वहीं, वीडियो में पीड़िता चिल्लाती है, “कृपया मेरे साथ ऐसा मत करो, वीडियो रिकॉर्ड मत करो।” इसके बाद आरोपितों में से एक ने पीड़िता के मुँह में कपड़ा ठूँसकर उसकी आवाज को बंद कर दिया। असम पुलिस ने इन पाँचों आरोपितों की तस्वीरें भी जारी की थी।

इस मामले में बेंगलुरु पुलिस ने आश्वासन दिया था कि पूरी तत्परता से वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में जाँच आगे बढ़ाई जा रही है। राममूर्ति पुलिस थाने में इस मामले की FIR दर्ज की गई थी।

हमास आतंकियों के साथ एसोसिएटेड प्रेस के पत्रकारों ने अल जला टावर में पी हर रोज कॉफी: इजरायल का सनसनीखेज खुलासा

फिलिस्तीन के साथ जारी विवाद के बीच इजरायल डिफेंस फोर्स के सीनियर लेवल अफसर ने बड़ा खुलासा करते हुए दावा किया है कि एसोसिएटेड प्रेस के गाजा में रहने वाले पत्रकारों के हमास के साथ अच्छे संबंध थे। टाइम्स ऑफ इजरायल के मुताबिक जिस मीडिया बिल्डिंग को आईडीएफ ने उड़ा दिया था, वहाँ एपी के पत्रकार हमास के आतंकियों के साथ ‘सुबह की चाय-कॉफी’ पीते थे।

दरअसल, बीते 15 मई 2021 को हमास के खिलाफ आक्रामक हमला करते हुए आईडीएफ ने गाजा में स्थित अल जला टॉवर पर भीषण बमबारी कर उसे ध्वस्त कर दिया था, जिसमें अल जजीरा और एसोशिएटेड प्रेस समेत कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटलेट थे।

काउंटर टेररिज्म ऑपरेशन के बाद आईडीएफ ने कहा था कि अल जला टॉवर, जिसमें प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटलेट्स थे वह आतंकी संगठन हमास के इंटेलीजेंस यूनिट का हाउस था। यहीं से हमास आईडीएफ की गतिविधियों पर एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर डिवाइसेस के जरिए नजर रखता था।

लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली डिफेंस फोर्स के चीफ अवीव कोहावी ने दावा किया है कि एसोसिएटेड प्रेस के पत्रकारों ने जाने-अनजाने अल जला टॉवर के ग्राउंड-लेवल पर स्थित कैफेटेरिया में हमास के इलेक्ट्रॉनिक्स विशेषज्ञों के साथ सुबह की कॉफी पी थी।

एसोसिएटेड प्रेस ने आईडीएफ के दावों को नकारा

हालाँकि, एसोसिएटेड प्रेस ने आईडीएफ के इन आरोपों का खंडन करते हुए इसे “बिल्कुल झूठा” बताया और कहा कि इमारत में एक भी कैफेटेरिया नहीं था।

शनिवार (29 मई 2021) रात को एक बयान जारी कर एपी ने कोहावी के दावों को गलत बताया। न्यूज एजेंसी ने कहा, “इजरायली सेना के चीफ ऑफ स्टाफ द्वारा लगाया गया यह आरोप पूरी तरह से झूठा और निराधार है। भवन में कैफेटेरिया भी नहीं था। इस तरह के निराधार दावे एसोसिएटेड प्रेस के पत्रकारों की सुरक्षा को खतरे में डालते हैं।”

अपने बयान में एपी ने अल जला टॉवर को उड़ाने की घटना की स्वतंत्र जाँच की माँग की, ताकि फैक्ट का पता चल सके। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, “जैसा कि हमने बार-बार कहा है, हमें इमारत में हमास के पहले से होने की कोई जानकारी नहीं थी और न ही आईडीएफ ने हमले से पहले ऐसी किसी भी संभावित उपस्थिति की चेतावनी दी। हमें नहीं पता कि इजरायल क्या सबूत दिखाएगा, लेकिन हम इसके बारे में जानना चाहते हैं।”

आईडीएफ चीफ बोले- सही थी एयर स्ट्राइक

गाजा के अल जला टॉवर पर एयर स्ट्राइक को सही ठहराते हुए आईडीएफ प्रमुख अवीव कोहावी ने अल जला टॉवर पर एयर स्ट्राइक को लेकर कथित तौर पर अपने सहयोगियों से कहा कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया के कुछ वर्ग इजरायल की निंदा कर रहे हैं, लेकिन हमें इसका तनिक भी अफसोस नहीं है। उसे उचित ढंग से ध्वस्त किया गया है।

इजरायली मिलिट्री इंटेलीजेंस के अधिकारियों ने इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए इमारत पर हमले को सही बताया है। हमास जिस मंजिल पर काम कर रहा था, उस पर केवल सर्जिकल स्ट्राइक करने के बजाय पूरे ढाँचे को ही उड़ाना ज्यादा सही था, क्योंकि सर्जिकल स्ट्राइक से टॉवर की सभी क्षमताओं को नष्ट नहीं किया सकता।

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अल जला टॉवर को “पूरी तरह से वैध लक्ष्य” बताते हुए कहा कि इजरायली इंटेलीजेंस के जरिए इस तरह के सबूत मिले हैं।

नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर आईडीएफ के अधिकारियों ने कहा है कि इजरायल के रक्षा प्रतिष्ठान ने पेंटागन के अधिकारियों को हमास के मिलिट्री ऑपरेशन के बारे में खुफिया जानकारी दी थी।

इजरायल के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अदालत पहुँचा अल जला टॉवर

इन सब के बीच इजरायल द्वारा नेस्तनाबूद किए गए अल जला मीडिया टॉवर के मालिक जवाद मेहदी ने इंटरनेशनल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा है कि टॉवर को जमींदोज करना एक युद्ध अपराध था। यह शिकायत आईसीसी के मुख्य अभियोजक द्वारा इजरायल-फिलिस्तीन के हालिया संघर्ष को अपराध बताने के बाद आई है।

हमास के आतंकवादियों के साथ मिले होने के आरोपित मेहदी ने कहा कि इजरायली खुफिया एजेंसियों ने 13 मंजिला इमारत पर हमले से पहले उसे खाली करने के लिए केवल एक घंटे का वक्त दिया था।

आईसीसी पहले से ही मार्च 2014 से इजरायली फोर्स और फिलिस्तीन के आतंकी गुटों के बीच संभावित युद्ध के मामलों की जाँच कर रहा है। हालाँकि, आईसीसी के पास इस तरह की जाँच करने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि इजरायल अदालत का सदस्य नहीं है।

पाकिस्तान में सिखों पर खतरा, धर्मगुरु भेज रहे ऑडियो मैसेज… और खालिस्तानी नेता कर रहे इस्लामी आतंकियों का बचाव

पाकिस्तान दशकों से अपने यहाँ की सिख आबादी के साथ हत्या, दुष्कर्म, अपहरण और उनकी बच्चियों/लड़कियों का जबरन विवाह कराने जैसे कृत्यों को अंजाम देकर प्रताड़ित करते आ रहा है। हाल में भी ऐसा ही हुआ। फिर भी वहाँ स्थित सिखों के नेता न जाने क्यों भारत को तोड़ने के नापाक मंसूबों वाले इस्लामी आतंकवाद को बढ़ावा देने में मदद कर रहे हैं?

हाल ही में पाकिस्तान के सिख समूहों के बीच प्रसारित एक ऑडियो संदेश में एक सिख धर्मगुरु ने लाहौर और ननकाना साहिब स्थित सिख समुदाय के सदस्यों को तालिबानी हमले के खतरे के कारण देर रात घरों से बाहर न निकलने की चेतावनी दी। ज़ी मीडिया ने इस ऑडियो संदेश को एक्सेस किया है, जिससे पता चलता है कि लाहौर के सिखों को और गुरु नानक देव के जन्मस्थान ननकाना साहिब में रहने वाले सिखों को पाकिस्तान के इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) को अपना परिचय पत्र जमा करने के लिए कहा गया था।

इसकी पुष्टि करते हुए, गुरुद्वारा गुरु रामदास जी, चूना मणि, लाहौर के ग्रंथी रंजीत सिंह ने एक ऑडियो संदेश भेजकर सिखों को सतर्क रहने और देर रात तक अपने घरों से बाहर न रहने की चेतावनी दी। रंजीत सिंह के साथ पीएसजीपीसी के पूर्व सदस्य मनिंदर सिंह ने भी पश्तो में एक ऑडियो संदेश जारी किया और पाकिस्तान में सिखों को सतर्क रहने के लिए कहा।

इंटरनेट पर वायरल हुए ऑडियो संदेश में रंजीत सिंह ने कहा, “गुरुद्वारा डेरा साहिब में दैनिक शाम दीवान की पराकाष्ठा के बाद, ईटीपीबी अधिकारियों द्वारा एक घोषणा की गई थी कि लाहौर और ननकाना साहिब में रहने वाले सिखों को जान से मारने की धमकी मिली है, इसलिए उन्हें पुलिस के साथ आवासीय पता, संपर्क नंबर आदि सहित अपना विवरण साझा करना चाहिए ताकि आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जा सकते हैं।”

इस बात की पुष्टि करते हुए कि कई सिखों ने पुलिस को अपने संबंधित दस्तावेज दिए थे। लाहौर के एक सिख निवासी जो कपड़े की दुकान चलाते हैं, ने कहा, “यहाँ तक कि पुलिसकर्मी भी हमारी दुकानों पर दस्तावेज माँगने आते हैं।”

इस मामले पर भारतीय विश्व मंच (IWF, भारतीय प्रवासियों को जोड़ने वाला एक संगठन) ने संयुक्त राष्ट्र में इस मुद्दे को उठाने के अलावा पाकिस्तान सरकार के साथ सिख और पाकिस्तान के हिंदुओं की सुरक्षा के मुद्दे को उठाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्तक्षेप की माँग की। इसके बावजूद पाकिस्तानी सिख नेतृत्व का कहना है कि सिखों को चेतावनी देने वाला ऑडियो मैसेज पाकिस्तान के गुरुद्वारा ग्रंथी रंजीत सिंह द्वारा फैलाया गया था, लेकिन किसी और मकसद से।

सोशल मीडिया पर अपलोड किए गए एक वीडियो संदेश में पाकिस्तान के खालिस्तानी नेता गोपाल सिंह चावला, जिनके हैंडलर आईएसआई के साथ हैं, ने कहा कि पाकिस्तान के सिख हमेशा गुरुद्वारा ग्रंथी से मार्गदर्शन लेते हैं। चावला ने कहा, “संदेश वास्तव में ग्रंथी रंजीत सिंह का था लेकिन वह कुछ और बताना चाहते थे।” 

लाहौर और ननकाना साहिब के सिखों के लिए खतरे के वास्तविक मुद्दे को छिपाने के एक स्पष्ट प्रयास में चावला ने एक मजेदार तर्क दिया कि ग्रंथी रंजीत सिंह सिख लड़कों को देर रात में इधर-उधर न घूमने और समय पर घर पहुँचने का संदेश दे रहे थे। लाहौर और ननकाना साहिब के सिखों के ऊपर खतरे के वास्तविक मुद्दे को छिपाने का प्रयास करते हुए उन्होंने अनजाने में पाकिस्तान में बिगड़ते सिख धार्मिक मूल्यों और प्रथाओं की ओर भी इशारा किया। उन्होंने दुनिया को सूचित किया कि पाकिस्तान के सिख युवा सिख धर्म के रास्ते से भटक गए हैं।

चावला ने 2.31 मिनट के वीडियो में कहा, “हमारे लड़के देर रात तक बाहर बहुत घूमते रहते हैं और दैनिक धार्मिक दिनचर्या नहीं कर रहे थे। इसलिए ग्रंथी ने कहा कि चिंता की कोई बात नहीं है। आप (सिख युवा) समय पर घर जाएँ ताकि आप अगली सुबह गुरुद्वारा जा सकें।”

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों किसान आंदोलन के दौरान तथाकथित सिख (खालिस्तानी)-इस्लाम एकता देखने को मिला। केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ ‘किसान’ दिल्ली बॉर्डर पर डटे हुए हैं। एक के बाद एक विपक्षी दल ‘किसानों’ के समर्थन में सामने आ रहे हैं। वहीं पंजाब और हरियाणा के ‘किसानों’ के समर्थन में मुस्लिम पक्ष भी जुड़ गया है। पिछले दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो खूब वायरल हुआ, जिसमें ‘किसान’ आंदोलन के समर्थन में उतरे मुस्लिम समुदाय के लोग सड़क पर नमाज पढ़ रहे थे और सिख समुदाय के लोग उनके साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा था कि सिख समुदाय के लोग नमाज पढ़ रहे मुस्लिम समुदाय के लोगों के पास खड़े होकर उन्हें प्रोटेक्ट कर रहे थे।

राँची में कविता की बेटी से छेड़खानी के बाद मुख्तार और उसके बेटों सहित 150 की मुस्लिम भीड़ ने किया हमला, पत्थरबाजी

झारखंड की राजधानी राँची के हिंदपीढ़ी इलाके में एक हिन्दू परिवार ने आरोप लगाया कि मोहल्ले के ही एक मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति ने डेढ़-दो सौ लोगों के साथ उनके घर पर हमला कर दिया। इसके अलावा पथराव और मारपीट का भी आरोप लगाया गया है।

घटना शनिवार (29 मई) शाम की बताई जा रही है। स्थानीय मीडिया खबरों के मुताबिक हिंदपीढ़ी थाना क्षेत्र के सेकंड स्ट्रीट के रहने वाले विवेक राज और उनके परिवार के साथ मोहल्ले के मुस्लिम समुदाय के कुछ व्यक्तियों द्वारा मारपीट की गई और पत्थर से हमला किया गया। हमले में विवेक, उनकी पत्नी कविता रानी, बेटा आलोक और घर के अन्य सदस्यों को चोट पहुँची है।

साभार : प्रभात खबर, रांची

विवेक राज की पत्नी कविता रानी का कहना है कि कुछ दिनों पहले उनकी बेटी से छेड़खानी के मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई थी जिसके आधार पर मुख्तार का पुत्र जेल गया था। कविता के मुताबिक मुख्तार का पुत्र अभी जमानत पर बाहर है और केस वापस न लेने पर जान से मारने की धमकी दे रहा है।

कविता रानी ने घटना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि शनिवार की शाम उनके पति विवेक और पुत्र घर के बाहर बाइक बना रहे थे। उसी समय मुख्तार और उसके दो बेटों ने करीब डेढ़ सौ लोगों के साथ उन पर हमला कर दिया। कविता ने बताया कि उनके पति और बेटे घर के अंदर भागे लेकिन आरोपितों ने घर में घुसकर मारपीट की। कविता ने मुख्तार और उसके साथियों पर पत्थरबाजी का भी आरोप लगाया है।

मामले में कविता रानी के बयान के आधार पर हिंदपीढ़ी थाना में मुख्तार और उसके दो बेटों के खिलाफ शिकायत दर्ज कर ली गई है। हालाँकि हिंदपीढ़ी थाना प्रभारी की जाँच में यह कहा गया है कि अपशब्द कहे जाने के बाद यह मामला बिगड़ा और हाथापाई तक पहुँचा।  

केरल में बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच शिक्षकों को घर-घर सीएम का संदेश बाँटने का आदेश: CPIM का समर्थन तो कॉन्ग्रेस ने किया विरोध

केरल की लेफ्ट सरकार द्वारा शैक्षणिक सत्र 2021-22 में कक्षा 1 में पहुँचने वाले छात्रों को मुख्यमंत्री पिनराई विजयन का शुभकामना और स्वागत संदेश उनके घर-घर जाकर देने के लिए आदेशित किया गया है। इसके लिए शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है जो बच्चों के घर जाकर उन्हें सीएम विजयन के संदेशों वाले पत्रक (Leaflets) देंगे। मीडिया खबरों के अनुसार शनिवार (29 मई) को जारी इस आदेश के बाद केरल में इसका विरोध भी हो रहा है।

कॉन्ग्रेस समर्थित केरल प्रदेश स्कूल टीचर एसोसिएशन (KPSTA) के नेताओं ने इस निर्णय का विरोध करते हुए सामान्य शिक्षा विभाग से यह माँग की है कि इस महामारी के समय घर-घर जाकर सीएम विजयन के संदेश पत्रकों को बाँटने का कार्य शिक्षकों को दिया जाना सही नहीं है और शिक्षकों को इस कार्य से रोका जाना चाहिए।

KPSTA के राज्य अध्यक्ष एम सलाहुद्दीन ने इस प्रकार के आदेश को राजनीति से प्रेरित और अजीब आदेश बताया। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले हुई क्वालिटी इमप्रूवमेंट प्रोग्राम (QIP) की मीटिंग में सरकार के प्रतिनिधियों ने ऐसी किसी भी योजना के बारे में कोई चर्चा नहीं की और इस आदेश के द्वारा इस कार्य में शामिल किए जाने वाले लोगों के जीवन पर संकट आ सकता है। सलाहुद्दीन ने कहा कि जब शिक्षा में क्लासरूम का स्थान ऑनलाइन शिक्षा ने ले लिया है तो मुख्यमंत्री यह संदेश ऑनलाइन या टेलीविजन चैनल के माध्यम से प्रसारित कर सकते हैं। इसके लिए शिक्षकों को घर-घर नहीं भेजना चाहिए।

वहीं सीपीआईएम समर्थित शिक्षक संगठन इस निर्णय के समर्थन में हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक केरल स्कूल टीचर्स एसोसिएशन (KSTA) के महासचिव एनटी शिवराजन ने कहा कि बच्चे और समाज के लोग यही तो चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री का संदेश घर-घर पहुँचेगा तब सभी के द्वारा इसकी प्रशंसा की जाएगी।

सूत्रों के मुताबिक सामान्य शिक्षा विभाग द्वारा लगभग 4 लाख ऐसे पत्रक (Leaflets) छपाए गए हैं जिनमें मुख्यमंत्री पिनराई विजयन का बच्चों और उनके अभिभावकों के नाम संदेश छपा हुआ है। हालाँकि पिछले साल भी मुख्यमंत्री का यह संदेश बच्चों को भेजा गया था लेकिन तब इसे ऑनलाइन ही भेजा गया था या फिर सीएम विजयन के संदेश को स्कूलों में पढ़ा गया था।  

ज्ञात हो कि Covid-19 महामारी के चलते स्कूलों में शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र का शुभारंभ कार्यक्रम ऑनलाइन आयोजित किया जाना है लेकिन सीएम पिनराई विजयन सरकारी कॉटन हिल्स हायर सेकंडरी स्कूल में प्रवेसनोत्सवम का शुभारंभ करेंगे।

हालाँकि केरल सरकार के इस निर्णय का विरोध ऐसे समय पर हो रहा है जब केरल में कोरोना वायरस संक्रमण दर 15% से ऊपर बनी हुई है। शनिवार (29 मई) को केरल में Covid-19 की संक्रमण दर 16.59% थी। लगातार बढ़ रहे संक्रमण के कारण राज्य में 8 मई को सख्त लॉकडाउन की घोषणा की गई थी। बाद में संक्रमण के मामलों में वृद्धि बने रहने के कारण लॉकडाउन को 30 मई तक बढ़ा दिया गया था। हाल ही में एक बार फिर राज्य सरकार द्वारा लॉकडाउन को 9 जून तक बढ़ा दिया गया है।

शनिवार को केरल में संक्रमण के 23,513 नए मामले आए। इसके अलावा संक्रमण के चलते 198 लोगों की मौत भी हुई। संक्रमण के नए मामलों के चलते राज्य में संक्रमित कुल मरीजों की संख्या 24,94,386 हो गई है जिनमें से सक्रिय मरीजों की संख्या 2,33,031 है। कुल संक्रमित और सक्रिय मरीजों के मामले में केरल देश के चार टॉप राज्यों में शामिल है।