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UNESCO के विश्व धरोहर स्थल: बनारस के गंगा घाट और नर्मदा का भेड़ाघाट शामिल, कांचीपुरम के मंदिर को भी मिली जगह

यूनेस्को की विश्व धरोहरों की सूची में भारत के 6 स्थानों को शामिल किया गया है। केन्द्रीय संस्कृति मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की संभावित सूची में शामिल कराने के लिए देश से 9 स्थानों का नाम भेजा गया था, जिसमें से 6 स्थानों को स्वीकृति मिली है।

यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की संभावित सूची में भारत से वाराणसी के गंगा घाट, तमिलनाडु के कांचीपुरम मंदिर, मध्य प्रदेश के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, मध्य प्रदेश के जबलपुर के भेड़ाघाट, महाराष्ट्र के मराठा मिलिट्री आर्किटेक्चर और कर्नाटक के हीरे बेनाकल को जगह मिली है।

इन 6 स्थानों के संभावित सूची में शामिल होने के बाद भारत से यूनेस्को विश्व धरोहर सूची के लिए दिए गए नामों की कुल सँख्या 48 हो गई है। 2019 की गाइडलाइंस के अनुसार किसी भी स्थान को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल करने के लिए पहले उसे संभावित स्थलों की सूची में शामिल किया जाता है। इस गाइडलाइन के बाद यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की संभावित सूची में अब भारत के 48 स्थान शामिल हैं।

साल 2020 में मध्य प्रदेश के ग्वालियर और ओरछा शहरों को यूनेस्को के विश्व धरोहर शहरों की सूची में शामिल किया गया था। ओरछा एक ऐसा स्थान है, जहाँ भगवान राम की पूजा राजा राम के रूप में होती है। इसके अलावा गुजरात के अहमदाबाद को यूनेस्को की विश्व हेरिटेज सिटी घोषित किया जा चुका है। अहमदाबाद भारत का पहला ऐसा शहर था, जिसे विश्व धरोहर शहर घोषित किया गया था।  

वर्तमान में भारत में 38 विश्व धरोहर स्थल मौजूद हैं। इन्हें दो भागों में बाँटा गया है, एक हैं सांस्कृतिक और दूसरे प्राकृतिक। 2017 में भारत के चार स्थानों में आयोजित होने वाले कुंभ मेला को भी यूनेस्को के सांस्कृतिक अमूर्त सांस्कृतिक धरोहरों की सूची में शामिल किया गया था। दुनिया भर में यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की सूची में भारत छठवें स्थान पर आता है।

साल 2019 में गुलाबी शहर के नाम से मशहूर जयपुर की चारदीवारी (परकोटा) को UNESCO (United Nation Educational scientific Cultural Organisation) ने विश्व धरोहर सूची में शामिल किया था।

जिस पीड़िता के कारण MP में बना ‘लव जिहाद’ कानून, उनकी संदिग्ध मौत: कॉन्ग्रेस नेता था आरोपित सिकंदर खान, मिल चुकी है जमानत

मध्य प्रदेश में जिस महिला के साथ हुए अपराध के कारण ‘लव जिहाद’ के खिलाफ कानून का खाका तैयार करने की शुरुआत हुई थी, उसकी संदिग्ध स्थिति में मौत हो गई है। उक्त पीड़िता की मौत मई 4, 2021 को ही हो गई थी लेकिन मीडिया में अब जाकर ये खबर सामने आई है। सोशल मीडिया में मंगलवार (मई 18, 2021) को लोगों ने जब इससे सम्बंधित चीजें शेयर करनी शुरू की, तब मामला प्रकाश में आया।

विश्व हिन्दू परिषद (VHP) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने स्थानीय थाना पहुँच कर विरोध दर्ज कराया। मामला कुछ यूँ था कि आरोपित सिकंदर उर्फ समीर उर्फ अतीक मंसूरी ने पीड़िता को छद्म हिंदू नाम रख कर अपने प्रेमजाल में फंसाया था। सिकंदर नजीराबाद के अहमद नगर का रहने वाला है। सितम्बर 11, 2020 को उसके खिलाफ बलात्कार सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया था। चूँकि पीड़िता तब नाबालिग थी, इसीलिए पॉस्को एक्ट भी लगाया गया।

इस घटना के तूल पकड़ने के बाद कड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपित का फार्म हाउस भी ध्वस्त कर दिया गया था। आरोपित सिकंदर खान कॉन्ग्रेस का नेता था और पूर्व-मुख्यमंत्री कमलनाथ की तस्वीर के साथ अपने पोस्टर्स लगाया करता था। उक्त घटना मध्य प्रदेश के सतना स्थित कोलगवाँ की थी। आरोपित के घर से जाँच के दौरान कई बड़े नेताओं के लेटर पैड मिले थे। साथ ही हवाला, ब्याज, अड़ीबाजी, रेल टिकट दलाली, प्लाॅट ब्रिकी के कई दस्तावेज जब्त हुए थे।

इससे साफ़ था कि आरोपित का काफी लम्बा-चौड़ा फैला हुआ था। भोपाल में घर और बैंक के लॉकर से सीडी, डीवीडी, नकदी, चेक भी मिले थे। उसे कोर्ट में पेश करने के बाद केंद्रीय जेल भेज दिया गया था। इस घटना के कुछ दिनों बाद राज्य सरकार ने इसकी चर्चा करते हुए बेटियों को न्याय दिलाने हेतु ‘लव जिहाद’ के खिलाफ कानून बनाने की बात कही थी। विहिप और बजरंग दल के लोग पीड़िता के घर भी पहुँचे।

हिन्दू संगठनों से मृतका के पिता ने बताया कि उनकी बेटी 24-25 अप्रैल को सहेली के साथ दिल्ली गई थी। वो 28-29 अप्रैल को वहाँ से लौट आई थी। लौटने के बाद उसकी तबीयत खराब लग रही थी। उसने बाजार से दवा लेकर खाई। 4 मई की शाम को उसे साँस लेने में दिक्कत आने लगी। पिता ने बताया कि वो उसे अस्पताल ले जाने के लिए ऑटो लेकर आए, लेकिन तब तक उसकी जान जा चुकी थी।

बेला चौकी स्थित गाँव में अंतिम-संस्कार की प्रक्रिया पूरी करने के बाद मई 18 को परिवार वापस आ गया। मृतका के पिता ने पुलिस-प्रशासन को कोई सूचना नहीं दी और हिन्दू नेताओं व पदाधिकारियों द्वारा मदद के आश्वासन के बावजूद किसी पर कुछ आरोप नहीं लगाया है। आरोपित सिकंदर भी अप्रैल 24 को जमानत पाने में कामयाब रहा था। कई लोगों ने उस पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है, क्योंकि पीड़िता में उसके जेल जाने के बाद थाना व SP के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया था कि आरोपित का भाई रहीस उस पर शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बना रहा है। सिकंदर को जबलपुर हाईकोर्ट ने जमानत दी थी। अगले दिन केंद्रीय जेल को भी आदेश की प्रति मिल गई थी। 40 वर्षीय सिकंदर ने फेसबुक के जरिए नाबालिग से संपर्क किया था। पुलिस को शिकायत मिली थी कि उसने कई अन्य महिलाओं को भी अपना शिकार बनाया है। सिकंदर पर आरोप है कि वो महिलाओं के अश्लील वीडियो बना कर उन्हें पोर्न वेबसाइट्स पर अपलोड कर दिया करता था।

TikTok वीडियो में सुसाइड करने की एक्टिंग… हमीदुल्लाह ने मारी अपने ही सिर में गोली, मौके पर मौत

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के स्वात जिले में बुधवार (मई 19, 2021) को एक टिकटॉक यूजर ने अपनी वीडियो बनाने के दौरान खुद ही को गोली मार ली। पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, 19 साल का हमीदुल्लाह लोडेड पिस्तौल लेकर वीडियो बना रहा था। इसी दौरान उसने गलती से ट्रिगर दबा दी। गोली चलते ही लड़के की मौके पर मौत हो गई।

पूरी घटना कबाल इलाके की है। पुलिस का कहना है कि हमीदुल्लाह की वीडियो बनाने में उसकी सहायता करने वाले दोस्त, जल्दी से उसे अस्पताल भी लेकर गए, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अब इस पूरी घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।

पुलिस ने हमीदुल्लाह का शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर मामले में तहकीकात शुरू कर दी है। एक्सप्रेस ट्रिब्यून से बातचीत में पुलिस अधिकारी ने बताया, “लड़का लोडेड पिस्तौल के साथ सुसाइड करने की एक्टिंग दिखा रहा था। उसने बंदूक अपने सिर पर लगाई और गलती से उसे चला दिया। दुर्भाग्य से लड़का वहीं मर गया क्योंकि गोली सीधे उसके सिर में लगी। बचने का कोई चांस नहीं था।”

पुलिस ने बताया कि उनके पास वह वीडियो है, जिसमें हमीदुल्लाह मजाक-मजाक में गन पहले लोड करता है और फिर बेखौफ उसे अपने सिर पर लगाता है। पुलिस का कहना है कि लड़का कॉलेज छात्र था और टिकटॉक का बहुत बड़ा फैन था। मगर, इस प्लेटफॉर्म के लिए अपनी वीडियो बनाने के वक्त ही उसकी मौत हो गई।

परिजनों ने कहा कि हमीदुल्लाह घर से बंदूक ले गया था। लेकिन उसे ये नहीं पता था कि वो लोडेड है। मृतक के दोस्तों के अनुसार, हमीदुल्लाह अपनी वीडियो के लिए गाना तक सोच चुका था। बस वीडियो शूट करनी बाकी थी।

गौरतलब है कि वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म टिकटॉक के कारण यह पहली मौत नहीं है। इससे पहले भी कई टिकटॉक यूजर्स अपनी वीडियो बनाने के लिए ऐसी नादानियाँ कर चुके हैं, जिसकी वजह से उनकी या उनके साथी की जान गई। पिछले दिनों छत्तीसगढ़ के भिलाई में ही एक टिकटॉक यूजर की वीडियो बनाने के दौरान पानी मे डूबकर मौत हुई थी।

म्यूटेट होकर बदलते वायरस की तरह रणनीति में भी हो परिवर्तन: 10 राज्यों के CM और DM के साथ PM मोदी की मीटिंग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (20 मई) देश के 10 राज्यों के मुख्यमंत्री और इन्हीं राज्यों के जिलों के DM के साथ कोरोना वायरस के संक्रमण के नियंत्रण और रोकथाम के उपायों पर चर्चा की। पीएम मोदी ने मीटिंग में इस बात पर जोर दिया कि जब तक माइनर स्केल पर संक्रमण मौजूद है, तब तक चुनौती है और सबसे निचले स्तर पर इस संक्रमण के खिलाफ लड़ाई से फायदा पूरे देश को होगा।

पीएम मोदी ने कहा कि इस नई चुनौती से लड़ने में रणनीति के साथ संवेदनशीलता और हौसला बनाए रखने की आदत ही काम आई। जिस प्रकार अपने जिले में अधिकारी लोगों की छोटी से छोटी समस्याएँ भी सुलझाते हैं, वही भावना आज भी काम आ रही है।

मीटिंग में चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि स्थानीय स्तर पर समस्या से निपटने के लिए अधिकारियों के अनुभव राष्ट्रीय स्तर पर काम आ सकते हैं और कई राज्यों के अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा भी किए हैं। पीएम मोदी ने मीटिंग में कहा कि कई अधिकारियों से अनेकों इनोवेटिव समाधान प्राप्त हुए हैं।

राज्य और जिला अधिकारियों के अनुभवों और फीडबैक के महत्व के बारे में बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इनकी सहायता से व्यवहारिक नीतियाँ बनाने में सहायता मिली है और टीकाकरण में भी अधिकारियों से प्राप्त सुझावों को शामिल किया गया है।

सबसे निचले स्तर पर कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम की आवश्यकता पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भले ही संक्रमित सक्रिय मरीजों की सँख्या में गिरावट आ रही हो किन्तु जब तक संक्रमण सबसे निचले स्तर तक मौजूद है, खतरा बना हुआ है। इसके लिए पीएम मोदी ने अपील की कि गाँवों समेत जिले के सभी इलाकों में कोविड के सभी प्रोटोकॉल का पूर्ण रूप से पालन सुनिश्चित किया जाए और इसके लिए टेस्टिंग एवं डिस्टेंसिंग की रणनीति अपनाना जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है। 

पीएम मोदी ने महामारी से लड़ने में अपने तौर-तरीकों में बदलाव करने को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि यदि वायरस म्यूटेट होकर बार-बार बदलता है तो हमें भी हर बार अपनी रणनीति में परिवर्तन करना चाहिए।

राज्यों और जिलों के अधिकारियों के साथ कोरोना वायरस पर चर्चा के लिए मीटिंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैक्सीन के वेस्टेज का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि वैक्सीन का वेस्टेज रोकना जरूरी है क्योंकि यदि वैक्सीन का एक भी डोज बर्बाद हुआ तो इसका मतलब यही है कि हम किसी एक जीवन को जरूरी सुरक्षा कवच नहीं दे पाए हैं।

पीएम मोदी ने अधिकारियों से कहा कि दूसरी लहर में वायरस के म्यूटेशन से युवाओं और बच्चों पर ज्यादा खतरा आया है लेकिन जिले में अधिकारियों के प्रयासों से यह खतरा गंभीर नहीं हो पाया लेकिन फिर भी आगे की तैयारी होनी चाहिए।

जीवन की सुरक्षा के साथ जीवन को चलाने की आवश्यकता पर भी पीएम मोदी ने जोर दिया। उन्होंने कहा कि गरीबों को मिलने वाले राशन की सप्लाई सही ढंग से हो और उसकी कालाबाजारी को रोकना अधिकारियों के लिए सबसे आवश्यक है जिससे इस लंबी लड़ाई को जीतने में आसानी हो।

पिछले कुछ दिनों से देश में लगातार कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक होने वाले मरीजों की सँख्या रोजाना मिलने वाले नए संक्रमित मरीजों से अधिक है। सक्रिय मरीजों की सँख्या भी अब घट रही है। उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटे में देश भर में 3,69,077 मरीज स्वस्थ हुए हैं जबकि इसी दौरान नए संक्रमितों की सँख्या 2,76,110 रही।

सक्रिय मरीजों की जो सँख्या 35 लाख से भी अधिक पहुँच रही थी वह अब घटकर 31,29,878 है। साथ ही देश भर में 18 करोड़ से अधिक लोगों को टीके भी लग चुके हैं। पिछले 24 घंटे में देश भर में 20.55 लाख टेस्ट हुए जो अब तक का सर्वाधिक आँकड़ा है लेकिन इस दौरान संक्रमण दर 13.44% रिकॉर्ड की गई।

भगवान राम पर आपत्तिजनक ट्वीट, शरजील उस्मानी के खिलाफ केस दर्ज: महाराष्ट्र पुलिस करेगी जाँच

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र नेता शरजील उस्मानी के खिलाफ महाराष्ट्र के औरंगाबाद में केस दर्ज किया गया है। उस पर भगवान राम को लेकर आपत्तिजनक ट्वीट करने के आरोप हैं।

उस्मानी के खिलाफ जाजलान जिले की अंबेड़ के रहने वाले अंबादास आंभोरे ने शिकायत की थी। हिंदू जागरण मंच से जुड़े आंभोरे ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में दावा किया है कि अपने हालिया ट्वीट में शरजील उस्मानी ने भगवान राम को लेकर विवादित ट्वीट कर सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने की कोशिश की थी।

उस्मानी के खिलाफ अंबेड़ पुलिस ने बुधवार (19 मई 2021) को आईपीसी की धारा 295ए और आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। एक पुलिस अधिकारी ने गुरुवार (20 मई 2021) को कहा कि इस मामले को जालना साइबर पुलिस डिपार्टमेंट को ट्रांसफर कर दिया गया है।

हालाँकि, यह कोई पहली बार नहीं है जब एएमयू के पूर्व छात्र नेता ने अपने विवादित ट्वीट्स के जरिए दंगा फैलाने की कोशिश की हो। उसके ट्विटर टाइमलाइन पर बहुत से विवादित कंटेट भरे पड़े हैं। हाल ही में उसने ट्वीट कर कहा था, “जय श्रीराम बोलने वाले सभी हिंदू आतंकवादी हैं।”

शरजील उस्मानी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

इसके अलावा वह आपसी रंजिश में मारे गए मेवात के आसिफ को लेकर भी फेक न्यूज फैला रहा था कि उसे हिंदू संगठनों ने मारा है। जबकि, हरियाणा पुलिस ने एक बयान में किसी भी सांप्रदायिक एंगल से इनकार किया था।

आसिफ को लेकर शरजील उस्मानी का ट्वीट

पुलिस को शुरुआती जाँच में पता चला था कि आसिफ सोहना से बसपा नेता जावेद अहमद का करीबी सहयोगी था। वह नूंह से कॉन्ग्रेस विधायक चौधरी आफताब अहमद का रिश्तेदार भी था। प्रदीप स्थानीय भाजपा नेता भल्ला का करीबी सहयोगी है, जो भाजपा के सोहना विधायक कंवर संजय सिंह के करीबी सहयोगी हैं।

क्यों ‘प्रतिभाओं की फौज’ खड़ी करने वाले राहुल द्रविड़ का एक सीरीज नहीं टीम इंडिया का फुल टाइम कोच बनना जरूरी?

इस साल की शुरुआत में विराट कोहली समेत कई स्टार खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी के बावजूद जब टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीती तो एक ऐसे व्यक्ति की जमकर तारीफ हुई, जो उस दौरे पर किसी भी तरह से जुड़ा नहीं था। उस व्यक्ति का नाम था भारतीय क्रिकेट के सबसे कामयाब बल्लेबाजों में से एक राहुल द्रविड़। लेकिन द्रविड़ को उस टेस्ट सीरीज जीत का श्रेय क्यों दिया गया? दरअसल, ऑस्ट्रेलिया का उसकी ही माँद में शिकार करने वाली टीम इंडिया की ऐतिहासिक जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कई युवा खिलाड़ियों को द्रविड़ ने ही कोचिंग दी थी।

अब वही ‘द वॉल’ राहुल द्रविड़ भारत के जुलाई में होने वाले श्रीलंका दौरे के लिए टीम इंडिया के कोच नियुक्त किए गए हैं। इससे पहले 2014 में भारत के इंग्लैंड दौरे पर बैटिंग सलाहकार की भूमिका निभा चुके राहुल की ये टीम इंडिया के कोच के तौर पर पहली पारी होगी।

नेशनल क्रिकेट एकैडमी (एनसीए) के प्रमुख का पद संभाल रहे द्रविड़ श्रीलंका के दौरे पर युवा भारतीय टीम को कोचिंग देंगे। उन्हें ये जिम्मेदारी टीम इंडिया के मुख्य कोच रवि शास्त्री समेत बाकी कोचिंग स्टाफ के उस दौरान टेस्ट सीरीज के लिए टेस्ट टीम के इंग्लैंड में होने की वजह से दी गई है।

भले ही एक सीरीज के लिए ही सही, लेकिन ‘मिस्टर भरोसेमंद’ के टीम इंडिया का कोच बनने से फैंस बेहद खुश हैं और उन्हें उम्मीद है कि ये भविष्य में कोच के तौर पर उनकी लंबी पारी का संकेत है।

द्रविड़ की कोचिंग से टीम इंडिया को मिली युवा खिलाड़ियों की फौज

राहुल द्रविड़ श्रीलंका के दौरे पर अपेक्षाकृत युवा भारतीय टीम को कोचिंग देंगे, जिसे काफी हद तक अंडर-19 और भारत-ए की वह टीम कहा जा सकता है जिसे पिछले कई सालों से खुद राहुल द्रविड़ ने ही कोचिंग दी थी। अंडर-19 और भारत-ए टीम के कोच के तौर पर द्रविड़ का योगदान किसी से छिपा नहीं है। उनकी कोचिंग में भारत 2018 में अंडर-19 वर्ल्ड कप का खिताब जीत चुका है।

उनकी कोचिंग में (2016-19) निखरे ये अंडर-19 और ए टीम के क्रिकेटर अब सीनियर टीम इंडिया में भी अपनी छाप छोड़ रहे हैं। फिर चाहे वो ऋषभ पंत, श्रेयस अय्यर, मयंक अग्रवाल, पृथ्वी शॉ, शुभमन गिल, संजू सैमसन, देवदत्त पडिक्कल, ईशान किशान जैसे युवा बल्लेबाज हों या फिर वॉशिंगटन सुंदर, नवदीप सैनी या कमलेश नागरकोटी जैसे बेहतरीन गेंदबाज।

खास बात ये है कि द्रविड़ की कोचिंग में निखरे युवा खिलाड़ी न केवल टीम इंडिया बल्कि आईपीएल में भी अपनी धाक जमा रहे हैं। यानी टेस्ट, वनडे हो या फटाफट क्रिकेट द्रविड़ के शिष्य हर फॉर्मेट में खुद को बीस साबित कर रहे हैं।

टीम इंडिया में पिछले कुछ सालों के दौरान चमकने वाले ज्यादातर युवा खिलाड़ियों को तैयार करने का श्रेय राहुल द्रविड़ को ही जाता है, जो हर फॉर्मेट के लिए तैयार हैं। खुद इन युवा खिलाड़ियों न केवल अपने खेल में सुधार बल्कि मानसिक मजबूती और मुश्किल समय से उबरने में ‘राहुल सर’ के मंत्र को ही अपना अस्त्र बनाने की बात कही और कामयाब भी रहे।

ऐसे में फैंस की महान खिलाड़ी राहुल द्रविड़ को टीम इंडिया का पूर्णकालिक कोच बनते देखने का सपना अतिश्योक्ति नही है, जो खिलाड़ी युवा टीम को तराशकर प्रतिभाओं का समुद्र तैयार कर सकता है, वो भारतीय टीम को दुनिया की सबसे ताकतवर टीम बनाने में भला क्यों कसर छोड़ेगा। इंटरनेशनल क्रिकेट में 48 शतकों 24 हजार से ज्यादा रन द्रविड़ की महानता की बानगी हैं। पर उससे भी ज्यादा युवा प्रतिभा को पहचानने और तराशने की उनकी क्षमता कमाल की रही है।

कोहली-शास्त्री युग में राहुल द्रविड़ कब टीम इंडिया के कोच बनेंगे, ये कह पाना तो अभी मुश्किल है, लेकिन जिस दिन भी ऐसा हुआ, वो भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम युग की शुरुआत होगी!

स्वास्थ्य सिस्टम के इतिहास से ऑक्सीजन सप्लाई के भूगोल तक.. 15000 हार्ट सर्जरी वाले डॉक्टर ने राजदीप की यूँ ली क्लास

प्रोपेगंडा पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने ‘नारायणा हेल्थ’ के संस्थापक डॉक्टर देवी शेट्टी का ‘इंडिया टुडे’ समाचार चैनल पर इंटरव्यू लेते समय अपने मोदी विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाना चाहा, लेकिन उन्हें करारा जवाब मिला। उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन की कमी से लोगों की मौत हो रही है, ऐसे में बेड्स और ऑक्सीजन सप्लाई के मामले में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के कौन से तरीके अपनाए जाएँ?

इस प्रश्न के जवाब में 30 से भी अधिक मल्टी स्पेशलिटी अस्पतालों का संचालन करने वाले डॉ देवी शेट्टी ने कहा कि सबसे पहले तो सभी लोग सरकार की आलोचना करने में लगे हुए हैं क्योंकि ये सबसे आसान है। उन्होंने कहा कि आज भारत में कोरोना संक्रमित मरीजों की जितनी संख्या है, इसका प्रबंधन दुनिया की कोई भी सरकार नहीं कर सकती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका, UK या किसी भी देश की सरकार इतनी बड़ी संख्या में कोरोना मामलों से नहीं निपट सकती।

उन्होंने कहा कि भारत में संक्रमितों की संख्या काफी ज्यादा है और बताया कि उन्होंने इसका खासा अध्ययन किया है कि ये कैसे हुआ। उन्होंने कहा, “सरकार ने कोई गलती नहीं की है। मेरा विश्वास कीजिए, केंद्र सरकार ने असाधारण कार्य किया है। सरकार ने लोगों तक ऑक्सीजन पहुँचाने के लिए सब कुछ किया है। लेकिन, दिक्कत ये है कि ऑक्सीजन की ज़रूरत सीधा 900 मीट्रिक टन से 9000 MT पहुँच जाए, तो इसे पूरा करने के लिए कोई लॉजिस्टिकल सपोर्ट सिस्टम ही मौजूद नहीं है।”

उन्होंने आगे समझाया कि लोगों को भले ही लगता हो कि फैक्ट्रियों में बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन है, लेकिन इनका मात्र 3% ही ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है और देश में 1000 से भी कम टैंकर्स हैं जिनका इस काम के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने आगे समझाया कि इन टैंकरों की गति 30 मील (48.28 किलोमीटर) प्रति घंटे से ज्यादा की रफ़्तार से आगे नहीं बढ़ सकती। उन्होंने जानकारी दी कि ऑक्सीजन का उत्पादन करने वाले अधिकतर स्टील प्लांट्स पूर्वी व पश्चिमी भारत में ही हैं।

पद्मश्री व पद्म भूषण से सम्मानित डॉ देवी शेट्टी ने राजदीप सरदेसाई को भूगोल समझाते हुए कहा कि कोरोना के अधिकतर मरीज उत्तर भारत में हैं और इन टैंकरों को पूर्वी और पश्चिमी भारत से हजारों किलोमीटर की दूरी तय करनी है, जो कि एक दुस्साध्य कार्य है। 15,000 से भी अधिक हार्ट सर्जरी का कीर्तिमान रच चुके डॉक्टर शेट्टी ने स्पष्ट कहा कि सरकार ने मरीजों तक ऑक्सीजन पहुँचाने के लिए सरे संभव माध्यमों व संसाधनों का इस्तेमाल किया।

उन्होंने स्वीकारा कि लोगों की जानें जा रही हैं और ये काफी दुःखद है कि हम लोगों की बेशकीमती जान बचाने में नाकामयाब हो रहे हैं पर इस रोग की प्रकृति ही यही है। लेकिन, उन्होंने वास्तविकता का भान कराते हुए ये भी कहा कि स्वतंत्रता के बाद से ही लगभग हर सरकारों ने स्वास्थ्य व्यवस्था को नज़रअंदाज़ किया। उन्होंने याद दिलाया कि स्वास्थ्य इन्फ्रस्टरक्चर के विकास पर देशों से ध्यान नहीं दिया गया, और आज हम उसके दुष्परिणाम भुगत रहे हैं।

हालाँकि, इस इंटरव्यू के दौरान जब ‘हार्ट सर्जरी के हेनरी फोर्ड’ कहे जाने वाले डॉक्टर शेट्टी बोल रहे थे, तब शांत से राजदीप सरदेसाई अजीब से एक्सप्रेशंस के साथ बोर हो रहे थे। फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “अर्बन नक्सल पत्रकार सोच रहा होगा कि ज़मीन फटे और मैं अंदर समा जाऊँ!” अभिनेता परेश रावल ने टिप्पणी की, “धरती माँ भी ऐसा ज़हर निगल ने से इनकार कर देगी!”

इससे पहले राजदीप सरदेसाई ने प्रोपेगंडा फैलाया था कि कोरोना महामारी से लड़ने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने पंजाब को केवल 71 करोड़ रुपए दिए हैं। उन्होंने भ्रम पैदा करने की कोशिश की थी कि कॉन्ग्रेस शासित पंजाब के साथ भेदभाव हो रहा है। साथ ही पैसा जुटाने के लिए पंजाब में शराब की बिक्री शुरू करने की राज्य सरकार की दलील का समर्थन भी किया था। जबकि सच्चाई ये है कि पजांब को वर्ष 2020-21 के लिए राज्य आपदा प्रबंधन कोष (SDRMF) की पहली किस्त में 247 करोड़ रुपए मिले हैं।

भारत से TikTok पर बैन के बाद अब कंपनी के CEO का इस्तीफा, हुआ था 45300 करोड़ रुपए का नुकसान

शॉर्ट वीडियो ऐप टिकटॉक की पैरेंट कंपनी बाइटडांस के को-फाउंडर और सीईओ झांग यिमिंग ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने गुरुवार (20 मई 2021) को कहा कि उनके अंदर कंपनी के लिए मैनेजेरियल स्किल की कमी होने कारण वह अपना पद छोड़ रहे हैं और अब वो कंपनी में दूसरा पद संभालेंगे।

उनकी जगह कंपनी के दूसरे सह-संस्थापक लियाँग रूबो बाइटडांस के नए सीईओ बनेंगे। वो फिलहाल कंपनी के एचआर विभाग के हेड हैं। वहीं झांग यिमिंग कंपनी के लिए रणनीतिकार के तौर पर कार्य करेंगे।

झांग ने कर्मचारियों के नाम लिखे एक नोट में कहा, “अभी भी कई चीजें ऐसी हैं जिन पर हमें सुधार करने की जरूरत है। मुझे लगता है कि इस क्षेत्र में कोई दूसरा चीजों का ज्यादा बेहतर तरीके से चला सकता है। हकीकत तो ये है कि मेरे पास एक अच्छा मैनेजर बनने की स्किल की कमी अभी भी है।”

उन्होंने कहा, “मुझे संगठन और बाजार के सिद्धांतों का विश्लेषण करने में ज्यादा रुचि है, बजाय इसके कि लोगों को मैनेज करने का काम करूँ। मैं बहुत अधिक ओपन नहीं रहता है।” इस मामले में बाइटडांस ने एक बयान जारी कर कहा है कि अगले 6 महीनों तक झांग और लियांग साथ मिलकर काम करेंगे। ताकि चीजों को आसान बनाया जा सके।

गौरतलब है कि चीन की वामपंथी सरकार ने तेजी से बढ़ रहे टेक सेक्टर पर पिछले महीने नियमों को और सख्त कर दिया है। साथ ही इस पर फाइन भी लगाया है। जिन कंपनियों पर फाइन लगा है, उनमें बाइटडांस का भी नाम शामिल है। इन कंपनियों पर मोनोपॉली के आरोप हैं।

टिकटॉक समेत 59 चीनी एप्स पर बैन

इससे पहले केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MeitY) मंत्रालय ने TikTok समेत 59 चीनी एप्स को नोटिस भेज कर उन्हें भारत में हमेशा के लिए प्रतिबंधित कर दिया था। इन सभी कंपनियों को सरकार ने एक प्रश्नावली सौंपी थी, जिसका इन्होंने संतोषजनक जवाब नहीं दिया था। इन सभी पर भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, एकता और अखंडता के लिए खतरा पैदा करने का आरोप था।

चीनी एप्स के बैन किए जाने से चीन को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। चीन के मुखपत्र “ग्लोबल टाइम्स:” की जुलाई 2020 में इस बात को स्वीकार किया था कि भारत में प्रतिबंधित किए जाने के बाद TikTok की पैरेंट कंपनी Bytedance को 600 करोड़ डॉलर (उस दौरान की करेंसी एक्सचेंज के अनुसार लगभग 45300 करोड़ रुपए) का नुकसान हुआ था।

ईद पर कन्नौज में लगे ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे, वीडियो वायरल होने पर मौलाना समेत चार गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के कन्नौज में ईद पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाने की घटना सामने आने के बाद मौलाना समेत चार कट्टरपंथियों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने ये कदम घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद उठाया।

दरअसल, जब ये कट्टरपंथी देशविरोधी नारे लगा रहे थे, उसी दौरान किसी ने अपने घर के भीतर से इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इस वीडियो में स्पष्ट तौर “पाकिस्तान जिंदाबाद” के नारे लगाने की आवाज सुनी जा सकती है।

घटना कन्नौज स्थित गुरसहायगंज कोतवाली क्षेत्र के जलालाबाद कस्बे की है, जहाँ ईद का चाँद देखने के बाद एक दिन पहले इमाम चौक पर इकट्ठे हुए कुछ लोगों ने पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए। जिले के एसपी के आदेश पर पुलिस ने जलालाबाद निवासी सलमान, साहिद, मेराज उर्फ छोटू को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया। साथ ही पेशे से इमाम मोहम्मद अफजल निवासी ग्राम फत्तेपुर थाना मूसानगर जनपद कानपुर देहात को भी उसके आवास से पकड़ लिया जबकि बाकियों की तलाश की जा रही है।

पुलिस ने इन सभी के खिलाफ धारा 153 (B) व 505 (2) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों को मंगलवार (18 मई) को जेल भेज दिया गया।

देश विरोधी नारे लगाए जाने को लेकर प्रभारी निरीक्षक राजा दिनेश सिंह ने कहा है कि केस में 10 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिशें की जा रही हैं। इस मामले में जिले के एसपी प्रशांत वर्मा ने कहा है कि पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। टीम ने चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है और कार्रवाई का जा रही है।

हिंदू जागरण मंच की सक्रियता से पकड़े गए आरोपित

जलालाबाद में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए जाने की घटना सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हिंदू जागरण मंच ने मामले को सक्रियता से उठाया। संगठन के प्राँतीय मंत्री राजेश कटियार ने इस मामले में पुलिस को आमरण अनशन करने की चेतावनी भी दी थी। हालाँकि, मामले में चार आरोपितों के गिरफ्तार होने के बाद उन्होंने पुलिस की तारीफ भी की है।

मंदिर के पैसों से चलने वाला 1000+ साल से भी पुराना अस्पताल: जहाँ थे डॉक्टर, सर्जन, नर्स… दीवार पर लिखी उपचार विधियाँ

आज जब पूरी दुनिया कोरोना वायरस संक्रमण की मार झेल रही है और भारत में इस महामारी की दूसरी लहर तबाही मचा रही है, अस्पतालों में बेड्स की किल्लत से मरीज परेशान हैं। ऑक्सीजन, वेंटिलेटर्स और बेड्स की व्यवस्था करने में सरकारों के पसीने छूट रहे हैं। इन सबके बीच हमें किसी और से नहीं, खुद के ही इतिहास से सीखने की ज़रूरत है। इसे समझने के लिए हमें चलना पड़ेगा अप्पन वेंकटेश पेरुमल मंदिर।

ये मंदिर तमिलनाडु से 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कांचीपुरम में स्थित है, जो एक प्राचीन शहर है। इस मंदिर को चोल राजाओं ने बनवाया था। इसकी दीवारों पर अब भी उस अस्पताल के सबूत मौजूद हैं, जो 1000 वर्ष पहले संचालित किए जाते थे। 1100 वर्ष से भी पूर्व संचालित होने वाले 15 बेड्स के इस अस्पताल में कई डॉक्टर और सर्जन हुआ करते थे। दूरद्रष्टा हिन्दू राजाओं ने नागरिकों की स्वास्थ्य सुविधाओं का भी पूरा ख्याल रखा था।

दीवार पर ये भी खुदा हुआ है कि कैसे उस समय विभिन्न मेडिकल प्रक्रियाओं और सर्जरी के जरिए लोगों का इलाज किया जाता था। डॉक्टरों को उनका वेतन अनाज के रूप में दिया जाता था। मरीजों को भोजन किस तरह से और कैसा दिया जाता है, ये भी अंकित है। डॉक्टर को उनके कार्य के हिसाब से वेतन दिया जाता था। साथ ही उन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के भी विवरण हैं, जिनसे मरीजों का इलाज किया जाता था।

ग्रेनाइट की दीवार पर ये नक्काशी कमाल की है, जो उस समय की उन्नत तकनीक की ओर इशारा करती है। इस अस्पताल को वीरराजेन्द्र चोल ने बनवाया था, जो दक्षिण भारत के महान राजा राजेंद्र चोल के बेटे थे। वो अपने बड़े भाइयों राजाधिराज चोल और राजेंद्र चोल II के सहयोगी के रूप में शासन करते थे। वेदों, शास्त्रों और व्याकरण के अध्ययन के लिए उन्होंने विद्यालय और छात्रावास भी बनवाया था।

इस अस्पताल को 1069 AD में चेयर, वेगवती और पलर नदी के संगम स्थल पर बनवाया गया था। थिरुमुकुड्डल में स्थित वेंकटेश मंदिर को भगवान विष्णु के भक्त सबसे प्रमुख मंदिरों में से एक मानते हैं। इस अस्पताल में 2 फिजिशियन, 2 डॉक्टर, और एक नाई हुआ करता था जो छोटे-छोटे ऑपरेशन्स करता था। 2 ऐसे कर्मचारी थे, जो आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ जुटाते थे। साथ ही मरीजों की देखभाल के लिए नर्स और अन्य कर्मचारी भी थे।

55 फ़ीट लम्बा ये अभिलेख 33 पंक्तियों में लिखा गया है। ऊपर से नीचे तक 540 स्क्वायर फ़ीट क्षेत्र में इसे अंकित किया गया है। इसे भारतीय उपमहाद्वीप के सबसे विस्तृत अभिलेख के रूप में जाना जाता है। इसका 95% हिस्सा तमिल में है, जबकि 5% ग्रन्थ लिपि में अंकित है। बुखार, फेफड़ों की गड़बड़ी और जलशोथ जैसी बीमारियों से लड़ने के उपचार और दवाओं का विवरण इसमें उपलब्ध है। ऐसी 19 दवाओं के बारे में बताया गया है।

इस अस्पताल का इस्तेमाल मुख्यतः मंदिर के कर्मचारियों और छात्रावास के छात्रों के इलाज के लिए किया जाता था। आम जनता को भी यहाँ इलाज की सुविधा दी जाती थी। करीब 100 वर्ष पूर्व इस अभिलेख को डिकोड किया गया था। ये आयुर्वेदिक के साथ साथ ‘सिद्ध तकनीक’ के इलाज की ओर भी इशारा करता है। इस अस्पताल को राजा द्वारा मंदिर को दिए जाने वाले दान से संचालित किया जाता था।

प्राचीन भारत या मध्यकाल में संचालित होने वाला ये अकेला भारतीय अस्पताल नहीं है। इसके अलावा थिरुवक्कम, तंजावुर और श्रीरंगम में भी ऐसे अस्पताल चलाए जाते थे। अस्पतालों को तब ‘अतुलार सलाई’ कहा जाता था। ASI भी योजना बना रहा है कि 9वीं सदी के इस मंदिर के प्रांगण में अभिलेख में वर्णित किए गए आयुर्वेदिक पेड़-पौधे लगाए जाएँ। आज वामपंथी जब ‘मंदिर की जगह अस्पताल’ वाला नैरेटिव फैलाते हैं, तब उन्हें जानना चाहिए कि पहले दोनों अलग नहीं हुआ करते थे।