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मुंबई पुलिस के निलंबित अधिकारी सचिन वाजे बर्खास्त: मनसुख हिरेन, एंटीलिया मामले में है गंभीर आरोप

एंटीलिया बम कांड और मनसुख हिरेन की मौत के मामले में आरोपित सचिन वाजे को मुंबई पुलिस ने मंगलवार (11 मई 2021) को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वाजे को एनआईए ने उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के पास विस्फोटक सामग्री से लैस कार मिलने और कारोबारी मनसुख हिरेन की मौत के मामले में गिरफ्तार किया था। इसके बाद से उनके खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई थी।

मालूम हो कि मनसुख हिरेन की पत्नी विमला हिरेन ने अपने पति की हत्या के मामले में वाजे को दोषी ठहराया था। वाजे के खिलाफ आईपीसी की धारा 285, 465, 473, 506(2), 120(बी) के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। वहीं, मामले की शुरुआती जाँच के बाद मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह को भी पद से हटा दिया गया था।

गौरतलब है कि वाजे ने खुद 25 फरवरी को उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के पास पार्क किए गए विस्फोटक से भरे स्कॉर्पियो में धमकी भरा पत्र रखा था। मुंबई पुलिस ने स्कॉर्पियो से मुकेश और नीता अंबानी को संबोधित एक पत्र बरामद किया था, जिसमें दावा किया गया था कि यह विस्फोटक सिर्फ एक ’ट्रेलर’ है।

एनआईए ने खुलासा किया था कि वाजे पहले स्कॉर्पियो के अंदर धमकी भरा पत्र रखना भूल गया था और बाद में इसे रखने के लिए वापस आया था। NIA द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद वाजे को 15 मार्च को सस्पेंड कर दिया गया था। एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस ने उसके निलंबन का आदेश जारी किया था।

बता दें कि जाँच के दौरान एनआईए अधिकारियों ने पाया कि वाजे ने एंटीलिया के पास बम से भरे स्कॉर्पियो को पार्क करने से लेकर धमकी भरे पत्र को कार के अंदर रखने तक की पूरी कवायद को खुद से कॉर्डिनेट किया था। एनआईए के अधिकारियों ने निष्कर्ष पर पहुँचने के लिए मुलुंड टोल कलेक्शन प्वाइंट से सीसीटीवी फुटेज बरामद किया था।

अनिल देशमुख के खिलाफ ED ने दर्ज किया मनी लॉन्ड्रिंग का केस, कॉन्ग्रेस ने कहा- महाविकास अगाड़ी को बदनाम करने की चाहत

महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार (11 मई 2021) को मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है। समाचार एजेंसी एएनआई ने ईडी के सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। एएनआई के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय ने सीबीआई की एफआईआर के आधार पर मामला दर्ज किया है।

बताया जा रहा है कि देशमुख के खिलाफ केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा पिछले महीने 24 अप्रैल को दर्ज की गई एफआईआर का अध्ययन करने के बाद धन शोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) की धाराओं के तहत यह मामला दर्ज किया गया है। इसके तहत प्रवर्तन निदेशालय अब देशमुख (71 वर्षीय) और अन्य लोगों को पूछताछ के लिए तलब कर सकता है।

देशमुख के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किए जाने के बाद एनसीपी और कॉन्ग्रेस नेता उनके बचाव में उतर गए हैं। उन्होंने इसे बदले की राजनीति से प्रेरित कार्रवाई बताया है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि अनिल देशमुख के खिलाफ यह कार्रवाई पीएम मोदी द्वारा कोरोना संकट में उनके कुप्रबंधन से ध्यान हटाने के लिए की गई है। कॉन्ग्रेस दावा कर रही है कि भाजपा महाविकास अगाड़ी और उनकी पार्टी को बदनाम करना चाहती है। इसलिए वह ऐसा कर रही है।

एक बयान में एनसीपी नेता नवाब मलिक ने दावा किया, “ईडी द्वारा सिंह के आरोपों के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया गया, यह सभी राजनीति से प्रेरित है और इसका उद्देश्य शक्ति का दुरुपयोग करके देशमुख को बदनाम करना है। यह स्पष्ट है कि भाजपा सीबीआई, ईडी और अन्य केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग करके राजनीति कर रही है, जो भी कानूनी पहलू हैं, देशमुख जाँच में सहयोग करेंगे।”

गौरतलब है कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई की एफआईआर को चुनौती देने वाली देशमुख की याचिका को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने रिश्वत के आरोपित को निर्देश दिया था कि अगर जरूरत पड़ी तो उनके केस की जरूरत के आधार पर हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच को स्थानांतरित किया जाएगा।

मालूम हो कि मुंबई के पूर्व पुलिस कमीश्नर परमबीर सिंह ने अनिल देशमुख पर आरोप लगाया था कि जब वो महाराष्ट्र के गृह मंत्री थे, तब उन्होंने मुंबई पुलिस के निलंबित अधिकारी सचिन वाजे को हर महीने 100 करोड़ रुपए की वसूली का टारगेट दिया था। वहीं देशमुख ने आरोपों से इनकार किया था, लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट की ओर से सीबीआई जाँच के आदेश के बाद देशमुख को पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

उत्तराखंड: देवप्रयाग में बादल फटने से मची तबाही, आईटीआई भवन सहित कई दुकानें ध्वस्त, लॉकडाउन की वजह से बचे लोग

उत्तराखंड के देवप्रयाग में बादल फटने से आज मंगलवार (मई 11, 2021) को भारी तबाही की खबरें हैं। न्यूज एजेंसी एएनआई ने देवप्रयाग एसएचओ एमएस रावत के हवाले से ये जानकारी दी। एसएचओ ने बताया कि आज शाम पाँच बजे बादल फटने की खबर मिली। इसमें 12-13 दुकानें और अन्य संपत्ति को नुकसान पहुँचा है। उन्होंने कहा कि चूँकि लॉकडाउन के चलते अधिकतर दुकानें बंद थीं इसलिए किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। हालाँकि यहाँ जल स्तर बढ़ रहा है और बचाव अभियान जारी है।

वहीं राज्य के डीजीपी अशोक कुमार ने बताया कि टिहरी जिले के देवप्रयाग में बादल फटने से कई दुकानें और घरों को नुकसान पहुँचा है। हालाँकि अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। उन्होंने कहा कि एसडीआरएफ टीमें बचाव अभियान में जुटी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बादल फटने से यहाँ आईटीआई भवन भी ध्वस्त हो गया। दरअसल, शाम पाँच बजे दशरथ आँचल पर्वत पर बादल फटा जिससे शांता गदेरा उफान पर आ गया और मलबा आने से प्रमुख बाजार की कई दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं।

खबर के मुताबिक संगम बाजार का रास्त भी बंद हो गया है। एक अच्छी बात ये है कि यहाँ कोरोना वायरस के चलते लोगों की आवाजाही बंद थी, इसलिए जानमाल की हानि ना होने की संभावना है। हालाँकि बचाव दल भी घटनास्थल पर पहुँच गया है। इस बीच सोशल मीडिया में घटना का वीडियो वायरल हो रहा है।

गौरतलब है कि इससे पहले उत्तराखंड के चमोली में बिनसर इलाके में ग्लेशियर फटने से भारी तबाही मची थी। कई लोगों के साथ, कई दुकानें इस हादसे में तबाह हो गए थे। इलाके में कई दिनों से लगातार बारिश के चलते बरसाती गदेरे भी उफान पर हैं।

बता दें कि विगत सात फरवरी को उत्तराखंड के चमोली जिले में आपदा आ गई थी। आपदा में कुल 206 लोग लापता हुए थे। ऋषिगंगा और धौली गंगा में आई भीषण आपदा से ऋषिगंगा प्रोजेक्ट पूरी तरह से तहस-नहस हो गई थी।

स्वप्ना पाटकर के ट्वीट हटाने के लिए कोर्ट पहुँचे संजय राउत: प्रताड़ना का आरोप लगा PM को भी महिला ने लिखा था पत्र

शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने मुंबई के अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट में एक मामला दायर किया है। इसमें ट्विटर इंडिया और गूगल इंडिया को उन सभी ट्वीट और अन्य डिजिटल सामग्रियों को हटाने के लिए निर्देश देने की गुहार लगाई गई है, जिसमें मराठी फिल्म निर्माता स्वप्ना पाटकर ने उनके खिलाफ आरोप लगाए हैं।

शिकायत में राउत ने दावा किया है कि उन पर किए गए ट्वीट भ्रामक हैं और देश की ‘शांति और सद्भाव को नुकसान’ पहुँचा सकते हैं। यह दावा करते हुए कि ट्वीट्स अपमानजनक हैं और पाटकर के ट्विटर अकाउंट को ब्लॉक किया जाना चाहिए, राउत ने कहा कि यह आरोप ‘भारत और विशेष रूप से महाराष्ट्र राज्य में राजनीतिक और सामुदायिक समूहों के बीच भेदभाव पैदा कर सकते हैं।’

राउत ने अदालत से उन सभी वेबसाइटों और ऑनलाइन प्लेटफार्मों को एक निर्देश जारी करने का भी आग्रह किया, जिन्होंने राउत पर पाटकर के आरोपों से संबंधित खबर को चलाया। अदालत से ऐसी खबरों को 24 घंटे के भीतर हटाने के लिए निर्देश देने की अपील की है।

यहाँ यह जानना दिलचस्प है कि राउत ने सूचना और प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69 ए के तहत शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें केवल केंद्र सरकार को एक सक्षम प्राधिकारी के रूप में एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सामग्री ब्लॉक करने की अनुमति होती है, वो भी तब जब इससे देश की संप्रभुता को खतरा हो। ट्विटर इंडिया की ओर से वकील द्वारा दायर शुरुआती ऑब्जेक्शन में कहा गया है कि शिकायत में उल्लिखित अधिनियम को निजी मामले के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

ट्विटर कम्युनिकेशंस इंडिया का प्रतिनिधित्व करने वाले एडवोकेट अनिरुद्ध गनु ने ऑपइंडिया को बताया कि ट्विटर इंडिया और गूगल इंडिया दोनों का कंटेंट पर कोई नियंत्रण नहीं है। कार्यवाही को वैध बनाने के लिए मूल कंपनियों को शिकायत में पार्टी बनाया जाता है।

अधिवक्ता गनु ने बताया कि संजय राउत ने शिकायत करने के लिए सत्ता का दुरुपयोग किया। उन्होंने उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया और केस दर्ज कराने के लिए शॉर्ट कट अपनाया। मराठी फिल्म निर्माता स्वप्ना पाटकर, जिन पर ‘आपत्तिजनक ट्वीट’ करने का आरोप है, को भी इस मामले में पार्टी नहीं बनाया गया। हालाँकि, पाटकर ने अब अपनी भाषा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने के लिए एक हस्तक्षेप याचिका दायर की है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह वैध मामला न होकर दबाव बनाने का मामला लगता है।

पाटकर ने ट्वीट्स के भ्रामक और विवादास्पद होने के संजय राउत के दावों को नकारते हुए कहा कि उसके पास सभी आरोपों के लिए पर्याप्त सबूत हैं और वह अदालत में लड़ने के लिए तैयार है।

गौरतलब है कि 2015 में शिवसेना संस्थापक बालासाहब ठाकरे के जीवन पर मराठी फिल्म ‘बालकाडू’ बनाने वाली फिल्म निर्माता डॉक्टर स्वप्ना पाटकर ने कुछ दिनों पहले शिवसेना सांसद संजय राउत पर प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। स्वप्ना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर न्याय की गुहार लगाई थी। स्वप्ना पाटकर ने आरोप लगाया था कि शिवसेना मुखपत्र ‘सामना’ के सह-संपादक संजय राउत पिछले 8 वर्षों से अपनी पार्टी के रुतबे और सिस्टम पर पकड़ का इस्तेमाल कर न सिर्फ उन्हें गालियाँ दे रहे हैं, बल्कि उनके परिवार और रिश्तेदारों को भी प्रताड़ित कर रहे हैं।

बता दें कि स्वप्ना पेशे से साइकोलॉजिस्ट हैं। साथ ही वो ‘द रॉयल मराठी एंटरटेनमेंट’ नामक फिल्म प्रोडक्शन कंपनी की मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। वे 2013 में मराठी में मोटिवेशनल पुस्तक ‘जीवन फंडा’ भी लिख चुकी हैं।

राजस्थान में 25000 से अधिक पाकिस्तानी हिन्दू प्रवासियों में कोरोना संक्रमण का डर, बिना आधार कार्ड कैसे लगेगी वैक्सीन

राजस्थान में रहने वाले 25 हजार से अधिक पाकिस्तानी हिंदू प्रवासी कोरोना के कहर से बचने के लिए टीकाकरण का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन आधार कार्ड व अन्य कोई पहचान पत्र उपलब्ध नहीं होने के कारण कोरोना की वैक्सीन लगवाना उनके लिए टेढ़ी खीर हो गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजस्थान के जोधपुर जिले में करीब 24 से ज्यादा झुग्गियों में 90 फीसदी पाकिस्तानी हिन्दू प्रवासी रहते हैं। बताया जा रहा है कि अभी तक न तो इनकी कोविड-19 की जाँच हुई है और न ही किसी तरह का इलाज इन्हें मुहैया कराया गया है।

हालाँकि, इन बस्तियों में पहले से ही कई लोग कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। जोधपुर में रहने वाले 5 प्रवासियों की कथित तौर पर कोरोना से मौत भी हो गई है। इन सबके बावजूद इनको कोरोना की वैक्सीन नहीं लगाई जा सकती है, क्योंकि इन लोगों के पास आधार कार्ड व अन्य कोई पहचान पत्र नहीं है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के 25 हजार से अधिक पाकिस्तानी प्रवासी राजस्थान के सीमावर्ती जिलों जैसे जोधपुर, बाड़मेर और जैसलमेर में रह रहे हैं। इनमें से लगभग 80 फीसदी अकेले जोधपुर में हैं। शहर के बाहरी इलाके में प्रवासियों की लगभग 21 बस्तियाँ हैं। ज्यादातर प्रवासी भारत की नागरिकता पाने के इंतजार में लंबे समय से यहाँ वीजा पर हैं। उनके पास ना तो आधार कार्ड है और ना ही कोई और पहचान पत्र है।

यही कारण है कि उन्हें टीका नहीं लगाया जा सकता है। मालूम हो कि कोरोना संक्रमण अन्य राज्यों, शहरों की तरह इन बस्तियों में रहने वालों को भी अपनी चपेट में ले रहा है, लेकिन अभी तक​ इनकी जाँच भी नहीं की गई है।

हाल ही में कुछ पाकिस्तानी प्रवासी कोरोना से संक्रमित पाए गए थे, जिसके बाद मेडिकल और स्वास्थ्य विभाग ने 24 झुग्गियों में घर-घर जाकर सर्वे किए जाने का आदेश दिया था, लेकिन टीकाकरण को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है।

पाकिस्तानी प्रवासियों के बुनियादी अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले सीमांत लोक संगठन के अध्यक्ष हिंदू सिंह सोढा का कहना है कि आधार कार्ड का न होना पाक प्रवासियों के टीकाकरण में सबसे बड़ी बाधा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर माँग की गई है कि प्रवासियों का पासपोर्ट, रेजिडेंशियस परमिट या फिर लॉन्ग टर्म वीजा के आधार पर टीकाकरण किया जाए।

बता दें कि बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री वासुदेव देवनानी ने भी केंद्रीय गृह मंत्री और मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर पाकिस्तानी प्रवासियों के लिए टीकाकरण सुनिश्चित करने की माँग की है।

उद्धव ठाकरे की जाएगी कुर्सी, शरद पवार खुद बनना चाहते हैं CM? रिपोर्ट से महाराष्ट्र सरकार के गिरने के कयास

महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार के भविष्य को लेकर फिर से अटकलें शुरू हो गई है। इस बार वजह सरकार में शामिल राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) सुप्रीमो शरद पवार की नाराजगी बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाकर अब उन्हें गलती का अहसास हो रहा है। पवार वो शख्स हैं जिन्हें मौजूदा महाराष्ट्र सरकार का शिल्पकार माना जाता है। माना जाता है कि उनकी वजह से ही कॉन्ग्रेस ​भी शिवसेना के साथ आने को तैयार हुई।

ताजा अटकलों को हवा मराठी दैनिक तरुण भारत की रिपोर्ट से मिली है। इसमें बताया गया है कि पवार को अब पछतावा हो रहा है। उन्हें लगता है कि उद्धव ठाकरे को सीएम बनाना ‘भारी भूल’ थी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि उद्धव ठाकरे द्वारा शरद पवार के फोन कॉल का जवाब नहीं देने के बाद, एनसीपी प्रमुख ने शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत के सामने इस बात को स्वीकारा कि उन्होंने ठाकरे को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनाकर बहुत बड़ी गलती कर दी। मराठी समाचार पत्र का मानना है कि राजनीतिक हलकों में इस चर्चा का कारण ठाकरे से पवार का मोहभंग होना है।

पाँच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों पर चर्चा के लिए आयोजित ‘पश्चिम बंगाल से पंढरपुर’ नामक कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार अनिल थाटे ने इसका खुलासा किया। उन्होंने कहा कि शरद पवार ने राउत से कहा कि वह खुद या एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद के लिए एक बेहतर विकल्प होंगे।

थाटे ने इस दौरान उन पहलुओं पर भी बात की जिससे ममता बनर्जी को बंगाल में जोरदार जीत मिली और जिसे महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में दोहराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बाला साहेब ने अपने दम पर सत्ता नहीं हासिल की। शरद पवार कभी भी महाराष्ट्र के ममता बनर्जी नहीं बन सकते। न ही यह उद्धव ठाकरे के लिए यह संभव है। शरद पवार 52-55 से अधिक विधायकों के साथ कभी सत्ता में नहीं रहे। महाराष्ट्र में शिवसेना के लिए ममता बनर्जी का अनुसरण करना असंभव है और न ही ममता यहाँ आकर उनकी ढाल बन सकती हैं।

उन्होंने आगे कहा, “ममता की राजनीतिक शैली महाराष्ट्र के अनुकूल नहीं है। साथ ही महाविकास अघाड़ी में फडणवीस के खिलाफ खड़े होने का सक्षम नेतृत्व नहीं है। राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन में दरार अवश्यंभावी है। यह जल्द ही होगी।”

थाटे के इन खुलासों से नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली भाजपा के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन बनाने वाली शिवसेना के खोखले दावों की पोल खुल गई है। सोमवार (10 मई 2021) को राउत ने कहा था कि विपक्षी दलों को एक साथ आने और एक मजबूत गठबंधन बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा था, “देश में विपक्षी दलों का एक मजबूत गठबंधन बनाने की जरूरत है, लेकिन कॉन्ग्रेस पार्टी के बिना गठबंधन नहीं हो सकता। यह आत्मा होगी। परामर्श के माध्यम से नेतृत्व का निर्णय किया जा सकता है।”

‘हम अपनी कूटनीतिक नीति का पालन करेंगे’: क्वाड पर चीन की धमकी का बांग्लादेश ने दिया दो-टूक जवाब

क्वाड देशों के समूह में किसी भी प्रकार की भागीदारी पर विचार करने के निर्णय को लेकर चीन द्वारा दी गई धमकी के जवाब में बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमन ने कहा कि एक स्वतंत्र राष्ट्र होने के नाते बांग्लादेश अपनी कूटनीतिक नीति का पालन करेगा।

बता दें कि बांग्लादेश में चीन के राजदूत ली जिमिंग ने चेतावनी देते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार अगर क्वाड देशों के समूह से जुड़ने में रुचि दिखाती है तो दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में कड़वाहट आ जाएगी।

उन्होंने कहा था, “इतिहास बार-बार यह साबित कर चुका है कि इस तरह की साझेदारी निश्चित रूप से हमारे पड़ोसियों के सामाजिक, आर्थिक विकास और लोगों की भलाई को नुकसान पहुँचाती है।”

चीन के तेवर को लेकर बांग्लादेश के विदेश मंत्री मोमन ने कहा, “यह हमारे ऊपर है कि हम इसे करते हैं या नहीं। हमने इसके लिए किसी ने आमंत्रित नहीं किया था, ना हमने इसको लेकर कोई रुचि दिखाई थी और न ही हमसे किसी ने कहा था। चीन सिर्फ एक स्वतंत्र और संप्रभु राज्य के रूप में अपनी राय दे सकता है।”

यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार चीनी दावों का जवाब देगी, इस पर विदेश मंत्री ने कहा, “हम इस पर बात नहीं करना चाहते हैं। हम अपनी कूटनीतिक नीति का पालन करेंगे। हम आमतौर पर इन उत्तेजक बयानों का बिल्कुल भी स्वागत नहीं करते हैं।”

उल्लेखनीय है कि भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के क्वाड गठजोड़ से चीन पहले से ही चि़ढ़ता आ रहा है और ये किसी से छिपा नहीं है। लेकिन बांग्लादेश को इस मामले में खुली चेतावनी देना चीन की सोच को और पुख्ता कर रहा है। चीन ने बांग्लादेश को धमकी दी है कि अगर ढाका ने इस गठजोड़ में शामिल होने के बारे में सोचा तो बीजिंग से उसके रिश्तों पर इसका असर जरूर पड़ेगा।

बांग्लादेश में चीन के राजदूत ली जिमिंग ने ढाका में मीडिया से बातचीत करते हुए अगर बांग्लादेश इन चार देशों के गठजोड़ में शामिल होगा, तो उसके चीन के साथ उसके रिश्तों को काफी नुकसान होगा। ली ने बताया कि क्वाड एक छोटे उद्देश्य के साथ बनाया गया एक भूराजनीतिक गुट है, जो चीन के खिलाफ काम कर रहे हैं।

ली ने कहा कि भले ही ये गठजोड़ आर्थिक और सुरक्षा के मकसद से बनाया गया हो लेकिन ये सच नहीं है। असल में इस क्वाड को चीन के खिलाफ काम करने के लिए बनाया गया है। ली ने कहा कि इसका हिस्सा बनने पर बांग्लादेश को कोई फायदा नहीं होगा बल्कि नुकसान ही होगा।

बता दें कि क्वाड्रीलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग यानी क्वाड भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के बीच एक बहुपक्षीय समझौता है। क्वाड बनाने का मुख्य उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है, ताकि समुद्रों से व्यापार आसान हो। लेकिन व्यापार के साथ-साथ अब यहाँ सैनिक बेस को भी मजबूती दी जा रही है और यही बात चीन को सबसे ज्यादा परेशान कर रही है। 

दरअसल, चीन को लगता है कि भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका मिलकर चीन के खिलाफ रणनीतिक साजिश रच रहे हैं। इसकी वजह यह है कि क्वाड संगठन दूसरे मुद्दों के साथ-साथ समुद्र में चीन की बढ़ती दादागिरी पर भी लगाम लगाने की तैयारी में है। इस गुट को चीन हमेशा से चीन की साजिश मानता है। 

‘चीनी सुपर गर्ल’ के फेर में टूटा बिल-मेलिंडा गेट्स का रिश्ता? जवानी और रंगीन मिजाजी के कई किस्से बेपर्दा

विश्व की सबसे अमीर हस्तियों में शुमार बिल गेट्स इन दिनों अपनी पत्नी मेलिंडा के साथ तलाक के कारण चर्चा में हैं। 7 साल तक प्रेम प्रसंग चलने के बाद 1994 में दोनों ने शादी की थी। इतने लंबे वक्त के बाद दोनों के रास्ते अलग हुए हैं। लिहाजा, तलाक की वजह को लेकर भी अटकलें लग रही है। इस क्रम में एक चीनी लड़की को इस रिश्ते के टूटने का जिम्मेदार बताया जा रहा है। इस लड़की का नाम झी शेली वांग (Zhe Shelly Wang) है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, बिल गेट्स के तलाक में चीनी लड़की झी शेली वांग की भूमिका थी। हालाँकि, वांग का कहना है कि किसी तलाक में उसकी कोई भागीदारी नहीं है। वांग ने चीनी माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट वीबो पर लिखा, “मैंने सोचा था कि अफवाहें खुद-ब-खुद चली जाएँगी। मुझे अफवाहों के ज्यादा फैलने की उम्मीद नहीं थी।”

वांग ने लिखा है, “गेट्स तलाक देते हैं और कुछ चालाक लोग एक निर्दोष चीनी लड़की की हत्या करने की बात उड़ा देते हैं।” वांग के दोस्तों ने भी उनका समर्थन किया है। एक दोस्त ने लिखा, “वह मेरी पूर्व सहकर्मी है। एक बहुत साफ-सुथरी लड़की है। वह एक ऐसी इंसान है जिसकी मैं प्रशंसा करता हूँ। मुझे विश्वास नहीं है कि वह अन्य लोगों की शादी के बीच में आएगी।”

कौन है झी शेली वांग?

बता दें कि वांग का जन्म क्वांग्जू में हुआ था। बाद में वे अमेरिका चली गईं। उनके पास ब्रिघम यंग यूनिवर्सिटी से बिजनेस की डिग्री है और यूटा में एक रेस्तरां भी। सोशल मीडिया में उपलब्ध बॉयों के अनुसार चीनी, फ्रेंच, जर्मन, जापानी, कोरियाई, रूसी और स्पेनिश भाषाओं में पारंगत हैं।

गेट्स फाउंडेशन के चैरिटेबल ट्रस्ट से झी 2015 से जुड़ी हैं। गेट्स के डायवोर्स के चलते वह चर्चा में आईं। वह गेट्स फाउंडेशन से जुड़े होने के साथ-साथ इंटरप्रेटर के तौर पर मॉनेट्री इंस्टिट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में काम करती थीं। वह येल स्कूल ऑफ मैनेजमेंट और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में भी दुभाषिए के तौर पर सेवा देती हैं। 6 भाषा की जानकार होने के नाते लोग वांग को ‘सुपर गर्ल’ बोलते हैं, जिन्हें प्लेन उड़ाना और शूटिंग करना पसंद हैं।

नेक्ड पार्टी में जाने के शौकीन थे बिल गेट्स

बता दें कि बिल गेट्स के डायवोर्स के बाद केवल झी ही सुर्खियों में नहीं है। ट्स से जुड़ी कई अन्य तरह की बातें भी मीडिया में हो रही हैं। डेलीमेल की हालिया रिपोर्ट बताती है कि गेट्स शादी होने से पहले नेक्ड पार्टी में जाना पसंद करते थे और उन्हें स्ट्रिपर्स को घर लाना भी पसंद था।

गेट्स पर दो किताब लिखने वाले James Wallace के हवाले से बताया गया है कि गेट्स को जवानी के दिनों में पार्टियाँ खूब पसंद थी। इसके अलावा वह स्ट्रिपर्स (कपड़े उतारकर मनोरंजन करने वाले लोग) से मिलते थे और उनको अपने घर भी लाते थे। बॉयोबायोग्राफर के मुताबिक गेट्स अपने घर डांसर बुलाते थे। इसके बाद वह अपने घर के पूल में अपने दोस्तों के साथ नंगे होकर तैरते थे।

अपनी किताब में wallace ने इस बात का जिक्र भी किया है कि गेट्स का रिलेशन मेलिंडा के साथ शुरुआती दिनों में इतना ठीक नहीं था। लेकिन 1992 के बाद दोनों फिर करीब आए और शादी हुई। इसी तरह गेट्स के एक मित्र वर्न रेबर्न दावा करते हैं कि गेट्स को पार्टी करना पसंद था और वह मेलिंडा के प्रति सीरियस नहीं थे। हालाँकि, शादी के बाद गेट्स अपनी पत्नी के प्रति ईमानदार रहे। उन्हें भले ही पार्टी पसंद थी, लेकिन बाद में उन्होंने धोखा नहीं दिया।

बंगाल के नतीजों पर नाची, हिंसा पर होठ सिले: अब ममता ने मीडिया को दी पॉजिटिव रिपोर्टिंग की ‘हिदायत’

ममता बनर्जी की जीत से पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र की रक्षा तय हो गई है। रिजल्ट के सप्ताह भर बाद तक बधाइयाँ ली और दी जा रही हैं। सार्वजनिक क्षेत्र से लेकर निजी क्षेत्र के लोगों और संस्थाओं ने विज्ञापन देकर बधाइयों की बरसात कर दी है। बुद्धिजीवी इस बात से खुश हैं कि भारतीय जनता पार्टी के न जीतने से राज्य की बौद्धिकता पर मँडरा रहा खतरा अब दूर हो गया है।

विपक्षियों की कुटाई से लेकर हत्या और घर जलाने से लेकर बलात्कार से लोकतांत्रिक मूल्यों में गिरावट के नए-नए कीर्तिमान बन रहे हैं। इन कीर्तिमानों को आरोप बताकर खारिज कर दिया जा रहा है। राज्यपाल इसलिए क्षुब्ध हैं कि उन तक रिपोर्ट नहीं पहुँचने दी जा रही। हिंसा पर उच्च न्यायालय के प्रश्नों का राज्य सरकार की ओर से मिला उत्तर एक लाइन का है- कोई हिंसा नहीं हुई है।

क्षेत्रीय और राष्ट्रीय मीडिया राष्ट्रीय राजनीति में ममता बनर्जी के महत्व को लेकर भविष्य की योजनाओं पर चिंतन कर रहा है और भाजपा के कार्यकर्ता चिंता।

इन सबके बीच ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री पत्र लिख चीनी वायरस के विरुद्ध मिलकर लड़ने की हिमायत की और फिर केंद्र के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट पहुँच गईं। पत्र लिखने का मूल इस बात में है कि वे लगातार काम कर रही हैं और पत्र में जो जायज-नाजायज़ माँगें रखी हैं, उनके पीछे यह दिखाना उद्देश्य है कि केंद्र सरकार (नरेंद्र मोदी) को न तो काम करना आता है और न ही गंभीर है।

ममता बनर्जी इस बार पिछली बार की अपेक्षा अधिक सीटें लेकर आई हैं। स्वाभाविक है कि वे इसे बड़ी उपलब्धि मानती हैं। पर तीसरी बार लगातार जीत की उपलब्धि अच्छे राजनेता के लिए गर्व की बात होती है और औसत राजनेता के लिए घमंड की। जिस लोकतांत्रिक प्रक्रिया से नेता जीत कर आते हैं, उस लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनके विश्वास की मात्रा तय यह करती है कि वे अपनी जीत पर गर्व करेंगे या घमंड। यही विश्वास यह भी तय करता है कि आनेवाले समय में लोकतंत्र के अन्य स्तम्भों के साथ इन नेताओं का समीकरण कैसा रहेगा।

ममता बनर्जी ने चुनाव परिणाम के बाद हुई हिंसा पर कोलकाता उच्च न्यायालय के प्रश्नों का जिस तरह एक लाइन का जवाब दिया है, वह उनके और न्यायालय के बीच सम्बंधों को लेकर भविष्य की झाँकी प्रस्तुत करता है। जो मीडिया उनके भविष्य की संभावित योजनाओं को लेकर बढ़िया से बढ़िया सपने बुनते हुए उनमें मोदी विरोधी हीरो देख रहा है, उसी मीडिया को धमकी देकर उन्होंने संदेश दे दिया कि ठीक है कि तुम लोग मेरी जीत की ख़ुशी में मरने के लिए तैयार हो पर हमेशा याद रखना कि महामारी को लेकर मेरी सरकार की रत्ती भर आलोचना मुझे बर्दाश्त नहीं। दवाई, ऑक्सीजन, बेड वग़ैरह मिले या न मिले पर इसकी रिपोर्टिंग चाहे जहाँ से शुरू हो, ख़त्म सरकार की सराहना पर ही होनी चाहिए। ऐसा न हुआ तो Pandemic Act के तहत हमने अपनी ताक़त रिजर्व कर रखी है।

यह सोच उसी नेता की हो सकती है जिसे महामारी के समय अपनी सरकार के प्रदर्शन को लेकर किसी तरह का संदेह होगा। ईमानदारी के साथ जनता के लिए काम करने वाले को यह चिंता नहीं रहेगी कि कहीं ज़रा सी भी कमी पर मीडिया उसके विरुद्ध कैसी रिपोर्टिंग करता है। जिसे संदेह है वही मीडिया को प्रेस कॉन्फ़्रेन्स में यह हिदायत देगा कि सरकार के बारे में पॉज़िटिव रिपोर्टिंग करें।

विडंबना यह नहीं कि उन्होंने मीडिया को धमकी दी। विडंबना यह है कि उनके इस वक्तव्य को छिपाने की पहली कोशिश उसी मीडिया द्वारा होगी, जिसे उन्होंने धमकी दी है। ऐसी कोशिश को देख लोगों को विश्वास ही न होगा कि उन्होंने यह मीडिया के लिए कहा है। वैसे भी पश्चिम बंगाल में मीडिया को ऐसी धमकियों के एवज में राग दरबारी गाने का डेढ़ दशक का अनुभव है। व्यक्तिगत तौर पर यह स्वीकार करने वाले संपादक और पत्रकार सार्वजनिक मंचों पर चुप्पी साध लेते हैं। शायद उन्हें समझ नहीं आता कि जिसे वे लोकतंत्र के हीरो के रूप में प्रस्तुत करते आए हैं, उसी से मिली धमकी पर क्या बोलें?

आनेवाले समय में पश्चिम बंगाल में मजबूत हुए लोकतंत्र की सुंदर प्रस्तुति का भार मीडिया पर होगा। वैसे तो इस भार में दबे रहने का मीडिया का अनुभव उसके काम आएगा। पर देखने वाली बात यह होगी कि भविष्य में पड़ने वाले अतिरिक्त भार से वह कैसे डील करता है।

योगी सरकार की प्लानिंग की WHO भी मुरीद, 10 दिन में कम हुए कोरोना के 85000 से अधिक केस

उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण से निपटने में योगी सरकार को ‘अर्ली, अग्रेसिव, ट्रेस, टेस्ट और ट्रीट’ अभियान से सकारात्मक परिणाम मिले हैं। इस अभियान के चलते मात्र 10 दिन में राज्य में 85000 से अधिक सक्रिय मामलों में कमी आई है। WHO ने भी राज्य सरकार की इस कदम की तारीफ की है।

योगी सरकार के इस प्रयास को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सराहते हुए इसकी तुलना पोलियो अभियान से की। WHO की एक रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में COVID-19 के मद्देनजर हाउस टू हाउस एक्टिव केस फाइंडिंग शुरू की है। इस प्रक्रिया में उन्हें आइसोलेट किया गया जिनमें कोविड के लक्षण थे।

WHO ने 7 मई की अपनी रिपोर्ट में बताया था कि राज्य में सरकार की टीमें 5 दिनों में 75 जिलों के 97,941 गाँवों में जाएँगी। अभियान की शुरुआत 5 मई को हुई थी। हर मॉनिटरिंग टीम में दो सदस्य रखे गए थे। इनका काम रैपिड एंटीजन टेस्ट (आरएटी) किटों का उपयोग कर उन लोगों का टेस्ट करना था जिनमें लक्षण दिख रहे थे।

रिपोर्ट में बताया गया है कि इस दौरान जो लोग भी पॉजिटिव मिल रहे थे उन्हें जल्दी से आइसोलेट कर एक मेडिसिन किट दिया जाना था। पॉजिटिव पाए गए लोगों के संपर्क में आए लोगों की भी RT-PCR जाँच होनी थी।

इसके अलावा इस अभियान के तहत सभी जिलों के हर ब्लॉक में दो मोबाइल वैन आवंटित की गई हैं। इसके अलावा भी नियमित रूप से और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर टेस्टिंग और सैंपलिंग जारी है। रिपोर्ट बताती है कि राज्य सरकार ने इस काम पर 1,41, 610 टीमों को लगाया था। इनमें 21 हजार 242 सुपरवाइजर थे, जिनका काम यह सुनिश्चित करना था कि हर ग्रामीण इलाका कवर हुआ या नहीं।

WHO ने भी इस काम में राज्य सरकार की मदद की। इसके लिए फील्ड ऑफिसर तैनात किए गए जो ग्राउंड पर सरकार से शेयर किया जा रहा रियल टाइम फीडबैक मॉनिटर कर रहे थे। इसका मकसद गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाना था।