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‘हेनरी’ लड़की छेड़ता था, इसलिए वामपंथियों ने उसे ‘हरि’ बना दिया: NCERT की किताबों से हिंदू घृणा की खेती, बच्चे शिकार

भारतीय सनातन संस्कृति से वामपंथी इतिहासकारों और शिक्षाविदों की घृणा का चरम यह है कि वे हर उस चरित्र का भारतीयकरण कर देते हैं जिससे किसी न किसी तरह सनातन प्रतीक चिह्नों को बदनाम किया जा सके। दुर्भाग्य यह है कि स्कूलों में भारतीय शिक्षा पद्धति को लागू करने का दावा करने वाले भी वामपंथियों की इन मंशाओं को अभी तक भाँप नहीं पाए हैं। पिछले कई वर्षों से बच्चों के दिमाग में यह जहर भरा जा रहा है।

पिछले चौदह-पंद्रह सालों से एनसीईआरटी (NCERT) की पाँचवी क्लास की अंग्रेजी की पुस्तक मैरीगोल्ड के यूनिट आठ के सिर्फ एक अध्याय ‘द लिटिल बुली’ से तत्कालीन प्रोपेगेंडा वाले शिक्षाविदों और टेक्स्टबुक डेवलपमेंट कमेटी की मंशाओं को समझा जा सकता है। एडवाइजरी कमेटी फॉर टेक्स्टबुक एट द प्राइमरी लेवल की अध्यक्ष अनिता रामपाल रहीं। वह दिल्ली विश्वविद्यालय में सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन में प्रोफेसर रहीं तथा नई शिक्षा नीति की आलोचक भी।

अनिता रामपाल के नेतृत्व में वर्ष 2007 में तैयार की गई इस पुस्तक में ‘द लिटिल बुली’ चैप्टर के माध्यम से छोटे बच्चों में सनातन संस्कृति में विष्णु भगवान के प्रचलित नाम ‘हरि’ के नाम पर एक ऐसे बच्चे की कहानी कही गई है जो लड़कियों को चिढ़ाता है, उन्हें चिकोटी काटता है, उन पर धौंस जमाता है। सब बच्चे उससे डरते हैं और उससे नफरत करते हैं। उससे दूर रहते हैं और आखिर में एक केकड़ा उसे काटकर सबक सिखाता है। ‘हरि’ नाम के उस बच्चे की नकारात्मक छवि बनाकर पाँचवी क्लास में पढ़ने वाले छोटे बच्चों के मन में सनातन संस्कृति के प्रति घृणा के बीज डाले जाते हैं। पिछले पंद्रह सालों से यह कार्य अनवरत किया जा रहा है।

अँग्रेजी की पुस्तक मैरीगोल्ड का अध्याय ‘द लिटिल बुली’

क्या यह वाकई प्रोपेगेंडा है?

इस बात को समझने के लिए ‘द लिटिल बुली’ की मूल लेखक और उसकी मूल कहानी को तलाशना होगा। यह कहानी मूल रूप से बच्चों की कहानी लिखने वाली ब्रिटेन की एनिड ब्लिटन के 1946 में प्रकाशित कहानियों के लोकप्रिय संग्रह ‘चिमनी कॉर्नर स्टोरीज’ से लिया गया है। इस कहानी में मूल चरित्र का नाम है ‘हेनरी’। यहाँ तक कोई बात नहीं थी, लेकिन जैसे ही इस कहानी के मूल चरित्र को बदलकर जानबूझकर उसे ‘हरि’ किया गया, तो बात आसानी से समझ में आती है कि वामपंथियों की मंशा क्या रही होगी। अब ‘हेनरी’ को ‘हरि’ करना तो वामपंथियों के लिए बहुत आसान था।

द लिटिल बुली की मूल कहानी जिसमें पात्र का नाम हेनरी है

अगर वे इसे अब्दुल करते तो किसी को तकलीफ हो सकती थी। मगर ‘हरि’ में किसे दिक्कत होगी? किसी को भी क्या पड़ी थी कि इस कहानी के मूल चरित्र को ढूँढा जाए। तत्कालीन सियासत ने तो वैसे भी शिक्षा क्षेत्र को दशकों से वामपंथियों के मानसिक दिवालियेपन को भेंट कर रखा था। जो उन्होंने लिख दिया, उसे बदस्तूर पढ़ाया जा रहा है। उन्हें पढ़ाया जा रहा है कि ‘हरि’ लड़कियों को छेड़ता है, उन्हें चिकोटी काटता है और इसमें उसे मजा आता है। वामपंथियों को अपनी पूर्वाग्रह से दूषित मानसकिता का प्रदर्शन करना था। वे हर उसे मौके की तलाश में रहते हैं कि कैसे भी भारतीय प्रतीक चिह्नों के बारे में भारतीय बच्चों में ही खराब छवि प्रस्तुत की जाए। इस प्रोपेगेंडा को ऐसे समझा जा सकता है कि इसी पुस्तक में दूसरी अन्य कहानियों में चरित्रों के नाम मूल चरित्र के नाम पर रखे गए हैं। उनमें किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया गया है।

अब्दुल बहुत अच्छा लड़का है

एनसीईआरटी की चौथी क्लास की ईवीएस की पुस्तकों में कई अध्यायों में अब्दुल नाम का एक चरित्र बार-बार आता है और हर बार वह या तो किसी की मदद करता है या वह कोई अच्छा काम करता है। चौथी क्लास के ईवीएस के चैप्टर 27 ‘चुस्की गोज टू स्कूल’ में अब्दुल एक भला बच्चा है और अपाहिज लड़की चुस्की की स्कूल जाने में मदद करता है। इसी पुस्तक के चैप्टर-19 ‘अब्दुल इन द गार्डन’ में अब्दुल बहुत मेहनती बच्चा है और गार्डन में अपने अब्बू की मदद करता है।

एनसीईआरटी के पाँचवीं तक के पाठ्यक्रम में लगभग हर विषय की किताब में बादशाह अकबर होता है और बहुत अच्छे रूप में आता है। ऐसा लगता है कि हिंदुस्तान में अकबर के अलावा कोई दूसरा राजा हुआ ही नहीं है। बच्चे अकबर को तो जानते हैं, लेकिन पाँचवीं क्लास तक के पाठ्यक्रम में न तो प्रताप हैं, न शिवाजी और न लक्ष्मीबाई।

चीजें कब बदलेंगी?

सवाल यह है कि ये चीजें कब बदलेंगी? यह इतनी छोटी मगर महत्वपूर्ण बातें हैं। भारतीय संस्कृति और शिक्षा का झंडा ऊँचा करने वालों के बीच पिछले छह सात सालों से बातें तो खूब हो रही हैं, मगर धरातल पर चीजें उतर रही हैं, ऐसा कम ही नजर आता है। बच्चों को उनकी किस्मत के भरोसा छोड़ा जाना एक गैर जिम्मेदाराना काम होगा। 

‘कस्टडी में पूछताछ का केस नहीं’: सुप्रीम कोर्ट ने MP कृष्णम राजू को दी जमानत, CID पर टॉर्चर करने का है आरोप

सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश की सत्ताधारी YSRCP के बागी सांसद रघुराम कृष्णम राजू को शुक्रवार (21 मई 2021) को जमानत दे दी। नर्सापुरम के सांसद राजू को आंध्र प्रदेश सीआईडी ने 14 मई 2021 को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया था। सीआईडी पर उनको हिरासत में प्रताड़ित करने का भी आरोप है।

मजिस्ट्रेट के पास राजू को जब पेश किया गया था तो उनके वकील ने दावा किया था कि उन पर पुलिस ने थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया। वकील ने यह भी बताया था कि कुछ महीने पहले ही उनकी बाइपास सर्जरी हुई थी। बाद में सिकंदराबाद के आर्मी अस्पताल में उनकी जाँच हुई थी।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विनीत सरन और बीआर गवई की वैकेशन बेंच ने YSRCP के सांसद राजू को जमानत देते हुए प्रथम दृष्टि में यह आशंका जताई है कि पुलिस कस्टडी में उनके साथ बुरा बर्ताव हो सकता है। कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि याचिककर्ता (कृष्णम राजू) पर ऐसे आरोप नहीं हैं कि कस्टडी में रखकर पूछताछ की जरूरत हो। चूँकि याचिककर्ता का स्वास्थ्य सही नहीं है और उनकी ओपन हार्ट सर्जरी भी हुई है ऐसे में उन्हें जमानत देने के लिए कोर्ट के पास पर्याप्त कारण हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने राजू को जमानत देते हुए कहा कि उन्हें जाँच में सहयोग देना होगा। साथ ही वह मीडिया को कोई इंटरव्यू नहीं देंगे। राजू को यह भी हिदायत दी गई है कि वे अपनी चोट मीडिया में न दिखाएँ। YSRCP के सांसद कृष्णम राजू की ओर से सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी कोर्ट में पेश हुए। कोर्ट द्वारा राजू की मेडिकल रिपोर्ट में अँगूठे में फ्रैक्चर और अन्य चोटों की पुष्टि करने पर एडवोकेट रोहतगी ने कहा कि रिपोर्ट से यह साबित होता है कि राजू को हिरासत में टॉर्चर किया गया है। राजू के साथ हुए बर्ताव पर एडवोकेट रोहतगी ने कोर्ट से संज्ञान लेते हुए सीबीआई जाँच की माँग की। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश के डीजीपी के खिलाफ जाँच के लिए भी आवेदन दिया जाएगा।

एडवोकेट रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट में यह मुद्दा भी उठाया कि मजिस्ट्रेट द्वारा मेडिकल जाँच का आदेश दिए जाने के बाद जिस गायनेकोलॉजिस्ट ने कृष्णम राजू की रिपोर्ट पर हस्ताक्षर किए हैं, उनके पति राज्य सरकार की लीगल सेल के लीडर हैं। वहीं आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए सीनियर एडवोकेट दुष्यंत दवे ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि याचिककर्ता की चोटें खुद बनाई गई हैं या नहीं। कृष्णम राजू पर लगे राजद्रोह के मुकदमे पर एडवोकेट दवे ने कहा कि राजू केवल सरकार की आलोचना तक ही सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि उन्होंने दो समुदायों के बीच घृणा उत्पन्न करने का काम भी किया है।

कृष्णम राजू को जमानत दिए जाने के मुद्दे पर एडवोकेट दवे ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कानून लागू करने और कानूनों की व्याख्या करने के लिए है। राजू के मामले में किसी भी प्रकार से अन्याय नहीं हुआ है। सिर्फ एक ही मुद्दा है जो अपवाद है कि याचिककर्ता एक सांसद हैं।

एडवोकेट दवे ने अखिल गोगोई और उत्तर प्रदेश में बंद सिद्दीकी कप्पन का उदाहरण देते हुए कोर्ट से राजू की जमानत का विरोध किया। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तों पर कृष्णम राजू को जमानत दे दी।

गौरतलब है कि राजू को 14 मई की रात 11 बजे देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। सीआईडी के एडिशनल एसपी ने बताया था कि उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था। YSRCP सांसद कृष्णम राजू आंध्र प्रदेश में धर्मांतरण में लिप्त ईसाई मिशनरियों के खिलाफ लगातार आवाज उठाते रहे हैं। पूर्व में वे अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं से जान का खतरा होने की बात भी कह चुके हैं।

राजू की गिरफ्तारी तब हुई जब उन्होंने 27 अप्रैल को CBI की विशेष अदालत से मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की जमानत रद्द करने की माँग की थी। उन्होंने कहा था कि जगन मोहन रेड्डी ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है।

चावल की बोरियों के बीच मिली 8000 जिलेटिन छड़ें और 12000 डेटोनेटर: महाराष्ट्र के बाद झारखंड में भी मिली भारी खेप

झारखंड के पाकुड़ में नासीपुर चेकपोस्ट के पास 12000 डेटोनेटर और 8000 जिलेटिन छड़ें पुलिस द्वारा जब्त की गई। आरोपित ये सारा सामान चावल की बोरियों के बीच में छिपाकर ले जा रहा था।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, “पाकुड़ में नासीपुर चेक पोस्ट पर वाहनों की चेकिंग के दौरान मालपहाड़ी पुलिस ने 12,000 डेटोनेटर और 8,000 जिलेटिन की छड़ें जब्त कीं। इन्हें फूले हुए चावल की बोरियों के बीच छिपाकर ले जाया जा रहा था।”

पुलिस का कहना है कि वह इस बात को पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि छड़ों और डेटोनेटर का इस्तेमाल किन माइन्स में किया जाना था और कौन इसका अवैध रूप से उपयोग कर रहा था।

बता दें कि इससे पहले 18 मई को महाराष्ट्र में दो अलग-अलग स्थानों से 13000 से ज्यादा जिलेटिन की छड़ें, 4000 के करीब डेटोनेटर और अन्य विस्फोटक सामग्री जब्त किए गए थे। राज्य के भिवंडी में सोमवार (मई 17, 2021) को विस्फोटकों की एक बड़ी खेप बरामद हुई थी।

छापेमारी में, पुलिस ने जिलेटिन की 12,000 छड़ें और 3,008 डेटोनेटर जब्त किए थे। यह कार्रवाई ठाणे पुलिस की क्राइम ब्रांच यूनिट-1 ने की थी। पुलिस ने कहा था कि जिलेटिन की छड़ें 60 बक्से में पैक की गई थीं और प्रत्येक बॉक्स में 190 छड़ें थीं।

इसी दिन ग्रामीण पुलिस ने आतंकवाद विरोधी प्रकोष्ठ और स्थानीय अपराध शाखा इकाई के साथ सोमवार (मई 17, 2021) को महाराष्ट्र के अमरावती जिले के तिवासा तालुका के घोटा में स्थित एक फार्म गोदाम से 1300 जिलेटिन की छड़ें और 835 डेटोनेटर जब्त किए थे।

थर्ड क्लास ऑक्सीजन कॉन्स्ट्रेटर, ₹15 हजार में इम्पोर्ट कर ₹70000 में बेचता था: नवनीत कालरा की कुंडली ही काली

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जिस नवनीत कालरा को बतौर ‘दिल्ली का निर्माता’ सम्मानित किया था, उसके गोरखधंधे की परत दर परत खुल रही है। वह कोरोना काल में जिस ऑक्सीजन कॉन्स्ट्रेटर की कालाबाजारी कर रहा था वह थर्ड क्लास की थी। लैब टेस्ट से पता चला है कि कालरा द्वारा मनमानी (₹15 हजार में खरीद ₹70 हजार में बेचे) कीमत पर बेचे जा रहे कॉन्संट्रेटर मरीजों को सिर्फ 38% ही ऑक्सीजन देने में सक्षम थे।

इंडिया टीवी ने एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में बताया है कि कालरा द्वारा बेचे जा रहे ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर की क्वालिटी को लेकर लैब की जाँच रिपोर्ट उनके पास है। ये रिपोर्ट कहती है कि उनसे सिर्फ 38% ही ऑक्सीजन मिलती। वहीं हिंदुस्तान की एक रिपोर्ट में भी इस बात का उल्लेख है। इसके मुताबिक लैब की रिपोर्ट देखने के बाद पुलिस ने कालरा के ख़िलाफ़ आईपीसी की एक और धारा बढ़ा दी है।

उल्लेखनीय है कि कालरा के कारनामों का चिट्ठा खुलने के बाद कई लोगों ने शिकायत की थी कि कालरा से खरीदे गए कॉन्संट्रेटर काम नहीं कर रहे। इसके बाद पुलिस ने इस संबंध में आरोपित से पूछताछ की। साथ ही जब्त किए गए कॉन्संट्रेटर्स को क्वालिटी चेक के लिए लैब भेजा। रिपोर्ट आई तो पता चला कि सच में ये मशीनें ढंग से काम नहीं कर रही थी और मरीज को केवल 38% ऑक्सीजन दे पाने में सक्षम थीं।

अब लैब की यह रिपोर्ट दिल्ली पुलिस के पास है। पुलिस उन सभी के बयान दर्ज कर रही है जिन्होंने कालरा से कॉन्संट्रेटर खरीदा। रिपोर्ट में लिखा है कि नवनीत कालरा के खान चाचा, टाउन हॉल, नेगे जु रेस्तरां के अलावा छतरपुर फार्म से जो ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर बरामद हुए थे उनमें से कुछ की जाँच में यह पता चला कि वे ठीक से काम नहीं कर रहे थे।

जाँच टीम का इस मसले पर कहना है कि जान बचाने के लिए जिस कॉन्संट्रेटर को लोगों ने खरीदा था, वे मरीजो के लिए उतने असरदार नहीं थे। ऐसे में इसका इस्तेमाल करना मरीजों के लिए घातक भी हो सकता था।

बता दें कि दिल्ली में खान मार्केट स्थित खान चाचा रेस्टोरेंट के अलावा कई अन्य रेस्टोरेंट से ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर की कालाबाजारी करने के मामले में मुख्य आरोपित नवनीत कालरा को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने रविवार (मई 16, 2021) देर रात गिरफ्तार किया था। नवनीत कालरा गुरुग्राम में अपने साले के फॉर्महाउस में छिपा हुआ था। नवनीत के रेस्टोरेंट और फॉर्महाउस से दिल्ली पुलिस ने 524 ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर बरामद किए थे।

इसके बाद शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली में ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर की जमाखोरी और कालाबाजारी के आरोप में कालरा और साथियों के कई परिसरों में छापेमारी की। अधिकारियों ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में कालरा के घर और मैट्रिक्स सेल्युलर के ऑफिस समेत नौ जगहों पर छापेमारी की जा रही है। ईडी ने कालरा के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है। ईडी ने बताया कि दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर ईसीआईआर फाइल की गई है। दिल्ली की एक अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था।

ट्विटर को केंद्र सरकार की लताड़: कहा- Manipulated Media का टैग हटाओ; टूलकिट असली या नकली, एजेंसियाँ तय करेंगी

भारत सरकार ने ट्विटर को कॉन्ग्रेस टूलकिट से जुड़ी फोटो शेयर करने पर ‘मैनिपुलेटेड मीडिया (Manipulated Media)’ टैग लगाने के लिए लताड़ लगाई है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ट्विटर से यह टैग हटाने के लिए कहा है। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि टूलकिट सही है अथवा गलत, यह तय करना जाँच एजेंसियों का काम है न कि ट्विटर का।

सूत्रों के अनुसार सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से ट्विटर की ग्लोबल टीम से संपर्क किया गया है। मंत्रालय ने कहा है कि ट्विटर द्वारा कॉन्ग्रेस के टूलकिट के लिए ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ का उपयोग किया जाना एकपक्षीय निर्णय है। साथ ही यह भी कहा कि एजेंसियों ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए जाँच शुरू कर दी है।

साथ ही मंत्रालय ने यह भी कहा है कि ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ टैग का उपयोग किया जाना न केवल ट्विटर के निष्पक्ष व्यवहार पर प्रश्न उठाता है, बल्कि उसके एक निष्पक्ष प्लेटफॉर्म होने के दावे पर भी सवाल खड़ा करता है।

आपको बता दें कि कॉन्ग्रेस ने बुधवार (19 मई) को ट्विटर को ईमेल किया था। इसमें कहा था कि कॉन्ग्रेस के टूलकिट के विषय में पोस्ट करने वाले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, प्रवक्ता सम्बित पात्रा और केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी समेत अन्य भाजपा नेताओं के ट्विटर हैन्डल सस्पेंड किए जाएँ।

कॉन्ग्रेस का कहना था कि भाजपा के ये सभी सदस्य जिस टूलकिट को कॉन्ग्रेस का बता रहे हैं वह फर्जी है। हालाँकि अभी तक कॉन्ग्रेस अपने इस दावे की पुष्टि के लिए कोई सबूत नहीं दे सकी है।

इस टूलकिट में कोरोना वायरस के समय केंद्र की मोदी सरकार और उसके मंत्रियों को बदनाम करने के दिशा-निर्देश दिए गए थे। इसके अलावा इस टूलकिट में विदेशी मीडिया से साँठ-गाँठ की बातें भी कही गई हैं। टूलकिट में हिंदुओं के महान पर्व कुंभ को भी बदनाम करने की साजिश की गई है।

हालाँकि कॉन्ग्रेस द्वारा ट्विटर से शिकायत करने के एक दिन के भीतर ही ट्विटर ने टूलकिट दस्तावेज को ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ की कैटेगरी में रख दिया और टूलकिट से सबंधित ट्वीट करने वाले भाजपा प्रवक्ता सम्बित पात्रा के ट्वीट पर ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ का टैग लगा दिया।  

‘पत्रकारों साथियों ने कहा- महाराष्ट्र बदनाम हो रहा, टेस्टिंग कम करिए’: उद्धव के मंत्री नवाब मलिक से नेटिजन्स पूछ रहे नाम

महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार में मंत्री और राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रवक्ता नवाब मलिक ने गुरुवार (21 मई 2021) को सनसनीखेज दावा कर विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि कुछ पत्रकारों ने उन्हें राज्य में ​कोविड-19 की टेस्टिंग कम करने के लिए कहा था, क्योंकि कोरोना के आँकड़े बढ़ने से राज्य की छवि खराब हो रही थी। मलिक ने दावा किया कि उन्हें यह सुझाव राज्य में कोरोना के बढ़ते मामलों को कम दिखाने के लिए दिया गया था।

आज तक को दिए एक इंटरव्यू में नवाब मलिक ने कहा, ”पहले दिन से जब हम टेस्टिंग बढ़ा रहे थे, तब हमें कुछ पत्रकार साथियों के फोन टेस्टिंग कम करने के लिए आ रहे थे। उनका कहना था कि आपका आँकड़ा बढ़ रहा है, जिससे आपकी बदनामी हो रही है।”

उन्होंने आज तक से (3:09 मिनट के करीब सुनें) बातचीत में कहा, “महाराष्ट्र कोरोना के मामले में दूसरों राज्यों से आगे था, यहाँ पर ​​कोरोना संक्रमण चरम पर था। इसके बावजूद आपने कभी किसी को अस्पताल में बेड खोजते या हाथ में ऑक्सीजन सिलेंडर लिए घूमते नहीं देखा होगा।”

उन्होंने आगे कहा, ”जब हम कोरोना की टेस्टिंग बढ़ा रहे थे, तभी हमें कुछ पत्रकारों के फोन आने लगे। उन्होंने हमें कोविड-19 की टेस्टिंग कम करने के लिए कहा था, क्योंकि राज्य में कोरोना के आँकड़े बढ़ रहे थे। उन्होंने हमसे यहाँ तक कहा था कि बढ़ते मामलों के कारण महाराष्ट्र सरकार का मजाक उड़ाया जा रहा है। लेकिन जब से हमने अपना काम गंभीरता से किया है, यह हमारी ताकत बन गया है।”

नवाब मलिक के सनसनीखेज दावों पर नेटिजन्स की प्रतिक्रिया

महाराष्ट्र में कोरोना की टेस्टिंग को लेकर लापरवाही बरतने और अपने सनसनीखेज दावों को लेकर नवाब मलिक सोशल मीडिया पर नेटिजन्स के निशाने पर आ गए हैं। कई ट्विटर यूजर ने माँग की है कि एनसीपी नेता ऐसे पत्रकारों का पर्दाफाश करें। लोकप्रिय ट्विटर यूजर @BefittingFacts ने कहा, “नमस्कार नवाब मलिक, क्या आप उन पत्रकारों का नाम बता सकते हैं, जिन्होंने आपसे टेस्टिंग को कम करने के लिए कहा था?”

बीजेपी सोशल मीडिया सेल की सदस्य पल्लवी ने लिखा, “क्या नवाब मलिक हमें बताएँगे कि ये ‘पत्रकार साथी’ कौन हैं, जो बदनामी (negative publicity) के डर से आपको कम टेस्टिंग करने की सलाह दे रहे थे? कोरोना महामारी की रफ्तार को काबू करने के लिए तेजी से टेस्टिंग करना सबसे अच्छा तरीका है। ऐसे में जो लोग ऐसी सलाह दे रहे हैं, उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जाना चाहिए और महामारी अधिनियम (Epidemic Diseases Act) के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए।

इसी तरह, कई नेटिजन्स ने मंत्री से उन पत्रकारों के नाम उजागर करने को कहा, जिन्होंने महाराष्ट्र में कोविड-19 की टेस्टिंग कम करने के लिए कहा था।

इससे पहले, विवेक पांडे द्वारा दायर एक आरटीआई के जवाब में यह पता चला था कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने अगस्त 2020 के अंतिम सप्ताह में पीएम को एक पत्र लिखा था और अप्रैल 2021 के पहले सप्ताह तक उनके साथ कोई संपर्क नहीं किया था। उस समय राज्य कोरोना की दूसरी लहर के भारी दबाव में था। इस बीच वह केंद्र सरकार ही थी, जिसने मार्च 2021 में महाराष्ट्र सरकार से हाई अलर्ट पर रहने के लिए संपर्क किया था, क्योंकि राज्य कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर से जूझ रहा था। बता दें कि 21 मई 2021 तक, महाराष्ट्र में कोरोना के कुल 3,85,785 एक्टिव मामले हैं और कुल 85,355 मौतें हुई हैं।

सनसनी के लिए BBC कैसे करता है छल-प्रपंच: राजकुमारी डायना के साथ पत्रकार बशीर के कपट से समझिए

साल 1995 में ब्रिटिश ब्रॉडकॉस्टिंग कॉरपोर्रेशन (BBC) के पत्रकार मार्टिन बशीर ने राजकुमारी डायना का सनसनीखेज साक्षात्कार लेने के लिए छल का सहारा लिया था। उन्होंने डायना के भाई चार्ल्स स्पेंसर को झूठे दस्तावेज पेश कर ये बताया था कि डायना पर निगरानी रखी जा रही है और उन्हीं के स्टाफ उनके बारे में जानकारी लीक कर रहे हैं।

जब चार्ल्स इन बातों पर गौर करने लगे तभी बशीर ने अपना दाव खेला और इंटरव्यू अरेंज करने के लिए उन्हें मना लिया। इसके बाद बीबीसी का वह सनसनीखेज इंटरव्यू सामने आया जिसमें राजकुमारी ने अपनी असफल शादी को लेकर तमाम खुलासे किए थे।

राजकुमारी डायना के भाई के नोट्स से खुली पोल

बीबीसी पत्रकार के इस कपट की पोल-पट्टी हाल में डायना के भाई चार्ल्स स्पेंसर ने ही खोली। उन्होंने सबूतों के साथ ये दावा किया कि उनकी बहन का इंटरव्यू लेने के लिए उनसे झूठ कहा गया था।

चार्ल्स के इस तरह के दावे के बाद बीबीसी को इस मामले पर जज डायसन के नेतृत्व में जाँच कमेटी बैठानी पड़ी। इसके निष्कर्षों में निकल कर आया कि स्पेंसर के आरोप सच हैं और बशीर ने डायना के इंटरव्यू के लिए उनसे वाकई झूठ कहा था।

इस जाँच रिपोर्ट में कहा गया, “मिस्टर बशीर ने झूठ बोला और उन्हें प्रिंसेस डायना के साथ मीटिंग अरेंज करने के लिए मनाया।” रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बशीर ने अनुचित तरीके से काम किया और स्ट्रेट डीलिंग में 1993 एडिशन ऑफ प्रोड्यूसर गाइडलाइन का उल्लंघन किया।

इस जाँच रिपोर्ट के आने के बाद बीबीसी ने ब्रिटिश शाही परिवार से अपनी ओर से माफी भी माँगी। बीबीसी के महानिदेशक टिम डेवी ने माना कि इंटरव्यू हासिल करने की प्रक्रिया गलत थी। उन्होने कहा,

“उस समय जो कुछ भी हुआ था, उसकी तह तक जाने के लिए बीबीसी को और अधिक कोशिश करनी चाहिए थी। इसे और अधिक पारदर्शी होना चाहिए था। एक चौथाई सदी बीतने के बाद हम पीछे तो नहीं जा सकते हैं, लेकिन हम एक पूर्ण और बिना शर्त माफी माँग सकते हैं।”

इंटरव्यू से और खराब हुआ रिश्ता- प्रिंसेस डायना का बेटा

जज डायसन की जाँच रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रिंसेस डायना के बेटे प्रिंस विलियम ने कहा कि बीबीसी की असफलताओं और मार्टिन बशीर के 1995 के पैनोरमा साक्षात्कार ने उनकी माँ के डर, उनके पागलपन और अलगाव को बढ़ा दिया था। उन्होंने कहा कि इस एपिसोड को फिर कभी टेलीकास्ट नहीं करना चाहिए।

प्रिंस विलियम ने राजकुमारी डायना की स्थिति के लिए न केवल रिपोर्टर बल्कि बीबीसी के मालिकों को भी जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा इस इंटरव्यू ने उनके माता-पिता के रिश्ते को और खराब करने में अपना योगदान दिया और कइयों को दुख पहुँचया। वहीं प्रिंस हैरी ने कहा है कि शोषण और अनैतिक परंपराओं की संस्कृति ने उनकी माँ की जान ले ली।

सोशल मीडिया पर नाराजगी

बीबीसी ने इस मामले में माफी तो माँग ली, लेकिन मामला सोशल मीडिया तक पहुँचने के बाद लोग बीबीसी पत्रकार बशीर पर फूट पड़े। बीबीसी पत्रकार मार्टिन बशीर के कारण ट्विटर पर #DefundTheBBC ट्रेंड रने लगा। यूजर्स बशीर को लेकर कहने लगे कि उन्होंने इंटरव्यू पाने के लिए कैसे झूठ बोला। इस ट्रेंड में बीबीसी की वो स्टोरीज भी शेयर होने लगी जिनसे पाठकों को आपत्ति थी।

स्पेंसर ने नोट्स में रिकॉर्ड कर रखी थी मीटिंग

अब आइए बताएँ कि बीबीसी के मार्टिन बशीर का यह कपट दुनिया के सामने कैसे उजागर हो पाया और वो क्या सबूत थे जिन्हें डायना के भाई ने पेश किए।

दरअसल, दिलचस्प बात ये है कि जिस समय नाइटब्रिज फ्लैट पर बीबीसी पत्रकार से स्पेंसर ने अपनी बहन को मिलवाया, उस दौरान वह बशीर की हर बात को नोट में रिकॉर्ड कर रहे थे। 19 सितंबर 1995 को हुई उस बैठक के नोट्स स्पेंसर के पास सलीके से मौजूद थे।

इन्हीं रिकॉर्ड से ये पता चला कि बीबीसी पत्रकार बशीर द्वारा राजकुमारी डायना के सामने किए गए दावे फर्जी थे। बशीर ने जो उनसे जो-जो कहा वो सब गलत था। जैसे, उनके पत्र पढ़े जा रहे हैं, उन पर निगरानी रखी जा रही है या फिर उनके फोन टैप हो रहे हैं।

मार्टिन बशीर द्वारा बोले गए झूठ

डायना के ईर्द-गिर्द हो रही चीजें कंट्रोल

डायना से मीटिंग के दौरान बशीर ने झूठ बोला था कि उन्हें एमआई 6 के 3 एजेंटों ने बताया था कि प्रिंस चार्ल्स के निजी सचिव रिचर्ड आयलॉर्ड उनके आसपास की चीजों को कंट्रोल कर रहे थे। इसमें डायना के पूर्व बॉडीगार्ड केन व्हार्फ भी शामिल थे। 

पत्रकार ने उन्हें कुछ फर्जी बैंक स्टेटमेंट दिखाए कि उनके करीबी उनके सीक्रेट बेच रहे हैं। इसके बाद बशीर ने डायना के शक का अपनी मीटिंग में जमकर इस्तेमाल किया। नीचे चार्ल्स स्पेंसर द्वारा तैयार किया गया मीटिंग का नोट देख सकते हैं।

साभार: डेली मेल

चार्ल्स के सेक्रेट्री को जोनाथन डिंब्ले करते थे पेमेंट

बशीर ने डायना के सामने दावा किया कि प्रिंस चार्ल्स के सचिव रिचर्ड आयलार्ड को ब्रॉडकास्टर जोनाथन डिंब्ले पेमेंट कर रहे थे। बशीर ने यह भी कहा कि दो साल पहले चार्ल्स के दो सहयोगियों ने डायना और स्पेंसर परिवार पर हमला करने के लिए योजना बनाई थी।

स्पेंसर की साख हो जाएगी समाप्त

बैठक में बशीर ने डायना के मन में डर बैठाया कि स्पेंसर की साख खत्म हो जाएगी। इस अलावा यह भी कहा कि कि प्रिंस चार्ल्स, स्पेंसर की तत्कालीन पत्नी विक्टोरिया को मारना चाहते थे।

विल कार्लिंग के साथ अफेयर

1995 में डायना और रग्बी कप्तान विल कार्लिंग की दोस्ती का हवाला भी बशीर ने दिया। जिन्हें स्पेंसर नोट करते गए।

डायना पर निगरानी

चार्ल्स स्पेंसर के नोट से पता चलता है कि मार्टिन बशीर ने डायना को बताया था कि उनकी कार और फोन लाइन्स को बग किया जा रहा है।

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कैमिला का डिप्रेस होना

बशीर ने डायना के सामने कैमिला पार्कर बोल्स का भी जिक्र किया और बताया कि वह उस समय डिप्रेस थीं। जिनके बारे में बात करते हुए बाद में डायना ने अपने इंटरव्यू में कहा भी उनकी शादी में तीन लोग थे। कहते हैं कि इस मुद्दे पर बोलने के लिए बशीर ने ही डायना को उकसाया था।

इसके अलावा नोट में टिगी का नाम भी शामिल था जिन पर प्रिंस चार्ल्स के साथ अफेयर होने के आरोप थे।

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इसमें बर्मा के अर्ल माउंटबेटन की पत्नी एडविना माउंटबेटन का भी उल्लेख किया गया है।

यूएस में बिजनेस डील

स्पेंसर के नोट में सारा फर्ग्यूसन की अमेरिका की कई फर्जी व्यापारिक यात्राओं का भी वर्णन किया गया है। सारा फर्ग्यूसन प्रिंस एंड्रयू की पत्नी थीं, जिनका 1996 में तलाक हो गया था।

नोट में कहा गया है कि तलाक के बाद भी एंड्रयू ने ‘उसकी देखभाल’ की और उसे आर्थिक रूप से मदद भी की थी।

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आराम के लिए खाती हैं रानी

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नोट में यह भी लिखा था कि रानी उस समय अस्वस्थ थीं और केवल आराम के लिए खाती थीं।

राजकुमारी डायना का इंटरव्यू और अंत

बता दें कि डायना के इंटरव्यू को बीबीसी ने 20 नवंबर 1995 को टेलीकास्ट किया था। 54 मिनट के प्रोग्राम में राजकुमारी डायना ने कई खुलासे अपने वैवाहिक जीवन को लेकर किए थे। इस प्रोग्राम को 23 मिलियन लोगों ने देखा था।

इस इंटरव्यू में डायना ने अफेयर की अटकलों पर पुष्टि की थी और साथ ही प्रिंस चार्ल्स से अपनी शादी पर कई निजी जानकारी शेयर की थी। इस इंटव्यू के बाद साल 1996 में डायना और चार्ल्स का डायवोर्स हो गया और 36 साल की उम्र में एक कार एक्सिडेंट में राजकुमारी का निधन हुआ।

‘सिंगापुरिया जाली डाक्टर… भाभी को पिटवाने वाली’ – लालू यादव की बेटी पर जीतन राम मांझी की बहू का अटैक

लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य इन दिनों सोशल मीडिया पर खासा एक्टिव रहती हैं। इसी बीच बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की बहू ने नीतीश सरकार पर हमला बोलने पर रोहिणी को ट्विटर पर आड़े हाथों लिया। शुक्रवार (21 मई 2021) को दीपा मांझी ने रोहिणी के एक ट्वीट को री-ट्वीट कर ठेठ अंदाज में उन्हें फटकार लगाई, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई ​है।

दरअसल, रोहिणी आचार्य ने बुधवार को (19 मई 2021) ट्वीट करके सुशील मोदी को धमकी दीं कि यदि उनकी बहनों के बारे में कुछ कहा तो वो आकर उनका मुँह तोड़ देंगी। उन्होंने सत्ता में बैठी पार्टी पर भी सवाल उठाए थे। इस पर जीतन राम मांझी की बहू दीपा संतोष मांझी ने ट्वीट करते हुए कहा कि पहले रोहिणी को अपने घर में अपनी भाभी को इंसाफ दिलाना चाहिए।

दीपा ने ट्वीट किया, ”बिहार में एक और बेटी इंसाफ माँग रही है, जिसकी जिंदगी लालू परिवार ने बर्बाद कर दी, क्या गलती थी ऐश्वर्या की जो तुम सब ने मिलकर उसे जलील किया, मारा पीटा? जब अपने घर शीशे के बने हों तो दूसरों के घर पर पत्थर नहीं मारा करते।” उन्होंने इसके बाद एक और ट्वीट में लिखा, ”भाई पिटाए गली-गली, बहन बने बजरंग बली, भाभी को घर में पिटवाती हो, हे भ्रष्टाचार की रोहिणी, तुम इतना ज्ञान कहाँ से लाती हो?”

मांझी की बहू अपने देसी अंदाज में रोहिणी पर पलटवार करते हुए तीसरा ट्वीट करती हैं, “15 साल में तहार अम्मा-पप्पा कौ गो प्लांट लगईलन है हो सिंगापुरिया जाली डाक्टर? चोरी-डकैती करके डाक्टर बनलू आउर दूसर के ज्ञान सिखा रहल बाडू, ठीक से रहा ना तो ठीक हो जईबू, ई बिहार हा बुझाईल।”

मालूम हो कि इससे पहले लालू यादव की बेटी ने नीतीश कुमार सरकार पर निशाना साधते हुए एक ट्वीट किया था, ”15 वर्षों से सत्ता में बैठकर, क्या मक्खी मार रहे थे..? एक भी लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट नहीं नहीं लगा सके, क्या समुद्र को भी..?, बिहार लाने का इरादा था..!, या बिहार को ही, प्रवासी मजदूरों की तरह, समुद्र के किनारे भेजने का इरादा था, जवाब दो कुर्सी कुमार, नहीं तो कुर्सी छोड़ दो।”

इसके अलावा उन्होंने बिहार में अरसे तक विपक्ष के नेता और उपमुख्यमंत्री रहे सुशील मोदी के लिए भी अभद्र भाषा का प्रयोग किया था। लालू की बेटी ने उन्हें ‘थेथर’ बता ‘थूर’ देने की बात कही थी। इससे पहले नवंबर 2017 में लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव ने सुशील कुमार मोदी के बेटे की शादी में उपद्रव करने की सार्वजनिक तौर पर धमकी दी थी। ‘घर में घुसकर मारेंगे’ टाइप की बातें खुलेआम कही थी। बता दें कि रोहिणी बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत से भी ट्विटर पर पंगा ले चुकी हैं।

‘कोई पूज्य फातिमा बीबी को ऐसा कहे तो तुम्हें कैसा लगेगा’: माँ भवानी के अपमान पर बोला 14 साल का बालवीर, सिर धड़ से हुआ अलग

इस्लाम में ‘ईशनिंदा (Blasphemy)’ की सज़ा काफी सख्त है। शरीयत कानून की मानें तो मौत से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। हाल ही में पाकिस्तान में दो भाइयों पर मस्जिद के अपमान का आरोप लगा और सैकड़ों की भीड़ ने थाने में घुस कर उन्हें मार डालने की कोशिश की। अगर आपको लगता है कि ये सब नया है, तो आप गलत हैं। सैकड़ों वर्ष पूर्व से ही इस्लाम में ऐसा ही होता आ रहा है। ऐसा ही एक नाम है ‘वीर’ हकीकत राय का।

हकीकत राय का जन्म एक खत्री हिन्दू परिवार में हुआ था। उनके बारे में हम जानेंगे, लेकिन उससे पहले अत्याचारी मुगलों की बात। जब हकीकत राय का जन्म हुआ था, तब भारत में मुग़ल शासन भी अपने अंतिम दिन गिन रहा था और साम्राज्य काफी सीमित हो गया था। सितम्बर 1719 से अप्रैल 1748 तक दिल्ली में मुहम्मदशाह ‘रंगीला’ का शासन था। 13वाँ मुग़ल बादशाह मुहम्मदशाह, बहादुरशाह जफ़र I का पोता और खुजिस्ता अख्तर का बेटा था।

मात्र 17 वर्ष की उम्र में उसने तब प्रभावशाली मुग़ल सरदारों सैयद भाइयों की मदद से सत्ता पा ली थी। बाद में उसने सैयद भाइयों में से एक का कत्ल करवा दिया तो एक को ज़हर देकर मरवा दिया। हालाँकि, वामपंथी उसे कला, संगीत, प्रशासनिक विकास और संस्कृति का वाहक मानते हैं। उसी के काल में पर्सिया का नादिर शाह दिल्ली आया और सब कुछ लूट कर ले गया। साथ ही उसने भारत की राजधानी में लाशों का अंबार भी लगा दिया।

हकीकत राय का पालन-पोषण भी कुछ इसी अवधि में हो रहा था। भगवद्गीता सीखते हुए बड़े हो रहे थे। परिवार अमीर था। पूरी खत्री खानदान के हकीकत राय को किसी चीज की कमी न थी। उस दौरान फ़ारसी भाषा का बोलबाला था। संस्कृत से लेकर अंग्रेजी तक, भाषा वो लोकप्रिय नहीं होती है जो सबसे ज्यादा बोली जाती है, बल्कि उस भाषा की माँग सबसे ज्यादा होती है जिनका इस्तेमाल प्रशासनिक कार्यों में होता हो।

सीधे शब्दों में कहें तो हर माँ-बाप अपनी संतान को उस भाषा का ज्ञान प्राथमिकता से देना चाहता है, जिसका इस्तेमाल वहाँ के प्रबुद्धजन करते हों। इसी तरह हकीकत राय को भी फ़ारसी पढ़ने के लिए एक मौलवी के पास भेजा जाता था। मुग़ल काल में अदालतों से लेकर दरबार तक की कार्यवाहियाँ फ़ारसी में ही हुआ करती थीं। जिस सियालकोट में हकीकत राय का जन्म व पालन-पोषण हुआ, वो आज पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में स्थित है।

पिता भागमल ने जिस मदरसे में हकीकत राय को फ़ारसी पढ़ने के लिए भेजा था, जाहिर है कि वहाँ अधिकतर छात्र मुस्लिम थे। उसी मदरसे में एक ऐसी छोटी सी घटना हुई, जिसके कारण हकीकत राय को अपनी जान गँवानी पड़ी। पिता की इच्छा थी कि फ़ारसी पढ़ कर उनका बेटा एक बड़ा सरकारी अधिकारी बनेगा। बालक कुशाग्र बुद्धि था और उसने शिक्षक का प्रेम कुछ ही समय में प्राप्त कर लिया। वो मन लगा कर पढ़ता।

लेकिन, मदरसे में पढ़ने वाले अन्य मुस्लिम छात्रों को ये बात खटकती थी। वो किसी न किसी प्रकार से हकीकत राय को प्रताड़ित करने लगे थे और पढ़ाई से ध्यान भटकाने के लिए उन्हें परेशान किया करते थे। मदरसे के कुछ बच्चे चोरी और जुआ में मशगूल थे, जिनकी शिकायत हकीकत ने शिक्षकों से कर दी थी। इसके बाद वो छात्र और भी चिढ़ गए। हकीकत राय की उम्र तब मात्र 13-14 वर्ष ही थी। उनके विवाह की बात भी चल रही थी।

लाहौर के ही एक बड़े घराने में उनका रिश्ता तय होने वाला था। एक दिन जब छात्रों के झगड़े में हकीकत राय के कपड़े फट गए तो पिता भागमल शिकायत लेकर मदरसा पहुँचे। मौलवी ने दोषी छात्रों को सज़ा दी। इसके बाद से ही उन लोगों ने मन बना लिया था कि वो किसी तरह से इसका बदला लेंगे। हकीकत राय का विवाह तय हो चुका था। मौलवी को भी निमंत्रण भेजा गया था। लेकिन, उसी बीच ईद का त्यौहार भी आ गया।

‘सुरुचि प्रकाशन’ द्वारा संकलित हकीकत राय की जीवनी के अनुसार, ईद के दिन हकीकत राय ने एक सोने का सिक्का देकर मौलवी साहब को त्यौहार की बधाई दी। इसी दौरान अन्य छात्र उससे कबड्डी खेलने की जिद करने लगे, लेकिन माँ भवानी की सौगंध खाकर हकीकत राय ने कहा कि उनका खेलने का मन नहीं है। फिर क्या था, मुस्लिम छात्रों ने माँ भवानी को ‘पत्थर का टुकड़ा’ बताते हुए उनकी प्रतिमा को सड़क पर फेंकने और लात से मारने की धमकी दी।

‘Gateway To Sikhism‘ और सुरुचि प्रकाशन में वर्णित हकीकत राय की जीवनी के अनुसार, उन्होंने माँ भवानी का अपमान करते मुस्लिम छात्रों से बस इतना ही पूछा कि अगर कोई उनकी पूज्य फातिमा बीबी के लिए कोई ऐसा कहेगा तो उन्हें कैसा महसूस होगा? इसके बाद उन छात्रों ने भीड़ जुटा दी और मौलवी से शिकायत की। फिर हकीकत राय को ‘काफिर’ बताते हुए काजी से उनकी शिकायत की गई।

गुरु से भगवद्गीता पढ़ते वीर हकीकत राय

हकीकत राय ने माफ़ी माँगने से इनकार कर दिया क्योंकि उन्होंने कोई अपशब्द नहीं कहे थे। काजी ने हकीकत राय और उनके पिता के सामने शर्त रखी कि हकीकत को इस्लाम कबूल करना पड़ेगा, तभी उसकी जान बच सकती है। लेकिन, हकीकत राय ने इनकार कर दिया। हकीकत राय को रस्सी से बाँध कर लाहौर के हाकिम के पास ले जाया गया। भागमल के नाम मिन्नतें करने के बावजूद उसने काजी के फैसले को पलटने से इनकार कर दिया।

भागमल अपने बेटे की जान की भीख माँगते रहे, उधर हाकिम ने जल्लाद को आवाज़ दी। उसे आदेश दिया गया कि वो एक ही वार में हकीकत राय का सिर धड़ से अलग कर दे और उसने उपस्थित सभी लोगों के सामने ही ऐसा ही किया। हकीकत राय ने गुरु तेग बहादुर और संभाजी जैसे वीरों के रास्ते पर चलते हुए जान दे दी, लेकिन इस्लाम कबूल नहीं किया। ‘ईशनिंदा’ का झूठा आरोप लगा और उन्हें मार डाला गया।

सिर कलम किए जाने से पहले हकीकत राय ने काजी से पूछा था कि क्या मुस्लिमों को मौत नहीं आती? अगर आती है तो मैं अपना धर्म क्यों छोड़ूँ? हकीकत राय के बलिदान पर सिख सम्राट रणजीत सिंह को भी नाज़ था। 18वीं सदी में इस्लामी शासकों और अंग्रेजों को नाकों चने चबवाने वाले ‘शेर-ए-पंजाब’ रणजीत सिंह अक्सर उनके बलिदान को याद करते थे। सिख और हिन्दू, दोनों ही वीर हकीकत राय को याद करते हैं। पंजाब के गुरदासपुर में उनकी समाधि भी है।

इंटरनेट एक्सप्लोरर Google Chrome डाउनलोड करने के लिए था बेस्ट: माइक्रोसॉफ्ट की बंद करने की घोषणा, बने Memes

माइक्रोसॉफ्ट ने घोषणा की है कि अंततः कंपनी अपने ब्राउजर इंटरनेट एक्सप्लोरर को जून 2022 में बंद करने जा रही है। कंपनी ने बयान जारी कर कहा कि 1995 में लॉन्च किया गया वेब ब्राउजर इंटरनेट एक्सप्लोरर 15 जून 2022 को बंद हो जाएगा।

माइक्रोसॉफ्ट कंपनी ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि विंडोज 10 में अब इंटरनेट एक्सप्लोरर का भविष्य माइक्रोसॉफ्ट एज (Microsoft Edge) में है। कंपनी ने कहा कि यह न केवल इंटरनेट एक्सप्लोरर की तुलना में तेज और सुरक्षित है बल्कि कई एप्लीकेशन और वेबसाइट के लिए अनुकूल भी है।

हालाँकि सोशल मीडिया में कई यूजर्स इंटरनेट एक्सप्लोरर के रिटायर होने की खबर पर मीम शेयर कर रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि इंटरनेट एक्सप्लोरर का एक ही उपयोग होता था, नया लैपटॉप खरीदने के बाद एक्सप्लोरर से गूगल क्रोम डाउनलोड करना और एक्सप्लोरर को भूल जाना। कई यूजर्स ने इसे एक युग का अंत भी बताया।

आपको बता दें कि वर्तमान में गूगल का क्रोम ब्राउजर, इंटरनेट सर्फिंग के बाजार का लगभग 65% हिस्सा कवर करता है। दूसरे स्थान पर एप्पल द्वारा निर्मित सफारी ब्राउजर है, जो एप्पल के कंप्यूटर्स और दूसरे डिवाइस में काम करता है। एप्पल की हिस्सेदारी 19% है। क्रोम और सफारी के अलावा फायरफॉक्स और माइक्रोसॉफ्ट एज क्रमशः 3.59% और 3.39% हिस्सेदारी के साथ तीसरे और चौथे स्थान पर हैं।