कोरोना वायरस के कहर के बीच देश में ब्लैक फंगस (म्यूकोरमायकोसिस) का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। इसके संक्रमण को देखते हुए केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से इसे महामारी घोषित करने को कहा है। बीते एक महीने में देशभर में इसके 5,000 से भी अधिक संक्रमित मिल चुके हैं और 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
केंद्र के आह्वान पर असम, ओडिशा, राजस्थान, तेलंगाना, तमिलनाडु, पंजाब और हरियाणा सरकार ने महामारी एक्ट की धारा 1897 के तहत ब्लैक फंगस को महामारी घोषित कर दिया है।
देश में 11 कंपनियाँ बना रही ब्लैक फंगस की दवा
इस बीच केंद्र सरकार ने इसके इलाज के लिए भारत सीरम, मिलन, बीडीआर फार्मा, सन फार्मा, लाइफ केयर और सिप्ला के बाद पाँच और कंपनियों एमक्योर फार्मा, नेटको, गुफिक बायोसाइंसेज, एलेंबिक फार्मा और लयका फार्मा को ब्लैक फंगस के इलाज में काम आने वाली दवा (एंफोटेरेसिन बी) के निर्माण की इजाजत दे दी है। इसी के साथ देश में म्यूकोरमायकोसिस की दवा बनाने वाली 11 कंपनियाँ हो गई हैं।
Black Fungus (Mucormycosis) curing drug #AmphotericinB ‘s shortage will be resolved soon!
Within three days, 5 more Pharma companies have got New Drug Approval for producing it in India, in addition to the existing 6 pharma companies. (1/2) pic.twitter.com/hm9KiZgxr4
— Mansukh Mandaviya (@mansukhmandviya) May 20, 2021
इस बात की जानकारी देते हुए रसायन एवं उर्वरक राज्यमंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि देश में ब्लैक फंगस के इंजेक्शन (एंफोटेरेसिन बी) को बना रही कंपनियों से उत्पादन बढ़ाने के लिए पहले ही कहा जा चुका है। मंडाविया ने कहा कि ब्लैक फंगस के इलाज में काम आने वाली एंटी-फंगल दवा एंफोटेरेसिन बी की कमी दूर करने का हर प्रयास किया जा रहा है। मंडाविया ने बताया कि भारतीय कंपनियों ने भी एंफोटेरेसिन बी (AmphotericinB) की 6 लाख शीशियों के आयात के ऑर्डर दिए हैं।
मौजूदा समय में देश में 3.80 लाख इंजेक्शन का उत्पादन हर महीने किया जा रहा है। इसके एक इंजेक्शन की कीमत करीब 7,000 रुपए है और एक मरीज को करीब 50-150 इंजेक्शन के डोज की आवश्यकता हो सकती है। देश में इसके संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। साथ ही साथ ही सरकार ने इसके इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा एंफोटेरेसिन बी इंजेक्शन के तीन लाख इंजेक्शन का आयात किया है, जो कि इसी महीने 31 मई तक मिल जाएँगे।
किस राज्य में कितने मरीज
गुजरात:ब्लैक फंगस का संक्रमण तेजी से सभी राज्यों को अपनी चपेट में लेता जा रहा है। अकेले गुजरात में ही अब तक इसके 1163 से ज्यादा मरीज मिल चुके हैं। इससे 40 से अधिक लोगों की जानें गई हैं।
महाराष्ट्र: राज्य में अब तक ब्लैक फंगस के 1500 से अधिक संक्रमित मिल चुके हैं, जिनमें 90 की मौत हो चुकी है तो 500 लोग इससे ठीक भी हो चुके हैं। जबकि, 850 एक्टिव केस हैं।
हरियाणा: यहाँ इसके 226 संक्रमित मिले थे, जिनमें से अब तक 14 मरीजों की मौत हो चुकी है।
दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी में इसके 200 से भी ज्यादा संक्रमितों को अब तक डिटेक्ट किया जा चुका है और इससे एक की मौत हुई है।
तमिलनाडु: तमिलनाडु में भी अब तक 9 मरीजों की पहचान हो चुकी है।
बिहार: यहाँ म्यूकोरमायकोसिस के 50 से अधिक मरीजों की पहचान हो चुकी है, जिसमें से दो की मौत भी चुकी है।
उत्तर प्रदेश: यूपी में अब तक इस महामारी के 120 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें से 13 लोगों की मौत हो गई है।
छत्तीसगढ़: राज्य में ब्लैक फंगस के अब तक 90 संक्रमितों की पहचान हो चुकी है। वहीं दुर्ग में इसके कारण एक मरीज की मौत भी हुई है।
हिमाचल प्रदेश: पहाड़ी राज्य हिमाचल में भी ब्लैक फंगस का एक संक्रमित मिला है।
उत्तराखंड: यहाँ इसके 30 मरीजों की पहचान हो चुकी है जबकि तीन लोगों की संक्रमण के चलते मौत भी हो चुकी है।
झारखंड: राज्य में ब्लैक फंगस की दवा एंफोटेरिसिन-बी इंजेक्शन की किल्लत के बीच यहाँ 4 मरीजों की मौत हो गई है। वहीं 15 लोगों का इलाज किया जा रहा है।
ओडिशा: यहाँ 5 मरीजों के मिलने और एक की मौत के बाद नवीन पटनायक सरकार ने इसे महामारी घोषित कर दिया है।
तेलंगाना: यहाँ भी अब तक 80 मरीजों में फंगस की पुष्टि हो चुकी है। सरकार ने इसे महामारी घोषित कर दिया है।
आंध्र प्रदेश: राज्य में इस फंगस के अब तक 250 से अधिक मामलों की पुष्टि हो चुकी है। जगन रेड्डी सरकार ने इससे निपटने के लिए एंफोटेरिसिन-बी इंजेक्शन के 15 हजार बॉयल का ऑर्डर किया है।
कर्नाटक: राज्य में अब तक 97 मरीजों में ब्लैक फंगस की पुष्टि हो चुकी है। बेंगलुरु में इसका डेडिकेटेड सेंटर बनाया गया है।
मध्य प्रदेश: यहाँ एक सप्ताह के भीतर ही 281 मरीजों में ब्लैक फंगस का असर दिखा है। अब तक 27 लोगों की मौत भी हो चुकी है।
राजस्थान: अशोक गहलोत सरकार ने भी इसे महामारी घोषित कर दिया है। राज्य में 100 से अधिक संक्रमित मिल चुके हैं।
केरल: केरल में अब तक ब्लैक फंगस के 15 मरीजों की पहचान हो चुकी है।
असम: इस पूर्वोत्तर राज्य में गुरुवार (20 मई 2021) को ब्लैक फंगस के कारण पहली मौत हुई थी।
गौरतलब है कि पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बाद अब तमिलनाडु, कर्नाटक, असम, ओडिशा व तेलंगाना ने म्यूकोरमायकोसिस के संक्रमण को महामारी घोषित कर दिया है।
भारत के कई राज्यों में तौकते तूफ़ान ने खूब तबाही मचाई है। इस तूफ़ान से जहाँ अब तक 122 लोगों के मारे जाने की सूचना है। इनमें से 37 तो बार्ज P-305 नामक जहाज पर थे, जो डूब गया। ये मुंबई के तट से 35 मील (56.32 किलोमीटर) की दूरी पर डूबा। आपदा प्रबंधन का कार्य देखने वाले गृह मंत्रालय के प्रकोष्ठ ने कहा कि 6 राज्यों से करीब 2.6 लाख लोगों को खतरे वाले तटीय इलाकों से सुरक्षित हटाया गया।
इनमें से 2.38 लाख लोग गुजरात के हैं, जबकि बाकी के 22 हज़ार लोग अन्य 5 राज्यों के हैं। इन सभी को राहत कैम्पों में रखा गया है। 47 मौतों के साथ तौकते तूफ़ान का सबसे ज्यादा असर गुजरात पर ही पड़ा है। समुद्र तौकते तूफ़ान सबसे पहले गिर सोमनाथ में ही पहुँचा। 77,000 बिजली के पोल ध्वस्त हो गए, वहीं 70,000 से अधिक पेड़ भी उखड़ गए। इससे कई इलाकों में बिजली ठप हो गई और सड़क जाम लग गया।
गुजरात आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया कि राज्य की 368 सरकारी इमारतों को इस तूफ़ान ने नुकसान पहुँचाया है। गुजरात में 1143 किलोमीटर सड़क मार्ग को भी इस तूफ़ान ने तबाह कर दिया। तौकते ने केरल में 356 किलोमीटर और कर्नाटक में 58 किलोमीटर सड़क मार्ग को भी तबाह किया। गुजरात में 130 कोविड-19 अस्पतालों को तौकते ने नुकसान पहुँचाया, जिनमें से 98 की मरम्मत कर के फिर से चालू कर दिया गया है।
जहाँ तक P-305 बरज (माल लादने या लोगों को ले जाने वाली संकरी नाव) का सवाल है, भारतीय नौसेना को अब तक इस पर सवार लोगों की 49 लाशें मिल चुकी हैं और 26 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। शुक्रवार (मई 21, 2021) को इस रेस्क्यू ऑपरेशन का 5वाँ दिन चल रहा है। सवाल उठ रहा है कि चेतावनी के बावजूद इसे सुरक्षित जगह पर क्यों नहीं पहुँचाया गया? जहाज के इंजीनियरों का आरोप है कि कैप्टेन पीठ दिखा कर भाग खड़ा हुआ था।
इस पर 263 लोग सवार थे, जिन्हें बचाने के लिए तूफ़ान के बीच भारतीय नौसेना ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। जहाज की मालिकाना कंपनी पर भी तूफ़ान की चेतावनी क नज़रअंदाज़ करने के आरोप लग रहे हैं। ये हीरा ऑइल फ़ील्ड्स में खड़ा था। हवा की रफ़्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक पहुँचने के साथ ही जहाज किसी चीज से टकराया और इसमें छेद हो गया। सोमवार को शाम 5 बजे तक ये पूरा पानी में डूब चुका था।
इधर अभी तौकते का कहर ठीक से थमा भी नहीं है कि पश्चिम बंगाल और ओडिशा में ‘याश तूफ़ान’ ने दस्तक दे दी है। आने वाले बुधवार (मई 26, 2021) को ये तूफ़ान समुद्र से जमीन पर टकराएगा। उत्तरी अंडमान समुद्र और बंगाल की खाड़ी के मध्य में एक दबाव वाला क्षेत्र न रहा है। ये तूफान उत्तर-पश्चिम की तरफ बढ़ना शुरू होगा। ओडिशा की सरकार और अधिकारियों की एक उच्च-स्तरीय बैठक में इससे निपटने की तैयारियों पर चर्चा हुई।
बता दें कि नुकसान का जायजा लेने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार (मई 19, 2021) को गुजरात, दमन और दीव के दौरे पर पहुँचे थे। पीएम मोदी सबसे पहले भावनगर पहुँचे, जहाँ उन्होंने चक्रवाती तूफान Tauktae से प्रभावित क्षेत्रों का हवाई निरीक्षण किया। पीएम मोदी ने गुजरात में राहत कार्यों के लिए एक हजार करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की घोषणा की। पीएमओ बताया कि गुजरात में नुकसान के आकलन के लिए केंद्र सरकार एक अंतर-मत्रीय दल को यहां तैनात करेगी।
बोल्ड किरदारों के जरिए बॉलीवुड में अपनी एक अलग पहचान बनाने वाली अभिनेत्री राधिका आप्टे का कुछ समय पहले एक न्यूड वीडियो लीक हुआ था, जिसे लेकर वह काफी विवादों में भी रही थीं। राधिका ने अपने एक हालिया इंटरव्यू में राधिका ने अपने उस लीक हुए न्यूड वीडियो को लेकर कहा कि उस घटना के बाद वह एकदम से टूट गई थीं और चार-पाँच दिनों तक घर से बाहर नहीं निकलीं।
ग्रैजिया मैग्जीन को दिए इंटरव्यू में राधिका कहती हैं कि उनके न्यूड वीडियो में उन्हें उनके ड्राइवर से लेकर वॉचमैन तक पहचान गए थे, जिसका उन पर बहुत ही बुरा असर हुआ था। राधिका ने कहा कि वह मीडिया की वजह से नहीं बल्कि इसलिए घर से बाहर नहीं निकल सकीं क्योंकि उन्हें तस्वीरों में उनके ड्राइवर, वॉचमैन और स्टाइलिस्ट के ड्राइवर तक ने पहचान लिया था।
उस दौर को याद करते हुए राधिका कहती हैं कि जिस वक्त उनके साथ ये हादसा हुआ, उस दौरान वे “क्लीन शेव” मूवी की शूटिंग कर रही थीं।
कपड़े उतारे तो लगा कि अब छुपाने के लिए कुछ बचा ही नहीं
राधिका ने कहा कि उन विवादित फोटोज को देखकर सभी पहचान सकते थे कि वो मैं नहीं थी। एक्ट्रेस को लगता है कि इन न्यूड वीडियोज और कंट्रोवर्सी के बारे में सोचना समय की बर्बादी है। वह कहती हैं कि जब उन्होंने “पार्च्ड” फिल्म के लिए अपने कपड़े उतारे तो उन्हें इस बात का अहसास हुआ कि अब उनके पास छुपाने के लिए कुछ भी नहीं है।
“पॉर्च्ड” फिल्म में न्यूड होने को लेकर राधिका आप्टे का कहना है, “ये आसान नहीं था। स्क्रीन पर न्यूड होना काफी डरावना था, क्योंकि उस दौरान वो अपनी बॉडी इमेज की समस्या से जूझ रही थीं। हालाँकि, अब वो कहीं भी न्यूड हो सकती हैं।”
अपनी बॉडी शेप पर गर्व
राधिका आप्टे ने अपनी बॉडी, शेप और साइज पर गर्व करते हुए कहा कि फिल्म “पार्च्ड” को कई जगहों पर देखा गया और मेरे काम को सराहा भी गया। बॉलीवुड में आपको हमेशा आपके शरीर के साथ क्या करना है इसकी सलाह दी जाती है? लेकिन मैंने सोच रखा है कि मैं अपने शरीर के साथ कुछ भी नहीं करूँगी। गौरतलब है कि हाल ही में आप्टे की “ओके कम्प्यूटर” फिल्म रिलीज हुई है।
‘अडानी ग्रुप’ के संस्थापक एवं अध्यक्ष गौतम अडानी अब एशिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं। भारत के लिए गर्व की बात है कि एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी भी यहीं के हैं। एशिया के दोनों सबसे अमीर व्यक्ति अब भारत के ही हैं। गौतम अडानी ने चीन के सबसे अमीर व्यक्ति झोंग शंशन को पीछे छोड़ा। झोंग शंशन फरवरी 2021 तक एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति हुआ करते थे, लेकिन मुकेश अंबानी ने उन्हें पीछे छोड़ दिया था।
स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड गौतम अडानी की कंपनियों के शेयर के दाम भी आगे बढ़ रहे हैं। गौर करने वाली बात ये है कि पिछले साल जहाँ मुकेश अंबानी की संपत्ति 175.5 मिलियन डॉलर (1280.94 करोड़ रुपए) घट गई, वहीं गौतम अडानी की संपत्ति में 32.7 बिलियन डॉलर (2.38 लाख करोड़ रुपए) की वृद्धि हुई, जिसके बाद उनकी संपत्ति 63.6 बिलियन डॉलर (4.64 लाख करोड़ रुपए) हो गई है।
पिछले साल गौतम अडानी की संपत्ति में जितनी वृद्धि हुई, उतनी विश्व के सबसे अमीर उद्योगपति एलोन मस्क या किसी भी अन्य अरबपति कारोबारी की संपत्ति में नहीं हुई। मुकेश अंबानी की संपत्ति फ़िलहाल 76.5 बिलियन डॉलर (5.58 लाख करोड़ रुपए) है और वो विश्व के 13वें सबसे अमीर व्यक्ति हैं। उनके बाद आने वाले गौतम अडानी का इस मामले में विश्व में 14वाँ स्थान है। एशिया के 10 शीर्ष अमीरों की सूची में अंबानी-अडानी के अलावा सभी चीनी कारोबारी हैं।
एशिया के दूसरे सबसे अमीर कारोबारी बने गौतम अडानी
जहाँ तक झोंग का सवाल है, नोंग्फू स्प्रिंग मिनरल वॉटर और वनटाई बायोलॉजिकल फार्मा इंटरप्राइस को चलाने वाले इस चीन के सबसे अमीर व्यक्ति के पास 63.6 बिलियन डॉलर (4.64 लाख करोड़ रुपए) की संपत्ति है। कोरोना महामारी के बीच उनकी फार्मा कंपनी ने अच्छी खासी कमाई की है। इधर ‘अडानी टोटल गैस’ के शेयर्स पिछले साल 12 गुना ज्यादा तक बढ़े। अडानी इंटरप्राइजेज के शेयर्स 8 गुना ज्यादा बढ़े।
वहीं ‘अडानी ट्रान्समिशन्स’ के शेयर 6 गुना ज्यादा बढ़ गए। ‘अडानी ग्रीन एनर्जी’ और अडानी पॉवर – इन दोनों कंपनियों के शेयर्स में भी इस अवधि में क्रमशः 4 गुना और 3 गुना इजाफा देखने को मिला। वहीं ‘अडानी पोर्ट्स’ के शेयरों के दाम भी दोगुने हो गए। कभी घरेलू चीजें और अनाज का कारोबार करने वाले गौतम अडानी आज पोर्ट्स, एयरपोर्ट्स, एनर्जी, रिसोर्सेज, लोजिस्टिक्स, कृषि व्यापार, रियल एस्टेट, वित्तीय सेवाएँ, गैस और रक्षा सम्बन्धी कंपनियों के मालिक हैं।
जहाँ राहुल गाँधी सहित कॉन्ग्रेस के सभी नेता मुकेश अंबानी और गौतम अडानी पर निशाना साधने में लगे रहते हैं, वहीं इन दोनों की कंपनियों ने कोरोना महामारी के बीच भी जनता की मदद के लिए काफी कुछ किया है। हाल ही में अडानी समूह ने ऐलान किया कि शहर में स्थित अडानी विद्या मंडिर स्कूल कैंपस को कोविड पॉजिटिव मरीजों के लिए सुविधा केंद्र में बदला जाएगा। इसके पहले अडानी ग्रुप ने नोएडा में कोरोना मरीजों की मदद करते हुए 300 डी-टाइप ऑक्सीजन सिलेंडर देने की घोषणा की थी।
11 दिनों चले संघर्ष के बाद इजरायल और हमास संघर्ष विराम करने पर सहमत हो गए हैं। इन दोनों के बीच हुए संघर्ष में 200 से ज्यादा फिलिस्तीनियों और इजरायल में 12 की मौत हुई। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने युद्धविराम की घोषणा की और सुरक्षा कैबिनेट ने अपने बयान में इसे “आपसी और बिना शर्त” कहा।
नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा कि इजरायल ने अपने सुरक्षा मंत्रिमंडल की देर रात बैठक के बाद मिस्र के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। हमास ने तुरंत इसका अनुसरण किया और कहा कि वह इस सौदे का सम्मान करेगा। हमास ने पुष्टि की संघर्ष विराम शुक्रवार को (भारतीय समयानुसार सुबह) 6 बजे से लागू होगा।
इजरायल ने संघर्ष विराम का सम्मान न होने पर फिर लड़ाई की चेतावनी
इजरायली कैबिनेट ने अपनी घोषणा में कहा कि मिस्र की मध्यस्थता वाले युद्धविराम पर सर्वसम्मति से सहमति बनी थी और उसे अपने इस अभियान से कई “महान उपलब्धियां” हासिल हुईं – उनमें से कुछ “अभूतपूर्व” थीं।
इजरायल ने साथ ही चेतावनी दी कि इस संघर्ष विराम का सम्मान नहीं करने पर लड़ाई को फिर से शुरू करने के लिए उसके दरवाजे खुले हैं। इजरायल ने जोर दिया कि जमीन पर वास्तविकता अभियान के भविष्य को निर्धारित करेगी।
युद्ध विराम लागू होने पर फिलिस्तीनियों ने मनाया जश्न
युद्धविराम प्रभावी होते ही, फिलीस्तीनी खुशी मनाने के लिए अपने घर छोड़कर गाजा की सड़कों पर निकल आए। उनमें से कुछ ने “अल्लाहू अकबर” का नारा लगाया, जबकि अन्य अपनी बालकनी से सीटी बजाते नजर आए।
सड़कें कारों से खचाखच भरी गई, ड्राइवर हॉर्न बजा रहे थे और लोग खिड़कियों से झंडे लहरा रहे थे। कुछ लोगों ने रायफल से हवा में फायरिंग की, तो कुछ ने पटाखे छोड़े। मस्जिद के लाउडस्पीकरों ने इसे “यरुशलम की तलवार की लड़ाई के दौरान कब्जे पर हासिल प्रतिरोध की जीत” के रूप में वर्णित किया।
एके-47 राइफल पकड़े एक व्यक्ति ने कहा, “हमारी उंगलियां ट्रिगर पर हैं, और हम फिर से लड़ने के लिए तैयार हैं, लेकिन अब हम अपने लोगों के साथ जश्न मनाएंगे।”
अमेरिका ने किया संघर्ष विराम के फैसले का स्वागत
युद्धविराम का ये फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन के संघर्ष विराम के आह्वान और मिस्र, कतर और संयुक्त राष्ट्र द्वारा मध्यस्थता किए जाने के एक दिन बाद आया।
संघर्ष विराम की घोषणा के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन ने लड़ाई में “सभी परिवारों, इजरायल और फिलिस्तीनी, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है” के प्रति अपनी ”संवेदना” व्यक्त की।
गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, पिछले 11 दिनों से जारी इस संघर्ष में कम से कम 230 फिलिस्तीनी मारे गए हैं, जबकि इजरायल के 12 लोगों की मौत हुई है।
बायडेन ने की इजरायल के आयरन डोम की तारीफ
पिछले 11 दिनों में नेतन्याहू को 6 बार कॉल करने वाले बायडेन ने कहा कि अमेरिका के सहयोग से विकसित इजरायल की आयरन डोम डिफेंस सिस्टम ने संकट शुरू होने के बाद से “अनगिनत लोगों की जान” बचाई थी। बिडेन ने संघर्ष शुरू होने के बाद से ही नेतन्याहू को भविष्य में इजरायल सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करने के लिए अपना “पूर्ण समर्थन” देने का वादा किया था। .
आयरन डोम का इस्तेमाल हमास द्वारा इजरायल की ओर दागे गए हजारों रॉकेटों में से कई को हवा में ही नष्ट करने के किया गया था। इजरायल ने हमास के रॉकेट हमलों के बाद गाजा पट्टी पर भारी हवाई हमले करते हुए जवाबी कार्रवाई की थी।
बिडेन ने कहा कि अमेरिका “तेजी से मानवीय सहायता” प्रदान करने और गाजा में “पुनर्निर्माण प्रयासों” में सहायता करने के लिए संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ काम करेगा। उन्होंने कहा, “हम इसे हमास के बजाय फिलिस्तीनी प्राधिकरण के साथ साझेदारी में करेंगे, जिससे हमास को अपने सैन्य शस्त्रागार को बहाल करने की अनुमति न मिले।”
बाइडेन ने कहा, “मेरा मानना है कि फिलिस्तीनी और इजरायल समान रूप से सुरक्षित रूप से रहने और स्वतंत्रता, समृद्धि और लोकतंत्र के समान उपायों का आनंद लेने के अधिकारी हैं।”
एक यहूदी व्यक्ति ने मरने के बाद भी तीन जिंदगियों को नई उम्मीद दी। इनमें से एक अरब महिला भी शामिल है। इस यहूदी व्यक्ति को अरब दंगाइयों ने पीट कर मार डाला था।
इजरायल के शहर लॉड में 56 वर्षीय यीगल येहोशुआ को अरब दंगाइयों ने लाठी और डंडों से पीट दिया था। इस घटना में उनके सिर पर गहरे घाव हुए, जिसके कारण सोमवार को येहोशुआ की मौत हो गई। यीगल येहोशुआ एक रजिस्टर्ड डोनर थे।
58 वर्षीय रान्डा वेइस जो कि एक अरब हैं, येरुशलम के हदाशाह मेडिकल सेंटर में भर्ती की गई थीं। उन्हें एक नई किडनी की आवश्यकता थी। वेइस ने चैनल 12 न्यूज को बताया कि सालों तक इंतजार करने के बाद जब उन्हें फोन पर बताया गया कि उनके इलाज के लिए किडनी मिल गई है तो पहले उन्हें लगा कि यह एक प्रैन्क जैसा है लेकिन यह सही था। उन्होंने बताया कि अब एक यहूदी किडनी मेरे जीवन का एक हिस्सा बन गई है।
वेइस की बेटी निवीन ने टाइम्स ऑफ इजरायल को बताया कि उनकी माँ अब स्वस्थ हैं और ठीक हो रही हैं। निवीन ने कहा कि वह येहोशुआ परिवार की शुक्रगुजार हैं और अपनी माँ के सफल किडनी ट्रांसप्लांट के लिए खुश हैं। लेकिन निवीन कहती हैं कि जिस वजह से यह खुशी मिल रही है, उसके लिए उन्हें पीड़ा हो रही है। उनका परिवार जल्दी ही येहोशुआ परिवार से मिलना चाहता है।
वहीं दूसरी ओर रान्डा वेइस ने कहा कि अरबी या इजरायली जैसा कुछ नहीं है और सभी इंसान ही हैं। उन्होंने कहा कि वह अब शांति चाहती हैं। यीगल येहोशुआ की दूसरी किडनी एक 67 वर्षीय यहूदी व्यक्ति को दी गई। जबकि उनके लीवर से 22 वर्षीय एक यहूदी को जीवनदान मिला।
यीगल येहोशुआ पिछले हफ्ते बीते मंगलवार को अपने घर लौट रहे थे, तब वो अरब दंगाइयों के बीच फँस गए। दंगाइयों ने उनकी कार तोड़ डाली और उनके साथ लाठी-डंडों से बुरी तरह से मारपीट की। दंगाइयों ने उनके सिर पर ईंट मारी थी, जिससे वो बुरी तरह घायल हो गए थे और सोमवार को उनकी मौत हो गई।
उत्तर प्रदेश के सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने बाराबंकी जिले की रामसनेहीघाट तहसील में स्थित 100 वर्ष पुरानी मस्जिद को ध्वस्त किए जाने का आरोप लगाते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। बोर्ड के अध्यक्ष जुफर अहमद फारूकी ने कहा कि ये मस्जिद सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के तहत पंजीकृत थी। उन्होंने इसे ध्वस्त किए जाने को कानून के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि ये अवैध कार्रवाई है और मनमानीपूर्वक की गई है।
फारूकी ने इस कार्रवाई की निंदा की। उन्होंने कहा, “यह न सिर्फ कानून के खिलाफ है, बल्कि शक्तियों का दुरुपयोग भी है। साथ ही हाईकोर्ट द्वारा पारित अप्रैल 24, 2021 के आदेश का पूर्ण उल्लंघन है। उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड इस मस्जिद का पुनर्निर्माण करने, उच्च स्तरीय जाँच करा कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए जल्द ही हाईकोर्ट में मामला दायर करेगा।” उन्होंने बाराबंकी के पुलिस-प्रशासन की आलोचना की।
वहीं राज्य के विपक्षी दल भी इस घटना पर हमलावर हैं। समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष मौलाना अयाज अहमद ने भी दावा किया कि रामसनेही घाट स्थित गरीब नवाज मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया है। उन्होंने इसे शर्मनाक घटना करार देते हुए कहा कि बाराबंकी हमेशा गंगा-जमुनी तहजीब का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस-प्रशासन ने सोमवार (मई 17, 2021) की रात कोरोना कर्फ्यू की आड़ में रामसनेहीघाट की गरीब नवाज मस्जिद को ‘शहीद’ कर दिया है।
On the directions of the President of the party, a memorandum has been submitted to the Governor by the delegation of SP regarding the illegal demolition of a 100 year old Mosque in Barabanki. SP has demanded strict action against the SDM who ordered the illegal demolition. pic.twitter.com/nmQShzETSg
मस्जिद के ध्वस्त होने का दावा करने वाले लोगों ने कहा कि इसका निर्माण आज़ादी से भी पहले किया गया था। डीएम डॉ आदर्श सिंह ने कहा कि तहसील परिसर में उपजिला मजिस्ट्रेट के आवास के सामने अवैध रूप से बने आवासीय परिसर के संबंध में कोर्ट ने संबंधित पक्षकारों को 15 मार्च 2021 को नोटिस भेजकर स्वामित्व के संबंध में सुनवाई का मौका दिया था। लेकिन नोटिस तामील होते ही परिसर में निवास कर रहे लोग परिसर छोड़कर फरार हो गए, जिसके बाद सुरक्षा की दृष्टि से 18 मार्च 2021 को तहसील प्रशासन द्वारा इस पर अपना कब्जा प्राप्त कर लिया गया।
जिलाधिकारी आदर्श सिंह के मुताबिक, इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा इस मामले को निस्तारित करने पर यह सिद्ध हुआ कि आवासीय निर्माण अवैध है। इसी आधार पर उपजिला मजिस्ट्रेट रामसनेहीघाट न्यायालय में न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत पारित आदेश का अनुपालन 17 मई 2021 को कराया गया। राम सनेही घाट पर बने तहसील दफ्तर के पास ये अवैध निर्माण किए गए थे। फिर भी प्रोपेगंडा फैलाया जा रहा है। सपा ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन भी दिया है।
सेंट्रल विस्टा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बदनाम करने के लिए तैयार किया गया कॉन्ग्रेस का टूलकिट पब्लिक डोमेन में लीक होने के बाद, अब प्रोपेगेंडा वेबसाइट ऑल्टन्यूज ये साबित करने आगे आया है कि ये टूलकिट बिलकुल फर्जी है। इससे पहले यह वेबसाइट आगे आकर कट्टरपंथियों के कुकर्मों पर भी अपने फैक्टचेक के जरिए पर्दा डालती रही है।
आज हम इसी वेबसाइट के स्तंभों के बारे में आपको बताएँगे।
प्रतीक सिन्हा
प्रतीक सिन्हा ऑल्ट न्यूज का सह-संस्थापक है। लेकिन इनकी पहचान स्टॉकर सिन्हा के तौर पर भी होती है। अगर इन्हें कोई पसंद न आए तो ये साइबर स्टॉकिंग और व्यक्ति की डॉक्सिंग करने से भी गुरेज नहीं करते। 2019 में लोकसभा चुनाव में इन्होंने कई ट्विटर अकाउंट के नाम रिवील कर दिए थे, सिर्फ इसलिए क्योंकि वो सवाल करके कॉन्ग्रेस के कपट को उजागर कर रहे थे और ये चीज प्रतीक को पसंद नहीं थी।
प्रतीक ने जिन लोगों के नाम अपने ट्वीट में लिखे वह व्यंग्यात्मक शैली में अपने काम करते थे। इसलिए ये न तो कॉन्ग्रेस को पसंद था, न प्रतीक को। इसलिए सिन्हा ने उनके नाम उजागर कर दिए ताकि उनका प्रोपेगेंडा किसी के तंज के कारण धराशायी न हो।
सिन्हा कोई कानून प्रवर्तन कर्मी नहीं है, तो जाहिर है कि उन्हें किसी की निजी जानकारी तक पहुँचने की या उसे सबके साथ साझा करने का भी अधिकार नहीं है। लेकिन परिणामों की चिंता किए बिना सिन्हा ने ये हरकत की और कॉन्ग्रेस समर्थक साथियों ने ऐसी और जानकारी साझा करने को कहा।
1) Not all Sinhas are from Bihar. This one has got nothing to do with Bihar. Plus are people from both Bihar and Gujarat not Indians? Why this secessionist attitude?
अब इस तरह की हरकत जाहिर है कि किसी पुरुष के साथ हो तो भी जस्टिफाई नहीं हो सकती। लेकिन सोचिए कि यदि इन अकाउंट्स को महिला या कोई बच्चा हैंडल कर रहा होता तो क्या होता? इससे पहले वैसे भी ऑपइंडिया के सीईओ राहुल रौशन की पत्नी और उनकी 2 माह की मासूम बेटी की तस्वीर शेयर कर सिन्हा अपनी स्टॉकिंगकी क्षमता दिखा ही चुका था।
कल्पना करिए कि सिन्हा की इस हरकत के बाद इन्हें क्या धमकियाँ या गालियाँ मिली होंगी। अभी कुछ ही दिन पहले हमने एक राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ताओं को चुनाव जीतने के बाद हिंसा फैलाते देखा, ऐसे में अगर इनमें से एक भी यूजर उस निश्चित राज्य का होता, तो क्या ये हरकत ऐसी नहीं होती है जैसे भेड़ियों के बीच उन्हें फेंक दिया गया हो।
अब आइए बात करें कि ये आदमी फैक्टचेक को कैसे प्रोपेगेंडा टूल की तरह इस्तेमाल करता है
दिसंबर 2019 में द द न्यूयॉर्कर मैग्जीन ने अपने आर्टिकल “Blood and soil in Narendra Modi’s India” में पीएम नरेंद्र मोदी की पुलवामा अटैक और बालाकोट एयर स्ट्राइक को लेकर जमकर आलोचना की थी। दिलचस्प बात ये है कि इस लेख को लिखने में डेक्सटर फिलकिंस की प्रतीक सिन्हा ने ही मदद की थी।
बालाकोट एयरस्ट्राइक पर प्रकाशित लेख में प्रतीक सिन्हा का योगदान
दरअसल, एयरस्ट्राइक पर सवाल उठाने के लिए प्रतीक सिन्हा लगातार उन अकाउंट्स को अपना निशाना बना रहे थे जो बालाकोट को लेकर दावा कर रहे थे कि वहाँ आतंकी छिपे थे। उस समय सिन्हा अपनी ऊर्जा किसी भी यूजर द्वारा पोस्ट की गई रैंडम पिक्चर को फेक बताने में इस्तेमाल कर रहे थे।
लेकिन इस दौरान, फिलकिंस और सिन्हा, दोनों का इससे सरोकार नहीं था कि पाकिस्तान सरकार ने क्यों अंतरराष्ट्रीय मीडिया के साइट पर जाने पर पाबंदी लगाई और क्यों स्ट्राइक के बाद 60 एकड़ के परिसर को घेर लिया गया। याद दिला दें कि ये सारी पाबंदी 8 मार्च 2019 देर रात तक थी। इस बीच कोई पत्रकार वहाँ नहीं जा सकता था।
दिल्ली में हुई हिंदू विरोधी हिंसा में भी AAP के निलंबित पार्षद का बचाव करके ये फैक्टचेकर फ्रंट पर आ गए थे और वीडियो के जरिए दिखा रहे थे कि ताहिर जिस वीडियो में छत पर मदद माँग रहा था, वो बिलुकल एडिट नहीं है।
कोरोना संक्रमण के दस्तक देने के बाद तबलीगी जमात ने अपने कुकर्मों से हर जगह जो रायता फैलाया, उस पर भी सिन्हा के पोर्टल ने लीपापोती की और अमेरिकी मीडिया को ये बयान दिया कि दक्षिणपंथी पुरानी वीडियो शेयर कर बता रहे हैं कि भारतीय मुसलमान कोरोना फैलाने में जिम्मेदार है, जो कि आतंकी गतिविधि से कम नहीं है।
सिन्हा की हरकत से साफ पता चल रहा था कि वह तबलीगी जमातियों की बदसलूकी, उनके रवैये पर वायरल हो रही वीडियोज को झूठा कह रहे थे। उन्हें कोई मतलब नहीं था कि जगह-जगह ये तबलीगी कैसे स्वास्थ्यकर्मियों को तंग कर उनसे बदसलूकी कर रहे थे और खुले में शौच, पेशाब, मारपीट कर रहे थे।
सबसे हालिया मामला तब देखने को मिला जब रोहित सरदाना की मौत के बाद शरजील उस्मानी के घटिया ट्वीट जिसमें आजतक के एंकर को पागल, नरसंहार के लिए उकसाने वाला आदि कहा गया था, उसे भी इन्होंने ये कहकर जस्टिफाई किया था, “मेरी अंग्रेजी के हिसाब से उस्मानी, सरदाना की मृत्यु का जश्न नहीं मना रहा था, वह उसके कामों की विशेषता बता रहा था।”
अब यही क्रम सिन्हा और उनकी वेबसाइट ने कॉन्ग्रेस के टूलकिट को झूठा बनाने में भी अपनाई है, जबकि कॉन्ग्रेस नेता राजीव मान चुके हैं कि इन दो डॉक्यूमेंट में से एक प्रमाणिक है।
मोहम्मद जुबैर
ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापकों में अगला नाम मोहम्मद जुबैर का है। ये शख्स भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी के नाम से पैरोडी पेज ‘सुसु स्वामी’ चलाता था। पिछले साल एक ट्विटर यूजर अंकुर सिंह ने जुबैर पर कॉन्ग्रेसी आईटी सेल की तरह काम करने के 25 प्रमाण दिए थे।
Alt News says ‘Mohammad Zubair has been at forefront of fighting fake narratives’.
इनके जरिए बताया गया था कि कैसे जुबैर, पीएम मोदी और भाजपा पर झूठ फैलाता है और पकड़े जाने पर ट्वीट डिलीट कर देता। हालाँकि इस बीच इसके ट्वीट के स्क्रीनशॉट वायरल हो जाते।
Alt News says ‘Mohammad Zubair has been at forefront of fighting fake narratives’.
जुबैर ने पीएम मोदी के रेडियो शो में कमेंट सेक्शन बंद होने पर भी उनका मजाक बनाया था कि ये कमेंट ऑफ नकारात्मक प्रक्रिया के डर से किया गया है। हालाँकि, जब हमने पीएमओ का यूट्यूब चैनल चेक किया तो पाया कि ऐसा हमेशा होता था।
Alt News says ‘Mohammad Zubair has been at forefront of fighting fake narratives’.
जुबैर को हर चीज का राजनीतिकरण करने में भी मजा करता है। चाहे मामला रेप से जुड़ा क्यों न हो। कठुआ रेप मामले में जब पुलिस के कुछ दावों में नजर आई कमियों को लेकर ऑपइंडिया ने सवाल किए थे, तब ऑल्ट न्यूज का ये संस्थापक सामने आया और ऑपइंडिया को रेपिस्टों का हितैषी बताने लगा। अब दिलचस्प यह है कि हमने सवाल विशाल जंगोत्रा के संबंध में पेश किए बिंदुओं पर किए थे और यही विशाल कोर्ट से अपराधों से बरी भी हुआ था।
साल 2019 में श्रीलंका में ईस्टर के मौके पर चर्च में हुए हमले के बाद तो इस जुबैर ने इस्लामी आतंक का बचाव करने में हर हद पार कर दी थी। एक लेटर सोशल मीडिया पर सामने आया था और जुबैर ने अपना एक दिन इस लेटर को झूठा बताने में लगा दिया। इसका कहना था कि किसी सरकारी अधिकारी की ओर से इस लेटर की पुष्टि नहीं हुई। लेकिन घटना के कुछ दिन बाद श्रीलंका के मंत्री ने एक पत्र शेयर किया था और बताया था कि चर्च पर हुए हमले में कट्टरपंथी इस्लामी संगठन नेशनल तौहीद जमात शामिल था।
बता दें कि ऑल्टन्यूज के ये फैक्टचेकर इतने ज्यादा पक्षपाती हैं कि ये आज के समय में अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं। इन्हें भाजपा, पीएम मोदी और हिंदुओं से नफरत के लिए जाना जा रहा है और इनकी पहचान सिर्फ कॉन्ग्रेस लाइट के तौर पर बन रही है।
निर्झरी सिन्हा
प्रतीक सिन्हा की माँ निर्झरी सिन्हा (Nirjhari Sinha ) एक मोदी आलोचक हैं। जो जायज है। लेकिन इनमें जो गलत आदत है वो ये कि ये आलोचना के लिए फर्जी तस्वीर, पुरानी फोटो का इस्तेमाल करके प्रोपेगेंडा फैलाती हैं।
2020 में चीन से कोरोना वायरस भारत में आने के बाद इन्होंने पीएम से अपनी असहमति जाहिर करते हुए एक गरीब परिवार की फोटो शेयर की थी, जो बिना छत के बैठे थे। सिन्हा ने इस फोटो पर पीएम के लिए लिखा था कि पीएम इन्हें क्या कहना चाहेंगे घर में रहें, बाहर न घूमें।
अब इस बात से इनकार नहीं है कि देश में गरीबी आज भी एक चुनौती है, लेकिन इस तथ्य को नहीं नकारा जा सकता कि लॉकडाउन इस बार की तरह पिछले साल समय की माँग थी और इसे भी नहीं मना किया जा सकता कि गरीबों को सहारा देने के लिए सरकार पीएम आवास योजन के तहत लगातार काम कर रही हैं।
सबसे बड़ी बात- ये तस्वीर भी 2020 की नहीं थी। ये 2016 की थी, लेकिन सिन्हा ने अपनी नफरत का प्रदर्शन करने के लिए अपनी सारी समझ को किनारे पर रख दिया और कोरोना से लड़ाई के समय लॉकडाउन पर ही सवाल उठा दिया।
निर्झरी वहीं महिला हैं जिन्होंने अपने पति मुकुल सिन्हा के साथ 2002 में गुजरात दंगों के ‘पीड़ितों’ के लिए लड़ाई लड़ी और गोधरा कांड को एक्सीडेंट बताने का पूरा पूरा प्रयास किया।
मुकुल सिन्हा
प्रतीक सिन्हा के पिता मुकुल सिन्हा वैज्ञानिक से एक्टिविस्ट बने वो शख्स हैं जो ऑल्टन्यूज जैसा एक ऑनलाइन पोर्टल ‘truthofgujarat.com चलाते थे। उन्होंने लॉ भी किया था और जन संघर्ष मंच के संस्थापक रहे। इसी संगठन ने न्यू सोशलिस्ट मूवमेंट की भी स्थापना की जो 2007 में चुनाव आयोग में एक पार्टी के तौर पर दर्ज हुआ। बाद में मुकुल सिन्हा ने राजनीति में भी किस्मत आजमाई। लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी।
ऑल्टन्यूज़ से जुड़े निर्झरी सिन्हा, प्रतीक सिन्हा और मुरलीधर देवमुरारी- सभी इनके जन संघर्ष मंच के सदस्य हैं। इनमें से निर्झरी और मुरलीधर ऑल्टन्यूज़ के निदेशक हैं।
मुकुल सिन्हा उन लोगों में से हैं जिन्होंने अपने जैसी सोच वालों को इकट्ठा करके गुजरात दंगों और गोधरा कांड पर अपनी अलग थ्योरी फैलाई। इन्होंने गोधरा कांड के दौरान इकट्ठा हुई मुस्लिम भीड़ तक को जस्टिफाई करने का ये कहकर प्रयास किया कि मुस्लिम भीड़ प्लेटफॉर्म पर अपने आप आई थी, जिसका कारण एक मुस्लिम लड़की का शोषण था और इसी कारण उन्होंने ट्रेन को आग लगाई।
यानी उन्होंने 59 कारसेवकों की मौत की जिम्मेदार भीड़ को एक प्रतिक्रिया मात्रा करार दे दिया और क्लीनचिट भी दे दी कि ये सब प्लान नहीं था।
गोधरा पर भीड़
इसके अलावा साल 2004 में भी एक कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ता शबनम हाशमी ने “Rebuilding Justice and Hope in Gujarat: The Agenda Ahead” नाम से सेमिनार करवाया। जहाँ सिन्हा ने ये साबित करने की कोशिश की मुस्लिमों द्वारा ट्रेन में आग लगाए जाने की बात झूठ है और वह सब सिर्फ एक दुर्घटना थी।
मुकुल सिन्हा ये सारा कारनामा अपनी साइट ट्रुथ ऑफ गुजरात के जरिए कर रहे थे और इसमें उनके साथ प्रतीक सिन्हा भी शामिल थे। 2013 में अचानक मुकुल सिन्हा ने ये कह दिया कि गुजरात के तत्कालीन सीएम पूरे 35 दिन तक राहत शिविरों में नहीं गए थे। उन्होंने 4 अप्रैल 2002 को दौरा किया था।
लेकिन द हिंदू की 7 मार्च 2002 की रिपोर्ट देखिए, सिन्हा के दावे से पहले द हिंदू ने बताया था कि मोदी राहत शिविर का दौरा कर चुके हैं। इसके अलावा टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में भी इसका जिक्र था।
तो इस तरह पहले भी बेशर्मी से प्रोपेगेंडा चलाया जाता था।
गोधरा कांड में मुस्लिम कट्टरपंथियों को बचाने के अलावा सिन्हा ने आतंकियों को बचाने की लड़ाई भी लड़ी है। वह आतंकी इशरत जहां के साथी जावेद शेख का बचाव करते पाए गए थे। वह उन आतंकियों में से था जिसका मिशन तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी की हत्या करना था, लेकिन वह अहमदाबाद में एनकाउंटर में मार गिराया गया था (बता दें कि इसी साल मार्च में सीबीआई कोर्ट ने इस केस में कहा है कि इशरत जहां को लेकर ऐसे कोई सबूत नहीं है जो साबित करें कि वो आतंकी नहीं थी)
मालूम हो कि सिन्हा चूँकि कैंसर मरीज थे इसलिए 12 मई 2014 को उनका निधन हो गया। अजीब बात ये है कि इसी दिन मीडिया में पोल्स की खबरें चलीं कि नरेंद्र मोदी इस बार भारी बहुमत से सत्ता में आने वाले हैं।
सैम जावेद, पूजा चौधरी और ऑल्ट न्यूज के छुटभैये
सैम जावेद ऑल्टन्यूज के अगली सह संस्थापक हैं। इनके बारे में कम जानकारी है लेकिन ऐसा लगता है कि इन्हें मिडल ईस्ट में समय गुजारना पसंद है। कॉन्ग्रेसियों की भाँति सैम भी भक्त शब्द का इस्तेमाल भाजपा और मोदी समर्थकों को नीचा दिखाने के लिए करती हैं। इसके अलावा उन्हें ये बताकर भी खुशी मिलती है कि दुबई गौमाता के लिए खतरनाक जगह है।
उनके ट्वीट्स में देखा जा सकता है कि जब कोई कॉन्ग्रेस को खराब प्रोडक्ट कहता है तो उनका रिएक्शन कैसे मोदी सरकार पर उलट आता है।
Technically if you can sell Modi, you can sell anything but then its easy to sell Modi’s brand of politics to Bhakts https://t.co/YdU8j0WIyI
इसके अलावा उन्हें राहुल चाहे संसद में सो जाएँ या जगें… इससे कोई मतलब नहीं है। उनका टारगेट सिर्फ भक्त ही हैं। एक ट्वीट में उन्हें गौ माता, गौरक्षक, गौमूत्र, गोबर पर भी तंज कसते देखा जा सकता है। बिलकुल उसी भाषा में जिस भाषा में आतंकी हिंदुओं के प्रति अपनी घृणा दिखाते हैं।
Nothing wrong in a nap once in a while but INC’s explanations are hilarious. From moisturising his eyes to breathing & listening technique
पूजा चौधरी, टूलकिट को झूठा बताने वाली फैक्टचेक की सह लेखिका हैं। इनके ट्वीट देखिए पता चलता है कि भूमि पूजन और राम मंदिर का समर्थन करने वाले लोगों से इतनी नफरत है कि ये सेलीब्रिटियों तक की लिस्ट बनाकर उनका बहिष्कार करने की बात कह सकती हैं।
नीचे ट्वीट देखिए, ये राम मंदिर पूजन पर ट्वीट करने वाले अक्षय कुमार, कार्तिक आर्यन, वरुण धवन सबके ट्वीट शेयर कर बता रही थी वो इन लोगों की फिल्में अब नहीं देखेंगी।
Have nothing to say about this dude. Don’t remember the last time I watched one of his films. pic.twitter.com/0TKOrbz0gx
पूजा, ऑल्ट न्यूज में इस्लामी कट्टरपंथियों को भी उनके अपराध से क्लीनचिट दिलवाने का काम करती हैं। तबलीगी जमात के कुकर्म आपको याद ही होंगे जब उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों को जमकर तंग किया था।
तमाम वायरल वीडियो में एक फेक वीडियो
इस दौरान कभी इन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों का शोषण किया, कभी थूका, कभी मापीट की, लेकिन इन सब कारनामों को नजरअंदाज करके पूजा ने सिर्फ एक वीडियो का फैक्टचेक किया, जो कि फर्जी थी।
पत्थर नहीं वो पर्स थाा- पूजा चौधरी
आगे आपको वो घटना याद होगी जहाँ जामिया छात्र के हाथ में पत्थर की जगह पर्स वाली बात ऑल्टन्यूज ने फैलाई थी, उसके निष्कर्ष तक पहुँचने में भी पूजा का हाथ था।
इसके अलावा ऑल्टन्यूज के एक लेखक जिग्नेश हैं। राहुल गाँधी के लिए दिल में बहुत नरम कोना रखने वाले। जिगनेश को राहुल प्रेम और दरियादिली की ऐसी मूरत लगते हैं कि उन्हें दुख होता है जब कॉन्ग्रेसी समर्थक किसी रिपोर्टर के साथ बदसलूकी करते हैं।
Bhakts will be Bhakts, regardless, of their political affiliation. Rahul Gandhi’s philosophy of love and kindness is just not cutting ice with his party supporters. pic.twitter.com/yXXCc2T76A
जिगनेश ये भी बताते हैं कि कैसे नोबेल प्राइज विजेता अभिजीत की यूपीए नीतियों पर दिए गए बयान को मीडिया ने गलत चलाया।
यूपीए का बचाव करके जिगनेश
इसके अलावा वो ये भी समझाते हैं कि किसी विदेशी मंत्री ने उनके राहुल गाँधी को बेवकूफ नहीं कहा, वो फेक अकाउंट था।
राहुल गाँधी को बेवकूफ न साबित करने की जिगनेश की कोशिश
तो ये हैं ऑल्टन्यूज के वो मुख्य स्तंभ जो आप तक प्रोपेगेंडा तैयार कर परोसते हैं। ऐसे पक्षपाती रवैये के बावजूद कई हस्तियाँ, कई नेता, कई पत्रकार इनका बचाव करते हैं। इसी तरह कॉन्ग्रेस का इकोसिस्टम काम करता है। यही तरीका जिससे अपराध करने वालों को पोसा जाता है और पकड़े जाने पर उनके अपराधों पर लीपापोती होती है।
पिछले कुछ हफ्तों से कई मीडिया संस्थान यह प्रोपेगेंडा रचने की कोशिश में हैं कि कोरोना संक्रमित मरीजों और इस महामारी से प्रभावित लोगों की केंद्रीय मंत्रियों और बीजेपी के नेतृत्व ने कोई मदद नहीं की। उनका आरोप है कि मंत्री और नेतृत्व इसकी जगह केंद्र की मोदी सरकार के यशोगान में लगा रहा।
18 मई 2021 को दैनिक भास्कर ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की। इसमें बताया गया कि कैसे केन्द्रीय मंत्री सोशल मीडिया पर सहायता की माँग कर रहे लोगों का जवाब देने में असफल रहे। भास्कर की इस रिपोर्ट में गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत 10 केन्द्रीय मंत्रियों का जिक्र किया गया है। भास्कर ने आरोप लगाया है कि ये मंत्री जन्मदिन और त्योहारों की शुभकामनाएँ देने में व्यस्त रहे, लेकिन महामारी से पीड़ित लोगों की सहायता नहीं की।
1 मई से 14 मई के दौरान मोदी सरकार के दिग्गज मंत्रियों के ट्विटर एनालिसिस में यह बात सामने आई है कि किसी मंत्री ने कोरोना पीड़ितों की मदद के लिए एक भी ट्वीट नहीं किया, जबकि पीएम मोदी की तारीफ़ में खूब कसीदे गढ़े गए।#COVID19Indiapic.twitter.com/ljv5kJRM9S
दैनिक भास्कर की इस रिपोर्ट को आधार बनाकर वामपंथी मीडिया समूह द वायर ने भी ऐसी ही रिपोर्ट प्रकाशित की और कहा कि सोशल मीडिया में लगातार प्रसारित हो रहे SOS (आपातकालीन सहायता) संदेशों पर प्रतिक्रिया देने के स्थान पर केन्द्रीय मंत्री केंद्र सरकार का गुणगान कर रहे थे। इस रिपोर्ट में भी उन्हीं मंत्रियों को निशाना बनाया गया, जिनका जिक्र दैनिक भास्कर ने किया।
दैनिक भास्कर और द वायर के ट्वीट
दैनिक भास्कर और द वायर की रिपोर्ट
कॉन्ग्रेस की कथित टूलकिट लीक होने के पहले ही दैनिक भास्कर की रिपोर्ट प्रकाशित हुई और 12 घंटों के बाद द वायर ने भी ऐसी रिपोर्ट प्रकाशित की। इन दोनों रिपोर्ट में यही आरोप लगाया गया कि 1 मई से लेकर 15 मई के बीच केन्द्रीय मंत्रियों ने केंद्र सरकार की प्रशंसा करने के अलावा Covid-19 को लेकर कुछ नहीं किया।
इन दोनों रिपोर्ट्स की तुलना यदि कॉन्ग्रेस के टूलकिट से की जाए तो पता चलता है कि उस टूलकिट में भी यही निर्देशित किया गया था कि मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से यह बताया जाए कि भाजपा सरकार के बड़े नेता Covid-19 महामारी के दौरान किसी प्रकार की सहायता नहीं कर सके और सरकार की अक्षमता को उजागर किया जाए। यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि टूलकिट में द वायर का नाम फ्रेंडली मीडिया हाउस के रूप में बताया गया है।
केन्द्रीय मंत्रियों द्वारा किए गए प्रयास
हालाँकि यह सभी को पता है कि केंद्र सरकार में बैठे मंत्री निजी तौर पर लोगों की सहायता करने में सक्षम नहीं हो पाते हैं। इसके स्थान पर उनके द्वारा संस्थागत रूप से महामारी से निपटने की रणनीति पर काम किया जाता है।
जिस समय दैनिक भास्कर और द वायर जैसे मीडिया समूह गृहमंत्री अमित शाह का निजी सोशल मीडिया एकाउंट खँगालने में लगे थे तब वह देश के पश्चिमी भाग में आए Cyclone Tauktae का जायजा ले रहे थे और तैयारियों में व्यस्त थे। इसके अलावा उनके नेतृत्व में गृह मंत्रालय कोविड की गाइडलाइंस का पालन कराने में लगा हुआ था।
MINISTRY OF HOME AFFAIRS (MHA) DRAWS ATTENTION OF STATES & UTs ON NEED TO HAVE PLAN OF ACTION TO ENSURE FIRE INCIDENTS DO NOT OCCUR IN HEALTH FACILITIES, PARTICULARLY COVID-19 FACILITIES.
— Spokesperson, Ministry of Home Affairs (@PIBHomeAffairs) May 5, 2021
इन रिपोर्ट्स में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और रेल मंत्री पीयूष गोयल के प्रयासों को भी धूमिल करने का प्रयास किया गया, जबकि इनके प्रयासों के कारण देश में अत्यावश्यक चिकित्सकीय संसाधनों की आपूर्ति संभव हो सकी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में सेनाओं ने मोर्चा सँभाला और डीआरडीओ जैसे संस्थानों ने कई स्थानों पर ऑक्सीजन प्लांट और अस्पताल बनवाए।
देश में बढ़ रही ब्लैक फंगस की समस्या पर केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी के प्रयासों को नहीं भूलना चाहिए जिनके कारण इसके इलाज के लिए उपयोगी दवा Amphotericin B के देश में उत्पादन के लिए अप्रूवल मिल पाया। रेल मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में भारतीय रेलवे ने लगभग 10,000 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का सफल परिवहन किया जो अभी भी जारी है। इसके अलावा रेलवे ने अपने कई रेलवे कोच को आइसोलेशन सुविधा में बदल दिया। क्या यह सब बिना मंत्रियों के प्रयास के संभव हो पाता?
— A. Bharat Bhushan Babu (@SpokespersonMoD) May 17, 2021
बात करते हैं विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन की। कोविड महामारी से लड़ने में इन केन्द्रीय मंत्रियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जहाँ एक ओर जयशंकर ने विदेशों से सहायता प्राप्त करने में सफलता प्राप्त की, वहीं स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन महामारी की शुरुआत से ही व्यस्त रहे। वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के साथ चर्चा, वैक्सीन और दवा निर्माताओं के साथ सामंजस्य और चिकित्सा व्यवस्था को बनाए रखने में सबसे बड़ा योगदान स्वास्थ्य मंत्री का ही रहा। जयशंकर के नेतृत्व में विदेश मंत्रालय ने न केवल भारत की सहायता प्राप्त की, बल्कि कई देशों की सहायता भी की। इसके अलावा विदेश मंत्रालय ने Covid-19 महामारी के दौरान भारत में विदेशों निवेशकों की रुचि को बनाए रखने के लिए भी प्रयास किया।
भारत में कोविड महामारी की शुरुआत से ही अफवाहों और गलत जानकारियों की समस्या बनी रही। कोरोना वायरस से जुड़ी सही जानकारियों को लोगों तक पहुँचाने और भ्रामक जानकारियों को उजागर करने में प्रकाश जावड़ेकर के नेतृत्व में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय सजगता से कार्य करता रहा। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल भी इस दौरान शिक्षा संस्थाओं में सामंजस्य बनाने में व्यस्त रहे। देश में चल रही ऑनलाइन शिक्षा पर नजर बनाए रखना उनके प्रमुख कार्यों में से एक था। इसके अलावा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कई मोर्चों पर एक साथ काम किया। वित्त मंत्री सीतारमण कोविड महामारी के दौरान आवश्यक फंड उपलब्ध कराने से लेकर आवश्यक उपकरणों पर करों की छूट तय करने में व्यस्त रहीं।
दैनिक भास्कर में विशेष रूप से निशाने पर रहे इन मंत्रियों के अलावा केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और भाजपा के युवा सांसद तेजस्वी सूर्या लगातार लोगों के सहायता माँगने पर उन्हें सहायता उपलब्ध कराने के लिए कार्य करते रहे।
After revamping Mahabodhi Hospital in 10 days, we are reviving operations in another 80 bed hospital in Jayanagar that was lying defunct from last few years.
क्या इसे कार्य करना नहीं कहते हैं या भाजपा के इन केन्द्रीय मंत्रियों के द्वारा किए जाने वाल यह प्रयास मीडिया समूहों के प्रोपेगेंडा पर फिट नहीं बैठते?
केन्द्रीय मंत्री अपना काम कर ही रहे थे। इसके अलावा भाजपा की युवा इकाई भाजयुमो, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और सेवा भारती महामारी की शुरुआत से ही लोगों की सहायता के लिए प्रयासरत हैं। ये सभी जितना संभव हो पाता है संक्रमित और पीड़ित लोगों तक निजी तौर पर पहुँचते हैं और सहायता करते हैं। ये सभी संगठन दवाइयों, ऑक्सीजन, चिकित्सकीय सलाह और भोजन इत्यादि की व्यवस्था में लगे हुए हैं।
Community Kitchen run by RSS is preparing 32,000 food packets daily for needy people in Delhi. pic.twitter.com/T3IryGOcrG
देश में कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर ने भयानक रूप ले लिया था। ऐसे में परिस्थितियों को सॅंभालने के लिए प्रधानमंत्री से लेकर मंत्रियों और विभिन्न अधिकारियों ने अपने काम को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन इन मीडिया समूहों के लिए सरकार और उसके मंत्रियों पर उँगली उठाना आसान है।
वे जब छोटी थीं तब उन्होंने शाहरुख खान के साथ बतौर बाल कलाकार एक फिल्म में काम किया। नाम था वन टू का फोर। यह फिल्म 2001 में आई थी। लेकिन सालों बाद जब दीवाली की एक पार्टी में शाहरुख उनके साथ कमरे में थे तो वह बेहद घबरा उठीं। यह कहना है फातिमा सना शेख का।
फातिमा के अनुसार यह वाकया 2017 का है। वे दीवाली पार्टी में दंगल फिल्म के अपने को स्टार आमिर खान और सान्या मल्होत्रा के साथ गई थीं। इसी दौरान आमिर ने उनकी मुलाकात शाहरुख से करवाई। शाहरुख खान ने उन्हें एक चुटकुला सुनाया, जिसके बाद फातिमा ने उन्हें छू लिया।
बॉलीवुड हंगामा को दिए इंटरव्यू में एक्ट्रेस ने बताया, “मेरे साथ एक मजेदार घटना यह हुई थी कि शाहरुख खान दीवाली की पार्टी में आए थे। उन्हें देख मैं घबरा गई थी। वह जहाँ भी जाते, मैं उन्हें दूर से देखती थी। आमिर ने हमें उनसे मिलवाया और शाहरुख ने मजाक भी किया। मुझे याद नहीं है कि क्या मजाक किया था। लेकिन मैंने हँसते हुए उन्हें छू लिया। इसके बाद मैंने पूरे दिन अपने हाथ नहीं धोए।”
बकौल फातिम, “अगर शाहरुख खान को इसके बारे में पता चल जाए तो वे मेरे साथ कभी काम नहीं करेंगे। लेकिन, मैं उनके साथ काम करने का मौका कभी नहीं गँवाना चाहूँगी।”
फातिमा सना शेख हाल में नेटफ्लिक्स पर प्रसारित “अजीब दास्तान” में दिखीं थीं। गंगूबाई काठियावाड़ी और क्वीन जैसी फिल्में करना उनका सपना है। उन्होंने कहा, “मेरी पसंद मेरे अंदर के व्यक्तित्व को दर्शाती है। ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि मुझे बहुत सारी फिल्म करने के मौके मिलते हैं। मेरे पास जो भी है मैं उससे बहुत अधिक कमा लेती हूँ। मैं गंगूबाई काठियावाड़ी या क्वीन जैसी फिल्में करना चाहती हूँ, लेकिन ऐसी स्क्रिप्ट भी मिलनी चाहिए।”